<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/preserved/tag-25556" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>preserved - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/25556/rss</link>
                <description>preserved RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर: वक्त के साथ अपनी धरोहर को संजोए हुए या लुप्त हो रहा अस्तित्व</title>
                                    <description><![CDATA[सिनेमाघर जहां सपने उड़ान भरते हैं और सितारे जमीं पर उतरते हैं, जहां 3 घंटे में आप हर वो एहसास कर लेते हैं। ख्वाबों के महल, बचपन की यादें, पहला प्यार, दोस्ती-दुश्मनी, दर्द और लड़ने का जज्बा, वो शहर वो गली, वो जगह, हर अनुभव महसूस करते हैं। अपनी हर परेशानी भूल कर पूरी जिंदगी जी लेते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/with-time--the-existence-of-its-heritage-is-being-preserved-or-vanishing/article-13142"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/cinema.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर।</strong> सिनेमाघर जहां सपने उड़ान भरते हैं और सितारे जमीं पर उतरते हैं, जहां 3 घंटे में आप हर वो एहसास कर लेते हैं। ख्वाबों के महल, बचपन की यादें, पहला प्यार, दोस्ती-दुश्मनी, दर्द और लड़ने का जज्बा, वो शहर वो गली, वो जगह, हर अनुभव महसूस करते हैं। अपनी हर परेशानी भूल कर पूरी जिंदगी जी लेते हैं।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>सिनेमाघर और राजस्थान राज घराना</strong></span><br />दोनों ही एक दूजे से जुड़े है। महाराजा स्वामी राम सिंह द्वितीय का फिल्मों से रिश्ता बरसों पुराना रहा है, जिसे उन्होंने 1879 में एक थिएटर के रूप में बनवाया और जयपुर को पहला सिनेमाघर मिला, जिसका नाम राम प्रकाश टॉकीज था।  इसने नाटकों व फिल्मों को हमसे जोड़ा और वो सब दिया, जो हर दिल चाहता है ‘एंटरटेनमेंट’, लेकिन अब ये बंद हो चुका है। जयपुर और शानो शौकत का अटूट संबध है, एशिया का सबसे बड़ा सिनेमाघर यानी राज मंदिर, इसकी शान का  जीता जागता नमूना है।</p>
<p>इसकी सजावट, बनावट, नक्काशी और रॉयल टच के साथ यह पूरी दुनिया में मशहूर है। देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए राज मंदिर उनकी यादों का हिस्सा बन जाता है। बड़े स्क्रीन पर मखमली पर्दे, जो प्राकृतिक फूलों की खुशबू से भरे हैं, झूमरों से सजी ऊंची छत और नौ सितारे यहां आने वालों को खुद सितारा होने का एहसास कराते हैं। इसे मेहताब चंद्र जी गोलेछा ने बनवाया था। इसकी नींव 1966 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया ने रखी थी और 1976 में पूर्व मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी ने इसका उद्घाटन किया था। राजमंदिर में पहली फिल्म चरस लगी थी, जिसका नशा, आज भी सिर चढ़ कर बोल रहा है।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>गोलेछा सिनेमा :</strong> </span>गोलेछा सिनेमा का पूर्व नाम प्रेम प्रकाश था, जो राजस्थान में 70 मिमी स्क्रीन का एकमात्र हॉल, जो आज चंद्रमहल के नाम से जाना जाता है। अब ये सिनेमा हॉल तीन स्क्रीन वाला मल्टीप्लेक्स है। प्रसिद्ध प्रेम प्रकाश समोसा, इसकी बड़ी स्क्रीन की तरह बहुत मशहूर है।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>पोलो विक्ट्री सिनेमा :</strong> </span>भारत ने 1933 में पोलो में विश्व कप जीता था। ये हॉल उसी उपलक्ष्य में एक गर्व के रूप में बनाया गया, जिसका उद्घाटन स्वतंत्र भारत के राज्यपाल जनरल लॉर्ड माउंटबेटन ने किया। यह भी अब मल्टीप्लेक्स बन चुका है।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>जेम सिनेमा :</strong></span> फिल्म प्रेमियों का रत्न हुआ करता था, लेकिन प्रतिस्पर्धा के कारण ये बंद हो गया। कई वर्षों बाद नए लुक में यह फिर शुरू हुआ और दर्शकों से अपना रिश्ता बनाने लगा है।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>कोहिनूर सिनेमा :</strong> </span>नवीनीकृत करने के बाद ये दर्शकों की भीड़ को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।<br /><span style="color:#ff0000;"><strong>पारस सिनेमा :</strong> </span>गुलाबी रंग की दीवारों से सजा ये दर्शकों को खूब लुभाता है।<br /><span style="color:#ff0000;"><strong>लक्ष्मी मंदिर :</strong></span> बेहतरीन सिनेमा हॉल में से एक, लेकिन अब धीरे-धीरे अपना वजूद खो रहा है।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>अंकुर सिनेमा :</strong> </span>अपना अस्तित्व बनाए रखने में नाकाम हो रहा है।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>बंद हो चुके सिनेमा हॉल: </strong></span>सम्राट, संगम, मिनर्वा, मयूर, मान प्रकाश, मोती महल सिनेमाघर शहर की अमिट विरासत का हिस्सा रहे, लेकिन आर्थिक तंगी, आधुनिक तकनीक और रखरखाव के बिना बंद हो चुके हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/with-time--the-existence-of-its-heritage-is-being-preserved-or-vanishing/article-13142</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/with-time--the-existence-of-its-heritage-is-being-preserved-or-vanishing/article-13142</guid>
                <pubDate>Tue, 28 Jun 2022 13:20:59 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-06/cinema.jpg"                         length="68795"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        