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                <title>treasury - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>treasury RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>क्यूबा पर अमेरिका का बड़ा एक्शन, राष्ट्रपति मिगुएल डियाज़-कैनेल सहित कई अधिकारियों और संस्थाओं पर लगाए कड़े प्रतिबंध</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका ने क्यूबा पर दबाव बढ़ाते हुए राष्ट्रपति मिगुएल डियाज़-कैनेल, चार अधिकारियों और पांच संस्थाओं को प्रतिबंधित व्यक्तियों की सूची में शामिल किया है। अमेरिकी वित्त विभाग द्वारा की गई इस कार्रवाई से दोनों देशों के बीच राजनयिक और आर्थिक तनाव और अधिक बढ़ने की आशंका है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/americas-big-action-on-cuba-strict-sanctions-imposed-on-many/article-156070"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/us-cuba-1.webp" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। अमेरिका ने क्यूबा पर दबाव बढ़ाने के लिए राष्ट्रपति मिगुएल डियाज़-कैनेल और कई अन्य लोगों एवं संस्थाओं पर प्रतिबंध लगा दिये हैं। अमेरिकी वित्त विभाग की वेबसाइट पर गुरुवार को जारी जानकारी के अनुसार विभाग ने डियाज़-कैनेल, चार अन्य लोगों और पांच संस्थाओं को विशेष रूप से नामित नागरिकों और प्रतिबंधित व्यक्तियों की सूची में शामिल किया है। डियाज़-कैनेल ने 2018 में राउल कास्त्रो की जगह क्यूबा के राष्ट्रपति का पद संभाला था।</p>
<p>मई में अमेरिकी सरकार ने क्यूबा के 11 अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाए थे और 1996 में क्यूबा से निर्वासित लोगों से जुड़ी एक घटना को लेकर राउल कास्त्रो पर आरोप लगाए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 14:10:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>1207 प्राइवेट स्कूलों का अटका 22.50 करोड़ का भुगतान</title>
                                    <description><![CDATA[पिछले तीन सत्रों के पैंडिंग बिलों का प्राइवेट स्कूलों को भुगतान नहीं हो सका। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/payment-of-rs-22-50-crore-stuck-for-1207-private-schools/article-74366"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/1207-private-schoolo-ka-atka-22.50-crore-ka-bhugtan...kota-news-03-04-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शिक्षा का अधिकार अधिनियम-आरटीई के दायरे में आने वाले कोटा जिले के 1 हजार से अधिक निजी स्कूलों का 22 करोड़ रुपए से ज्यादा का भुगतान अटक गया है। जिससे प्रावइेट स्कूलों के बैंक खातों में पैसा ट्रांसफर नहीं हो सका। जबकि, शिक्षा विभाग ने वित्तीय वर्ष मार्च समाप्ती से पहले ही सभी पेंडिंग बिल बनाकर ट्रेजरी भिजवा दिए थे। जहां से बिल पास भी हो गए लेकिन वित्त विभाग जयपुर से ईसीएस नहीं होने के कारण स्कूलों का भुगतान अटक गया। </p>
<p><strong>क्या है मामला</strong><br />कोटा जिले में डीओ सैकंडरी व डीओ एलीमेंट्री को मिलाकर कुल 1207 प्राइवेट स्कूल आरटीई के दायरे में आते हैं। जिनका सत्र 2021-22 की प्रथम व द्वितीय, 2022-23 की प्रथम व द्वितीय तथा 2023-24 की प्रथम किस्त को मिलाकर कुल तीन सत्र की 22.50 करोड़ रुपए की आरटीई पुनर्भरण राशि का बिल शिक्षा विभाग ने गत 26 मार्च को वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले ही बनाकर ट्रैजरी पहुंचा दिए थे। ट्रेजरी से भी बिल पास होकर वित्त विभाग जयपुर पहुंच गए। जहां से ईसीएस नहीं होने से बिल अटक गए। जिसकी वजह से संबंधित निजी स्कूलों के बैंक खातों में पुनर्भरण की राशि नहीं आ सकी। जबकि, वर्ष 2022-23 का वित्तीय वर्ष भी पूरा हो चुका है। लेकिन, पिछले तीन सत्रों के पैंडिंग बिलों का प्राइवेट स्कूलों को भुगतान नहीं हो सका। </p>
<p><strong>क्या होता है ईसीएस</strong><br />शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार ईसीएस का मतलब इलेक्ट्रॉनिक क्लियरिंग सर्विस है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से संस्थाएं अपने बैंक को नियमित रूप से इलेक्ट्रोनिक लेनदेन की अनुमति देने के लिए अधिकृत करती है। इसका उपयोग आमतौर पर बिलों, ऋणों, बीमा प्रमियमों और अन्य आवर्ती खर्चों के स्वचलित भुगतान के लिए किया जाता है। </p>
<p><strong>डीओ सैकंड्री के 14 व एलीमेंट्री के 8 करोड़ अटके</strong><br />डीओ सैकंडी में 548 निजी स्कूल आरटीई के दायरे में आते हैं। जिनका पिछले सत्र 2021 से 2024 तक के साढ़े 14 करोड़ रुपए का आरटीई पुनर्भरण बिल बना है, जिसका भुगतान वित्त विभाग से ईसीएस न होने के कारण अटक गए। जबकि, डीओ एलीमेंट्री में 659 निजी स्कूल आरटीई में आते हैं, जिनकी पुनर्भरण राशि 8 करोड़ रुपए है। इनके बिलों का भुगतान भी ईसीएस नहीं होने के कारण स्कूलों को नहीं हो पाया। </p>
<p><strong>उधार मांगकर चला रहे स्कूल</strong><br />सरकार द्वारा समय पर पिछले तीन सत्र के आरटीई की पुनर्भरण राशि का भुगतान नहीं किए जाने से निजी स्कूलों पर आर्थिक संकट आ गया है। शिक्षा विभाग ने वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले ही सभी पैंडिंग बिल बनाकर कोषालय में भिजवा दिए लेकिन, वित्त विभाग से ईसीएस नहीं होने से हमारा भुगतान अटक गया। जिसकी वजह से शैक्षणिक व अशैक्षणिक कर्मचारियों, का मानदेय, बिजली का बिल, बिल्डिंग किराया व स्टेशनरी सहित स्कूल संचालन की कई व्यवस्थाएं चरमरा गई। हालात यह हैं, पिछले तीन सत्र से अधिकतर स्कूलों को आरटीई पुनर्भरण का एक पैसा नहीं मिला। जिसकी वजह से संचालकों को उधार मांगकर स्कूल चलाना पड़ रहा है। पहले ही सरकार प्री-प्राइमरी कक्षाओं में पढ़ रहे आरटीई चयनित विद्यार्थियों की फीस नहीं दे रही। लेकिन, जो कक्षा एक से आठवीं तक के बच्चों का पैसा तो समय पर दे। सरकार की लेटलतीफी के कारण प्राइवेट स्कूल आर्थिक संकट से गुजर रहा है। <br /><strong>- जमना शंकर प्रजापति, सदस्य, निजी स्कूल संघर्ष समिति</strong></p>
<p><strong>स्कूल आ रहे परेशानी में </strong><br />सत्र 2021 से 2024 तक के आरटीई पुर्नभरण की राशि अब तक निजी स्कूलों को नहीं मिली। जिससे स्कूल का संचालन करना मुश्किल हो गया है। जबकि, हर साल आरटीई अधिनियम के तहत 25 प्रतिशत सीटों पर एडमिशन दे रहे हैं। नर्सरी से कक्षा आठवीं तक आरटीई में विद्यार्थियों का एडमिशन होता है। हर स्कूल के पास 150 से 200 बच्चे होते हैं। जिनकी पुर्नभरण फीस समय पर नहीं मिलने से कई तरह की परेशानियों से जूझ रहे हैं। यदि, सरकार प्री-प्राइमरी कक्षाओं में आरटीई में चयनित विद्यार्थियों की फीस का पुनर्भरण नहीं करती है तो वर्तमान सत्र में इन कक्षाओं में विद्यार्थियों को आरटीई के तहत एडमिशन नहीं दिया जाएगा। <br /><strong>- सत्यप्रकाश शर्मा, सदस्य, निजी स्कूल संघर्ष समिति</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />सरकार द्वारा आरटीई में चयनित बच्चों को किताबें खरीदने के लिए स्कूलों को 202 रुपए दिए जाते हैं। यह पैसा पुनर्भरण राशि के साथ स्कूल को प्रथम किस्त में दिया जाता है। वर्तमान सिलेबस के अनुसार 202 रुपए में एक या दो ही किताब आ सकती है। जबकि, सरकारी विद्यालयों की किताबों का बाजार मूल्य 700 से 800 रुपए के बीच होता है। ऐसे में आरटीई के विद्यार्थियों की किताबों का आर्थिक भार अभिभावकों पर पड़ता है। ऐसे में कई बार अभिभावक व स्कूल संचालक के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। छात्रहित में सरकार को पुनर्भरण राशि सहित किताबों का शुल्क भी बढ़ाकर देना चाहिए। इसके अलावा पिछले तीन सत्रों की बकाया पुनर्भरण राशि जल्द से जल्द स्कूल संचालकों को उपलब्ध करवानी चाहिए। <br /><strong>- कपिल विजय, सदस्य, निजी स्कूल संघर्ष समिति</strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं अधिकारी</strong><br />शिक्षा विभाग ने जारी बजट वित्तीय वर्ष 2022-23 के आरटीई के बिल 2021-22 व 2022-23 की प्रथम व द्वितीय और 2023-24 की प्रथम किस्त के भुगतान स्वीकृति आदेश गत  26 मार्च को सभी बिल बनाकर ट्रेजरी भेजवा दिए थे। वहां से बिल पास भी हो गए लेकिन जयपुर वित्त विभाग से ईसीएस नहीं होने के कारण निजी विद्यालयों के अकाउंट में पैसा ट्रांसफर नहीं हो पाए। <br /><strong>- केके शर्मा, जिला शिक्षाधिकारी, माध्यमिक शिक्षा विभाग</strong></p>
<p>सभी विद्यालयों की पुनर्भरण राशि के बिल समय पर ट्रैजरी भिजवा दिए गए थे। जहां से बिल पास भी हो गए। लेकिन, ईसीएस नहीं होने के कारण निजी विद्यालयों के खाते में पैसा ट्रांसफर नहीं हो सका। जल्द ही होने की उम्मीद है। <br /><strong>- यतीश विजय, जिला शिक्षाधिकारी, प्रारंभिक शिक्षा विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Apr 2024 17:14:01 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>बैन के बावजूद रूस का भरा खजाना</title>
                                    <description><![CDATA[रूस-यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के 100 दिन से अधिक हो चुके हैं, लेकिन ये लड़ाई कब थमेगी किसी को नहीं पता। लेकिन इस युद्ध के बीच रूस ने ऑयल बेचकर तगड़ी कमाई है। खबरों के मुताबिक यूक्रेन से चल रही लड़ाई के बीच 100 दिनों में रूस ने जीवाश्म ईंधन के निर्यात से 98 बिलियन डॉलर कमाए हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/russia-s---treasury---despite-the----ban/article-12119"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/pu.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मास्को।</strong> रूस-यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के 100 दिन से अधिक हो चुके हैं, लेकिन ये लड़ाई कब थमेगी किसी को नहीं पता। लेकिन इस युद्ध के बीच रूस ने ऑयल बेचकर तगड़ी कमाई है। खबरों के मुताबिक यूक्रेन से चल रही लड़ाई के बीच 100 दिनों में रूस ने जीवाश्म ईंधन के निर्यात से 98 बिलियन डॉलर कमाए हैं। यूरोपिय संघ ने सबसे अधिक रूस से जीवाश्म ईंधन का आयात किया है। पश्चिमी देशों ने यूक्रेन के खिलाफ युद्ध छेड़ने के चलते रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए थे। इसके बावजूद रूस ने ईंधन के निर्यात से बेहतरीन कमाई की है।<br /><br /><strong>यूरोपीय संघ सबसे बड़ा खरीदार</strong></p>
<p>फिनलैंड स्थित सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर की रिपोर्ट के अनुसार इस महीने की शुरूआत में यूरोपीय संघ अधिक मात्रा में रूस से तेल के निर्यात को रोकने पर सहमत हुआ था। हालांकि, यूरोपिय यूनियन रूस से ईंधन पर सबसे अधिक निर्भर है, लेकिन इस ब्लॉक ने 2022 में रूस से गैस के निर्यात को दो-तिहाई कम करने का लक्ष्य रखा है। रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के पहले 100 दिनों के दौरान यूरोपीय संघ ने रूस के जीवाश्म ईंधन निर्यात का 61 प्रतिशत हिस्सा खरीदा है। इसकी कीमत लगभग 57 बिलियन यूरो (60 बिलियन डॉलर) है।</p>
<p><strong>यूरोप ने क्रूड आॅयल भी सबसे अधिक खरीदा</strong></p>
<p>यूक्रेन से युद्ध छिड़ने के बाद रूस ने क्रूड आयल पर छूट देने का ऐलान किया था। इसका भी सबसे अधिक फायदा यूरोपीय देशों को ही मिला है। रूस ने कहा था कि वो क्रूड ऑयल की बिक्री ग्लोबल बेंचमार्क के मुकाबले 30 फीसदी के कम भाव से करेगा। यूरोपीय संघ अपने इंपोर्ट तेल का 27 फीसदी हिस्सा रूस से प्राप्त करता है। युद्ध और प्रतिबंधों के बावजूद यूरोप रूस के क्रू़ड ऑयल का सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है।<br /><br /><strong>चीन ने भी किया आयात</strong></p>
<p>यूरोपीय यूनियन के बाद रूस से चीन ने सबसे अधिक जीवाश्म ईंधन खरीदा है। चीन ने चीन 12.6 बिलियन यूरो, जर्मनी ने 12.1 बिलियन यूरो और इटली ने 7.8 बिलियन यूरो की कीमत के ईंधन खरीदे हैं। रूस जीवाश्म ईंधन से पहले 46 बिलियन यूरो की कमाई करता था। इसके बाद गैस पाइपलाइन, तेल उत्पाद, एलएनजी और कोयले के आयात से कमाई करता था। हालांकि, मई के महीने में रूस से निर्यात में गिरावट आई है। कई कंपनियों ने रूस से निर्यात बंद कर दिया, लेकिन चीन, भारत, यूएई और फ्रांस जैसे कुछ देशों ने रूस से अपनी खरीदारी बढ़ा दी. सीआरईए के अनुसार, रूस का औसत निर्यात प्राइस पिछले वर्ष की तुलना में इस साल लगभग 60 प्रतिशत अधिक था। यूरोपीय संघ रूस के खिलाफ सख्त प्रतिबंधों पर विचार कर रहा है। फ्रांस ने दुनिया में एलएनजी का सबसे बड़ा खरीदार बनने के लिए अपने आयात में वृद्धि की है। <br /><br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Jun 2022 14:56:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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