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                <title>chambal garden - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>जैविक खाद तो नहीं बनी, कबाड़ का लग गया अम्बार</title>
                                    <description><![CDATA[चम्बल गार्डन से पुराने कैंटीन हॉल मार्ग का है यह हाल।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/organic-fertilizer-was-not-made--but-a-pile-of-junk-was-created/article-108502"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/jevik-khad-to-nhi-bni,-kabad-ka-lg-gya-ambar...kota-news-24-05-20251.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम अधिकारियों की प्रयोगशाला बन गया है। अधिकारी आते हैं। लाखों रुपया अपनी योजनाओं पर खर्च कर देते हैं। लेकिन उनके चले जाने के बाद यह योजनाएं ढाक का तीन पात हो जाती हैं और जनता की गाड़ी कमाई का करोडों रुपया खर्च हो जाता है। ऐसा ही आर्गेनिक खाद बनाने के मामले में हुआ। दक्षिण की ओर से पूर्व में जिस जगह पर पत्तों से जैविक खाद बनाने की जगह बनाई गई थी। उस जगह पर वर्तमान में गार्डन का कचरा और कबाड़ का अम्बार लगा हुआ है। जिससे उस रास्ते से होकर निकलना अजीब सा लगता है। यह हालत है चम्बल गार्डन के पुराने कैंटीन हॉल की तरफ जाने वाले रास्ते का। पुराने कैटीन हॉल के बंद होने पर वह लम्बे समय तक बदहाल पड़ा हुआ था। लेकिन नगर निगम कोटा दक्षिण की तत्कालीन आयुक्त कीर्ति राठौड़ ने उस जगह को सही करवाया था। जहां कोटा दक्षिण निगम का अतिक्रमण कार्यालय शुरु किया। वहीं चम्बल गार्डन की तरफ बने निगम के स्टोर के पास और कैंटीन हॉल की तरफ जाने वाले रास्ते में पूर्व में गार्डन से निकले पत्तों का ढेर लगा हुआ था। उस ढेर को खत्म करने व उसका उपयोग जैविक खाद बनाने के लिए किया गया था। </p>
<p><strong>तत्कालीन आयुक्त ने शुरु की थी खाद बनाने की व्यवस्था</strong><br />तत्कालीन आयुक्त के निर्देश पर निगम की गार्डन लेबर से वहां बड़ा गड्ढ़ा खुदवाकर उसमें पत्तों का ढेर, मिट्टी व पानी डालकर उससे खाद बनाने का काम शुरु किया था। कई दिन की प्रक्रिया के बाद उन पत्तों से खाद बनकर तैयार होने पर उसका गार्डन में ही पेड़ पौधों में उपयोग किया जा रहा था।  लेकिन वर्तमान में हालत यह है कि स्टोर की तरफ से पुराने कैंटीन हॉल की तरफ जाने वाले रास्ते में पहले जहां खाद बनाई जा रही थी। वहां इतने अधिक पत्ते व अन्य सामान के साथ ही अतिक्रमण निरोधक दस्ते द्वारा जब्त कर लाया गया सामान भी पटका हुआ है। जिससे खाद वाली जगह तो खत्म हो गई है। वहां पत्तों व कचरे का अम्बार लगा हुआ है। </p>
<p><strong>रोजाना निकल रहे पत्तों का है ढेर</strong><br />नगर निगम कर्मचारियों का कहना है कि पत्तों से जैविक खाद बनाने के लिए केचुए वाली खाद के पास ही नई जगह बना दी है। इन पत्तों का उपयोग भी खाद के लिए ही किया जाना है। गार्डन से रोजाना बड़ी संख्या में निकल रहे पत्तों को यहां लाकर डालने से ढेर अधिक नजर आ रहा है। वहीं अतिक्रमण का कार्यालय यहीं होने से अतिक्रमण हटाने के दौरान जब्त किए गए सामान भी यहीं रखे जा रहे है। </p>
<p><strong>झूला जोन व वंडर पार्क की तरफ से दिख रहा दृश्य</strong><br />इतना ही नहीं उस जगह से होकर निगम के अतिक्रमण निरोेधक दस्ता कार्यालय में जाने का रास्ता है। जिससे अधिकारी व कर्मचारियों को उस जगह से होकर निकलना पड़ रहा है। इतना ही नहीं जिस जगह पर इस तरह का दृश्य बन रहा है। वह पास की चम्बल गार्डन के झूला जोन से साफ नजर आ रहा है। गार्डन की चार दीवारी यहां से टूटी हुई है। ऐसे में गार्डन में झूला झूलने आने वाले और उस झूला जोन के पास ही निगम ने वेस्ट टू वंडर पार्क बनाया हुआ है। उस वनडर पार्क में आने वाले भी जब सामने की कबाड़ का अम्बार देख रहे हैं तो उन्हें एक तरफ तो अच्छा दृश्य दिखाया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ उसके सामने ही ऐसा दृश्य देखना पड़ रहा है जहां कबाड़ के पहाड़ नजर आ रहे है। इसी यगह पर पूर्व में लाखों रुपए में क्रय किए गए हाथ ठेला रिक् शे भी पड़े-पड़े अनुपयोगी हो गए हैं। वे भी उसी जगह पर रखे हुए हैं। हालांकि नगर निगम के अतिक्रमण दस्ते में शामिल&gt; कर्मचारियों को भी रोजाना उस कबाड़ वाले रास्ते से जाना पड़ रहा है लेकिन अधिकारियों के डर के कारण कोई भी इस बारे में बोलने को तैयार नहीं है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Mar 2025 18:19:43 +0530</pubDate>
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                <title>दो विभागों के बीच फंसा चम्बल गार्डन का विकास</title>
                                    <description><![CDATA[निगम अधिकारियों की अनदेखी के चलते वर्तमान में यह उद्यान दुर्दशा का शिकार होने से अपनी पहचान खोता जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/development-of-chambal-garden-stuck-between-two-departments/article-68617"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/photo7.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में एक तरफ जहां नए-नए और बड़े बड़े उद्यान विकसित किए जा रहे हैं। वहीं शहर की शान और सबसे पुराना चम्बल गार्डन अपनी पहचान खोता जा रहा है। नगर निगम व नगर विकास न्यास के बीच फंसा होने से इनका विकास व सौन्दर्यीकरण तक नहीं हो पा रहा है।  चम्बल नदी के किनारे काफी बड़े क्षेत्रफल बना होने से इस उद्यान का नाम चम्बल गार्डन पड़ा था। नए कोटा शहर में पुराना उद्यान होने से यह कोटा की शान है। यहां नदी का किराना होने से दूर-दूर से लोग घूमने के लिए आते हैं। पहले यहां पिक निक तक मनाते थे। उद्यान के बीच का बड़ा फव्वारा और चारों तरफ छोटे-छोटे फव्वारे, बच्चों व महिलाओं के लिए झूले, दिनभर गूंजते पुराने गीत और चारों तरफ हरियाली से ढका होने से इसकी अलग भी आभा बिखरती थी। फूलों की सुगंध से पूरा उद्यान ही नहीं आस-पास का क्षेत्र भी महकता था। लेकिन निगम अधिकारियों की अनदेखी के चलते वर्तमान में यह उद्यान दुर्दशा का शिकार होने से अपनी पहचान खोता जा रहा है।</p>
<p><strong>श्वानों का बसेरा, बैंचें टूटी हुई</strong><br />गार्डन में जहां लोग घूमने के लिए आते हैं। वहां अपने साथ खाने का सामान लेकर आते हैं। जैसे ही वे परिवार के साथ बैठकर खाने लगते हैं वैसे ही वहां श्वानों का झुंड आ धमकता है। श्वानों ने पिल्ले भी दे रखे हैं। जिससे पूरे गार्डन में श्वान ही श्वान दिखाई दे रहे हैं।  इतना ही नहीं गार्डन में लोगों के बैठने के लिए बनी अधिकतर बैंचे टूटी हुई हैं। जिससे लोगों को इधर-उधर ही भटकना पड़ता है। </p>
<p><strong>खम्बे हैं लेकिन लाइटें गायब</strong><br />रात के समय कई लाइटें बंद हैंं। डस्टबीन टूटे होने से कचरा बिखरा पड़ा है। नदी किनारे बिजली के खम्बे तो लगे हुए हैंं लेकिन उन पर से लाइटें गायब हैं। इतना ही नहीं नदी किनारे लगी लोहे की रैलिंग से भाले के ऊपरी हिस्से स्मैकचियों द्वारा काटकर ले जाए जा चुके हैं। </p>
<p><strong>कांग्रेस सरकार में न्यास-निगम में उलझा था विकास</strong><br />रा’य की तत्कालीन कांग्रेस सरकार में स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल ने चम्बल गार्डन के विकास व सौन्दर्यीकरण के लिए डीपीआर बनाने के निर्देश दिए थे। पहले यह काम नगर विकास न्यास के करवाने को कहा। बाद में यह काम नगर निगम ने अपने हाथ में लिया। लेकिन निगम के पास करीब 4 करोड़ रुपए बजट का अभाव होने से यह मामला अटक गया। न तो नगर विकास न्यास और न ही नगर निगम इसका विकास करवा सका। रा’य में भाजपा सरकार बनने के बाद भी अभी तक इस उद्यान की हालत जस की तस बनी हुई है। </p>
<p><strong>पहले जैसा नहीं रहा गार्डन</strong><br />चम्बल गार्डन कोटा की शान है। यहां पहले घूमने आते थे तो अच्छा लगता था। लेकिन अब यह पहले जैसा नहीं रहा। बच्चे घूमने की जिद कर रहे थे। यहां आकर देखा तो फव्वारे बंद हैं। पैदल चलने का फर्श उखड़ा हुआ है। जगह-जगह श्वान घूम रहे हैं। बैठने की बैंच तक टूटी हुई हैं। ऐसे में यहां आकर उतना आनंद नहीं किया। बहुत कम समय में वापस जना पड़ रहा है। <br /><strong>- सावित्री सिंह, महावीर नगर </strong></p>
<p>चम्बल गार्डन में आने पर पहले ऐसा महसूस होता था मानो हरियाली और नदी का संगम देखने को मिल रहा हो। चम्बल रिवर फ्रंट नदी के किनारे घूमने का स्थान अब बनाया है। यह गार्डन तो बरसों पुराना रिवर फ्रंट से भी बेहतर है। यहां तो हरियाली भी है और पानी का किनारा भी। लेकिन देखरेख के अभाव में इसकी दुर्दशा हो रही है। <br /><strong>- महावीर वैष्णव, बोरखेड़ा</strong></p>
<p>चम्बल गार्डन पहले पिकनिक स्पॉट के रूप में जाना जाता था। यहां शहर के ही नहीं बाहर से आने वो लोग भी घूमने आते थे। अब शहर में करोड़ों रुपए खर्च कर नए-नए गार्डन बनाए जा रहे हैं जबकि शहर की शान चम्बल गार्डन कीे सार संभाल तक नहीं की जा रही। जिससे यह दुर्दशा का शिकार हो रहा है। यदि इसकी सही ढेंग से देखभाल की जाए तो यहां लोगों की संख्या बढ़ सकती है। <br /><strong>- सुनील लोधा, खेड़ली फाटक</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jan 2024 15:50:29 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>निगम,न्यास के बीच सेंडविच सा बना चंबल गार्डन, हो रही दुर्दशा</title>
                                    <description><![CDATA[निगम अधिकारियों को चाहिए वह इस गार्डन को मैंटेन करे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/chambal-garden-made-like-a-sandwich-between-corporation--trust--plight-is-happening/article-55083"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/nigam,-nyas-k-bich-sandwich-sa-bna-chambal-garden,-ho-rhi-durdasha...kota-news-21-08-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। चम्बल नदी के किनारे बना शहर का सबसे पुराने चम्बल गार्डन किसी समय में लोगों के लिए घूमने और पिकनिक का प्रमुख स्थान था। लेकिन वर्तमान में दुर्दशा का शिकार होने से आमजन को इसकी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इतना ही नहीं दो विभागों के बीच फंसने ने गार्डन का विकास नहीं हो पा रहा था। अब नगर निगम यहां काम करवाएगा। चम्बल गार्डन में न तो फव्वारे चल रहे हैं और न ही झूले। गार्डन के बीच में बना बड़ा फव्वारा  वहां आने वाले लोगों के लिए आकर्षण का केन्द्र था। जिसमें महिला के हाथ में रखे मटकों से पानी गिरता था और चारों तरफ फव्वारे चलते थे। लोग यहां फोटोग्राफी करते थे। हालत यह है कि पिछले कई सालों से यह फव्वारा बंद है। जिससे यहां आने वालों को निराशा हो रही है।</p>
<p><strong>यह भी है समस्या</strong><br />लोगों का कहना है कि गार्डन मे नि:शुल्क वाले झूलों में अधिकतर टूटे हुए हैं। जिससे बच्चे उन पर झूल नहीं पा रहे। टूटे झूलों से चोट लगने का खतरा है। वहीं जो झूले टिकट वाले हैं वे भी बंद हैं। डस्टबीन टूटे हुए हैं।  बैठने की बैंचें टूटी हुई हैं। गार्डन में दिनभर श्वान घूमते रहते हैं।  जिससे कभी खाने के सामान उठा ले जाते हैं तो कभी बच्चों को काटने का डर बना रहता है। </p>
<p><strong>टिकट वसूल रहे तो सुविधा दे निगम</strong><br />गार्डन आने वालों का कहना है कि निगम की ओर से गार्डन में प्रवेश का टिकट लगाया हुआ है। हालाकि वह राशि अधिक नहीं है। लेकिन जनता से टिकट की राशि 5 रुपए वसूल की जा रही है तो उसे सही करने की जिम्मेदारी भी निगम की है। निगम अधिकारियों को चाहिए वह इस गार्डन को मैंटेन करे। जनता को इससे कोई मतलब नहीं है कि यह निगम करवाएगा या नगर विकास न्यास। जनता को तो गार्डन में सुविधा चाहिए। </p>
<p><strong>बीच में फंसा विकास</strong><br />चम्बल गार्डन का विकास नगर निगम व नगर विकास न्यास के बीच में फंÞसा हुआ है। वैसे यह गार्डन नगर निगम कोटा दक्षिण के अधीन है। इसकी देखरेख नगर निगम करता है। लेकिन इसकी दुर्दशा होने पर इसके विकास का काम कुछ समय पहले यूआईटी ने करवाने का निर्णय किया था। जिसकी डीपीआर भी तैयार हो रही थी। लेकिन बाद में वह डीपीआर व काम से न्यास से हाथ खींच लिए। उसके बाद निगम को इसका काम करवाना था। लेकिन निगम के स्तर पर भी अभी कोई काम यहां नहीं कराया गया है। जिससे यहां घूमने आने वालों को सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। </p>
<p>चम्बल गार्डन में पहले नगर विकास न्यास को काम करवाना था। उसकी डीपीआर भी बन रही थी।। लेकिन उसे निरस्त कर दिया गया। अब निगम को इसका काम करवाना है। डीएलबी से यहां 50 लाख के काम करवाने के प्रस्ताव मांगे थे। वह बनाकर भेजे हैं। जिसमें पुराने कैंटीन हॉल के पास की जगह पर गार्डन विकसित करने और पौधे लगाने समेत कई काम हैं। वहां से स्वीकृति मिलने पर पहले उस काम को करवाया जाएगा।<br /><strong>- ए.क्यू कुरैशी, अधिशाषी अभियंता नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>
<p>चम्बल गार्डन में फव्वारे व टूटे झूलों को सही करवाने का काम पहले नगर विकास न्यास को करना था। लेकिन अब यह काम नगर निगम करवाएगा। पहले चरण में 50 लाख के काम होंगे। साथ ही 15-15 लाख के दो टेंडर समेत अन्य काम के टेंडर जारी कर दिए हैं। शीघ्र ही टेंडर प्रक्रिया पूरी होने पर यहां काम निगम के स्तर पर करवाए जाएंगे। <br /><strong>- कुलदीप गौतम, अध्यक्ष उद्यान समिति, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Aug 2023 15:34:12 +0530</pubDate>
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                <title>दुर्दशा की भेंट चढ़ा बच्चों का मनोरंजन</title>
                                    <description><![CDATA[गार्डन में लगे झूलों में से अधिकतर तो टूटे हुए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/children-s-entertainment-fell-victim-to-plight/article-54246"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/durdasha.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। चम्बल गार्डन में लोग परिवार समेत घूमने तो जा रहे हैं लेकिन बच्चे झूलों का आनंद नहीं ले पा रहे हैं। गार्डन में लगे कई झूले तो टूटे हुए हैं जबकि कई झूले बंद पड़े हुह हैं। नगर निगम की ओर से संचालित चम्बल गार्डन  शहर का सबसे प्रसिद्ध गार्डन है। यहां बरसों से लोग घूमने आते हैं। नदी किनारे होने से यह शहर वासियों की ही नहीं बाहर से आने वालों के लिए भी आकर्षण का केन्द्र है। लेकिन पिछले काफी समय से निगम अधिकारियों की अनदेखी के चलते गार्डन की दुर्दशा हो रही है। गार्डन घूमने गए लोगों का कहना है कि परिवार समेत घूमने जाने पर बच्चे वहां झूला झूलने की जिद करते हैं। गार्डन में लगे झूलों में से अधिकतर तो टूटे हुए हैं। जिन पर बच्चों को झूलने से चोट लगने का खतरा बना हुआ है। वहीं जो झूले सही हैं वे बंद पड़े हुए हैं।  लोगों का कहना है कि गार्डन में पहले नगर निगम की ओर से निजी फर्म को झृलों का टेंडर दिया था। जिसमें निर्धारित टिकट लेकर बच्चे झूलों का आनंद ले रहे थे। लेकिन पिछले काफी समय से ये झूले बंद हैं। जिससे गार्डन में आने वाले बच्चे उन झूलों का आनंद नहीं ले पा रहे हैं। विज्ञान नगर निवासी अमजद खान ने बताया कि वे अपने बच्चों को घुमाने चम्बल गार्डन लेकर गए थे। लेकिन वहां कई झूले तो टूटे हुए मिले। जबकि कई झूले बंद थे। जिससे बच्चों को बिना झूलों का आनंद लिए ही लौटना पड़ा। </p>
<p><strong>ट्रेन के घूम रहे चक्के</strong><br />लोगों ने बताया कि चम्बल गार्डन में बच्चों के मनोरंजन के लिए एक मात्र टॉय ट्रेन है। यह अभी चल रही है। लेकिन यहां भी 40 रुपए बड़ों का और 20 रुपए बच्चों का टिकट दने के बाद भी जरा सा ही चक्कर घुमाया। जिसमें बच्चों को ही मजा नहीं आया। लोगों का कहना है कि नयापुरा स्थित सीबी गार्डन में भी कई झूले टूटे हुए हैं। लेकिन नाना देवी से सीबी गार्डन तक चलने वाली जॉय ट्रेन में घूमने का आनंद आता है। यह ट्रेन दो गार्डन का चक्कर काटती है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />चम्बल गार्डन में झूलों का टेंडर दस साल के लिए जुलाई 2014 में किया गया था। प्रकाश ए’यूमेंट फर्म इसका सचालन कर रही है। वैसे तो यह जुलाई 2024 तक है। लेकिन इसके संचालन तिथि को लेकर कुछ असमंजस बना हुआ है। उसकी जांच की जा रही है। जांच होने तक झूलो को फिलहाल बंद किया हुआ है। मामले का शीघ्र ही निस्तारण कर झूलों को या तो शुरू कर दिया जाएगा। या फिर दोबारा से टेंडर कर झूले चालू किए जाएंगे। <br /><strong>- ए.क्यू कुरैशी, अधिशाषी अभियंता नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Aug 2023 16:27:03 +0530</pubDate>
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                <title>कहीं कोटा में भी न हो जाए मोरबी जैसा हादसा</title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम द्वारा संचालित चम्बल  गार्डन में बने लक्ष्मण झूले से करीब 10 फीट नीचे पानी है। चट्टानों पर पानी होने के साथ ही पहले यहा मगरमच्छ व घड़ियाल भी थे। इस पुल पर एक निर्धारित क्षमता तक ही लोगों को जाने की अनुमति है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/there-should-not-be-an-accident-like-morbi-even-in-kota/article-28301"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/kota-ka-laxman-jhula-bhi-ho-sakta-hai-khaternak...kota-news-1.11.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। गुजरात के मोरबी में मच्छु नदी पर बना पुल एक दिन पहले अचानक ढह गया। जिससे उस पर सवार 150 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इसी तरह का हादसा कोटा के लक्ष्मण झूले पर भी कई बार हो चुका है। शहर के सबसे पुराने व बड़े चम्बल गार्डन में नदी किनारे जाने के लिए लक्ष्मण झूला बना हुआ है। यह झूला लकड़ी है जो लोहे के तारों पर झूलते हुए बनाया गया है। इस पर सवार होकर जब लोग एक तरफ से दूसरी तरफ जाते हैं तो यह पूरा पुल हिलता रहता है। नगर निगम द्वारा संचालित इस गार्डन में बने लक्ष्मण झूले से करीब 10 फीट नीचे पानी है। चट्टानों पर पानी होने के साथ ही पहले यहा मगरमच्छ व घड़ियाल भी थे। इस पुल पर एक निर्धारित क्षमता तक ही लोगों को जाने की अनुमति है। लेकिन हालत यह है कि इस  झूले  पर जाने वाले लोगों पर ध्यान रखने वाला  कोई नहीं है। जिससे यहां दिनभर में और एक बार भी भी क्षमता से अधिक लोग निकल रहे हैं। उनमें भी कई लोग तो फोटो खींचने व सेल्फी लेने के क्रेज में इस पर दौड़ते, नाचते हुए और लटककर निकलते हुए देखे जा सकते है। जिससे उनके साथ ही उस झूले से निकल रहे अन्य लोगों के लिए भी वे खतरे से कम नहीं है। </p>
<p>जिस तरह से मोरवी के 140 साल पुराने पुल का  नवीनीकरण किया गया था। 6 महीने बाद 5 दिन पहले उसे खोला गया तो उस पर भी क्षमता से अधिक लोग एक साथ चढ़ गए। जिससे वह टूट गया और उस पर सवार सभी लोग नदी में जा गिरे। जिनमें से अधिकतर की तो मौत भी हो चुकी है।  जानकारों के अनुसार लक्ष्मण झूले पर भी पहले क्षमता से अधिक लोगों के चढ़ने से यह दो  बार टूट चुका है। जिसके बाद इसे काफी समत के लिए बंद कर दिया गया था। लेकिन गार्डन घूमने आने वालों के लिए लक्ष्मण झूला आकर्षण का केन्द्र होने से इसे फिर से चालू  कर दिया। </p>
<p><strong>बोर्ड की ही हालत खराब</strong><br />नगर निगम ने झूले को चालू  तो कर दिया लेकिन उसके साथ ही वहां एक बोर्ड लगा दिया। जिस पर लिख दिया कि इस झूले पर एक बार भी एक निर्धारित संख्या से अधिक लोग नहीं जा सकेंगे। लेकिन हालत यह है कि उस बोर्ड की ही दुर्दशा हो रही है। उस पर क्या लिखा है यह स्पष्ट नजर ही नहीं आ रहा है। ऐसे में वहां आने वालों को उसकी जानकारी भी नहीं है। सोमवार को भी एक बार में कई लोग उस पुल पर से निकल रहे थे। हालांकि अब पुल के नीचे न तो पानी है और न ही  मगरमच्छ। लेकिन उसके बाद भी पुल पर अधिक लोगों के चढ़ने से उसके टूटने का खतरा बना हुआ है। इधर नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि लक्ष्मण झूले पर एक निर्धारित संख्या में ही लोगों को जाने दिया जाता है। यदि उस पर अधिक संख्या में लोग जा रहे हैं तो उन्हें रोकने की व्यवस्था की जाएगी। जिससे फिर से  झूले के टूटने की संभावना नहीं हो। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Nov 2022 16:07:46 +0530</pubDate>
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                <title>टूटे झूले, बंद फव्वारे बिगाड़ रहे चंबल गार्डन का सौन्दर्य</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा शहर के फेमस चंबल नदी के किनारे बने चंबल गार्डन में अवस्थाओं का आलम है। गार्डन में काफी लंबे समय से फव्वारे बंद है। झूले टूटे हुए लटक रहे हैं और लाइट भी बंद है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/broken-swings--closed-fountains-spoiling-the-beauty-of-chambal-garden/article-13593"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/tute-jhule-bandh-fountain-chambal-garden.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। प्री मानसून की बरसात होते ही शहर के ग्रीन पार्क, गार्डन व पिकनिक स्पॉट लोगों की भीड़ से लबालब होने लगे हैं। लेकिन कोटा शहर के फेमस चंबल नदी के किनारे बने चंबल गार्डन में अवस्थाओं का आलम है। गार्डन में काफी लंबे समय से फव्वारे बंद है। झूले टूटे हुए लटक रहे हैं और लाइट भी बंद है। गार्डन की डिग्गी में पानी तक सूख चुका है। पार्क में लगे लाइट बॉक्स से बिजली के नंगे तार निकल चुके हंै और लावारिस पशुओं की भरमार है। ये सब पार्क की दुर्दशा को बयां करते हैं। पार्क में सुबह-शाम सैकड़ों की संख्या में लोग सैर करने आते हैं, लेकिन उसकी बदहाली देखकर उदास हो जाते हैं। सुविधाएं न होने से बच्चों को निराशा ही हाथ लगती है।<br /><br /><strong>लटक रहे हैं टूटे झूले</strong><br />चम्बल गार्डन के मनोरंजन जोन में लगे आधा दर्जन झूले टूट चुके है। प्रशासन ने झूलों को दुरुस्त करवाने की बजाए समेटकर बांध दिया गया है। इससे भी अहम यह है कि कई जगह तो झूले इस तरह से टूटे हैं कि इनकी वजह से गंभीर हादसे हो सकते हैं। झूलों में नुकीले लोहे की वस्तुएं लगी हुई है । बार-बार शिकायत करने के बाद विभाग इन्हें ठीक नहीं करवा रहा। ऐसे में पैरंट्स ने इन पार्कों में बच्चों को ले जाना ही लगभग बंद कर दिया है।<br /><br /><strong>डिग्गी की हालत खस्ताहाल</strong><br />गार्डन में बनाई गई पानी की बड़ी डिग्गी की हालत भी दयनिय हो चुकी है। इस डिग्गी के बाहर सुरक्षा के लिए लगाई गई लोहे की जाली उखड़कर टूट चुकी है। साथ ही लोहे के पोल भी डिग्गी के बाहर उखडकर गिरे हुए है। ऐसे में डिग्गी के पास जाने वाले लोगों व छोटे बच्चों का डिग्गी में गिरने का भी खतरा बना रहता है। इस डिग्गी की हालत अंदर से खस्ताहाल हो चुकी है और जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है। डिग्गी में कचरा व गंदगी जमा हो गई है, जिसकी वजह से यहां से बदबू आने लगी है। डिग्गी का पानी पूरी तरह से सूख चुका है।<br /><br /><strong>फव्वारे व लाइट बंद</strong><br />इसी गार्डन में घूमने आने वाले लोगों को लुभाने के लिए आकर्षक सुंदर प्रतिमा लगाकर सर्किल बनाया गया है। जिसमें कलर फुल लाइट व फव्वारे लगाए हुए हैं। ये फव्वारे व लाइट भी काफी लंबे समय से बंद है। सेल्फी लेने के लिए भी पार्क का यह मुख्य पॉइंट है, लेकिन उसकी मरम्मत तक नहीं हो पा रही। गार्डन में आने वाले लोगों को यह विहंगम दृश्य अपनी और आकर्षित तो करता है, लेकिन फव्वारे व लाइट बंद होने से चेहरे पर मायूसी छा जाती है। <br /><br /><strong>लाइट सप्लाई बॉक्स खुला</strong><br />झूलों के नजदीक लाइट बॉक्स भी खुला हुआ है। जिसकी तार भी बाहर निकल रहे है। बारिश का पानी भी इस लाइट बॉक्स में जाने से स्पार्किंग का खतरा बना रहता है। साथ ही छोटे बच्चे इस लाइट  बॉक्स के पास ही खेलते रहते है। बिजली के इस खुले बॉक्स से बड़ी घटना होने का अंदेशा बना रहता है। इससे बिजली के पोल में करंट आने आने की संभावना रहती है। <br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br /> चंबल गार्डन में अभी झूले ठीक करवाए गए थे। जो भी खराब या टूटे हुए झूले है उनको  जल्द ठीक करवा दिया जाएगा। पार्क में फव्वारे व लाइट बंद होने की सूचना अभी मिली है इनको भी ठीक करवा दिया जाएगा। <br /><strong>- ए क्यू कुरैशी, उद्यान प्रभारी नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Jul 2022 16:20:56 +0530</pubDate>
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