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                <title>TMC - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>TMC RSS Feed</description>
                
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                <title>'मेरे इस्तीफे का सवाल ही नहीं, हम हारे नहीं हराया गया है...',ममता ने चुनाव आयोग को बताया विलेन, बोलीं- मैं नहीं दूंगी इस्तीफा </title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल की निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनावी नतीजों को 'वोटों की चोरी' करार देते हुए इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है। उन्होंने चुनाव आयोग और केंद्र पर धांधली के गंभीर आरोप लगाए। ममता ने स्पष्ट किया कि वह INDIA गठबंधन के साथ मजबूती से खड़ी रहेंगी और इस हार के खिलाफ अपना लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रखेंगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/there-is-no-question-of-my-resignation-we-have-not/article-152805"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/mamta.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल की निवर्तमान मुख्यमंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने कहा है कि विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को जबरन हराया गया है और वह लोकभवन जाकर इस्तीफा नहीं देंगी। ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के एक दिन बाद मंगलवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि चुनाव आयोग और केंद्र सरकार ने तृणमूल कांग्रेस को जबरन हराया है। उन्होंने कहा, "हम हारे नहीं हैं, हमें हराया गया है।"</p>
<p>उन्होंने कहा, "इस चुनाव में चुनाव आयोग ने एक 'विलेन' के रूप में काम किया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गलत तरीके से चुनाव जीता है। नैतिक रूप से हमारी जीत हुई है।" ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि उन्हें और उनके चुनाव एजेंटों को मतदान केंद्रों से जबरन बाहर निकाला गया। उन्होंने अपने साथ धक्का-मुक्की होने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि वह लोकभवन जाकर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी।</p>
<p>तृणमूल प्रमुख ने कहा कि वह इंडिया गठबंधन के साथ बनी रहेंगी। उन्होंने बताया कि कांग्रेस नेता सोनिया गांधी एवं राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव तथा कई अन्य दलों के नेताओं ने उनसे फोन पर बात की है और कहा है कि वे तृणमूल कांग्रेस के साथ हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 18:31:47 +0530</pubDate>
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                <title>राहुल गांधी का विपक्ष पर हमला, बोले-तृणमूल कांग्रेस की हार पर जश्न नहीं, यह लोकतंत्र में 'वोट चोरी' का मामला</title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पश्चिम बंगाल और असम के चुनाव परिणामों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने टीएमसी की हार को 'वोट चोरी' करार देते हुए कहा कि यह जश्न मनाने का नहीं बल्कि लोकतंत्र को बचाने का समय है। राहुल ने आगाह किया कि यह हार केंद्र सरकार द्वारा लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करने की साजिश है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rahul-gandhi-attacked-the-opposition-and-said-there-is/article-152738"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rahul-gandhi1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहां है कि कुछ लोग पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की हार पर जश्न मना कर गलत कर रहे है क्योंकि यह हार 'वोट चोरी' का परिणाम है और लोकतंत्र के लिए सबसे खतरनाक स्थिति है। राहुल गांधी ने मंगलवार को सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि कांग्रेस के भीतर और बाहर कुछ लोग टीएमसी की हार पर खुशी जता रहे हैं लेकिन उन्हें यह समझना चाहिए कि असम और पश्चिम बंगाल के जनादेश में 'चोरी' हुई है और यह चोरी केंद्र सरकार के लोकतंत्र को कमजोर करने के मिशन की दिशा में बड़ा कदम है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यह समय हल्की राजनीति करने का नहीं है और टीएमसी की इस हार को एक पार्टी बनाम दूसरी पार्टी के नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए। कांग्रेस नेता ने कहा, "यह किसी एक दल का मुद्दा नहीं है, यह देश का मामला है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 17:56:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>कोलकाता में स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर टीएमसी का धरना : बैलट बॉक्स से छेड़खानी का आरोप, चुनाव आयोग ने दी सफाई </title>
                                    <description><![CDATA[कोलकाता में टीएमसी नेताओं ने ईवीएम स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर धरना शुरू कर दिया है। कुणाल घोष ने पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए बिना प्रतिनिधियों के काम करने का आरोप लगाया। हालांकि, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि केवल पोस्टल बैलट की छंटनी हो रही थी और सभी ईवीएम पूरी तरह सुरक्षित और लॉक हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/tmcs-protest-outside-the-strong-room-in-kolkata-election-commission/article-152269"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(4).png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस के नेता गुरुवार शाम से कोलकाता में ईवीएम स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर धरने पर बैठ गए। उनका आरोप है कि बैलट बॉक्स उनके प्रतिनिधियों की मौजूदगी के बिना खोले जा रहे हैं। पार्टी ने एक्स पर एक वीडियो भी पोस्ट किया। स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर धरने पर बैठे टीएमसी नेता कुणाल घोष ने कहा कि चुनाव आयोग के लाइवस्ट्रीम में अंदर कुछ लोग काम करते दिख रहे हैं, लेकिन टीएमसी के किसी प्रतिनिधि को अंदर नहीं जाने दिया जा रहा। पांजा ने कहा कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी तरह का मैनिपुलेशन नहीं होनी चाहिए। </p>
<p>चुनाव आयोग ने भी मामले पर सफाई दी है। आयोग ने कहा कि पोस्टल बैलट के लिए अलग स्ट्रॉन्ग रूम बनाया गया है, जहां बैलट की छंटनी की जा रही थी। इस प्रक्रिया की जानकारी पहले ही सभी राजनीतिक दलों को दे दी गई थी। ईवीएम पूरी तरह सुरक्षित और लॉक हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 10:27:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव : दूसरे चरण का मतदान बुधवार को ; BJP-TMC के लिए परीक्षा की घड़ी, इन दिग्गजों की साख दांव पर</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल चुनाव अब अपने सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव पर है। बुधवार को 8 जिलों की 142 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। पीएम मोदी की रैलियों और ममता बनर्जी बनाम सुवेंदु अधिकारी के भवानीपुर मुकाबले ने इस चरण को हाई-प्रोफाइल बना दिया है। सीएए, नागरिकता और शरणार्थी मुद्दों के बीच भाजपा और तृणमूल में कांटे की टक्कर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/west-bengal-assembly-elections-second-phase-voting-on-wednesday-a/article-151945"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(1)53.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पहले चरण में 93 प्रतिशत से अधिक के रिकॉर्ड मतदान और तृणमूल कांग्रेस तथा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दावों के साथ, पश्चिम बंगाल चुनाव अब अपने सबसे निर्णायक चरण में पहुँच गया है, जहाँ बुधवार को आठ जिलों के 142 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान होगा। कोलकाता और दक्षिण बंगाल पारंपरिक रूप से तृणमूल का मजबूत गढ़ माने जाते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा छह जनसभाएं और दो रोड शो करने के साथ यह स्पष्ट हो गया है कि भाजपा इस रूझान को तोड़ने के लिए बेताब है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, इस चरण में एक करोड़, 64 लाख ,35 हजार, 627 पुरुष, एक करोड़, 57 लाख, 37 हजार, 418 महिलाएं और 792 तीसरे लिंग के मतदाताओं सहित कुल तीन करोड़, 21 लाख, 73 हजार, 837 मतदाता 41,001 मतदान केंद्रों पर अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इन सभी मतदान केंद्रों पर वेबकास्टिंग निगरानी की व्यवस्था होगी।</p>
<p>इन जिलों की सामाजिक संरचना, मतदाताओं की संख्या और विविधता इस चरण को न केवल संख्यात्मक बल्कि राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण बनाती है। निर्वाचन क्षेत्र आठ प्रमुख जिलों- उत्तर कोलकाता (7 सीटें), दक्षिण कोलकाता (4), उत्तर 24 परगना (33), दक्षिण 24 परगना (31), हावड़ा (16), नदिया (17), हुगली (18) और पूर्व बर्धमान (16) में फैले हुए हैं, जिनमें तीन जिलों में अंतरराष्ट्रीय और नदी सीमाएं इसे न केवल राजनीतिक रूप से बल्कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी चुनौतीपूर्ण बनाती हैं।</p>
<p>जनसांख्यिकीय रूप से, दक्षिण 24 परगना, हावड़ा और दक्षिण कोलकाता के बड़े हिस्सों में महत्वपूर्ण अल्पसंख्यक आबादी है, जबकि नदिया और उत्तर 24 परगना जैसे जिलों में पर्याप्त मतुआ और शरणार्थी समुदाय शामिल हैं, जहां पहचान और नागरिकता का मुद्दा प्रमुख है। उल्लेखनीय है कि 2021 के विधानसभा चुनावों में, भाजपा के आक्रामक प्रचार के बावजूद, तृणमूल ने इन क्षेत्रों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी थी और 142 में से 123 सीटों पर जीत हासिल की थी।</p>
<p>भाजपा ने हालांकि पूरे बंगाल में 77 सीटें हासिल की थीं, जो राज्य में अब तक की उसकी सबसे अधिक सीटें हैं, लेकिन इस क्षेत्र में भगवा खेमा केवल 18 सीटें सुरक्षित करने में सफल रहा, जिससे इस बार श्री मोदी और उनकी ब्रिगेड के लिए यह सबसे कठिन लड़ाइयों में से एक बन गई है। भाजपा के लिए कठिनाई अंकगणित और जनसांख्यिकी दोनों में निहित है। पिछले कुछ वर्षों में, पार्टी मतुआ और शरणार्थी आबादी के बीच, विशेष रूप से नदिया और उत्तर 24 परगना में, अपना समर्थन मजबूत करने में सफल रही थी, लेकिन हाल के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के कारण शरणार्थी मतदाताओं के एक वर्ग के चुनावी सूची से बाहर होने से इन वर्गों में बेचैनी पैदा हुई है, जो भाजपा के लिए गंभीर चुनौती पेश कर रही है।</p>
<p>इस चरण के महत्व को पहचानते हुए, पीएम मोदी ने केवल चार दिनों में छह रैलियां और दो रोड शो करके एक गहन प्रचार अभियान चलाया है, जिसमें दो मतुआ बहुल कृष्णानगर और बनगांव इलाके भी शामिल हैं। प्रधानमंत्री के साथ, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन जैसे हाई-प्रोफाइल नेताओं ने धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए लोगों को नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के माध्यम से नागरिकता अधिकार देने का लगातार वादा किया है, हालांकि यह देखना बाकी है कि पार्टी तृणमूल के इस गढ़ में कितनी सेंध लगा पाती है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए भी दांव उतने ही अहम हैं, क्योंकि इस चरण में कुछ हाई-प्रोफाइल निर्वाचन क्षेत्र दांव पर हैं, जिनमें सबसे उल्लेखनीय भवानीपुर है, जहाँ सुश्री बनर्जी का नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी के साथ सीधा मुकाबला है। एसआईआर प्रक्रिया के बाद लगभग 51,000 मतदाताओं (लगभग 21 प्रतिशत) के नाम हटने के बाद इस सीट ने अतिरिक्त ध्यान आकर्षित किया है, जो संभावित रूप से चुनावी समीकरणों को बदल सकता है। भवानीपुर के अलावा, कई प्रमुख नेता मैदान में हैं, जिनमें फिरहाद हकीम (कोलकाता पोर्ट), चंद्रिमा भट्टाचार्य (दमदम उत्तर), शशि पांजा (श्यामपुकुर), अरूप विश्वास (टॉलीगंज), ब्रात्य बसु (दमदम) और सुजीत बसु (बिधाननगर) शामिल हैं।</p>
<p>भाजपा ने अपनी ओर से स्वपन दासगुप्ता और रूपा गांगुली जैसे चर्चित चेहरों को मैदान में उतारा है और पानीहाटी से आरजी कर अस्पताल की पीड़िता की मां को नामांकित करके भावनात्मक मुद्दों का लाभ उठाने का प्रयास किया है। दोनों दल पहले चरण के भारी मतदान की व्याख्या अपने लाभ के लिए कर रहे हैं। जहाँ पीएम मोदी ने दावा किया है कि मतदान 'परिवर्तन की लहर' को दर्शाता है, वहीं अभिषेक बनर्जी सहित तृणमूल नेतृत्व ने दावा किया है कि यह सत्तारूढ़ दल के लिए मजबूत समर्थन और एनआरसी तथा नागरिकता के इर्द-गिर्द भाजपा के खिलाफ प्रतिरोध का संकेत देता है।</p>
<p>भाजपा के लिए, यह एक परीक्षा है कि क्या उसका आक्रामक प्रचार और लक्षित पहुँच उस क्षेत्र में महत्वपूर्ण लाभ में बदल सकती है जहाँ उसने ऐतिहासिक रूप से संघर्ष किया है। तृणमूल के लिए, यह अपने किले की रक्षा करने और अपने पारंपरिक प्रभुत्व को एक नए जनादेश में बदलने के बारे में है। 142 सीटों के दांव पर होने के साथ, इस चरण का परिणाम पश्चिम बंगाल में अंतिम चुनावी फैसले को निर्णायक रूप से प्रभावित कर सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 16:12:02 +0530</pubDate>
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                <title>कृष्णानगर सभा में मोदी का ममता पर वार: झालमुड़ी मैंने खाई, मिर्ची टीएमसी को लगी, बोले-शरणार्थियों की नागरिकता पर कोई खतरा नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री मोदी ने नदिया में जनसभा को संबोधित करते हुए CAA के तहत शरणार्थियों की नागरिकता सुरक्षित रखने का आश्वासन दिया। उन्होंने टीएमसी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि 4 मई को जीत की मिठाई और झालमुड़ी दोनों बंटेंगी। मोदी ने पहले चरण के शांतिपूर्ण मतदान के लिए चुनाव आयोग की सराहना भी की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/modis-attack-on-mamta-in-krishnanagar-meeting-jhalmudi-i-ate/article-151517"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/modi9.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए शरणार्थियों की नागरिकता सुरक्षित रहेगी और उन्हें इसके लिए आशंकित होने की आवश्यकता नहीं है। मोदी ने पश्चिम बंगाल में चुनाव के पहले चरण के दौरान नदिया जिले के कृष्णनगर में जनसभा को संबोधित करते हुए शरणार्थी समुदायों को नागरिकता सुरक्षा का आश्वासन दिया और महिलाओं के लिए कई कल्याणकारी घोषणाएं कीं।  मोदी ने अब वायरल हो चुके झालमुड़ी वाले किस्से का जिक्र किया। उन्होंने कहा, मैंने सुना है कि झालमुड़ी ने कुछ लोगों को झटका दिया है। मैंने तो झालमुड़ी खाई थी, लेकिन ‘झाल’(तीखापन) तृणमूल को लगा। </p>
<p><strong>चार मई को मिठाई भी बंटेगी और झालमुड़ी भी </strong></p>
<p>पीएम मोदी ने कहा कि चार मई को मिठाई भी बंटेगी और झालमुड़ी भी बांटी जाएगी।  मोदी ने कहा कि, राज्य में पहले चरण की वोटिंग चल रही है और वह सभी मतदाताओं का अभिनंदन करते हैं। प्रधानमंत्री ने लोगों से अपील की कि इस बार मतदान का नया रिकॉर्ड बनाया जाना चाहिए। </p>
<p><strong>भाजपा सरकार बनी तो सीएए होगा तेज</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि किसी भी शरणार्थी परिवार को तृणमूल से डरने की जरूरत नहीं है। जो लोग धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए हैं, मोदी उनके साथ हैं। राज्य में भाजपा सरकार आने के बाद, सीएए की प्रक्रिया तेज की जाएगी। आपको वे सभी दस्तावेज और सुविधाएं मिलेंगी, जिनके आप एक भारतीय नागरिक के तौर पर हकदार हैं। उन्होंने कहा कि जहां भी मतदान प्रतिशत अधिक होता है, वहां भाजपा को लाभ मिलता है और पश्चिम बंगाल में भी ऐसा ही परिणाम देखने को मिलेगा।  मोदी ने चुनावी माहौल को अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण बताते हुए चुनाव आयोग की भूमिका की सराहना की और कहा कि चुनाव प्रक्रिया में विश्वास स्थापित हुआ है। उन्होंने कहा, पिछले 50 सालों में यह ऐसा चुनाव है, जिसमें हिंसा न के बराबर हुई है। पहले हत्याएं होती थीं और उन्हें आत्महत्या बता दिया जाता था। अब तक मुझे जो जानकारी मिली है, उसके अनुसार यह चुनाव भी शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है। मैं चुनाव प्रक्रिया में विश्वास कायम करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग को धन्यवाद देना चाहता हूं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 09:41:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>शुभेंदु अधिकारी का दावा : पश्चिम बंगाल में भाजपा की एकतरफा जीत का भरोसा, तृणमूल कांग्रेस की नहीं होगी सत्ता में वापसी</title>
                                    <description><![CDATA[नंदीग्राम में अपना वोट डालने के बाद भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने ममता सरकार की विदाई का दावा किया। उन्होंने कहा कि फर्जी मतदाताओं के हटने के बाद TMC की वापसी असंभव है। पहले चरण की 152 सीटों पर मतदान के बीच अधिकारी ने बंगाल में पूर्ण बहुमत के साथ भाजपा सरकार बनने का भरोसा जताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/shubhendu-adhikari-claims-that-trinamool-congress-will-not-return-to/article-151448"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/शुभेंदु-अधिकारी.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उम्मीदवार एवं वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी ने गुरुवार को नंदीग्राम मतदान केन्द्र पर अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया और पार्टी की जीत का भरोसा जताया। शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस का इस बार चुनाव जीतने का कोई मौका नहीं है। पश्चिम बंगाल में आज पहले चरण में 152 विधानसभा सीटों के लिए मतदान जारी है। राज्य में दो चरणों में मतदान कराया जा रहा है। जबकि पिछली बार आठ चरणों में मतदान कराया गया था। शुभेंदु अधिकारी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया का ज़िक्र करते हुए कहा कि मृतक और फ़र्ज़ी मतदाताओं को हटाने के बाद तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में वापसी का कोई मौका नहीं है। उन्होंने कहा "वे हारेंगे। इस बार हम सरकार बनाएंगे।"</p>
<p>बंगाल चुनावों के पहले चरण में शुभेंदु अधिकारी सहित कई जाने-माने उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। इसके अलावा माथाभांगा से भाजपा के पूर्व केंद्रीय मंत्री निशीथ प्रमाणिक और दिनहाटा में टीएमसी के राज्य मंत्री उदयन गुहा चुनाव लड़ रहे हैं। त़णमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गौतम देव सिलीगुड़ी से चुनावी मैदान में उतरे हैं, जबकि कांग्रेस के दिग्गज नेता अधीर रंजन चौधरी बहरामपुर से चुनाव लड़ रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 16:39:15 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव : पूर्व टीएमसी सांसद नुसरत जहां ईडी के समक्ष हुईं पेश, कंपनी की अनियमितताओं में उनकी कोई भूमिका नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[करोड़ों के आवास घोटाले में फंसी पूर्व सांसद और अभिनेत्री नुसरत जहां साल्ट लेक स्थित ईडी कार्यालय में पेश हुईं। उन पर राजारहाट आवासीय परियोजना में फ्लैट के नाम पर खरीदारों से ₹25 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी का आरोप है। नुसरत ने आरोपों को खारिज करते हुए खुद को कंपनी के कामकाज से अलग बताया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/former-west-bengal-assembly-election-tmc-mp-nusrat-jahan-appears/article-151333"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/ed2.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। बंगला फिल्म अभिनेत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की पूर्व सांसद नुसरत जहां बुधवार को यहां प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों के समक्ष पेश हुईं। नुसरत कोलकाता के बाहरी इलाके राजारहाट में एक आवासीय परियोजना से जुड़े कथित आवास धोखाधड़ी के मामले में समन भेजे जाने के बाद साल्ट लेक स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स में केंद्रीय एजेंसी के कार्यालय पहुंचीं। ईडी के एक अधिकारी ने बताया कि सुश्री नुसरत एक रियल एस्टेट कंपनी की निदेशक थीं। यह कंपनी राजारहाट में आवासीय फ्लैट विकसित कर रही थी। उन्होंने जानकारी दी कि जिस कंपनी में उन्होंने निदेशक के रूप में कार्य किया है, उस पर वादा किए गए फ्लैट देने में विफल रहने और सैकड़ों संभावित घर खरीदारों से धन एकत्र करने का आरोप है।</p>
<p>एक अन्य अधिकारी के अनुसार, लगभग 429 खरीदारों में से प्रत्येक ने राजारहाट परियोजना में आवासीय इकाइयों के लिए लगभग 5.5 लाख रुपये का भुगतान किया था, जिससे इसमें शामिल कुल राशि 25 करोड़ रुपये से अधिक हो गई। भुगतान के बावजूद, कथित तौर पर फ्लैट कभी नहीं सौंपे गए, जिससे प्रभावित खरीदारों को कानूनी रास्ता अपनाना पड़ा। नुसरत ने हालांकि कई मौकों पर खुद को इस रियल एस्टेट फर्म से अलग बताया है। उन्होंने कहा है कि उन्होंने किसी भी जांच शुरू होने से बहुत पहले 2017 में ही कंपनी के निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया था। उनका दावा है कि कंपनी के दैनिक कामकाज या कथित अनियमितताओं में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। बुधवार को नुसरत ने इस बारे में पत्रकारों के पूछे किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया। इससे पहले उन्होंने ईडी से दिल्ली कार्यालय में पूछताछ करने का अनुरोध भी किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 17:27:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>खड़गपुर सदर में कड़ा मुकाबला :  दिलीप घोष बनाम सरकार फिर आमने-सामने, जाति, समुदाय, मतदान प्रतिशत और अब मतदाताओं की अनुपस्थिति पर ध्यान केंद्रित </title>
                                    <description><![CDATA[खड़गपुर सदर में दिलीप घोष (भाजपा) और प्रदीप सरकार (TMC) के बीच कड़ा मुकाबला है। 44,000 मतदाताओं के नाम हटने से बूथ प्रबंधन निर्णायक हो गया है। गैर-बंगाली आबादी और औद्योगिक मुद्दों के कारण यहाँ का चुनावी मिजाज अक्सर राज्य की लहर के विपरीत रहता है, जिससे यह एक लो-मार्जिन सीट बन गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/tough-contest-in-kharagpur-sadar-ghosh-vs-government-again-face/article-151158"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/dilip-ghosh.png" alt=""></a><br /><p>खड़गपुर। पश्चिम बंगाल में खड़गपुर सदर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, जिसे जनसांख्यिकीय रूप से एक 'लघु भारत' कहा जा सकता है, शायद ही कभी मुख्य धारा के साथ चला है, और इसके परिणाम अक्सर पश्चिम बंगाल के अन्य हिस्सों में देखे जाने वाले रुझानों के विपरीत रहे हैं। चुनाव विश्लेषक इसे 'अल्प अंतर वाली सीट' कह सकते हैं। पश्चिम मेदिनीपुर जिले के इस निर्वाचन क्षेत्र के परिणाम अक्सर विजेताओं और हारने वालों के बीच मतों के बहुत कम अंतर से तय होते रहे हैं। खड़गपुर सदर,  दशकों तक, कांग्रेस का गढ़ रहा, और विशेष रूप से बंगाल की राजनीति के सम्मानित ‘चाचा’ - ज्ञान सिंह सोहनपाल का, जिन्होंने 1969 से 2011 के बीच 10 बार जीत दर्ज की, जब तक कि 2016 में अपने अंतिम चुनाव में वे भाजपा के दिलीप घोष से हार नहीं गये। भगवा दल ने 2021 में भी इस सीट पर अपना कब्जा बनाये रखा, जब उसने बंगाली फिल्म और टीवी अभिनेता हिरण चटर्जी को उम्मीदवार बनाया था।</p>
<p>जहां सोहनपाल की अधिकांश जीत तब हुई जब राज्य में वामपंथी मोर्चे ने भारी बहुमत प्राप्त किया था, वहीं 2016 और 2021 में तृणमूल कांग्रेस ने बंगाल की सत्ता पर प्रचंड बहुमत के साथ कब्जा किया। चूंकि राज्य विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 23 अप्रैल को इस निर्वाचन क्षेत्र में मतदान होना है, यहां की राजनैतिक लड़ाई लहर के बजाय जाति, समुदाय, मतदान प्रतिशत और अब मतदाताओं की अनुपस्थिति पर अधिक केंद्रित है।</p>
<p>इस प्रतियोगिता के केंद्र में भाजपा के दिलीप घोष और तृणमूल कांग्रेस के प्रदीप सरकार के बीच एक बड़ा मुकाबला है, ये दो ऐसे नेता हैं जिनका खड़गपुर सदर में चुनावी इतिहास गहराई से जुड़ा हुआ है, लेकिन व्यक्तित्वों से परे, यह चुनाव तीन निर्णायक कारकों के आधार पर आकार ले रहा है: मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) का प्रभाव, निर्वाचन क्षेत्र की जटिल जनसांख्यिकीय संरचना और औद्योगिक क्षमता एवं वास्तविक जीवन की परिस्थितियों के बीच निरंतर बना हुआ अंतर।</p>
<p>इस बार सबसे बड़ा प्रभाव डालने वाला कारक चुनाव आयोग के एसआईआर प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से लगभग 44,000 नामों का हटाया जाना है। जिस निर्वाचन क्षेत्र में 2021 का परिणाम केवल 3,771 मतों से तय हुआ हो, वहां यह कोई मामूली बदलाव नहीं,- बल्कि एक संरचनात्मक परिवर्तन है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि न तो भाजपा और न ही तृणमूल कांग्रेस आत्मविश्वास के साथ यह कह सकती है कि इन कटौतियों का सबसे ज्यादा असर कहां पड़ा है। खड़गपुर के एक स्थानीय राजनीतिक विश्लेषक ने कहा, “ यदि हटाये गये मतदाताओं का 10-15 प्रतिशत भी विशिष्ट क्षेत्रों में केंद्रित था, तो यह बूथ स्तर के समीकरणों को पलट सकता है। यह चुनाव लहर के बजाय इस बात पर निर्भर करेगा कि शेष मतदाताओं में से कौन मतदान प्रतिशत को बेहतर ढंग से प्रबंधित करता है।”</p>
<p>यह मुकाबला हालांकि केवल द्विध्रुवीय नहीं है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के उम्मीदवार मधुसूदन रॉय और कांग्रेस की उम्मीदवार पापिया चक्रवर्ती इस दौड़ में और गहराई जोड़ते हैं, जिससे मतों के विभाजन की संभावना बढ़ जाती है। खड़गपुर के बार-बार राज्यव्यापी रुझान के विरुद्ध जाने का कारण आंशिक रूप से इसकी जनसांख्यिकीय बनावट में निहित है। खड़गपुर जंक्शन और आई.आई.टी. खड़गपुर की उपस्थिति के कारण यह एक रेलवे और औद्योगिक शहर है, जहां गैर-बंगाली और प्रवासी मूल की बड़ी आबादी, जैसे तेलुगु, हिंदी, मराठी और ओडिया भाषी समुदाय — निवास करती है। इनकी मतदान प्राथमिकताएं अक्सर ग्रामीण बंगाल से भिन्न होती हैं।</p>
<p>एक सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी एस. नारायणन ने कहा, "रेलवे कॉलोनियों में लोग नौकरियों, तबादलों और पेंशन के बारे में बात करते हैं - स्थानीय राजनीति के बारे में नहीं। यहां बहुत से लोगों को लगता है कि राष्ट्रीय मुद्दे अधिक मायने रखते हैं, इसलिए भाजपा को लाभ मिलता है। लेकिन पुराने खड़गपुर और आस-पास के क्षेत्रों में तृणमूल का स्थानीय नेटवर्क मजबूत है।" यह दोहरी स्थिति वह पैदा करती है, जिसे राजनैतिक रणनीतिकार "विभाजित निर्वाचन क्षेत्र" कहते हैं, जहां राष्ट्रीय विमर्श और स्थानीय शासन एक साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं और अक्सर एक-दूसरे के प्रभाव को शून्य कर देते हैं। भाजपा के लिए श्री घोष की वापसी रणनीतिक और प्रतीकात्मक दोनों है। 2016 में पहली बार कांग्रेस के गढ़ को तोड़ने वाले श्री घोष आज भी उन गिने-चुने नेताओं में से एक हैं जिनका व्यक्तिगत जनाधार सभी समुदायों में फैला है। उनका अभियान कानून-व्यवस्था, प्रवासन और पहचान की राजनीति के विषयों पर केंद्रित रहा है। साथ ही वे यह तर्क भी दे रहे हैं कि केंद्र के साथ तालमेल बिठाने से रुकी हुई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में तेजी आ सकती है।</p>
<p>घोष ने मीडिया से कहा, "विकास की कमी एक प्रमुख मुद्दा है। सड़कें खस्ताहाल हैं। खराब जल निकासी व्यवस्था और अपर्याप्त पेयजल अन्य समस्याएं हैं। निर्वाचन क्षेत्र के विशाल क्षेत्रों में औद्योगिक प्रदूषण अधिक है। खड़गपुर एक ऐसा क्षेत्र है, जहां से हमें पिछले कुछ चुनावों में लगातार बढ़त मिली है। यहां तक कि 2024 के लोकसभा चुनावों में हम मेदिनीपुर से हार गये, लेकिन खड़गपुर सदर ने हमारे उम्मीदवार को बढ़त दी थी।" तृणमूल कांग्रेस ने प्रदीप सरकार की सुलभता और संगठनात्मक पहुंच पर केंद्रित एक स्थानीय रणनीति अपनायी है। 2021 में मामूली अंतर से हारने वाले सरकार का अभियान बूथ स्तर की मजबूती और जन कल्याणकारी योजनाओं पर केंद्रित है। मालंचा की निवासी शम्पा दास ने कहा, "वे यहीं रहते हैं, हम उन तक पहुंच सकते हैं। चुनाव के बाद भी वे हमसे जुड़े रहते हैं।"</p>
<p>खड़गपुर सदर जैसे बहुत कम निर्वाचन क्षेत्र विरोधाभासों को समेटे हुए हैं। यहां भारत के प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थानों में से एक और महत्वपूर्ण रेलवे बुनियादी ढांचा है, फिर भी यह बुनियादी नागरिक समस्याओं से जूझ रहा है। निवासी बार-बार रुकी हुई परियोजनाओं, खराब जल निकासी, पानी की कमी और पास की फैक्ट्रियों से होने वाले प्रदूषण की ओर इशारा करते हैं। एन.एच.-16 के पास एक दुकानदार सलीम खान ने कहा, "फैक्ट्रियां रहें, लेकिन धूल और धुआं तो बंद हो।"</p>
<p>ऐसी धारणा भी बढ़ रही है कि राज्य और केंद्र के बीच राजनैतिक मतभेदों ने विकास की गति धीमी कर दी है। खड़गपुर कॉलेज के बाहर एक पहली बार मतदाता बने युवा ने कहा, "यदि एक ही दल सत्ता में हो, तो काम तेजी से हो सकता है।" पिछले रुझान बताते हैं कि 2026 का परिणाम संभवतः किसी बड़ी लहर के बजाय मामूली बढ़त,- जैसे बूथ प्रबंधन, मतदान प्रतिशत और अपने मूल मतदाताओं को बनाये रखते हुए प्रतिद्वंद्वी के आधार में सेंध लगाने की क्षमता - से तय होगा। फिलहाल, जमीन पर माहौल न तो निर्णायक रूप से सत्ता के पक्ष में है और न ही सत्ता विरोधी है। यह सतर्क और व्यावहारिक है। गोल बाजार के पास एक बुजुर्ग मतदाता ने कहा, “हर बार विजेता बदलता है, लेकिन हमारा जीवन नहीं बदलता।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 12:13:09 +0530</pubDate>
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                <title>सीएम ममता का दावा : सुरक्षा जांच के लिए रोका काफ़िला; चुनाव आयोग से शिकायत दर्ज कराई, टोल-फ्री हेल्पलाइन जारी</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने काफिले को सुरक्षा जांच के लिए रोके जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि 'व्हाट्सऐप निर्देश' के जरिए पार्टी नेताओं को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। पार्टी ने इसे पक्षपातपूर्ण कार्रवाई और लोकतांत्रिक मर्यादा का उल्लंघन बताया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/cm-mamata-claims-convoy-stopped-for-security-check-door-to-door-voting/article-150614"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/mamta-banarji.jpg" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को दावा किया कि सुरक्षा जांच के लिए उनके काफिले को रोका गया। इसी बीच, तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग से औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। यह शिकायत एक व्हाट्सऐप ग्रुप के ज़रिए कथित तौर पर जारी किए गए निर्देशों के बारे में है, जिसमें अधिकारियों को उसके (तृणमूल) नेताओं के वाहनों की तलाशी लेने का निर्देश दिया गया है। ममता बनर्जी ने कहा, "मुझे जांच से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उसका मकसद निष्पक्ष होना चाहिए।"</p>
<p>कोलकाता में तृणमूल ने चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई और चुनाव निकाय के "व्हाट्सऐप निर्देश" के कथित स्क्रीनशॉट साझा किए, जिसमें उसके नेताओं के वाहनों की तलाशी का आदेश दिया गया है। अपनी लिखित शिकायत में, सत्ताधारी पार्टी ने दावा किया कि यह कथित आदेश विशेष रूप से मुख्यमंत्री को छोड़कर तृणमूल के अन्य सभी नेताओं को निशाना बनाता है। पार्टी ने आरोप लगाया कि सांसद अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी रुजिरा नरूला बनर्जी द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों को भी जांच के लिए नामित किया गया है। इससे पहले, मंगलवार को पार्टी ने कथित व्हाट्सऐप चैट के स्क्रीनशॉट जारी किए थे, जिसमें ये निर्देश शामिल थे।</p>
<p>तृणमूल के अनुसार, इन संदेशों से यह संकेत मिलता है कि आयोग को संदेह है कि अभिषेक बनर्जी की पत्नी के माध्यम से पैसों का लेन-देन हो सकता है, और इसलिए उसने पार्टी नेताओं के वाहनों की "गहन जांच" करने का निर्देश दिया। पार्टी के दावे के अनुसार, स्क्रीनशॉट से पता चलता है कि अधिकारियों को तृणमूल नेताओं और मंत्रियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों की (जिनमें सुरक्षा घेरे वाले वाहन भी शामिल हैं) विभिन्न चौकियों पर दिन भर जांच करने के निर्देश दिए गए है। कथित निर्देश में यह भी उल्लेख किया गया था कि पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) को चुनाव पर्यवेक्षकों की सहायता करनी चाहिए, जबकि एक कंट्रोल रूम ऐसी "अचानक" की जाने वाली जांचों पर नज़र रखेगा।</p>
<p>तृणमूल ने आरोप लगाया कि आयोग ने प्रभावी रूप से उसके नेतृत्व को निशाना बनाया है और जांच का दायरा परिवार के सदस्यों तक भी बढ़ा दिया है। पार्टी ने दावा किया कि चुनावों से पहले उसके जनसंपर्क कार्यक्रमों और चुनाव प्रचार से संबंधित गतिविधियों को निशाना बनाया जा रहा है। हालाँकि, इन स्क्रीनशॉट की प्रामाणिकता और स्पष्टता पर सवाल उठाए गए हैं। इसमें "अभिषेक" नाम अंग्रेजी में अलग-अलग वर्तनी में दिखाई देता है, जिसके साथ कोई उपनाम या पदनाम नहीं जुड़ा है। इससे यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि यह संदर्भ वास्तव में तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव के लिए ही है या नहीं।</p>
<p>इसी तरह, जहाँ कथित तौर पर चैट में उनकी पत्नी का ज़िक्र है, वहीं किसी नाम का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं किया गया है। इन स्क्रीनशॉट में कथित तौर पर चुनाव पर्यवेक्षकों के लिए व्यापक निर्देश भी शामिल हैं, जिनमें यह दावा भी किया गया है कि मेडिकल कैंपों की आड़ में पैसों का वितरण किया जा रहा है। नादिया, बसीरहाट, बनगाँव, कैनिंग, तेहट्टा, रानाघाट, काकद्वीप, मगराहाट-II, डायमंड हार्बर I और II, फलता और लालबाग जैसे विशिष्ट क्षेत्रों को कथित तौर पर जांच के लिए चिह्नित किया गया है।</p>
<p>चुनाव आयोग (ईसीआई) ने बुधवार को कहा कि कोलकाता उत्तर की सभी विधानसभा सीटों पर 85 वर्ष और उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों, और दिव्यांग जनों के लिए घर से वोट डालने की सुविधा 16 अप्रैल से शुरू होगी। इस पहल का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में पहुंच और समावेशिता को बेहतर बनाना है। आयोग के अनुसार 85 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग मतदाता और मतदाता सूची में चिह्नित दिव्यांग व्यक्ति पोस्टल बैलेट के माध्यम से अपना वोट डाल सकेंगे। </p>
<p>अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए ऐसे मतदाताओं को अधिसूचना जारी होने की तारीख से पांच दिनों के भीतर अपने संबंधित रिटर्निंग अधिकारी के पास आवेदन करना होगा। केंद्रीय बलों और पुलिस के साथ मतदान टीमें वोट लेने के लिए घर-घर जाएंगी। वोट जमा करने के लिए ईवीएम का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा, मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने मतदान अवधि के दौरान कानून-व्यवस्था से संबंधित शिकायतों के लिए एक टोल-फ्री हेल्पलाइन जारी की है। नागरिक 1800-345-008 पर कॉल करके अपनी चिंताएं बता सकते हैं। इस कदम से बुजुर्गों और दिव्यांग मतदाताओं की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है, जिससे एक अधिक समावेशी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति प्रतिबद्धता और मजबूत होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 14:51:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता की मुश्किल बढ़ाएंगे ओवैसी, बोले-बंगाल में नाइंसाफी की लंबी लिस्ट, हुमायूं कबीर से गठबंधन का ऐलान</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी ने हुमायूं कबीर की जनता उन्नयन पार्टी (JUP) के साथ गठबंधन का ऐलान कर ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ओवैसी ने 30% मुस्लिम आबादी की अनदेखी का आरोप लगाते हुए टीएमसी के वोट बैंक में सेंधमारी की तैयारी की है। राज्य में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/owaisi-will-increase-mamatas-problems-in-west-bengal-assembly-elections/article-147629"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(5)17.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता/हैदराबाद। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में असुदद्दीन ओवैसी ममता बनर्जी की अगुवाई वाली टीएमसी की मुश्किलें बढ़ाएंगे। ओवैसी ने रविवार को हैदराबाद में हुमायूं कबीर की जनता उन्नयन पार्टी (जेयूपी) के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। ओवैसी ने ईद के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए ममता बनर्जी को निशाने पर लिया और कहा कि राज्य में मुस्लिमों की आबादी 30 फीसदी है, लेकिन धर्मनिरपेक्ष होकर उनसे वोट तो लेते हैं लेकिन उन्हें उनका हक और भागीदारी नहीं देते हैं। ओवैसी ने लोगों से लगा कि दुआ करें कि मजलिस और मजबूत हो। बंगाल के ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस 291 सीटों पर लड़ रही है।</p>
<p>हैदराबाद में एआईएमआईएम चीफ प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि बंगाल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। एआईएमआईएम ने फैसला लिया है कि पश्चिम बंगाल में हुमायूं कबीर की पार्टी के साथ पार्टी एक गठबंधन करेगी और हम इस चुनाव में हिस्सा लेंगे। हमारी कोशिश है कि एआईएमआईएम को मजबूत किया जाए। हमारी आवाज को मजबूत किया जाए। ओवैसी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार हैं। वहां 30 फीसदी मुसलमानों की आबादी है, वहां लगभग 5 लाख पिछड़े वर्ग के प्रमाण पत्र को रद्द कर दिया गया। जिसमें मुसलमान भी शामिल हैं। ये लोग धर्मनिरपेक्षता के नाम पर वोट हासिल करते हैं लेकिन जहां एआईएमआईएम हिस्सेदारी की बात करती है तो इन्हें तकलीफ होती है। पश्चिम बंगाल में हुमायूं कबीर दो सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं।</p>
<p><strong>अभी तक कबीर ने उतारे हैं 182 कैंडिडेट</strong></p>
<p>हुमायूं कबीर की जनता उन्नयन पार्टी ने अभी तक 182 कैंडिडेट का ऐलान किया है। टीएमसी से सस्पेंड होने के बाद नई पार्टी जनता उन्नयन पार्टी थी। हुमायूं कबीर खुद बेलडांगा और रेजीनगर से लड़ रहे हैं। उन्होंने ममता बनर्जी के खिलाफ भबानीपुर में पूनम बेगम को उतारा है। हुमायूं कबीर टीएमसी में थे, लेकिन टीएमसी ने उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों की वजह से निष्कासित कर दिया था। अब वह ममता बनर्जी के मुस्लिम वोट बैंक में सेंधमारी करना चाहते हैं। ओवैसी के ऐलान ने सत्तारूढ़ टीएमसी की मुश्किलें बढ़ा दी है। बंगाल में अभी नामांकन प्रक्रिया शुरू नहीं हुई। राज्य में दो चरणों में चुनाव हैं। इसके लिए 23 और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। नतीजे 4 मई को घोषित होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 11:00:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: बंगाल चुनावी मुकाबले में नजर आया 'सरप्राइज फैक्टर'; चमक बिखेर रहे सेलिब्रिटी, चुनौतियों से घिरी होंगी ममता </title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए TMC और BJP ने सितारों पर दांव खेला है। राज चक्रवर्ती और सोहम जैसे पुराने चेहरों के साथ स्वप्न बर्मन जैसे नए खिलाड़ी मैदान में हैं। सोनारपुर साउथ में रूपा गांगुली और लवली मैत्रा के बीच हाई-वोल्टेज मुकाबला तय है। इस बार दलों ने प्रयोगों के बजाय संगठनात्मक अनुभव को प्राथमिकता दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/west-bengal-assembly-elections-surprise-factor-seen-in-bengal-election/article-147345"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/cm-mamta2.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल के आगामी विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) फिल्म और खेल जगत से जुड़ी कई नामचीन हस्तियों को उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतार रही हैं, लेकिन इस बार बहुप्रतीक्षित 'सरप्राइज फैक्टर' नजर नहीं आ रहा है। दिलचस्प बात यह है कि दोनों दलों ने खेल और फिल्मी दुनिया से नये चेहरों के बजाय आजमाये हुए उम्मीदवारों पर भरोसा जताया है। </p>
<p>सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस में भले ही मनोरंजन और खेल जगत के कुछ जाने-माने चेहरों को जगह मिली है, लेकिन पार्टी ने अधिकतर ऐसे उम्मीदवारों को टिकट दिया है, जो पहले चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा चुके हैं। प्रमुख नामों में अभिनेता सोहम चक्रवर्ती को करीमपुर से, जबकि फिल्म निर्माता राज चक्रवर्ती को बैरकपुर से उम्मीदवार बनाया गया है। अभिनेत्री सायंतिका बनर्जी को एक बार फिर बारानगर से टिकट दिया गया है, जो पार्टी के उनके प्रति भरोसे को दर्शाता है।</p>
<p>तृणमूल कांग्रेस ने मनोरंजन जगत से जुड़े दो मौजूदा विधायक लोकगायिका अदिति मुंशी (राजारहाट गोपालपुर) और अभिनेत्री लवली मैत्रा (सोनारपुर साउथ) पर भी भरोसा जताया है। गायक इंद्रनील सेन, जो 2016 से विधायक हैं, को चंदननगर से फिर उम्मीदवार बनाया गया है, जिससे पार्टी का अनुभव पर स्पष्ट जोर दिया जाना दिखता है। एशियन गेम्स की स्वर्ण पदक विजेता स्वप्न बर्मन को पार्टी में शामिल होने के तुरंत बाद राजगंज से उम्मीदवार बनाना एक चौंकाने वाला फैसला माना जा रहा है और यह उनका पहला चुनाव होगा। इसी तरह फुटबॉलर बिदेश बोस सप्तग्राम से, जबकि क्रिकेटर से कोच बने शिब शंकर पॉल तूफानगंज से चुनाव लड़ेंगे, जिससे खेल जगत की चुनावों में भागीदारी भी दिख रही है।</p>
<p>एक अन्य उल्लेखनीय नाम श्रेया पांडे का है, जो दिवंगत तृणमूल कांग्रेस विधायक साधन पांडे की पुत्री हैं, वह मानिकतला सीट से अपना पहला बड़ा चुनाव लड़ेंगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कुल मिलाकर मशहूर हस्तियों के उम्मीदवारों की संख्या सीमित है, जो यह संकेत देता है कि टीएमसी ने नये प्रयोगों के बजाय अनुभव और संगठनात्मक ताकत पर भरोसा किया है। दूसरी ओर, भाजपा की उम्मीदवार सूची की अधिक चर्चा हो रही है, जिसमें कई हाई-प्रोफाइल नाम शामिल हैं। पार्टी ने जहां पुराने चेहरों जैसे रुद्रनील घोष और श्री हिरण चटर्जी को मैदान में उतारा है, वहीं नये चेहरों को भी मौका दिया है।</p>
<p>अब तक जारी दो सूचियों में घोष को शिवपुर से और चटर्जी को श्यामपुर से उम्मीदवार बनाया गया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, चटर्जी को श्यामपुर से टिकट देना कुछ हद तक चौंकाने वाला है, क्योंकि उन्हें पहले उनकी जीत वाली सीट खड़गपुर सदर से हटाया गया था और उनकी शादी से जुड़े विवाद के बाद उनके टिकट पर सवाल उठ रहे थे।</p>
<p>नये चेहरों की बात करें, तो टॉलीगंज से अभिनेत्री पापिया अधिकारी और जादवपुर से शरबरी मुखर्जी को उम्मीदवार बनाया गया है। सोनारपुर साउथ सीट पर भाजपा की रूपा गांगुली और तृणमूल कांग्रेस की लवली मैत्रा के बीच हाई-वोल्टेज मुकाबला होने की संभावना है। भाजपा अब तक दो चरणों के लिए 256 सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर चुकी है, जबकि 38 सीटों पर नामों की घोषणा बाकी है। 294 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव के लिए मतदान 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में होगा और मतगणना चार मई को की जाएगी। उल्लेखनीय है कि करीब तीन दशकों में पहली बार राज्य में दो चरणों में चुनाव हो रहा है।</p>
<p>जैसे-जैसे चुनाव प्रचार तेज हो रहा है, सेलिब्रिटी उम्मीदवारों की मौजूदगी से ग्लैमर और चुनावों में भीड़ दोनों बढ़ने की उम्मीद है। व्यापक राजनीतिक संकेत हालांकि यही बताते हैं कि इस बार दलों ने नये और चौंकाने वाले चेहरों के बजाय अनुभवी और परिचित उम्मीदवारों पर ज्यादा भरोसा किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/west-bengal-assembly-elections-surprise-factor-seen-in-bengal-election/article-147345</link>
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                <pubDate>Sat, 21 Mar 2026 16:02:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: ममता बनर्जी ने बोला केंद्र सरकार पर हमला, लोगों के अधिकारों की रक्षा का दोहराया संकल्प, बोली-हमारी लड़ाई जारी रहेगी, आपके अधिकार किसी भी हाल में छीनने नहीं दूंगी</title>
                                    <description><![CDATA[कोलकाता में ईद सभा के दौरान ममता बनर्जी ने केंद्र और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को साजिश करार देते हुए "भाजपा हटाओ, देश बचाओ" का नारा दिया। मुख्यमंत्री ने संकल्प लिया कि वह बंगाल के लोगों के अधिकारों और सांप्रदायिक एकता की रक्षा के लिए आखिरी सांस तक लड़ेंगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/west-bengal-assembly-elections-mamata-banerjee-said-it-was-an/article-147331"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/cm-mamta-on-sir.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को ईद के मौके पर कोलकाता में आयोजित कार्यक्रम के दौरान लोगों के अधिकारों की रक्षा का संकल्प दोहराया और केंद्र की भाजपा सरकार तथा चुनाव आयोग पर तीखा निशाना साधा। वार्षिक ईद सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार बंगाल के लोगों के अधिकार किसी भी हाल में छीने नहीं जाने देगी। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची से कई नाम हटाए गए हैं, हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि लोगों की गरिमा सुरक्षित रहेगी।</p>
<p>उन्होंने कहा, "हमारी लड़ाई जारी रहेगी। हम बंगाल के हर व्यक्ति के साथ हैं और उनके अधिकारों को छीने नहीं जाने देंगे।" मुख्यमंत्री ने केंद्र के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि उनकी सरकार किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "जो बंगाल को निशाना बनाएंगे, उनका अंजाम अच्छा नहीं होगा।" साथ ही उन्होंने "बीजेपी हटाओ, देश बचाओ" का नारा भी दोहराया।</p>
<p>यह बयान उस समय आया है जब राज्य में अंतिम एसआईआर सूची को लेकर विवाद जारी है, जिसमें लाखों नाम हटाए जाने और कई नामों के जांच के दायरे में होने की खबरें हैं। तृणमूल कांग्रेस लगातार आरोप लगा रही है कि चुनाव आयोग केंद्र सरकार के दबाव में काम कर रहा है।</p>
<p>इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि वह पहले ही दिल्ली जाकर आयोग के सामने अपनी बात रख चुकी हैं और आगे भी संघर्ष जारी रखेंगी।<br />कार्यक्रम के दौरान बारिश को उन्होंने "ईश्वरीय आशीर्वाद" बताया और कहा कि यह उनके संघर्ष के समर्थन का प्रतीक है। साथ ही उन्होंने सभी धर्मों के बीच एकता और सौहार्द बनाए रखने पर जोर दिया। इस मौके पर मौजूद तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महसचिव अभिषेक बनर्जी ने भी लोगों से एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज को बांटने की कोशिश हो रही है, लेकिन बंगाल की सांप्रदायिक एकता कायम रहेगी। कार्यक्रम के बाद दोनों नेताओं ने शहर की एक मस्जिद में जाकर ईद की नमाज से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Mar 2026 15:00:54 +0530</pubDate>
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