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                <title>government schools - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>government schools RSS Feed</description>
                
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                <title>मनोहरथाना में 26 सरकारी विद्यालय शिफ्ट, बच्चों की सुरक्षा व पढ़ाई पर सवाल</title>
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                        <![CDATA[कई गांवों में बच्चों को उनके मूल विद्यालय के बजाय 3 - 4 किमी. दूर के स्कूलों में पढ़ने जाना होगा। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/26-government-schools-shifted-in-manoharathana--raising-questions-about-children-s-safety-and-education/article-138861"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)1.png" alt=""></a><br /><p>मनोहरथाना । एक ओर राज्य सरकार अपने दो वर्ष के कार्यकाल की उपलब्धियां गिना रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत यह है कि जर्जर विद्यालय भवनों का स्थायी समाधान अब तक नहीं हो सका है। पिपलोदी हादसे के बाद जिन स्कूल भवनों को जर्जर घोषित किया गया था, उन्हें समय रहते ध्वस्त कर नए भवनों का निर्माण नहीं किया गया। इसका नतीजा यह हुआ कि झालावाड़ जिले के मनोहरथाना ब्लॉक में करीब 26 सरकारी विद्यालयों को पास के अन्य विद्यालयों में शिफ्ट करना पड़ा है। इस निर्णय से हजारों बच्चों की पढ़ाई, सुरक्षा और अभिभावकों की चिंताएं बढ़ गई हैं।</p>
<p><strong>क्या है पूरा मामला</strong><br />जानकारी के अनुसार, मनोहरथाना ब्लॉक के जिन विद्यालयों को जर्जर घोषित किया गया था, वहां अध्ययनरत विद्यार्थियों को 10 जनवरी के बाद अन्य विद्यालयों में पढ़ने जाना होगा। कई गांवों में बच्चों को अपने मूल विद्यालय के बजाय 3 से 4 किलोमीटर दूर स्थित स्कूलों में भेजा जा रहा है। इस फैसले को लेकर ग्रामीणों और अभिभावकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।</p>
<p><strong>शिफ्ट किए गए 26 विद्यालय</strong><br />कोटड़ा चमरगढ़, ताजपुरिया, चित्तौड़ा, ढाबा, कुंजरी, गोडिया, हनोतिया, आफूखेड़ी, गुराड़खेड़ा, कंवरिया खेड़ी, भवानीपुरा, बिरजीपुरा, हमीरपुर, शोलाल का पूरा, तलाईबेह, टांडी तंवरान, बामलाबेह, बकबट पूरा, भामा का पूरा, गंगाहोनी, झिरी, गिरधरपुरा, खेड़ी बोर, कंजरी की टापरियां, मोतीपुरा, रामपुरिया गुजरान।</p>
<p><strong>इन 13 विद्यालयों ने दर्ज कराई आपत्ति</strong><br />ताजपुरिया, चित्तौड़ा, गुराड़खेड़ा, कंवरिया खेड़ी, बकबट पूरा, भामा का पूरा, गंगाहोनी, गिरधरपुरा, खेड़ी बोर, कंजरी की टापरियां, बिरजीपुरा, झिरी।</p>
<p><strong>अभिभावकों की चिंता</strong><br />अभिभावकों का कहना है कि छोटे बच्चों के लिए रोज 3-4 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाना आसान नहीं है। प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों को व्यस्त सड़क मार्ग से गुजरना पड़ेगा, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। पहले से ही पिपलोदी हादसे की टीस मन में है, ऐसे में दूरी बढ़ने से डर और गहरा गया है।</p>
<p><strong>पढ़ाई पर असर</strong><br />विद्यालय शिफ्ट होने से बच्चों की नियमित पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका है। फरवरी से बोर्ड परीक्षाएं शुरू होनी हैं। नए स्कूल, नया वातावरण और पहले से भरी कक्षाओं में अतिरिक्त विद्यार्थियों का दबाव शिक्षा की गुणवत्ता पर असर डाल सकता है।</p>
<p><strong>स्थायी समाधान की मांग</strong><br />ग्रामीणों, अभिभावकों और शिक्षाविदों की मांग है कि जर्जर भवनों को गिराकर समयबद्ध तरीके से नए सुरक्षित विद्यालय भवनों का निर्माण किया जाए। जब तक नए भवन नहीं बनते, तब तक गांव स्तर पर सुरक्षित अस्थायी व्यवस्था या परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जाए।</p>
<p>मनोहरथाना ब्लॉक में 26 विद्यालय शिफ्ट किए गए हैं। इनमें से 13 विद्यालयों की आपत्तियां प्राप्त हुई हैं, जिन्हें उच्च अधिकारियों को भेज दिया गया है। निर्देश मिलते ही नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>-दुलीचंद लोधा, कार्यवाहक ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, झालावाड़ </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 Jan 2026 16:20:24 +0530</pubDate>
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                <title>खतरे में बचपन, घट रहा नामांकन जर्जर सरकारी स्कूल</title>
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                        <![CDATA[इटावा व सुल्तानपुर ब्लॉक के उच्च प्राथमिक विद्यालयों के बुरे हाल ।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/childhood-in-danger--enrollment-decreasing-in-dilapidated-government-schools/article-120918"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/news36.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। अंधेर नगरी, चौपट राजा..., कहावत की यह पंक्तियां इन दिनों कोटा जिले के राजकीय विद्यालयों व शिक्षाधिकारियों पर सटीक बैठती है। इन विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना तो दूर कल्पना तक नहीं की जा सकती। हालात यह है, सरकार एक तरफ नामांकन बढ़ाने पर जोर दे रही है वहीं, दूसरी तरफ शिक्षा विभाग की लापरवाही से नामांकन बढ़ने के बजाए लगातार घट रहा है। विभागीय अधिकारियों के क्वालिटी एजुकेशन के दावों की ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में धज्जियां उड़ रही हैं। इटावा व सुल्तानपुर ब्लॉक के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय एक-एक कमरों में चल रहे हैं। जबकि, अन्य कमरें जर्जर हो चुके हैं। जिन्हें ताला लगाकर बंद कर दिया गया है। </p>
<p><strong>डिंडोरा व रणमल दोनों ही स्कूलों में घटा नामांकन: </strong>सुल्तानपुर व इटावा ब्लॉक के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय रणमल व राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय डिंडोरा दोनों में ही गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष नामांकन घट गया है। रणमल स्कूल में कक्षा 1 से 5वीं तक कुल 18 विद्यार्थियों का नामांकन था, जो इस वर्ष घटकर 11 ही रह गया। यहां कक्षा-3 में एक भी विद्यार्थी नहीं है। नामांकन जीरो है। वहीं, पहली कक्षा में अब तक मात्र-1 ही विद्यार्थी का दाखिला हुआ है। इसी तरह इटावा ब्लॉक के डिंडोरा स्कूल में पिछले साल कुल 28 छात्र-छात्राओं का नामांकन था, जो अब तक घटकर 24 ही रह गए।</p>
<p><strong>ब्लॉक इटावा : स्कूल डिंडोरा के हालत</strong><br /><strong>एक कमरे में लगती 5 कक्षाएं</strong><br />स्कूल शिक्षक से मिली जानकारी के अनुसार, विद्यालय में वर्तमान में कुल 4 कक्ष हैं, जिनमें से 2 पूरी तरह से जर्जर हैं, जिनमें विद्यार्थियों को नहीं बिठाया जाता।। एक प्रधानाध्यापक कक्ष है, जिसकी छत से प्लास्टर  गिरता रहता है, छतें टपकती है। ऐसे में एक ही कक्ष है, जिसमें कक्षा 1 से 5वीं तक की क्लासें लगती है। यह कक्ष भी गत मई-जून माह में स्थानीय भामाशाह बच्छाराजी मीणा ने 3 लाख रुपए की लागत से बनवाया है। </p>
<p><strong>जहां मिड-डे मिल बनता, उसी में बच्चे पढ़ते</strong><br />गत दो माह पहले भामाशाह द्वारा बनवाया गया एक ही कक्ष बच्चों को बिठाने लायक है। इसी में एक साथ पांच कक्षा चलती है और इसी में बच्चों के लिए मिड-डे मिल का भोजन बनता है। क्योंकि, बारिश के दिनों में पोषाहार को गिला होने से बचाने के लिए इसी भवन में खाद्यय सामग्री रखी जाती है। यहां पढ़ाने के लिए  दो ही शिक्षक ही, जिसमें से एक के पास बीएलओ का चार्ज भी है। </p>
<p><strong>ब्लॉक सुल्तानपुर : स्कूल बंबूलिया रणमल के हालत</strong><br /><strong>1 से 5वीं तक 11 ही विद्यार्थी, 7 की कटी टीसी</strong><br />इस स्कूल में कक्षा 1 से 5वीं तक वर्तमान में 11 ही विद्यार्थियों का नामांकन है। जबकि, गत वर्ष 18 बच्चे थे। ऐसे में 7 बच्चों की टीसी कट चुकी है। हालांकि, अभी प्रवेशोत्सव चल रहा है। विद्यालय में 1 ही कक्षा में 5वीं तक की कक्षाएं संचालित होती है। सुविधाओं का अभाव होने के कारण अभिभावक भी सरकारी विद्यालय में बच्चों को पढ़ाने में रुचि नहीं रखते और प्राइवेट विद्यालयों में दाखिला करवा रहे हैं। </p>
<p><strong>3 में से 2 कमरे जर्जर, दीवारें भी क्षतिग्रस्त</strong><br />बम्बूलिया रणमल विद्यालय में एकमात्र शिक्षक रामकल्याण मीणा ने बताया कि स्कूल में कुल 3 कक्ष  है। इसमें 2 जर्जर हो चुके हैं। एक ही कक्ष है, जिसमें  एक से पांचवीं तक की कक्षाएं संचालित करवाते हैं।   बच्चों का नामांकन भी कम है। पढ़ाने के अलावा बीएलओ का भी चार्ज है। विभाग द्वारा मांगी जाने वाली सूचनाएं भी खुद ही तैयार करनी पड़ती है और गांव में मतदाताओं की संख्या, नाम जोड़ने से लेकर हटाने तक के सभी कार्य स्वयं करने पड़ते हैं। स्कूल के संबंध में उच्चाधिकारियों को जानकारी भेजी हुई है। </p>
<p><strong>छत की पट्टियां टूटी, लोहे के पाइप से रोकी </strong><br />उन्होंने बताया कि जिस कमरे में मिड-डे मिल बनता है, उसकी छत की पट्टियां टूटी हुई है। दरारें चल रही हैं, जिसे लोहे के पाइप को बेल्डिंग करवाकर रोक रखी है। इसी में पोषाहार भी रखा जाता है। दूसरा कमरा नहीं होने से मजबूरी में इसी कमरे में रखना पड़ता है। वहीं, बारिश के दौरान हादसे की आशंका लगी रहती  है। स्कूल में उच्चाधिकारियों से एक और शिक्षक लगाने की मांग की थी लेकिन अब तक नहीं लगाया गया। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं अभिभावक</strong><br />विद्यालय जर्जर अवस्था में है। बरसों से इसकी मरम्मत नहीं करवाई गई। शिक्षाधिकारियों से शिकायत भी की लेकिन समाधान नहीं हुआ। इन दिनों भारी बारिश का दौर चल रहा है, ऐसे में अनहोनी की आशंका लगी रहती है। ऐसे में बच्चों को निजी स्कूल में भेजते हैं।<br /><strong>- केदार लाल, अभिभावक डिंडोरा गांव </strong></p>
<p>शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों को गांव में आकर स्कूल के हालात देखना चाहिए। यहां कक्षा-कक्ष जर्जर हैं, दीवारे ढह गई, छतों की पट्टियां टूट रही है। एक ही कक्षा में एक से पांचवी तक की कक्षाएं चलाई जाती है। जिस दिन बारिश नहीं होती उस दिन खुले आसमान के नीचे कक्षाएं लगती हैं। <br /><strong>- बजरंग कुमार, अभिभावक बम्बूलिया गांव </strong></p>
<p>शिक्षा मंत्री के गृह जिले में सरकारी स्कूलों के हालत   बदतर हो रहे हैं। मैंने स्कूल बचाओ अभियान के तहत इन स्कूलों की स्थति से शिक्षा विभाग व प्रशासन को अवगत कराया, इसके बावजूद सुधारात्मक कार्य नहीं हुआ। जिम्मेदारों की अनदेखी से बच्चों की सुरक्षा दांव पर लगी रहती है। प्रशासन को विद्यार्थियों के हित में  ठोक कदम उठाकर जर्जर भवनों का जीर्णोंद्धार करवाना चाहिए। ताकि, विद्यार्थियों को क्वालिटी एजुकेशन मिल सके।<br /><strong>- शिव प्रकाश नागर, जिलाध्यक्ष, बेरोजगार महासंघ कोटा</strong></p>
<p>समग्र शिक्षा विभाग के इंजीनियर्स से विद्यालयों का सर्वे करवाया है। जिसमें कई स्कूल जर्जर मिले हैं। जो भवन विद्यार्थियों के लिहाज से असुरक्षित हैं, उन्हें डिसमेंटल किए जाने के आदेश जारी किए हैं। वहीं, कई विद्यालय भवन  ऐसे हैं, जिनमें मरम्मत की आवश्यकता है, वहां रिपेयरिंग करवाई जाएगी।  साथ ही नए भवन निर्माण के लिए जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संस्थाओं व भामाशाहों से सहयोग का आग्रह किया है। विभागीय उच्चाधिकारियों के दिशा-निर्देशों की शत-प्रतिशत पालना की जा रही है। <br /><strong>- रूप सिंह मीणा, जिला शिक्षाधिकारी प्रारंभिक </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Jul 2025 18:22:55 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - राजकीय महात्मा गांधी स्कूलों में एडमिशन शेड्यूल जारी, अभिभावकों को राहत </title>
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                        <![CDATA[19 जून तक प्रवेश प्रक्रिया संपन्न होगी और एक जुलाई से शिक्षण कार्य शुरू किया जाएगा।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---admission-schedule-released-in-government-mahatma-gandhi-schools/article-113065"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/gggg1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शिक्षा विभाग ने राजकीय महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलों में प्रवेश कार्यक्रम जारी कर दिया है। जिससे अभिभावकों को बड़ी राहत मिली है। इन स्कूलों में समय पर एडमिशन होने के साथ पढ़ाई शुरू हो सकेगी। बता दें, प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन प्रक्रिया अप्रेल माह से ही शुरू हो गई थी। ऐसे में अभिभावक महात्मा गांधी स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू किए जाने का इंतजार कर रहे थे। इसको लेकर पूर्व में अभिभावकों द्वारा शिक्षा अधिकारियों से मांग भी की गई थी। इस पर विभाग ने प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर अभिभावकों को राहत प्रदान की। </p>
<p><strong>यह रहेगा एडमिशन शेड्यूल: </strong>बीएलओ शिक्षक संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष गजराज  सिंह ने बताया कि माध्यमिक शिक्षा निदेशालय बीकानेर ने सत्र 2025-26 के लिए अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया का कार्यक्रम जारी किया है। इसके तहत 7 मई से 15 जून तक ऑनलाइन आवेदन किए जा सकेंगे। 16 जून को ऑनलाइन प्राप्त आवेदन की सूची स्कूल बोर्ड पर चस्पा होगी। 17 जून को लॉटरी और 18 जून को प्रवेश मिलने वालों की अंतिम सूची विद्यालयों द्वारा जारी की जाएगी। 19 जून तक प्रवेश प्रक्रिया संपन्न होगी और एक जुलाई से शिक्षण कार्य शुरू किया जाएगा।</p>
<p><strong>कम नामांकन वाले स्कूलों का फैसला नहीं</strong><br />उन्होंने बताया कि प्रदेशभर में कम नामांकन वाले महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम वाले विद्यालयों को हिन्दी में परिवर्तित करने या बंद करने का फैसला  अभी नहीं हुआ है, जिससे असमंजस की स्थिति बनी हुई है। शिक्षा विभाग ने परिवर्तित होने वाले विद्यालयों के बारे में अभी तक कोई आदेश जारी नहीं किया है। जबकि, प्रदेश में 3700 महात्मा गांधी विद्यालय है, जिनमें करीब 800 विद्यालयों को हिन्दी में परिवर्तित करना प्रस्तावित है।  </p>
<p><strong>विद्यालयों में बढ़ेगा नामांकन  </strong><br />महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने का अभिभावकों को लंबे समय से इंतजार था। शिक्षा विभाग ने एडमिशन शेड्यूल जारी कर राहत प्रदान की है। समय पर दाखिला मिलने से स्कूल के नामांकन में वृद्धि हो सकेगी।<br /><strong>- गजराज सिंह, प्रदेशाध्यक्ष बीएलओ शिक्षक संघर्ष समिति </strong></p>]]>
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                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 May 2025 15:07:47 +0530</pubDate>
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                <title>यह कैसी कम्प्यूटर शिक्षा, 2 साल से नहीं मिली किताबें, किताब ऑनलाइन डाउनलोड कर पढ़ा रहे शिक्षक </title>
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                        <![CDATA[जिले के 340 राजकीय सीनियर सैकंडरी स्कूलों में पिछले दो साल से विद्यार्थियों को कम्प्यूटर की किताबें नहीं मिली है।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/what-kind-of-computer-education-is-this--not-received-for-2-years/article-112309"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/rtrer-(7)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिले के 340 राजकीय सीनियर सैकंडरी स्कूलों में पिछले दो साल से विद्यार्थियों को कम्प्यूटर की किताबें नहीं मिली है। जबकि, 11वीं व 12वीं कक्षा में कम्प्यूटर ऑफ्नल (ऐच्छिक) सब्जेक्ट है। ऐसे में विद्यार्थियों को पढ़ने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। हालात यह है, पिछले दो साल से विद्यार्थी बिना किताबों के परीक्षा दे रहे हैं। हालांकि, शिक्षक इंटरनेट से किताब की सॉफ्ट फाइल डाउनलोड कर बच्चों को कम्प्यूटर पढ़ा रहे हैं। इधर, नया शिक्षा सत्र 2025-26  एक जुलाई से शुरू होगा। इस बार भी विद्यार्थियों को किताबें मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे। </p>
<p><strong>कम्प्यूटर टीचर लगाए लेकिन किताबें नहीं दी</strong><br />कोटा जिले में 340 सीनियर सैकंडरी स्कूल हैं। जिनमें से 236 स्कूलों में 184 कम्प्यूटर अनुदेशक लगाए गए हैं। जहां कक्षा 11वीं व 12वीं में कम्प्यूटर कक्षाएं संचालित होती हैं। लेकिन, विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए किताबें तक उपलब्ध नहीं करवाई गई। जिससे  विद्यार्थियों व शिक्षकों को पढ़ने व पढ़ाने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पिछले दो साल से इन स्कूलों में कम्प्यूटर की किताबें नहीं पहुंची है। </p>
<p><strong>किताब ऑनलाइन डाउनलोड कर पढ़ाते शिक्षक </strong><br />राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य राम नारायण मीणा ने बताया कि वर्ष 2023 से ही कक्षा 11वीं व 12वीं की कम्प्यूटर किताबें स्कूलों में नहीं आई है। लेकिन, सिलेबस के अनुरूप कम्प्यूटर किताब इंटरनेट पर ऑनलाइन उपलब्ध है, जिसे शिक्षकों द्वारा डाउनलोड कर बच्चों को पढ़ाया जाता है। हालांकि, किताबें प्रिंट होकर निदेशालय से अब तक नहीं मिली है। </p>
<p><strong>कक्षा 1 से 8वीं तक की मिली किताबें</strong><br />सरकारी स्कूलों में गत वर्ष कक्षा 1 से 8वीं तक की कम्प्यूटर की किताबें आई थी, जिन्हें विद्यार्थियों को वितरित की गई लेकिन कक्षा 11वीं व 12वीं  के विद्यार्थियों को अब तक नहीं मिली है। ऐसे में उन्हें कम्प्यूटर के चेप्टर समझने व पढ़ने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हालात यह है, गत दो वर्षों से विद्यार्थियों को बिना किताबों के ही परीक्षा दे रहे हैं। हालांकि, शिक्षकों का कहना है, कम्प्यूटर प्रेक्टिकल सब्जेक्ट है, जिसे पढ़ने से ज्यादा प्रेक्टिकल के माध्यम से समझने में आसानी होती है। </p>
<p><strong>52 कम्प्यूटर अनुदेशक के पद खाली</strong><br />कम्प्यूटर अनुदेशक संघ के प्रदेशाध्यक्ष राघव पाठक ने बताया कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में सरकार ने 6 हजार 123 कम्प्यूटर अनुदेशक लगाए थे। कोटा जिले में 340 राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों में से 236 में पद स्वीकृत हैं। जिसमें से 184 कम्प्यूटर अनुदेशक कार्यरत हैं, ऐसे में 52 शिक्षकों के पद खाली चल रहे हैं। उन्होंने सरकार से प्रदेशभर में खाली पड़े कम्प्यूटर शिक्षकों के पद भरने की मांग की है ताकि विद्यार्थियों को वर्तमान दौर की आवश्यकता कम्प्यूटर शिक्षा मिल सके। </p>
<p><strong>खस्ताहाल हो रही लैब </strong><br />नाम न छापने की शर्त पर कुछ स्कूलों के प्रिसिंपल व शिक्षकों ने बताया कि सरकार ने कम्प्यूटर अनुदेशक तो लगा दिए लेकिन बच्चों को पढ़ाने के लिए किताबें ही मुहैया नहीं करवाई। ऐसे में विद्यार्थियों को केवल बेसिक शिक्षा ही दे रहे हैं, वहीं कई विद्यालयों में कम्प्यूटर लैब खस्ताहाल में है। वहीं, सालों पहले बनाई गई लैब में कम्प्यूटर खराब पड़े हैं, जिन्हें सुधरवाया नहीं गया। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं विद्यार्थी ?</strong><br /><strong>बाजारों में भी नहीं मिलती किताबें</strong><br />सरकारी स्कूल की कम्प्यूटर विज्ञान की किताब बाजारों में भी नहंी मिलती। जबकि, प्राइवेट स्कूलों की किताबें उपलब्ध हैं। 11वीं कक्षा में कम्प्यूटर विज्ञान विषय ले रखा है लेकिन बिना किताबों के ही पेपर देने को मजबूर हैं। हालांकि, शिक्षक  लैब में प्रेक्टिकल के माध्यम से चैप्टर समझा देते हैं। लेकिन, पेपर में थ्यौरी भी तो लिखनी होती है। किताबों के बिना परेशानी रहती है। <br /><strong>- अशोक मेहता, छात्र इटावा</strong></p>
<p>पिछले साल भी हमें किताबें नहीं मिली थी। इस बार तो 12वीं बोर्ड परीक्षा भी बिना किताब पढ़े ही  देनी पड़ी। सरकार को कम से कम किताबें तो उपलब्ध करानी चाहिए। <br /><strong>-अक्षय वैष्णव,  छात्र सुल्तानपुर</strong></p>
<p><strong>नहीं आई किताबें</strong><br />पिछले दो साल से कम्प्यूटर विषय की किताबें नहीं पहुंची हैं। 9वीं से 12वीं की कम्प्यूटर की किताबें नहीं आई है। पिछले साल 1 से 8वीं तक की आ गई थी।  कक्षा 9 से 12वीं तक में दो दर्जन छात्रों ने कम्प्यूटर विषय ले रखा है। किताब की सॉफ्ट फाइल ऑनलाइन डाउनलोड कर रखी है, उसी से बच्चों को पढ़ाया जाता है। <br /><strong>- रामनारायण मीणा, प्राचार्य, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय</strong></p>
<p>हर साल कम्प्यूटर विज्ञान की किताबों के लिए विभाग को डिमांड भेजी जाती है। लेकिन, गत दो वर्षों से किताबें नहीं मिली है। किताब के बिना बच्चों को पढ़ने में परेशानी तो होती है लेकिन किताब की सॉफ्ट फाइल ऑनलाइन डाउनलोड कर रखी है, जिससे बच्चों को पढ़ाते हैं। <br /><strong>- अजय चौधरी, कम्प्यूटर अनुदेशक, इटावा विद्यालय</strong></p>
<p>अभी तक कक्षा 9 से 12वीं तक की कम्प्यूटर साइंस की किताबें नहीं मिली है। गत वर्ष भी नहीं आई थी। जैसे ही हमारे पास माध्यमिक शिक्षा निदेशालय बीकानेर से किताबें आएंगी, वैसे ही स्कूलों को वितरित कर दी जाएगी। <br /><strong>- राजू कुमार, मुख्य प्रबंधक राजस्थान राज्य पाठ्य पुस्तक वितरण केंद्र कोटा </strong></p>
<p>इस संबंध में जानकारी कर आगे की कार्यवाही की जाएगी।<br /><strong>- योगेश पारीक, मुख्य जिला शिक्षाधिकारी कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Apr 2025 16:40:52 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - अब शिक्षक करेंगे हाउस होल्ड सर्वे, बढ़ाएंगे नामांकन</title>
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                        <![CDATA[ शिक्षक विद्यालय आएंगे और डोर टू डोर घर-घर जाकर अभिभावकों से सम्पर्क कर नामांकन बढ़ाने का प्रयास करेंगे।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---now-teachers-will-do-household-survey--will-increase-enrollment/article-111049"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/news-(5)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने के लिए अब शिक्षक हाउस होल्ड सर्वे करेंगे। इसी के साथ प्रवेशोत्सव के प्रथम चरण का आगाज हो गया है। ऐसे में अब शिक्षक विद्यालय आएंगे और डोर टू डोर घर-घर जाकर अभिभावकों से सम्पर्क कर नामांकन बढ़ाने का प्रयास करेंगे। हालांकि शैक्षणिक सत्र की शुरुआत 1 जुलाई से होगी। राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने इसके आदेश जारी कर दिए हैं। गौरतलब है कि दैनिक नवज्योति ने गत 8 अपे्रल को इस बार प्रवेशोत्सव में देरी से सरकारी स्कूलों का घटेगा नामांकन...शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद राजस्थान सकूल शिक्षा परिषद ने प्रवेशोत्सव को लेकर आदेश जारी किए। </p>
<p><strong>प्रवेशोत्सव का पहला चरण 9 मई तक </strong><br />शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, सत्र 2025 -26 के लिए प्रवेशोत्सव के पहले चरण का आगाज मंगलवार से हो चुका है, जो 9 मई तक जारी रहेगा। इस दौरान शिक्षक घर-घर जाकर हाउस होल्ड सर्वे करेंगे और 3 से 18 वर्ष आयु के सभी बच्चों का चिन्हीकरण कर 3 से 5 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को आंगनबाड़ियों में तथा 6 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को विद्यालय में प्रवेश दिया दिलाएंगे। </p>
<p><strong>अनामांकित व ड्रॉप आउट बच्चों पर रहेगा फोकस </strong><br />शिक्षक नेता मोहर सिंह ने बताया कि शिक्षा विभाग के आदेशानुसार प्रवेशोत्सव कार्यक्रम के दौरान नामांकन वृद्धि, अनामांकित व ड्रॉपआउट बच्चों एवं प्रवासी श्रमिकों के बच्चों एवं बाल श्रम से मुक्त कराए गए बच्चों तथा गाड़ी लुहार/घुमंतु परिवारों के बच्चों को विद्यालय में नामांकित करने पर विशेष फोकस रहेगा। शिक्षा से वंचित इन चिन्हित बालक-बालिकाओं की प्रविष्टि प्रत्येक शिक्षक द्वारा शाला दर्पण शिक्षक ऐप के माध्यम से की जानी है।</p>
<p><strong>प्रवेश महोत्सव का होगा आयोजन </strong><br />नव प्रवेशित विद्यार्थियों के उत्साहवर्धन के लिए 8 मई से 10 मई तक विद्यालयों में प्रवेश महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। जिसमें विद्यार्थियों के अभिभावकों को आमंत्रित कर विद्यालय की प्रवेश समिति के साथ परिचित करवा कर प्रवेश ा्रक्रिया को पूर्ण किया जाएगा।</p>
<p><strong>दो चरणों में होगा डिजिटल प्रवेशोत्सव </strong><br /><strong>प्रथम चरण: </strong><br />- हाउस होल्ड सर्वे (बच्चों का चिन्हीकरण) - 15 अप्रैल से 9 मई तक। <br />- नामांकन अभियान (सीआरसी मॉड्यूल में प्रविष्टि) - 10 से 16 मई तक<br /><strong>द्वितीय चरण: </strong><br />- पुन: हाउस होल्ड सर्वे (शेष रहें बच्चों का चिन्हीकरण) - 1 जुलाई से 24 जुलाई तक। <br />- नामांकन अभियान 25 जुलाई से 18 अगस्त तक रहेगा।</p>
<p><strong>नवज्योति का जताया आभार</strong><br />15 अप्रैल से प्रवेशोत्सव के आगाज किए जाने का विभाग का निर्णय स्वागत योग्य है। समय पर प्रवेशोत्सव शुरू होने से सरकारी विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने में मदद मिलेगी।  गवर्नमेंट स्कूलों में प्रवेशोत्सव में देरी को लेकर दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित कर उच्चाधिकारियों को नामांकन में कमी से अवगत कराकर अलख जगाई। जिसका ही नतीजा है कि राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने प्रवेशोत्सव शुरू किए जाने के आदेश जारी किए। इसके लिए दैनिक नवज्योति का बहुत-बहुत आभार। <br /><strong>-मोहर सिंह सलावद, प्रदेशाध्यक्ष शिक्षक संघ रेसटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Apr 2025 14:31:07 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - अब नहीं अटकेगा गुरुजी का पैसा सरकार ने जारी किया 3.60 करोड़ का बजट </title>
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                        <![CDATA[प्रदेशभर के शिक्षकों की आवाज बनी नवज्योति]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news---now-guruji-s-money-will-not-be-stuck--government-released-a-budget-of-rs--3-60-crore/article-109007"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/news51.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। सरकारी स्कूलों के शिक्षकों का जेब से लगाया गया पैसा अब नहीं अटकेगा।  राज्य सरकार ने शुक्रवार को प्रदेशभर के सभी राजकीय विद्यालयों को कम्पोजिट स्कूल ग्रांट की राशि जारी कर दी है। कोटा जिले के माध्यमिक व प्रारंभिक को मिलाकर कुल 1094 सरकारी विद्यालयों को 3.60 करोड़ रुपए से ज्यादा का बजट स्वीकृत कर दिया गया है। इससे स्कूलों में बिजली-पानी के बिलों का भुगतान, स्टेशनरी खरीद व वार्षिकोत्सव के आयोजन के लिए संस्था प्रधानों व शिक्षकों द्वारा अपनी जेब से खर्च किए गए पैसों का अब पुर्नभरण हो सकेगा।  </p>
<p><strong>कोटा के 1094 स्कूलों को मिला 3.60 करोड़ से ज्यादा का बजट</strong><br />जिला परियोजना समग्र शिक्षा से मिली जानकारी के अनुसार, कोटा जिले के कुल 1094 सरकारी स्कूलों को 3 करोड़ 60 लाख 81 हजार 500 रुपए की   कम्पोजिट स्कूल ग्रांट की राशि जारी कर दी गई है।  इसमें माध्यमिक शिक्षा के 329 राजकीय माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालयों को 1 करोड़ 82 लाख 75 हजार 400 रुपए का बजट दिया गया है। वहीं, प्रारंभिक शिक्षा के 763 स्कूलों को 1 करोड़ 78 लाख 6 हजार 100 रुपए की कम्पोजिट स्कूल ग्रांट स्वीकृत की गई है। बजट मिलने से शिक्षकों को पुर्नभरण किया जा सकेगा। </p>
<p><strong>अब सीबीईओ से स्कूलों को ट्रांसफर होगा बजट</strong><br />शिक्षा अधिकारियों का कहना है कि राज्य सरकार से समग्र शिक्षा को कम्पोजिट स्कूल ग्रांट की राशि प्राप्त हो चुकी है, जिसे समग्र शिक्षा ने ब्लॉकवाइज   स्कूलों को बजट जारी कर सीबीईओ को भिजवा दिया गया है। ऐसे में अब यहां से संबंधित स्कूलों को बजट ट्रांसफर किया जाएगा। </p>
<p><strong>किस ब्लॉक को कितना मिला बजट </strong><br /><strong>माध्यमिक शिक्षा </strong><br /><strong>ब्लॉक        बजट</strong><br />इटावा    23,76,100<br />खैराबाद    29,38100<br />कोटा सिटी    55,21,900<br />लाडपुरा    20,00200<br />सांगोद    28,13,200<br />सुल्तानपुर    26,25,900</p>
<p><strong>प्रारंभिक शिक्षा</strong><br /><strong>ब्लॉक      बजट</strong><br />इटावा    32,9,500<br />खैराबाद    35,89,700<br />कोटा सिटी    24,84,800<br />लाडपुरा    28,42,100<br />सांगोद    31,37,500<br />सुल्तानपुर    25,42,500</p>
<p><strong>शिक्षक संघ ने नवज्योति का जताया आभार</strong><br />दैनिक नवज्योति के सराहनीय प्रयास से प्रदेशभर के सरकारी स्कूलों को वित्तीय वर्ष खत्म होने से पहले  कम्पोजिट स्कूल ग्रांट की राशि स्वीकृत हो गई है। बजट मिलने से शिक्षकों को बड़ी राहत मिलेगी। दैनिक नवज्योति ने समय-समय पर बेबाकी से शिक्षकों व विद्यार्थियों की आवाज उठाता रहा है। इसके लिए  शिक्षक संघ रेसटा नवज्योति का आभार जताता है। <br /><strong>-मोहर सिंह सलावद, प्रदेशाध्यक्ष शिक्षक संघ रेसटा </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br /> सरकार ने कम्पोजिट स्कूल ग्रांट की राशि स्वीकृत कर दी है। समग्र शिक्षा से जिले के सभी राजकीय विद्यालयों को बजट जारी कर दिया गया है।<br /><strong>-योगेश पारीक, मुख्य जिला शिक्षाधिकारी </strong></p>
<p>हां, कम्पोजिट स्कूल ग्रांट का बजट जारी हो गया है। समग्र शिक्षा ने जिले के सभी ब्लॉक के सीबीईओ को ग्रांट की राशि भेज दी है। अब वहां से स्कूलों को ट्रांसफर की जाएगी।<br /><strong>-रुपेश सिंह, एडीपीसी समग्र शिक्षा </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Mar 2025 11:54:15 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - प्रदेश के 56 लाख विद्यार्थियों के खाते में आएंगे यूनिफॉर्म खरीदने के 800 रुपए</title>
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                        <![CDATA[कोटा के 92 हजार विद्यार्थियों को मिलेगी राहत।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/56-lakh-students-of-the-state-will-get-rs-800-to-buy-uniforms/article-108456"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/news38.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत  कक्षा एक से आठवीं तक के लाखों विद्यार्थियों के लिए खुशखबर है। यूनिफॉर्म का 8 माह का इंतजार चंद दिनों में खत्म होने वाला है। अब सरकार प्रदेश के 56 लाख विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म खरीदने का पैसा सीधा उनके बैंक खाते में ट्रांसफर करेगी। इस राशि से अभिभावक दो गणवेश खरीद सकेंगे।  दरअसल, मुख्यमंत्री द्वारा 27 मार्च को कक्षा एक से आठवीं तक के समस्त विद्यार्थी व कक्षा 9 से 12वीं तक की छात्राओं को यूनिफॉर्म (सिलाई सहित) खरीदने के लिए उनके जनाधार से लिंक बैंक खातों में डीबीटी का शुभारंभ करेंगे। डीबीटी के जरिए प्रत्येक विद्यार्थियों के खातों में 800 रुपए ट्रांसफर किए जाएंगे।  सरकार की इस योजना से जहां भ्रष्टाचार खत्म होगा वहीं, अभिभावक अपने बच्चों के लिए अच्छी क्वालिटी का यूनिफॉर्म का कपड़ा खरीद सकेंगे। </p>
<p><strong>दैनिक नवज्योति बना लाखों विद्यार्थियों की आवाज</strong><br />प्रदेश के 56 लाख व कोटा के 92 हजार विद्यार्थियों को पिछले 8 माह से स्कूल यूनिफॉर्म मिलने का इंतजार था। अभिभावक भी पशोपेश में थे कि एक तरफ सत्र खत्म होने में मात्र 4 माह बचे हैं, परीक्षाएं  भी शुरू हो चुकी है,लेकिन अब तब गणवेश नहीं मिली। ऐसे में वर्तमान सत्र में यूनिफॉर्म मिलेगी या नहीं। विद्यार्थियों व अभिभावकों की इसी परेशानियों को देखते हुए दैनिक नवज्योति ने 18 मार्च के अंक में कोटा के 92 हजार विद्यार्थियों को 8 महीने बाद भी न यूनिफॉर्म मिली न खातों में पैसा....शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। जिसके 4 दिन बाद ही सरकार ने गणवेश खरीदने के लिए पैसा सीधे विद्यार्थियों के जनाधार से लिंक बैंक खातों में ट्रांसफर किए जाने का आदेश जारी कर दिया। नवज्योति लाखों विद्यार्थियों व अभिभावकों Ñकी आवाज बना और उनकी समस्याओं को सरकार के समक्ष रख ध्यान आकर्षित किया।</p>
<p><strong>विद्यार्थियों को मिलेगा सरकार की योजना का लाभ</strong><br />सरकार की बजट घोषणा के क्रियान्वयन के संबंध में शिक्षा विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। यह राशि 27 मार्च को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा डीबीटी के जरिए विद्यार्थियों के बैंक खाते में जमा कराएंगे। राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद की आयुक्त अनुपमा जोरवाल ने इस संबंध में सभी जिला शिक्षाधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। राज्य सरकार की इस योजना का लाभ सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को मिलेगा।</p>
<p><strong>बैंक खाते जनाधार से लिंक करवाने के दिए निर्देश</strong><br />आयुक्त जोरवाल ने स्पष्ट किया है कि छात्र-छात्राओं को यूनिफॉर्म की राशि ऑनलाइन बैंक खाते में जमा कराई जाएगी। जिन विद्यार्थियों के जन आधार बैंक खाते से लिंक नहीं है तो निर्धारित अवधि में उनके खाते और जनाधार अपडेट करवाई जाए। इस काम की प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने राज्य के साथ-साथ जिला स्तर पर कंट्रोल रूम और प्रभारी नियुक्त करने के निर्देश भी दिए हैं। </p>
<p><strong>कक्षा 9 से 12वीं की छात्राओं को भी मिलेगा यूनिफॉर्म का पैसा</strong><br />शिक्षक संघ एलिमेंट्री सेकेंडरी टीचर एसोसिएशन (रेसटा) राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने बताया कि कक्षा पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों को नि:शुल्क यूनिफार्म देने के साथ ही सरकार ने नवीं से बारहवीं तक की सिर्फ छात्राओं के लिए भी यही घोषणा कर रखी है। अब कक्षा एक से आठवीं के साथ-साथ कक्षा नौवीं से बारहवीं तक की 12 लाख 94 हजार 645 छात्राओं को भी नि:शुल्क यूनिफॉर्म के लिए 800 रुपए प्रति विद्यार्थी भुगतान किया जाएगा।</p>
<p><strong>पिछले साल मिला यूनिफॉर्म का कपड़ा, अब बदलाव</strong><br />सरकारी स्कूलों में एक समान यूनिफॉर्म की योजना पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार लेकर आई थी।  उन्होंने सरकारी विद्यालयों के कक्षा 1 से 8वीं तक के विद्यार्थियों को नि:शुल्क यूनिफॉर्म फैब्रिक के दो सेट उपलब्ध करने की योजना शुरू की थी और फिर यूनिफॉर्म की सिलाई के लिए छात्रों को 200 रुपए का भुगतान करने का फैसला लिया था। लेकिन, इस बार वर्तमान सरकार ने सीधे ही 800 रुपए प्रति विद्यार्थी के खाते में जमा कराए जाने की योजना लागू की है। इससे विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा।</p>
<p><strong>शिक्षक संघ : मांग पूरी करने पर सरकार का आभार </strong><br />सरकारी स्कूलों में नि:शुल्क यूनिफॉर्म वितरण योजना में पात्र छात्र,छात्राओं को 8 माह बाद भी न तो यूनिफॉर्म न ही नकद राशि मिलने के कारण जल्द वितरण की मांग राज्य सरकार से की थी। रेसटा शिक्षक संघ लगातार शिक्षा सत्र खत्म होने से पहले बच्चों को लाभांवित करने की मांग करता रहा है। अब 27 मार्च से प्रति छात्र 800 रुपए की राशि दिए जाने की शुरुआत हो जाएगी । इसके लिए राज्य सरकार का आभार।<br /><strong>- मोहर सिंह सलावद, प्रदेशाध्यक्ष, शिक्षक संघ रेसटा </strong></p>
<p>हमारी तरफ से पूरी तैयारी है, कार्यक्रम के शुभारंभ  होते ही विद्यार्थियों के खातों में यूनिफॉर्म खरीदने के पैसे ट्रांसफर कर दिए जाएंगे और समय पर बिल ट्रेजरी भिजवा दिए जाएंगे।<br /><strong>- रितु शर्मा, सीबीईओ कोटा शहर, शिक्षा विभाग</strong></p>
<p>इस बार कपड़ा न देकर बच्चों के खातों में सीधे गणवेश खरीदने की 800 रुपए राशि ट्रांसफर की जाएगी। सरकार की इस डीबीटी योजना से भ्रष्टाचार का खात्मा होगा। जल्द ही बच्चे सरकार की योजना से लाभांवित होंगे। <br /><strong>- सतीश कुमार, विशेषाधिकारी, शिक्षामंत्री </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Mar 2025 13:26:38 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा के 92 हजार विद्यार्थियों को 8 महीने बाद भी न यूनिफॉर्म मिली न खातों में पैसा</title>
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                        <![CDATA[बिना यूनिफार्म में आने वाले विद्यार्थियों को भी परीक्षा दिलवाई जाएगी। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/92-thousand-students-of-kota-did-not-get-uniform-even-after-8-months-nor-money-in-their-accounts/article-107831"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer-(4)21.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिले के एक हजार से अधिक सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत कक्षा 1 से 8वीं तक 92 हजार विद्यार्थियों को 9 माह बाद भी यूनिफार्म नहीं मिली। पहले सरकार द्वारा गणवेश का कपड़ा देने की बात कही गई थी लेकिन अब यूनिफॉर्म खरीदने के लिए विद्यार्थियों के खाते में पैसा डालने की बात कह रही है। लेकिन, गणवेश कब तक मिलेगी, इसका जवाब शिक्षा अधिकारियों के पास भी नहीं है। हालात यह हैं, शिक्षा सत्र खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है लेकिन अब तक यूनिफार्म का कोई अता-पता नहीं है।  सबसे ज्यादा परेशानी 8वीं के बच्चों के साथ है। दो दिन बाद  परीक्षाएं शुरू होने वाली है, ऐसे में बोर्ड परीक्षा में यूनिफार्म पहनकर आने की अनिवार्यता के कारण विद्यार्थियों व अभिभावक असमंजस में है कि बिना यूनिफार्म के जाने पर परीक्षा में बैठने देंगे या नहीं। हालांकि, शिक्षाअधिकारियों का कहना है कि बिना यूनिफार्म में आने वाले विद्यार्थियों को भी परीक्षा दिलवाई जाएगी। </p>
<p><strong>बैंक खातों में नहीं आए यूनिफार्म खरीदने के पैसे</strong><br />शिक्षकों का कहना है, सत्र 2024-25 में सरकार ने आदेश जारी किए थे कि कक्षा पहली से आठवीं तक के बच्चों को नि:शुल्क यूनिफार्म की जगह उनके बैंक अकाउंट में गणवेश खरीदने के लिए पैसे दिए जाएंगे। इसमें सिलाई, कपड़ा व स्कूल बैग की खरीद होगी। ऐसे में अभिभावक इसका भी इंतजार कर रहे है कि बच्चों के बैंक खातों में जब राशि जमा होगी, तब यूनिफार्म बनवा लेंगे। इधर, प्रदेश में कक्षा 9 से 12वीं तक की 12 लाख 94 हजार 645 छात्राएं हैं, जिन्हें भी नि:शुल्क यूनिफार्म देने की घोषणा की गई थी। जिस पर अब तक अमल नहीं हुआ।   </p>
<p><strong>9 महीने से विद्यार्थियों को गणवेश का इंतजार</strong><br />शिक्षा सत्र शुरू हुए 9 माह हो चुके हैं। कक्षा 1 से 8वीं तक के 91 हजार 948 विद्यार्थियों को गणवेश नहीं मिल रही। वहीं, अभिभावक भी पशोपेश में है कि या तो सरकार यूनिफॉर्म का कपड़ा दे या फिर राशि दे तो बच्चों के लिए समय पर यूनिफार्म सिलवाई जा सके। मामले को लेकर अधिकारी भी संतोषजनक जवाब देने से बचते नजर आ रहे है। इधर, यूनिफार्म की सिलाई की राशि आएगी भी नहीं, इसकी भी जानकारी नहीं दी जा रही। </p>
<p><strong>कोटा में कक्षा-1 से 8वीं तक के विद्यार्थियों की संख्या</strong><br /><strong> नामांकन     कक्षा </strong><br />7307         पहली<br />8833         दूसरी<br />10807    तीसरी<br />13346     चौथी<br />11740     पांचवीं<br />13217     छठीं<br />13462     सातवीं<br />13236     आठवीं</p>
<p><strong>प्रदेश में विद्यार्थियों का आंकड़ा</strong><br /><strong> नामांकन     कक्षा </strong><br />474858     पहली<br />615297     दूसरी<br />739944     तीसरी<br />795058     चौथी<br />724667     पांचवीं<br />760481     छठीं<br />780372     सातवीं <br />759039     आठवीं</p>
<p><strong>क्या कहते हैं अभिभावक</strong><br />पिछले 8 महीने से न तो यूनिफार्म का कपड़ा मिला और न ही सिलाई का पैसा। स्कूल में शिक्षकों से पूछते हैं तो वह शिक्षा विभाग जाने की बात कहते हैं, जब विभाग में जाते हैं तो अधिकारी भी बजट नहीं आने की बात कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं। वहीं, कुछ शिक्षकों द्वारा बच्चों के बैंक खाते में यूनिफार्म खरीदने की राशि दिए जाने की बात कहीं जा रही है लेकिन स्पष्ट कुछ भी नहीं है। <br /><strong>-सतीश कुमार जांगिड़, छत्रपुरा </strong></p>
<p>सरकार को अपनी घोषणा पर अमल करना चाहिए। पिछले साल भी यूनिफार्म नहीं मिली। दो साल पहले मिली थी जो छोटी हो चुकी है। गणवेश मिलेगी या नहीं, सरकार को स्थिति स्पष्ट करना चाहिए ताकि, अभिभावक अपने बच्चों की गणवेश के लिए  इंतजार नहीं करना पड़े।<br /><strong>-सुरेंद्र बैरवा, संजय गांधी नगर </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />इधर, बालिकाओं का भी बढ़ रहा इंतजार  कक्षा पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों को नि:शुल्क यूनिफार्म देने के साथ ही सरकार ने 9वीं से 12वीं तक की सिर्फ छात्राओं के लिए यही घोषणा कर रखी है। अब कक्षा एक से आठवीं के साथ-साथ कक्षा नौवीं से बारहवीं तक की बालिकाओं के अभिभावक भी यूनिफार्म के इंतजार में है कि सरकार राशि जमा करा दे तो बच्चों के यूनिफार्म सिलवा दे सके। <br /><strong>-राजेंद्र कुमार, जिलाध्यक्ष शिक्षक संघ रेसटा झालावाड़</strong></p>
<p>शिक्षा सत्र के 8 माह गुजरने के बाद भी राज्य के सरकारी स्कूलों में नि:शुल्क यूनिफॉर्म वितरण योजना में पात्र छात्र-छात्राओं को अभी तक न तो यूनिफॉर्म  मिली न ही नकद राशि।  सरकार की ओर से प्रति छात्र 800 रुपए की राशि देने की घोषणा कर रखी है। लेकिन अभी तक प्रक्रिया शुरू नहीं हुई। जिससे विद्यार्थियों व अभिभावकों को कई तरह की परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। सरकार को जल्द से जल्द यूनिफार्म उपलब्ध करवाना चाहिए। <br /><strong>-मोहर सिंह सलावद, प्रदेशाध्यक्ष शिक्षक संघ रेसटा  </strong></p>
<p>हमारे यहां ऐसा इश्यू नहीं है, यदि कोई विद्यार्थी स्कूल यूनिफार्म में आता है तो अच्छी बात है और नहीं आता है तो भी उसे परीक्षा दिलवाई जाएगी। <br /><strong>-पवित्रा त्रिपाठी, डाइट प्रिंसिपल कोटा</strong></p>
<p>इस बार यूनिफॉर्म का कपड़ा देने के बजाए विद्यार्थियों के बैंक खातों में राशि देने का प्रावधान किया गया है।  लेकिन, अभी बजट के अभाव में यूनिफार्म खरीदने के लिए पैसा खातों में नहीं डाला गया है। उच्चाधिकारियों से प्राप्त निर्देशों के अनुसार कार्य किया जाएगा। वहीं, यूनिफार्म के लेवल पर विद्यार्थी को परीक्षा से वंचित नहीं रखा जाएगा। <br /><strong>-रूप सिंह मीणा, डीईओ एलीमेंट्री कोटा </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Mar 2025 15:49:03 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा में प्रिंसिपल से लेकर शिक्षकों के एक हजार से ज्यादा पद खाली, जिले के 343 सरकारी स्कूलों में नहीं विषय-विशेषज्ञ</title>
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                        <![CDATA[ माध्यमिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में लंबे समय से शिक्षकों के रिक्त पद भरे नहीं जा सके। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/more-than-one-thousand-posts-of-teachers-from-principal-to-teacher-are-vacant-in-kota/article-106199"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/2257rtrer-(2).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिले के सरकारी स्कूलों में एक हजार से ज्यादा शिक्षकों के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। जिसकी वजह से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। गुरुजी के इंतजार में बोर्ड परीक्षा ही सर पर आ गई लेकिन शिक्षकों की कमी पूरी नहीं हो सकी। नतीजन, स्कूलों से गुणवत्ता की दूरी बढ़ गई।  जिसका असर परीक्षा परिणामों के रूप में पड़ सकता है। दरअसल, विभाग शिक्षा विभाग न तो समय पर पदोन्नति करवा पा रहा है और न ही राज्य सरकार सीधी भर्ती करवा प रही। जिसके कारण माध्यमिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में लंबे समय से शिक्षकों के रिक्त पद भरे नहीं जा सके। </p>
<p><strong>स्कूलों में 1129 शिक्षक पद रिक्त</strong><br />जिले में माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधीन 343 सरकारी स्कूलों में प्रिंसिपल से लेकर तृतीय श्रेणी लेवल-2 तक के 1129 शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। इनमें अधिकतर फर्स्ट व सेकंड ग्रेड के पद  रिक्त हैं। जिसकी वजह से विद्यार्थियों को सब्जेक्ट टीचर नहीं मिल पाया। हालात यह हैं, सालभर इंतजार के बावजूद स्कूलों में शिक्षक तो नहीं मिले  लेकिन परीक्षा जरूर सिर पर आ गई। शिक्षकों के रिक्त पदों का असर 6 मार्च से होने वाली दसवीं व बारहवी बोर्ड परीक्षाओं में नजर आएगा। </p>
<p><strong>स्मार्ट टीवी तो दी लेकिन पढ़ाने को गुरुजी नहीं </strong><br />जानकारी के अनुसार, शिक्षा विभाग ने जिन स्कूलों में सब्जेक्ट टीचर के पद रिक्त हैं, वहां स्मार्ट टीवी के साथ सब्जेक्ट लेक्चर के वीडियो ट्यूटोरियल भी उपलब्ध करवा रखे हैं। लेकिन, समस्या यह है, विषय विशेषज्ञ अध्यापक नहीं होने से वीडियो लेक्चर  को समझाने वाला ही नहीं है।  ऐसे में विद्यार्थियों के डाउट क्लियर नहीं हो पा रहे। विभाग ने एलइडी देकर महज, खानापूर्ति कर दी। </p>
<p><strong>कोटा में माध्यमिक शिक्षा विभाग में पदों की स्थिति </strong><br /><strong>जिले में कुल स्कूल     343 </strong><br /><strong>पद                                                     स्वीकृत             कार्यरत              रिक्त</strong><br />प्रिंसिपल                                                 333                 240                 093<br />ग्रेड-1 टीचर                                           1145                 737                 408<br />ग्रेड-द्वितीय टीचर                                    1731               1443                 288<br />ग्रेड-तृतीय एल-2 व समकक्ष                      946                 804                 142<br />गे्रड-तृतीय एल-1 व समकक्ष                   1050                908                 142<br />प्रारंभिक माध्यमिक ग्रेड-फर्स्ट                    344                288                   56<br />सेकंड, 3 ग्रेड व समकक्ष </p>
<p><strong>लैब अस्टिेंट ग्रेड फर्स्ट, सेकंड व तृतीय ग्रेड पदों की स्थिति</strong><br /><strong>स्वीकृत    कार्यरत    रिक्त  </strong>  <br />89    76    13</p>
<p><strong>पदोन्नति नहीं होने से विद्यार्थियों को नहीं मिले गुरुजी</strong><br />शिक्षक संघ रेस्टा के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने बताया कि वरिष्ठ अध्यापक व व्याख्याता के 50 प्रतिशत पदों पर सीधी भर्ती व 50 प्रतिशत पदों पर पदोन्नति से भरने का नियम हैं। इनकी भी समय पर पदोन्नति नहीं होने से बोर्ड परीक्षाओं के विद्यार्थियों को भी समय पर विषय अध्यापक नहीं मिल पा रहे।  राज्य के सभी सेकेंडरी स्कूलों को उच्च माध्यमिक स्कूलों में क्रमोन्नत करने से सरकारी स्कूलों में पहले से ही शिक्षकों का टोटा है, जिसकी पूर्ति पदोन्नति के अभाव में नहीं हो सकी। </p>
<p><strong>लाखो विद्यार्थियों को उठाना पड़ रहा खामियाजा</strong><br />शाला दर्पण के 1 फरवरी के आंकड़ों के अनुसार स्कूलों  में शिक्षकों से लेकर प्राचार्यों तक स्वीकृत 3 लाख 71 हजार 126 पदों में से वर्तमान में 2 लाख 54 हजार 684 कार्यरत हंै और 1 लाख 16 हजार 442 पद रिक्त पड़े हैं। इतनी बड़ी संख्या में पद रिक्त होने से राज्य के हजारों स्कूलों में व्यवस्था गड़बड़ाई हुई है। लेकिन सरकार व शिक्षा विभाग द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिसका खामियाजा सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे लाखों विद्यार्थियों को उठाना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>इनका अब तक नहीं हुआ पदस्थापन </strong><br />वरिष्ट अध्यापक से व्याख्याता की चार सत्रों की बकाया चल रही पदोन्नति में से केवल दो सत्रों की पदोन्नति हुई है । लेकिन, इन्हें यथावत स्कूलों में ही कार्यग्रहण करवा दिया गया ओर पदस्थापन के लिए दो बार जारी हुए काउंसलिंग कार्यक्रम को स्थगित किया जा चुका है। एक अप्रैल को तीसरे सत्र की पदोन्नति और बकाया जो जाएगी। ऐसे में दो सत्रों के  पदस्थापन आदेश और दो सत्रों की पदोन्नति बकाया है, जिसे छात्र हित में जल्द से जल्द पूरा किया जाना चाहिए। </p>
<p><strong>स्कूलों में लाखों पद रिक्त होना चिंताजनक</strong><br />राज्य के सबसे बड़े विभाग शिक्षा विभाग में बोर्ड परीक्षाएं से 6 मार्च से शुरू होने जा रही है। दूसरी ओर माध्यमिक शिक्षा विभाग में एक लाख 16 हजार 442 पद रिक्त होना गंभीर विषय है। राज्य सरकार व शिक्षा विभाग को नई भर्तियों में पदों की संख्या बढ़ानी चाहिए। साथ ही लंबे समय से लंबित सभी पदोन्नतियों को समय पर करके रिक्त पदों को भरा जाएं, जिससे राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे लाखों विद्यार्थियों को नए सत्र से पहले शिक्षक मिल सकें।<br /><strong>- मोहर सिंह सलावद, प्रदेशाध्यक्ष, शिक्षक संघ रेसटा </strong></p>
<p>विभाग में कर्मचारियों की डीपीसी किए जाने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। जल्द ही शिक्षकों व प्रिंसिपलों के रिक्त पदों को भर दिया जाएगा।<br /><strong>- केके शर्मा, जिला मुख्य शिक्षाधिकारी कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Mar 2025 15:36:16 +0530</pubDate>
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                <title>जर्जर स्कूलों से खतरे में बचपन, हर पल दरबीजी जैसी घटना का डर</title>
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                        <![CDATA[कोटा जिले के सरकारी स्कूलों के हाल बद से बदतर।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/childhood-in-danger-due-to-dilapidated-schools/article-104579"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/pze9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। अंधेर नगरी, चौपट राजा..., कहावत की यह पंक्तियां इन दिनों कोटा जिले के राजकीय विद्यालयों व शिक्षाधिकारियों पर सटीक बैठती है। इन विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना तो दूर कल्पना तक नहीं की जा सकती। सरकार के क्वालिटी एजुकेशन के दावों की ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में धज्जियां उड़ रही है। इटावा ब्लॉक के राजकीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय बिना कमरों के खुले में चल रहे हैं। यहां बच्चे कभी सर्दी में शीत लहर से ठिठुरते तो कभी गर्मी से झुलसते। सरकारी मशीनरी की लचरता से विद्यार्थियों ने स्कूल आना ही बंद कर दिया। हालात यह हैं, ग्रामीण इलाकों में दो-दो कमरों में प्राइमरी व अपर प्राइमरी स्कूल चलते हैं। यह कमरें भी जर्जर हो चुके हैं, जिसकी वजह से स्कूल प्रशासन अनहोनी के डर से खुले में कक्षाएं लगाने को मजबूर है। ऐसे में मौसम बिगड़ते ही पढ़ाई  चौपट हो जाती है। कक्षा-कक्षों की छतों से प्लास्टर गायब हो चुके और सरिए बाहर निकल गए। दीवारों पर बड़ी-बड़ी गहरी दरारों से बचपन खतरे में पड़ा है। पेश है खबर के प्रमुख अंश....</p>
<p><strong>हर पल दरबीजी जैसी घटना का डर</strong><br />कोटा जिले के ग्रामीण इलाके अमरपुरा, झाड़ोल, बंबूलिया रणमल, कोटड़ा दीप सिंह सहित अन्यक्षेत्रों के प्रायमरी व अपर प्रायमरी स्कूलों में हर पल दरबीजी गांव के स्कूल में हुए हादसे जैसी घटनाओं का डर लगा रहता है। सुल्तानपुर के दरबीजी स्कूल में हाल ही में क्षतिग्रस्त टायलेट की दीवार ढहने से 7वर्षीय छात्रा की मौत हो गई थी।  इस घटना के बाद भी शिक्षा विभाग नहीं चेता। इन इलाकों के स्कूलों के कक्षा-कक्ष पूरी तरह से जर्जर हो रहे हैं। दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें, छतों के सरिए बाहर निकल रहे हैं। तेज हवा चलने या बारिश होने के दौरान हादसे का डर बना रहता है। </p>
<p><strong>अमरपुरा स्कूल : दो कमरे, दोनों ही जर्जर</strong><br />इटावा ब्लॉक के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय अमरपुरा स्कूल खुले में चलता है। स्कूल के पास दो कमरे हैं, लेकिन दोनों ही जर्जर है। इनमें से एक कमरा आंगनबाड़ी का है और दूसरा स्कूल का, जिसे जर्जर होने के कारण बंद रखा जाता है। ऐसे में कक्षा 1 से 8वीं तक की कक्षाएं खुले आसमान के नीचे धूप में तो कभी पेड़ की छांव में चलती है। धूप आने पर विद्यार्थियों को फिर से दरी पट्टी उठाकर अपनी जगह बदलनी पड़ती है। </p>
<p><strong>मैंदान तो कहीं पेड़ के नीचे लगती कक्षाएं</strong><br />अमरपुरा स्कूल के हैडमास्टर कालूलाल सुमन ने बताया कि स्कूल में कक्षा 1 से 8वीं तक कुल 78 बच्चों का नामांकन है। क्षतिग्रस्त कमरों में हादसे के डर से सभी कक्षाएं मैदान में खुले में चलानी पड़ती है। स्कूल के पास एक ही कमरा है, जिसकी छत से सरिए बाहर निकल रहे हैं। जिसमें पोषाहार बनता है और खाद्य सामग्री रखी जाती है। ऐसे में कक्षा 3 व 4 बरामदे में और 1,2,5,6,7 और 8वीं कक्षा पेड़ों के नीचे लगानी पड़ती है। बारिश के दिनों में हालात खराब हो जाती है। छोटे बच्चों की छुट्टी करनी पड़ती है, ताकि उनकी जगह बरामदे में कक्षा 6 से 8वीं तक के बच्चों को बिठा सके। उच्चाधिकारियों को मामले से अवगत करा चुके हैं और पीओ कार्यालय में भी लिखित शिकायत कर चुके हैं। </p>
<p><strong>ढह गया रसोई घर, क्षतिग्रस्त कमरे में बना पोषाहार</strong><br />अमरपुरा स्कूल का रसोई घर पिछले साल हुई तेज बारिश में ढह गया। जिससे पोषाहार के समान रखने व बच्चों के लिए भोजन बनाने में परेशानी हो गई। ऐसे में कक्षा-कक्ष के नाम पर  क्षतिग्रस्त कमरे में ही पोषाहार बनाना पड़ता है। </p>
<p><strong>झाड़ोल स्कूल : एक कमरे में तीन कक्षाएं</strong><br />राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय झड़ोल की प्रधानाध्यापक रेणु मीणा ने बताया कि स्कूल में 120 बच्चों का नामांकन है और कमरे तीन हैं। जिसमें से एक असुरक्षित घोषित होने से सालों से बंद है। दूसरा क्षतिग्रस्त होने से कक्षाएं संचालित नहीं की जाती।  शेष बचे तीसरे कमरे में ही कक्षाएं लगती है, जिसमें 6,7 व 8वीं कक्षा एक साथ लगानी पड़ती है। वहीं, अन्य कक्षाएं खुले मैदान में चलती है। </p>
<p><strong>मौसम बिगड़ते ही 120 बच्चों में मचती भगदड़</strong><br />इस स्कूल में कक्षा 1 से 5वीं तक के विद्यार्थियों की कक्षाएं खुले में लगानी पड़ती है। इसमें कक्षा 1 व 2 तो चबुतरे पर तो 3, 4 व 5वीं कक्षा पेड़ों के नीचे लगानी पड़ती है। ऐसे में मौसम बदलते ही विद्यार्थियों में हड़कम्प मच जाता है और बारिश होते ही दरिपट्टियां  उठाकर बरामदे की ओर दौड़ लगानी पड़ती है। ऐसे में बच्चों के फिसलने से हादसे का डर बना रहता है। </p>
<p><strong>सर्दियों में ठिठुरते हैं बच्चे</strong><br />कक्षा कक्ष नहीं होने से खुले में बैठने पर बच्चे व शिक्षक  सर्दियों में ठिठुरते रहते हैं। कभी बरामदमें में एक साथ पांच कक्षाएं लगानी पड़ती है लेकिन यहां भी सर्द हवाओं से ठिठुरन बनी रहती है। ऐसे स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना तो दूर शिक्षा का माहौल भी नहीं बन पाता। सरकार को तुरंत बजट जारी कर जर्जर स्कूलों की मरम्मत करवानी चाहिए। </p>
<p><strong>कोटड़ादीप सिंह स्कूल : दीवारों में दरारें, छत के उखड़े प्लास्टर</strong><br />राजकीय प्राथमिक विद्यालय कोटड़ा दीप सिंह स्कूल में कक्षा 1 से 5वीं तक कुल 80 बच्चों का नामांकन है। जबकि, कक्षा-कक्ष तीन ही है।  कक्षाओं की दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें हैं और छतों का प्लाटर गिरने से सरिए बाहर निकल आए। कमरे क्षतिग्रस्त हैं, निर्माण की सख्त आवश्यकता है। हालांकि, मरम्मत के लिए स्कूल प्रशासन की ओर से सरपंच व एसडीएमसी की बैठक में प्रस्ताव लिए जा चुके हैं, जिसे सीबीईओ को भेजे गए हैं। </p>
<p>सरकार एक ओर तो क्वालिटी एजुकेशन देने की बात कर रही है और दूसरी तरफ मूलभूत सुविधाओं से वंचित कर रही है। बुनियादी सुविधाओं के अभाव में कैसे सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी।  बिना कमरों के स्कूल चल रहे हैं। खुले में पेड़ों के नीचे कक्षाएं लग रही हैं, बरसात में पढ़ाई चौपट हो जाती है। इलाके के सरकारी स्कूलों के बूरे हालात हैं, दरबीजी स्कूल जैसी घटना न हो, इसके लिए शिक्षा विभाग को छात्रहित में कमद उठाने चाहिए।<br /><strong>- शिव प्रकाश नागर, अध्यक्ष बेरोजगार महासंघ कोटा</strong><br /> <br />क्षेत्र के ग्रामीण सरकारी स्कूलों की हालत बद से बदतर है। टूटी दीवारें, टपकती छतें, शौचालयों का अभाव और बुनियादी सुविधाओं की कमी से बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा खतरे में है। शिक्षा विभाग व शिक्षा मंत्री को स्कूलों की दशा सुधारनी चाहिए।  इन स्कूलों को सुरक्षित, आधुनिक और बच्चों के लिए अनुकूल बनाए जाना बेहद जरूरी है। <br /><strong>- हरिओम मीणा, सदस्य बेरोजगार महासंघ </strong></p>
<p>समसा के इंजीनियर व ब्लॉक शिक्षाधिकारी द्वारा स्कूलों  का निरीक्षण किया जाता है, उनकी रिपोर्ट के आधार पर डिपार्टमेंट बजट जारी करता है। इटावा ब्लॉक के स्कूलों की टीम भेजकर मौका दिखवाकर उचित कार्यवाही करेंगे। बच्चों की सुरक्षा व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना हमारी प्राथमिकता है।<br /><strong>- सतीश कुमार गुप्ता, विशेषाधिकारी शिक्षा मंत्री  </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Feb 2025 15:46:28 +0530</pubDate>
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                <title>राजकीय विद्यालयों के अंग्रेजी माध्यम रूपांतरण की होगी समीक्षा, भजनलाल सरकार ने समिति का किया गठन</title>
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                        <![CDATA[मुख्यमंत्री भजनलाल सरकार ने राजकीय विद्यालयों को अंग्रेजी माध्यम में किए गए रूपांतरण की समीक्षा के लिए एक मंत्रिमण्डलीय समिति का गठन किया है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/bhajanlal-government-formed-a-committee-to-review-the-conversion-of/article-99525"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/bhajanlal-sharma.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल सरकार ने राजकीय विद्यालयों को अंग्रेजी माध्यम में किए गए रूपांतरण की समीक्षा के लिए एक मंत्रिमण्डलीय समिति का गठन किया है। इस समिति के अध्यक्ष एवं संयोजक उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचन्द बैरवा होंगे, जबकि इसके अन्य सदस्य में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह, विद्यालयी शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा शामिल हैं।</p>
<p>मंत्रिमंडल सचिवालय के आदेश के अनुसार समिति का मुख्य उद्देश्य अंग्रेजी माध्यम में विद्यालयों के रूपांतरण के निर्णयों की समीक्षा करना और भविष्य की दिशा निर्धारित करना है। विद्यालयी शिक्षा विभाग को समिति का प्रशासनिक विभाग बनाया गया है, और इसके सदस्य सचिव शासन सचिव, विद्यालयी शिक्षा विभाग होंगे। राज्यपाल की आज्ञा से यह आदेश जारी किया गया है।</p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jan 2025 16:16:49 +0530</pubDate>
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                <title>स्पर्धा सरकारी स्कूलों की, खर्चा खिलाड़ियों का</title>
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                        <![CDATA[शिक्षा विभाग के नियमों के तहत जिला स्तरीय और राज्य स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिताओं में जाने वाले खिलाड़ियों के खर्चे का निर्वाहन खेलकूद फंड से किया जाना चाहिए। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/competition-is-of-government-schools--expenses-of-players/article-91349"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/427rtrer-(6)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। प्रदेश में शिक्षा विभाग की ओर से 68वीं खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। जिनमें ब्लॉक स्तर से चयनित खिलाड़ी जिला स्तर और जिला स्तर से चयनित खिलाड़ी राज्य स्तर पर खेलते हैं। वहीं इन प्रतियोगिताओं के लिए खिलाड़ियों को अपने जिलों से भी बाहर जाना पड़ता है। नियमानुसार किसी विद्यालय से खिलाड़ी के राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में जाने की स्थिति में उसके खर्चे का निर्वाहन विद्यालय प्रशासन की ओर से किया जाना चाहिए लेकिन प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए खिलाड़ियों को खुद से ही सारा खर्चा देना पड़ रहा है, जबकि प्रतियोगिता शिक्षा विभाग की है।</p>
<p><strong>एक खिलाड़ी के ले रहे 4500 रुपए तक</strong><br />शिक्षा विभाग की ओर से आयोजित की जा रही प्रतियोगिताओं में एक खिलाड़ी से 4500 रुपए तक लिए जा रहे हैं। जिसमें 1 हजार रुपए ट्रैक सूट के लिए, सात दिन के खाना के लिए प्रतिदिन 200 रुपए के हिसाब से 1400 रुपए, 1800 रुपए आने जाने का किराया और 300 रुपए कोच की फीस के रूप में लिए जा रहे हैं, जो कुल मिलाकर 4500 रुपए हो जाते हैं। हालांकि सरकारी विद्यालयों में अभिभावकों से ट्रैक सूट के आधे रुपए छोड़कर सारा खर्चा स्कूल की ओर से निर्वाहित किया जाता है। जबकि प्राइवेट विद्यालयों में सारा खर्चा विद्यार्थियों से लिया जा रहा है। शिक्षा विभाग के नियमों के तहत जिला स्तरीय और राज्य स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिताओं में जाने वाले खिलाड़ियों के खर्चे का निर्वाहन खेलकूद फंड से किया जाना चाहिए। </p>
<p><strong>पदक जीतने के बाद भी कोई लाभ नहीं</strong><br />कोटा महाबली र्स्पोट्स एकेडमी के कोच अशोक गौत्तम ने बताया कि कोटा से हर साल खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर में अनेकों पदक जीतते हैं। लेकिन उन्हें इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। सरकार और क्रीड़ा परिषद की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर भाग लेने वाले खिलाड़ी को सरकारी नौकरी में 2 फीसदी और पदक जीतने पर नौकरी का प्रावधान है लेकिन साल 2022 के बाद से वो भी ठंडे बस्ते में है। इसके साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने पर 1 से 2 लाख तक पुरस्कार राशि और राज्य स्तर पर पदक जीतने पर 20 से 50 हजार रुपए तक पुरस्कार राशि का नियम है लेकिन कोटा समेत राज्य के सैंकड़ों खिलाड़ियों को 2017 से किसी प्रकार की पुरस्कार राशि नहीं मिली है।</p>
<p><strong>अभिभावकों का कहना है</strong><br />विद्यालय की ओर से हर साल फीस में खेलकूद का शुल्क लिया जाता है। इसके बाद भी हर साल बच्चों से राज्य स्तरीय और जिला स्तरीय प्रतियोगिता में जाने के दौरान 4000 से 4500 रुपए तक लिए जाते हैं और नहीं देने पर खेलने से वंचित कर दिया जाता है। साथ ही बच्चों के मेडल जीतने पर भी किसी प्रकार का लाभ नहीं मिलता सरकार की ओर से योजना बनाने के बाद भी ठंडे बस्ते में पड़ी है।<br /><strong>- सुनील कुमार सुंडा, बॉक्सिंग खिलाड़ी कुनाल सुंडा के पिता</strong></p>
<p>बच्चे का चयन राज्य स्तरीय वुशु प्रतियोगिता के लिए हुआ है। ऐसे में बच्चे मैच खेलने के लिए बाड़मेर जा रहे हैं। जिसमें विद्यालय की ओर से चयन पत्र के साथ 4500 रुपए की फीस जमा करने के लिए कहा गया है। जबकि बच्चा विद्यालय से चयनित हुआ है तो विद्यालय को अपने स्तर पर ही खर्च का निर्वाहन करना चाहिए।<br /><strong>- राजेंद्र खटाना, वुशु खिलाड़ी शिविका खटाना के पिता </strong></p>
<p>खिलाड़ी जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में जाते हैं और पदक जीतते हैं तो विद्यालयों का नाम रोशन होता है। ऐसे में विद्यालयों की जिम्मेदारी बनती है उनके खर्चे और सुविधाओं का ध्यान रखने की। लेकिन विद्यालय सारा खर्चा परिजनों से ही निर्वाहन कराता है। साथ ही प्रतियोगिताओं में पदक जीतने के बाद की पुरस्कार राशि अभी तक नहीं आ पाई है।<br /><strong>- सुधीर शर्मा, वुशु खिलाड़ी नव्या शर्मा के पिता</strong></p>
<p>विद्यालय की ओर से खिलाड़ियों को किसी प्रकार की सुविधा नहीं दी जाती है। बच्चों को अपने स्तर पर ही सारी सुविधाएं करनी पड़ती हैं। जब सरकारी प्रतियोगिता है तो खर्चा भी सरकार और विद्यालय के स्तर पर होना चाहिए। अगर खिलाड़ी निजी तौर पर जाए तो अलग बात है। इसके चलते कई बच्चे प्रतियोगिताओं से वंचित रह जाते हैं।<br /><strong>- रितेश गुर्जर, बॉक्सिंग खिलाड़ी खुशी गुर्जर के पिता</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />राज्य स्तर और जिला स्तर पर चयनित खिलाड़ियों के प्रतियोगिता में भाग लेने पर उनके खर्चे का निर्वाहन विद्यालय की जिम्मेदारी है अगर कोई ले रहा है तो ये गलत है। वहीं राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने पर खिलाड़ियों को कई तरह की सुविधाएं दी जाती हैं। <br /><strong>- शशि कपूर, उप निदेशक खेलकूद, माध्यमिक शिक्षा विभाग</strong></p>]]>
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                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Sep 2024 17:46:42 +0530</pubDate>
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