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                <title>TMC - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता की मुश्किल बढ़ाएंगे ओवैसी, बोले-बंगाल में नाइंसाफी की लंबी लिस्ट, हुमायूं कबीर से गठबंधन का ऐलान</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी ने हुमायूं कबीर की जनता उन्नयन पार्टी (JUP) के साथ गठबंधन का ऐलान कर ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ओवैसी ने 30% मुस्लिम आबादी की अनदेखी का आरोप लगाते हुए टीएमसी के वोट बैंक में सेंधमारी की तैयारी की है। राज्य में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/owaisi-will-increase-mamatas-problems-in-west-bengal-assembly-elections/article-147629"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(5)17.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता/हैदराबाद। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में असुदद्दीन ओवैसी ममता बनर्जी की अगुवाई वाली टीएमसी की मुश्किलें बढ़ाएंगे। ओवैसी ने रविवार को हैदराबाद में हुमायूं कबीर की जनता उन्नयन पार्टी (जेयूपी) के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। ओवैसी ने ईद के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए ममता बनर्जी को निशाने पर लिया और कहा कि राज्य में मुस्लिमों की आबादी 30 फीसदी है, लेकिन धर्मनिरपेक्ष होकर उनसे वोट तो लेते हैं लेकिन उन्हें उनका हक और भागीदारी नहीं देते हैं। ओवैसी ने लोगों से लगा कि दुआ करें कि मजलिस और मजबूत हो। बंगाल के ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस 291 सीटों पर लड़ रही है।</p>
<p>हैदराबाद में एआईएमआईएम चीफ प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि बंगाल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। एआईएमआईएम ने फैसला लिया है कि पश्चिम बंगाल में हुमायूं कबीर की पार्टी के साथ पार्टी एक गठबंधन करेगी और हम इस चुनाव में हिस्सा लेंगे। हमारी कोशिश है कि एआईएमआईएम को मजबूत किया जाए। हमारी आवाज को मजबूत किया जाए। ओवैसी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार हैं। वहां 30 फीसदी मुसलमानों की आबादी है, वहां लगभग 5 लाख पिछड़े वर्ग के प्रमाण पत्र को रद्द कर दिया गया। जिसमें मुसलमान भी शामिल हैं। ये लोग धर्मनिरपेक्षता के नाम पर वोट हासिल करते हैं लेकिन जहां एआईएमआईएम हिस्सेदारी की बात करती है तो इन्हें तकलीफ होती है। पश्चिम बंगाल में हुमायूं कबीर दो सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं।</p>
<p><strong>अभी तक कबीर ने उतारे हैं 182 कैंडिडेट</strong></p>
<p>हुमायूं कबीर की जनता उन्नयन पार्टी ने अभी तक 182 कैंडिडेट का ऐलान किया है। टीएमसी से सस्पेंड होने के बाद नई पार्टी जनता उन्नयन पार्टी थी। हुमायूं कबीर खुद बेलडांगा और रेजीनगर से लड़ रहे हैं। उन्होंने ममता बनर्जी के खिलाफ भबानीपुर में पूनम बेगम को उतारा है। हुमायूं कबीर टीएमसी में थे, लेकिन टीएमसी ने उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों की वजह से निष्कासित कर दिया था। अब वह ममता बनर्जी के मुस्लिम वोट बैंक में सेंधमारी करना चाहते हैं। ओवैसी के ऐलान ने सत्तारूढ़ टीएमसी की मुश्किलें बढ़ा दी है। बंगाल में अभी नामांकन प्रक्रिया शुरू नहीं हुई। राज्य में दो चरणों में चुनाव हैं। इसके लिए 23 और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। नतीजे 4 मई को घोषित होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 11:00:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: बंगाल चुनावी मुकाबले में नजर आया 'सरप्राइज फैक्टर'; चमक बिखेर रहे सेलिब्रिटी, चुनौतियों से घिरी होंगी ममता </title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए TMC और BJP ने सितारों पर दांव खेला है। राज चक्रवर्ती और सोहम जैसे पुराने चेहरों के साथ स्वप्न बर्मन जैसे नए खिलाड़ी मैदान में हैं। सोनारपुर साउथ में रूपा गांगुली और लवली मैत्रा के बीच हाई-वोल्टेज मुकाबला तय है। इस बार दलों ने प्रयोगों के बजाय संगठनात्मक अनुभव को प्राथमिकता दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/west-bengal-assembly-elections-surprise-factor-seen-in-bengal-election/article-147345"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/cm-mamta2.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल के आगामी विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) फिल्म और खेल जगत से जुड़ी कई नामचीन हस्तियों को उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतार रही हैं, लेकिन इस बार बहुप्रतीक्षित 'सरप्राइज फैक्टर' नजर नहीं आ रहा है। दिलचस्प बात यह है कि दोनों दलों ने खेल और फिल्मी दुनिया से नये चेहरों के बजाय आजमाये हुए उम्मीदवारों पर भरोसा जताया है। </p>
<p>सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस में भले ही मनोरंजन और खेल जगत के कुछ जाने-माने चेहरों को जगह मिली है, लेकिन पार्टी ने अधिकतर ऐसे उम्मीदवारों को टिकट दिया है, जो पहले चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा चुके हैं। प्रमुख नामों में अभिनेता सोहम चक्रवर्ती को करीमपुर से, जबकि फिल्म निर्माता राज चक्रवर्ती को बैरकपुर से उम्मीदवार बनाया गया है। अभिनेत्री सायंतिका बनर्जी को एक बार फिर बारानगर से टिकट दिया गया है, जो पार्टी के उनके प्रति भरोसे को दर्शाता है।</p>
<p>तृणमूल कांग्रेस ने मनोरंजन जगत से जुड़े दो मौजूदा विधायक लोकगायिका अदिति मुंशी (राजारहाट गोपालपुर) और अभिनेत्री लवली मैत्रा (सोनारपुर साउथ) पर भी भरोसा जताया है। गायक इंद्रनील सेन, जो 2016 से विधायक हैं, को चंदननगर से फिर उम्मीदवार बनाया गया है, जिससे पार्टी का अनुभव पर स्पष्ट जोर दिया जाना दिखता है। एशियन गेम्स की स्वर्ण पदक विजेता स्वप्न बर्मन को पार्टी में शामिल होने के तुरंत बाद राजगंज से उम्मीदवार बनाना एक चौंकाने वाला फैसला माना जा रहा है और यह उनका पहला चुनाव होगा। इसी तरह फुटबॉलर बिदेश बोस सप्तग्राम से, जबकि क्रिकेटर से कोच बने शिब शंकर पॉल तूफानगंज से चुनाव लड़ेंगे, जिससे खेल जगत की चुनावों में भागीदारी भी दिख रही है।</p>
<p>एक अन्य उल्लेखनीय नाम श्रेया पांडे का है, जो दिवंगत तृणमूल कांग्रेस विधायक साधन पांडे की पुत्री हैं, वह मानिकतला सीट से अपना पहला बड़ा चुनाव लड़ेंगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कुल मिलाकर मशहूर हस्तियों के उम्मीदवारों की संख्या सीमित है, जो यह संकेत देता है कि टीएमसी ने नये प्रयोगों के बजाय अनुभव और संगठनात्मक ताकत पर भरोसा किया है। दूसरी ओर, भाजपा की उम्मीदवार सूची की अधिक चर्चा हो रही है, जिसमें कई हाई-प्रोफाइल नाम शामिल हैं। पार्टी ने जहां पुराने चेहरों जैसे रुद्रनील घोष और श्री हिरण चटर्जी को मैदान में उतारा है, वहीं नये चेहरों को भी मौका दिया है।</p>
<p>अब तक जारी दो सूचियों में घोष को शिवपुर से और चटर्जी को श्यामपुर से उम्मीदवार बनाया गया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, चटर्जी को श्यामपुर से टिकट देना कुछ हद तक चौंकाने वाला है, क्योंकि उन्हें पहले उनकी जीत वाली सीट खड़गपुर सदर से हटाया गया था और उनकी शादी से जुड़े विवाद के बाद उनके टिकट पर सवाल उठ रहे थे।</p>
<p>नये चेहरों की बात करें, तो टॉलीगंज से अभिनेत्री पापिया अधिकारी और जादवपुर से शरबरी मुखर्जी को उम्मीदवार बनाया गया है। सोनारपुर साउथ सीट पर भाजपा की रूपा गांगुली और तृणमूल कांग्रेस की लवली मैत्रा के बीच हाई-वोल्टेज मुकाबला होने की संभावना है। भाजपा अब तक दो चरणों के लिए 256 सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर चुकी है, जबकि 38 सीटों पर नामों की घोषणा बाकी है। 294 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव के लिए मतदान 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में होगा और मतगणना चार मई को की जाएगी। उल्लेखनीय है कि करीब तीन दशकों में पहली बार राज्य में दो चरणों में चुनाव हो रहा है।</p>
<p>जैसे-जैसे चुनाव प्रचार तेज हो रहा है, सेलिब्रिटी उम्मीदवारों की मौजूदगी से ग्लैमर और चुनावों में भीड़ दोनों बढ़ने की उम्मीद है। व्यापक राजनीतिक संकेत हालांकि यही बताते हैं कि इस बार दलों ने नये और चौंकाने वाले चेहरों के बजाय अनुभवी और परिचित उम्मीदवारों पर ज्यादा भरोसा किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Mar 2026 16:02:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: ममता बनर्जी ने बोला केंद्र सरकार पर हमला, लोगों के अधिकारों की रक्षा का दोहराया संकल्प, बोली-हमारी लड़ाई जारी रहेगी, आपके अधिकार किसी भी हाल में छीनने नहीं दूंगी</title>
                                    <description><![CDATA[कोलकाता में ईद सभा के दौरान ममता बनर्जी ने केंद्र और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को साजिश करार देते हुए "भाजपा हटाओ, देश बचाओ" का नारा दिया। मुख्यमंत्री ने संकल्प लिया कि वह बंगाल के लोगों के अधिकारों और सांप्रदायिक एकता की रक्षा के लिए आखिरी सांस तक लड़ेंगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/west-bengal-assembly-elections-mamata-banerjee-said-it-was-an/article-147331"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/cm-mamta-on-sir.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को ईद के मौके पर कोलकाता में आयोजित कार्यक्रम के दौरान लोगों के अधिकारों की रक्षा का संकल्प दोहराया और केंद्र की भाजपा सरकार तथा चुनाव आयोग पर तीखा निशाना साधा। वार्षिक ईद सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार बंगाल के लोगों के अधिकार किसी भी हाल में छीने नहीं जाने देगी। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची से कई नाम हटाए गए हैं, हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि लोगों की गरिमा सुरक्षित रहेगी।</p>
<p>उन्होंने कहा, "हमारी लड़ाई जारी रहेगी। हम बंगाल के हर व्यक्ति के साथ हैं और उनके अधिकारों को छीने नहीं जाने देंगे।" मुख्यमंत्री ने केंद्र के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि उनकी सरकार किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "जो बंगाल को निशाना बनाएंगे, उनका अंजाम अच्छा नहीं होगा।" साथ ही उन्होंने "बीजेपी हटाओ, देश बचाओ" का नारा भी दोहराया।</p>
<p>यह बयान उस समय आया है जब राज्य में अंतिम एसआईआर सूची को लेकर विवाद जारी है, जिसमें लाखों नाम हटाए जाने और कई नामों के जांच के दायरे में होने की खबरें हैं। तृणमूल कांग्रेस लगातार आरोप लगा रही है कि चुनाव आयोग केंद्र सरकार के दबाव में काम कर रहा है।</p>
<p>इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि वह पहले ही दिल्ली जाकर आयोग के सामने अपनी बात रख चुकी हैं और आगे भी संघर्ष जारी रखेंगी।<br />कार्यक्रम के दौरान बारिश को उन्होंने "ईश्वरीय आशीर्वाद" बताया और कहा कि यह उनके संघर्ष के समर्थन का प्रतीक है। साथ ही उन्होंने सभी धर्मों के बीच एकता और सौहार्द बनाए रखने पर जोर दिया। इस मौके पर मौजूद तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महसचिव अभिषेक बनर्जी ने भी लोगों से एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज को बांटने की कोशिश हो रही है, लेकिन बंगाल की सांप्रदायिक एकता कायम रहेगी। कार्यक्रम के बाद दोनों नेताओं ने शहर की एक मस्जिद में जाकर ईद की नमाज से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Mar 2026 15:00:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम बंगाल​ विधानसभा चुनाव: अधिकारियों के तबादलों को हाईकोर्ट में चुनौती, चुनाव आयोग की शक्तियों पर उठे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[चुनाव आयोग द्वारा बंगाल के IAS और IPS अधिकारियों के तबादलों को कलकत्ता उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने आयोग के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाते हुए इसे राज्य प्रशासन में हस्तक्षेप बताया। मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ अगले सप्ताह इस जनहित याचिका पर सुनवाई करेगी, जो चुनावी निष्पक्षता और शक्तियों की सीमा तय कर सकती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/transfers-of-west-bengal-assembly-election-officers-challenged-in-high/article-147222"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/west-bengal-ec.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। चुनाव आयोग द्वारा पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ अधिकारियों के तबादलों का मामला अब कलकत्ता उच्च न्यायालय पहुंच गया है। एक याचिका में चुनाव आयोग के उस अधिकार को चुनौती दी गयी है, जिसके तहत अधिकारियों को चुनाव ड्यूटी के लिए अन्य राज्यों में भेजा जा रहा है। वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने न्यायालय का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित करते हुए कहा कि आयोग के पास इस तरह से भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारियों को राज्य से बाहर भेजने का अधिकार नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि इससे राज्य प्रशासन के सामान्य कामकाज पर असर पड़ता है।</p>
<p>इस मामले में तृणमूल कांग्रेस के अधिवक्ता अर्क नाग जनहित याचिका दाखिल करेंगे। न्यायालय से याचिका दाखिल करने की अनुमति देने की मांग करते हुए बनर्जी ने तबादला आदेशों पर रोक लगाने का आग्रह किया है। मुख्य न्यायाधीश सुजोय पाल और न्यायमूर्ति पार्थसारथी सेन की खंडपीठ ने याचिका दायर करने की अनुमति दे दी है और मामले की सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित की है।</p>
<p>यह विवाद चुनाव आयोग द्वारा रविवार आधी रात से लेकर गुरुवार तक किये गये बड़े प्रशासनिक फेरबदल के बाद उत्पन्न हुआ है। इसमें मुख्य सचिव, गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक और कोलकाता पुलिस आयुक्त समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों को उनके पदों से हटाया गया है। कई जिलों के जिलाधिकारियों का भी तबादला किया गया है और नये अधिकारियों की नियुक्ति की गयी है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि हटाये गये अधिकारियों को फिलहाल पश्चिम बंगाल में चुनाव संबंधी कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इनमें से कई अधिकारियों को अन्य राज्यों में चुनाव पर्यवेक्षक के रूप में पहले ही प्रतिनियुक्त किया गया है।</p>
<p>तबादलों की इस कार्रवाई पर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जतायी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर आयोग के फैसलों पर सवाल उठाये हैं। अब इस मामले के उच्च न्यायालय में पहुंच जाने के बाद चुनाव आयोग की शक्तियों और अधिकार क्षेत्र की सीमा का कानूनी परीक्षण होने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 18:22:32 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: सीएम ममता का चुनाव आयोग पर तीखा हमला, राज्य के खिलाफ अभूतपूर्व हस्तक्षेप और पक्षपात का लगाया आरोप </title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर तीखा हमला करते हुए 50 से अधिक अधिकारियों के तबादले को 'अघोषित आपातकाल' करार दिया है। उन्होंने आयोग पर भाजपा के पक्ष में काम करने और संविधान के उल्लंघन का आरोप लगाया। ममता ने स्पष्ट किया कि बंगाल धमकियों के आगे नहीं झुकेगा और चुनावी शुचिता के लिए संघर्ष जारी रखेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/west-bengal-assembly-elections-cm-mamatas-sharp-attack-on-the/article-147158"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/mamta-banerjee.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को चुनाव आयोग पर तीखा हमला करते हुए आगामी चुनावों से पहले राज्य के खिलाफ अभूतपूर्व हस्तक्षेप और पक्षपात का आरोप लगाया है। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट संदेश में बनर्जी ने दावा किया है कि आयोग ने पश्चिम बंगाल को चुन-चुनकर निशाना बनाया है, जो बेहद चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य सचिव, गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और कई अन्य उच्च पदस्थ अधिकारियों सहित 50 से अधिक वरिष् अधिकारियों को चुनाव की औपचारिक अधिसूचना जारी होने से पहले ही मनमाने ढंग से हटा दिया गया है। उन्होंने कहा, यह कोई प्रशासनिक कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह उच्चतम स्तर का राजनीतिक हस्तक्षेप है। मुख्यमंत्री ने इन घटनाक्रमों को संस्थानों के बढ़ते राजनीतिकरण का हिस्सा बताया। बनर्जी ने कहा, जिन संस्थानों को निष्पक्ष रहना चाहिए, उनका व्यवस्थित राजनीतिकरण करना सीधे तौर पर संविधान पर हमला है। उन्होंने आगे कहा कि आयोग का यह आचरण स्पष्ट पक्षपात और राजनीतिक हितों के सामने आत्मसमर्पण को दर्शाता है। </p>
<p><strong>प्रशासनिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करने का आरोप  </strong></p>
<p>उनकी यह टिप्पणी राज्य में बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच आयी है, जहां सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस अक्सर विपक्षी भारतीय जनता पार्टी पर पश्चिम बंगाल की प्रशासनिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करने का आरोप लगाती रही है। बनर्जी ने मतदाता सूची के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर भी चिंता जतायी। उन्होंने इस प्रक्रिया को बेहद त्रुटिपूर्ण बताया और आरोप लगाया कि इससे जनता में घबराहट पैदा हुई है। उन्होंने दावा किया कि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों की अवहेलना करते हुए अभी तक पूरक मतदाता सूची प्रकाशित नहीं की गयी है, जिससे नागरिक अनिश्चितता की स्थिति में हैं। </p>
<p><strong>उन्होंने सवाल किया, भाजपा इतनी बेताब क्यों है? </strong></p>
<p>बंगाल और यहां के लोगों को लगातार निशाना क्यों बनाया जा रहा है? बनर्जी ने पार्टी पर आरोप लगाया कि आजादी के दशकों बाद भी नागरिकों को कतारों में खड़े होने और अपनी नागरिकता साबित करने को मजबूर करने की कोशिश की जा रही है।</p>
<p><strong>चुनाव पर्यवेक्षक के रूप में तैनाती</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री ने आयोग की कार्रवाइयों में विरोधाभासों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन अधिकारियों को उनके पदों से हटाया गया था, उन्हें कुछ ही घंटों के भीतर फिर से चुनाव पर्यवेक्षक के रूप में तैनात कर दिया गया। उन्होंने सिलीगुड़ी और बिधाननगर जैसे प्रमुख शहरी केंद्रों का उदाहरण दिया, जहां वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को बिना किसी तत्काल विकल्प के पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिया गया। उनके अनुसार, इससे महत्वपूर्ण शहरी केंद्र प्रभावी रूप से बिना मुखिया के रह गये हैं। बनर्जी ने कहा, यह शासन नहीं है। यह अराजकता, भ्रम और घोर अक्षमता को सत्ता के रूप में पेश करने जैसा है। बनर्जी ने स्थिति को अघोषित आपातकाल और राष्ट्रपति शासन का अघोषित रूप करार दिया। </p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि यह जबरदस्ती और संस्थानों के दुरुपयोग के जरिए पश्चिम बंगाल पर नियंत्रण करने की सोची-समझी साजिश है। उन्होंने राज्य सरकार के अधिकारियों के प्रति एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें सिर्फ ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ राज्य की सेवा करने के लिए निशाना बनाया जा रहा है। बंगाल कभी धमकियों के आगे नहीं झुका ममता ने जोर देकर कहा, बंगाल कभी धमकियों के आगे नहीं झुका है और न कभी झुकेगा। बंगाल लड़ेगा, बंगाल प्रतिरोध करेगा और अपनी धरती पर विभाजनकारी तथा विनाशकारी एजेंडा थोपने की हर कोशिश को निर्णायक रूप से शिकस्त देगा। चुनाव आयोग ने अभी तक इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। राज्य जैसे-जैसे अगले चुनावी चक्र की ओर बढ़ रहा है, इस विवाद ने पहले से ही गर्म राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। प्रशासनिक निष्पक्षता और चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े सवाल इस बहस के केंद्र में रहने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 10:59:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: टीएमसी ने 74 मौजूदा विधायकों का टिकट काटा, चुनावी मैदान में 47 मुस्लिम प्रत्याशी </title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भवानीपुर से चुनाव लड़ने की घोषणा कर सुवेंदु अधिकारी को सीधी चुनौती दी है। टीएमसी ने 74 मौजूदा विधायकों के टिकट काटकर 52 महिलाओं और जमीनी नेताओं पर दांव खेला है। ममता ने इसे 'बंगाल की अस्मिता' का चुनाव बताते हुए 226 से अधिक सीटें जीतने का विश्वास जताया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/west-bengal-assembly-elections-tmc-cancels-tickets-of-74-sitting/article-147008"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/west-bengal-2026.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा द्वारा पहली सूची जारी करने के अगले दिन सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने मंगलवार को अपने सभी उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी। मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने अपने कालीघाट स्थित आवास से राज्य की कुल 294 में से 291 सीटों पर उम्मीदवारों की सूची जारी की। घोषणा की कि 291 सीट पर तृणमूल चुनाव लड़ेगी जबकि पिछली बार की ही तरह दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र की तीन सीटें सहयोगी पार्टी अनित थापा के नेतृत्व वाली भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा (बीजीपीएम) के लिए छोड़ी गई है। तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता इस बार अपनी पारंपरिक सीट कोलकाता के भवानीपुर से ही चुनाव लड़ेंगी।</p>
<p><strong>सुवेंदु के सामने उनके ही करीबी</strong></p>
<p>भवानीपुर में ममता का मुकाबला भाजपा नेता व विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी से होगा। भाजपा ने सुवेंदु को इस बार दो विधानसभा सीटों-नंदीग्राम के अलावा भवानीपुर से उम्मीदवार बनाया है। तृणमूल ने इस बार नंदीग्राम से सुवेंदु के खिलाफ उनके करीबी व पूर्व भाजपा नेता पवित्र कर को उम्मीदवार बनाया है। पवित्र मंगलवार दिन में ही तृणमूल में शामिल हुए। बताते चलें कि ममता 2021 के विधानसभा चुनाव में अपनी परंपरागत भवानीपुर से नहीं लड़कर सुवेंदु की चुनौती स्वीकार कर पूर्व मेदिनीपुर जिले की नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़ी थीं, जहां उन्हें सुवेंदु से 1956 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। नंदीग्राम में हार के पश्चात ममता ने भवानीपुर से उपचुनाव में जीत दर्ज की थीं।</p>
<p><strong>74 मौजूदा विधायकों के काटे टिकट</strong></p>
<p>तृणमूल ने इस बार करीब 74 मौजूदा विधायकों को टिकट नहीं दिया है, जिनमें कई मंत्री भी शामिल हैं। साथ ही 15 विधायकों की सीट भी बदली है। पार्टी ने सामाजिक संतुलन पर जोर देते हुए इस बार 52 महिलाओं, अनुसूचित जाति (एससी) से 78, अनुसूचित जनजाति (एसटी) से 17 और मुस्लिम समुदाय से 47 लोगों को टिकट दिया है।</p>
<p><strong>बंगाल के अस्तित्व और अस्मिता की रक्षा का चुनाव</strong></p>
<p>ममता ने कहा कि यह चुनाव बंगाल के अस्तित्व और अस्मिता की रक्षा का है। 2026 के चुनाव में 226 से अधिक सीटें जीतने का विश्वास जताते हुए कहा कि भाजपा की सीटें इस बार पहले से कम हो जाएगी। कहा कि जिन विधायकों को इस बार टिकट नहीं मिला है, पार्टी उनका इस्तेमाल दूसरे तरीकों से करेंगी। पार्टी ने पहले की तरह कई बांग्ला फिल्मों के अभिनेता-अभिनेत्रियों को भी टिकट दिया है।</p>
<p><strong>चर्चित हस्तियों की जगह जमीनी नेताओं को तरजीह</strong></p>
<p>तृणमूल ने टिकट वितरण में चर्चित हस्तियों की जगह संगठन पर पकड़ रखने वाले जमीनी नेताओं को तरजीह दी है। पार्टी ने हिंदीभाषी समुदाय से आने वाले पूर्व भारतीय क्रिकेटर व खेल राज्यमंत्री मनोज तिवारी को हावड़ा की शिवपुर सीट से इस बार टिकट नहीं दिया है। इसके अलावा चर्चित चेहरों में शिक्षक भर्ती घोटाले में आरोपित पार्टी से निलंबित विधायक पार्थ चटर्जी और विधायक जीवनकृष्ण साहा को टिकट नहीं दिया गया है। ओलंपिक में हिस्सा ले चुकीं और एशियाई खेलों की स्वर्ण पदक विजेता स्वप्ना बर्मन को राजगंज से मैदान में उतारा गया है, जबकि पूर्व क्रिकेटर शिव शंकर पाल को तूफानगंज से उम्मीदवार बनाया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 12:40:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, गृह सचिव को हटाए जाने के विरोध में तृणमूल का राज्यसभा से बहिर्गमन, संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करने लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल के मुख्य और गृह सचिव को हटाए जाने के विरोध में तृणमूल कांग्रेस ने राज्यसभा से बहिर्गमन किया। डेरेक ओ ब्रायन ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया, वहीं किरण रिजिजू ने इसे चुनाव आयोग का संवैधानिक अधिकार करार दिया। सदन में तीखी नोकझोंक के बाद टीएमसी सदस्यों ने पूरे दिन के लिए सदन का त्याग कर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/trinamools-walkout-from-rajya-sabha-in-protest-against-removal-of/article-146641"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/tmc-rajaya-sabha.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग द्वारा राज्य के मुख्य सचिव और गृह सचिव को उनके पद से हटाए जाने के विरोध में तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने सोमवार को राज्यसभा से दिन भर के लिए बहिर्गमन किया। सदन में तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने जरूरी दस्तावेज सदन के पटल पर रखे जाने के बाद शून्य काल से पहले यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि रात के अंधेरे में राज्य के मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और गृह सचिव को चुनाव आयोग द्वारा हटा दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह चुनाव आयोग का अधिकार है लेकिन उनकी पार्टी इसका कड़ा विरोध करती है और इसके विरोध में दिन भर के लिए सदन से बहिर्गमन कर रही है। इसके बाद तृणमूल कांग्रेस के सदस्य सदन से बाहर चले गए। </p>
<p>संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि यह चुनाव आयोग का फैसला है और सदन का इससे कुछ लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को यह शक्ति संविधान ने दी है और इस मामले को सदन में उठाने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करने की आदत बना रखी है। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस ने बिना बात के मुद्दे पर सदन का समय बर्बाद किया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/trinamools-walkout-from-rajya-sabha-in-protest-against-removal-of/article-146641</link>
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                <pubDate>Mon, 16 Mar 2026 13:59:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पुणे में प्रवासी मजदूर की हत्या पर जताया विरोध, हेट क्राइम करार देते हुए दोषियों की गिरफ्तारी की मांग की</title>
                                    <description><![CDATA[कोलकाता में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पुणे में पुरुलिया के मजदूर सुखेन महतो की हत्या पर दुख जताया। दोषियों की गिरफ्तारी और प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/west-bengal-chief-minister-mamata-banerjee-expressed-protest-over-the/article-142902"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/mamta-banarji.jpg" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने महाराष्ट्र के पुणे में काम करने वाले पुरुलिया के मजदूर सुखेन महतो की हत्या पर गहरा दुख और आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने इस घटना को हेट क्राइम करार देते हुए दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और कड़ी सजा की मांग की है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ममता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक कड़े संदेश में कहा है कि वह परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य महतो की हत्या से स्तब्ध, क्रोधित और व्यथित हैं। सीएम बनर्जी ने पीड़ित को उसकी भाषा और पहचान के कारण निशाना बनाए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रवासी श्रमिकों पर होने वाले ऐसे हमले बाहरी लोगों के प्रति द्वेष के बढ़ते माहौल के कारण है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने लिखा, यह किसी हेट क्राइम से कम नहीं है। एक युवक को उसकी भाषा, उसकी पहचान और उसकी जड़ों के कारण प्रतड़ित कर मार डाला गया। यह उस माहौल का सीधा परिणाम है जहाँ बाहरी लोगों के प्रति नफरत को हथियार बनाया जाता है और निर्दोषों को निशाना बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि बंगाल शोक संतप्त परिवार के साथ खड़ा है।</p>
<p>उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुरुलिया जिले के तुमरासोल गाँव के निवासी महतो पुणे में एक ऑटो पार्टस फैक्ट्री में कार्यरत थे। वह नौ फरवरी को काम पर निकलने के बाद लापता हो गए थे और अगले दिन उनका शव बरामद हुआ था। तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि महतो की हत्या की गई है। शव मिलने के बाद जिले के पार्टी नेताओं ने पुरुलिया में उनके परिवार से मुलाकात की।</p>
<p>इस घटना ने एक बार फिर पश्चिम बंगाल के प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। पिछले कुछ हफ्तों में, देश के अन्य हिस्सों में राज्य के प्रवासी मजदूरों की अस्वाभाविक मौत की खबरों ने राजनीतिक प्रतिक्रियाओं और परिवारों के बीच चिंता को बढ़ा दिया है।इससे पहले, मालदा जिले के हरिश्चंद्रपुर के एक प्रवासी मजदूर का शव चेन्नई में रेलवे ट्रैक के पास मिला था। परिवार ने आरोप लगाया था कि उसे चलती ट्रेन से धक्का दिया गया है, जिससे उसकी मौत की परिस्थितियों पर राजनीतिक विवाद छिड़ गया था। एक अन्य मामले में, दक्षिण 24 परगना के उस्ती के एक श्रमिक का शव आंध्र प्रदेश की एक कपड़ा फैक्ट्री से बरामद किया गया था।</p>
<p>इसके अलावा, पिछले महीने झारखंड में पश्चिम बंगाल के एक श्रमिक की कथित हत्या के कारण मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में अशांति फैल गई थी। हालांकि, मुर्शिदाबाद जिला पुलिस की एक विशेष टीम द्वारा जांच के बाद अधिकारियों ने दावा किया कि झारखंड में कार्यरत उस श्रमिक ने आत्महत्या की थी। पुलिस ने हत्या की आशंका को खारिज करने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मौके के वीडियो साक्ष्य का हवाला दिया था।</p>
<p>पुणे में महतो की हत्या ने अब पश्चिम बंगाल के प्रवासी श्रमिकों से जुड़ी घटनाओं की श्रृंखला में एक और कड़ी जोड़ दी है, जिसके कारण मुख्यमंत्री ने कड़ी कार्रवाई की मांग की है और राज्य के बाहर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील दोहराई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Feb 2026 17:21:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भाजपा प्रवक्ता संबिता पात्रा का SIR मुद्दें पर पलटवार, बोलें-संवैधानिक संस्थानों को लेकर देश में जानबूझकर अस्थिरता और भ्रम का माहौल बना रहा है विपक्ष </title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि विपक्ष एसआईआर को लेकर भ्रम फैलाकर संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने प्रक्रिया को सही ठहराया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/bjp-spokesperson-sambita-patra-countered-on-sir-issue-opposition-is/article-142662"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(10)7.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्र्वक्ता संबित पात्रा ने मंगलवार को विशेष गहन पुनीरीक्षण (एसआईआर) पर विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि वह संसद और संवैधानिक संस्थानों को लेकर देश में जानबूझकर अस्थिरता और भ्रम का माहौल बना रही है।  </p>
<p>संबिता पात्रा ने आज यहां भाजपा मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह सिलसिला आज का नहीं है, बल्कि जब से भाजपा-राजग की सरकार बनी है, तब से राहुल गांधी, कांग्रेस और उसके सहयोगी दल जॉर्ज सोरोस के इशारों पर उच्चतम न्यायालय, चुनाव आयोग, लोकसभा अध्यक्ष और प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक संस्थानों पर लगातार हमले कर रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि पहले कांग्रेस और अब ममता बनर्जी एसआईआर को फर्जी बताकर भाजपा एवं भारतीय लोकतंत्र के खिलाफ एक खास नैरेटिव गढऩे की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष यह प्रचार कर रहा है कि एसआईआर चुनावी सूची की शुचिता के लिए नहीं, बल्कि भाजपा के राजनीतिक लाभ के लिए है और यह पूरी प्रक्रिया गैरकानूनी है।</p>
<p>संबिता पात्रा ने कहा, बीते सप्ताह सीएम ममता ने उच्चतम न्यायालय में दावा किया था कि एसआईआर के माध्यम से पश्चिम बंगाल में अत्याचार हो रहा है और इसे तुरंत रद्द किया जाना चाहिए। लेकिन न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट कर दिया कि एसआईआर को रोका नहीं जाएगा, जिसे उन्होंने तृणमूल कांग्रेस सरकार के लिए करारा झटका बताया। उन्होंने कहा कि शीर्ष न्यायालय का यह निर्णय लोकतांत्रिक व्यवस्था और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को और मजबूत करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Feb 2026 17:37:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल में ED की कार्रवाई से राजनीतिक गलियारें में हलचल तेज, हिमाचल राजस्व मंत्री ने ममता बनर्जी का किया समर्थन</title>
                                    <description><![CDATA[ईडी कार्रवाई पर हिमाचल के मंत्री जगत सिंह नेगी ने ममता बनर्जी का समर्थन करते हुए केंद्र पर एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया, बंगाल चुनाव से पहले राजनीति गरमाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/ed-action-in-west-bengal-creates-stir-in-political-circles/article-139456"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/ed.png" alt=""></a><br /><p>शिमला। पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की चल रही कार्रवाई ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। हिमाचल प्रदेश की राजनीतिक गलियारों में इस पर प्रतिक्रिया देखी गयी, जहां राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने मंगलवार को खुले तौर पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का खुलकर समर्थन किया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने ममता बनर्जी की केंद्रीय एजेंसियों का सामना करने के तरीके की प्रशंसा करते हुए उन्हें शेरनी और रॉयल बंगाल बाघिन कहा। </p>
<p>जगत सिंह नेगी ने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो को देखकर उन्हें बहुत खुशी हुई, जिसमें मुख्यमंत्री बनर्जी ने ईडी की कार्रवाई पर कड़ा जवाब दिया है। केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए नेगी ने कहा कि चुनावों से पहले गैर-भाजपा शासित राज्यों को निशाना बनाने का एक स्पष्ट एवं सुनियोजित चलन दिखाई दे रहा है। उन्होंने छत्तीसगढ़ एवं झारखंड जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए दावा किया कि इस तरह की कार्रवाइयां चुनावों से ठीक पहले राजनीतिक अस्थिरता उत्पन्न करने और लोकप्रिय नेताओं को बदनाम करने के उद्देश्य से की जा रही हैं।</p>
<p>इसके आगे नेगी ने कहा, केंद्रीय एजेंसियों का उपयोग कर जिस प्रकार से लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है वह बहुत चिंताजनक है। ये एजेंसियां चुनाव से ठीक पहले अचानक सक्रिय हो जाती हैं और केंद्र सरकार को फायदा पहुंचाने के लिए एक झूठी कहानी गढऩे की कोशिश करती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ये एजेंसियां स्वतंत्र रूप से कार्य नहीं करतीं बल्कि केंद्र सरकार की कठपुतली बनकर काम करती हैं।</p>
<p>हिमाचल के राजस्व मंत्री ने कहा कि सरकार तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व को निशाना बनाकर पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया साहस एवं राजनीतिक दृढ़ संकल्प का प्रतीक है और पूरे देश की लोकतांत्रिक ताकतों का समर्थन पाने की हकदार है। नेगी को एक प्रखर जनजातीय नेता के रूप में जाना जाता है और वह केंद्र सरकार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के मुखर आलोचक रहे हैं। अतीत में उनके कई बयानों ने राजनीतिक बहस को जन्म दिया है और जनता का ध्यान आकर्षित किया है।</p>
<p>नेगी के बयान यह रेखांकित करते हैं कि जैसे-जैसे पश्चिम बंगाल के चुनाव नजदीक आ रहे हैं, विभिन्न राज्यों के विपक्षी नेताओं के बीच एकता बढ़ रही है, जिससे ईडी की कार्रवाई को एक व्यापक राष्ट्रीय राजनीतिक आयाम मिल गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Jan 2026 17:19:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>केंद्र सरकार का बंगाल सरकार पर तीखा प्रहार, 'जंगल राज' और 'गुंडा राज' का चेहरा बन गई हैं सीएम ममता</title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने ममता बनर्जी पर गृह मंत्री को धमकी देने और 'जंगल राज' चलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कांग्रेस से भी 'वोट डकैती' के मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/central-governments-sharp-attack-on-bengal-government-cm-mamta-has/article-138168"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/mamta-and-modi.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा प्रहार करते हुए कहा है कि वह 'जंगल राज' और 'गुंडा राज' का चेहरा बन गयी हैं। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने शुक्रवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री खुलेआम धमकियां दे रही हैं। उन्होंने कहा, ममता बनर्जी के संरक्षण में पूरे राज्य में 'जंगल राज' कैसे फल-फूल रहा है। हर कोई परेशान है कि एक मुख्यमंत्री, जो संविधान को बनाए रखने की शपथ लेती है, भारत के गृह मंत्री को धमकी देती है। इसीलिए हम कहते हैं कि जंगल राज और गुंडाराज ऐसा ही दिखता है बिल्कुल ममता बनर्जी के शासन जैसा।</p>
<p>उन्होंने कहा, ममता बनर्जी ने भारत के गृह मंत्री को धमकी दी और दो बातें कहीं। पहली, अगर मैं चाहूं तो गृह मंत्री पश्चिम बंगाल में घुस नहीं सकते और दूसरी अगर मैं चाहूं तो गृह मंत्री अपने होटल के कमरे से बाहर भी नहीं निकल सकते। यह उनकी जान को खतरा है। इसीलिए ममता बनर्जी 'जंगल राज' और 'गुंडा राज' का चेहरा बन गई हैं। इस दौरान भाजपा नेता ने कांग्रेस और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए राहुल गांधी पर छल की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, राहुल गांधी देश में लगातार चुनाव हार रहे हैं और फिर बिना किसी आधार के झूठे दावे करते हैं। वह छल की राजनीति करते हैं और कहते हैं कि वोट चुराए गए।</p>
<p>इस दौरान भाटिया ने कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी के बयान का उल्लेख किया और कहा, चौधरी कहते हैं कि बंगाल में तृणमूल सिर्फ वोट नहीं चुराती, बल्कि वोट की डकैती करती है। उन्होंने कहा, अगर ममता बनर्जी वोट की डकैती कर रही हैं और हम कह रहे हैं कि जंगल राज है, तो यह इंडिया गठबंधन एक साथ चुनाव क्यों लड़ रहा था? कांग्रेस को इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को आने नहीं देंगी। एसआईआर एक कानूनी प्रक्रिया है।</p>
<p>इसके आगे अधीर रंजन चौधरी ने कहा, पश्चिम बंगाल में वोट चोरी, या यूं कहें कि वोट डकैती हो रही है और ममता बनर्जी यह कर रही हैं और जिस तरह से गृह मंत्री और नागरिकों को धमकियां दी जा रही हैं, उससे पता चलता है कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Jan 2026 19:03:48 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>&quot;बाबरी मस्जिद विवाद&quot; पर इकबाल अंसारी का बड़ा बयान, कहा-बाबर कोई मसीहा नही, न बने उसके नाम पर कोई मस्जिद</title>
                                    <description><![CDATA[इकबाल अंसारी ने पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद के नाम पर निर्माण की खबर को चुनावी राजनीति बताया। उन्होंने कहा कि बाबर किसी के मसीहा नहीं थे और देश में शांति बनी हुई है, ऐसे मुद्दे केवल राजनीति के लिए उठाए जा रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/iqbal-ansaris-big-statement-on-babri-dispute-said-that-babar/article-135071"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/ikbal-ansari.png" alt=""></a><br /><p>अयोध्या। बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि विवाद के पूर्व वादी इकबाल अंसारी ने पश्चिम बंगाल के बेलडांगा में निलंबित टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर द्वारा कथित रूप से बाबरी मस्जिद के नाम पर निर्माण की नींव रखे जाने को लेकर कहा कि यह कदम पूरी तरह चुनावी राजनीति से प्रेरित है और उनका मानना है कि बाबर के नाम पर कोई मस्जिद नही बननी चाहिए क्योंकि बाबर कोई मसीहा नहीं था।    </p>
<p>इकबाल अंसारी ने रविवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि 9 नवंबर 2019 को उच्चतम न्यायालय ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद पर अपना अंतिम फैसला सुनाया था, जिसके बाद देशभर के मुसलमानों ने न्यायालय के निर्णय का सम्मान किया और अमन बनाए रखा। कोर्ट ने फैसला किया और पूरे देश में एक पत्ता भी नहीं हिला। यही इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि आज देश में इस मुद्दे को लेकर कोई विवाद नहीं है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव नजदीक आते देख कुछ नेता फिर से मंदिर-मस्जिद की राजनीति शुरू कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव अब शुरू भी नहीं हुआ और बाबर के नाम की मस्जिद की याद आ गई। यह सिर्फ राजनीति है। देश को बांटने की कोशिश है। बाबर के संदर्भ में इकबाल अंसारी ने कहा कि बाबर न तो किसी का मसीहा था और न ही उसने इस देश में कोई ऐसा कार्य किया जो जनता, हिंदू-मुस्लिम या देशहित में हो। बाबर ने न कहीं स्कूल बनाया, न अस्पताल, न कोई विकास का काम किया। इसलिए बाबर के नाम पर मस्जिद बनाने की कोई जरूरत नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Dec 2025 16:46:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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