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                <title>species - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>उम्मेदगंज पक्षी विहार, अभेड़ा तालाब,जोहराबाई का तालाब व बायोलॉजिकल पार्क बना बर्ड्स वॉचिंग का डेस्टिनेशन</title>
                                    <description><![CDATA[हर साल सर्दियों में देश-विदेश से आते हैं 10 हजार से अधिक पक्षी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ummedganj-bird-sanctuary--abheda-talab--johrabai-s-talab--and-biological-park-have-become-bird-watching-destinations/article-127337"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/_4500-px)-(6)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के 4 वैटलैंड न केवल बर्ड्स वॉचिंग के डेस्टिनेशन बन रहे बल्कि अनुसंधान का केंद्र भी बन रहे हैं। वर्तमान में यहां 200 प्रजातियों के 6 हजार से ज्यादा पक्षियों का बसेरा बसा है। दुनियाभर से हर साल हजारों की तादाद में परिंदे प्रवास पर आ रहे हैं। जिनमें से कई पक्षी तो ऐसे हैं, जो पिछले पांच सालों में पहली बार नजर आए हैं। वन्यजीव विभाग कोटा की ओर से शहरी सीमा के वैटलैंड्स को पक्षियों के अनुकूल हैबीटाट के रूप में विकसित किए गए हैं। जिनमें अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क, अभेड़ा तालाब, जोहरा बाई का तालाब और उम्मेदगंज पक्षी विहार शामिल हैं। इन वैटलैंड पर गत फरवरी माह में हुई गणना में विभिन्न प्रजातियों के 10 हजार से अधिक पक्षी काउंट किए गए थे। जबकि, यह संख्या मात्र उम्मेदगंज पक्षी विहार सहित तीन वैटलैंड की है। जबकि, शहरी क्षेत्र में दो दर्जन से अधिक वैटलैंड हैं। जहां बड़ी संख्या में पक्षियों का प्रवास रहता है। </p>
<p><strong>अनुसंधान का केंद्र बन रहे वैटलैंड </strong><br />वन्यजीव विभाग कोटा के अधीन उम्मेदगंज पक्षी विहार परिंदों की पहली पसंद बना हुआ है। यहां वाइल्ड लाइफ डिपार्टमेंट की ओर से गत वर्ष से अब तक कई डवलपमेंट कार्य करवाए गए। अवैध फिशिंग के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई व संदिग्ध घुसपैठ पर पूर्णत: प्रतिबंध लगाए जाने पेड़ों की अवैध कटाई रुकी। इससे पक्षियों का हैबीटाट  न केवल सुरक्षित हुआ बल्कि भोजन की भी पर्याप्त उपलब्धता भी हो गई। अवैध गतिविधियां थमने से परिंदों का कुनबा आबाद हुआ। वर्तमान में यहां पेड़ों पर करीब 80 प्रजातियों के 3 हजार पक्षियों की कॉलोनी बसी है। </p>
<p><strong>यूरोप से लेकर एशिया तक से आते हैं हजारों परिंदे </strong><br />वन्यजीव विभाग के उप वन संरक्षक अनुराग भटनागर ने बताया कि बर्ड्स रिसर्च की दृष्टि से शहर के वैटलैंड अनुसंधान के केंद्र बन चुके हैं। गत 30 व 31 जनवरी को मिड विंटर वाटर फोल पापुलेशन ऐस्टीमेशन-2025 के तहत पक्षियों की गणना करवाई गई थी। जिसमें जोराबाई का तालाब, अभेड़ा  व सालकिया तालाब, बायोलॉजिकल पार्क व उम्मेदगंज पक्षी विहार को मिलाकर करीब 8000 से ज्यादा पक्षी नजर आए थे। इनमें यूरोप से लेकर एशिया तक के पक्षी शामिल हैं। हर साल दुनियाभर से इन वैटलैंड पर हजारों पक्षी आते हैं। कोटा विवि सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से बर्ड्स रिसर्चर आते हैं। </p>
<p><strong>पक्षियों की भूमिका पर बढ़ रहा शोध </strong><br />डीएफओ भटनागर कहते हैं, उम्मेदगंज पक्षी विहार, अभेड़ा तालाब, अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क, सालकिया व जोहराबाई का तालाब, किशोर सागर, गैपरानाथ, गरड़िया महादेव सहित शहर के विभिन्न वैटलैंड बर्ड वॉचिंग का डेस्टिनेशन बन चुके हैं। यहां की फिजा विभिन्न प्रजातियों के देसी-विदेशी पक्षियों की  चहचहाट से गुलजार रहती है। कोटा विश्वविद्यालय, महाविद्यालयों  व कई शिक्षण संस्थानों से विद्यार्थी और स्कॉलर्स ईको सिस्टम में पक्षियों की भूमिका, उनके व्यवहार, हैबीटाट, विशेषताएं, सिमटते वनों व वैटलेंड से पक्षियों पर पड़ने वाले नकारात्मक असर पर शोध कर रहे हैं। </p>
<p><strong>यह पक्षी आते हैं नजर</strong><br />उम्मेदगंज पक्षी विहार सहित अन्य वैटलैंड पर कोमन पोचार्ड, क्रेस्टेड पोचर्ड, टफ्टेड पोचार्ड, लिटिल गीब, लिटिल रिंग फ्लॉवर, रफ, कॉमन टील, ब्लू थ्रोट,  विस्किर्ड टर्न, रिवर टर्न, कॉमन कूट, गेडवेल, गागीर्नी, इंडियन कर्सर,कॉटन पिग्मी गीज, बुटेड ईगल,ग्रेटर स्पॉटेड ईगल, टावनी ईगल, मार्स हैरियर, इंडियन वाइट आई, ब्लू फ्लाई कैचर, हनी बजार्ड, ग्रे हेडेड कैनरीफ्लाई कैचर,ओस्प्रे, मार्स हैरियर, इंडियन वाइट आई सहित विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों की आबादी बसी हुई है। जिन्हें देखने बड़ी संख्या में बड्स वॉचर्स यहां आते हैं। </p>
<p><strong>चंबल की कराइयों में बसी गिद्दों की कॉलोनी </strong><br />नेचर प्रमोटर एएच जैदी बताते हैं, शहर के तलाबों पर हर साल विभिन्न प्रजातियों के पक्षी हजारों मील का सफर तय कर कोटा आते हैं। सर्दी में भोजन, रहवास के लिए तथा गर्मी में वापस माइग्रेशन में चली जाते है। वहीं, गैपरनाथ व गराड़िया महादेव वन क्षेत्र में चंबल की कराइयों के बीच गिद्दों की साउथ ईस्ट एशिया की सबसे बड़ी कॉलोनी बसी है। मोटे अनुमान के तौर पर चंबल में करीब 200 इंडियन वल्चर है।  </p>
<p><strong>इन देशों से आते हैं पक्षी</strong><br />बर्ड्स रिसर्चर हर्षित शर्मा ने बताया कि कोटा के विभिन्न इलाकों में स्थित वैटलैंड पर इन दिनों देसी विदेशी पक्षियों का कलरव गूंज रहा है। आलनिया, उम्मेदगंज, अभेड़ा, उदपुरिया, बरधा डेम, गिरधरपुरा, बोराबांस का तालाब, सोखिया तालाब, किशोर सागर तालाब, उम्मेदगंज, अभेड़ा सहित कई इलाके परिंदों की चहचहाट से गुलजार हैं।  यह पक्षी यूरोप, सेंट्रल एशिया, साइबेरिया, हिमालय, उत्तरी अमेरिका, चीन, रूस, कजाकिस्तान सहित यूरोपियन व एशियाई देशों से आते हैं। शोधार्थियों के लिए शहर के वैटलेंड ज्ञान का खजाना हैं।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Sep 2025 17:48:17 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>5 साल में 4 लाख 58 हजार 781 पर्यटकों ने देखे विभिन्न प्रजातियों के पक्षी</title>
                                    <description><![CDATA[जानकारी के अनुसार उद्यान में सर्वाधिक पर्यटकों की उपस्थिति नवंबर से मार्च के फ़र्स्ट वीक तक ज़्यादा देखने को मिलती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/in-5-years-4-lakh-58-thousand-781-tourists-saw/article-88997"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/pze14.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भरतपुर में स्थित केवलादेव राष्ट्रीय पक्षी उद्यान को पक्षियों का स्वर्ग कहा जाता है, यहां हर साल बड़ी संख्या में विदेशों से प्रवासी पक्षी आते हैं। यहां करीब 375 विभिन्न प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं। इस दौरान कई प्रवासी पक्षी भी यहाँ ब्रीडिंग के लिए आते हैं।</p>
<p>यहाँ इस समय बिल स्टोर्क, स्पून बिल, पैंटेड स्टॉर्क और एग्रेट्स सहित अन्य प्रजातियों के पक्षी देखने को मिल रहे हैं।पार्क में एशियन ओपन बिल स्टोर्क भी देखने को मिल रही हैं। कई पक्षियों ने नेस्टिंग भी की है।</p>
<p>जानकारी के अनुसार उद्यान में सर्वाधिक पर्यटकों की उपस्थिति नवंबर से मार्च के फ़र्स्ट वीक तक ज़्यादा देखने को मिलती है। केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान के डीसीएफ़ मानस सिंह ने बताया कि यहाँ  साल 2019-20 से लेकर 2023-24 तक 4 लाख 25 हज़ार 883 घरेलू और 32 हज़ार 898 विदेशी पर्यटक आए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>भरतपुर</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Aug 2024 17:23:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>विश्व ऊंट दिवस,ऊष्ट्र प्रदर्शनी एवं पशु स्वास्थ्य शिविर आयोजित </title>
                                    <description><![CDATA[बीकानेर। राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र, एनआरसीसी बीकानेर के निदेशक डॉ. आर्तबन्धु साहू ने कहा कि ऊंट को यदि औषधि भण्डार, कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bikaner/world-camel-day-camel-exhibition-and-animal-health-camp-organized/article-12835"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/bikaner-new.jpg" alt=""></a><br /><p>बीकानेर। राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र, एनआरसीसी बीकानेर के निदेशक डॉ. आर्तबन्धु साहू ने कहा कि ऊंट को यदि औषधि भण्डार, कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। डॉ. साहू बुधवार को विश्व ऊंट दिवस पर एनआरसीसी बीकानेर परिसर में आयोजित कार्यक्रम को कार्यक्रम अध्यक्ष के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधानों में ऊंटनी का दूध, मधुमेह, क्षय रोग, आॅटिज्म आदि में कारगर साबित हुआ है।</p>
<p>मुख्य अतिथि वेटरनरी विवि बीकानेर के कुलपति प्रो. एसके गर्ग ने कहा कि ऊंट पालकों को ऊंटनी के अधिक से अधिक दूध का उत्पादन पर ध्यान देना चाहिए।इसका सकारात्मक असर ऊंटों की संख्या पर भी होगा। पर्यटन विभाग के उपनिदेशक भानुप्रताप ढाका ने ऊष्ट्र डेयरी या पर्यटनीय सजावटी ऊंट जैसे मॉडल तैयार करने की बात कही। केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान बीकानेर के निदेशक डॉ. दिलीप कुमार समादिया ने कहा कि बागवानी खेती से पशुपालन व्यवसाय को अधिकाधिक लाभ मिल सकता है। राजुवास के अधिष्ठाता, सीवीएएसए डॉ. आरके सिंह व किसान प्रतिनिधि के रूप में श्रीगोपाल उपाध्याय ने भी विचार रखे।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>ऊष्ट्र प्रदर्शनी एवं पशु स्वास्थ्य शिविर आयोजित</strong></span><br />विश्व ऊंट दिवस के उपलक्ष्य पर एनआरसीसी द्वारा ऊष्ट्र प्रदर्शनी एवं पशु स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आयोजित सर्वश्रेष्ठ नर ऊंट प्रतियोगिता में इमरान खान ने प्रथम, रफीक खान ने द्वितीय, नैनूराम ने तृतीय तथा मुरली गहलोत व महमूद खान ने सांत्वना पुरस्कार अर्जित किया। सजावटी ऊंट प्रतियोगिता में संजय खान ने प्रथम, इमरान ने द्वितीय, महमूद ने तृतीय तथा सांत्वना पुरस्कार नैनूराम प्राप्त किया। डॉ. वेद प्रकाश ने आभार जताया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बीकानेर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jun 2022 13:13:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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