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                <title>plantation - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>सिविल लाइन जोन में निगम की कार्रवाई : भूमि को कराया अतिक्रमण मुक्त, अब किया जाएगा वृक्षारोपण </title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम हेरिटेज के सिविल लाइन जोन की टीम ने वार्ड 54 स्थित सुल्तान नगर क्षेत्र में वर्षों पुराने अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/encroachment-free-of-encroachment-in-civil-line-zone-now-plantation/article-124283"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/31.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। नगर निगम हेरिटेज के सिविल लाइन जोन की टीम ने वार्ड 54 स्थित सुल्तान नगर क्षेत्र में वर्षों पुराने अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई की। यह कार्रवाई जोन उपायुक्त सुनील कुमार बैरवा के नेतृत्व में सतर्कता शाखा के सहयोग से की गई। निगम प्रशासन ने बताया कि जिस भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है, वहां अब वृक्षारोपण किया जाएगा।</p>
<p>इस पहल से क्षेत्र में हरियाली बढ़ेगी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। निगम का कहना है कि अतिक्रमण हटाने के साथ-साथ खाली पड़ी सरकारी जमीनों को उपयोगी बनाने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि लोगों को स्वच्छ और हरित वातावरण मिल सके।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Aug 2025 17:40:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जिला कलक्टर ने पौधरोपण कर किया अभियान का शुभारंभ : वनस्पति प्रजाति, उपज संरक्षण और संवर्द्धन अभियान का आगाज</title>
                                    <description><![CDATA[जिला प्रशासन की ओर से जिले के पंच गौरव के प्रोत्साहन एवं संवर्द्धन के लिए वनस्पति प्रजाति एवं उपज संरक्षण व संवर्द्धन अभियान का आगाज किया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/district-collector-inaugurated-the-campaign-by-planting-saplings/article-121256"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/news-(7)10.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जिला प्रशासन की ओर से जिले के पंच गौरव के प्रोत्साहन एवं संवर्द्धन के लिए वनस्पति प्रजाति एवं उपज संरक्षण व संवर्द्धन अभियान का आगाज किया। जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी ने जिला कलेक्ट्रेट परिसर में जयपुर जिले के पंच गौरव में शुमार एक वनस्पति प्रजाति- लिसोड़ा एवं एक उपज- आंवले का पौधारोपण कर अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी ने एक पुस्तिका का भी विमोचन किया।</p>
<p>अभियान के तहत उपखण्ड स्तर पर भी जन प्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने आंवले एवं लिसोड़े के पौधे लगाए। इस अभियान का लक्ष्य पंच-गौरव कार्यक्रम के तहत एक जिला-एक वनस्पति प्रजाति लिसोड़ा व एक जिला-एक उपज आंवला की महत्ता, उपयोगिता एवं आवश्यकता से आमजन को परिचित करवाने एवं रोजगार की दृष्टि से जनउपयोगी बनाना है। अभियान से आंवला व लिसोड़ा को राज्य, राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में मदद मिलेगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Jul 2025 11:14:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पौधों की सुरक्षा पर हर साल लाखों की सिंचार्ई, फिर भी नजर नहीं आ रहे पौधे</title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम की ओर से लाखों रुपए से बनवाए जा रहे ट्री गार्ड।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/lakhs-of-rupees-are-spent-every-year-on-the-protection-of-plants--yet-the-plants-are-not-visible/article-119928"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/untitled-design-(3)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मानसून का सीजन शुरु होते ही जहां शहर को हरा भरा बनाने के लिए लाखों पौधे हर साल लगाए जा रहे हैं। वहीं सिलसिला इस बार भी शुरु हो गया है। इतना ही नहीं नगर निगम की ओर से उन पौधों की सुरक्षा पर भी ट्री गार्ड के रूप में लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। उसके बाद भी शहर में पौधे नजर नहीं आ रहे।  शहर में पिछले कई सालों से हर बार मानसून में सरकार की ओर से पौधारोपण का अभियान चलाया जाता है।  जिसमें वन विभाग के अलावा सभी सरकारी विभागों को पौधे लगाने का लक्ष्य दिया जाता है। उसके हिसाब से सभी विभाग अपने-अपने स्तर पर निर्धारित व चिन्हित स्थानों पर पौधारोपण करते हैं। इस बार भी इस अभियान की शुरुआत एक दिन पहले वन महोत्सव के माध्यम से हो चुकी है। उसके अलावा क्लब, स्वयंसेवी व सामाजिक संस्थाएं समेत व्यक्तिगत स्तर पर भी हजारों लाखों पौधे लगाए जा रहे हैं। पिछले कुछ समय से पौधों की सुरक्षा व उन्हें पेड़ बनाने को भावनात्मक रूप से जोड़ते हुए पौधारोपण को एक पेड़ मां के नाम दिया गया है। जिसमें पौधे लगाने से लेकर उसे बड़ा करने तक की जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति को दी जा रही है। </p>
<p><strong>कोटा उत्तर में 69 लाख के बनेंगे ट्री गार्ड</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण की तरह ही कोटा उत्तर में भी इस बार करीब 69 लाख रुपए के ट्री गार्ड बनवाए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार यहां करेब एक हजार ट्री गार्ड पहले के ही रखे हुए हैं। जबकि करीब 18 सौ नए ट्री गार्ड बनवाए जाएंगे। जिनका कार्यादेश होने वाला है। </p>
<p><strong>कोटा दक्षिण में ढाई से तीन हजार ट्री गार्ड</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण में इस बार करीब ढाई से तीन हजार ट्री गार्ड बनवाए जा रहे हैं। हालांकि यहां कई ट्री गार्ड तो पूर्व के भी बचे हुए बताए जा रहे हैं।  जानकारों के अनुसार करेब 30 लाख की लागत से इन ट्री गार्ड को बनवाया जा रहा है। हालांकि इस बार ट्री गार्ड बनवाने का टेंडर 30 फीसदी कम दर पर हुआ है। पार्षदों को 15 से 20, महापौर व उप महापौर को इससे दो से तीन गुना अधिक  और विधायक व अन्य जनप्रतिनिधियों को भी उनके क्षेत्र के लिए ट्री गार्ड निगम द्वारा दिए जाएंगे। इनके अलावा भी यदि कोई संस्था नगर निगम में लेटर हैड पर ट्री गार्ड की डिमांड करती है तो उन्हें भी निगम द्वारा ये उपलब्ध करवाए जाते हैं।</p>
<p><strong>पुरानों का पता नहीं कहां गए</strong><br />नगर निगम की ओर से हर साल लाखों रुपए खर्च कर ट्री गार्ड बनवाकर शहर में पौधों की सुरक्षा के लिए लगवाए जा रहे हैं। लेकिन हालत यह है कि उनमें से न तो अधिकतर ट्री गार्ड नजर आ रहे हैं और न ही वे पौधे नजर आ रहे हैं। जिनके सुरक्षा के लिए ये ट्री गार्ड लगाए गए थे। नगर निगम की ओर से पूर्व में दशहरा मैदान फेज दो पुराना पशु मेला स्थल व निगम कार्यालय के सामने डिवाइडर पर लगाए पौधे व ट्री गार्ड या तो गायब हो गए हैं या क्षतिग्रस्त हो गए हैं। ऐसी ही हालत शहर में अन्य स्थानों पर ही है। </p>
<p><strong>निगम हर साल बनवाता है ट्री गार्ड</strong><br />शहर में नगर निगम के अलावा जनप्रतिनिधियों और अन्य संस्थाओं की ओर से होने वाले पौधारोपण में लगाए गए पौधों की सुरक्षा के लिए नगर निगम द्वारा हर साल ट्री गार्ड बनवाए जाते हैं। उन ट्री गार्ड को पार्षद, महापौर, उप महापौर, नेता प्रतिपक्ष के माध्यम से वितरित किया जाता है। जिससे वे अपने-अपने वार्ड व क्षेत्रों में लगाए गए पौधों की सुरक्षा के लिए उन ट्री गार्ड का उपयोग कर सके। इस बार भी नगर निगम की ओर से ट्री गार्ड बनवाए जा रहे हैं। </p>
<p><strong>ट्री गार्ड का हिसाब रखा जाए</strong><br />जानकारों का कहना है कि जिस तरह से नगर निगम द्वारा अन्य बजट का लेखा जोखा रखा जाता है। उसी तरह से ट्री गार्ड के वितरण का भी हिसाब रखा जाना चाहिए। भीमगंजमंडी निवासी महेश गौतम का कहना है कि जब निगम इतनी अधिक राशि खर्च कर रहा है तो उनका हिसाब भी रखा जाना चाहिए कि उन ट्री गार्ड का कहां उपयोग हो रहा है। उपयोग हो भी रहा है या नहीं। यदि हो रहा है तो बार-बार एक ही जगह पत तो ट्री गार्ड नहीं लग रहे।  खेड़ली फाटक निवासी जगदीश लोधा का कहना है कि ट्री गार्ड लगाने के बाद भी पौधे सुरक्षित हैं या नहीं इसकी भी जानकारी निगम अधिकारियों को होनी चाहिए। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण द्वारा इस बार करीब 25 सौ से अधिक ट्री गार्ड बनवाए जा रहे हैं। जिनका काम शुरु हो गया है। कई तो बनकर तैयार हो रहे हैं और शेष बन रहे हैं। जैसे-जैसे तैयार होते रहेंगे वैसे-वैसे उनका उपयोग किया जाएगा।  हालांकि अभी इनके वितरण के संबंध में निर्णय नहीं हुआ है। उच्चाधिकारियों के आदेशानुसार ही इनका वितरण किया जाएगा। नगर निगम द्वारा संस्थाओं को उनके लेटर हैड पर डिमांड अनुसार ही ट्री गार्ड का वितरण किया जाता है। लेकिन उनकी मॉनिटरिंग की कोई व्यवस्था नहीं है। <br /><strong>- ए.क्यू कुरैशी, एक्सईएन, नगर निगम कोटा दक्षिण </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Jul 2025 15:05:09 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>वृक्षारोपण के साथ पेड़ों की सुरक्षा भी जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[देश में हर साल जुलाई माह की शुरुआत से वृहद स्तर पर वृक्षारोपण किया जाता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/along-with-plantation-safety-of-trees-is-also-necessary/article-119406"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/rt112roer-(3)3.png" alt=""></a><br /><p>देश में हर साल जुलाई माह की शुरुआत से वृहद स्तर पर वृक्षारोपण किया जाता है। प्रकृति संरक्षण की दिशा में सरकार द्वारा किया जाने वाला वृक्षारोपण अभियान प्रशंसनीय हैं, लेकिन इसकी सफलता तभी संभव है, जब रोपित पौधों का उचित रख-रखाव और संरक्षण हो। इस बारे में जहां तक सरकारी अधिकारियों का सवाल है, सभी सरकारी अधिकारियों का संवैधानिक कर्तव्य है कि वे अधिक से अधिक पेड़ों को बचाएं और उनकी सुरक्षा करें। दरअसल इस अभियान में लगी एजेंसियों की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है। जरूरत है कि इस अभियान को जनांदोलन बनाया जाए, जिसके लिए जनभागीदारी की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण और आवश्यक है। देखा जाए, तो वृक्षारोपण के लक्ष्य का निर्धारण सराहनीय ही नहीं, स्तुतियोग्य प्रयास है, प्रशंसनीय है। लेकिन रोपित पौधों की रक्षा बेहद जरूरी है, जैसा कि देश की शीर्ष अदालत का निर्देश है, क्योंकि अक्सर होता यह है कि पौधारोपण के बाद उनकी उचित देखभाल नहीं होती और वे कुछ समय बाद ही मर जाते हैं। इसलिए इस काम में लगी एजेंसियां रोपित पौधों के रख-रखाव की जिम्मेदारी समाज के उन लोगों को सौंपें, जो इस अभियान में सहभागिता कर रहे हैं। तभी अभियान की सफलता संभव है।</p>
<p>असलियत में दुनिया में जिस तेजी से पेड़ों की तादाद कम होती जा रही है, उससे पर्यावरण तो प्रभावित हो ही रहा है,पारिस्थितिकी, जैव विविधता, कृषि और मानवीय जीवन ही नहीं,भूमि की दीर्घकालिक स्थिरता पर भी भीषण खतरा पैदा हो गया है। जैव विविधता का संकट पर्यावरण ही नहीं, हमारी संस्कृति और भाषा का संकट भी बढ़ा रहा है। जबकि यह सर्वविदित है कि पृथ्वी के पारिस्थितिकीय तंत्र में वृक्षों की महत्ता और विविधता की बहुत बड़ी भूमिका है। देखा जाए, तो पेड़ों का होना हमारे जीवन के लिए महत्वपूर्ण ही नहीं, बेहद जरूरी है। यह न केवल हमें गर्मी से राहत प्रदान करते हैं, बल्कि जैव विविधता को बनाए रखने, कृषि की स्थिरता सुदृढ़ करने, सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करने, जलवायु को स्थिरता प्रदान करते हैं। पता नहीं हम पेड़ों के दुश्मन क्यों बने हुए हैं, यह समझ से परे है। बीते कई बरसों से दुनिया के वैज्ञानिक, पर्यावरणविद और वनस्पति व जीव विज्ञानी चेता रहे हैं कि अब हमारे पास पुरानी परिस्थिति को वापस लाने के लिए समय बहुत ही कम बचा है। यह भी कि हम जहां पहुंच चुके हैं वहां से वापस आना आसान काम नहीं है।</p>
<p>कारण वहां से हमारी वापसी की उम्मीद केवल और केवल पांच फीसदी से भी कम ही बची है। दरअसल जैव विविधता न सिर्फ हमारे प्राकृतिक वातावरण के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि ऐसे वातावरण में रहने वाले लोगों के मानसिक कल्याण के लिए भी जरूरी है। इस पर गंभीरता से विचार किए जाने की जरूरत है कि जैव विविधता धरती और मानव स्वास्थ्य के लिए सह-लाभ के तत्व हैं और इसे महत्वपूर्ण बुनियादी मान सरकार द्वारा बीते कुछ सालों से देश में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान चलाया जा रहा है। यहां सबसे दुखदायी और चिंता की बात यह है कि हर साल जितना जंगल खत्म हो रहा है, वह एक लाख तीन हजार वर्ग किलोमीटर में फैले देश जर्मनी, नार्डिक देश आइसलैंड, डेनमार्क, स्वीडन और फिनलैंड जैसे देशों के क्षेत्रफल के बराबर है। लेकिन सबसे बडेÞ दुख की बात भी यह है कि इसके अनुपात में नए जंगल लगाने की गति बहुत धीमी है। समूची दुनिया में जंगल खत्म किए जा रहे हैं। एक बार यदि हम खतरे के दायरे में पहुंच गए, तो हमारे पास करने को कुछ नहीं रहेगा। आज जंगल बचाने की लाख कोशिशों के बावजूद दुनिया में वनों की कटाई में और तेजी आई है। हम यह क्यों नहीं समझते कि यदि अब भी हम नहीं चेते तो क्या मानव सभ्यता बची रह पाएगी।</p>
<p>प्राकृतिक संसाधनों का उचित प्रबंधन आज की सबसे बड़ी जरूरत है। ऐसे सामुदायिक प्रयासों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है, जिससे धरती को बचाया जा सके। खासकर ऐसे समय में जब हम पेड़ों और पानी के साथ साथ जैव विविधता की वजह से पारिस्थितिकी के संकट से जूझ रहे हैं। संसाधनों के उचित प्रबंधन के बगैर शांति कायम नहीं हो सकती। फिर हम जिस रास्ते पर चल रहे हैं, यदि उसे नहीं बदला तो पुरानी झड़पें बढेÞंगीं और संसाधनों को लेकर नई लड़ाइयां सामने खड़ी होंगी। वर्तमान में बढ़ता प्रदूषण एक बहुत बड़ी समस्या बन गया है। असंतुलित जीवन शैली, वाहनों का बढ़ता प्रयोग, औद्योगिक प्रतिष्ठान, बढ़ता कचरा, अधिक अन्न उत्पादन की चाहत के चलते उर्वरकों का बढ़ता उपयोग, सुख-सुविधाओं की अंधी चाहत के चलते भौतिक सुख-संसाधनों की बेतहाशा बढ़ती मांग आदि तो इसका सबसे बड़ा कारण है ही, लेकिन इसका एक अहम कारण पर्यावरण हितैषी पेड़ न लगाया जाना भी रहा है।</p>
<p>इस सच्चाई को झुठलाया नहीं जा सकता। देश में वृक्षारोपण के नाम पर सरकारों का एकमात्र उद्देश्य हरियाली बढ़ाना रहता है, न कि पर्यावरण हितैषी और आक्सीजन छोड़ने वाले पेड़-पौधे लगाने को प्रोत्साहन देना। अक्सर होता यह है कि सभी विभाग अपनी इच्छानुसार कम कीमत और आसानी से बढ़ने वाले पेड़-पौधे लगाने को प्राथमिकता देते हैं। जबकि जरूरत है देश में पर्यावरण हितैषी यानी पर्यावरण को बढाÞवा देने वाले लाभकारी नीम, पीपल, बरगद, जामुन, शीशम, रीठा, आम, देवदार, कैल, चीड़, अमलतास, कदम्ब, अशोक, पीला गुलमोहर, बुरांस, चिनार, सावनी, कैथी सहित खैर, कैंथ, कचनार, हिमालय केदार, बेऊल, खरसू ओक, निर्गल, कौरकी कोरल, सिल्क कौटन ट्री, पाल्श, सिल्क ट्री मिमोसा, पाजा, ब्लू पाइन, ब्रेओक, बन ओक, चिलगोजा, पेन्सिल केदार, चीर पाईन, शुकपा, लूनी, डेरेक,खिडक व दादू आदि पेड़-पौधे लगाए जाने की। ऐसा करके जहां हम पर्यावरण में बढ़ रहे प्रदूषण पर किसी हद तक अंकुश लगा सकते हैं, वहीं प्राणी मात्र के जीवन बचाने में भी कामयाब हो सकते हैं।</p>
<p><strong>-ज्ञानेन्द्र रावत</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Jul 2025 11:53:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का - रेंजर सहित तीन वनकर्मियों को मिली चार्जशीट</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार ने माना मिलीभगत से बनी सड़क व प्लोटिंग। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---three-forest-workers-including-the-ranger-got-chargesheet/article-111183"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/2567rtrer2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा वनमंडल की लाडपुरा रेंज के लखावा प्लांटेशन-8 में अवैध सीसी सड़क व आवासीय प्लोटिंग कटने के मामले में सरकार ने रेंजर सहित तीन वनकर्मियों के खिलाफ चार्जशीट दिए जाने की कार्रवाई की है। दैनिक नवज्योति में लगातार खबरें प्रकाशित होने के बाद वन विभाग ने मामले की जांच की थी।  जिसमें  तत्कालीन लाडपुरा रेंजर कुंदन सिंह माली, सहायक वनपाल धर्मराज बैरवा तथा वन रक्षक मनोज गैनन को अतिक्रमियों के साथ मिलीभगत कर वनभूमि में अवैध सीसी सड़क बनवाने व आवासीय प्लोटिंग कटवाने का आरोपी मानते हुए चार्जशीट देने की कार्रवाई की। </p>
<p><strong>अधिकारियों व कर्मियों की भू माफियों से संलिप्ता मानी</strong><br />सरकार ने लखावा प्लांटेशन-8 में सीसी सड़क व आवासीय प्लोटिंग कटवाने में रेंजर सहित तीनों वनकर्मियों की भू-माफियाओं के साथ मिलीभगत व संलिप्ता मानी है। चार्जशीट में बताया गया कि वनभूमि में अवैध प्लोटिंग कटने तथा सीसी सड़क बनने से रोकना इन वनकर्मियों का दायित्व था। साथ ही भू-माफियाओं के खिलाफ पुलिस में मुकदमा दर्ज करवाना था लेकिन इन्होंने अपने दायित्व का निर्वाहन न करते हुए प्लोटिंग व सीसी सड़क बनने दी। जिससे इनकी भू-माफियाओं के साथ संलिप्ता स्पष्ट होती है। वही, वनभूमि पर अतिक्रमण कर प्लांटेशन नष्ट करने पर अवैध प्लोटिंगकर्ताओं के विरुद्ध किसी भी तरह की फौजदारी कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई।</p>
<p><strong>इन्हें मिली चार्जशीट </strong><br />संभागीय मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक सोनल जोरिहार ने लाडपुरा रेंज के तत्कालीन रेंजर कुंदन सिंह माली व सहायक वनपाल धर्मराज बैरवा को 16सीसी तथा वनरक्षक मनोज गैनन को 17 सीसी की चार्जशीट दी है। </p>
<p><strong>नवज्योति ने खोली थी वन अधिकारियों की माफियाओं से सांठगांठ</strong><br />दैनिक नवज्योति ने 23 मई 2024 को खबर प्रकाशित कर लखावा प्लांटेशन-8 में अवैध प्लोटिंग कटवाने व सीसी सड़क बनवाने में वन अधिकारियों की भू-माफियाओं के साथ गठजोड़ उजागर की थी। वृक्षारोपण के नाम पर लाखों रुपयों का भ्रष्टाचार भी खोला था। इसके बाद ही वन विभाग के टॉप मैनेजमेंट ने मामले की जांच शुरू करवाई।  हालांकि, तत्कालीन डीएफओ, सीसीएफ व एसीएफ के खिलाफ चार्जशीट दिए जाने की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। </p>
<p><strong>गबन करने वाले अधिकारियों को बचाने का प्रयास</strong><br />जांच अधिकारी तत्कालीन कोटा सीसीएफ ने अपनी रिपोर्ट में प्लांटेशन में अवैध प्लॉटिंग व सीसी सड़क बनवाने वाले अधिकारियों को दोषी मानते हुए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई (चार्जशीट) दिए जाने की अनुशंसा कर दी। जिसके आधार पर सरकार ने तत्कालीन वन अधिकारियों व कर्मचारियों को चार्जशीट देने के आदेश जारी कर दिए। लेकिन, जांच अधिकारी ने इसी प्लांटेशन में हुए 21.42 लाख के भ्रष्टाचार को गौण कर दिया और पौधों की झूठी संख्या बताकर फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी धन का गबन करने वाले भ्रष्ट अधिकारियों को बचा लिया। भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई में दोहरे मापदंड अपनाए जा रहे हैं। जिससे करप्शन को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा मिल रहा है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />लखावा प्लांटेशन-8 में अवैध सीसी सड़क व प्लोटिंग कटने के मामले में लाडपुरा रेंज के तत्कालीन रेंजर कुंदन सिंह माली, सहायक वनपाल धर्मराज बैरवा व वन रक्षक मनोज गैनन को चार्जशीट दी गई है। <br /><strong>- सोनल जोरिहार, सीसीएफ कोटा</strong><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Apr 2025 17:03:33 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मुख्यमंत्री वृक्षारोपण अभियान के तहत राजस्थान में लगे 7.22 करोड़ पौधे : प्रत्येक जिले में “मातृ वन” की स्थापना, विधानसभा में विधायक की ओर से पूछे गए सवाल के जवाब में दी ये जानकारी</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री वृक्षारोपण अभियान के तहत 7 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/722-crore-saplings-in-rajasthan-under-the-chief-ministers-plantation/article-105539"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/vidhan-shbha043.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री वृक्षारोपण अभियान के तहत 7 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसे पार करते हुए 7.22 करोड़ पौधे रोपे गए। वन विभाग ने 80 हजार हेक्टेयर वन भूमि पर 2.50 करोड़ पौधे लगाए, जबकि विभिन्न विभागों, गैर सरकारी संगठनों और आमजन के सहयोग से 4.72 करोड़ पौधे लगाए गए। यह उपलब्धि राज्य सरकार की हरित पहल और जनसहभागिता के माध्यम से संभव हुई।</p>
<p>विधानसभा में विधायक की ओर से पूछे गए सवाल के जवाब में ये जानकारी दी गई है। अभियान के तहत विभाग की ओर से 45,037 पौधे रोपे गए। इसके साथ ही, राज्य सरकार की 2024-25 की बजट घोषणा के अंतर्गत प्रत्येक जिले में "मातृ वन" की स्थापना की गई। इन मातृ वनों की स्थापना में स्थानीय प्रजातियों को प्राथमिकता दी गई। "एक जिला, एक प्रजाति" योजना के तहत प्रत्येक जिले के लिए एक मुख्य प्रजाति और अन्य स्थानीय प्रजातियों को विभागीय नर्सरियों में तैयार किया जा रहा है।</p>
<p>अभियान के तहत रोपित पौधों की सुरक्षा और जीवितता सुनिश्चित करने के लिए 3,406 स्थानीय नागरिकों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को "वन मित्र" के रूप में पंजीकृत किया गया है। ये वन मित्र स्वैच्छिक रूप से पौधों की देखभाल करते हैं और इसके लिए कोई मानदेय नहीं दिया जाता। इस अभियान के तहत राज्य सरकार की हरित पहल ने पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता को एक नई दिशा दी है। इससे वन क्षेत्र में वृद्धि और जैव विविधता को संरक्षित करने में सहायता मिलेगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Feb 2025 17:06:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वन क्षेत्र में खुले आम हो रही है पेड़ों की कटाई, सरकार हर साल पौधारोपण के लिए करती है लाखों खर्च</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य सरकार के वन मंत्री द्वारा हर साले पर्यावरण बचाने के लिए पेड़ लगाने का अभियान चलाया जाता है, वहीं दूसरी ओर से कई लोग पेड़ों की अवैध कटाई कर जंगल साफ करने में लगे हुए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/trees-are-being-cut-openly-in-the-forest-area/article-102791"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer.png" alt=""></a><br /><p>बूढ़ादीत। बूढ़ादीत थाना क्षेत्र के वन विभाग क्षेत्र में धड़ल्ले के साथ अवैध रूप से पेड़ों की कटाई का कार्य किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार बूढ़ादीत क्षेत्र के ग्राम पंचायत बिसलाई व धनसुरी गांवों में अवैध रूप से नियमों को ताक पर रखकर वन क्षेत्र में पेड़ों कटाई की जा रही है। एक ओर तो राज्य सरकार के वन मंत्री द्वारा हर साले पर्यावरण बचाने के लिए पेड़ लगाने का अभियान चलाया जाता है, वहीं दूसरी ओर से कई लोग पेड़ों की अवैध कटाई कर जंगल साफ करने में लगे हुए हैं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला भी हर वर्ष पौधारोपण अभियान चलाकर लाखों पौधे लगाने की कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपते हैं।  </p>
<p>वन विभाग के अधिकारी कुछ जनप्रतिनिधियों की मिली भगत से प्लांटेशन के नाम पर धनसुरी एवं बिसलाई गांव में सैंकड़ों बीघा के जंगल काटकर मोटी कमाई करने में जुटे हुए हैं। यहां रोज लकड़ी से भरे ट्रक खुले आम गुजरते हैं। इन पर कार्रवाई नहीं की गई तो सुल्तानपुर वन विभाग कार्यालय के बाहर धरना दिया जाएगा। <br /><strong>-हेमंत मीणा, जिला परिषद सदस्य, बिसलाई</strong></p>
<p>लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला हर वर्ष ग्रीन कोटा के लिए पौधारोपण अभियान चलाकर हजारों पौधों का रोपण करवाते हैं। अगर हमारे क्षेत्र में वन विभाग की लापरवाही एवं मिली भगत से जंगल को नष्ट किया जा रहा है तो इनके विरुद्ध उच्च अधिकारियों को कार्रवाई करनी चाहिए। यदि अवैध जंगल कटाई को नहीं रोका गया तो वन मंत्री को लिखित में अवगत कराएंगे।<br /><strong>-देवेश भारद्वाज, भाजपा नेता, धनवां</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br /> बिसलाई ग्राम में अवैध रूप से जंगल कटाई की सूचना पर मौके पर पहुंचे तो पाया कि वहां पर लकड़ी कटाई की गई थी। जिसको जब्त किया गया। साथ ही धनसुरी गांव में प्लांटेशन का कार्य चल रहा है। फिर भी यदि जंगल कटाई अवैध रूप से की गई है तो उसकी जांच कर कार्रवाई करेंगे। <br /><strong>-मोनिका मीणा, रेंजर, वन विभाग, सुल्तानपुर  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Feb 2025 17:28:10 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>6 महीने बाद भी नहीं लगे डिवाइडर पर पौधे</title>
                                    <description><![CDATA[वन महोत्सव के दौरान जिलेभर में सघन पौधारोपण किया जाता है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/even-after-6-months--no-treatment-has-been-brought-on-the-divider/article-99104"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/5554-(4)19.png" alt=""></a><br /><p>झालावाड़। झालावाड़ के सिटी फोरलेन के मध्य बनाया गया डिवाइडर जो कुछ समय पहले तक हरियाली और फूलों से गुलजार हुआ करता था, इन दिनों उजड़ा हुआ पड़ा है, लेकिन ध्यान देने योग्य बात यह है कि इस डिवाइडर को उजाड़ तो दिया गया, लेकिन उजाड़ते समय इसको वापस आबाद करने के जो वादे हुए थे उनमें से एक भी वादा पूरा नहीं हो पाया है। 23 जुलाई 2024 को इस डिवाइडर पर लगे हुए पौधों को हटाकर नए फूलदार पौधे लगाए जाने की बात कही गई थी और प्रशासन की तरफ से इस कार्यवाही को शुरू किया गया था, लेकिन अब लगभग 6 महीने का समय बीत जाने के बाद भी यह डिवाइडर उजड़े हुए वीरान पड़े हैं। झालावाड़ सिटी फोर लेन के निर्माण के साथ ही इस डिवाइडर का निर्माण भी हुआ था तथा इस वक्त इस पर फूलदार पौधे लगा दिए गए थे। धीरे-धीरे यह पौधे बड़े होने लगे और फूल भी देने लगे। समय के साथ-साथ पौधों ने अच्छा आकर ले लिया जिससे एक लाइन में चलने वाली गाड़ियों की हेडलाइट की रोशनी दूसरी लाइन में जाना भी बंद हो गई। डिवाइडर पर पौधे लगाए जाने का मुख्य कारण यही होता है कि आमने-सामने चलने वाली गाड़ियों की हेडलाइट की रोशनी एक दूसरे पर ना पड़े, क्योंकि इसके कारण काफी दुर्घटनाएं घटित हो जाती हैं झालावाड़ के सिटी फोरलेन पर लगे हुए पौधों को हटाने का विचार जिला प्रशासन के मन में उस वक्त आया, जब वन महोत्सव की शुरूआत की गई। वन महोत्सव के दौरान जिलेभर में सघन पौधारोपण किया जाता है। इसी के चलते इस डिवाइडर पर रंगीन फूलों वाले खूबसूरत पौधे लगाने का मन बनाया गया और जिला प्रशासन की तरफ से आदेश जारी कर दिए गए। अभियान की शुरूआत विधिवत्त झालावाड़ मिनी सचिवालय के मुख्य द्वार के सामने डिवाइडर पर लगे पुराने पौधों को हटाकर नए पौधे लगाकर की गई और एक बड़ा आयोजन हुआ, जिसमें कई संस्थाएं, एनजीओ और निजी विद्यालयों ने भाग लिया। इस अवसर पर सभी संस्थाओं ने अपने-अपने हिसाब से डिवाइडर को गोद लेकर पौधे लगाने और सार संभाल करने की बात कही और अनेक वादे किए गए, लेकिन नतीजा हमेशा की तरह वही "ढ़ाक के तीन पात" रहा। आज डिवाइडर की हालत किसी से छुपी नहीं है ऐसे में सवाल पैदा होता है कि आखिर वह सभी संस्थाएं जिन्होंने पौधे लगाने और संभालने के वादे किए थे वह अब कहां है।<br />  <br /> पुराने पौधे हटाकर नए पौधे लगाए जाने के अभियान की शुरूआत झालावाड़ जिला कलेक्टर के सानिध्य में हुई थी। ऐसे में जब हमने जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौर से इस पूरे मामले को लेकर बात की तो उन्होंने कहा कि मामले में तुरंत कार्रवाई करते हुए ऐसे सभी हिस्से जहां पर पौधे नहीं है या सूख गए हैं, वहां पर पौधे लगवाएंगे। जिला कलेक्टर ने जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को निर्देश भी दिए कि तुरंत प्रभाव से उन सभी संस्थाओं और लोगों से संपर्क करें जिन्होंने पौधे लगाने की जिम्मेदारी ली थी और जहां से भी पौधे उजड़ गए हैं उनको वापस लगवाया जाए।  जिला प्रशासन ने पूरे अभियान की शुरूआत मिनी सचिवालय के सामने वाले हिस्से से की थी तथा यह अभियान मिनी सचिवालय के सामने से लेकर झालावाड़ अस्पताल के सामने मौजूद डिवाइडर तक चला। जहां पौधे उजाड़ तो दिए गए लेकिन लगाए नहीं गए। झालावाड़ पशु चिकित्सालय के सामने और झालरापाटन रोड पर आज भी पुराने पौधे बरकरार हैं, उन्हें देखकर एहसास होता है कि इन पौधों में भी किसी प्रकार की कोई कमी नहीं थी तथा इनको सड़क बनाने वाले विशेषज्ञों द्वारा सोच समझकर उस वक्त लगवाया गया था। ऐसे में एक बड़ा सवाल पैदा हो जाता है कि क्या जरूरत पड़ी थी कि हरे भरे पौधों को उखाड़ कर फेंक दिया गया और हद तो तब हो गई जब उनके स्थान पर नए पौधे भी नहीं लग पाए। </p>
<p>डिवाइडर पर पौधे लगाने की जिम्मेदारी जिन संस्थाओं ने ली थी, उनसे बात करके पौधों को वापस लगाया जाएगा। ताकि डिवाइडर फिर से हरे भरे हो सके। <br /><strong>-  अजय सिंह राठौड, जिला कलेक्टर झालावाड़</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Dec 2024 17:25:55 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>बिलों में फर्जीवाड़ा: जुलाई में पौधे लगाने के एक माह बाद अगस्त में खोदे 5500 गड्ढ़े ? </title>
                                    <description><![CDATA[वन अधिकारियों का कारनामा-न गड्ढ़े न मिट्टी हवा में कर दिया पौधरोपण।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/fraud-in-bills--5500-pits-dug-in-august--a-month-after-planting-saplings-in-july/article-98654"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer52.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। लखावा प्लांटेशन-8 में भ्रष्टाचार  के नित नए चौंकाने वाले मामले सामने आ रहे हैं। 50 हैक्टेयर के प्लांटेशन में वन मंडल के अधिकारियों ने गड्ढ़े किए बिना ही पौधे लगाने का कारनामा कर दिखाया। अधिकारियों ने जुलाई में एक साथ हजारों पौधे लगाए लेकिन उनके लिए खड्ढ़े एक महीने बाद अगस्त में किए। जब गड्ढ़े ही अगस्त में किए तो जुलाई में पौधे कैसे लग गए। बगैर गड्ढ़ों के पौधे लगाने का फर्जीवाड़ा एपीसीसीएफ के प्लांटेशन जनरल और बिलों के अवलोकन से हुआ।</p>
<p><strong>एपीसीसीएफ ने यूं पकड़ा फर्जीवाड़ा</strong><br />अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन सुरक्षा) केसी मीना ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि लखावा-8 प्लांटेशन में बहुत ही गड़बड़झाला है। प्लांटेशन जनरल में यहां वर्ष 2022 में 15 से 25 जुलाई के बीच 8000 पौधे लगाना बताया गया है। जबकि, इसी कार्य के बिल में 5500 खडढ़े ही 16 से 31 अगस्त के बीच खोदा जाना बताया है। जब खड्ढ़े ही अगस्त में खुदे हैं तो जुलाई में पौधे कैसे लग गए। इससे यह प्रतित होता है कि 5500 खडढ़े खुदे बिना ही 8000 पौधे लगा दिए गए।</p>
<p><strong>निरीक्षण पथ बना नहीं, उठ गए 77 हजार</strong><br />16 नवम्बर 2022 तक 2500 रनिंग मीटर लंबा और 3 मीटर चौड़ा निरीक्षण पथ बनाना बताकर 54 हजार 500 रुपए का बिल उठा। इसके बाद 2 अगस्त 2023 को 1 किमी निरीक्षण पथ के संधारण के नाम पर 22 हजार 400 का बिल बनाकर भुगतान उठा लिया। जबकि, मौके पर निरीक्षण पथ मिला ही नहीं। जब निरीक्षण पथ बना ही नहीं तो संधारण किसका कर रहे थे। </p>
<p><strong>न खडढ़े खुदे न थांवले बने, उठ गए 3.45 लाख</strong><br />रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 में 16 अगस्त से 31 अक्टूबर की कार्य अवधि के बिलों में अधिकारियों ने 5500 खडढ़े खोदना बताया। प्रति खड्ढ़े के 54 रुपए चार्ज किए। जबकि, हकीकत में 5500 खडढ़े यहां खुदे ही नहीं। क्योंकि, यह चटटानी क्षेत्र है, जहां जेसीबी से भी एक फीट गहरा खड्ढ़ा नहीं खोदा जा सकता। वहां श्रमिकों द्वारा हाथों से खडढ़े खोदना बताकर 3 लाख 2 हजार 60 रुपए का भुगतान उठा लिया गया। इसी तरह यहां किसी भी पौधे के थांवले नहीं बने हुए हैं। जबकि, बिल में 5500 पौधों के जल संरक्षण के लिए प्रति थांवला 7 रुपए की दर से चार्ज किया गया। जिसका 42 हजार 900 रुपए का बिल उठाया गया। जबकि, निरीक्षण के दौरान मौके पर न खड्ढ़े मिले और न ही थांवले। </p>
<p><strong>दीवारों की मरम्मत तो हुई नहीं, उठा लिए 95 हजार का भुगतान</strong><br />एपीसीसीएफ ने रिपोर्ट में बताया कि वर्ष 2024 में 18 से 27 मार्च तक कार्य अवधि के बिल में 115 मीटर लंबी  दीवार की मरम्मत कार्य करना बताया गया, जबकि, 27 मई को निरीक्षण के दौरान मौके पर दीवार मरम्मत कार्य नजर आया। इसके बावजूद 27 मार्च को दीवार मरम्मत के नाम पर 95 हजार 734 रुपए का बिल पास कर भुगतान उठा लिया गया। अत: यह सभी बिल काफी हद तक फर्जी ही प्रतित होते हैं।</p>
<p><strong>कागजों में खुदी 5000 मीटर वी-डिच, मौके पर नदारद </strong><br />बिलों में 5000 रनिंग मीटर वी-डिच खोदना बताया है, जो मौके पर नजर नहीं आई। वहीं, प्लांटेशन जनरल में जानकारी आधी-अधूरी मिली। वर्ष 2022 में 1 अप्रेल से 15 अगस्त कार्य अवधि के बिल में 5000 मीटर वी-डिच पर बीजारोपण करने के 3100 रुपए तथा 16 अगस्त से 31 अक्टूबर के बिल में वी-डिच में पौधों की निराई गुडाई के लिए 11,900 रुपए का भुगतान उठाया गया। जबकि, निरीक्षण में वी-डिच नजर आई। </p>
<p><strong>10.78 लाख से किसका किया संधारण </strong><br />जांच रिपोर्ट के अनुसार, लखावा प्लांटेशन-8 के प्रथम वर्ष 2022-23 में पौधे लगाने व संधारण के लिए सरकार से 12.76 लाख रुपए का बजट आवंटित हुआ था। जिसमें से 10.78 लाख रुपए खर्च किए गए। जबकि मौके पर पौधे न के बराबर मिले। ऐसे में उक्त अवधि में जब पौधे ही नहीं थे तो किनके संधारण पर लाखों रुपयों के बिल बनाकर भुगतान उठाया गया। वहीं, किसकी सुरक्षा निगरानी की जा रही थी। इस तरह गत 24 मई को दैनिक नवज्योति में छपी खबर के तथ्य बिलकुल सही है। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं वाइल्ड लाइफर</strong><br /><strong>डीएफओ के इशारे पर रेंजरों ने बनाए फर्जी बिल</strong><br />पौधों के संधारण के नाम पर डीएफओ के इशारे पर लाडपुरा रेंजरों ने फर्जी बिल बनाकर भुगतान उठाया और सरकारी धन का गबन किया। 1 नवम्बर 2022 से जून 2024 तक लगातार बिल उठाते रहे, जबकि मौके पर काम हुए ही नहीं। नतीजन, 30% सरवाइवल रेट के साथ प्लांटेशन फेल हो गया। मेटिगेटिव मैजर्स में नेशनल हाइवे आॅथोरिटी आॅफ इंडिया ने हाइवे के सहारे हरितिमा पट्टी विकसित करने के लिए वन विभाग को लाखों रुपए कैम्पा के जरिए वन विभाग को दिया था, जिसमें इन अधिकारियों ने गबन कर लिया। तत्कालीन व वर्तमान डीएफओ एवं रेंजरों ने मिलीभगत से जमकर सरकारी धन का दुरुपयोग कर भ्रष्टाचार किया। ऐसे अधिकारियों व फिल्ड स्टाफ के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।<br /><strong>- तपेश्वर सिंह भाटी, एडवोकेट एवं पर्यावरणविद् </strong></p>
<p><strong>रिपोर्ट सौंपने के 5 माह बाद भी कार्रवाई नहीं</strong><br />अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक केसी मीना ने गत 27 मई को मामले की जांच शुरू की थी, जो सवा महीने चली। गत 10 जुलाई को उन्होंने रिपोर्ट प्रधान मुख्य वनसंरक्षक (हॉफ)को सौंप दी थी। इसके बावजूद फर्जी बिल बनाकर भुगतान उठाने वाले फिल्ड अधिकारियों व कर्मचारियां के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। जिससे न केवल वन अपराध को बढ़ावा मिल रहा बल्कि भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों में उच्चाधिकारियों का भय खत्म हो रहा है। साथ ही जवाबदारी व जिम्मेदारी खत्म हो रही है।  <br /><strong>- बाबूलाल जाजू, प्रदेशाध्यक्ष, पीपुल्स फॉर एनिमल </strong></p>
<p><strong>कड़ा संदेश देने की जरूरत</strong><br />जिन पर पर्यावरण संरक्षण,वन  रक्षा की जिम्मेदारी है, वहीं भक्षक बन भ्रष्टाचार में लिप्त हो गए हैं। जांच में जब फर्जीवाड़े का खुलासा हो गया तो सरकार सख्त कार्रवाई कर कड़ा संदेश दें। <br /><strong>- रवि कुमार, बायोलॉजिस्ट</strong></p>
<p><strong>डीएफओ ने नहीं दिया जवाब </strong><br />मामले की जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेज चुके हैं, जिसमें जांच के सभी प्वाइंट कवर किए हैं।<br /><strong>- रामकरण खैरवा, संभागीय मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक, वन विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Dec 2024 17:05:53 +0530</pubDate>
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                <title>जमीन से अफसरों की जेब में पहुंची 21.42 लाख की हरियाली, पौधों के पानी का पैसा भी डकार गए</title>
                                    <description><![CDATA[वर्तमान में पौधों की औसत ऊंचाई  8 से 10 इंच, कागजों में 6 से 8 फीट]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/greenery-worth-21-42-lakhs-reached-the-pockets-of-the-officers-from-the-ground--they-also-swallowed-the-money-for-the-water-of-the-plants/article-98541"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/5554-(2)18.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। चट्टानों से घिरा 50 हैक्टेयर का लखावा प्लांटेशन-8 चारों तरफ से खाली है। कंक्रीट व चट्टानों के ढेर लगे हैं, लेकिन कोटा वन मंडल के अधिकारियों ने यहां कागजों में जंगल खड़ा कर दिया है। जहां 6 से 7 फीट ऊंचे 8000 से 6300 पौधे लगे हैं। जबकि, हकीकत में यहां 150 पौधे भी नहीं मिले। इसके बावजूद वन अधिकारी वर्ष 2022 से जून 2024 तक प्लांटेशन संधारण के नाम पर फर्जी बिल बनाकर 21.42 लाख रुपए का भुगतान उठाते रहे।  भ्रष्टाचार का खुलासा अतिरिक्त मुख्य प्रधान वन संरक्षक केसी मीना व पीएंडएम गणना दल की जांच रिपोर्ट से हो चुका है।  असल में, 21.42 लाख की हरियाली प्लांटेशन के बजाय अफसरों की जेब में पहुंच गई। नतीजन, लखावा प्लांटेशन-8 तो हरा नहीं हो सका लेकिन पिछले 3 सालों में वन अधिकारियों की जेबें हरी हो गई। हालांकि, जब जांच में भ्रष्टाचार की पोल खुली तो अधिकारियों ने गत जुलाई में 2500 नए पौधे लगा दिए। जिसकी 30 सितम्बर से 4 अक्टूबर तक पीएंडएम गणना दल द्वारा जांच की गई तो मौके पर 2300 पौधे ही मिले। जिनकी ऊंचाई बमुश्किल से 8 से 10 इंच थी। </p>
<p><strong>1 से 8 सभी प्लांटेशनों के बूरे हाल</strong><br />अतिरिक्त प्रधान मुख्य वनसंरक्षक केसी मीना ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि निरीक्षण के दौरान लखावा प्लांटेशन-8 में न के बराबर पौधे थे, जबकि अनेकों बार 8-8 हजार पौधों को पानी पिलाने, निराई-गुड़ाई व सुरक्षा के नाम पर फर्जी बिल बनाकर भुगतान उठाया गया। यदि, हकीकत में यह कार्य हुए होते तो यहां जंगल खड़ा हो चुका होता। </p>
<p><strong>8 हजार से 6300 पौधों को कागजों में पिलाया पानी</strong><br />कोटा वन मंडल के अधिकारियों ने लखावा प्लांटेशन में पिछले तीन सालों से 8000 से 6300 तक पौधों को कागजों में पानी पिलाते रहे और जमकर सरकारी धन का दुरुपयोग करते है। जबकि, मौके पर 150 पौधे भी नहीं थे। डीएफओ-रेंजर से नाका प्रभारियों तक ने मिलीभगत कर फजीर्वाड़े को अंजाम दिया। अतिरिक्त प्रधान मुख्य वनसंरक्षक केसी मीना ने 27 मई को जयपुर से कोटा आकर लखावा प्लांटेशन-8 का निरीक्षण किया तो उन्हें यहां 150 पौधे भी जीवित नहीं मिले थे। ऐसे में वन अधिकारी इतने सालों तक किन्हें पानी पिलाया और किसकी चौकीदारी करते रहे।</p>
<p><strong>5500 खडढ़े खुदे नहीं और उठा लिए 3.2 लाख </strong><br />पी एंड एम गणना दल की जांच रिपोर्ट के अनुसार, 16 अगस्त से 31 अक्टूबर 2022 तक  वन अधिकारियों ने कागजों में 5500 खडढ़े खोद दिए। बिल में प्रति खड्ढ़े 54 रुपए चार्ज किए। जबकि, हकीकत में 5500 खडढ़े यहां खुदे ही नहीं। क्योंकि, यह चट्टानी क्षेत्र है, ऐसे में यहां जेसीबी से भी एक फीट गहरा खड्ढ़ा नहीं खोदा जा सकता। इसके बावजूद श्रमिकों द्वारा हाथों से खड्ढ़े खोदना बताकर 3 लाख 2 हजार 60 रुपए का भुगतान उठा लिया गया। इसके अलावा यहां किसी भी पौधे के थांवले नहीं बनाए गए। जबकि, बिल में 5500 पौधों के जल संरक्षण के लिए प्रति थांवला 7 रुपए की दर से चार्ज किया गया। जिसका 42 हजार 900 रुपए का बिल उठा लिया गया। </p>
<p><strong>नवज्योति खबर नहीं छापता तो उजागरनहीं होता घोटाला</strong><br />जांच अधिकारी केसी मीना ने गत 10 जुलाई को प्रधान मुख्य वनसंरक्षक (हॉफ) को सौंपी अपनी रिपोर्ट में कहा कि दैनिक नवज्योति खबर प्रकाशित नहीं करता तो संभव था कि लखावा प्लांटेशन-8 में वृक्षारोपण में हुई इतनी बड़ी गड़बड़ी शायद कभी उजागर ही नहीं होती। जबकि, संभागीय मुख्य वनसंरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक कोटा में ही बैठते हैं, लेकिन उनके द्वारा भी साइड का निरीक्षण नहीं किया गया। ऐसे में उक्त रिपोर्ट के विशलेषण के मध्यनजर उचित एवं सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। लखावा-8 से सटे अन्य प्लांटेशनों के भी यही हालात है। इनकी विशेष टीम गठित कर जांच करवानी चाहिए।</p>
<p><strong>क्या कहते हैं अधिकारी</strong><br />मामले की जांच करवाकर उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेज चुके हैं, जिसमें मामले से संबंधित जांच के सभी प्वाइंट कवर किए हैं। वहां से जो निर्देश प्राप्त होंगे, उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। <br /><strong>-रामकरण खैरवा, संभागीय मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक, वन विभाग </strong></p>
<p><strong>डीएफओ ने नहीं दिया जवाब </strong><br />मामले को लेकर नवज्योति ने कोटा डीएफओ अपूर्व कृष्ण श्रीवास्तव को फोन कर पक्ष जानना चाहा लेकिन उन्होंने फोन अटैंड नहीं किया। इसके बाद उन्हें मैसेज किया गया, जिसका भी जवाब नहीं दिया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Dec 2024 14:36:18 +0530</pubDate>
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                <title>खबर छपी तो अधिकारियों ने भ्रष्टाचार छिपाने को लगा दिए 2500 नए पौधे </title>
                                    <description><![CDATA[वर्ष 2022 से 31 जुलाई 2024 तक कागजों में 8-8 हजार पौधों को पिलाया जा रहा था पानी ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/when-the-news-was-published--the-officials-planted-2500-new-plants-to-hide-the-corruption/article-98437"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer-(4)16.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा वनमंडल के लखावा प्लांटेशन-8 में पौधों के संधारण के नाम पर हुए भ्रष्टाचार का एक और सनसनीखेज खुलासा हुआ है। दैनिक नवज्योति में खबर छपने के बाद वन अधिकारियों की पोल खुली तो उन्होंने अपना भ्रष्टाचार छिपाने के लिए गत जुलाई के प्रथम सप्ताह में 2500 नए पौधे लगा दिए। जबकि, अतिरिक्त मुख्य प्रधान वनसंरक्षक केसी मीना के गत 27 मई को हुए निरीक्षण में यहां 150 पौधे भी नहीं मिले थे। ऐसे में उनकी रिपोर्ट पर सितम्बर माह में पी एंड एम गणना दल ने जांच की तो पूरे प्लांटेशन में 2300 पौधे ही मिले। जबकि, इससे पहले तक वन अधिकारी कागजों में 8-8 हजार पौधे बताकर पानी पिलाने, निराई-गुड़ाई व चौकीदारी के नाम पर लाखों के फर्जी बिल बनाकर भुगतान उठाते रहे। </p>
<p><strong>पौधे लगाए, रिकॉर्ड में नहीं किया चार्ज</strong><br />लखावा प्लांटेशन वर्ष 2021 का है। जिसका प्रथम वर्ष 2022 में शुरू हुआ था, तब यहां 8000 पौधे लगाए जाने थे। लेकिन, इतने पौधे कभी लगाए ही नहीं गए। लेकिन, वन अधिकारियों ने लाडपुरा रेंजरों से मिलीभगत कर साल-दर-साल 8-8 हजार पौधे कागजों में जीवित बताकर बिल उठाते रहे। गत 24 मई को नवज्योति ने खबर छाप भ्रष्टाचार उजागर किया तो 27 मई को अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक केसी मीणा जयपुर से कोटा पहुंच कर लखावा प्लांटेशन-8 का निरीक्षण किया। इस दौरान मौके पर 150 पौधे भी नहीं मिले। जब मामले की जांच खुली तो कोटा वनमंडल के अधिकारियों ने अपना भ्रष्टाचार छिपाने के लिए जुलाई के प्रथम सप्ताह में 2500 पौधे नए सिरे से लगवाकर बीजारोपण करवाया। जिसे रिकॉर्ड में चार्ज नहीं किया गया। </p>
<p><strong>नवज्योति की खबर पर लगी सत्यता की मुहर</strong><br />अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक केसी मीना ने अपनी जांच रिपोर्ट में दैनिक नवज्योति में गत 24 मई को प्रकाशित न पौधे न चौकीदार, किसकी सुरक्षा में खर्च किए लाखों रूपए...शीर्षक से छपी खबर के हर एक तथ्य को सही बताया। उन्होंने यहां कि जब मौके पर पौधे ही नहीं है तो 2 साल तक किसके संधारण के नाम पर लाखों रूपयों के बिल कैसे बना लिए गए। मीना ने चिंता जताई कि विभाग का इतना बड़ा सिस्टम होने के बाद भी कोई अधिकारी-कर्मचारी कार्य के नाम पर बजट का बेजा इस्तेमाल कैसे कर सकता है। यदि, नवज्योति खबर नहीं छापता तो इतनी बड़ी गड़बड़ी शायद कभी उजागर नहीं होती। </p>
<p><strong>सरकारी धन का जमकर किया दुरुपयोग</strong><br />एपीसीसीएफ की रिपोर्ट के अनुसार, लखावा प्लांटेशन-8 में वर्ष 2022 से 31 जुलाई 2024 तक कभी 8000, 7200, 6500, 6300 तो कभी 6800 पौधे लगाना, निराई-गुड़ाई, चौकीदारी, 5500 खड्ढ़े खोदना, दीवारों की मरम्मत, 5000 रनिंग मीटर वी-डिच खुदाई सहित अन्य कार्यों के बिल बिना कार्य किए ही उठा लिए। अधिकारियों का प्लांटेशन पर ध्यान देने के बजाए सिर्फ सरकारी धन का दुरूपयोग करने पर ही रहा। नतीजन, 3 साल में 150 पौधे भी पनप नहीं सके। जबकि, मेटिगेटिव मैजर्स में प्लांटेशन का एनएच-76 के सहारे हरितिमा पटटी विकसित करना उद्देश्य था, परन्तु यहां सिर्फ धन का ही दुरूपयोग ही हुआ है।</p>
<p><strong>प्लांटेशन चारों तरफ से खाली, कहां पिलाया 8 हजार पौधों को पानी </strong><br />अतिरिक्त मुख्य प्रधान वनसंरक्षक केसी मीना ने अपनी जांच रिपोर्ट में बताया कि बिलों में 5500 गड्ढ़े खोदे गए है। जबकि, वर्ष 2022 से ही 8000 पौधें लगाने से लेकर अनेकों बार पानी पिलाना, बार-बार निराई-गुड़ाई, सुरक्षा निगरानी के नाम पर बिल बनाकर भुगतान उठाया गया है। जबकि, निरीक्षण के वक्त पूरा क्षेत्र खाली पाया गया। यदि, 8 हजार पौधे होते तो 3 साल में यहां जंगल विकसित हो चुका होता। लेकिन, प्लांटेशन में चारों तरफ घूमने पर भी पौधे नजर नहीं आए। हालांकि, कुछ जगह मामूली निशान मिले हैं, जिन्हें देख ऐसा नहीं लगा कि यहां कोई गड्ढ़ा खोदकर पौधा लगाकर थांवला बनाया गया हो और उनकी निराई-गुड़ाई की गई हो। अत: प्लांटेशन के नाम पर घोर लापरवाही की गई है। मौके पर कार्य हुआ ही नहीं, मात्र औपचारिकता की गई है। अधिकांश भुगतान बिना कार्यों के ही उठाए गए हैं। </p>
<p><strong>पी एंड एम गणना दल की जांच में यूं खुली भ्रष्टाचार की पोल</strong><br />अतिरिक्त प्रधान मुख्य वनसंरक्षक केसी मीना की रिपोर्ट पर मूल्यांकन एवं प्रबोधन कोटा को प्लांटेशन का सर्वे कर पौधों की जांच सौंपी गई। इस पर पी-एंड-एम की 7 सदसीय टीम ने गत 30 सितम्बर से 4 अक्टूबर तक प्लांटेशन में पौधों की वास्तविक संख्या की जांच की तो यहां 2300 पौधे मिले। जिनकी ऊंचाई बमुश्किल 8 से 10 इंच थी। पीएंडएम की जांच रिपोर्ट में बताया गया कि यह प्लांटेशन पूरी तरह से फेल है और पूर्व में जो कार्य जिस मात्रा में करना बताया गया वह मौके पर गणना के समय नहीं पाया गया। यदि, जुलाई 2024 के प्रथम सप्ताह में बारिश के समय 2500 पौधे इस प्लांटेशन में नहीं लगाए जाते तो पीएंडएम गणना दल को मौके पर 2300 पौधें भी नहीं मिलते। इससे स्पष्ट है कि अतिरिक्त प्रधान मुख्य वनसंरक्षक केसी मीना के निरीक्षण तक यहां 150 पौधे भी नहीं थे।    </p>
<p><strong>पर्यावरण प्रेमी बोले- न केवल प्रकृति बल्कि सरकार के साथ भी धोखा</strong><br /><strong>भ्रष्टाचार करने वालों से हो रिकवरी</strong><br />पौधे लगाने के नाम पर जिन वन अधिकारियों ने भ्रष्टाचार किया है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही प्लांटेशन संधारण में अब तक जितनी राशि खर्च हुई है, उनकी रिकवरी इन संबंधित  अधिकारियों से वसूली जानी चाहिए। वहीं, लखावा प्लांटेशन जैसे प्रदेश के अन्य प्लांटेशनों की जांच हो तो बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार उजागर होगा। <br /><strong>- बाबूलाल जाजू, प्रदेश प्रभारी, पीपुल फॉर एनीमल</strong></p>
<p><strong>एसीबी खुद संज्ञान लेकर दोषियों के खिलाफ करें कार्रवाई</strong><br />वन मंडल कोटा में लोकसेवकों द्वारा भ्रष्टाचार किया जाना नई बात नहीं हैं। यह भ्रष्टाचार छिपाने के उद्देश्य से पारदर्शिता नियमों की पालना नहीं करते। जिम्मेदार लोकसेवकों द्वारा यहां असम्यक लाभ प्राप्त किया गया है। इनका यह कृत्य आपराधिक प्रवृति की श्रेणी में आता है, जो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के अन्तर्गत परिभाषित है। नियमानुसार यहां वन विभाग की जगह भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरों को स्वत: ही संज्ञान लेकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। क्योंकि वन विभाग की जांच पक्षपातपूर्ण होगी।<br /><strong>- तपेश्वर सिंह भाटी, एडवोकेट एवं पर्यावरणविद् </strong></p>
<p><strong>जिम्मेदारों पर हो सख्त कार्रवाई</strong><br />प्लांटेशन में भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारियों ने न प्रकृति बल्कि सरकार से भी विश्वासघात किया है। राजकोष से लाखों रुपयों का गबन कर पर्यावरण को क्षति पहुंचाने वाले संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। नियमानुसार प्लांटेशन फेल होने पर जिम्मेदार अधिकारियों से रिकवरी किए जाने का प्रावधान है। <br /><strong>- अजय दुबे, वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट, भोपाल</strong></p>
<p><strong>रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी</strong><br />उच्चाधिकारियों को मामले की रिपोर्ट भेज दी है। मैं इसमें कमेंट्स नहीं कर सकता।   <br /><strong>- रामकरण खैरवा, संभागीय वनसंरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक वन विभाग कोटा</strong></p>
<p><strong>डीएफओ ने नहीं दिया जवाब </strong><br />मामले को लेकर नवज्योति ने कोटा डीएफओ को फोन कर पक्ष जानना चाहा लेकिन उन्होंने फोन अटैंड नहीं किया। इसके बाद उन्हें मैसेज किया गया लेकिन जवाब नहीं मिला।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Dec 2024 17:55:52 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का -150 पौधे भी नहीं, उठा लिए 8-8 हजार पौधों को पानी पिलाने के नाम पर लाखों रुपए</title>
                                    <description><![CDATA[अतिरिक्त प्रधान मुख्य वनसंरक्षक की जांच रिपोर्ट से खुली भ्रष्टाचार की पोल।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---not-even-150-plants--took-lakhs-of-rupees-in-the-name-of-watering-8-8-thousand-plants/article-98421"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/5554-(2)14.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नेशनल हाइवे-76 स्थित लाड़पुरा रेंज का लखावा प्लांटेशन-8 में पौधों के संधारण के नाम पर भ्रष्टाचार का खनसनीखेज खुलासा हुआ है। 50 हैक्टेयर के प्लांटेशन में 2 साल से 8-8 हजार पौधों को पानी पिलाने, निराई-गुड़ाई करने व सुरक्षा-चौकीदारी के नाम पर वन अधिकारियों ने लगातार फर्जी बिल बनाए और लाखों रूपयों का भुगतान उठा लिया। जबकि, मौके पर 150 पौधे भी नहीं मिले। भ्रष्टाचार का यह खुलासा अतिरिक्त प्रधान मुख्य वनसंरक्षक-वनसुरक्षा की जांच रिपोर्ट से हुआ। वर्ष 2022 से जून 24 तक कोटा वनमंडल के अधिकारियों ने रेंजर्स के साथ मिलीभगत कर सरकारी धन का जमकर दुरूपयोग किया। भ्रष्टाचार का आलम यह है, अतिरिक्त प्रधान मुख्य वनसंरक्षक के निरीक्षण के बाद भी 6500 पौधों को पानी पिलाने का बिल उठ उठा लिया। दरअसल, दैनिक नवज्योति ने गत 23 मार्च को खबर प्रकाशित कर लखावा प्लांटेशन में भ्रष्टाचार उजागर किया था। इस पर अतिरिक्त वन सचिव अर्पणा अरोरा के निर्देश पर जयपुर से अतिरिक्त मुख्य प्रधान वनसंरक्षक केसी मीणा व उपवन संरक्षक पीके पांडे जांच के लिए 26 मई को कोटा आए थे और 27 मई को लखावा प्लांटेशन का निरीक्षण किया। मौके के हालात देख जांच टीम भी दंग रह गई। टीम को यहां 150 पौधे भी नहीं मिले थे। सवा महीने चली जांच में भ्रष्टाचार के चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पेश है जांच रिपोर्ट के प्रमुख अंश....</p>
<p><strong>कागजों में 10 बार पिलाया 8-8 हजार पौधों को पानी, उठाए 12.67 लाख के बिल</strong><br />कोटा वनमंडल का लखावा प्लांटेशन-8 वर्ष 2022 का है, जो 50 हैक्टेयर में फैला है। जिसमें 150 पौधे भी नहीं है लेकिन फिल्ड अधिकारियों ने वर्ष 2022 से जून 2024 तक 8-8 हजार पौधों को पानी पिलाने के फर्जी बिल बनाकर 12.67 लाख रूपए का भुगतान उठा लिए। अब तक 10 बार कागजों में 8-8 हजार पौधों को पानी पिलाने, निराई-गुड़ाई, रिप्लेसमेंट व पौधों की सुरक्षा, चौकीदारी के नाम तत्कालीन व वर्तमान अधिकारी सरकार को लाखों रूपयों की चपत लगा चुके हैं। अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक केसी मीना ने जांच रिपोर्ट में बताया कि अधिकांश भुगतान बिना कार्यों के ही उठा लिए हैं। वहीं, अब तक बिलों में यहां लगाए गए पौधों की जितनी भी संख्या बताई, उसके कोई सबूत नहीं दिखे और न ही इतने पौधों को पानी पिलाया गया हो, इसके मौके पर साक्ष्य नहीं मिले। अर्थात : उक्त बिल काफी हद तक फर्जी ही प्रतीत होते हैं।</p>
<p><strong>प्लांटेशन में 150 पौधें भी नहीं फिर 8000 को कैसे पिलाया पानी</strong><br />अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक केसी मीना ने जांच रिपोर्ट में बताया कि 50 हैक्टेयर के लखावा प्लांटेशन में 27 मई को निरीक्षण के दौरान काफी धूम फिरकर देखा लेकिन यहां जीवित पौधे 150 भी नहीं मिले। जबकि, वर्ष 2022 से जून 2024 तक अनेकों बार 8-8 हजार पौधों को पानी पिलाने व संधारण के नाम पर बिल उठते रहे। ऐसे में जब यहां 150 पौधे भी नहीं है तो 2 साल से पानी किसे पिलाया जा रहा था। बिलों को देखकर स्पष्ट है, सरकारी धन का जमकर दुरूपयोग किया है। जबकि, निरीक्षण के वक्त जयपुर से आए वन सुरक्षा डीएफओ पीके पांडे, सीसीएफ रामकरण खैरवा, कोटा डीएफओ अपूर्व कृष्ण श्रीवास्तव, प्रशिक्षु आईएफएस विवेकानंद सहित कोटा वनमंडल का फिल्ड स्टाफ साथ था। जब इनसे पूछा गया कि यहां कितने पौधे जीवित देखे हैं तो इस पर किसी ने 60, 70, 80 तथा कोई भी 100 पौधे जीवित नहीं बता सका। प्लांटेशन पूरी तरह से फेल है। पौधे लगाने से ज्यादा बिल उठाने पर ही ध्यान दिया गया है।</p>
<p><strong>जांच अधिकारी ने नवज्योति को बताया आई ओपनर</strong><br />प्लांटेशन की जांच करने जयपुर से आए अधिकारी अतिरिक्त प्रधान मुख्य संरक्षक केसी मीना ने अपनी रिपोर्ट में दैनिक नवज्योति को विभाग की आंख खोलने के लिए आई ओपनर बताया है। उन्होंने कहा कि गत 24 मई को दैनिक नवज्योति में छपी खबर न केवल सही है बल्कि विभाग के लिए आई ओपनर भी है कि कैसे इतना सिस्टम होने के बाद भी कोई अधिकारी-कर्मचारी कार्य के नाम पर बजट का बेजा इस्तेमाल कर सकता है और ऊपर की कड़ी में किसी भी अधिकारियों द्वारा नेशनल हाइवे से सटे प्लांटेशन होने पर भी इसका निरीक्षण तक नहीं किया गया। नतीजन, वृक्षारोपण के नाम पर इतनी बड़ी राशि खर्च करने के बावजूद वांछित परिणाम से दूर है। </p>
<p><strong>सख्त होगी कार्रवाई</strong><br />यह मामला सरकार के संज्ञान में है। दोषियों के खिलाफ निश्चित रूप से सख्त से सख्त कार्रवाई होगी।<br /><strong>- अर्पणा अरोड़ा, अतिरिक्त मुख्य सचिव वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, राजस्थान सरकार</strong></p>
<p>मुझे मौके की तथ्यात्मक रिपोर्ट देने के लिए निर्देशित किया गया था। जिसकी पालना में मैं, कोटा आया और लखावा प्लांटेशन-8 का मौका निरीक्षण किया था। <br /><strong>- केसी मीना, अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक, वन सुरक्षा </strong></p>
<p>मामले में कार्रवाई तो निश्चित होगी लेकिन कार्रवाई क्या होगी, इस बारे में कमेंट नहीं कर सकता। हमने जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंप दी है, वहां से प्राप्त निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। <br /><strong>- रामकरण खैरवा, संभागीय मुख्य वनसंरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक</strong></p>
<p><strong>डीएफओ ने नहीं उठाया फोन</strong><br />नवज्योति ने मामले को लेकर दो बार डीएफओ को फोन किया , लेकिन उन्होंने फोन अटैंड नहीं किया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Dec 2024 14:09:39 +0530</pubDate>
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