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                <title>असर खबर का : आरओबी से हटाया झुका हुआ खम्बा, बंद लाइटें फिर से जल उठेंगी</title>
                                    <description><![CDATA[बिजली के अस्त-व्यस्त तार ठीक किए जाएंगे, जिससे बंद लाइटें फिर से जल उठेंगी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---leaning-pole-removed-from-rob/article-153111"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(1)32.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। डीसीएम रोड स्थित संजय नगर आरओबी पर आंधी के दौरान झुके बिजली के खम्बे को केडीए की ओर से गुरुवार को हटवा दिया गया। शहर में तीन दिन पहले आई आंधी से आरओबी पर लगे खम्बों में से बिजली का एक खम्बा टेढ़ा होकर झुक गया था। जिससे उसके कभी भी गिरने पर हादसे का खतरा बना हुआ था। गुरुवार को केडीए की ओर से उस खम्बे को हटवा दिया।केडीए के अधिशाषी अभियंता विद्युत ललित कुमार मीणा ने बताया कि अज्ञात वाहन की टक्कर से खम्बा झुक गया था। उसे कटवाकर हटवा दिया है। उसके साथ ही दो अन्य खम्बों को भी हटाया गया है। वहीं इसकी जगह पर फेब्रिकेट करके नए सिरे से खम्बे लगाए जाएंगे। साथ ही बिजली के जो तार अस्त-व्यस्त हो रहे हैं उन्हें भी सही कर दिया जाएगा। जिससे यहां बंद लाइटें भी जल जाएंगी।</p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था प्रकाशित</strong><br />गौरतलब है कि हादसों को न्यौता दे रहे इस बिजली के खम्बे का मामला दैनिक नवज्योति ने प्रकाशित किया था। समाचार पत्र में 7 मई के अंक में पेज 6 पर ' छतों पर लगे अवैध होर्डिग्स व वॉलड्रॉप से दुर्घटनाओं का खतरा शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें इस बिजली के खम्बे के टेढ़ा होने व उससे हादसों के खतरे की जानकारी दी गई थी। समाचार प्रकाशित होते ही केडीए अधिकारी हरकत में आए और गुरुवार को ही उस खम्बे को हटवा दिया। जिससे अब खतरा नहीं रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 12:32:42 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का : छावनी में शुरु हुआ सीसी सड़क का निर्माण कार्य, हादसों व जाम से जल्द मिलेगी राहत</title>
                                    <description><![CDATA[पहले से बनी डामर की सड़क को कई दिन से खोदकर छोड़ा हुआ था। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---construction-of-cc-road-begins-in-chhavani/article-152855"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)29.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। छावनी मेन रोड पर सीसी सड़क बनाने का काम संवेदक द्वारा मंगलवार को शुरु कर दिया है। जिससे जल्दी ही सड़क का काम पूरा होने पर यहां से गुजरने वाले वाहनों को न तो जाम का सामना करना पड़ेगा और न ही हादसों का खतरा रहेगा। कोटा विकास प्राधिकरण द्वारा संवेदक के माध्यम से छावनी मेन रोड स्थित डॉ. राम कुमार सर्किल पर सीसी सड़क का निर्माण कार्य शुरु कराया गया है। संवेदक द्वारा यहां सीसी सड़क बनाने के लिए पहले से बनी डामर की सड़क को कई दिन से खोदकर छोड़ा हुआ था। जिससे वहां सड़क उबड़ खाबड़ होने के साथ ही सीवरेज के चैम्बर भी बाहर की तरफ अधिक ऊपर निकल गए थे। जिससे वहां से गुजरने वाले वाहन दिन में हादसों का शिकार हो रहे हैं। साथ ही मेन रोड होने से यहां चारों तरफ से वाहनों के आने के कारण दिनभर में कई बार जाम की स्थिति बन रही थी।</p>
<p><strong>दैनिक नवज्योति ने उठाया था मामला</strong><br />छावनी में कई दिन से खुदी सड़क से स्थानीय निवासियों व राहगीरों और व्यापारियों को रही परेशानी को देखते हुए इस मामले को दैनिक नवज्योति ने उठाया था। समाचार पत्र में 5 मई के अंक में पेज 4 पर' सीसी के लिए खोदी सड़क, जाम व हादसों का खतरा ,शीर्षक से प्रकाशित किया था। जिसमें स्थानीय लोगों के साथ ही वहां से गुजरने वाले वाहन चालकों की पीड़ा को उजागर किया गया था।समाचार प्रकाशित होते ही केडीए अधिकारी व संवेदक हरकत में आए और मंगलवार को सुबह ही सीसी सड़क बनाने का काम शुरु कर दिया। केडीए अधिकारियों का कहना है कि सड़क का काम शुरु कर दिया है। मेन रोड होने से इस सड़क को सूखने में कई दिन का समय लगने से रास्ते को कुछ समय के लिए बंद करना पड़ सकता है। जल्दी ही सड़क का काम पूरा हो जाएगा। जिससे लोगों को राहत मिलेगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 14:18:27 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सीसी के लिए खोदी सड़क, जाम व हादसों का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[डाली गई सीवरेज लाइन के चैम्बर काफी बाहर तक निकल गए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/road-dug-up-for-concrete-paving--risk-of-traffic-jams-and-accidents/article-152724"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)22.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से छावनी मेन रोड पर डामर की जगह सीसी रोड बनायी जा रही है। लेकिन उसके लिए खोदी गई सड़क वहां से गुजरने वालों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। दिनभर जाम व हादसों का खतरा बना हुआ है। केडीए की ओर से छावनी में डॉ. रामकुमार चौराहे से मुख्य बाजार में होते हुए रामचंद्रपुरा तक सीसी रोड काफी समय पहले बनाई जा चुकी है। ऐसे में जहां डामर रोड बरसात के समय बार-बार गड्ढ़ो में तब्दील होने से लोगों के लिए हादसों कारण बन रही थी। उससे काफी राहत मिली है। वहीं अब मेन रोड पर चौराहे के आस-पास की सड़क पर जहां हर बार बरसात में पानी भरने से गड्ढ़े हो रहे थे। उसे भी सीसी किया जा रहा है। इसके लिए संवेदक द्वारा पिछले कई दिन से सड़क को खोदकर छोड़ा हुआ है। डामर सड़क को खोदने से वहां डाली गई सीवरेज लाइन के चैम्बर काफी बाहर तक निकल गए हैं। ऐसे में यह मार्ग काफी व्यस्त होने से यहां वाहनों का आवागमन बना रहता है। ऐसे में यहां दिनभर वाहनों का जाम व छोटे वाहनों विशेष रूप से ई रिक् शा के पलटने व दो पहिया वाहनों के संतुलन बिगडऩे से गिरने का खतरा बना हुआ है।</p>
<p><strong>चौराहा है तो चार तरफ से आ रहा ट्रैफिक</strong><br />स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह चौराहा है इस कारण से यहां चार तरफ से वाहन निकल रहे हैं। छावनी अंदर की कॉलोनियों से चौराहे की तरफ जाने वाले, चौराहे से अंदर कॉलोनी में जाने वाले, बंगाली कॉलोनी की तरफ से आने व उधर की तरफ जाने वाले वाहनों के एक साथ आने से वहां दिनभर जाम की स्थिति बनी हुई है। इतना ही नहीं सुबह के समय तो थोक फल सब्जीमंडी के लोडिंग वाहन तक निकल रहे हैं। जिससे उनका कई बार संतुलन बिगड़ चुका है। वहीं सोमवार को बरसात होने से वहां खुदी सड़क में पानी भरने से कीचड़ हो गया। जिससे हादसों का खतरा अधिक बना रहा।</p>
<p><strong>काम होना अच्छा है लेकिन जल्दी हो</strong><br />छावनी निवासी देवेश तिवारी ने बताया कि केडीए की ओर से चौराहे की सड़क को सीसी किया जा रहा है। यह अच्छा काम होगा लेकिन उसे कई दिन तक खोदकर खुला छोड़ा हुआ है। जिससे मेन रोड होने से वहां से निकलने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।<br />छावनी निवासी राकेश जैन व मोहम्मद इसरार ने बताया कि केडीए द्वारा संवेदक से काम कराया जा रहा है तो उसकी मॉनिटरिंग भी होनी चाहिए। जिससे संवेदक काम को समय पर और बेहतर ढ़ंग से करे। जैन ने बताया कि सड़क खुदी होने से वहां रास्ता उबड़ खाबड़ हो रहा है। जिससे दो पहिया वाहन असंतुति होकर हादसों का शिकार हो रहे हैं। ऐसे में यह काम जितना जल्दी पूरा होगा उतना अच्छा रहेगा।</p>
<p><strong>बरसात के कारण देरी हुई, काम जल्दी पूरा होगा</strong><br />इधर केडीए अधिकारियों का कहना है कि चौराहे का कुछ हिस्सा डामर का है। जिससे वहा बरसात में पानी भरने पर बार-बार सड़क खराब हो रही है। उसे सही करने के लिए यहां सीसी रोड बनाया जा रहा है। इसका काम शुरु होना था लेकिन बरसात आने से काम अटक गया। मंगलवार को काम शुरु कर जल्दी ही पूरा कर दिया जाएगा। संवेदक का कहना है कि पहले एक तरफ की सड़क सीसी करने के बाद दूसरी तरफ की की जाएगी। जिससे आवागमन सुचारू रह सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 14:14:50 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>टावर ऑफ लिबर्टी को रोशन रखना बना बड़ी चुनौती, लाइटें पिछले कई महीनों से बंद</title>
                                    <description><![CDATA[ऊपरी हिस्से तक पहुंच न होने से लाइट चालू करना मुश्किल है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/keeping-the--tower-of-liberty--illuminated-becomes-a-major-challenge/article-152631"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(7)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से करोड़ों रुपए खर्च कर शहर के मध्य एरोड्राम चौराहे पर टावर ऑफ लिबर्टी को बनाया गया लेकिन इसे रोशन रखना अब विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। टावर की लाइटें पिछले कई महीनों से बंद हैं। जिससे यहां अंधेरा पसरा हुआ है। तत्कालीन नगर विकास न्यास(केडीए) की ओर से शहर में यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के साथ ही चौराहों का विकास व सौन्दर्यीकरण कराया गया। इसी के तहत एरोड्राम चौराहे पर अंडरपास बनाया गया। इसके बीच में टावर ऑफ लिबर्टी का निर्माण किया गया। </p>
<p>कोरोना काल में हुए इस कार्य के तहत जहां करीब 50 करोड़ की लागत से तो चौराहे पर अंडरपास बनाया गया और 25 करोड़ की लागत से टावर ऑफ लिबर्टी का निर्माण कराया या। सुंदरता के साथ ही आकर्षक बनाने के लिए यहां तीन बड़े टावर जिनकी ऊंचाई 32 मीटर, 38 मीटर व 40 मीटर है। इन पर सात तरह ही इफेक्ट लाइटिंग लगाई गई थी। करीब दो कि.मी. दूसर से ही चौराहा और इसकी लाइटिंग नजर आती है। विशेष अवसरों पर तो यह तिरंगे रंग में और अलग-अलग रंग बदलते हुए लोगों के लिए आकर्षण का केन्द्र है। झालावाड़ रोड हाइवे होने से कोटा शहर ही नहीं बाहर से आने वाले लोग भी इसकी लाइटिंग को देखकर बिना फोटो खींचे नहीं रह पाते हैं।लेकिन हालत यह है कि शहर के बीच इस आकर्षक स्थल की लाइटें पिछले काफी समय से बंद हैं। जिससे इसकी सुंदरता पर ग्रहण लगा हुआ है।</p>
<p><strong>लाइटें बंद होने पर चालू करना मुश्किल</strong><br />टावर ऑफ लिबर्टी को बनाते समय इस पर लगाई गई लाइटों का सिस्टम इस तरह से किया गया है कि नीचे तो इसकी केबल व पैनल दिया गया। जबकि इसके अलग-अलग फ्लोर पर ऐसी व्यवस्था की गई कि लाइट बंद होने पर वहां से ही उसे सही कर चालू किया जा सकता है। लेकिन इसके ऊपरी हिस्से में जाने की कोई व्यवस्था नहीं की गई। जिससे हर बार लाइटें बंद होने पर उसे चालू करना काफी मुश्किल होता है।</p>
<p><strong>पेड़ा बांधने व खोलने पर 4 लाख का खर्चा</strong><br />जानकारों के अनुसार शुरुआत में इस चौराहे व टावर का ओएंडएम किया हुआ था। जिससे जितनी बार भी लाइटें बंद हुई संवेदक फर्म द्वारा उन्हें सही कराया गया। लेकिन हालत यह है कि एक बार लाइट चालू करने के लिए टावर के ऊपरी हिस्से तक पहुंचने के लिए लोहे व लकड़ी का पेड़ा बांधना पड़ता है। जिसे बांधने में 15 दिन व खोलने में 10 दिन का समय लगता है। साथ ही कई दिन तक लाइटों की ट्रायल की जाती है। ऐसे में एक बार पेडा बांधकर लाइटें चालू करने पर करीब 4 लाख रुपए खर्च होना बताया जा रहा है। इस कारण से संवेदक फर्म ने कुछ समय तो इन लाइटों को सही किया लेकिन अब संवेदक फर्म ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। जिससे केडीए प्रशासन अभी तक इन लाइटों को चालू नहीं कर सका है।</p>
<p><strong>कई बार हो चुकी केबल चोरी</strong><br />सूत्रों के अनुसार टावर ऑफï लिबर्टी की लाइटों की नीबे लगी केबल व पैनल कई बार चोरी हो चुके हैं। जिनके संबंध में केडीए की ओर से पुलिस में कई बार शिकायत दी जा चुकी है। लेकिन न तो चोरों के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई और न ही लाइटें चालू। नतीजा शहर के बीच का यह आकर्षण अंधेरे में डूबा हुआ है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />एरोड्राम के टावर की लाइटें लम्बे समय से बंद हैं। मैने भी इन्हें देखा है। इन लाइटों को चालू करने के संबंध में अधिकारियों से चर्चा भी हो चुकी है। इन लाइटों को चालू करने के लिए अलग सिस्टम पर विचार किया जा रहा है। जिससे बार-बार ऊपर की तरफ नहीं जाना पड़े। नीचे से ही स्थायी समाधान हो सके। शीघ्र ही इन लाइटों को चालू करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं।<br /><strong>-बचनेश कुमार अग्रवाल, आयुक्त कोटा विकास प्राधिकरण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 15:16:21 +0530</pubDate>
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                <title>अब नहीं होगी रोड लाइटों में भ्रम की स्थिति, केडीए लगा रहा नई लाइटें</title>
                                    <description><![CDATA[लाइट खराब होने पर निगम और केडीए के बीच जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं रहती।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/no-more-confusion-regarding-streetlights/article-152613"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(8)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में हजारों की संख्या में रोड लाइटें तो लगी हुई हैं लेकिन उन लाइटों के खराब या बंद होने पर सही करने में नगर निगम व केडीए में भ्रम की स्थिति रहती है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।शहर में आधा एरिया नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में हैं और आधा एरिया कोटा विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में। पुराना शहर अधिकतर नगर निगम क्षेत्र में आता है और नए कोटा शहर का अधिकतर क्षेत्र केडीए में आता है। शहर में वैसे तो मेन रोड व डिवाइडर साइट पर अधिकतर लाइटें केडीए ने लगाई हैं और गलियों व वार्डों में नगर निगम ने। लेकिन कई इलाके ऐसे हैं जहां कहीं निगम ने तो कहीं केडीए ने सुविधा की दृष्टि से लाइटें तो लगा दी लेकिन उनके खराब होने पर दोनों ही विभागों में भ्रम की स्थिति रहती है कि लाइट किस विभाग की है। उसे कौन सही करेगा। ऐसे में शिकायतकर्ता से वहां की लोकेशन व फोटो समेत कई तरह की जानकारी ली जाती है। उसके आधार पर तय होता है कि लाइट किस एरिया में है और वह किसके अधिकार क्षेत्र में है। जिससे उन बंद व खराब लाइटों को सही करने में काफी समय तक लग जाता है। लेकिन अब इस भ्रम की स्थिति को समाप्त किया जा रहा है।</p>
<p><strong>केडीए लगा रहा नई लाइटें</strong><br />कोटा विकास प्राधिकरण के अधिशाषी अभियंता(विद्युत) ललित मीणा ने बताया कि दोनों विभागों के बीच की इस भ्रम वाली स्थिति को समाप्त किया गया है। इसके लिए अब केडीए की ओर से जो भी नई रोड लाइटें लगाई जा रही हैं वह गोल्डन रंग की है। खम्बे तो एक जैसे हो सकते हैं लेकिन उनके ऊपर की तरफ लाइटें व आसपास का रंग गोल्डन रखा गया है। जिससे दूर से ही देखकर पता चल जाएगा कि ये लाइटें केडीए की है। साथ ही इन पर ऊपर की तरफ केडीए लिखा भी गया है।</p>
<p><strong>चोरी होने पर भी पहचान होगी आसान</strong><br />अधिशाषी अभियंता मीणा ने बताया कि शहर में बड़ी संख्या में रोड लाइटें चाहे वे सजावटी हों या सामान्य चोरी हो गई है। लाइटें चोरी होने के बाद भी पता नहीं चलता कि ये लाइटें किसकी हैं। लेकिन इन लाइटों पर केडीए लिखा गया है। जिससे इनके चोरी होने पर आसानी से पहचान हो सकेगी कि ये लाइटें केडीए की है।</p>
<p>जानकारी के अनुसार एसपी ऑफिस चौराहे से लेकर स्टेशन की तरफ जाने वाले रास्ते, जेडीबी कॉलज रोड, नयापुरा समेत कई जगह से तो रोड लाइटें चोरी हो चुकी हैं। यहां तक कि डेकोरेटिव लाइटें तक चोरी हो गई है। जिससे लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी सड़कों पर अंधेरा ही छाया हुआ है।</p>
<p><strong>शहर में ऐसी 500 लाइटें लगाई</strong><br />केडीए अभियंता ने बताया कि शहर में अब नई लाइटें ही लगाई जा रही है। अब तक ऐसी करीब 500 रोड लाइटें लगाई जा चुकी हैं। जिनमें रायपुरा से कैथून रोड, के. पाटन तिराहे से जैन मंदिर तक और बारां रोड समेत कई जगह पर इस तरह की लाइटें लगाई गई हैं।</p>
<p><strong>निगम की करीब 56 हजार लाइटें</strong><br />इधर नगर निगम के अधिशाषी अभियंता(विद्युत) सचिन यादव ने बताया कि कोटा शहर में नगर निगम की करीब 56 हजार रोड लाइटें लगी हुई हैं। समय-समय पर इन लाइटों के बंद व खराब होने पर मेंटेनेंस की जा रही है। फिलहाल शहर में अधिकतर रोड लाइटें एलईडी ही हैं। जिससे कम से कम बिजली में अधिक से अधिक रोशनी लोगों को मिल सके।</p>
<p><strong>एसपी को लिखा है पत्र</strong><br />कोटा आने के बाद अधिकतर यही सुनाई में आता है कि रोड लाइटें अधिक चोरी हो रही है। कई जगह से लाइटें चोरी होने के मामले में तो पुलिस को फोटो व वीडियो तक उपलब्ध करवाए जा चुके हैं। यहा तक कि एसपी को भी पत्र लिखकर लाइटें व अन्य सामान चोरी के मामले में कार्रवाई करने के संबंध में कहा गया है। अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।<br /><strong>- बचनेश कुमार अग्रवाल, आयुक्त, कोटा विकास प्राधिकरण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 15:12:25 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>नगर निगम कैथून में भी बनाएगा गौशाला, आयुक्त ने अधिकारियों के साथ देखी जमीन</title>
                                    <description><![CDATA[कैथून नगर पालिका और तीन पंचायतें नगर निगम में शामिल हुई है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/municipal-corporation-to-establish-a-gaushala-in-kathun-as-well/article-152080"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(2)46.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की ओर से कैथून में भी गौशाला बनाने की योजना है। इसके लिए नगर निगम आयुक्त ने अधिकारियों के साथ कई जगह पर जमीन देखी है।नगर निगम आयुक्त ओम प्रकाश मेहरा ने सोमवार को कैथून क्षेत्र का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने नगर पालिका और कोटा विकास प्राधिकरण की कई जमीनों को देखा। जहां गौशाला बनाई जा सकती है।</p>
<p>आयुक्त ओम प्रकाश मेहरा ने बताया कि कैथून नगर पालिका और तीन पंचायतें नगर निगम में शामिल हो गई है। ऐसे में यहां भी बड़ी संख्या में निराश्रित मवेशी हैं। उन्हें यहां से पकड़कर बंधा धर्मपुरा स्थित निगम की गौशाला में ले जाना काफी भारी पड़ रहा है। कैथून से गौशाला की दूरी करीब पचास किमी. है। ऐसे में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कैथून में ही गौशाला की संभावना तलाशने के निर्देश दिए थे। उनके निर्देशों की पालना में ही यहां कई जगह पर जमीन देखी है।</p>
<p><strong>एक हजार गायों के लिए बनेगी गौशाला</strong><br />आयुक्त मेहरा ने बताया कि कैथून में करीब एक हजार गायों को रखने के लिए गौशाला बनाने की योजना है। जिससे इस क्षेत्र से निराक्षित गौवंश को पकड़कर यहीं रखा जा सकेगा। उन्हें बंधा गौशाला नहीं ले जाया जा सकेगा। इसके लिए उतनी बड़ी जमीन की तलाश की जा रही है। कुछ जमीन देखी हैं उन पर विचार कर निर्णय किया जाएगा।</p>
<p><strong>बंधा गौशाला में होंगे एक करोड़ के काम</strong><br />इधर नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में करीब एक करोड़ रुपए के कार्य करवाए जाएंगे।आयुक्त मेहरा ने बताया कि वर्तमान में करीब 28 लाख रुपए के टेंडर तो हो चुके हैं। 80 लाख रुपए और स्वीकृत करवाए जाएंगे। जिनसे यहां शेड, पानी की टंकी, प्रशासनिक भवन, टॉयलेट्स , चार दीवारी निर्माण समेत अन्य सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।</p>
<p><strong>डेढ़ हजार की क्षमता होगी विस्तारित गौशाला की</strong><br />आयुक्त मेहरा ने बताया कि निगम की बंधा गौशाला में वर्तमान में करीब दो हजार गौवंश हैं। वहीं इसके पास ही करीब 25 बीघा जमीन केडीए से प्राप्त हुई है। जिसका विस्तार किया जा रहा है। इस विस्तारित गौशाला में भी करीब डेढ़ हजार गौवंश को रखा जाएगा। इस तरह से बंधा गौशाला की क्षमता भी बढ़ जाएगा।</p>
<p><strong>गर्मी से बचाव के इंतजाम किए जा रहे</strong><br />शहर में पड़ रही भीषण गर्मी का असर जहां इंसानों पर हो रहा है। वहीं जानवर भी इससे अधूते नहीं है। नगर निगम की बंधा धर्मपुरा गौशाला और किशोरपुरा स्थित कायन हाउस में गौवंश को गर्मी से बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। कायन हाउस में ग्रीन नेट लगाई गई है। जबकि गौशाला में पुरानी नेट तो लगी हुई है। नई ग्रीन नेट भी लगाई जा रही है। साथ ही गौशाला में अलग-अलग बाड़ों के हिसाब से 20से अधिक पंखे व कूलर भी लगाए गए हैं।</p>
<p> शहर की तुलना में बंधा की तरफ तापमान अधिक रहता है। ऐसे में जहां गौवंश को गर्मी से राहत के इंतजाम किए जा रहे हैं। वहीं ट्रेक्टर से फव्वारा पद्धति से गौवंश पर व बाड़ों में पानी का छिड़काव भी किया जा रहा है।<br /><strong>-जितेन्द्र सिंह ,पूर्व अध्यक्ष गौशाला समिति</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 15:00:28 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>रनवे के काम में तेजी, लेकिन फेज दो में सिटी साइड का काम अब तक शुरू भी नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट : शिलान्यास के डेढ़ माह बाद भी शुरू नहीं हुआ फेज दो का निर्माण कार्य।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/runway-work-accelerates--but-phase-ii--city-side--construction-has-not-even-started-yet/article-152074"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(1)57.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा-बूंदी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का शिलान्यास हुए डेढ़ माह से अधिक हो गया लेकिन इसके फेज दो सिटी साइट का काम शुरू नहीं हो पाया है। निर्माण कम्पनी को 18 माह में यह काम पूरा करना है। दिसम्बर 2027 में इस एयरपोर्ट से उड़ान भरने का दावा किया जा रहा है।<br />शम्भूपुरा में 440.646 हैक्टेयर भूमि में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का निर्माण किया जाना है। यह काम दो फेज में होना है। पहले फेज में रनवे साइट का और दूसरे में सिटी साइट यानि बिल्डिंग व पार्किंग का निर्माण किया जाना है। रनवे का काम नवम्बर 2025 में शुरू कर दिया गया है।<br />फेज एक में रनवे साइट पर बीच में आ रहे पावर ग्रिड के एक टावर को ही शिफ्ट किया जा सका है। एयरपोर्ट की भूमि से करीब 88 टावर शिफ्ट किए जाने हैं। इसकी प्रक्रिया चल रही है। जहां टावर शिफ्ट किए जाने हैं उस जगह की क्लीयरेंस मिल चुकी है। टावर शिफ्टिंग के लिए अधिग्रहित की गई जमीन का मुआवजा देने का काम भी केडीए की ओर से किया जा रहा है। कई लोगों को तो मुआवजा राशि के चैक शिविर के माध्यम से दिए भी जा चुके हैं।</p>
<p><strong>फेज दो का टेंडर हुआ फाइनल</strong><br />एयरपोर्ट अथोरिटी आॅफ इंडिया की ओर से 1507 करोड़ की लागत से एयरपोर्ट का निर्माण किया जाना है। इसके लिए फेज एक का काम तो करीब 283 करोड़ की लागत से चल रहा है। वहीं फेज दो का टेंडर तो लगभग फाइनल हो गया है। करीब 393 करोड़ से इस काम को दिल्ली की आहलूवालिया कांट्रक्ट प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी को करना है।</p>
<p><strong>मौके पर स्थापित हुई लैब</strong><br />एयरपोर्ट निर्माण के लिए उपयोग में होने वाली सामग्री की जांच के लिए निर्माण स्थल पर ही कम्पनी ने प्रयोगशाला स्थापित की है।अब निर्माण सामग्री की जांच के लिए हाल ही में करीब 800 करोड़ रुपए में थर्ड पार्टी क्वालिटी एश्योरेंस किया गया है। यह काम आरटीयू को दिया गया है। यहां की टीम को इस काम को 20 माह में पूरा करना है।</p>
<p><strong>पानी की लाइन का काम भी शुरू नहीं</strong><br />एयरपोर्ट तक पानी पहुंचाने का काम जलदाय विभाग को करना है। इसके लिए सकतपुरा स्थित मिनी अकेलगढ़ से एयरपोर्ट तक करीब 21 कि.मी. लम्बी पाइप लाइन बिछानी है। इसके लिए एएआई और जलदाय विभाग के बीच करीब 17.46 करोड़ रुपए का एमओयू हुआ है। करीब 6 माह पहले 30 अक्टूबर 2025 को एमओयू होने के बाद भी अभी तक इसका काम भी शुरू नहीं हो सका है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कोटा-बूंदी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का शिलान्यास हो गया है। इसके पहले फेज में रनवे का काम तेजी से किया जा रहा है। इसके सबग्रेड का काम चल रहा है। बरसात के बाद इसके ऊपरी हिस्से का काम शुरू किया जाएगा। वहीं फेज दो का टेंडर तो हो गया है। निर्माण कम्पनी ने मौके पर अपना आॅफिस व लैब समेत अन्य सिस्टम स्थापित करना शुरू कर दिया है। सॉयल टेस्टिंग का काम किया जा रहा है। फेज दो का काम भी शीघ्र ही शुरू हो जाएगा। प्रयास है कि समय पर इस काम को पूरा किया जा सके।<br /><strong>- सुनील प्रसाद, जीएम प्रोजेक्ट, कोटा-बूंदी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 14:59:29 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का : दूसरे दिन 1031 बीघा जमीन को कराया अतिक्रमण मुक्त, दो दिन में 25 सौ बीघा जमीन से हटाए अतिक्रमण</title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति ने केडीए की जमीन पर अतिक्रमण का मुद्दा प्रकाशित किया था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---on-the-very-next-day--1-031-bighas-of-land-were-cleared-of-encroachments--in-just-two-days--encroachments-were-removed-from-a-total-of-2-500-bighas-of-land/article-151826"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/asar-khabar-ka---dusre-din-1031-bigha-zameen-ko-kraya-atikraman-mukt,-2-din-me-25-so-bigha-zameen-s-htaye-atiktraman...kota-news-27.04.2026.jpg.jpeg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा विकास प्राधिकरण द्वारा लगातार दूसरे दिन शनिवार को भी रामपुरिया गांव में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की गई। जिसमें 1031 बीघा जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया। दो दिन में करीब 25 सौ बीघा जमीन से अतिक्रमण हटाया जा चुका है। केडीए सचिव मुकेश कुमार चौधरी ने बताया कि केडीए की ओर से रीको को करीब 4 हजार बीघा से अधिक जमीन आवंटित की गई है। करीब 431 करोड़ कीमत की इस जमीन को औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के लिए आवंटित किया गया है। लेकिन उस जमीन पर बरसों से कई लोगों ने पक्के अतिक्रमण किए हुए थे। केडीए की ओर से एक दिन पहले करीब 1296 बीघा जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया थाो। जिसकी कीमत 112 करोड़ रुपए थी।</p>
<p><strong>इन्होंने की कार्रवाई</strong></p>
<p>केडीए तहसीलदार सुरेन्द्र शर्मा व ललित किशोर नागर ,भू-अभिलेख निरीक्षक मुरलीधर पारेता, हरीश कुमार गुप्ता, हरीशचन्द्र प्रजापति, विवेक पाल सिंह, भवानी शंकर कारपेन्टर, पटवारी रामनिवास मेघवाल, अमित कुमार, हितेश माहेश्वरी, संदीप गोचर, रुचिता यादव, रोहिणी महावर, प्रफुल्ल कुमार गोयल, सहायक अभियंता राहुल जैन के साथ पुलिस उप अधीक्षक तालेडा राजेश टेलर, थानाधिकारी तालेडा अरविन्द भारद्वाज, थानाधिकारी नमाना माया, थानाधिकारी बून्दी नवल शर्मा और प्राधिकरण के एएसआई सत्य नारारण मीणा समेत पुलिस जाप्ते ने मौके पर पहुंचकर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की।</p>
<p><strong>रीको प्रबंधक के साथ लगाए जमीन पर निशान</strong></p>
<p>कोटा विकास प्राधिकरण के आयुक्त बचनेश कुमार अग्रवाल के निर्देशानज़्ुसार उस जमीन से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है। शनिवार को प्राधिकरण के अतिक्रमण निरोधक दस्ता और थाना तालेडा, थाना नमाना व बून्दी का जाप्ता मौके पर पहुंचा। पहल तो क्षेत्रीय प्रबन्धक रीको संजीव सक्सेना के साथ भूमि के निशानात लगाए गये उसके बाद 165 हैक्टेयर यानि 1031 बीघा भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया।</p>
<p><strong>अतिक्रमियों ने कर रखा था पका अतिक्रमण</strong></p>
<p>सचिव चौधरी ने बताया कि अतिक्रमियो द्वारा पत्थर कोट, पक्के स्ट्रक्चर, पक्के बाडे व पक्की चार दीवारी और मकान बनाकर अवैध अतिक्रमण किया हुआ था। जिसको प्राधिकरण के अतिक्रमण निरोधक दस्ते द्वारा हटाया गया। ग्राम रामपुरिया व पीली की खान में अभी तक करीब 2500 बीघा से प्राधिकरण द्वारा अतिक्रमण हटाकर रीको को सम्भलाया गया।</p>
<p><strong>अतिक्रमियों के खिलाफ होगी एफआईआर दर्ज</strong></p>
<p>आयुक्त बचनेश अग्रवाल द्वारा बताया गया कि अतिक्रमण हटाने का अभियान निरन्तर जारी रहेगा, साथ ही अवगत कराया कि जिस भी अतिक्रमी ने कोटा विकास प्राधिकरण की भूमि पर कब्जा कर रखा है, वे स्वत: ही अपना कब्जा हटा ले अन्यथा आगे से अतिक्रमी के विरूद्ध सम्बन्धित थाने में एफआईआर दर्ज की जाएगी।</p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था अतिक्रणण का मुद्दा प्रकाशित</strong></p>
<p>गौरतलब है कि दैनिक नवज्योति ने केडीए की जमीन पर अतिक्रमण का मुद्दा प्रकाशित किया था। समाचार पत्र में 18 अप्रैल को पेज दो पर ' करोड़ों की सरकारी जमीन अभी भी अतिक्रमियों के कब्जे में शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें बताया गया था कि केडीए की ओर से छोटी-छोटी जगह से अतिक्रमण हटाए जा रहे हैं। जबकि करोड़ों की सैकड़ों बीघा जमीन पर अभी भी अतिक्रमियों का कब्जा है। समाचार प्रकाशित होने के बाद केडीए प्रशासन हरकत में आया। इसके बाद पिछले दो दिन से इतनी बड़ी कार्रवाई करते हुए 25 सौ बीघा जमीन को तो अतिक्रमण मुक्त कराया जा चुका है। तहसीलदार सुरेन्द्र शर्मा ने बताया कि अभी भी करीब 15 सौ बीघा जमीन से अतिक्रमण हटाकर रीको को हैंड ओवर करनी है। इसके अलावा अन्य जगहों पर भी अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 14:25:57 +0530</pubDate>
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                <title>करोड़ों की सरकारी जमीन अभी भी अतिक्रमियों के कब्जे में, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[केडीए लगातार कार्रवाई कर करवा रहा जमीनों को अतिक्रमण मुक्त।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/government-land-worth-crores-still-under-the-control-of-encroachers/article-150917"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(5)13.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। <strong>केस एक:</strong> कोटा विकास प्राधिकरण के अतिक्रमण निरोधक दस्ते ने 13 अप्रैल को नदी पार क्षेत्र के तीरथ गांव में कार्रवाई करते हुए करीब 22 करोड़ रुपए की सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया है।</p>
<p><strong>केस दो: </strong>केडीए की अतिक्रमण निरोधक टीम ने 11 अप्रैल को नदी पार क्षेत्र के नांता, बालिता, गिरधरपुरा, गामछ में अतिक्रमण के खिलाफ कर करीब 10 करोड़ की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया।</p>
<p><strong>केस तीन:</strong> कोटा विकास प्राधिकरण की अतिक्रमण निरोधक टीम ने इसी साल 16 जनवरी को तालेड़ा क्षेत्र के तुलसी गांव में केडीए की जमीन पर हो रहे अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की। जिससे करीब 2.50 करोड़ की जमीन को अतिक्रमियों के कब्जे से मुक्त कराया।</p>
<p>ये तो वे उदाहरण हैं जो हाल ही में कोटा विकास प्राधिकरण के अतिक्रमण निरोधक दस्तों ने कार्रवाई करते हुए सरकारी जमीनों को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। इनके अलावा भी शहर में सभी क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में ऐसी सरकारी जमीनें हैं जिन पर अभी भी अतिक्रमियों के कब्जे हैं। करोड़ों-अरबों रुपए की बेशकीमती जमीनों पर बरसों से अतिक्रमण हो रहा है। जिन पर न तो अधिकारियों का ध्यान रहा और न ही पुलिस का। शहर में सबसे अधिक सरकारी जमीनों पर नदी पार क्षेत्र में अतिक्रमण व कब्जे हो रहे हैं।</p>
<p><strong>देवली अरब समेत कई जगह पर हुई कार्रवाई</strong><br />केडीए की ओर से पिछले कुछ समय से अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। यह कार्रवाई स्थायी रूप से और सरकारी व केडीए की जमीनों पर किए गए बरसों से अतिक्रमण के खिलाफ की जा रही है। केडीए की ओर से 9 अप्रैल को देवली अरब क्षेत्र में कार्रवाई कर 0.16 हैक्टेयर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया। जिसकी कीमत करीब दो करोड़ रुपए से अधिक है। इसी तरह से खेड़ा जगपुरा में 5.38 हैक्टेयर यानि करीब 33 बीघा जमीन को मुक्त कराया। इसकी कीमत करीब 15 करोड़ रुपए बताई जा रही है। वहीं कंसुआ के शिव सागर थेगड़ा में भी सरकारी भूमि पर किए गए अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई कर जमीन को मुक्त कराया। जिसकी कीमत करीब दो करोड़ रुपए है।</p>
<p><strong>राम नगर में 35 भूखंड करवाए मुक्त</strong><br />केडीए अधिकारियों के अनुसार अतिक्रमण के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। उसी के तहत गत दिनों राम नगर पत्थर मंडी में प्राधिकरण की योजना क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए करीब 35 भूखंडों व पार्क को अतिक्रमण से मुुक्त करवाया। जिनकी कीमत करीब 40 करोड़ रुपए से अधिक है।वहीं धाकडख़ेड़ी व कंवरपुरा में भी बरसों से हो रहे अतिक्रमण को हटाकर 25 करोड़ की भूमि को मुक्त कराया गया।</p>
<p><strong>नए गांव व एरिया शामिल होने से मिली जमीन पर है अतिक्रमण</strong><br />केडीए के तहसीलदार सुरेन्द्र शर्मा ने बताया कि नगर विकास न्यास से कोटा विकास प्राधिकरण बनने के बाद शहर व आसपास के कई गांव व नए एरिया शामिल हुए हैं। जिनकी जमीन भी केडीए के खाते में आई है। ऐसे में वहां भी बड़ी संख्या में अतिक्रमण हो रहे हैं। शम्भूपुरा व बूंदी तक का क्षेत्र केडीए में शामिल हुआ है। यह पृूरा क्षेत्र नदी पार में आता है। ऐसे में इस क्षेत्र में ही करीब 12 हजार बीघा नई जमीन शामिल होने से यहां सबसे अधिक अतिक्रमण हो रहा है। इनके अलावा अन्य क्षेत्रों में भी स्थायी अतिक्रमण हो रहे हैं। जिनके खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />केडीए सीमा में शामिल हुए नए एरिया में अधिक अतिक्रमण के मामले आ रहे हैं। केडीए टीम द्वारा अतिक्रणम के संबंध में नियमित सर्वे किया जा रहा है। उस सर्वे व अन्य लोगों के माध्यम से अतिक्रमण की जानकारी मिल रही है। उन जानकारियों के आधार पर हर महीने का शेड्यूल बनाकर अतिक्रमण के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। हाल ही में की गई कार्रवाई से करोड़ों की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है। उन जमीनों पर केडीए की ओर से प्लानिंग की जाएगी। जिससे केडीए की आय हो सके।<br /><strong>- मुकेश कुमार चौधरी, सचिव कोटा विकास प्राधिकरण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 15:20:42 +0530</pubDate>
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                <title> रिवर फ्रंट पर बढ़ा शादियों का क्रेज, दिसम्बर तक फुल</title>
                                    <description><![CDATA[किराया  दो गुना से अधिक करने के बाद भी यहां लगातार आयोजन हो रहे हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/weddings-on-the-river-front-are-on-the-rise--full-until-december/article-145820"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/200-x-60-px)-(2)11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। चम्बल नदी के किनारे बना रिवर फ्रंट पर्यटन स्थल के रूप में तो अपनी पहचान बना ही रहा है। वहीं दूसरी तरफ यह नया वेडिंग डेस्टीनेशन भी बन रहा है। रिवर फ्रंट पर शादियों का क्रेज लगातार बढ़ता ही जा रहा है। यहां दिसम्बर तक शादियों के लिए अभी से बुकिंग हो गई है।कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से करीब 1445 करोड़ रुपए की लागत से बने रिवर फ्रंट के बैराज साइड पूर्वी छोर पर तो पर्यटकों की संख्या काफी अच्छी है। यहां दो सौ रुपए प्रति व्यक्ति प्रवेश टिकट होने के बाद भी अधिकतर लोग इसी तरफ उसे देखने के लिए जा रहे हं। जबकि इसके सकतपुरा साइड पश्चिमी छोर पर प्रवेश टिकट मात्र 50 रूपए किया हुआ है। उसके बाद भी वहां पर्यटकों की संख्या अपेक्षाकृत काफी कम है।</p>
<p><strong>पश्चिमी छोर के शौर्य घाट पर आयोजन</strong><br />रिवर फ्रंट के पश्चिमी छोर स्थित शौर्य घाट पर ही अधिकतर विवाह के आयोजन हो रहे हैं। यहां काफी बड़ा एरिया है। जहां एक बार में दो हजार से अधिक लोग एक साथ विवाह समारोह में शामिल हो सकते हैं। हालांकि पहले यहां विवाह आयोजन करने पर किराया कम था। लेकिन आयोजनों के अधिक होने पर केडीए ने इसका किराया करीब दो गुना से अधिक कर दिया है। उसके बाद भी यहां लगातार आयोजन हो रहे हैं।</p>
<p><strong>शौर्य घाट आयोजनों के लिए ही </strong><br />केडीए की ओर से शौर्य घाट को अधिकतर आयोजनों के लिए रिजर्व कर दिया है। यहां शादी समारोह व अन्य आयोजनों के साथ ही कोटा महोत्सव, ट्रेवल मार्ट या अन्य सांस्कृतिक आयोजन भी इसी तरफ हो रहे हैं। यहां बड़ी एलईडी स्क्रीन भी लगी हुई है। जिससे भारत के मैच का सीधा प्रसारण भी लोग देख सकते हैं।</p>
<p><strong>केडीए के लिए नुकसान का सौदा</strong><br />रिवर फ्रंट बनने के बाद से अभी तक केडीए के लिए नुकसान का ही सौदा रहा है। केडीए इसके संचालन पर जितना खर्चा कर रहा है। उससे आधी भी कमाई नहीं हो रही है। हालांकि यहां पर्यटकों की संख्या पहले से बढ़ी है। साथ ही वाटर पार्क, नाव व कई सांस्कृतिक कार्यक्रम और संग्रहालय भी बना हुआ है। साथ ही शादी समारोह व अन्य आयोजनों से भी आय हो रही है। लेकिन यहां बनी दुकानों के शुरू नहीं होने और होटल रेस्टोरेंट नहीं होने से लोगों को खाने-पीने की वस्तुएं नहीं मिल पा रही है। इस कारण से इसका संचालन भारी पड़ रहा है। हालांकि केडीए की ओर से इसका संचालन निजी फर्म के माध्यम से करवाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए दो बार टेंडर हो चुके हैं। लेकिन अभी तक कोई फर्म इसके लिए योग्य साबित नहीं हुई है।</p>
<p><strong>पहले से बढ़ा है लोगों का क्रेज</strong><br />कोटा विकास प्राधिकरण के अधिशाषी अभियंता ललित कुमार मीणा ने बताया कि रिवर फ्रंट के शौर्य घाट पर शादी समारोह के आयोजन करने के प्रति लोगों का क्रेज पहले से अधिक हुआ है। हालांकि शुरूआत में इसका किराया काफी कम था। लेकिन आयोजनों को देखते हुए कुछ समय पहले ही इसका किराया बढ़ाया है। उसके बाद भी लोगों का रूझान अच्छा है। यहां रविवार को भी विवाह समारोह का आयोजन हुआ। इस माह में हर दो से तीन दिन में एक आयोजन के लिए बुकिंग है। जबकि साल के अंत दिसम्बर तक शादियों की अभी से बुकिंग हो गई है। इसका कारण चम्बल नदी का किनारा, हैरिटेज लुक, पार्किंग की सुविधा और एक नई जगह होने से लोगों के लिए भी इसे देखने का उत्साह रहता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 14:55:34 +0530</pubDate>
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                <title>सांप मारने को लाठी पीट  रहे, वह भी आधी अधूरी</title>
                                    <description><![CDATA[ एक बार फिर नोटिस देकर की इतिश्री-हादसों के कुछ दिन तक ही नजर आती है अधिकारियों की सक्रियता।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/they-re-using-sticks-to-kill-a-snake--and-that-too-is-half-hearted/article-144681"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-60-px)13.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।<strong> केस एक :</strong> जवाहर नगर थाना क्षेत्र स्थित इंद्र विहार में एक तीन मंजिला रेस्टोरेंट के ढहने से दो लोगों की मौत के बाद नगर निगम व कोटा विकास प्राधिकरण कुछ दिन तक तो सक्रिय नजर आया। अवैध निर्माण के नोटिस भी दिए गए। लेकिन उसके बाद केडीए ने तो किसी के भी खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई तक नहीं की। जबकि निगम ने की चार अवैध निर्माण भवनों को सीज करने के बाद आगे कोई कार्रवाई नहीं की।</p>
<p><strong>केस दो : </strong>रेस्टोरेंट हादसे के बाद नगर निगम का फायर अनुभाग भी सक्रिय हुआ। फायर टीम ने नए कोटा शहर के कोचिंग इलाकों में तीन से चार दिन तक तो अभियान चलाकर करीब डेढ़ सौ से अधिक नोटिस जारी किए। लेकिन उसके बाद उन नोटिसों की पालना हुई या नहीं। किसी के भी खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।</p>
<p><strong>स्कूल हादसे के बाद भी चेते थे अधिकारी:</strong> इसी तरह बरसात के समय में झालावाड़ जिले के पिपलोदी गांव में एक सरकारी स्कूल की छत ढहने से कई बच्चों की मौत हो गई थी। उस हादसे के बाद सरकार व प्रशासन और शिक्षा विभाग हरकत में आया। आनन-फानन में सभी जर्जर स्कूलों का सर्वे कराया गया। उनमें बच्चों को बैठने से रोका गया। सरकार ने जर्जर स्कूल भवनों के लिए बजट भी पारित कर दिया। लेकिन हुआ कुछ भी नहीं। अभी तक भी किसी स्कूल की मरम्मत तक नहीं हुई है। ये तो उदाहरण मात्र हैं उस स्थिति को बताने के लिए जो कुछ दिन पहले शहर में उत्पन्न हुई थी। हालत यह है कि हर बार किसी भी तरह का बड़ा हादसा होने के बाद प्रशासन उस समय या कुछ दिन तक तो सक्रिय नजर आता है लेकिन उसके बाद फिर वही ढाक के तीन पात वाली स्थिति हो जाती है।</p>
<p><strong>केडीए ने दिए सौ से अधिक नोटिस</strong><br />रेस्टोरेंट हादसा होने के बाद जांच में पता चला कि जो रेस्टोरेंट ध्वस्त हुआ था उसका निर्माण अवैध था। उसके पास के अन्य 5 भवन भी अवैध निर्माण की बुनियाद पर खड़े हुए थे। उसे देखते हुए कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से नए कोटा शहर के कोचिंग एरिया जवाहर नगर, इंद्र विहार, तलवंडी, महावीर नगर, के अलावा कुन्हाड़ी लैंड मार्क और बोरखेड़ा स्थित नयानोहरा समेत कई जगह पर बहुमंजिला इमारतों को अवैध निर्माण मानते हुए नोटिस जारी किए। जानकारी के अनुसार करीब 100 से 125 नोटिस जारी किए। लेकिन उन नोटिसों को देने के बाद उन पर आगे क्या कार्रवाई की गई। इस बारे में कोई भी अधिकारी बोलने को तैयार ही नहीं है।</p>
<p><strong>अग्नि सुरक्षा नहीं होने पर दिए नोटिस</strong><br />इसी तरह नगर निगम के फायर अनुभाग की ओर से हॉस्टलों व रेस्टोरेंट समेत अन्य बहुमंजिला उमारतों में आग से सुरक्षा की जांच की गई। उनमें से कहीं फायर सिस्टम नहीं था तो कहीं कार्यशील अवस्था में नहीं थे। कहीं आग से सुरक्षा के नाम पर मात्र दिखावे के छोटे उपकरण रखे हुए थे। ऐसे में नगर निगम के फायर अनुभाग की ओर से अभियान चलाकर करीब 150 से अधिक नोटिस दिए गए। उन नोटिसों के बाद उनकी पालना हुई या नहीं। भवन मालिकों ने फायर सेफ्टी सिस्टम लगाए या नहीं। इसकी कोई जानकारी अभी तक नहीं है।</p>
<p><strong>फिर किसी हादसे का इंतजार</strong><br />शहर में किसी तरह का हादसा होने के कुछ दिन बाद तक तो सभी विभाग व जिला प्रशासन सक्रिय रहता है। फिर चाहे संभागीय आयुक्त हो या जिला कलक्टर। सभी ने बैठकें लेकर अधिकारियों को निर्देश दिए कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा नहीं हो। इसके लिए जो भी संभव हो कार्रवाई की जाए। अधिकारियों के निर्देश के बाद संबंधित विभाग हरकत में आए और कुछ दिन तक ऐसा लगा मानो अब शहर में ऐसी कार्रवाई होगी जिससे अवैध निर्माण व अतिक्रमण करने वालों को सबक मिलेगा। जबकि ऐसा लगता है कि प्रशासन व संबंधित विभाग फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं। उसके बाद ही सख्त कार्रवाई होगी।</p>
<p><strong>17 दिन हुए हादसे को</strong><br />दिल्ली स्पाइसी रेस्टोरेंट को ध्वस्त हुए 17 दिन का समय हो गया है। 8 फरवरी की रात को हुए हादसे में एक कोचिंग छात्र व एक युवक की मौत हो गई थी। जबकि एक महिला के मलबे में दबने से उनका पैर इतना जख्मी हो गया था कि उसे काटना ही पड़ा। विभागीय व भवन मालिकों की लापरवाही का खामियाया बेगुनाहों को भुगतना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />इंद्र विहार में जिस रेस्टोरेंट का अवैध निर्माण था। उस समेत आस-पास के 5 भवनों को नोटिस दिया गया था। जिनमें से एक जर्जर भवन के मालिक ने तो स्वयं ही उसे ढहा दिया था। जबकि अन्य 4 को सीज कर दिया है। वहीं फायर के नोटिसों की पालना करवाई जाएगी। पालना नहीं करने वालों के खिलाफ निर्धारित समय के बाद कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>- ओम प्रकाश मेहरा, आयुक्त, नगर निगम कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Feb 2026 14:24:55 +0530</pubDate>
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                <title>बायो मेट्रिक मशीन में चेहरा दिखाने पर ही खुलेगा दरवाजा, बाहर से आने वाले लोगों पर होगा नियंत्रण</title>
                                    <description><![CDATA[केडीए की नई बिल्डिंग में लागू हुआ विजिटर्स मैनेजमेंट सिस्टम।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/doors-will-only-open-after-showing-their-faces-in-a-biometric-machine/article-143786"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/12200-x-600-px)-(1)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । कोटा विकास प्राधिकरण की नई विस्तारित बिल्डिंग स्थित कार्यालय में अधिकारियों व कर्मचारियों से मिलने जाने वाले बाहरी लोगों को अब बायो मेट्रिक मशीन में चेहरा दिखाना व अपना नाम पता नोट करवाना आवश्यक होगा। उसके बाद ही प्रवेश द्वार खुलेगा। केडीए की ओर से नई बिल्डिग में बुधवार से विजिटर्स मैनेजमेंट सिस्टम को लागू किया गया है। हालांकि इसका ट्रायल तो पिछले करीब एक सप्ताह से अधिक समय से चल रहा था। उसके सही तरह से काम करने के बाद बुधवार से उसे लागू कर दिया गया।</p>
<p><strong>अंदर जाते व बाहर निकलते समय दिखाने होंगे चेहरे</strong><br />सामान्य तौर पर सरकारी व निजी कार्यालयों में बायो मेट्रिक मशीन का उपयोग वहां काम करने वाले कर्मचारियों व अधिकारियों के लिए किया जाता है। लेकिन केडीए की नई बिल्डिंग में इसे कर्मचारियों व अधिकारियों के साथ ही आमजन के लिए भी लागू किया गया है।बाहरी से आने वाले किसी भी व्यक्ति को यदि अधिकारी व कर्मचारी से मिलना है तो सबसे पहले उन्हें कम्प्यूटराइज बायो मेट्रिक कक्ष में बैठे कर्मचारियों को अपना नाम व मोबाइल नम्बर के साथ ही किससे मिलना है उसकी जानकारी देनी होगी। उसे नोट करने के बाद वहां लगी बायो मेट्रिक मशीन में चेहरा दिखाना होगा। जिससे उस व्यक्ति का पंजीयन होगा।उसके बाद मुख्य प्रवेश द्वार के पास लगी मशीन में भी चेहरा दिखाना होगा। वहां से ओके होने के बाद ही दरवाजा खुलेगा। जिससे अंदर प्रवेश किया जा सकेगा। वहीं कामहोने के बाद वापस बाहर आते समय भी गेट के पास अंदर लगी बायो मेट्रिक मशीन में चेहरा दिखाने पर ही गेट खुलेगा। पहले दिन कार्यालय आए लोग इस सिस्टम को देखकर चौक गए। जबकि अधिकतर ने इसकी सराहना की।</p>
<p><strong>गेट पर आॅटोमैटिक लॉक सिस्टम</strong><br />बिल्डिंग में प्रवेश के लिए एक ही मुख्य प्रवेश द्वार है। उसे बायो मेट्रिक मशीन से जोड़ा गया है। साथ ही उसमें आॅटो मेटिक सिस्टम लगाया गया है। बाय मेट्रिक मशीन में चेहरा दिखाने के बाद ही वह गेट खुलगा। हालांकि वहां दो होमगार्ड को लगाया गया है लेकिन वे केवल व्यवस्था की दृष्टि से हैं।विजिटर्स के लिए प्रवेश की व्यवस्था सुबह 11 से शाम 5 बजे तक ही रहेगी।</p>
<p><strong>कर्मचारियों के लिए बायो मेट्रिक उपस्थिति</strong><br />आम आदमी के लिए जहां विजिटर्स मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया गया है। वहीं वहां काम करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए भी बायो मेट्रिक उपस्थिति सिस्टम लागू किया गया है। अधिकारी-कर्मचारियों के भी आते-जाते समय बायो मेट्रिक मशीन से ही उपस्थिति दर्ज होगी।</p>
<p><strong>सीसीटीवी से कवर है पूरा सिस्टम</strong><br />केडीए अधिकारियों का कहना है कि यह पूरा सिस्टम सीसीटीवी कैमरे से कवर है। जिससे इसमें किसी तरह की और किसी के भी द्वारा कोई छेड़छाड़ नहीं की जा सके। इसके लिए दो होमगार्ड विशेष रूप से लगाए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे सिस्टम का संचालन केडीए कर्मचारियों के द्वारा ही किया जा रहा है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कार्यालय की नई बिल्डिग में इस सिस्टम को लागू किया गया है। वहां की व्यवस्थाएं उसके अनुरूप है। इससे अनावश्यक रूप से कार्यालय में आने वाले लोगों पर रोक तो लगेगी ही। साथ ही बाहर से आने वाले लोगों का रिकॉर्ड भी रहेगा। अधिकारियों व कर्मचारियों की बायो मेट्रिक उपस्थिति तो पुरानी बिल्डिंग में भी है। विजिटर्स मैनेजमेंट सिस्टम का ट्रायल कई दिन से चल रहा था। उसे बुधवार से लागू किया गया है। विजिटर्स सुबह 11 से शाम 5 बजे तक ही प्रवेश कर सकेंगे।<br /><strong>- हर्षित वर्मा, उपायुक्त, कोटा विकास प्राधिकरण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Feb 2026 15:22:54 +0530</pubDate>
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