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                <title>observation - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>चिड़ियाघर में 48 पशु-पक्षी नजरबंद</title>
                                    <description><![CDATA[बायोलॉजिकल पार्क के निर्माण के दौरान 44 एनक्लोजर बनने थे लेकिन प्रथम चरण में मात्र 13 ही बन पाए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/48-bird-animal-house-arrest-in-zoo/article-53548"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/chidiyaghar-k-48-pakshi-animal-najzarband...kota-news-03-08-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। आंखों के सामने फिर भी नजरों से दूर...यह कहावत इन दिनों कोटावासियों पर चरितार्थ हो रही है। चंबल से लुप्त हो चुके घड़ियाल शहर में होने के बावजूद शहरवासी देख नहीं पा रहे। रियासतकालीन चिड़ियाघर में ढाई साल से 45 से ज्यादा पक्षियों सहित शेडयूल-1 के एनिमल नजर बंद हैं। यहां, घड़ियाल के अलावा मगरमच्छ, अजगर, 3 फीट उंचे पेलिकन हवासिल सहित लव बडर्स के साथ विविध पक्षियों का संसार बसा है। कोटावासियों को न तो इन पक्षियों का दीदार करने दिया जा रहा और न ही चिड़िया घर के दरवाजे खोले जा रहे। दरअसल, जायका प्राजेक्ट के तहत 20 करोड़ का बजट नहीं मिलने से अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में इन पक्षियों व एनिमल्स के एनक्लोजर तैयार नहीं हो सके। जिसकी वजह से इनकी शिफ्टिंग नहीं हो सकी।</p>
<p><strong>30 करोड़ से बना पार्क </strong><br />वर्ष 2017 में 30 करोड़ की लागत से बायोलॉजिकल पार्क का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। जिसे 2019 में पूरा किया जाना था लेकिन कोविड के 2 साल के कारण काम समय पर पूरा नहीं हो सका। इसके बाद 21 नवंबर 2021 को काम पूरा हुआ।</p>
<p><strong>दो साल से शिफ्टिंग का इंतजार</strong><br />बायोलॉजिकल पार्क के निर्माण के दौरान 44 एनक्लोजर बनने थे लेकिन प्रथम चरण में मात्र 13 ही बन पाए। जबकि, 31 एनक्लोजर अभी बनने बाकी हैं। जायका प्रोजेक्ट के तहत 20 करोड़ का बजट अटका हुआ है। जिसकी वजह से द्वितीय चरण के तहत  होने वाले निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहे। जबकि, वन्यजीव विभाग की ओर से कई बार सरकार को प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं। इतना ही नहीं रिमाइंडर भी भेजा गया। इसके बावजूद बजट स्वीकृत नहीं हुआ। ऐसे में जब तक यह एनक्लोजर नहीं बनेंगे तब तक पुराने चिड़ियाघर में मौजूद अजगर, घड़ियाल, मगरमच्छ, बोनट (बंदर), कछुए सहित कई पक्षी बायलॉजिकल पार्क में शिफ्ट नहीं हो पाएंगे। </p>
<p><strong>पर्यटकों को हो रही निराशा   </strong><br />वन्यजीव अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2020-21 में जाइका प्रोजेक्ट के तहत बायलोजिकल पार्क में अधूरे निर्माण कार्यों को पूरा करवाने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा था। इसके बाद फिर से रिव्यू प्रस्ताव भेजे गए, वह भी स्वीकृत नहीं हुए। विभाग द्वारा रिमाइंडर भी भेजे गए फिर भी कुछ नहीं हुआ। एनक्लोजर नहीं होने से चिड़ियाघर से पक्षी व एनिमल मिलाकर 48 तरह के वन्यजीवों की शिफ्टिंग नहीं हो पा रही। बायोलॉजिकल पार्क में पर्यटकों को अजगर, घड़ियाल, मगरमच्छ का जोड़ा देखने को नहीं मिल रहा। वहीं, आकर्षण का केंद्र लव बर्ड्स के दीदार भी नहीं होने से नराजगी जताते हैं। </p>
<p><strong>20 करोड़ से यह होने हैं कार्य</strong><br />बायोलॉजिकल पार्क में द्वितीय चरण के तहत 20 करोड़ से 31 एनक्लोजर, स्टाफ क्वार्टर, कैफेटेरिया, वेटनरी हॉस्पिटल, इंटरपिटेक्शन सेंटर, पर्यटकों के लिए आॅडिटोरियम हॉल, छांव के लिए शेड, कुछ जगह पथ-वे सहित अन्य कार्य शामिल हैं।  </p>
<p><strong>चिड़ियाघर में यह वन्यजीव</strong><br />चिड़ियाघर में वर्तमान में बंदरों की विशेष प्रजाति के 2 बोनट, 18 पहाड़ी कछुए, पानी के 5 कुछए, तीन फीट ऊंचे पेलिकन हवासिल, 8 से 10 फीट लंबे 4 अजगर  जोड़े में, 2 घड़ियाल, 2 मगरमच्छ तथा पक्षियों में इग्रेट, स्पॉट बिल्ड डक, विसलिंग टिल, कोम्ब डक, नाइट हेरोन, पोण्ड हेरोन, बारहेडेड गूज, राजहंस बतख, तोता, लवबर्ड्स सहित कुल 48 तरह के वन्यजीव हैं, जिन्हें शिफ्टिंग का इंतजार है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में द्वितीय चरण में कई महत्वपूर्ण निर्माण कार्य होने हैं। जायका प्रोजेक्ट के तहत 20 करोड़ रुपए की लागत से 31 एनक्लोजर बनाए जाने हैं। बजट के लिए प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेज रखा है। रिमाइंडर भी भेज चुके हैं। बजट मिलते ही एनक्लोजर बनाए जाएंगे। इसके बाद उच्चाधिकारियों के दिशा-निर्देश पर चिड़ियाघर के वन्यजीवों को बायोलॉजिकल पार्क में शिफ्ट किया जाएगा। पर्यटकों की बेहतर सुविधाओं के लिए निरन्तर प्रयास जारी है। <br /><strong>- सुनील गुप्ता, डीएफओ,  वन्यजीव विभाग कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Aug 2023 16:16:20 +0530</pubDate>
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                <title>महिला शौचालय में मिला नवजात का शव </title>
                                    <description><![CDATA[दौसा। यहां के श्री रामकरण जोशी राजकीय जिला चिकित्सालय में बुधवार को मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। चिकित्सालय के इमरजेंसी यूनिट के ऑब्जर्वेशन वार्ड के महिला शौचालय में नवजात का शव मिलने से सनसनी फैल गई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/dausa/newborn-s-body-found-in-women-s-toilet/article-12832"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/nav.jpg" alt=""></a><br /><p>दौसा। यहां के श्री रामकरण जोशी राजकीय जिला चिकित्सालय में बुधवार को मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। चिकित्सालय के इमरजेंसी यूनिट के ऑब्जर्वेशन वार्ड के महिला शौचालय में नवजात का शव मिलने से सनसनी फैल गई। उल्लेखनीय है कि बुधवार को रामकरण जोशी राजकीय जिला चिकित्सालय के इमरजेंसी यूनिट के ऑब्जर्वेशन वार्ड के महिला शौचालय में एक नवजात का शव मिलते चिकित्साकर्मियों एवं प्रशासन में हड़कम्प मच गया। मामले की जानकारी प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. शिवराम मीणा को दी गई।</p>
<p>पीएमओ मौके पर पहुंचे तथा कोतवाली पुलिस को मौके पर बुलाया। पुलिस ने नवजात का शव बरामद कर मोर्चडी में रखवाया। उधर कोतवाली पुलिस जिला चिकित्सालय के सीसी टीवी फुटेज को खंगालने में लगी हुई है। पुलिस ने बताया कि नवजात महिला शौचालय के नाले में मृत पड़ा मिला था। अस्पताल प्रशासन व कोतवाली थाना पुलिस अस्पताल में लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाल कर पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आखिर इमरजेंसी के महिला शौचालय में मृत नवजात किसने डाला।</p>
<p><br /> घटना के बाद उठे कई सवाल: श्री रामकरण जोशी राजकीय जिला चिकित्सालय के इमरजेंसी यूनिट के ऑब्जर्वेशन वार्ड के महिला शौचालय में इस तरह की घटना होना चिकित्साकर्मियों की कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है। इमरजेंसी यूनिट में भारी भरकम स्टाफ तैनात रहता है तथा इस यूनिट में गंभीर रूप से बीमार मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद वार्ड में भेज दिया जाता है। गर्भवती महिला का इंमरजेंसी वार्ड में किसी भी तरह का उपचार नहीं किया जाता है। भारी भरकम स्टाफ व चारों तरह सीसी टीवी होने के बावजूद इस शर्मसान घटना का अंजाम दिया गया। इधर पुलिस चिकित्साल में भर्ती घात्री एवं गर्भवती महिलाओं की जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>दौसा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jun 2022 13:12:26 +0530</pubDate>
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