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                <title>दशकों की प्रतीक्षा खत्म : नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर पीएम मोदी ने कहा-विधायिका में महिलाओं को आरक्षण 21वीं सदी का सबसे बड़ा निर्णय</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को महिला सशक्तिकरण के लिए समर्पित ऐतिहासिक कदम बताया है। उन्होंने कहा कि 16 अप्रैल से शुरू हो रहा विशेष सत्र पंचायतों से संसद तक महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करेगा। यह अधिनियम 2029 तक लागू होगा, जिससे स्टार्टअप से लेकर राजनीति तक भारतीय महिलाओं के सपनों को नई उड़ान मिलेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-biggest-decision-of-the-21st-century-pm-modi-said/article-150273"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/modi5.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में एक तिहाई आरक्षण देने से संबंधित नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने के लिए लाये जाने वाले संशोधन विधेयक को 21 वीं सदी का सबसे बड़ा निर्णय करार देते हुए कहा कि यह पूरी तरह से नारी शक्ति को समर्पित है। प्रधानमंत्री ने इसे ऐतिहासिक बताते हुए कहा है कि देश की संसद एक नया इतिहास रचने के निकट है जो अतीत की परिकल्पना और भविष्य के संकल्पों को पूरा करेगा।</p>
<p>पीएम मोदी ने गुरुवार को संसद में लाये जाने वाले इस संशोधन विधेयक से पहले सोमवार को यहां विज्ञान भवन में नारी शक्ति वंदन कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा, "भारत 21वीं सदी के सबसे बड़े निर्णयों में से एक लेने जा रहा है, एक ऐसा निर्णय जो नारी शक्ति को समर्पित है।" उन्होंने इस क्षण को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि देश की संसद एक नया इतिहास रचने के निकट है जो अतीत की परिकल्पना और भविष्य के संकल्पों को पूरा करेगा। सामाजिक न्याय के महत्व पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि देश एक समतावादी भारत की कल्पना करता है जहां सामाजिक न्याय केवल एक नारा नहीं बल्कि कार्य संस्कृति का अभिन्न अंग है। प्रधानमंत्री ने कहा, "राज्य विधानसभाओं से लेकर देश की संसद तक, दशकों की प्रतीक्षा अब समाप्त होने वाली है।"</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्ष 2023 में नए संसद भवन में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को सर्वसम्मति से पारित किया गया था और सभी दलों ने इस बात पर सहमति जताई थी कि इसे हर हाल में 2029 तक क्रियान्वित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को समय पर लागू किया जाना चाहिए ताकि महिलाओं की भागीदारी से लोकतंत्र सुदृढ़ हो। इसके लिए संसद के बजट सत्र का विशेष सत्र 16 अप्रैल से आरंभ होगा। उन्होंने कहा, "हमारा प्रयास और प्राथमिकता यह है कि यह कार्य संवाद, सहयोग और भागीदारी के माध्यम से पूरा किया जाए, जिससे संसद की गरिमा बढ़ेगी।"</p>
<p>इस मुद्दे पर महिलाओं के बीच व्याप्त राष्ट्रव्यापी उत्साह की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश भर की महिलाएं विधानसभाओं और लोकसभा तक पहुंचने की अपनी आकांक्षाओं को व्यक्त कर रही हैं। उनके सपनों को नई उड़ान मिली है और देश में सकारात्मक माहौल का निर्माण हुआ है। प्रधानमंत्री ने सभी महिलाओं से इस पूरी प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी बनाए रखने और अपने सांसदों से मिलकर अपने विचार और अपेक्षाएं साझा करने का आग्रह किया।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता संग्राम से लेकर संविधान सभा तक महिलाओं के योगदान का उल्लेख करते हुए स्वतंत्र भारत की नींव रखने में नारी शक्ति की असीम भूमिका पर प्रकाश डाला। महिलाओं ने राष्ट्र के लिए हर क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किया है और देश में राष्ट्रपति से लेकर वित्त मंत्री तक, महिलाएं इतने महत्वपूर्ण पदों पर आसीन हैं। उन्होंंने कहा, "राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री तक, जहां भी महिलाएं रही हैं, उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई है।"</p>
<p>पीएम मोदी ने पंचायती राज संस्थाओं को महिला नेतृत्व का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा, "राजनीति और सामाजिक जीवन में लाखों महिलाओं की यह सक्रिय भागीदारी विश्व के अग्रणी नेताओं और राजनीतिक विशेषज्ञों को भी आश्चर्यचकित करती है और भारत के गौरव को बढ़ाती है।" प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि स्थानीय निकायों और संस्थानों में वर्षों से कार्यरत लाखों महिलाओं के पास व्यापक अनुभव है और वे बड़ी भूमिकाओं के लिए तैयार और उत्सुक हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम का कार्यान्वयन इन सभी महिलाओं के जीवन में एक बड़ा अवसर साबित होगा। प्रधानमंत्री ने कहा, "पंचायत से संसद तक की यात्रा सुगम होने वाली है।"</p>
<p>विकसित भारत की यात्रा में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख करते हुए, प्रधानमंत्री ने संतोष व्यक्त किया कि उनकी सरकार ने 2014 से महिलाओं के जीवन चक्र के हर चरण के लिए योजनाएं बनाई हैं। महिला सशक्तिकरण के लिए उनकी आर्थिक भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हर निर्णय और योजना में महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी गई है जिसके परिणामस्वरूप महिलाएं आर्थिक तौर पर ज्यादा मजबूत हुई हैं। प्रधानमंत्री ने स्टार्टअप क्रांति में महिलाओं के नेतृत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पंजीकृत स्टार्टअप में से 45 प्रतिशत से अधिक में कम से कम एक महिला निदेशक के रूप में कार्यरत है। उन्होंने कहा, "वर्षों पहले शुरू किए गए स्किल इंडिया मिशन के परिणाम अब हजारों ड्रोन दीदियों के माध्यम से दिखाई दे रहे हैं, जो प्रौद्योगिकी के माध्यम से आधुनिक खेती सिखाकर कृषि में क्रांति ला रही हैं।"</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा कि महिला-केंद्रित विकास विजन ने पुरानी सोच को चुनौती दी है और महिलाएं आज उन सेक्टरों में भी ऊंचाइयों को छू रही हैं जिन्हें कभी पुरुषों का गढ़ माना जाता था। भारतीय बेटियां लड़ाकू पायलट बन रही हैं और आसमान को छू रही हैं। पीएम मोदी ने कहा, "विश्व के किसी भी देश की तुलना में भारत में महिला पायलटों का प्रतिशत सबसे अधिक है।" पीएम मोदी ने देश की हर मां, बहन और बेटी को आश्वस्त किया कि राष्ट्र उनकी आकांक्षाओं को समझता है और उनके सपनों को साकार करने के लिए हर आवश्यक कदम उठा रहा है। देश की नारी शक्ति ने कड़ी मेहनत, साहस और आत्मविश्वास के बल पर नई ऊंचाइयों को छुआ है। प्रधानमंत्री ने कहा, "हमें सामूहिक रूप से इस शक्ति को नई ऊर्जा प्रदान करनी चाहिए और उनके लिए अवसरों का विस्तार करना चाहिए।"</p>
<p>प्रधानमंत्री ने एक विशेष अपील के माध्यम से महिलाओं से आग्रह किया कि वे नारी शक्ति वंदन कार्यक्रम की चर्चा को व्यक्तिगत मुलाकातों और सोशल मीडिया के माध्यम से देश के हर गांव तक पहुंचाएं। देश को इस महत्वपूर्ण निर्णय के बारे में हर महिला को जागरूक करना होगा ताकि वे इसकी शक्ति को समझ सकें, अपनी भूमिका को जान सकें और आने वाले समय में राज्यों से लेकर देश की संसद तक अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का स्पष्ट रूप से सपना देख सकें। उन्होंने निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी को उज्जवल भविष्य की गारंटी बताते हुए कहा, "आइए हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि नारी शक्ति को उनके अधिकार प्राप्त हों और वे निर्णय लेने की प्रक्रिया में पूर्ण भागीदार बनें - यही हमारे उज्ज्वल भविष्य की सबसे बड़ी गारंटी है।"</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 18:13:11 +0530</pubDate>
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                <title>भारती नारी से नारायणी’ प्रतिनिधिमंडल ने महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से की शिष्टाचार भेंट</title>
                                    <description><![CDATA[मार्च 2026 में होने वाले 'भारती नारी से नारायणी' राष्ट्रीय कन्वेंशन की तैयारी के लिए प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भेंट की। राष्ट्रपति ने नारी सशक्तिकरण की इस पहल की सराहना की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/bharati-nari-se-narayani-delegation-paid-courtesy-call-on-his/article-138640"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/safds.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। "भारती नारी से नारायणी” के तहत मार्च 2026 में होने वाले राष्ट्रीय कन्वेंशन 7–8 मार्च2026 के आयोजन के क्रम में आज भारती, नारी से नारायणी प्रतिनिधिमंडल प्रो. शिवानी वी. सचिव, भारतीय विद्वत परिषद, सुश्री विजया राष्ट्र सेविका समिति, अंजू आहुजा अध्यक्ष, शरण्या तथा डॉ. श्रुति एच.के. सदस्य, भारतीय विद्वत परिषद  डॉ चारु कालरा सचिव शरण्या ने महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू से राष्ट्रपति भवन में शिष्टाचार भेंट की।</p>
<p>इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल ने कन्वेंशन की परिकल्पना, उद्देश्य तथा राष्ट्र निर्माण में नारी शक्ति की निर्णायक भूमिका के संबंध में माननीय राष्ट्रपति को अवगत कराया। प्रतिनिधियो ने बताया कि कन्वेंशन का मूल भाव भारतीय नारी की सांस्कृतिक, बौद्धिक, सामाजिक एवं नेतृत्वकारी शक्ति को सशक्त मंच प्रदान करना है, जिससे “नारी” से “नारायणी” की यात्रा को राष्ट्रीय विमर्श में सुदृढ़ किया जा सके। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन नारी सशक्तिकरण, मूल्यबोध तथा समावेशी विकास को नई दिशा प्रदान करते है । उन्होंने महिलाओं की शिक्षा, नेतृत्व क्षमता एवं आत्मनिर्भरता को राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य का सशक्त आधार बताया।<br />यह जानकारी भारतीय विद्वत परिषद की संयुक्त सचिव डॉ अमृता कौर ने दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jan 2026 19:09:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आरक्षण की मांग, माली समाज के सैकड़ों लोगों ने SDM को दिया ज्ञापन</title>
                                    <description><![CDATA[ आगरा-बीकानेर हाईवे पर भरतपुर के गांव अरौंदा में माली, सैनी, कुशवाहा, शाक्य, शिव, बोई तथा मौर्य जैसे दबे कुचले समाज को ओबीसी में से 12 प्रतिशत आरक्षण दिलाने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को लेकर टोडारायसिंह कस्बे के तहसील माली सैनी समाज के सैकड़ों बुजुर्ग सहित युवाओं ने मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को ज्ञापन दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/tonk/demand-for-reservation--hundreds-of-people-of-mali-society-gave-memorandum-to-sdm/article-12531"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/tonk-1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>टोडारायसिंह।</strong> आगरा-बीकानेर हाईवे पर भरतपुर के गांव अरौंदा में माली, सैनी, कुशवाहा, शाक्य, शिव, बोई तथा मौर्य जैसे दबे कुचले समाज को ओबीसी में से 12 प्रतिशत आरक्षण दिलाने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को लेकर टोडारायसिंह कस्बे के तहसील माली सैनी समाज के सैकड़ों बुजुर्ग सहित युवाओं ने मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को ज्ञापन दिया है। ज्ञापन में बताया कि प्रदेश में दबे कुचले समाज माली, सैनी, कुशवाहा, शाक्य, मौर्य सहित अन्य समाज वर्षों से पिछडा समाज रहा है। ये समाज मेहनत, मजदूरी तथा कृिष आधारित कार्य कर अपना जीवन यापन करते है, इसलिए इन समाज के बच्चें उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी सरकारी नौकरियों में नहीं पहुंच पाते है। अब तक की सरकारों ने इस समाज की अनदेखी कर वाजिब समस्याओं पर ध्यान केंद्रित नहीं किया, जिससे लगातार पिछडते जा रहा है। ज्ञापन में बताया कि ये समाज अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए आगरा-बीकानेर हाईवे पर भरतपुर के गांव अरौंदा में आंदोलन कर रहे है। समाज को राजनैतिक क्षेत्र में काफी पिछडा होने से उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया है। साथ ही उच्च स्तरीय प्रशासनिक सेवाओं में समाज का<span style="color:#ff0000;"><span style="color:#000000;"> प्रतिनिधित्व</span> </span>नगण्य है। ऐसे में इन समाज को ओबीसी में से 12 प्रतिशत आरक्षण दिया जाने की मांग है।</p>
<p>इससे पहले महात्मा ज्योतिबा फूले सर्किल पर माली समाज के लोग एकत्र होकर मालीयािन धर्मशाला में बैठक आयोजित की गई, जिसमें माली समाज भरतपुर में हो रहे आंदोलन का पूरजोर से समर्थन करते हुए आंदोलन में भागीदारी के लिए संकल्प लिया। बैठक में माली समाज जिला अध्यक्ष कैलाशचंद, मास्टर परशुराम माली, अशोक सैनी पूर्व सीआर, मिट्टूलाल सैनी सहित अन्य वक्ताओं ने विचार व्यक्त करते हुए आंदोलन का समर्थन करते हुए तेज करने को कहा। उन्होंने कहा कि आंदोलन स्थल पर टोडारायसिंह तहसील क्षेत्र से भी सैकड़ो समाज के युवा व बुजुर्ग पहुंचेंगे। बैठक का संचालन अरविंद सिंगोदिया ने किया। ज्ञापन देने वालों में माली समाज प्रदेश उपाध्यक्ष कैलाश आर्यवीर, अखिल भारतीय माली, कुशवाहा, मौर्य महासभा जिला अध्यक्ष पप्पूलाल सिंगोदिया, महात्मा फूले समता परिषद जिला अध्यक्ष एडवोकेट लाभचंद अजमेरा, सुरेश सेनी पार्षद, मोतीलाल हलसोरा, चतरा पटेल सत्यनारायण सैनी, सजंय सैनी, भागचंद सैनी, मुकेश सैनी, अशोक सैनी, रामलाल दग्धी, राजेंद्र कूकरा, दौलत सेनी, राजेंद्र सैनी, हंसराज सैनी, दिनेश सैनी, राजेश सैनी, अशोक माली, श्यामसुंदर सैनी पार्षद, भागचंद माली, हेमराज सैनी, चेतन सैनी, बन्नालाल सैनी, मनोज सैनी, शंकरलाल माली, नोरतमल माली, धर्मराज सैनी सहित बडी संख्या में माली समाज के युवा व बुजुर्ग मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>टोंक</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Jun 2022 15:16:04 +0530</pubDate>
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