<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/jhalawar-district/tag-24759" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>jhalawar district - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/24759/rss</link>
                <description>jhalawar district RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>झालावाड़ जिले में कांग्रेस का दबदबा, 8 में से 4 निकायों में जीत</title>
                                    <description><![CDATA[झालावाड़, भवानीमंडी, खानपुर और डग में कांग्रेस के उपाध्यक्ष बने।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/congress-dominates-jhalawar-district--wins-4-out-of-8-local-bodies/article-166334"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(5)29.png" alt=""></a><br /><p>झालावाड़। नगरीय निकाय चुनाव 2026 के तहत मंगलवार को नगर परिषद झालावाड़ में उपसभापति और जिले की सात नगर पालिकाओं में उपाध्यक्ष पद के चुनाव हुए। घोषित परिणामों में कांग्रेस ने चार निकायों में जीत दर्ज की, जबकि भाजपा के तीन प्रत्याशी विजयी रहे। पिड़ावा में निर्दलीय प्रत्याशी ने जीत हासिल की।<br />झालावाड़ नगर परिषद में कांग्रेस के फारूक अहमद उपसभापति निर्वाचित हुए। उन्होंने 31 मत प्राप्त कर भाजपा के राजेंद्र कुमार सुमन को 17 मतों से हराया।</p>
<p>भवानीमंडी में कांग्रेस के विनय आस्तोलिया ने भाजपा के अमित पाटनी को हराया। विनय को 26 और अमित को 14 मत मिले।</p>
<p>पिड़ावा में निर्दलीय सगीर अहमद मुन्ना खां ने कांग्रेस की परवीन खान को चार मतों से हराया। सगीर को 12 और परवीन को 8 मत मिले। सगीर को भाजपा के छह पार्षदों और एक निर्दलीय पार्षद का समर्थन मिला।</p>
<p>झालरापाटन में भाजपा की किरण भील ने 22 मत हासिल कर कांग्रेस के नवीन को आठ मतों से हराया।</p>
<p>मनोहरथाना में  ग्राम पंचायत से नगरपालिका बनने के बाद पहली बार हुए उपाध्यक्ष चुनाव में भाजपा की गायत्री देवी विजयी रहीं। उन्हें 13 मत मिले, जबकि कांग्रेस के तनवीर कुरैशी को 4 मत मिले।</p>
<p>अकलेरा में  भाजपा के अश्वनी मंगल उपाध्यक्ष निर्वाचित हुए। उन्होंने 25 मत हासिल कर कांग्रेस के आफताब खान को 17 मतों से हराया।</p>
<p>खानपुर में कांग्रेस के अमीर मोहम्मद ने 18 मत प्राप्त कर भाजपा के राहुल गौत्तम को 11 मतों से पराजित किया।</p>
<p>डग में पहली बार हुए उपाध्यक्ष चुनाव में कांग्रेस के कृष्ण पाल सिंह विजयी हुए। उन्हें 14 मत मिले, जबकि भाजपा के सुरेंद्र सिंह परिहार को 6 मत प्राप्त हुए। नगरपालिका के सभी 20 पार्षदों ने मतदान किया।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/congress-dominates-jhalawar-district--wins-4-out-of-8-local-bodies/article-166334</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/congress-dominates-jhalawar-district--wins-4-out-of-8-local-bodies/article-166334</guid>
                <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 10:04:25 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-09/111200-x-600-px%29-%285%2929.png"                         length="1076887"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अनमोल विरासत प्रदेश का दूसरा रोमन शैली जलसेतु</title>
                                    <description><![CDATA[झालावाड़ में विश्व विरासत गागरोन किला, कोलवी की गुफाएं, दहलनपुर सहित ऐसी दर्जनों प्राचीन धरोहर हैं ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/precious-heritage---the-second-roman-style-aqueduct-of-the-state/article-100149"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/5554-(21)1.png" alt=""></a><br /><p>झालावाड़। राजस्थान का झालावाड़ जिला अपनी ऐतिहासिक विरासतों एवं प्राकृतिक वातावरण के कारण काफी प्रसिद्ध है, यहां पर रोमन शैली से बना हुआ जलसेतु भी मौजूद है, जिसको एक अनमोल विरासत माना जा रहा है। यह झालावाड़ जिले की एक ऐसी विरासत है, जिसे अब तक लोग देखते तो रहे किंतु यह तथ्य उजागर नहीं हुए कि आखिर यह चीज क्या है। इसको देखने वाले यही समझा करते थे कि शायद यह कोई पत्थरों का बना अधूरा ढांचा है जो पूरा नहीं हो पाया होगा। यह अपने प्रकार की एक ऐसी संरचना है जो राजस्थान में मात्र दो ही हैं। वहीं पूरे देश में भी इनकी संख्या आधा दर्जन से काम ही बताई जाती है। ऐसे में यह बात यकीनी तौर पर कहीं जा सकती है कि यदि प्रशासन और राजस्थान सरकार झालावाड़ की इस विरासत को ठीक से सहेज कर सजा और संवार दे तो यह पर्यटन क्षेत्र में भी मील का पत्थर साबित हो सकती है, क्योंकि झालावाड़ में विश्व विरासत गागरोन किला, कोलवी की गुफाएं, दहलनपुर सहित ऐसी दर्जनों प्राचीन धरोहर हैं जो पर्यटकों को लुभाती आ रही है। हमारी टीम ने जब इस प्राचीन ढांचे की गहनता से पड़ताल की और जानकारी इकट्ठा करना शुरू किया तो वर्ष 1875 में बने इस ढांचे से जुड़े तथ्य बेहद रोचक और चोंकाने वाले हैं।</p>
<p><strong>1875 में हुआ निर्माण</strong><br />झालावाड़ के गांवड़ी का तालाब के किनारे से शुरू होकर मामा भांजा चौराहे के समीप खत्म होने वाला यह ढांचा रोमन शैली पर बना हुआ एक एक्वाडक्ट है, जिसको साधारण भाषा में रोमन एक्वाडक्ट कहा जाता है। रोमन एक्वाडक्ट यानी रोमन जल सेतुओं के बारे में हमें कई जगहों पर पढ़ने को मिल जाता है। रोम इटली स्पेन इत्यादि देशों में यह जलसेतु पानी को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए बनाए जाते थे जो आज भी काम में आ रहे हैं। झालावाड़ के इस रोमन एक्वाडक्ट की यदि बात करें तो इसका निर्माण तत्कालीन शासक पृथ्वी सिंह द्वारा राजमहल के पास स्थित चंद्र सरोवर के किनारे वर्ष 1875 में करवाया गया था। चंद्र सरोवर को आज गांवड़ी का तालाब के नाम से जाना जाता है। इस जल सेतु का निर्माण गांवड़ी के तालाब से माधव विलास पैलेस, भवानी क्लब और राज परिवार की छोटी कोठी तक पानी ले जाने के लिए करवाया गया था। माधव विलास पैलेस इन दिनों झालावाड़ के जिला कलेक्टर का निवास हुआ करता है। झालावाड़ का यह पूरा एक्वाडक्ट जिसकी लंबाई लगभग 1 किलोमीटर है यह है 70 मेहराबों पर टिका हुआ है। एक्वाडक्ट की शुरूआत गांवड़ी का तालाब से होती है, जहां एक कुआं बनाया गया है, जिस पर एक इमारत नुमा ढांचे का निर्माण किया गया है, जहां से रहट के माध्यम से पानी लिफ्ट करके इस एक्वाडक्ट के ऊपरी छोर तक लाया जाता था, जहां से यह पानी गुरुत्वाकर्षण बल का इस्तेमाल करते हुए अंतिम छोर तक पहुंचता था।</p>
<p><strong>राजस्थान का दूसरा एक्वाडक्ट</strong><br />राजस्थान में बना हुआ यह दूसरा एक्वाडक्ट है, राजस्थान में पहला एक्वाडक्ट वर्ष 1845 में अलवर जिले की सिलीसेढ़ झील पर बनाया गया था। विशेषज्ञ और वैज्ञानिक बताते हैं कि झालावाड़ का यह एक्वाडक्ट अलवर के एक्वाडक्ट के 30 वर्षों बाद बनाया गया तथा इसमें अलवर के मुकाबले अधिक उन्नत तकनीक का इस्तेमाल हुआ। पूरे देश की यदि बात करें तो मात्र आधा दर्जन रोमन एक्वाडक्ट यहां होने की बात सामने आती है, जिनमें से सबसे बड़ा रोमन एक्वाडक्ट तमिलनाडु में मौजूद है।</p>
<p><strong>उल्टा साइफन सिस्टम</strong><br />इस एक्वाडक्ट का निर्माण जिस दौर में झालावाड़ के शासको द्वारा करवाया गया, उसे दौर में किसी भी प्रकार की आधुनिक तकनीक और बिजली मौजूद नहीं थी। ऐसे में जिन तकनीकों का इस्तेमाल जिसको बनाने में किया गया। वह वाकई चौंकाने वाली है। इस एक्वाडक्ट के मध्य से एक रास्ता भी गुजरता है जिसको बंद होने से बचाने के लिए यहां उल्टे साइफन सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है। रास्ते के दोनों तरफ यह एक्वाडक्ट नजर आता है जहां एक तरफ से इसमें पानी आता था और फिर यह पानी पाइप के माध्यम से रास्ते के नीचे से गुजरता और फिर दूसरी तरफ लेवल डाउन होने के कारण वापस पाइप द्वारा ऊपर चढ़ जाता और आगे एक्वाडक्ट में बहता हुआ अपने मुकाम तक पहुंचता था।</p>
<p><strong>संरक्षण की दरकार</strong><br />झालावाड़ शहर में स्थित इस एक्वाडक्ट को इतिहास विद और पुरातत्व विज्ञानी नायाब ढांचा बताते हैं, लेकिन सरकार और प्रशासन द्वारा इस पर ध्यान नहीं दिए जाने के चलते यह अब सामाजिक तत्वों एवं अतिकर्मियों का निशान बनता जा रहा है। इसके कुछ हिस्से को भू माफियाओं द्वारा अपनी कॉलोनी के रास्ते निकालने के लिए तोड़ने की कोशिश की जा रही है, तो वहीं लगभग आधे हिस्से में लोगों ने अपनी मनमर्जी से इसको क्षतिग्रस्त करके रास्ते निकाल लिए हैं। एक निजी शिक्षण संस्थान ने तो इसको जमींदोज ही कर दिया है तथा इसको नष्ट करके रास्ता बना लिया है, तथा अपनी चारदीवारी भी इसके ऊपर ही खड़ी कर दी है, जिसको लेकर प्रशासन की तरफ से कोई कार्यवाही नहीं की गई है, जबकि झालावाड़ नगर परिषद स्पष्ट रूप से कह चुकी है कि इस ढांचे के आसपास किसी भी प्रमाण प्रकार के निर्माण या इस पर से रास्ता निकालने की स्वीकृति उसने किसी को भी नहीं दी है।</p>
<p>झालावाड़ का यह रोमन एक्वाडक्ट राजस्थान में दूसरा एक्वाडक्ट है तथा पूरे देश में इनकी संख्या बहुत थोड़ी सी है झालावाड़ का यह एक्वाडक्ट 1875 में बना था, इसको संरक्षित किए जाने की सख्त जरूरत है। <br /><strong> - राजपाल शर्मा, जिला संयोजक, इंटेक</strong></p>
<p>झालावाड़ के इस एक्वाडक्ट को दुरुस्त करवाने के प्रयास किया जा रहे हैं, जल्दी ही इसको लेकर कार्य योजना बनाई जाएगी एवं उसके संरक्षण के काम को आगे बढ़ाया जाएगा। <br /><strong> - अजय सिंह राठौड़, जिला कलक्टर, झालावाड़</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/precious-heritage---the-second-roman-style-aqueduct-of-the-state/article-100149</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/precious-heritage---the-second-roman-style-aqueduct-of-the-state/article-100149</guid>
                <pubDate>Thu, 09 Jan 2025 17:05:54 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-01/5554-%2821%291.png"                         length="604589"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सात समंदर पार करके आए प्रवासी पक्षी </title>
                                    <description><![CDATA[झालावाड़ में आने वाले प्रवासी पक्षी कई हजार किलोमीटर का सफर तय करके यहां आते हैं तथा यहां वह तीन से चार महीना रुकते हैं और उसके बाद पुन: लौट जाते हैं। प्राप्त जानकारी अनुसार कई पक्षी ऐसे हैं जो 5 से 10000 किलोमीटर की यात्रा करते हुए यहां पहुंचते हैं। हिमालय के अतिरिक्त यूरोप एवं पृथ्वी के अन्य भागों से भी यह प्रवासी पक्षी यहां पहुंचते हैं जो लोगों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/migratory-birds-crossing-the-seven-seas/article-36920"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/saat-samander-paar-karke-aaye-prawasi-pakshi...jhalawar-news..9.2.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>झालावाड़। झालावाड़ जिले में कई जलाशयों पर लंबे समय से प्रवासी पक्षी आते रहे हैं, हालांकि कभी-कभी इनकी संख्या काफी कम भी हो जाती है, किंतु इस बार झालावाड़ के आसपास विभिन्न जलाशयों में प्रवासी पक्षियों ने अपना डेरा जमा रखा है तथा जलाशयों में इनकी अठखेलियां पक्षी प्रेमियों को काफी आकर्षित कर रही हैं।  विशेषज्ञों से प्राप्त जानकारी अनुसार शीत ऋतु के प्रारंभ से ही झालावाड़ में लगभग 150 तरह के विदेशी प्रवासी पक्षी आना शुरू हो जाते हैं, जिनकी कुल संख्या कई हजारों में होती है। जलाशयों के आसपास इन प्रवासी पक्षियों का जमावड़ा इन दिनों को देखने को मिल रहा है, जिसमें झालावाड़ का खंड्या तालाब, नया झालरापाटन का गोमती सागर, मूंडलिया खेड़ी तथा बड़बेला का तालाब प्रमुख रूप से शामिल है। इन दिनों में सभी तालाबों पर पक्षी प्रेमी और फोटोग्राफर खूब पहुंच रहे हैं तथा पक्षियों की अठखेलियों को निहार कर आनंदित हो रहे हैं।</p>
<p><strong>हजारों किलोमीटर का सफर तय करके आते हैं प्रवासी पक्षी</strong><br />विशेषज्ञों से प्राप्त जानकारी अनुसार झालावाड़ में आने वाले प्रवासी पक्षी कई हजार किलोमीटर का सफर तय करके यहां आते हैं तथा यहां वह तीन से चार महीना रुकते हैं और उसके बाद पुन: लौट जाते हैं। प्राप्त जानकारी अनुसार कई पक्षी ऐसे हैं जो 5 से 10000 किलोमीटर की यात्रा करते हुए यहां पहुंचते हैं। हिमालय के अतिरिक्त यूरोप एवं पृथ्वी के अन्य भागों से भी यह प्रवासी पक्षी यहां पहुंचते हैं जो लोगों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। जानकारी के लिए आपको बता दें कि बर्ड डेस्टिनेशन के रूप में विकसित हो चुके झालावाड़ में अब पक्षियों की तदात बढ़ती जा रही है, बताया जा रहा है कि झालावाड़ में अब पक्षी आवास संरक्षित होने लगे हैं। जिसके चलते यहां पक्षियों की संख्या में दिन-ब-दिन इजाफा हो रहा है।</p>
<p><strong>इन पर जातियों के प्रवासी पक्षी आए</strong><br />जानकारी अनुसार झालावाड़ और उसके आसपास के विभिन्न जलाशयों पर कॉमन कूट, नार्दन पिनटेल, नार्दन शॉवलर, कॉमन पॉचार्ड, टफ्टेड पॉचार्ड, रेड क्रेस्टेड पॉचार्ड, कॉमन टील, बार हेडेड गूज, रडी शेल डक, ग्रे लेग गूज, पालास गल, ग्रेटर फ्लेमिंगो, गे्रट व्हाइट पेलिकन, व्हाइट टेल लेपविंग, येल्लो वाटल्ड लेपविंग, लिटिल ग्रिब, कोटन पिगमि गूज व्हिलिंग टील, पेंटेड स्टॉर्क, ब्लैक स्टॉर्क, वूली नेक्ड स्टॉर्क, सेंडपाइपरस, स्टिंट, प्लोवरस, इग्रेट, शिकारी पक्षियों में मार्श हेरियर, ओस्प्रे सहित कई दुर्लभ प्रजातियों के प्रवासी पक्षी भी देखने को मिल रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/migratory-birds-crossing-the-seven-seas/article-36920</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/migratory-birds-crossing-the-seven-seas/article-36920</guid>
                <pubDate>Thu, 09 Feb 2023 14:36:56 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2023-02/saat-samander-paar-karke-aaye-prawasi-pakshi...jhalawar-news..9.2.2023.jpg"                         length="157681"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अस्पताल में डॉक्टर नदारद, मरीज परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[क्षेत्र की ग्राम पंचायत ढाबलाखींची के सरकारी अस्पताल में सरकार के लाखों प्रयासों के बावजूद भी स्वास्थ्य सेवाओं का दम निकल रहा है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अक्सर डॉक्टर अक्सर नदारद रहते हैं। इस वजह से मरीजों को इलाज के लिए दर- दर भटकना पड़ रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/doctor-absent-in-hospital--patient-upset/article-12463"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/aspataal-mei-doctor-nahi-sunel.jpg" alt=""></a><br /><p>सुनेल। क्षेत्र की ग्राम पंचायत ढाबलाखींची के सरकारी अस्पताल में सरकार के लाखों प्रयासों के बावजूद भी स्वास्थ्य सेवाओं का दम निकल रहा है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अक्सर डॉक्टर अक्सर नदारद रहते हैं। इस वजह से मरीजों को इलाज के लिए दर- दर भटकना पड़ रहा है। अस्पताल में पर्याप्त सुविधाएं होने के बावजूद भी डॉक्टर अपनी मनमानी पर उतारू है। अक्सर डॉक्टर अपने केबिनों से नदारद रहते हैं। गुरूवार को भी डॉक्टर ओपीडी से नदारद हो गए। बताया यह जा रहा है कि डॉक्टर अपने केबिनों में कभी समय से नहीं पहुंचते हैं। जब चाहे, उस समय अस्पताल पहुंचते हैं और जब मर्जी, तब चले जाते हैं। इसके चलते मरीजों को अस्पताल के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। घंटों मरीज डॉक्टरों के इंतजार में लाइनों में खड़े रहते हैं, लेकिन जब खड़े होने की हिम्मत नहीं होती, तो मायूस होकर अस्पताल से लौट जाते हैं। मरीजों ने बताया कि सरकारी अस्पताल में सारी मूलभूत सुविधाएं होने के बावजूद भी डॉक्टरों के अभाव में छोटी-मोटी बीमारियों के लिए भी जिले के अन्य अस्पतालों में पहुंचना पड़ता है। पिछले महीने जिला सीएमएचओ साजिद खान द्वारा सख्त निर्देश जारी करने के बावजूद भी डॉक्टरों ने अपनी कार्यशैली में कोई सुधार नहीं किया।<br /><br /><strong>यह बोले मरीज</strong><br /><br /> अस्पताल में दवाई लेने के लिए आया लेकिन, यहां काफी देर से डॉक्टर ही नहीं आए हैं। मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। <br /><strong>- हरिराम </strong><br /><br /> अस्पताल में इलाज के लिए बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं। कभी डॉक्टर नहीं मिलते, तो कभी दवाई की परेशानी होती हैं।<br /><strong>-कौशल्या बाई</strong><br /><br /> अस्पताल में जख्म पर मरहम-पट्टी के लिए तीन बार आ चुका हूं, लेकिन कोई देखभाल नहीं की जा रही है। जिसके लिए निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा है।<br /><strong>- रामविलास पाटीदार</strong> <br /><br />तत्कालीन डॉक्टर किसी कारणों के चलते छुट्टी पर है, मरीज परेशान नहीं हो इसके लिए अतिरिक्त डॉक्टर की व्यवस्था जल्द से जल्द करवा दी जाएगी।<br /><strong>-डॉ अंकुर सोमानी, बीसीएमएचओ</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/doctor-absent-in-hospital--patient-upset/article-12463</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/doctor-absent-in-hospital--patient-upset/article-12463</guid>
                <pubDate>Fri, 17 Jun 2022 15:54:57 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-06/aspataal-mei-doctor-nahi-sunel.jpg"                         length="32244"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        