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                <title>पाकिस्तान के बाजौर इलाके में आतंकवादी हमला: विस्फोटक से लदे वाहन के चेकपोस्ट से टकराने पर 11 पुलिसकर्मियों की मौत 7 अन्य घायल, बचाव और राहत कार्य जारी</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान के बाजौर में आतंकवादियों ने सुरक्षा चौकी पर आत्मघाती हमला किया, जिसमें 11 जवान शहीद हो गए। विस्फोट में एक बच्ची की भी मौत हुई और महिलाओं समेत 7 लोग घायल हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/terrorist-attack-in-bajaur-area-of-pakistan-11-policemen-killed/article-143530"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/pakistan.png" alt=""></a><br /><p>पाकिस्तान। पाकिस्तान के बाजौर इलाके में एक बड़ा आंतकवादी हमला हुआ है, जिसमेंं 11 सुरक्षा बल के जवानों की मौत हो गई है। इस बात की पुष्टि सेना ने की है। सेना ने जानकारी देते हुए कहा कि इस हादे में महिलाओं और बच्चों समेत करीब 7 लोग भी घायल हुए है।</p>
<p>बताया जा रहा है कि आतंकियों ने खैबर पख्तूनख्वा के बजौर जिले में बनी एक संयुक्त सुरक्षा चौकी को अपना निशाना बनाते हुए हमलावरों ने विस्फोट से भरी एक गाड़ी को चौकी की दीवार से टकरा दिया, जिसके कारण 11 सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई। इस हादसे में एक मासूम बच्ची की भी मौत होने की खबर सामने आ रही है।</p>
<p>इस हादसे के बारे में आईएसपीआर ने जानकारी देते हुए बताया कि 16 फरवरी सोमवार को बाजौर जिले में सुरक्षाबल और लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियों के जॉइंट चेक पोस्ट पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान से जुड़े आतंकवादियों ने हमला करने की कोशिश की थी लेकिन वो इसमें कामयाब नहीं हो सके। फिलहाल, मौके पर सुरक्षाबल मौजूद है। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 16:06:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>इस्लामाबाद बम धमाके को लेकर कश्मीर में शिया-समुदाय का विरोध प्रदर्शन: प्रदर्शनकारियों ने लगाए पाकिस्तान विरोधी नारे, नमाजियों पर हुए हमले की निंदा की</title>
                                    <description><![CDATA[इस्लामाबाद शिया मस्जिद आत्मघाती हमले में 31 मौतों के बाद कश्मीर के शिया इलाकों में शांतिपूर्ण विरोध हुए, पाकिस्तान विरोधी नारे लगे, पीड़ितों के प्रति संवेदना जताई गई और निंदा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/shia-community-protests-in-kashmir-over-islamabad-bomb-blasts-protestors/article-142311"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(6)6.png" alt=""></a><br /><p>श्रीनगर। पाकिस्तान के इस्लामाबाद की एक शिया मस्जिद में हुए आत्मघाती बम धमाके में 31 लोगों की मौत के बाद कश्मीर के कई शिया-बहुल इलाकों में शुक्रवार रात विरोध प्रदर्शन भड़क उठे।  </p>
<p>अधिकारियों ने बताया कि बारामूला के चैनाबल पट्टन, श्रीनगर के इमामबाड़ा जादीबल एवं हरवान और बांदीपोरा के इंदरकोट-सुंबल में विरोध प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान विरोधी नारे लगाते हुए नमाजयिों पर हुए हमले की निंदा की। प्रदर्शनकारियों ने पीड़तिों के साथ संवेदना व्यक्त करते हुए सांप्रदायिक हिंसा की निंदा की। पुलिस ने बताया कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे और देर रात प्रदर्शनकारी अपने-अपने घर लौट गए।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में जुम्मे की नमाज़ के दौरान एक मस्जिद खदीजतुल कुबरा में विस्फोट से कम से कम 31 लोगों की मौत हो गयी, जबकि 169 अन्य घायल हो गये। अधिकारियों के अनुसार मरने वालों में इस्लामाबाद पुलिस महानिरीक्षक के एक चचेरे भाई भी शामिल हैं, जिनका नाम हसन है। यह धमाका तरलाई इलाके में इमामबाड़ा के द्वार पर हुआ, जब नमाजी नमाज के लिए अंदर जा रहे थे।  हमलावर ने मस्जिद में जबरन घुसने की कोशिश की, लेकिन दरवाजे पर रोके जाने के बाद उसने अपने विस्फोटक जैकेट में धमाका कर खुद को उड़ा दिया। जांचकर्ताओं ने हमलावर को आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान से जोड़ा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Sun, 08 Feb 2026 10:01:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पाकिस्तान धर्मगुरूओं ने कहा, भारत के हमलों पर आपत्ति, तो क्यों करते हैं अफगानिस्तान पर हमला</title>
                                    <description><![CDATA[जेयूआई-एफ प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने अफगान सीमा पर पाकिस्तान की सैन्य रणनीति की तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तान अफगानिस्तान में घुसकर हमला करने को सही ठहराता है, तो वह भारत द्वारा पाकिस्तान में किए जाने वाले हमलों पर आपत्ति कैसे जता सकता है?]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/pakistan-religious-leaders-said-why-do-they-attack-afghanistan-if/article-137093"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/india-paksitan.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पाकिस्तान के कई धर्मगुरुओं और अलग-अलग पंथों के प्रतिनिधियों ने मंगलवार को कहा कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल पाकिस्तान पर हमला करने के लिये नहीं करना चाहिये और न ही पाकिस्तान को अफगानिस्तान में हमले करने चाहिये। </p>
<p>धर्मगुरुओं ने मंगलवार को एक संयुक्त बयान में कहा, अफगानिस्तान को टीटीपी जैसे समूहों का सुरक्षित स्थान बनाना न सिर्फ दोनों देशों के की स्थिरता के लिये खतरा है, बल्कि दोनों देशों के रिश्तों को भी प्रभावित करता है। मौलाना फजलुर रहमान ने अफगानिस्तान में पाकिस्तान सेना के हमलों की निंदा करते हुए कहा कि 'भारत भी आतंकवादी ठिकानों को तबाह करने के दावे' के साथ ही पाकिस्तान में हमला करता है।</p>
<p>मौलाना फक़ालुर रहमान ने कहा, अगर आप अफगानिस्तान में अपने हमलों को यह कहकर सही ठहराते हैं कि आप अपने दुश्मनों को निशाना बना रहे हैं, तो आप तब क्यों आपत्ति जताते हैं जब भारत बहावलपुर और मुरीदके में अपने दुश्मनों को निशाना बनाता है?</p>
<p>जमियत उलेमा-ए-इस्लाम (जेयूआई-एफ) के अध्यक्ष फजलुर रहमान ने विशेष रूप से सेना प्रमुख आसिम मुनीर की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि अफगान सीमा पर पाकिस्तान की रणनीति के पीछे का कारण क्या है। उल्लेखनीय है कि, रहमान की जेयूआई-एफ के पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में 10 सदस्य हैं, जो विपक्षी पार्टियों में सबसे बड़ी है। इमरान खान के नेतृत्व वाली पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के समर्थन वाले 75 निर्दलीय सांसद असेंबली का सबसे बड़ा विपक्षी गुट हैं। </p>
<p>मौलाना फक़ालुर रहमान ने पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व को निशाना बनाकर नीति में निरंतरता के मुद्दे पर सवाल उठाये। उन्होंने कहा, अगर आप यह दावा करके काबुल पर हमलों को सही ठहराते हैं कि आपके दुश्मन वहां मौजूद हैं, तो जब भारत पाकिस्तान के अंदर अपने दुश्मनों को निशाना बनाता है तो आपका जवाब अलग क्यों होता है?</p>
<p>उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तानी और अफगान सेनाओं के बीच दुश्मनी का दौर जारी है। हाल के महीनों में सीमा पार झड़पों और हवाई हमलों ने इस क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा दी है। दोनों पक्षों ने संघर्ष विराम उल्लंघन और हिंसा बढ़ाने की जिम्मेदारी को लेकर एक-दूसरे पर आरोप लगाये हैं। पाकिस्तान में अपनी सुरक्षा नीति और सीमाओं के पार बल के इस्तेमाल को लेकर अंदरूनी बहस भी चल रही है। पाक-अफग़ान तनाव ने न सिर्फ काबुल-इस्लामाबाद संबंधों को खराब किया है, बल्कि आगे और अस्थिरता के जोखिम को लेकर क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय चिंता भी बढ़ा दी है। </p>
<p>मौलाना रहमान ने संयम और बातचीत की भी अपील की, क्योंकि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर सीमा पार आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन देने का आरोप लगा रहे हैं। पाकिस्तान का आरोप है कि टीटीपी के आतंकवादी अफग़ान इलाके से काम करते हैं, जबकि काबुल इन आरोपों से इनकार करता है। अफगानिस्तान का दावा है कि पाकिस्तान दुश्मन गुटों को पनाह देता है और हवाई हमलों से अफग़ान संप्रभुता का उल्लंघन करता है। पाकिस्तानी उम्माह एकता कार्यक्रम में मौलाना फजलुर रहमान की टिप्पणियों ने एक सुसंगत और सैद्धांतिक विदेश नीति की जरूरत पर जोर दिया है। </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Dec 2025 18:38:26 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>टीटीपी के बाद पाकिस्तान में नए आतंकी संगठन का जन्म, हरकत इंकलाब इस्लामी पाकिस्तान रखा नाम</title>
                                    <description><![CDATA[ पाकिस्तान में एक नए आतंकवादी समूह की स्थापना की घोषणा की की गई है। इसका नाम हरकत इंकलाब इस्लामी पाकिस्तान यानि आईआईपी रखा गया है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/after-ttp-the-birth-of-a-new-terrorist-organization-in/article-107804"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/news24.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान में एक नए आतंकवादी समूह की स्थापना की घोषणा की की गई है। इसका नाम हरकत इंकलाब इस्लामी पाकिस्तान यानि आईआईपी रखा गया है। एक वीडियो जारी करते हुए आईआईपी ने अपने गठन की घोषणा की है। ये वीडियो ऊर्दू और पश्तो भाषा में है, जिसमें आईआईपी ने पाकिस्तान को अपना अखाड़ा बनाने की घोषणा की है। इसने कहा है कि ये पाकिस्तान से ऑपरेट होगा और इसके निशान पर पाकिस्तान की सेना होगी। इसने पाकिस्तान की सेना को अपना मुख्य लक्ष्य कहा है। आईआईपी ने कहा है कि उसका मकसद पूरे पाकिस्तान में शरिया आधारित सख्त इस्लामी शासन की स्थापना करना है।</p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक आईआईपी के नेता की पहचान गाजी शहाबुद्दीन के रूप में की गई है। वीडियो में आधुनिक हथियारों के साथ दर्जनों आतंकवादियों को देखा जा रहा है, जिसके बीच में खड़ा होकर गाजी शहाबुद्दीन अपने इरादों की घोषणा करता है। इस घोषणा के दौरान गाजी शहाबुद्दीन ने समूह के लक्ष्यों और घोषणापत्र के बारे में बताया है। इसने अपने घोषित लक्ष्यों को हासिल करने के लिए पाकिस्तान में अन्य आतंकवादी समूहों के साथ सहयोग करने का इरादा जताया है। यानि आईआईपी आगे जाकर पाकिस्तान में मौजूद अन्य आतंकवादी संगठनों के साथ गठबंधन कर सकता है।</p>
<p><strong>पाकिस्तान में बना नया आतंकवादी संगठन</strong><br />हालांकि, पाकिस्तान में पहले से ही दर्जनों आतंकवादी संगठन आॅपरेट होते हैं, जिनमें ज्यादातर भारत के खिलाफ काम करते रहे हैं। लेकिन कई ऐसे आतंकवादी संगठन भी बने हैं, जो पाकिस्तान की सरकार के खिलाफ जंग का ऐलान कर चुके हैं। जिनमें तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानि टीटीपी काफी कुख्यात है। टीटीपी का मकसद भी पाकिस्तान को इस्लामिक अमीरात बनाने की है। टीटीपी सिर्फ इसलिए लोगों के खून बहाता है ताकि पाकिस्तान में शरीयत आधारित कानून की स्थापना कर सके। टीटीपी का कहना है कि वो पाकिस्तान में ठीक उसी तरह का कानून लागू करना चाहता है, जैसा कानून तालिबान ने अफगानिस्तान में बनाया हुआ है।</p>
<p>फिलहाल ये साफ नहीं हो पाया है कि इस आतंकवादी संगठन में कितने लड़ाके हैं, क्या ये किसी आतंकी संगठन से टूटकर बना है या फिर पाकिस्तान के साथ इसकी क्या दुश्मनी है। जो वीडियो जारी किया गया है वो करीब 7 मिनट का है और वीडियो में दिख रहे लोगों के हाथों में उसी तरह का झंडा दिख रहा है, जैसा झंडा अफगान तालिबान इस्तेमाल करता है। लेकिन अभी तक पता नहीं चल पाया है कि दोनों झंडों में क्या अंतर है या क्या ये संगठन अफगान तालिबान से बाहर निकला या फिर दोनों में कुछ संबंध हैं या नहीं। पाकिस्तान पहले से ही बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी और टीटीपी के आतंक से जूझ रहा है, लिहाजा देखने होगा कि ये आतंकी संगठन पाकिस्तान को कितना नुकसान पहुंचाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Mar 2025 12:52:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>मीर अली खुलासे से हड़कंप : टीटीपी ने तालिबान के हक्कानी चीफ से की डील, टीटीपी पाकिस्तान पर कब्जा कर लागू करेगा शरिया कानून</title>
                                    <description><![CDATA[अफगानिस्तान में साल 2021 में सत्ता में आने के बाद से ही तालिबानी सरकार और पाकिस्तान के बीच रिश्ते लगातार रसातल में जाते दिख रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/stirred-by-mir-ali-revelations-ttp-made-a-deal-with/article-101074"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/5554-(22)2.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। अफगानिस्तान में साल 2021 में सत्ता में आने के बाद से ही तालिबानी सरकार और पाकिस्तान के बीच रिश्ते लगातार रसातल में जाते दिख रहे हैं। पाकिस्तान ने पिछले करीब एक साल में दो बार अफगानिस्तान पर हवाई हमला किया है। वहीं तालिबानी सेना ने भी पाकिस्तान के ऊपर पर भारी हथियारों से हमला करके कई पाकिस्तानी सैनिकों को मार डालने का दावा किया है। तालिबान के सहयोगी आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान ने न केवल पाकिस्तान के सैकड़ों सैनिकों को मार दिया है, बल्कि कई सैन्य ठिकानों को भी विस्फोटकों से उड़ा दिया है। पाकिस्तान की सरकार ने खुद ही माना है कि अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार आने के बाद टीटीपी के हमलों में भारी तेजी आई है। पाकिस्तान ने तालिबान को सत्ता में लाने के लिए दिल खोलकर मदद की थी, लेकिन अब वही उसके लिए भस्मासुर बन गए हैं। इस बीच मीर अली समझौते के खुलासे ने पाकिस्तानियों के होश उड़ा दिए हैं। अफगानिस्तान पर नजर रखने वाली न्यूज वेबसाइट अफगान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक अफगानिस्तान में सत्ता में वापसी से पहले तालिबान ने टीटीपी आतंकियों और अलकायदा के साथ एक डील की थी। इसे मीर अली समझौता नाम दिया गया था। इस समझौते के तहत तालिबान ने शपथ ली थी कि अगर उनकी अफगानिस्तान में जीत हो जाती है, तो वह टीटीपी और अन्य विदेशी लड़ाकुओं को पाकिस्तान में कब्जा करके वहां शरिया कानून लागू कराने के उनके जिहाद में मदद की जाएगी। रिपोर्ट के मुताबिक टीटीपी ने यह डील तालिबानी गृहमंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी के साथ की है। यह वही हक्कानी है, जो पाकिस्तानी आईएसआई का पालतू रहा है।</p>
<p><strong>तालिबान और टीटीपी के डील का खुलासा:</strong> रिपोर्ट के मुताबिक मीर अली समझौते पर टीटीपी, अलकायदा के कमांडर, हाफिज गुल बहादुर जैसे लोगों और संगठनों ने हस्ताक्षर किया है। उस समय पर सिराजुद्दीन हक्कानी तालिबानी सरगना मुल्ला हैबतुल्ला का दाहिना हाथ था। अप्रैल 2022 में जब पाकिस्तान ने पहली बार अफगानिस्तान पर हवाई हमला किया था, तब तालिबान के रक्षा मंत्री और मुल्ला उमर के बेटे मुल्ला याकूब ने टीटीपी और हाफिज गुल बहादुर गुट के नेताओं को समन किया था। हाफिज गुल बहादुर ने ही कई सालों तक उत्तरी वजीरिस्तान में हक्कानी नेटवर्क और अलकायदा को समर्थन दिया था। इस मुलाकात के दौरान हाफिज गुल बहादुर गुट ने मुल्ला याकूब को मीर अली समझौते का दस्तावेज दिखा दिया। </p>
<p>पाकिस्तान की सरकार पिछले 3 साल से आरोप लगा रही है कि तालिबान से पाकिस्तान में सक्रिय टीटीपी आतंकियों को मदद मिल रही है। तालिबान ने इन आरोपों को खारिज किया है। तालिबान ने यह भी कहा है कि उसकी जमीन का इस्तेमाल किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं होने दिया जाएगा। वहीं मीर अली समझौता यह दिखाता है कि तालिबान सक्रिय रूप से टीटीपी को सपोर्ट कर रहा है।</p>
<p><strong>टीटीपी का शरिया कानून लागू करने का ऐलान :</strong></p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक इस समझौते पर इसलिए हस्ताक्षर हुआ था क्योंकि टीटीपी के आतंकियों ने अन्य विदेशी आतंकियों के साथ मिलकर तालिबान के लिए अफगानिस्तान की अशरफ गनी सरकार, अमेरिका और नाटो सेना से जंग लड़ी थी। यह भी खुलासा हुआ है कि अयमान अल जवाहिरी की हत्या के बाद हक्कानी और मुल्ला याकूब ने विदेशी आतंकियों को कहा था कि वे दूरस्थ इलाकों में चले जाएं ताकि उनकी निगरानी नहीं की जा सके। इससे पहले टीटीपी के सरगनान नूर वली मेहसूद ने भी ऐलान किया था कि वे पाकिस्तान में वर्तमान गैर इस्लामिक सरकार को हटाकर उसकी जगह अपनी सरकार बनाएंगे और शरिया कानून को लागू करेंगे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jan 2025 12:27:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>तालिबान ने पाकिस्तान के आगे झुकने से किया इंकार</title>
                                    <description><![CDATA[तालिबान को झुकाने के लिए पाकिस्तान ने लाखों की तादाद में देश में मौजूद अफगान शरणार्थियों को देश से बाहर जाने के लिए कह दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/taliban-refused-to-bow-before-pakistan/article-62236"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-11/sizte--(3)10.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। अफगानिस्तान में पाकिस्तान की मदद से अशरफ गनी सरकार को हटाकर सत्ता में आए तालिबान आतंकियों ने अब पाकिस्तान के आगे झुकने से इंकार कर दिया है। पाकिस्तानी सेना बार-बार तालिबान से गुहार लगा रही है कि वह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानि टीटीपी आतंकियों के खिलाफ एक्शन ले। ये टीटीपी आतंकी पाकिस्तानी सेना के खिलाफ अक्सर हमले करते रहते हैं। तालिबान को झुकाने के लिए पाकिस्तान ने लाखों की तादाद में देश में मौजूद अफगान शरणार्थियों को देश से बाहर जाने के लिए कह दिया। इससे भी तालिबानी नहीं झुके तो अब पाकिस्तानी सेना हमला करने के विकल्प विचार करने की धमकी दे रही है।</p>
<p>यही नहीं पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने तालिबान सरकार के साथ अफगानिस्तान में मौजूद टीटीपी के ठिकानों की सूची साझा की है। पाकिस्तान ने कहा है कि हम अपेक्षा करते हैं कि तालिबान सरकार इनके खिलाफ कार्रवाई करेगी। वहीं तालिबान ने साफ कर दिया है कि टीटीपी की समस्या उनके सत्ता में आने से पहले है और यह पाकिस्तान का आतंरिक मामला है। तालिबान ने यह भी कहा कि टीटीपी के आतंकी अफगानिस्तान नहीं बल्कि पाकिस्तान के अंदर मौजूद हैं। वहीं अफगानिस्तान के साथ तनाव के बावजूद पाकिस्तान की सरकार को भरोसा है कि वह टीटीपी के मुद्दे को तालिबान के साथ सुलझा सकता है। पाकिस्तानी पीएम ने तालिबान को दी धमकी: पाकिस्तान के केयरटेकर प्रधानमंत्री अनवारुल हक काकर ने हाल ही में खुलासा किया कि इस साल फरवरी में तालिबान को पाकिस्तान और टीटीपी के बीच चयन करने का स्पष्ट संदेश दिया गया था।</p>
<p><strong>तालिबान को हमारी क्षमता पता : पाकिस्तान</strong><br />पाकिस्तानी अधिकारियों का मानना है कि इस मामले से निपटने वाले अधिकारी भी ऐसा ही मानते हैं। उन्होंने कहा कि यह आकस्मिक योजना का सवाल नहीं है। यह क्षमता का सवाल है और हमारे पास समस्या से निपटने की क्षमता है। एक वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारी ने बुधवार को द एक्सप्रेस ट्रिब्यून अखबार को नाम न छापने की शर्त पर बताया। वे पाकिस्तान के उन संभावित विकल्पों पर एक सवाल का जवाब दे रहे थे जिसमें कहा गया था कि अगर तालिबान टीटीपी आतंकियों संगठन को शरण देना जारी रखता है तो पाकिस्तान क्या करेगा। हालांकि, पाकिस्तानी अधिकारी ने सटीक विकल्पों का खुलासा नहीं किया, बल्कि इस बात पर जोर दिया कि तालिबान सरकार भी हमारी क्षमता को जानती है। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Fri, 17 Nov 2023 11:25:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title> टीटीपी सरगना ने पाकिस्तानी सेना को दी धमकी, मांगें मानो नहीं तो जारी रहेगी जंग</title>
                                    <description><![CDATA[ पाकिस्तानी सेना के लिए काल बने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान आतंकियों के सरगना मुफ्ती नूर वली मेहसूद ने पाकिस्तान सरकार को खुली धमकी दी है। आतंकी नूर वली ने कहा कि तालिबान की मध्यस्थता से पाकिस्तान से बातचीत चल रही है लेकिन अगर यह फेल होती है तो हम और ज्यादा हमले करेंगे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/ttp-leader-threatens-pakistani-army--demands-will-be-accepted-otherwise-the-war-will-continue/article-13318"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/v-2.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> </strong><br /><strong>इस्लामाबाद।   </strong><strong><strong>भारत पर झूठ की खोली पोल</strong> :</strong>हमारा जिहाद जारी रहेगा टीटीपी चीफ ने पाकिस्तान के उस दावे की भी पोल खोल दी जिसमें इस्लामाबाद आरोप लगाता रहता है कि भारत इस आतंकी संगठन को पैसा दे रहा है। मेहसूद ने यह भी कहा कि टीटीपी ने चीनी नागरिकों पर हमला नहीं किया था। उसने कहा कि इस तरह के हमले पाकिस्तानी सरकार अपनी जासूसी एजेंसी के जरिए कराती है ताकि ताकि चीन का शोषण किया जा सके। यह ठीक उसी तरह से है जैसे पाकिस्तान ने अमेरिका का किया था। उसने कहा कि टीटीपी अपनी जमीन के लिए जंग लड़ रही है और तालिबान के साथ तनाव का कोई सवाल ही नहीं उठता है। मेहसूद ने खुलासा किया कि पाकिस्तान की तरफ से इमरान खान के करीबी बदनाम जनरल फैज हामिद बातचीत का नेतृत्व कर रहे हैं।</p>
<p>टीटीपी चीफ ने पाकिस्तान के तमाम विरोध के बाद भी साफ कर दिया है कि वह पाकिस्तान के कबायली इलाके फाटा को खैबर पख्तूनख्वा से अलग करने की मांग पर डटे हुए हैं। वे इस मांग से पीछे नहीं हटेंगे। मेहसूद ने बताया कि पाकिस्तान सरकार के साथ चल रही बातचीत में अभी कोई सफलता नहीं मिली है। आतंकी सरगना ने यह भी साफ कर दिया कि अगर पाकिस्तान सरकार के साथ बातचीत सफल भी हो जाती है तो भी टीटीपी न तो भंग होगा और न ही आत्मसमर्पण करेगा। मेहसूद ने कहा कि अगर पाकिस्तान सरकार के साथ कोई समझौता होता है तो टीटीपी सदस्यों के खिलाफ पाकिस्तान में चल रहे सभी मुकदमे खत्म हो जाएंगे। उसने कहा कि इन हमलों में दोनों ही पक्षों को नुकसान हुआ है लेकिन पाकिस्तानी सरकार को ज्यादा नुकसान हुआ है। आतंकी सरगना ने कहा कि टीटीपी के बढ़ते हमलों से घबराकर पाकिस्तान सरकार बातचीत को मजबूर हुई है। भारत से पैसा मिलने के सवाल पर मेहसूद ने साफ किया कि टीटीपी एक स्वतंत्र आंदोलन है और यह किसी सरकार के नियंत्रण में नहीं है।<br />उसने कहा कि पाकिस्तान में सेना ही असली फैसले लेने वाली एजेंसी है।<br /><br /><strong>इस्लाम विरोधी है लोकतंत्र: नूर वली मेहसूद</strong><br />मेहसूद ने कहा कि लोकतंत्र इस्लाम विरोधी है और पाकिस्तान की जनता को टीटीपी में शामिल होना चाहिए या हमारी मदद करनी चाहिए क्योंकि पाकिस्तान का निर्माण इस्लाम के नाम पर हुआ था। उसने यह भी कहा कि टीटीपी को ब्लैक लिस्ट से निकलवाने की जिम्मेदारी भी पाकिस्तानी सेना की है। बता दें कि फाटा को अलग कर इस पश्तून बहुल इलाके में टीटीपी एक शरिया कानून से शासित इलाका बनाना चाहता है जहां पाकिस्तान सरकार का कोई शासन नहीं होगा। इस कानून को लागू करवाने का जिम्मा भी टीटीपी के पास होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Jun 2022 18:34:54 +0530</pubDate>
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