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                <title>New Guidelines - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>नए निर्देशों से उजागर हुआ पीपीएफ में निवेश का गणित</title>
                                    <description><![CDATA[अभिभावक और नाबालिग के खातों में कुल 1.50 लाख पर ही मिलेगा ब्याज।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/new-guidelines-clarify-the-math-behind-ppf-investments/article-158565"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/12200-x-600-px)-(3)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। यदि आपने अपने नाम के साथ-साथ नाबालिग बेटे या बेटी के नाम पर भी पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) खाता खुलवा रखा है और दोनों खातों में अलग-अलग 1.50 लाख जमा कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। वित्त मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के बाद डाक विभाग ने ऐसे खातों की समीक्षा और नियमितीकरण (रेगुलराइजेशन) की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसके चलते कई खाताधारकों को अब यह जानकारी दी जा रही है कि अभिभावक और उसके द्वारा संचालित नाबालिग के पीपीएफ खाते में मिलाकर एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 1.50 लाख की जमा राशि पर ही पीपीएफ योजना का ब्याज और अन्य लाभ मिलेगा। अब तक कई निवेशक यह मानकर चल रहे थे कि अपने खाते में 1.50 लाख और नाबालिग बच्चे के खाते में भी 1.50 लाख जमा कर वे दोनों खातों पर अलग-अलग ब्याज का लाभ ले सकते हैं, लेकिन अब वित्त मंत्रालय के नए दिशा-निर्देशों के बाद योजना के ब्याज के बारे में नई जानकारी उजागर हुई है। यदि दोनों खातों में मिलाकर 3 लाख जमा किए जाते हैं, तो इस योजना के तहत केवल 1.50 लाख तक की पात्र राशि पर ही ब्याज मिलेगा। अतिरिक्त राशि पर इस योजना के नियमों के अनुसार लाभ नहीं दिया जाएगा।</p>
<p><strong>अधिकांश खाताधारक इस नियम से अनभिज्ञ</strong><br />डाक विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह कोई नई बचत योजना नहीं है। यह नियम योजना की शुरुआत के साथ जारी किया गया था, लेकिन खाताधारक इस नियम से अनभिज्ञ थे। अब इस साल वित्त मंत्रालय द्वारा अनियमित पीपीएफ खातों को नियमित करने के सम्बंध में दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत विभाग अब ऐसे मामलों की जांच कर रहा है, जहां अभिभावक और नाबालिग के खातों में निवेश निर्धारित सीमा से अधिक पाया जा रहा है। कई खाताधारकों को इस प्रक्रिया के दौरान पहली बार इन नियमों की जानकारी मिल रही है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार पीपीएफ की वार्षिक अधिकतम निवेश सीमा हमेशा से 1.50 लाख रही है। नए निर्देशों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एक ही अभिभावक अपने खाते और नाबालिग के खाते का उपयोग करके इस सीमा से अधिक निवेश पर पीपीएफ का ब्याज और कर लाभ प्राप्त न कर सके।</p>
<p><strong>ज्यादा ब्याज लिया तो लौटाना पड़ सकता है पैसा</strong><br />वित्त मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में डाक विभाग अब ऐसे पीपीएफ खातों की भी समीक्षा कर रहा है, जिनमें अभिभावक और नाबालिग के खातों में निर्धारित सीमा से अधिक निवेश पर वर्षों तक पीपीएफ ब्याज का लाभ मिलता रहा। जांच में यदि किसी खाताधारक को नियमों के विपरीत अतिरिक्त ब्याज का भुगतान हुआ पाया जाता है, तो डाक विभाग उसकी वसूली (रिकवरी) की प्रक्रिया शुरू कर रहा है। इसके लिए संबंधित खाताधारकों को नोटिस जारी कर अतिरिक्त ब्याज राशि जमा कराने के लिए कहा जा रहा है। यदि निर्धारित अवधि में राशि जमा नहीं कराई जाती है, तो विभाग नियमानुसार आगे की कार्रवाई कर सकता है। डाक विभाग का कहना है कि यह कार्रवाई किसी नई योजना के तहत नहीं, बल्कि वित्त मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निदेर्शों के अनुपालन में की जा रही है।</p>
<p><strong>इन निवेशकों को रहना होगा सतर्क</strong><br />विभागीय अधिकारियों के अनुसार वे परिवार, जिन्होंने वर्षों से अपने और नाबालिग बच्चों के नाम पर अलग-अलग पीपीएफ खातों में 1.50-1.50 लाख जमा किए हैं, उन्हें अपने खाते की स्थिति की जानकारी डाकघर या बैंक से अवश्य प्राप्त करनी चाहिए। भविष्य में निवेश करते समय वार्षिक पात्र सीमा का ध्यान रखना जरूरी होगा, अन्यथा अतिरिक्त राशि पर अपेक्षित लाभ नहीं मिलेगा। वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि पीपीएफ निवेश करने से पहले खाताधारकों को अपने निवेश की वार्षिक सीमा की समीक्षा करनी चाहिए। यदि अभिभावक और नाबालिग दोनों के नाम पर खाते हैं, तो कुल निवेश 1.50 लाख से अधिक न करें। यदि पहले से अधिक राशि जमा हो रही है, तो संबंधित डाकघर या बैंक से संपर्क कर अपने खाते की स्थिति स्पष्ट करा लें, ताकि भविष्य में ब्याज या अन्य लाभ को लेकर किसी प्रकार का विवाद न हो।</p>
<p><strong>क्या कहते हैं नियम</strong><br />-एक व्यक्ति के नाम पर केवल एक ही पीपीएफ खाता मान्य है।<br />-नाबालिग बच्चे के नाम पर पीपीएफ खाता उसके माता, पिता या कानूनी अभिभावक द्वारा संचालित किया जा सकता है।<br />-अभिभावक के अपने पीपीएफ खाते और उसके द्वारा संचालित नाबालिग के पीपीएफ खाते में मिलाकर एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 1.50 लाख की जमा राशि ही पीपीएफ ब्याज और कर लाभ के लिए पात्र होगी।<br /><strong>-अधिक जमा राशि पर पीपीएफ योजना के लाभ नहीं मिलेंगे और मामले का निस्तारण नियमानुसार किया जाएगा।</strong></p>
<p>डाक विभाग ने पीपीएफ खातों की समीक्षा और नियमितीकरण (रेगुलराइजेशन) की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसके चलते कई खाताधारकों को अब यह जानकारी दी जा रही है कि अभिभावक और उनके द्वारा संचालित नाबालिग के पीपीएफ खाते में मिलाकर एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 1.50 लाख की जमा राशि पर ही ब्याज और अन्य लाभ मिलेगा। निर्धारित सीमा से अधिक निवेश पर वर्षों तक पीपीएफ ब्याज लेने वाले खातों की भी जांच की जा रही है।<br /><strong>-मनीष चौरसिया, हेड पोस्टमास्टर, प्रधान डाकघर नयापुरा कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 14:22:36 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>'वंदे मातरम’ पर नई गाइडलाइंस जारी: सरकारी कार्यक्रमों व स्कूलों में छह छंद अनिवार्य, खड़े रहना होगा जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को ‘वंदे मातरम’ के बारे में नई गाइडलाइंस जारी कीं, जिसमें कहा गया कि सभी सरकारी इवेंट्स और स्कूलों में राष्ट्रगान से पहले राष्ट्रगान गाया जाना चाहिए, और जब यह बजाया जाए तो सभी लोग सावधान की मुद्रा में खड़े रहें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/new-guidelines-issued-on-vande-mataram-standing-of-six-verses/article-142740"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(3)10.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ‘वंदे मातरम’ को लेकर नई गाइडलाइंस जारी की हैं। अब सभी सरकारी कार्यक्रमों और स्कूल असेंबली में राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ से पहले ‘वंदे मातरम’ गाया जाएगा। निर्देशों के अनुसार, गीत के सभी छह छंद (लगभग 3 मिनट 10 सेकंड) गाए या बजाए जाएंगे और इस दौरान सभी को सावधान की मुद्रा में खड़ा होना होगा।</p>
<p>गाइडलाइंस राष्ट्रपति व राज्यपालों की उपस्थिति वाले समारोहों, नागरिक सम्मान कार्यक्रमों और झंडारोहण अवसरों पर भी लागू होंगी। हालांकि, फिल्म प्रदर्शन के दौरान इसे अनिवार्य नहीं किया गया है।</p>
<p>सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय गीत के सम्मान को औपचारिक और एकरूप बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है। हाल में इसके ऐतिहासिक स्वरूप और पूरे संस्करण को शामिल करने को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हुई थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Feb 2026 14:35:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का - अन्य राज्यों में भेजने पर लगी पाबंदी 11 साल बाद हटाई, ऊंटों की घटती संख्या पर लगेगा ब्रेक</title>
                                    <description><![CDATA[अब ऊंटों का अंतरराज्यीय परिवहन और निर्यात  (वध के अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए) संभव। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news---ban-on-transporting-camels-to-other-states-lifted-after-11-years--curbing-the-declining-number-of-camels/article-128723"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/111-(1)10.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिले सहित पूरे प्रदेश में ऊंटों की लगातार घटती संख्या से चिंतित ऊंट पालकों को अब राहत मिली है। अब वे बिना किसी रोक-टोक के अपने ऊंटों को किसी भी मेले में लाकर बेच सकेंगे। सरकार ने ऊंटों को अन्य राज्यों में भेजने पर लगी पाबंदी 11 साल बाद हटा दी है और ऊंटों के परिवहन को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है, जिसके अनुसार ऊंट पालकों को पशु कल्याण और देखभाल से जुड़ी शर्तों का पालन करना होगा। राजस्थान सरकार ने 2015 में पारित राजस्थान ऊंट अधिनियम के तहत ऊंटों के वध, व्यापार और राज्य से बाहर भेजने पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसका उद्देश्य ऊंटों की घटती संख्या को बचाना था, लेकिन इससे ऊंट पालकों की आजीविका प्रभावित हुई और ऊंटों की संख्या में भी लगातार कमी आती गई। अब सरकार ने इस प्रतिबंध को हटा दिया है। अब ऊंटों का अंतरराज्यीय परिवहन और निर्यात  (वध के अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए) संभव हो गया है।</p>
<p><strong>सशर्त निर्यात और प्रवासन की मिली अनुमति</strong><br />राज्य सरकार ने ऊंटों की घटती आबादी को आधार बनाकर अन्य राज्यों में अस्थायी प्रजनन और प्रवासन को अनुमति देने संबंधी अधिसूचना जारी कर दी है। सरकार का कहना है कि यह फैसला ऊंटों की गिरती संख्या और पशुपालकों के हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। सशर्त निर्यात और प्रवासन की अनुमति से जहां ऊंटपालकों को राहत मिलेगी वहीं उनके संरक्षण को भी बढ़ावा मिल सकेगा। पशुपालन विभाग के अधिकारियों के अनुसार ऊंटों को राज्य से बाहर ले जाने के लिए अब कुछ जरूरी प्रक्रियाओं और शर्तो का पालन करना अनिवार्य होगा।</p>
<p><strong>इन शर्तो का करना होगा पालन</strong><br />- राज्य से ऊंटों को बाहर ले जाने के लिए संबंधित सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति लेनी होगी।<br />-पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा ऊंट का स्वास्थ्य परीक्षण कर प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। बिना स्वास्थ्य प्रमाण पत्र के ऊंट का परिवहन अवैध माना जाएगा। <br />-यदि ऊंट को अस्थायी प्रजनन या कृषि उद्देश्यों के लिए ले जाया जा रहा है तो उसका स्पष्ट उल्लेख करना होगा।<br />-शर्तो और नियमों का उल्लंघन करने पर सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />रेगिस्तानी जहाज के रूप में पहचाने वाले राज्य पशु ऊंट का खेती व दैनिक कामकाज में कम उपयोग से अब इनका अस्तित्व खतरे में है। प्रतिवर्ष इनकी संख्या में कमी हो रही है। दैनिक नवज्योति में 16 सितंबर को इस सम्बंध में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। जिसमें बताया था कि बीते दो दशक में पूरे प्रदेश में खेती कार्य में ट्रैक्टर का प्रयोग बढ़ने, साधन में दुपहिया, चार पहिया वाहनों के अधिक उपयोग से आम आदमी के दैनिक जीवन में अब ऊंट का महत्व बहुत कम रह गया है। इससे इनकी संख्या हर वर्ष कम हो रही है। कोटा जिले की बात की जाए तो यहां पर ऊंट की संख्या घटकर केवल 1862 ही रह गई है। इसी तरह की स्थिति संभाग के अन्य जिलों की है।</p>
<p>सरकार ने ऊंटों को अन्य राज्यों में भेजने पर लगी पाबंदी 11 साल बाद हटा दी है और ऊंटों के परिवहन को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है, जिसके अनुसार ऊंट पालकों को पशु कल्याण और देखभाल से जुड़ी शर्तों का पालन करना होगा। <br /><strong>- डॉ. गिरीश सालफले,उप निदेशक पशुपालन विभाग</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Oct 2025 15:32:40 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>नए लॉकर एग्रीमेंट के आगे बैंक उपभोक्ता चकरघिन्नी</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में स्टाप एग्रीमेंट के लिए सरकार की ओर से 500 रुपए का स्टांप अनिवार्य किया हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/bank-consumer-chakarghinni-ahead-of-new-locker-agreement/article-50147"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/naye-locker-agreement-k-age-bank-upbhokta-chakkarghinni...kota-news-27-06-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। एक जनवरी से  जारी आरबीआई की बैक लॉकर लेकर जारी की गई नई  गाइड लाइंस लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। बैंक से लोगों को लॉकर के नये एग्रीमेंट को लेकर मैसजे आ रहे है। बैंक पहुंचने पर वहां कर्मचारी पांच सौ रुपए का स्टांप खरीदकर बैंक को देने के लिए कह रहे है। बैक स्टाप नये नियम व शर्ते लिखकर उपभोक्ता से साइन कराकर ले रहा है। पांच रुपए स्टांप इसके अलावा जीएसटी और कमीशन मिलाकर ये 650 रुपए में उपभोक्ता को पड़ रहा है। लॉकर संयुक्त रूप से आॅपरेटर किया जा रहा है तो सभी लॉकर उपभोक्ताओं को एग्रीमेंट पर साइन करने होंगे। इस सब में खास बात ये है कि राजस्थान में स्टाप एग्रीमेंट के लिए सरकार की ओर से 500 रुपए का स्टांप अनिवार्य किया हुआ है। जिससे लोगों की जेब ज्यादा ढीली हो रही है। जबकि दिल्ली सहित अन्य राज्यों में लॉकर एग्रीमेंट 100 रुपए के स्टाप पर हो रहा है। </p>
<p><strong>नॉमिनी को मिलेगी सुविधा </strong><br />अगर किसी कारण वश लॉकर की सुविधा लेने वाले व्यक्ति की मौत हो जाती है तो इस स्थिति में नए एग्रीमेंट के अनुसार नॉमिनी को लॉकर की सुविधा दे दी जाएगी। अगर वह इस लॉकर को आगे रखना चाहता है तो उसे बैंक से संपर्क करना होगा और अगर निकालना चाहता है तो वह इसका दावेदार होगा। </p>
<p><strong>ऐसे कर सकते हैं लॉकर समझौते को अपडेट</strong><br />अगर किसी ने अपने समझौते को रीन्यू नहीं किया है, तो इसके लिए ग्राहकों को बैंक से संपर्क करना और लॉकर समझौते को अपडेट करना होगा। साथ ही सलाह दी जाती है कि ग्राहक साल में कम से कम एक बार अपने लॉकर का उपयोग करें। इसके लिए बैंकों को लॉकर समझौते में निर्धारित प्रोटोकॉल का उपयोग करके उन्हें खोलने की अनुमति है।</p>
<p><strong>कैसे करें लॉकर एग्रीमेंट</strong><br />लॉकर एग्रीमेंट के तहत ग्राहक को लॉकर अलॉट करते समय, बैंक ग्राहक के साथ मुहर लगे कागज पर एक समझौता करता है। दोनों पक्षों द्वारा हस्ताक्षरित लॉकर समझौते की एक कॉपी ग्राहक को दी जाती है, जिसमें उसके अधिकारों और जिम्मेदारियों को के बारे में बताया जाता है। वहीं, लॉकरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी बैंको की है। आरबीआई की नोटिफिकेशन के अनुसार, यह बैंकों की जिम्मेदारी है कि वे परिसर की सुरक्षा और सुरक्षा के लिए सभी कदम उठाएं, जिसमें सुरक्षित जमा वाल्ट रखे गए हैं।</p>
<p><strong>बैंक लॉकर से जुड़े नियमों में हुए ये बदलाव</strong><br />पूर्व बैक अधिकारी पदम पाटोदी ने ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के फरवरी 2021 के एक आदेश का पालन करते हुए केंद्रीय बैंक ने लॉकर से जुड़े नियमों में कई बदलाव किए हैं। बैंक लॉकर के नए नियमों के मुताबिक बैंक और ग्राहकों को नए एग्रीमेंट में स्पष्ट तौर पर ये उल्लेख करना होगा कि वहां किस तरह का सामान रखा जा सकता है और किस तरह का नहीं। वैसे आरबीआई के नियम कहते हैं कि लॉकर में अब ग्राहक सिर्फ ज्वैलरी, जरूरी दस्तावेज और कानूनी तौर पर वैध सामान ही रख सकेंगे।  बैंक लॉकर ग्राहकों को सिर्फ उनके निजी इस्तेमाल के लिए मिलेगा। ये नॉन-ट्रांसफरेबल होंगे। यानी परिवार के व्यक्तियों को आपस में एक-दूसरे का लॉकर एक्सेस करने की सुविधा नहीं होगी। बैंक लॉकर में आर्म्स, कैश या फॉरेन करेंसी, ड्रग्स या दवाएं, कॉन्ट्रा बैंड या कोई घातक जहरीला सामान नहीं रखा जा सकेगा। नए नियम बैंक को कई तरह की जिम्मेदारियों से मुक्त कर देगा। अगर बैंक लॉकर का पासवर्ड या चाबी खो जाती है या उसका दुरुपयोग होता है तो बैंक की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। हालांकि ग्राहक के सामान की सुरक्षा की जिम्मेदारी बैंक की होगी। अगर बैंक ऐसा नहीं कर पाता है तो उसे समय-समय पर बदलने वाले इससे जुड़े नियमों के हिसाब से हर्जाना देना होगा। </p>
<p><strong>बैंक को देना होगा मुआवजा </strong><br />नए नियम के तहत अगर कोई नुकसान होता है तो यह जिम्मेदारी सीधे तौर पर बैंक की होगी और उसे मुआवजा देना होगा। अगर नुकसान बैंक कर्मचारी के धोखाधड़ी के कारण हुआ है तो लॉकर के किराए के 100 गुना तक पैसा बैंक को देना होगा। हालांकि प्राकृतिक आपदा या अन्य चीजों से लॉकर प्रभावित होता है तो बैंक मुआवजा का जिम्मेदार नहीं होगा। </p>
<p><strong>1 जनवरी से लागू हुआ नया लॉकर एग्रीमेंट</strong><br />अगर आप बैंक का लॉकर किराए पर लिया है या फिर बैंक लॉकर का इस्तेमाल करने की योजना है तो बैंक लॉकर के इस नए नियम के बारे में आपको जानकारी होनी चाहिए। आरबीआई ने 8 अगस्त 2022 को ही इसे लेकर गाइडलाइन जारी किया था।  इसके अनुसार, अगर ग्राहक के किसी भी सामान को नुकसान पहुंचता है तो यह बैंकों की जिम्मेदारी होगी।  साथ ही ग्राहकों से 31 दिसंबर2023 तक बैंक लॉकर एग्रीमेंट साइन कराना होगा।  साथ ही ग्राहकों को लॉकर के नियमों में बदलाव की जानकारी एसएमएस और अन्य माध्यम से देनी होगी।</p>
<p><strong>बैंक लॉकर में रखी है जीवनभर की कमाई तो उसे सीज होने से बचाने के लिए करनी होगी भाग दौड़</strong><br />एसबीआई बैंक में हमारा लॉकर है। बैंक से 1 जून को मैसेज आया की आपका लॉकर बंद हो जाएगा। यदि आपने नया एग्रीमेंट साइन नहीं किया तो हम लोग तुरंत बैंक गए तो वहां कर्मचारी ने बताया कि 500 रुपए का स्टांप लेकर आए और जिन जिनका लॉकर में नाम उनके साइन लगेंगे बैंक एग्रीमेंट टाइप करके देगा उस पर साइन लगेंगे। ई मित्र से स्टांप खरीदने गए तो वहां आॅन लाइन ई स्टांप लेने में एक घंटा लग गया। सर्वर धीमा चलने से समय लग गया। उसके बाद 650 रुपए देकर स्टांप खरीदकर दिया । दो दिन बाद बैंक से फोन आया साइन करने आए मै और मेरे पति बैंक पहुंचे तो बैंक कर्मचारियों ने एक और फार्म पकड़ा दिया उसको भी भरकर दिया। बैक लॉकर पड़ी जमा पूंजी बचाने के लिए पूरे परिवार की मशक्कत हो गई। <br /><strong>- सीमा पांडे, शिक्षिका </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />आरबीआई ने बैंक लॉकर के लिए नए एग्रीमेंट साइन करने की लास्ट डेट पहले 1 जनवरी  रखी थी। अब इसे बढ़ाकर 31 दिसंबर 2023 कर दिया गया है।  ये प्रोसेस चरणबद्ध तरीके से पूरी होनी है। आरबीआई ने बैंक लॉकर के 50 प्रतिशत नए एग्रीमेंट 30 जून तक, 75 प्रतिशत 30 सितंबर तक और 100 प्रतिशत 31 दिसंबर 2023 तक साइन करवाने का लक्ष्य तय किया है। नए बैंक लॉकर ग्राहकों के लिए ये रूल्स 1 जनवरी 2022 से ही लागू हो चुके हैं।  जबकि बैंकों के पुराने ग्राहकों के लिए ही नए एग्रीमेंट साइन करने की लास्ट डेट 31 दिसंबर 2023 कर दी गई है।बैंकों के साथ लॉकर रखने के लिए होने वाला नया एग्रीमेंट अब स्टांप पेपर पर साइन किया जाएगा। इसका खर्च  ग्राहकों को उठाना है। नए एग्रीमेंट को लेकर आरबीआई ने कई बदलाव किए हैं। ये लॉकर रखने वाले ग्राहकों के हितों की सुरक्षा करता है।<br /><strong>- सत्येंद्र जयसवाल, मुख्य प्रबंधक एसबीआई बैंक कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Jun 2023 16:03:11 +0530</pubDate>
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                <title>स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय ने जारी की नई गाइडलाइंस, बच्चों को रेमडेसिविर लगाने पर रोक</title>
                                    <description><![CDATA[देश में कोरोना की संभावित तीसरी लहर में बच्चों के चपेट में आने की संभावना के मद्देनजर उनके इलाज के लिए गाइडलाइंस जारी की गई है। गाइडलाइंस के मुताबिक बच्चों को रेमडेसिविर देने से सख्त मना किया गया है। साथ ही बताया गया है कि 5 साल या उससे कम उम्र के बच्चों को फेस मास्क लगाने की आवश्यकता नहीं है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A4%88-%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%A1%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%82%E0%A4%B8--%E0%A4%AC%E0%A4%9A%E0%A5%8D%E0%A4%9A%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%AE%E0%A4%A1%E0%A5%87%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B0-%E0%A4%B2%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%95/article-672"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-06/coronavirus-test.jpeg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। देश में कोरोना की संभावित तीसरी लहर में बच्चों के चपेट में आने की संभावना के मद्देनजर उनके इलाज के लिए गाइडलाइंस जारी की गई है। गाइडलाइंस के मुताबिक बच्चों को रेमडेसिविर देने से सख्त मना किया गया है। साथ ही बताया गया है कि 5 साल या उससे कम उम्र के बच्चों को फेस मास्क लगाने की आवश्यकता नहीं है। वहीं 6-11 साल के बच्चे माता-पिता की निगरानी में मास्क लगा सकते हैं, जबकि 12 साल या उससे अधिक उम्र के बच्चे बड़ों की तरह ही मास्क का इस्तेमाल कर सकते हैं। <br /> <br /> डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज यानी स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय ने 18 साल से कम उम्र के बच्चों के इलाज के लिए डिटेल गाइडलाइंस जारी किए हैं। गाइडलाइंस में कोरोना के हल्के लक्षण और माइल्ड लक्षण वाले बच्चों की कैसे देखभाल करनी है और उनके इलाज में क्या सावधानी बरतनी चाहिए, इसके बारे में विस्तार से बताया गया है। माइल्ड लक्षणों में कमरे में ऑक्सीजन सैचुरेशन 94 फीसदी या इससे ज्यादा हो सकती है। गले में दिक्कत, सांस लेने में परेशानी व खांसने में परेशानी शामिल है। <br /> <br /> <strong>इलाज के लिए निर्देश</strong><br /> -बुखार में हर 4 से 6 घंटे के बीच में एक पैरासिटामोल की गोली देनी है।<br /> -खांसी के लिए गर्म पानी से गरारे करने हैं। <br /> -आइसोलेशन में गए बच्चों से उनके माता-पिता को सकारात्मक बात करने की सलाह दी गई है।<br /> -ऑक्सीजन सैचुरेशन को बच्चों में समझने के लिए 6 मिनट के वॉक टेस्ट कराने की सलाह दी गई है।<br /> <br /> <strong>स्टेरॉयड पर नियंत्रण</strong><br /> गाइडलाइंस के मुताबिक एसिंप्टोमैटिक और माइल्ड के मामलों में बच्चों पर स्टेरॉयल का इस्तेमाल न करने की सलाह दी गई है। स्टेरॉयड केवल मॉडरेट, सीवियर और क्रिटिकल स्थिति के बच्चों को ही सख्त निगरानी में दिया जाना चाहिए। साथ ही ध्यान रखना चाहिए कि उचित समय तक ही स्टेरॉयड दें। डीजीएचएस ने बच्चों में एसिंप्टोमेटिक यानी बिना किसी लक्षण वाले और माइल्ड लक्षण वाले मामलों में स्टेरॉयड के इस्तेमाल को भी बहुत हानिकारक बताया है। डीजीएचएस ने अस्पताल में भर्ती गंभीर और मध्यम संक्रमण से पीड़ित बच्चों के इलाज के लिए भी स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की निगरानी में ही स्टेरॉयड का यूज करने के लिए कहा है। <br /> <br /> <strong>एचआरसीटी को कम प्रोत्साहित करें</strong><br /> गाइडलाइंस में हाई रेजोल्यूशन सीटी (एचआरसीटी) स्कैन के तर्कसंगत उपयोग की सलाह देते हुए डीजीएचएस ने कहा है कि सीने के स्कैन से इलाज में बहुत कम मदद मिलती है, ऐसे में इसे कम प्रोत्साहित करना चाहिए। वहीं डीजीएचएस ने कोविड-19 को एक वायरल संक्रमण बताते हुए कहा है कि हल्की बीमारी के मामले में एंटीमाइक्रोबियल्स से इसकी रोकथाम या इलाज में कोई मदद नहीं मिलती है, इसलिए हल्के संक्रमण वाले बच्चे या बड़े, सभी को कोई दवा लेने के बजाय मास्क लगाने, हाथ धोने, सामाजिक दूरी बनाने जैसे उचित को कोविड प्रोटोकॉल का को फॉलो करना चाहिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Jun 2021 16:33:57 +0530</pubDate>
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