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                <title>हवाई यात्रियों के लिए खुशखबरी: 19 से 28 मार्च के बीच एयर इंडिया करेगा यूरोप, कनाडा के लिए 36 अतिरिक्त उड़ानों का परिचालन, यहां देखें पूरा शेड्यूल</title>
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                        <![CDATA[बढ़ती मांग को देखते हुए एयर इंडिया ने 19 से 28 मार्च के बीच 36 नई उड़ानों की घोषणा की है। दिल्ली और मुंबई से लंदन, फ्रैंकफर्ट, ज्यूरिख और टोरंटो के लिए 10,012 अतिरिक्त सीटें उपलब्ध होंगी। यात्री अब अधिक विकल्पों के साथ अपनी अंतरराष्ट्रीय यात्रा सुगम बना सकेंगे। टाटा समूह की यह पहल वैश्विक कनेक्टिविटी को नई मजबूती देगी।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/good-news-for-air-passengers-air-india-will-operate-36/article-146823"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/air-india.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। टाटा समूह की विमान सेवा कंपनी एयर इंडिया ने बढ़ी मांग को देखते हुए यूरोप और कनाडा के लिए 19 से 28 मार्च के बीच 36 अतिरिक्त उड़ानों (दोनों तरफ मिलाकर) के परिचालन की घोषणा की है। एयरलाइंस ने मंगलवार को एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि ये उड़ानें दिल्ली से लंदन (हीथ्रो), फ्रैंकफर्ट, ज्यूरिख और टोरंटो के लिए तथा मुंबई से लंदन (हीथ्रो) के लिए होंगी। इन उड़ानों के माध्यम से 10,012 अतिरिक्त सीटें उपलब्ध होंगी। </p>
<p>एयर इंडिया ने बताया कि दिल्ली से लंदन के लिए चार अतिरिक्त उड़ानें 20, 22, 25 और 27 मार्च को और मुंबई से ब्रिटेन की राजधानी लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे के लिए एक मात्र उड़ान 21 मार्च को उपलब्ध होंगी। दिल्ली से जर्मनी के फ्रैंकफर्ट के लिए आठ अतिरिक्त उड़ानें 19, 20, 22, 23, 24, 25, 26 और 27 मार्च को रवाना होंगी। दिल्ली से स्विटजरलैंड के ज्यूरिख के लिए एक मात्र उड़ान 24 मार्च को उपलब्ध रहेगी। </p>
<p>दिल्ली से कनाडा के टोरंटो के लिए 19, 21, 24 और 26 मार्च को चार अतिरिक्त उड़ानों की योजना है। इससे पहले एयर इंडिया ने 10 से 18 मार्च के बीच नौ मार्गों पर 78 अतिरिक्त उड़ानों की घोषणा की थी। </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 15:18:50 +0530</pubDate>
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                <title>यूक्रेन जेलेंस्की शांति: 'शांति संबंधी' समझौते के लिए तैयार यूक्रेन</title>
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                        <![CDATA[यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में कहा कि वे 'सम्मानजनक' शांति समझौते के लिए तैयार हैं। उन्होंने वार्ता में यूरोप की भागीदारी और अमेरिका से ठोस सुरक्षा गारंटी की मांग की।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/ukraine-ready-for-zelensky-peace-deal/article-143270"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(12200-x-600-px)-(24)1.png" alt=""></a><br /><p>कीव। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा है कि यूक्रेन एक ऐसे समझौते के लिए तैयार है जो वास्तविक रूप से शांति लाएगा। यूक्रिनफॉर्म न्यूज एजेंसी के अनुसार, जेलेंस्की ने जर्मनी में आयोजित म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में एक भाषण के दौरान कहा, यूक्रेन एक ऐसे समझौते के लिए तैयार है जो हमारे लिए, यूक्रेन के लिए, यूरोप के लिए असली शांति लाएगा। </p>
<p>जेलेंस्की ने कहा, इस संकट को सबसे पहले अस्मिता के साथ खत्म किया जा सकता है। यह हमारे लिए सबसे जरूरी बात है। उनके मुताबिक, यूरोप असल में बातचीत के लिए मौजूद नहीं है, जो एक बड़ी गलती है। यूक्रेन बातचीत की प्रक्रिया में यूरोप को पूरी तरह से शामिल करने की कोशिश कर रहा है ताकि यूरोप के हितों और यूरोप की आवाज का ध्यान रखा जा सके।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यूक्रेन बातचीत को सफल बनाने के लिए सब कुछ करेगा। वह अमेरिका के प्रतिनिधियों के साथ लगातार बातचीत कर रहा है। </p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Feb 2026 16:03:03 +0530</pubDate>
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                <title>दिमित्री पोलियांस्की का दावा: यूक्रेन के लिए रूस ओएससीई विशेष निगरानी मिशन प्रारूप को फिर से शुरू करने के पक्ष में नहीं, सैन्य कार्रवाई बंद होने की मांग</title>
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                        <![CDATA[ओएससीई में रूस के प्रतिनिधि दिमित्री पोलियांस्की ने कहा कि यूक्रेन पर एसएमएम प्रारूप दोबारा शुरू करने में मॉस्को की कोई रुचि नहीं है, वियना साक्षात्कार में यह स्पष्ट किया।]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/dmitry-polyansky-claims-russia-is-not-in-favor-of-resuming/article-142604"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(5)8.png" alt=""></a><br /><p>वियना। रूस की यूक्रेन के लिए यूरोप में सुरक्षा और सहयोग संगठन (ओएससीई) के विशेष निगरानी मिशन (एसएमएम) के प्रारूप को फिर से शुरू करने में दिलचस्पी नहीं है। </p>
<p>यह बात ओएससीई में रूस के नये स्थायी प्रतिनिधि दिमित्री पोलियांस्की ने स्पूतनिक को दिए एक साक्षात्कार में कही। उन्होंने कहा कि वियना पहुंचने पर वह पहले ही दूसरे प्रतिनिधिमंडल के प्रतिनिधियों के साथ कई बैठकें कर चुके हैं। कई साथी बातचीत को मना नहीं कर रहे हैं लेकिन, बिना किसी वजह के वे कहते हैं कि पहले सैन्य कार्रवाई बंद होनी चाहिए और उसके बाद ही ओएससीई अवलोकन, निगरानी, विघटन (संघर्षरत पक्षों को अलग करना) और सत्यापन में अपनी क्षमता का एहसास कर पाएगा।</p>
<p>इसके आगे दिमित्री पोलियांसकी ने कहा, असल में एसएमएम  जो कुछ भी कर रहा था। जैसा मैं समझता हूँ, उस मिशन के कुछ बचे हुए हिस्से कहीं न कहीं वह अवशेष हैं, और लोग शायद यह नहीं भूले हैं कि वह कैसा था। जाहिर है, कई लोग इस संसाधन को संगठन के योगदान के तौर पर देखते हैं। हमें एसएमएम के प्रारूप को दोहराने की जरूरत नहीं है। असली समझौते और बातचीत अभी दूसरे प्रारूप में हो रही हैं।</p>
<p>गौरतलब है कि, पोलियांस्की को 29 दिसंबर, 2025 को रूसी राष्ट्रपति के आदेश से वियना में ओएससीई में रूस का स्थायी प्रतिनिधि नियुक्त किया गया था। उन्होंने अलेक्जेंडर लुकाशेविच की जगह ली और 2026 की शुरुआत में अपना काम संभाला। इससे पहले पोलियांस्की न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में में रूस के उप स्थायी प्रतिनिधि के तौर पर काम कर चुके हैं।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Feb 2026 15:38:26 +0530</pubDate>
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                <title>इतालवी परिवहन मंत्रालय ने कहा ओलंपिक्स के पहले दिन हुए हमले, आयोजन को नुकसान पहुंचाने की कोशिश</title>
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                        <![CDATA[इटली में शीतकालीन ओलंपिक के पहले दिन बोलोन्या क्षेत्र में रेलवे ट्रैक, केबल और स्विच पर तोड़फोड़ से ट्रेन सेवाएं बाधित रहीं, जांच एजेंसियां हमले की आशंका जता रही हैं।]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/italian-transport-ministry-said-the-attacks-on-the-first-day/article-142328"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(3).jpg" alt=""></a><br /><p>मिलान। इटली के परिवहन मंत्रालय ने बोलोन्या क्षेत्र में शीतकालीन ओलंपिक्स के पहले दिन हुई ट्रेन सेवाओं को बाधित करने वाली घटनाओं को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करार देते हुए कहा है कि ये 2024 में पेरिस ओलंपिक खेलों के उद्घाटन से ठीक पहले फ्रांस में हुए हमलों की याद दिलाती हैं। बोलोन्या क्षेत्र में रेलवे ट्रैक और उससे जुड़ी अवसंरचनाओं को नुकसान पहुंचने की कई घटनाएं सामने आयी हैं। पहली घटना शनिवार सुबह बोलोन्या-वेनिस खंड पर दर्ज की गयी, जहां क्षतिग्रस्त केबल पाए गए। इसके अलावा, बोलोन्या-पाडुआ लाइन पर एक स्विच के पास एक देसी बम (आईईडी) बरामद किया गया, जिसे निष्क्रिय कर दिया गया। </p>
<p>इसी मार्ग के उच्च-रफ्तार रेलवे खंड पर बिजली के केबल काटे गए, जबकि बोलोन्या-एंकोना लाइन पर पेसारो के पास एक विद्युत कैबिनेट में आग लगने की सूचना मिली। इटली के रेलवे नेटवर्क संचालक ने दोपहर 2:45 बजे सेवा बहाल किये जाने की घोषणा की। परिवहन मंत्रालय ने एक बयान में कहा, आज सुबह बोलोन्या और पेसारो रेलवे स्टेशनों के पास हुई गंभीर तोडफ़ोड़ की घटनाएं, जिनसे हजारों यात्रियों को भारी असुविधा हुई, चिंताजनक हैं और फ्रांस में पेरिस ओलंपिक के उद्घाटन से कुछ घंटे पहले हुए हमलों की याद दिलाती हैं।</p>
<p>मंत्रालय ने कहा, परिवहन मंत्री और उप प्रधानमंत्री मातेओ साल्विनी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। बयान में कहा गया, इस तरह की अभूतपूर्व गंभीर कार्रवाइयां इटली की अंतरराष्ट्रीय छवि को धूमिल नहीं कर पाएंगी, जिसे (शीतकालीन) ओलंपिक खेल और भी सकारात्मक तथा प्रभावशाली बनाएंगे। </p>
<p>बोर्मियो में प्रतियोगिताओं की निगरानी कर रहे साल्विनी ने स्वयं इन घटनाओं को जानबूझकर किये गये हमले बताया। उन्होंने कहा, यदि यह पुष्टि होती है कि ओलंपिक खेलों के पहले दिन ट्रेन सेवाओं का रुकना जानबूझकर किये गये हमले का नतीजा है, तो यह कहा जा सकता है कि कोई इटली का बुरा चाहता है। इतालवी मीडिया के अनुसार, जांचकर्ता इस संभावना से इनकार नहीं कर रहे हैं कि यह एक प्रदर्शनात्मक अराजकतावादी कार्रवाई हो सकती है, जैसा कि 2024 में पेरिस ओलंपिक के दौरान फ्रांस में देखा गया था। </p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Feb 2026 13:17:32 +0530</pubDate>
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                <title>फ्रांस-जर्मनी और ऑस्ट्रिया अमेरिकी सॉफ्टवेयर छोड़कर अपनाएंगे ओपन-सोर्स </title>
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                        <![CDATA[फ्रांस, जर्मनी समेत कई यूरोपीय देश डेटा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों के चलते अमेरिकी सॉफ्टवेयर छोड़कर स्वदेशी व ओपन-सोर्स तकनीक अपनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/gadgets/france-germany-and-austria-will-abandon-american-software-and-adopt/article-141999"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(10).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। यूरोप के कई देश अब अमेरिकी टेक कंपनियों पर अपनी निर्भरता कम करना चाहते हैं। फ्रांस, जर्मनी और ऑस्ट्रिया जैसे देश ने अमेरिकी सॉफ्टवेयर छोड़कर अपने या ओपन-सोर्स विकल्प अपनाने का फैसला किया है। इसका मकसद है डेटा सुरक्षा, गोपनीयता और डिजिटल आजादी। फ्रांस में सरकारी कर्मचारियों को अब जूम और माइक्रोसॉफ्ट टीम्स जैसे अमेरिकी वीडियो कॉलिंग टूल्स छोड़ने होंगे। साल 2027 तक करीब 25 लाख सरकारी कर्मचारी फ्रांस के अपने वीडियो कॉन्फ्रेंस सिस्टम वीआईएसआई का इस्तेमाल करेंगे।</p>
<p>फ्रांसीसी सरकार का कहना है कि गैर-यूरोपीय सॉफ्टवेयर पर निर्भर रहना डेटा और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है। सरकार चाहती है कि संवेदनशील बातचीत और सरकारी जानकारी यूरोप के अंदर ही सुरक्षित रहे। फ्रांस के सिविल सर्विस मंत्री डेविड अमिएल ने कहा कि वैज्ञानिक जानकारी, संवेदनशील डेटा और रणनीतिक नवाचारों को गैर-यूरोपीय कंपनियों के हाथ में नहीं छोड़ा जा सकता।</p>
<p><strong>अमेरिका-यूरोप तनाव से बढ़ी चिंता</strong></p>
<p>यूरोप में यह चिंता तब और बढ़ी जब अमेरिका की ट्रंप सरकार ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के एक अधिकारी पर प्रतिबंध लगाए। इसके बाद माइक्रोसॉफ्ट ने उस अधिकारी की ईमेल सेवा बंद कर दी। इससे यह डर पैदा हुआ कि अमेरिकी कंपनियां कभी भी सेवाएं रोक सकती हैं। हालांकि, माइक्रोसॉफ्ट का कहना है कि उसने आईसीसी की सेवाएं पूरी तरह बंद नहीं की और वह यूरोपीय सरकारों के साथ मिलकर डेटा सुरक्षा पर काम कर रहा है। कंपनी का दावा है कि उसका डेटा यूरोप में ही रहता है और यूरोपीय कानूनों के तहत सुरक्षित है। फिर भी यूरोप में यह भावना मजबूत हुई कि अगर किसी देश या कंपनी पर बहुत ज्यादा निर्भरता होगी तो उसे हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।</p>
<p><strong>जर्मनी-ऑस्ट्रिया और डेनमार्क के भी बदले रास्ते</strong></p>
<p>जर्मनी के श्लेसविग-होल्सटीन राज्य ने पिछले साल 44 हजार कर्मचारियों की ईमेल सेवाएं माइक्रोसॉफ्ट से हटाकर ओपन-सोर्स सिस्टम पर ले गईं। ऑस्ट्रिया की सेना ने रिपोर्ट लिखने और दस्तावेज बनाने के लिए अपनाया है। इसकी एक वजह यह भी है कि माइक्रोसॉफ्ट अब ज्यादा डेटा क्लाउड पर ले जा रहा है, जबकि लिबर ऑफिस आमतौर पर ऑफलाइन चलता है।</p>
<p><strong>पहले आजादी-बाद में बचत</strong></p>
<p>डेनमार्क की सरकार और कोपेनहेगन व आरहूस जैसे शहर भी ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर आजमा रहे हैं। उनका कहना है कि विदेशी कंपनियों पर निर्भरता भविष्य में जोखिम बन सकती है। यूरोपीय नेताओं का मानना है कि तकनीक के मामले में किसी एक देश या कंपनी पर निर्भर रहना खतरनाक है। यही वजह है कि अब यूरोप में पहले आजादी, बद में बचत की सोच बढ़ रही है।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 11:39:38 +0530</pubDate>
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                <title>ग्रीनलैंड के पास फ्रांस ने भेजा राफेल से लैस परमाणु एयरक्राफ्ट कैरियर, जबरन कब्जे की तैयारी में डोनाल्ड ट्रंप</title>
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                        <![CDATA[ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय एकजुटता दिखाते हुए फ्रांस ने परमाणु एयरक्राफ्ट कैरियर चार्ल्स डी गाले को उत्तरी अटलांटिक की ओर तैनात किया, यूरोपीय संप्रभुता को समर्थन जताया और अमेरिका संदेश]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/france-sends-rafale-equipped-nuclear-aircraft-carrier-to-greenland-in-preparation/article-141142"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/500-px)11.png" alt=""></a><br /><p>पेरिस। ग्रीनलैंड को लेकर यूरोप के देश एकजुट होते दिख रहे हैं। अमेरिका को खुली चेतावनी देने के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने ग्रीनलैंड के पास उत्तरी अटलांटिक महासागर में अपने एकमात्र परमाणु ऊर्जा से चलने वाले एयरक्राफ्ट कैरियर चार्ल्स डी गाले को भेजा है। यह राफेल फाइटर जेट से लैस है। फ्रांस के रक्षा मंत्रालय ने इस तैनाती के बारे में ऐलान किया है। माना जा रहा है कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी सेना के हमले के खतरे को देखते हुए फ्रांसीसी नौसेना ऐक्शन में आई है। यही नहीं फ्रांसीसी राष्ट्रपति डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं से पेरिस में मिलने जा रहे हैं। फ्रांसीसी राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा है कि मैक्रों यूरोपीय एकजुटता को एक बार फिर से अपना समर्थन जाहिर करेंगे। साथ ही डेनमार्क और ग्रीनलैंड की संप्रभुता और क्षेत्रीय एकजुटता को भी अपना समर्थन देंगे।</p>
<p><strong>फ्रांसीसी स्ट्राइक कैरियर कहां जा रहा?</strong></p>
<p>फ्रांस, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेता आर्कटिक में सुरक्षा खतरे, ग्रीनलैंड के आर्थिक तथा सामाजिक विकास के मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इसको फ्रांस और यूरोपीय संघ दोनों ही सपोर्ट करने के लिए तैयार हैं। हालांकि, फ्रांसीसी रक्षा मंत्रालय ने यह नहीं बताया कि चार्ल्स डी गॉल को कहां तैनात किया जा रहा है, लेकिन समाचार एजेंसी के सूत्रों के हवाले से बताया कि यह उत्तरी अटलांटिक की ओर बढ़ रहा है। हाल के दिनों में यह इलाका अमेरिका और यूरोप के बीच भूराजनीतिक तनाव का केंद्र बनकर उभरा है। फ्रांस के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि नेवल एयर ग्रुप ओरियन 26 सैन्य अभ्यास में हिस्सा लेने के लिए तोउलोन नौसैनिक अड्डे से रवाना हो गया है। </p>
<p><strong>स्ट्राइक कैरियर के साथ पूरा बेड़ा</strong></p>
<p>फ्रांस के कैरियर स्ट्राइक ग्रुप में चार्ल्स डी गॉल और उसके विमान, साथ ही कई एस्कॉर्ट और सपोर्ट जहाज शामिल हैं। इसमें एक डिफेंस फ्रिगेट, एक सप्लाई शिप और एक हमलावर पनडुब्बी है। यह अभ्यास ऐसे समय में होने जा रहा है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप डेनमार्क के अर्ध-स्वायत्तशासी क्षेत्र ग्रीनलैंड को लगातार अमेरिका में मिलाने की धमकी दे रहे हैं।</p>
<p><strong>जंग के मूड में यूरोप, टूट सकता है नाटो </strong></p>
<p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जे के लिए कमर कस चुके हैं। अमेरिका की सेना इसके लिए लगातार तैयारी भी कर रही है। ट्रंप के इस रुख से 32 देशों की सदस्यता वाले सैन्य संगठन उत्तर अटलांटिक संधि संगठन यानि नाटो के अस्तित्व पर ही खतरा मंडराने लगा है। ट्रंप की दादागिरी के खिलाफ यूरोपीय देश एकजुट हो रहे हैं। ब्रिटेन, इटली, फ्रांस, जर्मनी जैसे ताकतवर यूरोपीय देशों ने अमेरिका को ग्रीनलैंड को लेकर चेतावनी भी दी है। </p>
<p>इस बीच नाटो चीफ ने चेतावनी दी है कि बिना अमेरिका के नाटो देश अपनी रक्षा नहीं कर सकते हैं। ग्रीनलैंड का प्रशासन डेनमार्क देखता है जो नाटो का सदस्य देश है। ट्रंप ने कहा है कि ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बहुत ही जरूरी है। दरअसल, अमेरिका यहां पर अपना गोल्डन डोम डिफेंस सिस्टम लगाना चाहता है ताकि रूस और चीन की मिसाइलों से अमेरिका को बचाया जा सके। </p>
<p><strong>डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो को दी टैरिफ की धमकी</strong></p>
<p>यही नहीं डोनाल्ड ट्रंप लगातार ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय देशों पर भारी भरकम टैरिफ लगाने की धमकी दे रहे हैं। नाटो का आर्टिकल 5 कहता है कि अगर एक सदस्य देश पर दुश्मन का हमला होता है तो यह सभी देशों पर अटैक माना जाएगा। यही नहीं इस जंग में नाटो के हर सदस्य देश को सैन्य सहायता देना होगा। </p>
<p>नाटो के महासचिव जनरल मार्क रट ने सोमवार को खुलासा किया कि अमेरिकी सैन्य सहायता के बिना यूरोप अपनी खुद की रक्षा नहीं कर सकता है। उन्होंने यूरोपीय सांसदों से कहा कि यूरोप और अमेरिका को एक-दूसरे की जरूरत है।</p>
<p><strong>जर्मनी-पोलैंड बनाना चाहेंगे परमाणु बम</strong></p>
<p>एक्सपर्ट के अनुसार अमेरिका ठीक इसी समय यूरोप को अपने ऊपर निर्भर बनाए रखेगा और उसे एक विरोधी ब्लॉक के रूप में उभरने से रोकेगा। उन्होंने कहा कि ट्रंप के शासनकाल में नाटो के आंतरिक नियम बदलने जा रहे हैं। अगर अमेरिका नाटो से निकलता है तो यूरोपीय सुरक्षा ढांचा खंड-खंड हो जाएगा। </p>
<p>यूरोपीय देश सामूहिक सुरक्षा की जगह पर अपनी-अपनी सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित कर देंगे। उन्होंने कहा कि जर्मनी और पोलैंड जैसे यूरोपीय देश परमाणु बम हासिल करने पर बहस करने लगेंगे। वहीं ब्रिटेन और फ्रांस असलियत में अमेरिका की कमी को पूरा नहीं कर पाएंगे। ये दोनों देश पूरे यूरोप की उस तरह से सुरक्षा नहीं कर पाएंगे जैसे कि अमेरिका करता है।</p>
<p><strong>अमेरिकी सेना का ग्रीनलैंड में बेस</strong></p>
<p>जैसे-जैसे वैश्विक तनाव बढ़ रहा है, यह द्वीप भू-राजनीतिक दबाव का एक मापक बन गया है। इससे पता चलता है कि पुरानी अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था किस तरह कमजोर पड़ने लगी है। इन सभी के केंद्र में पिटुफिक अंतरिक्ष ठिकाना है, जिसे पहले थुले एयरबेस के नाम से जाना जाता था। शीतयुद्ध के दौरान एक चौकी के रूप में इस्तेमाल यह बेस अब अमेरिकी सेना के अंतरिक्ष बल केंद्र का एक अहम हिस्सा है, जो मिसाइल का पता लगाने से लेकर जलवायु परिवर्तन पर नजर रखने तक हर चीज के लिए आवश्यक है। ग्रीनलैंड में अमेरिकी रुचि उस समय बढ़ रही है, जब युद्ध के बाद की नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था शांति और सुरक्षा बनाए रखने में तेजी से निष्प्रभावी साबित हो रही है।</p>]]>
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                <pubDate>Thu, 29 Jan 2026 11:26:54 +0530</pubDate>
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                <title>यूक्रेन रक्षा मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, पांच उप-रक्षा मंत्रियों को किया निलंबित</title>
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                        <![CDATA[यूक्रेन ने रक्षा मंत्रालय में बड़ा फेरबदल करते हुए पांच उप-रक्षा मंत्रियों को हटाया; मंत्री फेडोरोव ने कहा, कदम से एसिमिट्रिक और साइबर क्षमताएं मजबूत होंगी, नए सदस्य जल्द नियुक्त।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-decision-of-ukrainian-government-five-deputy-defense-ministers-were/article-140597"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(6).png" alt=""></a><br /><p>कीव। यूक्रेन ने पांच उप-रक्षा मंत्रियों को हटया है। रक्षा मंत्री मिखाइलो फेडोरोव ने गुरुवार को टेलीग्राम पर यह जानकारी दी। फेडोरोव ने कहा कि यह फेरबदल यूक्रेन की रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने और दुश्मन तथा उसकी अर्थव्यवस्था के खिलाफ 'एसिमिट्रिक' एवं साइबर हमलों को मजबूत करने के प्रयासों का हिस्सा है।</p>
<p>रक्षा मंत्री के अनुसार कैबिनेट ने अनातोली क्लोचको, ओलेक्सांद्र कोजोंको, मायकोला शेवत्सोव, वलोडिमिर जवेरुखा और हन्ना ग्वोज्दियार को उनके पदों से हटा दिया है। उन्होंने कहा कि आने वाले हफ्तों में नए सदस्य मंत्रालय में शामिल होंगे और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालेंगे।</p>
<p>गौरतलब है कि, फेडोरोव को पिछले सप्ताह यूक्रेन का रक्षा मंत्री नियुक्त किया गया था।</p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Jan 2026 15:17:24 +0530</pubDate>
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                <title>ग्रीनलैंड खरीदने निकले ट्रंप पर पुतिन का तंज, बताई नई कीमत, यूरोप को दिखाया कूटनीतिक आईना</title>
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                        <![CDATA[ग्रीनलैंड को लेकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में घमासान जारी है। इसी बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूरोप के जख्म कुरेद दिए हैं।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/putin-taunts-trump-who-set-out-to-buy-greenland-shows/article-140490"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/greeland-dispute.png" alt=""></a><br /><p>ग्रीनलैंड। ग्रीनलैंड को लेकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में घमासान जारी है। इसी बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूरोप के जख्म कुरेद दिए हैं। दरअलस, राष्ट्रपति पुतिन ने डेनमार्क पर ग्रीनलैंड के साथ औपनिवेशिक व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस द्वीप की कीमत आज के समय में महज 200 से 250 मिलियन डॉलर आंकी जा सकती है। राष्ट्रपति पुतिन ने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड की ओनरशिप के विवाद से रूस का कोई लेना-देना नहीं है और यह मामला अमेरिका व डेनमार्क को आपस में सुलझाना चाहिए।</p>
<p>इसके अलावा रूसी सुरक्षा परिषद की बैठक में पुतिन ने 1867 में अमेरिका द्वारा रूस से अलास्का की खरीद का उदाहरण दिया और महंगाई के हिसाब से उसकी मौजूदा कीमत का हवाला देकर ग्रीनलैंड का तुलनात्मक मूल्य बताया। पुतिन के इस बयान को यूरोप के लिए तंज माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। विश्लेषकों के अनुसार, पुतिन यूरोप-अमेरिका के टकराव को यूक्रेन युद्ध की पृष्ठभूमि में राजनीतिक संतुलन के तौर पर देख रहे हैं।</p>]]>
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                <pubDate>Thu, 22 Jan 2026 14:43:20 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका नहीं, मैं हूं दुनिया का असली लीडर, चीन का बड़ा ऐलान</title>
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                        <![CDATA[ग्रीनलैंड पर ट्रंप की चेतावनी से यूरोपीय सहयोगी असहज हैं। चीन ने बहुपक्षवाद, मुक्त व्यापार और सहयोग की बात कर खुद को नया वैश्विक विकल्प पेश किया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/i-am-not-america-i-am-the-real-leader-of/article-140438"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trunp-and-china.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दुश्मनों से ज्यादा दोस्तों पर भारी पड़ रहे हैं। पहले उन्होंने टैरिफ लगाकर दुनिया की अर्थव्यवस्था को तहस-नहस कर दिया। अब वह ग्रीनलैंड पर कब्जे को लेकर अमेरिका के खास कहे जाने वाले यूरोपीय सहयोगियों को हड़का रहे हैं। उन्होंने ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जे का विरोध करने वाले देशों पर टैरिफ की धमकी भी दी है। हालांकि, यूरोपीय देशों ने भी न झुकने की कसम खाई है। इस बीच चीन ने खुद को एक वैकल्पिक वैश्विक नेता के तौर पर पेश करना शुरू कर दिया है। बड़ी बात यह है कि अमेरिका के सहयोगी देश भी चीन के साथ अपना भविष्य देख रहे हैं और नजदीकियां बढ़ा रहे हैं।</p>
<p><strong>चीन ने खुद को बताया दुनिया का नया नेता</strong></p>
<p>ट्रंप की ग्रीनलैंड पर चेतावनी के कुछ घंटों बाद, चीनी उप-प्रधानमंत्री हे लिफेंग ने सालाना अल्पाइन बैठक में मंच पर जोर देकर कहा कि बीजिंग लगातार साझा भविष्य वाले समुदाय की सोच पर काम कर रहा है और बहुपक्षवाद और मुक्त व्यापार का समर्थन करने में दृढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि हम सहमति और एकजुटता को बढ़ावा दे रहे हैं, और फूट और टकराव के बजाय सहयोग को प्राथमिकता दे रहे हैं। दुनिया की आम समस्याओं के लिए चीन समाधान पेश कर रहा है। यह बयान ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति के झटके और डर के मुकाबले चीन की खुद को एक शांत, तर्कसंगत और भरोसेमंद विकल्प के रूप में दिखाने की रणनीति को प्रकट करता है।</p>
<p><strong>बिना कुछ किए चीन की हो रही जय-जयकार</strong></p>
<p>चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सालों से एक ऐसी विश्व व्यवस्था को बदलने की बात कर रहे हैं जिसे वे अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा गलत तरीके से हावी मानते हैं। वे तेजी से अपनी खुद की सोच को एक विकल्प के रूप में पेश कर रहे हैं, भले ही चीन के अपने पड़ोसी देशों से सीमा विवाद हो और उस पर आक्रामकता के आरोप लगते रहे हों। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि चीन को वैश्विक शक्ति संतुलन में फायदा उठाने के लिए ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं है। उसे बस अपने रास्ते पर चलते रहना है, क्योंकि अमेरिका अपने आप ही सहयोगी और विश्वसनीयता खो रहा है।</p>
<p><strong>चीन से दोस्ती बढ़ा रहे अमेरिका के सहयोगी</strong></p>
<p>चीन की बढ़ते कद का अंदाजा अमेरिका के सबसे करीबी देश कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के हाल के चीन दौरे और भाषण से लगाया जा सकता है। कार्नी ने खुलेआम अमेरिकी वर्चस्व को एक काल्पनिक अंतर्राष्ट्रीय नियम-आधारित व्यवस्था का हिस्सा बताया। कार्नी ने अमेरिका की ओर इशारा करते हुए कहा, हम जानते थे कि अंतरराष्ट्रीय नियमों पर आधारित व्यवस्था की कहानी आंशिक रूप से झूठी थी - कि सबसे ताकतवर देश सुविधा के अनुसार खुद को छूट देंगे, कि व्यापार नियमों को असमान रूप से लागू किया जाएगा। <br />हालांकि, कार्नी ने रूस की जमकर आलोचना भी की, लेकिन उनको भी ट्रंप को लेकर डर है।</p>
<p><strong>कनाडा-ब्रिटेन-फ्रांस तक ने छोड़ा साथ</strong></p>
<p>कार्नी ने पिछले हफ्ते चीन का दौरा किया। उन्होंने बीजिंग और ओटावा के बीच सहयोग के एक नए दौर की शुरूआत भी की। कनाडा ने चीन के साथ रणनीतिक साझेदारी पर सहमति जताई है। कार्नी ने चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों पर कनाडा के कड़े टैरिफ में ढील दी, जिसे अमेरिका के साथ मिलकर लागू किया गया था। अमेरिका के अन्य करीबी साझेदारों ने भी चीन के साथ संबंध सुधारने या उसके करीब जाने में दिलचस्पी दिखाई है, क्योंकि वे अमेरिका के खिलाफ बचाव कर रहे हैं। ब्रिटेन के कीर स्टारमर ने बीजिंग के साथ अधिक जुड़ाव पर जोर दिया है। मंगलवार को ब्रिटिश सरकार ने लंदन के वित्तीय जिले के पास एक नए चीनी मेगा दूतावास के विवादास्पद निर्माण को मंजूरी दे दी।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Jan 2026 11:28:32 +0530</pubDate>
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                <title>जर्मनी, इजरायल ने 'साइबरडोम' बनाने के लिए किया समझौता, साइबर और ड्रोन हमलों का लगाएगा पता</title>
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                        <![CDATA[जर्मनी और इजरायल ने संयुक्त सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। साइबर व ड्रोन हमलों से निपटने के लिए जर्मन ‘डोम’ सिस्टम विकसित किया जाएगा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/germany-and-israel-sign-agreement-to-build-cyberdome-to-detect/article-139274"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/israel,-germany-sign.png" alt=""></a><br /><p>बर्लिन। जर्मनी और इजरायल ने संयुक्त सुरक्षा कार्य को लेकर एक समझौता किया है, जिसमें साइबर हमलों को रोकने के लिए एक जर्मन 'डोम' का निर्माण भी शामिल है। </p>
<p>जर्मनी के द हैंडेल्सब्लाट अखबार ने की रिपोर्ट के अनुसार इस समझौते पर जर्मनी गृहमंत्री मंत्री अलेक्जेंडर डोबिडट और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ने हस्ताक्षर किया। अखबार की रिपोर्ट के अनुसार ने स्पष्ट किया कि यह समझौता जर्मनी गृहमंत्री मंत्री अलेक्जेंडर डोबिडट के इजराइल के दो दिवसीय दौरे के दौरान हुआ। </p>
<p>अखबार ने बताया है कि यह सिस्टम स्वचालित रूप से साइबर हमलों और ड्रोन हमलों का पता लगाएगा और उन्हें रोकेगा। यह समझौता जर्मनी और इजरायल के साइबर सुरक्षा क्षमताओं के घनिष्ठ एकीकरण का प्रावधान करता है।</p>]]>
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                <pubDate>Mon, 12 Jan 2026 14:05:36 +0530</pubDate>
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                <title>दुनिया में धीरे-धीरे बढ़ रहा है हिजाब पर प्रतिबंध का दायरा, यूरोप सहित कई देशों में सार्वजनिक स्थानों से लेकर शिक्षण संस्थानों तक में रोक</title>
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                        <![CDATA[डेनमार्क सरकार ने बुर्का और निकाब पर प्रतिबंध को स्कूलों व विश्वविद्यालयों तक बढ़ाने का ऐलान किया है। आप्रवासन मंत्री रासमस स्टॉकलंड के अनुसार, चेहरा ढकने वाले परिधान शैक्षणिक माहौल के अनुकूल नहीं हैं। प्रस्ताव फरवरी 2026 में संसद में आएगा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/the-scope-of-ban-on-hijab-is-gradually-increasing-in/article-136465"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/hijab.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। डेनमार्क सरकार ने ऐलान किया है कि वह बुर्का और निकाब (पूरे चेहरे को छुपाने वाले इस्लामी आवरण) पर पहले से लागू प्रतिबंध को अब स्कूलों और विश्वविद्यालयों तक भी बढ़ाना चाहती है। इस बात की घोषणा डेनमार्क के आप्रवासन और समावेशन मंत्री रासमस स्टॉकलंड ने की, जिन्होंने कहा, बुर्का, निकाब या अन्य किसी ऐसे परिधान का शैक्षणिक वातावरण में कोई स्थान नहीं होना चाहिए जो लोगों के चेहरे को छुपाता हो। यह प्रस्ताव संसद में फरवरी 2026में पेश किया जाएगा। डेनमार्क में पहले से ही 1 अगस्त 2018 से सार्वजनिक स्थानों पर पूरे चेहरे को ढकने वाले परिधानों पर प्रतिबंध लागू है, जिसके तहत उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाया जाता है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि यह कानून व्यापक रूप से लागू नहीं होता क्योंकि बुर्का/निकाब पहनने वाली महिलाओं की संख्या कम है। </p>
<p><strong>अब तक कितने देशों में बुर्का/चेहरा ढकने वाले परिधानों पर प्रतिबंध</strong></p>
<p>पूरे दुनिया भर में कई देश ऐसे हैं जिन्होंने बुर्का, निकाब या चेहरे को ढकने वाले परिधानों पर पूरी तरह या आंशिक रूप से प्रतिबंध लगा रखा है। इनमें से अधिकतर यूरोपीय देश हैं, जबकि कुछ अन्य देशों में भी ऐसे नियम हैं। </p>
<p><strong>प्रमुख देश जहां प्रतिबंध लागू है</strong></p>
<p>    फ्रांस :  2011 में सार्वजनिक स्थानों पर पूरा चेहरा ढकने वाले परिधानों पर प्रतिबंध लगाया गया था। <br />    बेल्जियम : सार्वजनिक स्थानों पर बुर्का/निकाब बैन। <br />    बुल्गारिया : पूरे चेहरे को ढकने वाले परिधान पर प्रतिबंध। <br />    डेनमार्क :  2018 से सार्वजनिक स्थानों पर प्रतिबंध, अब स्कूल/विश्वविद्यालय भी शामिल। <br />    ऑस्ट्रिया : कुछ जगहों पर हेडस्कार्फ और बालों ढकने पर प्रतिबंध के साथ नया कानून। <br />    नीदरलैंड : सार्वजनिक स्थानों और परिवहन में प्रतिबंध। <br />    स्विट्जरलैंड : 1 जनवरी 2025 से बैन लागू। <br />    जर्मनी :  कुछ राज्यों में प्रतिबंध। <br />    इटली :  कुछ स्थानीय अधिकार क्षेत्र में प्रतिबंध। <br />    स्पेन (कैटलोनिया) : कुछ क्षेत्रों में बैन। <br />    लक्समबर्ग : पूर्णतया बैन। <br />    नॉर्वे : नर्सरी, स्कूल और यूनिवर्सिटी में प्रतिबंध। <br />    कोसोवो : सार्वजनिक स्कूलों में बैन। <br />    बोस्निया और हजेर्गोविना : न्यायिक संस्थानों में प्रतिबंध। </p>
<p><strong>यूरोप के बाहर कहां-कहां बुर्का/नकाब पर प्रतिबंध</strong></p>
<p><strong>यूरोप (ईयू से बाहर)</strong><br />   </p>
<p>    ब्रिटेन  : राष्ट्रीय बैन नहीं, लेकिन स्कूलों, अदालतों व कार्यस्थलों में स्थानीय नियम<br />    रूस :  राष्ट्रीय स्तर पर बैन नहीं, कुछ क्षेत्रों/स्कूलों में प्रतिबंध</p>
<p><strong>एशिया</strong></p>
<p>    चीन (शिनजियांग) : बुर्का, निकाब और धार्मिक प्रतीकों पर सख्त प्रतिबंध<br />    श्रीलंका :  2019 आतंकी हमलों के बाद सुरक्षा कारणों से चेहरा ढकने पर रोक<br />    ताजिकिस्तान : सार्वजनिक स्थानों पर बुर्का/विदेशी परिधान बैन<br />    उज्बेकिस्तान : आंशिक प्रतिबंध, सार्वजनिक स्थलों पर नियंत्रण</p>
<p><strong>अफ्रीका</strong></p>
<p>    चाड : आतंकी घटनाओं के बाद बुर्का पर प्रतिबंध<br />    कांगो : सार्वजनिक स्थानों पर चेहरा ढकने पर रोक<br />    गैबॉन : सुरक्षा कारणों से बुर्का/निकाब बैन</p>
<p><strong>मध्य-पूर्व  </strong></p>
<p>    तुर्की : पहले सरकारी संस्थानों में बैन था, अब अधिकांश प्रतिबंध हटाए गए।</p>
<p><strong>विवाद और बहस</strong></p>
<p>बुर्का और निकाब पर प्रतिबंध का मुद्दा गहन विवाद में रहा है। समर्थक इसका तर्क देते हैं कि यह समाजिक एकीकरण और पहचान की स्पष्टता के लिए जरूरी है, जबकि आलोचक इसे धार्मिक स्वतंत्रता और महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन मानते हैं। मानवाधिकार समूहों का मानना है कि यह कानून धार्मिक भेदभाव को बढ़ावा दे सकता है। डेनमार्क सरकार भी यह साफ कर चुकी है कि यह कानून धर्म की आजादी को खत्म नहीं करता, बल्कि उसका मकसद लोकतंत्र और समाज में खुलापन बनाए रखना है। </p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Dec 2025 11:47:35 +0530</pubDate>
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                <title>यूरोप में हमास का सीक्रेट टेरर नेटवर्क बेनकाब, इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद का खुलासा</title>
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                        <![CDATA[ मोसाद ने दावा किया है कि हमास यूरोप में खुफिया सेल के जरिए बड़ा ऑपरेशनल नेटवर्क खड़ा कर रहा था। यूरोपीय एजेंसियों की मदद से हथियारों का जखीरा जब्त किया गया और कई संदिग्ध पकड़े गए। वियना में टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़ भी इसी अभियान का हिस्सा रहा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/hamass-secret-terror-network-in-europe-exposed-israeli-intelligence-agency/article-133412"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/111-(1200-x-600-px)-(630-x-400-px)-(7)1.png" alt=""></a><br /><p>तेल अवीव/बर्लिन। इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने गाजा से ऑपरेट होने वाली आतंकी संगठन हमास को लेकर बहुत बड़ा खुलासा किया है। मोसाद ने खुलासा किया है कि हमास पूरे यूरोप में एक ऑपरेशनल नेटवर्क बना रहा है, जो खुफिया सेल के जरिए काम कर रहा है। मोसाद की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है कि यूरोपियन सिक्योरिटी सर्विस के साथ मिलकर काम करने से हथियारों का पता चला है, संदिग्धों को पकड़ा गया है और प्लान किए गए हमलों को रोका गया।</p>
<p>मोसाद के बयान के मुताबिक, यूरोपियन पार्टनर ने इजरायली और यहूदी समुदायों को निशाना बनाकर की जा रही साजिशों को नाकाम करने में मदद की। जर्मनी और ऑस्ट्रिया जैसे देशों में मिलकर की गई कार्रवाई के नतीजे में कई संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। मोसाद ने आम लोगों के खिलाफ कमांड पर इस्तेमाल के लिए तैयार किए गए हथियारों के जखीरे को जब्त किया है।</p>
<p><strong>यूरोप में बड़े हमलों की साजिश नाकाम</strong></p>
<p>मोसाद ने जिन बड़ी कामयाबी का जिक्र किया है, उनमें से एक पिछले सितंबर में वियना में सीक्रेट टेरर मॉड्यूल के भांडाफोड़ का दावा किया गया है। ऑस्ट्रिया की डीएसएन सिक्योरिटी सर्विस ने हथियारों का एक जखीरा बरामद किया है, जिसमें हैंडगन और विस्फोटक सामान थे। इसके बाद मोसाद और यूरोप की एजंसियों मे मोहम्मद नईम नाम के एक आतंकी को गिरफ्तार किया है, जो हमास के सीनियर पॉलिटिकल ब्यूरो अधिकारी बासेम नईम का बेटा है, जो गाजा में हमास के एक सीनियर लीडर खलील अल-हया का करीबी है। मोसाद ने हमास के नेताओं पर यूरोप में इन टेरर नेटवर्क को कई तरह से मदद देने का आरोप लगाया है। </p>
<p>मोसाद ने कहा है कि कतर में आतंकी "ऑपरेशन" को आगे बढ़ाने में ऑर्गेनाइजेशन की लीडरशिप के शामिल होने का खुलासा पहली बार नहीं हो रहा है। उसने कहा कि हमास के सीनियर नेता इंटरनेशनल लेवल पर ग्रुप की इमेज बचाने की कोशिश के तहत किसी भी तरह के कनेक्शन से पब्लिकली इनकार करते रहे हैं। एजेंसी ने सितंबर में कतर में मोहम्मद नईम और उनके पिता के बीच हुई मीटिंग की तरफ भी इशारा किया। हमास ने कहा है कि यह यूरोप में "ऑपरेशन" के लिए हमास के फॉर्मल सपोर्ट की तरफ इशारा करता है। मोसाद ने चेतावनी दी है कि सीनियर लीडर्स का लगातार इनकार नेतृत्व के बुरे ऑपरेटिव पर कंट्रोल खोने का संकेत हो सकता है।</p>
<p><strong>मोसाद के खिलाफ एक्शन तेज</strong></p>
<p>जर्मनी सहित कई यूरोपीय देशों ने मोसाद के खुलासे के बाद सुरक्षा उपायों को और मजबूत कर दिया है। जर्मन अधिकारियों ने न सिर्फ प्रत्यक्ष ऑपरेशनल सदस्यों को निशाना है, बल्कि उन संस्थानों, चैरिटी संगठनों और धार्मिक समूहों पर भी कार्रवाई शुरू की है जिन पर हमास के लिए फंड जुटाने या कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने का आरोप है। मोसाद का कहना है कि 7 अक्टूबर के हमले के बाद हमास ने विदेशों में अपनी गतिविधियों को तेज कर दिया है और ईरान और उसके प्रॉक्सी मॉडल की तर्ज पर यूरोप में गुप्त सेल और ऑपरेशनल क्षमता विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं। मोसाद ने कहा है कि हमास दर्जन भर से ज्यादा हमलों की योजना बना रहा था। और उसके निशाने पर दुनियाभर के यहूदियों पर हमले करना था।</p>]]>
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                <pubDate>Mon, 24 Nov 2025 12:14:30 +0530</pubDate>
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