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                <title> रिवर फ्रंट पर बढ़ा शादियों का क्रेज, दिसम्बर तक फुल</title>
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                        <![CDATA[किराया  दो गुना से अधिक करने के बाद भी यहां लगातार आयोजन हो रहे हैं।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/weddings-on-the-river-front-are-on-the-rise--full-until-december/article-145820"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/200-x-60-px)-(2)11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। चम्बल नदी के किनारे बना रिवर फ्रंट पर्यटन स्थल के रूप में तो अपनी पहचान बना ही रहा है। वहीं दूसरी तरफ यह नया वेडिंग डेस्टीनेशन भी बन रहा है। रिवर फ्रंट पर शादियों का क्रेज लगातार बढ़ता ही जा रहा है। यहां दिसम्बर तक शादियों के लिए अभी से बुकिंग हो गई है।कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से करीब 1445 करोड़ रुपए की लागत से बने रिवर फ्रंट के बैराज साइड पूर्वी छोर पर तो पर्यटकों की संख्या काफी अच्छी है। यहां दो सौ रुपए प्रति व्यक्ति प्रवेश टिकट होने के बाद भी अधिकतर लोग इसी तरफ उसे देखने के लिए जा रहे हं। जबकि इसके सकतपुरा साइड पश्चिमी छोर पर प्रवेश टिकट मात्र 50 रूपए किया हुआ है। उसके बाद भी वहां पर्यटकों की संख्या अपेक्षाकृत काफी कम है।</p>
<p><strong>पश्चिमी छोर के शौर्य घाट पर आयोजन</strong><br />रिवर फ्रंट के पश्चिमी छोर स्थित शौर्य घाट पर ही अधिकतर विवाह के आयोजन हो रहे हैं। यहां काफी बड़ा एरिया है। जहां एक बार में दो हजार से अधिक लोग एक साथ विवाह समारोह में शामिल हो सकते हैं। हालांकि पहले यहां विवाह आयोजन करने पर किराया कम था। लेकिन आयोजनों के अधिक होने पर केडीए ने इसका किराया करीब दो गुना से अधिक कर दिया है। उसके बाद भी यहां लगातार आयोजन हो रहे हैं।</p>
<p><strong>शौर्य घाट आयोजनों के लिए ही </strong><br />केडीए की ओर से शौर्य घाट को अधिकतर आयोजनों के लिए रिजर्व कर दिया है। यहां शादी समारोह व अन्य आयोजनों के साथ ही कोटा महोत्सव, ट्रेवल मार्ट या अन्य सांस्कृतिक आयोजन भी इसी तरफ हो रहे हैं। यहां बड़ी एलईडी स्क्रीन भी लगी हुई है। जिससे भारत के मैच का सीधा प्रसारण भी लोग देख सकते हैं।</p>
<p><strong>केडीए के लिए नुकसान का सौदा</strong><br />रिवर फ्रंट बनने के बाद से अभी तक केडीए के लिए नुकसान का ही सौदा रहा है। केडीए इसके संचालन पर जितना खर्चा कर रहा है। उससे आधी भी कमाई नहीं हो रही है। हालांकि यहां पर्यटकों की संख्या पहले से बढ़ी है। साथ ही वाटर पार्क, नाव व कई सांस्कृतिक कार्यक्रम और संग्रहालय भी बना हुआ है। साथ ही शादी समारोह व अन्य आयोजनों से भी आय हो रही है। लेकिन यहां बनी दुकानों के शुरू नहीं होने और होटल रेस्टोरेंट नहीं होने से लोगों को खाने-पीने की वस्तुएं नहीं मिल पा रही है। इस कारण से इसका संचालन भारी पड़ रहा है। हालांकि केडीए की ओर से इसका संचालन निजी फर्म के माध्यम से करवाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए दो बार टेंडर हो चुके हैं। लेकिन अभी तक कोई फर्म इसके लिए योग्य साबित नहीं हुई है।</p>
<p><strong>पहले से बढ़ा है लोगों का क्रेज</strong><br />कोटा विकास प्राधिकरण के अधिशाषी अभियंता ललित कुमार मीणा ने बताया कि रिवर फ्रंट के शौर्य घाट पर शादी समारोह के आयोजन करने के प्रति लोगों का क्रेज पहले से अधिक हुआ है। हालांकि शुरूआत में इसका किराया काफी कम था। लेकिन आयोजनों को देखते हुए कुछ समय पहले ही इसका किराया बढ़ाया है। उसके बाद भी लोगों का रूझान अच्छा है। यहां रविवार को भी विवाह समारोह का आयोजन हुआ। इस माह में हर दो से तीन दिन में एक आयोजन के लिए बुकिंग है। जबकि साल के अंत दिसम्बर तक शादियों की अभी से बुकिंग हो गई है। इसका कारण चम्बल नदी का किनारा, हैरिटेज लुक, पार्किंग की सुविधा और एक नई जगह होने से लोगों के लिए भी इसे देखने का उत्साह रहता है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 14:55:34 +0530</pubDate>
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                <title>सांप मारने को लाठी पीट  रहे, वह भी आधी अधूरी</title>
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                        <![CDATA[ एक बार फिर नोटिस देकर की इतिश्री-हादसों के कुछ दिन तक ही नजर आती है अधिकारियों की सक्रियता।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/they-re-using-sticks-to-kill-a-snake--and-that-too-is-half-hearted/article-144681"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-60-px)13.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।<strong> केस एक :</strong> जवाहर नगर थाना क्षेत्र स्थित इंद्र विहार में एक तीन मंजिला रेस्टोरेंट के ढहने से दो लोगों की मौत के बाद नगर निगम व कोटा विकास प्राधिकरण कुछ दिन तक तो सक्रिय नजर आया। अवैध निर्माण के नोटिस भी दिए गए। लेकिन उसके बाद केडीए ने तो किसी के भी खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई तक नहीं की। जबकि निगम ने की चार अवैध निर्माण भवनों को सीज करने के बाद आगे कोई कार्रवाई नहीं की।</p>
<p><strong>केस दो : </strong>रेस्टोरेंट हादसे के बाद नगर निगम का फायर अनुभाग भी सक्रिय हुआ। फायर टीम ने नए कोटा शहर के कोचिंग इलाकों में तीन से चार दिन तक तो अभियान चलाकर करीब डेढ़ सौ से अधिक नोटिस जारी किए। लेकिन उसके बाद उन नोटिसों की पालना हुई या नहीं। किसी के भी खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।</p>
<p><strong>स्कूल हादसे के बाद भी चेते थे अधिकारी:</strong> इसी तरह बरसात के समय में झालावाड़ जिले के पिपलोदी गांव में एक सरकारी स्कूल की छत ढहने से कई बच्चों की मौत हो गई थी। उस हादसे के बाद सरकार व प्रशासन और शिक्षा विभाग हरकत में आया। आनन-फानन में सभी जर्जर स्कूलों का सर्वे कराया गया। उनमें बच्चों को बैठने से रोका गया। सरकार ने जर्जर स्कूल भवनों के लिए बजट भी पारित कर दिया। लेकिन हुआ कुछ भी नहीं। अभी तक भी किसी स्कूल की मरम्मत तक नहीं हुई है। ये तो उदाहरण मात्र हैं उस स्थिति को बताने के लिए जो कुछ दिन पहले शहर में उत्पन्न हुई थी। हालत यह है कि हर बार किसी भी तरह का बड़ा हादसा होने के बाद प्रशासन उस समय या कुछ दिन तक तो सक्रिय नजर आता है लेकिन उसके बाद फिर वही ढाक के तीन पात वाली स्थिति हो जाती है।</p>
<p><strong>केडीए ने दिए सौ से अधिक नोटिस</strong><br />रेस्टोरेंट हादसा होने के बाद जांच में पता चला कि जो रेस्टोरेंट ध्वस्त हुआ था उसका निर्माण अवैध था। उसके पास के अन्य 5 भवन भी अवैध निर्माण की बुनियाद पर खड़े हुए थे। उसे देखते हुए कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से नए कोटा शहर के कोचिंग एरिया जवाहर नगर, इंद्र विहार, तलवंडी, महावीर नगर, के अलावा कुन्हाड़ी लैंड मार्क और बोरखेड़ा स्थित नयानोहरा समेत कई जगह पर बहुमंजिला इमारतों को अवैध निर्माण मानते हुए नोटिस जारी किए। जानकारी के अनुसार करीब 100 से 125 नोटिस जारी किए। लेकिन उन नोटिसों को देने के बाद उन पर आगे क्या कार्रवाई की गई। इस बारे में कोई भी अधिकारी बोलने को तैयार ही नहीं है।</p>
<p><strong>अग्नि सुरक्षा नहीं होने पर दिए नोटिस</strong><br />इसी तरह नगर निगम के फायर अनुभाग की ओर से हॉस्टलों व रेस्टोरेंट समेत अन्य बहुमंजिला उमारतों में आग से सुरक्षा की जांच की गई। उनमें से कहीं फायर सिस्टम नहीं था तो कहीं कार्यशील अवस्था में नहीं थे। कहीं आग से सुरक्षा के नाम पर मात्र दिखावे के छोटे उपकरण रखे हुए थे। ऐसे में नगर निगम के फायर अनुभाग की ओर से अभियान चलाकर करीब 150 से अधिक नोटिस दिए गए। उन नोटिसों के बाद उनकी पालना हुई या नहीं। भवन मालिकों ने फायर सेफ्टी सिस्टम लगाए या नहीं। इसकी कोई जानकारी अभी तक नहीं है।</p>
<p><strong>फिर किसी हादसे का इंतजार</strong><br />शहर में किसी तरह का हादसा होने के कुछ दिन बाद तक तो सभी विभाग व जिला प्रशासन सक्रिय रहता है। फिर चाहे संभागीय आयुक्त हो या जिला कलक्टर। सभी ने बैठकें लेकर अधिकारियों को निर्देश दिए कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा नहीं हो। इसके लिए जो भी संभव हो कार्रवाई की जाए। अधिकारियों के निर्देश के बाद संबंधित विभाग हरकत में आए और कुछ दिन तक ऐसा लगा मानो अब शहर में ऐसी कार्रवाई होगी जिससे अवैध निर्माण व अतिक्रमण करने वालों को सबक मिलेगा। जबकि ऐसा लगता है कि प्रशासन व संबंधित विभाग फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं। उसके बाद ही सख्त कार्रवाई होगी।</p>
<p><strong>17 दिन हुए हादसे को</strong><br />दिल्ली स्पाइसी रेस्टोरेंट को ध्वस्त हुए 17 दिन का समय हो गया है। 8 फरवरी की रात को हुए हादसे में एक कोचिंग छात्र व एक युवक की मौत हो गई थी। जबकि एक महिला के मलबे में दबने से उनका पैर इतना जख्मी हो गया था कि उसे काटना ही पड़ा। विभागीय व भवन मालिकों की लापरवाही का खामियाया बेगुनाहों को भुगतना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />इंद्र विहार में जिस रेस्टोरेंट का अवैध निर्माण था। उस समेत आस-पास के 5 भवनों को नोटिस दिया गया था। जिनमें से एक जर्जर भवन के मालिक ने तो स्वयं ही उसे ढहा दिया था। जबकि अन्य 4 को सीज कर दिया है। वहीं फायर के नोटिसों की पालना करवाई जाएगी। पालना नहीं करने वालों के खिलाफ निर्धारित समय के बाद कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>- ओम प्रकाश मेहरा, आयुक्त, नगर निगम कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Feb 2026 14:24:55 +0530</pubDate>
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                <title>बायो मेट्रिक मशीन में चेहरा दिखाने पर ही खुलेगा दरवाजा, बाहर से आने वाले लोगों पर होगा नियंत्रण</title>
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                        <![CDATA[केडीए की नई बिल्डिंग में लागू हुआ विजिटर्स मैनेजमेंट सिस्टम।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/doors-will-only-open-after-showing-their-faces-in-a-biometric-machine/article-143786"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/12200-x-600-px)-(1)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । कोटा विकास प्राधिकरण की नई विस्तारित बिल्डिंग स्थित कार्यालय में अधिकारियों व कर्मचारियों से मिलने जाने वाले बाहरी लोगों को अब बायो मेट्रिक मशीन में चेहरा दिखाना व अपना नाम पता नोट करवाना आवश्यक होगा। उसके बाद ही प्रवेश द्वार खुलेगा। केडीए की ओर से नई बिल्डिग में बुधवार से विजिटर्स मैनेजमेंट सिस्टम को लागू किया गया है। हालांकि इसका ट्रायल तो पिछले करीब एक सप्ताह से अधिक समय से चल रहा था। उसके सही तरह से काम करने के बाद बुधवार से उसे लागू कर दिया गया।</p>
<p><strong>अंदर जाते व बाहर निकलते समय दिखाने होंगे चेहरे</strong><br />सामान्य तौर पर सरकारी व निजी कार्यालयों में बायो मेट्रिक मशीन का उपयोग वहां काम करने वाले कर्मचारियों व अधिकारियों के लिए किया जाता है। लेकिन केडीए की नई बिल्डिंग में इसे कर्मचारियों व अधिकारियों के साथ ही आमजन के लिए भी लागू किया गया है।बाहरी से आने वाले किसी भी व्यक्ति को यदि अधिकारी व कर्मचारी से मिलना है तो सबसे पहले उन्हें कम्प्यूटराइज बायो मेट्रिक कक्ष में बैठे कर्मचारियों को अपना नाम व मोबाइल नम्बर के साथ ही किससे मिलना है उसकी जानकारी देनी होगी। उसे नोट करने के बाद वहां लगी बायो मेट्रिक मशीन में चेहरा दिखाना होगा। जिससे उस व्यक्ति का पंजीयन होगा।उसके बाद मुख्य प्रवेश द्वार के पास लगी मशीन में भी चेहरा दिखाना होगा। वहां से ओके होने के बाद ही दरवाजा खुलेगा। जिससे अंदर प्रवेश किया जा सकेगा। वहीं कामहोने के बाद वापस बाहर आते समय भी गेट के पास अंदर लगी बायो मेट्रिक मशीन में चेहरा दिखाने पर ही गेट खुलेगा। पहले दिन कार्यालय आए लोग इस सिस्टम को देखकर चौक गए। जबकि अधिकतर ने इसकी सराहना की।</p>
<p><strong>गेट पर आॅटोमैटिक लॉक सिस्टम</strong><br />बिल्डिंग में प्रवेश के लिए एक ही मुख्य प्रवेश द्वार है। उसे बायो मेट्रिक मशीन से जोड़ा गया है। साथ ही उसमें आॅटो मेटिक सिस्टम लगाया गया है। बाय मेट्रिक मशीन में चेहरा दिखाने के बाद ही वह गेट खुलगा। हालांकि वहां दो होमगार्ड को लगाया गया है लेकिन वे केवल व्यवस्था की दृष्टि से हैं।विजिटर्स के लिए प्रवेश की व्यवस्था सुबह 11 से शाम 5 बजे तक ही रहेगी।</p>
<p><strong>कर्मचारियों के लिए बायो मेट्रिक उपस्थिति</strong><br />आम आदमी के लिए जहां विजिटर्स मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया गया है। वहीं वहां काम करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए भी बायो मेट्रिक उपस्थिति सिस्टम लागू किया गया है। अधिकारी-कर्मचारियों के भी आते-जाते समय बायो मेट्रिक मशीन से ही उपस्थिति दर्ज होगी।</p>
<p><strong>सीसीटीवी से कवर है पूरा सिस्टम</strong><br />केडीए अधिकारियों का कहना है कि यह पूरा सिस्टम सीसीटीवी कैमरे से कवर है। जिससे इसमें किसी तरह की और किसी के भी द्वारा कोई छेड़छाड़ नहीं की जा सके। इसके लिए दो होमगार्ड विशेष रूप से लगाए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे सिस्टम का संचालन केडीए कर्मचारियों के द्वारा ही किया जा रहा है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कार्यालय की नई बिल्डिग में इस सिस्टम को लागू किया गया है। वहां की व्यवस्थाएं उसके अनुरूप है। इससे अनावश्यक रूप से कार्यालय में आने वाले लोगों पर रोक तो लगेगी ही। साथ ही बाहर से आने वाले लोगों का रिकॉर्ड भी रहेगा। अधिकारियों व कर्मचारियों की बायो मेट्रिक उपस्थिति तो पुरानी बिल्डिंग में भी है। विजिटर्स मैनेजमेंट सिस्टम का ट्रायल कई दिन से चल रहा था। उसे बुधवार से लागू किया गया है। विजिटर्स सुबह 11 से शाम 5 बजे तक ही प्रवेश कर सकेंगे।<br /><strong>- हर्षित वर्मा, उपायुक्त, कोटा विकास प्राधिकरण</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Feb 2026 15:22:54 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - हजार फीट में ही बना दी 8-8 मंजिला इमारतें, 91 अवैध निर्माण वाले भवन मालिकों को जारी किए नोटिस</title>
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                        <![CDATA[केडीए ने एक ही दिन में कोरल पार्क,  लेण्डमार्क व जवाहर नगर क्षेत्र में की कार्रवाई।
]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---eight-story-buildings-constructed-within-a-thousand-feet--notices-issued-to-91-illegal-building-owners/article-143014"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(12200-x-600-px)-(5)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जवाहर नगर थाना क्षेत्र स्थित इंद्र विहार में तीन मंजिला बिल्डिग के धराशाही होने के बाद अब कोटा विकास प्राधिकरण प्रशासन हरकत में आया है। केडीए ने शहर में अवैध निर्माण वाले भवनों का सर्वे करने के साथ ही गुरुवार को एक ही दिन में 91 अवैध निर्माण वाले भवन मालिकों को नोटिस जारी किए हैं।</p>
<p>एक ओर जहां नगर निगम की ओर से इंद्र विहार में अवैध निर्माण वाले चार भवनों को सीज किया गया है। वहीं केडीए ने भी कार्रवाई शुरू कर दी है। कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से कृषि भूमि पर बसी हुई आवासीय योजनाओं में बिना निर्माण स्वीकृति व बिना सेटबेक छोड़े बनायी गई बहुमंजिला ईमारतों के मालिकों को नोटिस जारी किए हैं।</p>
<p><strong>8 सौ से 15 सौ वर्गफीट पर खड़ी हुई 8 मंजिले</strong><br />प्राधिकरण द्वारा करवाए जा रहे सर्वे में सामने आया कि शहर में छोटे-छोटे भूखंडों पर बहुमंजिला इमारतें खड़ी की गई है। जिनमें 8 सौ से 15 सौ वर्ग फीट तक के भूखंडों पर 8 मंजिल तक के अवैध निर्माण कर लिए गए। अब केडीए की ओर से उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।</p>
<p><strong>कोरल पार्क में 30 भूखंडों को दिए नोटिस</strong><br />प्राधिकरण की आयुक्त ममता तिवारी के निर्देशन में यह कार्रवाई की गई है। आयुक्त ने बताया कि प्राधिकरण के जोन 1 व 2 में स्थित योजना कोरल पार्क, दीपक रेजीडेन्सी, ग्राम हनुवन्तखेडा व गैर अनुमोदित योजना अमरनाथ एनक्लेव, ग्राम नयानोहरा में बिना सेटबेक छोड़े व अवैध रूप से निर्माण किया हुआ है। जहां जी प्लास 5 से लेकर जी प्लास 8 तक की बहुमंजिला ईमारते जो 1 हजार वर्गफीट से 12 सौ वर्गफीट तक के भूखंडों पर बनाई गई है। ऐसे 30 भूखण्डों पर निर्मित भवनों के मालिकों को नोटिस जारी किए हैं।</p>
<p><strong>जवाहर नगर में 8 मंजिल तक किया निर्माण</strong><br />जोन 3 में स्थित प्राधिकरण की अनुमोदित योजना जवाहर नगर में 800 वर्गफीट से 1250 वर्गफीट तक के भूखंडों पर जी प्लस 4 से जी प्लास 8 तक के भवनों का अवैध निर्माण व बिना स्वीकृति के निर्माण किया गया है। ऐसे 15 भूखण्डों पर निर्मित भवनों के मालिकों को नोटिस जारी किए हैं।</p>
<p><strong> लैंडमार्क में भी यही स्थिति</strong><br />आयुक्त ने बताया कि प्राधिकरण के जोन 4 में स्थित अनुमोदित योजनाएँ लेण्डमार्क सिटी, अम्बिका नगर में 900 वर्गफुट से 15 सौ वर्ग वर्गफुट के भूखण्डों पर बिना निर्माण स्वीकृति, बिना सेटबेक छोड़े व निर्माण स्वीकृति से अधिक ऊचाई तक अवैध निर्माण किया गया है। ऐसे अवैध निर्माण के संबंध में 46 भवन मालिकों को नोटिस जारी किये गये है। इस प्रकार प्राधिकरण द्वारा कुल 91 भवन मालिकों को नोटिस जारी किए गए है।</p>
<p><strong>जवाब के लिए एक माह का समय</strong><br />केडीए सचिव मुकेश चौधरी ने बताया कि जिन भी भवन मालिकों द्वारा अवैध निर्माण किया गया है। उन सभी को नोटिस जारी किए गए हैं। साथ ही उन्हें एक माह में जवाब पेश करने का समय दिया गया है। निर्धारित समय अवधि में जवाब प्राप्त नहीं होने या न्याय संगत व संतुष्टिपूर्ण जवाब प्राप्त नहीं होने की स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई अमल में लायी जाएगी।</p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था मामला प्रकाशित</strong><br />गौरतलब है कि शहर में अवैध निर्माण कर खड़ी की गई गगन चुम्भी इमारतों का मामला दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता से प्रकाशित किया है। समाचार पत्र के 12 फरवरी के ही अंक में पेज दो पर' सांप निकलने के बाद लाठी पीट रहे जिम्मेदार शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया है। जिसमें बताया कि शहर में कहां-कहां और कितनी अवैध बिल्डिगें खड़ी हो गई है। अवैध निर्माण होते समय तो किसी भी जिम्मेदार अधिकारियों ने उन पर ध्यान नहीं दिया अब सर्वे कर लाठी पीट रहे हैं।</p>
<p>दैनिक नवज्योति में समाचार प्रकाशित होते ही नगर निगम और केडीए दोनों विभागों के अधिकारी हरकत में आए। निगम ने जहां 4 भवनों को सीज किया। वहीं केडीए ने भी नवज्योति द्वारा बताए गए स्थानों में से तीन स्थानों पर ही 91 भवन मालिकों को अवैध निर्माण का दोषी पाए जाने पर नोटिस जारी किए हैं।</p>
<p>उपायुक्तों के निर्देशन में जोन वाइज सवे किया जा रहा है। सर्वे में जो भी अवैध निर्माण होगा उन सभी को नोटिस जारी किए जाएंगे।<br /><strong>- ममता तिवारी, आयुक्त केडीए</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Feb 2026 15:05:37 +0530</pubDate>
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                <title>तीन सौ करोड़ खर्च फिर भी चूल्हे के धुंए में सिर देने को मजबूर महिलाएं,  कोसों दूर से महिलाओं को कंडे व लकड़ी लाकर चलाना पड़ रहा काम</title>
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                        <![CDATA[अधिकतर पशु पालक देव नारायण योजना से शहर में कर रहे पलायन।    
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/despite-spending-300-crore-rupees--women-are-forced-to-cook-over-open-fires--having-to-travel-miles-to-collect-cow-dung-and-firewood/article-140111"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)42.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। पशु पालकों को बेहतर जीवन यापन करने के लिए तत्कालीन नगर विकास न्यास(केडीए) की ओर से करीब 300 करोड़ रुपए की लागत से तैयार की गई देव नारायण आवासीय योजना के पशु पालक इन दिनों गैस व पानी की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने से परेशान है। जिससे अधिकतर पशु पालक तो वापस शहर में आकर बस रहे हैं।शहर में जगह-जगह पर बाड़े बनाकर रह रहे पशु पालकों को पक्के आवास व पशुओं के लिए बाड़े समेत अन्य सुविधाएं देने के लिए कांग्रेस सरकार के समय में बंधा धर्मपुरा में देव नारायण पशु पालक आवासीय योजना तैयार की गई थी। यहां अलग-अलग श्रेणी के 700 से अधिक आवास बनाए गए थे। जहां उस समय बड़ी संख्या में पशु पालकों को शिफ्ट भी किया गया था। हालांकि वहां पशु पालकों के लिए सभी तरह की सुविधाएं विकसित की गई थी। लेकिन वर्तमान में वहां रह रहे अधिकतर पशु पालक परिवार परेशान हो रहे हैं।</p>
<p><strong>पीने व पशुओं के लिए नहीं पानी</strong><br />देव नारायण योजना डी ब्लॉक में रह रहे गोविंद गुर्जर का कहना है कि योजना में बड़ी संख्या में पशु पालक रहते हैं। लेकिन वहां पानी की इतनी अधिक समस्या है कि न तो लोगों को पीने का पानी मिल पा रहा है और न ही पशुओं के लिए पानी मिल रहा है। उन्होंने बताया कि वे पिछले काफी समय से टैंकरों से पानी मंगवा रहे हैं। जिस पर हजारों रुपए खर्च कर चुके है। उन्होंने बताया कि यही हालत रही तो उन्हें भी अन्य पशु पालकों की तरह शहर में शिफ्ट होना पड़ेगा।<br />यह समस्या सी व डी ब्लॉक में अधिक है। जबकि ए व बी ब्लॉक में भी समस्या तो है।</p>
<p><strong>योजना के परिवारों को नहीं मिल रही गैस</strong><br />स्थानीय निवासी व योजना के पूर्व अध्यक्ष किरण लांगरी का कहना है कि योजना में बायो गैस प्लांट बना हुआ है। पहले तो स्थानीय लोगों को घरों में पाइप से बायो गैस की सप्लाई हो रही थी। लेकिन पिछले कुछ समय से लोगों को गैस ही नहीं मिल रही है। जिससे काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। योजना में कंडे थापने की जगह नहीं होने से महिलाओं को कोसो दूर से कंडे व लकड़ी लाकर खाना बनाने को मजबूर होना पड़ रहा है।उन्होंने बताया कि केडीए की ओर से प्लांट का संचालन संवेदक के माध्यम से किया जा रहा है। उसके द्वारा योजना से बाहर गैस की सप्लाई की जा रही है। जबकि सबसे पहले योजना के परिवारों को गैस मिलनी चाहिए।</p>
<p><strong>वंचितों को भी मिले आवास</strong><br />लांगरी ने बताया कि योजना में केडीए को सुविधाएं तो विकसित करनी चाहिए तभी लोग यहां रूकेंगे। हालांकि पूर्व में आवंटितों में से करीब 50 से 70 परिवार ऐसे हैं जिन्हें आवासों का आवंटन किया जाना है। उन्हें भी आवंटन किया जाए और सुविधाओं को बेहतर बनाया जाए। इस संबंध में केडीए अधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है।</p>
<p><strong>करीब 300 परिवारों ने किया पलायन</strong><br />स्थानीय निवासी मोहन गुर्जर का कहना है कि योजना में शुरूआत में जितने परिवारों का पुनर्वास किया गया था। उनमें से करीब आधे 300 परिवार तो वापस कोटा शहर में पलायन कर चुके हैं। जिस तरह की सुविधाएं शुरूआत में दी जा रही थी। वे वर्तमान में नहीं मिल रही हैं। यदि यही हालत रही तो अन्य परिवारों को भी शहर में जाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />देव नारायण योजना में वर्तमान में 1250 केएलडी का पानी का प्लांट है। जिससे पानी की सप्लाई हो रही है। उस समय की जरूरत के हिसाब से वह पर्याप्त था। लेकिन अब जरूरत को देखते हुए यहां एक पानी की टंकी और बनाई जाएगी। जिसके दो से तीन माह में बनकर तैयार होने की संभावना है। लेकिन पानी की सप्लाई तो अमूत 2.0 के तहत ही मिल पाएगा। उसी तरह गैस सप्लाई दो चरणों में किया जाना था। पहले चरण में ओएंडएम के तहत सप्लाई की जा रही थी। पहले सप्लाई कम थी। लेकिन अब सप्लाई पर्याप्त है। शीघ्र ही केडीए की कार्यकारी समिति की बैठक में एजेंडा रखकर उस पर निर्णय किया जाएगा। जिसके बाद शीघ्र ही योजना के लोगों को भी गैस की सप्लाई मिलने लगेगी।<br /><strong>मुकेश चौधरी, सचिव, कोटा विकास प्राधिकरण</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Jan 2026 17:30:19 +0530</pubDate>
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                <title>बाहर बोर्ड लगाया स्टेडियम में भोजन वितरण सख्त मना,अंदर सजाई भोज की प्लेटें</title>
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                        <![CDATA[गंदगी और भोजन वितरण पर चेतावनी बोर्ड लगे, पर अमल नदारद।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/a-sign-outside-the-stadium-read-%22food-distribution-strictly-prohibited-%22-but-inside--food-plates-were-being-served/article-139303"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)28.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। "स्टेडियम में झूठन और गंदगी के बीच मॉर्निंग वॉक, खेल के नाम पर हो रही पार्टियां "शीर्षक से समाचार प्रकाशित होने के बाद हरकत में आए अधिकारी अब फिर से सुस्त नजर आ रहे हैं। स्टेडियम परिसर में जगह-जगह चेतावनी बोर्ड तो लगवा दिए गए, लेकिन इनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं किए गए। परिणामस्वरूप एक समाज ने शुक्रवार से रविवार तक जेके पवेलियन स्टेडियम को किराए पर लिया और परिसर के भीतर ही चाय, नाश्ता व भोजन का आयोजन कर दिया। इससे न केवल खेल गतिविधियां प्रभावित हुईं, बल्कि स्वच्छता के दावे भी हवा-हवाई साबित हुए।शुक्रवार को मॉर्निंग वॉकर अचल शर्मा, मोइनुद्दीन, रितुराज सुमन, चेतन मीणा तथा गोलाफेंक कोच श्याम बिहारी नाहर ने आयोजन का विरोध किया। इस पर आयोजकों ने खेल अधिकारी वाई.बी. सिंह और केडीए अधिकारी सुमित चित्तौड़ा की सहमति का हवाला दिया।</p>
<p>शनिवार सुबह जब नवज्योति ने इस संबंध में खेल अधिकारी वाई.बी. सिंह से पूछा तो उन्होंने कहा कि आयोजक भोजन की टेबले हटाने के लिए मानने को तैयार नहीं हैं और दावा कर रहे हैं कि उन्हें केडीए से अनुमति मिली है।आप बीच में क्यों बोल रहे हो जैसी बातें कही जा रही हैं। वहीं केडीए अधिकारी सुमित चित्तौड़ा ने भोजन आयोजन की अनुमति देने से साफ इनकार किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने केवल खेल अधिकारी से बात करने को कहा था। इसके बाद उन्होने मामले को स्वयं दिखवाकर स्टेडियम परिसर से खाने की टेबलें हटवाई।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Mon, 12 Jan 2026 15:40:15 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - रोशनी से जगमगाया टावर ऑफ लिबर्टी, केडीए ने सही करवाई लाइटें</title>
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                        <![CDATA[टावर ऑफ लिबर्टी पर अंधेरा छाने का मामला दैनिक नवज्योति ने उठाया था।
]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---tower-of-liberty-illuminated-with-lights--kda-gets-the-lights-repaired/article-135969"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(6)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के बीच स्थित एरोड्राम सर्किल के टावर ऑफ लिबर्टी के टावर एक बार फिर से रोशनी से जगमगा उठे हैं। जिससे चौराहे की सुंदरता बढ़ी है।कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से टावर की लाइटों को सही करवाया गया है। जिससे एक बार फिर से चौराहे पर बने टावर रोशन हो गए हैं। हालांकि इन टावरों की लाइटें पहले जहां अलग-अलग रंग बिखेर रही थी। अभी ऐसा नहीं हो रहा है। लेकिन आने वाले समय में ये लाइटें रंग बिरंगी रोशनी भी बिखेरने लगेंगी।केडीए की ओर से करोड़ों रुपए खर्च कर एरोड्राम चौराहे पर अंडरपास बनाने के साथ ही यहां विशाल टावर आॅफ लिबर्टी का निर्माण भी करवाया है। जिसके तीन टावरों पर मशाल नुमा लाइटें लगाई गई है। इन लाइटों से रात के समय इन टावरों की सुंदरता देखते ही बनती है। लेकिन गत दिनों काफी समय से ये लाइटें बंद हो रही थी। जिससे पूरा चौराहा व टावर अंधेरे में डूबे हुए थे।</p>
<p><strong>नवज्योति ने उठाया था मुद्दा</strong><br />शहर के बीच स्थित एरोड्राम सर्किल के टावर ऑफ लिबर्टी पर अंधेरा छाने का मामला दैनिक नवज्योति ने उठाया था। समाचार पत्र में 5 दिसम्बर को पेज दो पर' फिर अंधेरे में डूबा एरोड्राम सर्किल का टावर ऑफ लिबर्टी शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें अनदेखी के चलते टावर व चौराहे पर अंधेरा होने की जानकारी अधिकारियों को दी थी। उस समय केडीए सचिव मुकेश चौधरी ने कहा था कि शीघ्र ही टावर की लाइटों को चालू करवाया जाएगा। समाचार प्रकाशित होते ही केडीए अधिकारी हरकत में आए और टावर की सभी लाइटों को फिर से चालू कराया गया। केडीए अधिकारियों का कहना है कि इन लाइटों का सर्किट ऊंचाई पर होने से लाइटों के बंद होने पर उन्हें चालू करना काफी कठिन हो जाता है। जबकि नीचे लगाने पर उसके चोरी होने का खतरा बना हुआ है। ऐसे में प्रयास किया जा रहा है कि उसे बीच में ऐसी जगह पर लगाया जाए जिससे उसे चालू करने में परेशानी नहीं हो।</p>]]>
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                <pubDate>Mon, 15 Dec 2025 15:20:15 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - केडीए ने अपलोड किया रिवर फ्रंट संचालन का टेंडर डॉक्यूमेंट, 8 जनवरी तक किए टेंडर आमंत्रित</title>
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                        <![CDATA[टेंडर डॉक्यूमेंट तैयार होने की जानकारी दैनिक नवज्योति ने सबसे पहले प्रकाशित की थी। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news--kda-uploads-tender-document-for-river-front-operation--invites-tenders-until-january-8th/article-135262"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल चम्बल रिवर फ्रंट का संचालन एक ही निजी फर्म के माध्यम से करवाने की योजना के तहत केडीए की ओर से इसका टेंडर डॉक्यूमेंट तैयार किया है। जिसे केडीए की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है। एक माह में टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। केडीए सचिव मुकेश चौधरी ने बताया कि रिवर फ्रंट का संचालन अभी केडीए कर रहा है। साथ ही कई अन्य कार्य निजी संवेदक फर्मों के माध्यम से करवाए जा रहे हैं। लेकिन केडीए का प्रयास है कि इसका संचालन एक ही फर्म द्वारा किया जाए। इसके लिए एक टेंडर डॉक्यूमेंट तैयार किया गया है। इसमें इस बार इसे 30 साल के लिए लीज पर देने की योजना है। इसमें शुरूआती दो साल तक तो संवेदक फर्म को कोई भी राशि केडीए को नहीं देनी होगी। लेकिन रिवर फ्रंट से संबंधित सभी खर्चों व जिम्मेदारियों का वहन फर्म को ही करने होंगे। तीसरे साल के लिए केडीए ने 5 करोड़ रुपए निर्धारित किए हैं। इतनी राशि या इससे अधिक देने वाली फर्म को ठेका दिया जाएगा। उसके बाद हर साल 5 फीसदी राशि बढ़ती जाएगी।</p>
<p>उन्होंने बताया कि इस टेंडर डॉक्यूमेंट को अपलोड कर दिया है। जिसमें एक माह का समय दिया गया है। 8 जनवरी तक संवेदक फर्म व कम्पनियां जो इसका संचालन करने की इच्छुक होंगी वे टेंडर में हिस्सा लेंगी। 8 जनवरी के बाद टेंडर खोले जाएगे। जिसके बाद आगे की प्रक्रिया की जाएगी। गौरतलब है कि पूर्व में भी केडीए ने यह प्रयास किया था। उस समय 20 साल के लिए देने की योजना बनाई गई थी। लेकिन सफलता नहीं मिली थी। अब संशोधन के साथ इसे दोबारा से जारी किया गया है।</p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था प्रकाशित</strong><br />रिवर फ्रंट सचालन का टेंडर डॉक्यूमेंट तैयार होने की जानकारी दैनिक नवज्योति ने सबसे पहले प्रकाशित की थी। समाचार पत्र में 6 दिसम्बर को पेज 5 पर' तीसरे साल में 5 करोड़ या अधिक का भुगतान करने वाली फर्म करेगी संचालन शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें टेंडर से संबंधित सभी जानकारी दी गई थी। उन्हीं जानकारियों के साथ केडीए ने टेंडर डॉक्यूमेंट को अपलोड कर टेंडर अमंत्रित किए हैं।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Dec 2025 14:32:04 +0530</pubDate>
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                <title>शहर बदरंग हो रहा, निगम कार्रवाई का नहीं दिख रहा असर, सार्वजनिक स्थानों को बदरंग करने का बना हुआ है सिलसिला</title>
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                        <![CDATA[ सबसे अधिक फ्लाई ओवरों की दीवारों और स्पान पर  विज्ञापन देखे जा सकते है। 
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-city-is-becoming-discolored--municipal-action-is-showing-no-effect--and-the-defacement-of-public-spaces-continues/article-133447"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/1200-x-600-px-(2)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। पर्यटन नगरी के रूप में विकसित हो रहे कोटा शहर को बदरंग करने वाले अभी भी समझ नहीं पा रहे है। वहीं नगर निगम द्वारा ऐसे लोगों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई का असर भी नहीं हो रहा है।नगर निगम और कोटा विकास प्राधिकरण द्वारा शहर को एक तरफ तो स्वच्छ व सुंदर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। जिसके तहत सुबह और दिन के समय ही नहीं रात के समय भी शहर के मुख्य मार्गों की सफाई करवाई जा रही है।वहीं केडीए की ओर से डिवाइडरों के पौधों की छटनी करने के साथ ही फ्लाई ओवरों की रंगाई पुताई भी करवाई जा रही है। जिससे बाहर से आने वाले पर्यटकों को शहर सुंदर दिख सके। लेकिन हालत यह है कि निगम व केडीए के प्रयासों पर कुछ संस्थाएं व लोग पानी फेरने में लगे हुए है।</p>
<p><strong>निर्धारित स्थानों के अलावा लगा रहे विज्ञापन</strong><br />शहर में नगर निगम व केडीए की ओर से विज्ञापन लगाने के लिए स्थान निर्धारित किए हुए हैं। यूनिपोल की तय किए हुए हैं। उसके बाद भी निजी संस्थाओं के अलावा आमजन भी सार्वजनिक स्थानों पर बिना अनुमति विज्ञापन या पोस्टर, बैनर लगाकर शहर को बदरंग करने में जुटे हुए हैं।</p>
<p><strong>सबसे अधिक फ्लाई ओवरों पर विज्ञापन</strong><br />शहर में वैसे तो कई जगह पर पोस्टर, बैनर व फ्लेक्स लगे हुए देखे जा सकते है। लेकिन सबसे अधिक फ्लाई ओवरों की दीवारों पर स्पान पर इस तरह के विज्ञापन देखे जा सकते है। शहर के सभी फ्लाई ओवरों की हालत खराब कर रखी है।<br />झालावाड़ रोड स्थित विज्ञान नगर का फ्लाई ओवर हो या आॅक्सीजोन के सामने मिनी फ्लाई ओवर। सिटी मॉल के सामने का फ्लाई ओवर हो या गुमानपुरा का। छावनी का फ्लाई ओवर हो या एरोड्राम का अंडरपास। सभी जगह पर पोस्टर व विज्ञापन चाहे बधाई के हैं या प्रचार के लगे हुए है।<br />झालावाड़ रोड स्थित मिनी फ्लाई ओवर की दीवार पर तो बड़े-बड़े अक्षरों में जन्म दिन की बधाई समेत बहुत कुछ लिखा हुआ है। जबकि फ्लाई ओवर के नीचे कोचिंग संस्थानों के पोस्टर चस्पा किए हुए हैं।</p>
<p><strong>निगम कर रहा सफाई</strong><br />लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा गत दिनों निगम व केडीए समेत अन्य विभागों के अधिकारियों की बैठक ली गई थी। जिसमें शहर को साफ करने के साथ ही शहर को बदरंग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने तक के निर्देश दिए थे। हालांकि अभी नगर निगम की ओर से सार्वजनिक स्थानों पर लगी प्रचार सामग्री को हटाने व साफ करने का काम किया जा रहा है। सख्ती अभी तक नहीं की गई है।</p>
<p><strong>सख्ती भी की जाएगी</strong><br />नगर निगम कोटा के आयुक्त ओम प्रकाश मेहरा ने बताया कि अभी तो निगम के स्तर पर ही प्रचार सामग्री को हटााया जा रहा है। यदि हटाने के बाद फिर से कोई उसी जगह पर पोस्टर, बैनर या पम्पलेट चस्पा करता है तो उसके खिलाफ सम्पति विरूपण अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई भी की जाएगी।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Nov 2025 17:22:59 +0530</pubDate>
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                <title>फ्लाई ओवर के नीचे गेम जोन से गायब होने लगी रैलिंग व जाली</title>
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                        <![CDATA[नए कोटा क्षेत्र में विशेषकर कोचिंग एरिया में  खेल की जगह उपलब्ध करावने के लिए फ्लाई ओवर के नीचे गेम जोन बनाया है। 
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/railings-and-nets-are-disappearing-from-the-game-zone-under-the-flyover/article-133446"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/1200-x-600-px-(1)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में चोरों के हौंसले इतने अधिक बुलंद हो रहे हैं कि वे न तो घरों को छोड़ रहे हैं और न ही सार्वजनिक स्थानों को। चोरों ने झालावाड़ रोड जैसे व्यस्त मार्ग पर फ्लाई ओवर के नीचे बने गेम जोन तक को नहीं छोड़ा। यहां से भी रैलिंग व जालियां गायब होने लगी है। नए कोटा क्षेत्र विशेष रूप से कोचिंग एरिया में युवाओं व विद्यार्थियों को खेल की जगह उपलब्ध करावने के उद्देश्य से कोटा विकास प्राधिकरण द्वारा झालावाड़ रोड पर सिटी मॉल के सामने फ्लाई ओवर के नीचे गेम जोन बनाया है। इसके लिए यहां रैलिंग लगाकर उसे जालियों से कवर किया है। जिससे यहां खेल की प्रेक्टिस करने वालों को सुरक्षा भी मुहैया हो सके।</p>
<p><strong>4 स्पान, दो खेल</strong><br />सिटी मॉल के सामने बने फ्लाई ओवर के नीचे चार स्पान को गेम जोन के लिए चिन्हित किया गया है। जिनमें दो गेम का अभ्यास कराया जाएगा। तीन स्पान में स्केटिंग व एक में बास्केटबॉल का अभ्यास कराया जाएगा। इसके लिए केडीए की ओर से बास्केटबॉल की नेट भी लगाई गई है।</p>
<p><strong>देखरेख के अभाव में दुर्दशा</strong><br />केडीए ने गेम जोन बनाने के लिए हजारों रुपए खर्च तो कर दिए। लेकिन वहां उसकी सुरक्षा के लिए न तो अभी तक गार्ड लगाए हैं और न ही अभी तक इसके संचालन का टेंडर किया गया है। जिसका फायदा चोर उठा रहे हैं। पिछले कई दिन से धीरे-धीरे चोर सिटी मॉल के सामने वाले हिस्से से रैलिंग और कई जगह से जालियों के छोटे-छोटे हिस्से चोरी कर ले जा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि यदि कुछ समय और इसकी देखरेख नहीं की गई तो इसकी अधिक दुर्दशा हो जाएगी।</p>
<p><strong>केडीए ने दो बार किया टेंडर</strong><br />कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से गेम जोन के संचालन के लिए दो बार टेंडर किए जा चुके है। पहली बार में तो कोई भी नहीं आया। अब दोबारा टेंडर किया है। उसकी प्रक्रिया चल रही है। केडीए द्वारा गेम जोन का संचालन करने वाले से एक साल में ९६ हजार रुपए यानि करीब ८ हजार रुपए महीना किराए के रूप में लिया जाएगा। इसके बाद यहां जितने लोग प्रेक्टिस करने आएंगे उनसे मासिक शुल्क संबंधित संचालन कर्ता द्वारा वसूल किया जाएगा।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />झालावाड़ रोड फ्लाई ओवर के नीचे गेम जोन के लिए केडीए ने सैटअप तैयार किया है। अब इसके संचालन की प्रक्रिया की जा रही है। पहली बार टेंडर में कोई नहीं आया। अब दूसरी बार टेंडर किया है। उसके शीघ्र ही फाइनल होने पर इसका संचालन किया जाएगा। साथ ही जब तक इसका संचालन करने वाला नहीं मिलता है तब तक यहां गार्ड की व्यवस्था की जाएगी। जिससे इसे किसी तरह का कोई नलकसान नहीं हो।<br /><strong>- मुकेश चौधरी, सचिव,कोटा विकास प्राधिकरण</strong></p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Nov 2025 15:20:54 +0530</pubDate>
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                <title>पशु पालकों के आवास खाली : शहर में डाल रखा डेरा, केडीए आवंटियों को आवासों में करवाएगा पुनर्वास</title>
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                        <![CDATA[इसमें आवासों के अलावा पशुओं के  लिए बाड़े, बच्चों के लिए स्कूल व  चिकित्सा केन्द्र बनाए गए। 
]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/animal-herders--houses-are-vacant--they-are-camping-in-the-city--kda-will-rehabilitate-all-the-allottees-in-the-housing/article-132710"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/12111.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। बंधा धर्मपुरा स्थित देव नारायण पशु पालक आवासीय योजना में एक तरफ तो मकानों का आवंटन होने के बाद भी वे खाली पड़े हुए हैं। वहीं दूसरी तरफ कई पशु पालक अभी भी शहर में ही डेरा डाले हुए हैं। एसे सभी पशु पालकों को केडीए अधिकारी अव आवासों में पुनर्वास करवाएंगे।  तत्कालीन नगर विकास न्यास की ओर से पशु पालकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए बंधा धर्मपुरा में देव नारायण के नाम से आवासीय योजना का निर्माण कराया गया था। करीब 300 करोड़ रुपए की लागत से बनी इस योजना में आवासों के अलावा पशुओं के  लिए बाड़े, पशु आहार के लिए गोदाम, बच्चों के लिए स्कूल व उपचार के लिए चिकित्सा केन्द्र तक बनाए गए। </p>
<p>तत्कालीन कांग्रेस सरकार के समय में बनी इस योजना में पहले चरण में 12 सौ से अधिक आवासों की योजना थी। जिनमें से करीब 738 आवासों का निर्माण किया गया। वहीं 474 को आवंटन पत्र जारी कर दिए थे। लेकिन उनमें से करीब आधे ही पशु पालक योजना में शिफ्ट हो पाए थे।  हालत यह है कि जो पशु पालक योजना में चले भी गए थे लेकिन वे कुछ समय बाद वापस शहर में विभिन्न स्थानों पर बाड़े बनाकर रहने लगे। </p>
<p><strong>15 हजार पशुओं के लिए बाड़े</strong><br />योजना में एक ओर जहां  पशु पालकों के रहने के लिए आवासों का निर्माण किया गया। वहां उनके लिए गोबर गैस प्लांट की स्थापना की गई। जिससे पशुओं के गोबर का उपयोग कर उसी से गैस बनाई जा सके। साथ ही दूध का उपयोग करने के लिए डेरी का निर्माण किया गया। वहीं पशु पालकों के पशुओं को ध्यान में रखते हुए करीब 15 हजार पशुओं के लिए भी बाड़े बनाकर व्यवस्था की गई। आवास व बाड़े पशुओं की संख्या के आधार पर ही आवंटित किए गए। </p>
<p><strong>शहर से पुनर्वास करने की थी योजना</strong><br />शहर में पशुओं के कारण आए दिन होने वाले हादसों को देखते हुए कैटल फ्री शहर की कल्पना के तहत इस योजना को तैयार किया गया था। जिससे पशुओं को शहर से दूर किया जा सके। साथ ही पशु पालकों को भी उनके रहने के लिए अच्छे मकान दिए जा सके। जिससे उनका रहन-सहन व जीवन स्तर बेहतर हो सके। यह योजना तत्कालीन न्यास अधिकारियों द्वारा पशु पालकों व पशुओं के सर्वे के आधार पर तैयार की गई। जिसमें स्वयं के बाड़े वाले और अतिक्रमण कर बाड़े बनाकर रहने वाले सभी को शामिल किया गया था। </p>
<p><strong>35 सौ भृूखंडों की फेज दो योजना</strong><br />देव नारायण एकीकृत योजना फेज दो में करीब 35 सौ भूखंड हैं। इन थूखंडों का लॉटरी से आवंटन किया जा चुका है। जिनके कब्जा पत्र दिए जाने हैं। जैस-जैसे वहां सड़क, बिजली व अन्य सुविधाएं होती जाएंगी वैसे-वैसे वहां कब्जे देते रहेंगे। </p>
<p><strong>आवंटन हो चुका, कब्जा पत्र जारी होंगे</strong><br />गत दिनों केडीए सचिव समेत संबंधित अधिकारियों ने योजना का निरीक्षण किया था। इस दौरान वहां   खाली आवास व  बायो गैस प्लांट समेत अन्य व्यवस्थाओं को देखा था। उसके बाद अधिकारियों ने संबंधित को योजना में खाली आवासों के कब्जे देने व पशु पालकों का शहर से पुनर्वास करवाने के निर्देश दिए थे।  केडीए के अधिशाषी अभियंता पवन शर्मा ने बताया कि पशु पालकों को आवासों का आवंटन तो किया जा चुका है। जिनमें से आधे पशु पालक वहां रहने भी लगे है। मकान खाली नहीं हैं आवंटन सभी का हो चुका है लेकिन कब्जा पत्र जारी नहीं हुए थे। अब धीरे-धीरे कब्जा पत्र जारी किए जा रहे है। कुछ ही पशु पालक ऐसे हैं जिन्हें कब्जा पत्र दिए जाने हैं। कब्जा पत्र मिलने के साथ ही आवंटी बिजली व पानी के कनेक् शन के लिए आवेदन करेगा। जैसे ही सभी सुुविधाएं चालू हो जाएंगी तो उन्हें उन आवासों में शिफ्ट करवा दिया जाएगा। </p>
<p>शर्मा ने बताया कि जब पशु पालकों को आवास आवंटित हो जाएंगे तो उन्हें शहर से हटने के लिए कहा जाएगा। कब्जा मिलने के बाद भी यदि कोई पशु पालक शहर में रहता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार जो भी कार्रवाई होगी की जाएगी। </p>
<p><strong>दूरी के कारण वापस आए शहर में</strong><br />पशु पालकों का कहना है कि योजना तो अच्छी है। लेकिन शहर से दूर होने और कई सुविधाओं का अभाव होने के कारण उन्हें वापस शहर में आना पड़ा। किरण लांगरी ने बताया कि पशु पालकों को दूध बेचने के लिए शहर में आना पड़ रहा है। साथ ही शुरुआत में वहां के लिए परिवहन साधनों का भी अभाव था। जिससे कई  पशु पालक वापस शहर  में आकर रहने लगे। योजना में सफाई की भी समस्या रहती है। लांगरी ने बताया कि केडीए की ओर से शेष पशु पालकों को आवंटन पत्र जारी किए जा रहे हैं। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Nov 2025 17:30:46 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - सेवन वंडर्स पार्क में पर्याप्त रोशनी व्यवस्था करने के दिए निर्देश</title>
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                        <![CDATA[समाचार प्रकाशित होने के बाद इस मामले को आयुक्त ने गम्भीरता से लिया और स्वयं सेवन वंडर्स पार्क का निरीक्षण कर वहां बिजली व्यवस्था को सुधारने के निर्देश दिए। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news--instructions-given-for-adequate-lighting-at-seven-wonders-park--garden-not-properly-maintained/article-132238"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/asar-khabar-ka---seven-wonders-park-mein-paryapt-roshani-vyavastha-karne-k-diye-nirdesh...kota-news-13.11.2025.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा ।  कोटा विकास प्राधिकरण की आयुक्त ममता कुमारी तिवारी ने बुधवार को सेवन वंडर्स पार्क  व किशोर सागर तालाब का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने वहां पर्याप्त रोशनी व्यवस्था करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान आयुक्त ने सेवन वंडर्स पार्क में घास अधिक बड़ी होने और उद्यानों के उचित रखरखाव नहीं होने पर असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने संबंधित अभियंता को निर्देश दिए कि उद्यान (हॉर्टिकल्चर) के ठेकेदार को नोटिस जारी किया जाए और पार्क की सफाई व देखभाल को तत्काल सुधारने के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। आयुक्त ने पार्क में अतिरिक्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए ताकि परिसर में पर्याप्त उजाला बना रहे। उन्होंने पाथवे पर समुचित लाइटिंग, स्मारकों के पास पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था  व स्मारकों से संबंधित जानकारी प्रदर्शित करने वाले बोर्डों पर भी उपयुक्त लाइट की व्यवस्था करने के निर्देश दिए, जिससे आगंतुकों को वहां लिखी जानकारी पढ़ने में परेशानी नहीं हो। साथ ही प्रकाश व्यवस्था से संबंधित सभी समस्याओं का त्वरित निराकरण करने के निर्देश भी अभियंताओं को दिए। किशोर सागर तालाब स्थित स्वर्ण महल के निरीक्षण के दौरान स्वच्छता की स्थिति संतोषजनक नहीं पाए जाने पर आयुक्त ने संबंधित अभियंता को स्वर्ण महल के संधारण व संचालन कार्य से जुड़े ठेकेदार को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने किशोर सागर तालाब की समुचित साफ-सफाई सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान प्राधिकरण के अधीक्षण अभियंता सुमित चित्तौड़ा, अधिशाषी अभियंता  आर. के. लोढ़ा, सहायक अभियंता ललित मीना, सहायक अभियंता पवन गोचर  व सहायक कृषि अधिकारी मनीष मीना उपस्थित रहे।</p>
<p><strong>नवज्योति ने उठाया था मामला </strong><br />गौरतलब है कि सेवन वंडर्स में अंधेरा होने व वहां आने वालों को परेशानी का मामला दैनिक नवज्योति  ने उठाया था। समाचार पत्र में 6 अक्टूबर को पेज 3 पर अंधेरे में डूबे 7 अजूबे, सेवन वंडर्स पार्क से पर्यटक लौट रहे निराश शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें पूरे पार्क में अंधेरा होने  व एक माह से लाइटें बंद व लाइटों के चोरी होने की जानकारी दी थी।  जिससे वहां परिवार समेत आने वाले पर्यटकों को होने वाली समस्या से अवगत कराया था।  समाचार प्रकाशित होने के बाद इस मामले को आयुक्त ने गम्भीरता से लिया और स्वयं सेवन  वंडर्स पार्क का निरीक्षण कर वहां बिजली व्यवस्था को सुधारने के निर्देश दिए। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Nov 2025 14:05:46 +0530</pubDate>
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