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                <title>dussehra fair - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>शहर में मुख्य मार्ग व कचरा पॉइंटों पर लगे कचरे के ढेर : रोजाना निकल रहा एक हजार टन कचरा, घर को साफ कर बाहर से ला रहे गंदगी </title>
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                        <![CDATA[दीपावली की सफाई के चलते शहर में कचरे की मात्रा दोगुनी होकर 900–1000 टन पहुंच गई है। नगर निगम ने सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सफाईकर्मी और ट्रैक्टर-ट्रॉलियां तैनात की हैं। दशहरा मेले से भी भारी मात्रा में कचरा निकल रहा है। निगम द्वारा कचरा त्वरित रूप से उठवाने की कार्रवाई जारी है।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/piles-of-garbage-pile-up-on-main-roads-and-garbage-points-in-the-city--1-000-tons-of-garbage-is-being-generated-daily--people-are-cleaning-their-homes-and-bringing-in-dirt-from-outside/article-129759"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/y-of-news-(4)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में इन दिनों अधिकतर घरों में साफ सफाई और रंगाई पुताई का काम तेजी से चल रहा है। जिससे निकलने वाला कचरा सड़कों पर ही डाला जा रहा है। हालत यह है कि घर तो साफ हो रहे हैं और मुख्य मार्गों पर कचरे के ढेर लगे हुए हैं। दीपावली सफाई के दौरान शहर में इन दिनों सामान्य दिनों की तुलना में करीब दोगुना कचरा निकल रहा है। दस दिन तक गणपति की आराधना और नौ दिन तक देवी मां की भक्ति करने के बाद अब मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने की बारी है। 5 दिवसीय दीपोत्सव को मनाने के लिए शहर में अधिकतर घरों को साफ करने व चमकाने का काम चल रहा है। नवरात्र समाप्त होने के बाद से ही कई घरों व प्रतिष्ठानों में साफ सफाई का काम शुरु हो गया था। वहीं अधिकतर घरों में पिछले कुछ दिन से सफाई चल रही है। </p>
<p><strong>500 टन की तुलना में दोगुना कचरा</strong><br />नगर निगम की ओर से घर-घर कचरा संग्रहण किया जा रहा है। इसके लिए हर वार्ड में दो से तीन टिपर लगे हुए हैं। वे वार्डों  में घर-घर व दुकानों से कचरा एकत्र कर रहे हैं। हालांकि अभी ये एक समय सुबह ही चल रहे है। उस कचरे को कचरा ट्रांसफर स्टेशन पर लाया जा रहा है। वहां से नांता सिथत ट्रेचिंग ग्राउंड पर भेजा जा रहा है। हालत यह है कि सामान्य दिनों में जहां शहर से रोजाना करीब 450 से 500 टन कचरा निकल रहा है। वहीं दीपावली पर घरों में हो रही सफाई के दौरान निकलने वाले हर तरह के कचरे की मात्रा बढ़कर करीब दो गुनी 900 से 1000 टन तक हो गई है। यह स्थिति नवरात्र के समय से शुरु हुई है जो अभी भी बनी हुई है। </p>
<p><strong>दशहरा मेले से भी निकल रहा कचरा</strong><br />शहर में 2 अक्टूबर से ही दशहरा मेला भी चल रहा है। ऐसे में वहां भी रोजाना हजारों लोग पहुंच रहे है। फूड जोन में खाने-पीने के साथ ही दुकानों से निकलने वाला कचरा भी मैदान में एकत्र हो रहा है। हालांकि उस कचरे को तीन पारियों में सफाई कर्मचारियों के माध्यम से साफ कराया जा रहा है। लेकिन वहां से भी टनों कचरा रोजाना निकल रहा है। </p>
<p><strong>सफाई श्रमिक व संसाधन बढ़ाए</strong><br />इधर नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की ओर से शहर में सफाई के लिए श्रमिक व संसाधन बढ़ाए हैं। नगर निगम कोटा दक्षिण आयुक्त द्वारा आदेश जारी कर हर वार्ड में संवेदक के माध्यम से 5-5 सफाई श्रमिक 17 से 31 अक्टूबर तक और 15 से 30 अक्टूबर तक हर सेक्टर में एक-एक ट्रेक्टर ट्रॉली अतिरिक्त लगाएं हैं। मोतीलाल चौधरी स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि पहले जहां संवेदक दो चक्कर में कचरा उठा रहा था। वहीं अब चाहे तीन हों या चार चक्कर एक बार में पूरा कचरा उठाना होगा। </p>
<p>वैसे तो निगम के स्तर पर नियमित सफाई की जा रही है। कचरा भी उठाया जा रहा है। लेकिन त्योहार पर निकलने वाले अतिुरक्त कचरे को साफ करनेी व उठाने के लिए अतिरिक्त श्रमिक व संसाधन लगाए हैं। जिससे सफाई होने के साथ समय पर कचरा उठ सके। वहीं जहां से भी शिकायत मिल रही है। वहां तुरंत टीम भेजकर सफाई भी कवाई जा रही है। वहीं नगर निगम कोटा उत्तर की ओर से हर सेक्टर में एक-एक ट्रेक्टर ट्रॉली अतिरिक्त लगाई है। साथ ही संवेदक की ट्रेक्टर ट्रॉली द्वारा कचरा उठाने के फेरे बढ़ाए हैं। <br /><strong>- ऋचा गौतम स्वास्थ्य अधिकारी</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Oct 2025 16:03:37 +0530</pubDate>
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                <title>मेले में मोबाइल नेटवर्क हो जाता जाम : परेशान होता हर आम, मेला समिति व अधिकारी करते वॉकी-टॉकी का उपयोग  </title>
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                        <![CDATA[मेला समिति ने मेला परिसर व उसके आस-पास टावर लगाने का किया निवेदन।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mobile-network-congestion-occurs-at-the-fair--causing-inconvenience-to-everyone--and-the-fair-committee-and-officials-use-walkie-talkies/article-128515"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/111-(1)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राष्ट्रीय दशहरा मेले का विधिवत शुभारम्भ तो हो गया है लेकिन पूरी तरह से मेला 2 अक्टूबर को दशहरे के दिन से होगा। उसी दिन से मेले में भीड़ के कारण मोबाइल नेटवर्क जाम होने की समस्या से आमजन को दोचार होना पड़ता है। ऐसे में परिजनों के बिछुड़ने पर उनसे आपस में सम्पर्क करनाा मुश्किल हो जाता है। इस समस्या से निपटने के लिए मेला समिति व अधिकारी तो वॉकी-टॉकी का उपयोग करते हैं। निगम कोटा दक्षिण व उत्तर की ओर से आयोजित दशहरा मेला शुरु हो गया है। लेकिन अभी यहां सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन नहीं होने व पूरी दुकानें भी नहीं लगने से लोग बहुत कम पहुंच रहे हैं। लेकिन जैसे ही 2 अक्टूबर को दशहरे के दिन रावण दहन होगा। उस दिन  से मेले में लोगों की भीड़ उमड़ना शुरु हो जाती है। भीड़ भी इतनी अधिक रहती है कि मेला परिसर में लोग एक दूसरे से सटकर चलते है। विशेष रूप से झूला मार्केट व फूड कोर्ट में सबसे अधिक भीड़ रहती है। वहीं  मेले के दौरान होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों और शनिवार व रविवार को अवकाश के दिन तो मेला परिसर में सांस लेना तक दूभर हो जाता है। इस बार दशहरे पर 215 फीट का विशाल रावण दहन होगा। ऐसे में उसे देखने के कारण भीड़ पहले से काफी अधिक रहने की संभावना है। </p>
<p><strong>खोया-पाया पर उद्घोषणा</strong><br />मोबाइल नेटवर्क जाम होने से फोन नहीं लगने पर कई लोग तो निगम की ओर से मुख्य प्रवेश द्वार श्रीराम द्वार के पास खोया-पाया केन्द्र पर सूचना देते हैं। वहां से बिछड़े लोगों व बच्चों के बारे में उद्घोषणा की जाती है। जिससे बड़ी संख्या में लोगों को आपस में मिलाने का काम किया जाता है। लेकिन मोबाइल से बात करके मिलना संभव नहीं हो पाता है। इस समस्या से कुछ लोग ही नहीं मेले में आने वाले अधिकतर लोगों को इस समस्या का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मेले में भीड़ के कारण मोबाइल नेटवर्क व फोन जाम होने की समस्या आती है। गत वर्ष भी इसका सामना करना पड़ा था। इसके लिए समिति सदस्यों व अधिकारियों ने वॉकी-टॉकी का उपयोग किया था। करीब 10 वॉकी-टॉकी से आपस में बातचीत व सम्पर्क करना सुविधाजनक रहा था। इस बार तीन मोबाइल कम्पनियों को पत्र लिखे गए हैं। समिति ने जिला कलक्टर के माध्यम से कम्पनियों को पत्र भेजकर मेला परिसर व उसके आस-पास टावर लगाने या अन्य व्ववस्था करने का निवेदन किया है जिससे लोगों को इस समस्या का सामना नहीं करना पड़े। संभावना है कि दशहरे तक इस समस्या का समाधान हो सकता है। <br /><strong>- विवेक राजवंशी, अध्यक्ष मेला समिति </strong></p>]]>
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                <pubDate>Thu, 02 Oct 2025 15:04:35 +0530</pubDate>
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                <title>विदेशों में रहने वाले भारतीय भी देख सकेंगे दशहरा मेला</title>
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                        <![CDATA[मल्टी कैमरों के साथ ड्रोन का भी होगा उपयोग। 
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/indians-living-abroad-will-also-be-able-to-watch-dussehra-fair/article-125938"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/(630-x-400-px)-(5)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की ओर से इस माह शुरु होने वाले 132 वें राष्ट्रीय दशहरा मेले को कोटा में रहने वाले तो मौके पर जाकर देख सकेंगे। वहीं विदेशों में रहने वाले भारतीय भी हजारों किलोमीटर दूर रहकर भी मेले के हर कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देखने का आनंद ले सकेंगे। यह संभव होगा सोशल मीडिया(यू ट्यूब) के माध्यम से दशहरा मेले के लाइव प्रसारण से। निगम की ओर से गत वर्ष इसका प्रयोग किया गया था। जिसके सफल रहने पर इस बार भी ऐसा ही किया जाएगा। लेकिन इस बार इस सुविधा का विस्तार करते हुए कार्यक्रमों के प्रसारण की  क्वा लिटी को और बेहतर किया जाएगा। इसके लिए पहले जहां एक ही कैमरे से लाइव किया जा रहा था। वहीं इस बार मल्टी कैमरों का उपयोग  तो होगा ही। साथ ही ड्रोन का उपयोग भी करने का प्रयास किया जा रहा है। जिससे कार्यक्रमों का अधिक से अधिक व्यू देखा जा सके। 22 सितम्बर से शुरु होने वाले मेले के दौरान दशहरे के बाद विजयश्री रंगमंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। </p>
<p>गत वर्ष 25 से अधिक देशों में देखा गया मेला: मेला समिति के अध्यक्ष विवेक राजवंशी ने बताया कि दशहरा मेला राष्ट्रीय स्तर का है। बरसों से यहां बड़े-बड़े आयोजन हो रहे है।  लेकिन मेले को राष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित नहीं किया गया। ना ही पर्यटन विभाग के कैलेंडर में इसे अभी तक भी शामिल किया गया है।  मेले की बैठक व जिला कलक्टर की बैठक में कई बार पर्यटन विभाग के अधिकारियों से इस संबंध में बात हो चुकी है। जिससे विदेशी पर्यटकों को मेले में लाने के प्रयास हो सके। हालांकि दशहरे के दिन कुछ विदेशी पर्यटकों का दल कोटा में रहता है तो मेले में शामिल हो जाते है।  राजवंशी ने बताया कि  गत वर्ष मेला समिति की बैठक में लिए गए निर्णय की पालना में मेले का  यू ट्यूब के माध्यम से सोशल मीडिया पर लाइव प्रसारण किया गया था। इसकी डिटेल ली गई तो पता चला कि करीब 25 से अधिक देशों जिनमें अमेरिका, इटली, आस्ट्रेलिया, जर्मनी समेत कई अन्य देशों में यू ट्यूब के माध्यम से वहां रहने वाले भारतीयों ने मेले के सभी कार्यक्रमों को देखा था।  साथ ही भारत में भी 500 से अधिक कस्बों व शहरों में मेले के कार्यक्रम देखे गए। करीब 10 लाख व्यू मिले और एक करोड़ से अधिक  लोगों के द्वारा मेले के कार्यक्रम देखे गए थे।  उन्होंने बताया कि इस बार इस लाइव प्रसारण को और अधिक सुविधाजनक व बेहतर करने का प्रयास किया जा रहा है। जिसके लिए मल्टी कैमरे व ड्रोन का भी उपयोग करने का प्रयास किया जा रहा है। </p>
<p><strong>अमेरिका से फोन कर याद ताजा होने की दी थी जानकारी</strong><br />अध्यक्ष राजवंशी ने बताया कि गत वर्ष अमेरिका में रहने वाले एक भारतीय ने उन्हें फोन कर कहा था कि यू ट्यूब के माध्यम से उन्होंने हजारों कि.मी. दूर रहकर भी मेले के सभी कार्यक्रम घर बैठे देखे। उन्हें कोटा आए कई साल हो गए। लेकिन कई साल बाद मेले के कार्यक्रम देखकर कोटा की याद ताजा हो गई। उन्होंने इस प्रयास की सराहना की थी। साथ ही कई लोगों ने लाइव प्रसारण की क्वा लिटी में सुधार के भी सुझाव दिए थे। उन्हें इस बार प्रयास कर सही किया जाएगा। </p>
<p><strong>मेला उद्घाटन में दिखेगा महारास</strong><br />दशहरा मेले के उद्घाटन में गत वर्ष जहां प्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री व सांसद हेमा मालिनी कोटा आई थी। उन्होंने अपने नृत्य नाटिका दुर्गा की प्रस्तुति दी थी। लेकिन इस बार उद्घाटन में किसी बड़े कलाकार के आने की संभावना कम है।  मेला समिति के अध्यक्ष विवेक राजवंशी ने बताया कि प्रयास तो किया जा रहा है किसी बड़े कलाकार को बुलाने का लेकिन संभावना कम लग रही है। ऐसे में उद्घाटन के दौरान करीब दो से ढाई घंटे का महारास करवाने की योजना है। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Fri, 05 Sep 2025 14:48:24 +0530</pubDate>
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                <title>समिति के मेले में नगर निगम के नाम का धडल्ले से हो रहा दुरूपयोग </title>
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                        <![CDATA[अभी तक दशहरा मेला शुरू भी नहीं हुआ है, अभी से मेले की नाम से पर्ची काटी जा रही है। 
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-name-of-the-municipal-corporation-is-being-misused-in-the-committee-s-fair/article-90244"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/2rtrer4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा दक्षिण  क्षेत्र में जीएडी सर्किल पर श्रीनाथपुरम् स्टेडियम के सामने पिछले चार दिन से चल रहे गणेश मेले  में नगर निगम के नाम का दुरूपयोग किया जा रहा है।  समिति के  मेले को नगर निगम का मेला बताकर संकेतक फ्लेक्स लगाए हुए हैं। साथ ही वाहन स्टैंड पर पर्ची भी राष्ट्रीय दशहरा मेले के नाम से ही काटी जा रही है। जिससे लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।  इतना सब कुछ होने के बाद भी निगम अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं। श्रीनाथपुरम् में आयोजित गणेश मेले में रोजाना आने वाले लोगों के वाहनों को व्यवस्थित खड़ा करने के लिए वहां एक संवेदक द्वारा वाहन पार्किंग का संचालन किया जा रहा है। उसके द्वारा पूरे मार्ग में और दीवारों पर जगह-जगह फ्लेक्स लगा रखे हैं। उन फ्लेक्स पर  नगर निगम मेला लिखा हुआ है। उसके नीचे टू व्हीलर पार्किंग और अपने वाहन पार्किंग में लगाएं, अन्यथा उठाए जाने पर अतिक्ति चार्ज लगेगा लिखा हुआ है। शुरुआत में तो लोगों को लगा कि यह मेला निगम की ओर से व वाहन पार्किंग भी निगम कीओर से ही संचालित हो रही है। दो पहिया वाहन के दस रुपए किराया वसूल किया जा रहा है। लेकिन जब कई लोगों ने देखा कि वाहन पार्किंग की पर्ची राष्ट्रीय दशहरा मेले के नाम से दी जा रही है तो लोगों को शक हुआ। अभी तक दशहरा मेला शुरू भी नहीं हुआ है। अभी से मेले की नाम से पर्ची काटी जा रही है। इसके बाद लोगों ने जानकारी की तो हकीकत सामने आई। मेले में जाने वाले लोगों का कहना है कि मेला स्थानीय मेला समिति के माध्यम से आयोजित किया जा रहा है। जिसमें एक व्यक्ति विशेष ने अपने स्तर पर ही वाहन पार्किंग शुरु कर दी है। उसके द्वारा पर्ची नगर निगम के राष्ट्रीय दशहरा मेले के नाम से काटी जा रही है। लोगों का कहना है कि उस पर्ची पर न तो वर्ष लिखा हुआ है और न ही तारीख डाली गई है। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो स्टैंड पर तैनात लोगों द्वारा उनसे अभद्रता की गई। यहां तक कहा कि कहीं भी शिकायत कर लो हमारा कुछ नहीं हो सकता। </p>
<p><strong>आए दिन विवाद व मारपीट</strong><br />मेले में जहां रोजाना सैकड़ों लोगों के आने का दावा किया जा रहा है। वहां उनकी सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है। मेले में कभी दुकानें लगाने को लेकर चकूबाजी हो रही है तो कभी आयोजकों व पुलिस कर्मियों के साथ ही मारपीट व धक्का मुक्की की जा रही है। </p>
<p><strong>नई डायरी नहीं छपी थी</strong><br />इधर गणेश मेला समिति के अध्यक्ष व  पूर्व पार्षद देवेन्द्र चौधरी मामा का कहना है कि मेला नगर निगम का नहीं है। यह स्थानीय लोगों की  मेला समिति द्वारा किया जा रहा है। चौधरी ने बताया कि जिसके द्वारा पार्किंग का संचालन किया जा रहा है उसने पूर्व में दशहरा मेले में ठेका लिया था। नई डायरी नहीं छपने से पुरानी पर्ची हीे देना शुरू कर दिया था। यह मामला जानकारी में आने पर पुरानी पर्चियां हटवाकर नई डायरी की गणेश मेले के नाम से पर्ची काटी जा रही है।</p>
<p><strong>केडीए का एरिया</strong><br />इधर इस बारे में नगर निगम कोटा दक्षिण के अतिरिक्त आयुक्त जवाहर लाल जैन से जानकारी चाही तो उनका कहना था कि मेला नगर निगम का नहीं है।  जिस जगह मेला लग रहा है वह श्रीनाथपुरम् क्षेत्र कोटा विकास प्राधिकरण के क्षेत्राधिकार में आता है। </p>
<p>इनका कहना<br />वहीं नगर निगम की दशहरा मेला व अन्य उत्सव आयोजन समिति के नव निर्वाचित अध्यक्ष विवेक राजवंशी ने इस सबंध में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि इस संबंध में कुछ भी कहने के लिए निगम अधिकारी ही अधिकृत है। </p>
<p><strong>जानकारी नहीं</strong><br />नगर निगम के नाम से इस तरह से कोई मेला आयोजित होने की जानकारी नहीं है। साथ ही निगम मेले के नाम पर पार्किंग चलाना गलत है।  इसे दिखवाएंगे। <br /><strong>- राजीव अग्रवाल, महापौर नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>
<p><strong>यह है कानूनी प्रावधान</strong><br />यदि शहर में अनाधिकृत तौर पर कोई ऐसा  कार्य हो रहा है तो यह स्वाभाविक है कि इसमें निगम  की मौन सहमति है। नगर निगम, पुलिस  व जिला प्रशासन सभी का दायित्व है कि जनता के साथ कोई भी व्यक्ति किसी तरह का छलावा नहीं करें। किसी भी निकाय के बैनर तले कोई कार्य किया जाता है तो निकाय के जिम्मेदार अधिकारियों का दायित्व बनता हैं कि वे ऐसे अनाधिकृत कार्य करने वाले व्यक्ति के खिलाफ   नियमानुसार संबंधित पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज  करवाएं। अनाधिकृत तौर पर सार्वजनिक मार्ग पर साइकिल स्टैंड का संचालन अपने आप में ही राष्ट्रीय संपत्ति का दुरुपयोग करने के समान है।  ऐसी स्थिति में नगर निगम ,पुलिस व जिला प्रशासन भारतीय न्याय संहिता के साथ साथ सार्वजनिक संपत्ति के दुरुपयोग के सम्बन्ध में कानूनी कार्रवाई करने के लिए सक्षम है। आमजन के साथ यह एक तरह से छलावा है और भारतीय न्याय संहिता की धारा 318 के तहत दण्डनीय अपराध की श्रेणी में आता है।  इसके तहत तीन वर्ष तक का कारावास या जुर्माना या दोनों से दंडित किए जाने का प्रावधान है। <br />- विवेक नंदवाना, एडवोकेट</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Sep 2024 14:48:26 +0530</pubDate>
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                <title>अतिक्रमण और गंदगी से सड़ रहा पुराना पशु मेला स्थल</title>
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                        <![CDATA[फेज दो पुराना पशु मेला स्थल में किशोरपुरा थाने के पास की जगह पर बड़े क्षेत्र में कचरे के ढेर लगे हुए हैं। 
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/old-animal-fair-site-rotting-due-to-encroachment-and-dirt/article-88693"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/atikraman-or-gandagi-s-sd-rha-purana-pashu-mela-sthal...kota-news-26-08-2024&#039;.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटौ। नगर निगम की ओर से अक्टूबर में आयोजित होने वाले दशहरा मेले में जहां दशहरा मैदान के फेज एक में अधिकतर दुकानदारों व झूले वालों का रूझान रहता है। वहीं इस पर पुराना पशु मेला स्थल फेज दो में भी व्यापारियों को लाने का प्रयास तो किया जा रहा है लेकिन वह अभी गंदगी और अतिक्रमण से सड़ रहा है। नगर निगम की ओर से दशहरा मैदान के फेज एक की तो सुरक्षा के लिए गार्ड लगा रखे हैं। उसे चार दीवारी बनाकर सुरक्षित किया हुआ है। हालांकि उसके बाद भी यहां से बिजली के तार व अन्य उपकरण चोरी हो रहे हैं। यहां दुकानों का स्वरूप भी काफी अच्छा है। जिससे अधिकतर व्यापारी व दुकानदारों का रूझान इसी में दुकानें लेने का अधिक रहता है। जबकि फेज दो में व्यापारियों व दुकानदारों का रूझान कम रहता है। </p>
<p><strong>कचरे का ढेर मार रहा दुर्गंध</strong><br />फेज दो पुराना पशु मेला स्थल में किशोरपुरा थाने के पास की जगह पर बड़े क्षेत्र में कचरे के ढेर लगे हुए हैं। यहां काफी समय से कचरा डाला जा रहा है। लेकिन कुछ दिन पहले उसे कचरे को हटाने की जगह उसे फेला दिया है। जिससे बरसात में यह कचरा सड़ने से दुर्गंध आने लगी है। इस मैदान से निकलने वाले लोगों को दुर्गंध का सामना करना पड़ रहा है। किशोरपुरा व साजी देहड़ा से एरोड्राम की तरफ जाने वाले अधिकतर लोग शॉर्ट कट के लिए पुराने पशु मेला स्थल की बीच सड़क से ही निकल रहे हैं। वर्तमान में जिस स्थान पर कचरे का ढेर लगा हुआ है। निगम की ओर से उस स्थान पर सर्कस लाने की योजना है। </p>
<p><strong>झूले व भोजननालय  तक लगते</strong><br />पशु मेला स्थल पर भी लोगों को आकर्षित करने के लिए यहां कई छोटे-बड़े झूले भी लगते हैं। उसके अलावा भोजनालय भी खुलते हैं। जिनमें रोटी सब्जी से लेकर दाल बाटी तक मिलते हैं। इन भोजनालयों में अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोग भोजनकर अपना पेश भरते हैं।मेला समिति का प्रयास है कि फेज दो मैदान में भी मेले जैसा माहौल रहे। यहां भी दुकानें लगे। इसके लिए समिति द्वारा इस बार सर्किस लाने और इसी मैदान में उसे लगाने की योजना है। </p>
<p><strong>किसान रंगमंच व पार्किंग पर अतिक्रमण</strong><br />पशु मेला स्थल पर निगम अधिकारियों की अनदेखी के चलते पूरे साल अतिक्रमण होता रहता है। यहां संवेदक द्वारा सीवरेज के  पाइप डाल दिए जाते हैं। खाना बदीश लोग टापरियां बनाकर अतिक्रमण कर लेते हैं। कई पशु पालक यहां पशु बांध देते हैं। कई लोग कचरा डाल देते हैं। ऐसे में दशहरामैदान का फेज दो मेला अवधि को छोड़ अधिकतर समय दुर्दशा का ही शिकार रहता है। इस मैदान में अम्बेडकर भवन के पीछे की तरफ किसान रंगमंच बनाया जाएगा। जहां किसानों के लिए कार्यक्रम होंगे। जबकि उसके पास से ट्रैफिक कार्यालय के बीच की जगह पर मेला अवधि के दौरान की पार्किंग बनाई जाएगी। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />फेज एक के साथ ही फेज दो मैदान में भी मेला भरे। यहां भी दुकानें लगे इसके लिए इस मैदान में सर्कस लाने का प्रयास किया जा रहा है। सर्कस के साथ ही यहां झूले भी लगान की योजना है। वहीं किसान रंगमंच व पार्किंग भी इसी मैदान पर रहेगी। हालांकि अभी मेला शुरू होने में समय है। उससे पहले फेज दो के मैदान को भी अतिक्रमण से मुक्त करवा दिया जाएगा। साथ ही यहां फेले कचरे को साफ करने व जमीन को समतल करने का काम भी किया जाएगा। किसी को कोई समस्या नहीं आने दी जाएगी। <br /><strong>- विवेक राजवंशी, अध्यक्ष मेला समिति </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 26 Aug 2024 19:11:34 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - दशहरा मेला: परम्परा कायम रखने के लिए मेला समिति आज करवाएगी गणेश पूजन </title>
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                        <![CDATA[  ऐसे में राष्ट्रीय दशहरा मेला 2024 के  गणेश पूजन की तिथि का निर्धारण व अन्य आवश्यक कार्यवाही के लिए आपके स्तर से निर्णय लिया जाना है।  ]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/asar-khabar-ka---dussehra-fair--to-maintain-tradition--the-fair/article-84930"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/photo-size16.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । दशहरा मेले के आयोजन में अभी करीब तीन माह से अधिक का समय शेष है। लेकिन उससे पहले ही इसके आयोजन में टकराव विवाद की स्थिति बनने लगी है। मेले के लिए देव शयनी से पहले गणेश पूजन की परम्परा से निगम अधिकारियों ने पल्ला झाड़ लिया है। ऐसे में मेला उत्सव आयोजन समिति की ओर से बुधवार को सुबह 8.30 बजे श्रीराम रंगमंच पर गणेश पूजन कराया जाएगा। दशहरा मेला तो अक्टूबर में आयोजित होता है। उस दौरान देव शयन रहने से उसके कार्यक्रमों की तैयारी के लिए देव शयनी एकादशी से पहले हर साल गणेश स्थापना व पूजन करवाने की परम्परा रही है। यह आयोजन नगर निगम की ओर से होता है। जिसमें अधिकारी व मेला समिति सभी मिलकर पूजन में शामिल होते हैं। पिछली कांग्रेस सरकार में बनी समिति मेले का आयोजन करती रही है। लेकिन इस बार सरकार बदल गई। ऐसे में कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा ने एक दिन पहले स्वायत्त शासन मंत्री से मुलाकात निगम की समितियों को भंग करने का आग्रह किया था। हालांकि अभी तक समितियां भंग नहीं हुई है। </p>
<p><strong>उत्तर आयुक्त ने दक्षिण आयुक्त को लिखा पत्र : </strong>असमंजस की स्थिति को देखते हुए कोटा उत्तर आयुक्त अनुराग भार्गव ने कोटा दक्षिण आयुक्त को एक पत्र लिखा है। जिसमें हवाला दिया कि कोटा उत्तर की महापौर व मेला उत्सव आयोजन समिति की अध्यक्ष का यू ओ नोट प्राप्त हुआ है। जिसमें मेले के गणेश पूजन के लिए कहा गया है। पत्र में लिखा कि वर्तमान में नगर निगम कोटा उत्तर में कोई समिति अस्तित्व में नहीं है।  कोटा दक्षिण में मेला व अन्य उत्सव आयोजन समिति का गठन हुआ था।  जिसमें कोटा उत्तर की महापौर को अध्यक्ष बनाया गया था।  ऐसे में राष्ट्रीय दशहरा मेला 2024 के  गणेश पूजन की तिथि का निर्धारण व अन्य आवश्यक कार्यवाही के लिए आपके स्तर से निर्णय लिया जाना है।  सूत्रों के अनुसार इस संबंध में कोटा दक्षिण आयुक्त की तरफ से कोई निर्णय नहीं लिया गया।</p>
<p><strong> मेला समिति ने ली गणेश पूजन की जिम्मेदारी :</strong> नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण आयुक्त की तरफ से देव शयनी के एक दिन पहले तक गणेश पूजन के बारे में कोई निर्णय नहीं करने पर मेला समिति की अध्यक्ष मंजू मेहरा की अध्यक्षता में उनके कक्ष में मंगलवार को समिति की बैठक हुई। जिसमें सभी सदस्यों को आमंत्रित किया गया। लेकिन अधिकतर के किसी ने किसी कार्य में व्यस्त होने से आधे ही सदस्य बैठक में शामिल हुए। बैठक में मेला समिति अध्यक्ष मंजू मेहरा के अलावा समिति के सदस्य व कोटा दक्षिण के उप महापौर पवन मीणा, सदस्य इसरार मोहम्मद, चेतना माथुर व अनूप कुमार अन्नू शामिल हुए। बैठक में गणेश पूजन की परम्परा को कायम रखने के लिए समिति की ओर से बुधवार को सुबह पूजन करवाने का निर्णय किया गया। समिति अध्यक्ष मंजू मेहरा ने बताया कि देव शयनी से पहले बुधवार को सुबह 7 से 9 बजे तक गणेश पूजन का मुहुर्त है। उसमें समिति की ओर से सुबह 8.30 बजे पूजन का तय किया गया है। </p>
<p><strong>समिति अपने खर्चे पर करवाएगी पूजन : </strong>मेला समिति सदस्य व कोटा दक्षिण उप महापौर पवन मीणा ने बताया कि  दशहरा मेला पूरे शहर का आयोजन है। उससे पहले गणेश पूजन की परम्परा है। जिसका निर्वहन किया जाएगा। अधिकारियों की तरफ से मंगलवार शाम तक कोई निर्णय या आदेश जारी नहीं हुआ है। इस पर अब समिति की ओर से अपने खर्चे पर ही गणेश पूजन कराया जाएगा। इसमें निगम से कोई बजट नहीं लिया जाएगा। पूजन सुबह 8.30 बजे दशहरा मैदान स्थित श्रीराम रंगमंच पर किया जाएगा। </p>
<p><strong>आयुक्त, महापौर व पार्षदों को खुद किए फोन :</strong> उत्तर की महापौर मंजू मेहरा ने बताया कि मेला समिति द्वारा गणेश पूजन का समय तय होने के बाद उन्होंने स्वयं कोटा दक्षिण के महापौर व अन्य सभी पार्षदों, नेता प्रतिपक्ष को पूजन में शामिल होने के लिए फोन किए हैं। साथ ही दोनों निगमों के आयुक्तों को भी फोन किए हैं। जितने भी सदस्य व अधिकारी आएंगे उनकी मौजूदगी में ही पूजन कर परम्परा को कायम रखा जाएगा। </p>
<p><strong>नवज्योति ने उठाया मुद्दा</strong><br />गौरतलब है कि गणेश पूजन की परम्परा को निभाने में देरी के संबंध में दैनिक नव’योति ने मंगलवार के अंक में समाचार प्रकाशित किया था। देव शयनी कल, नहीं हुआ दशहरा मेले का श्रीगणेश शीर्षक से पेज 5 पर समाचार प्रकाशित किया था। उस समाचार के बाद मेला समिति हरकत में आई। समिति ने पहल करते हुए गणेश पूजन करवाने का निर्णय किया। </p>
<p><strong>अधिकारियों ने नहीं दिया कोई जवाब</strong><br />गणेश पूजन को लेकर दोनों नगर निगमों के आयुक्तों को फोन कर उनसे बात करनी चाही। लेकिन किसी ने भी फोन रिसीव नहीं किया। जिससे उनकी तरफ से इस संबंध में कोई जवाब नहीं मिल सका। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jul 2024 11:35:38 +0530</pubDate>
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                <title>देव शयनी कल, नहीं हुआ दशहरा मेले का श्रीगणेश</title>
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                        <![CDATA[देव शयनी से पहले गणेश पूजन की टूट सकती है बरसों पुरानी परम्परा।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dev-shayani-tomorrow--dussehra-fair-s-shri-ganesh-did-not-take-place/article-84871"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/photo-size-(8)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की ओर से हर साल देव शयनी एकादगी से पहले दशहरा मेले की गणेश स्थापना व पूजन करवाने की बरसों पुरानी परम्परा इस बार टूटती नजर आ रही है। बुधवार को देव शयनी एकादशी है लेकिन कोटा उत्तर महापौर व मेला समिति अध्यक्ष के दो-दो यू ओ नोट के बाद भी एक दिन पहले तक गणेश पूजन की तारीख तक तय नहीं की जा सकी। नगर निगम की ओर से हर साल दशहरा मेले का आयोजन किया जाता है। पहले एक ही नगर निगम होने से इसमें कोई विवाद नहीं था। लेकिन पिछली कांग्रेस सरकार में दो नगर निगम बनाने और मेला समिति में कोटा उत्तर की महापौर को अध्यक्ष बनाने के बाद से आयोजन को लेकर विवाद की शुरुआत हो गई थी। हालांकि पिछले साल काफी खींचतान के बाद भी मेले का आयोजन सफलता पूर्वक सम्पन्न हो गया था। इस बार भी अक्टूबर में दशहरा मेला भरवाया जाना है। जिसके लिए हर साल देव शयनी एकादशी से पहले बुधवार को निगम की ओर से गणेश स्थापना व पूजन का कार्यक्रम कराया जाता है। जिससे देव शयन के दौरान भी 4 माह में मेले से संबंधित बैठकें व तैयारी की जा सके। </p>
<p><strong>पिछली बार श्रीराम रंगमंच पर हुई थी स्थापना</strong><br />पहले गणेश स्थापना व पूजन का कार्यक्रम निगम भवन स्थित मेला प्रकोष्ठ में होता था। पिछले साल भी इस परम्परा का निर्वहन करते हुए दशहरा मैदान स्थित  श्रीराम रंगमंच पर पूजन किया गया था। लेकिन इस बार बुधवार को देव शयनी एकादगी है और सोमवार रात तक इस पूजन की तैयारी से संबंधित कोई जानकारी मेला समिति अध्यक्ष से लेकर किसी भी सदस्य को नहीं थी। </p>
<p><strong>मेला अध्यक्ष होने के नाते महापौर से की बात</strong><br />कोटा दक्षिण के कांग्रेस पार्षद व मेला समिति के सदस्य इसरार मोहम्मद ने बताया कि मेला समिति का सदस्य होने के नाते उन्होंने कोटा उत्तर महापौर व मेला समिति की अध्यक्ष को इस संबंध में कई बार कहा। सोमवार को भी उनसे फोन पर बात की। जिसमें गणेश पूजन व स्थापना की परम्परा का निर्वचन करने को कहा गया। उनकी तरफ से यही जवाब मिला कि उन्होंने यू ओ नोट लिख दिया। तारीख अधिकारियों को तय करनी है। </p>
<p><strong>अधिकारियों से नहीं हो सका सम्पर्क</strong><br />मेले की गणेश स्थापना व पूजन के संबंध में जब नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण के आयुक्तों से  बात करने का प्रयास किया तो उनसे सम्पर्क नहीं हो सका। उन्होंने फोन ही रिसीव नहीं किए। </p>
<p><strong>मेला समिति की बैठक बुलाते तो नहीं होती समस्या</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के नेता प्रतिपक्ष और मेला समिति के सदस्य विवेक राजवंशी ने बताया कि मेले से पहले गणेश पूजन की परम्परा का निर्वबन होना चाहिए। अधिकारियों को समय पर इसकी तैयारी करनी चाहिए। मेला समिति की अध्यक्ष को इस संबंध में समिति सदस्यों की बैठक आयोजित करनी चाहिए थी। जिससे सभी मिलकर अधिकारियों पर दबाव बनाते तो समय रहते अधिकारी इसके प्रति गम्भीर होते। लेकिन सिर्फ यू ओ नोट लिखना ही पर्याप्त नहीं है। राजवंशी ने कहा कि दशहरा मेले का आयोजन शहर का बड़ा आयोजन हैं। दोनों निगम मिलकर काम करें लेकिन मेला भरवाने का अधिकारी कोटा दक्षिण को है।</p>
<p><strong>परम्परा टूटी तो परिणाम भुगतना पड़ेगा</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के उप महापौर व मेला समिति के सदस्य पवन मीणा का कहना है कि देव शयनी एकादशी से पहले हर साल गणेश स्थापना व पूजन किया जाता है। उस परम्परा का निर्वचन किया जाना चाहिए। लेकिन एक दिन पहले तक उसकी तैयारी व तारीख के संबंध में मेला समिति सदस्यों को कोई जानकारी नहीं दी गई है। यदि अधिकारी व सरकार के जनप्रतिनिधि भगवान से जुड़ी परम्परा का निर्वचन नहीं करते हैं तो उन्हें परिणाम भुगताना पड़ सकता है। </p>
<p><strong>दो-दो यू ओ नोट लिखे, मौखिक भी कहा</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर की महापौर व मेला उत्सव आयोजन समिति की अध्यक्ष मंजू मेहरा ने बताया कि देव शयनी एकादशी से पहले गणेश पूजन की परम्परा बनी हुई है। इस परम्परा को बनाए रखने के लिए कोटा उत्तर व दक्षिण आयुक्त को दो -दो यू ओ नोट लिखे जा चुके हैं। पहले यू ओ नोट पर कोई कार्रवाई नहीं होने से सोमवार को फिर से यू ओ नोट लिखा है। साथ ही आयुक्त को कई बार मौखिक भी कहा जा चुका है। वहां से यही जवाब मिलता है कि पूजन करेंगे लेकिन एक दिन पहले तक पूजन से संबंधित कोई जानकारी आयुक्त की तरफ से नहीं दी गई है। जबकि पहले सी तैयारी कर तारीख का आदेश जारी किया जाता है। संबंधित अधिकारियों व मेला समिति सदस्यों को जानकारी देकर सभी को आमंत्रित किया जाता है। देव शयनी एकादशी से पहले गणेश स्थापना व पूजन नहीं कर बरसो पुरानी परम्परा को खत्म किया जा रहा है। महापौर ने कहा कि अभी तक सरकार ने समितियां भंग नहीं की है। समिति भंग हो भी जाए तो मेला शहर का आयोजन है। अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे इसका आयोजन करें। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jul 2024 15:44:20 +0530</pubDate>
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                <title>ट्रेड फेयर के नाम निगम से रियायत लेकर निजी फर्म कमा रही हर दिन लाखों रुपए</title>
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                        <![CDATA[मेला समझकर घूमने आने वालों को मजबूरी में अपनी जेब कटानी पड़ रही है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/private-firm-is-earning-lakhs-of-rupees-every-day-by-taking-concession-from-the-corporation-in-the-name-of-trade-fair/article-68533"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/trade-fair-k-naam-nigam-s-riyayat-lekr-niji-farm-kma-rhi-hr-din-lakho-rupaye...kota-news-29-01-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की ओर से दशहरा मेले के अवसर पर तो फेज दो पशु मेला स्थल पर दुकानें व झूले लगाने वालों को महंगी दर पर नीलामी में जगह दी जाती है। दूसरी तरफ गुजरात के राजकोट की फर्म ने उसी जगह पर ट्रेड फेयर मेला लगाने के नाम पर निगम से रियायती दर पर जमीन ले ली और लोगों से मेले में प्रवेश शुल्क के नाम पर 100  रुपए टिकट वसूल किया जा रहा है। पार्किंग शुल्क भी इतना अधिक कि दो पहिया वाहन के 20 रुपए वसूल किए जा रहे हैं। मेला समझकर घूमने आने वालों को मजबूरी में अपनी जेब कटानी पड़ रही है। </p>
<p><strong>डेढ़ लाख की जगह 80 हजार प्रतिदिन में ली जगह</strong><br />नगर निगम की ओर से हस्त शिल्प व छोटे व्यापारियों को प्रोत्साहित करने के लिए पशु मेला स्थल को रियायती दर पर दिया जाता है। इस जगह का कामर्शियल शुल्क 1.5 लाख रुपए प्रतिदिन है  जब कि इस स्थान को गुजरात की फर्म को मात्र 80 हजार रुपए प्रतिदिन रियायती दर पर पर किराए पर दे दिया। रियायती दर पर जमीन किराए देने पर निगम को प्रतिदिन 70 हजार रुपए का घाटा उठाना पड़ता है। इतना ही नहीं फर्म द्वारा लोगों से जबरन 100 रुपए प्रवेश टिकट  वसूल किए जा रहे हैं। जिससे परिवार समेत मेले में घूमने जाने वालों को या तो मजबूरी में प्रति व्यक्ति 100 रुपए टिकट लेना पड़ रहा है या फिर निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा है। 26 जनवरी व  रविवार समेत अन्य अवकाश के दिनों में लोग बड़ी संख्या में मेला देखने पहुंचे हैं। </p>
<p><strong>24 दिसम्बर से 24 फरवरी तक 63 दिन का मेला</strong><br />दशहरा मेला हो या अन्य कोई मेला 10 से 20 दिन ही चलता है। लेकिन गुजरात के राजकोट की महावीर पोली प्रिंट फर्म ने इस जगह पर मेले के लिए 24 दिसम्बर से 24 फरवरी तक 63 दिन के लिए यह जगह किराए पर ली है। फर्म के निलेश एंड तुराखिया ने इस जगह को रियायती दर पर उपलब्ध करवाने के लिए नगर निगम कोटा दक्षिण के महापौर को आवेदन किया था।  महापौर ने ट्रेड फेयर व संस्था के बताए अनुसार शहर के लोगों को ध्यान में रखते हुए फर्म को रियायती दर पर जगह देने की अनुशंसा की। जिस पर सभी स्तर पर अधिकारियों के द्वारा नोट शीट चलाई गई। उसके बाद यह जगह रियायती दर पर दी गई। </p>
<p><strong>फिश एक्यूरम फ्री का लालच</strong><br />फर्म द्वारा लोगों को मेले में फिश एक्यूरम फ्री दिखाने के नाम पर लालच दिया जा रहा है। वहां जाने पर पता चलता है कि मेले में प्रवेश करने के लिए पहले 100 रुपए का टिकट लेना होगा। उसके बाद ही प्रवेश मिलेगा। प्रवेश के समय ही फिश एक्यूृरम की टनल से होकर लोगों को गुजरना होगा। उसके बाद अंदर मेला दिखेगा। जबकि मेले में अंदर कोई विशेष आकर्षण भी नहीं है। उससे पहले लोगों को पार्किंग में वाहन खड़े करने होंगे। जिसमें दो पहिया वाहन की पार्किंग के ही 20 रूपए वसूल किए जा रहे हैं। </p>
<p><strong>मेले के नाम पर लोगों से वसूली</strong><br />नगर निगम की ओर से दशहरा मैदान में मेला लगा है। उसे देखने के लिए परिवार के साथ आया था। लेकिन यहां तो अंदर जाने के ही 100 रुपए टिकट ले रहे हैं। परिवार के 5 जनों को अंदर लेकर जाना ही इतना महंगा है तो अंदर भी महंगाई होगी। इसलिए इतनी दूर से आकर भी बिना मेला देखे जाना पड़ रहा है। <br /><strong>- घांसीलाल, कैथून </strong></p>
<p>मेला तो नि:शुल्क ही लगता है। मेले में दुकानों पर खरीदारी करने का पैसा लगना तो मानते हैं। लेकिन प्रवेश के 100 रुपए लेना गलत है। मैदान में इतने मेले लगते रहे हैं किसी का भी टिकट नहीं लगता। फिश एक्यूरम जिसे देखना हो उससे 100 रुपए ले सकते हैं लेकिन सभी को जबरक फिश एक्यूरम नि:शुल्क दिखाने के नाम पर 100 रुपए लेना वसूली है। नगर निगम  को इस बारे में कार्रवाई करनी चाहिए। <br /><strong>- महावीर चौहान, रामपुरा</strong></p>
<p>मेले में 100 रुपए लेना गलत है। नगर निगम की इस जगह पर अन्य संस्थाएं भी मेला लगाती हैं लेकिन उनमें किसी में भी अंदर जाने का टिकट नहीं लगता। दो पहिया वाहन की पार्किंग के 20 रुपए लेना भी गलत है। 10 रुपए से ज्यादा तो कहीं भी नहीं लगते। जबकि मेले में अंदर किसी तरह की कोई सुविधा भी नहीं है। पार्किंग किराया अधिक वसूलने का लोग विरोध करते हैं तो वहां लगे लोग उनसे अभद्रता करते हैं।  <br /><strong>- लोकेश मेघवाल, साजी देहड़ा</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />नगर निगम ने राजकोट की फर्म को रियायती दर पर मेले के लिए जगह दी है।  लेकिन फर्म तो व्यवसाय कर रही है। साथ ही लोगों से प्रवेश टिकट के नाम पर अवैध वसूली कर रही है। पार्किंग शुल्क भी अधिक है। इससे निगम को राजस्व नुकसान होने के साथ ही शहर की जनता के साथ धोखाधड़ी है। इस बारे में आयुक्त से भी मुलकात की थी। निगम को कार्रवाई करनी चाहिए। <br /><strong>- सुरेन्द्र राठौर, पार्षद नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>
<p>फर्म ने ट्रेड फेयर के लिए रियायती दर पर जगह देने के लिए आवेदन किया था। रियायती दर पर 63 दिन के लिए 63 लाख रुपए निगम को राजस्व प्राप्त हो रहा था। उसे देखते हुए अनुशंसा की थी। लेकिन प्रवेश टिकट के 100 रुपए सभी से लेने और पार्किंग का किराया अधिक लेने की जानकारी नहीं है। उसका पता करवाएंगे। <br /><strong>- राजीव अग्रवाल, महापौर नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>
<p>प्राइवेट फर्म का मेला है।  नगर निगम से लम्बे समय के लिए जगह किराए पर ली है। जिसका लाखों रुपए किराया दिया है। मेले के साथ ही एक्यूरम है। उसका शुल्क लिया जा रहा है। पार्किंग का ठेका अन्य व्यक्ति के पास है। मेला नगर निगम का या सरकारी होता तो प्रवेश नि:शुल्क रहता। प्राइवेट फर्म का मेला होने से टिकट तो लगेगा। <br /><strong>- निलेश एच तुराखिया, प्रोपराइटर महावीर पोली प्रिंट</strong> </p>
<p>मेले के लिए पशु मेला स्थल की जगह निगम ने दी है। फर्म ने उसका शुल्क भी जमा कराया है। लेकिन फर्म द्वारा लोगों से प्रवेश टिकट के 100 रुपए सभी से और पार्किंग का किराया इतना अधिक लेने की जानकारी नहीं है। उसका पता करवाएंगे। यदि गलत हो रहा है तो नियमानुसार कार्रवाई करेंगे। <br /><strong>- सरिता सिंह, आयुक्त नगर निगम कोटा दक्षिण </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jan 2024 17:30:21 +0530</pubDate>
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                <title>दशहरा मेले ने दिया कोटा को 200 टन से अधिक कचरा</title>
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                        <![CDATA[नगर निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार कोटा उत्तर व दक्षिण से रोजाना करीब 400 टन से अधिक कचरा निकल रहा है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dussehra-fair-gave-more-than-200-tons-of-garbage-to-kota/article-61723"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-11/gan1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की ओर से आयोजित 130 वें राष्ट्रीय दशहरा मेले का गुरूवार को समापन होने वाला है। 17 दिवसीय इस मेले के दौरान करीब 200 टन कचरा निकला है। जबकि इतना कचरा नगर निगम कोटा दक्षिण क्षेत्र में रोजाना निकल रहा है। नगर निगम की ओर से वैसे तो दशहरा मेले का आगाज 15 अक्टूबर को नवरात्र स्थापना के साथ ही हो गया था। उस दिन सुबह नवरात्र पूजन व शाम को ध्वजारोहण के साथ उद्घाटन हुआ था। रात को रामलीला का आयोजन शुरू हो गया था। लेकिन उस समय तक मेले में दुकानों के आवंटन का काम ही पूरा नहीं हुआ था। जिससे करीब 10 दिन तक तो मेला परिसर सूना पड़ा रहा। दुकानों, झूलों व कच्चे फूड कोर्ट के आवंटन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दुकानें पूरी तरह से 24 अक्टूृबर को दशहरे के दिन से सजी। उसी दिन से मेले में रौनक बढ़ी और लोग घूमने के लिए आने लगे। </p>
<p><strong>शुरुआती 8 दिन में करीब 5 टन रोजाना निकला कचरा</strong><br />नगर निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार मेला 24 अक्टूबर को दशहरे के दिन से परवान चढ़ा। शुरुआती 8 दिन तक लोगों की संख्या कम रहने से कचरा भी कम निकला। यहां निगम की ओर से दो बड़े कचरा पाइंट बनाए गए थे। साथ ही मैदान में सफाई के लिए तीन पारियों में 40-40 सफाई कर्मचारी लगाह गए थे। जानकारी के अनुसार शुरुआती 8 दिन में रोजाना 5 टन करीब कचरा ही निकला था। इस तरह से 8 दिन में करीब 40 टन कचरा निकला।</p>
<p><strong>कोटा दक्षिण निगम में निकल रहा 200 टन कचरा रोजाना</strong><br />नगर निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार कोटा उत्तर व दक्षिण से रोजाना करीब 400 टन से अधिक कचरा निकल रहा है। जिसमें से कोटा दक्षिण निगम के 80 वार्ड से रोजाना करीब 200 टन कचरा निकल रहा है। जितना कचरा रोजाना एक निगम क्षेत्र से निकल रहा है। उतना कचरा दशहरा मेले के दौरान निकला है। </p>
<p><strong>मेले में गीला कचरा अधिक</strong><br />मेले में रोजाना हजारों की संख्या में लोग शहर व दूरदराज से घूमने के लिए आए। दशहरे पर रावण दहन के दिन करीब एक लाख से अधिक लोग मौजूद थे। वहीं उसके बाद गिनती के ही दिन ऐसे रहे जब लोगों की संख्या अधिक रही। अधिकतर समय लोग कम ही घूमने पहुंचे। ऐसे में यहां घूमने आने वाले लोगों द्वारा खाने-पीने का लुत्फ लिया। दुकानदारों व लोगों के यहां आने से बड़ी मात्रा में कचरा भी हुआ। सबसे अधिक गीले कचरे की मात्रा रही। सूखा कचरा भी निकला लेकिन वह अपेक्षाकृत कम रहा। </p>
<p><strong>1 नवम्बर के बाद 15 से 20 टन कचरा निकला</strong><br />अक्टूबर का वेतन मिलने के बाद लोग मेले में अधिक संख्या में घूमने जाने लगे। जिससे वहां आने वालों की संख्या अधिक रही। अधिक लोग आने से खाने-पीने के सामानों की बिक्री अधिक हुई। दुकानदारों द्वारा साफ सफाई करने के बाद  सुबह-शाम कचरा निकला। जिससे सफाई कर्मचारियों द्वारा साफ कर कचरा पॉइंट पर एकत्र किया गया। वहां से रोजाना दो ट्रेक्टर ट्रॉलियों व टिपरों से कचरा उठाया गया। इस हिसाब से 1 नवम्बर से लेकर रोजाना करीब 15 से 20 टन कबरा निकला। जिसमें गीले कचरे की मात्रा अधिक होने व वजन अधिक होने से क बार इसकी मात्रा अधिक भी रही।  इस हिसाब से 1 नवम्बर के बाद करीब 150 टन से अधिक कचरा निकला। दशहरा मेले के दौरान गीला व सूखा समेत कुल 200 टन से अधिक कचरा निकला है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />दशहरा मेले में सफाई के लिए तीन पारियों में सफाई कमचारी लगाए गए हैं। मेला परिरस में दो कचरा पाइंट बनाए गए। जहां से रोजाना दो ट्रेक्टर ट्रॉलियां व टिपरों से कचरा उठाया जा रहा है। मेले में शुरुआत में भीड़ कम होने से करीब 5 टन  कचरा रोजाना निकला था। वहीं अंतिम 8 से 9 दिन में भीड़ अधिक होने से खाने-पीने के सामानों की बिक्री भी अधिक हुई। गीला कचरे का वजन अधिक होने से अंतिम दिनों में रोजाना करीब 15 से 20 टन कचरा निकला है। </p>
<p>इस तरह से पूरे मेला अवधि के दौरान करीब  200 टन कचरा निकला होगा। इस कचरे को साजी देहड़ा स्थित आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन पर भेजा गया। जहां से उसे नांता स्थित ट्रेचिंग ग्राउंड में भेजा गया। <br /><strong>- रिचा गौतम, स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम कोटा दक्षिण </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Nov 2023 14:57:19 +0530</pubDate>
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                <title>बड़े कलाकारों ने दी है कोटा के दशहरा मेले को राष्ट्रीय पहचान </title>
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                        <![CDATA[मैसूृर के मेले के बाद कोटा का दशहरा मेला सबसे बड़ा व अधिक दिन तक चलने वाला मेला है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/big-artists-have-given-national-recognition-to-kota-s-dussehra-fair/article-60865"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/bde-kalakaro-ne-di-h-kota-k-dussehra-mele-ko-rashtriye-pehchaan...kota-news-30-10-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा का दशहरा मेला इस बार अपने 130 साल पूरे कर चुका है। नवरात्र स्थापना से लेकर धन तेरस तक चलने वाला यह मेला दशहरो के बाद परवान पर चढ़ता है। इस मले में होने वाले कार्यक्रमों में फिल्मी कलाकारों से लेकर ख्यातनाम कवि तक अपने प्रस्तुति दे चुके हैं। जिससे इस मेले की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर बनी है। नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की ओर से आयोजित इस बार दशहरा मेला 15 अक्टूबर को नवरात्र स्थापना के दिन विधिवत शुरू हुआ था।  24 अक्टूबर को दशहरे के दिन रावण दहन हुआ। उसके बाद अगले दिन से मेला भरना शुरू हुआ। मेले के दौरान कार्यक्रमों की शुरुआत भी हो चुकी है। इस बार भी मेले में विजयश्री रंगमंच पर 9 नवम्बर तक अलग-अलग कार्यक्रम होंगे। जिनमें कवि सम्मेलन से लेकर सिने संध्या, पंजाबी नाइट, भोजपुरी कार्यक्रम व भजन संध्या होगी। वहीं उससे पहले कोरोना काल के दो साल को छोड़कर हर साल बड़े-बड़े कलाकार यहां आकर प्रस्तुति दे चुके हैं।</p>
<p><strong>सुलक्षणा पंडित से लेकर मीका सिंह तक</strong><br />कोटा का दशहरा मेला अब राष्ट्रीय दशहरा मेला कहलाता है। ज़सकी राष्ट्रीय पहचान यहां होने वाले कार्यक्रमों में देशभर से आने वाले कलाकारों के कारण बनी है।  जानकारों के अनुसार कोटा में हर साल कई कार्यक्रम होते हैं। जिनमें बड़े-बड़े कलाकार आते हैं। गत वर्षों में सुलक्षणा पंडित, हिमेश रेशमिया, बप्पी लहरी, सोनू निगम, दलेर मेहंदी, मीका सिंह, जगजीत सिंह, महेन्द्र कपूर, पंकज उधास, गुलाम अली, गुरु रंधावा  समेत कई बड़े कलाकार आ चुके हैं। वहीं जीनत अमान मेले के उद्घाटन कार्यक्रम में आ चुकी हैं।  हेमा मालिनी को बुलाने के लिए प्रयास किए गए थे। जिसके लिए निगम की ओर से करीब 50 हजार रुपए एडवांस भी दे दिए गए थे। लेकिन किसी कारण से वह कोटा मेले में नहीं आ सकीे थी। इस मामले में तत्कालीन कांग्रेस पार्षद की ओर से अदालत में वाद तक दायर किया था। लेकिन कई साल तक मामला चलने के बाद भी कोई लाभ नहीं हो सका। </p>
<p><strong>इन कवियों से सज चुका है कोटा का मंच</strong><br />कोटा के दशहरा मेले की पहचान देश के चुनिंदा मेले में शुमार है। मैसूृर के मेले के बाद कोटा का दशहरा मेला सबसे बड़ा व अधिक दिन तक चलने वाला मेला है। दशहरा मैदान स्थित विजय श्री रंगमंच पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देश के कई ख्यातनाम कवियों से सज चुका है। कोटा आने वाले कवियों में महादेवी वर्मा से लेकर राम धारी सिनह दिनकर जैसे कवि आ चुके हैं। वहीं वरिष्ठ कवि नीरज, काका हाथरसी, शैल चतुर्वेदी, सुरेन्द्र शर्मा, अरुण जैमिनी, हरिओम पंवार, कुमार विश्वास, कविता ुतवारी, अनामिका अंजुम, शैलेष लोढ़ा, कुंवर बैचेन, मुनवव्वर राणा के अलावा  राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले कोटा के जगदीश सोलंकी व अतुल कनक जैसे कवि व साहिय्कार शामिल हैं। इनके अलावा कोटा के मेले में राष्ट्रीय व अंतर राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी और पहलवान सुशील कुमार समेत अन्य खिलाड़ी भी अपना प्रदर्शन कर चुके हैं। </p>
<p><strong>इस बार भी आएंगे गुरु रंधावा</strong><br />इधर मेले में इस बार भी बड़े कार्यक्रम होंगे। जिनमें अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में नामचीन कवियों के साथ ही सिनेमा जगत के कई कलाकार भी आएंगे। पंजाबी नाइट में गुरु रंधावा के आने का कार्यक्रम है। वहीं 8 नवम्बर को होने वाली सिने संध्या(स्टार नाइट) के लिए निगम की ओर से 60 लाख रुपए की अल्प कालीन निविदा जारी की गई है। जिसमें भी किसी बड़े कलाकार को बुलाने का कार्यक्रम है। कार्यक्रम के कलाकार का पता 1 नवम्बर को निविदा खुलने पर चलेगा। नगर निगम के मुख्य अभियंता व अतिरिक्त मेला अधिकारी प्रेम शंकर शर्मा ने बताया कि मेले में अब तक अधिकतर कार्यक्रम तय हो चुके हैं। कार्यक्रमों के कलाकारों के चयन में समय लग रहा है। इसका कारण विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगना रहा है। मेला समिति की बैठक में कार्यक्रम व कलाकार तय नहीं हुए थे। अब उसका काम तेजी से किया जा रहा है। शीघ्र ही इस बार के सभी कलाकार भी तय हो जाएंगे। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Oct 2023 15:20:18 +0530</pubDate>
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                <title>इस बार व्यापारियों को रास नहीं आ रहा दशहरा मेला</title>
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                        <![CDATA[ मेला परिसर में जगह आवंटन नहीं होने से पुलिस वाले शाम के समय मेला प्रागंण से बाहर निकाल रहे जिससे भारी परेशानी हो रही है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/this-time-traders-are-not-liking-dussehra-fair/article-60698"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/gan1.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। दशहरा मेला धीरे धीरे परवान चढ़ रहा है लेकिन इस बार छोटे व्यापारियों को 130 वां दशहरा मेला रास नहीं आ रहा है। व्यापारियों को कहना है कि पिछले साल की अपेक्षा इस बार छोटे व्यापारियों का धंधा नहीं होने से निराश नजर आ रहे है। रावण दहन से लेकर आज चार दिन होने आए लेकिन इन चार दिन में हजार रुपए रोज का भी माल नहीं बिक रहा है। ऐसे में इस बार खर्चा निकालना मुश्किल हो रहा है। मेला परिसर में जगह आवंटन नहीं होने से पुलिस वाले शाम के समय मेला प्रागंण से बाहर निकाल रहे जिससे भारी परेशानी हो रही है। दशहरा मेला में आए व्यापारियों की परेशानी उन्हीं की जुबानी।</p>
<p><strong>15 दिन में 2 हजार के आइटम ही बिके</strong><br />इस बार का दशहरा मेला फ्लाप दिखाई दे रहा है। दिल्ली से यहां चीनी मिट्टी के आइटम बेचने के लिए 15 दिन पहले आए लेकिन इस बार मेले में ना तो कोई बड़ा कार्यक्रम हो रहा ना ही कोई बड़े कलाकार आ रहे है। मेला देखने जो लोग आ रहे वो झूला चकरी का आनंद लेकर निकल जा रहे है। पिछले अच्छा धंधा हुआ इस बार तो 15 दिन में 2 हजार रुपए के ही आइटम ही बिके है। इस बार तो खर्चा निकालना मुश्किल हो रहा है। मेला भी इस बार कार्यक्रम नहीं होने से 12.30 ही खत्म हो रहा है। आचार संहिता की भेंट चढ़ता नजर आ रहा इस बार का मेला। <br /><strong>- गोविंदराम, चीनी मिट्टी के आइटम के विक्रेता</strong></p>
<p><strong>एलईडी और सजावटी लाइट के ग्राहक नहीं</strong><br />दस साल का था तब से मैनपुरी यूपी से इस दशहरा मेला में अपने पिता के साथ सजावटी सामान, इलेक्ट्रानिक आइटम, एलएडी लाइट बेचते आ रहे है। आज में 26 साल का हो गया लेकिन पहली बार दशहरा मेला में ग्राहकी नहीं हो रही है। पिछले साल प्रतिदिन डेढ से दो हजार का माल आसानी से बिक जाता था। शुरुआत चार दिन में दो बार माल मंगवा लेते थे लेकिन इस बार लोग माल कम पूछपरख ज्यादा करने आ रहे है। मेले पर इस बार सारे कार्यक्रम निरस है। जिससे पब्लिक कम आ रही है। माल कैसे बिकेगा यह चिंता सता रही है।<br /><strong>- विवेक, इलेक्ट्रानिक आइटम विक्रेता</strong></p>
<p><strong>चार दिन में हजार रुपए का माल भी नहीं बिका</strong><br />आगरा से दशहरा मेला में हर साल गजक रेवडी, आगरा का पेठा बेचने के लिए 30 से अधिक लोग आते है। रावण दहन से आज चार दिन हो गए लेकिन हजार रुपए का माल भी नहीं बिका पिछले साल रावण दहन से ही तीन से साढे तीन हजार रुपए रोज का माल बिक जाता था। इस बार मेले में आचार संहिता से कार्यक्रम नहीं हो रहे जिससे लोग कम आ रहे है। मेले में जो लोग आ रहे वो झूला चकरी का आनंद लेकर निकल जाते है। इस बार खर्चा निकलना मुश्किल हो रहा है। पुलिस परेशान कर रही । पिछली बार 1965 की रसीद काटी इस बार अभी तक जगह तक आवंटन नहीं की है। ऐसे शाम के समय पुलिस वाले मेला परिसर बाहर निकाल देते है।<br /><strong>- राजवीर, गजक रेवडी विक्रेता </strong></p>
<p><strong>छह साल में पहली बार आ रही परेशानी</strong><br />जोधपुर व जयपुर से आर्टिफिशियल ज्वैलरी व श्रृंगार प्रसाधन की सामग्री बेचने करीब 20 परिवार को इस बार मेले में माल बेचने में परेशानी आ रही है। खरीदार कम और पूछपरख वाले ज्यादा आ रहे है। पिछले छह साल से अनवरत इस दशहरा मेला में माल बेचने आ रहे है पहली बार मेला सूना नजर आ रहा है। 5 लाख माल लेकर एक एक महिला आई है लेकिन अभी तक किसी ने हजार से डेढ हजार रुपए का माल नहीं बेचा है। उधार में माल लेकर आए है। समय पर माल नहीं बिका तो क्रेडिट खराब होने का डर है। <br /><strong>- योगेशी बाई, आर्टिफिशियल ज्वैलरी विक्रेता</strong></p>
<p><strong>पानी पुरी चाट बेचना भी हो गया मुश्किल</strong><br />ग्वालियर से करीब 25 लोग पानी पुरी, पताशा चाट का ठेला लेकर आए है। लेकिन मेला इस बार फीका ही नजर आ रहा है। पिछले साल दशहरा मेला शुरू होते ही 3 से 4 हजार रुपए के पताशा चाट कचोरी बेच देते थे। इस बार रोज 500 रुपए का धंधा हो रहा है। ऐसे में घर किराया ओर खाने का खर्चा भी नहीं निकल रहा है। जगह नहीं मिलने से कल पुलिस वालों ने डंडे मारकर मेला परिसर से बाहर निकाल दिया। पताश तोड दिए जिसे तीन हजार का नुकसान हुआ। दो दिन ओर इंतजार करेंगे ग्राहकी नहीं बढ़ी तो घर लौट जाएंगे। घाटा खाकर धंधा करने से अच्छा ग्वालियर में माल बेचेंगे। इस बार दीपावली फीकी मनेंगी।     <br /><strong>- राम खिलावन, चाट पानी पुरी विक्रेता</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Oct 2023 14:01:07 +0530</pubDate>
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                <title>जेब भरकर ले जाएं, मेले में महंगाई की मार, खानपान हुआ महंगा</title>
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                        <![CDATA[ दुकान किराए पर लेने से लेकर कारीगर रखने और घे तेल व इंधन तक महंगा हो गया है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/take-it-with-your-pockets-full-inflation-hits-the-fair-food-becomes-expensive/article-60446"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/jeb-bhrkr-le-jaye,-mele-me-mehngayi-ki-maar,-khan-paan-hua-mehnga...kota-news-25-10-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की ओर से 130 वें राष्ट्रीय दशहरा मेले को विधिवत शुरु हुए तो दस दिन हो गए। मंगलवार को दशहरे पर रावण का दहन भी कर दिया गया। लेकिन अभी तक भी दशहरा मेला परवान पर नहीं चढ़ सका है। अधिकतर दुकानें व मैदान खालीे पड़ा हुआ है। दशहरा मेले पर इस बार महंगाई की मार नजर आ रही है। मेले के दौरान फूड कोर्ट में सबसे अधिक पसंद किए जाने वाले खाद्य पदार्थो में नसीराबाद का कचौड़ा व गोभी के पकौडे शामिल हैं। लेकिन इस बार ये 400 रुपए किलो में बिक रहे हैं। 100 रुपए पाव मिलने से उसमें 7 से 8 पकौड़ी व कचौड़े का जरा सा हिस्सा ही आ रहा है। जिससे एक परिवार में 4 से 5 जनों के जाने पर उनके लिए पकौड़ी व कचौड़ा खाना काफी महंगा पड़ रहा है। पहले कचौड़ा नसीराबाद का और गोभी की पकौड़ी बारां की प्रसिद्ध थी। लेकिन अब स्थानीय स्तर पर बनने के बाद भी भाव वहीं के हिसाब से लग रहे हैं। हालांकि दुकानदारों का कहना है कि महंगाई सभी जगह बढ़ी है। दुकान किराए पर लेने से लेकर कारीगर रखने और घे तेल व इंधन तक महंगा हो गया है। उसका कुछ तो फर्क पड़ेगा। </p>
<p><strong>दुकानें खाली, कई दुकानदार तैयारी में जुटे</strong><br />जिस तरह से दशहरा मेले का आयोजन हो रहा है। उससे मेले पर विधानसभा चुनाव की आचार संहिता का असर दिख रहा है। इस बार अभी तक मेले के दौरान वैसी रंगत देखने को नहीं मिली है। एनवक्त तक दुकानों व झूलों के आवंटन की प्रक्रिया की गई। दिल्ली व गाजियाबाद से आए दुकानदारों का कहना है कि इस बार दुकानों का आवंटन देरी से होने के कारण सामान देरी से लेकर आए। जिससे समय अधिक लग रहा है। </p>
<p><strong>आचार संहिता का असर</strong><br />दशहरा मेला शुरू होने से पहले ही विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लग गई थी। जिससे मेला समिति का दखल मेले के आयोजन से समाप्त हो गया। वहीं अधिकारियों के हाथ मेले की कमान आने से वे अपने हिसाब से काम कर रहे हैं। कई काम जो बहुत आवश्यक हैं वह हो रहे हैं। जबकि  मेले के दौरान होने वाले कई कार्यक्रम तो अभी तक फाइनल ही नहीं हुए हैं। कार्यक्रम तक हो गए तो उनके कलाकार तय नहीं हुए हैं। लोगों का कहना है कि चुनाव की आचार संहिता तो हर पांच साल में लगती है लेकिन मेले की रंगत पर उसका असर नहीं दिखता। जबकि इस बार अभी तक मेले में न तो रौनक नजर आ रही है और न ही तैयारी। </p>
<p><strong>हाथीजाम व सोफ्टी पर भी असर</strong><br />इसी तरह से हाथी जाम व काला जाम भी मेले के दौरान काफी पसंद किया जाता है। इस बार वह भी 40 रुपए प्लेट के हिसाब से मिल रहा है। जिसमें छोटे-छोटे दो काले जाम आ रहे हैंो वह भी 20 रुपए का एक पड़ रहा है। मेले के दौरान सबसे अधिक पसंद की जाने वाली आईस्क्रीम है सोफ्टी। शुरुआत में जो 5 से 10 रूपए में मिलती है वह धीरे-धीरे महंगी होती जा रही है। इस बार कम से कम 30 रूपए की एक सोफ्टी मिल रही है। लोगों का कहना है कि यह  ताजी होने व सामने बनने से उसे अधिक पसंद किया जाता है। </p>
<p><strong>कलाकारों के चयन के लिए एनवक्त पर कमेटी गठित </strong><br />मेले के दौरान आयोजित होने वाले गिनती के कार्यक्रमों कीे निविदाएं जारी की गई हैं। जिनमें से कुछ को सोमवार को खुलना था और कुछ पहले ही खोली जा चुकी है। लेकिन उन आवेदनों में आए कलाकारों व समूहों के चयन के लिए मेला अधिकारी ने सोमवार को एनवक्त पर कमेटी का गठन किया है।  मेला अधिकारी अनुराग भार्गव द्वारा गठित कमेटीे में नगर निगम कोटा दक्षिण की आयुक्त को कमेटी का अध्यक्ष बनाया है। जबकि 7 सदस्यों को भी शामिल किया है। जिनमें  कोटा उत्तर निगम की अतिरिक्त आयुक्त, निगम के मुख्य अभियंता, निगम के मुख्य लेखाधिकारी,संयुक्त विधि परामर्शी,पर्यटन विभाग के उप निदेशक , मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी व कोटा विवि के रजिस्ट्रार द्वारा नामित हिन्दी साहित्य व उर्दू साहित्य के वरिष्ठतम प्रोफेसर को शामिल किया गया है। आदेश के अनुसार यह कमेटी मेले के दौरान होने वाले कवि सम्मेलन, मुशारा, भजन संध्या व  कव्वाली कार्यक्रमों के कलाकारों का चयन करेगी। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Oct 2023 18:51:10 +0530</pubDate>
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