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                <title>drainage - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>करोड़ों के दावों के बीच मूलभूत सुविधाओं को तरसते वार्ड, बारिश में नाले बन रहे आफत</title>
                                    <description><![CDATA[नालों की सफाई नहीं होने से ब्रजराज कॉलोनी, मस्जिद चौक और नेहरू कॉलोनी में जलभराव, घरों तक पहुंच रहा गंदा पानी ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/wards-deprived-of-basic-amenities-despite-claims-of-multi-crore-investments--drains-turn-into-a-menace-during-rains/article-164345"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(11).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के चार वार्डों की ऑडिट में विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। वार्ड क्षेत्र में रहने वाले लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान हैं। कहीं नालों की सफाई नहीं होने से बारिश के दिनों में जलभराव की समस्या विकराल हो जाती है तो कहीं पार्क, डिस्पेंसरी और सामुदायिक भवन जैसी जरूरी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। सफाई व्यवस्था की स्थिति भी कई इलाकों में संतोषजनक नहीं है।</p>
<p><strong>नाले जाम, बारिश में घरों तक पहुंचता है गंदा पानी</strong><br />वार्ड क्षेत्र की ब्रजराज कॉलोनी और नेहरू कॉलोनी में नालों की नियमित सफाई नहीं होने की समस्या सामने आई। क्षेत्रवासियों का कहना है कि बारिश के दौरान नालियां और नाले जाम हो जाते हैं। पानी की निकासी नहीं होने के कारण सड़कों पर गंदा पानी भर जाता है और कई बार यह पानी घरों तक पहुंच जाता है। जलभराव के कारण लोगों को आवाजाही में परेशानी होती है। लंबे समय से नालों की सफाई और स्थायी जल निकासी की मांग की जा रही है, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।</p>
<p><strong>पार्क, डिस्पेंसरी और सामुदायिक भवन की दरकार</strong><br />ऑडिट के दौरान कई क्षेत्रों में लोगों ने बताया कि वार्ड में बच्चों और बुजुर्गों के लिए पर्याप्त पार्क नहीं हैं। वहीं जरूरत के बावजूद डिस्पेंसरी और सामुदायिक भवन जैसी सुविधाएं भी कई जगह उपलब्ध नहीं हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए भी उन्हें जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। सफाई व्यवस्था को लेकर भी लोगों में नाराजगी है। जगह-जगह गंदगी और नियमित सफाई नहीं होने से परेशानी बढ़ रही है।</p>
<p><strong>करोड़ों के काम हुए तो नजर क्यों नहीं आते?</strong><br />क्षेत्रवासियों का कहना है कि जब वे समस्याओं को लेकर पार्षद से सवाल करते हैं तो जवाब मिलता है कि वार्ड में करोड़ों रुपए के विकास कार्य करवाए गए हैं। लोगों का सवाल है कि यदि इतने बड़े स्तर पर काम हुए हैं तो वे नजर क्यों नहीं आ रहे? उनका कहना है कि पार्षद का चुनाव इसलिए होता है कि वह अपने क्षेत्र की समस्याओं को समझे और प्राथमिकता के आधार पर उनका समाधान करवाए। लेकिन चुनाव जीतने के बाद कई बार जनप्रतिनिधियों का व्यवहार बदल जाता है और लोगों की शिकायतों पर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई देती।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद अनूप कुमार</strong><br />वार्ड में सामुदायिक भवन का अभाव है। हालांकि क्षेत्र में सुलभ कॉम्पलेक्स का निर्माण करवाया गया है। उन्होंने कहा कि कार्यकाल समाप्त होने के बाद वार्ड की साफ-सफाई व्यवस्था बिगड़ गई है। कई बार शिकायत करने के बावजूद नगर निगम के अधिकारी समस्याओं के समाधान को लेकर गंभीरता नहीं दिखाते, जिससे लोगों को परेशानी हो रही है।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद नीलोफर</strong><br />वार्ड में करीब 25 वर्षों से अतिक्रमण की समस्या बनी हुई थी, जिसका समाधान करवाया गया। मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया गया। वर्षों पुरानी कचरा पॉइंट की समस्या खत्म कर वहां पार्क विकसित करवाया। वहीं करीब 40 वर्षों से सफाई और मरम्मत का इंतजार कर रहे नालों की रिपेयरिंग करवाकर व्यवस्था में सुधार किया गया।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद ममता कंवर</strong><br />पूर्व पार्षद ममता कंवर ने बताया कि वार्ड में पार्क की कमी है। उनके कार्यकाल के दौरान जरूरत के अनुसार नालियों का निर्माण करवाया गया। उन्होंने कहा कि वार्डवासियों की समस्याओं को प्राथमिकता देते हुए समय-समय पर उनके समाधान का प्रयास किया जाता रहा। वर्तमान में वार्ड में कोई बड़ी समस्या नहीं है, हालांकि मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने की जरूरत है।</p>
<p><strong>वार्डवासी शिवा मद्रासी</strong><br />क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या नाले की है। नियमित सफाई नहीं होने से नाला जाम हो जाता है। बारिश के दौरान नाले का गंदा पानी ओवरफ्लो होकर घरों तक पहुंच जाता है। वार्ड में सामुदायिक भवन भी नहीं है। इसके अलावा साफ-सफाई व्यवस्था का भी अभाव होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर व क्षेत्र</strong><br />-वार्ड नंबर 21 में काली बस्ती, हनुमान बस्ती, थर्मल पावर स्टेशन, चंबल कॉलोनी, लक्ष्मी मैरिज गार्डन, समय विद्या निकेतन स्कूल, मुन्ना टेलर्स, सीनियर लेडीज टेलर्स, असगर अली का मकान, रोज ब्यूटी पार्लर, हरिजन बस्ती, कुंदकुंद आवासीय योजना, फॉरेस्ट चौकी, पंचशील कॉलोनी, समस्त दुर्गा नगर, सुभाष नगर, सगसजी महाराज, न्यू थर्मल कॉलोनी, जी-मार्ट, मस्जिद, नेवालाल मैरिज गार्डन, बजरंगपुरा एवं आरएसईबी कार्यालय क्षेत्र शामिल हैं।<br />-वार्ड नंबर 41 में हरिजन बस्ती, राजभवन क्षेत्र, जेके लोन अस्पताल, आयुर्वेदिक अस्पताल, इस्माइल चौक, बग्गी खाना, ब्रजराज कॉलोनी, नेहरू कॉलोनी, मस्जिद चौक, एमबीएस अस्पताल, सिविल लाइंस, कोलीपाड़ा का आंशिक क्षेत्र, प्रकाश क्लिनिक सहित आसपास के क्षेत्र शामिल हैं।<br />-वार्ड नंबर 42 में शीतला माता मंदिर, गोरी आश्रम, हरिजन बस्ती, बापू बस्ती, रामदेवजी का मंदिर, देवनारायण मंदिर, बीड़ के बालाजी, सरकारी स्कूल, न्यू सरस्वती विद्या मंदिर, जय अम्बे टेंट हाउस एवं राजपूत किराना स्टोर सहित आसपास का क्षेत्र शामिल है।<br />-वार्ड नंबर 43 में पुरानी कुन्हाड़ी व हवेली, चंबल पुलिया का निचला हिस्सा, रिद्धि राज टावर, बूंदी सिलिका, बिजासन माताजी का मंदिर, डी-मार्ट, विजय वीर स्टेडियम, बालापुरा का संपूर्ण क्षेत्र, सेक्टर कार्यालय, रोडवेज वर्कशॉप, कंकरेश्वर महादेव मंदिर, रजत सिटी ग्रुप मल्टी सहित आसपास के क्षेत्र शामिल हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 12:31:47 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>विकास के दावों की हकीकत : शहर के बीच बसे गांव जैसे हालात, मूलभूत सुविधाओं को तरसे वार्डवासी</title>
                                    <description><![CDATA[लोगों ने पूछा—मूलभूत सुविधाएं नहीं तो वोट का क्या मतलब?]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-reality-behind-development-claims--village-like-conditions-in-the-heart-of-the-city--residents-deprived-of-basic-amenities/article-163826"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(1)82.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के विकास और आधुनिक सुविधाओं के दावों के बीच रविवार को छह वार्डों के किए गए ग्राउंड ऑडिट में कई चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आईं। शहर का हिस्सा होने के बावजूद कुछ इलाके ऐसे नजर आए, जहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो शहर के बीचों-बीच कोई गांव बस गया हो। कहीं टूटी सड़कें हैं तो कहीं बदहाल नालियां, कहीं टूटे स्पीड ब्रेकर लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं तो कहीं बच्चों के खेलने के लिए पार्क तक उपलब्ध नहीं हैं। कई इलाकों में सामुदायिक भवन जैसी सुविधा भी नहीं है, जहां स्थानीय लोग छोटे-मोटे सामाजिक और पारिवारिक आयोजन कर सकें। छह वार्डों के इस ऑडिट में सामने आया कि विकास की रफ्तार हर क्षेत्र तक समान रूप से नहीं पहुंच पाई है। उद्योग नगर, डीसीएम और हनुमत खेड़ाख, रायपुरा जैसे क्षेत्रों में अलग-अलग समस्याएं जरूर हैं, लेकिन आम नागरिकों की मांग एक ही है—सड़क, बिजली, पानी, पार्क और सामुदायिक भवन जैसी मूलभूत सुविधाएं हर वार्ड में उपलब्ध होनी चाहिए।</p>
<p><strong>शहर में रहते हुए भी ग्रामीण जैसी सुविधाओं का अभाव</strong><br />वार्डवासियों का कहना है कि शहर के बीच रहने के बावजूद उन्हें कई ऐसी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ता है, जो एक विकसित वार्ड की पहचान मानी जाती हैं। कई स्थानों पर सड़कें जर्जर हैं और लंबे समय से मरम्मत की मांग की जा रही है। बरसात और समय के साथ सड़कों की स्थिति और खराब हो जाती है। रायपुरा के लोगों का कहना है कि खराब सड़कों के कारण वाहन चलाना मुश्किल होता है, वहीं पैदल चलने वालों को भी परेशानी उठानी पड़ती है।</p>
<p>ग्राउंड ऑडिट के दौरान कुछ क्षेत्रों में ऐसा माहौल दिखाई दिया, जहां विकास की रफ्तार बेहद धीमी नजर आई। वार्डवासियों ने बताया कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से शिकायतें करने के बाद भी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। लोगों का कहना है कि चुनाव के दौरान विकास और सुविधाओं के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में कई क्षेत्र मूलभूत सुविधाओं से ही वंचित रह जाते हैं।</p>
<p><strong>उद्योग नगर की सड़कें बनीं परेशानी, टूटे ब्रेकर बढ़ा रहे खतरा</strong><br />उद्योग नगर क्षेत्र में सबसे बड़ी समस्या क्षतिग्रस्त सड़कों और टूटे हुए स्पीड ब्रेकरों को लेकर सामने आई। सड़कों की बदहाली लोगों के लिए रोजमर्रा की परेशानी बन चुकी है। लोगों की मांग है कि सड़क और ब्रेकरों की समय पर मरम्मत कराई जाए, ताकि किसी बड़े हादसे की आशंका को टाला जा सके। उद्योग नगर और डीसीएम क्षेत्र में आपराधिक गतिविधियों को लेकर भी चिंता जताई। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में असामाजिक तत्वों की गतिविधियां समय-समय पर परेशानी का कारण बनती हैं। स्थानीय निवासियों का मानना है कि पुलिस गश्त और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किए जाने की जरूरत है। वार्डवासियों का कहना है कि सुरक्षित वातावरण भी किसी क्षेत्र के विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। केवल सड़क और भवन निर्माण से ही आदर्श वार्ड नहीं बनता, बल्कि वहां रहने वाले लोगों को सुरक्षा का भरोसा भी मिलना चाहिए।</p>
<p><strong>हनुमत खेड़ा में सुविधाओं की कमी से मायूसी</strong><br />हनुमत खेड़ा क्षेत्र की स्थिति भी कुछ खास बेहतर नजर नहीं आई। यहां कई लोगों ने स्थानीय सुविधाओं की कमी को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। बच्चों के खेलने और बुजुर्गों के टहलने के लिए पर्याप्त पार्क की सुविधा नहीं होना लोगों की प्रमुख शिकायतों में शामिल रहा।</p>
<p><strong>छोटे आयोजनों के लिए भी नहीं मिलती जगह</strong><br />ऑडिट में एक बड़ी समस्या सामुदायिक भवन के अभाव की भी सामने आई। कई वार्डवासियों ने बताया कि क्षेत्र में ऐसा कोई व्यवस्थित स्थान नहीं है, जहां लोग छोटे सामाजिक, सांस्कृतिक या पारिवारिक आयोजन करवा सकें।</p>
<p><strong>वार्डवासी बोले—पहले मूलभूत सुविधाएं तो मिलें</strong><br />हम शहर में रहते हैं, लेकिन कई बार सुविधाओं की स्थिति देखकर लगता है जैसे गांव के पिछड़े इलाके में रह रहे हों। सड़कें ठीक नहीं हैं, बच्चों के लिए पार्क नहीं है और कई जगह सामुदायिक कार्यक्रमों के लिए भी कोई उचित स्थान नहीं मिलता। हमारी मांग कोई बड़ी नहीं है, सिर्फ इतनी है कि हर वार्ड में सड़क, बिजली, पानी और पार्क जैसी मूलभूत सुविधाएं बेहतर हों।<br /><strong>- जितेन्द्र चौधरी, वार्डवासी</strong></p>
<p>जनप्रतिनिधियों से लोगों को उम्मीद होती है कि वे क्षेत्र की समस्याओं को प्राथमिकता से दूर करेंगे। उद्योग नगर और डीसीएम जैसे क्षेत्रों में सड़क और सुरक्षा दोनों को लेकर चिंता है। यदि आम आदमी को रोजाना टूटी सड़क, खराब सुविधाओं और असुरक्षा जैसी समस्याओं से जूझना पड़े तो विकास के दावों का क्या मतलब रह जाता है।<br /><strong>- दिपू सिंह, वार्डवासी</strong></p>
<p>कार्यकाल में वार्डवासियों की हर समस्या को प्राथमिकता के साथ दूर कराने का प्रयास किया गया। वार्ड में पार्क जैसी सुविधाओं का अभाव जरूर है, लेकिन जब भी कोई वार्डवासी अपनी समस्या लेकर आता है तो उसका समाधान कराना मेरी पहली प्राथमिकता रहती है। जनसमस्याओं के समाधान के लिए मैं हमेशा तत्पर रहता हू।<br /><strong>- दीपक कुमार, पूर्व पार्षद</strong></p>
<p>वार्ड के कई क्षेत्रों में तकनीकी कारणों से समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। सफाई व्यवस्था नियमित रूप से कराई जाती है, लेकिन कई बार लोग स्वयं कचरा फैला देते हैं। वार्ड की सबसे बड़ी समस्या नालियों के ड्रेनेज व्यवस्था की है, जिसका समाधान अब तक नहीं हो सका है।<br /><strong>-सुशील त्रिपाठी, पूर्व पार्षद</strong></p>
<p><strong>वार्ड नंबर व क्षेत्र</strong><br />वार्ड नंबर 29 में वैष्णो कॉलोनी, डालाबाई माताजी , प्रेम नगर द्वितीय आंशिक, मदरसा, सरकारी स्कूल क्षेत्र, राजेंद्र कुशवाहा जागा बस्ती, अफॉर्डेबल आवास योजना के ए, बी, सी, डी और ई, प्रेम नगर तृतीय का आंशिक क्षेत्र तथा गोविंद नगर का आंशिक क्षेत्र शामिल हैं।<br />वार्ड नंबर 30 : इंदिरा गांधी नगर का आंशिक क्षेत्र, पावर हाउस क्षेत्र, रामदेव मंदिर तथा प्रेम नगर तृतीय क्षेत्र शामिल हैं।<br />वार्ड नंबर 31 : जलेबी चौक, झिरी के हनुमान जी, विजयलक्ष्मी स्कूल क्षेत्र, तिलक स्कूल, फकीरों का मोहल्ला, भेरूजी का चबूतरा, मस्जिद क्षेत्र, राजपूत कॉलोनी, गुर्जरों का मोहल्ला, नाईस स्कूल के पीछे का क्षेत्र, सामुदायिक भवन के पीछे का क्षेत्र, पुलिस चौकी के सामने का क्षेत्र, जागा मोहल्ला और सुभाष स्कूल के पीछे का क्षेत्र शामिल हैं।<br />वार्ड नंबर 32 : बापू कॉलोनी, कर बाजार, डीसीएम श्मशान, इंदिरा गांधी नगर, तारवाड़ा, पावर हाउस और डीसीएम सेक्टर कार्यालय सहित आसपास का क्षेत्र शामिल है।<br />वार्ड नंबर 33 : जय श्री विहार, रायपुर नाका, गुलाबबाड़ी, मालीपुरा, लक्ष्मी आवास, थेकड़ा, मॉडल टाउन, रॉयल सनसिटी, कैरियर पॉइंट टाउनशिप, शिवधाम कॉलोनी, कबीरधाम और शिवसागर का क्षेत्र शामिल हैं।<br />वार्ड नंबर 34 : देवली अरब ग्राम, नया नोहर, राजनगर का आंशिक भाग, महालक्ष्मीपुरम, बक्शी स्कूल, अरिहंत विद्यालय, मित्तल इंटरनेशनल स्कूल, श्याम नगर, हाथीखेड़ा ग्राम, हनुमतखेड़ा ग्राम, श्रीराम कॉलोनी, जगन विहार, गुरु नानक विहार, अरावली विहार, टैगोर नगर, होली फैमिली क्षेत्र, कृष्णा नगर, मोती नगर, गणेश नगर, बृज विहार, देवली अरब रोड, कौटिल्य नगर और प्रताप नगर द्वितीय सहित कई शामिल हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 14:48:39 +0530</pubDate>
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                <title>कहीं अधूरे कामों पर नाराजगी, कहीं मूलभूत सुविधाओं का इंतजार</title>
                                    <description><![CDATA[जनता का सवाल : वादे फिर होंगे, लेकिन क्या इस बार वे पूरे भी होंगे?
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/resentment-over-incomplete-projects--a-long-wait-for-basic-amenities/article-163732"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(5)29.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम चुनाव प्रक्रिया चलने के साथ ही शहर के छह वार्डों की ग्राउंड ऑडिट में विकास कार्यों की जमीनी हकीकत सामने आई है। कई क्षेत्रों में सड़क, सफाई, नालियों के निर्माण और मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं। लोगों का कहना है कि चुनाव के समय जिन उम्मीदों और विकास के वादों के साथ जनप्रतिनिधि उनके बीच पहुंचे थे, उन वादों को पूरी तरह धरातल पर उतारा नहीं जा सका। कहीं विकास कार्य शुरू होकर अधूरे रह गए, कहीं काम तो हुए लेकिन गुणवत्ता और रखरखाव की कमी सामने आई, जबकि कुछ इलाकों में जरूरी काम अब तक शुरू ही नहीं हो सके। ऐसे में लोगों की नाराजगी चुनावी माहौल से पहले साफ दिखाई देने लगी है। अगले महीने होने वाले वार्ड पार्षद चुनाव से पहले यह ग्राउंड रिपोर्ट नए और पुराने, दोनों तरह के दावेदारों के लिए एक संदेश है। जनता अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट होने के बजाय काम का हिसाब और भविष्य की स्पष्ट योजना जानना चाहती है। सड़क, सफाई, नाली, स्ट्रीट लाइट, पार्क और सामुदायिक भवन जैसे मुद्दे सीधे लोगों के दैनिक जीवन से जुड़े हैं। ऐसे में इस बार चुनावी मैदान में उतरने वाले जनप्रतिनिधियों के सामने चुनौती केवल वोट मांगने की नहीं, बल्कि भरोसा जीतने और विकास को जमीन पर साबित करने की होगी।</p>
<p><strong>कोटड़ी से बजरंग नगर तक समस्याओं की अलग तस्वीर</strong><br />वार्डों की पड़ताल में अलग-अलग इलाकों में समस्याओं का स्वरूप भले ही अलग नजर आया, लेकिन मूल चिंता सुविधाओं की कमी ही रही। कोटड़ी क्षेत्र में सफाई व्यवस्था और स्पीड ब्रेकर से जुड़ी समस्याओं को लेकर लोग परेशान हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नियमित सफाई नहीं होने से कई स्थानों पर गंदगी बनी रहती है, वहीं जरूरत वाले स्थानों पर उचित ब्रेकर नहीं होने से आवागमन और सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है।<br />उधर, बजरंग नगर क्षेत्र में कई स्थानों पर कचरा सड़कों और खुले स्थानों पर फैला नजर आया। लोगों का कहना है कि सफाई व्यवस्था को नियमित और प्रभावी बनाने की जरूरत है, क्योंकि गंदगी केवल क्षेत्र की सुंदरता ही खराब नहीं करती, बल्कि बारिश के दिनों में नालियों के जाम होने और बीमारियों की आशंका भी बढ़ा देती है। सरस्वती कॉलोनी में सड़क पर बने चैंबरों के क्षतिग्रस्त ढक्कन लोगों के लिए परेशानी और हादसे का कारण बन सकते हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इन समस्याओं की जानकारी कई बार संबंधित विभागों और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाई गई, लेकिन स्थायी समाधान की प्रतीक्षा अब भी बनी हुई है।</p>
<p><strong>गार्डन और सामुदायिक भवनों की भी दरकार</strong><br />कई इलाकों में लोगों ने गार्डन और सामुदायिक भवनों की कमी को भी जाहिर किया। जिन क्षेत्रों में ये सुविधाएं नहीं हैं, वहां स्थानीय लोगों को सामाजिक और सामुदायिक आयोजनों के लिए उचित स्थान नहीं मिल पाता। वहीं जहां गार्डन बने हुए हैं, वहां भी पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं होने से शाम के समय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए सुरक्षित और सुविधायुक्त सार्वजनिक स्थानों की मांग लगातार उठ रही है। लोगों का कहना है कि वे विकास के विरोध में नहीं, बल्कि अधूरे विकास के खिलाफ सवाल उठा रहे हैं। उनकी सबसे बड़ी अपेक्षा यही है कि चुनावी वादे केवल मंचों और प्रचार तक सीमित न रहें, बल्कि उनकी समयबद्ध समीक्षा हो। ह्लजिस उम्मीद के साथ जनप्रतिनिधि वोट मांगने आए थे और जिस भरोसे के साथ हमने उन्हें वोट दिया, वह उम्मीद पूरी नहीं हो सकी,ह्व यह समस्या कई वार्डों के लोगों की बातचीत में साफ सुनाई दी।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर व एरिया</strong><br /><strong>वार्ड नंबर 66</strong> में फकीरों की मस्जिद के पीछे का क्षेत्र, कन्या छात्रावास के पीछे का क्षेत्र, सामुदायिक भवन के आसपास का क्षेत्र, भूतेश्वर मंदिर, हरदौल बेहरमशाला, शमशान के बांये भाग का क्षेत्र शामिल है।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर 67</strong> में रेगर मोहल्ला, कोटड़ी बड़ी मस्जिद, छोटी मस्जिद, चित्तौड़ा की दुकान, जनता डेयरी, खंडेलवाल धर्मशाला का समस्त क्षेत्र, पेट्रोल पंप के पीछे का क्षेत्र और दादी शाल्लो का चौक शामिल हैं।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर 68</strong> में पंचवटी कॉलोनी, अल्फा कॉम्प्लेक्स, न्यू गोपाल विहार, गणपति कॉलोनी, अटवाल नगर, आदित्य आवास कॉलोनी, वैभव नगर, बजरंग नगर, पुलिस लाइन, नयागांव और केसर बाग आदि क्षेत्र शामिल हैं।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर 69 </strong>में ग्रामीण पुलिस लाइन रोड प्रथम, लाजपत नगर, सूर्य नगर, जय अंबे नगर, अटवाल नगर लिंक रोड, आदित्य नगर, फ्रेंड्स कॉलोनी, भारत विहार, सुखधाम कॉलोनी, जय हिंद नगर और गोपाल विहार प्रथम क्षेत्र शामिल हैं।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर 70</strong> में प्रगति स्कूल, प्रगति नगर, रेलवे सोसाइटी, 80 बीघा जमीन, आरके नगर, जय हिंद नगर, पुलिस लाइन, शिव नगर, गायत्री विहार प्रथम एवं द्वितीय, एसपी कार्यालय, मन्ना कॉलोनी, शमशान, सुलभ कॉम्प्लेक्स, गणेश नगर, सरकारी स्कूल, अमृत कॉलोनी, खारा कुआं, बालाजी की बगीची, मस्जिदवास और सैन्य क्षेत्र शामिल हैं।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर 71</strong> में सरस्वती कॉलोनी, जेडीबी कॉलेज, राजेंद्र विहार, आकाशवाणी कॉलोनी, अमृत कलश, गुलाब बाग और गायत्री विहार शामिल हैं।</p>
<p><strong>वार्डवासी उदयभान सिंह ने बताया</strong><br />वार्ड क्षेत्र में साफ-सफाई की समस्या लगातार बनी हुई है। कई बार लोगों को अपनी समस्याओं का समाधान खुद ही निकालना पड़ता है। चुनाव के बाद जनप्रतिनिधि भी क्षेत्र में कम नजर आते हैं, ऐसे में वार्डवासियों को अपनी समस्याएं किसके सामने रखें, यह सबसे बड़ी परेशानी है। उन्होंने नियमित सफाई व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों की सक्रियता की मांग की।</p>
<p><strong>वार्डवासी जुबेर पठान ने बताया</strong><br />वार्ड की स्थिति संतोषजनक नहीं है। कई स्थानों पर नालियां टूटी हुई हैं और स्पीड ब्रेकर भी क्षतिग्रस्त पड़े हैं। क्षेत्र में साफ-सफाई का अभाव बना रहता है, जिससे लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है। उन्होंने कहा कि समय पर नालियों और टूटे ब्रेकरों की मरम्मत के साथ नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद राजेंद्र सुवालका का कहना</strong><br />कार्यकाल में वार्ड क्षेत्र की हर कॉलोनी तक सीसी रोड का निर्माण करवाने का प्रयास किया गया। गायत्री विहार में ठेकेदार अधूरा काम छोड़कर चला गया, जिससे कुछ विकास कार्य पूरे नहीं हो सके। इसके बाद सरकार बदलने के कारण भी शेष कार्य आगे नहीं बढ़ पाए और कई योजनाएं अधूरी रह गईं।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद विजय लक्ष्मी का कहना</strong><br />वार्ड क्षेत्र में नियमित रूप से कचरा संग्रहण के लिए वाहन चार-पांच बार आते हैं, लेकिन स्वच्छता के लिए जनता की भागीदारी भी जरूरी है। उन्होंने लोगों से वार्ड में गंदगी नहीं फैलाने की अपील की। वार्ड क्षेत्र में सुलभ शौचालय का निर्माण भी करवाया गया और पांच साल के कार्यकाल में विकास कार्यों के लिए लगातार प्रयास किए गए।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद जियाउद्दीन का कहना</strong><br />उनके कार्यकाल में वार्ड क्षेत्र में पानी की पाइपलाइन डलवाने के साथ आवश्यक विकास कार्य करवाए गए। गणपति लाइन के अंदर सीसी रोड का निर्माण भी कराया गया, जिससे क्षेत्रवासियों को बेहतर आवागमन की सुविधा मिली। पूरे कार्यकाल के दौरान साफ-सफाई व्यवस्था पर विशेष ध्यान रखा गया और वार्ड की मूलभूत समस्याओं के समाधान के प्रयास किए गए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Aug 2026 15:20:42 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>शहर में शामिल, फिर भी गांव जैसे हालात</title>
                                    <description><![CDATA[बोले- नगर निगम में शामिल होने के बाद भी नहीं मिलीं शहर जैसी सुविधाएं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/included-in-the-city--yet-conditions-resemble-a-village/article-163224"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(6)12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा शहर की सीमा में शामिल होने के बावजूद वार्ड नंबर 1 से 5 तक के कई इलाकों की तस्वीर आज भी गांव जैसी नजर आती है। शहर का हिस्सा होने के बावजूद यहां रहने वाले लोगों को सड़क, पानी, बिजली, नाली और स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। कई जगह मुख्य सड़कें क्षतिग्रस्त हैं तो कहीं नालियों का पानी सड़कों पर बहता रहता है। बारिश के दिनों में हालात और खराब हो जाते हैं। सड़क पर जमा गंदा पानी पैदल राहगीरों के साथ वाहन चालकों के लिए भी परेशानी का कारण बन रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्याओं के समाधान और क्षेत्र के विकास की उम्मीद में जनप्रतिनिधि चुने, लेकिन उम्मीद के मुताबिक काम नहीं हो पाया। कई इलाकों में आज भी विकास कार्यों की दरकार है। लोगों का कहना है कि नगर निगम क्षेत्र में आने के बाद भी यदि मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलें तो शहर और गांव में अंतर ही क्या रह जाता है।</p>
<p><strong>कहीं सड़क बदहाल तो कहीं नालियों का पानी सड़कों पर</strong><br />इन वार्डों के कई क्षेत्रों में सड़कें लंबे समय से क्षतिग्रस्त हैं। जगह-जगह गड्ढे होने से वाहन चालकों को परेशानी होती है। कई स्थानों पर नालियों की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण घरों और गलियों का पानी सड़क पर आ जाता है। इससे लोगों को पैदल निकलने में भी परेशानी होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार संबंधित अधिकारियों तक शिकायत पहुंचाने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं हुआ। स्ट्रीट लाइटों की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है। लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर पोल तो लगे हैं, लेकिन लाइटें नियमित रूप से नहीं जलतीं। रात के समय अंधेरा रहने से लोगों को परेशानी होती है। ग्रामीण क्षेत्र से शहर का हिस्सा बने इन इलाकों में तेजी से विकास की जरूरत है, लेकिन सुविधाओं का विस्तार उस गति से नहीं हुआ है।</p>
<p><strong>शहर जैसी सुविधाओं की उम्मीद, विकास अंतिम छोर तक पहुंचे</strong><br />क्षेत्रों के लोगों की सबसे बड़ी मांग अब शहर जैसी मूलभूत सुविधाओं की है। लोगों का कहना है कि केवल वार्ड सीमा में शामिल करना पर्याप्त नहीं, बल्कि विकास का लाभ भी अंतिम छोर तक पहुंचना चाहिए। मुख्य सड़कों की मरम्मत, नालियों की नियमित सफाई, जलभराव का स्थायी समाधान और खराब स्ट्रीट लाइटों को दुरुस्त करना प्राथमिकता होनी चाहिए। स्थानीय लोगों को ऐसे प्रतिनिधि की उम्मीद है, जो उनके बीच रहकर समस्याएं सुने और अधिकारियों से समन्वय कर समाधान करवाए। लोगों का कहना है कि अब गांव जैसी बदहाली नहीं, बल्कि शहर जैसी सुविधाएं चाहिए।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर और क्षेत्र</strong><br /><strong>वार्ड नंबर 1-</strong> शंभूपुरा, गिरधरपुरा एवं गोवर्धनपुरा ग्राम<br /><strong>वार्ड नंबर 2-</strong> कबीर आश्रम, विजय राजे सिंधिया चौराहा, ज्ञान सरोवर कॉलोनी, नयागांव उर्फ दौलतगंज, रोझड़ी का आंशिक भाग, पटवार ट्रेनिंग स्कूल, मोदी इंस्टीट्यूट, कौटिल्य कॉलेज आदि<br /><strong>वार्ड नंबर 3- </strong>ग्राम आमली, रथकांकरा, बंधा, धरमपुरा की समस्त राजस्व सीमा, देवनारायण योजना, रोझड़ी राजस्व ग्राम का आंशिक भाग, धरमपुरा रोड की समस्त कॉलोनियां<br /><strong>वार्ड नंबर 4- </strong>रानपुर, पुनिया देवरी, रानपुर एजुकेशन एरिया, रेतिया चौकी, लखावा, जगपुरा, खेड़ा जगपुरा, भीमपुरा, उमेदपुरा, भामाशाह मंडी, रानपुर औद्योगिक क्षेत्र, कोयला तलाई आदि<br /><strong>वार्ड नंबर 5-</strong> कंवरपुरा ग्राम, श्रीराम नगर, कच्ची बस्ती, कहारों की बस्ती, डीसीएम कॉलोनी, डीसीएम श्रीराम फैक्ट्री, श्रीराम कॉलोनी, उमेदगंज गांव का संपूर्ण क्षेत्र, राजनगर का आंशिक क्षेत्र, मानसरोवर कॉलोनी, कोटा क्लब, गायत्री विहार एवं रायपुरा क्षेत्र शामिल है।</p>
<p>घर-घर पाइपलाइन पहुंचाने के साथ सड़क निर्माण, स्कूल निर्माण और सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करवाया गया। वार्डवासियों की सुविधा के लिए पट्टे बनवाने का काम भी किया गया। उन्होंने कहा कि वार्ड के लोगों की समस्याओं को सुनकर उनका समाधान करवाने का हरसंभव प्रयास किया गया और जरूरत के अनुसार विकास कार्यों को गति दी गई।<br /><strong>-पवन मीणा,पूर्व पार्षद </strong></p>
<p>पार्षद कार्यकाल के दौरान राजनीतिक फेरबदल के कारण उनके साथ भेदभाव किया गया, जिसके चलते वार्ड में प्रस्तावित कई विकास कार्य पूरे नहीं हो सके। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि के रूप में उनकी प्राथमिकता हमेशा वार्डवासियों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाना और उनकी समस्याओं का समय पर समाधान करना रही।<br /><strong>- सोनू भील,पूर्व पार्षद </strong></p>
<p>वार्ड की स्थिति आज भी गांव जैसी बनी हुई है। नगर निगम क्षेत्र में शामिल होने के बावजूद यहां मूलभूत सुविधाओं का अपेक्षित विकास नहीं हो पाया है। जनप्रतिनिधियों के साथ निगम के अधिकारियों ने भी वार्ड की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। इसके कारण स्थानीय लोगों को सड़क, सफाई और अन्य जरूरी सुविधाओं को लेकर लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।<br /><strong>-कपिल गुर्जर,वार्डवासी</strong></p>
<p>वार्ड में सड़कें लगातार क्षतिग्रस्त हो रही हैं और जगह-जगह बड़े गड्ढे बने हुए हैं। बारिश के दौरान इन गड्ढों में पानी भरने से वाहन चालकों और राहगीरों को काफी परेशानी होती है। उन्होंने बताया कि वार्ड में रोड लाइटें तो लगाई गई हैं, लेकिन कई जगह रात के समय ये जलती नहीं हैं। इससे अंधेरा रहने के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी होती है और दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।<br /><strong>- भागचंद,वार्डवासी</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 14:31:12 +0530</pubDate>
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                <title>अस्पताल या तालाब! बारिश में डूबा अटरू चिकित्सालय परिसर</title>
                                    <description><![CDATA[ नगरपालिका निरीक्षण में खुलासा, बंद नालियां और खराब ड्रेनेज बनीं जलभराव की मुख्य वजह।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/hospital-or-pond--atru-hospital-complex-submerged-in-rainwater/article-162363"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)41.png" alt=""></a><br /><p>अटरू। बरसात आते ही अटरू उपजिला चिकित्सालय में मरीजों के  लिए इलाज से पहले पानी से जूझने की  मजबूरी बन जाती है। अस्पताल परिसर में जमा बारिश का पानी व्यवस्था की ऐसी तस्वीर पेश कर रहा है, मानो चिकित्सालय नहीं बल्कि तालाब हो। हर वर्ष सामने आने वाली इस समस्या की पड़ताल में जलभराव की असली वजह सामने आई है। नगरपालिका के निरीक्षण में अस्पताल परिसर की नालियों कचरे, मिट्टी और मलबे से बंद मिलीं, जिसके कारण बारिश का पानी बाहर नहीं निकल पा रहा है। अस्पताल परिसर में पानी भरने से मरीजों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इलाज के लिए आने वाले लोगों को कई बार पानी भरे रास्तों से होकर अस्पताल तक पहुंचना पड़ता है। जलभराव के कारण संक्रमण फैलने और मच्छरों के पनपने का खतरा भी बना रहता है।</p>
<p><strong>हर मानसून में दोहराती है समस्या</strong><br />स्थानीय लोगों के अनुसार अटरू उपजिला चिकित्सालय में जलभराव की समस्या कोई नई नहीं है। कई वर्षों से बारिश के मौसम में यही स्थिति बनती आ रही है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र के प्रमुख सरकारी अस्पताल में जहां मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा  मिलनी चाहिए, वहीं बरसात के दिनों में परिसर में जमा पानी परेशानी का कारण बन जाता है। </p>
<p><strong>निरीक्षण में बंद मिलीं अस्पताल की नालियां</strong><br />जलभराव की शिकायत मिलने पर नगरपालिका के कार्यवाहक अधिशासी अधिकारी योगेन्द्र प्रसाद त्रिवेदी ने स्वास्थ्य निरीक्षक मदनमोहन भार्गव को अस्पताल परिसर का निरीक्षण करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान सामने आया कि अस्पताल परिसर के अंदर बनी कई नालियां कचरे, मिट्टी और मलबे के कारण पूरी तरह बंद पड़ी हैं। इसके चलते बारिश का पानी नालियों के माध्यम से बाहर नहीं निकल पा रहा है और परिसर में जमा हो रहा है। निरीक्षण में यह तथ्य भी सामने आया कि अस्पतालपरिसर का स्तर बाहरी सड़क की तुलना में काफी नीचा है, जबकि बाहर की नालियां ऊंची हो चुकी हैं। इसी वजह से बारिश का पानी बाहर निकलने के बजाय अस्पताल परिसर में ही रुक जाता है और जलभराव की स्थिति बन जाती है।</p>
<p><strong>बीसीएमओ ने बताई वर्षों पुरानी समस्या</strong><br />ब्लॉक चिक्रित्सा अधिकारी डॉ. केशवराज नागर ने बताया कि बरसात के दौरान अस्पताल परिसर में जलभराव की समस्या हर वर्ष सामने आती है। इस संबंध में कई बार नगरपालिका को अवगत कराया है, लेकिन अभी तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। उन्होंने अस्पताल के बाहर स्थित बड़े नालों की सफाई कराने के साथ ही स्थायी ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने की आवश्यकता बताई।</p>
<p><strong>सिर्फ सफाई नहीं, स्थायी समाधान की जरूरत</strong><br />कार्यवाहक अधिशासी अधिकारी योगेन्द्र प्रसाद त्रिवेदी ने बताया कि अस्पताल के बाहर स्थित बड़े नालों की पहले भी सफाई करवाई जा चुकी है। यदि जल निकासी की समस्या फिर भी बनी हुई है तो दोबारा निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य निरीक्षक की रिपोर्ट में अस्पताल परिसर की आंतरिक नालियां बंद होने और बाहरी नालियों के ऊंचे स्तर के कारण जल निकासी प्रभावित होने की बात सामने आई है। समस्या के स्थायी समाधाम के लिए अस्पताल परिसर का स्तर ऊंचा करना होगा। साथ ही अंदर की नालियों का पुनर्निर्माण कर उन्हें बाहरी ड्रेनेज सिस्टम से वैज्ञानिक तरीके से जोड़ना जरूरी है।</p>
<p><strong>नागरिकों ने मांगा स्थायी ड्रेनेज सिस्टम</strong><br />स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और नगरपालिका से मांग की है कि हर वर्ष होने वाली जलभराव की समस्या को केवल नालियों की सफाई तक सीमित न रखा जाए। अस्पताल परिसर में स्थायी जल निकासी व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि मानसून के दौरान मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।</p>
<p><strong>इनका  कहना है </strong><br /> बरसात के मौसम में अस्पताल परिसर में हर वर्ष जलभराव की समस्या आती है। प्रत्येक वर्ष नगरपालिका को अवगत कराया जाता है, लेकिन अब तक पानी निकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकी। अस्पताल के बाहर जाम पड़े बड़े नालों की सफाई कराने तथा अस्पताल के लिए स्थायी ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने की आवश्यकता है ताकि हर मानसून में होने वाली इस समस्या का स्थायी समाधान हो सके।<br /><strong>- डॉ. केशवराज नागर, ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी</strong></p>
<p> अस्पताल के बाहर स्थित बड़े नालों की पूर्व में सफाई करवाई जा चुकी है। यदि फिर भी जल निकासी की समस्या बनी हुई है तो दोबारा निरीक्षण कर आवश्यकतानुसार नालों की सफाई करवाई जाएगी। स्वास्थ्य निरीक्षक मदनमोहन भार्गव की रिपोर्ट में अस्पताल परिसर की आंतरिक नालियां बंद होने तथा बाहरी नालियों के ऊंचे स्तर के कारण जल निकासी प्रभावित होने की बात सामने आई है।<br /><strong>- योगेन्द्र प्रसाद त्रिवेदी, कार्यवाहक अधिशासी अधिकारी, नगरपालिका अटरू</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 14:56:53 +0530</pubDate>
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                <title>लाल बहादुर शास्त्री बस स्टैंड का बदलेगा स्वरूप, सीसी सड़क निर्माण कार्य तेज</title>
                                    <description><![CDATA[जलनिकासी की बेहतर योजना से बारिश में जलभराव की समस्या होगी कम।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/lal-bahadur-shastri-bus-stand-set-for-a-makeover--cc-road-construction-work-accelerates/article-161703"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(1)4.png" alt=""></a><br /><p>बपावरकला। लाल बहादुर शास्त्री बस स्टैंड पर सीसी सड़क निर्माण कार्य इन दिनों तेजी से प्रगति पर है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद बस स्टैंड क्षेत्र का स्वरूप बदलने के साथ स्थानीय लोगों एवं वाहन चालकों को बेहतर आवागमन सुविधा मिलने की उम्मीद है। निर्माण एजेंसी की ओर से निर्धारित मानकों के अनुरूप कार्य कराया जा रहा है तथा जलनिकासी की व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। निर्माण कार्य के दौरान बस स्टैंडपरिसर में सीसी सड़क का निर्माण तेजी से जारी है। स्थानीय नागरिकों ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ वर्षा ऋतु में जलभराव की समस्या से बचाव के लिए समुचित जलनिकासी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि सड़क के साथ नालियों का निर्माण भी प्रभावी ढंग से किया जाएगा तो भविष्य में लोगों को जलभराव और कीचड़ जैसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा।</p>
<p>लाल बहादुर शास्त्री बस स्टैंड का सीसी सड़क निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप किया जा रहा है। सड़क निर्माण के साथ पानी की निकासी के लिए नालियों एवं नालों का निर्माण भी समानांतर रूप से कराया जा रहा है, ताकि बरसात के दौरानं जलभराव की स्थिति उत्पन्न न हो। कार्य पूर्ण होने के बाद बस स्टैंड क्षेत्र में यातायात व्यवस्था अधिक सुगम होगी और आमजन को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।<br /><strong>- पूजा नामा, कनिष्ठ अभियंता, आरएसआरडीसी।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 16:31:04 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मानसून की मोहलत कह रही सावधान, बारिश तेज हुई तो सड़क से लेकर बिजली तक बढ़ेगा खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[मानसून में करंट से पहले सुरक्षा का इंतजाम जरूरी, खुले ट्रांसफार्मर बन सकते हैं जानलेवा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-monsoon-s-delayed-arrival-serves-as-a-warning--if-rainfall-intensifies--risks-ranging-from-road-hazards-to-electrical-dangers-will-escalate/article-160025"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(1)52.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में मानसून दस्तक दे चुका है। आसमान में बादल छा रहे हैं, बारिश का मौसम भी बन रहा है, लेकिन अभी झमाझम बारिश का दौर शुरू नहीं हुआ है। मौसम की यह मोहलत प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए शहर की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का आखिरी अवसर साबित हो सकती है। आने वाले दिनों में बारिश का दौर तेज हुआ तो शहर की कुछ बदहाल सड़कें, ब्रिजों के नीचे जलभराव और खुले विद्युत ट्रांसफार्मर लोगों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर सकते हैं। शहर के कई प्रमुख मार्गों पर अभी से सड़क की स्थिति चिंता बढ़ा रही है। कहीं गिट्टी बिखरी पड़ी है तो कहीं छोटे-बड़े गड्ढे वाहन चालकों की राह मुश्किल कर रहे हैं। फिलहाल बारिश नहीं होने के कारण इन रास्तों से आवागमन हो रहा है, लेकिन लगातार बारिश शुरू होते ही यही छोटी खामियां बड़ी समस्या में बदल सकती हैं। गड्ढों में पानी भरने के बाद उनकी गहराई का अंदाजा नहीं रहता और दोपहिया वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।</p>
<p><strong>बारिश से पहले भरें गड्ढे, वरना पानी छिपा देगा खतरा</strong><br />मोहन टॉकीज रोड, नयापुरा से एरोड्रम जाने वाले मार्ग और छावनी से नयापुरा की ओर आने वाले रास्ते सहित शहर के कुछ प्रमुख मार्गों पर कहीं गिट्टी फैली हुई है तो कहीं सड़क पर गड्ढे नजर आ रहे हैं। इन मार्गों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में दोपहिया, चारपहिया और अन्य वाहन गुजरते हैं। अभी इन स्थानों की मरम्मत कर दी जाए तो लोगों को राहत मिल सकती है, लेकिन बारिश तेज होने के बाद मरम्मत कार्य करना भी मुश्किल हो सकता है।</p>
<p><strong>ब्रिज के नीचे पानी भरा तो थमेगी रफ्तार</strong><br />शहर में बने कुछ ब्रिजों के अंडरपास के नीचे बारिश के दौरान जलभराव की समस्या भी सामने आती रही है। तेज बारिश के बाद यदि पानी की निकासी समय पर नहीं हो तो कुछ ही देर में सड़क पर पानी जमा हो जाता है। इससे वाहन चालकों को रास्ता बदलना पड़ता है और यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है। । नतीजा यह होता है कि कुछ घंटों की बारिश लोगों के लिए घंटों की परेशानी बन जाती है। यदि बारिश रात के समय हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में पंपिंग व्यवस्था, ड्रेनेज की सफाई और आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई के इंतजाम पहले से तैयार रखना जरूरी है।</p>
<p><strong>खुले ट्रांसफार्मर पर सुरक्षा घेरा जरूरी, बारिश में बढ़ सकता है करंट का खतरा</strong><br />सड़कों और जलभराव के साथ शहर में खुले विद्युत ट्रांसफार्मर भी चिंता का विषय हैं। कई स्थानों पर ट्रांसफार्मर और विद्युत उपकरण खुले क्षेत्र में लगे हुए हैं। बारिश के दौरान आसपास पानी भरने या बिजली के तारों और उपकरणों में तकनीकी खराबी आने पर करंट का खतरा बढ़ सकता है। विशेष रूप से ऐसे स्थान जहां बच्चों, राहगीरों और पशुओं की आवाजाही अधिक रहती है, वहां सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है। सड़क के गड्ढे भरना, बिखरी गिट्टी हटाना, जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करना और खुले ट्रांसफार्मरों को सुरक्षित करना ऐसे काम हैं जिन्हें तेज बारिश से पहले पूरा किया जाना चाहिए।</p>
<p><strong>बारिश से पहले हो काम, बाद में केवल खानापूर्ति नहीं</strong><br />गड्ढे अभी दिखाई दे रहे हैं, बारिश में इनमें पानी भर जाएगा। तब वाहन चालक को पता ही नहीं चलेगा कि गड्ढा कितना गहरा है। प्रशासन को बारिश से पहले ही सड़कों की मरम्मत करनी चाहिए। सड़क पर फैली गिट्टी दोपहिया वाहन चालकों के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक है। बारिश में सड़क गीली होने पर वाहन फिसलने का डर रहता है। इसे समय रहते हटाया जाना चाहिए। हर साल तेज बारिश के बाद कई स्थानों पर जलभराव की समस्या सामने आती है। यदि नालियों और ड्रेनेज की सफाई पहले ही हो जाए तो लोगों को काफी राहत मिल सकती है। खुले ट्रांसफार्मर बारिश के दिनों में बड़ा खतरा बन सकते हैं। विद्युत विभाग को ऐसे स्थानों की पहचान कर सुरक्षा जाली और अन्य इंतजाम करने चाहिए।”<br /><strong>-राहुल शर्मा, वाहन चालक</strong></p>
<p><strong>बारिश का इंतजार क्यों?</strong><br />मानसून आ चुका है और तेज बारिश का दौर कभी भी शुरू हो सकता है। विभागों के सामने सवाल साफ हैं—क्या सड़कों के गड्ढे बारिश से पहले भरे जाएंगे? क्या बिखरी गिट्टी हटेगी? क्या ब्रिजों के नीचे जल निकासी की जांच होगी? क्या खुले ट्रांसफार्मरों को सुरक्षित किया जाएगा? अभी कार्रवाई हुई तो शहर को बड़ी परेशानी से बचाया जा सकता है। यदि इंतजार तेज बारिश और शिकायतों का किया गया तो लोगों को परेशानी झेलनी पड़ेगी और विभागों को फिर आपातकालीन मरम्मत में जुटना होगा। बारिश कब होगी, यह मौसम तय करेगा, लेकिन शहर बारिश के लिए कितना तैयार होगा, यह जिम्मेदार विभागों को तय करना है।<br /><strong>-हरपाल सिंह राणा, शहरवासी</strong></p>
<p>बारिश के मौसम को देखते हुए नगर निगम प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। अधिकारियों के साथ बैठक कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई और संभावित जलभराव व आपात स्थितियों से निपटने के लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है। निगम व केडीए प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को अलर्ट मोड पर रहते हुए त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।<br /><strong>-पीयूष समारिया, जिला कलक्टर कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 15:09:13 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बारिश बनी एमबीएस अस्पताल की सबसे बड़ी परीक्षा : बदहाल ड्रेनेज व्यवस्था बनी मरीजों की मुसीबत</title>
                                    <description><![CDATA[ नई बिल्डिंग, सेंट्रल लैब और अधीक्षक कार्यालय तक जाने वाले रास्तों पर भरता है पानी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/rain-poses-the-biggest-challenge-for-mbs-hospital--poor-drainage-system-causes-trouble-for-patients/article-159324"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(1)20.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल में मानसून की पहली बारिश के साथ ही वर्षों पुरानी जलभराव की समस्या फिर सामने आने लगती है। अस्पताल की नई बिल्डिंग के बाहर, सेंट्रल लैब, अधीक्षक कार्यालय तक जाने वाले मार्ग सहित कई स्थानों पर थोड़ी सी बारिश के बाद ही पानी भर जाता है। मरीजों, उनके परिजनों और अस्पताल स्टाफ को पानी से होकर गुजरना पड़ता है। कई बार स्ट्रेचर और व्हीलचेयर निकालने तक में परेशानी होती है, जिससे गंभीर मरीजों को समय पर उपचार तक पहुंचाने में दिक्कत आती है।</p>
<p>अस्पताल प्रशासन ने पिछले कुछ समय में पुरानी बिल्डिंग से पर्ची काउंटर, जांच काउंटर और इमरजेंसी ओपीडी जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं को नई बिल्डिंग में स्थानांतरित कर दिया है। इससे मरीजों को आधुनिक सुविधाओं का लाभ मिला है और एक ही स्थान पर अधिकांश सेवाएं उपलब्ध होने लगी हैं। लेकिन बारिश के दौरान नई बिल्डिंग के बाहर जलभराव होने से मरीजों को इन सुविधाओं तक पहुंचने में परेशानी उठानी पड़ती है। हालांकि पुरानी बिल्डिंग में अब मुख्य रूप से भर्ती मरीजों को रखा जाता है, लेकिन बारिश के मौसम में वहां भी सीलन, पानी टपकने और आसपास जलभराव जैसी समस्याएं सामने आती हैं।</p>
<p><strong>मोर्चरी तक पहुंचने वाला रास्ता बना सबसे बड़ी चिंता</strong><br />एमबीएस अस्पताल से मोर्चरी की ओर जाने वाला मार्ग लंबे समय से जर्जर हालत में है। सड़क जगह-जगह से उखड़ चुकी है और बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं। बारिश के दौरान इन गड्ढों में पानी भर जाता है, जिससे उनकी गहराई का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में एंबुलेंस, शव वाहन, अस्पताल के अन्य वाहन और पैदल आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। हालात इतने खराब हो जाते हैं कि कई बार मोर्चरी तक पहुंचना भी चुनौती बन जाता है। शव लेकर आने वाले परिजनों को भी कीचड़ और जलभराव के बीच से गुजरना पड़ता है। अस्पताल परिसर का यह मार्ग वर्षों से मरम्मत का इंतजार कर रहा है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है।</p>
<p>डॉक्टरों की सेवाएं और चिकित्सा सुविधाएं बेहतर हैं, लेकिन बारिश के मौसम में अस्पताल परिसर की स्थिति चिंता बढ़ा देती है।<br /><strong>-सुशिला बाई, मरीज</strong></p>
<p>- नई बिल्डिंग बनने से सुविधाएं तो बढ़ी हैं, लेकिन बारिश के समय बाहर पानी भर जाता है। बुजुर्ग और गंभीर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में काफी परेशानी होती है।<br /><strong>सुरज सिंह, मरीज</strong></p>
<p>सेंट्रल लैब और जांच काउंटर तक जाने में पानी और कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है। प्रशासन को ड्रेनेज व्यवस्था स्थायी रूप से सुधारनी चाहिए। मोर्चरी की सड़क इतनी खराब है कि बारिश में गड्ढे दिखाई ही नहीं देते। एंबुलेंस तक हिचकोले खाती हुई गुजरती है। अस्पताल परिसर की सड़कें जल्द से जल्द बनाई जानी चाहिए।<br /><strong>- श्वेता गुर्जर, मरीज</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मानसून को देखते हुए अस्पताल परिसर की सभी प्रमुख नालियों की सफाई करवाई जा रही है ताकि पानी की निकासी बाधित न हो। संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं और लगातार निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने बताया कि स्थायी समाधान के लिए केडीए को ड्रेनेज निर्माण का कार्य सौंप दिया गया है। फिलहाल वर्क ऑर्डर जारी होने की प्रक्रिया चल रही है। जैसे ही कार्यादेश मिलेगा, सबसे पहले अस्पताल परिसर में आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जाएगा। इसके बाद क्षतिग्रस्त और जर्जर सड़कों का पुनर्निर्माण कराया जाएगा, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को राहत मिल सके।<br /><strong>- डॉ. आर.के. सिंह, अधीक्षक एमबीएस अस्पताल</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 14:36:30 +0530</pubDate>
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                <title>पहली बारिश में डूबी व्यवस्थाएं : लाखों खर्च के बावजूद सफाई व्यवस्था फेल</title>
                                    <description><![CDATA[जाम नालियों से बढ़ी परेशानी, नगरपालिका की कार्यशैली पर उठाए सवाल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/systems-overwhelmed-by-the-first-rain--sanitation-efforts-fail-despite-heavy-spending/article-157354"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(3)26.png" alt=""></a><br /><p>अटरू। राज्य सरकार के शहरी सेवा शिविरों में जनसमस्याओं के समाधान के दावों के बीच अटरू कस्बे में पहली ही बारिश ने नगरपालिका की तैयारियों की हकीकत उजागर कर दी। मुख्य बाजार, मुख्य सड़क और कई मोहल्लों में जलभराव की स्थिति बनने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। नालियों की सफाई नहीं होने और जल निकासी व्यवस्था के कमजोर होने से आमजन में नाराजगी देखने को मिली। राज्य सरकार, के निर्देशानुसार आयोजित शहरी सेवा शिविरों में आमजन की समस्याओं के समाधान के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन अटरू कस्बे की सफाई एवं जल निकासी व्यवस्था की जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। पहली बारिश ने नगरपालिका की तैयारियों की पोल खोलकर रख दी है। मुख्य बाजार, मुख्य रोड और कई मोहल्लों में जलभराव की स्थिति बनने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।</p>
<p><strong>नालियों पर बने पक्के ढकान बने समस्या की वजह</strong><br />स्थानीय नागरिक पवन मालवीय, गणेश सेन और लोकेश पंचोली ने बताया कि मुख्य रोड क्षेत्र में कई स्थानों पर दुकानों के सामने नालियों पर पक्के ढकान बना दिए गए हैं। इन डंकानों के कारण नालियों की नियमित सफाई नहीं हो पाती, जिससे उनमें गाद और कचरा जमा हो जाता है। परिणामस्वरूप पानी का प्रवाह बाधित हो जाता हैऔर थोड़ी सी बारिश में ही सड़कें जलमग्न हो जाती हैं। नागरिकों का कहना है कि पहले नालियों से पानी का निकास सुचारु रूप से हो जाता था, लेकिन अब सफाई व्यवस्था की अनदेखी और अवरोधों के कारण हालात बिगड़ते जा रहे हैं।</p>
<p><strong>जनता की ये है प्रमुख मांगें</strong><br />अटरू कस्बे में जलभराव और सफाई व्यवस्था की बदहाल स्थिति को देखते हुए स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन और नगरपालिका के समक्ष कई महत्वपूर्ण मांगे रखी हैं। लोगों का कहना है कि बरसात के मौसम में राहत देने के लिए तत्काल कराई जाए। साथ ही नालों पर बने अवैध एवं स्थायी अवरोधों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि पानी की निकासी सुचारु रूप से हो सके। पूरे कस्बे की जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए तथा सफाई व्यवस्था की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर प्रभावी कार्रवाई की जाए, जिससे भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।</p>
<p><strong>सड़कों पर भरा बारिश का पानी</strong><br />स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात से पूर्व नालियों की समुचित सफाई नहीं होने के कारण बारिश का पानी सड़कों पर भर गया। कई स्थानों पर गंदा पानी दुकानों के सामने तक पहुंच गया, जिससे व्यापारियों और राहगीरों को परेशानी उठानी पड़ी। हालात ऐसे बने कि कई जगह लोगों को स्वयं नालियों की सफाई कर पानी की निकासी करनी पड़ी।</p>
<p><strong>कलेक्टर के निर्देशों पर उठे सवाल</strong><br />गौरतलब है कि जिला कलक्टर बालमुकुंद असावा समय-समय पर शहरी सेवा शिविरों एवं नगर निकायों का निरीक्षण कर आवश्यक दिशा-निर्देश देते रहे हैं। इसके बावजूद पहली ही बरसात में जलभराव और गंदगी की स्थिति सामने आने से व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।  स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते नालियों की सफाई और जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया तो आगामी बरसात में स्थिति और गंभीर हो सकती है।</p>
<p><strong>दुकानदार खुद कर रहे जाम नालियों की सफाई</strong><br />नगरपालिका की ओर से समय पर सफाई नहीं होने के कारण मुख्य बाजार क्षेत्र के दुकानदारों को खुद नालियों की सफाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। बारिश के दौरान जब नालियों का पानी सड़कों और दुकानों के सामने जमा हो गया, तब कई व्यापारियों ने फावड़े और अन्य उपकरणों की मदद से नालियों में जमा कचरा और गाद निकालकर पानी की निकासी का प्रयास किया। दुकानदारों का कहना है कि नियमित सफाई होती तो उन्हें यह काम स्वयं नहीं करना पड़ता। उन्होंने बताया कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद सफाई व्यवस्था धरातल पर नजर नहीं आ रही है, जिसका खामियाजा आमजन और व्यापारियों को भुगतना पड़ रहा है।</p>
<p>मुख्य रोड एवं बाजार क्षेत्र में जलभराव तथा नालियों की समस्या को शिकायतें संज्ञान में आई हैं। प्रशासन द्वारा तथा नगरपालिका प्रशासन को आवश्यक निर्देश देकर समस्या के समाधान के लिए कार्रवाई कराई जाएगी। जहां भी नालियों में अवरोध, जाम या जलनिकासी संबंधी समस्या पाई जाएगी, वहाँ तत्काल सफाई एवं आवश्यक सुधारात्मक कार्य कराए जाएंगे, ताकि बरसात के दौरान आमजन को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। प्रशासन आमजन की समस्याओं के समाधान के लिए गंभीर है। <br /><strong>-अभिमन्यु कुंतल, कार्यवाहक उपखंड अधिकारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 15:18:01 +0530</pubDate>
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                <title>भण्डेड़ा में जलभराव समस्या पर किसानों की मांग तेज, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[पाइप बंद होते ही ऊपरी क्षेत्र के खेतों में जलभराव हो जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/farmers-in-bhandeda-intensify-demands-regarding-waterlogging-issue/article-156656"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(4)3.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। क्षेत्र में आगामी बरसात को देखते हुए किसानों ने मुख्य सड़कों पर बरसाती पानी निकासी के लिए लगाए गए पाइप बंद करने वाले लोगों के खिलाफ समय रहते सख्त कार्रवाई की मांग की है। किसानों का कहना है कि यदि विभाग पहले से ही ऐसे लोगों को पाबंद कर दे, तो खरीफ फसलों को हर साल होने वाले भारी नुकसान से बचाया जा सकता है। जानकारी के अनुसार बांसी-कालानला मार्ग एवं भण्डेड़ा-सादेड़ा मुख्य मार्ग पर सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा सड़क निर्माण के दौरान पानी निकासी के लिए पाइप लगाए गए थे, ताकि बारिश का पानी खेतों में जमा न होकर आगे निकल सके। लेकिन कई स्थानों पर निचले क्षेत्र के किसान अपने खेतों में पानी जाने से रोकने के लिए इन पाइपों को बंद कर देते हैं। पाइप बंद होते ही ऊपरी क्षेत्र के खेतों में जलभराव की स्थिति बन जाती है और लगातार बारिश के कारण फसलें पूरी तरह खराब हो जाती हैं।</p>
<p> पिछले तीन वर्षों से यही स्थिति बनी हुई है, जिससे हजारों बीघा फसल हर साल बर्बाद हो रही है। किसानों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद विभाग केवल औपचारिक कार्रवाई करता है और मौके पर जाकर स्थिति देखकर लौट जाता है। इससे ऐसे लोगों का हौसला बढ़ता जा रहा है और पाइप बंद करने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि आगामी बरसात से पहले ही ऐसे लोगों को चिन्हित कर पाबंद किया जाए तथा पाइपलाइन व्यवस्था को सुचारू रखा जाए, ताकि किसानों की मेहनत और लाखों की फसल बर्बाद होने से बच सके।</p>
<p><strong>अधिकारी का कहना है </strong><br />क्षेत्र में इस तरह पानी निकासी के पाइप को बन्द करने वाले किसानों को समय से पहले ही पाबंद करवाया जाएगा। फिर भी किसी व्यक्ति ने पाइप बन्द किया, तो उसी समय पुलिस साथ लेकर बंद पाइप को खुलवाया जाएगा। संबंधित व्यक्ति पर कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।<br /><strong>- हरिराम मीणा, अधिशाषी अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग, नैनवां </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 14:38:39 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - एमबीएस एवं जे.के.लोन परिसर में ड्रेनेज समस्या का होगा समाधान, संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में दिए निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति में पांच फरवरी को प्रमुखता से उठाया था मामला ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---drainage-problems-in-the-mbs-and-jk-lon-complexes-will-be-resolved/article-143016"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(12200-x-600-px)-(6)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभागीय आयुक्त अनिल कुमार अग्रवाल की अध्यक्षता में गुरुवार को सीएडी सभागार में आयोजित बैठक में एमबीएस हास्पीटल एवं जे.के.लोन चिकित्सालय परिसर में वर्षा जल भराव की समस्या के समाधान के लिए ड्रेनेज सिस्टम के निर्माण तथा एक एमएलडी के एसटीपी के निर्माण के लिए आरयूआईडीपी से डिजाईन बनवाने के निर्देश दिए गए। बैठक में संभागीय आयुक्त ने निर्देश दिए कि एमबीएस एवं जेके लोन हॉस्पिटल परिसर की क्षतिग्रस्त दीवार का शीघ्र निर्माण कराया जाए। उन्होंने एमबीएस एवं जे.के.लोन चिकित्सालय परिसर में स्थित पुराने, अनुपयोगी, जर्जर एवं नकारा घोषित स्ट्रक्चर को नियमानुसार गिराए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने नवीन आईपीडी के मॉड्यूलर आॅपरेशन थियेटर में पानी के लीकेज, सीपेज एवं टाइल्स उखडने से मरीजों एवं अस्पताल स्टाफ को हो रही समस्या के समाधान के लिए पीडब्ल्यूडी के अभियंताओं को मौका निरीक्षण करने एवं समस्या का स्थाई समाधान निकालने के निर्देश दिए।</p>
<p><strong>आरएमआरएस में उपलब्ध फंड की भी समीक्षा</strong><br />उन्होंने नवीन आईपीडी एवं पुराने भवन को जोड़ने के लिए कनेक्टिंग कोरिडोर का कार्य शीघ्र पूरा करने तथा चिकित्सालय परिसर में लगी हुई खराब लाइटों का ठीक करने के भी निर्देश दिए। बैठक में आरएमआरएस में उपलब्ध फंड एवं प्रगतिरत कार्यों के बारे में भी समीक्षा की गई। बैठक में जिला कलक्टर पीयूष समारिया, केडीए आयुक्त ममता तिवारी, केडीए सचिव मुकेश चौधरी, मेडिकल कॉलेज कोटा की प्राचार्य डॉ. संगीता सक्सेना,एमबीएस हॉस्पिटल अधीक्षक डॉ. धर्मराज मीणा, जेके लोन हॉस्पिटल की अधीक्षक निर्मला शर्मा, निदेशक अभियात्रिंकी केडीए रविन्द्र माथुर, अधिशाषी अभियंता पीडब्ल्यूडी अशोक सनाढय सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि इस सम्बंध में दैनिक नवज्योति में गत पांच फरवरी को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Feb 2026 15:06:41 +0530</pubDate>
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                <title>किराड़ी में जलभराव के लिए 'आप' जिम्मेदार: 11 वर्षो में नहीं बनाई सीवर व्यवस्था, भाजपा मंत्री ने केजरीवाल पर साधा निशाना</title>
                                    <description><![CDATA[पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश सिंह ने किराड़ी जलभराव के लिए पूर्व आप सरकार को जिम्मेदार ठहराया, कहा वर्षों तक सीवर और ड्रेनेज नहीं बने, अब परियोजनाएं तेज़ी से पूरी होंगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/aap-is-responsible-for-waterlogging-in-kirari-sewer-system-has/article-140505"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(2)44.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने किराड़ी विधानसभा क्षेत्र में लगातार हो रहे जलभराव को लेकर पूर्ववर्ती आम आदमी पार्टी (आप) सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुये आरोप लगाया कि पिछले 11 वर्षों में इलाके में न तो सीवर व्यवस्था बनाई गई और न ही समुचित जल निकासी प्रणाली विकसित किया गया।</p>
<p>प्रवेश सिंह ने संवाददाता सम्मेलन में गुरूवार को कहा कि पिछले एक सप्ताह से किराड़ी में जलभराव के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। किराड़ी की कॉलोनियों में नालियों और सीवर का पानी भरने की समस्या बीते 10 वर्षों से लगातार सामने आती रही है, जिसकी मीडिया रिपोर्ट मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि जब अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री बने थे, तब शर्मा कॉलोनी जैसे इलाकों में जलभराव नहीं होता था, लेकिन वर्ष 2022 तक वहां नालियों का पानी जमा होने लगा। शर्मा कॉलोनी एक निचले क्षेत्र में स्थित है और किराड़ी विधानसभा क्षेत्र में लगभग 10 लाख की आबादी रहती है। यह कॉलोनी वर्ष 2000 से पहले विकसित हुई थी, लेकिन कांग्रेस और आप, दोनों ही सरकारों ने यहां सीवर लाइन बिछाने का कोई ठोस काम नहीं किया।</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षा जल और सीवर के पानी की निकासी के लिए उचित आउटलेट न होने के कारण निचले इलाकों में जलभराव होता है। उन्होंने दावा किया कि आप सरकार ने अपने कार्यकाल में किराड़ी में सीवर से जुड़े कार्यों पर मात्र 43 लाख रुपये खर्च किए। इसके आगे उन्होंने बताया कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने वर्ष 2020 में 100 करोड़ रुपये की लागत से एक ड्रेनेज परियोजना की योजना बनाई थी, जिस पर अब काम शुरू हो चुका है। इसके बाद दिल्ली जल बोर्ड ने किराड़ी सहित 114 अनधिकृत कॉलोनियों में 480 करोड़ रुपये की लागत से सीवर लाइन परियोजनाएं शुरू कीं, लेकिन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से कनेक्टिविटी की योजना नहीं बनाई गई। सीवर का यह कार्य दिसंबर 2024 तक पूरा होना था, लेकिन भुगतान न होने के कारण ठेकेदारों ने काम रोक दिया। उन्होंने कहा हमारी सरकार आने के बाद काम दोबारा शुरू हुआ है और इसे जून 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा।</p>
<p>पीडब्ल्यूडी मंत्री ने बताया कि गंदे पानी को रोहिणी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाने के लिए तीन सीवेज पंपिंग स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग द्वारा 220 करोड़ रुपये की लागत से 4.5 किलोमीटर लंबा नया नाला बनाया जा रहा है, जिसे डेढ़ साल में पूरा किया जाएगा। उन्होंने बताया कि किराड़ी में जमीन की भराई कर लेवल ऊंचा किया जा रहा है और सीवर लाइनें जमीन के स्तर से ऊपर बिछाई जा रही हैं। उन्होंने दावा किया कि छह महीने के भीतर किराड़ी में सीवर ओवरफ्लो की समस्या नहीं दिखेगी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि देओली, बदरपुर, नजफगढ़ और तुगलकाबाद में भी सीवर नेटवर्क परियोजनाएं शुरू की गई हैं। उन्होंने आप पार्टी को चुनौती देते हुए पूछा कि क्या उसके शासनकाल में इन इलाकों में कोई सीवर नेटवर्क, ड्रेनेज सिस्टम या ट्रीटमेंट प्लांट बनाया गया था।</p>
<p>प्रवेश सिंह ने बताया कि किराड़ी से वर्षा जल की निकासी के लिए 112 करोड़ रुपये के अतिरिक्त कार्य भी चल रहे हैं, जबकि शर्मा कॉलोनी में ड्रेनेज का काम सांसद निधि से शुरू किया गया है। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को एक्स पर किराड़ी की स्थिति को लेकर टिप्पणी करते हुए आरोप लगाया था आज हर आम भारतीय की जिंदगी नर्क की यातना बन गयी है। देश में लालच की महामारी फैल चुकी है, शहरी सडऩ जिसका सबसे डरावना चेहरा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Jan 2026 17:06:13 +0530</pubDate>
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