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                <title>जरा देखूं तो कैसा है मेरा घर का आंगन, टाइग्रेस ने किया शिकार, रास आ रहा मुकुंदरा</title>
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                        <![CDATA[बाघिन ने एनक्लोजर का चप्पा चप्पा छाना, नए घर का किया मुआयना]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/let-me-see-how-my-courtyard-looks--the-tigress-hunted--enjoying-mukundra/article-145341"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/kota-news.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से शिफ्ट किए हुए बुधवार को पांच दिन हो गए हैं। बाघिन को अपना नया आशियाना खूब रास आ रहा है। बाघिन ने आते ही दूसरे दिन रविवार को पाड़े का शिकार किया। वह सुबह सूरज की पहली किरण के साथ ही अपने नए घर का मुआयने पर निकलती है। राउंठा रेंज की झामरा घाटी में बने एक हेक्टेयर के सॉफ्ट एनक्लोजर में बुधवार को चहल कदमी करती नजर आई। वह नए माहौल में ढलने की कोशिश करती दिखी। इस बीच कुछ समय वाटर प्वाइंट के पास रुकी और प्यास बुझाकर फिर से दौरे पर निकल पड़ी। यह सिलसिला दिनभर चलता रहा। भूख लगी तो एनक्लोजर में छोड़े गए पाड़े का शिकार कर पेट भरा। टाईग्रेस की एक-एक गतिविधियां एनक्लोजर के पीछे बने दो मंजिला वॉच टावर से कर्मचारी नोट कर अधिकारियों को रिपोर्ट करते रहे। हालांकि, बाघिन अभी पांच दिनों तक समान्य व्यवहार में विचरण करती नजर आई। अधिकारियों व कर्मचारियों की टीम लगातार बाघिन की सघन मॉनिटरिंग में जुटी है।</p>
<p><strong>रौब से घूमी, दौड़ कर किया शिकार</strong></p>
<p>डीएफओ मुथू एस ने बताया कि मुकुंदरा का माहौल बाघिन को रास आ रहा है। व्यवहार भी सामान्य रहा और बाड़े में रौब के साथ मूवमेंट करती दिखाई दी। कभी वॉटर पॉइंट पर तो कभी झाड़ियों के पीछे आराम करती नजर आई। एनक्लोजर में छोड़े गए वैट का दौड़कर शिकार किया। वन्यजीव चिकित्सक ने बाघिन का भौतिक रूप से स्वास्थ्य परीक्षण भी किया। जिसमें वह पूरी तरह से स्वस्थ मिली। दोपहर को उसने कुछ समय तक आराम किया फिर शाम 5 बजे बाद विवरण करती देखी गई।</p>
<p><strong>24 घंटे वॉच टावर से हर मूवमेंट पर नजर</strong></p>
<p>मुकुंदरा अधिकारियों का कहना है कि 24 घंटे बाघिन के हर एक मूवमेंट पर नजर रखी जा रही है। उसकी एक्टिविटी को वॉच टावर पर तैनात वनकर्मी नोट कर डीएफओ कार्यालय में बने कंट्रोल रूम पर रिपोर्ट करते रहे हैं। यहां 8-8 घंटे की शिफ्ट में गठित 3 टीमों द्वारा टाइग्रेस के मूवमेंट पर की नजर रखी जा रही हैं। जिसमें वह कितने बजे से कितनी बजे तक घूमी, कितनी बार पानी पिया। कब से कब तक आराम किया। दिनभर में उसका व्यवहार कैसा रहा, भोजन-पानी व एक्टिवनेस सहित अन्य गतिविधियां नोट की गई। इन एक्टिविटी के आधार पर तैयार रिपोर्ट का एनालिसिस किया जाता है, फिर हार्ड रिलीज पर फैसला किया जाता है।</p>
<p><strong>1135 वर्ग किमी में फैला मुकुंदरा टाइगर रिजर्व</strong></p>
<p>मुकुन्दरा हिल्स को 9 अप्रैल 2013 को टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था। वर्तमान में यह 1135 वर्ग किमी में चार जिलों कोटा, बूंदी, झालावाड़ व चित्तौडगढ़ में फैला है। इसमें 793 वर्ग किमी कोर और 342 वर्ग किमी बफर जोन है। पहले मुकुंदरा का दायरा 760 वर्ग किमी था लेकिन दो वर्ष पूर्व भैंसरोडगढ़ अभयारण्य को शामिल कर लिया गया। जिससे टाइगर रिजर्व का क्षेत्रफल बढ़कर 1135 वर्ग किमी हो गया।</p>
<p><strong>सप्ताहभर बाद हार्ड रिलीज पर फैसला</strong></p>
<p>सीसीएफ सुगनाराम जाट ने बताया कि बाघिन को सॉफ्ट एनक्लोजर में शिफ्ट करने के साथ ही विशेषज्ञों की टीम 24 घंटे उसकी निगरानी कर रही है। उसके व्यवहार, स्वास्थ्य और नए वातावरण में ढलने की प्रक्रिया पर लगातार नजर रखी जा रही है। सब कुछ संतोषजनक रहने पर 7 दिन बाद बाघिन को खुले जंगल में छोड़ दिया जाएगा। बाघिन की मॉनिटरिंग के लिए 8- 8 घंटे की शिफ्ट में 3 टीमें गठित की गई है।</p>
<p><strong>अब मुकुंदरा में 7 बाघ</strong></p>
<p>बांधवगढ़ से बाघिन आने के साथ ही मुकुंदरा में अब बाघों की संख्या 7 हो गई है। इनमें 2 बाघ, 4 बाघिन और एक 10 माह का नर शावक शामिल है। वर्तमान में टाइग्रेस एमटी- 6 अपने शावक के साथ कोलीपुरा रेंज में तो बाघिन एमटी-8 हाल ही में रणथंभोर से लाए बाघ एमटी - 9 के साथ दरा रेंज में 82 वर्ग किमी के जंगल में विचरण कर रहे हैं। दोनों को कई बार साथ देखा गया है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि निकट भविष्य में यहां श्रावकों के जन्म से बाघों का कुनबा बढ़ेगा।</p>
<p><strong>कमजोर जेनेटिक आधार को मजबूत करना उद्देश्य</strong></p>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार, इंटर स्टेट बाघ ट्रांसलोकेशन का मुख्य उद्देश्य बाघों की आनुवंशिक विविधता बढ़ाना, कमजोर जेनेटिक आधार को मजबूत करना, भविष्य में संख्या स्थिर और स्वस्थ रखना है। ऐसे में अंतरराज्यीय स्थानांतरण से राजस्थान के टाइगर रिजर्व में दीर्घकालिक रूप से मजबूत बाघ आबादी विकसित करने में मदद मिलेगी।</p>
<p><strong>मार्च - अप्रैल में लाए जाएंगे 250 चीतल</strong></p>
<p>सीसीएफ जाट ने बताया कि मुकुंदरा में अभी प्रेबेस अच्छी संख्या अच्छी है। लेकिन इनकी संख्या बढ़ाने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। हाल ही में भरतपुर के घना नेशनल पार्क से 9 चीतल लाए हैं। मार्च - अप्रैल तक 250 चीतल लाए जाएंगे। भोमा लगाया हुआ है। उसमें जैसे जैसे प्रेबेस आएंगे वैसे ही मुकुंदरा में शिफ्ट किए जाएंगे।</p>
<p><strong>बाधिन पूरी तरह स्वस्थ</strong></p>
<p>बाघिन पूरी तरह से स्वस्थ है। सॉफ्ट एनक्लोजर में सामान्य व्यवहार में विचरण कर रही है। उसने एनक्लोजर में छोड़े गए वैट का शिकार किया। टीम द्वारा टाइग्रेस की 24 घंटे मॉनिटरिंग की जा रही है। पशु चिकित्सक द्वारा समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जा रहा है। सप्ताहभर बाद उच्च अधिकारियों के निर्देश पर हार्ड रिलीज करने का निर्णय किया जाएगा।</p>
<p><strong>- मुथू एस, डीएफओ मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Mar 2026 14:09:43 +0530</pubDate>
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                <title>टाइगर ने किया भालू का शिकार</title>
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                        <![CDATA[ रणथंभौर टाइगर रिजर्व में एक बार फिर से एक शानदार लम्हा देखने को मिला। जिसे देखकर पर्यटक रोमांचित हो उठे। पर्यटकों ने यहां टाइगर को एक जंगली भालू का शिकार करने के बाद इस शिकार का लुफ्त उठाते हुए देखा। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/sawai-madhopur/tiger-hunted-bear/article-12747"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/t-31.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>सवाई माधोपुर।</strong>  रणथंभौर टाइगर रिजर्व में एक बार फिर से एक शानदार लम्हा देखने को मिला। जिसे देखकर पर्यटक रोमांचित हो उठे। पर्यटकों ने यहां टाइगर को एक जंगली भालू का शिकार करने के बाद इस शिकार का लुफ्त उठाते हुए देखा। रणथंभौर के जोन नम्बर 3 में सुबह की पारी में पर्यटकों को टाइगर सफारी के दौरान टाइगर टी.120 योद्धा के दीदार हुए। पर्यटकों ने यहां पदम तालाब के पास टाइगर टी.120 योद्धा को एक जंगली भालू का शिकार करते हुए देखा। जिसके बाद टाइगर टी.120 योद्धा को इस शिकार का लुफ्त उठाता हुआ भी दिखाई दिया। जिसे देखकर पर्यटक रोमांचित हो उठे। यहां मौजूद पर्यटकों ने इस पूरे वाकया को अपने कैमरे मे कैद कर लिया। </p>
<p>रणथंभौर में टाइगर इससे पहले हाइना, कुत्ते, मगरमच्छ और लेपर्ड का भी शिकार कर चुके है। जिसके बाद एक बार फिर से यहां वाइल्ड लाइफ का रेयर वीडियों देखने को मिला है। गौरतलब  है कि हाल ही में टाइगर टी.120 योद्धा सांभर के शिकार को लेकर बाघिन.84 के साथ झड़प करता हुआ दिखाई दिया था। जिसमें बाघ की बीच हुई और बाघिन को शिकार छोड़ना पड़ा था। टाइगर टी.120 योद्धा रणथंभौर का एक युवा और ताकतवर बाघ है। जिसकी टेरेटरी फिलहाल रणथंभौर के जोन नम्बर तीन में है।</p>]]>
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                                                            <category>सवाई माधोपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Jun 2022 11:51:25 +0530</pubDate>
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