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                <title>neglect - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>रामधन चौराहा के बाईपास का काम 7 साल से अटका पड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[लाखेरी  बूंदी रोड पर सुखाड़िया पार्क से गौरव पथ तक साढ़े तीन करोड़ का 600 मीटर लंबा और 11 मीटर चौड़ा बाईपास बनना है। इस बाईपास पर 88 मीटर भूमि निजी खातेदारी है जिसकी अवाप्ति को लेकर समस्या सामने आ रही है। पालिका और निर्माण एजेंसी ने संबंधित भूमि को अवाप्ति के लिए बातचीत की है लेकिन बात नहीं बनी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/bypass-work-of-ramdhan-chauraha-stuck-for-7-years/article-41213"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/ramdhan-choraha-ke-bypass-ka-kaam-7-saal-se-atka-pada-_.lakheri-news-bundi_30.3.2023-(1)-(1).jpg" alt=""></a><br /><p> लाखेरी। नगर पालिका की अनदेखी के चलते लाखेरी के रामधन चौराहा के बाईपास निर्माण गत 7 साल से अटका हुआ है। इससे वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी हो रही है। बाईपास नहीं बनने से क्षेत्र के लोगों को हादसों का खतरा बना हुआ है। विद्यार्थियों को आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्रवासी आए दिन लगने वाले जाम से परेशान है। जाम की वजह से यात्रियों की गाड़ियां तक मिस हो जाती है। लाखेरी  बूंदी रोड पर सुखाड़िया पार्क से गौरव पथ तक साढ़े तीन करोड़ का 600 मीटर लंबा और 11 मीटर चौड़ा बाईपास बनना है। इस बाईपास पर 88 मीटर भूमि निजी खातेदारी है जिसकी अवाप्ति को लेकर समस्या सामने आ रही है। पालिका और निर्माण एजेंसी ने संबंधित भूमि को अवाप्ति के लिए बातचीत की है लेकिन बात नहीं बनी इस संदर्भ में जिला कलेक्टर बूंदी, लाखेरी अधिशासी अधिकारी व कनिष्ठ अभियंता पीडब्ल्यूडी अधिकारी सामूहिक बैठक होने के बाद दो महीने गुजर जाने के बाद भी अभी तक समस्या का समाधान नहीं हो पाया है जिससे वाहन चालकों और आम जन को परेशानी उठानी पड़ रही है।</p>
<p><strong>जमीन अवाप्त हो तो शुरू हो बाईपास का कार्य</strong><br />इस मामले को लेकर तत्कालीन पालिका बोर्ड में बाईपास को लेकर प्रस्ताव सरकार को भेजे थे। उस समय भी निजी खातेदारी का वर्णन प्रस्ताव में नहीं किया था उस समय पालिका ने प्रस्ताव पीडब्ल्यूडी को भेज दिए और पीडब्ल्यूडी ने सरकार को जिससे अब भूमि अवाप्ति में समस्या आ रही है। अगर उस समय पालिका और संबंधित विभाग भूमि अवाप्ति की समस्या का जिक्र वास्तव में करते तो बजट मिलने से पहले भूमि अवाप्ति काम होता जानकारी में आ रहा है कि बाईपास के लिए 88 मीटर के टुकड़े को अवाप्ति मैं पालिका को पसीने आ रहे हैं। </p>
<p><strong>लाखेरीवासियों का क्या है कहना</strong></p>
<p>बाईपास का कार्य प्रारंभ नहीं होने से महिलाएं और छात्राओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बाईपास का निर्माण हो तो आवाजाही में राहत मिले।<br /><strong>-राजेश्वरी मीणा,कांग्रेस नेता</strong></p>
<p>बाईपास का कार्य नहीं होने से लक्ष्मी विहार, रामधन चौराहा के निवासियों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रामधन चौराहा पर आए दिन जाम लगने से समस्या  का सामना करना पड़ता है।<br /><strong>-कालू वर्मा, व्यापारी</strong></p>
<p>शहर का महत्वपूर्ण बाईपास नहीं बनने के कारण रामधन चौराहे पर ही कॉलेज मिडिल स्कूल डीएवी स्कूल होने की वजह से काफी संख्या में वाहनों के साथ आमजन का छात्र छात्राओं का आना जाना लगा रहता है जिससे कभी भी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। बाईपास बनने पर  आमजन को राहत मिल सकती है। <br /><strong>-धन सिंह जग्गी, व्यापारी </strong></p>
<p>बाईपास नहीं बनने से रेलवे स्टेशन एसीसी फैक्ट्री ,बैंक ,लाखेरी जाने का रास्ता रामधन चौराहे से गुजरता है। यहां पर दिन में कहीं बाहर जाम लगने से यात्रियों की गाड़ी मिस हो जाती है। इसी प्रकार बैंक फैक्ट्री जाने वाले लेट हो जाते हैं। <br /><strong>-दिलीप रामचंदानी, किराना मर्चेंट</strong></p>
<p>बाईपास का कार्य प्रारंभ नहीं होने से गृहणियों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा है। बायपास बनने पर आवाजाही में सुविध मिली सकेगी। <br /><strong>-जयमाला पारेता, पिंकी पारेता गृहणी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Mar 2023 18:56:13 +0530</pubDate>
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                <title>टूटे झूले व कचरे का ढेर, कैसे करें पार्क में सैर</title>
                                    <description><![CDATA[ पार्क में गंदगी के ढेर व टूटे झूलों को देखकर लोगों को निराश होना पड़ रहा है। पार्क में जिस तरह की दुर्दशा है उसे देखकर लोगों का कहना है कि यहां आने का मन ही नहीं है।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/broken-swing-and-pile-of-garbage--how-to-take-a-walk-in-the-park/article-33120"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/tute-jhoole-kachre-ka-dher,-kaise-kare-par-mei-sair...kota-news..23.12.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । शहर के पॉश इलाके का पार्क। उस पार्क में गिनती के झूले। उनमें भी अधिकतर झूले टूटे हुए। गंदगी के ढेर से उठती दुर्गंध और उससे बीमारी का खतरा। यह हालत है स्टेशन रोड स्थित नेहरु  पार्क की।  देश के पहले प्रधानमंत्री और बच्चों के प्रिय चाचा पंडित जवाहर लाल नेहरु के नाम से बने नेहरु पार्क में जहां सिविल लाइंस समेत आस-पास के लोग परिवार समेत बच्चों को घुमाने आते हैं। पार्क में बच्चों को सबसे अधिक पसंद झूले होते हैं और लोग वहां शुद्ध हवा का आनंद लेते हैं। लेकिन हालत यह है कि उस महान व्यक्ति के नाम पर बने इस पार्क की हालत इतनी अधिक खराब हो रही है कि यहां लोग आ तो जाते हैं। लेकिन एक बार आने के बाद दोबारा आने की सोचते भी नहीं हैं। इसका कारण यह पार्क अनदेखी का शिकार हो रहा है। जिससे पार्क में हर तरफ दुर्दशा दिखाई दे रही है। </p>
<p><strong>लोगों की पीड़ा</strong><br />पार्क में बच्चों को घुमाने आई आशा शर्मा ने बताया कि पार्क में बच्चों को झूला झुलाने के लिए लाई थी। लेकिन यहां अधिकतर झूले टूटे हुए हैं। फिसल पट्टी पर इतना बड़ा गड्ढ़ा हो रहा है कि उसमें बच्चे झूल नहीं सकते। यदि कोई गलती से प्रयास भी करेगा तो उसके गिरने व चोटिल होने का खतरा है। इसी तरह से छोटे बच्चों के अन्य झृले भी टूटे हुए हैं।  पार्क में आए राधेश्याम महावर ने बताया कि पार्क में जगह-जगह पर कचरे के ढेर लगे हुए हैं।  फव्वारे तो बंद हैं ही। साथ ही उस पानी में गंदगी जमा है। जिसमें मच्धर पनप रहे हैं। ऐसे में उस महापुरुष के नाम के पार्क की दुर्दशा तो हो ही रही है। साथ ही लोगों के लिए दुर्गंध व बीमारी का कारण बन रहे हैं।  पार्क में आए करण सिंह ने बताया कि पार्क का  ट्रैेक ही जगह-जगह से टूटा हुआ है। जिससे उस पर आरास से सैर करने के लिए चलना तक मुश्किल हो रहा है। उसकी इंटर लोकिंग उखड़ी होने से हादसे का खतरा बना हुआ है।  सभी का कहना है कि पार्क में लोग सैर करने व बच्चों को झूले झुलाने के लिए आते हैं। लेकिन इस पार्क में गंदगी के ढेर व टूटे झूलों को देखकर लोगों को निराश होना पड़ रहा है। इधर नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि पार्क में रोजाना सफाई तो होती है। फिर भी यदि कचरे का ढेर लगा हुआ है तो उसे साफ करवा दिया जाएगा। टूटे झूलों को सही करवाया जाएगा। यदि कहीं ट्रैक टूटा हुआ है तो उसे भी जल्दी ही ठीक करवा दिया जाएगा। </p>
<p><strong>अवकाश में अधिक लोग आएंगे घूमने</strong><br />शीतकालीन अवकाश लगने वाले हैं। ऐसे में बच्चे अपने परिवार के साथ आस-पास के पार्को में घूमने जाएंगे। स्टेशन मेन रोट पर होने से इस पार्क में भी बड़ी संख्या में लोग घूमने आएंगे। इतना ही नहीं सिविल लाइंस क्षेत्र में होने से इस पार्क में आस-पास रहने वाले सरकारी अधिकारी और उनके परिजन भी घूमने जाते हैं। शीत कालीन अवकाश में यहां अधिक लोग आएंगे। लेकिन उस पार्क में जिस तरह की दुर्दशा है उसे देखकर लोगों का कहना है कि यहां आने का मन ही नहीं है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Dec 2022 16:15:18 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>प्रशासन की अनदेखी के चलते कई वर्षों से शहर के पुस्तकालयों का हुआ बुरा हाल</title>
                                    <description><![CDATA[ प्रशासन की अनदेखी के चलते कई वर्षों से शहर के पुस्तकालय दुर्दशा का शिकार हो रहे हैं। एक मे एक भी पुस्तक नहीं है तो वही दूसरे में स्टाफ के अभाव के कारण ताला लगा रहता है। नाम मात्र के इन पुस्तकालयों का वर्षों से उपयोग नहीं हो रहा है जिसके कारण नगर में खुली आधुनिक लाइब्रेरियों में युवाओं को फीस देकर अध्ययन करने को मजबूर होना पड़ रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/dholpur/due-to-the-neglect-of-the-administration--the-libraries-of-the-city-were-in-bad-condition-for-many-years/article-12848"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/libaray.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बाड़ी।</strong> प्रशासन की अनदेखी के चलते कई वर्षों से शहर के पुस्तकालय दुर्दशा का शिकार हो रहे हैं। एक मे एक भी पुस्तक नहीं है तो वही दूसरे में स्टाफ के अभाव के कारण ताला लगा रहता है। नाम मात्र के इन पुस्तकालयों का वर्षों से उपयोग नहीं हो रहा है जिसके कारण नगर में खुली आधुनिक लाइब्रेरियों में युवाओं को फीस देकर अध्ययन करने को मजबूर होना पड़ रहा है। देश में सदियों पहले नालन्दा जैसे विश्वविद्यालय में जिन पुस्तकालयों का इतिहास पुस्तको से ही पढ़ने को मिला था। देश की उस विश्व प्रसिद्ध लाइब्रेरी स्थापना की परंपरा अंग्रेजो से लेकर आजाद हिंदुस्तान में आज भी कायम है। आज भी लोग पुस्तकालयों की पुस्तकों में से ज्ञान का भंडार अर्जित करते हैं। <br />वर्तमान में पुस्तकालयों को आधुनिकी रूप दिया जा रहा है। यही कारण है कि आज भी युवा विशेष ज्ञान अर्जित करने के लिए पुस्तकालयों का सहारा लेते हैं। इसी परम्परानुसार बाड़ी को नगरपालिका द्वारा किला गेट स्थित नेहरू पार्क में एक पुस्तकालय संचालित किया था।</p>
<p>जिसमें उपखण्ड स्तर के लोग पुस्तकों व अखबारों का अध्ययन बड़ी संख्या में करते थे, लेकिन प्रशासन की बेरुखी व नगरपालिका की लापरवाही के चलते यह पुस्तकालय धीरे-धीरे दुर्दशा का शिकार हो गया। सैकड़ों की संख्या में पुस्तकें गायब हो गई। बैठने व पढ़ने का फर्नीचर जर्जर होकर टूट गया। दीवारें उन पर पुस्तकों को रखने के लिए बनी अलमारियों की खिड़कियां टूटकर कबाड़ हो गई। आज स्थिति यह है कि दो चार अखबारों के लिए इसका संचालन ऐसे किया जा रहा है। जैसे कोई धक्का देकर खींच रहा हो। दूसरी ओर राजस्थान का सार्वजनिक पंचायती पुस्तकालय जो लगभग 25 से 30 वर्ष पूर्व किराए के भवन में संचालित हुआ था, जिसमें हजारों पुस्तकें थी।</p>
<p>प्रतिदिन पत्र-पत्रकाओं का आवागमन होता था। पुस्तकालय के नगर में सैकड़ों स्थाई सदस्य थे, लेकिन वह भी कई किरायों के भवनों में बदल-बदल कर दुर्दशा का शिकार हो गया। पुस्तकें चोरी हो गई। विशेष रूप से स्टाफ का अभाव के चलते इस पुस्तकालय पर भी हर वक्त ताला ही जड़ा देखा जा सकता है। लगभग 2 वर्ष पूर्व इसे नए भवन में स्थानांतरित किया गया है, लेकिन जब से ही इसमे ताला लगा हुआ है जो आज तक नहीं खुला। जब इनसे या नगर पालिका से इस बारे में बात की जाती है तो वह कहते हैं कि अब कम्प्यूटर का जमाना है।</p>
<p>लोग अब पुस्तकालयों में रुचि नहीं रखते, जबकि पिछले एक वर्ष में नगर में तीन से चार आधुनिक लाइब्रेरी निजी स्तर पर लोगों ने खोली है जिनका प्रति माह पढ़ने वाले युवा किराया देते है, जिनमें लगभग 2000 से 3000 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। ऐसे में पुस्तकालयो का अस्तित्व समाप्त होने की बात कहना बेमानी ही है। बल्कि प्रशासन व नगरपालिका का पुस्तकालयो के प्रति अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ना है।</p>
<p><br />आपके माध्यम से हमें जानकारी मिली है। इसको लेकर नगर पालिका व पुस्तकालय विभाग के संबंधित अधिकारियों से वार्ता कर जल्द ही इस ओर सुधार हेतु प्रयास किए जाएंगे। -<span style="background-color:#ffffff;color:#000000;"><strong>राधेश्याम मीणा, एसडीएम बाड़ी</strong></span><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>धौलपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jun 2022 13:16:57 +0530</pubDate>
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