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                <title>scrutiny - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>पश्चिम बंगाल का असली चुनावी युद्ध : मतदाता सूची से करीब 91 लाख लोगों के नाम, सड़कों पर बख्तरबंद दौड़ रही गाड़ियाँ </title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल में 'विशेष गहन पुनरीक्षण' के तहत 91 लाख नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं, जिससे राजनीतिक पारा चढ़ गया है। AI फिल्टर और तकनीकी विसंगतियों के कारण अल्पसंख्यकों, महिलाओं और SC समुदायों पर सबसे ज्यादा मार पड़ी है। ममता बनर्जी ने इसे जनता पर हमला बताया है, जबकि भाजपा ने इसे शुद्धिकरण की प्रक्रिया करार दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-real-electoral-war-of-west-bengal-focused-on-the/article-151319"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(2)28.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल में इस बार 'विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)' के नाम पर मतदाता सूची से लगभग 91 लाख लोगों के नाम हटा दिए गए हैं। इनमें से करीब 27 लाख लोगों के नाम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जनित फिल्टर द्वारा "तार्किक विसंगतियों" के आधार पर हटाए गए। यह विसंगतियां उपनामों की वर्तनी में मामूली अंतर राय या रे जैसी छोटी बातों पर आधारित थीं। राज्य में चुनाव से पहले ग्रामीण सड़कों पर बख्तरबंद गाड़ियाँ दौड़ रही हैं और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल बाज़ारों में गश्त कर रहे हैं। राजमार्गों पर चेकपॉइंट्स बने हैं जहाँ नकदी और शराब की तलाशी ली जा रही है। चुनाव आयोग की यह अभूतपूर्व तैनाती राजनीतिक झड़पों और "वोट खरीदने" की कोशिशों को रोकने के लिए है।</p>
<p>लेकिन इस "युद्ध क्षेत्र" जैसे माहौल के बीच बंगाल की असली चुनावी लड़ाई सड़कों पर नहीं, बल्कि उन न्यायाधिकरणों में लड़ी जा रही है जो यह तय कर रहे हैं कि किसे वोट देने का अधिकार है और कौन भारतीय नागरिक है। बंगाली मुसलमानों के लिए, जिनमें से कई के पास कोई निश्चित उपनाम नहीं होता, इसका मतलब यह हुआ कि पूरे के पूरे गांव मतदाता सूची से बाहर हो गए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इन कटौतियों ने अल्पसंख्यकों, महिलाओं और गरीबों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। मुस्लिम और दलित बहुल सीमावर्ती जिलों जैसे मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर और दक्षिण 24 परगना में यह मार सबसे अधिक पड़ी है, जहाँ हटाए गए नामों की संख्या 2.2 लाख (दक्षिण 24 परगना) से लेकर 4.6 लाख (मुर्शिदाबाद) तक है।</p>
<p>यह शुद्धिकरण अभियान केवल गरीबों तक सीमित नहीं रहा है। इसने "विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग" को भी अपनी चपेट में लिया है। कोलकाता के प्रसिद्ध आईआईएम की प्रोफेसर नंदिता रॉय ने पाया कि उनका नाम सूची से गायब है। उन्होंने कहा, "मेरे पिता सेवानिवृत्त वायुसेना अधिकारी हैं और मैं एक शिक्षाविद हूँ, जब मुझे इस संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है, तो कल्पना कीजिए उन गरीब और अर्ध-शिक्षित लोगों की क्या स्थिति होगी जिन्हें अपने मताधिकार के लिए नौकरशाही से लड़ना पड़ रहा है।" इसी तरह, मुर्शिदाबाद के अंतिम नवाब के वंशज सैयद रजा अली मिर्जा, जिन्हें 'छोटा नवाब' भी कहा जाता है, ने भी अपना नाम मतदाता सूची से हटाए जाने पर गहरा रोष व्यक्त किया है।</p>
<p>राजनीतिक रूप से, टीएमसी को मालदा और मुर्शिदाबाद में मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण से लाभ मिलता दिख रहा है, क्योंकि मतदाता "परिचित बुराई" के पक्ष में एकजुट हो रहे हैं। दूसरी ओर, हिंदुओं के बीच वोटों का जवाबी ध्रुवीकरण मुश्किल लग रहा है क्योंकि <br />'एसआईआर' अभियान ने अनुसूचित जातियों को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। बंगाल के 25 से 30 लाख की आबादी वाले मतुआ समुदाय के बड़ी संख्या में नाम काटे गए हैं, जिससे वे काफी आक्रोशित हैं। मतुआ समाज के सचिव दिलीप मतुआ ने बताया कि उनके अकेले गांव से 200 नाम हटाए गए हैं। इसके अतिरिक्त, बिहार जैसे अन्य राज्यों से आकर बंगाल में बसे लोगों को भी पर्याप्त दस्तावेजों के बावजूद सूची से बाहर रखा गया है।</p>
<p>चुनाव आयोग के इस कदम पर पूर्व आईएएस अधिकारी जवाहर सरकार ने सवाल उठाते हुए कहा है कि आयोग के पास नागरिकता के सवाल तय करने का अधिकार नहीं है। वहीं, भाजपा के विचारक और उम्मीदवार स्वपन दासगुप्ता ने इस अभियान का बचाव करते हुए इसे मतदाता सूची से "फर्जी और मृत" वोटरों को निकालने की प्रक्रिया बताया है। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे राज्य के लोगों पर हमला बताते हुए उच्चतम न्यायालय में गुहार लगाई है।</p>
<p>आंकड़ों का विश्लेषण यह भी बताता है कि इस अभियान ने महिलाओं को असमान रूप से प्रभावित किया है। पहले चरण के चुनावों वाले 152 विधानसभा क्षेत्रों में पुरुष-महिला अनुपात 952:1000 से गिरकर 950:1000 हो गया है। साबर संस्थान के विश्लेषण के अनुसार, विशेष रूप से एससी आरक्षित सीटों पर महिलाओं के नाम काटे जाने के मामले 52.4 प्रतिशत हैं, जो औसत से अधिक हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि 'एसआईआर' ने इस चुनाव के परिणामों की भविष्यवाणी करना अत्यंत कठिन बना दिया है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि इसका अंतिम लाभ किस राजनीतिक दल को मिलता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 15:36:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>PTET परीक्षा सेंटरों पर जूते-चप्पल उतार कर जांच</title>
                                    <description><![CDATA[जोधपुर प्री टीचर एजुकेशन टेस्ट (PTET) देने आज जोधपुर के 88 सेंटर पर स्टूडेंट पहुंचे। चेकिंग के बाद उन्हें एग्जाम सेंटर पर प्रवेश दिया गया। शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालयों में बीएड, 4 वर्षीय इंटीग्रेटेड बीए बीएड व बीएससी बीएड पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने के लिए आयोजित इस प्रवेश परीक्षा में रविवार सुबह 11:30 बजे से शुरु हुई।

]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/scrutiny-by-taking-off-shoes-and-slippers-at-ptet-exam-centers/article-13510"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/7.jpg" alt=""></a><br /><p>PTET परीक्षा सेंटरों पर जूते-चप्पल उतरवा कर जांच:जोधपुर में 88 सेंटर पर परीक्षा शुरू, कड़ी सुरक्षा के बंदोबस्त</p>
<p>जोधपुर प्री टीचर एजुकेशन टेस्ट (PTET) देने आज जोधपुर के 88 सेंटर पर स्टूडेंट पहुंचे। चेकिंग के बाद उन्हें एग्जाम सेंटर पर प्रवेश दिया गया। शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालयों में बीएड, 4 वर्षीय इंटीग्रेटेड बीए बीएड व बीएससी बीएड पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने के लिए आयोजित इस प्रवेश परीक्षा में रविवार सुबह 11:30 बजे से शुरु हुई।</p>
<p>सेंटर पर परीक्षार्थियों की लम्बी कतारें नजर आईं। एग्जाम से एक घंटे पहले सेंटर पर परीक्षार्थी पहुंचे। कोविड नियमों की पालना के साथ सेंटर में प्रवेश दिया गया। परीक्षार्थियों को सेंटर के अंदर मोबाइल, ब्लूटूथ, स्मार्टवॉच, ईयरफोन, पर्स, थैला, काला चश्मा, बंद जूते व गहने ले जाने की अनुमति नहीं थी। ऐसे में स्टूडेंट्स की जांच की गई। यहां तक कि चप्पल जूते भी सेंटर के बाहर ही उतारने को कहा गया। सिर्फ सिंपल चप्पल को अलाउ किया गया। आधी बांह के कपड़ों में स्टूडेंट परीक्षा देने पहुंचे। सुबह 11:30 से शुरु हुई परीक्षा दोपहर 2:30 बजे तक चलेगी। बता दें कि PTET एग्जाम के लिए प्रदेश में 1558 केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों पर 5,44,337 परीक्षार्थी परीक्षा में बैठे। जोधपुर में 88 केंद्र बनाए गए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 Jul 2022 14:51:31 +0530</pubDate>
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