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                <title>shiv sena - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>शिवाजी महाराज पर पुस्तक को लेकर शिवसेना (शिंदे) विधायक संजय गायकवाड़ ने प्रकाशक को दी जान से मारने की धमकी</title>
                                    <description><![CDATA[शिवसेना (शिंदे गुट) विधायक संजय गायकवाड़ एक बार फिर विवादों में हैं। उन्होंने कोल्हापुर के प्रकाशक प्रशांत आंबी को 'शिवाजी कौन थे?' पुस्तक के प्रकाशन पर कथित तौर पर जान से मारने की धमकी दी। ऑडियो क्लिप वायरल होने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है, जबकि प्रकाशक ने आरोपों को सिरे से खारिज किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/shiv-shiv-shinde-mla-sanjay-gaikwad-threatens-to-kill-publisher/article-151427"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/संजय-गायकवाड़.png" alt=""></a><br /><p>कोल्हापुर। अपने विवादित बयानों के लिए अक्सर चर्चा में रहने वाले शिवसेना (शिंदे गुट) के विधायक संजय गायकवाड़ ने गुरुवार को महाराष्ट्र के कोल्हापुर के किताबों के प्रकाशक प्रशांत आंबी को जान से मारने की धमकी दी। विधायक का आरोप है कि आंबी ने एक पुस्तक प्रकाशित की थी, जिसमें छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान किया गया है। इस विवाद की जड़ में 'शिवाजी कौन थे?' नामक पुस्तक है, जिसे दिवंगत गोविंद पानसरे ने लिखा और इसका प्रकाशन दशकों पहले हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार, गायकवाड़ ने हाल ही में पुस्तक के शीर्षक पर आपत्ति जतायी और आंबी को फोन कर कथित तौर पर अपशब्द कहे। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक ऑडियो क्लिप में गायकवाड़ को अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते और धमकी देते सुना जा सकता है। उन्होंने लेखक गोविंद पानसरे के बारे में भी आपत्तिजनक टिप्पणी की।</p>
<p>जवाब में प्रकाशक आंबी ने स्पष्ट किया कि वह केवल पुस्तक के प्रकाशक हैं, लेखक नहीं। उन्होंने बताया कि यह पुस्तक मूल रूप से 1988 में प्रकाशित हुई थी और इसका उद्देश्य शिवाजी महाराज का अपमान करना कतई नहीं है। आंबी ने विधायक से आग्रह किया कि आरोप लगाने से पहले वह पूरी पुस्तक पढ़ लें। गायकवाड़ ने हालांकि कथित तौर पर अपनी धमकियां जारी रखीं, जिसका श्री आंबी ने भी दृढ़ता से जवाब दिया। यह पहली बार नहीं है जब शिवसेना नेता (शिंदे गुट) नेता श्री गायकवाड़ विवादों में घिरे हैं। इससे पहले उन पर विधायक निवास के एक कैंटीन कर्मचारी के साथ भोजन की गुणवत्ता को लेकर मारपीट करने का आरोप लगा था। पार्टी नेतृत्व के हस्तक्षेप के बावजूद, उनके आचरण पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। 'विश्व पुस्तक दिवस' के अवसर पर सामने आयी इस घटना ने राज्य के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 15:32:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>महाराष्ट्र में निकाय चुनाव के लिए मतदान जारी: मोहन भागव, सचिन तेंदुलकर, शाइना एनसी सहित कई प्रमुख हस्तियों ने डाला वोट</title>
                                    <description><![CDATA[महाराष्ट्र में 29 नगर निकायों के लिए मतदान जारी, मोहन भागवत, शाइना एनसी सहित कई दिग्गजों ने वोट डाला।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/voting-continues-for-civic-elections-in-maharashtra-many-prominent-personalities/article-139624"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/bmc-election-2026.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। महाराष्ट्र में लंबे अंतराल के बाद आज 29 नगर निकायों के चुनाव के लिए आज मतदान हो रहा है और अब तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत और आरएसएस नेता सुरेश भैयाजी तथा शिवसेना नेता शाइना एनसी समेत कई प्रमुख हस्तियों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर दिया है। </p>
<p>मोहन भागवत ने मतदान शुरू होते ही नागपुर के महाल इलाके के भाउजी दपतारी एनएमसी स्कूल में बने मतदान केंद्र में वोट डाला। वहीं सुरेश भैयाजी ने नागपुर में मतदान करने के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए कहा, हर नागरिक को अपने मताधिकार का इस्तेमाल करना चाहिए। वे जिसे चाहेंगे उन्हें वोट करेंगे, ये उनकी इच्छा पर निर्भर है, लेकिन जो लोग चुने जाएंगे, ये उनका कर्तव्य है कि वे लोगों की उम्मीदों को पूरा करें।</p>
<p>शाइना एनसी ने बीएमसी चुनाव के लिए वोट डालने के बाद संवाददाताओं से कहा,'मां मुंबा देवी और श्री सिद्धिविनायक की कृपा से मतदान शुरू हो गया है। मैं सभी मुंबईकर से अपील करती हूं कि वे मतदान जरूर करें। लोकतंत्र की यही खूबसूरती है कि ये आपकी आवाज को मजबूत करती है। उन्होंने कहा कि विपक्ष अपनी हार के बहाने ढूंढ रहा है। मुंबई का मेयर मराठी और हिंदू होगा। फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार सहित कई अन्य फिल्मी हस्तियों ने भी अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर लिया है।  </p>
<p>बृहन्मुंबई महानगरपालिका में प्रत्येक वार्ड से केवल एक सदस्य चुना जाना है, इसलिए यहां हर मतदाता को सिर्फ एक वोट डालना होगा। वहीं, राज्य की अन्य 28 नगरपालिकाओं में बहु-सदस्यीय वार्ड प्रणाली लागू है। इन नगर निकायों में प्रत्येक वार्ड में तीन से पांच सीटें हैं, जिसके कारण मतदाताओं को तीन से पांच वोट डालने होंगे। इस व्यवस्था के चलते मतदान प्रक्रिया को लेकर मतदाताओं को पहले से जागरूक किया गया है, ताकि किसी तरह की भ्रम की स्थिति न बने और मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।</p>
<p>मतदान की प्रक्रिया आज सुबह 7:30 बजे शुरू हुई और शाम 5:30 बजे तक मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर पाएंगे। निकाय चुनाव के लिए मुंबई में कुल 10,231 मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं और 64,375 अधिकारियों और कर्मचारियों को ड्यूटी पर तैनात किया गया है। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर, नवी मुंबई, वसई-विरार, कल्याण-डोंबिवली, कोल्हापुर, नागपुर, मुंबई, सोलापुर, अमरावती, अकोला, नासिक, पिपरी-चिंचवाड़, पुणे, उल्हासनगर, ठाणे, चंद्रपुर, परभणी, मीरा-भायंदर, नांदेड़-वाघाला, पनवेल, भिवंडी-निजामपुर, लातूर, मालेगांव, सांगली-मिराज-कुपवाड, जलगांव, अहिल्यानगर, धुले, जालना और इचलकरंजी में नगर निकाय चुनाव के लिए मतदान हो रहा है।  </p>
<p>बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के चुनाव में 227 सीटों के लिए करीब 1,700 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं। देश के सबसे अमीर नगर निकाय पर कब्जे की लड़ाई में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)  के नेतृत्व वाली महायुति और उद्धव-राज ठाकरे के गठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला माना जा रहा है। कुल 29 नगर निकाय के 893 वार्डों की 2,869 सीटों के लिए होने वाले मतदान में 3.48 करोड़ मतदाता 15,931 उम्मीदवारों के राजनीतिक भविष्य का फैसला करेंगे। अकेले बीएमसी की 227 सीटों पर 1,700 प्रत्याशी मैदान में हैं और 74 हजार करोड़ रुपये के वार्षिक बजट वाली इस संस्था पर सभी दलों की नजर है। शिवसेना विभाजन के बाद यह पहला बीएमसी चुनाव है, जिससे इसका राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है। प्रचार में आरोप-प्रत्यारोप, गठबंधन टूट-जुड़ और लोकलुभावन वादों ने माहौल को और दिलचस्प बना दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 15 Jan 2026 12:14:31 +0530</pubDate>
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                <title>बीएमसी चुनाव में अठावले ने बढ़ाई महायुति की टेंशन, मुंबई में गठबंधन तोड़ने का ऐलान</title>
                                    <description><![CDATA[सीट बंटवारे से नाराज केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने मुंबई में भाजपा-शिवसेना गठबंधन तोड़ दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने आरपीआई को नजरअंदाज किया और देर रात मात्र 7 सीटों का प्रस्ताव दिया। अठावले ने अब मुंबई की 38 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/athawale-increases-mahayutis-tension-in-bmc-elections-announces-break-of/article-137857"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/ramdas-athawale.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव और बृहन्मुंबई नगर निगम चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है। इस बीच केंद्रीय मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के प्रमुख रामदास अठावले ने सीट को लेकर अंसतोष जाहिर किया है। उन्होंने कहा है कि उन्हें कई शहरों में सीटें नहीं मिली हैं। रामदास अठावले ने कहा, हमें नागपुर, अमरावती और औरंगाबाद जैसे कई शहरों में सीटें नहीं दी गईं। नालासोपारा में हमें एक भी सीट नहीं दी गई। </p>
<p>आरपीआई को भिवंडी में एक सीट मिली। कल्याण-डोंबिवली में एक भी सीट नहीं दी गई। इसलिए, बीजेपी ने कई जगहों पर आरपीआई को नजरअंदाज करने की कोशिश की है। बीजेपी अपनी पार्टी का विस्तार करना चाहती है, लेकिन उसे हमारी पार्टी के बारे में भी सोचना चाहिए। इसीलिए रिपब्लिकन पार्टी के कार्यकतार्ओं में बहुत गुस्सा है और बीजेपी नेताओं को इस पर ध्यान देना चाहिए। हम 38 जगहों पर मिलजुलकर चुनाव लड़ेंगे और मुंबई में हमने बीजेपी और शिवसेना के साथ गठबंधन तोड़ दिया है। हम मुंबई में अपने दम पर चुनाव लड़ रहे हैं।</p>
<p><strong>क्या है समीकरण?</strong></p>
<p>इस चुनाव में भाजपा 137 और शिवसेना 90 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेगी। 30 दिसंबर को नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि से एक दिन पहले सोमवार को हुई गहन वार्ता के बाद सीट बंटवारे पर समझौता हुआ। बीएमसी में कुल 227 सीटें हैं। महायुति की एक अन्य घटक अजीत पवार के नेतृत्व वाली राकांपा अलग रहकर चुनाव लड़ रही है। राकांपा ने अब तक बीएमसी चुनाव के लिए 64 उम्मीदवारों की घोषणा की है। मुंबई समेत महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों के चुनाव 15 जनवरी को होंगे और मतगणना अगले दिन शुरू होगी। </p>
<p>2017 में हुए बीएमसी चुनाव में भाजपा ने शिवसेना के गढ़ में शानदार प्रदर्शन करते हुए 82 सीटें जीतीं, जो कि अविभाजित शिवसेना से सिर्फ दो सीटें कम थीं। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले की पार्टी आरपीआई ने भाजपा और शिवसेना से ठंडी प्रतिक्रिया का हवाला देते हुए नवी मुंबई नगर निगम चुनाव अकेले लड़ने की धमकी दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 Dec 2025 11:41:24 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>भाजपा-शिवसेना शिंदे ने दूर किए मतभेद, नगर निकाय चुनावों में एकजुट होकर करेंगे मुकाबला </title>
                                    <description><![CDATA[महाराष्ट्र नगर निकाय चुनावों को लेकर भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने विवाद खत्म कर गठबंधन में चुनाव लड़ने का निर्णय किया है। नागपुर बैठक में नेताओं ने आपसी मतभेद दूर कर संयुक्त रणनीति बनाने पर सहमति जताई। जल्द ही सीट बंटवारे पर चर्चा होगी और महायुति को एकजुट रखने पर जोर दिया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/bjp-shiv-sena-shinde-resolve-differences-will-fight-unitedly-in-municipal/article-135447"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/maharashtra-elections.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। महाराष्ट्र नगर निकाय चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने अपना विवाद खत्म कर दिया है। दोनों ने आखिरकार चुनाव में एक साथ उतरने का फैसला कर लिया है।  पार्टी सूत्रों के मुताबिक मुंबई, ठाणे और अन्य नगर निगमों में दोनों दल एक गठबंधन के तौर पर चुनाव लड़ेंगे। </p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की सोमवार देर रात हुई बैठक में निर्णय किया गया कि भाजपा और शिवसेना गठबंधन के तौर पर ही निकाय चुनावों में उतरेंगी। यह बैठक नागपुर में हुई। जहां संघ का मुख्यालय है। कछु विश्लेषकों का कहना है कि इस समझौते में संघ की भूमिका भी हो सकती है। राज्य चुनाव आयोग ने नगर निगम चुनावों की तारीखों की घोषणा नहीं की है, लेकिन दोनों दलों ने चुनावी रणनीति तैयार करना शुरू कर दिया है।</p>
<p><strong>चंद्रशेखर बावनकुले और रविंद्र चव्हाण भी मौजूद: </strong></p>
<p>बैठक में भाजपा नेता चंद्रशेखर बावनकुले और रविंद्र चव्हाण भी मौजूद रहे। सूत्रों ने बताया कि दोनों दलों ने यह सहमति बनाई कि वे एक-दूसरे के नेताओं को नहीं तोड़ेंगे और न ही दल-बदल को बढ़ावा देंगे। हाल के महीनों में महायुति घटक दलों के बीच खींचतान बढ़ गई थी, क्योंकि स्थानीय चुनावों के पहले चरण में भाजपा और शिवसेना कई जगह आमने-सामने आ गई थीं। कई सीटों पर चुनाव प्रचार भी तीखा हो गया था, जिसे लेकर शिंदे ने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को शिकायत की थी।</p>
<p><strong>सीट बंटवारे पर चर्चा शीघ्र</strong></p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार सीट बंटवारे को लेकर चर्चा अगले दो-तीन दिनों में शुरू होगी। दोनों दल यह सुनिश्चित करने की कोशिश में हैं कि पिछले चुनावों में जो गलतियां हुईं, वे इस बार न दोहराई जाएं। दोनों ही दलों का जोर खास तौर पर मुंबई और ठाणे पर रहेगा, जहां चुनाव बेहद प्रतिष्ठा का मामला माने जाते हैं। शिवसेना के लिए यह क्षेत्रों में पकड़ बनाए रखना जरूरी है, जबकि भाजपा महापौर पदों पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।</p>
<p><strong>भाजपा, शिवसेना और एनसीपी को एकजुट होकर लड़ना चाहिए</strong></p>
<p>एकनाथ शिंदे ने सोमवार को अपने विधायकों और मंत्रियों के साथ अलग बैठक की। उन्होंने कहा कि महायुति में शामिल भाजपा, शिवसेना और एनसीपी को एकजुट होकर लड़ना चाहिए। उन्होंने नेताओं को निर्देश दिया कि वे कोई ऐसा बयान न दें या कदम न उठाएं जिससे गठबंधन में विवाद बढ़े। शिंदे ने यह भी कहा कि जिला परिषद और नगर निगम चुनावों में महायुति को मजबूत तरीके से उतरना होगा ताकि विपक्ष को कोई मौका न मिले।</p>
<p>पहले चरण के स्थानीय निकाय चुनावों में महायुति के सहयोगी दल कई जगह सीधे टकरा गए थे। इससे कार्यकतार्ओं में नाराजगी बढ़ी और चुनावी माहौल बिगड़ने लगा। अब जब दोनों दलों ने औपचारिक तौर पर साथ लड़ने का फैसला किया है, तो चुनौती यह है कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को एकजुट कैसे रखा जाए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Dec 2025 12:28:24 +0530</pubDate>
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                <title>शरद पवार का बड़ा दावा: भाजपा से शिंदे गुट की नाराजगी जग जाहिर, जल्द ही एकनाथ शिंद...</title>
                                    <description><![CDATA[महाराष्ट्र सरकार में खींचतान के बीच एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने दावा किया कि जल्द ही बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा को अब डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की आवश्यकता नहीं रही और मंत्रियों में भी उनके प्रति सम्मान नहीं है। मंगलवार की कैबिनेट बैठक में शिवसेना के मंत्री शामिल नहीं हुए, जिससे महायुति में तनाव बढ़ गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/sharad-pawars-big-claim-shinde-groups-displeasure-with-bjp-is/article-132977"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/mahara.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। महाराष्ट्र सरकार में खीचतान अब जग जाहिर हो चुकी है और इसी बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शरदचंद्र पवार ने आज महाराष्ट्र सीएम देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना के मंत्रियों के बीच खीचतान को लेकर दावा किया है कि, बहुत जल्द महाराष्ट्र सरकार में बहुत कुछ बदलने वाला है और लगता है कि, भाजपा को अब डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की आवश्यकता नहीं है। इसके आगे पवार ने कहा कि, महाराष्ट्र सीएम और उनके मंत्रियों को अब डिप्टी सीएम शिंदे के प्रति कोई सम्मान नहीं है।</p>
<p>इसके आगे शरद पवार ने बयान देते हुए कहा कि, यदि एकनाथ शिंदे में थोड़ा भी आत्मसम्मान बचा है तो उनको अब भाजपा गठबंधन का साथ छोड़ देना चाहिए। यदि वो सही समय पर इस दलदल से बाहर नहीं निकले तो उनको जल्द ही पछताना पड़ेगा।</p>
<p><strong>आखिर क्यों शिवसेना के मंत्रियों ने कैबिनेट की बैठक से बनाई थी दूरी</strong><br /> <br />बता दें कि, महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति में भाजपा, शिवसेना और एनसीपी की पार्टियां शामिल हैं। मंगलवार को हुई बैठक में एकनाथ शिंदे और उनकी पार्टी को छोड़कर बाकी कोई भी पार्टी मंत्रिमंडल की इस बैठक का हिस्सा नहीं बने। सूत्रों के अनुसार, भाजपा ने शिवसेना के कई मंत्रियों को अपनी पार्टी में शामिल कर लिया है, जिससे महाराष्ट्र में होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव से पहले ही महायुति गठबंधन में बेचैनी बढ़ गई है। इस मामले में मीडिया से रूबरू होते हुए डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने बताया कि, महायुति ने ये तय किया है कि, सहयोगी दल एक दूसरे के नेताओं की पार्टी में शामिल होने से बचेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Nov 2025 16:52:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>बीजेपी और शिंदे गुट में बढ़ा तनाव, फडणवीस की शिवसेना को नसीहत, गठबंधन धर्म का पालन करें</title>
                                    <description><![CDATA[महाराष्ट्र कैबिनेट बैठक में शिंदे गुट के कई मंत्री नदारद रहे, जिससे बायकॉट की अटकलें तेज हुईं। बैठक बाद शिवसेना मंत्रियों ने फडणवीस से नाराजगी जताई। फडणवीस ने पोचिंग विवाद पर दोनों सहयोगियों को अनुशासन की चेतावनी दी, जबकि बीजेपी ने गठबंधन टूटने की अटकलों को खारिज किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/tension-increases-between-bjp-and-shinde-faction-fadnavis-advises-shiv/article-132914"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/11-(700-x-400-px)-(7).png" alt=""></a><br /><p>मुम्बई। महाराष्ट्र की राजनीति में अचानक तापमान बढ़ गया, जब कैबिनेट बैठक में एकनाथ शिंदे नेतृत्व वाली शिवसेना के कई मंत्री गैरमौजूद रहे। इस गैरहाजिरी ने तुरंत बायकॉट की अटकलों को हवा दे दी। हालांकि डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे बैठक में मौजूद थे, लेकिन बैठक के बाद शिवसेना मंत्रियों ने सीएम देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर अपनी नाराजगी साफ-साफ जाहिर की। उन्होंने शिवसेना और शिंदे से यह भी कहा कि सभी को गठबंधन के नियमों का पालन करना चाहिए।</p>
<p>शिवसेना नेताओं ने आरोप लगाया कि आगामी स्थानीय निकाय चुनाव से पहले इखढ उनके डोंबिवली क्षेत्र के स्थानीय नेताओं को पोच कर रही है। यह बात शिंदे गुट को बेहद खल गई और उन्होंने इसे गठबंधन की आत्मा के खिलाफ बताया। लेकिन सूत्रों के मुताबिक, फडणवीस ने बैठक में बेहद सख्त लहजा अपनाया। उन्होंने साफ कहा कि राजनीतिक सेंध लगाने की शुरूआत शिवसेना ने ही की थी, उल्हासनगर में आपने किया था और अब उसी का जवाब मिल रहा है। उन्होंने दोनों सहयोगी दलों को चेतावनी दी कि आगे से कोई भी पोचिंग नहीं करेगा। उनके शब्दों में, दोनों दलों को अनुशासन का पालन करना होगा।</p>
<p><strong>बीजेपी ने बॉयकॉट की अफवाहों को खारिज किया</strong></p>
<p>इस बीच बीजेपी नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने बायकॉट की अफवाहों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि कई मंत्री स्थानीय चुनाव प्रचार के लिए गए थे, इसलिए बीजेपी के भी कुछ मंत्री बैठक में नहीं आए। उन्होंने गठबंधन टूटने की बात को अफवाह बताते हुए कहा कि टिकट न मिलने पर कई स्थानीय नेता इधर-उधर जा रहे हैं, और इस पर पार्टी कार्रवाई करेगी।</p>
<p><strong>कैबिनेट मीटिंग जनता के काम के लिए, नाराजगी के लिए नहीं</strong></p>
<p>उधर विपक्ष ने मौके का पूरा फायदा उठाया. आदित्य ठाकरे ने  पर शिंदे गुट पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कैबिनेट मीटिंग जनता के काम के लिए होती है, व्यक्तिगत नाराजगी के लिए नहीं. यह महाराष्ट्र का अपमान है। उन्होंने शिंदे गुट को मिंधे टोली कहते हुए कहा कि सीटों के बंटवारे और पोचिंग को लेकर इनका असली चेहरा सामने आ गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकल बॉडी चुनावों के करीब आते ही यह तनाव और बढ़ सकता है। हालांकि बीजेपी और शिंदे गुट सार्वजनिक रूप से गठबंधन मजबूत कह रहे हैं, लेकिन अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आ चुकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Nov 2025 12:23:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>सतरंगी सियासत</title>
                                    <description><![CDATA[ जब यह तय हो गया कि कांग्रेसनीत आईएनडीआइए के घटक दल केन्द्र में सत्ता की दावेदारी फिलहाल नहीं करेंगे। और सही समय का इंतजार करेंगे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/india-gate/colorful-politics/article-81018"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/india-gate031.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>असर...</strong><br />आम चुनाव- 2024 के परिणाम का असर एक अलग तरीके का भी। जिन क्षेत्रीय दलों की कभी अपने प्रदेशों में कभी तूती बोलती थी। इस बार उनका एक भी सांसद लोकसभा में नहीं होगा। इसमें ओडिशा की बीजद, तेलंगाना की बीआरएस, तमिलनाडु की एआईएडीएमके और जम्मू-कश्मीर की पीडीपी इस बार गायब हो गई। कभी पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कहा था। अनुच्छेद- 370 खत्म किया। तो घाटी में कोई तिरंगा उठाने वाला नहीं मिलेगा। लेकिन आज उनकी पार्टी को ढोने वाला कोई नहीं बचा। हां, इस बार खालिस्तानी अमृतपाल सिंह पंजाब की खडूर साहिब से सांसद चुना गया। तो फरीदकोट से सरबजीत सिंह भी जीत गया। जो पूर्व पीएम इंदिरा गांधी की हत्या करने वाले बेअंत सिंह का बेटा। और एक अलगाववादी नेता राशिद इंजीनियर भी। जो जम्मू-कश्मीर की बारामूला सीट से सफल रहा। राशिद पर टेरर फंडिंग का आरोप और आजकल तिहाड़ जेल में।</p>
<p><strong>दक्षिण में एंट्री...</strong><br />केन्द्र में लगातार तीसरी बार सत्तारूढ़ हुई भाजपा केरल में एक, आंध्रप्रदेश में तीन, तेलंगाना में आठ और कर्नाटक में 17 सीटें जीतकर दक्षिण में प्रभावशानी मौजूदगी दर्ज करवागी। हां, तमिलनाडु में कोई सीट नहीं जीत सकी। लेकिन अपना मत 16 फीसदी तक बढ़ा लिया। जो सत्ताधारी डीएमके लिए के लिए 2026 में होने वाले विधानसभा चुनाव में परेशानी का सबब होगा। अब कहा जा रहा। भाजपा ने यदि एआईएडीएमके के ओपीएस गुट के साथ ही ईपीएस गुट से मिलकर चुनाव लड़ा होता। तो शायद तस्वीर आंध्रप्रदेश जैसी बन सकती थी। खैर, अब जो होना था। वह हो गया। लेकिन भाजपा की दक्षिण में मानी जानी वाली कमजोर कड़ी अब लगातार मजबूत हो रही। क्योंकि तेलंगाना में वह प्रमुख विपक्षी दल बनने की राह पर। तो आंध्रप्रदेश में अब सत्ता में भागीदार भी। वहीं, केरल में अब भाजपा के तीसरी ताकत होकर उभरने की उम्मीद।  </p>
<p><strong>गतिरोध का इंतजाम</strong><br />जब यह तय हो गया कि कांग्रेसनीत आईएनडीआइए के घटक दल केन्द्र में सत्ता की दावेदारी फिलहाल नहीं करेंगे। और सही समय का इंतजार करेंगे। तो राहुल गांधी एवं उनके रणनीतिकार मुंबई शेयर बाजार में हुए उतार-चढाव का मामले ले आए। मतलब जैसे ही 18 वीं लेकसभा की कार्यवाही शुरू होगी। विपक्ष का हंगामे के लिए मुद्दा तैयार। यानी कांग्रेस ने शेयर बाजार के बहाने संसद में गतिरोध का इंतजाम कर लिया। सो, 18वीं लोकसभा का पहला ही सत्र हंगामेदार होने के आसार। इससे पहले पेगासस, हिंडनबर्ग रिपोर्ट और मणिपुर हिंसा जैसे मामलों में विपक्ष जेपीसी की मांग कर चुका। सो, इस मामले में भी जेपीसी से जांच की मांग। वैसे सरकार मानेगी नहीं। लेकिन पीएम मोदी को यह अहसास करवाने की तरकीब कि इस बार विपक्ष मजबूत। और उन्हें पूरे समय घेरे रहेगा। हालांकि इसके लिए पीएम मोदी और उनके साथी तैयार होंगे ही।</p>
<p><strong>पेंच बाकी</strong><br />भले ही आइएनडीआए में सब कुछ सामान्य लग रहा। लेकिन पेंच अभी बाकी। नेता प्रतिपक्ष और संयोजक की जिम्मेदारियां कांग्रेस के पास रहने वाली। लेकिन शरद पवार जैसे नेता इतनी आसानी से कहां मानने वाले? सपा, टीएमसी, डीएमके, शिवसेना-यूबीटी गठबंधन में आखिर कुछ तो चाहेंगी। इस बार गैर भाजपा और गैर कांग्रेस दलों के करीब 200 सांसद। और इनमें से कई सांसद ऐसे। जो कभी भाजपा और कांग्रेस के साथ गठबंधन में रह चुके। सो, वह इनकी कार्यप्रणाली से परिचित। यह भी सही कि ज्यादातर दल या नेता वहीं जाते। जहां ज्यादा राजनीतिक लाभ हो। ऐसे में आशंका। क्या भाजपा और कांग्रेस इनको पांच साल बांधीे रख पाएंगी? इसीलिए मल्लिकार्जुन खडगे सही समय पर सही कदम उठाने की बात कह गए। वहीं, भाजपा ने भी एनडीए की क्षमता 293 से 300 से ज्यादा संख्या यूं ही नहीं कर ली। मतलब घर को भी साधना होगा।</p>
<p><strong>उलझन बाकी...</strong><br />उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र एवं पश्चिम बंगाल ऐसे राज्य। जहां क्षेत्रीय दल मजबूत। सो, आइएनडीआइए में अब एक नई उलझन! कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों को एक दूसरे का साथ तो चाहिए। लेकिन इतना भी नहीं कि कांग्रेस क्षेत्रीय दलों से हक मांगने लगे। क्योंकि महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव। जबकि पश्चिम बंगाल में दो साल बाद। ऐसे में क्षत्रप कतई नहीं चाहेंगे कि कांग्रेस उनसे अधिक सीटों की मांग करे। सो, फिलहाल आइएनडीआइए गठबंधन के घटक दल खुश हों। लेकिन कांग्रेस की बढती राजनीतिक जमीन। उनके लिए भी खतरा पैदा कर रही। सत्ता चलाना और उसमें बने रहना। कांग्रेस को खूब आता। महाराष्ट्र में अब कांग्रेस ज्यादा हिस्सा मांगेगी। जो शरद पवार और उद्धव ठाकरे के लिए मुश्किल का सबब। जबकि यूपी में तो मानो घमासान की संभावना रहेगी। कांग्रेस, सपा से ज्यादा सीटें चाहेगी। जबकि सपा इससे बचेगी। तो कैसे बात आगे बढे़गी? यह देखना दिलचस्प!</p>
<p><strong>नई सरकार...</strong><br />नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में एनडीए गठबंधन सरकार का शपथग्रहण समारोह हो चुका। अब बारी काम करने की। इस बार पीएम मोदी क्षत्रपों पर निर्भर। उन पर दबाव होने का अंदेशा जताया जा रहा। क्योंकि मोदीजी ने कभी गठबंधन सरकार नहीं चलाई। जबकि भाजपा की ओर से लगातार कहा जा रहा। गठबंधन सरकार भी आसानी से चलेगी और मोदीजी भी उसी गति एवं दिशा से काम करेंगे। जैसा पिछले दस साल से करते आ रहे। लेकिन जानकार विश्वास नहीं कर पा रहे। तो सबसे पहली परीक्षा मंत्रिपरिषद का गठन। जिसमें जो नाम शामिल हुए। वह अपने आप में संकेत और संदेश। हां, सरकार की विदेश नीति में बहुत बदलाव नहीं आएगा। ऐसे ही रक्षा क्षेत्र एवं आंतरिक सुरक्षा की नीति भी वैसे ही चलेगी। फिर यह भी कोई नहीं चाहेगा कि देश के ढांचागत विस्तार ने जो गति पकड़ी हुई। उसमें कोई बाधा उत्पन्न हो।</p>
<p><strong>अब आगे...</strong><br />अगले छह माह नरेन्द्र मोदी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार के लिए महत्वपूर्ण। जिसमें खुद मोदीजी सहज रहेंगे या उनकी चुनौतियां बढ़ेंगी। यह तय हो जाएगा। असल में, इसी साल अक्टूबर-नवंबर में महाराष्ट्र, झारखंड एवं हरियाणा जैसे राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले। इसी के साथ केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में भी विधानसभा चुनाव की संभावनाएं। चुनाव आयोग ने इसकी तैयारियां भी शुरू कर दीं। ऐसे में, खासकर महाराष्ट्र एवं हरियाणा में भाजपा सफल रही। तो पीएम मोदी मजबूत होंगे। नहीं तो माना जा रहा। सहयोगी दलों के उन पर हावी होने की संभावना। फिर तो केन्द्र की सरकार भी पूरे रूआब से चला पाना मुश्किल होगा। वहीं, एक बार निचले सदन में बहुमत साबित कर देने के बाद अविश्वास प्रस्ताव लाने की मियाद भी पूरी हो जाती। ऐसे में, इस साल के अंत तक मोदी सरकार की मजबूती कितनी? यह भी तय हो जाएगा!    </p>
<p><strong>दिल्ली डेस्क</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>इंडिया गेट</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Jun 2024 12:20:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>शिंदे और अजीत पवार की बढ़ती हैसियत से भाजपा कार्यकर्ता हताश </title>
                                    <description><![CDATA[ शिवसेना के साथ गठबंधन में भाजपा की जीत का स्ट्राइक रेट हमेशा शिवसेना से बेहतर रहता आया था। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा का स्ट्राइक रेट शिवसेना (यूबीटी) शिवसेना राकांपा, और कांग्रेस से भी खराब रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/bjp-workers-frustrated-with-the-rising-status-of-shinde-and/article-80716"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/bjpp.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। महाराष्ट्र में एनडीए की हार का बड़ा कारण राज्य में बढ़ा असंतोष माना जा रहा है। लोकसभा चुनावों में महाराष्ट्र में भाजपानीत गठबंधन को अपेक्षित सफलता न मिल पाने में कई अन्य कारणों के अलावा सांगठनिक असंतोष ने भी बड़ी भूमिका निभाई है। यदि समय रहते भाजपा ये असंतोष दूर न कर सकी तो कुछ ही महीनों बाद होने जा रहे विधानसभा चुनावों में उसे और तगड़ा झटका लग सकता है।</p>
<p>भारतीय जनता पार्टी अपनी स्थापना के बाद से ही महाराष्ट्र में सांगठनिक दृष्टि से एक मजबूत और जुझारू पार्टी बन कर उभरी। संयोग से जनसंघ काल के बाद भाजपा की स्थापना भी मुंबई में ही हुई थी। स्थापना के बाद से ही भाजपा को राज्य में प्रमोद महाजन एवं गोपीनाथ मुंडे जैसे दो युवा चेहरे मिले। महाजन की पहल पर ही यहां के उभरते क्षेत्रीय दल शिवसेना से गठबंधन की शुरुआत हुई। दोनों दलों ने मिलकर यहां की मजबूत जनाधार वाली कांग्रेस से टक्कर लेकर 1995 में पहली बार अपनी सरकार बनाई।</p>
<p><strong>मराठा आंदोलन का असर<br /></strong>आज तो भाजपा एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री एवं अजीत पवार को उपमुख्यमंत्री बनाकर भी मराठा आरक्षण आंदोलन से उपजी मराठों की नाराजगी दूर नहीं कर सकी। जबकि ये दोनों प्रमुख मराठा चेहरों में से एक हैं। उलटे इन दोनों को इनके वृहद कुनबे के साथ अपने साथ लाने से भाजपा के ही विधायकों में असंतोष पैदा हुआ है। क्योंकि इन दोनों के साथ आने से मंत्रिमंडल विस्तार में भाजपा विधायकों का ही हक मारा गया है।</p>
<p><strong>विधायकों से नीचे के स्तर पर भी असंतोष पनप रहा<br /></strong> विधायकों से नीचे के स्तर पर भी असंतोष पनप रहा है। महाराष्ट्र की 27 महानगरपालिकाओं एवं 300 से अधिक नगरपालिकाओं का कार्यकाल काफी पहले समाप्त हो चुका है। इन स्थानीय निकायों के चुनाव लंबित हैं। युवा नेताओं की नई पौध स्थानीय निकायों से ही तैयार होती है। </p>
<p>पिछले दो साल से ये चुनाव भले कुछ न्यायिक कारणों से नहीं हो पा रहे हैं। लेकिन केंद्र एवं पिछले दो साल से ही राज्य में भी भाजपा के गठबंधन वाली सरकार होने से स्थानीय निकायों के चुनाव न होने का ठीकरा भी उसी पर फूट रहा है।</p>
<p><strong>कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता</strong><br />शिवसेना के साथ गठबंधन में भाजपा की जीत का स्ट्राइक रेट हमेशा शिवसेना से बेहतर रहता आया था। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा का स्ट्राइक रेट शिवसेना (यूबीटी) शिवसेना राकांपा, और कांग्रेस से भी खराब रहा है।</p>
<p>इसका एक बड़ा कारण संगठन में निचले स्तर के कार्यकर्ताओं का निष्क्रिय होना माना जा रहा है। चुनाव से पहले पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व जहां बूथ प्रमुख एवं पन्ना प्रमुख के जरिए घर-घर पहुंचने का दावा कर रहा था। वहीं चुनाव परिणाम आने के बाद खुद उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस मान रहे हैं कि वह सोयाबीन एवं कपास उत्पादक किसानों तक पहुंच बना पाने में नाकाम रहे। प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले हार का ठीकरा जातिवाद की राजनीति को दे रहे हैं। जबकि इसी महाराष्ट्र में भाजपा नेता माली, धनगर एवं वंजारी (माधव समीकरण) जैसे अन्य पिछड़ा वर्गों को साथ लेकर मजबूत मराठा नेताओं को चुनौती देते रहे थे।</p>
<p><strong>निचले स्तर के संगठन की उपेक्षा</strong><br />दूसरी ओर नई पीढ़ी के नेता और कार्यकर्ताओं के उससे न जुड़ पाने के कारण निचले स्तर पर संगठन कमजोर होता जा रहा है। दो साल से राज्य में साझे की सरकार होने के बावजूद निगमों एवं महामंडलों में नियुक्तियां न होना एवं मंत्रिमंडल का विस्तार न होना भी सांगठनिक असंतोष का कारण बन रहा है। भाजपा के सांगठनिक ढांचे में प्रदेश स्तर से लेकर केंद्रीय इकाई तक संगठन महासचिव की बड़ी भूमिका होती है। इस पद पर बैठा व्यक्ति सामान्यत: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का प्रतिनिधि होता है। जो निरपेक्ष भाव से संगठन एवं सरकार के बीच की कड़ी बनकर काम करता है और सभी की बात सुनकर सामंजस्य बैठाता है। करीब तीन साल से महाराष्ट्र की प्रदेश इकाई में कोई पूर्णकालिक संगठन महासचिव का न होना भी प्रादेशिक संगठन की एक बड़ी कमजोरी माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Jun 2024 12:31:43 +0530</pubDate>
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                <title>सतरंगी  सियासत</title>
                                    <description><![CDATA[देश का सबसे बड़ा सूबा उत्तर प्रदेश। उसमें भी प्रमुख विपक्षी सपा और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव का मानो सब कुछ दांव पर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/india-gate/colorful-politics/article-78641"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/india-gate.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>सब कुछ दांव पर</strong><br />आम चुनाव- 2024 का परिणाम बहत कुछ संकेत और संदेश छोड़कर जाएगा। देश का सबसे बड़ा सूबा उत्तर प्रदेश। उसमें भी प्रमुख विपक्षी सपा और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव का मानो सब कुछ दांव पर। देश के दिग्गज समाजवादी नेता रहे मुलायम सिंह यादव के पुत्र अखिलेश यूपी का सीएम पद संभालने के बाद से लगातार चार बार चुनाव हार चुके। विधानसभा चुनाव 2017 और 2022 एवं लोकसभा चुनाव 2014 और 2019 में भी पिछड़ चुके। इनमें अखिलेश प्रभावशाली प्रदर्शन नहीं कर पाए। अब पांचवें चुनाव में भी कोई बहुत अवसर नजर नहीं आ रहा। कांग्रेस से गठजोड़ इसकी बानगी। फिर उनकी चाचा शिवपाल यादव से पटरी बैठती नहीं। जबकि वह सपा की मुलायम सिंह के जाने के बाद मानो रीढ़। लेकिन अखिलेश ने उन्हें पूरे समय साइड में रखा। ऐसे में यदि अखिलेश यादव लगातार पांचवां चुनाव हारे। तो क्या होगा? यह समय बताएगा।</p>
<p><strong>किस किसकी बारी?</strong><br />आम चुनाव- 2024 कई क्षेत्रीय दलों या क्षत्रपों के लिए अवसान का अवसर भी संभव। कई दल लगातार निचले पायदान पर जाते जा रहे। सो, इनकी वंशवादी, परिवारवादी एवं व्यक्तिवादी राजनीति पर खतरा। हां, राजद के तेजस्वी यादव ऐसे नेता। जिन्होंने लालू यादव की राजनीतिक विरासत को ठीक से संभाला हुआ। बाकी कई नए राजनीतिक माहौल में संघर्ष कर रहे। बात चाहे बीआरएस के केसीआर की हो या बीजेडी के नवीन पटनायक। जदयू के नीतीश कुमार, एनसीपी के शरद पवार और शिवसेना (यूबीटी) के उद्धव ठाकरे इसी संभावना से जूझ रहे। फिर जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद- 370 हटने के बाद एनसी के उमर अब्दुल्ला और पीडीपी की महबूबा मुफ्ती महबूबा के राजनीतिक भविष्य का क्या होगा? वहीं, दक्षिण के तमिलनाडु में राजनीति तेजी से करवट ले रही। जयललिता की एआईडीएमके आंतरिक झगड़े से जूझ रही। तो डीएमके को नंबर एक राजनीतिक दुश्मन भाजपा नजर आ रही।</p>
<p><strong>अपनी राह</strong><br />बसपा की अपनी राजनीति और गति। मायावती से आगे दूर तक देख रहीं। भले ही आज राजनीतिक जानकार उनका घाटा बता रहे हों। लेकिन मायावती की नजर भविष्य पर। इसीलिए भतीजे आकाश आनंद को आगे भी किया। लेकिन कुछ मामला गड़बड़ा गया। इसीलिए उन्हें फिलहाल फ्री भी कर दिया। बसपा प्रमुख मायावती की राजनीति टर्निंग पाइंट पर। यूपी में उनकी नजर कांग्रेस के दलित और सपा का मुस्लिम वोट पर। यानी त्रिकोणिय मुकाबले में भाजपा की जीत की संभावना ज्यादा। इसीलिए सपा और कांग्रेस, मायावती की बसपा पर हमलावर भी। लेकिन उनकी अपनी रणनीति और राजनीतिक गुणा भाग। जब यूपी में सपा और कांग्रेस कमजोर होंगी। तो भाजपा के सामने बसपा ही होगी। और इसी में मायावती अगली पीढ़ी के लिए अवसर देख रहीं। आकाश आनंद को उसी के लिए तैयार किया जा रहा। लेकिन प्रदेश की जनता का मूड इस चुनाव में मालूम पड़ेगा।</p>
<p><strong>संकेत और संदेश</strong><br />श्रीनगर संसदीय क्षेत्र में इस बार मतदान का 28 साल पुराना रिकार्ड टूट गया। साल 1996 में 41 तो इस बार 38 फीसदी मतदान हुआ। भाजपा इसे अनुच्छेद- 370 खत्म होने का असर बता रही। जिसे शांतिपूर्ण माहौल और अच्छी कानून व्यवस्था से भी जोड़कर देखा जा रहा। लेकिन सीमा पार गुलाम कश्मीर में हालात इसके एकदम उलट। वहां पाक फौज के खिलाफ बगावत जैसे हालात। धरना-प्रदर्शन एवं नारेबाजी भी ठीक उसी दिन। जिस दिन श्रीनगर में मतदान हो रहा था। इसकी जानकारी पूरी दुनियां तक पहंच रही। याद रहे, भारत के रक्षा और विदेश मंत्री कश्मीर को भारत में मिलाए जाने की बात एकदम स्पष्ट कह चुके। अब यह घटनाक्रम महज संयोग या फिर कुछ और? लेकिन गुलाम कश्मीर ने दुनियाभर का ध्यान जरुर खींच लिया। आनन-फानन में पाक सरकार द्वारा 700 करोड़ की मदद की घोषणा की गई। मतलब हालात काबू से बाहर।</p>
<p><strong>रूस की एंट्री</strong><br />देश के आम चुनाव में पाक का जिक्र न हो। तो चुनाव ही क्या? लेकिन अब रूस की भी एंट्री। इसका जिक्र किया अरविंद केजरीवाल ने। जो इन दिनों सुप्रीम कोर्ट की जमानत पर। उन्होंने रूसी राष्ट्रपति पुतिन का जिक्र करके चुनावी तड़का तो लगा ही दिया। इससे पहले अमरीका पर आरोप। वह भारतीय चुनाव प्रक्रिया में दखलंदाजी कर रहा। इसके बाद अमरीका बैक फुट पर। वैसे बात पाक तक तो ठीक। लेकिन रूस के जिक्र से विदेशी संबंधों पर भी असर संभव। लेकिन विपक्षी नेता जिस तरह से पीएम मोदी पर हमला कर रहे। इसे क्या कहा जाए? चुनावी रस्म या अगला संदेश? और वह क्या? पीएम मोदी सभी पर भारी पड़ रहे? लेकिन एक बात। इस बार का चुनाव। कई नेताओं एवं दलों के लिए राजनीतिक अस्तित्व का सवाल। हारे तो वह मानकर चल रहे। राजनीति की रिंग से बाहर जाने का खतरा!</p>
<p><strong>विपक्ष का नजरिया!</strong><br />आम चुनाव का पांचवां चरण कल। लेकिन विपक्ष अभी भी यही दावा कर रहा कि एनडीए 400 पार नहीं करेगा। साथ में विपक्ष जोड़ रहा। यदि 400 सीटें पार हुईं। तो देश का संविधान और आरक्षण व्यवस्था को खत्म कर दिया जाएगा। इसी की काट में पीएम मोदी ने बोला। यदि कांग्रेस सत्ता में आई। तो ओबीसी का आरक्षण काटकर मुस्लिम समाज को दे दिया जाएगा। कर्नाटक इसका उदाहरण। रही सही कसर सलमान खुर्शीद की भतीजी ने वोट जेहाद का जिक्र करके कर दिया। इसके बाद कांग्रेस बैकफुट पर। इसके बावजूद विपक्ष और कांग्रेस यह नहीं बता रहे कि खुद उनकी कितनी सीटे आएंगी। अब तो ममता बनर्जी भी बोल गईं। इंडिया गठबंधन सत्ता में आया। तो टीएमसी उसे बाहर से समर्थन देगी। इसी, बीच पीओजेके में महंगाई को लेकर प्रदर्शन। तो इधर, देश में सीएए के तहत नागरिकता देने का कार्यक्रम शुरू हो गया।</p>
<p><strong>केजरीवाल मौन!</strong><br />अरविंद केजरीवाल राजनीतिक और कानूनी भंवर में। स्वाति मालीवाल के साथ सीएम आवास में मारपीट क्या हुई। केजरीवाल एकदम मौन हो गए। बाद में आप सांसद संजय सिंह नमूदार हुए। कहा, मालीवाल के साथ अभद्रता हुई। दोषी के खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने मालीवाल के घर जाकर उनका हालचाल जाना। लेकिन सवाल केजरीवाल का। उनसे न उगलते बन रहा और न निगलते। फिर उनके खास सिपहसालार विभव कुमार जेल पहुंच चुके। इधर, माहौल आम चुनाव का। अभी दिल्ली और पंजाब में मतदान बाकी। कहीं, यह सब आम आदमी पार्टी में अंदरखाने की ही तो कोई खदबदाहट तो नहीं? क्योंकि केजरीवाल को वापस जेल भी जाना। उससे पहले राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से आगे बढ़ रहा। आप सांसद राघव चढ्ढा की लंदन से अचानक स्वदेश वापसी। इसकी स्पष्ट बानगी। फिर सर्वोच्च न्यायालय भी कह चुका। अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री पद पर रहेंगे या नहीं। यह उप-राज्यपाल को तय करना।</p>
<p><strong>-दिल्ली डेस्क</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार है)</strong><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>इंडिया गेट</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 May 2024 12:18:21 +0530</pubDate>
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                <title>शिवसैनिक और ठाकरे परिवार का रिश्ता कोई नहीं तोड़ सकता-चंद्रकांत खैरे</title>
                                    <description><![CDATA[उन्होंने कहा कि शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे का पसंदीदा शहर औरंगाबाद था। इस तरह पिछले 50 सालों से औरंगाबाद के शिवसैनिकों और ठाकरे परिवार का रिश्ता इतना मजबूत हो गया है कि उसे कोई नहीं तोड़ सकता।   ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/no-one-can-break-the-relationship-between-shiv-sainik-and/article-37857"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/download-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>औरंगाबाद। शिवसेना के वरिष्ठ नेता और औरंगाबाद के पूर्व सांसद चंद्रकांत खैरे ने कहा है कि शिवसैनिक और ठाकरे परिवार का रिश्ता कोई नहीं तोड़ सकता है।</p>
<p>खैरे उद्धव ठाकरे का समर्थन करने के लिए बीती रात संत एकनाथ रंगमंदिर में वफादार शिवसैनिक की दृढ़ संकल्प बैठक में बोल रहे थे।    इस मौके पर नेता प्रतिपक्ष अंबादास दानवे वर्चुअली रुप से बैठक में शामिल हुए। </p>
<p>उन्होंने कहा कि शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे का पसंदीदा शहर औरंगाबाद था। इस तरह पिछले 50 सालों से औरंगाबाद के शिवसैनिकों और ठाकरे परिवार का रिश्ता इतना मजबूत हो गया है कि उसे कोई नहीं तोड़ सकता।   </p>
<p>दानवे ने कहा कि शिवसैनिक हमेशा बालासाहेब ठाकरे, उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे के प्रति वफादार रहेंगे। ठाकरे हमारा ब्रांड है, जो चुनाव चिन्ह मिलेगा, हम उद्धव ठाकरे के साथ खड़े रहेंगे।</p>
<p>इस अवसर पर सभी शिवसैनिकों ने उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे के समर्थन का संकल्प लिया और औरंगाबाद पश्चिम निर्वाचन क्षेत्र में भीमशक्ति संगठन की सुनीता शिरसाठ, अनीता तुपारे, संगीता रत्नापारखे, इंद्रावती दाउद सहित सैकड़ों महिलाएं शिवसेना (ठाकरे) में शामिल हुईं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Feb 2023 11:42:09 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>शिंदे की शिवसेना, चुनाव आयोग के इस आदेश को ठाकरे गुट ने दी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती </title>
                                    <description><![CDATA[चुनाव आयोग ने 17 फरवरी को 2023 को उद्धव ठाकरे समूह को एक बड़ा झटका देते हुए अपने अंतिम आदेश में कहा था कि पार्टी का नाम शिवसेना और चुनाव चिह्न तीर-धनुष मुख्यमंत्री शिंदे गुट के पास रहेगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/shindes-shiv-sena-election-commissions-order-challenged-in-the-supreme/article-37782"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/site-photo-size10.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट को असली शिवसेना के तौर पर मान्यता और चुनाव चिह्न तीर-धनुष आवंटित करने के चुनाव आयोग के फैसले को पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे गुट ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और जे बी पारदीवाला की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ए. एम. सिंघवी ने इस मामले को महत्वपूर्ण बताते हुए याचिका पर तत्काल सुनवाई करने की गुहार लगाई। सिंघवी ने इस मामले को विशेष उल्लेख के दौरान शीर्ष अदालत के समक्ष उठाया।</p>
<p>शीर्ष अदालत की तीन सदस्यीय पीठ ने सिंघवी के अनुरोध पर फिलहाल सुनवाई की तारीख देने से इनकार कर दिया, लेकिन उन्हें मंगलवार को फिर अनुरोध करने को कहा।</p>
<p>चुनाव आयोग ने 17 फरवरी को 2023 को उद्धव ठाकरे समूह को एक बड़ा झटका देते हुए अपने अंतिम आदेश में कहा था कि पार्टी का नाम शिवसेना और चुनाव चिह्न तीर-धनुष मुख्यमंत्री शिंदे गुट के पास रहेगा। चुनाव आयोग ने अपने आदेश में कहा था कि यह आदेश उसने संविधान के अनुच्छेद 324 और प्रतीक आदेश- 1968 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए पारित किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Feb 2023 16:58:15 +0530</pubDate>
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                <title>लोगों को राउत से पूछना चाहिए कि सौदे का पैसा कहां रखा गया: पाटिल</title>
                                    <description><![CDATA[ राउत ने ट्वीट कर चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए दावा किया था कि पार्टी का चिह्न और नाम हासिल करने के लिए अब तक 2000 करोड़ रुपये के सौदे और लेन-देन हो चुके हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/people-should-ask-raut-where-the-deal-money-was-kept/article-37768"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/raut.png" alt=""></a><br /><p>औरंगाबाद। महाराष्ट्र के जल आपूर्ति मंत्री गुलाबराव पाटिल ने सोमवार को कहा कि लोगों को संजय राउत से पूछना चाहिए कि सौदे का पैसा कहां रखा है जिसका उन्होंने दावा किया।</p>
<p>शिवसेना (ठाकरे) के नेता एवं सांसद संजय राउत ने आरोप लगाया था कि चुनाव आयोग ने पार्टी के नेता एकनाथ शिंदे गुट को शिवसेना पार्टी का चुनाव चिह्न देने के लिए 2000 करोड़ रुपये की रिश्वत ली है।</p>
<p>पाटिल जल आपूर्ति विभाग की समीक्षा बैठक में शामिल होने और जालना में सरकारी योजना का उद्घाटन करने के लिए सोमवार को औरंगाबाद जिले के दौरे पर आये हैं।</p>
<p>पाटिल चिकलथाना हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने राउत के आरोप कि पार्टी के चुनाव चिह्न धनुष बाण का सौदा 2000 करोड़ रुपये का था, के जवाब में कहा कि राउत से पूछे कि सौदे का पैसा कहां रखा है, और कितने नोट थे। </p>
<p>पाटिल से पूछा गया कि ठाकरे गुट उच्चतम न्यायालय जा रहा है, तो उन्होंने कहा कि उन्हें जाने दीजिए।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि राउत ने ट्वीट कर चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए दावा किया था कि पार्टी का चिह्न और नाम हासिल करने के लिए अब तक 2000 करोड़ रुपये के सौदे और लेन-देन हो चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह शुरुआती आंकड़ा है और 100 प्रतिशत सच है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Feb 2023 13:04:00 +0530</pubDate>
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