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                <title>drainage - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>शहर में शामिल, फिर भी गांव जैसे हालात</title>
                                    <description><![CDATA[बोले- नगर निगम में शामिल होने के बाद भी नहीं मिलीं शहर जैसी सुविधाएं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/included-in-the-city--yet-conditions-resemble-a-village/article-163224"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(6)12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा शहर की सीमा में शामिल होने के बावजूद वार्ड नंबर 1 से 5 तक के कई इलाकों की तस्वीर आज भी गांव जैसी नजर आती है। शहर का हिस्सा होने के बावजूद यहां रहने वाले लोगों को सड़क, पानी, बिजली, नाली और स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। कई जगह मुख्य सड़कें क्षतिग्रस्त हैं तो कहीं नालियों का पानी सड़कों पर बहता रहता है। बारिश के दिनों में हालात और खराब हो जाते हैं। सड़क पर जमा गंदा पानी पैदल राहगीरों के साथ वाहन चालकों के लिए भी परेशानी का कारण बन रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्याओं के समाधान और क्षेत्र के विकास की उम्मीद में जनप्रतिनिधि चुने, लेकिन उम्मीद के मुताबिक काम नहीं हो पाया। कई इलाकों में आज भी विकास कार्यों की दरकार है। लोगों का कहना है कि नगर निगम क्षेत्र में आने के बाद भी यदि मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलें तो शहर और गांव में अंतर ही क्या रह जाता है।</p>
<p><strong>कहीं सड़क बदहाल तो कहीं नालियों का पानी सड़कों पर</strong><br />इन वार्डों के कई क्षेत्रों में सड़कें लंबे समय से क्षतिग्रस्त हैं। जगह-जगह गड्ढे होने से वाहन चालकों को परेशानी होती है। कई स्थानों पर नालियों की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण घरों और गलियों का पानी सड़क पर आ जाता है। इससे लोगों को पैदल निकलने में भी परेशानी होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार संबंधित अधिकारियों तक शिकायत पहुंचाने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं हुआ। स्ट्रीट लाइटों की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है। लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर पोल तो लगे हैं, लेकिन लाइटें नियमित रूप से नहीं जलतीं। रात के समय अंधेरा रहने से लोगों को परेशानी होती है। ग्रामीण क्षेत्र से शहर का हिस्सा बने इन इलाकों में तेजी से विकास की जरूरत है, लेकिन सुविधाओं का विस्तार उस गति से नहीं हुआ है।</p>
<p><strong>शहर जैसी सुविधाओं की उम्मीद, विकास अंतिम छोर तक पहुंचे</strong><br />क्षेत्रों के लोगों की सबसे बड़ी मांग अब शहर जैसी मूलभूत सुविधाओं की है। लोगों का कहना है कि केवल वार्ड सीमा में शामिल करना पर्याप्त नहीं, बल्कि विकास का लाभ भी अंतिम छोर तक पहुंचना चाहिए। मुख्य सड़कों की मरम्मत, नालियों की नियमित सफाई, जलभराव का स्थायी समाधान और खराब स्ट्रीट लाइटों को दुरुस्त करना प्राथमिकता होनी चाहिए। स्थानीय लोगों को ऐसे प्रतिनिधि की उम्मीद है, जो उनके बीच रहकर समस्याएं सुने और अधिकारियों से समन्वय कर समाधान करवाए। लोगों का कहना है कि अब गांव जैसी बदहाली नहीं, बल्कि शहर जैसी सुविधाएं चाहिए।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर और क्षेत्र</strong><br /><strong>वार्ड नंबर 1-</strong> शंभूपुरा, गिरधरपुरा एवं गोवर्धनपुरा ग्राम<br /><strong>वार्ड नंबर 2-</strong> कबीर आश्रम, विजय राजे सिंधिया चौराहा, ज्ञान सरोवर कॉलोनी, नयागांव उर्फ दौलतगंज, रोझड़ी का आंशिक भाग, पटवार ट्रेनिंग स्कूल, मोदी इंस्टीट्यूट, कौटिल्य कॉलेज आदि<br /><strong>वार्ड नंबर 3- </strong>ग्राम आमली, रथकांकरा, बंधा, धरमपुरा की समस्त राजस्व सीमा, देवनारायण योजना, रोझड़ी राजस्व ग्राम का आंशिक भाग, धरमपुरा रोड की समस्त कॉलोनियां<br /><strong>वार्ड नंबर 4- </strong>रानपुर, पुनिया देवरी, रानपुर एजुकेशन एरिया, रेतिया चौकी, लखावा, जगपुरा, खेड़ा जगपुरा, भीमपुरा, उमेदपुरा, भामाशाह मंडी, रानपुर औद्योगिक क्षेत्र, कोयला तलाई आदि<br /><strong>वार्ड नंबर 5-</strong> कंवरपुरा ग्राम, श्रीराम नगर, कच्ची बस्ती, कहारों की बस्ती, डीसीएम कॉलोनी, डीसीएम श्रीराम फैक्ट्री, श्रीराम कॉलोनी, उमेदगंज गांव का संपूर्ण क्षेत्र, राजनगर का आंशिक क्षेत्र, मानसरोवर कॉलोनी, कोटा क्लब, गायत्री विहार एवं रायपुरा क्षेत्र शामिल है।</p>
<p>घर-घर पाइपलाइन पहुंचाने के साथ सड़क निर्माण, स्कूल निर्माण और सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करवाया गया। वार्डवासियों की सुविधा के लिए पट्टे बनवाने का काम भी किया गया। उन्होंने कहा कि वार्ड के लोगों की समस्याओं को सुनकर उनका समाधान करवाने का हरसंभव प्रयास किया गया और जरूरत के अनुसार विकास कार्यों को गति दी गई।<br /><strong>-पवन मीणा,पूर्व पार्षद </strong></p>
<p>पार्षद कार्यकाल के दौरान राजनीतिक फेरबदल के कारण उनके साथ भेदभाव किया गया, जिसके चलते वार्ड में प्रस्तावित कई विकास कार्य पूरे नहीं हो सके। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि के रूप में उनकी प्राथमिकता हमेशा वार्डवासियों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाना और उनकी समस्याओं का समय पर समाधान करना रही।<br /><strong>- सोनू भील,पूर्व पार्षद </strong></p>
<p>वार्ड की स्थिति आज भी गांव जैसी बनी हुई है। नगर निगम क्षेत्र में शामिल होने के बावजूद यहां मूलभूत सुविधाओं का अपेक्षित विकास नहीं हो पाया है। जनप्रतिनिधियों के साथ निगम के अधिकारियों ने भी वार्ड की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। इसके कारण स्थानीय लोगों को सड़क, सफाई और अन्य जरूरी सुविधाओं को लेकर लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।<br /><strong>-कपिल गुर्जर,वार्डवासी</strong></p>
<p>वार्ड में सड़कें लगातार क्षतिग्रस्त हो रही हैं और जगह-जगह बड़े गड्ढे बने हुए हैं। बारिश के दौरान इन गड्ढों में पानी भरने से वाहन चालकों और राहगीरों को काफी परेशानी होती है। उन्होंने बताया कि वार्ड में रोड लाइटें तो लगाई गई हैं, लेकिन कई जगह रात के समय ये जलती नहीं हैं। इससे अंधेरा रहने के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी होती है और दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।<br /><strong>- भागचंद,वार्डवासी</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 14:31:12 +0530</pubDate>
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                <title>अस्पताल या तालाब! बारिश में डूबा अटरू चिकित्सालय परिसर</title>
                                    <description><![CDATA[ नगरपालिका निरीक्षण में खुलासा, बंद नालियां और खराब ड्रेनेज बनीं जलभराव की मुख्य वजह।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/hospital-or-pond--atru-hospital-complex-submerged-in-rainwater/article-162363"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)41.png" alt=""></a><br /><p>अटरू। बरसात आते ही अटरू उपजिला चिकित्सालय में मरीजों के  लिए इलाज से पहले पानी से जूझने की  मजबूरी बन जाती है। अस्पताल परिसर में जमा बारिश का पानी व्यवस्था की ऐसी तस्वीर पेश कर रहा है, मानो चिकित्सालय नहीं बल्कि तालाब हो। हर वर्ष सामने आने वाली इस समस्या की पड़ताल में जलभराव की असली वजह सामने आई है। नगरपालिका के निरीक्षण में अस्पताल परिसर की नालियों कचरे, मिट्टी और मलबे से बंद मिलीं, जिसके कारण बारिश का पानी बाहर नहीं निकल पा रहा है। अस्पताल परिसर में पानी भरने से मरीजों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इलाज के लिए आने वाले लोगों को कई बार पानी भरे रास्तों से होकर अस्पताल तक पहुंचना पड़ता है। जलभराव के कारण संक्रमण फैलने और मच्छरों के पनपने का खतरा भी बना रहता है।</p>
<p><strong>हर मानसून में दोहराती है समस्या</strong><br />स्थानीय लोगों के अनुसार अटरू उपजिला चिकित्सालय में जलभराव की समस्या कोई नई नहीं है। कई वर्षों से बारिश के मौसम में यही स्थिति बनती आ रही है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र के प्रमुख सरकारी अस्पताल में जहां मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा  मिलनी चाहिए, वहीं बरसात के दिनों में परिसर में जमा पानी परेशानी का कारण बन जाता है। </p>
<p><strong>निरीक्षण में बंद मिलीं अस्पताल की नालियां</strong><br />जलभराव की शिकायत मिलने पर नगरपालिका के कार्यवाहक अधिशासी अधिकारी योगेन्द्र प्रसाद त्रिवेदी ने स्वास्थ्य निरीक्षक मदनमोहन भार्गव को अस्पताल परिसर का निरीक्षण करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान सामने आया कि अस्पताल परिसर के अंदर बनी कई नालियां कचरे, मिट्टी और मलबे के कारण पूरी तरह बंद पड़ी हैं। इसके चलते बारिश का पानी नालियों के माध्यम से बाहर नहीं निकल पा रहा है और परिसर में जमा हो रहा है। निरीक्षण में यह तथ्य भी सामने आया कि अस्पतालपरिसर का स्तर बाहरी सड़क की तुलना में काफी नीचा है, जबकि बाहर की नालियां ऊंची हो चुकी हैं। इसी वजह से बारिश का पानी बाहर निकलने के बजाय अस्पताल परिसर में ही रुक जाता है और जलभराव की स्थिति बन जाती है।</p>
<p><strong>बीसीएमओ ने बताई वर्षों पुरानी समस्या</strong><br />ब्लॉक चिक्रित्सा अधिकारी डॉ. केशवराज नागर ने बताया कि बरसात के दौरान अस्पताल परिसर में जलभराव की समस्या हर वर्ष सामने आती है। इस संबंध में कई बार नगरपालिका को अवगत कराया है, लेकिन अभी तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। उन्होंने अस्पताल के बाहर स्थित बड़े नालों की सफाई कराने के साथ ही स्थायी ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने की आवश्यकता बताई।</p>
<p><strong>सिर्फ सफाई नहीं, स्थायी समाधान की जरूरत</strong><br />कार्यवाहक अधिशासी अधिकारी योगेन्द्र प्रसाद त्रिवेदी ने बताया कि अस्पताल के बाहर स्थित बड़े नालों की पहले भी सफाई करवाई जा चुकी है। यदि जल निकासी की समस्या फिर भी बनी हुई है तो दोबारा निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य निरीक्षक की रिपोर्ट में अस्पताल परिसर की आंतरिक नालियां बंद होने और बाहरी नालियों के ऊंचे स्तर के कारण जल निकासी प्रभावित होने की बात सामने आई है। समस्या के स्थायी समाधाम के लिए अस्पताल परिसर का स्तर ऊंचा करना होगा। साथ ही अंदर की नालियों का पुनर्निर्माण कर उन्हें बाहरी ड्रेनेज सिस्टम से वैज्ञानिक तरीके से जोड़ना जरूरी है।</p>
<p><strong>नागरिकों ने मांगा स्थायी ड्रेनेज सिस्टम</strong><br />स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और नगरपालिका से मांग की है कि हर वर्ष होने वाली जलभराव की समस्या को केवल नालियों की सफाई तक सीमित न रखा जाए। अस्पताल परिसर में स्थायी जल निकासी व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि मानसून के दौरान मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।</p>
<p><strong>इनका  कहना है </strong><br /> बरसात के मौसम में अस्पताल परिसर में हर वर्ष जलभराव की समस्या आती है। प्रत्येक वर्ष नगरपालिका को अवगत कराया जाता है, लेकिन अब तक पानी निकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकी। अस्पताल के बाहर जाम पड़े बड़े नालों की सफाई कराने तथा अस्पताल के लिए स्थायी ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने की आवश्यकता है ताकि हर मानसून में होने वाली इस समस्या का स्थायी समाधान हो सके।<br /><strong>- डॉ. केशवराज नागर, ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी</strong></p>
<p> अस्पताल के बाहर स्थित बड़े नालों की पूर्व में सफाई करवाई जा चुकी है। यदि फिर भी जल निकासी की समस्या बनी हुई है तो दोबारा निरीक्षण कर आवश्यकतानुसार नालों की सफाई करवाई जाएगी। स्वास्थ्य निरीक्षक मदनमोहन भार्गव की रिपोर्ट में अस्पताल परिसर की आंतरिक नालियां बंद होने तथा बाहरी नालियों के ऊंचे स्तर के कारण जल निकासी प्रभावित होने की बात सामने आई है।<br /><strong>- योगेन्द्र प्रसाद त्रिवेदी, कार्यवाहक अधिशासी अधिकारी, नगरपालिका अटरू</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 14:56:53 +0530</pubDate>
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                <title>लाल बहादुर शास्त्री बस स्टैंड का बदलेगा स्वरूप, सीसी सड़क निर्माण कार्य तेज</title>
                                    <description><![CDATA[जलनिकासी की बेहतर योजना से बारिश में जलभराव की समस्या होगी कम।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/lal-bahadur-shastri-bus-stand-set-for-a-makeover--cc-road-construction-work-accelerates/article-161703"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(1)4.png" alt=""></a><br /><p>बपावरकला। लाल बहादुर शास्त्री बस स्टैंड पर सीसी सड़क निर्माण कार्य इन दिनों तेजी से प्रगति पर है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद बस स्टैंड क्षेत्र का स्वरूप बदलने के साथ स्थानीय लोगों एवं वाहन चालकों को बेहतर आवागमन सुविधा मिलने की उम्मीद है। निर्माण एजेंसी की ओर से निर्धारित मानकों के अनुरूप कार्य कराया जा रहा है तथा जलनिकासी की व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। निर्माण कार्य के दौरान बस स्टैंडपरिसर में सीसी सड़क का निर्माण तेजी से जारी है। स्थानीय नागरिकों ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ वर्षा ऋतु में जलभराव की समस्या से बचाव के लिए समुचित जलनिकासी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि सड़क के साथ नालियों का निर्माण भी प्रभावी ढंग से किया जाएगा तो भविष्य में लोगों को जलभराव और कीचड़ जैसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा।</p>
<p>लाल बहादुर शास्त्री बस स्टैंड का सीसी सड़क निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप किया जा रहा है। सड़क निर्माण के साथ पानी की निकासी के लिए नालियों एवं नालों का निर्माण भी समानांतर रूप से कराया जा रहा है, ताकि बरसात के दौरानं जलभराव की स्थिति उत्पन्न न हो। कार्य पूर्ण होने के बाद बस स्टैंड क्षेत्र में यातायात व्यवस्था अधिक सुगम होगी और आमजन को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।<br /><strong>- पूजा नामा, कनिष्ठ अभियंता, आरएसआरडीसी।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 16:31:04 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>मानसून की मोहलत कह रही सावधान, बारिश तेज हुई तो सड़क से लेकर बिजली तक बढ़ेगा खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[मानसून में करंट से पहले सुरक्षा का इंतजाम जरूरी, खुले ट्रांसफार्मर बन सकते हैं जानलेवा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-monsoon-s-delayed-arrival-serves-as-a-warning--if-rainfall-intensifies--risks-ranging-from-road-hazards-to-electrical-dangers-will-escalate/article-160025"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(1)52.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में मानसून दस्तक दे चुका है। आसमान में बादल छा रहे हैं, बारिश का मौसम भी बन रहा है, लेकिन अभी झमाझम बारिश का दौर शुरू नहीं हुआ है। मौसम की यह मोहलत प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए शहर की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का आखिरी अवसर साबित हो सकती है। आने वाले दिनों में बारिश का दौर तेज हुआ तो शहर की कुछ बदहाल सड़कें, ब्रिजों के नीचे जलभराव और खुले विद्युत ट्रांसफार्मर लोगों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर सकते हैं। शहर के कई प्रमुख मार्गों पर अभी से सड़क की स्थिति चिंता बढ़ा रही है। कहीं गिट्टी बिखरी पड़ी है तो कहीं छोटे-बड़े गड्ढे वाहन चालकों की राह मुश्किल कर रहे हैं। फिलहाल बारिश नहीं होने के कारण इन रास्तों से आवागमन हो रहा है, लेकिन लगातार बारिश शुरू होते ही यही छोटी खामियां बड़ी समस्या में बदल सकती हैं। गड्ढों में पानी भरने के बाद उनकी गहराई का अंदाजा नहीं रहता और दोपहिया वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।</p>
<p><strong>बारिश से पहले भरें गड्ढे, वरना पानी छिपा देगा खतरा</strong><br />मोहन टॉकीज रोड, नयापुरा से एरोड्रम जाने वाले मार्ग और छावनी से नयापुरा की ओर आने वाले रास्ते सहित शहर के कुछ प्रमुख मार्गों पर कहीं गिट्टी फैली हुई है तो कहीं सड़क पर गड्ढे नजर आ रहे हैं। इन मार्गों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में दोपहिया, चारपहिया और अन्य वाहन गुजरते हैं। अभी इन स्थानों की मरम्मत कर दी जाए तो लोगों को राहत मिल सकती है, लेकिन बारिश तेज होने के बाद मरम्मत कार्य करना भी मुश्किल हो सकता है।</p>
<p><strong>ब्रिज के नीचे पानी भरा तो थमेगी रफ्तार</strong><br />शहर में बने कुछ ब्रिजों के अंडरपास के नीचे बारिश के दौरान जलभराव की समस्या भी सामने आती रही है। तेज बारिश के बाद यदि पानी की निकासी समय पर नहीं हो तो कुछ ही देर में सड़क पर पानी जमा हो जाता है। इससे वाहन चालकों को रास्ता बदलना पड़ता है और यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है। । नतीजा यह होता है कि कुछ घंटों की बारिश लोगों के लिए घंटों की परेशानी बन जाती है। यदि बारिश रात के समय हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में पंपिंग व्यवस्था, ड्रेनेज की सफाई और आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई के इंतजाम पहले से तैयार रखना जरूरी है।</p>
<p><strong>खुले ट्रांसफार्मर पर सुरक्षा घेरा जरूरी, बारिश में बढ़ सकता है करंट का खतरा</strong><br />सड़कों और जलभराव के साथ शहर में खुले विद्युत ट्रांसफार्मर भी चिंता का विषय हैं। कई स्थानों पर ट्रांसफार्मर और विद्युत उपकरण खुले क्षेत्र में लगे हुए हैं। बारिश के दौरान आसपास पानी भरने या बिजली के तारों और उपकरणों में तकनीकी खराबी आने पर करंट का खतरा बढ़ सकता है। विशेष रूप से ऐसे स्थान जहां बच्चों, राहगीरों और पशुओं की आवाजाही अधिक रहती है, वहां सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है। सड़क के गड्ढे भरना, बिखरी गिट्टी हटाना, जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करना और खुले ट्रांसफार्मरों को सुरक्षित करना ऐसे काम हैं जिन्हें तेज बारिश से पहले पूरा किया जाना चाहिए।</p>
<p><strong>बारिश से पहले हो काम, बाद में केवल खानापूर्ति नहीं</strong><br />गड्ढे अभी दिखाई दे रहे हैं, बारिश में इनमें पानी भर जाएगा। तब वाहन चालक को पता ही नहीं चलेगा कि गड्ढा कितना गहरा है। प्रशासन को बारिश से पहले ही सड़कों की मरम्मत करनी चाहिए। सड़क पर फैली गिट्टी दोपहिया वाहन चालकों के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक है। बारिश में सड़क गीली होने पर वाहन फिसलने का डर रहता है। इसे समय रहते हटाया जाना चाहिए। हर साल तेज बारिश के बाद कई स्थानों पर जलभराव की समस्या सामने आती है। यदि नालियों और ड्रेनेज की सफाई पहले ही हो जाए तो लोगों को काफी राहत मिल सकती है। खुले ट्रांसफार्मर बारिश के दिनों में बड़ा खतरा बन सकते हैं। विद्युत विभाग को ऐसे स्थानों की पहचान कर सुरक्षा जाली और अन्य इंतजाम करने चाहिए।”<br /><strong>-राहुल शर्मा, वाहन चालक</strong></p>
<p><strong>बारिश का इंतजार क्यों?</strong><br />मानसून आ चुका है और तेज बारिश का दौर कभी भी शुरू हो सकता है। विभागों के सामने सवाल साफ हैं—क्या सड़कों के गड्ढे बारिश से पहले भरे जाएंगे? क्या बिखरी गिट्टी हटेगी? क्या ब्रिजों के नीचे जल निकासी की जांच होगी? क्या खुले ट्रांसफार्मरों को सुरक्षित किया जाएगा? अभी कार्रवाई हुई तो शहर को बड़ी परेशानी से बचाया जा सकता है। यदि इंतजार तेज बारिश और शिकायतों का किया गया तो लोगों को परेशानी झेलनी पड़ेगी और विभागों को फिर आपातकालीन मरम्मत में जुटना होगा। बारिश कब होगी, यह मौसम तय करेगा, लेकिन शहर बारिश के लिए कितना तैयार होगा, यह जिम्मेदार विभागों को तय करना है।<br /><strong>-हरपाल सिंह राणा, शहरवासी</strong></p>
<p>बारिश के मौसम को देखते हुए नगर निगम प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। अधिकारियों के साथ बैठक कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई और संभावित जलभराव व आपात स्थितियों से निपटने के लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है। निगम व केडीए प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को अलर्ट मोड पर रहते हुए त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।<br /><strong>-पीयूष समारिया, जिला कलक्टर कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 15:09:13 +0530</pubDate>
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                <title>बारिश बनी एमबीएस अस्पताल की सबसे बड़ी परीक्षा : बदहाल ड्रेनेज व्यवस्था बनी मरीजों की मुसीबत</title>
                                    <description><![CDATA[ नई बिल्डिंग, सेंट्रल लैब और अधीक्षक कार्यालय तक जाने वाले रास्तों पर भरता है पानी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/rain-poses-the-biggest-challenge-for-mbs-hospital--poor-drainage-system-causes-trouble-for-patients/article-159324"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(1)20.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल में मानसून की पहली बारिश के साथ ही वर्षों पुरानी जलभराव की समस्या फिर सामने आने लगती है। अस्पताल की नई बिल्डिंग के बाहर, सेंट्रल लैब, अधीक्षक कार्यालय तक जाने वाले मार्ग सहित कई स्थानों पर थोड़ी सी बारिश के बाद ही पानी भर जाता है। मरीजों, उनके परिजनों और अस्पताल स्टाफ को पानी से होकर गुजरना पड़ता है। कई बार स्ट्रेचर और व्हीलचेयर निकालने तक में परेशानी होती है, जिससे गंभीर मरीजों को समय पर उपचार तक पहुंचाने में दिक्कत आती है।</p>
<p>अस्पताल प्रशासन ने पिछले कुछ समय में पुरानी बिल्डिंग से पर्ची काउंटर, जांच काउंटर और इमरजेंसी ओपीडी जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं को नई बिल्डिंग में स्थानांतरित कर दिया है। इससे मरीजों को आधुनिक सुविधाओं का लाभ मिला है और एक ही स्थान पर अधिकांश सेवाएं उपलब्ध होने लगी हैं। लेकिन बारिश के दौरान नई बिल्डिंग के बाहर जलभराव होने से मरीजों को इन सुविधाओं तक पहुंचने में परेशानी उठानी पड़ती है। हालांकि पुरानी बिल्डिंग में अब मुख्य रूप से भर्ती मरीजों को रखा जाता है, लेकिन बारिश के मौसम में वहां भी सीलन, पानी टपकने और आसपास जलभराव जैसी समस्याएं सामने आती हैं।</p>
<p><strong>मोर्चरी तक पहुंचने वाला रास्ता बना सबसे बड़ी चिंता</strong><br />एमबीएस अस्पताल से मोर्चरी की ओर जाने वाला मार्ग लंबे समय से जर्जर हालत में है। सड़क जगह-जगह से उखड़ चुकी है और बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं। बारिश के दौरान इन गड्ढों में पानी भर जाता है, जिससे उनकी गहराई का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में एंबुलेंस, शव वाहन, अस्पताल के अन्य वाहन और पैदल आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। हालात इतने खराब हो जाते हैं कि कई बार मोर्चरी तक पहुंचना भी चुनौती बन जाता है। शव लेकर आने वाले परिजनों को भी कीचड़ और जलभराव के बीच से गुजरना पड़ता है। अस्पताल परिसर का यह मार्ग वर्षों से मरम्मत का इंतजार कर रहा है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है।</p>
<p>डॉक्टरों की सेवाएं और चिकित्सा सुविधाएं बेहतर हैं, लेकिन बारिश के मौसम में अस्पताल परिसर की स्थिति चिंता बढ़ा देती है।<br /><strong>-सुशिला बाई, मरीज</strong></p>
<p>- नई बिल्डिंग बनने से सुविधाएं तो बढ़ी हैं, लेकिन बारिश के समय बाहर पानी भर जाता है। बुजुर्ग और गंभीर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में काफी परेशानी होती है।<br /><strong>सुरज सिंह, मरीज</strong></p>
<p>सेंट्रल लैब और जांच काउंटर तक जाने में पानी और कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है। प्रशासन को ड्रेनेज व्यवस्था स्थायी रूप से सुधारनी चाहिए। मोर्चरी की सड़क इतनी खराब है कि बारिश में गड्ढे दिखाई ही नहीं देते। एंबुलेंस तक हिचकोले खाती हुई गुजरती है। अस्पताल परिसर की सड़कें जल्द से जल्द बनाई जानी चाहिए।<br /><strong>- श्वेता गुर्जर, मरीज</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मानसून को देखते हुए अस्पताल परिसर की सभी प्रमुख नालियों की सफाई करवाई जा रही है ताकि पानी की निकासी बाधित न हो। संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं और लगातार निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने बताया कि स्थायी समाधान के लिए केडीए को ड्रेनेज निर्माण का कार्य सौंप दिया गया है। फिलहाल वर्क ऑर्डर जारी होने की प्रक्रिया चल रही है। जैसे ही कार्यादेश मिलेगा, सबसे पहले अस्पताल परिसर में आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जाएगा। इसके बाद क्षतिग्रस्त और जर्जर सड़कों का पुनर्निर्माण कराया जाएगा, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को राहत मिल सके।<br /><strong>- डॉ. आर.के. सिंह, अधीक्षक एमबीएस अस्पताल</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 14:36:30 +0530</pubDate>
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                <title>पहली बारिश में डूबी व्यवस्थाएं : लाखों खर्च के बावजूद सफाई व्यवस्था फेल</title>
                                    <description><![CDATA[जाम नालियों से बढ़ी परेशानी, नगरपालिका की कार्यशैली पर उठाए सवाल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/systems-overwhelmed-by-the-first-rain--sanitation-efforts-fail-despite-heavy-spending/article-157354"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(3)26.png" alt=""></a><br /><p>अटरू। राज्य सरकार के शहरी सेवा शिविरों में जनसमस्याओं के समाधान के दावों के बीच अटरू कस्बे में पहली ही बारिश ने नगरपालिका की तैयारियों की हकीकत उजागर कर दी। मुख्य बाजार, मुख्य सड़क और कई मोहल्लों में जलभराव की स्थिति बनने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। नालियों की सफाई नहीं होने और जल निकासी व्यवस्था के कमजोर होने से आमजन में नाराजगी देखने को मिली। राज्य सरकार, के निर्देशानुसार आयोजित शहरी सेवा शिविरों में आमजन की समस्याओं के समाधान के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन अटरू कस्बे की सफाई एवं जल निकासी व्यवस्था की जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। पहली बारिश ने नगरपालिका की तैयारियों की पोल खोलकर रख दी है। मुख्य बाजार, मुख्य रोड और कई मोहल्लों में जलभराव की स्थिति बनने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।</p>
<p><strong>नालियों पर बने पक्के ढकान बने समस्या की वजह</strong><br />स्थानीय नागरिक पवन मालवीय, गणेश सेन और लोकेश पंचोली ने बताया कि मुख्य रोड क्षेत्र में कई स्थानों पर दुकानों के सामने नालियों पर पक्के ढकान बना दिए गए हैं। इन डंकानों के कारण नालियों की नियमित सफाई नहीं हो पाती, जिससे उनमें गाद और कचरा जमा हो जाता है। परिणामस्वरूप पानी का प्रवाह बाधित हो जाता हैऔर थोड़ी सी बारिश में ही सड़कें जलमग्न हो जाती हैं। नागरिकों का कहना है कि पहले नालियों से पानी का निकास सुचारु रूप से हो जाता था, लेकिन अब सफाई व्यवस्था की अनदेखी और अवरोधों के कारण हालात बिगड़ते जा रहे हैं।</p>
<p><strong>जनता की ये है प्रमुख मांगें</strong><br />अटरू कस्बे में जलभराव और सफाई व्यवस्था की बदहाल स्थिति को देखते हुए स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन और नगरपालिका के समक्ष कई महत्वपूर्ण मांगे रखी हैं। लोगों का कहना है कि बरसात के मौसम में राहत देने के लिए तत्काल कराई जाए। साथ ही नालों पर बने अवैध एवं स्थायी अवरोधों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि पानी की निकासी सुचारु रूप से हो सके। पूरे कस्बे की जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए तथा सफाई व्यवस्था की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर प्रभावी कार्रवाई की जाए, जिससे भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।</p>
<p><strong>सड़कों पर भरा बारिश का पानी</strong><br />स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात से पूर्व नालियों की समुचित सफाई नहीं होने के कारण बारिश का पानी सड़कों पर भर गया। कई स्थानों पर गंदा पानी दुकानों के सामने तक पहुंच गया, जिससे व्यापारियों और राहगीरों को परेशानी उठानी पड़ी। हालात ऐसे बने कि कई जगह लोगों को स्वयं नालियों की सफाई कर पानी की निकासी करनी पड़ी।</p>
<p><strong>कलेक्टर के निर्देशों पर उठे सवाल</strong><br />गौरतलब है कि जिला कलक्टर बालमुकुंद असावा समय-समय पर शहरी सेवा शिविरों एवं नगर निकायों का निरीक्षण कर आवश्यक दिशा-निर्देश देते रहे हैं। इसके बावजूद पहली ही बरसात में जलभराव और गंदगी की स्थिति सामने आने से व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।  स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते नालियों की सफाई और जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया तो आगामी बरसात में स्थिति और गंभीर हो सकती है।</p>
<p><strong>दुकानदार खुद कर रहे जाम नालियों की सफाई</strong><br />नगरपालिका की ओर से समय पर सफाई नहीं होने के कारण मुख्य बाजार क्षेत्र के दुकानदारों को खुद नालियों की सफाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। बारिश के दौरान जब नालियों का पानी सड़कों और दुकानों के सामने जमा हो गया, तब कई व्यापारियों ने फावड़े और अन्य उपकरणों की मदद से नालियों में जमा कचरा और गाद निकालकर पानी की निकासी का प्रयास किया। दुकानदारों का कहना है कि नियमित सफाई होती तो उन्हें यह काम स्वयं नहीं करना पड़ता। उन्होंने बताया कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद सफाई व्यवस्था धरातल पर नजर नहीं आ रही है, जिसका खामियाजा आमजन और व्यापारियों को भुगतना पड़ रहा है।</p>
<p>मुख्य रोड एवं बाजार क्षेत्र में जलभराव तथा नालियों की समस्या को शिकायतें संज्ञान में आई हैं। प्रशासन द्वारा तथा नगरपालिका प्रशासन को आवश्यक निर्देश देकर समस्या के समाधान के लिए कार्रवाई कराई जाएगी। जहां भी नालियों में अवरोध, जाम या जलनिकासी संबंधी समस्या पाई जाएगी, वहाँ तत्काल सफाई एवं आवश्यक सुधारात्मक कार्य कराए जाएंगे, ताकि बरसात के दौरान आमजन को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। प्रशासन आमजन की समस्याओं के समाधान के लिए गंभीर है। <br /><strong>-अभिमन्यु कुंतल, कार्यवाहक उपखंड अधिकारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 15:18:01 +0530</pubDate>
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                <title>भण्डेड़ा में जलभराव समस्या पर किसानों की मांग तेज, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[पाइप बंद होते ही ऊपरी क्षेत्र के खेतों में जलभराव हो जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/farmers-in-bhandeda-intensify-demands-regarding-waterlogging-issue/article-156656"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(4)3.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। क्षेत्र में आगामी बरसात को देखते हुए किसानों ने मुख्य सड़कों पर बरसाती पानी निकासी के लिए लगाए गए पाइप बंद करने वाले लोगों के खिलाफ समय रहते सख्त कार्रवाई की मांग की है। किसानों का कहना है कि यदि विभाग पहले से ही ऐसे लोगों को पाबंद कर दे, तो खरीफ फसलों को हर साल होने वाले भारी नुकसान से बचाया जा सकता है। जानकारी के अनुसार बांसी-कालानला मार्ग एवं भण्डेड़ा-सादेड़ा मुख्य मार्ग पर सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा सड़क निर्माण के दौरान पानी निकासी के लिए पाइप लगाए गए थे, ताकि बारिश का पानी खेतों में जमा न होकर आगे निकल सके। लेकिन कई स्थानों पर निचले क्षेत्र के किसान अपने खेतों में पानी जाने से रोकने के लिए इन पाइपों को बंद कर देते हैं। पाइप बंद होते ही ऊपरी क्षेत्र के खेतों में जलभराव की स्थिति बन जाती है और लगातार बारिश के कारण फसलें पूरी तरह खराब हो जाती हैं।</p>
<p> पिछले तीन वर्षों से यही स्थिति बनी हुई है, जिससे हजारों बीघा फसल हर साल बर्बाद हो रही है। किसानों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद विभाग केवल औपचारिक कार्रवाई करता है और मौके पर जाकर स्थिति देखकर लौट जाता है। इससे ऐसे लोगों का हौसला बढ़ता जा रहा है और पाइप बंद करने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि आगामी बरसात से पहले ही ऐसे लोगों को चिन्हित कर पाबंद किया जाए तथा पाइपलाइन व्यवस्था को सुचारू रखा जाए, ताकि किसानों की मेहनत और लाखों की फसल बर्बाद होने से बच सके।</p>
<p><strong>अधिकारी का कहना है </strong><br />क्षेत्र में इस तरह पानी निकासी के पाइप को बन्द करने वाले किसानों को समय से पहले ही पाबंद करवाया जाएगा। फिर भी किसी व्यक्ति ने पाइप बन्द किया, तो उसी समय पुलिस साथ लेकर बंद पाइप को खुलवाया जाएगा। संबंधित व्यक्ति पर कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।<br /><strong>- हरिराम मीणा, अधिशाषी अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग, नैनवां </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 14:38:39 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - एमबीएस एवं जे.के.लोन परिसर में ड्रेनेज समस्या का होगा समाधान, संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में दिए निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति में पांच फरवरी को प्रमुखता से उठाया था मामला ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---drainage-problems-in-the-mbs-and-jk-lon-complexes-will-be-resolved/article-143016"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(12200-x-600-px)-(6)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभागीय आयुक्त अनिल कुमार अग्रवाल की अध्यक्षता में गुरुवार को सीएडी सभागार में आयोजित बैठक में एमबीएस हास्पीटल एवं जे.के.लोन चिकित्सालय परिसर में वर्षा जल भराव की समस्या के समाधान के लिए ड्रेनेज सिस्टम के निर्माण तथा एक एमएलडी के एसटीपी के निर्माण के लिए आरयूआईडीपी से डिजाईन बनवाने के निर्देश दिए गए। बैठक में संभागीय आयुक्त ने निर्देश दिए कि एमबीएस एवं जेके लोन हॉस्पिटल परिसर की क्षतिग्रस्त दीवार का शीघ्र निर्माण कराया जाए। उन्होंने एमबीएस एवं जे.के.लोन चिकित्सालय परिसर में स्थित पुराने, अनुपयोगी, जर्जर एवं नकारा घोषित स्ट्रक्चर को नियमानुसार गिराए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने नवीन आईपीडी के मॉड्यूलर आॅपरेशन थियेटर में पानी के लीकेज, सीपेज एवं टाइल्स उखडने से मरीजों एवं अस्पताल स्टाफ को हो रही समस्या के समाधान के लिए पीडब्ल्यूडी के अभियंताओं को मौका निरीक्षण करने एवं समस्या का स्थाई समाधान निकालने के निर्देश दिए।</p>
<p><strong>आरएमआरएस में उपलब्ध फंड की भी समीक्षा</strong><br />उन्होंने नवीन आईपीडी एवं पुराने भवन को जोड़ने के लिए कनेक्टिंग कोरिडोर का कार्य शीघ्र पूरा करने तथा चिकित्सालय परिसर में लगी हुई खराब लाइटों का ठीक करने के भी निर्देश दिए। बैठक में आरएमआरएस में उपलब्ध फंड एवं प्रगतिरत कार्यों के बारे में भी समीक्षा की गई। बैठक में जिला कलक्टर पीयूष समारिया, केडीए आयुक्त ममता तिवारी, केडीए सचिव मुकेश चौधरी, मेडिकल कॉलेज कोटा की प्राचार्य डॉ. संगीता सक्सेना,एमबीएस हॉस्पिटल अधीक्षक डॉ. धर्मराज मीणा, जेके लोन हॉस्पिटल की अधीक्षक निर्मला शर्मा, निदेशक अभियात्रिंकी केडीए रविन्द्र माथुर, अधिशाषी अभियंता पीडब्ल्यूडी अशोक सनाढय सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि इस सम्बंध में दैनिक नवज्योति में गत पांच फरवरी को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Feb 2026 15:06:41 +0530</pubDate>
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                <title>किराड़ी में जलभराव के लिए 'आप' जिम्मेदार: 11 वर्षो में नहीं बनाई सीवर व्यवस्था, भाजपा मंत्री ने केजरीवाल पर साधा निशाना</title>
                                    <description><![CDATA[पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश सिंह ने किराड़ी जलभराव के लिए पूर्व आप सरकार को जिम्मेदार ठहराया, कहा वर्षों तक सीवर और ड्रेनेज नहीं बने, अब परियोजनाएं तेज़ी से पूरी होंगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/aap-is-responsible-for-waterlogging-in-kirari-sewer-system-has/article-140505"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(2)44.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने किराड़ी विधानसभा क्षेत्र में लगातार हो रहे जलभराव को लेकर पूर्ववर्ती आम आदमी पार्टी (आप) सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुये आरोप लगाया कि पिछले 11 वर्षों में इलाके में न तो सीवर व्यवस्था बनाई गई और न ही समुचित जल निकासी प्रणाली विकसित किया गया।</p>
<p>प्रवेश सिंह ने संवाददाता सम्मेलन में गुरूवार को कहा कि पिछले एक सप्ताह से किराड़ी में जलभराव के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। किराड़ी की कॉलोनियों में नालियों और सीवर का पानी भरने की समस्या बीते 10 वर्षों से लगातार सामने आती रही है, जिसकी मीडिया रिपोर्ट मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि जब अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री बने थे, तब शर्मा कॉलोनी जैसे इलाकों में जलभराव नहीं होता था, लेकिन वर्ष 2022 तक वहां नालियों का पानी जमा होने लगा। शर्मा कॉलोनी एक निचले क्षेत्र में स्थित है और किराड़ी विधानसभा क्षेत्र में लगभग 10 लाख की आबादी रहती है। यह कॉलोनी वर्ष 2000 से पहले विकसित हुई थी, लेकिन कांग्रेस और आप, दोनों ही सरकारों ने यहां सीवर लाइन बिछाने का कोई ठोस काम नहीं किया।</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षा जल और सीवर के पानी की निकासी के लिए उचित आउटलेट न होने के कारण निचले इलाकों में जलभराव होता है। उन्होंने दावा किया कि आप सरकार ने अपने कार्यकाल में किराड़ी में सीवर से जुड़े कार्यों पर मात्र 43 लाख रुपये खर्च किए। इसके आगे उन्होंने बताया कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने वर्ष 2020 में 100 करोड़ रुपये की लागत से एक ड्रेनेज परियोजना की योजना बनाई थी, जिस पर अब काम शुरू हो चुका है। इसके बाद दिल्ली जल बोर्ड ने किराड़ी सहित 114 अनधिकृत कॉलोनियों में 480 करोड़ रुपये की लागत से सीवर लाइन परियोजनाएं शुरू कीं, लेकिन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से कनेक्टिविटी की योजना नहीं बनाई गई। सीवर का यह कार्य दिसंबर 2024 तक पूरा होना था, लेकिन भुगतान न होने के कारण ठेकेदारों ने काम रोक दिया। उन्होंने कहा हमारी सरकार आने के बाद काम दोबारा शुरू हुआ है और इसे जून 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा।</p>
<p>पीडब्ल्यूडी मंत्री ने बताया कि गंदे पानी को रोहिणी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाने के लिए तीन सीवेज पंपिंग स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग द्वारा 220 करोड़ रुपये की लागत से 4.5 किलोमीटर लंबा नया नाला बनाया जा रहा है, जिसे डेढ़ साल में पूरा किया जाएगा। उन्होंने बताया कि किराड़ी में जमीन की भराई कर लेवल ऊंचा किया जा रहा है और सीवर लाइनें जमीन के स्तर से ऊपर बिछाई जा रही हैं। उन्होंने दावा किया कि छह महीने के भीतर किराड़ी में सीवर ओवरफ्लो की समस्या नहीं दिखेगी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि देओली, बदरपुर, नजफगढ़ और तुगलकाबाद में भी सीवर नेटवर्क परियोजनाएं शुरू की गई हैं। उन्होंने आप पार्टी को चुनौती देते हुए पूछा कि क्या उसके शासनकाल में इन इलाकों में कोई सीवर नेटवर्क, ड्रेनेज सिस्टम या ट्रीटमेंट प्लांट बनाया गया था।</p>
<p>प्रवेश सिंह ने बताया कि किराड़ी से वर्षा जल की निकासी के लिए 112 करोड़ रुपये के अतिरिक्त कार्य भी चल रहे हैं, जबकि शर्मा कॉलोनी में ड्रेनेज का काम सांसद निधि से शुरू किया गया है। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को एक्स पर किराड़ी की स्थिति को लेकर टिप्पणी करते हुए आरोप लगाया था आज हर आम भारतीय की जिंदगी नर्क की यातना बन गयी है। देश में लालच की महामारी फैल चुकी है, शहरी सडऩ जिसका सबसे डरावना चेहरा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Jan 2026 17:06:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>लापरवाही: दहीखेड़ा व डुंडी गाडरवाड़ा रोड पर गहरे गड्ढे बने जानलेवा, हादसे की आशंका</title>
                                    <description><![CDATA[निकासी नहीं होने से कारण नालियों का पानी सड़क के गड्ढों में जमा हो रहा है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/negligence--deep-potholes-on-the-dahikheda-and-dundi-gadarwara-roads-have-become-life-threatening--raising-the-risk-of-accident/article-127340"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/_4500-px)-(2)14.png" alt=""></a><br /><p>खानपुर। खानपुर क्षेत्र में एक ऐसी भी सड़क है जो दुर्दशा का शिकार हो गई है इस सड़क पर इतने बड़े बडेÞ गड्ढे हो गए है कि कभी भी कोई भी राहगीर गिरकर चोटिल हो सकता है। यह सड़क दहीखेड़ा व डुंडी गाडरवाड़ा रोड खानपुर से जुड़ी हुई है और अधिकतर गांवों के व्यक्ति इसी रोड से खानपुर आते जाते हैं। इस रोड से दहीखेड़ा पनवाड़ व कोटा जाने वाला रास्ता भी जुड़ा हुआ है और इधर कई कालोनियां बसी हुई है जिनका आना-जाना भी इसी रोड से है और भी कई दुकानदार जो यहां से जाते वह आते हैं इनको बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है। मुख्य बात यह है कि यहां से डुंडी गाडरवाड़ा पर प्रसिद्ध मंदिर श्री गणेश जी का है जहां पर हर बुधवार श्रद्धालु जाते हैं और वहां भीड़ लगती है तो उन श्रद्धालुओं के लिए यह रोड परेशानी का सबब बना हुआ है। इस सड़क से राहगीर , वाहन चालक और स्कूल के विद्यार्थियों का रोजाना आना जाना रहता है लेकिन ऊबड़ खाबड़ होने के कारण परेशानी उठानी पड़ती है। इस खस्ताहाल सड़क से गिट्टी निकल कर फैल गई है वहीं पानी की निकासी न होने के कारण नालियों का पानी सड़क के गड्ढों में जमा हो गया है। इस जमा पानी से दिखाई नहीं देता कि गड्ढा कितना गहरा है जिसके चलते कई बार वाहन चालक गिरकर चोटिल हो जाते है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जल्द से जल्द समस्या का समाधान कर खस्ताहाल सड़Þक को दुरूस्त करवाया जाए। </p>
<p>मैं डुंडी गाडरवाड़ा का निवासी हूं और रोजाना ही इस रोड से आना-जाना लगा रहता है मेरे रोजाना के निजी काम इसी रोड से होते हैं और मेने खानपुर में वेल्डिंग की दुकान लगा रखी है जो मैं घर से निकलता हूं तो रात को दुकान बढा कर जब वापस घर आता हूं तो कभी कभार ऐसा लगता है कि गिर जाएंगे गड्ढे इतने हो रहे हैं कि इनसे बचकर चलना पड़ता है।<br /><strong> - नुपेश राठौर, कस्बेवासी </strong></p>
<p>यह दहीखेड़ा रोड बहुत ही दिनों से खराब है ऐसा कहा जा रहा है कि यह रोड बनेगा लेकिन पता नहीं कब बनेगा। निवेदन है कि कृपया इसकी मरम्मत की जाए।<br /><strong>- संदीप शर्मा, कस्बेवासी </strong></p>
<p>इस रोड पर में दिन-रात चलता हूं और मेरे को ऐसा लगता है कि जैसे कोई जिंदगी का खतरा बना हुआ हो। <br /><strong>- उग्रसेन नागर, कस्बेवासी</strong></p>
<p>गड्ढे इतने गहरे है कि कभी भी वाहन चालक इससे गिरकर चोटिल हो सकते है। <br /><strong>- दिनेश मेहता, कस्बेवासी</strong></p>
<p>बरसात आने पर इस खस्ताहाल सड़क पर पानी भर जाता है। दुपहिया वाहन को भी फिसलने का खतरा रहता है, इस रोड की मरम्मत की जाए।<br /><strong>- रमेश मेहता, कस्बेवासी </strong></p>
<p>इस खस्ताहल सड़क  से हादसे की आश्ांका बनी रहती है। जल्द से जल्द समस्या का समाधान किया जाए।  <br /><strong>- राजेंद्र मेहरा, कस्बेवासी</strong></p>
<p>हमारे यहां से एनआइटी लग चुकी है लेकिन अभी द्वितीय स्वीकृति नहीं मिली है। इसके पहले बरसात हो रही थी तो रोड बन ही नहीं सकता था जैसे ही द्वितीय स्वीकृति आ जाएगी तो रोड का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। <br /><strong>- विश्वेंद्र, पीडब्लूडी जेईएन खानपुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Sep 2025 16:56:26 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - मोहल्लेवासियों को जलभराव से मिली राहत </title>
                                    <description><![CDATA[ दो जेसीबी मशीनों से रोड कटिंग कर डाले पाइप, हुई पानी की निकासी  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/effect-of-the-news---residents-of-the-locality-got-relief-from-waterlogging/article-122368"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(2)4.png" alt=""></a><br /><p>सीसवाली।  सीसवाली क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश से क्षेत्रवासियों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। वहीं शुक्रवार को मौसम साफ रहा। वहीं बादल छाये रहे। कई दिनों से लगातार  हो रही बरसात से कस्बे के आसन मौहल्ले में पानी की निकासी नहीं होने के कारण मकानों व बाडियो में पानी भर गया है। इस समस्या को लेकर 31 जुलाई को प्रमुखता से खबर को दैनिक नवज्योति में प्रकाशित किया गया था। खबर प्रकाशित होने के बाद शुक्रवार को प्रशासन हरकत में आया। जिसके बाद शुक्रवार को दो जेसीबी मशीनों से रोड कटिंग करके पाइप डालकर पानी की निकासी की गई। कुछ महिने पहले भैरुपुरा रोड से कालूपुरा खाडी पुलिया तक लगभग दो करोड रुपए की लागत से  सीसी रोड का निर्माण  किया गया था। जहां राजनैतिक पेंच फंसने के कारण आसन मोहल्ले अन्ता रोड पर बरसाती पानी निकासी के लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग ने  पानी निकासी के लिए पाइप नहीं डाले थे जबकि आसन मोहल्ले के लोगो ने पाईप डालने की मांग की थी वहीं धरना प्रदर्शन भी किया गया था। सार्वजनिक निर्माण विभाग की हठधर्मिता  का नतीजा आसन बस्ती के लोगो को भुगतना पड़ रहा था।  बारिश का  पानी कई महीनों तक भरा रहता है। आसन बस्ती बरसात के दिनों में जल मग्न रहती थी। वही मकानों में पानी भर जाने से खाने पीने के सामान तक खराब हो जाते है। खेत में पानी भरा रहने से मकान तक जाना भी भारी पड  रहा था। वहीं कई महिनों तक बरसात का पानी भरा रहने से परिवार के लोग बीमार तक रहते थे। </p>
<p><strong>समस्या से कई बार जिम्मेदारों को करवाया था अवगत </strong><br />सुरेश खण्डेलवाल व्यापार संघ अध्यक्ष ने आसान बस्ती में भरे हुए बारिश के पानी की निकासी के लिए  मुख्यमंत्री ,मुख्य सचिव, पीडब्ल्यूडी मंत्रीÑ, राजस्थान सरकार तथा सांसद, संभागीय आयुक्त, जिला कलेक्टर ,पीडब्लूडी अधिशासी अभियंता तथा नगर पालिका अधिशासी अभियंता सभी को पत्र स्पीड पोस्ट द्वारा दिए गए थे। साथ ही राजस्थान संपर्क में दो बार परिवाद दर्ज करवाया गया था।वहीं पूर्व भाजपा जिला संगठन महामंत्री रामशंकर वैष्णव के अथक प्रयासों के बाद शुक्रवार को प्रशासन की मौजूदगी में रोड कटिंग करके दो मशीनों की सहायता से पाइप डालकर पानी की निकासी की गई। वहीं आसन मौहल्ले के लोगो ने पानी कम होने पर अपनों मकानों की सार संभाल ली। वहीं प्रशासन व भाजपा नेताओं का आभार व्यक्त किया।</p>
<p><strong>वाटर पम्प से अन्य बस्तियों का भी निकाला जा रहा पानी </strong><br />वहीं कस्बे  के गढ़ के पीछे की बस्तियों में जल भराव को वाटर पम्प की सहायता से निकाला जा रहा है।  इस मौके पर भाजपा के वरिष्ठ नेता रामशंकर वैष्णव, लक्ष्मण सिंह हाड़ा, किशनबिहारी यादव, श्याम सोनी, व्यापार महासंघ के अध्यक्ष सुरेश खंडेलवाल, दिनेश दाधीच रायथल, लक्ष्मीचंद सुमन, युवा मोर्चा के सत्यनारायण सोनी, महावीर कहार, राहुल कोड़प,आयुष नागर  समेत अनेक कार्यकर्ता बचाव राहत कार्य में जुटे रहे और मौके पर उपखण्ड अधिकारी सौरभ भांबू मांगरोल, तहसीलदार मांगरोल नरोत्तम  मीणा,नायब तहसीलदार लोकेन्द ्रसिंह सोलंकी,काननूगो दिलशेर, पटवारी भारत भूषण शर्मा, हिमांशु वैष्णव, पीडब्ल्यूडी कनिष्ठ अभियंता नितेश मीणा,नगर पालिका सहायक अभियन्ता महेन्द्र सिंह जाटव, थानाधिकारी बाबूलाल मीणा जाप्ते के साथ मौके पर मौजूद रहे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Aug 2025 14:45:41 +0530</pubDate>
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                <title>बड़ा सवाल : कौन बनाएगा बस स्टैण्ड ?</title>
                                    <description><![CDATA[खानपुर बाईपास पर मेगा हाइवे के समीप सासंद व विधायक कोष से करीब 35 लाख रुपए की लागत से बस स्टैंड का निर्माण करीब तीन साल से अधिक समय से अधूरा पड़ा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/the-big-question--who-will-build-the-bus-stand/article-99819"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/257rtrer-(4)4.png" alt=""></a><br /><p>खानपुर। खानपुर बाईपास पर मेगा हाइवे के समीप सासंद व विधायक कोष से करीब 35 लाख रुपए की लागत से बस स्टैंड का निर्माण करीब तीन साल से अधिक समय से अधूरा पड़ा है। नवनिर्मित बस स्टैंड पर चारदीवारी निर्माण में लगी जालियां टूटी हैं। परिसर में बबूल के पेड़ व कंटीली झाड़ियां उगी है तथा कई जहरीले पौधे उग चुके हैं, जिनको जानवर खाकर मर सकते हैं। 20 हजार से अधिक आबादी होने के बावजूद भी स्थाई बस स्टैंड निर्माण नहीं होने से यात्री परेशान है। खानपुर को स्मार्ट सिटी बनाने को लेकर तैयार किए खाके में सार्वजनिक बस स्टैंड, मुख्य मार्गों पर सीसी सड़कें, मुख्य नालों पर ड्रेनेज सिस्टम से गन्दे पानी की निकासी आदि विकास कार्यों का निर्माण करवाया जाना था, लेकिन आधे अधूरे निर्माण कार्य होने से खानपुरवासियों के लिए स्मार्ट सिटी बनने का सपना अधूरा ही रह गया। स्मार्ट सिटी बनाने को लेकर मुख्य नालों के ऊपर बने अतिक्रमण हटाने की आधी अधूरी कार्रवाई कर इतिश्री कर दी थी। इससे कस्बे के मुख्य नाले साफ सफाई के अभाव में गंदगियों से अटके हैं। कस्बेवासियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। </p>
<p><strong>रात्रि में बना नशेडियों का अड्डा</strong><br />रात्रि में तो बस स्टैण्ड भूमि पर शराबी व नशेडियों का अड्डा बन गया है। कस्बे में करीब आधा दर्जन से अधिक अस्थाई बस स्टैंड के भरोसे से ही यात्रियों को बिना किसी मूलभूत सुविधा के घंटों तक इंतजार करना पड़ता है। जहां यात्रियों के बैठने की भी व्यवस्था नहीं है। ऐसे में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।   यहां पर अस्थायी बस स्टैंड में पुराना बस स्टैंड, सारोला रोड, पुराना बैंक तिराहर, शहीद स्मारक अटरू रोड, बारां रोड, कृषि उपज मंडी के सामने, मेगा हाइवे स्थित दहीखेड़ा चौराहा, काली तलाई सहित कई नाम से अस्थाई बस स्टैंड बने हुए हैं। अस्थाई बस स्टैण्ड से सवारियों को परिवहन करना पड़ता है। इनकी जगह करीब एक से दो किलोमीटर दूरी होने से अलग-अलग रूटों से आने-जाने वाले यात्रियों को अपने साथ लेकर आए सामान को लेकर पैदल गन्तव्य मार्ग से पहुंचना पड़ता है। यहां तक की घंटे तक बैठे यात्री बसों का इंतजार करते रहते हैं। यहां पर दुकान व फल फ्रूट वाले है जो यह बताते हैं कि यह बस किस समय आएगी, इससे यात्रियों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। तिराहर, शहीद स्मारक अटरू रोड, बारां रोड, कृषि उपज मंडी के सामने, मेगा हाइवे स्थित दहीखेड़ा चौराहा, काली तलाई सहित कई नाम से अस्थाई बस स्टैंड बने हुए हैं। अस्थाई बस स्टैण्ड से सवारियों को परिवहन करना पड़ता है। इनकी जगह करीब एक से दो किलोमीटर दूरी होने से अलग-अलग रूटों से आने-जाने वाले यात्रियों को अपने साथ लेकर आए सामान को लेकर पैदल गन्तव्य मार्ग से पहुंचना पड़ता है। यहां तक की घंटे तक बैठे यात्री बसों का इंतजार करते रहते हैं ।  यहां पर अस्थाई रूप से बस स्टैंड बन चुके हैं जिनका अधूरा निर्माण कार्य रह गया है खानपुर बार रोड स्थित महावीर कॉलोनी में बस स्टैंड बनाया था जो वह भी अधूरा पड़ा हुआ है व खानपुर आबादी से अत्यधिक दूर होने के कारण या कोई और सुविधा न होने के कारण वहां पर कोई यात्री आता जाता ना था इसलिए वह बस स्टैंड भी निरस्त हो गया। </p>
<p> खानपुरवासी दर- दर भटक रहे  है, जल्द बस स्टैंड शुरू होना चाहिए। कस्बेवासियों के लिए यह एक मूलभूत आवश्यकता है, ताकि एक जगह से ही बसों का संचालन शुरू हो। <br /><strong>- गजेंद्र राठौर, व्यापारी</strong></p>
<p> खानपुर में स्थाई बस स्टैंड न होने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है और जो बसें बंद चल रही है उन्हें चालू किया जाए। <br /><strong>- कमल मालव, व्यापारी</strong></p>
<p> बस स्टैंड का कार्य अधूरा पड़ा होने से यात्री परेशान हो रहे हैं और वह इधर- उधर भटकते रहते हैं, जल्द ही बस स्टैंड का निर्माण हो ताकि यात्री परेशान ना हो। <br /><strong>- रामबाबू वैष्णव, समाजसेवी </strong></p>
<p>खानपुर से जुड़े हुए आसपास के छोटे गांव के छात्र व छात्राओं को आने- जाने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है, इसलिए यथावत बस स्टैंड का निर्माण होना चाहिए, ताकि छात्रों को परेशानी ना आए। <br /><strong>- दिनेश नागर, मैकेनिक</strong></p>
<p>खानपुर में शहीद मुकुट बिहारी कॉलेज स्थित है, जहां पर आसपास गांव से विद्यार्थी आते हैं। इन विद्यार्थियों को भी बस स्टैंड ना होने के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। <br /><strong>-नितेश शर्मा, छात्र </strong></p>
<p> कई वर्षों से कस्बेवासी बस स्टैंड का इंतजार कर रहे हैं। व्यापारियों को व्यापार के लिए आने जाने के लिए परेशानी उठानी पड़ती है। <br /><strong>-सत्यनारायण, व्यापारी </strong><br /> <br />सार्वजनिक निर्माण विभाग को इसका टेंडर दिया गया था , उन्होंने इसकी खाली चार दीवारें करके इसके अलावा इसका कोई काम नहीं हुआ । हमें भी अलॉट नहीं हुआ अगर तैयार हो जाता है तो हम बस स्टैंड प्रारंभ कर सकते हैं, हम भी चाहते हैं कि यात्रियों को बस स्टैण्ड सुविधा मिले। <br /><strong>- प्रतीक मीणा, यातायात प्रबंधक (झालावाड़)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Jan 2025 17:54:09 +0530</pubDate>
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