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                <title>gold medalist - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>मंजिल उन्ही को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है...</title>
                                    <description><![CDATA[यदि सहयोग और सपोर्टमिले तो वह खुद अकादमी खोलकर पॉवर लिफ्टिंग की टैÑनिंग देना चाहेंगी, शोभा ने जिस तरह से तमाम मुसीबतों का सामना करते हुए इस मुकाम को हासिल किया वो दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-destination-is-reached-only-by-those-who-have-life-in-their-dreams/article-45181"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/manjil-unhi-ko-milati-hai-jinke-sapno-me-jaan-hoti-he...kota-news-10-05-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मंजिल उन्ही को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। राजस्थान की बेटी शिक्षिका  शोभा माथुर इसका एक बड़ा उदाहरण हैं। पति की मौत के बाद शोभा को डिप्रेशन ने घेर लिया था लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और वेट लिफ्टिंग में अपना करियर बनाने पर फोकस किया। नजीता सबके सामने है। अब वो एक जाना-माना नाम हैं और सिल्वर से लेकर गोल्ड मेडल अपने नाम कर चुकी हैं।</p>
<p><strong>छलक उठी आंखें जब कानों में पड़े राष्टÑगान के बोल </strong><br />वह कहती हैं जब मैं कक्षा 8 में पढ़ती थी। अभ्यास के लिए नयापुरा स्टेडियम में जाया करती थी तो उस समय वहां सेना से रिटायर्ड एक फौजदार आया करते थे । वह मेरी खेल के प्रति लगन और मेहनत को देखकर कहते थे कि बेटा इस आग को कभी ठन्डी मत होने देना। वो कहते थे कि जब किसी खिलाड़ी के सम्मान में राष्टÑगान गाया जाता है तो उसे भी उतना की सम्मान देना चाहिए जितना एक सैनिक को मिलता है। मुझे उनकी सालों पहले की ये बात उस समय याद आई जब मैं पोडियम पर खड़ी थी।  केरल में मैडल प्रदान करते समय राष्टÑगान की धुन मेरे कानों में पहुंच रही थी। यह कहते-कहते मंगलवार को एशियन पॉवर लिफ्टिंग चैंपियनशिप के मास्टर वर्ग में गोल्ड मेडल हांसिल करने वाली माथुर की आंखें उस समय छलक उठी जब वो नवज्योति कार्यालय में आभार प्रकट करने के लिए आई थी।</p>
<p><strong>अकादमी खोल बच्चियों को ट्रैनिंग देने की इच्छा</strong><br />शोभा माथुर  एशियन पॉवर लिफ्टिंग चैंपियन बनने के बाद मंगलवार को नवज्योति कार्यालय पर पहुंची और पूरी टीम का आभार जताया। इस दौरान नवज्योति टीम की ओर से भी उनका स्वागत किया गया। कार्यालय में बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि वे कोटा की उन बच्चियों के लिए बहुत कुछ करना चाहती है जो खेल में अपने जीवन को तलाश रही हैं। यदि सहयोग और सपोर्टमिले तो वह खुद अकादमी खोलकर पॉवर लिफ्टिंग की टैÑनिंग देना चाहेंगी। वे बताती है कि जिस तरह उन्होंने मुझे खेलने के लिए इतना प्रोत्साहित किया उसी से प्रेरणा लेकर मैं भी दूसरी लड़कियों को प्रोत्साहित करूंगी। शोभा ने जिस तरह से तमाम मुसीबतों का सामना करते हुए इस मुकाम को हासिल किया वो दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं।</p>
<p><strong>आसान नहीं रहा सफर </strong><br />इस समय खूब तारीफ बटोरने वाली रावतभाटा के एक सरकारी स्कूल की अध्यापिका 53 वर्षीय शोभा का यहां तक पहुंचने का सफर इतना आसान नहीं था। पति की मौत के बाद खुद को सदमे से उबारा और बच्चों के प्रति जिम्मेदारी बखूबी निभाई। इसमें परिवार का साथ मिला तो पॉवर लिफ्टिंग में फिर से जोर आजमाइश शुरू की अ‍ौर खुद को मजबूती के साथ दोबारा खड़ा करके पावर लिफ्टिंग के नाम कर दिया। खेल में कामयाबी का सिलसिला शुरू हुआ। इसके बाद शोभा ने कभी पीछे मुड़कर नही देखा। शोभा के घर में एक अलमारी अवॉर्डों से भरी है। जो शोभा की कामयाबी की गवाही देता है।</p>
<p><strong>कई मेडल जीत चुकी हैं शोभा</strong><br />गत अक्टूबर में उन्होंने नेशनल मास्टर पुरुष-महिला क्लासिक पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप में 290 किलो का वजन उठाकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया था। शोभा ने पहली बार साल 2021 में राज्यस्तरीय पावर लिफ्टिंग में मेडल जीता। इसके बाद 220 किलो का वजन उठाकर स्वर्ण पदक हांसिल किया। अब 2023 में आयोजित हुए एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर शहर का नाम रोशन किया।  </p>
<p><strong>ताने सुने लेकिन गुस्सा वर्क आउट पर उतारा</strong><br />शोभा बताती है कि मेरा इस खेल का सफर इतना आसान नहीं है। पति की मौत के बाद विधवा होने पर एक स्त्री को क्या कुछ सहना पड़ता है। लोग किन निगाहों से उसे देखते हैं। बहुत मुश्किल होता है ये सब सुनना, देखना और सहन करना लेकिन मैने किया बजाय लोगों को जवाब देने के मैने सारा गुस्सा जिम में अभ्यास पर उतारा, कई बार तो आधी रात के बाद जब मैं जिम में वर्क आउट के लिए जाती थी तो परिवार वाले मजाक में कहा करते थे कि ये क्या पागल हो गई है। शोभा बताती है कि हालात कैसे भी रहे हो लेकिन मेरे परिवारवालों ने हमेशा मेरा साथ दिया। उन्होंने हमेशा यहीं कहा कि तुम चलों हम तुम्हारे पीछे खड़े है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 May 2023 14:21:21 +0530</pubDate>
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                <title>पावो नुर्मी खेलों में नीरज ने बनाया नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड, जीता रजत पदक</title>
                                    <description><![CDATA[तुरकू। टोक्यो ओलंपिक के स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा ने मंगलवार को पावो नुर्मी खेलों में रजत पदक जीतते हुए जैवलीन थ्रो का नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित किया। नीरज ने 89.3 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ पिछले साल मार्च में आयोजित इंडियन ग्रां प्री में बनाया अपना 88.07 मीटर का रिकॉर्ड तोड़ा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/new-national-record-of-pavo-nurmi-games-neeraj-won-silver-medal/article-12321"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/neeraj-chopra.jpg" alt=""></a><br /><p>तुरकू। टोक्यो ओलंपिक के स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा ने मंगलवार को पावो नुर्मी खेलों में रजत पदक जीतते हुए जैवलीन थ्रो का नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित किया। नीरज ने 89.3 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ पिछले साल मार्च में आयोजित इंडियन ग्रां प्री में बनाया अपना 88.07 मीटर का रिकॉर्ड तोड़ा।  यह उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन होने के साथ-साथ इस वर्ष का अब तक का पांचवां सर्वश्रेष्ठ थ्रो है। फिनलैंड के ओलिवर हेलेंडर ने 89.83 मीटर के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता।</p>
<p>ग्रेनाडा के मौजूदा विश्व चैंपियन एंडरसन पीटर्स ने 86.60 मीटर के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया। पिछले साल अगस्त में हुए टोक्यो ओलंपिक के बाद नीरज पहली बार किसी प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे थे।  24 वर्षीय नीरज ने 86.92 मीटर के थ्रो के साथ शुरुआत की और दूसरे प्रयास में 89.30 मीटर की दूरी पर भाला फेंका, जो उनके ओलंपिक प्रदर्शन (87.58) से भी बेहतर था। नीरज अब तुरकू के बाद कुओरटाने खेलों में हिस्सा लेंगे, जिसके बाद वह डायमंड लीग के स्टॉकहोम लेग के लिए स्वीडन जाएंगे। पावो नुर्मी खेल विश्व एथलेटिक्स कॉन्टिनेंटल टूर का एक स्वर्ण आयोजन है। यह डायमंड लीग के बाहर सबसे बड़ी ट्रैक एंड फील्ड प्रतियोगिताओं में से एक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Jun 2022 12:44:14 +0530</pubDate>
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