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                <title>सावन के दूसरे सोमवार को शिवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब, कांवड़ यात्रियों ने श्रद्धा से किया जलाभिषेक</title>
                                    <description><![CDATA[सावन के दूसरे सोमवार को शहर के प्रमुख शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। तारकेश्वर महादेव और झारखंड महादेव मंदिर में लंबी कतारें। गलता जी से पहुंचे कांवड़ यात्रियों ने विभिन्न शिवालयों में जलाभिषेक। भक्तों ने जल, दूध, बेलपत्र और पुष्प अर्पित कर पूजा-अर्चना की। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/on-the-second-monday-of-sawan-a-flood-of-faith/article-162476"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/temple1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सावन के दूसरे सोमवार को राजधानी जयपुर के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह से ही शहर के प्रमुख शिवालयों में भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। गलता जी से कांवड़ यात्रियों के आने का सिलसिला भी अलसुबह से शुरू हो गया, जो दिनभर जारी रहा। कांवड़ यात्रियों ने विभिन्न शिव मंदिरों में पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया और पूजा-अर्चना की।</p>
<p>छोटी चौपड़ स्थित प्रसिद्ध तारकेश्वर महादेव मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। भक्तों ने कतार में लगकर भगवान शिव के दर्शन किए और जल, दूध, बेलपत्र, पुष्प सहित विभिन्न पूजन सामग्री अर्पित की। मंदिर परिसर में हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारे गूंजते रहे।</p>
<p>इसी तरह झारखंड महादेव मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। बड़ी संख्या में भक्त सुबह से ही मंदिर पहुंचने लगे थे। कांवड़ यात्रियों के पहुंचने से मंदिरों में विशेष धार्मिक माहौल बना रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का अभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।</p>
<p>शहर के अन्य प्रमुख शिव मंदिरों में भी दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रही। सावन के दूसरे सोमवार को लेकर मंदिरों में विशेष सजावट और पूजा-अर्चना के आयोजन किए गए। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिरों के आसपास व्यवस्थाएं भी की गईं। पूरे दिन जयपुर में शिव भक्ति का माहौल बना रहा।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Aug 2026 11:30:16 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अमरापुर स्थान में विशेष पूजा, निकली कांवड़ यात्रा </title>
                                    <description><![CDATA[श्री अमरपुरेश्वर महादेव मंदिर में सावन मास के दूसरे सोमवार को विशेष पूजा-अर्चना और भव्य आयोजन किए जाएंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/kavad-yatra-took-out-special-worship-in-amrapur-place/article-121217"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/news-(3)28.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। आस्था और भक्ति के प्रतीक श्री अमरापुर स्थान, जयपुर स्थित श्री अमरपुरेश्वर महादेव मंदिर में सावन मास के दूसरे सोमवार को विशेष पूजा-अर्चना और भव्य आयोजन किए जाएंगे।</p>
<p>मंदिर में भोलेनाथ का विशेष अभिषेक गंगाजल, गौ दुग्ध, पंचामृत, बिल्व पत्र, कमल पुष्प, धतूरा और रुद्राक्ष आदि से किया जाएगा। भगवान शिव का भव्य श्रृंगार किया जाएगा और गुलाबी नगरी के प्रसिद्ध घेवर का भोग अर्पित किया जाएगा।</p>
<p>इस पावन अवसर पर श्री अमरापुर नवयुवक मंडल के तत्वावधान में 139 कांवड़ियों का जत्था प्रातः 4 बजे गलता तीर्थ से पैदल यात्रा प्रारंभ कर प्रातः 7 बजे श्री अमरापुर स्थान पहुंचेगा। इसी कांवड़ यात्रा द्वारा लाए गए गंगाजल से भगवान अमरपुरेश्वर महादेव का अभिषेक किया जाएगा।</p>
<p>संतों ने जानकारी दी कि कामिका एकादशी के अवसर पर प्रातः 6:30 से 6:54 बजे तक 24 मिनट, एक घड़ी विशेष पूजन-अभिषेक किया जाएगा। इस दौरान शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, चंदन, अक्षत, गंगाजल और कमल पुष्प अर्पित किए जाएंगे। मंदिर परिसर में सुंदर झांकी सजाई जाएगी जो भक्तों के आकर्षण का केंद्र होगी।</p>
<p>सायंकाल संत महात्माओं द्वारा हरिनाम संकीर्तन का आयोजन किया जाएगा तथा खीर प्रसादी का वितरण किया जाएगा। इसके साथ ही श्री अमरापुर दरबार के लड्डू गोपाल जी का विशेष श्रृंगार मोगरे के पुष्पों से किया जाएगा। आयोजकों ने बताया कि इसी प्रकार की विशेष पूजा तृतीय और चतुर्थ सोमवार को भी आयोजित की जाएगी। श्रद्धालुजन भारी संख्या में इस धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेने की तैयारी कर रहे हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Jul 2025 17:47:35 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>सावन में हो रहा हर दिन 30 लाख का कारोबार</title>
                                    <description><![CDATA[पूजा सामग्री से लेकर फलाहारी वस्तुओं की बढ़ी बिक्री । 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/every-day--30-lakhs-of-business-is-happening-in-sawan/article-121193"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/news-(3)26.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। श्रावण मास में कोटा के बाजारों में भक्ति और व्यापार का संगम देखने को मिल रहा है। अच्छी खरीदारी से इन दिनों धार्मिकता की बयार के साथ बाजार में भी हरियाली ला दी है। श्रद्धालु भक्ति भाव से शिव पूजन में लीन हैं और बाजार व्यापारिक उम्मीदों से खिल उठे हैं। यह संगम न सिर्फ संस्कृति को समृद्ध कर रहा है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बना रहा है मंदिरों में शिवभक्तों की भीड़ के साथ ही बाजारों में पूजा सामग्री, फूलों, फलाहारी वस्तुओं, मेहंदी, चूड़ियां, वस्त्र और श्रृंगार सामग्री की बिक्री में भारी इजाफा देखा जा रहा है। स्थानीय व्यापारियों के अनुसार इस बार खरीदारी में 40-50% तक की वृद्धि देखी गई है। बाजारों में रोजाना 25 से 30 लाख रुपए का कारोबार होने से व्यापारियों के चेहरे चमक रहे हैं। </p>
<p><strong>फूलों की दुकानों पर बढ़ी रौनक:</strong> शिवलिंग पर पुष्प अर्पित करने की परंपरा के चलते गेंदे, कनेर, गुलाब, बेला जैसे फूलों की मांग चरम पर है। कोटा के प्रमुख फूल बाजारों थोक मंडी, घंटाघर, महावीर नगर और स्टेशन क्षेत्र में फूलों के थोक व्यापारियों का कहना है कि इस बार की बिक्री बीते वर्षों की तुलना में काफी बेहतर है। सावन माह के दौरान फूलों की बिक्री में काफी इजाफा हो गया है। थोक फूल मंडी के विक्रेताओं के अनुसार इन दिनों गेंदे और गुलाब के फूलों की डिमांड अधिक है। यहां कोटा के ग्रामीण क्षेत्रों में फूल बिकने के लिए जाते हैं। ऐसे में खरीदारी जोरों पर हो रही है। </p>
<p><strong>फलाहारी सामानों की डिमांड में उछाल</strong><br />श्रावण के व्रत-उपवास में उपयोग होने वाली वस्तुओं जैसे कि साबूदाना, सेंधा नमक, फल, मूंगफली, आलू के चिप्स, सिंघाड़ा आटा आदि की खपत में तेजी आई है। दुकानें खास फलाहारी काउंटर सज रही हैं। किराना व्यापारी गौरव अग्रवाल के अनुसार सावन माह में कई व्रत और त्यौहार आ रहे हैं। इस कारण फलाहारी सामग्री की खरीदारी अच्छी हो रही है। ग्राहकों की डिमांड को देखते हुए फलाहारी सामग्री के विशेष किट तैयार किए गए हैं, जो ग्राहकों को खूब पंसद आ रहे हैं। पिछले साल की तुलना में इस बार सावन माह किराना व्यापारियों के अच्छा साबित हो रहा है। आगामी दिनों में बिक्री में और इजाफा होने की उम्मीद है।</p>
<p><strong>हरियाली तीज की खरीदारी में तेजी</strong><br />श्रावण में आने वाली हरियाली अमावस्या और तीज को लेकर बाजार में चूड़ियों, साड़ियों, मेहंदी, बिंदी, लहरिया व अन्य श्रृंगार सामग्रियों की दुकानों में महिलाओं की भीड़ देखी जा रही है। कोटा के घंटाघर, इंद्रा मार्केट, तलवंडी, मालरोड जैसे क्षेत्रों में विशेष स्टॉल लगाए गए हैं। आगामी दिनों में हरियाली तीज का त्यौहार आने वाला है। ऐसे में महिलाओं ने अभी से खरीदारी शुरू कर दी है। इन दिनों लहरिया की बिक्री अधिक हो रही है। इस साल विभिन्न डिजाइन के लहरिया महिलाओं को काफी लुभा रहे हैं। कोटा के प्रमुख शिवालयों जैसे चम्बल गार्डन शिव मंदिर, ब्रह्मपुरी महादेव, तलवंडी महादेव और रामपुरा महादेव मंदिर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। इससे आसपास की दुकानों जैसे कि प्रसाद, धूप-बत्ती, बेलपत्र, जल पात्र, माला आदि की बिक्री को बड़ा सहारा मिला है।</p>
<p>10  लाख का कारोबार पूजन सामग्री का<br />10  लाख का कारोबार फलहारी सामग्री का<br />05  लाख का कारोबार हो रहा फूलों का<br />02  लाख का कारोबार श्रंगार सामग्री का</p>
<p>श्रावण में सुबह 4 बजे से ही खरीदारों की लाइन लग जाती है। गेंदे और गुलाब के फूलों की सबसे ज्यादा मांग है। हम रोजाना करीब 100 से अधिक फूलों के पैकेट बेच रहे हैं।<br /><strong>- राजेन्द्र सुमन, फूल विक्रेता </strong></p>
<p>हमने खास व्रत किट तैयार की है, जिसमें उपवास से जुड़ी सारी सामग्री शामिल है। ग्राहकों को सुविधाजनक पैकिंग में सब कुछ मिल रहा है।<br /><strong>- अजीत गोयल, किराना दुकानदार </strong></p>
<p>तीज का त्यौहार हमारे लिए बहुत खास है। इस बार नए डिजाइन की चूड़ियां और लहरिया साड़ी बाजार में खूब पसंद की जा रही है।<br /><strong>- सीमा कुमारी, गृहिणी </strong></p>
<p>श्रावण के चलते व्यापार में अप्रत्याशित तेजी आई है। फूल, पूजा सामग्री, फल, श्रृंगार, मिठाई  सभी क्षेत्रों में बिक्री में उछाल है। यह व्यापार के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है।<br /><strong>- महेश मित्तल, प्रमुख किराना व्यापारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Jul 2025 15:05:16 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>गोविन्द देव जी मंदिर में महाकाल का महाभिषेक, द्वादश ज्योतिर्लिंग का हुआ पूजन</title>
                                    <description><![CDATA[सावन मास के दूसरे सोमवार की पूर्व संध्या पर रविवार को गोविंद देव जी मंदिर शिवमय हो उठा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/mahabhishek-dwadash-jyotirlinga-was-worshiped-in-govind-dev-ji-temple/article-121168"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/news-(9)4.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सावन मास के दूसरे सोमवार की पूर्व संध्या पर रविवार को गोविंद देव जी मंदिर शिवमय हो उठा। महाकाल महाभिषेक द्वादश ज्योतिर्लिंग पूजन और पंच कुंडीय शिव-गायत्री महायज्ञ में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।</p>
<p>मंदिर परिसर में राधे-राधे और हर-हर महादेव के जयघोष के बीच 25 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल व बूरा से द्वादश ज्योतिर्लिंगों का रुद्राभिषेक किया। कार्यक्रम की शुरुआत मंदिर के सेवाधिकारी मानस गोस्वामी ने आराध्य गोविंद देवजी,  सनातन बोर्ड संघर्ष समिति के संयोजक राहुल द्विवेदी, मंदिर एवं प्रतिमा निर्माण की विशेषज्ञ आचार्या हिमानी शास्त्री, आचार्य अनुपम जोली, वेद माता गायत्री और गुरुसत्ता के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर की। पार्थिव शिवलिंग पूजन के साथ महायज्ञ का शुभारंभ हुआ।</p>
<p>कार्यक्रम में गायत्री शक्तिपीठ ब्रह्मपुरी के व्यवस्थापक सोहनलाल शर्मा, सनातन बोर्ड संघर्ष समिति के सर्वेश्वर शर्मा, कुलदीप सुलोनिया, गुर्जर समाज के युवा अध्यक्ष गौरव गुर्जर, बीसलपुर ऑर्गेनिक फाॅर्म एंड रिजॉर्ट के राजेश सैनी सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Jul 2025 13:02:32 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>सावन के दूसरे सोमवार को शिवालयों में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, हर-हर महादेव के जयकारों और शिव भक्ति से वातावरण हुआ भक्तिमय  </title>
                                    <description><![CDATA[सावन मास के दूसरे सोमवार को शहर के प्रमुख शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/on-the-second-monday-of-sawan-the-inundation-of-devotees/article-121161"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/news45.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सावन मास के दूसरे सोमवार को शहर के प्रमुख शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भगवान शिव के पूजन और जलाभिषेक के लिए सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लग गया। हर-हर महादेव के जयकारों और शिव भक्ति से वातावरण भक्तिमय हो गया।</p>
<p>सावन के पावन सोमवार पर शहर के ताड़केश्वर महादेव मंदिर, झारखंड महादेव मंदिर, छोटी चौपड़ स्थित रोजगढ़ेश्वर महादेव मंदिर सहित अन्य शिवालयों में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। भक्तगण जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग से भगवान शिव का अभिषेक करते नजर आए। महिलाओं ने विशेष व्रत रखकर शिव की पूजा अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।</p>
<p>इस अवसर पर शहर में कई स्थानों पर कावड़ यात्रियों की भी भारी भीड़ देखने को मिली। दूर-दूर से आए कांवड़िए जल या पवित्र सरोवरों से जल भरकर नंगे पांव पैदल चलकर शहर के शिव मंदिरों में पहुंचे। उन्होंने 'बोल बम' के जयघोष के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक कर पुण्य अर्जित किया। कांवड़ियों ने रंग-बिरंगे वस्त्र पहनकर, कंधे पर सजी हुई कांवड़ लेकर पूरे रास्ते भक्ति गीतों और जयकारों से माहौल को भक्तिमय बना दिया।</p>
<p>पुलिस प्रशासन द्वारा मंदिरों के आसपास विशेष प्रबंध किए गए थे ताकि भीड़ को सुव्यवस्थित तरीके से दर्शन का अवसर मिल सके। जगह-जगह भंडारों का आयोजन किया गया, जहां भक्तों और कांवड़ियों को जलपान और प्रसाद वितरित किया गया।</p>
<p>श्रद्धालुओं में इस दिन को लेकर विशेष उत्साह और आस्था देखने को मिली। लोग भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए पूरे श्रद्धा और विश्वास से पूजा में लीन रहे। मंदिरों में रुद्राभिषेक, शिव चालीसा पाठ, आरती और भजन-कीर्तन का आयोजन दिनभर चलता रहा। श्री अमरापुरा में भी भक्तों ने गलता पीठ से पवित्र जल लाकर भगवान शिव का अभिषेक किया। महाराज मोनू  ने बताया कि भक्तों में गहरी श्रद्धा और आस्था का माहौल बना हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Jul 2025 12:37:21 +0530</pubDate>
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                <title>शंकर महादेव का किया सामूहिक जलाभिषेक, निकाली कावड़ यात्रा </title>
                                    <description><![CDATA[बल शंकर महादेव का गंगा और गलता के जल से सामूहिक अभिषेक किया गया। अभिषेक के बाद भगवान की मनमोहक झांकी सजाई गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/collective-jalabhishek-of-double-shankar-mahadev-was-carried-out-by/article-87474"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/12.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। बाबा हरिश्चंद्र मार्ग पर स्थित डबल शंकर महादेव का सामूहिक अभिषेक करने के लिए गलता तीर्थ से हर हर महादेव, बम बम भोले के जयकारों के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु कांवड़ लेकर रवाना हुए। कावड़ यात्रा में आगे आगे पचरंगा निशान और पीछे तिरंगा भगवा पताकाओं सहित अनेक पताकाएं लेकर श्रद्धालु चल रहे थे। गलता से कावड़ यात्रा आरंभ हुई। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने यात्रा का पुष्प वर्षा से स्वागत किया। गलता कुंड से रवाना होकर यात्रा गलता गेट, सूरजपोल, रामगंज बाजार, बड़ी चौपड़ होकर द्वारकाधीश मंदिर चौड़ा रास्ता पहुंची। जहां कावड़ यात्रा का संत महंतों की मौजूदगी में भव्य स्वागत करने के बाद 1100 महिलाएं सिर पर कलश धारण किए शामिल हुई।</p>
<p>इस तरह कावड़ कलश यात्रा यहां से आरंभ होकर डबल शंकर महादेव मंदिर के लिए रवाना हुई। कावड़ कलश यात्रा में पूर्व महापौर ज्योति खंडेलवाल यशोदा और शरद खंडेलवाल नंद बाबा बने। द्वारकाधीश मंदिर से कावड़ कलश यात्रा त्रिपोलिया बाजार, छोटी चौपड़, इंदिरा बाजार होते हुए बाबा हरिशचंद्र मार्ग पर डबल शंकर महादेव मंदिर पहुंची। डबल शंकर महादेव का गंगा और गलता के जल से सामूहिक अभिषेक किया गया। अभिषेक के बाद भगवान की मनमोहक झांकी सजाई गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 11 Aug 2024 17:59:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>हरी व हर का मिलन ही श्रावण व अधिक मास</title>
                                    <description><![CDATA[शिव पुराण कथा कहती है कि जल ही शिव का स्वरूप है। उन्होंने जल को बचाने के लिए सभी भक्तों को पौधेरोपण करने को कहा। महाराज ने कहा कि शिव महापुराण कथा कहती है कि झूठ नहीं बोलना चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/the-meeting-of-hari-and-har-is-the-month-of/article-50961"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/multipurpose-timeline-infographic-based-on-years-(6).png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पुष्कर। तीर्थनगरी पुष्कर में विश्व की पहली श्री ब्रह्मा शिव महापुराण कथा का शुभारंभ बुधवार को हुआ। अंतर्राष्टÑीय ख्याति प्राप्त कथा वाचक पं. प्रदीप मिश्रा (सीहोर वाले) ने सात दिवसीय कथा के प्रथम दिवस जगत पिता ब्रह्माजी की उत्पत्ति एवं तीर्थगुरु पुष्कर राज का महत्व बताया। सावन माह के मौके पर पुष्कर के मेला मैदान में आयोजित कथा में भीषण गर्मी व उमस के बीच 50 हजार से अधिक शिवभक्तों ने कथा का रसपान किया। महाराज ने कहा कि सौभाग्यशाली है जो तीर्थनगरी में शिव महापुराण कथा सुनने का अवसर मिला है। इस मौके पर पूरा कथा स्थल श्री शिवाय नमस्तुभ्यं के उद्घोष से गूंज उठा।<br /><br />अंतर्राष्टÑीय वैश्य महासम्मेलन अजमेर के सानिध्य में चन्द्रकांता-कैलाशचंद, मोनिका-राकेश, कीर्ति-अमितकुमार गुप्ता खण्डेलवाल परिवार की ओर से आयोजित कथा का विधिवत शुभारंभ बुधवार को गणपति वंदना के साथ हुआ। इसके बाद करीब 1.15 बजे कथा व्यास पं. प्रदीप मिश्रा कथा स्थल पर पहुंचे और उन्होंने भगवान लड्डूगोपाल की पूजा व माल्यार्पण किया। तत्पश्चात शिवपुराण कथा पुराण की पूजा व नमन कर व्यास पीठ की गद्दी पर विराजमान हुए। तथा गणपति सहित देवताओं की जयकार करते हुए अपनी समुधुर वाणी से ऊं नम: शिवाय भजन की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। हर हर महादेव, श्री शिवाय नमस्तुभ्यं, एक लोटा जल सभी समस्या का हल आदि का उच्चारण कर कथा शुरू की। उन्होंने कहा कि शिव कथा भगवान शंकर का संवाद है, भगवान शिव की कथा है उसमें 24 हजार श्लोकों का अपार समुद्र है। अगर आपने शिवमहापुराण की कथा का 1 क्षण भी इस श्रावण मास में पुष्कर राज की भूमि, ब्राह्मणों की धरा व ब्रह्मा जी का निवास ऐसी पवित्र भूमि पर कथा सुनने का सौभाग्य मिला है। उन्होंने श्रोताओं से एक बार पुष्कर सरोवर में स्रान पूजन व ब्रह्मा जी के दर्शन कर अपने जीवन का धन्य बनाने का आग्रह किया। आगे बताया कि प्रतिदिन मनुष्य के शरीर से 21 हजार 6 सौ श्वास निकलती है उसमें वह कितनी श्वास भगवान, भजन, परिवार, स्वयं के कार्य में लगा रहे है। बताया कि मनुष्य ने पृथ्वी पर कितना धर्म व पुण्य किया इसका हिसाब परमात्मा जरूर लेता है। सभी को अपने मोबाइल पर फोटो व स्टेटस उसकी लगानी चाहिए जिसने तुम्हारी तकदीर बदल दी हो। हरी और हर का मिलन श्रावण और अधिक मास है। महाराज ने सत्यनारायण कथा के महत्व के बारे में भी बताया।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>जल ही शिव का स्वरूप, उसे बचाएं<br /></strong>शिव पुराण कथा कहती है कि जल ही शिव का स्वरूप है। उन्होंने जल को बचाने के लिए सभी भक्तों को पौधेरोपण करने को कहा। महाराज ने कहा कि शिव महापुराण कथा कहती है कि झूठ नहीं बोलना चाहिए। और अहंकार व दिखावे से भगवान शंकर प्रसन्न नहीं होते है। महादेव को प्रसन्न करने के लिए स्वयं भोला भक्त बन जाए। अपनी वाणी, शरीर व चरित्र द्वारा किसी को दुख ना दे यहीं भोला भक्त होता है। ब्रह्मा की नगरी में पहली बार शंकर के भक्त आए तो सभी को पानी पिलाये। महाराज ने कहा कि अगर घर में से कोई भी एक सदस्य महादेव पर एक लोटा जल चढ़ा रहा है तो वह अपनी एकत्तर पीढ़ी को पार लगा रहा है। अंत में महाराज ने ईसर गणगौर की कथा बताई। इस मौके पर आयोजक अमित गुप्ता एवं कीर्ति गुप्ता द्वारा ईसर गणगौर के रूप में सजीव झांकी सजाई गई। </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>1 हजार अश्वमेघ यज्ञ करने के बराबर पुष्कर में एक रात रुकना<br /></strong>उन्होंने भक्तों से सभी तीर्थों के गुरु पुष्कर में शिव के प्रिय मास सावन माह में ब्रह्मा शिव महापुराण कथा सुनने का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि पद्मपुराण में लिखा है कि 1 हजार अश्वमेघ यज्ञ और एक रात्रि पुष्कर राज की भूमि पर निवास करने के महत्व के बराबर है। कहा कि पद्मपुराण कहती है अगर कोई पृथ्वी पर आकर 1 हजार अश्वमेघ यज्ञ नहीं कर पाए तो उसे प्रयास करना कि पुष्कर पहुंचकर पवित्र सरोवर में स्रान, पूजा व ब्रह्मा का दर्शन कर लेंवे तो उसे यह पुण्य प्राप्त हो जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>कथा श्रवण मात्र ही समस्याओं का निस्तारण<br /></strong>पं. मिश्रा ने बताया कि ब्रह्माजी ने भगवान विष्णु से प्रश्न किया कि में आपकी नाभी से प्रकट हुआ हूं और आप मेरे पिता हो। ब्रह्माजी ने विष्णु भगवान से प्रश्न किया कि आपको आपके पिता का नाम बता है। तब भगवान विष्णु ने सरल भाषा में बताया कि मेरे पिता देवादिदेव महादेव है, कोई दूसरा नहीं। बताया कि भगवान विष्णु की लक्ष्मीजी के साथ विवाह भी भगवान शंकर ने करवाया। कथा में पं. मिश्रा ने उत्तराखंड स्थित बद्री विशाल की कथा को विस्तार से समझाया। सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड, सभी तीर्थों का गुरु पुष्कर राज है। पं. मिश्रा ने बताया कि प्रत्येक शिव मंदिर में भगवान शंकर के लिंग चाहे वह पाषण का हो, हरी को, पन्ने, चांदी, सोने, स्फटिक शिवलिंग आदि पर चढ़े जल को आचमन कर सकते है, लेकिन इनमें एक पारद के शिवलिंग पर चढ़े जल का आचमन नहीं किया जाता है। भगवान शिव के स्वरूप को साधारण मनुष्य द्वारा पहचान पाना बहुत कठिन है। उन्होंने कहा कि जो शिव महापुराण कथा सुनता है उसके सभी समस्या भगवान महादेव हर लेते है। <br /><br /><strong>महादेव से कामना करो दुख का समय समाप्त होगा</strong><br />अगर आपके दुख का समय समाप्त नहीं हो रहा है और आपने देवी देवताओं, ज्योतिषाचार्य, वास्तु शास्त्र, अंगुठियां पहन आदि प्रयास कर लिए लेकिन कोई सफलता नहीं मिले तो उन्हे इस श्रावण मास में एक प्रयास यह करना है कि जो पौधा अपने घर में लगा हो उसी पौधे की मिट्टी से थोड़ी मिट्टी हाथ से निकालकर उसी पौधे के नीचे लिंग की आकृति बनाकर पूजन व जल चढ़ाकर 15-20 मिनट बाद अपना कार्य करने के बाद उसको उसी मिट्टी में अपनी कामना कर विसर्जन कर दे। दो महिने बाद महादेव क्या देगा ये महादेव ही जानते है। <br /><br /><strong>3 वर्ष पहले हुई बुकिंग अजमेर की जगह पुष्कर में फाइनल हुई</strong><br />महाराज ने बताया कि 3 वर्ष पहले यजमान परिवार ने बुकिंग कराई उस समय अजमेर में कथा कराने का विचार था। महाराज ने बताया कि कुछ समय पूर्व उनकी दिल की इच्छा, यजमान परिवार की इच्छा व ब्रह्माजी व महादेव की कृपा से कथा का पुष्कर में होना फाइनल हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>ब्रह्माजी के कटे सिर से कर्मनाशा नदी प्रकट हुई<br /></strong>बताया कि ब्रह्माजी ने शंकर भगवान की वाणी को झूठा संबोधित करने पर महादेव ने अपने पैर के अंगूठे के नख को तोड़कर काल भैरव को प्रकट किया और फिर काल भैरव को कहा कि ब्रह्माजी का शीश काट दो। ब्रह्माजी का शीश कटकर लुढ़कता हुआ कर्मनाशा नदी प्रकट हो गई। वो कर्मनाशा नदी का पानी जिसका पानी का छींटा भी शरीर पर लग जाये तो सात पीढ़ी में किया हुआ पुण्य नष्ट हो जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>तैतीस कोटि देवी देवताओं करते थे यहां तप-साधना<br /></strong>महाराज ने कहा कि पुष्कर के पवित्र सरोवर में स्रान, पूजन व आचमन करो सही है लेकिन कपड़े धोना, कुल्ला या गंदगी करना ये बहुत गलत है। उन्होंने बताया कि पूर्व काल में एक ब्रजनाभ नामक राक्षस था जिसका काम था जलाश्य को दूषित करना था। यह राक्षस जल को दूषित इसलिए करता था कि यह गंदा जल देवताओं पर चढ़ेगा तो देवताओं नाराज होकर उस जल से नफरत करेंगे। उन्होंने बताया कि पद्मपुराण में लिखा है कि पुष्कर के कंकर-कंकर में, पुष्कर की रज-रज व एक-एक कण कण में तैतीस कोटि देवी देवताओं बैठकर तप साधना करते है यह भूमि पुष्कर है। यहां गंदगी करना उचितता नहीं व श्रेष्ठता नहीं है। लेकिन ब्रजनाभ ने गंदगी करी तब ब्रह्माजी ने समझाया लेकिन वह नहीं समझा तब ब्रह्माजी ने गुस्से में आकर ब्रजनाभ को मार दिया। ब्रह्माजी ने वापस आकर क्रोध में आकर बैठे तब उनके गले में कमल के पुष्प की माला से दो पुष्प व हाथ से एक पुष्प पृथ्वी पर आकर गिरे इससे तीन पुष्कर का निर्माण हुआ। यहां पर ब्रह्माजी ने यहां आकर जन कल्याण के लिए यज्ञ किया। और पृथ्वी का निर्माण किया। बताया कि द्वापर युग में ब्रह्माजी ने राधा रानी का भगवान कृष्ण के साथ विवाह कर कन्यादान किया था। कन्या का कन्यादान करना सरल बात नहीं है कथा के अनुसार बेटा एक कुल को और बेटी दो कुल को तारती है। जब बेटी का कन्यादान पिता करते से ही वो पिता 94 तरह के नरकों को नहीं भुगता है वो वैकुंठधाम को चला जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>...तो नारी अपमान का दोष दूर होगा<br /></strong>महाराज ने बताया कि पुष्कर के सरोवर का जल लेकर ब्रह्मा जी का नाम लेकर कपालेश्वर महादेव पर समर्पित किया जाता है तो भूल से भी किसी नारी का अपमान किया हो या गर्भ में बेटी का शांत हो गई हो उसका दोष पुष्कर राज की धरा पर समाप्त हो जाता है यह वो भूमि है।<br />उन्होंने कहा कि मनुष्य में किसी पूजन, सत्संग व धार्मिक कर्म करते समय अगर थोड़ा भी अंहकार आ जाए तो भगवान उस धार्मिक कर्म को कभी स्वीकार नहीं करते है। </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>भजनों की दी प्रस्तुति<br /></strong>कथा में महाराज एवं भजन मंडली ने हरी ओम में ओम समाया है मेरा भोला पुष्कर में आया है, मेरे भोले के हाथों में त्रिशुल है, खाली ना जाता कोई दर से तुम्हारे में भी खड़ा हूं नंदी बाहें पसारे अपने हृदय से लगा लो लगा लो गिरा जा रहा हूं उठा लो उठा लो, मत कर बुरे कर्म भगवान की आंखों से तू बच नहीं पायेगा आदि भजनों की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>हंसी मजाक के साथ लगाए ठहाके<br /></strong>कथा में पं. प्रदीप मिश्रा ने कई प्रसंगों के बीच बीच में श्रोताओं को हंसी मजाक के साथ जमकर ठहाके लगाए जिस पर श्रोताओं ने हंसते हुए प्रसन्नता व्यक्त करते हुए तालियां बजाई।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>भक्तों के आए पत्रों को पढ़ा<br /></strong>कथा के दौरान पं. मिश्रा ने राजस्थान सहित दूरदराज से आए पत्रों को पढ़कर श्रोताओं को सुनाया। इस दौरान चंडीगढ़ से नरेश कुमारी महिला भक्त के एक पत्र को पढ़ते हुए बताया कि उस भक्त ने शिव के बगलामुख और बगलामुखी माता वाला हल्दी की माला वाले उपाय से उसकी भक्त की वर्षों पुरानी सोरयसिस वाली बीमारी समाप्त हो गई। इसी तरह उस भक्त ने पशुपति नाथ का व्रत कर महादेव से विनती करने पर उसके 35 वर्षीय बेटें की रूकी हुई शादी हो गई है। बीकानेर के महिला भक्त मोहिनी देवी सोनी के आए पत्र को पढ़ते हुए बताया कि उसके बेटे के गले में हो रखी केंसर की गांठ व बंद आवाज केवल शिव पुराण कथा सुनने और महादेव पर चढ़े एक बल्व पत्र और जल को बेटे को पिलाने से सहीं हो गई। जयपुर निवासी लक्ष्मी यादव के पत्र में बताया कि एक लोटे जल व महादेव पर चढ़े बल्वपत्र को खाने और कुंदकेश्वर महादेव की कृपा से उसके पेट की केंसर की गांठ सही हो गई। नसीराबाद के नांदला निवासी कमला देवी के पत्र में बताया कि महादेव पर चढ़े जल को पीने व बल्वपत्र खानें से उसकी दांतों की बड़ी बीमारी सही हो गई। नागौर के डेगाना निवासी महिला भक्त कैलाश कंवर के आए पत्र को पढ़ते हुए बताया कि उस महिला के पशुपति व्रत करने व सफेद आंकड़े की जड़ का प्रयोग करने से उसकों संतान सुख की प्राप्ति हुई। </p>
<p style="text-align:justify;"><strong>आरती में देवस्थान मंत्री रावत सहित जनप्रतिनिधियों ने लिया भाग<br /></strong>शाम 4 बजे कथा समय की समाप्ति पर शिव पुराण कथा में भगवान शंकर की आरती की गई। इस अवसर पर राज्य सरकार की देवस्थान मंत्री श्रीमती शकुंतला रावत, आरटीडीसी चैयरमेन धर्मेन्द्र सिंह राठौड़, प्रदेश के उप नेता प्रतिपक्ष सतीश पूनिया, सांसद भागीरथ चौधरी, विधायक सुरेश सिंह रावत, पूर्व विधायक डा. श्रीगोपाल बाहेती, अजमेर उप महापौर नीरज जैन, आयोजक परिवार एवं जनप्रतिनिधियों सहित प्रबुद्धजनों ने आरती में भाग लिया। इस मौके पर प्रवक्ता उमेश गर्ग ने सभी अतिथियों का शॉल ओढ़ाकर अभिनंदन किया। इससे पूर्व सभी ने हजारों भक्तों के साथ कथा श्रवण किया।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>कथा शुरू होने से पहले ही पांडाल खचाखच <br /></strong>मेला मैदान में पं. प्रदीप मिश्रा की 7 दिवसीय श्री ब्रह्मा शिव महापुराण कथा सुनने के लिए पहले ही दिन उम्मीद से अधिक शिव भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। बुधवार को दिन निकलने के साथ ही श्रोताओं ने डेरा जमाना शुरू कर दिया। कथा दोपहर 1 बजे शुरू होनी थी, लेकिन इससे पहले ही आयोजन स्थल महिला-पुरूषों से खचाखच भर गया। जिसको जहां जगह मिली, वहीं बैठ गए। अधिकतर महिला भक्तों ने भजन गाकर पं. मिश्रा के आने का इंतजार किया। शाम को पहले दिन की कथा संपन्न होने के साथ ही मेला मैदान से एक साथ शिव भक्तों की भीड़ रैले के रूप में बाहर निकली। कथा के बाद कई श्रद्धालुओं ने सरोवर में स्रान व ब्रह्मा मंदिर के दर्शन किए। वहीं बाकी आस-पास के गांव व शहरों से आए शिव भक्त वापस अपने घरों के लिए लौट गए। इसके चलते बस स्टैंड व पार्किंग स्थलों पर काफी देर तक लोगों का जमघट लगा रहा तथा बांगड़ व गनाहेड़ा तिराहे पर जाम लग गया। वाहनों को पुष्कर से निकालने के लिए पुलिस व यातायत कर्मियों को खासी मशक्कत करनी पड़ी।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>बसों की कमी, यात्री परेशान<br /></strong>भारी भीड़ के बावजूद रोडवेज प्रशासन ने बसों की माकूल व्यवस्था नहीं की है। शिव भक्तों को कथा के पहले ही दिन बसों की कमी का सामना करना पड़ा। कथा संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोग बस स्टैंड पहुंचे, मगर उन्हें बसों का धूप में बैठ कर घंटों इंतजार करना पड़ा। बसों का इंतजार कर रहे कुछ लोगों की तबीयत भी बिगड़ गई। इस मामले में कांगे्रस ब्लॉक अध्यक्ष संजय जोशी ने गहरी नाराजगी प्रकट की है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>पुलिसकर्मी व पासधारियों में नोंकझोंक<br /></strong>आयोजक परिवार की ओर से प्रबुद्ध नागरिकों को विशिष्ट अतिथि के नाम से पास जारी किए गए। हालांकि शुरूआत में तो प्रवेश द्वार पर तैनात पुलिस कर्मियों ने पासधारी लोगों को अतिथि दीर्घा में बैठने दिया। मगर बाद में अतिथि दीर्घा में प्रवेश रोक दिया। जिससे पासधारियों व पुलिस कर्मियों के बीच कई बार नोंकझोंक देखने को मिली।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>उपखंड़ कार्यालय में नियंत्रण कक्ष स्थापित<br /></strong>उपखंड अधिकारी निखिल कुमार पोद्दार ने बताया कि शिव महापुराण कथा में शिव भक्त श्रोताओं व सावन मास के दौरान सरोवर का जल लेने के लिए आने वाले कावड़ियों की आपात काल में सहायता के लिए उपखंड़ कार्यालय में नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है। नियंत्रण कक्ष के तहसीलदार संदीप चौधरी प्रभारी रहेंगे। नियंत्रण कक्ष 24 घंटे खुला रहेगा। कक्ष में तीन कर्मचारियों की राउंड़ द क्लॉक ड्यूटी लगाई गई है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>स्कूल बसों को भी रोका<br /></strong>कथा के चलते अजमेर रोड स्थित यात्री कर नाके से गनाहेड़ा तिराहे तक के मुख्य मार्ग समेत शहर के गली-मौहल्लों में चार पहिए वाहनों के आवागमन पर पुलिस प्रशासन ने पूरी तरह से रोक लगा दी है। यही नहीं अजमेर से आने वाली स्कूल बसों को भी शहर में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है। सभी बसों को अजमेर रोड यात्री कर नाके से पहले ही रोका जा रहा है। जिससे अजमेर पढ़ने के लिए जाने वाले छात्र-छात्राओं को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं स्कूल बसों को दो किमी पहले ही रोकने से अभिभावकों में रोष उत्पन्न हो रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Jul 2023 09:41:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Ajmer]]></dc:creator>
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                <title>देश के इन हिस्सों में लगता है  सावन का मेला</title>
                                    <description><![CDATA[लखीमपुर-खीरी में स्थित गोला के गोकर्णनाथ को छोटी काशी के नाम से जाना जाता है। सावन के महीने में यहां की छटा निराली होती है। श्रावण मास में यहां कांवड़ियों और शिव साधकों की भीड़ पहुंचती है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/-in-these-parts-of-the-country-sawan-fair/article-50779"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/rj-(1)2.png" alt=""></a><br /><p>सावन के पावन महीने में शिव मंदिरों की रौनक देखने लायक होती है। इस पवित्र महीने में विशेष मेलों का आयोजन भी किया जाता है। सावन में लगने वाले इन मेलों को श्रावणी मेला कहा जाता है। इन मेलों में भगवान शिव के भक्तों का हुजूम उमड़ता है। इसमें ज्यादातर कांवड़िये शामिल होते हैं ,जो कांवड़ में पवित्र गंगाजल लेने आते हैं।<br /><br /><strong>सावन 59 दिनों का </strong><br />साल 2023 का सावन बहुत खास है। अधिकमास होने की वजह से इस बार सावन 59 दिनों का होगा। इस साल श्रावणी मेले का आगाज सावन माह के साथ ही शुरू हो जाता है। इस साल सावन 4 जुलाई से शुरू हो रहा है। <br /><br /><strong>हरिद्वार का श्रावणी मेला </strong><br />सावन के महीने में शिव भक्तों की सेना हरिद्वार पहुंचती है। यहां सावन में बहुत बड़े मेले का आयोजन होता है। सावन माह का शुभारंभ होने के साथ ही शिव भक्तों का यहां आना शुरू हो जाता है। <br /><br /><strong>देवघर का श्रावणी मेला</strong><br />देवघर में लगने वाला श्रावणी मेला देश और दुनिया में मशहूर है। यहां साल दर साल आने वाले शिवा भक्तों की संख्या में इजाफा देखा जा रहा है। कांवड़ यात्रियों के लिए देवघर आना सपने के सच होने के समान होता है। कावड़ यात्री बिहार के सुल्तानगंज में गंगा नदी से जल लेकर देवघर पहुंचते हैं और बाबा बैद्यनाथ जी का जलाभिषेक करने का सौभाग्य पाते हैं। देवघर में लगने वाला श्रावणी मेला सबसे बड़े मेलों की फेहरिस्त में शामिल है।<br /><br /><strong>काशी विश्वानथ का मेला</strong><br />उत्तर प्रदेश के बनारस में भी सावन महीने में बहुत बड़े मेले का आयोजन किया जाता है। यहां बहुत बड़ी संख्या में शिव भक्त और कांवड़िये बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने और आशीर्वाद पाने के लिए दूर-दराज के इलाकों से आते हैं। <br /><br /><strong>लखीमपुर में सावन मेला </strong><br />लखीमपुर-खीरी में स्थित गोला के गोकर्णनाथ को छोटी काशी के नाम से जाना जाता है। सावन के महीने में यहां की छटा निराली होती है। श्रावण मास में यहां कांवड़ियों और शिव साधकों की भीड़ पहुंचती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Jul 2023 12:01:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>सावन में करे शिव आराधना...दूर होगें सारे कष्ट !!</title>
                                    <description><![CDATA[हजारों सालों से विज्ञान 'शिव' के अस्तित्व को समझने का प्रयास कर रहा है। जब भौतिकता का मोह खत्म हो जाए और ऐसी स्थिति आए कि ज्ञानेंद्रियां भी बेकाम हो जाएं, उस स्थिति में शून्य आकार लेता है, और जब शून्य भी अस्तित्वहीन हो जाए तो वहां शिव का प्राकट्य होता है। शिव यानी शून्य से परे। जब कोई व्यक्ति भौतिक जीवन को त्याग कर सच्चे मन से मनन करे तो शिव की प्राप्ति होती है। उन्हीं एकाकार और अलौकिक शिव देवों के देव महादेव का प्रिय महीना सावन का है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/worship-shiva-in-sawanall-the-troubles-will-go-away/article-15051"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/shiv.jpg" alt=""></a><br /><p>हजारों सालों से विज्ञान 'शिव' के अस्तित्व को समझने का प्रयास कर रहा है। जब भौतिकता का मोह खत्म हो जाए और ऐसी स्थिति आए कि ज्ञानेंद्रियां भी बेकाम हो जाएं, उस स्थिति में शून्य आकार लेता है, और जब शून्य भी अस्तित्वहीन हो जाए तो वहां शिव का प्राकट्य होता है। शिव यानी शून्य से परे। जब कोई व्यक्ति भौतिक जीवन को त्याग कर सच्चे मन से मनन करे तो शिव की प्राप्ति होती है। उन्हीं एकाकार और अलौकिक शिव देवों के देव महादेव का प्रिय महीना सावन का है।</p>
<p><br />हिंदू धर्म में सावन मास का विशेष महत्व है। सावन में भगवान शिव की अराधना की जाती है। सावन के सभी सोमवार का अपना महत्व होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार पांचवा महीना सावन कहलाता है। इस दौरान कुल 4 सोमवार पड़ेंगे। मान्यता है कि सावन मास में भोलेनाथ की अराधना करने से सुख-शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। कुंवारी कन्याएं इस दौरान सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए सावन में पूजा-अर्चना करती हैं। <br /><br /><strong>शिव आराधना से मनोवांछित फल मिलते हैं</strong><br />सावन का महीना और चारों और हरियाली। भारतीय वातावरण में इससे अच्छा कोई और मौसम नहीं बताया गया है। जुलाई में आने वाले इस मौसम में, ना बहुत अधिक गर्मी होती है और ना ही बहुत ज्यादा सर्दी। वातावरण को अगर एक बार को भूला भी दिया जाए, किन्तु अपने आध्यात्मिक पहलू के कारण सावन के महीने का हिन्दू धर्म में विशेष महत्त्व बताया गया है। सावन का महीना पूरी तरह से भगवान शिव को समर्पित रहता है। इस माह में विधि पूर्वक शिवजी की आराधना करने से, मनुष्य को शुभ फल भी प्राप्त होते हैं। इस माह में भगवान शिव के 'रुद्राभिषेक' का विशेष महत्त्व है। इसलिए इस माह में खासतौर पर सोमवार के दिन 'रुद्राभिषेक' करने से शिव भगवान की कृपा प्राप्त की जा सकती है। अभिषेक कराने के बाद बेलपत्र, शमीपत्र, कुशा तथा दूब आदि से शिवजी को प्रसन्न करते हैं और अंत में भांग, धतूरा तथा श्रीफल भोलेनाथ को भोग के रूप में समर्पित किया जाता है।<br /><br /><strong>सावन में चार सोमवार और दो प्रदोष व्रत</strong><br />पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर-जोधपुर के निदेशक, विश्वविख्यात भविष्यवक्ता, कुण्डली विश्ल़ेषक और ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि सावन में चार सोमवार और दो प्रदोष व्रत रहेंगे। इसके अलावा कई विशेष शुभ योग भी आएंगे। ऐसी मान्यता है कि इस माह में किए गए सोमवार के व्रत का फल बहुत जल्दी मिलता है। लेकिन महामारी के संक्रमण से बचने के लिए घर पर ही भगवान शिव की पूजा की जा सकती है। घर पर की गई पूजा का फल मंदिर में की गई पूजा के बराबर ही मिलता है। इसलिए घर में उपलब्ध चीजों से ही पूजा करनी चाहिए।<br /><br /><strong>सावन सोमवार की तिथियां</strong><br />18 जुलाई सोमवार- श्रावण मास का पहला सोमवार<br />25 जुलाई सोमवार- श्रावण सोमवार व्रत<br />01 अगस्त सोमवार- श्रावण सोमवार व्रत<br />08 अगस्त सोमवार- श्रावण सोमवार व्रत<br />12 अगस्त शुक्रवार- श्रावण मास का अंतिम दिन<br /><br /><br /><strong>शिव को मिली थी जल से शीतलता</strong><br />जब शिव विष को धारण कर रहे थे उस समय माता पार्वती ने उनके गले को दबाए रखा, जिससे विष का प्रभाव केवल गले में हुआ और शेष शरीर इसके प्रभाव से अछूता रहा। विष के प्रभाव से महादेव का कंठ नीला हो गया। इसलिए उनको 'नीलकंठ' कहा जाता है। विष के प्रभाव से महादेव को असहनीय गर्मी को सहन करना पड़ा। कैलाशपति को विष की गर्मी से छुटकारा दिलवाने के लिए इंद्र ने वर्षा करवाई थी। शिव ने सावन के महीने में विषपान किया था। इसलिए इस महीने उत्तम वृष्टि के योग बनते हैं और शिव की गर्मी को शांत करने के लिए भक्त शिवलिंग पर शीतल जल चढ़ाते हैं।<br /><br /><strong>पूजा-विधि</strong><br />सावन महीने में सुबह जल्दी उठकर नहाएं और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद ऊं नमः शिवाय मंत्र बोलते हुए गंगा जल से भगवान शिव का अभिषेक करें। शिवलिंग पर जल-दूध चढ़ाएं। फिर फूल, बिल्वपत्र, धतूरा और अन्य चीजें चढ़ाकर आरती करें। इसके बाद नैवैद्य लगाएं। इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का ही भोग लगाया जाता है। पूजा-आरती के बाद शिव मंत्र का जाप भी करना चाहिए।<br /><br /><strong>सावन मास का महत्व</strong><br /> सावन मास भगवान शिव को समर्पित है। मान्यता है कि इन दिनों में भक्तिभाव से शिव आराधना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान जब कालकूट नाम का जहर निकला तो देव और दानव दोनों उससे भयभीत हो गए और कोई भी उसको लेने के लिए तैयार नहीं था। इसके साथ इस विष से चारों और हाहाकार मच गया था। दसों दिशाएं इस विष से जलने लगी थी। देव, दानव, ऋषि-मुनि सभी इसकी गरमी से जलने लगे। इसलिए सभी महादेव के पास गए और उनसे इस सृष्टि को बचाने की प्रार्थना की। भोलेनाथ विष को ग्रहण करने के लिए तैयार हो गए।<br /><br /><strong>घर में छोटा सा ही शिवलिंग रखना चाहिए</strong><br /> देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियां घर में नहीं रखनी चाहिए, लेकिन शिवलिंग रख सकते हैं, क्योंकि शिवलिंग को निराकार स्वरूप माना गया है। इस कारण इसे खंडित नहीं माना जाता है। टूटा शिवलिंग भी पूजनीय होता है। ध्यान रखें घर में ज्यादा बड़ा शिवलिंग नहीं रखना चाहिए। घर में छोटा शिवलिंग रखना शुभ रहता है। हमारे अंगूठे के पहले पोर से बड़े आकार का शिवलिंग घर में रखने से बचना चाहिए। शिवजी के साथ ही गणेशजी, माता पार्वती, नंदी की भी मूर्तियां जरूर रखें। पूजा की शुरुआत गणेश पूजन से करना चाहिए।<br /><br /><strong>इन बातों का रखें ख्याल</strong><br />शास्त्रों के अनुसार सावन माह में भक्तों को बैंगन खाने से परहेज करना चाहिए क्योंकि कई लोग इस सब्जी को अशुद्ध मानते हैं। इसके अलावा इस दौरान व्रत रखने वाले लोगों को दूध का सेवन भी नहीं करना चाहिए। इसके पीछे धार्मिक मान्यता ये है कि दूध से भोले बाबा का अभिषेक किया जाता है इसलिए इसका सेवन वर्जित है। इस महीने में भक्तों को मास-मदिरा तथा प्याज-लहसुन के सेवन से भी परहेज करना चाहिए।<br /><br /><strong>सावन सोमवार से प्रसन्न हो जाते हैं शिव भगवान</strong><br />ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि सावन महीने के प्रत्येक सोमवार को शिव की पूजा करनी चाहिए। इस दिन व्रत रखने और भगवान शिव के ध्यान से विशेष लाभ प्राप्त किया जा सकता है। यह व्रत भगवान शिव की प्रसन्नता के लिए किये जाते हैं। व्रत में भगवान शिव का पूजन करके एक समय ही भोजन किया जाता है। साथ ही साथ गले में गौरी-शंकर रूद्राक्ष धारण करना भी शुभ रहता है। भोले बाबा सभी देवो में सबसे सरल और भोले माने गए हैं। इन्हें हिंदू धर्म में बड़ी श्रद्धा के साथ पूजा जाता है। माना जाता है कि सावन में शिव जी का व्रत रखने से कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर और कुवारें लड़कों को मनचाही वधु की प्राप्ति होती है। यदि आपने भी भोले बाबा को प्रसन्न करने के लिये सावन सोमवार का व्रत रखा है तो बताए गए शुभ मुहूर्त में जल चढ़ाएं पूरा श्रावण मास जप,तप और ध्यान के लिए उत्तम होता है, लेकिन इसमें सोमवार का विशेष महत्व है। सोमवार का दिन चन्द्र ग्रह का दिन होता है और चन्द्रमा के नियंत्रक भगवान शिव हैं। अतः इस दिन पूजा करने से न केवल चन्द्रमा बल्कि भगवान शिव की कृपा भी मिल जाती है। कोई भी व्यक्ति जिसको स्वास्थ्य की समस्या हो, विवाह की मुश्किल हो या दरिद्रता छाई हो।अगर सावन के हर सोमवार को विधि पूर्वक भगवान शिव की आराधना करता है तो तमाम समस्याओं से मुक्ति पा जाता है। सोमवार और शिव जी के सम्बन्ध के कारण ही मां पार्वती ने सोलह सोमवार का उपवास रखा था। सावन का सोमवार विवाह और संतान की समस्याओं के लिए अचूक माना जाता है। भगवान शिव की पूजा के लिए और खास तौर से वैवाहिक जीवन के लिए सोमवार की पूजा की जाती है। अगर कुंडली में विवाह का योग न हो या विवाह होने में अडचने आ रही हों तो संकल्प लेकर सावन के सोमवार का व्रत किया जाना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Jul 2022 12:07:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सावन लगते ही भीगा कोटा </title>
                                    <description><![CDATA[सावन का महीना शुरू होते ही कोटा में भी इंद्रदेव मेहरबान हो गए और झमाझम बरसात होने लगी। सावन के पहले दिन जहां देर शाम को बरसात हुई थी वही दूसरे दिन शुक्रवार को दोपहर बाद ही बरसात शुरू हो गई ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-gets-wet-as-soon-as-sawan-starts/article-14716"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/bari.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । सावन का महीना शुरू होते ही कोटा में भी इंद्रदेव मेहरबान हो गए और झमाझम बरसात होने लगी। सावन के पहले दिन जहां देर शाम को बरसात हुई थी वही दूसरे दिन शुक्रवार को दोपहर बाद ही बरसात शुरू हो गई । हालांकि कहीं धीमी तो कहीं तेज बरसात होती रही । खंड वर्षा के रूप में थोड़ी - थोड़ी देर में बरसात का क्रम चलता रहा। जिससे पूरे शहर में सड़के भी गई और गर्मी से भी लोगों को राहत मिली । जबकि 1 दिन पहले तक कोटा को छोड़कर उसके आसपास के इलाकों और जिलों में अच्छी बरसात हो रही थी । <br /><br />सावन लगने के बाद कोटा में भी बरसात का दौर शुरू हो गया है । वहीं देर रात 12:00 बजे बाद कोटा में बरसात शुरू हुई जो करीब एक से डेढ़ घंटे तक चली । बादल गरजते रहे, बिजली चमकती  रही और झमाझम बरसात होती रही।  शहर में कई जगह पर पेड़ गिर गए और दुकानों के टीन शेड भी उड़ गए।   रात 12:00 बजे बाद से पूरे शहर में बिजली भी बंद हो गई थी जो सुबह 4:00 बजे तक सामान्य हो सकी।  महावीर नगर से लेकर रेलवे कॉलोनी तक कहीं 2 घंटे तो कहीं 3 घंटे तक बिजली बंद रहने से पूरी रात लोग परेशान होते रहे । लोगों का कहना है कि बिजली बंद होने के बाद कॉल सेंटर पर फोन करते रहे लेकिन किसी भी अधिकारी व कर्मचारी ने फोन तक रिसीव नहीं किया । मौसम विभाग के अनुसार 1 दिन पहले कोटा में 4.6 मिलीमीटर बरसात रिकॉर्ड की गई थी और तापमान 35 डिग्री पर बना हुआ है । 1 दिन पहले तक गर्मी तेज पड़ रही थी वही शुक्रवार को दिन में बरसात होने से लोगों ने गर्मी से राहत महसूस की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 Jul 2022 16:32:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आषाढ़ में लगी सावन सी झड़ी...</title>
                                    <description><![CDATA[भीषण गर्मी के मौसम के बीच आई बारिश से जहां एक ओर क्षेत्रवासी राहत महसूस कर रहे हैं तो वहीं कस्बे के फौजावाली-अमरपुरा, नई कोठी व हाऊसिंग बोर्ड समेत आसपास के नागरिकों के लिए वार्ड नं. 4 स्थित ईटली वाली ढ़ाणी के लोगों के लिए यह बारिश पुन: परेशानी का सबब लेकर आई है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/alwar/--sawan-like-rain-in-ashadh/article-12636"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/qq8.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>कोटपूतली।</strong> भीषण गर्मी के मौसम के बीच आई बारिश से जहां एक ओर क्षेत्रवासी राहत महसूस कर रहे हैं तो वहीं कस्बे के फौजावाली-अमरपुरा, नई कोठी व हाऊसिंग बोर्ड समेत आसपास के नागरिकों के लिए वार्ड नं. 4 स्थित ईटली वाली ढ़ाणी के लोगों के लिए यह बारिश पुन: परेशानी का सबब लेकर आई है। मौसम की पहली ही बारिश में पानी से लबालब हुआ ईटली वाला जोहड़ अब स्थानीय नागरिकों के लिए नासूर बन चुका है। जिसने उनके जीवन को नरक बना दिया है। शनिवार व रविवार को हुई बारिश से जोहड़ शहर के गंदे पानी से एक बार फिर लबालब होकर गंदा पानी उक्त आम रास्तों पर जमा हो चुका है। जिससे स्थानीय नागरिकों को आवागमन के साथ-साथ गंदे पानी से उठने वाली दुर्गन्ध के कारण लोगों का जीवन दूभर हो गया है। राजमार्ग के सिक्स लेन विस्तारीकरण के बाद उभरी इस समस्या का स्थाई समाधान तमाम प्रयासों के बावजूद भी नहीं निकल पा रहा है। शहर के बीचों बीच से राजमार्ग के निकलने के बाद पानी का ढलान उक्त क्षेत्र में होने के कारण लगभग आधे शहर का गंदा पानी ईटली वाले जोहड़ में जमा होता है। जिसकी निकासी के लिए अभी तक किए गए सभी प्रयास विफल हुए है। स्थानीय नागरिकों ने क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ राज्य व केन्द्र सरकार तक गुहार लगाई है। लेकिन फिर भी स्थानीय समाधान ना होने के कारण हजारों लोगों को प्रतिदिन परेशानी से दो चार होना पड़ रहा है। क्षेत्रीय विधायक व गृह राज्यमंत्री राजेन्द्र सिंह यादव के प्रयासों से राज्य सरकार द्वारा अतिरिक्त फण्ड भी जारी किया गया था। जिससे नगर पालिका मंडल कोटपूतली द्वारा करोड़ों रुपयों की लागत से पाईप लाइन बिछाकर व मोटर लगाकर समस्या के समाधान के प्रयास किए गए। परन्तु ओवरफ्लो जल भराव व तकनीकी समस्याओं की वजह से इस समस्या का कोई समाधान नहीं निकला एवं उक्त परियोजना विफल सिद्ध हुई। ईटली वाले जोहड़ की समस्या का स्थाई समाधान केवल कस्बे में सीवरेज लाईन का निर्माण ही है। कोटपूतली के लिए सीवरेज लाईन को राज्य सरकार द्वारा हाल ही के बजट में स्वीकृत भी किया जा चुका है, लेकिन दो चरणों में बनने वाली सीवरेज लाईन को पहले मुख्य कस्बे की ओर बनाया जाएगा। जिसका कार्य शुरू होने में भी काफी वक्त लग सकता है। ऐसे में द्वितीय चरण का काम कब शुरू होगा यह तो वक्त ही बताएगा। सीवरेज लाईन के द्वारा ईटली के जोहड़ के पानी की निकासी में वर्षों का वक्त लग सकता है।</p>
<p><br /><span style="color:#008000;"><strong>बारिश से किसानों से खिले चेहरे, गर्मी से राहत</strong></span><br /><strong> प्रागपुरा।</strong> कस्बे सहित आसपास गांवों में शनिवार से शुरू हुआ बारिश का दौर रविवार को रूक रूककर दिनभर जारी रहा। लगातार बारिश होने से किसानों के चेहरे खिल उठे और भीषण गर्मी से परेशान लोगों ने राहत महसूस की। रविवार को लगातार 4 घंटे मध्यम गति से हुई बारिश ने सावन मास का नजारा पेश किया। बारिश के बाद किसानों ने खेतों में पहुंचकर फसल बुआई की तैयारी शुरु कर दी। शनिवार व रविवार को दो दिनों में 50 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई। जानकारी देते हुए पावटा वर्षा मापी केन्द्र प्रभारी सुनील कुमार ने बताया कि शनिवार को 37 एमएम व रविवार को 13 एमएम बारिश हुई। इधर पावटा प्रागपुरा नगर पालिका प्रशासन ने बारिश से पूर्व नालों की सफाई नहीं करवा पाने व कई मोहल्लों में बारिश का पानी भर जाने से आमजन को तकलीफ हुई। इसी प्रकार राष्टÑीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा राजमार्ग के दोनों किनारों पर बने नालों की सफाई नहीं करवा पाने से मुख्य राजमार्ग सहित सर्विस लेन में पानी भर गया। सर्विस लेन में पानी भरने से यहां कार्यरत दुकानदारों को विशेष असुविधा हुई।</p>
<p><span style="color:#008000;"><strong> नरैना में हुई35 एमएम बारिश</strong> </span><br />नरैना। श्री रामपुरा पंचायत के मोरुंदा ग्राम में पहली बरसात में ही जलमग्न हो गया। वहीं ठेकेदारों की भी पोल खुल गई। गांव में बनी सड़कों के ऊंचा नहीं होने के कारण घरों में पानी घुस गया। बिरधीचंद ने बताया कि गांव में पानी की निकासी नहीं होने के कारण बारिश का पानी घरों में घुस जाता है। जिसके चलते ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। फुलेरा विधायक व सांभर एसडीएम को पत्र लिखकर पानी निकासी की मांग की थी परंतु आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। सांभरलेक तहसीलदार हरिसिंह राव ने बताया कि रविवार सुबह से शाम 5:00 बजे तक सांभरलेक में 35, फुलेरा में 48 और नरैना में 35 एमएम  बारिश दर्ज की गई है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अलवर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Jun 2022 14:27:33 +0530</pubDate>
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