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                <title>खंडेवला सरकारी स्कूल में दो कमरों की छत ढही: तीन महीने पुरानी तकनीकी रिपोर्ट पर उठे सवाल, रिवेरिफिकेशन के पत्र के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई।</title>
                                    <description><![CDATA[खंडेवला के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में रात के समय दो पुराने भवनों की छत ढह गई। दिन में हादसा होता तो बच्चों की जान जोखिम में पड़ सकती थी। ग्रामीणों ने समय रहते कमरों को खाली करवाया था। प्रशासन की अनदेखी पर अभिभावकों में नाराजगी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/dausa/ceiling-of-two-rooms-collapsed-in-khandevla-government-school-questions/article-133308"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/khandar.png" alt=""></a><br /><p>खंडार। बहरावंडा खुर्द कस्बे के समीप ग्राम पंचायत खंडेवला स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में देर रात बड़ा हादसा होते-होते टल गया। विद्यालय के दो जर्जर भवनों की छत अचानक भरभराकर गिर गई। घटना रात में होने से कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन यदि यह हादसा दिन में होता तो बच्चों की जान जोखिम में पड़ सकती थी। गिरी हुई छत के साथ दीवार का बड़ा हिस्सा भी ढह गया, जहां पर दीवार में लगे नलों से बच्चे रोजाना पानी पीते थे। घटना से विद्यालय प्रबंधन, ग्रामीणों और अभिभावकों में गहरी नाराजगी व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को समय रहते अवगत कराने के बावजूद रिवेरिफिकेशन टीम क्यों नहीं भेजी गई।</p>
<p><strong>1985 से पहले बने हुए थे भवन, बारिश के बाद बढ़ गई थी दरारें:-</strong></p>
<p>ये दोनों कमरे 1985 से पूर्व निर्मित थे और लंबे समय से जर्जर अवस्था में थे। बरसात के दौरान कमरों में आई नई दरारों को देखते हुए ग्रामीणों ने प्रधानाचार्य को चेताया था कि इन कमरों में बच्चों को बिठाया न जाए। ग्रामीणों की समझाइश व जागरूकता के चलते विद्यालय प्रशासन ने दो महीने पहले ही इन भवनों में कक्षाएं बंद कर दी थीं। यही निर्णय अब बच्चों की सुरक्षा के लिए वरदान साबित हुआ।</p>
<p><strong>3 महीने पहले आई थी तकनीकी टीम, रिपोर्ट पर उठे सवाल:-</strong></p>
<p>प्रधानाचार्य संदीप सिंह के अनुसार, लगभग तीन महीने पहले पीडब्ल्यूडी विभाग की दो-सदस्यीय टीम विद्यालय में जर्जर भवनों का सर्वे करने आई थी। टीम ने दो जुड़वां भवनों में से एक को 'कंडम' और दूसरे को 'मरम्मत योग्य' बताया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि कौन-सा भवन किस श्रेणी में आता है। इस अस्पष्ट रिपोर्ट ने विद्यालय स्टाफ और ग्रामीणों को असमंजस में डाल दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि रिपोर्ट वास्तविकता के अनुरूप नहीं थी और टीम ने भवनों की वास्तविक हालत को ठीक से नहीं समझा। देर रात छत गिरने की घटना से ग्रामीणों के आरोप और भी मजबूत हो गए हैं।</p>
<p><strong>एसएमसी और एसडीएमएसी ने जताई थी असंतुष्टि, 4 अक्टूबर को भेजा गया था रिवेरिफिकेशन का पत्र:-</strong></p>
<p>विद्यालय की एसएमसी समिति के अध्यक्ष रामबलवान मीना और सदस्य मेमराज गुर्जर ने बताया कि टीम की रिपोर्ट अधूरी और अस्पष्ट होने के कारण एसएमसी व एसडीएमएसी सदस्यों ने असंतोष जताया था। ग्रामीणों की मांग पर विद्यालय के प्रधानाचार्य ने 4 अक्टूबर 2025 को सीबीईओ खंडार को पत्र भेजकर भवनों का पुनः निरीक्षण कराने की मांग की थी। पत्र में साफ लिखा गया था कि तकनीकी रिपोर्ट पर एसएमसी और एसडीएमएसी ने असंतोष जताया है और बरसात के बाद भवनों को और अधिक नुकसान हुआ है। इसके बावजूद खंडार प्रशासन ने रिवेरिफिकेशन टीम नहीं भेजी और न ही किसी प्रकार की कार्रवाई की। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की लापरवाही आज किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती थी।</p>
<p><strong>ग्रामीणों ने प्रशासन पर उठाए सवाल “क्या गरीब बच्चों की जान की कोई कीमत नहीं?”</strong></p>
<p>घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन पर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब भवनों में गहरी दरारें थीं तो टीम ने उन्हें मरम्मत योग्य कैसे बताया। प्रधानाचार्य द्वारा पत्र भेजने के बाद भी रिवेरिफिकेशन की कार्रवाई क्यों नहीं हुई क्या सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब बच्चों की कोई अहमियत नहीं है।ग्रामीणों ने खंडार प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए कहा कि समय रहते कार्रवाई की जाती तो आज इस स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।</p>
<p><strong>प्रधानाचार्य बोले "समय रहते कमरे खाली करवाए, बड़ा हादसा टल गया:-</strong></p>
<p>प्रधानाचार्य संदीप सिंह ने बताया कि ग्रामीणों की मांग पर उन्होंने 4 अक्टूबर को सीबीईओ को पत्र लिखकर भवनों के पुनः सर्वे की मांग की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।उन्होंने कहा रात को छत गिरने से बड़ी अनहोनी टल गई। हम पहले से ही इन कमरों को बंद करवा चुके थे, वरना दर्जनों बच्चों की जान जोखिम में पड़ सकती थी। फिलहाल जर्जर भवन के आसपास तारबंदी करवा दी गई है ताकि कोई निकट न जाए।</p>
<p><strong>ग्रामीणों की मांग जल्द हो नए भवन मंजूर, दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय हो:</strong></p>
<p>छत गिरने की घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जर्जर भवनों का तुरंत पुनः निरीक्षण कराया जाए और नए भवन निर्माण की स्वीकृति जल्द दी जारी हो। तकनीकी रिपोर्ट में लापरवाही करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए व विद्यालय के बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखी जायें रात में गिरी छत ने प्रशासन की ढीली व्यवस्था और लापरवाही को उजागर कर दिया है। गनीमत है कि यह घटना दिन में नहीं हुई, अन्यथा स्थिति बेहद भयावह हो सकती थी। ग्रामीणों ने साफ कहा है कि अब वे इस मुद्दे को आगे तक उठाएंगे ताकि भविष्य में बच्चों की जान इस तरह की लापरवाही की भेंट ना चढ़े।</p>
<p><strong>इनका कहना...</strong></p>
<p>खंडार सीबीईओ ने बताया कि हमने पत्र आने के तुरंत बाद ही उच्च अधिकारियों को रिवेरिफिकेशन टीम भेजने के लिए अवगत करवा दिया था। उच्च लेवल पर ही टीम गठित नहीं की गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>दौसा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Nov 2025 17:29:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>जर्जर भवन: दहशत में शिक्षा ग्रहण कर रहे नौनिहाल</title>
                                    <description><![CDATA[छत में लगा आरसीसी का सरिया भी गलकर पपडी गिरने लगी है। इस समस्या के साए में शाला परिवार संचालित है। संबंधित विभाग को समय पर अवगत करवाया जाने के बाद भी समस्या बनी हुई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/dilapidated-building--children-are-receiving-education-in-fear/article-92732"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/4427rtrer-(8)5.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। क्षेत्र में मूण्डली के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में कक्षा कक्षों की छत की पट्टियां टूट रही। वही कक्षों की दीवारों में भी दरारें आ चुकी है। इस सरकारी विद्यालय में कक्षा कक्ष कम कक्षाएं अधिक होने से खतरे के साए में शिक्षा ग्रहण करने को नौनिहाल मजबूर है। शाला के जिम्मेदार ने संबंधित विभाग को लिखित-पत्र के माध्यम से अवगत भी करवाया गया। अभी तक समस्या जस की तस बनी हुई है। जिसकी वजह से शाला परिवार परेशान हो रहा है।  जानकारी के अनुसार मूण्डली ग्राम में स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय परिसर में आठ कक्षाएं संचालित है। पर यहां कक्षा कक्ष पांच है। जिसमें एक प्रधानाध्यापक कक्ष, आठ कक्षाएँ, चार कक्ष वह भी जर्जर हाल में एक कक्ष में छत की चार पट्टियां टूटी हुई है। जिसमें लंबे समय से लोहे के सरिया का सहारा दे रखा है। इस सरिए को लगे भी बहुत समय हो गया है, जो यह कभी भी नीचे आ सकते है। विद्यालय में बरसाती समय सभी कक्षों की छत टपकती है। बारिश के समय छत टपकने से कक्षों में लगे छतों के पंखे भी खराब हो जाते है। बारिश निकलने पर हर वर्ष सभी पंखों को ठीक करवाने पड़ते है। एक कक्ष की दीवारों में दरारे हो रही है, जो इसमें भी सीलन आती है। सभी कक्षों की छत टपकने से बरसात में स्कूली बच्चों को अध्ययन कार्य सहित कक्षों में बैठना मुश्किल हो जाता है। पर संबंधित विभागीय जिम्मेदार समस्या का निदान नहीं कर रहे है। चारों कक्षों की छत पर पट्टियां होने से जर्जर छत की नीचे नौनिहालों को खतरा बना हुआ है। एक प्रधानाध्यापक का कक्ष है, जिसमें आरसीसी की छत है। जिसका छत का प्लास्तर छूटकर गिर रहा है। छत में लगा आरसीसी का सरिया भी गलकर पपडी गिरने लगी है। इस समस्या के साए में शाला परिवार संचालित है। संबंधित विभाग को समय पर अवगत करवाया जाने के बाद भी समस्या बनी हुई है।</p>
<p><strong>खुले में शिक्षण कार्य प्रभावित</strong><br />इस सरकारी विद्यालय में नौनिहाल खुले में पेड़ों के नीचे अध्ययन करते है, तो उनका शिक्षण कार्य भी प्रभावित हो रहा है। बच्चों की यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है, पर जिम्मेदार अनदेखी कर रहे है।</p>
<p><strong>अभिभावकों की जुबानी</strong><br />इस स्कूल भवन की छत जर्जर हाल में है। स्कूल में भेजते है, जो जब तक बच्चा घर नही आता है। तब तक परेशान रहते है। बारिश के समय स्कूल में बच्चे भीग जाते है। इस समस्या को जिम्मेदार जल्द संज्ञान लेकर निराकरण करें।<br /><strong>-कौशल्या सेन, छात्र की माता निवासी मूण्डली</strong></p>
<p>इस स्कूल में एक ही कक्ष में अधिक संख्या में छत की पट्टियां टूटी हुई है। जो इस कक्ष में बच्चों को खतरा रहता है। इस समस्या से हमें भी नौनिहाल की चिंता सताती है। संबंधित विभाग स्कूल की समस्या का जल्द समाधान करें, तो सभी को राहत मिलें। <br /><strong>- चंद्रकांता चौपदार, छात्र की माता निवासी मूण्डली</strong></p>
<p>स्कूल भवन बरसात के समय कक्षा कक्ष टपकते है। जो बरसात के दौरान अधिकतर समय बच्चों को घर पर आना पड़ता है। यहां पर जो छत है, वह भी जर्जर हाल में है। खतरे के साएं में नौनिहाल यहां अध्ययनरत है। संबंधित जिम्मेदार स्कूली समस्या का त्वरित समाधान करें, तो हमें भी बच्चों की चिंता से राहत मिले।<br /><strong>-रामप्यारी बाई, छात्र अभिभावक निवासी मूण्डली</strong></p>
<p><strong>इनका कहना हैं</strong><br />मैं यहा आया हूं, तब से समय-समय पर हमारे उच्चाधिकारियों सहित संबंधित विभागीय अधिकारियों को लिखित पत्र से अवगत करवा दिया है। पर समस्या का समाधान तो उच्चाधिकारी ही करेंगे।<br /><strong>- राकेश कुमार शर्मा, संस्था प्रधान राउप्रावि मूण्डली</strong></p>
<p>इस तरह की समस्या है, तो प्रधानाध्यापक से जानकारी करते है। जल्द प्रस्ताव बनाकर संबंधित विभाग को भिजवाया जाएगा।<br /><strong>- अनिल गोयल, सीबीईओ शिक्षा विभाग नैनवां</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Oct 2024 16:21:37 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>शॉपिग सेंटर पीएचसी की छत से गिरा प्लास्टर, बाल बाल बचे मरीज</title>
                                    <description><![CDATA[अस्पतालों के भवनों की खस्ताहाल हालत पर विभाग का ध्यान नहीं है जिससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ी हुई है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/plaster-fell-from-the-roof-of-shopping-center-phc--patient-narrowly-escaped/article-66633"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/photo-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर बाजार के बीच में बना शॉपिग सेंटर अस्पताल अपनी बदहाली के आंसू बहा रहा है। बुधवार को भी छत से प्लास्टर गिरने से मरीज चोटिल होते होते बचे। पिछले दो साल से इस पीएचसी की छत से प्लास्टर गिर रहा है। लेकिन इसकी कोई सुध लेने वाला नहीं है। पिछले साल कुछ बजट देकर छत के गड्डे भरकर इतिश्री कर ली गई। लोगों कहना है कि शहरवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाए देने के लिए विभिन्न स्थानों पर प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खोल रखे हैं जिससे मरीजों को बडेÞ अस्पताल तक जाने की दौड़ बच जाए लेकिन शहर के अधिकांश पीएचसी पर प्राथमिक उपचार की ही सुविधा है। अस्पतालों के भवनों की खस्ताहाल हालत पर विभाग का ध्यान नहीं है जिससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ी हुई है। </p>
<p><strong>बरसों पुरानी छत को मरम्मत की दरकार</strong><br />शहर के शॉपिंग सेंटर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की बरसों से भवन की मरम्मत नहीं होने से छतों से प्लास्टर गिर रहा है। वहीं बारिश शुरू होने के साथ छत से जगह जगह पानी टपकने लग जाता है। गंदे पानी की निकासी के चेंबर नहीं होने से सारा पानी अस्पताल परिसर में जमा हो जाता जिससे मरीजों को अस्पताल में पहुंचने में परेशानी होती है। अस्पताल की मरम्मत से लेकर सुविधा बढ़ाने के लिए कई बार सीएमएचओ से लेकर जनप्रतिनिधियों तक अस्पताल प्रभारी ने गुहार लगा दी लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। हर बार आश्वासन का झुनझुना देकर इतिश्री कर ली जाती है। </p>
<p><strong>जहां जांच वहीं टूटा प्लास्टर, दीवारों पर लग रही फंगस </strong><br />शॉपिग सेंटर अस्पताल के लेब में चहुंओर दीवारों पर सीलन आ रही है।  दीवारों पर ब्लैक फंगस लगी हुई है। ऐसे में लेब जांच से ज्यादा संक्रमण दे रही है। चहुंओर सीलन की बदबू से यहां काम करने वाले लेब टेक्नीशियन परेशान रहते है।</p>
<p><strong>टीकाकरण केंद्र कक्ष में गिर रहा प्लास्टर</strong><br />शॉपिंग सेंटर अस्पताल के टीकाकरण केंद्र कक्ष छत का जगह-जगह से प्लास्टर गिर रहा है। ऐसे में कभी बड़ा हादसा होने का अंदेशा सदैव बना रहता है। इस कक्ष में गर्भवती महिलाओं, बच्चों को वैक्सीन लगाई जाती है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज यहां आते है। जर्जर होती छत से आए दिन प्लास्टर गिर रहा है। ये तो गनिमत रहती है अभी तक जितनी बार प्लास्टर गिरा मरीज बच गए। नहीं तो किसी  मरीज के सिर पर  गिरा होता हो बड़ी दुर्घटना हो जाती। </p>
<p><strong>इंजेक्शन रूम बदहाल</strong><br />अस्पताल के इंग्जेक्शन रूम में भी सीलन और प्लास्टर गिरा हुआ है। नि:शुल्क दवा केंद्र की छत से प्लास्टर गिर रहा है।  पानी की निकासी नहीं होने से परिसर में पानी भर जाता है।</p>
<p>अस्पताल की छोटी बड़ी मरम्मत अस्पताल अनटाइल फंड से करा सकता है। पूरी छत का प्लास्टर गिर रहा हैतो इसके लिए पीएचसी प्रभारी लिखित में सीएमएचओ कार्यालय में दे इसके अलावा बड़े कार्य के लिए एनएच विंग में लिखित में देवे। इसके लिए जयपुर से स्वीकृति लेनी होगी। <br /><strong>- डॉ.जगदीश कुमार सोनी, सीएमएचओ</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jan 2024 15:27:02 +0530</pubDate>
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                <title>शॉपिग सेंटर पीएचसी छत से गिर रहा प्लास्टर, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा</title>
                                    <description><![CDATA[शहर के शॉपिंग सेंटर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की बरसों से भवन की मरम्मत नहीं होने से छतों से प्लास्टर गिर रहा है। वहीं बारिश शुरू होने के साथ छत से जगह जगह पानी टपक रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/plaster-falling-from-shopping-center-phc-ceiling--there-can-be-a-big-accident-anytime/article-13595"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/shopping-center-phc-plaster-gir-raha.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । शहर में लोगों बेहतर स्वास्थ्य सेवाए देने के लिए शहर के विभिन्न स्थानों पर प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खोल रखे हैं जिससे मरीजों को बडे अस्पताल तक जाने की दौड़ बच जाए लेकिन शहर के अधिकांश पीएचसी पर प्राथमिक उपचार की ही सुविधा है। अस्पतालों के भवनों की खस्ताहाल हालत पर विभाग का ध्यान नहीं है जिससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ी हुई है। शहर के शॉपिंग सेंटर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की बरसों से भवन की मरम्मत नहीं होने से छतों से प्लास्टर गिर रहा है। वहीं बारिश शुरू होने के साथ छत से जगह जगह पानी टपक रहा है। गंदे पानी की निकासी के चेंबर नहीं होने से सारा पानी अस्पताल परिसर में जमा हो रहा जिससे मरीजों को अस्पताल में पहुंचने में भी परेशानी होरही है। अस्पताल की मरम्मत से लेकर सुविधा बढ़ाने के लिए कई बार सीएमएचओं से लेकर जनप्रतिनिधियों तक अस्पताल प्रभारी ने गुहार लगा दी लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। हर बार आश्वासन का झुनझुना देकर इतिश्री कर ली जाती है। <br /><br /><strong>टीकाकरण केंद्र कक्ष में गिर रहा प्लास्टर</strong><br />शॉपिंग सेंटर अस्पताल के टीकाकरण केंद्र कक्ष छत का जगह-जगह से प्लास्टर गिर रहा है। ऐसे में कभी बड़ा हादसा होने का अंदेशा सदैव बना रहता है। इस कक्ष में गर्भवती महिलाओं, बच्चों व कोविड वैक्सीन लगाई जाती है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज यहां आते है। बारिश के चलते इन दिनों छत आए दिन प्लास्टर गिर रहा है। ये तो गनिमत रहती है अभी तक प्लास्टर किसी मरीज के सिर पर नहीं गिरा नहीं हो बड़ी दुर्घटना हो जाती। <br /><br /><strong>जहां जांच होती वहीं फैल रहा फंगस</strong> <br />शॉपिग सेंटर अस्पताल के लेब में चहुंओर दीवारों पर सीलन आ रही है। छत से पानी टपक रहा है। दीवारों पर ब्लैक फंगस लगी हुई है। ऐसे में लेब जांच से ज्यादा संक्रमण दे रही है। चहुंओर सीलन की बदबू से यहां काम करने वाले लेब टेक्नीशियन परेशान रहते है। इसके अलावा अस्पताल के इंग्जेक्शन रूम में भी सीलन और पानी टपक रहा है। नि:शुल्क दवा केंद्र की छत से प्लास्टर गिर रहा है। <br /><br /><strong> निकासी नहीं होने से अस्पताल में भरा पानी</strong> <br />अस्पताल परिसर में पानी बारिश की पानी निकासी के लिए चेंबर नहीं बना रखा जिससे पानी अस्पताल परिसर में ही फैलता है। अस्पताल के मुख्य गेट पर चेंबर नहीं होने से यहां लोहे की सीढ़ी लगा रखी उस पर चढ़कर मरीज अस्पताल में पहुंच रहे है। <br /><br />अस्पताल की मरम्मत कराने के लिए सीएमएचओ को कई बार पत्र लिखा और मौखिक भी अवगत कराया। उन्होंने विज्ञान नगर सीएचसी के बजट से अस्पताल की मरम्मत कराने का आश्वासन दिया लेकिन आज तक मरम्मत नहीं हो सकी। जन सहयोग से अस्ताल में पुताई कराई लेकिन बारिश से छत टपक रही है। प्लास्टर गिर रहा है। अस्पताल में पानी की निकासी के लिए कोई चेंबर नहीं होने से सारा पानी अस्पताल परिसर में जमा हो रहा है। <br /><strong>-डॉ. निधी सक्सेना, अस्पताल प्रभारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Jul 2022 16:16:46 +0530</pubDate>
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