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                <title>discrepancy - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>20 साल पुराने यूरोपीय प्रोजेक्ट पर 2023 से खर्च शून्य: जल सुधार की रिपोर्ट गौण ; 450 करोड़ का यूरोपीय संघ जल सुधार कार्यक्रम, कितनी बदली राजस्थान की तस्वीर</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में जल प्रबंधन के लिए शुरू हुई 450 करोड़ की यूरोपीय संघ परियोजना सवालों के घेरे में है। 415.66 करोड़ रुपये खर्च होने और जल नीति-2010 जैसी उपलब्धियों के बावजूद, पिछले तीन वर्षों (2023-26) से व्यय शून्य बना हुआ है। विशेषज्ञ जमीनी स्तर पर इसके वास्तविक प्रभाव और रखरखाव पर सवाल उठा रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/zero-expenditure-on-20-year-old-european-project-from-2023/article-157627"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(1)44.png" alt=""></a><br /><div>जयपुर। राजस्थान में जल प्रबंधन सुधार और भूजल संरक्षण के लिए वर्ष 2006 में शुरू किया गया यूरोपीय संघ (यूरोपियन यूनियन) समर्थित स्टेट पार्टनरशिप प्रोग्राम (एसपीपी)द्ध एक बार फिर चर्चा में है। करीब 450 करोड़ की परियोजना को जल क्षेत्र में सुधार की बड़ी पहल बताया गया, लेकिन उपलब्ध आंकड़े से भारी निवेश के बावजूद इसके वास्तविक प्रभाव और वर्तमान स्थिति पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यूरोपीय संघ ने इस परियोजना के लिए 80 मिलियन यूरो (करीब 450 करोड़ रुपए) का अनुदान स्वीकृत किया था। अब तक 61.675 मिलियन यूरो 418.83 करोड़ रुपए) जारी किए जा चुके हैं, जबकि 31 मई 2026 तक कुल खर्च 415.66 करोड़ रुपए दर्ज किया गया है।</div>
<div> </div>
<div><strong>11 जिलों की 3,182 ग्राम पंचायतें शामिल</strong></div>
<div> </div>
<div>परियोजना का उद्देश्य राज्य में जल क्षेत्र सुधार, भूजल संरक्षण, सुरक्षित पेयजल उपलब्धता और पंचायतों की भागीदारी को मजबूत करना था। इसके तहत 11 जिलों की 82 पंचायत समितियों और 3182 ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया। हालांकि सबसे बड़ा सवाल यह है कि परियोजना पर 2023-24, 2024-25 और 2025-26 में एक भी रुपया खर्च नहीं हुआ। वित्तीय प्रगति रिपोर्ट में लगातार तीन वर्षों तक व्यय शून्य दर्शाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परियोजना के तहत तैयार किए गए जल प्रबंधन मॉडल इतने सफल रहे, तो फिर उनके विस्तार और रखरखाव पर खर्च क्यों नहीं हुआ? वहीं सरकारी दस्तावेज परियोजना की उपलब्धियों में जल नीति-2010, एक्विफर मैपिंग, जल जागरूकता अभियान, नदी बेसिन प्राधिकरण गठन और 14 अंतर.बेसिन जलांतरण योजनाओं की तैयारी को प्रमुख उपलब्धि बताते हैं।</div>
<div> </div>
<div><strong>उठते सवाल...</strong></div>
<div> </div>
<div>
<ul>
<li>450 करोड़ की परियोजना के बावजूद जल संकट वाले क्षेत्रों में स्थिति कितनी बदली, इसका स्पष्ट मूल्यांकन सार्वजनिक नहीं।</li>
<li>2023-24 से लगातार तीन वर्षों तक व्यय शून्य रहना परियोजना की सक्रियता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।</li>
<li>कई उपलब्धियां अध्ययन, कार्यशाला और योजनाओं तक सीमित दिखाई देती हैं, जबकि जमीनी प्रभाव के आंकड़े सीमित हैं।</li>
<li>14 जलांतरण योजनाएं बनीं, लेकिन कितनी लागू हुईं, इसका उल्लेख नहीं है।</li>
<li>परियोजना समाप्ति के बाद बनाए गए ढांचे और संस्थाओं की वर्तमान स्थिति स्पष्ट नहीं है।</li>
</ul>
</div>
<div><strong>परियोजना की प्रमुख उपलब्धियां</strong></div>
<div> </div>
<div>
<ul>
<li>राज्य जल नीति-2010 लागू</li>
<li>3182 ग्राम पंचायतों में जल प्रबंधन योजनाएं तैयार</li>
<li>79,550 लोगों को प्रशिक्षण</li>
<li>भूजल एक्विफर मैपिंग और गुगल आधारित डेटा तैयार</li>
<li>जल चेतना यात्रा, जल मेला और जनजागरूकता अभियान</li>
<li>14 अंतर-बेसिन जलांतरण योजनाओं की तैयारी</li>
<li>जल कानूनों के सामंजस्य की पहल</li>
</ul>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 11:36:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खुलासा: अनुमान से 1.4 करोड़ ज्यादा हो सकते हैं भारतीय, दिल्ली की आबादी 2.3 करोड़</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली के शुरुआती जनगणना आंकड़ों के अनुसार, देश की आबादी सरकारी अनुमान (143.6 करोड़) को पार कर 145 करोड़ तक पहुंच सकती है। दिल्ली में 2011 से अब तक 37.5% जनसंख्या वृद्धि और परिवारों की संख्या 55 लाख होना तीव्र शहरीकरण, प्रवासन और न्यूक्लियर परिवारों के बढ़ते चलन को दर्शाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-revelation-on-countrys-population-indians-may-be-14-crore/article-157456"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/population.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। देश की आबादी सरकारी अनुमानों से अधिक हो सकती है। 2027 की जनगणना के पहले चरण में सामने आए दिल्ली के शुरुआती आंकड़ों ने इस संभावना को बल दिया है। आंकड़ों के अनुसार दिल्ली की जनसंख्या 2.308 करोड़ दर्ज की गई है, जबकि सरकारी अनुमान 2.294 करोड़ का था। यानी वास्तविक आबादी अनुमान से लगभग 0.6 प्रतिशत अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही प्रवृत्ति राष्ट्रीय स्तर पर भी लागू होती है, तो भारत की कुल आबादी सरकारी अनुमान 143.6 करोड़ से बढ़कर करीब 145 करोड़ तक पहुंच सकती है। इससे देश की जनसंख्या में लगभग 1.4 करोड़ लोगों का अतिरिक्त इजाफा सामने आ सकता है।</p>
<p>दिल्ली में वर्ष 2011 से 2027 के बीच आबादी में 37.5 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं घरों की संख्या 34 लाख से बढ़कर 55 लाख हो गई है, जो शहरीकरण, प्रवासन और न्यूक्लियर परिवारों की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाता है। विश्लेषण में यह भी सामने आया है कि पिछले चार दशकों में सरकारी जनसंख्या अनुमान वास्तविक आंकड़ों से लगातार कम रहे हैं। बड़े राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्य प्रदेश में भी आबादी सरकारी अनुमानों से अधिक होने की संभावना जताई जा रही है। जनसांख्यिकीय विशेषज्ञों के अनुसार अंतिम जनगणना परिणाम देश की वास्तविक आबादी और सामाजिक संरचना की अधिक स्पष्ट तस्वीर पेश करेंगे।</p>
<p><strong><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दिल्ली</span> </strong><strong><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> </strong><strong><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आबादी</span> 2.3 </strong><strong><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">करोड़</span> </strong></p>
<p><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जनगणना</span> 2027 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">तहत</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दिल्ली</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> 14 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जून</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">संपन्न</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हुए</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पहले</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">चरण</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दौरान</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">राजधानी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आबादी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लगभग</span> 2.3 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">करोड़</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">तक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पहुंचने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">का</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रारंभिक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अनुमान</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सामने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आया</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">इस</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">चरण</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गणनाकर्मियों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">शहर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">भर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बड़े</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पैमाने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मकानों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">परिवारों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">का</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सर्वेक्षण</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">किया। </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अधिकारियों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अनुसार</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पहले</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">चरण</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दिल्ली</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सभी</span> 13 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जिलों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कुल</span> 75,98,982 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मकानों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> 54,98,560 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">परिवारों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">का</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">विवरण</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दर्ज</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">किया</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गया।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हालांकि</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उन्होंने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">स्पष्ट</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">किया</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कि</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ये</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आंकड़े</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रारंभिक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हैं</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">इन्हें</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अंतिम</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नहीं</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">माना</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सकता। </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अधिकारियों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">का</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कहना</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कि</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">फरवरी</span> 2027 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">होने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वाली</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मुख्य</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जनगणना</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बाद</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ही</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दिल्ली</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वास्तविक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जनसंख्या</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अन्य</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जनसांख्यिकीय</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आंकड़ों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आधिकारिक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">तस्वीर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सामने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आएगी।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">फिलहाल</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पहले</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">चरण</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आंकड़े</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">राजधानी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बढ़ती</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आबादी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आवासीय</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">विस्तार</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">का</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">संकेत</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दे</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">रहे</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:39:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बड़े खुलासे के संकेत! फर्जी हस्ताक्षर मामले में अभिषेक बनर्जी पर सीआईडी का शिकंजा, तीसरी बार तलब करने की तैयारी</title>
                                    <description><![CDATA[तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी से सीआईडी ने आठ घंटे तक कड़ी पूछताछ की। कुणाल घोष के सामने बैठाकर किए गए सवाल-जवाब में बनर्जी के बयानों में कई बड़े विरोधाभास मिले हैं। जांच से असंतुष्ट सीआईडी अब उन्हें तीसरा समन भेजने की तैयारी कर रही है, जबकि आज उन्हें ईडी के सामने भी पेश होना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/indications-of-big-revelations-preparation-to-summon-cid-for-the/article-157012"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/ईडी.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर मामले की जांच कर रही अपराध जांच विभाग (सीआईडी) पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी को तीसरी बार तलब कर सकती है। रविवार को हुई पूछताछ के दौरान जांच एजेंसी को उनके बयानों में कई विरोधाभास मिले हैं। अभिषेक बनर्जी इस मामले में दूसरे दौर की पूछताछ के लिए रविवार को सीआईडी के सामने पेश हुए थे, जहां करीब आठ घंटे तक उनसे पूछताछ चली। उनसे अकेले में भी पूछताछ की गयी और फिर तृणमूल नेता कुणाल घोष के सामने बैठाकर भी घंटों सवाल-जवाब किये गये। जांच एजेंसी के सूत्रों का आरोप है कि जब घोष की मौजूदगी में पूछताछ की गयी, तो अभिषेक बनर्जी कई अहम बातों पर अपने बयान से पलट गये। बताया जा रहा है कि आमने-सामने बैठाने से पहले सीआईडी अधिकारियों ने दोनों नेताओं से अलग-अलग पूछताछ की थी।</p>
<p>सीआईडी सूत्रों के अनुसार, जांचकर्ताओं को अभिषेक बनर्जी के अकेले के बयानों और दोनों नेताओं की मौजूदगी में दिये गये जवाबों में काफी अंतर मिला। जब बनर्जी से बयानों में इस बदलाव की वजह पूछी गयी, तो वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाये। माना जा रहा है कि रविवार की पूछताछ से जांच एजेंसी संतुष्ट नहीं है। ऐसे में जांच को आगे बढ़ाने के लिए तृणमूल सांसद को एक और समन भेजने पर विचार किया जा रहा है। उनकी पेशी की तारीख पर अभी हालांकि फैसला नहीं हुआ है।</p>
<p>कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले में अभिषेक बनर्जी पिछले कई हफ्तों से सीआईडी की रडार पर हैं। इससे पहले उन्होंने अलग-अलग वजहें बताकर कई समन टाल दिये थे, जिसके बाद अदालत के दखल देने पर ही वह जांचकर्ताओं के सामने पेश हुए। सूत्रों का कहना है कि पहले दौर की पूछताछ में उन्होंने कई सवालों के जवाब में सिर्फ यही कहा था कि उन्हें इस मामले की कोई जानकारी नहीं है। यह नया घटनाक्रम ऐसे समय में आया है, जब अभिषेक बनर्जी पहले से ही कई मामलों में घिरे हुए हैं। कथित भर्ती घोटाले के सिलसिले में सोमवार को उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सामने पेश होना है। मंगलवार को, डीजे विवाद से जुड़ी अपनी कथित टिप्पणी के एक अलग मामले में भी उनके सीआईडी के सामने पेश होने की संभावना है।</p>
<p>इन मामलों के अलावा भी अभिषेक बनर्जी कई अन्य जांच और शिकायतों का सामना कर रहे हैं। कोयला तस्करी के मामले में भी उनका नाम लंबे समय से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा, अम्फान राहत कोष के वितरण में गड़बड़ी को लेकर शनिवार को उनके खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की गयी थी, जबकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ विवादास्पद टिप्पणी करने के मामले में सिलीगुड़ी में भी एक शिकायत दर्ज है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 13:26:50 +0530</pubDate>
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                <title>उर्वरकों की कालाबाजारी और किसानों के आर्थिक शोषण की उच्चस्तरीय जांच हो : दिग्विजय सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मध्य प्रदेश में खाद और उर्वरकों की एमआरपी से अधिक दामों पर बिक्री पर गहरी चिंता जताई है। सीएम मोहन यादव को लिखे पत्र में उन्होंने पुराने स्टॉक को नई बढ़ी कीमतों पर बेचने का आरोप लगाते हुए किसानों से हुई अतिरिक्त वसूली वापस कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/there-should-be-a-high-level-investigation-into-black-marketing/article-156654"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-07/digvijay_singh_1.jpg" alt=""></a><br /><p>भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने प्रदेश में डीएपी, एसएसपी तथा विभिन्न कॉम्प्लेक्स उर्वरकों के वितरण और बिक्री में कथित अनियमितताओं पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से उच्चस्तरीय जांच कराने और किसानों के हितों की रक्षा के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि प्रदेश के विभिन्न जिलों से किसानों और किसान संगठनों की ओर से शिकायतें प्राप्त हो रही हैं कि सहकारी समितियों, विपणन संस्थाओं तथा निजी विक्रेताओं के माध्यम से उर्वरकों की बिक्री मुद्रित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से अधिक दरों पर की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुराने स्टॉक में उपलब्ध उर्वरकों को भी पीओएस और ई-टोकन प्रणाली में प्रदर्शित नई तथा बढ़ी हुई दरों पर बेचा जा रहा है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि 20:20:0:13 उर्वरक की 50 किलोग्राम की एक बोरी, जिसकी पूर्व निर्धारित कीमत लगभग 1450 रुपये थी, उसे कई स्थानों पर 2100 रुपये तक में बेचे जाने की शिकायतें मिली हैं। इससे किसानों पर प्रति बोरी लगभग 650 रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। इसी प्रकार एसएसपी तथा अन्य उर्वरकों के संबंध में भी अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं। सिंह ने कहा कि यह मामला केवल मूल्य वृद्धि का नहीं, बल्कि किसानों के उपभोक्ता अधिकारों, पारदर्शिता और कानून के संभावित उल्लंघन से भी जुड़ा है। उन्होंने उल्लेख किया कि उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के अनुसार किसी भी उर्वरक की बिक्री उसके मुद्रित अधिकतम खुदरा मूल्य से अधिक दर पर नहीं की जा सकती।</p>
<p>उन्होंने मांग की कि प्रदेशभर में उर्वरक वितरण एवं विक्रय व्यवस्था की विशेष और स्वतंत्र जांच कराई जाए, पुराने स्टॉक पर नई दरों की वसूली संबंधी शिकायतों की जिला स्तर पर जांच हो, किसानों से अधिक वसूली गई राशि वापस कराई जाए तथा दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों और विक्रेताओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। दिग्विजय सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश एक कृषि प्रधान राज्य है और किसान प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। ऐसे समय में जब किसान बढ़ती लागत, प्राकृतिक आपदाओं और बाजार की अनिश्चितताओं का सामना कर रहे हैं, तब उर्वरकों की कीमतों और वितरण में किसी भी प्रकार की अनियमितता अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने राज्य सरकार से किसानों के हितों की रक्षा के लिए त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई करने का आग्रह किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 17:38:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>झारखंड में सियासी हलचल: परिमल नथवाणी के नामांकन पर कांग्रेस का धरना, दस्तावेजों में नाम की विसंगति पर उठाए सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[राज्यसभा चुनाव में भाजपा समर्थित उम्मीदवार परिमल नथवाणी के दस्तावेजों में नाम की तकनीकी विसंगति सामने आई है। इसके विरोध में कांग्रेस मंत्रियों और विधायकों ने विधानसभा के बाहर एकजुट होकर धरना दिया। निर्वाचन पदाधिकारी ने नामांकन पर अंतिम निर्णय फिलहाल लंबित रखा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-protest-on-nomination-of-parimal-nathwani-raised-questions-on/article-156563"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/paraimal.png" alt=""></a><br /><p>रांची। झारखंड विधानसभा परिसर के बाहर बुधवार को कांग्रेस के मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ नेताओं ने एकजुट होकर धरना-प्रदर्शन किया। कांग्रेस ने भाजपा समर्थित निर्दलीय राज्यसभा उम्मीदवार परिमल नथवाणी के नामांकन को रद्द करने की मांग करते हुए चुनावी प्रक्रिया में नियमों के सख्ती से पालन की बात कही। राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी के दौरान परिमल नथवाणी के दस्तावेजों में नाम को लेकर तकनीकी विसंगति सामने आई। कुछ आधिकारिक दस्तावेजों में उनका नाम "परिमल नथवाणी" दर्ज है, जबकि अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों में "नथवाणी परिमल" लिखा हुआ पाया गया। इस अंतर को गंभीर मानते हुए निर्वाची पदाधिकारी ने आपत्ति दर्ज की और उनके नामांकन पर अंतिम निर्णय फिलहाल लंबित रख दिया।</p>
<p>इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेताओं ने विधानसभा के बाहर धरना देते हुए आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जा सकती। पार्टी नेताओं का कहना है कि जब तक इस विसंगति का संतोषजनक समाधान नहीं हो जाता अथवा नामांकन रद्द नहीं किया जाता, उनका विरोध जारी रहेगा। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि राज्यसभा जैसे महत्वपूर्ण चुनाव में सभी उम्मीदवारों के लिए समान नियम लागू होने चाहिए और किसी भी प्रकार की तकनीकी या कानूनी त्रुटि को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।</p>
<p>उधर, निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार परिमल नथवाणी अथवा उनके प्रतिनिधियों को इस तकनीकी आपत्ति के संबंध में स्पष्टीकरण और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाएगा। सभी पक्षों की दलीलों और उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा के बाद ही उनके नामांकन की वैधता पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। फिलहाल, इस घटनाक्रम ने झारखंड की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है और राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सभी की नजरें अब निर्वाचन पदाधिकारी के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 16:34:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अवैध रूप से संचालित नर्सिंग होम में महिला की मौत, स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया डॉक्टर तथा संचालक को नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[बिलासपुर के रतनपुर में बिना वैध पंजीयन चल रहे एक निजी नर्सिंग होम में ऑपरेशन के दौरान एनेस्थीसिया देने से महिला की मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग की जांच में गंभीर अनियमितताएं मिलने पर अस्पताल संचालक और डॉक्टर को नोटिस जारी किया गया है। पुलिस ने परिजनों की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/woman-dies-in-illegally-operated-nursing-home-health-department-issues/article-156453"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/hospital.png" alt=""></a><br /><p>बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के रतनपुर क्षेत्र में एक निजी नर्सिंग होम में उपचार के दौरान महिला की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग की जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। जांच में संबंधित नर्सिंग होम के बिना वैध पंजीयन संचालित होने का खुलासा हुआ है। इसके बाद विभाग ने अस्पताल संचालक और संबंधित चिकित्सक को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मंगलवार को मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार रतनपुर थाना क्षेत्र के पोड़ी नवागांव निवासी 50 वर्षीय कुमारी बाई साहू स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के कारण उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रतनपुर पहुंची थीं। परिजनों का आरोप है कि जांच के दौरान चिकित्सक ने उन्हें गर्भाशय संबंधी समस्या बताकर शल्य चिकित्सा कराने की सलाह दी और बाद में एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया।</p>
<p>मृतका के परिजनों का कहना है कि ऑपरेशन की तैयारी के दौरान निर्धारित शुल्क भी जमा कराया गया था। आरोप है कि शल्य प्रक्रिया से पूर्व एनेस्थीसिया दिये जाने के बाद महिला की तबीयत अचानक बिगड़ गई। स्थिति गंभीर होने पर अस्पताल प्रबंधन ने उसे अन्य अस्पताल रेफर करने का निर्णय लिया। परिजनों का आरोप है कि महिला को आवश्यक चिकित्सकीय औपचारिकताएं पूरी किए बिना निजी वाहन से बिलासपुर स्थित सिम्स अस्पताल भेजा गया, जहां पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई।</p>
<p>घटना के बाद मृतका के पुत्र मुकेश साहू ने रतनपुर थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए संबंधित चिकित्सक एवं नर्सिंग होम प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक जांच में नर्सिंग होम के बिना पंजीयन संचालित होने तथा उपचार प्रक्रिया में लापरवाही के संकेत मिलने पर अस्पताल संचालक और संबंधित डॉक्टर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 17:41:12 +0530</pubDate>
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                <title>मालवीय नगर अग्निकांड में गरीब शेफ पर इल्जाम डालकर बड़े लोगों को बचा रही सरकार, अन्याय बर्दाश्त नहीं करेंगे : आप</title>
                                    <description><![CDATA[आम आदमी पार्टी ने मालवीय नगर अग्निकांड में होटल शेफ केशव नेगी की गिरफ्तारी पर सवाल उठाए हैं। 'आप' नेता संजीव झा ने आरोप लगाया कि प्रशासन सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले रसूखदारों को बचाने के लिए उत्तराखंड के एक गरीब प्रवासी को बलि का बकरा बना रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/in-the-malviya-nagar-fire-incident-the-government-is-saving/article-156359"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/sanjiv-jha.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी(आप) ने मालवीय नगर अग्निकांड मामले में होटल के शेफ की गिरफ्तारी पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि सरकार इस मामले में गरीब शेफ पर सारा इल्जाम डालकर बड़े लोगों को बचा रही है। आप के वरिष्ठ नेता एवं बुराड़ी के विधायक संजीव झा ने कहा कि भाजपा सरकार इस अग्निकांड मामले में गरीब शेफ पर सारा इल्जाम डालकर बड़े लोगों को बचा रही है। ऐसा बताया जा रहा, जैसे शेफ ही अवैध होटल चला रहा था और उसके कारण ही एमसीडी या पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि अग्निकांड के चंद दिन बाद ही भाजपा सरकार की गहन जांच और जिम्मेदार बड़े लोगों पर सख्त कार्रवाई की पोल खुल गई है। अगर सरकार निष्पक्ष है तो सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वालों की जिम्मेदारी तय कर कड़ी कार्रवाई करे। सिर्फ प्रवासी होने के कारण सेफ को फंसाया जा रहा है। आम आदमी पार्टी उसके साथ अन्याय नहीं होने देगी।</p>
<p>उन्होंने बताया कि जांच के नाम पर कार्रवाई किस पर हो रही है, यह देखने वाली बात है। केशव नेगी, जो उत्तराखंड के पहाड़ों से आते हैं और उस होटल में शेफ हैं, सारा इल्जाम उन पर डाल दिया गया है। ऐसा बताया जा रहा है जैसे सारी जिम्मेदारी उन्हीं की है, उन्हीं के कारण यह अवैध इमारत बनी और अवैध होटल चल रहा था। मानो उन्हीं की गलती के कारण पुलिस और एमसीडी ने कोई कार्रवाई नहीं की। यह सब एक भद्दा मजाक चल रहा है।</p>
<p>आप नेता ने कहा , "जांच के नाम पर फिर से एक गरीब को फंसाने की कोशिश की जा रही है क्योंकि वह उत्तराखंड से आए एक प्रवासी हैं। सरकार को लगता है कि उनका साथ देने वाला कोई नहीं है, लेकिन हम यह अन्याय बर्दाश्त नहीं करेंगे और ऐसा होने नहीं देंगे। उम्मीद है कि रेखा गुप्ता की सरकार और उनका पूरा प्रशासन केशव नेगी के साथ न्याय करेगा और उनके साथ अन्याय नहीं होने देगा। अगर उनके साथ अन्याय हुआ तो न केवल दिल्ली, बल्कि उत्तराखंड के लोग भी उनके साथ खड़े होंगे और न्याय की मांग करेंगे।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 18:03:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस पर विशेष: राजस्थान में खाद्य सुरक्षा का दायरा बढ़ा, लेकिन दाल-तेल और सब्जियों की महंगाई से परिवारों का रसोई-बजट अब भी संकट में</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत राजस्थान में 28.14 लाख नए लाभार्थी जुड़े हैं। प्राथमिकता परिवारों को 5 किलो और अंत्योदय को 35 किलो गेहूं मिल रहा है। हालांकि, अनिवार्य ई-केवाईसी और तकनीकी खामियों के कारण राशन रुकने का संकट है, जिसे सुधारने और गेहूं के साथ दाल-तेल देने की मांग उठ रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/special-on-world-food-security-day-scope-of-food-security/article-156236"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/food.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत प्राथमिकता श्रेणी के प्रत्येक सदस्य को प्रतिमाह पांच किलोग्राम खाद्यान्न मिलता है। इस हिसाब से पांच सदस्यों के परिवार को 25 किलोग्राम गेहूं उपलब्ध होता है। अंत्योदय परिवार को प्रतिमाह 35 किलोग्राम खाद्यान्न का अधिकार है। यह राहत महत्वपूर्ण है, लेकिन केवल गेहूं को संपूर्ण खाद्य सुरक्षा नहीं माना जा सकता। दिहाड़ी मजदूर, छोटे किसान, घरेलू कामगार, विधवा, वृद्ध, दिव्यांग और असंगठित क्षेत्र के श्रमिक की आय अनिश्चित है, जबकि भोजन से जुड़े बाकी खर्च लगातार उसकी जेब पर दबाव डालते हैं।</p>
<p><strong>नाम जुड़ना राहत, कटना पूरे परिवार का संकट</strong></p>
<p>राज्य सरकार के अनुसार, 26 जनवरी 2025 से एनएफएसए पोर्टल दोबारा शुरू होने के बाद 28 लाख से अधिक नए नाम योजना में जोड़े गए। यह बड़ी राहत है, लेकिन अब ई-केवाईसी अनिवार्य होने से बुजुर्गों, मजदूरी के लिए बाहर गए प्रवासियों, आदिवासी परिवारों और खराब इंटरनेट वाले ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वालों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।</p>
<p><strong>तकनीकी खामी अपात्रता का प्रमाण नहीं</strong></p>
<p>अंगुलियों के निशान नहीं मिलने, आधार और जनाधार में नाम अलग होने, मोबाइल नंबर बंद होने या सर्वर खराब होने जैसी तकनीकी समस्याओं को अपात्रता का प्रमाण नहीं बनाया जाना चाहिए। किसी परिवार का राशन रोकने या नाम हटाने से पहले भौतिक सत्यापन, लिखित सूचना और अपील का पर्याप्त अवसर मिलना आवश्यक है।</p>
<p>खाद्य विभाग को प्रत्येक उचित मूल्य दुकान का मासिक स्टॉक, वितरण और शिकायतों का विवरण सार्वजनिक करना चाहिए। घटतौली, दुकान बंद मिलने या राशन से वंचित होने की शिकायत का निस्तारण अधिकतम 72 घंटे में हो। वृद्ध और दिव्यांग लाभार्थियों के लिए घर तक राशन पहुंचाने की प्रभावी व्यवस्था भी जरूरी है। खाद्य सुरक्षा का अर्थ गोदाम से अनाज निकालना नहीं, बल्कि नागरिक की थाली में सम्मानजनक और पौष्टिक भोजन सुनिश्चित करना है। सरकार को गेहूं के साथ दाल, खाद्य तेल और नमक जैसी आवश्यक वस्तुओं की सहायता पर भी विचार करना चाहिए। व्यवस्था की सफलता लाभार्थियों की संख्या से नहीं, इस तथ्य से मापी जाएगी कि राजस्थान में कोई परिवार भूखा सोने को मजबूर न हो।</p>
<p>राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में प्राथमिकता परिवारों के लिए प्रति व्यक्ति पांच किलोग्राम और अंत्योदय परिवारों के लिए प्रति परिवार 35 किलोग्राम मासिक खाद्यान्न का प्रावधान है। राजस्थान सरकार के अनुसार, पोर्टल दोबारा शुरू होने के बाद 28,14,942 नए नाम जोड़े गए और नए लाभार्थियों के लिए तीन महीने में ई-केवाईसी कराना अनिवार्य किया गया। फरवरी 2026 में ई-केवाईसी और सूची से नाम हटने का मुद्दा राजस्थान विधानसभा में भी उठा था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 12:05:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान के वेटलैंड्स पर हाईकोर्ट सख्त, 46 हजार से अधिक आर्द्रभूमियों की हालत पर लिया स्वत: संज्ञान </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट ने वेटलैंड्स को 'प्रकृति की किडनी' बताते हुए उनके संरक्षण के लिए ऐतिहासिक स्वत: संज्ञान लिया है। कोर्ट ने प्रदूषण और अतिक्रमण पर चिंता जताते हुए सरकार से प्रदेश के 46,748 वेटलैंड्स की जीआईएस मैपिंग और जिला-वार वर्तमान स्थिति की पूरी रिपोर्ट तलब की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/high-court-strict-on-rajasthans-wetlands-took-suo-motu-cognizance/article-156234"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/court-22.png" alt=""></a><br /><p>जोधपुर। राजस्थान की आर्द्रभूमियों (वेटलैंड्स) के संरक्षण को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक पहल करते हुए स्वत: संज्ञान लिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि वेटलैंड्स केवल जलभराव क्षेत्र नहीं हैं, बल्कि वे पर्यावरण, जैव विविधता, भूजल संरक्षण और जलवायु संतुलन की आधारशिला हैं। इनकी उपेक्षा आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकती है। हाईकोर्ट की अवकाश खंडपीठ में न्यायाधीश डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह भाटी और न्यायाधीश रेखा बोराणा ने आदेश में कहा , वेटलैंड्स को प्रकृति की किडनी कहा जाता है क्योंकि वे भूजल पुनर्भरण, बाढ़ नियंत्रण, जल शुद्धिकरण, कार्बन अवशोषण और जैव विविधता संरक्षण जैसी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाते हैं। </p>
<p>हाईकोर्ट ने कहा कि प्रदेश में लगभग 46,748 वेटलैंड यूनिट्स मौजूद हैं, लेकिन इनमें से बहुत कम को ही वेटलैंड (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत अधिसूचित किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार अनेक वेटलैंड्स प्रदूषण, अतिक्रमण, सीवरेज के पानी, ठोस कचरे के निस्तारण और सिकुड़ते जल क्षेत्र जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। हाईकोर्ट ने माना कि यह समस्या केवल कुछ जलाशयों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश में वेटलैंड्स की पहचान, अधिसूचना, संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन से जुड़ा व्यापक मुद्दा है। कोर्ट ने कहा कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो इससे जैव विविधता, प्रवासी पक्षियों के आवास, भूजल स्तर और जल सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।  हाईकोर्ट ने सरकार से जिला-वार वेटलैंड्स की सूची, उनकी वर्तमान स्थिति, अधिसूचित और गैर-अधिसूचित वेटलैंड्स का विवरण, जीआईएस मैपिंग, सीमांकन, अतिक्रमण, प्रदूषण, सीवरेज प्रवाह और संरक्षण योजनाओं की जानकारी मांगी है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 09:54:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सैलजा का केंद्र पर बड़ा हमला: जीडीपी के 60 प्रतिशत से अधिक कर्ज पर पहुंची सरकार, अर्थव्यवस्था और युवाओं के भविष्य पर ध्यान केंद्रित करने की मांग </title>
                                    <description><![CDATA[सिरसा सांसद कुमारी सैलजा ने केंद्र पर जीडीपी से तेज कर्ज बढ़ने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि 2026 तक देश का कर्ज $214$ लाख करोड़ रुपये पहुंचने का अनुमान है, जिससे कर्ज-जीडीपी अनुपात 60% हो गया है। उन्होंने प्रचार के बजाय रोजगार और ग्रामीण विकास पर ध्यान देने की मांग की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/seljas-big-attack-on-the-center-the-government-reached-debt/article-156101"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/selja11.webp" alt=""></a><br /><p>चंडीगढ़। हरियाणा में सिरसा लोकसभा सीट से सांसद कुमारी सैलजा ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि देश को विकास के नाम पर कर्ज के बोझ तले दबाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि सरकार जीडीपी वृद्धि का प्रचार कर रही है, जबकि सरकारी कर्ज उससे कहीं अधिक तेजी से बढ़ रहा है। कुमारी सैलजा ने कहा कि वर्ष 2008 में भारत की जीडीपी लगभग एक लाख 20 हजार करोड़ डॉलर थी, जो 2026 तक बढ़कर चार लाख 10 हजार करोड़ डॉलर होने का अनुमान है। केंद्र सरकार का कर्ज 27 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 214 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। उनके अनुसार, 2014 में कर्ज-से-जीडीपी अनुपात करीब 45 प्रतिशत था, जो अब लगभग 60 प्रतिशत तक पहुंच गया है।</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार भारी कर्ज लेकर विकास का भ्रम पैदा कर रही है तथा विज्ञापनों, प्रचार अभियानों और दिखावटी परियोजनाओं पर खर्च बढ़ा रही है जबकि रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों की उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी से युवा सबसे अधिक प्रभावित हैं। लाखों सरकारी पद खाली हैं, नये रोजगार के अवसर सीमित हैं और छोटे-मध्यम उद्योग आर्थिक दबाव झेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कर्ज के विरोध में नहीं है, बशर्ते उसका उपयोग रोजगार सृजन, उत्पादक परिसंपत्तियों के निर्माण और आर्थिक क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाये। उन्होंने केंद्र सरकार से देश की आर्थिक स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करने तथा रोजगार एवं उत्पादन आधारित आर्थिक सुधारों पर ध्यान केंद्रित करने की मांग की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 18:52:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खान सर होंगे गिरफ्तार? हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट में केस दर्ज; वायरल फायरिंग वीडियो के बाद पुलिस जांच तेज, गिरफ्तारी को लेकर बढ़ी हलचल</title>
                                    <description><![CDATA[पटना के चर्चित कोचिंग विवाद में प्रसिद्ध शिक्षक खान सर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। कदमकुआं थाने में हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के तहत यह कार्रवाई हुई है। परिसर में हुई फायरिंग के बाद खान सर के दो सुरक्षाकर्मियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि पुलिस मामले की जांच में जुटी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/khan-sir-will-be-arrested-case-registered-under-attempt-to/article-156089"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/fir.png" alt=""></a><br /><p>पटना। पटना में चर्चित कोचिंग विवाद अब कानूनी लड़ाई में बदलता नजर आ रहा है। पुलिस ने शिक्षक फैसल खान उर्फ खान सर के खिलाफ गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। जानकारी के अनुसार कदमकुआं थाने में हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। यह कार्रवाई हाल ही में उनकी कोचिंग संस्था में हुए हंगामे और वायरल वीडियो की जांच के बाद की गई।</p>
<p>पुलिस का कहना है कि घटना से जुड़े वीडियो और अन्य सबूतों की पड़ताल की जा रही है। इससे पहले खान सर के दो सुरक्षाकर्मियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। बताया जा रहा है कि कोचिंग परिसर में हुई फायरिंग को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। खान सर ने इसे आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई बताया था। दूसरी ओर विरोधी पक्ष ने उन पर फायरिंग करवाने का आरोप लगाया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले में सभी पक्षों से पूछताछ कर आगे की कार्रवाई में जुटी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 15:02:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खड़गे का केंद्र पर बड़ा हमला: महिलाओं और बच्चों के पोषण के मुद्दों पर विफल रहने का लगाया आरोप, बोले- प्रत्येक पांच में से एक बच्चा तीव्र कुपोषण का शिकार</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एनएफएचएस-6 के आंकड़ों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में 84% बच्चों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल रहा और 57% महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। खरगे ने सरकार पर अपनी नाकामियां छुपाने के लिए आंकड़ों को दबाने का आरोप लगाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/kharges-big-attack-on-the-center-accused-of-failure-on/article-155938"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/kharge.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) के आंकड़ों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार पर महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य तथा पोषण के मुद्दों पर विफल रहने का आरोप लगाया। खरगे ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि देश में प्रत्येक पांच में से एक बच्चा तीव्र कुपोषण का शिकार है। एक-तिहाई बच्चे कम वजन के हैं, छह से 23 माह आयु वर्ग के 84 प्रतिशत से अधिक बच्चों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल रहा है तथा 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की 57 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। उनका आरोप है कि केंद्र सरकार अपनी नाकामियों को उजागर करने वाले महत्वपूर्ण आंकड़ों को जानबूझकर छिपा रही है। उन्होंने कहा कि एनएफएचएस-6 के आंकड़ों ने केंद्र सरकार की अक्षमता को बेनकाब कर दिया है।</p>
<p>खरगे ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार चुनिंदा आंकड़ों को दबाने, कमजोर वर्गों की उपेक्षा करने, प्रचार के माध्यम से सकारात्मक छवि पेश करने, वास्तविक स्थिति से ध्यान भटकाने की रणनीति अपनाते हुए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि देश के बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य एवं पोषण जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार को जवाबदेह होना चाहिए और सभी आंकड़े सार्वजनिक कर वास्तविक स्थिति सामने रखनी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 14:07:17 +0530</pubDate>
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