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                <title>Paris Olympics 2024: श्रीजेश और मनु होंगे पेरिस ओलंपिक समापन समारोह में भारत के ध्वजवाहक</title>
                                    <description><![CDATA[आईओए की अध्यक्ष डॉ. पीटी उषा ने कहा कि श्रीजेश ने दो दशकों से अधिक समय तक विशेष रूप से भारतीय हॉकी और भारतीय खेल की सराहनीय सेवा की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/paris-olympics-2024-sreejesh-and-manu-will-be-flag-bearers/article-87335"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/4111u1rer18.png" alt=""></a><br /><p>पेरिस। भारतीय पुरुष हॉकी टीम के गोलकीपर पीआर श्रीजेश और महिला निशानेबाज मनु भाकर पेरिस ओलंपिक में समापन समारोह के लिए भारत के ध्वजवाहक होंगे। भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने इसकी घोषणा की।</p>
<p>आईओए की अध्यक्ष डॉ. पीटी उषा ने कहा कि श्रीजेश ने दो दशकों से अधिक समय तक विशेष रूप से भारतीय हॉकी और भारतीय खेल की सराहनीय सेवा की है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि मैंने नीरज चोपड़ा से बात की और उस सहजता और शालीनता की सराहना की जिसके साथ वह इस बात पर सहमत हुए कि श्रीजेश को समापन समारोह में ध्वजवाहक होना चाहिए।</p>
<p>श्रीजेश ग्रीष्मकालीन खेलों में पुरुष हॉकी कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय टीम के जबरदस्त प्रदर्शन करने वालों में से एक थे। यह उनका दूसरा ओलंपिक कांस्य है। 36 वर्षीय गोलकीपर ने कांस्य पदक मुकाबले के बाद अंतरराष्ट्रीय हॉकी से संन्यास ले लिया।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि इससे पहले आईओए ने मनु भाकर को महिला ध्वजवाहक घोषित किया था। मनु ने पेरिस ओलंपिक में कई रिकॉर्ड तोड़े और दो कांस्य पदक जीते।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 09 Aug 2024 16:36:01 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>विनेश के साथ अन्याय हुआ, भारत सरकार और आईओए करे इसका कड़ा विरोध </title>
                                    <description><![CDATA[रिस ओलंपिक खेलों में भारतीय महिला पहलवान विनेश फोगाट को फाइनल मुकाबले से पूर्व अयोग्य घोषित करने के फैसले पर देशभर में तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/government-of-india-has-done-injustice-to-vinesh-and-ioa/article-87090"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/4111u1rer-(6)5.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पेरिस ओलंपिक खेलों में भारतीय महिला पहलवान विनेश फोगाट को फाइनल मुकाबले से पूर्व अयोग्य घोषित करने के फैसले पर देशभर में तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही है। राजस्थान में भी पूर्व ओलंपियन धावक गोपाल सैनी ने फैसले को अन्यायपूर्ण बताते हुए कहा कि यह एक खिलाड़ी के साथ-साथ इस खेल में आगे बढ़ रहे एक देश को रोकने का प्रयास है। सैनी ने कहा कि भारत सरकार को अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक कमेटी के समक्ष इसका कड़ा विरोध दर्ज कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब कोई पहलवान कुश्ती लड़ता है तो उससे पहले ही उसका वेट लिया जाता है। विनेश ने प्रीक्वार्टर, क्वार्टर फाइनल और सेमी फाइनल मुकाबला जीतकर फाइनल में जगह बनाई। फाइनल में जाकर मात्र कुछ ग्राम वजन अधिक होने की वजह से उसे अयोग्य ठहराना एक खिलाड़ी के साथ गंभीर अन्याय है। इतना सा वजन तो बाउट के बाद दो गिलास पानी पीने से ही बढ़ जाता है। </p>
<p><strong>अमेरिका की सारा से होना था फाइनल मुकाबला</strong><br />भारतीय पहलवान विनेश ने 50 किग्रा वजन वर्ग के सेमी फाइनल में क्यूबा की लोपेज गुजमान को हराकर फाइनल में जगह बनाई। लेकिन बाद में भारतीय दल को उनके अयोग्य होने की सूचना दी गई। भारत द्वारा इसका विरोध दर्ज कराने के बावजूद आज सुबह उन्हें अयोग्य करार देने की अधिकारिक पुष्टि की गई। विनेश का वजन 50 किलोग्राम से कुछ ग्राम अधिक बताया गया। विनेश का फाइनल में आज देर रात अमेरिका की सारा एन हिल्डब्रांड से फाइनल मुकाबला होना था। </p>
<p><strong>फाइनल में पहुंचने के बाद अयोग्य करार देना सही नहीं</strong><br />वहीं राजस्थान ओलंपिक संघ के महासचिव रामावतार सिंह जाखड़ ने कहा कि पिछले कुछ सालों में भारतीय पहलवान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। भारत ने कुश्ती के खेल में अपना दबदबा बनाया है। लेकिन जब भारत की एक बेटी स्वर्ण पदक के लिए मुकाबले में उतरने जा रही थी और ऐन वक्त पर उसे अयोग्य ठहराना तो एक खिलाड़ी के साथ अन्याय है। जाखड़ ने कहा कि भारतीय ओलंपिक संघ और भारत सरकार को इसका कड़ा विरोध करना चाहिए और मामले को अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक कमेटी और मेजबान आयोजन समिति के समक्ष उठाना चाहिए। कुश्ती के तकनीकी अधिकारियों के इस फैसले को कतई जायज नहीं ठहराया जा सकता है। </p>
<p><strong>फैसला दुर्भाग्यपूर्ण</strong><br />दूसरी ओर राजस्थान कुश्ती संघ के अध्यक्ष उम्मेद सिंह ने विनेश फोगाट को अयोग्य करार देने के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि विनेश फाइनल में पहुंच गई थी और भारत को एक पदक मिलना निश्चित था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यह पूछे जाने पर कि क्या खिलाड़ी के साथ अन्याय हुआ है, उम्मेद सिंह ने कहा कि विनेश का वजन उसकी वेट कैटेगरी से अधिक निकला। ओलंपिक स्तर पर अन्याय या षड्यंत्र जैसी बात नहीं होती, जो भी निर्णय हुआ है नियम-कायदों से ही किया गया होगा।</p>
<p><strong>फोगाट के करियर पर 100 ग्राम वजन का असर, विश्वस्तरीय बहस की मांग : सीए नटवर सारडा</strong></p>
<p>हाल ही में, ओलंपिक में प्रवेश के समय एक एथलीट का वजन हर पल जांचा जाने वाला नया मुद्दा सामने आया है। यह बहस का विषय बन चुका है कि खिलाड़ियों के वजन को हर समय जांचने के बजाय, उन्हें प्रवेश के समय चेक किए गए पैरामीटर ही मान्य होने चाहिए, जब तक कि कोई असाधारण परिवर्तन न हो। भारतीय पहलवान फोगाट के करियर के साथ मात्र 100 ग्राम वजन के लिए जो खिलवाड़ किया गया है, वह बेहद अनुचित है। इस विषय पर विश्व स्तरीय बहस होनी चाहिए ताकि खिलाड़ियों के साथ न्याय हो सके और उनके करियर के साथ खिलवाड़ न हो।</p>
<p><strong>अत्यंत दुखद : सुनीत कुमार जैन, अध्यक्ष फॉरहेक्स</strong><br />समझ नहीं आ रहा यह लापरवाही हैं या खराब किस्मत। पेरिस ओलंपिक से विनेश फोगाट को बाहर करने के फैसले को सुनने और देखने के बात मन व्यथित हैं।</p>
<p><strong>बडा नुकसान: मुकेश जैन ने खेल भावना से लेने की अपील की<br /></strong>मुकेश जैन, डायरेक्टर मार्वेरिक शेयर ब्रोकर, ने देश में हाल ही में हुए बड़े नुकसान पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा, "यह देश का एक बड़ा नुकसान है। इसे निराशा नहीं होना चाहिए और इसको खेल भावना से लेना चाहिए।" उन्होंने सभी को सलाह दी है कि इस मुश्किल समय में हिम्मत बनाए रखें और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>खेल</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Aug 2024 14:56:05 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>सीईओ की नियुक्ति जल्द करे आईओए : आईओसी</title>
                                    <description><![CDATA[सीईओ के पद के लिये पात्रता मानदंडों में से एक यह है कि उम्मीदवार को 'कम से कम 25 करोड़ रुपये के वार्षिक कारोबार वाली कंपनी/इकाई के सीईओ के रूप में कम से कम 10 साल का अनुभव होना चाहिए।']]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/ioa-ioc-should-appoint-ceo-soon/article-49694"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/630-400-size-(14)11.png" alt=""></a><br /><p>लुसाने। अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) ने भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) में मुख्य कार्यकारी अधिकारी/महासचिव की नियुक्ति में देरी को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए चिंता व्यक्त की और कहा कि वह इस मुद्दे पर लगातार नजर रखे हुए है।</p>
<p>आईओसी ने बुधवार को कार्यकारी समिति की बैठक के बाद एक बयान जारी किया, जिसमें आईओए से भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) से जुड़ी समस्या का समाधान निकालने के लिये भी कहा गया है। </p>
<p>आईओए ने एक बयान में कहा, ''भारत की एनओसी (राष्ट्रीय ओलंपिक समिति) को कई मौकों पर एनओसी संविधान के अनुसार बिना किसी देरी के नये सीईओ/महासचिव की नियुक्ति पूरी करने का निर्देश दिया गया है, ताकि एनओसी के भीतर स्थिति को सामान्य किया जा सके।" </p>
<p>बयान में कहा गया, ''दुर्भाग्य से एनओसी ने अभी तक इस प्रक्रिया को पूरा नहीं किया है। आईओसी इस मुद्दे की निगरानी जारी रखे हुए है।" </p>
<p>आईओसी ने आईओए से डब्ल्यूएफआई को प्रभावित करने वाले मुद्दों के समाधान के लिये अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघ, यूनाइटेड वल्र्ड रेसङ्क्षलग (यूडब्ल्यूडब्ल्यू) के साथ समन्वय करने के लिये भी कहा है। </p>
<p>उल्लेखनीय है कि ओलंपिक पदक विजेता पहलवान बजरंग पूनिया, साक्षी मलिक और एशियाई खेलों की चैंपियन विनेश फोगाट सहित भारत के शीर्ष पहलवानों ने डब्ल्यूएफआई के निवर्तमान अध्यक्ष बृजभूषण शरण ङ्क्षसह की गिरफ्तारी की मांग को लेकर पिछले महीने नयी दिल्ली में जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया था। दिल्ली पुलिस ने 29 मई को पहलवानों को हिरासत में लेकर प्रदर्शन समाप्त किया था, जिसके बाद यूडब्ल्यूडब्ल्यू ने भारतीय कुश्ती की स्थिति पर ङ्क्षचता व्यक्त की थी। </p>
<p>आंदोलनरत पहलवानों का आरोप है कि बृजभूषण ने महिला पहलवानों का यौन उत्पीड़न किया है। आईओसी ने कहा, ''भारत के एनओसी से अनुरोध किया गया है कि वह भारतीय खेल महासंघों को प्रभावित करने वाले कई मौजूदा मुद्दों को समन्वित तरीके से और संबंधित अंतरराष्ट्रीय महासंघों के नियमों और निर्देशों के अनुसार संबोधित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय महासंघों के साथ मिलकर काम करे। इसमें विशेष रूप से भारत में कुश्ती महासंघ की स्थिति शामिल है।"</p>
<p>आईओसी ने इस साल मार्च में भी सीईओ नियुक्त करने में आईओए की ओर से देरी की ओर इशारा किया था। आईओसी द्वारा मान्यता प्राप्त नये संविधान के अनुसार, आईओए को नयी कार्यकारी परिषद का कार्यभार संभालने के एक महीने के भीतर एक सीईओ नियुक्त करना था जो पूर्व महासचिव के कार्यों को पूरा करेगा। पूर्व धाविका पीटी उषा की अध्यक्षता वाली आईओए परिषद ने 10 दिसंबर को कार्यभार संभाला था, लेकिन सात महीने से अधिक समय होने के बाद भी सीईओ की नियुक्ति नहीं की गयी है। </p>
<p>उषा ने मार्च में कहा था कि आईओए ने सीईओ की नियुक्ति के लिये मानदंड तय किये थे, लेकिन केवल एक आवेदक को इस पद के लिये योग्य पाया गया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें और आवेदनों की जरूरत है और आईओए इस पद के लिये दोबारा विज्ञापन देगा। फिलहाल आईओए महासचिव कल्याण चौबे सीईओ के कार्यों का निर्वहन कर रहे हैं। </p>
<p>सीईओ के पद के लिये पात्रता मानदंडों में से एक यह है कि उम्मीदवार को 'कम से कम 25 करोड़ रुपये के वार्षिक कारोबार वाली कंपनी/इकाई के सीईओ के रूप में कम से कम 10 साल का अनुभव होना चाहिए।'</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Jun 2023 16:28:11 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>भारतीय ओलंपिक संघ में प्रशासकों की समिति का गठन </title>
                                    <description><![CDATA[ सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश अनिल दवे की अध्यक्षता में गठित समिति में पूर्व चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी और विदेश मंत्रालय के पूर्व सचिव विकास स्वरूप को सदस्य के रूप में शामिल किया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/constitution-of-the-committee-of-administrator-in-olympic/article-19273"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/65465465410.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के काम का संचालन करने के लिए प्रशासकों की 3 सदस्यीय समिति (सीओए) का गठन किया। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश अनिल दवे की अध्यक्षता में गठित समिति में पूर्व चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी और विदेश मंत्रालय के पूर्व सचिव विकास स्वरूप को सदस्य के रूप में शामिल किया है। कोर्ट ने कहा कि खेल संहिता का पालन करने के लिए आईओए की लगातार अनिच्छा ने यह अनिवार्य कर दिया है कि इसके काम को सीओए को दिया जाए।</p>
<p><strong>आईओए की कार्यसमिति को कार्यभार सीओए को देने के निर्देश</strong><br />हाईकोर्ट ने आईओए की कार्यसमिति को कार्यभार सीओए को देने के निर्देश दिए है। कोर्ट ने सीओए के सलाहकार के रूप में पूर्व ओलंपियन निशानेबाज अभिनव बिन्द्रा, एथलीट अंजू और तीरन्दाज बोम्बायला देवी लैशराम को नियुक्त किया है। आईओए को अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक कमेटी द्वारा भारत में राष्ट्रीय ओलंपिक समिति के रूप में मान्यता प्राप्त है।</p>
<p><strong>खेल संघों में नहीं होगा आजीवन अध्यक्ष का पद</strong><br />न्यायालय ने पदाधिकारियों के कार्यकाल और मतदान के अधिकार से संबंधित पहलुओं पर भी विस्तार से प्रकाश डाला है। कोर्ट ने आईओए में आजीवन अध्यक्ष या ऐसे किसा स्थाई पद को समाप्त कर दिया है। अध्यक्ष समेत सभी पदाधिकारियों का कार्यकाल अधिकतम तीन कार्यकाल तक होगा। कोर्ट ने सीओए को निर्देश दिए है कि वह किसी ऐसे खेल संघ को मान्यता नहीं दे, जो खेल संहिता का पालन नहीं करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/khel/constitution-of-the-committee-of-administrator-in-olympic/article-19273</link>
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                <pubDate>Wed, 17 Aug 2022 11:07:05 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नरिन्द्र बत्रा ने आईओसी, आईओए, एफआईएच से दिया इस्तीफा</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व में दिल्ली उच्च न्यायालय ने बत्रा के आईओए के अध्यक्ष के रूप में काम करने पर रोक लगाई थी। दिनेश कुमार शर्मा की अवकाशकालीन पीठ ने कहा था कि वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनिल खन्ना अध्यक्ष की जिम्मेदारियां संभालेंगे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/narindra-batra-resigns-from-ioc-ioa-fih/article-15211"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/batra.jpg" alt=""></a><br /><p> नई दिल्ली। वरिष्ठ खेल प्रशासक डॉ नरिंद्र ध्रुव बत्रा ने  भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के अध्यक्ष पद, अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ (एफआईएच) के अध्यक्ष पद और अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) के सदस्य के पद सहित तीन पदों से इस्तीफा दिया। <br /><br /><strong>निजी कारणों से दिया इस्तीफा</strong></p>
<p>बत्रा ने आईओए के महासचिव, एफआईएच की कार्यकारी पीठ और आईओसी के अध्यक्ष को तीन अलग-अलग पत्र लिखकर कहा कि वह  निजी कारणों  के चलते सभी पदों से इस्तीफा दे रहे हैं। उन्होंने आईओए की कार्यकारी पीठ को लिखे गये एक संक्षिप्त संदेश में कहा, मैं निजी कारणों से अध्यक्ष पद से इस्तीफा देता हूं जिसके लिये मैं 2017 में चुना गया था। आपके समर्थन और मार्गदर्शन के लिये धन्यवाद।</p>
<p><br /><strong>2019 में आईओसी सदस्य चुने गए थे</strong><br />बत्रा ने आईओसी अध्यक्ष थॉमस बाक को लिखा, मैं निजी कारणों से आईओसी सदस्य के पद से इस्तीपा देता हूं। आपके समर्थन और मार्गदर्शन के लिये धन्यवाद। बत्रा 2019 में आईओसी के सदस्य चुने गये थे।</p>
<p><br /><strong>हाईकोर्ट ने काम करने पर लगाई थी रोक</strong><br />पूर्व में दिल्ली उच्च न्यायालय ने बत्रा के आईओए के अध्यक्ष के रूप में काम करने पर रोक लगाई थी। दिनेश कुमार शर्मा की अवकाशकालीन पीठ ने कहा था कि वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनिल खन्ना अध्यक्ष की जिम्मेदारियां संभालेंगे। अदालत ने बत्रा को 25 मई को एनएसएफ के आजीवन सदस्य के पद से भी हटा दिया था।</p>
<p><br /><strong>कार्यकाल 2024 में होना था समाप्त</strong> <br />बत्रा ने एफआईएच को लिखे पत्र में कहा, मैं निजी कारणों से एफआईएच के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देता हूं। बत्रा को मई 2021 में 47वीं एफआईएच कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में पुन: निर्वाचित किया गया था और उनका कार्यकाल 2024 में समाप्त होना था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Jul 2022 13:28:48 +0530</pubDate>
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                <title> बत्रा को आईओए से हटाया, खन्ना होंगे कार्यवाहक अध्यक्ष</title>
                                    <description><![CDATA[वरिष्ठ खेल प्रशासक नरिंदर बत्रा को बड़ा झटका देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को उन्हें भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के अध्यक्ष पद से हटा दिया और अनिल खन्ना को खेल संस्था का कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/-batra-removed-from-ioa-khanna-to-be-acting-president/article-12977"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/batra.jpg" alt=""></a><br /><p> <br /><strong>नई दिल्ली।</strong> वरिष्ठ खेल प्रशासक नरिंदर बत्रा को बड़ा झटका देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को उन्हें भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के अध्यक्ष पद से हटा दिया और अनिल खन्ना को खेल संस्था का कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया। न्यायमूर्ति दिनेश शर्मा की अदालत की अवकाश पीठ ने पूर्व ओलंपियन असलम शेर खान की ओर से बत्रा, आईओए के महासचिव राजीव मेहता और खेल सचिव के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। खान की ओर से पेश हुए वकील वंशदीप डालमिया ने कहा कि अदालत ने आदेश दिया कि नरिंदर बत्रा को तत्काल प्रभाव से आईओए अध्यक्ष के रूप में काम करना बन्द कर देना चाहिए। डालमिया ने कहा कि अदालत ने यह भी कहा कि वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनिल खन्ना आईओए के कार्यवाहक अध्यक्ष होंगे। असलम शेर खान की ओर से यह याचिका दायर की गई थी क्योंकि नरिंदर बत्रा अभी भी आईओए अध्यक्ष के रूप में खेल मंत्रालय सहित बैठकों में भाग ले रहे थे। इसे दिल्ली उच्च न्यायालय के 25 मई के आदेश के खिलाफ अवमानना माना गया।</p>
<p><strong>यह था 25 मई का आदेश</strong></p>
<p>न्यायालय के 25 मई के आदेश में बत्रा की आजीवन सदस्यता और हॉकी इंडिया की कार्यकारी समिति के कार्यकाल को भी रद्द कर दिया था क्योंकि इसे भारतीय राष्टÑीय खेल विकास संहिता का उल्लंघन माना गया था। यही नहीं इस आदेश में हॉकी इंडिया के कामकाज के संचालन के लिए रिटायर जस्टिस अनिल आर दवे, भारत के पूर्व चुनाव आयुक्त डॉ. एसवाई कुरैशी और पूर्व ओलंपियन जफर इकबाल की प्रशासकों की तीन सदस्यीय समिति नियुक्त कर दी थी।</p>
<p><strong>आईओसी की सदस्यता भी खतरे में</strong></p>
<p>बत्रा को आईओए अध्यक्ष पद से हटाने का मतलब है कि अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक कमेटी (आईओसी) की उनकी सदस्यता भी समाप्त हो जाएगी। क्योंकि यह पद उनके आईओए अध्यक्ष पद से जुड़ा है। बत्रा को 2019 में आईओसी का सदस्य बनाया गया था।</p>
<p><strong>विवादों से घिरा रहा है बत्रा का कार्यकाल</strong></p>
<p>नरिंदर बत्रा का आईओए अध्यक्ष के रूप में कार्यकाल विवादों से घिरा रहा है। 2020 में आईओए के उपाध्यक्ष सुधांशु मित्तल ने आईओसी को पत्र लिखकर बत्रा पर अनियमितताओं और झूठी घोषणाओं का आरोप लगाया था। यही नहीं सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व जस्टिस के खिलाफ अपनी एक सोशल मीडिया पोस्ट के लिए भी उन्हें माफी मांगनी पड़ी थी।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sat, 25 Jun 2022 12:32:20 +0530</pubDate>
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