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                <title>courses - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>कॉलेज सरकारी, कोर्सेज प्राइवेट, ढाई गुना फीस चुका रही बेटियां</title>
                                    <description><![CDATA[रेगुलर स्कीम के मुकाबले सेल्फ फाइनेंस स्कीम में ढाई गुना ज्यादा फीस।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/government-college--private-mode-courses--young-women-paying-2-5-times-the-fees/article-159711"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(2)26.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा संभाग का सबसे बड़ा गर्ल्स कॉलेज जेडीबी आर्ट्स में एमए होम साइंस व जीपीईएम पिछले 8 साल से सेल्फ फाइनेंस स्कीम में संचालित हो रहा है। जिससे बालिकाओं की शिक्षा महंगी हो गई। नतीजन, 16 हजार की डिग्री के लिए उन्हें 50 हजार रुपए फीस चुकानी पड़ रही है। सरकारी कॉलेज होने के बावजूद महंगी फीस, बालिकाओं के उच्च शिक्षा में बढ़ते कदम पर बेड़ियां बन गई।</p>
<p>दरअसल, जेडीबी आर्ट्स कॉलेज में गारमेंट प्रोडेक्शन एंड एक्सपोर्ट मैनेजमेंट (जीपीईएम) व होम साइंस बीए तक तो सरकारी स्कीम के तहत संचालित होता है। जिसमें कोर्स फीस पर ईयर 3 हजार रुपए लगती है। जबकि, एमए में यही कोर्स सेल्फ फाइनेंस स्कीम में चलने से 20 हजार रुपए पर ईयर हो गई। महंगी फीस के कारण बालिकाएं एडमिशन नहीं ले पाती। मजबूरन, उन्हें कोर्स छोड़ना पड़ता है। जबकि, इंडस्ट्रीज में डिमांड होने के बावजूद छात्राएं इन पाठ्यक्रमों में एडमिशन लेने से वंचित रह जाती हैं।</p>
<p><strong>जीपीईएम : 40 हजार कोर्स व 10 हजार एग्जाम फीस</strong><br />राजकीय कला कन्या महाविद्यालय (जेडीबी आर्ट्स) में सेल्फ फाइनेंस स्कीम के तहत एमए जीपीईएम कोर्स की फीस सालाना 20 हजार रुपए है। साल में दो बार सेमेस्टर एग्जाम होते हैं। पर-सेमेस्टर एग्जाम फीस ढाई हजार रुपए है, ऐसे में एक साल के 25 हजार रुपए होते हैं और दो साल का पीजी कोर्स पूरा करने के लिए छात्राओं को 50 हजार रुपए चुकाने पड़ते हैं। जबकि, यही कोर्स रेगुलर स्कीम में हो जाए तो 16 हजार रुपए में ही डिग्री पूरी हो सकती है। ग्रामीण परिवेश से आने वाली छात्राओं के लिए इतनी महंगी फीस दे पाना मुश्किल रहता है। ऐसे में कई छात्राएं रुचि होने के बावजूद इस कोर्स में दाखिला नहीं ले पाती।</p>
<p><strong>रेगुलर स्कीम में 3 हजार रुपए फीस</strong><br />जीपीईएम विभागाध्यक्ष प्रो. बिंदू चतुर्वेदी बताती हैं, यदि गारमेंट प्रोडेक्शन एंड एक्सपोर्ट मैनेजमेंट (जीपीईएम) कोर्स सरकारी स्कीम में संचालित किया जाए तो इसकी फीस 20 हजार की बजाय 3 हजार रुपए सालाना हो जाएगी। वहीं, सेमेस्टर एग्जाम फीस 5 हजार रुपए जोड़कर 8 हजार रुपए में एक साल पूरा हो जाएगा। इस तरह दो साल की यह डिग्री 50 हजार की जगह 16 हजार रुपए में पूरी हो जाएगी। ऐसे में ज्यादा से ज्यादा छात्राएं दाखिला ले पाएंगी और उन पर आर्थिक भार भी नहीं पड़ेगा। टैक्सटाइल डिजाइनिंग के क्षेत्र में प्रतिभाएं उभर सकेंगी।</p>
<p><strong>होम साइंस : 16 हजार की जगह लग रही 30 हजार फीस</strong><br />होम साइंस की विभागाध्यक्ष दीपा स्वामी बताती हैं, एमए होम साइंस भी सेल्फ फाइनेंस स्कीम में संचालित हो रहा है। इसकी पर-ईयर फीस 10 हजार रुपए तथा 5 हजार रुपए सेमेस्टर एग्जाम फीस है। ऐसे में एक साल में 15 हजार रुपए खर्च होते हैं। इस तरह दो साल की डिग्री पूरी करने के लिए 30 हजार रुपए लगते हैं। जबकि, यही कोर्स यूजी में सरकारी स्कीम में संचालित होने से इसकी फीस परईयर 3 हजार रुपए ही है।</p>
<p>सेल्फ फाइनेंस स्कीम में चलने से कोर्स की फीस बहुत महंगी होती है। ऊपर से सेमेस्टर के कारण फीस और बढ़ गई। इसके अलावा प्रेक्टिकल, असाइमेंट व इंडस्ट्री विजिट सहित अन्य खर्चों को मिलाकर दो साल की डिग्री करने में 50 हजार से ज्यादा रुपए खर्च हो जाते हैं। सरकार को जीपीएम व होम साइंस को रेगुलर स्कीम में करना चाहिए ताकि छात्राओं को राहत मिल सके।<br /><strong>-कौशल्या कुमारी, निर्मला, छात्रा</strong></p>
<p>यह संभाग का सबसे बड़ा गर्ल्स कॉलेज है। न्यू एजुकेशन पॉलिसी के तहत यह दोनों सब्जेक्ट स्किल बेस्ड है। इसलिए इन पाठ्यक्रमों के नियमितिकरण के लिए प्रयास कर रहे हैं। आगे हम विद्या संबल के लिए लिखेंगे। हमारी ओर से लगातार सकारात्मक प्रयास जारी है।<br /><strong>-प्रो. सीमा चौहान, प्राचार्य जेडीबी आर्ट्स कॉलेज कोटा</strong></p>
<p>छात्राओं की मांग आने पर सेल्फ फाइनेंस स्कीम में चल रहे कोर्सेज को रेगुलर स्कीम में बदलवाने के प्रयास करेंगे।<br /><strong>- नवीन मित्तल, क्षेत्रीय सहायक निदेशक आयुक्तालय कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Jul 2026 15:30:21 +0530</pubDate>
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                <title>16 हजार की डिग्री के लिए बालिकाएं चुका रही 50 हजार, रेगुलर स्कीम में 3 हजार रुपए फीस</title>
                                    <description><![CDATA[रेगुलर स्कीम के मुकाबले सेल्फ फाइनेंस स्कीम में ढाई गुना ज्यादा लग रही फीस ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/girls-are-paying-50-thousand-for-a-degree-of-16-thousand/article-115954"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtroer-(3)22.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा संभाग का सबसे बड़ा गर्ल्स कॉलेज जेडीबी आर्ट्स में एमए होम साइंस व जीपीईएम पिछले 7 साल से सेल्फ फाइनेंस स्कीम में संचालित हो रहे हैं। जिससे बालिकाओं की शिक्षा महंगी हो गई। नतीजन, 16 हजार की डिग्री के लिए उन्हें 50 हजार रुपए फीस चुकानी पड़ रही है। सरकारी कॉलेज होने के बावजूद महंगी फीस, बालिकाओं के शिक्षा में बढ़ते कदम पर बेड़ियां बन गई। दरअसल, जेडीबी आर्ट्स कॉलेज में गारमेंट प्रोडेक्शन एंड एक्सपोर्ट मैनेजमेंट (जीपीईएम) व होम साइंस बीए तक तो सरकारी स्कीम के तहत संचालित होता है। जिसमें कोर्स फीस परईयर 3 हजार रुपए लगती है। जबकि, एमए में यही कोर्स सेल्फ फाइनेंस स्कीम में चलने से 20 हजार रुपए परईयर हो गई।  महंगी फीस के कारण बालिकाओं को बारां-झालावाड़ की ओर रुख करना पड़ रहा है। वहीं, इंडस्ट्रीज में डिमांड होने के बावजूद छात्राएं इन पाठ्यक्रमों में एडमिशन नहीं ले पा रही। </p>
<p><strong>जीपीईएम :</strong> 40 हजार कोर्स व 10 हजार एग्जाम फीस: राजकीय कला कन्या महाविद्यालय में सेल्फ फाइनेंस स्कीम के तहत एमए जीपीईएम कोर्स की फीस पर-ईयर 20 हजार रुपए है। साल में दो बार सेमेस्टर एग्जाम होते हैं। पर-सेमेस्टर एग्जाम फीस ढाई हजार रुपए है, ऐसे में एक साल के 25 हजार रुपए होते हैं और दो साल का पीजी कोर्स पूरा करने के लिए छात्राओं को 50 हजार रुपए चुकाने पड़ते हैं। ग्रामीण परिवेश से आने वाली छात्राओं के लिए इतनी महंगी फीस दे पाना चुनौतिपूर्ण रहता है। ऐसे में कई छात्राएं रुचि होने के बावजूद इस कोर्स में दाखिला नहीं ले पाती। </p>
<p><strong>रेगुलर स्कीम में 3 हजार रुपए फीस</strong><br />जीपीईएम विभागाध्यक्ष प्रो. बिंदू चतुर्वेदी बताती हैं, यदि गारमेंट प्रोडेक्शन एंड एक्सपोर्ट मैनेजमेंट (जीपीईएम) कोर्स सरकारी स्कीम में संचालित किया जाए तो इसकी फीस 20 हजार की बजाय 3 हजार रुपए सालाना हो जाएगी। वहीं, सेमेस्टर एग्जाम फीस 5 हजार रुपए जोड़कर 8 हजार रुपए में एक साल पूरा हो जाएगा। इस तरह दो साल की यह डिग्री 50 हजार की जगह 16 हजार रुपए में पूरी हो जाएगी। ऐसे में ज्यादा से ज्यादा छात्राएं दाखिला ले पाएंगी और उन पर आर्थिक भार भी नहीं पड़ेगा। टैक्सटाइल डिजाइनिंग के क्षेत्र में प्रतिभाएं उभर सकेंगी। </p>
<p><strong>होम साइंस : 15 हजार की जगह लग रहे 30 हजार</strong><br />होम साइंस की विभागाध्यक्ष दीपा स्वामी बताती हैं, एमए होम साइंस भी सेल्फ फाइनेंस स्कीम में संचालित हो रहा है। इसकी पर-ईयर फीस 10 हजार रुपए तथा 5 हजार रुपए सेमेस्टर एग्जाम फीस है। ऐसे में एक साल में 15 हजार रुपए खर्च होते हैं। इस तरह दो साल की डिग्री पूरी करने के लिए 30 हजार लगते हैं। जबकि, यही कोर्स यूजी में सरकारी मोड पर संचालित होने से इसकी फीस परईयर 3 हजार रुपए ही है। </p>
<p><strong>साइड इफेक्ट: हर साल खाली रहती सीटें</strong><br />कॉलेज से मिली जानकारी के अनुसार, प्रदेश के अन्य जिलों से भी लड़कियां जेडीबी आर्ट्स कॉलेज में एमए जीपीईएम में दाखिले के लिए आवेदन करती हैं। इस विषय में कुल 20 सीटें हैं, जिसके मुकाबले एडमिशन फॉर्म तो दो गुने आते हैं लेकिन फीस ज्यादा होने के चलते 10 से ज्यादा सीटें खाली रह जाती है। कॉलेज में यूजी में 1999 में यह कोर्स शुरू हुआ था। उस समय राज्य में केवल अलवर व बीकानेर में ही चलता था। डिमांड बढ़ने पर जेडीबी में पीजी में वर्ष 2018 में सेल्फ फाइनेंस स्कीम में इस कोर्स को शुरू किया था। जीपीईएम में गत वर्ष प्रिवियस में 15 तथा फाइनल में 11 सीटें खाली रह गई। होम साइंस की 40 सीटों में से आधी सीटें खाली रही थी।  </p>
<p><strong>बारां-झालावाड़ जाने को मजबूर छात्राएं</strong><br />छात्राओं ने बताया कि हाड़ौती में केवल राजकीय महाविद्यालय बारां व झालावाड़ में ही होम साइंस रेगुलर स्कीम में संचालित हो रहा है। जिसमें सरकारी फीस होने के कारण बड़ी संख्या में छात्राएं कोटा से बारां-झालावाड़ जाने को मजबूर होती है। जबकि, कोटा में इसे सरकारी स्कीम में चलाने के लिए आयुक्तालय से लेकर विधायक मंत्री तक को ज्ञापन दे चुके हैं, इसके बावजूद समाधान नहीं हो रहा। </p>
<p><strong>क्या कहती हैं छात्राएं</strong><br /><strong>फीस बहुत महंगी, रेगुलर मोड पर चलाए सरकार</strong><br />मैने जीपीईएम में एमए किया है। सेल्फ फाइनेंस स्कीम में चलने से कोर्स की फीस बहुत महंगा है। ऊपर से सेमेस्टर के कारण फीस और बढ़ गई। इसके अलावा प्रेक्टिकल, असाइमेंट व इंडस्ट्री विजिट सहित अन्य खर्चों को मिलाकर दो साल की डिग्री करने में 50 हजार से ज्यादा रुपए खर्च हो गए। इतनी महंगी शिक्षा से कई छात्राएं रुचि होते हुए भी यह कोर्स नहीं कर पातीं। सरकार को छात्राओं के हित में इस कोर्स को रेगुलर स्कीम में संचालित करना चाहिए। <br /><strong>-निकिता सचवानी, रिसर्चर जेडीबी आर्ट्स कॉलेज</strong></p>
<p>एक साथ 20 हजार रुपए सालाना फीस जमा करवाना लड़कियों के लिए आसान नहीं होता। क्योंकि, अधिकतर छात्राएं ग्रामीण परिवेश से आती हैं। जीपीईएम को रेगुलर स्कीम में चलाने के लिए शिक्षकों व आयुक्तालय से डिमांड की लेकिन कुछ नहीं हुआ। फॉर्म तो सीटों से दो गुना आते हैं लेकिन महंगी फीस के कारण छात्राएं एडमिशन नहीं ले पाती। कुछ समय पहले छात्राओं  ने होमसाइंस व जीपीईएम को रेगुलर स्कीम में करने की मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया था। <br /><strong>-अनुश्री सक्सेना, छात्रा जेडीबी कॉलेज</strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं प्रोफेसर </strong><br /><strong>परिधान इंडस्ट्री में रोजगार के अवसर </strong><br />जीपीएम, गारमेंट प्रोडेक्शन एंड एम्पोर्ट मैनेजमेंट कोर्स होता है। इसमें कपड़ा निर्माण से लेकर डिजाइनिंग व एक्सपोर्ट-एम्पोर्ट तक की जानकारी दी जाती है। इस कोर्स में एडमिशन लेकर छात्राएं, फैशन डिजाइनिंग, परिधान उद्योग, गारमेंट व्यवसाय, बुटीक, गारमेंट इंडस्ट्री में कॅरियर बना सकती हैं। वहीं, नेट व सेट कर आरपीएससी के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में भी नौकरी पा सकती हैं। छात्राओं को जयपुर, बीकानेर, भीलवाड़ा में इंडस्ट्री विजट करवाई जाती है। वहीं,  कैथून में कोटा डोरिया के उत्पादन-निर्माण दिखाया जाता है। इसमें रोजगार के असीम अवसर उपलब्ध हैं।<br /><strong>-प्रो. बिंदू चतुर्वेदी, विभागाध्यक्ष जीपीईएम, जेडीबी आर्ट्स कॅलेज</strong></p>
<p>कोटा जिले में यह एकमात्र ऐसा कॉलेज है, जहां होम साइंस में एमए कराई जाती है। लेकिन, सेल्फ फाइनेंस स्कीम में होने से फीस महंगी हो गई। जिसकी वजह से छात्राओं को बारां-झालावाड़ जाना पड़ता है। होम साइंस में प्रसार शिक्षा, इंटियर डिजाइनिंग, टेक्सटाइल, फू्रड एंड न्यूट्रीशियन तथा फर्नीचर डिजाइनिंग सीखाई जाती है। इसे रेगुलर मोड पर संचालित करवाने के लगातार प्रयास कर रहे हैं। आयुक्तालय को भी पत्र भेज चुके हैं। उम्मीद है इस सत्र से हो जाए। <br /><strong>-प्रो. दीपा स्वामी, विभागाध्यक्ष होम साइंस, जेडीबी आर्ट्स कॉलेज</strong></p>
<p> यह कॉलेज संभाग का सबसे बड़ा गर्ल्स कॉलेज है। पिछले 7 साल से जीपीईएम व होम साइंस कोर्स सेल्फ फाइनेंस स्कीम में चल रहा है। फीस बहुत महंगी है, जिसके कारण छात्राओं पर आर्थिक बोझ पड़ता है। इन कोर्सेज को सरकार द्वारा संचालित करवाने के लिए हर साल आयुक्तालय को पत्र भेजा जाता है।  हाल ही में लोकसभा स्पीकर के विशेषाधिकारी को भी इससे अवगत कराया है। उन्होंने समाधान का भरोसा दिलाया है। अब तक उप मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री, स्थानीय विधायकों को भी पत्रों के माध्यम से छात्राओं के हित में इन कोर्सेज को रेगुलर स्कीम में करवाने की मांग की थी। इसके बावजूद कुछ नहीं हुआ। हालांकि, हमारे स्तर पर प्रयास जारी है।  <br /><strong> -प्रो. सीमा चौहान, प्राचार्य जेडीबी आर्ट्स कॉलेज कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 May 2025 15:08:04 +0530</pubDate>
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                <title>इस बार भी भंवर में फंसेगी छात्रों की नैया!</title>
                                    <description><![CDATA[राजसेस कॉलेजों में शिक्षण कार्य विद्या संबल शिक्षकों द्वारा करवाया जाता है। जिनकी चयन प्रक्रिया सेमेस्टर वाइज होती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/this-time-too-the-boat-of-students-will-be-stuck-in-the-whirlpool/article-98289"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/555435.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कॉलेज एजुकेशन सोसायटी के अधीन संचालित सरकारी कॉलेजों में शिक्षण व्यवस्था  फिर से बेपटरी होने की कगार पर है। हर साल की तरह इस साल भी परीक्षा से पहले ही विद्या संबल पर लगे शिक्षकों को हटाने की कवायद शुरू हो गई है। जबकि, हाड़ौती के अधिकतर राजसेस कॉलेजों  में अब तक 40 से 50% कोर्स ही पूरे हो सके हैं। जबकि, सत्र 2024-25 में खुले नए कॉलेजों में तो 60 प्रतिशत कोर्स अधूरे हैं। जबकि, यूजी प्रथम सेमेस्टर के एग्जाम आगामी जनवरी माह में होने हैं। इसके बावजूद  अतिथि शिक्षकों को हटाने की तैयारी की जा रही है। इस संबंध में आयुक्तालय ने नोडल महाविद्याय व प्राचार्यों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। दरअसल, राजसेस कॉलेजों में शिक्षण कार्य विद्या संबल शिक्षकों द्वारा करवाया जाता है। जिनकी चयन प्रक्रिया सेमेस्टर वाइज होती है। लेकिन, शिक्षा सत्र देरी से शुरू होने पर इनकी नियुक्ति भी देरी से की गई। नियमानुसार, 24 सप्ताह या 28 फरवरी इनमें से जो भी पहले हो, तब तक ही यह अध्यापन करवा सकते हैं। लेकिन, यह अवधि सेमेस्टर एग्जाम से पहले होनी चाहिए। जबकि, कई कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति ही सितम्बर-अक्टूबर माह में हुई है। ऐसे में इनके 24 सप्ताह पूरे होने से पहले ही इन शिक्षकों  की छुट्टी कर दी जाएगी। इस अटपटे नियम से शिक्षक व छात्रों में रोष है। </p>
<p><strong>50% तक कोर्स अधूरे </strong><br />हाड़ौती के कई राजसेस कॉलेजों में यूजी प्रथम व थर्ड सेमेस्टर में 50 प्रतिशत कोर्स अधूरे हैं। वहीं, जनवरी माह में प्रथम सेमेस्टर के एग्जाम प्रस्तावित हैं। ऐसे में परीक्षा से पहले ही शिक्षकों को हटा दिए जाने से विद्यार्थियों का कोर्स पूरा नहीं हो सकेगा। ऐसे में उनका परीक्षा परिणाम प्रभावित होने की आशंका रहेगी। </p>
<p><strong>नए कॉलेजों में अभी 60 दिन ही लगी क्लासें</strong><br />राजकीय महाविद्यालय दीगोद में कार्यरत विद्या संबल शिक्षिका शर्मिला ने बताया कि यहां 1 अक्टूबर से फैकल्टी लगाई गई है। 80 दिनों में से एक महीना दीपावली व सरकारी अवकाश में गुजर गया। इस दरमियान मात्र 60 दिन ही कक्षाएं लगी हैं। ऐसे में यूजी प्रथम सेमेस्टर का 50 प्रतिशत ही कोर्स पूरा हो सका है। जनवरी में एग्जाम होने हैं। वहीं, परीक्षा से पहले हमारे 24 सप्ताह पूरे नहीं हो पाएंगे। इसके बावजूद विद्या संबल शिक्षकों को हटा दिया जाएगा।   जिससे विद्यार्थियों को अध्यापन में काफी परेशानी होगी। सरकार को कोर्स पूरा होने तक रखना चाहिए। </p>
<p><strong>नियुक्ति में लेटलतीफी, अब हटाने में उतावलापन</strong><br />बारां जिले के राजकीय सीसवाली कॉलेज में कार्यरत   सहायक आचार्य डॉ. रवि कुमार कहते हैं, सरकारी कॉलेजों में शिक्षा सत्र शुरू होने के बाद में भी शिक्षण के लिए अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति में लेटलतीफी बरती गई। नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद में शिक्षण कार्य शुरू हो पाया। एनईपी में सेमेस्टर सिस्टम होने के कारण सेमेस्टर कक्षाओं में अब तक कोर्स पूरा नहीं हो पाया है। मगर दूसरी तरफ आयुक्तालय की ओर से 21 जून 2024 को जारी आदेश की पालना करने के निर्देश जारी हो गए हैं। इन आदेशों में साफ तौर पर अतिथि शिक्षकों को 24 सप्ताह या फिर 28 फरवरी 2025 तक हटाने के लिए निर्देश दिए गए हैं। जितनी फुर्ती हटाने में दिखाई जाती है उतनी ही   फुर्ति शिक्षकों की नियुक्ति में भी दिखाई जानी चाहिए।</p>
<p><strong>शिक्षक-विद्यार्थी दोनों तनाव में </strong><br />कोटा संभाग में राजसेस के अधीन संचालित सरकारी कॉलेजों में कार्यरत शिक्षक बेरोजगार होने से तनाव में हैं, वहीं पढ़ाई प्रभावित होने से विद्यार्थियों को परिणाम बिगड़ने का डर सता रहा है। जबकि, जनवरी माह में यूजी प्रथम सेमेस्टर एग्जाम होने हैं और परीक्षा से पहले शिक्षकों को हटाया जाना है लेकिन अधिकतर महाविद्यालयों में 40 से 50 प्रतिशत कोर्स अधूरे हैं। ऐसे में इन दिनों गुरु-शिष्य दोनों ही तनाव से गुजर रहे हैं। </p>
<p><strong>विद्यार्थी बोले- परिणाम बिगड़ने का सता रहा डर</strong><br />अभी तक यूजी प्रथम वर्ष का करीब 40 प्रतिशत ही कोर्स पूरा हुआ है, जनवरी में पेपर है। एग्जाम से पहले विद्या संबल पर लगे शिक्षकों को हटा देंगे तो शेष सिलेबस को कौन पूरा करवाएगा। छात्रों के सामने असमंजस की स्थिति बनी हुई है। वहीं, द्वितीय वर्ष के सैकंड सेमेस्टर का तो अभी 25 प्रतिशत ही सिलेबस पूरा हुआ है। प्रेक्टिकल व असाइनमेंट भी अधूरे हैं। सरकार एक तरह तो क्वालिटी एजुकेशन देने का दवा करती है और दूसरी तरफ शिक्षकों को हटाने पर तुली है। शिक्षकों के बिना पास होने के भी लाले पड़ जाएंगे।<br /><strong>-भूपेश कुमार, तस्यम नेग, छात्र, सीसवाली व तालेड़ा कॉलेज</strong></p>
<p>सरकार के जो निर्देश मिले हैं, उसकी पालना की जाएगी। हमारे यहां शिक्षक सितम्बर माह में लगे थे। जिनके 24 सप्ताह जनवरी के अंत में पूरे हो जाएंगे। परीक्षा से पूर्व कोर्स पूरे होने की संभावना है। <br /><strong>-प्रो. राजेश कुमार प्राचार्य रामपुरा कन्या महाविद्यालय कोटाक्या कहते हैं शिक्षक</strong></p>
<p>विद्या संबल शिक्षकों की चयन प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता है। हर सेमेस्टर में चयन प्रक्रिया के तहत शिक्षकों से फॉर्म भरवाए जाते हैं। वर्ष 2024 में ही 3 बार फॉर्म भर चुके हैं। जिसकी वजह से बार-बार कॉलेज बदल रहा है। <br /><strong>-डॉ. शर्मिला कुमारी, सहायक आचार्य विद्या संबल</strong></p>
<p>राजसेस महाविद्यालय में लगे शिक्षकों को बीच-बीच में न हटाया जाए। चयन प्रक्रिया साल में एक बार होनी चाहिए और जो विद्या संबल शिक्षक जिन कॉलेज में लगे हैं, उन्हें  उसी कॉलेज में लगाया जाए। बार-बार कॉलेज बदलने से शिक्षक व विद्यार्थियों को परेशानी होती है। ऐसे में बार-बार चयन प्रक्रिया पर रोक लगाई जानी चाहिए।<br /><strong>-डॉ. हनिफ खान, सहायक आचार्य विद्या संबंल</strong></p>
<p>संभाग में 19 पुराने व 4 नए राजसेस कॉलेज हैं। इनमें से अधिकतर कॉलेजों में सिलेबस अधूरा है। ऐसे में परीक्षा से पहले शिक्षकों को हटाने से विद्यार्थियों की न केवल पढ़ाई प्रभावित होगी बल्कि उनका परिणाम भी बिगड़ने का खतरा रहेगा।  सरकार भले ही विद्या संबंल शिक्षकों को नियमित न करे लेकिन उन्हें एक साल तक के लिए तो कॉलेज में लगाए और बार-बार चयन प्रक्रिया बंद की जानी चाहिए। <br /><strong>-डॉ. रवि कुमार, सहायक आचार्य सीसीवाली कॉलेज बारां</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Dec 2024 14:11:48 +0530</pubDate>
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                <title>आयुक्तालय ने कॉलेजों को दी राहत, अब 5 स्टूडेंट्स पर भी एसएफएस के तहत कॉलेज चला सकेंगे पीजी कोर्स  </title>
                                    <description><![CDATA[कोटा में जेडीबी साइंस व जेडीबी आर्ट्स में एसएफएस में चल रहे कोर्स ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/commissionerate-gives-relief-to-colleges--now-colleges-can-run-pg-courses-under-sfs-even-with-5-students/article-97600"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer-(2)21.png" alt=""></a><br /><p> कोटा। कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय ने प्रदेश के सरकारी कॉलेजों को बड़ी राहत देते हुए एसएफएस(सेल्फ फाइनेन्स स्कीम) में संचालित कोर्सेज चलाने के लिए 20 विद्यार्थियों के होने की बाध्यता समाप्त कर दी है। अब 5 विद्यार्थी होने पर भी कॉलेज प्रशासन सेल्फ फाइनेंस स्कीम के तहत चलने वाले पीजी कोर्स चला सकते हैं। आयुक्तालय ने यह कदम पीजी कोर्सेज में दाखिले नहीं होने पर मामले की गंभीरता को देखते हुए नियमों में ढील दी है। ऐसे में अब पांच स्टूडेंट्स मिलने पर भी कॉलेज में सेल्फ फाइनेंस स्कीम (एसएफएस) के तहत कोर्स चलाया जा सकेगा। </p>
<p><strong>16 दिसम्बर तक होंगे एडमिशन</strong><br />आयुक्तालय द्वारा नियमों में परिवर्तन किए जाने के बाद अब 16 दिसंबर तक कॉलेजों में एडमिशन लिए जा सकेंगे। पीजी कोर्सेज में दाखिले के लिए आयुक्तालय ने पहले ऑनलाइन आवेदन की 12 नवंबर अंतिम तिथि तय की थी। इस तिथि तक एडमिशन के बाद भी जेडीबी साइंस व आर्ट्स कॉलेज में सेल्फ फाइनेंस स्कीम में संचालित एमएससी कैमेस्ट्री व एमए जीपीईएम व होम साइसं में  सीटें खाली रह गई। ऐसे में आयुक्तालय ने दाखिले की अंतिम तिथि 16 दिसम्बर तक बढ़ा दी है। </p>
<p><strong>5 से कम स्टूडेंट्स तो नहीं चलेगा कोर्स  </strong><br />आयुक्तालय द्वारा कॉलेज प्राचार्यों को कहा गया है कि प्रवेशित विद्यार्थियों की संख्या 5 से कम रहने की स्थिति में उस विषय का शिक्षण कार्य वर्तमान सत्र 2024-25 के लिए स्थगित रहेगा। विद्यार्थियों द्वारा अनुरोध करने पर उसी कॉलेज के अन्य पाठ्यक्रम में या उसी पाठ्यक्रम में अन्य कॉलेज में स्थान रिक्त  हों तो स्थानांतरित किया जा सकता है या फिर स्टूडेंट्स को शुल्क वापस लौटाया जा सकता है। </p>
<p><strong>16 तक शुल्क जमा किया जा सकेगा</strong><br />आयुक्तालय कॉलेज शिक्षा राजस्थान जयपुर के संयुक्त निदेशक प्रो. विजय सिंह जाट ने आदेश जारी किए हैं। अब रिक्त सीटों पर ऑफलाइन आवेदन करने वाले स्टूडेंट्स से 16 दिसंबर तक शुल्क जमा किया जा सकेगा। वहीं, जिन विश्वविद्यालयों में परीक्षा आवेदन पत्र भरने की अंतिम तिथि पूर्ण हो गई हैं, उनसे संबंधित महाविद्यालयों पर यह लागू नहीं होगा। </p>
<p><strong>एमए जीपीईएम में 16 व होमसाइंस में 28 सीट खाली</strong><br />राजकीय कला कन्या महाविद्यालय (जेडीबी) में सेल्फ फाइनेंस स्कीम के तहत संचालित एमए जीपीईएम में 20 सीटें हैं, जिस पर अब तक मात्र 4 ही एडमिशन हुए हैं। जबकि, 16 सीटें खाली हैं। वहीं, होम साइंस में 40 सीटें हैं, जिसके मुकाबले अब तक 12 ही छात्राओं ने दाखिला लिया है। प्रोफेसर बिंदू चतुर्वेदी व दीपा स्वामी ने बताया कि सरकार का निर्णय सराहनीय है। लेकिन, जीपीईएम व होम साइंस जैसे महत्वपूर्ण कोर्स को सेल्फ फाइनेंस के तहत संचालित होने से इसकी फीस अधिक है, जिसकी वजह से छात्राएं एडमिशन नहीं ले पाती। यदि, यही कोर्स को सरकारी कर दिया जाए तो इसमें एडमिशन भी बढ़ेंगे और  छात्राओं पर आर्थिक भार भी कम होगा। सरकार को बालिकाओं के हित में इन कोर्सेज को एसएफएस से सरकारी में तब्दील करना चाहिए।</p>
<p><strong>कैमेस्ट्री में 10 सीटें खाली</strong><br />जेडीबी साइंस में कैमेस्ट्री विषय सेल्फ फाइनेंस स्कीम में चल रहा है। इसकी 15 सीटें हैं, जिसमें से मात्र 5 ही बालिकाओं ने एडमिशन  लिया है, जबकि 10 सीट खाली है। इसकी  प्रति ईयर फीस 18 हजार है। जबकि, यह विषय रेगुलर हो तो इसकी फीस दो गुना कम हो जाएगी। </p>
<p><strong>झालावाड़-बारां में होमसाइंस सरकारी और कोटा में एसएफएस में </strong><br />जेडीबी आर्ट्स कॉलेज संभाग का सबसे बड़ा गर्ल्स कॉलेज है। इसके बावजूद यहां होम साइंस जैसा महत्वपूर्ण विषय सरकारी न होकर सेल्फ फाइनेंस स्कीम के तहत संचालित किया जा रहा है। इसकी प्रथम वर्ष की फीस 10 हजार रुपए है। जबकि, बारां-झालावाड़ में यह विषय रेगुलर यानी सरकारी है। जिससे वहां की फीस पांच हजार है। ऐसे में कोटा की छात्राएं भी बारां-झालावाड़ में एडमिशन ले रहीं है। जिसकी वजह से जेडीबी आर्ट्स में एडमिशन कम हो रहे हैं। ऐसे में यहां भी होम साइंस विषय को सरकारी किया जाना चाहिए।</p>
<p>सेल्फ फाइनेंस स्कीम के तहत संचालित कोर्सेज में 20 स्टूडेंट्स के प्रवेश लेने की बाध्यता समाप्त कर 5 करने का आयुक्तालय का फैसला सराहनीय है। हमारा प्रयास रहेगा की ज्यादा से ज्यादा एडमिशन हो। हमारे यहां एसएफएस में एमए जीपीईएम व होम साइंस संचालित हो रहे हैं। सेल्फ फाइनेंस में होने के कारण इनकी फीस महंगी हो जाती है। ऐसे में इन कोर्सेज को रेगुलाइज होना चाहिए। जबकि, जीपीईएम  में दाखिला लेने के लिए अजमेर, अलवर सहित अन्य जिलों से छात्राएं आती हैं। इस विषय को सरकारी में करने को हमने पहले भी कई बार आयुक्तालय को पत्र लिखे हैं।  सरकार को छात्राहित में यह कोर्स रेगुलाइज करना चाहिए। <br /><strong>-प्रो. सीमा चौहान, प्राचार्य राजकीय कला कन्या महाविद्यालय</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Dec 2024 17:35:29 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असमंजस के भंवर में फंसी आरटीयू की एमए-एमएससी </title>
                                    <description><![CDATA[पहले सितम्बर फिर अक्टूबर में एडमिशन शुरू करने के किए थे दावे, नवम्बर में भी आसार नहीं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/rtu-s-ma-msc-stuck-in-a-whirlpool-of-confusion/article-94407"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/6633-copy34.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय में नॉन इंजीनियरिंग एमएससी व एमए डिग्री प्रोग्राम असमंजस के भंवर में फंस गए हैं। सितम्बर में शुरू होने वाले कोर्सेज के नवम्बर में भी शुरू होने के आसार नजर नहीं आ रहे। जबकि, आरटीयू द्वारा सितम्बर के प्रथम सप्ताह में ही कोर्स शुरू करने के दावे किए गए थे। एमएससी व एमए में 30-30 सीटों पर एडमिशन दिए जाने थे। लेकिन, आरटीयू प्रशासन की लेटलतीफी के कारण हजारों विद्यार्थियों की उम्मीदों पर पानी फिर गया।  क्योंकि, कॉलेजों में पीजी के एडमिशन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और सीटें सीमित होने के कारण अधिकतर विद्यार्थी स्वयंपाठी के रूप में एडमिशन ले चुके हैं। ऐसे में उनका आरटीयू में एमएससी व एमए करना सपना ही रह गया। विशेषज्ञों का मत है, यदि आरटीयू द्वारा नवम्बर के आखिरी सप्ताह तक भी एडमिशन प्रोसेज शुरू करता है तो संतोषजनक एडमिशन नहीं मिल पाएंगे, क्योंकि अनावश्यक देरी के चलते विद्यार्थी अन्य संस्थानों में एडमिशन ले चुके हैं। कोटा यूनिवर्सिटी से एफिलेटेड कॉलेजों में पीजी प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाएं भी दिसम्बर से जनवरी के बीच निर्धारित है। </p>
<p><strong>पहले सितम्बर फिर अक्टूबर अब नवम्बर</strong><br />आरटीयू प्रशासन द्वारा एमएससी व एमए डिग्री कोर्सेज शुरू करने के लिए पहले सितम्बर के प्रथम सप्ताह में प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने के दावे किए गए थे। इसके बाद कोर्स संचालन की कमेटी की मिटिंग नहीं होने का हवाला देकर अक्टूबर से एडमिशन स्टार्ट करने की बात कही गई। लेकिन, दोनों माह बीतने के बाद अब नवम्बर में बोम से अप्रूवल मिलने पर कोर्स शुरू करने की उम्मीद जताई जा रही है। </p>
<p><strong>फिजिक्स, मैथ्स व कैमेस्ट्री में एमएससी</strong><br />आरटीयू द्वारा वर्तमान शिक्षा सत्र 2024-25  में  फिजिक्स, मैथ्स व कैमेस्ट्री में एमएससी कराए जानी है। लेकिन, अब अब तक एडमिशन प्रक्रिया ही शुरू नहीं की गई। जबकि, सिलेबस तक बन गए। कोर्सेज के लिए कमेटी भी गणित हो चुकी है। इसके बावजूद आरटीयू प्रशासन द्वारा प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने में अनावशयक देरी की जा रही है। जिससे एमएससी शुरू होने पर भी संशय लग गया। </p>
<p><strong>अंगे्रजी, गणित व ह्यूमेनिटी में एमए</strong><br />राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय अंग्रेजी, गणित व ह्यमेूनिटी में एमए डिग्री कोर्स शुरू होना है। एमए इंग्लिश के प्रति विद्यार्थियों में खासा उत्साह नजर आया था। क्योंकि, प्रत्येक संकाय में 30-30 सीटें निर्धारित हैं। वहीं, शहर में मात्र गवर्नमेंट कॉलेज में ही अंगे्रजी में एमए करवाई जाती है। लेकिन वहां सीटे सीमित होने के कारण छात्र-छात्राओं का रेगुलर एडमिशन नहीं मिल पाता। ऐसे में बड़ी संख्या में विद्यार्थी आरटीयू से उम्मीद लगाए बैठे थे लेकिन नवम्बर तक भी एडमिशन प्रोसेज शुरू नहीं होने से मायूस हो गए। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं विद्यार्थी</strong><br />जब आरटीयू में इंग्लिश में एमए की जानकारी मिली थी तो हम एडमिशन लेने के लिए उत्साहित थे और बेसब्री से प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रहे थे, क्योंकि कोटा शहर में मात्र गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज कोटा में ही इंग्लिश में एमए करवाई जाती है लेकिन सीटें कम होने से मेरिट हाई जाती है, जिसकी वजह से अधिकतर विद्यार्थियों को रेगुलर एडमिशन नहीं मिल पाता। ऐसे में आरटीयू  से उम्मीद थी। लेकिन यहां अब तक कोर्स ही शुरू नहीं हुआ। मजबूरी में स्वयंपाठी के रूप में एडमिशन लेना पड़ेगा। <br /><strong>- जोगेंद्र कहार, याज्ञेंद्र कुमार, छात्र </strong></p>
<p>आरटीयू, टेक्नीकल यूनिवर्सिटी होने के नाते यहां इंफ्रास्ट्रेक्चर बेहतर है। ऐेसे में यहां से एमएससी करना चाहता था लेकिन नवम्बर तक भी एडमिशन प्रोसेज शुरू नहीं किया। ऐसे में गवर्नमेंट कॉलेज में ही एडमिशन ले लिया। यदि, अक्टूबर तक भी प्रोसेज शुरू  हो जाता तो एडमिशन ले सकते थे। यह यूनिवर्सिटी की लेटलतीफी है, कई विद्यार्थी एमएसी व एमए के विभिन्न संकाय में एडमिशन लेने की आस लगाए बैठे थे, लेकिन देरी के कारण अन्यंत्र संस्थानों में एडमिशन लेना पड़ा।  नवम्बर से भी कोर्स शुरू हो जाए, यह भी तय नहीं है। इस सत्र से कोर्स शुरू होना मुश्किल लगता है। <br /><strong>- खुशीराम जादौन, हर्षित अग्रवाल, छात्र </strong></p>
<p>अभी इस संबंध में कोई अपडेट नहीं है। हालांकि कार्य तेजी से चल रहा है। <br /><strong>- प्रो. रंजन माहेश्वरी, चीफ प्रोक्टर आरटीयू</strong></p>
<p>एडमिशन प्रोसेज के रूल-रेगुलेशन आखिरी स्टेज पर है। आगामी कुछ दिनों में बोम की बैठक होने की उम्मीद है, जिसमें अप्रूव्ल मिलते ही प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। सिलेबस बन चुके हैं, तैयारी भी पूरी हो चुकी है। आरटीयू विद्यार्थियों के सर्वागींण विकास के लिए लगातार प्रयासरत है। <br /><strong>- प्रो. दिनेश बिरला, डीन फैकल्टी अफेयर आरटीयू</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Nov 2024 14:56:35 +0530</pubDate>
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                <title>कॉलेज में कई नए कोर्सेज चालू </title>
                                    <description><![CDATA[कॉलेज के निदेशक डॉ. राघव प्रकाश ने कहा कि ऑटोनोमस स्टेट्स के जरिए कॉलेज में कई नए कोर्सेज चालू किए हैं।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/many-new-courses-started-in-the-college/article-55235"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/news-(7).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान लोक सेवा आयोग के पूर्व चेयरमैन प्रो. बीएम शर्मा का कहना है कि इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी का युग है। स्टूडेंट्स को केवल प्रशासनिक सेवाओं के भरोसे नहीं रहना चाहिए। शर्मा मानसरोवर स्थित परिष्कार कॉलेज ऑफ ग्लोबल एक्सीलेंस द्वारा आयोजित ऑरिएंटेशन कार्यक्रम में बोल रहे थे। कॉलेज के निदेशक डॉ. राघव प्रकाश ने कहा कि ऑटोनोमस स्टेट्स के जरिए कॉलेज में कई नए कोर्सेज चालू किए हैं।  <br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Aug 2023 11:08:30 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>परिष्कार कॉलेज में पढ़ सकेंगे डीयू और जेएनयू के कोर्स </title>
                                    <description><![CDATA[परिष्कार कॉलेज यूजीसी का पहला ऑटोनॉमस महाविद्यालय बन गया है। परिष्कार कॉलेज अब ग्लोबल एक्सीलेंस एंड सेंट्रल यूनिवर्सिटी, डीयू और जेएनयू आदि के कोर्स पढ़ा सकेगा, क्योंकि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यूजीसी ने इसे एक विशेष योजना के तहत ऑटोनॉमस स्टेट महाविद्यालय प्रदान किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world-of-education/jaipur-du-and-jnu-courses-will-be-able-to-study-in-parishkar-collage/article-12246"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/446465465.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। परिष्कार कॉलेज यूजीसी का पहला ऑटोनॉमस महाविद्यालय बन गया है। परिष्कार कॉलेज ऑफ ग्लोबल एक्सीलेंस एंड सेंट्रल यूनिवर्सिटी, डीयू और जेएनयू आदि के कोर्स पढ़ा सकेगा, क्योंकि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यूजीसी ने इसे एक विशेष योजना के तहत ऑटोनॉमस स्टेट महाविद्यालय प्रदान किया है। इससे परिष्कार कॉलेज ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन डिग्री के साथ-साथ पीएचडी डिग्री के लिए भी शोध करवा सकेगा। अब परिष्कार कॉलेज सिलेबस भी बना सकेगा। परीक्षाएं भी लेगा और डिग्री राजस्थान विश्वविद्यालय प्रदान करेगा।</p>
<p>कॉलेज के निदेशक डॉ. राघव प्रकाश ने बताया कि अब हम आई एएसआरएएस का 3 वर्ष का फाउंडेशन कोर्स चला सकेंगे। इसके साथ ही इंडस्ट्री की जरूरत के अनुसार स्टूडेंट को तैयार कर डिग्री प्रदान करेंगे। एक्सपोर्ट हार्ड वर्ड स्टैनफोर्ड आईबीएम गूगल आदि के कोर्सेज की जांच कर तथा बैंक एवं इंडस्ट्रीज के एक्सपर्ट को शामिल कर डाटा एनालिसिस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सॉफ्टवेयर वेब डेवलपमेंट और मैनेजमेंट के अंतरराष्ट्रीय स्तर के ऐसे उत्कर्ष और तैयार किए है, जिनसे हमारे बीए बीएससी, बीसीए, बीएएमएस और बीबीए के विद्यार्थियों को डिग्री मिलने से पहले ही एमएनसीजी के बड़े पैकेज पर जॉब मिल सकेगी।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world-of-education/jaipur-du-and-jnu-courses-will-be-able-to-study-in-parishkar-collage/article-12246</link>
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                <pubDate>Wed, 15 Jun 2022 15:07:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>

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