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                <title>प्रदेश में पहली बार एयर लिफ्ट कर अंगों को लाया गया, इस वर्ष का यह 13 वां अंगदान</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश में पहली बार लंग्स का प्रत्यारोपण किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/for-the-first-time-in-the-state-organs-were-brought/article-97741"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/5554-(2)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में पहली बार एक ब्रेन डेड व्यक्ति के आठ अंगों का प्रत्यारोपण किया गया। इस लिहाज से भी पहला अवसर रहा, जब एक ही व्यक्ति के लंग्स और हृदय का प्रत्यारोपण एक ही रोगी को किया गया। साथ ही, प्रदेश में पहली बार लंग्स का प्रत्यारोपण किया गया। अंगों को झालावाड़ से हेलीकॉप्टर से एसएमएस अस्पताल भेजकर सफ लतापूर्वक प्रत्यारोपण किया गया। चिकित्सा शिक्षा सचिव अम्बरीष कुमार एवं चिकित्सा शिक्षा आयुक्त इकबाल खान ने अंगदान की इस प्रक्रिया में एयर एम्बुलेंस के लिए आवश्यक प्रक्रिया को पूरा करवाया, जिससे यह अंगदान एवं प्रत्यारोपण सफ लतापूर्वक हो सका। इस वर्ष का यह 13 वां अंगदान था। </p>
<p><strong>कौन-कैसे हुआ ब्रेन डेड:</strong>  विष्णु प्रसाद (33) को गम्भीर रूप से घायल हो जाने पर 11 दिसंबर को झालावाड़ के मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाया गया था। चिकित्सकों के अथक प्रयासों के बावजूद विष्णु को बचा पाना सम्भव नहीं हो पाया। विष्णु को ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। ब्रेन डेड घोषित हो जाने के बाद विष्णु के परिवारजन को अंगदान के बारे में प्रेरित किया गया। परिवार विष्णु के अंगों दोनों किडनियां, लिवर, हार्ट, लंग्स व दोनों कॉर्निया को दान करने के लिए सहमत हो गया। इसमें नोडल अधिकारी डॉ. रामसेवक ने अहम भूमिका निभाई। </p>
<p><strong>हेलीकॉप्टर की सहायता से झालावाड़ से जयपुर आए अंग:</strong> पहली बार हेलीकॉप्टर से अंगों को झालावाड़ से सवाई मानसिंह चिकित्सालय में प्रत्यारोपण के लिए लाया गया। एक किडनी व लिवर का प्रत्यारोपण एम्स जोधपुर में किया गया, एम्स जोधपुर में भी अंगों को झालावाड़ से जोधपुर हवाई जहाज के माध्यम से ले जाया गया। डॉ. मनीष अग्रवाल ने एसएमएस हॉस्पिटल में समन्वय के रूप में कार्य किया और एम्स में डॉ. शिवचरण नवारिया की विशेष भूमिका रही।</p>
<p><strong>इनका रहा विशेष योगदान : </strong>एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ दीपक माहेश्वरी एवं समुचित प्राधिकारी डॉ. रश्मि गुप्ता, एसएमएस में न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉ.मनीष अग्रवालए का विशेष योगदान रहा। अंगों का आवंटन स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन के माध्यम और समन्वय से किया गया, जिसमें सोटो पदाधिकारी डॉ. मृणाल, डॉ.अजीत, डॉ. धर्मेश और रोशन की अहम भूमिका रही। इस कार्य में नोटो के निदेशक डॉ.अनिल कुमार का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Dec 2024 10:22:24 +0530</pubDate>
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                <title>ब्रेनडेथ के बाद अंधविश्वास के चलते परिजन नहीं कराते है अंगदान</title>
                                    <description><![CDATA[अभी प्रदेश में 484 लोग ऐसे है, जिनके लीवर और हॉर्ट खराब हैं। स्टेट ऑर्गन ट्रांसप्लांट एंड टिशू आर्गेनाइजेशन (सोटो ) के ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ. अमरजीत मेहता, कंसल्टेंट डॉ. मनीष शर्मा ने बताया कि ब्रेनडेथ के बाद अंधविश्वास के चलते परिजन अंगदान नहीं कराते है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/jaipur-organ-donation-not-after-brain-dead/article-13041"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/46546546535.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। अभी प्रदेश में 484 लोग ऐसे है, जिनके लीवर और हॉर्ट खराब हैं। स्टेट ऑर्गन ट्रांसप्लांट एंड टिशू आर्गेनाइजेशन (सोटो ) के ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ. अमरजीत मेहता, कंसल्टेंट डॉ. मनीष शर्मा ने बताया कि ब्रेनडेथ के बाद अंधविश्वास के चलते परिजन अंगदान नहीं कराते है। परिवहन विभाग भी लाइसेंस देते समय अंगदान का संकल्प पत्र भरवाता है, लेकिन जिनकी ब्रेनडेथ होती है, उनके परिजन तैयार नहीं होते।</p>
<p><strong>जागरूकता जरूरी, लेकिन सिस्टम भी मजबूत हो</strong><br />प्रदेश में सभी सरकारी अस्पतालों में ब्रेनडेथ के केस आते हैं, लेकिन परिजनों की रजामंदी के लिए ट्रांसप्लांट कोर्डिनेटर नहीं हैं। जयपुर के 11 और जोधपुर, और गंगानगर के 1-1 अस्पताल के अलावा बीकानेर, जोधपुर, अजमेर, कोटा मेडिकल कॉलेज में ही कोर्डिनेटर हैं। सभी को इसकी अनुमति भी नहीं है। सबसे ज्यादा हॉर्ट, लीवर और किडनी के केस आते हैं। हॉर्ट 3 घंटे, लीवर 6 घंटे, किडनी 24 घंटे, अग्नाश्य 6 घंटे, कोर्निया 7-14 दिन, स्किन की 4-5 साल की समयावधि में ट्रांसप्लांट होना जरूरी है। अन्य जिलों से अंगों के निकालने, जिस अस्पताल में मरीज को इसकी जरूरत है। उस तक पहुंचाने के मजबूत ग्रीन कोरिडोर बनाने की प्रणाली जरूरी है।</p>
<p>जयपुर के एसएमएस और महात्मा गांधी अस्पताल में सभी अंगों के ट्रांसप्लांट की सुविधा है। हर जिले में एक ऐसे अस्पताल को विशेषज्ञों के साथ तैयार करने की जरूरत है, जो ऑगन ट्रांसप्लांट की सुविधा दे। हॉर्ट, लीवर टांसप्लांट कराना है, तो जयपुर के अस्पताल ही विकल्प हैं। सरकारी अस्पतालों में ब्रेनडेथ के केस सबसे ज्यादा आते हैं। प्रदेश में 30 जिलों में खुल रहे मेडिकल कॉलेजों में अंगदान और ट्रांसप्लांट की सुविधा की कवायद हो।</p>
<p><strong>अभी तक 44 लोगों के यह अंग मिले</strong><br /> 81 किडनी, 39 लीवर, 24 हॉर्ट, 4 लंग्स, 1 अग्नाश्य, 12 कोर्निया, 2 हॉर्ट वॉल्व, 1 ब्रेनडेथ की स्कीन का दान हो सका है। इनमें किडनी के अलावा अधिकांश अंग दूसरे राज्यों में भेजे गए। यहां सभी ट्रांसप्लांट हो सकते थे। लेकिन चुनिंदा अस्पताल में ट्रांसप्लांट, मरीज का यहां पहुंचने में समय लगना, प्राइवेट में महंगा ट्रांसप्लांट की वजह से लोगों बचाने के लिए दूसरे राज्यों को ये अंग भेजे गए। एक भी लंग्स का ट्रांसप्लांट आज तक प्रदेश में नहीं हो सका है।</p>
<p><strong>पहला लीवर-हॉर्ट-अग्नाशय ट्रांसप्लांट महात्मा गांधी अस्पताल में हुआ</strong><br />राजस्थान का पहला लीवर, हॉर्ट 2015 में और अग्नाश्य 2017 में महात्मा गांधी में हुआ। एसएमएस में फरवरी 2015 में पहला किडनी केडेवर ट्रांसप्लांट हुआ।</p>
<p><strong>किस अंग के इंतजार में कितने लोग</strong><br />राजस्थान में 354 लोगों को किडनी, 97 को लीवर और 33 को हॉर्ट की जरूरत है। इन्होंने स्टेट ऑर्गन ट्रांसप्लांट एंड टिशू आर्गेनाइजेशन यानी सोटो में रजिस्ट्रेशन करा रखा है।</p>
<p><strong>अब तक इनमें ही अंगदान</strong> <br />सबसे ज्यादा अंगदान एसएमएस अस्पताल में हुए हैं। इसके अलावा सीतापुरा स्थित महात्मा गांधी अस्पताल, नारायण, अपेक्स, र्फोटिज और ईएचसीसी में हुए।   <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Jun 2022 11:22:40 +0530</pubDate>
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