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                <title>education policy - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>education policy RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>भजनलाल सरकार में शिक्षा का स्वर्णिम दौर : आवासीय विद्यालयों के छात्रों ने रचा इतिहास, मॉनिटरिंग और मार्गदर्शन से मिली सफलता</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की दूरदर्शी नीतियों से आवासीय विद्यालयों के छात्रों ने बोर्ड परीक्षाओं में कीर्तिमान रचा है। कला और वाणिज्य संकाय में लगभग 100% परिणाम के साथ वंचित वर्ग के विद्यार्थियों ने उत्कृष्टता सिद्ध की। मंत्री अविनाश गहलोत ने इस सफलता को समावेशी शिक्षा और शिक्षकों के समर्पण का परिणाम बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/golden-era-of-education-under-bhajanlal-government-students-of-residential/article-151812"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/ambedkar-bhawan.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य की शिक्षा व्यवस्था में हो रहे सुधारों का असर अब परिणामों में साफ दिखाई दे रहा है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा संचालित आवासीय विद्यालयों के विद्यार्थियों ने इस वर्ष 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में अभूतपूर्व सफलता हासिल कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत ने इस शानदार उपलब्धि का श्रेय विद्यार्थियों की मेहनत, शिक्षकों के समर्पण और राज्य सरकार की दूरदर्शी नीतियों को दिया। उन्होंने कहा कि यह सफलता वंचित वर्ग के विद्यार्थियों के लिए नई प्रेरणा है और आने वाले समय में ये विद्यालय और बेहतर परिणाम देंगे।</p>
<p><strong>शानदार परीक्षा परिणाम</strong></p>
<p>आवासीय विद्यालयों के छात्रों ने इस वर्ष उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए—</p>
<p>10वीं बोर्ड में 97.98% परिणाम दर्ज किया। 1829 में से 1792 विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए।<br />12वीं विज्ञान संकाय में 98.38% सफलता मिली, जिसमें बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने प्रथम श्रेणी प्राप्त की।<br />कला संकाय में 99.85% का लगभग शत-प्रतिशत परिणाम रहा।<br />वाणिज्य संकाय में 100% परिणाम दर्ज कर सभी 18 विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए।</p>
<p>उच्च अंकों की बात करें तो कई विद्यार्थियों ने 90% से अधिक अंक प्राप्त कर उत्कृष्टता का प्रदर्शन किया।</p>
<p><strong>समावेशी शिक्षा का मॉडल बना योजना</strong></p>
<p>वर्ष 1997-98 में शुरू हुई आवासीय विद्यालय योजना आज सामाजिक परिवर्तन का मजबूत माध्यम बन चुकी है। वर्तमान में राज्य के 42 विद्यालयों में 14,500 से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। यहां अनुसूचित जाति, जनजाति, विशेष पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा, आवास, भोजन, पुस्तकें और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।</p>
<p><strong>बढ़ते निवेश से मिल रहे बेहतर परिणाम</strong></p>
<p>राज्य सरकार द्वारा इस योजना पर लगातार निवेश बढ़ाया जा रहा है। पिछले वर्षों में करोड़ों रुपये खर्च कर हजारों विद्यार्थियों को लाभान्वित किया गया है, जिससे शिक्षा का स्तर ऊंचा हुआ है और वंचित वर्ग मुख्यधारा से जुड़ रहा है।</p>
<p><strong>मॉनिटरिंग और मार्गदर्शन से मिली सफलता</strong></p>
<p>छात्रों की नियमित मॉनिटरिंग, विषय विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और परामर्श व्यवस्था ने इन परिणामों की नींव मजबूत की है। सभी विद्यालय राजस्थान रेजिडेंशियल एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन सोसाइटी (RREIS) के माध्यम से संचालित हो रहे हैं, जहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सर्वांगीण विकास पर जोर दिया जा रहा है। सरकार की इस पहल ने यह साबित कर दिया है कि सही अवसर और संसाधन मिलने पर वंचित वर्ग के विद्यार्थी भी सफलता के नए आयाम स्थापित कर सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 16:16:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भाजपा सरकार की शिक्षा नीति गरीबों के लिए बनी परेशानी का सबब : जूली</title>
                                    <description><![CDATA[जूली ने भाजपा सरकार से अपील की है कि वे अपनी शिक्षा नीति को बदले और स्कूलों को बंद करने की जगह उन्हें सुधारने और उनके विस्तार पर ध्यान दें। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/education-policy-of-bjp-government-has-become-a-cause-of/article-101150"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/257rtrer27.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भाजपा सरकार की घोषित शिक्षा नीति को लेकर चिंता जताई है। जूली ने कहा कि घोषित शिक्षा नीति से गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों को सबसे अधिक नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने 1 साल में 450 स्कूलों को बंद कर दिया है, जो कि शिक्षा प्रणाली में सुधार, नवाचार एवं विस्तार करने की जगह दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चे शिक्षा से वंचित हो जाएंगे।</p>
<p>भाजपा सरकार का असली उद्देश्य शिक्षा को निजी हाथों में सौंपना है, जो कि आरएसएस के एजेंडे के तहत है। वे गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों को शिक्षा के अधिकार से वंचित रखकर आदर्श विद्या मंदिर स्कूलों को पुन: स्थापित करना चाहते हैं। जूली ने भाजपा सरकार से अपील की है कि वे अपनी शिक्षा नीति को बदले और स्कूलों को बंद करने की जगह उन्हें सुधारने और उनके विस्तार पर ध्यान दें। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Jan 2025 11:21:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सेमेस्टर तक सिमट कर रह गई नई शिक्षा नीति</title>
                                    <description><![CDATA[दो साल बाद भी मल्टी डिसिप्लिनरी नहीं बन सके कॉलेज, सेमेस्टर सिस्टम बना बोझ, बढ़ती फीस दे रही तनाव  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/new-education-policy-limited-to-semesters/article-94720"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/6630400-sizee6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती के उच्च शिक्षण संस्थानों में नई शिक्षा नीति लागू हुए दो साल बीत चुके हैं। लेकिन, यूनिवर्सिटी व महाविद्यालय अब तक न्यू एजुकेशन पॉलिसी का 10 प्रतिशत हिस्सा भी लागू नहीं कर पाई। वजह, बुनियादी सुविधाएं और इंफ्रस्ट्रेक्चर का अभाव।  कोटा यूनिवर्सिटी ने आपाधापी में न्यू एजुकेशन पॉलीसी 2020 लागू तो कर दी लेकिन उसके उद्देश्यों को पूरा नहीं कर सकी। नई शिक्षा नीति के नाम पर सिर्फ सेमेस्टर प्रणाली ही लागू किया गया, जो विद्यार्थियों पर बोझ बन गया और मल्टीपल सब्जेक्ट च्वाइस, क्रेडिट सिस्टम व मल्टीपल एंट्री-एक्जिट जैसी सुविधाएं पहुंच से दूर हो गई।  कोटा संभाग में एक भी मल्टी डिसिप्लिनरी कॉलेज नहीं है, जहां विद्यार्थियों को मल्टीपल सब्जेक्ट पढ़ने की सुविधा मिल सके। ऐसे में नई शिक्षा नीति इंफ्रास्ट्रक्चर की लचरता के भंवर में फंसकर रह गई। विशेषज्ञों का तर्क है, इंफ्रास्ट्रक्चर व बुनियादी सुविधाओं के बिना विद्यार्थियों का सम्रग विकास संभव नहीं है और न ही नई न्यू एजुकेशन पॉलिसी के उद्देश्यों की पूर्ति हो पाएगी। </p>
<p><strong>पढ़ाने को शिक्षक नहीं, मल्टी डिसिप्लिनरी कैसे बने कॉलेज</strong><br />नई शिक्षा नीति में प्रावधान है कि आर्ट्स के स्टूडेंट्स साइंस, कॉमर्स या कोई भी रुचिकर विषय पढ़ सकता है। ताकि, छात्र मल्टी टास्किंग बन सके। लेकिन, पिछले दो साल में हाड़ौती का एक भी राजकीय महाविद्यालय मल्टी डिसिप्लिनरी तक नहीं बन सका। कॉलेजों में पढ़ाने को शिक्षक नहीं है, ऐसे में यहां मल्टी टास्किंग स्टूडेंट्स तैयार होना तो दूर उनका पास होना ही चुनौति बना हुआ है। </p>
<p><strong>मल्टीपल एंट्री-एक्जिट तक की सुविधा नहीं</strong><br />कोटा विवि से संबद्ध हाड़ौती के राजकीय महाविद्यालयों में अब तक नई शिक्षा नीति के तहत मल्टीपल एंट्री-एक्टिजट तक की सुविधा नहीं मिली। जबकि, एनईपी में तीन वर्षीय डिग्री कोर्स में कोई विद्यार्थी प्रथम वर्ष का पहला सेमेस्टर पूरा करता है तो उसे सर्टिफिकेट मिलता है और दूसरा सेमेस्टर करने पर डिप्लोमा का सर्टिफिकेट दिया जाना है। इसके बाद वह आगे की पढ़ाई किसी दूसरे कॉलेज या विवि से कर सकता है। ऐसी स्थिति में उसके क्रेडिट (अंक) संबंधित शिक्षक संस्था में ट्रांसफर किए जाने का प्रावधान है। लेकिन, संभाग के विद्यार्थियों को यह सुविधा भी नहीं मिल रही। छात्र महीप सिंह </p>
<p><strong>सेमस्टर ने मानसिक तनाव व फीस का बोझ बढ़ाया</strong><br />नई शिक्षा नीति के नाम पर शुरू की गई सेमेस्टर स्कीम  विद्यार्थियों के लिए मुसीबत बन गई। हर छह माह में सेमेस्टर एग्जाम से फीस का बोझ बढ़ गया। जबकि, परीक्षाएं भी 6 माह की जगह ढाई से तीन  माह में हो रही है। साल में दो बार एग्जाम होने से विद्यार्थियों को प्रति समेस्टर ढाई हजार का नुकसान हो रहा है। जबकि, पहले वार्षिक स्कीम के तहत साल में एक बार ही एग्जाम फीस लगती थी। वहीं, रिजल्ट भी समय पर जारी होते थे। </p>
<p><strong>आर्ट्स के स्टूडेंट्स कैसे पढ़ेंगे साइंस</strong><br /> : एनईपी छात्रों को बहु विषयक पढ़ने की सुविधा देती है लेकिन संभाग के महाविद्यालय संसाधनों से जूझ रहे।  हालात यह हैं, कॉलेजों में बैठने के लिए कुर्सियां तक नहीं है, शिक्षकों के नहीं होने से महत्वपूर्ण विषयों की कक्षाएं नहीं लगती। ऐसे महाविद्यालयों में आर्ट्स के विद्यार्थियों को कैसे साइंस या अन्य रुचिकर सब्जेक्ट  पढ़ने को मिलेंगे। मल्टीपल च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम, मल्टीपल एंट्री एक्जिट की सुविधाएं तब तक नहीं मिल सकेगी जब तक मल्टीपल डिसिप्लिीनरी कॉलेज की स्थापना नहीं होगी। </p>
<p><strong>यह बोले शिक्षाविद्</strong><br /><strong>एबीसी आईडी व एक समान हो सिलेबस </strong><br />जब तक विद्यार्थियों की एबीसी आईडी, एक समान सिलेबस और सभी यूनिवर्सिटी व महाविद्यालय एक प्लेटफॉर्म पर नहीं आएगी तब तक नई शिक्षा नीति को पूरी तरह लागू कर पाना मुश्किल होगा। हालांकि, ऐसे इंडिज्यूवल कॉलेज जहां पर 10 विषय संचालित हैं, वहां  स्टूडेंट्स के तीन विषयों को छोड़कर अन्य सात विषयों में च्वाइस दे सकते हैं। लेकिन संबंधित कॉलेजों में 10 विषयों के शिक्षक भी तो हो, जो वर्तमान में कई राजकीय महाविद्यायों में नहीं है। संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के बाद एनईपी लागू करनी चाहिए थी। <br /><strong>-केशव दत्ता, शिक्षक, निजी महाविद्यालय</strong></p>
<p><strong>डिविजन लेवल पर हो ज्वाइंट डायरेक्टर की नियुक्ति</strong><br />राजकीय महाविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थी दूसरे स्ट्रीम का विषय कहां और कैसे पढ़ेगा, इसकी व्यवस्था कैसे होगी, यह नीति निर्धारण करना चाहिए था, जो अब तक नहीं हुआ। हमारे पास जो साधन-संसाधन उपलब्ध हैं, उसी में बेहतर करना है। इसके लिए जरूरी है कि संभाग मुख्यालय पर एक ज्वाइंट डायरेक्टर नियुक्त किया जाना चाहिए। क्योंकि, उनके पास सरकार द्वारा निहित शक्तियां होती हैं, जिसका उपयोग कर दो तरह से प्रयास कर सकते हैं, पहला-आर्ट्स के छात्रों को साइंस कॉलेज में तीन दिन पढ़ाने की व्यवस्था कर सकते हैं, लेकिन इसमें स्टूडेंट्स मूव करने में दिक्कत होगी। दूसरा- साइंस कॉलेज से शिक्षक को तीन दिन आर्ट्स कॉलेज में भेजकर पढ़ा सकते हैं।  <br /><strong>-प्रो. संजय भार्गव, शिक्षाविद् एवं पूर्व प्राचार्य जेडीबी</strong></p>
<p><strong>मल्टीपल एंट्री-एक्जिट पॉलीसी हो लागू  </strong><br />नई शिक्षा नीति का मुख्य उद्देश्य मल्टीपल डिसिप्लिीनरी कॉलेज की स्थापना करना है, जो अब तक नहीं हुआ। जबकि, आबादी को देखते हुए ऐसा महाविद्यालय की स्थापना की जानी चाहिए, जहां पर सभी विषयों की फैकल्टी उपलब्ध हो। ताकि, विद्यार्थी किसी भी स्ट्रीम का विषय पढ़ने का मौका मिल सके। मल्टीपल एंट्री एंड एक्जिट स्कीम, के्रडिट सिस्टम तक नहीं अपना सके। मल्टीपल एंट्री एंड एक्जिट के तहत यदि, कोई छात्र 6 महीने ही पढ़ाई करता है और फिर छोड़ देता है तो उसे सर्टिफिकेट दिया जाता है। एक साल पढ़ाई करने पर डिप्लोमा, दो साल पढ़ने पर पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा, तीन साल पर डिग्री, चार साल पर आॅनर्स और पांच साल लगातार पढ़ाई करने पर रिसर्च की डिग्री दी जाती है। लेकिन, हाड़ौती ही नहीं प्रदेश के किसी भी कॉलेज व विवि में यह लागू नहीं हो सका।   <br /><strong>-डॉ. अनुज विलियम, प्रोफेसर</strong></p>
<p>एनईपी-2020 की मूल भावना के अनुरूप अभी बहुत कुछ करना बाकी है। सेमेस्टर स्कीम तो न्यू एजुकेशन पॉलिसी का छोटा सा कदम है। विद्यार्थियों के लिए इसे व्यवहारिक बनाने की आवश्यकता है, इस दिशा में हम लगातार कार्य किया जा रहा है। <br /><strong>-प्रो. कैलाश सोढानी, कुलपति, कोटा विश्वविद्यालय</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 Nov 2024 15:31:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नई शिक्षा नीति युवाओं को निर्णय लेने में अधिक स्वतंत्रता करती है सुनिश्चित : मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[इस समारोह को संबोधित करने वाले मोदी 70 साल के बाद दूसरे प्रधानमंत्री है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/new-education-policy-ensures-youth-more--in-decision-making--says-modi/article-16762"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/465465465157.jpg" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि नई शैक्षिक नीति बदलती परिस्थितियों में युवाओं को निर्णय लेने में अधिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करती है। मोदी अन्ना विश्वविद्यालय के 42वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस समारोह को संबोधित करने वाले मोदी 70 साल के बाद दूसरे प्रधानमंत्री है। इससे पहले प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इस विश्विविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि हम भाग्यशाली हैं कि आप लोग भारत के भविष्य के साथ-साथ अपने भविष्य का निर्माण करेंगे। हर अवसर का लाभ उठाएं। मोदी ने कहा कि एक मजबूत सरकार प्रतिबंधात्मक नहीं, बल्कि उत्तरदायी होती है।</p>
<p>पहले धारणा थी कि मजबूत सरकार वही है, जो हर किसी को नियंत्रित करती है। हमने इसे बदल दिया है। मजबूत सरकार सभी को नियंत्रित नहीं करती, बल्कि यह व्यवस्था को  नियंत्रित करती है। एक मजबूत सरकार प्रतिबंधात्मक नहीं, बल्कि उत्तरदायी है। लोगों को अपने बल पर निर्णय लेने की स्वतंत्रता है। नयी शिक्षा नीति बदलती परिस्थितियों में युवाओं को उनके अनुसार निर्णय लेने की अधिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करती है।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Jul 2022 14:26:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>युवाओं को तकनीक की ओर ले जाना है शिक्षा नीति का उद्देश्य : मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मूल उद्देश्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस नीति का पहला मूलमंत्र युवाओं को तकनीकी और उन्नत की ओर ले जाना है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/aim-of-education-policy-is-to-take-youth-technology--says-modi/article-13828"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/46546546546.jpg" alt=""></a><br /><p>वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मूल उद्देश्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस नीति का पहला मूलमंत्र युवाओं को तकनीकी और उन्नत की ओर ले जाना है। इससे सिर्फ डिग्री धारक युवाओं से देश को बचाया जा सके। मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर अखिल भारतीय शिक्षा समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि आजादी के पहले शिक्षा का उद्देश्य शिक्षित लोग नहीं, बल्कि सेवक वर्ग तैयार करना था। वह अंग्रेजों की शिक्षा पद्धति थी, लेकिन अब ऐसी शिक्षा पद्धति की जरूरत है, जो केवल युवाओं को डिग्रीधारक न बनाएं, बल्कि उनमें नेतृत्व की क्षमता भी उत्पन्न करे।</p>
<p>मोदी ने कहा कि यह उस धरती पर हो रहा है, जिस धरती पर आजादी से पहले एक शिक्षा का केंद्र स्थापित हुआ था। बनारस शिक्षा और ज्ञान का केंद्र था। मोदी ने कहा कि नये भारत के निर्माण के लिए आधुनिक व्यवस्थाओं का समावेश होना जरूरी है। देश को आगे बढ़ने के लिए जितने भी मानव संसाधनों की जरूरत हो। वह सभी शिक्षा व्यवस्था को देश के लिये मिलने का संकल्प लेना चाहिये। इस संकल्प का नेतृत्व शिक्षकों और शिक्षण संस्थानों को करना है।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Jul 2022 16:42:32 +0530</pubDate>
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