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                <title>Rakesh Tikait - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Rakesh Tikait RSS Feed</description>
                
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                <title>दिल्ली सीमा सील करने की तैयारी</title>
                                    <description><![CDATA[महापंचायत में राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली से खाप नेता शामिल हुए।  पंचायत में सर्वसम्मति से कुरुक्षेत्र में एक और महापंचायत बुलाए जाने की बात कही गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/preparation-to-seal-delhi-border/article-47475"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/tikait.jpg" alt=""></a><br /><p>मुजफ्फरनगर। पहलवानों के समर्थन में गुरुवार को भारतीय किसान यूनियन ने मुजफ्फरनगर में महापंचायत की। इस दौरान किसान नेता नरेश टिकैत ने एक बार फिर सरकार को अल्टीमेटम याद दिलाया और कहा कि 5 दिन बाद कुछ भी हो सकता है।</p>
<p>महापंचायत में राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली से खाप नेता शामिल हुए।  पंचायत में सर्वसम्मति से कुरुक्षेत्र में एक और महापंचायत बुलाए जाने की बात कही गई है। इस दौरान कुछ महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी रखे गए हैं। जिसमें कहा गया कि पहलवान गंगा में पदक बहाने के बजाय इसे अंतर्राष्ट्रीय कुश्ती  महासंघ के माध्यम से नीलाम करें। खाप प्रमुखों की समिति का गठन किया जाए जो भविष्य में पहलवानों के विरोध के लिए मेन बॉडी के तौर पर कार्य करेगी। एक प्रतिनिधि मंडल को तय किया जाएगा जो कि पहलवानों का पक्ष लेकर राष्ट्रपति और गृहमंत्री के पास जाएंगे और उनकी बात रखेंगे। दिल्ली की सीमाओं को फिर से बंद किए जाने पर भी महापंचायत में सहमति बनी है। देशव्यापी आंदोलन को खड़ा करने की तैयारी भी की जाएगी।</p>
<p><strong>पॉक्सो में गिरफ्तारी क्यों नहीं?</strong> <br />राकेश टैकैत ने कहा कि एक खाप चौधरी समिति बनाई जाएगी और हम तय करेंगे कि किससे मिलना है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि गुरुवार को हुई बैठक के निर्णय की घोषणा कुरुक्षेत्र में होने वाली महापंचायत में की जाएगी। इस दौरान किसान नेता ने कहा कि पॉक्सो मामलों में कोई गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई? उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कानून में संशोधन होगा कि गिरफ्तारी नहीं बल्कि जांच पहले होगी? टिकैत ने कहा सच्चाई ये है कि वह केवल अपने लोगों को ही बचाएंगें। लेकिन उन्हें याद रखना चाहिए कि खाप पंचायत और लड़कियां हारने वाली नहीं हैं। हम राष्ट्रपति से मिलेंगे।</p>
<p><strong>जाति में बांटने की कोशिश हो रही </strong><br />किसान नेता ने यह भी कहा कि अभी सरकार हमें जाति में बांटने की कोशिश कर रही है, लेकिन जो लड़े उनकी कभी कोई जाति नहीं थी वे योद्धा थे। इन लड़कियों के साथ भी ऐसा ही है। पहले उन्होंने हिंदू मुस्लिम किया, लालू परिवार को तोड़ा, मुलायम सिंह परिवार को विभाजित किया। वे केवल बांटना चाहते हैं। लेकिन ये लड़कियां ये पहलवान तिरंगा जाति से हैं। ये विदेश में राष्ट्रीय ध्वज के साथ गई थीं। इन लड़कियों को पुलिस ने परेशान किया। उन पर अत्याचार किए हैं। यह लड़ाई जारी रहेगी। जरूरत पड़ी तो यह लड़ाई देशव्यापी हो जाएगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Jun 2023 09:56:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>एक बार फिर किसान नेता राकेश टिकैत ने भरी हुंकार, किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए बड़े किसान आंदोलन की बताई जरूरत</title>
                                    <description><![CDATA[देश में एक बड़े किसान आन्दोलन की जरुरत :टिकैत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/farmer-leader-rakesh-tikait-once-again-uttered-a-slogan--a-big-farmer-movement-is-needed-to-solve-the-problems-of-the-farmers--209-villages-are-crime-free--314-are-located-in-the-police-station-area--these-1062-villages/article-7748"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/rakesh-tikait.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। एक बार फिर देश में इस बात की चर्चा शुरू हो गई है कि क्या देश में किसान फिर धरने पर बैठेगा क्या। क्या एक बार देशभर में बड़े रूप में किसान आंदोलन होंगा। दरअसल भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने सोमवार को कहा कि देश के किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए एक बड़े किसान आन्दोलन की जरुरत है जिसकी सफलता के लिए विपक्षी दलों की एकजुटता जरुरी है। <br /><br /> टिकैत ने तेलंगना के किसानों से फसलों की खरीद को लेकर तेलंगना भावन पर जन प्रतिनिधियों के चल रहे धरना को सम्बोधित करते हुए कहा कि किसानों के आन्दोलन के लिए स्थान और तिथि की घोषणा जल्दी ही की जायेगी। उन्होंने कहा कि देश के किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए विपक्षी दलों के मुख्यमंत्रियों की एक बैठक की जानी चाहिए और ठोस निर्णय लिया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि सत्तारुढ दल का मुकाबला करने के लिए विपक्ष के मदद की जरूरत है और इस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए । <br /><br />किसान नेता ने कहा कि तेरह माह के आन्दोलन के बाद किसानों की फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के निर्धारण के लिए केन्द्र सरकार ने एक समिति गठित करने की घोषणा की और बाद में संयुक्त किसान मोर्चा से इसके लिए दो तीन नाम मांगे गए। मोर्चा की ओर से सरकार को पत्र भेजा गया और और पूछा गया कि समिति में कितने लोग होंगे और उसकी शक्ति क्या होगी , इसका जवाब अब तक नहीं दिया गया है । <br /><br />उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मनमाने ढंग से समिति का गठन करना चाहती है और उसके निर्णय को किसानों पर थोपना चाहती है जिसे किसान कभी सफल नहीं होने देंगे। किसानों को एमएसपी गारंटी कानून चाहिए और इससे कम कुछ उसे मंजूर नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 Apr 2022 14:24:47 +0530</pubDate>
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                <title>प्रदर्शन स्थल से वापस लौट रहे है किसान</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर रहे किसान प्रदर्शन स्थल से वापस लौट रहे है। किसानों के लौटने के साथ ही इस विरोध-प्रदर्शन का अंत हो जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A4%A8-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%B2-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%B8-%E0%A4%B2%E0%A5%8C%E0%A4%9F-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A8/article-3064"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/4654654654652.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर रहे किसान प्रदर्शन स्थल से वापस लौट रहे है। किसानों के लौटने के साथ ही इस विरोध-प्रदर्शन का अंत हो जाएगा। किसानों ने लौटने से पहले सिंघू, टिकरी और गाजीपुर सीमा पर विजय मार्च निकाला। किसानों को लौटने से पहले अपने तंबू तोड़ते और क्षेत्र की सफाई करते हुए देखा गया।</p>
<p>इस बीच किसान नेता राकेश टिकैत ने गाजीपुर सीमा पर कहा कि इस प्रक्रिया में कुछ समय और लगेगा। वह स्वंय भी कुछ समय बाद लौट जाएंगे। किसानों के जाने के बाद बैरिकेड्स हटा दिए जाएंगे और सड़कों को ट्रैफिक के लिए साफ कर दिया जाएगा। न्यूनतम समर्थन मूल्य के मुद्दे पर सरकारी अधिकारी और कृषि विशेषज्ञ को शामिल कर एक समिति गठित करने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की घोषणा के बाद संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले किसान समूहों ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया था। <br />  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Dec 2021 13:09:46 +0530</pubDate>
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                <title>किसान आंदोलन की नई रूप रेखा चार दिसंबर होगी तय, दिल्ली में नहीं निकलेगा ट्रैक्टर मार्च: राकेश टिकैत</title>
                                    <description><![CDATA[ न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानूनी गारंटी मिलने तक आंदोलन चलता रहेगा: टिकैत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%86%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A4%88-%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%AA-%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%96%E0%A4%BE-%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%AC%E0%A4%B0-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%A4%E0%A4%AF--%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%97%E0%A4%BE-%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%88%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9A--%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%9F%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%A4/article-2824"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/rakesh-tiket.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारतीय किसान युनियन के नेता राकेश टिकैत ने तीनों विवादास्पद कृषि कानूनों को वापस लेने का विधेयक लोकसभा में पारित होने के बाद सोमवार को कहा कि बाकी मांगों को लेकर किसान युनियनों का आंदोलन जारी रहेगा और आंदोलन की नयी रूप रेखा चार दिसंबर के बाद तय की जायेगी। उन्होंने कहा कि फिलहाल किसान राजधानी की ओर ट्रैक्टर मार्च नहीं निकालेंगे। <br /><br />लोकसभा में तीनों विवादास्पद कृषि कानूनों - कृषक उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) अधिनियम 2020, कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार अधिनियम 2020 तथा आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम 2020 के निरसन के लिये कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर प्रस्ताव को सदन ने बिना बहस के पारित कर दिया है। <br /><br />राकेश टिकैत ने कृषि वापसी बिल दोनों सदनों में पास होने पर कहा कि अभी दूसरे मुद्दें बाकी हैं। उन्होंने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानूनी गारंटी मिलने तक आंदोलन चलता रहेगा। आगे के आंदोलन के तौर तरीके के बारे में सवालों पर उन्होंने कहा कि आज ट्रैक्टर रैली नहीं निकाली जायेगी, आगे की रूप रेखा चार दिसंबर को तय होगी। यह पूछे जाने पर यदि बाकी संगठन आंदोलन उठाने का फैसला करते हैं तो आपका क्या रूख होगा, टिकैत ने कहा कि हमारे सामने किसान युनियन की ओर से अभी इस तरह की कोई बात नहीं आयी है। उन्होंने यह भी कहा कि उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि इस मसले को किसान युनियनें और सरकार मिलकर तय करें। किसान नेता ने उम्मीद जतायी की बात सामाधान की ओर बढ़ेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Nov 2021 15:16:48 +0530</pubDate>
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                <title>दिल्ली में बैरिकेड हटाने के बाद भी रास्ता खुलने पर नहीं बनी सहमति</title>
                                    <description><![CDATA[पुलिस के द्वारा गाजीपुर और टिकरी बॉर्डर पर बैरिकेड हटाए जाने के बाद रास्ता खुलने को लेकर प्रशासन और किसान संगठनों के बीच सहमति नहीं बनी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AC%E0%A5%88%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%A1-%E0%A4%B9%E0%A4%9F%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%A6-%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%96%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%B9%E0%A4%AE%E0%A4%A4%E0%A4%BF/article-2014"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/niramala_sitharaman_630x400-copy1.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पुलिस के द्वारा गाजीपुर और टिकरी बॉर्डर पर बैरिकेड हटाए जाने के बाद रास्ता खुलने को लेकर प्रशासन और किसान संगठनों के बीच सहमति नहीं बनी है। किसान एकता मंच ने ट्वीट किया कि टिकरी बॉर्डर पर दिल्ली पुलिस द्वारा रास्ते खुलवाने संबंधित बिना बातचीत के कार्रवाई करने का प्रयास किया गया, लेकिन किसान एकजुट होकर तुरंत पहुंच गए। अभी हालात सामान्य है।</p>
<p>गाजीपुर बॉर्डर पर भी हालत सामान्य है। सयुंक्त किसान मोर्चा के स्वयंसेवक कड़ा पहरा दे रहे है। किसान आंदोलन के समर्थक एवं शुभचिंतक आश्वस्त रहे। किसानों का मोर्चा मजबूत है। सरकार को अवरोधकों को हटाना पड़ा है। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने आंदोलन से पीछे नहीं हटने की मंशा को एक बार फिर साफ कर दिया है। उन्होंने कहा हमारी लड़ाई तीन कृषि कानूनों के खिलाफ और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गारंटी कानून को लेकर है, जिन किसानों की फसल कहीं नहीं बिक रही है। वह दिल्ली में फसल बेचने जाएंगे। उन्होंने ट्वीट किया कि धान बेचने के लिए किसान भटक रहा है। <br /> <br />  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Oct 2021 16:28:13 +0530</pubDate>
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                <title>राकेश टिकैत का सरकार पर धोखाधड़ी करने का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[प्रमुख विपक्षी दलों ने किसानों के भारत बंद का समर्थन किया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>नई दिल्ली। किसान नेता राकेश टिकैत ने सरकार पर किसानों के साथ धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया। टिकैत ने कहा कि किसान आन्दोलन चलाया जायेगा। किसानों का भारत बंद आन्दोलन का भाग है। तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर दिल्ली बाहरी भागों में किसानों का धरना प्रदर्शन चल रहा है। सरकार की हठधर्मिता जारी रही, तो यह आन्दोलन चलता रहेगा। उन्होंने कहा कि सड़को को सील नहीं किया गया है, बल्कि आवश्यक सेवाओं को बंद से मुक्त रखा गया है।  </p>
<p>उन्होंने कहा कि सरकार तीन कृषि कानूनों को वापस नहीं ले रही है। लोगों को आवासों में रहकर भारत बंद का समर्थन करना चाहिये। उन्होंने दुकानदारों से भी दुकाने बंद रखने की अपील की। किसान नेता ने कहा कि उनका आन्दोलन शांतिपूर्ण है। प्रमुख विपक्षी दलों ने किसानों के भारत बंद का समर्थन किया है। <br />  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Sep 2021 18:28:26 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जंतर-मंतर पर किसान संसद: केंद्र के 3 कृषि कानूनों का विरोध, कानून वापसी की मांग पर अड़े प्रदर्शनकारी</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ लंबे समय से आंदोलनरत किसानों ने गुरुवार को राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर में किसान संसद की शुरुआत की है। किसान संगठनों के मुताबिक जब तक संसद का मानसून सत्र जारी रहेगा वह हर रोज ऐसी किसान संसद लगाएंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%9C%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A4%A6--%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%87-3-%E0%A4%95%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A4%BF-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%82%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A7--%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%82%E0%A4%A8-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%85%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A4%A8%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80/article-1232"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-07/e64m5ncucakye_v.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ लंबे समय से आंदोलनरत किसानों ने गुरुवार को राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर में किसान संसद की शुरुआत की है। किसान संगठनों के मुताबिक जब तक संसद का मानसून सत्र जारी रहेगा वह हर रोज ऐसी किसान संसद लगाएंगे। किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि किसान अपनी संसद चलाएंगे। सदन में किसानों के लिए आवाज नहीं उठाने पर संसद सदस्यों (सांसदों) की उनके निर्वाचन क्षेत्रों में आलोचना की जाएगी, फिर चाहे वो किसी भी पार्टी से हों। हम यहां पर अपनी आवाज उठाएंगे, विपक्ष को सदन के अंदर हमारी आवाज बनना चाहिए। किसान संसद की शुरुआत में पहले तो आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों को श्रद्धांजलि दी गई, उसके बाद किसानों नेताओं पर जो मुकदमे दायर किए गए हैं, उन्हें वापस लेने की मांग उठी। <br /> <br /> किसान संसद' की प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्लाह किसानों की बात संसद नहीं सुन रही है, इसलिए सभी सांसदों को हमने चिट्ठी दी है कि हमारे वोट से जीते हैं तो ऐसा करें कि हम वोट देते समय याद रखें। ईमानदार हैं तो हमारा सवाल उठाएं। आज हम यहां आए और यह 13 अगस्त तक लगातार चलेगा। प्रतिदिन 200 किसान सिंघु बॉर्डर से आएंगे और किसानों के मुद्दे पर चर्चा होगी। आज 3 कानूनों के पहले कानून APMC पर चर्चा हुई। इसके बाद हम कानून को संसद में खारिज करेंगे और संसद से अपील करेंगे कि 'किसान संसद' की बात मानकर कानून खारिज करे। इससे पहले सुबह सिंघु, टिकरी और गाजीपुर बॉर्डर से बसों में भरकर किसानों का जत्था जंतर-मंतर पर पहुंचा। दिल्ली पुलिस ने 200 किसानों को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की इजाजत दी है। सुबह 11 से शाम 5 बजे तक ये किसान यहां पर प्रदर्शन कर सकेंगे।<br /> <br /> <strong>सरकार किसानों के साथ खुले मन से चर्चा के लिए तैयार: तोमर</strong><br /> कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने गुरुवार को फिर कहा कि सरकार आन्दोलनकारी किसान संगठनों के साथ खुले मन से चर्चा के लिए तैयार है। तोमर ने संसद भवन परिसर में मीडिया से बातचीत में कहा कि किसान संगठनों को कृषि सुधार कानूनों के जिन प्रावधानों पर आपत्ति है उसे बताएं। सरकार उसका समाधान करेगी। उन्होंने कहा कि कृषि सुधार कानूनों से किसानों की आय में वृद्धि होगी और व्यापारियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों का सम्मान करती है और उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध करा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Jul 2021 17:53:54 +0530</pubDate>
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                <title>किसान आंदोलन के 7 माह पूरे होने पर प्रदर्शन, किसान संगठनों ने देशभर में राज्यपालों को दिया ज्ञापन</title>
                                    <description><![CDATA[किसान संगठनों ने कृषि सुधार कानूनों के विरोध में चल रहे आंदोलन के 7 माह पूरे होने पर शनिवार को देश भर में राजभवनों के बाहर धरना प्रदर्शन किया और राज्यपालों को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत की गिरफ्तारी की अफवाह भी उड़ी, लेकिन खुद राकेश टिकैत और दिल्ली पुलिस ने इन खबरों का खंडन किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%86%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%87-7-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B9-%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A4%A8--%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%A0%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6%E0%A4%AD%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%9E%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%A8/article-902"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-06/e4y8lo3vgaaqspo.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। किसान संगठनों ने कृषि सुधार कानूनों के विरोध में चल रहे आंदोलन के सात माह पूरे होने पर शनिवार को देश भर में राजभवनों के बाहर धरना प्रदर्शन किया और राज्यपालों को ज्ञापन सौंपा। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने किसानों के आंदोलन स्थल गाजीपुर बॉर्डर पर मीडिया से बातचीत में कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा ने किसान विरोधी 3 कानूनों को वापस लेने तथा फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को लेकर कानून बनाने की मांग को लेकर देश के सभी राजभवनों के बाहर धरना प्रदर्शन किया और राज्यपालों को ज्ञापन सौंपा है। इस बीच राकेश टिकैत की गिरफ्तारी की अफवाह भी उड़ी, लेकिन खुद राकेश टिकैत और दिल्ली पुलिस ने इन खबरों का खंडन किया है। दिल्ली पुलिस ने ट्वीट कर कहा कि राकेश टिकैत की गिरफ्तारी की खबर झूठी है। पुलिस ने लिखा है कि उन्हें शक है ऐसी गलत खबरें सोशल मीडिया पर उड़ाकर माहौल खराब करने की कोशिश की जा रही है।<br /> <br /> टिकैत ने कहा कि पिछले दिनों कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर को किसान संगठनों के साथ बिना किसी शर्त के बातचीत को लेकर एक पत्र लिखा गया था, लेकिन उसका अब तक जवाब नहीं आया है। उन्होंने कहा कि किसान 7 माह से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार सुन नहीं रही है। किसान कमजोर नहीं है। सरकार के मांग माने जाने तक आंदोलन चलता रहेगा। टिकैत ने कहा कि किसान संगठन सरकार से बात करना चाहते हैं ताकि समस्या का समाधान हो। सरकार जैसे ही 3 कृषि सुधार कानूनों को वापस लेगी और एमएसपी को लेकर कानून बना देगी, तो यह आंदोलन समाप्त हो जाएगा। उन्होंने कहा कि देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था है और इसमें किसान शांतिपूर्ण तरीके से अपना आंदोलन कर रहे हैं। एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि यह आंदोलन कब तक चलेगा, इसका उन्हें भी पता नहीं है।<br /> <br /> किसान नेता ने कहा कि कोरोना संकट के कारण आंदोलन स्थल पर भीड़ नहीं होने दी जा रही है और किसानों को बारी-बारी से आंदोलन स्थल पर बुलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसान नेता युद्धवीर सिंह और विरेन्दर सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली के उप राज्यपाल से मिलकर एक ज्ञापन सौंपा है। इस बीच केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने ट्वीट कर कहा कि मैं सभी किसान यूनियन के लोगों को कहना चाहता हूं कि उनको अपना आंदोलन समाप्त करना चाहिए। भारत सरकार कानून के किसी भी प्रावधान पर बात करने के लिए भी तैयार है और उसका निराकरण करने के लिए भी तैयार है। बता दें कि किसान संगठनों की ओर से दिल्ली की सीमा पर गाजीपुर, टिकरी और सिंधु बॉर्डर पर धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। देश के 40 किसान संगठनों और सरकार के बीच 11 दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Jun 2021 17:00:57 +0530</pubDate>
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                <title>राकेश टिकैत के काफिले पर पथराव, किसान नेता ने भाजपा पर लगाया हमला करवाने का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के काफिले पर शुक्रवार को अलवर के ततारपुर चौराहे के पास कुछ लोगों ने हमला कर दिया। चलती गाड़ियों पर पत्थर फेंके, जिससे करीब 3 से 4 गाड़ियों के शीशे टूटने की सूचना है। घटना के बाद टिकैत सहित उनके समर्थक कुछ देर ततारपुर चौराहे पर धरने पर बैठे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/alwar/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%9F%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%AB%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A4%A5%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B5--%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%AA%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%B2%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%AA/article-75"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-04/2021-04-03~4uqbp_nl.jpg" alt=""></a><br /><p>अलवर। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के काफिले पर शुक्रवार को अलवर के ततारपुर चौराहे के पास कुछ लोगों ने हमला कर दिया। चलती गाड़ियों पर पत्थर फेंके, जिससे करीब 3 से 4 गाड़ियों के शीशे टूटने की सूचना है। घटना के बाद टिकैत सहित उनके समर्थक कुछ देर ततारपुर चौराहे पर धरने पर बैठे। टिकैत को बानसूर में सभा में पहुंचना था, इसलिए वह आगे निकल गए। पथराव करने वाले भी फरार हो गए। घटना के बाद मौके पर जाम लग गया। वहीं पुलिस ने मत्स्य यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कुलदीप यादव सहित 4 युवकों को हिरासत में लिया है। वहीं टिकैत ने ट्वीट कर भाजपा पर हमला करवाने का आरोप लगाया है। <br /> <br /> <strong>हरसोली में सभा कर बानसूर जा रहे थे </strong><br /> किसान नेता टिकैत हरसौली में सभा करने के बाद बानसूर जा रहे थे। शाम करीब चार बजे बाद जैसे ही काफिला ततारपुर चौराहे के पास आया। यहां करीब एक दर्जन से अधिक युवकों ने गाड़ी के काफिले पर पत्थर फेंके, जिससे एक गाड़ी का पूरा शीशा टूट गया। तीन-चार और कारों के शीशे भी क्षतिग्रस्त हो गए।<br /> <br /> <strong>करीब आधा घंटे तक रुका रहा काफिला</strong><br /> ततारपुर चौराहे के पास घटना होने के बाद करीब आधा घंटे तक काफिले के वाहन वहीं खड़े रहे। आक्रोशित लोगों ने पुलिस को भी खरी खोटी सुनाई। उन्होंने कहा कि ततारपुर चौराहे पर पुलिस चौकी है, इसके बावजूद घटना हो गई।<br /> <br /> <strong>जाम में फंसे वाहन</strong><br /> घटना के बाद चौराहे पर जाम लग गया। बाद में पुलिस ने जाम खुलवाया। टिकैत के साथ आए किसान नेताओं में इस घटना को लेकर आक्रोश है। बानसूर में सभा होने के बाद वापस ततारपुर चौराहे पर आएंगे।<br /> <br /> <strong>किसानों ने केएमपी पर लगाया जाम</strong><br /> किसान नेता राकेश टिकैत की गाड़ी पर हमले के विरोध में धरनारत गुस्साए किसानों ने कुंडली में कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) पहुंचकर जाम लगा दिया। बाद में मोर्चा के नेताओं ने किसानों को वापस बुला लिया और इस बारे में बाद में निर्णय लेकर कार्रवाई करने की बात कही। टिकैत पर हमले की खबर जैसे ही कुंडली में धरने पर बैठे किसानों तक पहुंची, सैकड़ों किसान शाम करीब पौने सात बजे अपने दर्जनों ट्रैक्टर लेकर कुंडली के पास केएमपी पर चढ़ गए और जाम लगा दिया। अचानक जाम लगाने से केएमपी पर लंबा जाम लग गया। किसानों ने यहां सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों के जाम लगाने के बाद पुलिस भी हरकत में आई और किसानों को मनाने के प्रयास शुरू किए, लेकिन किसान नहीं माने। करीब 20 मिनट के बाद ही संयुक्त किसान मोर्चा ने जाम लगा रहे किसानों को फोन पर संदेश दिया कि फिलहाल जाम न लगाएं और वापस आ जाएं। जाम लगाने या अन्य कार्रवाई के बारे में बाद में बैठक कर निर्णय लिया जाएगा। ऐसे में किसानों ने जाम खोल दिया और वापस धरने पर लौट गए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अलवर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 03 Apr 2021 12:19:30 +0530</pubDate>
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                <title>ऐतिहासिक मकाम पर किसान आंदोलन</title>
                                    <description><![CDATA[तो दिल्ली की सरहदों पर किसान आंदोलन के 100 दिन पूरे हो गए। नवंबर के अंतिम सप्ताह में जब यह आंदोलन शुरू हुआ तो तब शायद ही किसी को यह उम्मीद थी कि यह इतना लंबा चलेगा। लोकतांत्रिक आंदोलनों का इतिहास तो यही कहता है कि आंदोलन होते हैं, थोड़े दिनों में सत्ता या सरकार के साथ आंदोलनकारियों की बातचीत होती है, दोनों पक्ष एक मुद्दे पर सहमत होते हैं और आंदोलन खत्म हो जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/india-gate/%E0%A4%90%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%AE%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%AE-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%86%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%B2%E0%A4%A8/article-65"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-04/2021-03-06~tpvxt_nl.jpg" alt=""></a><br /><p>तो दिल्ली की सरहदों पर किसान आंदोलन के 100 दिन पूरे हो गए। नवंबर के अंतिम सप्ताह में जब यह आंदोलन शुरू हुआ तो तब शायद ही किसी को यह उम्मीद थी कि यह इतना लंबा चलेगा। लोकतांत्रिक आंदोलनों का इतिहास तो यही कहता है कि आंदोलन होते हैं, थोड़े दिनों में सत्ता या सरकार के साथ आंदोलनकारियों की बातचीत होती है, दोनों पक्ष एक मुद्दे पर सहमत होते हैं और आंदोलन खत्म हो जाता है। कहने के लिए तो किसान आंदोलन में भी बातचीत का दौर चला। मगर 11 दौर की बातचीत के बाद भी वह किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका। किसान अपनी मांगों को लेकर डटे रहे और दूसरी ओर सरकार अपनी जिद पर अड़ी रही। लोकतंत्र के इतिहास में किसी आंदोलन के बरक्स सरकार की जिद की ऐसी बानगी कभी नजर नहीं आती। गोया, किसानों को सरकार की इस जिद का एहसास था। क्योंकि 100 दिनों का किसान आंदोलन देखने के बाद यह साफ है कि किसान दिल्ली की सरहदों पर आंदोलन को लंबे समय तक चलाने की तैयारी के साथ आए थे। यही वजह रही कि वे सरकार के साथ बातचीत के दौरान कभी भी अपनी मांगों के साथ समझौता करते नजर नहीं आए। <br /> <br /> बताया जाता है कि पंजाब और हरियाणा के किसान संगठनों ने सितंबर में संसद से कानून पारित होने के बाद से ही आंदोलन के लिए हर किसान परिवार के लिए मासिक चन्दा तय करके वसूली प्रारंभ कर दी थी और अब तो यह आंदोलन दिल्ली की सरहदों से पसरता हुआ तकरीबन मुल्क भर में फैल चुका है। आंदोलन के लिए चंदा जमा करने की प्रक्रिया भी संस्थागत रूप ले चुकी है। किसान आंदोलन की पुख्ता तैयारी का ही नतीजा था कि किसानों ने इस दौरान तमाम बाधाओं को झेला मगर पीछे नहीं हटे। दिसंबर और जनवरी की भयंकर सर्दी के बावजूद उनको धरना देने में किसी प्रकार की असुविधा महसूस नहीं हुई। बुजुर्ग किसानों के साथ-साथ महिलाएं और बच्चे भी धरने पर नजर आते रहे। सभी टेंटों में कंबल गद्दों के साथ-साथ हीटर भी लगा दिए गए थे। हालांकि जिसे लेकर गोदी मीडिया और आंदोलन के विरोधियों ने इसे बदनाम करने की कोशिश भी की। सरकार और भाजपा की ओर से बारहा यह साबित करने की कोशिश की गई कि खालिस्तानी और वामपंथी संगठनों की ओर से किसानों को गुमराह करने के लिए यह आंदोलन चलाया जा रहा है, जिसे कांग्रेस समर्थन कर रही है। मगर किसानों ने ऐसी कोशिशों की कभी परवाह नहीं की। <br /> <br /> किसान नेता राकेश टिकैत का कहना है कि अप्रैल से जून तक की गर्मियों से निबटने के लिए अभी से ही एयर कंडीशनर और कूलर का इंतजाम करना प्रारंभ कर दिया गया है। बहरहाल, सौ दिनों का लब्बोलुआब यह रहा कि किसानों का यह आंदोलन ऐतिहासिक बन चुका है और इस ऐतिहासिक आंदोलन की खासियत रही है कि आंदोलन का कोई एक चेहरा नहीं है। किसानों नेताओं की एक समिति है जो सारे अहम फैसले लेती है। हालांकि 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा के बाद जो स्थिति पैदा हुई। उसके बाद राकेश टिकैत एक लोकप्रिय किसान नेता के तौर पर तो जरूर उभरे हैं। मगर उन्हें आंदोलन का चेहरा नहीं कहा जा सकता है। जन आंदोलन के प्रतिमानों के लिहाज से बेशक यह आंदोलन अनूठा और ऐतिहासिक बन चुका है। हर आंदोलन की शुरुआत किसी न किसी मुद्दे को लेकर होती है। मौजूदा किसान आंदोलन की भी वजह सरकार की ओर से पारित तीन विवादित कृषि कानून हैं। जो मुल्क भर के किसानों की समस्या को बढ़ाने वाला हैं। जहां तक किसानों की समस्या का सवाल है तो कृषि लागतों में बढ़ोतरी आज खेती-किसानी की सबसे बड़ी समस्या है। बीज, खाद, दवाई, श्रम-मजदूरी, डीजल एवं कृषि उपकरणों की कीमतें जिस अनुपात में बढ़ रहीं हैं, उस अनुपात में कृषि उत्पादों की कीमतें नहीं बढ़ रहीं हैं। यही इस समय कृषि की सबसे बड़ी ज्वलंत समस्या है।  <br /> <br /> स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों में साफ तौर पर खेती-किसानी से जुड़ी सभी तरह की लागतों एवं खर्चों को जोड़ा गया है। कृषि कार्य में बीज, खाद, दवाई, जुताई, बुवाई-कटाई, मिंजाई, मजदूरी आदि सभी खर्चे जरूरी तो होते हैं। जिनका भुगतान किसानों को नकदी के रूप में करना होता है, लेकिन इससे भी अधिक अहम किसान एवं उसके परिवार के सभी सदस्यों की कड़ी मेहनत होती है। पूरे परिवार के लोग फसलों के तैयार होते तक लगे रहते हैं। स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों में इन सभी चिंताओं की ओर ध्यान दिया गया है। सरकार इसे ही लागू कर देती तो किसानों का भला हो जाता। मगर सरकार ने तो तीनों विवादित कृषि कानूनों को लाकर छत की मरम्मत करने के बजाय छत को ही उजाड़ने की तैयारी कर ली है। बहरहाल, सौ दिनों के बाद किसान आंदोलन जिस ऐतिहासिक मुकाम तक पहुंच गया है, उससे किसानों की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। यह आंदोलन अब लोकतंत्र की बुनियादी लड़ाई में बदल चुकी है। लिहाजा, इस आन्दोलन को भी किसानों के साथ-साथ आम जनता से जुड़े दीर्घकालिक सवालों को अब अपना एजेंडा बनाना होगा।<br /> <strong>-शिवेश गर्ग (ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>इंडिया गेट</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Apr 2021 17:21:27 +0530</pubDate>
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