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                <title>मुकुंदरा के जंगल में बिछेगा वन्यजीवों की सुरक्षा का जाल</title>
                                    <description><![CDATA[जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा पहले के मुकाबले और अधिक बढ़ जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/wildlife-safety-net-in-mukundra-forest/article-98925"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/5554-(2)23.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व का दायरा अब 760 वर्ग किमी से बढ़कर 953 वर्ग किमी हो गया है। भारत सरकार का गजट नोटिफिकेशन जारी होने के बाद भैंसरोडगढ़ अभयारणय भी मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में शामिल हो गया है। ऐसे में भैंसरोडगढ़ में अब टाइगर रिजर्व के नियम कानून लागू होंगे। जिससे जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा पहले के मुकाबले और अधिक बढ़ जाएगी। टाइगर रिजर्व में फेस-4 मॉनिटरिंग होने से प्रोटेक्शन के साथ बजट की उपलब्धता भी बढ़ेगी। गौरतलब है कि अभी तक मुकुंदरा का दायरा 760 वर्गकिमी तक फैला हुआ था, लेकिन भैंसरोडगढ़ सेंचुरी शामिल होने से इसका क्षेत्रफल 953 वर्गकिमी हो गया है। </p>
<p><strong>जंगल और वन्यजीवों की बढ़ेगी सुरक्षा </strong><br />उन्होंने बताया कि सेंचुरी और टाइगर रिजर्व के नियम अलग-अलग होते हैं। टाइगर रिजर्व में शामिल होने से जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा अधिक बढ़ जाती है। क्योंकि, रिवर्ज में फेस-4 मॉनिटरिंग होती है। विकास कार्यों के लिए बजट ज्यादा मिल सकेगा। बड़े-बड़े एनक्लोजर बनाए जा सकेंगे। दीवारें पक्की हो जाएंगी, जिससे जंगल का प्रोटेक्शन मजबूत होगा। वहीं, शिकार की संभावना भी बहुत कम हो जाएगी। फिल्ड स्टाफ की संख्या बढ़ेगी। इसके अलावा अन्य डवलपमेंट कार्य भी ज्यादा होंगे। </p>
<p><strong>193 वर्ग किमी में फैला भैंसरोडगढ़</strong><br />वन्यजीव कोटा के डीसीएफ अनुराग भटनागर ने बताया कि भैंसरोडगढ़ सेंचुरी को अब टाइगर रिजर्व का स्टेटस मिल गया है। यह सेंचुरी 193 वर्ग किमी में फैली हुई है। हमने पूर्व में इसके प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजे थे। जहां से मंजूरी मिलने के बाद भैंसरोडगढ़ को टाइगर रिर्जव में शामिल कर लिया गया है। हालांकि, इसका संचालन वाइल्ड लाइफ कोटा द्वारा किया जाएगा। लेकिन, नियम-कानून टाइगर रिजर्व के लागू होंगे। जिससे भैंसरोडगढ़ को फायदा होगा। </p>
<p><strong>पैंथर व जंगली सूअर की संख्या अधिक</strong><br />भैंसरोडगढ़ के जंगल में हिरण प्रजाति को छोड़ अन्य मांसाहारी जानवरों की संख्या अधिक है। जिनमें पैंथर, जंगली सूअर, हायना, जरख सहित अन्य वन्यजीवों की संख्या ज्यादा है। हालांकि, हिरण प्रजाति के शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या कम है। जिनकी संख्या बढ़ाने के लिए 5-5 हैक्टेयर के एनक्लोर बनाकर उनमें 8 से 10 जोड़ों को रखा जानी की आगामी कार्य योजना है। </p>
<p><strong>हिरण की पसंदीदा घास की हो रही रिसर्च</strong><br />डीएफओ भटनागर ने बताया कि अभयारणय में कई तरह की घास हैं। कौनसी घास चरने योग्य है, हिरण किस घास को खाना ज्यादा पसंद करते हैं, इसका पता लगाने के लिए रिसर्च वर्क करवा रहे हैं। इसके लिए टैंडर भी निकाल दिया है। बायोलॉजिस्ट ने काम भी शुरू कर दिया है। अगले 4 माह में रिपोर्ट मिल जाएगी। ऐसे में हिरण की पसंदीदा घास को ही ज्यादा लगाया जाएगा। इसके अलावा भैंसरोडगढ़ में  शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या में तेजी से हुई गिरावट के क्या कारण है, इसका पता लगाने के लिए भी रिसर्च वर्क शुरू करवा दिया है।</p>
<p><strong>भैंसरोडगढ़ से हो सकती है चीतों की एंट्री </strong><br />विशेषज्ञों के अनुसार, मध्यप्रदेश से राजस्थान तक 400 वर्ग किमी के क्षेत्र में चीता लैंडस्केप बनाया जाएगा। इसके लिए कार्य योजना तैयार की जा रही है। अगले चरण में दक्षिणी अफ्रीका या नामीबिया से चीते गांधी सागर में लाए जाएंगे, जो भैंसरोडगढ़ से जुड़ा हुआ है। ऐसे में जब चीते एनक्लोजर से बाहर निकलेंगे तो सौ फीसदी यह राजस्थान में भैंसरोडगढ़ के जंगल में एंट्री करेंगे। यहां का भगौलिक वातावरण चीते के अनूकूल है। पूर्व में भी चीता कूनों से निकल बारां के शाहबाद के जंगल तक आ चुका है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Dec 2024 16:30:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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                <title>Online Medium से एग्जाम कम खर्चीला और आसान होगा</title>
                                    <description><![CDATA[ऑफलाइन मोड के दौरान कैंडिडेट्स को ओएमआर शीट भरने से पहले तीन बार अपना वेरिफिकेशन करना पड़ा, ऐसे में उनका काफी समय बर्बाद होता है और पेपर की बर्बादी भी होती है। कंप्यूटर पर ऐसा नहीं होता।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/exam-will-be-less-expensive-and-easier-through-online-medium/article-83746"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/u1rer-(2)8.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। एक के बाद एक परीक्षाओं में सॉल्वर और पेपर लीक गैंग की सेंधमारी से परीक्षा की शुचिता भंग हो रही है और सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। पिछले पांच साल में 15 राज्यों की 41 से ज्यादा भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं। यानी परीक्षा में पेपरलीक की महामारी देशभर में फैली हुई है। इससे निपटने के लिए कई पहलुओं पर गौर करना जरूरी है, जिनमें एग्जाम मोड सबसे अहम है। नीट यूजी और नेट 2024 परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर सरकार सख्त है। इस बीच अब परीक्षाओं के ऑफलाइन (पेन-पेपर मोड) या ऑनलाइन (कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट) मोड में आयोजित कराने को लेकर बहस तेज हो गई है।</p>
<p>दरअसल, परीक्षा के मोड (ऑफलाइन या ऑनलाइन) पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। अंडरग्रेजुएट मेडिकल एंट्रेंस टेस्ट यानी नीट यूजी पारंपरिक रूप से एक ही बार में होने वाली पेन-पेपर परीक्षा होती है, जबकि नीट-नेट, जो 2018 से कंप्यूटर आधारित है, इस बार इसे पेन-एंड-पेपर ओएमआर मोड में कराया गया था। नीट परीक्षा में जहां हर साल 20 से 24 लाख उम्मीदवार शामिल होते हैं, वहीं यूजीसी नेट परीक्षा में भी 10 से 12 लाख से ज्यादा उम्मीदवार बैठते हैं। इसलिए सुरक्षित मोड में परीक्षा कराना बहुत जरूरी है। इस दौरान ऑनलाइन माध्यम कम खर्चीला और आसान मानी जा रही है। ऑफलाइन परीक्षा में खर्चा ज्यादा आता है, जबकि ऑनलाइन में खर्चा कम होता है। ऑफलाइन में ट्रांसपोर्ट सहित अन्य खर्चे बढ़ जाते हैं, तो ऑनलाइन में यह कम होता है। </p>
<p><strong>ट्रांसपोर्टेशन में लीक</strong><br />ऑफलाइन मोड की परीक्षा में सबसे बड़ा रोल ट्रांसपोर्टेशन का है। परीक्षा से उचित समय पहले परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षित प्रश्न पत्र पहुंचाना बड़ी चुनौती है। नीट सहित अन्य भर्ती के पेपर लीक मामले में सामने आया है कि प्रश्न पत्र ट्रांसपोर्टेशन के दौरान लीक हुआ था। </p>
<p><strong>यह भी होती सुविधा यह भी होती सुविधा </strong><br />यूजीसी नेट जेआरएफ के लिए हमेशा से ऑफलाइन मोड से ज्यादा बेहतर ऑनलाइन मोड रहा है, क्योंकि ऑनलाइन बोर्ड की बहुत सारी विशेषताएं, जैसे ऑनलाइन बोर्ड में जो क्वेश्चन पेपर है, वह समय से ठीक 5 मिनट पहले ही ऑन होता है, जिससे कि पेपर लीक होने की सारी संभावनाएं खत्म हो जाती हैं।</p>
<p><strong>परीक्षा केंद्र पर गड़बड़ी से बचावपरीक्षा केंद्र पर गड़बड़ी से बचाव</strong><br />ऑफलाइन एग्जाम में परीक्षार्थियों को क्वेश्चन पेपर मैनुअली बांटे जाते हैं। इस बार नीट परीक्षा में कई एग्जाम सेंटर्स पर अंग्रेजी के बजाय हिंदी का क्वेश्चन पेपर बांट दिया गया था, जिसकी वजह से देरी हुई और परीक्षार्थियों को ग्रेस मार्क्स दिए गए। सीबीटी मोड में इस तरह की गलती की कोई गुंजाइश नहीं होती। सिक्योरिटी वेरिफिकेशन के बाद कंप्यूटर स्क्रीन पर क्वेश्चन पेपर मिल जाता है। ऑनलाइन मोड में पेपर सबमिशन करते ही पेपर लॉक हो जाता है, जो किसी भी माध्यम से खुल नहीं सकता है, तो पेपर के बाद होने वाली पेपर लीक की समस्या भी खत्म हो जाती है।</p>
<p><strong>समय की बर्बादी से बचाव</strong><br />ऑफलाइन मोड के दौरान कैंडिडेट्स को ओएमआर शीट भरने से पहले तीन बार अपना वेरिफिकेशन करना पड़ा, ऐसे में उनका काफी समय बर्बाद होता है और पेपर की बर्बादी भी होती है। कंप्यूटर पर ऐसा नहीं होता था, एक ही बार फेस स्कैन करके एंट्री मिल जाती थी, इसमें ओएमआर फटने-खोने का कोई डर नहीं होता। </p>
<p><strong>सबमिट के बाद पेपर लीक का डर होगा दूर</strong><br />कॅरिअर काउंसलिंग एक्सपर्ट अमित आहूजा ने कहा कि ऑफलाइन मोड में परीक्षा के बाद ओएमआर शीट को मुख्य केंद्र पर ले जाया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान भी परीक्षा में धांधली का सबसे ज्यादा चांस रहता है। परीक्षा शुरू होने से पहले जिस छात्र की सेटिंग होती है, उसे डुप्लीकेट ओएमआर शीट दी जाती है और ओरिजनल सीट किसी सॉल्वर से भरवा ली जाती है। </p>
<p><strong>पहले ऑनलाइन, फिर ऑफलाइन</strong><br />राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के प्रोफेसर राम अवतार शर्मा का कहना है कि पहले नेट की परीक्षा सीबीटी मोड (ऑनलाइन) में होती थी, ऐसे में पेपर तुरंत लॉक हो जाता था। इस साल एग्जाम पेन और पेपर मोड में हुआ है। अगर सारे सवाल पता हों तो कुछ ही देर में ओएमआर शीट भरकर पेपर भिजवाया जा सकता है और किसी को शक भी नहीं होगा, क्योंकि सेंटर इतनी दूर है तो यह कह सकते हैं कि आने में काफी देरी हुई। <br /><br /><strong>सब परेशानियों से निजात</strong><br />एसएसजी पारीक पीजी कॉलेज ऑफ एजुकेशन, जयपुर की प्राचार्य डॉ. प्रमिला दुबे कैंडिडेट को ओएमआर शीट भरने का बस नाटक करने के लिए कहा जाता है। जब ओएमआर शीट सबमिट करने का समय आता है तो बड़ी सफाई से ओरिजनल ओएमआर शीट रिप्लेस कर दी जाती है, यह काम इतनी सफाई से होता है कि गड़बड़ी सामने आने की गुंजाइश न के बराबर होती है। जबकि ऑनलाइन एग्जाम से इस सब परेशानियों से निजात मिल जाएगी। </p>
<p><strong>समय लग सकता है</strong><br />परीक्षा के बाद ओएमआर शीट को मुख्य सेंटर तक पहुंचाने में समय लग सकता है। ऐसे में कोई भी परीक्षक अपने पसंदीदा कैंडिडेट को यह भी कह सकता है कि ओएमआर शीट ब्लैंक छोड़ दो। एनटीए देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थानों में स्नातक और स्नातकोत्तर कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय स्तर की 15 परीक्षाएं करवा रही है, जिसमें एक सत्र की परीक्षा में बैठने वाले उम्मीदवारों की संख्या एक करोड़ से अधिक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jul 2024 14:46:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>परीक्षाओं में धांधली से युवाओं में बेचैनी</title>
                                    <description><![CDATA[लोक परीक्षा विधेयक-  2004 को कानून की शक्ल में लागू कर दिया गया है। इसके प्रावधान बेहद सख्त हैं और सरकार को उम्मीद है कि इसके लागू होने से परीक्षाओं की धांधली पर अंकुश लग सकेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/uneasiness-among-youth-due-to-rigging-in-examinations%C2%A0/article-82878"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/u1rer-(4)3.png" alt=""></a><br /><p>देश में पिछले कुछ वर्षों में प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं में जिस तरह की धांधलियां सामने आई हैं उससे युवाओं में खासा नाराजगी पनप गई है। पेपर लीक होना और नकल के कारण प्रतिभाशाली युवाओं में कुंठा का माहौल है। परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल रोक पाने में तमाम सरकारें नाकाम साबित हो रही हैं। युवा वर्ग में नाराजगी स्वाभाविक है। इस तरह के मामले जब उजागर होते हैं तो सरकार सिर्फ भरोसा ही देती है कि वह दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी और मामले की जांच करेगी। </p>
<p>सरकार का यह भरोसा अब लोगों के गले नहीं उतर रहा है , क्योंकि गड़बड़ी का यह सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। राष्ट्रीय स्तर के साथ ही प्रदेश स्तर की ज्यादातर परीक्षाएं धांधली की भेंट चढ़ रही हैं और इस पर लगाम लगाने के लिए कोई कारगर सिस्टम सरकारें लागू नहीं कर पा रही हैं।  सरकारों की तैयारियों के सामने नकल कराने वाले तथा पेपर हल करके देने वाले कहीं न कहीं रास्ता निकाल लेते हैं और फिर परीक्षा के होने के बाद ही पेपर आउट होने  की बात सभी अभ्यर्थियों को परेशान करती है। </p>
<p>हाल में नीट परीक्षा में जो गड़बड़ी सामने आई उससे तो पूरे सिस्टम की पोल खुलकर ही सामने आ गई। देश भर में यह मामला गर्माया हुआ है और इस प्रतिष्ठित परीक्षा को लेकर सरकार कोई ठोस निर्णय नहीं कर पा रही है। देश में वर्षों से परीक्षा की धांधली को रोकने की कवायद भी चली पर आज भी नतीजा ढाक के तीन पात ही दिखता है। समस्या बदस्तूर जारी है और अब सरकार ने कड़ा कानून भी लागू कर दिया है। इसका मकसद परीक्षाओं में गड़बड़ी और धांधली को रोकना है। यह कानून कितना कारगर हो पाएगा यह तो आने वाले में समय में ही पता चलेगा। लोक परीक्षा विधेयक-  2004 को कानून की शक्ल में लागू कर दिया गया है। इसके प्रावधान बेहद सख्त हैं और सरकार को उम्मीद है कि इसके लागू होने से परीक्षाओं की धांधली पर अंकुश लग सकेगा।</p>
<p>नीट और यूजीसी नेट की परीक्षाओं की गड़बड़ी के बीच उपजे विवाद के दौरान लागू हुए इस कानून का बड़ा महत्व माना जा सकता है। यह सही है कि अपराधों पर रोक लगाने के लिए ही कड़े कानून बनाये जाते हैं। पर इसकी उपयोगिता तभी साबित हो सकती है जब इस पर कड़ाई से अमल किया जाए। कानून अपनी जगह है, जो अपराध होने पर अपना काम करेगा और दोषियों को दंडित करेगा। लेकिन परीक्षाएं आयोजित कराने वाली संस्थाएं ही अपने सिस्टम को मजबूत बनाएं तो भी कई गड़बड़ियों को समय रहते रोका जा सकता है। परीक्षा कराने वाली संस्थाएं अगर पूरी पारदर्शिता और सख्ती से काम करें तो बहुत सी समस्याएं हल हो सकती हैं।  </p>
<p>यह संस्थाएं भले ही कहें की इन्होंने हर प्रकार से सुरक्षित व्यवस्था कर रखी है, लेकिन वास्तविकता यह है कि इनके इंतजामों में कहीं न कहीं कोई- न काई पोल जरूर है। इन संंस्थाओं को अपना निगरानी तंत्र मजबूत करने की सख्त आवश्यकता है। देखने में आता है कि ये संस्थाएं ही कई बार धांधली में शामिल हो जाती हैं और युवाओं का भविष्य बिगाड़ देती हैं। देश और प्रदेशों की भर्ती और परीक्षा एजेंसियां कई बार राजनीतिक  दबाव में काम करती है। इससे पूरा तंत्र की गड़बड़ा जाता है। परीक्षाओं में नकल पर नकेल लगाने के तमाम प्रयास पिछले कुछ वर्षों में तहस- नहस हो गये हैं। स्वच्छ और पारदर्शी तरीके से परीक्षा आयोजित कराने में ज्यादातर एजेंसियां नाकाम साबित हो रही हैं। नकल और पेपर लीक की बीमारी भर्ती परीक्षा के साथ ही मेडिकल, इंजीनियरिंग जैसे अहम पाठयक्रमों के दाखिले की परीक्षाओं में भी पनप गई है। </p>
<p>हाल में मेडिकल दाखिले के लिए हुई नीट परीक्षा ने तो देश भर में बवाल मचा दिया है। इस परीक्षा में शामिल हुए करीब 24 लाख विद्यार्थियों के सामने दुविधा की स्थिति बनी हुई है। नीट परीक्षा में जिस प्रकार से ग्रेस मार्क्स दिए गए या फिर पेपर फटे मिले वह भी यह बताते हैं कि व्यवस्था सही तरीके से नहीं हुई जिसका परिणाम ही यह हुआ कि नीट परीक्षा में भी धांधली की खबरों ने हमारी साख को काम कर दिया। <br />इस मामले में अब तो हर दिन किसी न किसी राज्य में पेपर लीक होने का खुलासा हो रहा है। इस मामले में पेपर लीक के साथ ही अन्य तरह की धांधलियां भी अब सामने आ रही हैं। परीक्षा की पवित्रता खत्म होने की धारणा मजबूत होती जा रही है। सरकार को इस तरह के मामले सख्ती से रोकने की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे तभी युवाओं का भरोसा इन परीक्षाओं के प्रति बना रहेगा। युवाओं को किसी भी तरह की परीक्षाओं पर तभी भरोसा रहेगा जब वह पूरी तरह  से सुरक्षित तथा एक समान तरीके से होंगी। वैसे यह बात भी कम चिंता की नहीं है कि आज देश के सभी बड़े राज्य पेपर लीक जैसी बीमारी से जूझ रहे हैं।</p>
<p><strong>- राजीव जैन</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Jun 2024 11:16:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>विद्यार्थियों का हित सर्वोपरि, गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ होगी कार्रवाई: केंद्र सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[शिक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव गोविंद जायसवाल ने बताया कि यूजीसी नेट की परीक्षा में धांधली को लेकर कुछ जानकारियां मिली थीं। इस पर तुरंत कार्रवाई करते हुए परीक्षा को रद्द कर दिया और जांच के लिए मामले को सीबीआई को सौंप दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/central-government-will-take-action-against-those-who-commit-irregularities/article-82193"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/ugc-net.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग-राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (यूजीसी-नेट) परीक्षा में गड़बड़ी की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया गया है और गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p>केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से आज यहां राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) और यूजीसी-नेट के मुद्दे पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन शिक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव गोविंद जायसवाल ने कहा कि हमने यूजीसी-नेट मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंप दिया है। हमारे लिए विद्यार्थियों का हित सर्वोपरि है। गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।</p>
<p>जायसवाल ने बताया कि यूजीसी नेट की परीक्षा में धांधली को लेकर कुछ जानकारियां मिली थीं। इस पर तुरंत कार्रवाई करते हुए परीक्षा को रद्द कर दिया और जांच के लिए मामले को सीबीआई को सौंप दिया। उन्होंने कहा कि गड़बड़ी को लेकर मंत्रालय कोई भी करवाई करने में संकोच नहीं करेगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यूजीसी-नेट के बारे में कोई शिकायत नहीं मिली थी। मंत्रालय ने उपलब्ध सूचनाओं के आधार  पर स्वत: संज्ञान लेते हुए इसे रद्द कर दिया। उन्होंने कहा कि प्राप्त जानकारियों से प्रथम  ²ष्टया यह संकेत मिले कि यूजीसी-नेट परीक्षा में धांधली हुई। इस दौरान उन्होंने बताया कि परीक्षा की  नयी तिथि जल्द घोषित की जाएगी। </p>
<p>जायसवाल ने कहा कि नीट में तीन मुद्दे हैं, जिसमें पहला मुद्दा कृपांक है। वहीं दूसरा बिहार और तीसरा गुजरात के दावे का हैं। बिहार की एजेंसी उस पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि एजेंसी इन सब मुद्दे की जांच कर सकती है, हम जांच उस पर छोड़ते हैं।  मंत्रालय इस बात का ध्यान रखेगा कि किसी भी विद्यार्थी के हित से समझौता नहीं किया जाए। हमारे लिए विद्यार्थियों के लिए विद्यार्थियों का हित सर्वोपरि है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Jun 2024 19:30:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एसबीआई का शुद्ध लाभ 13,265 करोड़ रुपए दर्ज</title>
                                    <description><![CDATA[एक वर्ष पूर्व समान अवधि में यह 7,627 करोड़ रुपए था। एसबीआई ने एक बयान में कहा कि उसका परिचालन लाभ वार्षिक आधार पर 16.82 प्रतिशत बढ़कर 21,120 करोड़ रुपए रहा, जो पूर्व में 18,079 करोड़ रुपए था।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/sbi-profit-13265-carore/article-28733"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/dsc-0096-copy1.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने चालू वित्त वर्ष में 74 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 13,265 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ दर्ज किया। एक वर्ष पूर्व समान अवधि में यह 7,627 करोड़ रुपए था। एसबीआई ने एक बयान में कहा कि उसका परिचालन लाभ वार्षिक आधार पर 16.82 प्रतिशत बढ़कर 21,120 करोड़ रुपए रहा, जो पूर्व में 18,079 करोड़ रुपए था।  </p>
<p>इस दौरान बैंक की शुद्ध ब्याज आय 35,183 करोड़ रुपए दर्ज की गई, जो प्राप्त हुए 31,184 करोड़ से 12.83 प्रतिशत अधिक है। एसबीआई का शुद्ध अवरुद्ध ऋण (एनपीए) अनुपात 0.72 प्रतिशत सही होकर एक प्रतिशत से नीचे 0.80 प्रतिशत पर आ गया। इसी तरह सकल एनपीए 1.38 प्रतिशत कम होकर 3.52 प्रतिशत दर्ज किया गया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 06 Nov 2022 11:11:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूजीसी नेट 9 जुलाई से, पहले दिन 25 विषयों की परीक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[एनटीए ने जूनियर रिसर्च फैलोशिप और असिस्टेंट प्रोफेसर की पात्रता के लिए देशभर में आयोजित होने वाली आॅनलाइन राष्टÑीय पात्रता परीक्षा (यूजीसी नेट) के पंजीकृत अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा का विषयवार शेड्यूल जारी किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/ugc-net-from-july-9-examination-of-25-subjects-on/article-13605"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/ugc-net.jpg" alt=""></a><br /><p>अजमेर। एनटीए ने जूनियर रिसर्च फैलोशिप और असिस्टेंट प्रोफेसर की पात्रता के लिए देशभर में आयोजित होने वाली ऑनलाइन राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (यूजीसी नेट) के पंजीकृत अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा का विषयवार शेड्यूल जारी किया है। फिलहाल पहले चरण की 9 से 12 जुलाई तक होने वाली विभिन्न विषयों की परीक्षा का शेड्यूल जारी किया गया है। मालूम हो कि 80 से अधिक विषयों के लिए आयोजित यह परीक्षा 9, 11 व 12 जुलाई तथा 12, 13 व 14 अगस्त को होगी। </p>
<p>एनटीए की वरिष्ठ निदेशक परीक्षा डॉ.साधना पाराशर की ओर से जारी किए गए नोटिस के अनुसार 9 जुलाई को परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को परीक्षा शहर आवंटित कर दिए गए हैं। अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्र जल्द जारी किए जाएंगे। अभ्यर्थी परीक्षा से संबंधित किसी भी जानकारी या स्पष्टीकरण के लिए हेल्पडेस्क नंबर 01140759000 पर संपर्क कर सकते हैं।</p>
<p><strong>पहले दिन इन विषयों की परीक्षा</strong></p>
<p>शेड्यूल के अनुसार पहले दिन 9 जुलाई को चाइनिज, जर्मन, इंडियन कल्चर, जेपेनिज, पाली, पॉपुलेशन स्टेडिज, राजस्थानी, रशियन, स्पेनिश, तेलगू, मराठी सहित 25 विषयों की परीक्षा होगी। इसी तरह 11 को 5 तथा 12 जुलाई को 4 विषयों की परीक्षा होगी। डॉ.पाराशर के अनुसार अगस्त में होने वाली परीक्षा का विषयवार शेड्यूल भी आगामी दिनों में जारी किया जाएगा। परीक्षा दो पारी में होगी। पहली पारी सुबह 9 से दोपहर 12 बजे तक तथा दूसरी पारी दोपहर 3 से सायं छह बजे तक होगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Jul 2022 12:20:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Ajmer]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नेटबंदी से 7000 करोड़ का व्यापार प्रभावित</title>
                                    <description><![CDATA[हत्याकांड के बाद बने हालात पर काबू पाने के लिए सरकार ने इंटरनेट सेवा बंद की है। डिजिटल युग में नेटलॉक करना अब आमजन को सताने लगा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-bussiness-affected--of-7000-carore-to-net-ban/article-13409"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/4545465.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। हत्याकांड के बाद बने हालात पर काबू पाने के लिए सरकार ने इंटरनेट सेवा बंद की है। डिजिटल युग में नेटलॉक करना अब आमजन को सताने लगा है। इसके साथ ही छोटे कारोबारियों का व्यापार ठप हो गया है। ऑनलाइन शॉपिंग, फूड परचेजिंग, कैब बुकिंग, बिल पेमेंट और ई-वे बिलिंग जैसे रोजमर्रा के ट्रांजेक्शन ठप हो गए है।</p>
<p><strong>ये सुविधाएं बाधित</strong><br />ऑनलाइन फूड ऑर्डर, पानी-बिजली के बिल भुगतान, ऑन लाइन शॉपिंग, फ्लाइट और ट्रैन बुकिंग और ऑन लाइन पेमेंट और मनी ट्रांसफर जैसी सेवाएं बाधित हो जाती है। बैंकिंग, स्वास्थ्य, शिक्षा, लॉजिस्टिक्स से लेकर लगभग हर क्षेत्र में इंटरनेट आधारित इन सेवाए ठप रही। पेट्रोल पंप पर भी ऑनलाइन और मोबाइल पेमेंट अटके हुए है। आॅनलाइन क्लास पर भी इंटरनेट बंदी से पढ़ाई की छुट्टी हुई है।</p>
<p><strong>सरकार कोई अन्य उपाय करे</strong><br />छोटे कारोबारियों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पिछले तीन दिनों से मोबाइल इंटरनेट बंद है। शनिवार को भी बंद रहेगा। पिछले दिनों बंद से बीस हजार करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ है। सरकार को कोई अन्य उपाय करने चाहिए।</p>
<p>-<strong> सुरेश अग्रवाल, चेयरमैन फोर्टी हजारों बेरोजगार</strong></p>
<p>मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद होने से डिलीवरी फोर्स बेरोजगार हो गई है। जयपुर में प्रतिदिन 500 करोड़ से अधिक का कारोबार प्रभावित हो रहा है। सरकार को लघु व्यापारियों को राहत देने के लिए कोई बचाव की पहल करनी चाहिए।<br /><strong>- सुभाष गोयल, अध्यक्ष, जयपुर व्यापार महासंघ</strong><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Jul 2022 10:44:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शुद्ध के लिए युद्ध अभियान:  हेल्थ डिपार्टमेंट ने मैन्युफेक्चरिंग फैक्ट्री में खीरमोहन में लगे कीड़े</title>
                                    <description><![CDATA[गंगापुर सिटी। हेल्थ डिपार्टमेंट ने शुद्ध के लिए युद्ध अभियान में गुरुवार को गंगापुरसिटी और वजीरपुर में बड़ी कार्रवाई की। टीम ने गर्ग मिल्क एंड फूड प्रोडक्ट की वजीरपुर स्थित मैन्युफेक्चरिंग फैक्ट्री कृष्णा चिलिंग सेंटर पर खीरमोहन में कीड़े लगने, मधुमक्खी और झींगुर पड़े हुए होने पर करीब 1 लाख रुपए का 300 किलो खीरमोहन को मौके पर ही नष्ट करवाया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/tonk/war-campaign-for-the-net/article-12911"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/shudh-ke-liye-yudd.jpg" alt=""></a><br /><p>गंगापुर सिटी। हेल्थ डिपार्टमेंट ने शुद्ध के लिए युद्ध अभियान में गुरुवार को गंगापुरसिटी और वजीरपुर में बड़ी कार्रवाई की। टीम ने गर्ग मिल्क एंड फूड प्रोडक्ट की वजीरपुर स्थित मैन्युफेक्चरिंग फैक्ट्री कृष्णा चिलिंग सेंटर पर खीरमोहन में कीड़े लगने, मधुमक्खी और झींगुर पड़े हुए होने पर करीब 1 लाख रुपए का 300 किलो खीरमोहन को मौके पर ही नष्ट करवाया। फैक्ट्री में मावा बहुत पुराना दिखाई देने पर करीब 75 हजार रुपए का 300 किलो मावा और करीब 82 हजार रुपए का 165 लीटर लूज घी सीज किया गया। सीएमएचओ डॉ. तेजराम मीना ने बताया कि गंगापुर सिटी और वजीरपुर में अलग-अलग ब्रांड के घी और अन्य सामग्रियों के सैंपल लिए गए।</p>
<p>विभाग के फूड सेफ्टी अधिकारी विरेन्द्र कुमार और उनकी टीम ने गंगापुर सिटी स्थित मैसर्स गर्ग मिल्क एंड फूड प्रॉडक्ट्स के यहां से 4 सैम्पल लिए। 1 सैम्पल लूज घी, 1 सैम्पल पनीर, 1 सैम्पल मावा और 1 सैम्पल खीरमोहन के लिए गए। साथ ही 165 लीटर लूज घी सीज किया गया जिसकी कीमत करीब 82 हजार 500 रुपए है। गंगापुर सिटी की गर्ग मिल्क एंड फूड प्रोडक्ट की वजीरपुर स्थित मैन्युफेक्चरिंग फैक्ट्री कृष्णा चिलिंग सेंटर पर भी विभाग ने कार्रवाई की। फैक्ट्री में खीरमोहन में कीड़े लगे हुए थे, मधुमक्खी, झींगुर पड़े हुए होने पर करीब 1 लाख रुपए का 300 किलो खीरमोहन मौके पर ही नष्ट करवाया गया, साथ ही चाशनी को भी नष्ट करवाया गया।</p>
<p>फैक्ट्री में ही मौजूद मावा बहुत पुराना दिखाई देने के संदेह पर और मावे की क्वालिटी को देखते हुए करीब 75 हजार रुपए का 300 किलो मावा सीज किया गया। सैम्पल की रिपोर्ट आने के पश्चात फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट 2006 के सीज किए गए घी और मावे पर कार्रवाई की जाएगी। सीएमएचओ डॉ. तेजराम मीना ने सभी लोगों से अपील की लूज या खुला हुआ घी काम में नहीं लें। यह किसी भी प्रकार से सेहत के लिए फाय्देमंद नहीं है। इस लूज घी में पाम आॅयल अथवा अन्य प्रकार के तेल होते हैं, जो हानिकारक हैं। दुकानदार वनस्पति तेल, पाम आॅयल को घी, पूजा-दीया बाती के लिए काम में आने वाला घी बता कर बेचते हैं।</p>
<p>बहुत ही कम कीमत में बाजार में मिलने वाला घी, घी ना होकर नकली, मिलावटी वनस्पति अथवा पाम आॅयल होते हैं। इसलिए जब भी घी खरीदें हमेशा उस पर लिखे हुए लेबल, सामग्री आदि के बारे में पढ़कर जांच परख कर ही खरीदें। कम कीमत में मिलने वाले घी को कई परिवार जन अपने घर की गर्भवती महिलाओं, धात्री महिलाओं के लिए खरीद कर प्रयोग में लाते हैं, ऐसा घी गर्भवती महिलाओं, धात्री महिलाओं के लिए लाभदायक ना होकर अत्यधिक घातक है। साथ ही ऐसे पदार्थ युवा पीढ़ी के लिए भी घातक हैं। ऐसे पदार्थों का सेवन युवाओं की नस्ल भी खतरे में पड़ रही है। ऐसे में सभी लोग शुद्व घी का प्रयोग करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टोंक</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Jun 2022 15:51:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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