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                <title>Air Pollution - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>कांग्रेस ने कहा, एनसीएपी को कानूनी रूप से और सशक्त बनाकर निधि बढ़ाने की जरूरत</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने NCAP को कानूनी दर्जा देने और इसका बजट बढ़ाकर 25,000 करोड़ करने की मांग की। उन्होंने कहा कि देश के 1,787 प्रदूषित शहरों में स्वच्छ हवा सुनिश्चित करना अनिवार्य है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-said-there-is-a-need-to-increase-funds-by/article-139161"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/jairam-ramesh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि वायु प्रदूषण राष्ट्रीय समस्या बन गई है इसलिए इसकी निगरानी के लिए बने राष्ट्रीय स्वच्छ हवा कार्यक्रम (एनसीएपी) का कानूनी आधार और मजबूत कर अधिक वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने के साथ ही इसका तत्काल पुनर्गठन किया जाना चाहिए।</p>
<p>कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने रविवार को यहां एक बयान में एनसीएपी की हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि सैटेलाइट डेटा आधारित इस अध्ययन के अनुसार देश के 4,041 नगरों में से 1,787 शहर बीते पाँच वर्षों में लगातार राष्ट्रीय मानकों से अधिक प्रदूषित रहे है। इसके बावजूद एनसीएपी के तहत केवल 130 शहरों को शामिल किया गया है, जो गंभीर रूप से प्रदूषित शहरों का महज चार प्रतिशत है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि एनसीएपी को''नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम'' के रूप में प्रचारित किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता में यह एक 'नोशनल क्लीन एयर प्रोग्राम' बनकर रह गया है। इससे जुड़े 130 शहरों में से 28 शहरों में आज तक वायु गुणवत्ता मापन के निगरानी स्टेशन नहीं  हैं और जहाँ हैं वहाँ भी प्रदूषण का स्तर बेहद ङ्क्षचताजनक है।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने एनसीएपी कानूनी दर्जा देने की मांग की और कहा कि इसके प्रभावी क्रियान्वयन की सख्त व्यवस्था के साथ ही एनसीएपी की मौजूदा फंडिंग व्यवस्था को बढ़ाया जाना चाहिए। उनका कहना था कि वर्तमान में इसके लिए लगभग 10,500 करोड़ रुपये के बजट को 131 शहरों में बाँटा जा रहा है, जबकि वास्तविक जरूरत इससे 10 से 20 गुना अधिक की है। उन्होंने यह भी कहा कि एनसीएपी को कम से कम 25,000 करोड़ रुपये देकर देश के 1,000 सबसे अधिक प्रदूषित शहरों और कस्बों वह इसके दायरे में लाया जाना चाहिए।</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा, एनसीएपी का प्रदर्शन मापने का पैमाना पीएम 2.5 स्तर होना चाहिए और इसका फोकस ठोस ईंधन के जलने, वाहन उत्सर्जन और औद्योगिक प्रदूषण जैसे प्रमुख स्रोतों पर केंद्रित किया जाना चाहिए। कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में इस साल के अंत तक एफजीडी अनिवार्य रूप से लगाने, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की स्वतंत्रता बनाये रखने और मोदी सरकार में बने जन विरोधी पर्यावरण कानून संशोधनों को वापस लेने की भी मांग दोहराई।</p>
<p>उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार संसद में वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य प्रभावों को बार-बार कमतर दिखाने की कोशिश कर अपनी अक्षमता और लापरवाही को छिपाने का प्रयास करती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 11 Jan 2026 17:41:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, दिल्ली में अब केवल बीएस-4 और उससे ऊपर के मानक वाले वाहन ही चल सकेंगे</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दिल्ली में केवल बीएस-4 या उससे ऊपर मानक वाले वाहन ही चल सकेंगे। बीएस-3 व पुराने मानक वाले वाहनों पर कार्रवाई होगी, जबकि बीएस-4 और नए वाहनों को तय आयु सीमा के बाद भी अनुमति रहेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-decision-of-the-supreme-court-now-only-vehicles-of/article-136318"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/delhi-bs4-vechala.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को स्पष्ट किया कि दिल्ली में केवल ऐसे वाहनों को ही चलने की अनुमति दी जाएगी जो बीएस-4 उत्सर्जन मानक या उससे ऊपर की श्रेणी के हैं। न्यायालय के इस नए स्पष्टीकरण के बाद अब अधिकारी उन पुराने वाहनों के खिलाफ कार्रवाई कर सकेंगे जो बीएस-चार मानकों को पूरा नहीं करते हैं। वहीं बीएस-4 या  नये वाहनों  को उनकी समय सीमा पूरी होने के  बावजूद चलाने की अनुमति है।</p>
<p>न्यायालय का यह नवीनतम आदेश, उसके गत 12 अगस्त के उस पिछले आदेश में संशोधन करता है, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में दस साल से अधिक पुराने डीजल वाहनों और पंद्रह साल से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करने पर रोक लगा दी गई थी।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल पांचोली की पीठ ने दिल्ली सरकार की उस याचिका पर यह स्पष्टीकरण जारी किया, जिसमें शहर में बिगड़ती वायु गुणवत्ता को देखते हुए पुराने वाहनों पर कार्रवाई की अनुमति मांगी गई थी।</p>
<p>दिल्ली सरकार की ओर से पेश अपर सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने न्यायालय से आग्रह किया कि 12 अगस्त के आदेश में संशोधन किया जाए ताकि बीएस-3 तक के उत्सर्जन मानकों वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। उन्होंने दलील दी कि पुराने वाहनों के उत्सर्जन मानक बहुत खराब हैं और वे प्रदूषण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। वायु प्रदूषण मामले में न्याय मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने भी इस दलील का समर्थन किया।</p>
<p>पीठ ने दलीलों को दर्ज करते हुए निर्देश दिया कि 12 अगस्त के आदेश को उस सीमा तक संशोधित किया जाता है कि उन वाहन मालिकों के खिलाफ कोई कठोर कदम नहीं उठाया जाएगा जो बीएस-4 और उससे नए हैं, भले ही वे डीजल इंजन के मामले में दस साल और पेट्रोल इंजन के मामले में पंद्रह साल की सीमा पार कर चुके हों।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि, 2015 में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए दिल्ली-एनसीआर में दस साल से अधिक पुराने डीजल और पंद्रह साल से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों के चलने पर रोक लगाने का निर्देश दिया था, जिसे 2018 में उच्चतम न्यायालय ने बरकरार रखा था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Dec 2025 19:39:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>प्रदूषण के कारकों के खात्मे की जरूरत</title>
                                    <description><![CDATA[आज देश गंभीर वायु प्रदूषण के दौर से गुजर रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/need-to-eliminate-factors-of-pollution/article-135296"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(14).png" alt=""></a><br /><p>आज देश गंभीर वायु प्रदूषण के दौर से गुजर रहा है। इसका दुष्प्रभाव भयावह स्तर पर स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। वायु प्रदूषण प्रमुख पर्यावरणीय समस्याओं में से एक है, जिसका प्राणी जगत पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। सच कहें, तो वायु प्रदूषण के लिए मानवजनित स्रोत ही वे अहम तत्व हैं, जो बाहरी तत्वों से मिलकर वायु की गुणवत्ता में कमी लाते हैं, जो मानव जाति और जीव-जंतुओं के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। इसी जानलेवा हवा में कार्बन डाई आक्साइड, कार्बन मोनो आक्साइड, सल्फर डाई आक्साइड, नाइट्रोजन आक्साइड, क्लोरीन, सीसा, अमोनिया, कैडमियम, धूल आदि मानवजनित वायु प्रदूषक तत्वों की अहम भूमिका होती है। हमारा देश दुनिया के प्रदूषित देशों की सूची में शामिल है। यहां हर साल तकरीबन 20 लाख से ज्यादा लोग प्रदूषित हवा के चलते मौत के मुंह में चले जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार आज 93 फीसदी बच्चे प्रदूषित हवा में सांस लेने को मजबूर हैं।</p>
<p><strong>विश्व स्वास्थ्य संगठन : </strong></p>
<p>वायु प्रदूषण में सर्वाधिक योगदान जीवाश्म ईंधन और बायोमास के जलाने से होता है, जो परिवहन, ऊर्जा उत्पादन, विनिर्माण और कृषि क्षेत्रों में होते हैं। इन गतिविधियों से निकलने वाली गैसें जैसे कार्बन मोनोक्साइड, कार्बन आक्साइड, नाइट्रोजन डाय आक्साइड तथा सूक्ष्म कण पार्टिकुलेट मैटर यानी पी एम वायुमंडल को प्रदूषित करते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की मानें तो गरीब और मध्यम आय वर्ग के देश घरेलू और बाहरी दोनों तरह के वायु प्रदूषण से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। भारत जैसे देश में अधिकतर जनसंख्या राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानकों से ज्यादा प्रदूषित हवा में सांस लेने को मजबूर है। वैज्ञानिक विश्लेषणों से यह साबित हो चुका है कि कोयला और परिवहन उत्सर्जन के दो प्रमुख स्रोत हैं। ये दोनों वायु प्रदूषण के सबसे खतरनाक रूपों में बड़े भूभाग को प्रभावित करते हैं। यह भी कि वायु प्रदूषण से जुड़ी होने वाली स्वास्थ्य समस्यायें अक्सर एयरोसोल से जुड़ी होती हैं। एयरोसोल हवा में निलंबित सूक्ष्म ठोस या तरल लवण होते हैं, जो अक्सर दिखाई नहीं देते।</p>
<p><strong>स्वास्थ्य पर प्रभाव : </strong></p>
<p>इनका निर्माण प्राकृतिक और मानव निर्मित दोनों स्रोतों से होता है। इनका आकार कुछ नैनोमीटर से लेकर कई माइक्रोमीटर तक हो सकता है। इसे कणों के आधार पर पी एम 2.5 आदि नामों से जाना जाता है। एयरोसोल में यह धुंआ, कोहरा और औद्योगिक प्रदूषण कण हैं। ये कण वायुमंडल में निलंबित धूल, समुद्री नमक, ज्वालामुखी की राख, धुंआ, पेड़ों से निकलने वाला रसायन और विभिन्न प्रकार के उत्सर्जन जैसे जीवाश्म ईंधन जलने यथा कारों और कारखानों से निकलने वाला प्रदूषण और औद्योगिक प्रदूषण आदि रूपों में पाया जाता है। यह जलवायु, मौसम और स्वास्थ्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है। एयरोसोल में मौजूद विषाक्त पदार्थ शरीर में विषाक्तता सम्बंधित प्रतिक्रियाओं को जन्म देते हैं। इसके चलते श्वसन सम्बंधी, लीवर,तंत्रिका तंत्र,आंख और त्वचा की समस्या पैदा होती है। इसके लम्बे समय तक संपर्क में रहने से फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। इसके प्रभाव से पौधे और जानवर भी अछूते नहीं रह गये हैं।</p>
<p><strong>शरीर को नुकसान :</strong></p>
<p>एयरोसोल के कण फेफड़ों में जलन पैदा कर सकते हैं और अत्याधिक सान्द्रता के कारण श्वसन तंत्र को अवरुद्ध भी कर सकते हैं। यहां तक कि यह मृत्यु का कारण भी बन सकते हैं। इसके सूक्ष्म कणों से होने वाले वायु प्रदूषण से हृदय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। वायु प्रदूषण आपके फेफड़े, दिल, दिमाग ही नहीं, पूरे शरीर को नुकसान पहुंचाता है। शरीर का कोई अंग ऐसा नहीं है, जो इसके प्रभाव से अछूता हो। इस बाबत देश के 80 से ज्यादा पद्म पुरस्कार प्राप्त डाक्टरों ने चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि भारत में सभी श्वसन संबंधी मौतों में से एक तिहाई से अधिक वायु गुणवत्ता से जुड़ी हैं। इसके अलावा स्ट्रोक से होने वाली लगभग 40 फीसदी मौतों के लिए वायु प्रदूषण जिम्मेदार है। जिन परिवारों के पास एयर प्यूरीफायर नहीं है, उनको रोजाना गीले कपड़े से सफाई करना, अगरबत्ती, धूपवत्ती, कपूर और मास्क्यूटो कौइल से बचना चाहिए।</p>
<p><strong>असुरक्षित हवा :</strong></p>
<p>हालात की भयावहता का सबूत यह है कि देश की 70 फीसदी से ज्यादा आबादी रोजाना असुरक्षित हवा में सांस ले रही है। प्रदूषण का असर अब दमा, हृदय रोगों से भी कहीं आगे बढ़ गया है। अब यह कैंसर और मेटाबोलिक विकार को भी पार कर गया है। अब वातावरण में मानक से भी ढ़ाई गुणा प्रदूषक कण मौजूद हैं। यह बेहद खतरनाक स्थिति है। हालात की गंभीरता का प्रमाण यह है कि डाक्टर दिल्ली वालों को कुछ दिनों के लिए पहाड़ों पर जाने की सलाह दे रहे हैं। विज्ञान एवं पर्यावरण केन्द्र की मानें तो दिल्ली में हानिकारक जहरीली गैसों यथा नाइट्रोजन डाय आक्साइड और कार्बन मोनोक्साइड का स्तर लगातार बढ़ रहा है। राजधानी के प्रदूषण में लगभग 51.5 फीसदी योगदान वाहनों के उत्सर्जन का है। इसके बाद आवासीय उत्सर्जन और दूसरे कारक जिम्मेदार हैं। राजधानी में मुख्य रूप में प्रदूषण वाहनों और दहन स्रोतों से हो रहा है। हकीकत में दिल्ली के तकरीबन 11 से अधिक स्थानों पर एक्यूआई 400 के पार है। वायु प्रदूषण अब एक गंभीर समस्या का रूप ले चुका है। अब इसका दीर्घकालिक उपाय ढूंढना जरूरी हो गया है। सुप्रीम कोर्ट का यह कहना कि कि मामला बेहद गंभीर है।</p>
<p><strong>-ज्ञानेन्द्र रावत</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Dec 2025 12:26:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>वायु प्रदूषण : धुएं-धूल की मार, आंखें हुई लाचार, एलर्जी जैसी समस्याएं, सर्दी के मौसम में वायु प्रदूषण के कण हवा में</title>
                                    <description><![CDATA[बच्चों और बुजुर्गो को सर्द मौसम में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/air-pollution--smoke-and-dust--eyes-become-vulnerable--and-problems-like-allergies--air-pollution-particles-in-the-air-during-the-winter-season/article-132514"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/500-px)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा ।  शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण ने आमजन की सेहत पर गंभीर प्रभाव डालना शुरू कर दिया है। पिछले एक सप्ताह में विशेष तौर पर आंखों से जुड़े मरीजों की संख्या में 20-30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकारी अस्पतालों से लेकर निजी नेत्र चिकित्सालयों तक रोजाना ऐसे दर्जनों मरीज पहुंच रहे हैं, जिन्हें आंखों में जलन, लालिमा, लगातार पानी बहना, सूखापन और एलर्जी जैसी समस्याएं हो रही हैं। दिवाली के बाद से ही शहर में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है। सर्दी के मौसम में वायु प्रदूषण के कण हवा में तैरते रहते हैं। जिससे वायु दिनभर प्रदूषित बनी रहती है। इसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर हो रहा है। प्रदूषण नियंत्रण मंडल के आंकड़ों के अनुसार शहर में शुक्रवार को एक्यूआई यानी वायु गुणवत्ता सूचकांक 176 दर्ज किया गया है। यानी यहां की हवा जहरीली हो चुकी है। </p>
<p><strong>प्रदूषण आंखों पर ऐसे डालता है असर</strong><br />नेत्र विशेषज्ञों के अनुसार सर्दी के मौसम में हवा में मौजूद पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे छोटे कण बहुत खतरनाक होते हैं। यह कण इतने छोटे होते हैं कि सीधे आंखों की सतह तक पहुंचकर कंजंक्टिवा और कॉर्निया पर जमा हो जाते हैं। इससे सूजन, खुजली, जलन और पानी आने जैसे समस्या शुरू हो जाती है। वहीं लंबे समय तक ऐसे माहौल में रहने से ड्राई आई सिंड्रोम, एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस और यहां तक की आंखों के इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है। डॉक्टरों का मानना है कि बच्चों और बुजुर्गों में यह असर ज्यादा दिखाई देता है, क्योंकि उनकी आंखें ज्यादा संवेदनशील होती है। इन दिनों बुजुर्ग और बच्चे आंखों की समस्या लेकर अस्पतालों में अधिक आ रहे हैं। इनकी संख्या में रोजाना इजाफा होता जा रहा है।</p>
<p><strong>धूल-धुएं की अधिक मात्रा बनी परेशानी</strong><br />शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पीएम 2.5 और पीएम 10 कणों की मात्रा सामान्य स्तर से अधिक दर्ज की जा रही है। ट्रैफिक का बढ़ता दबाव, निर्माण कार्यों की धूल और मौसम में बदलाव के चलते हवा में धूलकणों की मात्रा लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह महीन कण सीधे आंखों की ऊपरी परत को प्रभावित करते हैं, जिससे संक्रमण और कॉर्निया को नुकसान तक हो सकता है। इस माहौल में जहां लोगों में सांस संबंधी समस्याएं भी बढ़ जाती है, वहीं बड़ी संख्या में लोग आंखों में जलन, चुभन और पानी आने जैसी दिक्कतों से भी जूझने लगते है। इस कारण बच्चों और बुजुर्गो को सर्द मौसम में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।</p>
<p><strong>आंखों को हेल्दी रखने के लिए अपनाएं यह उपाय</strong><br />- प्रदूषण में जब भी आप बाहर निकले अपनी आंखों को धूल और धुएं से बचाए। इसके लिए सनग्लासेस या बड़े साइज के काले चश्मे यूज करें। जिससे हवा सीधे आंखों में न जाए और एलर्जी और जलन से बचाव हो।<br />- बाहर फैली प्रदूषित हवा आंखों की नमी को कम कर देती है। जिससे आंखों में जलन और खुजली जैसी समस्याएं हो जाती है। इससे बचने के लिए आप दिन में 2 से 3 बार लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप आंखों में डालें।<br />- अगर पॉल्यूशन के समय में आपको भी आंखों में जलन और सूजन महसूस हो तो आपको आंखों को दिन में दो बार ठंडे पानी से धोना चाहिए. इसके अलावा आप आंखों पर आईस पैक सिकाई भी कर सकते हैं। <br />- कई बार ज्यादा धुएं की वजह से आंखों में जलन बढ़ जाती है और चुभन की भी शिकायत रहती है। ऐसे में लोग आंखों को रगड़ने लगते हैं। ऐसे में कोशिश करें कि आंखों को रगड़े नहीं बल्कि उन्हें पानी से धो लें।</p>
<p><strong>एक्यूआई यह देता है संकेत</strong><br />अच्छा यानि कोई दिक्कत नहीं - 0-50 <br />संतोषजनक  -  51-100<br />बाहर जाने से बचें - 101-200<br />श्वसन के मरीजों को तकलीफ - 201-300<br />लम्बे बीमार रोगियों को दिक्कत - 301-400<br />बाहर बिलकुल नहीं निकलें - 401-500</p>
<p>प्रशासन निर्माण स्थलों पर पानी का छिड़काव करवाएं, धूल नियंत्रण के नियमों का पालन सुनिश्चित करें और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर कड़ी कार्रवाई करें। तभी शहर की हवा और आंखों की सेहत दोनों सुधर पाएंगी। <br /><strong>- राजू कुमार, पर्यावरणविद</strong></p>
<p>बच्चों और बुजुर्गों में आंखों की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। धूल और प्रदूषित हवा के लगातार संपर्क में रहने से इन वर्गों में आंखों की समस्या तेजी से बढ़ रही है। बाहर निकलते समय चश्मे का उपयोग करें, आंखों को बार-बार धोएं और संक्रमण बढ़ने पर तुरंत चिकित्सा लें।<br /><strong>- डॉ. सुधीर गुप्ता, नेत्र रोग विशेषज्ञ  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Nov 2025 15:21:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर आप ने व्यक्त की चिंता : एक्यूआई इतना अधिक कभी नहीं रहा, आतिशी ने कहा- भाजपा सरकार के चारों इंजन लगातार छोड़ रहे हैं धुआं</title>
                                    <description><![CDATA[आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि दिल्ली में मई के महीने में इतना प्रदूषण कभी नहीं रहा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/aap-expressed-concern-over-the-increasing-pollution-in-delhi-aqi/article-114258"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/atishi.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि दिल्ली में मई के महीने में इतना प्रदूषण कभी नहीं रहा। दिल्ली विधानसभा में नेता विपक्ष आतिशी ने एक्स पर कहा कि मई में दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) इतना अधिक कभी नहीं रहा।</p>
<p>आतिशी ने कहा कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अपने डाटा से पता चलता है कि 2022-2024 तक 15 मई को एक्यूआई कभी भी 243 से अधिक नहीं रहा। आज एक्यूआई 500 पर है। क्या दिल्ली में खराब वायु प्रदूषण की जिम्मेदारी भाजपा लेगी? दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंद्र सिंह सिरसा कहाँ हैं? </p>
<p>आप के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने कहा कि भाजपा की चार इंजन वाली सरकार के चारों इंजन लगातार दिल्ली में धुंआ छोड़ रहे हैं। दिल्ली में इस समय एक्यूआई 500 है। मतलब जहर! धूप दिखती नहीं, सांस ली नहीं जाती, आंखों में जलन, गले में खराश। उन्होंने कहा कि ना कोई योजना, ना कोई जवाबदेही, ना कोई आपात योजना। केवल भाषण। दिल्ली वालों को भाषण नहीं चाहिए। जुमले नहीं चाहिए।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 15 May 2025 17:16:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इन्फ्लुएंजा और वायु प्रदूषण कर रहा बच्चों-बुजुर्गों को बीमार, एसएमएस सहित अन्य अस्पतालों में मरीजों की भीड़</title>
                                    <description><![CDATA[डब्ल्यूएचओ लगातार बदल रहे इन्फ्लुएंजा वायरस से आगे रहने के लिए वैक्सीन फॉर्मूलेशन की निगरानी और अपडेट करता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/influenza-and-air-pollution-are-making-children-and-elderly-sick/article-101471"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/5554-(16)6.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। अध्ययनों से पता चला है कि वायु प्रदूषण न केवल व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करता है, बल्कि इससे मनुष्यों में इन्फ्लुएंजा वायरस के फैलने के अवसर बढ़ जाते हैं। इसके चलते क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज यानी सीओपीडी, खांसी, सांस और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों के रोगियों में इन्फ्लुएंजा जैसे वायरल संक्रमण होने की अधिक संभावना हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को इंफ्लुएंजा वायरस जैसे संक्रमण जल्दी चपेट में ले लेते हैं और इन दिनों सर्दियों के मौसम और वायु प्रदूषण के कारण ऐसे मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। इसलिए इस बीमारी से टीकाकरण के जरिए काफी हद तक बचा जा सकता है।</p>
<p><strong>क्यों जरूरी है टीकाकरण</strong><br />एसएमएस मेडिकल कॉलेज में सीनियर प्रोफेसर मेडिसिन डॉ. पुनीत सक्सैना ने बताया कि खराब वायु गुणवत्ता श्वसन प्रतिरक्षा को कमजोर करके स्वास्थ्य को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करती है। प्रदूषित हवा फ्लू के लक्षणों को बढ़ा सकती है, जिससे व्यक्ति को ज्यादा परेशानी महसूस हो सकती है। ऐसी स्थितियों में खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए इन्फ्लूएंजा के टीके सालाना लगवाना बचाव के लिए सबसे उपयुक्त उपाय है। इन्फ्लुएंजा वैक्सीन को हर साल डब्ल्यूएचओ की निगरानी में अपडेट किया जाता है, क्योंकि वायरस एंटीजेनिक परिवर्तनों द्वारा निरंतर स्वरूप बदलता रहता है। डब्ल्यूएचओ लगातार बदल रहे इन्फ्लुएंजा वायरस से आगे रहने के लिए वैक्सीन फॉर्मूलेशन की निगरानी और अपडेट करता है। </p>
<p><strong>रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार</strong><br />डॉ. सक्सैना ने बताया कि भारत में वर्तमान में जो सर्दियों का सीजन चल रहा है उसे लेकर इंफ्लुएंजा से बचाव के लिए नवीनतम टीके उपलब्ध है। ये टीके प्रतिरक्षा को बढ़ाते हैं। फ्लू का टीका प्रतिरक्षा प्रणाली को वायरस को पहचानने और उससे प्रभावी रूप से लड़ने के लिए तैयार करता है। रोग की गंभीरता कम करता है और यदि कोई व्यक्ति फ्लू से संक्रमित हो भी जाता है तो टीका लगवाने से रोग की गंभीरता का जोखिम कम हो सकता है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jan 2025 10:12:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वायु प्रदूषण से जीना हो रहा मुश्किल  </title>
                                    <description><![CDATA[ हालात की भयावहता का सबूत यह है कि प्रदूषण के मामले में हमारा देश और देश की राजधानी दिल्ली दुनिया में कीर्तिमान स्थापित कर चुकी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/it-is-becoming-difficult-to-live-due-to-air-pollution/article-99186"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/5554-(9)12.png" alt=""></a><br /><p>देश और देश की राजधानी दिल्ली से प्रदूषण का जहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। हालात की भयावहता का सबूत यह है कि प्रदूषण के मामले में हमारा देश और देश की राजधानी दिल्ली दुनिया में कीर्तिमान स्थापित कर चुकी है। वह चाहे पहाड़ हो या मैदानी इलाका, तराई का इलाका हो या देश का समुद्री तटीय इलाका, कोई भी प्रदूषण की मार से अछूता नहीं रहा है। देश में हवा अब इतनी प्रदूषित है, जिसकी वजह से सांस लेना भी दूभर हो गया है। देश की शीर्ष अदालत ने भी इस बाबत गंभीर चिंता व्यक्त की है। हालात इतने खराब हैं कि अगर उस माहौल में आपने सांस भी ले ली तो निश्चित मानिए कि आप गंभीर प्रदूषण से फेफड़े, हृदय, धमकियों में खून का थक्का जमने, ब्रेन स्ट्रोक, विटामिन डी के घटते स्तर से हृदय सम्बन्धी रोगों के जोखिम से बच नहीं  सकते। यही नहीं इससे मानसिक रोगों का खतरा भी बढ़ गया है।</p>
<p>स्कॉटलैंड की यूनिवर्सिटी आफ सेंट एण्ड्रयूज द्वारा किए शोध से यह खुलासा हुआ है कि वायु प्रदूषण से हवा में मौजूद दूषित कणों के दिमाग पर हमला करने से  छात्रों में पढ़ाई संबंधी परेशानियों और जीवन की चुनौतियों से निपटने की क्षमता लगातार कम हो रही है। जहरीली हवा हर साल देश में होने वाली करीब 15 लाख लोगों की जान ले रही है। इसके चलते इंसान की उम्र 11.9 साल कम हो गई है। मौसम में आ रहा बदलाव इसका अहम कारण है। इसके लिए इंसानी गतिविधियां ही प्रमुख रूप से जिम्मेंदार हैं, जो इंसानों पर ही भारी पड़ रही हैं। बढ़ते तापमान और वायु प्रदूषण पर समय रहते अंकुश नहीं लगाया गया तो इससे हर साल दुनिया में करीब तीन करोड़ लोग असमय मौत के मुंह में चले जाएंगे।</p>
<p>वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि ऐसे ही हालात रहे तो वार्षिक मृत्यु दर सदी के अंत तक अनियंत्रित हो सकती है और दुनिया की 20 फीसदी आबादी गंभीर स्वास्थ्य जोखिम का सामना करेगी। उत्तर भारत के शहरों में आवासीय इलाकों और परिवहन से सबसे अधिक प्रदूषण फैल रहा है, जबकि पश्चिमी भारत में उद्योग और ऊर्जा क्षेत्र प्रदूषण के लिए जिम्मेंदार है।  विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा पी एम 2.5 को लेकर जो मानक बनाया है, उसके अनुसार भारत की हवा 5 गुणा ज्यादा खराब है। इनमें परिवहन, घर, जंगलों की आग और उद्योगों में जलाए जाने  वाले जीवाश्म ईंधन और बायोमास की प्रमुख भूमिका है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि प्रत्येक क्यूबिक मीटर हवा में पी एम 2.5 में हर 10 माइक्रोग्राम की बढ़ोतरी से रोजाना मृत्यु दर में 1.42 फीसदी की वृद्धि हो रही है।</p>
<p>वायु प्रदूषण से मरने वालों में देश की राजधानी दिल्ली सर्वोच्च स्थान पर है। हकीकत में बढ़ता प्रदूषण जहां पर्यावरणीय चुनौतियों को और भयावह बना रहा है, वहीं आबादी के लिए स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ाने में भी अहम भूमिका निबाह रहा है। इसके बढ़ने से धुंध छाने, साफ  न दिखाई देने, सांस के रोगों, गले में खराश होने की  बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। वायु प्रदूषण अब नासूर बन गया है। यह अब किसी खास मौसम की नहीं, बल्कि साल भर रहने वाली स्थाई समस्या बन चुकी है। यदि प्रदूषण का वर्तमान स्तर बरकरार रहता है, तो इस आबादी की जीवन प्रत्याशा में ड्ब्ल्यू एच ओ के दिशा निर्देश के सापेक्ष औसतन आठ वर्ष व राष्ट्रीय मानक के सापेक्ष 4.5 वर्ष की कमी का खतरा है। यदि आप वायु प्रदूषण के बीच दो घंटे से अधिक समय भी रह लेते हैं तो इससे मस्तिष्क की फंक्शनल कनेक्टिविटी कम हो जाती है। अब तो यह साफ  हो गया है कि जिस तरह से वायु प्रदूषण का मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव पड़ता है, उसी तरह जंगल की आग से निकलने वाले धुंए का भी स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पड़ता है। सबसे जरूरी तो यह है कि लोगों को भी इस बात को लेकर सचेत रहना चाहिए कि वह किस तरह की हवा में सांस ले रहे हैं और वाहनों के धुंए जैसे नुकसानदायक वायु प्रदूषकों को कम करने के क्या उपाय किए जा रहे हैं या नहीं।</p>
<p>इस बाबत जागरूकता बेहद जरूरी है। साथ ही लोगों को इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि वह मोटर साईकिल से या पैदल जाते समय कम व्यस्त सड़क पर ही चलें। यह सावधानी हमें काफी हद तक राहत दिलाने में मददगार हो सकती है। इसमें वित्तीय संसाधनों की कमी और राजनीतिक दलों के आपसी टकराव तथा राज्य सरकारों के बीच समन्वय की कमी प्रमुख बाधा है, हमारे यहां अक्सर  खतरनाक स्तर पर पहुंच चुके वायु प्रदूषण पर अंकुश के लिए किए जाने वाले ग्रेप जैसे तात्कालिक आपात उपाय  केवल प्रदूषण के बढ़ते स्तर को कम कर सकते हैं। निष्कर्ष यह कि वायु प्रदूषण मानव स्वास्थ्य के लिए अब सबसे बड़ा पर्यावरणीय खतरा बन चुका है। नीति निर्माताओं द्वारा इस मामले पर व्यापक स्तर पर विचार करना बेहद जरूरी है तभी कुछ बदलाव की उम्मीद संभव है। <br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/opinion/it-is-becoming-difficult-to-live-due-to-air-pollution/article-99186</link>
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                <pubDate>Tue, 31 Dec 2024 11:48:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>सड़क पर सुबह की सैर, फिर नहीं सेहत की खैर!</title>
                                    <description><![CDATA[अस्थमा व सीओपीडी के अटैक का खतरा अधिक। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/morning-walk-on-the-road--then-there-is-no-good-for-health/article-99085"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/5554-(1)34.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। बेहतर स्वास्थ्य के लिए अगर आप मुख्य मार्गों और सड़क किनारे मॉर्निंग वॉक कर रहे हैं, तो ठहरिए! यह मॉर्निंग वॉक आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है। धुंध और कोहरे के कारण में वायु प्रदूषण की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। सड़कों पर धुंआ और धूल सुबह की सैर करने वालों के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। वायु प्रदूषण में पीएम 2.5 के कण सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाते हैं, जो गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 में कणों का व्यास 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। ये कण वाहनों के धुएं और ईंधन के जलने से निकलते हैं। चूंकि ये कण बहुत छोटे होते हैं, तो श्वास के साथ आसानी से शरीर में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है।</p>
<p><strong>इसलिए सुबह की हवा ज्यादा प्रदूषित</strong><br />विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार सुबह के समय प्रदूषण यानी पार्टिकुलेट मेटर्स जमीन पर या जमीन के बेहद नजदीक होते हैं। उस समय हवा भी नहीं चल रही होती है, लिहाजा जो लोग मॉर्निग वॉक पर जाते हैं और इस हवा में सांस लेते हैं वे शुद्ध व ताजी हवा के बजाय इन प्रदूषित तत्वों को इनहेल कर रहे होते हैं। वहीं एक हकीकत यह है भी है कि जब आप सुबह उठकर एक्सरसाइज करते हैं तो आपको ज्यादा आॅक्सीजन की जरूरत होती है। ऐसे में प्रदूषण और कार्बन सीधे-सीधे फेफड़ों और फिर उससे ब्लड में जाकर नुकसान पहुंचाता है। शाम के समय भी यही स्थिति रहती है। शाम छह-सात बजे के बाद एकदम से स्मॉग आने लगता है, जिसमें प्रदूषण और धूल मिली होती है। जिससे बीमारियों का खतरा हो सकता है।</p>
<p><strong>वायु प्रदूषण की स्थिति</strong><br />दिसंबर सुबह 6 बजे - 255 - 24<br />दिसंबर    सुबह 7 बजे - 250 - 25<br />दिसंबर    सुबह 7 बजे - 252 - 26<br />दिसंबर    सुबह 6 बजे - 245 -27<br />दिसंबर    सुबह 7 बजे - 240 - 28</p>
<p><strong>कोटा में एक्यूआई 240 यानी प्रदूषित हवा </strong><br />इस समय वातावरण में धुंध की एक परत से छा रही है। वहीं उत्तर भारत से बहती सर्द हवाओं में मौजूद पीएम-2.5 के कण समेत अन्य नुकसानदायक गैसें वातावरण में लंबे समय तक तैर रही हैं। इस कारण कोटा शहर में वायु प्रदूषण का स्तर कम होने का नाम नहीं ले रहा है। प्रदूषण नियंत्रण मंडल की वेबसाइट के अनुसार शहर में शनिवार को एक्यूआई 240 दर्ज किया गया है।  दिसंबर माह की शुरूआत से ही एक्यूआई 150 से 300 के आस-पास बना हुआ है, जो खतरनाक है। यह पिछले वर्षों की तुलना में असामान्य भी है। हालांकि कुछ दिनों की तुलना में वायु प्रदूषण का ग्राफ कम जरूर हुआ है। इसके बावजूद यह सेहत के लिए काफी खतरनाक है और विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।</p>
<p><strong>ऐसे करें बचाव</strong><br />- सर्दी के मौसम में मुख्य मार्गों और सड़क किनारे मॉर्निंग वॉक से बचें, क्योंकि पीएम 2.5 के कण सड़क किनारे सबसे अधिक होते हैं। सुबह ये कण जमीन की सतह पर होते हैं।<br />- घर के आसपास के पार्कों में ही सुबह की सैर करें, क्योंकि वहां पीएम 2.5 के कण कम होते हैं।<br />- वायु प्रदूषण का स्तर अधिक होने पर घर पर भी योग और व्यायाम करें। बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को प्रदूषण स्तर की जानकारी लेकर ही बाहर निकलना चाहिए।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />अधिक प्रदूषण में सही तरीके से सांस लेना मुश्किल हो जाता है और उसके चलते कई दिक्कतें हो सकती है। प्रदूषण के दौरान जो लोग सड़कों पर मॉर्निग वॉक पर जाते हैं, उस समय सांस लेते समय आॅक्सीजन के साथ प्रदूषण भी फेफड़ों तक आसानी से पहुंच जाता है। इससे फेफड़ो को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।<br /><strong>- डॉ. कपिल भोला, फिजिशियन</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Dec 2024 14:02:27 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ब्लॉक हो गया आसमां, प्रदूषण को किया कैद</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर अब प्रदूषित शहरों का तैयार होगा डाटा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-sky-got-blocked--pollution-was-imprisoned/article-97992"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer-(4)13.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। सर्दी के मौसम में वायु प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया है। दिल्ली सहित देश के कई शहर प्रदूषण की चपेट में आ गए हैं। राजस्थान में भी कोटा शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक 268 पर पहुंंच गया है। वायु प्रदूषण का बिगड़ता स्तर लोगों की सेहत पर प्रतिकूल असर डाल रहा है। सर्दी के मौसम में वाहनों और उद्योगों का धुआं वायु प्रदूषण में इजाफा कर रहा है। देशभर में वायु प्रदूषण का लेवल हाई होने को गम्भीरता लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अब प्रदूषित शहरों के सम्बंध में केन्द्र सरकार से डाटा मांगा है। राजस्थान के कई शहरों में भी प्रदूषण का स्तर अधिक रहता है। ऐसे में अब इन शहरों में होने वाले प्रदूषण के लेवल और कारणों के सम्बंध में डाटा तैयार किया जाएगा। इसके बाद  सरकार को भेजा जाएगा। </p>
<p><strong>रेड जोन में शामिल शहरों की पहचान करने के निर्देश</strong><br />सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सरकार को उन शहरों की पहचान करने का निर्देश दिया, जहां वायु प्रदूषण का स्तर गंभीर है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग जैसे तंत्र को देशभर में लागू करने की जरूरत पर जोर देते हुए कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण के मसले पर उसकी सुनवाई सिर्फ दिल्ली-एनसीआर तक सीमित नहीं रहेगी। देशभर के प्रदूषण को लेकर सुनवाई होगी। प्रदूषण देशव्यापी समस्या है, इसलिए समाधान होना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषित शहरों के सम्बंध में सम्पूर्ण ब्यौरा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में राजस्थान के प्रदूषित शहरों का डाटा भी तैयार किया जाएगा। हालांकि प्रारंभ में प्रदूषण के मामले में रेड जोन में आने वाले शहरों का डाटा तैयार होगा। रेड जोन में वह जिले आते हैं, जिनमें प्रदूषण का स्तर 300 के ऊपर रहता है। </p>
<p><strong>प्रदेश के शहरों में वायु प्रदूषण</strong><br />कोटा -268<br />चुरू - 274<br />झालावाड़ - 242<br />टोंक - 278<br />धौलपुर - 318<br />भिवाड़ी - 270<br />जयपुर - 227</p>
<p><strong>एक्यूआई गुणवत्ता प्रभाव</strong><br />0-50 - अच्छा यानि कोई दिक्कत नहीं <br />51-100 - संतोषजनक<br />101-200 - बाहर जाने से बचें <br />201-300 - श्वसन के मरीजों को तकलीफ <br />301-400 - गंभीर रोगियों को दिक्कत <br />401-500 - बाहर बिलकुल नहीं निकलें </p>
<p><strong>कोटा में 268 पर पहुंचा एक्यूआई</strong><br />सर्दी के मौसम में कोटा शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी प्रदूषण का स्तर काफी बढ़कर 268 एक्यूआई पर पहुंच गया है। यहां की हवा जहरीली हो गई और इस मौसम में मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। कोटा शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में वायु प्रदूषण का स्तर भी अलग-अलग हैं। इस समय शहर के नयापुरा क्षेत्र में प्रदूषण का लेवल सबसे अधिक है। प्रदूषण नियंत्रण मंडल की वेबसाइट के अनुसार मंगलवार को नयापुरा और उसके आसपास के क्षेत्र में एक्यूआई 283 दर्ज किया गया है। जबकि शहर के अन्य क्षेत्र धानमंडी में एक्यूआई 308 और श्रीनाथपुरम में एक्यूआई 212 दर्ज किया गया। यानी शहर में सबसे प्रदूषित क्षेत्र धानमंडी है। कोटा में नयापुरा, नई धानमंडी और श्रीनाथपुरम क्षेत्र में लगे संयंत्र के माध्यम से रोजाना प्रदूषण का स्तर दर्ज किया जाता है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />इस समय हवा थम गई है। इसकी वजह से इन्वर्जन लेयर बन गया है। यानी  आसमां में प्रदूषक तत्व अटक गए हैं। इस कारण वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने रेड जोन में आने वाले प्रदूषित शहरों का डाटा मांगा है। फिलहाल कोटा रेड जोन में शामिल नहीं है। <br /><strong>- अमित सोनी, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण मंडल कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Dec 2024 16:31:26 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नयापुरा सबसे अधिक  प्रदूषित, धान मंडी व श्री नाथपुरम भी खतरनाक स्तर 313 पर</title>
                                    <description><![CDATA[चिकित्सकों का कहना है कि अब रोगियों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/nayapura-is-the-most-polluted--dhan-mandi-and-shri-nathpuram-are-also-at-dangerous-level-of-313/article-95847"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/257rtrer-(7)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। दीपावली के बाद कोटा शहर में वायु प्रदूषण का लेवल काफी बढ़ा हुआ है। वायु प्रदूषण का बिगड़ता स्तर लोगों की सेहत पर प्रतिकूल असर डाल रहा है। सर्दी के मौसम में वाहनों और उद्योगों का धुआं वायु प्रदूषण में इजाफा कर रहा है। अब तो शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी प्रदूषण का स्तर काफी बढ़कर 313 एक्यूआई पर पहुंच गया है। यहां की हवा जहरीली हो गई और इस मौसम में मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। कोटा शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में वायु प्रदूषण का स्तर भी अलग-अलग हैं। इस समय शहर के नयापुरा क्षेत्र में प्रदूषण का लेवल सबसे अधिक है। प्रदूषण नियंत्रण मंडल की वेबसाइट के अनुसार शनिवार को नयापुरा और उसके आसपास के क्षेत्र में एक्यूआई 313 दर्ज किया गया है। जबकि शहर के अन्य क्षेत्र धानमंडी में एक्यूआई 308 और श्रीनाथपुरम में एक्यूआई 305 पर बना हुआ है। </p>
<p><strong>नयापुरा में सबसे ज्यादा व श्रीनाथपुरम में सबसे कम</strong><br />प्रदूषण नियंत्रण मंडल की ओर से शहर में वायु प्रदूषण का स्तर रिकार्ड करने के लिए तीन अलग-अलग स्थानों पर प्रदूषण मापक संयंत्र लगाए गए हैं। कोटा में नयापुरा, नई धानमंडी और श्रीनाथपुरम क्षेत्र में लगे संयंत्र के माध्यम से रोजाना प्रदूषण का स्तर दर्ज किया जाता है। प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अनुसार शनिवार को शहर के तीनों क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर अलग-अलग दर्ज किया गया। नयापुरा क्षेत्र में शाम को एक्यूआई 313 दर्ज किया गया। इसके अलावा नई धानमंडी क्षेत्र में 308 और श्रीनाथपुरम क्षेत्र में 305 एक्यूआई था। ऐसे में शहर के नयापुरा क्षेत्र में सबसे ज्यादा प्रदूषण और सबसे कम श्रीनाथपुरम क्षेत्र में हो रहा है। वहीं पूरे शहर में औसत प्रदूषण 313 एक्यूआई दर्ज किया गया। यानी शहर में हवा काफी प्रदूषित हो चुकी है।</p>
<p><strong>वायु प्रदूषण का यह होता है स्तर</strong><br />0-50        अच्छा यानि कोई दिक्कत नहीं<br />51-100    संतोषजनक हवा<br />100-200    बाहर जाने से बचें<br />201-300    श्वसन के मरीजों को परेशानी<br />301-400    लम्बे समय से बीमार मरीजों को परेशानी<br />401-500    बाहर बिलकुल भी नहीं निकलें</p>
<p><strong>यह बढ़ा रहे वायु प्रदूषण का ग्राफ</strong><br />प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारियों के अनुसार कोटा शहर में वाहनों की संख्या बढ़ने के कारण धुआं अधिक मात्रा में फैल रहा है। शहर के अन्य क्षेत्रों की तुलना में नयापुरा क्षेत्र में वाहनों का संचालन अधिक होता है। ऐसे में वाहनों की धुआं हवा को बीमार कर रहा है। इसके अलावा पास ही स्थित औद्योगिक संस्थान थर्मल से निकलने वाला धुआं भी वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण बन रहा है। इनकी वजह से इस क्षेत्र में वायु प्रदूषण सबसे ज्यादा है। धानमंडी क्षेत्र स्थित सब्जीमंडी में भी काफी संख्या में बड़े वाहनों की आवाजाही होती है। इसलिए यहां पर भी प्रदूषण काफी ज्यादा है। श्रीनाथपुरम क्षेत्र में बड़े वाहनों की आवाजाही काफी होती है। इसलिए यहां पर वायु प्रदूषण अन्य क्षेत्रों की तुलना में कम है।</p>
<p><strong>कोटा में जहरीली होती जा रही हवा</strong><br />प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारियों के अनुसार सदी के मौसम में हवा की गति थम जाती है। इससे वायुमंडल में मौजूद प्रदूषक तत्व जमींदोज नहीं हो पाते हैं और हवा में ही तैरते रहते हैं। इस कारण प्रदूषण का लेवल बढ़ता ही चला जाता है। दीपावली से पहले शहर में एक्यूआई 180 के आसपास था। दीपावली पर्व के दौरान आतिशबाजी का दौर चलने से एक्यूआइ लेवल 250  पर आ गया है। इसके बाद से प्रदूषण का लेवल बढ़ता ही जा रहा है। अब वायु प्रदूषण लेवल लंबी छलांग लगाकर 313 एक्यूआई पर आ गया है। इस समय हवा काफी प्रदूषित हो चुकी है। चिकित्सकों का कहना है कि अब रोगियों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।</p>
<p>वायु प्रदूषण आंखों के लिए बेहद खतरनाक है। खासकर कंजंक्टिवा और कार्निया के लिए जहरीली सबसे ज्यादा नुकसानदायक है। प्रदूषित हवा में सुक्ष्म कण होते हैं, जो आंखों की सतह को प्रभावित कर सकते हैं। इससे एलर्जी और जलन जैसी समस्याएं हो सकती है। लोगों को प्रदूषण से बचने के लिए हर प्रयास करना चाहिए।<br /><strong>- डॉ. सुधीर गुप्ता, नेत्र रोग विशेषज्ञ</strong></p>
<p>सर्दी के मौसम में पिछले कुछ दिनों से कोटा में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है। नयापुरा क्षेत्र में उद्योग और वाहनों का धुआं अधिक प्रदूषण फैला रहा है। जिससे यहां पर अन्य क्षेत्रों की तुलना में प्रदूषण का स्तर ज्यादा है। आगामी दिनों में वायु प्रदूषण में और बढ़ोतरी हो सकती है। <br /><strong>- अमित सोनी, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण मंडल कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Nov 2024 16:24:16 +0530</pubDate>
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                <title>झालावाड़ में खतरे की घंटी, हवा में घुल रहा जहर</title>
                                    <description><![CDATA[हाड़ौती में झालावाड़ का सबसे ज्यादा एक्यूआई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/alarm-bells-in-jhalawar--poison-dissolving-in-the-air/article-95664"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/jhalawar-mein-khatare-ki-ghanti,-hawa-mein-ghul-raha-zahar...jhalawar-news-23.11.2024.jpg" alt=""></a><br /><p>झालावाड़। पूरे राजस्थान में इन दोनों एयर क्वालिटी इंडेक्स को लेकर चर्चा हो रही है। झुंझुनू का एयर क्वालिटी इंडेक्स बढ़कर 474 तक जा पहुंचा है, लेकिन झालावाड़ जैसे प्रदूषण मुक्त माने जाने वाले जिलों में भी अब खतरे की घंटी बजने लगी है। शुक्रवार को झालावाड़ का एयर क्वालिटी इंडेक्स हाड़ौती में सबसे ज्यादा बढ़कर 262 हो गया, जबकि कोटा का एक्यूआई-240, बारां एक्यूआई-256 तथा बूंदी का एक्यूआई-234 रहा। यह पहला अवसर है जबकि झालावाड़ का एयर क्वालिटी इंडेक्स बढ़कर कितने उच्च स्तर पर पहुंच गया है। प्रदूषण नियंत्रण मंडल के द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार पहले एक दौर था जब राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक्यूआई 70 से 90 के बीच हुआ करता था, लेकिन अब 150 से 200 तक एक्यूआई होना सामान्य बात हो गई है। जानकारी के लिए आपको बता दें कि भिवाड़ी वर्ष 2021 में दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर रहा था। भिवाड़ी में पूरे साल औसत एक्यूआई 106.2 रहा था। कुल मिलाकर बीते करीब 20 बरसों में राजस्थान में प्रदूषण का स्तर बढ़कर दोगुना हो गया है।</p>
<p><strong>झालावाड़ में क्यों बढ़ रहा है एक्यूआई</strong><br />झालावाड़ जैसे प्राकृतिक रूप से संपन्न जिले में एक्यूआई बढ़ना वास्तव में चिंता का विषय है। यहां ना तो बहुत ज्यादा ट्रैफिक है ना ही बड़े उद्योग धंधे हैं, जिनसे प्रदूषण फैलता है। यहां एक्यूआई बढ़ने की मुख्य वजह यहां के ईंट भट्टों को माना जाता है। झालावाड़ शहर सहित जिले के विभिन्न भागों में अवैध रूप से बड़ी तादाद में ईंट भट्टे चल रहे हैं जिसके चलते यहां लगातार प्रदूषण रहता है और एक्यूआई का स्तर लगातार बढ़ता रहता है। हालांकि यहां पर थर्मल पावर परियोजना जैसी परियोजनाएं भी है जो दिन रात धुआं उगलती है, लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि थर्मल में पॉल्यूशन प्लांट बहुत ही उच्च स्तर का लगा हुआ है, जिसके चलते यहां पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। मुख्य रूप से यहां पर ईंट भट्टे और खेतों में जलाए जाने वाला पराली ही ए क्यू आई बढ़ने का कारण माना जाता है।</p>
<p><strong>कैसे कम करें प्रदूषण</strong><br />विशेषज्ञों की राय के अनुसार हवा और पानी दो बुनियादी जरूरतों के हालत खराब होंगे तो लोग की सहत ठीक नहीं रहेगी। इसका एक रास्ता ये है कि हरियाली को बढ़ावा दिया जाए और विकास को पर्यावरण फ्रेंडली बनाया जाए। किसी भी तरह के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन न किया जाए। बस केवल आवश्यक जरूरतों को ही पूरा किया जाये। कोयले से जलाकर जहर उगलने वाले ईट भट्टों को बंद किया जाए तथा उनकी वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। उसके अतिरिक्त लोगों को धुआं करने और खेतों में पराली जलाने से रोका जाए।</p>
<p><strong>क्या होता है नुकसान</strong><br />चिकित्सकों की राय के अनुसार वायु प्रदूषण से कई प्रकार के नुकसान होते हैं जिनमें प्रमुख रूप से आंखों में जलन, सांस फूलना, जी घबराना और चक्कर आना तथा फेफड़ों का संक्रमण शामिल हैं। इसको अतिरिक्त वायु प्रदूषण से त्वचा के विकार भी उत्पन्न होते हैं त्वचा में कई तरह का संक्रमण वायु प्रदूषण की वजह से होते हैं।</p>
<p><strong>कैसे रखें बचाव</strong><br />चिकित्सा विशेषज्ञ डॉक्टर रामविलास बताते हैं कि प्रदूषण से बचने के लिए आमजन घर पर ही रहें। बाहर निकले तो मास्क लगाकर निकलें। सांस फूलने, चक्कर आने तथा आंखों में जलन होने पर अपने नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र पर डॉक्टर को दिखाएं। घरों पर गैस चूल्हे का उपयोग करें। हैवी ट्रैफिक व भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में जहां भवन निर्माण चल रहा हो, वहां जाने से बचें। सुबह जल्दी और देर शाम के समय घर के खिड़की व दरवाजे बन्द रखें। हवा का स्तर अधिक खराब होने पर मार्निंग वॉक एवं इवनिंग वॉक भी बन्द कर दें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Nov 2024 15:56:04 +0530</pubDate>
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                <title>रोजाना सांसों में घुल रहा 8 सिगरेट के बराबर का धुआं</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदूषण से फेफडे से लेकर ब्लड कैंसर तक का खतरा । 
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/8-cigarette-equivalent-smoke-is-getting-into-the-breath-every-day/article-95573"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/rozana-sanso-me-ghul-rha-8-cigarette-k-brabr-ka-dhua...kota-news-22-11-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा की आबो हवा इन दिनों दूषित हो रही है। एयर डंडेक्स 240 पर पहुंच चुका है। हवा इतनी प्रदूषित हो चुकी है कि सड़कों पर चलने वाला व्यक्ति रोजाना करीब 8 से 10 सिगरेट पीने जितना नुकसान झेल रहा है। वातावरण में इतना पॉल्यूशन जमा हो गया  कि बिना सिगरेट पीने वाला व्यक्ति की सांसों में उतना ही प्रदूषण घुल रहा है, जितना दिनभर में एक सिगरेट का पूरा पैकेट पीने से धुआं शरीर में जाता है। इससे शहरवासियों पर फेफड़े से लेकर ब्लड कैंसर तक घातक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।  दरअसल, सर्दियां बढ़ने के साथ ही एयर क्वालिटी बेहद खराब होने लगी है। मौसम में बदलाव के कारण हवा पूरी गति से नहीं चल रही और कोहरे की वजह से हवा में मौजूद प्रदूषण के कण वायुमंडल में नहीं जा पा रहे और वह हवा के साथ आमजन की सांसों में जाकर शरीर को खतरनाक बीमारियों की ओर धकेल रहे हैं। विश्व दमा दिवस के मौके पर पेश है, नवज्योति की खास रिपोर्ट....</p>
<p><strong>आगामी तीन महीने बेहद खतरा</strong><br />मेडिकल कॉलेज में श्वांस रोड विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र ताखर बताते हैं, आगामी सर्दियों के तीन महीने एयर क्वालिटी के लिहाज से खतरनाक होंगे। सर्दियों में कोहरा बढ़ेगा, जिसके कारण वाहनों व उद्योगों से निकलने वाला धुआं व जहरीली गैसें वायुमंडल में नहीं जा पाती और प्रदूषण पार्टिकल्स  कोहरे में लिपटकर रहेंगे, जो हवा के साथ सांसों में घुलकर शरीर को खतरनाक बीमारियों की ओर धकेलते हैं। इन खतरों से बचने के लिए व्यक्ति को मास्क का उपयोग करना चाहिए।</p>
<p><strong>80 हजार से ज्यादा वाहन अवधि पार</strong><br />जिला परिवहन कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार कोटा जिले में कुल 5 लाख 69 हजार 607 वाहन पंजीकृत हैं। इनमें से करीब 80 हजार वाहन 15 साल की अवधि पार हैं। नियमों के अनुसार अवधि पार वाले वाहनों को रिन्यू नहीं करवाए जाने पर रजिस्ट्रेशन निरस्त किए जाने का प्रावधान है। लेकिन आरटीओ द्वारा ऐसे वाहनों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। </p>
<p><strong>गर्मियों की अपेक्षा सर्दियों में अधिक खतरा</strong><br />डॉ. ताखर बताते हैं, जब एक्यूआई 200 से ऊपर होता है तो 7 से 8 सिगरेट के बराबर का धुआं हवा में सांस लेने वाला हर व्यक्ति के शरीर में जाता है। इसलिए, हवा की गुणवत्ता सुधारना बेहद जरूरी है। इसके लिए पुराने कंडम वाहनों, उद्योगों से निकलने वाला धुआं को कम करने के प्रयास होने चाहिए। साथ ही कंट्रक्शन वर्क व सड़कों की नियमित सफाई हो ताकि, वाहनों के गुजरने के दौरान धूल  न उड़े। क्योंकि, इन नैनो पार्टिकल्स  से फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचता है। </p>
<p><strong>प्रदूषण से लीवर से कैंसर तक का खतरा</strong><br />चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, वाहनों से निकलने वाले धुएं में अनगिनत नैनो पार्टिकल्स होते हैं, जिनके हवा के साथ शरीर में प्रवेश करने से कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। जिसमें  खांसी, सिर में दर्द, जी-मिचलाना, घबराहट होना, आंखों में जलन, दिल से संबंधित बीमारियां, दिमाग, फेफड़े, हृदय, गुर्दे, फेफड़े के कैंसर, सांस अटैक, दमा, एलर्जी सहित कई बीमारियों का खतरा बना रहता है। </p>
<p><strong>सांस का अटैक से आंखों में सूजन तक बीमारियां</strong><br />सड़कों पर बेधड़क दौड़ रहे खटारा वाहनों से निकलने वाला काला धुआं अपने पीछे गंभीर बीमारियां छोड़ रहा है, जिससे राहगीरों पर सांस के अटैक से लेकर आंखों में सूजन तक कई गंभीर बीमारियों का खतरा रहता है। इसका सबसे ज्यादा खतरा सड़कों पर तैनात ट्रैफिक पुलिस के जवानों पर अधिक रहता है। इसके बावजूद यातायात पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाती। </p>
<p><strong>सड़कों पर दौड़ रहे खटारा वाहन, उगल रहे काला धुआं</strong><br />शहर में ट्रैफिक पुलिस व परिवहन विभाग की नजरों के सामने खटारा वाहन दौड़ रहे हैं, जो डीजल का गहरा काला धुआं छोड़ रहे हैं। इनमें नगर निगम की सिटी बसें भी शामिल हैं। यह बसें शहर के प्रमुख मार्गों से गुजर रही है। जहां ट्रैफिक पुलिस के जवान तैनात रहते हैं, इसके बावजूद इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती। नाम न छापने की शर्त पर बस चालक ने बताया कि प्रदूषण जांच तो छोड़ों लंबे समय से इन बसों की सर्विस तक नहीं हुई है। इसके अलावा खटारा लोडिंग वाहन भी एयरोड्रम सर्किल, घोड़ा सर्किल, सीएडी व कोटाड़ी चौराहा सहित प्रमुख मार्गों से बेधड़क दौड़ रहे हैं। </p>
<p><strong>बचाव के उपाए</strong><br /><strong>बीमारियों से बचाव में मास्क कारगर </strong><br />प्रदूषण से होने वाली घातक बीमारियों से बचाव के लिए मास्क प्रभावशाली उपाए है। हवा में मौजूद प्रदूषण के कण मास्क के कारण सांस के साथ शरीर में नहीं जा पाते। विदेशों में मास्क पहनना लोगों की आदत में शामिल हैं। जबकि, भारत में कोविड के बाद लोगों ने मास्क का उपयोग करना लगभग बंद कर दिया। जबकि, यही मास्क खतरनाक बीमारियों से बचाता है। मास्क का उपयोग अनिवार्य होना चाहिए।</p>
<p><strong>सप्ताह में एक दिन नो कार </strong><br />शिक्षाविद् अजीम पठान कहते हैं, सप्ताह में एक दिन नो कार डे होना चाहिए। 1 लीटर पेट्रोल बर्न करने पर वाहन करीब 1 हजार लीटर कार्बनडाई ऑक्साइड धुएं के रूप में छोड़ता है, जो गत वर्ष के आंकड़ों के मुताबिक आरटीओ में रजिस्टर्ड  56 हजार कारों के प्रति एक लीटर ईधन के हिसाब से करोड़ों लीटर कार्बनडाई ऑक्साइड पर्यावरण में घुल जाता है। यदि एक दिन वाहनों के पहिए थमे तो 2.24 लाख लोगों को स्वच्छ ऑक्सीजन मिल सकती है। </p>
<p><strong>पब्लिक ट्रांसपोर्ट व वाहन पुलिंग  का हो उपयोग</strong><br />प्रशासन को शहर में ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि लोग अपनी गाड़ियां छोड़ पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अधिक उपयोग करें ताकि, अनावश्यक ज्यादा वाहन सड़कों पर न आएं। वहीं, वाहन पुलिंग के तहत कई लोग एक ही साधन से कार्यस्थल पर पहुंच सकते हैं। इससे न केवल ईधन की बचत होगी बल्कि प्रदूषण भी कम होगा और करोड़ों लीटर ऑक्सीजन भी बचेगा। सरकार को सरकारी कार्यालयों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों व मल्टी स्टोरी में ईवी चार्जिंग लगाना चाहिए। जिससे ईवी व्हीकल्स को बढ़ावा मिलेगा। काला छुआं छोड़ने वाले व अवधि पार वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। <br /><strong>- डॉ. राजेंद्र ताखर, श्वांस रोग विशेषज्ञ, मेडिकल कॉलेज कोटा</strong></p>
<p>यह बात सही है, शहर में पॉल्यूशन का स्तर बढ़ रहा है। पुराने वाहनों को बाहर करने के लिए कार्रवाई की जा रही है। वहीं, कंडम व काला धुआं छोड़ने वाले वाहनों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। सख्ती और बढ़ाई जाएगी।<br /><strong>- सुरेंद्र सिंह राजपुरोहित, जिला परिवहन अधिकारी, आरटीओ</strong></p>
<p>पॉल्यूशन फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं। पॉल्यूशन सर्टिफिकेट भी चैक करते हैं, जिनके पास नहीं मिलते, उनके चालान कर रहे हैं। प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। <br /><strong>- पूरण सिंह, ट्रैफिक इंस्पेक्टर, यातायात पुलिस</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Nov 2024 14:46:31 +0530</pubDate>
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