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                <title>sowing - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>खेतों में पहुंचा चंबल का अमृत, खिलखिलाने लगी फसलें</title>
                                    <description><![CDATA[वर्तमान  में गेहूं की बुवाई का दौर शुरू हो चुका है। ऐसे में किसानों को सिंचाई के लिए पानी की अधिक आवश्यकता महसूस होने लगी है। किसानों की मांग को देखते हुए दोनों में पूरी क्षमता से जलप्रवाह किया जा रहा है। 
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-nectar-of-chambal-reached-the-fields--the-crops-started-blooming/article-29965"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/kheto-mei-pahucha-chambal-ka-amrit,-khilkhilane-lagi-faslei...kota-news-17.11.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। गेहूं फसल की बुवाई का दौर शुरू होने के साथ ही सिंचाई के लिए नहरी पानी की मांग बढ़ने लगी है। कोटा, बारां, बूंदी व मध्यप्रदेश के किसानों की  मांग आने के बाद कोटा बैराज की दायीं व बायीं नहर में पूरी क्षमता से जलप्रवाह किया जा रहा है। इधर राणाप्रताप सागर और जवाहर सागर बांध से विद्युत उत्पादन कर नहरों के लिए पानी छोड़ा जा रहा है ताकि चंबल के बांधों का लेवल बरकरार रखा जा सका। कोटा बैराज की दायीं नहर से कोटा, बारां जिले के अलावा मध्यप्रदेश के कई गांवों के खेतों में सिंचाई होती है, जबकि बायीं नहर से बूंदी जिले के गांवों को सिंचाई सुविधा मिलती है। इस बार मानसून की मेहरबानी से चंबल नदी के चारों बांध लबालब भरे हुए हैं। इस कारण इस साल रबी फसल के लिए किसानों को भरपूर पानी उपलब्ध कराया जाएगा।  </p>
<p><strong>दायीं में 6300 व बायीं में 1500 क्यूसेक</strong><br />बैराज की दायीं नहर से कोटा जिला व बारां जिला सहित मध्यप्रदेश के सैंकड़ों गांवों के खेत सिंचित होते हैं। इस कारण नहर की जलप्रवाह क्षमता बायीं नहर से ज्यादा है। किसानों ने सरसों की बुवाई पहले ही कर दी थी। वर्तमान  में गेहूं की बुवाई का दौर शुरू हो चुका है। ऐसे में किसानों को सिंचाई के लिए पानी की अधिक आवश्यकता महसूस होने लगी है। किसानों की मांग को देखते हुए दोनों में पूरी क्षमता से जलप्रवाह किया जा रहा है। दायीं नहर में 6300 और बायीं नहर में 1500 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।   </p>
<p><strong>वितरिकाओं में भी दौड़ रहा पानी</strong><br />इटावा क्षेत्र में स्थित पार्वती हेड के माध्यम से मध्यप्रदेश के किसानों के लिए पानी छोड़ा जाता है। पार्वती हेड से जुडेÞ इटावा, अयाना सहित विभिन्न क्षेत्रों के खेतों में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। अब मध्यप्रदेश के किसानों ने पानी आवश्यकता जताई है। इस कारण दायीं नहर में पूरी क्षमता से जलप्रवाह किया जा रहा है। वर्तमान में कोटा व बारां जिला की वितरिकाओं में भी पानी छोड़ दिया गया है। इस कारण अब सैंकड़ों गांवों के खेतों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होने लगा है।</p>
<p><strong>बुवाई कार्य को मिली गति</strong><br />सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होने के बाद फसलों में भी रंगत आने लगी है। मौसम अनुकूल होने से बुवाई कार्य तेज हो गया है। गेहूं व सरसों के लिए बढ़ती सर्दी फायदेमंद रहती है। ऐसे में कुछ दिनों से फसल बेहतर रूप से विकसित होने लगी है। कई किसान अभी बुवाई कार्य में भी जुटे हुए हैं। जिन किसानों के पास सिंचाई के अच्छे बंदोबस्त नहीं है पानी की कमी है वे किसान सरसों की पैदावार में रुझान दिखा रहे हैं। क्योंकि सरसों को पानी की जरूरत कम रहती है। जबकि गेहूं को पानी अधिक चाहिए। ऐसे में सिंचाई की दृष्टि से सरसों को तवज्जों अधिक दी जा रही है।</p>
<p><strong>गत दिनों हुई बारिश से फायदा</strong><br />हर साल गेहूं व सरसों की सिंचाई में किसानों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है, लेकिन इस बार किसानों के सामने ऐसी समस्या नहीं है। लंबे दौर तक चली बारिश से सरसों व गेहूं की पैदावार अच्छी होगी। बांध भी लबालब भरे हुए हैं। ऐसे में सिंचाई की विशेष समस्या नहीं है। दीपावली पहले तक बारिश का दौर चल रहा था, लेकिन अब तापमान भी कम हो गया है और बारिश भी नहीं है। मौसम अनुकूल होने से बुवाई कार्य ने गति पकड़ ली है। </p>
<p><strong>पूरी क्षमता से छोड़ा जा रहा है पानी</strong><br /> रबी फसलों की सिंचाई के लिए दायीं व बायीं नहर में जलप्रवाह किया जा रहा है। मध्यप्रदेश के किसानों की मांग आने के बाद से दोनों नहरों में पूरी क्षमता से पानी छोड़ा जा रहा है। अब तो नहरों से जुड़ी वितरिकाओं में भी पानी छोड़ दिया गया है। इस बार पानी की कमी नहीं है।<br /><strong>- लखनलाल गुप्ता, अधीक्षण अभियंता, सीएडी कोटा</strong></p>
<p><strong>बम्पर पैदावार की उम्मीद </strong><br /> जिले में रबी की फसलों की बुवाई का कार्य चल रहा है। नहरों व वितरिकाओं के माध्यम से खेतों में पानी पहुंंचने लगा है। जिले में गेहूं व सरसों की रकबा अधिक है। पानी की पर्याप्त उपलब्धता और मौसम अनुकूल होने से फसलों की बम्पर पैदावार की उम्मीद है। <br /><strong>-रामलाल, पर्यवेक्षक, कृषि विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Nov 2022 16:32:42 +0530</pubDate>
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                <title>बरसात से खरीफ की फसल बुवाई का इंतजार खत्म </title>
                                    <description><![CDATA[उनियारा कस्बे सहित समूचे क्षेत्र में बीती रात्रि को झमाझम बरसात हुई नहीं, गुरुवार को दोपहर बाद करीब 1 घंटे तक बरसात होने से मौसम सुहाना हो गया। बरसात के मारे किसानों के खेतों में खरीफ की फसल की बुवाई के लिए ट्रैक्टर नहीं चल सके, जिससे उन्हें खरीद के फसल की बुवाई का इंतजार है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/sawai-madhopur/the-wait-for-sowing-of-kharif-crop-is-over-due/article-13353"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/t-2.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>उनियारा।</strong> उनियारा कस्बे सहित समूचे क्षेत्र में बीती रात्रि को झमाझम बरसात हुई नहीं, गुरुवार को दोपहर बाद करीब 1 घंटे तक बरसात होने से मौसम सुहाना हो गया। बरसात के मारे किसानों के खेतों में खरीफ की फसल की बुवाई के लिए ट्रैक्टर नहीं चल सके, जिससे उन्हें खरीद के फसल की बुवाई का इंतजार है। इधर बरसात के दौरान विद्युत गुल होने से लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा।</p>
<p>लोगों का कहना है कि बरसात पूर्व मेंटेनेंस के नाम पर विद्युत कटौती किए जाने के बावजूद भी बरसात शुरू होते ही विद्युत गुल हो जाती है जिससे बरसात के दौरान कमरों में से निकलने वाली गर्मी और उमस से उन्हें खासा परेशान होना पड़ता है। वही बरसात के मारे गुरुवार को सवेरे पेयजल सप्लाई भी देरी से शुरू हुई। इधर बाढ़ नियंत्रण कक्ष से मिली जानकारी के अनुसार उनियारा के गलवा बांध में 24 एमएम बरसात पिछले 24 घंटों के दौरान दर्ज की गई जबकि सायं 13 एमएम बरसात दर्ज की गई है। गलवा बांध में वर्तमान में 12 फीट पानी की आवक बनी हुई है। <br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सवाई माधोपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Jul 2022 11:39:20 +0530</pubDate>
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                <title>बरसात से खिले किसानों के चेहरे, बाजरे की बिजाई में जुटे</title>
                                    <description><![CDATA[कस्बे सड्डहत ग्रामीण अंचल में रड्डववार को इंद्र देव मेहरबान रहे। यहां करीब ढेढ़ घण्टे तक जमकर बरसात हुई। इस दौरान शहर के ड्डनचले इलाकों में पानी भर गया। सड़के दड्डरया बन गई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bikaner/the-faces-of-farmers-blossomed-due-to-rain--engaged-in-sowing-of-millet/article-12639"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/bik.jpg" alt=""></a><br /><p>श्रीडूंगरगढ़। कस्बे सहित ग्रामीण अंचल में रविवार को इंद्र देव मेहरबान रहे। यहां करीब ढेढ़ घण्टे तक जमकर बरसात हुई। इस दौरान शहर के निचले इलाकों में पानी भर गया। सड़के दरिया बन गई। लोगों ने सड़कों पर भरे पानी के स्थायी समाधान के लिए पालिका की सफाई नीति पर विरोध दर्ज किया। यहां गांधी पार्क, पोस्ट आॅफि स रोड पर करीब तीन फीट तक पानी भर गया। अंचल में हुई 10 से 12 इंच बरसात से बुजुर्ग बच्चे सहित हर वर्ग में उत्साह का संचार हुआ। किसानों ने हल सम्भाल लिए और बाजरे के बीजान प्रारंभ कर दिया है। लोढेरा, उदरासर, लिखमादेसर, आडसर, बिग्गा, उपनी, श्रीडूंगरगढ़ की रोही में बारानी किसानों ने बाजरा बिजाई शुरू कर दी है। वहीं कृषि कुओं पर किसानों ने ग्वार व बाजरा की बिजाई शुरू कर दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बीकानेर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Jun 2022 14:59:10 +0530</pubDate>
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