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                <title>world population day - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>देश में कठोर जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की मांग को लेकर प्रधानमंत्री के नाम का सौंपा ज्ञापन</title>
                                    <description><![CDATA[फाउंडेशन के जिला संरक्षक सुरेंद्र सिंह शेखावत ने बताया देश की आबादी 145 करोड़ से अधिक हो चुकी है जबकि हमारे संसाधन सीमित है। असंतुलित सामाजिक जनसंख्या भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में बड़ा रोड़ा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/world-population-day-population-solution-foundation-submitted-a-memorandum-in/article-84424"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/ajmer.png" alt=""></a><br /><p>अजमेर। विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर देश में कठोर जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की मांग को लेकर जनसंख्या समाधान फाउंडेशन के कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों ने अतिरिक्त जिला कलेक्टर को प्रधानमंत्री के नाम का ज्ञापन सौंपा। </p>
<p>फाउंडेशन के जिला संरक्षक सुरेंद्र सिंह शेखावत ने बताया देश की आबादी 145 करोड़ से अधिक हो चुकी है जबकि हमारे संसाधन सीमित है। असंतुलित सामाजिक जनसंख्या भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में बड़ा रोड़ा है। बढ़ती आबादी के कारण देश में गृह युद्ध की स्थिति बन रही है। जिला अध्यक्ष डॉ. राजू शर्मा ने  कहा कि हम दो हमारे दो, तो सभी के दो हो। विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच बढ़ती असंतुलित जनसंख्या देश के ताने-बाने के लिए अत्यंत विनाशकारी साबित हो सकती है। फाउंडेशन के कार्यकर्ता देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से मांग करते हैं की जाति, धर्म, क्षेत्र और भाषा बंधनों से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि मानते हुए एक कठोर जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाये। कानून अधिसूचित होने के बाद कानून तोड़कर अधिक संतान पैदा करने वाले नागरिकों को मताधिकार से वंचित किया जाए। सरकार से मिलने वाले सभी प्रकार की सहायता, अनुदान समाप्त किए जाएं। एक से अधिक पत्नियों  से  होने वाली  संतानों की भी कुल संख्या दो से  अधिक होने पर जनसंख्या नियंत्रण कानून के अंतर्गत कार्यवाही हो। </p>
<p>विश्व हिंदू परिषद के धर्म प्रसार प्रांत सहप्रमुख लेखराज सिंह ने कहा कि जनसंख्या का सामाजिक संतुलन न केवल भारत की प्रतिभा को अवसर प्रदान करेगा अपितु संपूर्ण विश्व एवं समस्त मानवता के लिए अत्यंत आवश्यक है। बहुपत्नी और बहुपतित्व प्रथा पर भी समान नागरिक  कानून लागू कर रोक लगानी चाहिए। महिला विंग अध्यक्ष आभा भारद्वाज ने कहा कि संसाधन सीमित है, बढ़ती जनसंख्या ही महंगाई, बैरोजगारी और अपराधों की जननी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jul 2024 09:58:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>World Population Day: विकास के लिए जनसंख्या नियंत्रण जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[ परिवार नियोजन, गरीबी, लैंगिक समानता, नागरिक अधिकार, मां और बच्चे का स्वास्थ्य, गर्भनिरोधक दवाओं के इस्तेमाल जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा और विमर्श किया जाता है।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/population-control-is-necessary-for-development/article-84352"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/u1rer-(6)10.png" alt=""></a><br /><p>संयुक्त राष्ट्र संघ ने बढ़ती जनसंख्या पर चिंता प्रकट की, इसके बाद 11 जुलाई 1989 को संयुक्त राष्ट्र में बढ़ती जनसंख्या को काबू करने और परिवार नियोजन को लेकर लोगों में जागरूकता लाने के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसके साथ ही पहली बार वर्ल्ड पॉपुलेशन- डे मनाया गया। इस मूल तिथि को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा विश्व जनसंख्या दिवस के रूप में निर्धारित करने का निर्णय लिया गया था। दिसंबर 1990 में इसे आधिकारिक बना दिया। हर साल इस दिन जनसंख्या को कंट्रोल करने के उपायों पर चर्चा की जाती है। बढ़ी हुई जनसंख्या की वजह से देश और दुनिया के सामने जो परेशानियां हैं उनसे इको सिस्टम और मानवता को जो नुकसान पहुंचता है,उसके प्रति लोगों में जागरूकता लाने के लिए ये दिन मनाया जाता है। परिवार नियोजन, गरीबी, लैंगिक समानता, नागरिक अधिकार, मां और बच्चे का स्वास्थ्य, गर्भनिरोधक दवाओं के इस्तेमाल जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा और विमर्श किया जाता है। </p>
<p>हमारा देश चीन के बाद विश्व की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाला देश है। कोरोना काल में बढ़ी हुई आबादी के दुष्प्रभाव साफ नजर आए, स्वास्थ्य से लेकर शिक्षा, हर क्षेत्र में मुश्किलें बढ़ी हैं, ऐसे में जनसंख्या नियंत्रण के महत्व को समझना और भी जरूरी हो गया है। हर साल विश्व जनसंख्या दिवस एक थीम के साथ मनाया जाता है। जैसे कि कुल विश्व जनसंख्या 8 मिलियन का आंकड़ा पार करने वाली है, अवसरों का दोहन और सभी के लिए अधिकार और विकल्प सुनिश्चित करना। अगर बात करें वर्तमान समय की तो इस समय विश्व की जनसंख्या 7.92 अरब के पार पहुंच गई है। इस आंकड़े में हर सेकंड  इजाफा हो रहा है। वहीं विश्व की इस बढ़ती जनसंख्या में चीन और भारत का सबसे ज्यादा योगदान है। जिसमें भारत की जनसंख्या वृद्धि दर तो कुछ सालों में चीन से भी ज्यादा हुई है। कुछ साल में भारत चीन को आसानी से पीछे छोड़कर जनसंख्या की दृष्टि से विश्व का सबसे बड़ा देश बन जाएगा। अगर जनसंख्या वृद्धि की बढ़ती दर के पीछे केवल चीन और भारत ही नहीं है,बल्कि अन्य कई देश हैं जहां जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है। इनमें भारत और चीन के पड़ोसी पकिस्तान और बांग्लादेश का भी नाम शामिल है।</p>
<p>आजादी के पहले तक पाकिस्तान और बांग्लादेश भी भारत के ही हिस्से हुए करते थे। वर्तमान में भी अगर ये भारत के ही भाग होते तो भारत की बढ़ती जनसंख्या का केवल आप अनुमान ही लगा सकते हैं। जनसंख्या वृद्धि दर संबंधी आंकड़ों पर नजर रखने वाली वेबसाइट अनुसार 2021 में भारत की जनसंख्या लगभग 139 करोड़ हो चुकी है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या की रिपोर्ट के अनुसार भारत की आबादी 1.21 अरब यानी 121 करोड़ है। वर्ष 2021 चला गया और वर्ष 2022 और 2023 भी चला गया। और वर्ष 2024 का लगभग आधे से ज्यादा साल बीतने को आ गया है। लेकिन अभी नई जनगणना अधर में है।</p>
<p>हम देश की वर्ष 2011 की जनगणना की बात करें तो इस जनगणना को दो चरणों में पूरा किया गया था। पहले चरण में अप्रैल 2010 से सितंबर 2010 के बीच देशभर में घरों की गिनती की गई थी। वहीं, दूसरे चरण में 9 फरवरी 2011 से 28 फरवरी 2011 तक चली। यह जनगणना किसी भी देश के विकास में मील का पत्थर होती है और नीति निर्धारण में अहम भूमिका निभाती है। देश में प्रत्येक 10 साल में एक बार जनगणना होती है। </p>
<p>पिछली जनगणना के 12 वर्ष पूरे हो चुके हैं और 13वां वर्ष शुरू हो चुका है। वर्ष 2021 में नई जनगणना होनी थी,लेकिन वैश्विक संक्रामक महमारी कोविड-19 के प्रकोप के कारण यह नहीं हो पाई। और इसमें लगातार देरी हो रही है। जनसंख्या की अनियंत्रित वृद्धि के कारण संसार पर भुखमरी का संकट तीव्र गति से बढ़ता जा रहा है। जब हम महानगरों की बात करते हैं तो  साफ नजर आता है कि महानगरों कि जनसंख्या वृद्धि के कारण वाहनों की लंबी लंबी कतारें, घण्टों तक लम्बा जाम और बेतरतीब फंसे वाहन आमजन के जीवन मे बड़ी समस्या बनते दिखाई दे रहे है। </p>
<p>बढ़ती जनसंख्या के कारण स्थिति बदहाल हो रही है। चाहे  बात रेलवे स्टेशनों की हो या फिर बस स्टैंड, बाजार, मॉल, सड़कों की हर तरफ भीड़ तंत्र दिखाई दे रहा है। जिसके कारण आमजन फंसता दिखाई दे रहा है। सरकार की ओर से चलाए जा रहे तमाम अभियान बौने साबित हो रहे हैं।  लंदन के विश्व विख्यात  जनसंख्या विशेषज्ञ हरमन वेरी ने संसार को सावधान करते हुए लिखा है- सन् 2050 में संसार की हालत महाप्रलय से भी बुरी हो जायेगी। तब धरती पर न तो इतने लोगों के लिए पर्याप्त भोजन मिल सकेगा, न शुद्ध वायु,न पानी,न बिजली। देश की उत्पादकता ही राष्ट्रीय विकास का आधार है। </p>
<p><strong>- प्रकाश चंद्र शर्मा</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jul 2024 11:44:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>विश्व जनसंख्या दिवस विशेष : देश की बढ़ती आबादी को शिक्षित और कुशल बनाना चुनौतीपूर्ण </title>
                                    <description><![CDATA[ बढ़ती आबादी के अनुरूप  हमारे पास संसाधन नहीं है ऐसे में देश का विकास कैसे होगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/world-population-day-special--it-is-challenging-to-make-the-country-s-growing-population-educated-and-skilled/article-51449"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/rj-(2)16.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। 1.4 अरब लोगों की कुल आबादी के साथ भारत दुनिया की सबसे अधिक आबादी वाला देश तो बन गया लेकिन यहां बेरोजगारी का बहुत बड़ा संकट है। बढ़ती आबादी के अनुरूप  हमारे पास संसाधन नहीं है। ऐसे में देश का विकास कैसे होगा। गुणवत्ता के लोग कैसे उपलब्ध होंगे । देश पूरी तरह से आज भी साक्षर नहीं हुआ और अब डिजिटल साक्षरता का जमाना है...जब आबादी के बहुत बड़े हिस्से के पास शिक्षा नहीं होगी। डिजिटल क्रांति तेजी से आगे बढ़ रही है। नित नई टेक्नोलॉजी हर क्षेत्र में आगे आ रही है। प्राइवेट से लेकर सरकारी तक सभी काम आॅनलाइन किए जा रहे हैं, लेकिन देश का हर एक नागरिक इस डिजिटल तौर तरीकों से रु ब रु नहीं हो सका है। शहरी इलाकों में भी कंप्यूटर को लेकर लोगों में ज्यादा जानकारी नहीं है। नेशलन सैंपल सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक 15 प्रतिशत शहरी जनता में करीब 7.5 प्रतिशत लोगों को ही एक डिवाइस से दूसरा डिवाइस कनेक्ट करने आता है, वहीं ग्रामीण इलाकों में केवल 4 प्रतिशत लोगों को ही एक डिवाइस से दूसरा डिवाइस कनेक्ट करने आता है। </p>
<p><strong>साक्षरता दर </strong><br />दुनिया में टेक्नोलॉजी को पल-पल अपडेट किया जा रहा है, फिर भी हमारे देश की साक्षरता की धीमी राह है। हालांकि, भारत की 90% से अधिक आबादी के बीच डिजिटल साक्षरता लगभग न के बराबर है। भारत में औसत साक्षरता दर लगभग 73% है, जो विश्व की औसत साक्षरता दर 84% से कम है। दशकों से मशीनों ने रोजगारों और नौकरियों का संकट पैदा किया हुआ था। अब इनमें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस भी जुड़ गया है। नौकरियां गंवाने का खतरा 'ब्लू कॉलर वर्कर्स' तक सीमित था, पर एआई के बढ़ते प्रभुत्व ने 'व्हाइट कॉलर जॉब्स' को भी इसकी जद में ला दिया है। </p>
<p><strong>चीन के पास 90 करोड़ ह्यक्वालिटीह्ण कामगार</strong><br />वहीं दुनिया की सर्वाधिक जनसंख्या वाले देश की हैसियत भारत से गंवाने पर भी चीन के पास अब भी 90 करोड़ के करीब क्वालिटी कामगार हैं, जो उसके विकास को तेजी देते रहेंगे। चीन की 1.4 अरब आबादी में काम करने की आयु वाले लोगों की संख्या 90 करोड़ के करीब है चीन में 24 करोड़ से अधिक लोग उच्च शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं और कार्यक्षेत्र में आने वाले नौजवानों की औसत शिक्षा अवधि बढ़कर 14 साल हो गयी है। हमें केवल जनसंख्या के आकार पर नहीं बल्कि उसकी जनसंख्या की गुणवत्ता को भी देखना होगा ।''बढ़ती आबादी के बीच गुणवत्ता वाले लोग कैसे देश में होंगे। गुणवत्ता वाले लोग देश में होंगे तभी देश को फायदा होगा अन्यथा बेतहाशा बढ़ती जनसंख्या विकास को प्रभावित करेगी। एक बड़ी आबादी की वजह से काम करने की क्षमता रखने वाले लोगों की एक बड़ी संख्या भी खड़ी हो जाती है। इस बड़ी संख्या को रोजगार उपलब्ध करवाना एक बड़ी चुनौती के तौर पर उभरेगा। यही हालात रहे तो  बेरोजगारी की  समस्या भविष्य में एक विकराल रूप ले लेगी। रोजगार की कमी आर्थिक असमानता और गरीबी  बढ़ने से  एक बड़ी आबादी को शिक्षित और कुशल बनाना चुनौतीपूर्ण होगा  क्योंकि समय के साथ जितने लोगों को शिक्षित और कुशल बनाने की जरूरत होगी उतनी क्षमता शैक्षणिक संस्थानों के पास शायद नहीं होगी। इसका सीधा परिणाम यह होगा कि बहुत से लोग अच्छी शिक्षा हासिल नहीं कर पाएंगे और बहुत से लोगों के पास जो कौशल होगा वो नौकरी के बाजार से मेल नहीं खाएगा। ज्यादा जनसंख्या होगी तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा लोगो को नहीं मिलेगी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का जमाना है ऐसे में गुणवत्ता वाले लोग कैसे होंगे। किसी देश की जनसंख्या की गुणवत्ता उसके नागरिकों द्वारा अर्जित कौशल निर्माण से निर्धारित होती है। साक्षरता दर सबसे महत्वपूर्ण पहलू है क्योंकि यह लोगों की चेतना को प्रभावित करती है और उनके जीवन की और व्यक्ति की गुणवत्ता को बढ़ाती है। <br /> <br />देश में जनसंख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में किस तरह हम बढ़ती आबादी के बीच गुणवत्ता और कौशल वाले लोग तैयार कर सकेंगे। विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर यहीं सवाल शहर के लोगों के सामने रखा इस बारे में क्या कहा जानिए उनकी राय।</p>
<p>इसके लिए स्किल डेवलपमेंट होना बहुत जरूरी है। सरकार का स्किल डेवलपमेंट पर फोकस बहुत अच्छा प्रयास है। स्किल इंडिया से संबंधित कोर्सेज  हर यूनिवर्सिटी और इंस्टीट्यूशन में ग्रेजुएशन व पोस्टग्रेजुएशन स्तर पर अनिवार्य किया जाना चाहिए। पोस्ट ग्रेजुएशन लेवल तक  हर स्टूडेन्ट के पास किसी ना किसी स्किल का जो उसके अंदर है उसका फॉर्मल क्वालिफिकेशन या सर्टिफिकेट या डिप्लोमा जरूर होना चाहिए। जब तक स्किल नहीं है उद्यमिता भी नहीं हो सकती है। बच्चा तभी सशक्त हो सकता है जब उसके अंदर कोई भी हुनर है उसे यूनिवर्सिटी और कॉलेज लेवल पर पहचान मिले। इसके लिए उसे फॉर्मल ट्रेनिंग दी जाए और उसके पास डिग्री या सर्टिफिकेट के रूप में प्रमाण हो। यह अनिवार्य होना चाहिए चॉइस या आॅप्शनल नहीं होना चाहिए। एआई तकनीक अपनी जगह सही है। लेकिन मानवीय योग्यता है उसका जो कौशल है वो कोई भी कंप्यूटर, कोई भी तकनीक, एआई, कोई भी क्लाउड सब्सिडिंग मैच नहीं कर सकता।<br /><strong>- डॉ. अनुकृति शर्मा, डायरेक्टर कौशल विकास केन्द्र, कोटा विश्वविद्यालय, कोटा</strong></p>
<p>हम सबसे युवा राष्टÑ है। यूथ की आबादी सबसे ज्यादा है। मैनपावर दुनिया में चाइना से भी ज्यादा है। आबादी के हिसाब से यह हमारे  लिए पॉजिटिव है। धीरे-धीरे साक्षरता देश में बढ़ रही है। डिजिटल साक्षरता में भी पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा मोबाइल और इंटरनेट यूजर्स भारत में है। साक्षरता व्यवहारिक ज्ञान से होती है जो भारत में सबसे ज्यादा है। एन्टरप्रेन्योरशिप धीरे-धीरे बढ़ रहा है। प्राइवेट सेक्टर बढ़ रहा है। रोजगार की कमी नहीं है। हम पिछड़े किसी भी रूप में नहीं है। गांव-गांव में इंटरनेट व मोबाइल की पहुंच है। जो लोग पढ़ना नहीं जानते वह भी डिजिटल पेमेंट कर रहे हैं। नई योजनाएं सरकारों ने लागू की हैं जिसमें आराम से लोन लेकर अपना काम शुरू कर सकते है। बहुत जल्दी हम विकसित राष्ट्र की श्रेणी में खड़े होंगे और बाहरी देशों के लोग हमारे यहां जॉब्स करने आएगें। एआई को बढ़ावा दिया गया तो वो दिन दूर नहीं जब इंसान मशीन का गुलाम बन जाएगा। इन चीजों का सीमित उपयोग होना चाहिए। <br /><strong>-डॉ. भारत मर्मठ, डायरेक्टर, सिद्धि विनायक हॉस्पिटल,कोटा</strong></p>
<p>ह्यूमन राइट्स के प्लेटफॉर्म पर हम समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम करते रहते हैं। मानवाधिकार तो लोगों को अवेयर करता ही है यदि साथ में मीडिया और प्रबुद्ध वर्ग के लोग भी जुड़कर अवेयरनैस ला सकते हैं। स्किल्ड डेवलपमेंट के प्रोग्राम डेवलप किए जाए और उनकी जानकारी दी जाए। आने वाले समय में डिजिटल साक्षरता की ही वेल्यू है। डिजिटल इंडिया की तरफ रूझान बढ़ाया जाए। अवेयरनैस बहुत जरूरी है इतनी जागरूकता के बाद भी अभी भी लोगों में जागरूकता की कमी है लोग बहुत पीछे है। हुनरमंद लोगों की कमी है। आबादी निरंतर बढ़ रही है ऐसे में यह एक बड़ी चुनौती है।<br /><strong>-कुलविन्दर सिंह सेक्खौ, स्टेट प्रेसिडेंट, राजस्थान ह्यूमन राइट्स एसोसिएशन आॅफ इंडिया</strong></p>
<p>यह एक जटिल समस्या है। देश में आबादी बढ़ रही है। औद्योगिकरण के साथ विकास धीमी गति से हो रहा है। साक्षरता देश में बहुत कम है। डिग्रियां लोगों के पास है लेकिन हुनर वाली डिग्री भारतीयों के पास बहुत कम है। शिक्षित युवा देश से बाहर है क्योकि यहां उनको उनकी शिक्षा के अनुरूप सुविधाएं नहीं मिलती है। शिक्षा प्रणाली ऐसी है कि किताबी ज्ञान पर फोकस दिया जाता है। औद्योगिक शिक्षा या कौशल विकास का अभाव है । हालांकि, अब मेक इन इंडिया से आने वाले समय में कुछ संभावनाएं नजर आती है। देश के उच्च शिक्षित लोग बाहर नहीं जाएं उसके प्रयास करने होगें।  उद्योगों का विकास करना चाहिए। शिक्षा को औद्योगिक शिक्षा से भी जोड़ना चाहिए। <br /><strong>-सावित्री गुप्ता, डायरेक्टर, शिव ज्योति सी.सै. स्कूल वल्लभनगर गुमानपुरा,कोटा</strong></p>
<p>बहुत से बच्चे अंडर प्रिवलेज्ड है, चॉल्स में रहते है, सरकारी स्कूल में  जाते है, पढ़ते है और बहुत से ऐसे बच्चे है जो स्कूल नहीं जाते है । अभिभावकों की ग्रूमिंग रूलर एरिया में  जरूरी है। बदलाव लाना चाहते है तो अंडरप्रिवलेज्ड और ग्रामीण इलाकों पर फोकस करें कि हर चीज को लेकर उनमें जागरूकता हो। उनकी आदतों व स्वच्छता को लेकर जागरूक करें। इसके बाद शिक्षा की बारी आती हैं। बच्चे को किसी भी स्कूल में प्रवेश दिलाएं किस फील्ड में जाना है ,किस क्लास के बाद कौनसी जगह पढ़ना होगा उसकी प्रॉपर सूचना नहीं होगी तो इन बच्चों के सपनों को दिशा भी नहीं मिलेगी। इसके लिए ऐसे लोग आगे आए और ग्रामीण इलाको में जाएं उन्हें मोटीवेट करें इस के लिए सर्टिफिकेट या उनकी जरूरत की कोई भी चीज उनको उपहार के रूप में दे सकते है। ऐसे एरिया में साक्षरता का मिशन अभिभावकों के लिए भी किया जाए। उनको समझाया जाए कि बच्चे की काबिलियत को सही दिशा कैसे दी जा सकती है। जब उनको यह समझ आएगा कि शिक्षा कितनी आवश्यक हैं तो बच्चों को शिक्षा देने के लिए मेहनत करेंगे। <br /><strong>-मीता अग्रवाल, चेयरपर्सन, जेसीआई इंडिया एसएमए जोन-5</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Jul 2023 12:01:52 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>विश्व जनसंख्या दिवस और जनगणना</title>
                                    <description><![CDATA[विश्व में तेजी से बढ़ती आबादी और इससे जुड़ी समस्याओं पर ध्यान आकर्षित करन के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से वर्ष 1989 से 11 जुलाई विश्व जनसंख्या दिवस मनाए जाने की घोषणा की गई थी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/world-population-day-and-census/article-14054"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/world-population-day-new.jpg" alt=""></a><br /><p>विश्व में तेजी से बढ़ती आबादी और इससे जुड़ी समस्याओं पर ध्यान आकर्षित करन के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से वर्ष 1989 से 11 जुलाई विश्व जनसंख्या दिवस मनाए जाने की घोषणा की गई थी। आबादी के अन्तर्गत विशेष नंबर पर जन्में शिशुओं को अन्तरराष्ट्रीय संस्था की ओर से विशेष सम्मान की परम्परा रही है। दरअसल, 11 जुलाई 1987 को तत्कालीन यूगोस्लाविया के जागरेख में मातेज गैसकर को पांच अरब की संख्या वाला बच्चा माना गया। विचार-विमर्श के क्रम में दो वर्ष पश्चात 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस के रूप में मनाने की परम्परा आरंभ हुई। जनसंख्या दिवस मनाए जाने के साथ-साथ जनगणना का विशिष्ट महत्व हैं जनगणना से किसी भी देश की कमोबेश वास्तविक जनसंख्या का तथ्यात्मक आंकलन किया जाता है। देश की समूची जनसंख्या एवं उसकी जनांकिकीय विशिष्टताओं के प्रतीक रूप में जनगणना की मान्यता है।</p>
<p>इससे शासन-प्रशासन को विशेष रूप से सामाजिक, आर्थिक एवं क्षेत्रीय नियोजन तथा नीति संबंधी निर्णय लेने के लिए आवश्यक सूचनाएं उपलब्ध होती है। दूसरे अर्थों में दस साल के अन्तराल में की जाने वाली जनगणना में समूची जनसंख्या का अगणक एवं आयु, लिंग, भाषा, शिक्षा, रोजगार प्रवास, परिवार का आकार, प्रजननशीलता, आमदनी, व्यवसाय, धर्म एवं जाति के अनुसार उसके वितरण के संदर्भ में व्यापक जानकारी प्राप्त की जाती है। जनगणना से संबंधित तैयारियां आधार वर्ष से तीन वर्ष पहले प्रारंभ की जाती है। मकान सूचीकरण तथा मकानों की गणना परिवार अनुसूची तथा जनगणना का प्रगणन काल इत्यादि विभिन्न कदम निर्धारित समय चक्र के अनुसार उठाए जाते हैं। जनगणना के लिए व्यापक प्रशासन तंत्र की व्यवस्था की जाती है।</p>
<p><br />भारत में प्राचीन काल में कई सुव्यवस्थित राज्यों में जनगणना की जाती थी। चाणक्य के अर्थशास्त्र ग्र्रंथ में चन्द्रगुप्त मौर्य एवं सम्राट अशोक के शासनकाल में इसके प्रमाण उपलब्ध हैं। इसी प्रकार शेरशाहसूरी तथा मुगल काल के दौरान समय की शासन व्यवस्था और आवश्यकतानुसार जनगणना कार्य प्रचलन में था। ब्रिटिश शासन में 1872 में अलग-अलग समय पर विभिन्न राज्यों में जनगणना की गई। इसमें एकरूपता का अभाव था। इसलिए 1881 से जनगणना का काम विधिवत तौर पर आरंभ हुआ और दस वर्ष के अंतराल पर नियमित रूप से जनगणना की जाने लगी। वर्ष 1931 में भारत में पहली बार जाति धर्म आधार पर की गई जनगणना के आंकड़े सार्वजनिक किए गए थे। द्वितीय विश्व युद्ध के चलते 1941 में निर्धारित समय पर जनगणना नहीं हो सकी। यूपीए सरकार के समय जातीय आधार पर जनगणना कराने के निर्णय पर काफी बावेला मचा।स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात 1951 में पहली जनगणना करवाई गई थी। जनगणना का कार्य दो चरणों में किया जाता है। जनगणना दशक वर्ष के आरंभ से करीब छ: माह पूर्व प्राय: अप्रैल से जून माह की अवधि में राज्यों तथा संघ राज्य क्षेत्रों में मकान नंबर एवं सूचीकरण का कार्य सम्पन्न किया जाता है।</p>
<p>दूसरे चरण में फरवरी माह में जनगणना की गणना का कार्य होता है। जन्म और मृत्यु संबंधी आंकड़ों के साथ जनगणना से संबंधित सारणियां तैयार कर उनका विश्लेषण किया जाता है। कोरोना वायरस की वैश्विक महामारी से भारत में दशकीय जनगणना से संबंधित क्रियाकलापों पर विपरीत प्रभाव हुआ है। लेकिन जनगणना का कार्य तो सम्पन्न किया जाना है। स्वाभाविक रूप से इसके समय चक्र में काफी फेरबदल किया जाना है। इस बार की जाने वाली गणना में तथा आंकड़ों में संकलन के लिए मोबाइल एप का विशेष प्रयोग किया जाएगा। जनगणना कार्य की निगरानी और प्रबंधन पोर्टल की व्यवस्था की गई है। जनगणना से संबंधित लगभग 60 प्रतिशत कार्य आॅनलाईन किया जाना है। जनगणना कानून 1948 एवं जनगणना नियम 1990 जनगणना के लिए वैधानिक फ्रेमवर्क उपलब्ध कराता है। नागरिक कानून 1955 तथा नागरिकता नियम 2003 के अन्तर्गत राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) पहली बार 2010 में तैयार किया गया था। इसे आधार कार्ड से जोड़ने के पश्चात 2015 में अपडेट किया गया। केन्द्र सरकार ने गत 24 दिसंबर को जनगणना कार्य की मंजूरी दी। जनगणना कार्य पर 8754-23 करोड़ रुपये तथा राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (असम को छोड़कर) के लिए 3941.45 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।जनगणना कार्य सोलह भाषाओं में किया जाएगा।</p>
<p>जनगणना प्रगणक इकतीस प्रश्नों के माध्यम से हर परिवार के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। लगभग तीस लाख कार्मिकों को इस कार्य में जुटाया जाएगा। जनगणना प्रश्नावली से मकान की स्थिति, पानी, बिजली, शौचालय, टेलीफोन, इंटरनेट, मोबाईल, लेपटॉप, वाहन, रसोई गैस, बैंक खाता इत्यादि सूचनाएं प्राप्त की जाएंगी। इनसे प्राप्त आंकड़ों के विश्लेषण से सामाजिक आर्थिक स्थिति का सहज संकलन हो सकेगा। विश्व में तेजी से बढ़ रही आबादी तथा संसाधनों की उपलब्धता में कमी है, हालात भयावह हो रहे हैं। इसलिए हमें जनसंख्या स्थिरीकरण और स्थायी विकास के लक्ष्य की दिशा में अग्र्रसर होना है। भारत में प्राचीन काल में कई सुव्यवस्थित राज्यों में जनगणना की जाती थी। चाणक्य के अर्थशास्त्र ग्र्रंथ में चन्द्रगुप्त मौर्य एवं सम्राट अशोक के शासनकाल में इसके प्रमाण उपलब्ध हैं। इसी प्रकार शेरशाहसूरी तथा मुगल काल के दौरान समय की शासन व्यवस्था और आवश्यकतानुसार जनगणना कार्य प्रचलन में था। ब्रिटिश शासन में 1872 में अलग-अलग समय पर विभिन्न राज्यों में जनगणना की गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/opinion/world-population-day-and-census/article-14054</link>
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                <pubDate>Mon, 11 Jul 2022 15:57:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्व जनसंख्या दिवस पर विशेष: आबादी के बोझ से कराहती धरती</title>
                                    <description><![CDATA[वर्ष 2019 में जब कोरोना ने विश्व मेंअपना प्रकोप दिखाना आरंभ किया तो पूरी दुनिया को समझ में आया कि जनसंख्या का अधिक होना हमारे लिए कितना खतरनाक है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/special-on-world-population-day-earth-groaning-with-the-burden-of-population/article-14019"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/hklsajfajls.jpg" alt=""></a><br /><p>वर्ष 2019 में जब कोरोना ने विश्व मेंअपना प्रकोप दिखाना आरंभ किया तो पूरी दुनिया को समझ में आया कि जनसंख्या का अधिक होना हमारे लिए कितना खतरनाक है।<br /><br />चीन के बाद सर्वाधिक आबादी वाले देश भारत में तो यह कोरोना कहर बनकर आया। आक्सीजन और दवाओं के साथ ही अस्पतालों की कमी ने हमें बताया कि यदि हम अभी भी नहीं चेते तो हमारा भविष्य उज्जवल नहीं है। बाकी की पोल बढ़ती आबादी ने ग्लोबल वार्मिंग के रूप में हमारे सामने खोलकर रख दी है। इस वर्ष के अभी तक के मौसम चक्र में सर्दी और गर्मी दोनों ही हर वर्ष के मुकाबले अधिक रहीं और अब जब वर्षा ऋतु चल रही है तो वर्षा का प्रकोप पूरे देश में नजर आ रहा है।<br /><br />यह सब बताता है कि आबादी का बोझ हमारे जीवन में भस्मासुर बन गया है। भारत तथा चीन दुनिया के सर्वाधिक आबादी वाले देश हैं। यहां की सरकारें आबादी नियंत्रण के लिए लंबे समय से प्रयासरत हैं। चीन ने 1979 में एक संतान की नीति लागू की थी। उसकी योजना थी कि इससे देश में जनसंख्या वृद्धि नियंत्रण में आ जाएगी। भारत ने जनसंख्या नियंत्रण के लिए हम दो हमारे दो की नीति के साथ ही परिवार नियोजन के विभिन्न साधन अपनाने पर भी जोर दिया।<br /><br />सरकारी सेवाओं में भी इसी परिवार नियोजन को विभिन्न योजनाओं से जोड़ा गया। थोड़ा और विस्तार से देखें तो कोविड 19 के प्रसार के शुरुआती दौर में महानगरों से बड़ी संख्या में लोग गांवों की तरफ भाग चले थे। लेकिन यह बहुत कम समय तक होने वाली प्रक्रिया थी। तब लोगों ने समझा था कि गांव इस महामारी से ज्यादा सुरक्षित रहेंगे। शहरी क्षेत्र में संक्रमण के ज्यादा मामलों और महामारी के कारण हुई आर्थिक दिक्कत के बावजूद शहर फिर से अवसरों का केन्द्र बनते जा रहे हैं। वे रोजगार, शिक्षा और प्रशिक्षण के अवसर मुहैया कराते हैं और गांवों में होने वाले अनेक संघर्षों से भी व्यक्ति की रक्षा करते हैं। शहरीकरण की प्रक्रिया में एकरूपता नहीं है फिर भी शहरों का विकास अब होता ही जाएगा और मानवता का भविष्य अब नगरों में ही निहित है। शहरों की जनसंख्या वृद्धि का एक कारण यह भी है।</p>
<table style="width:708px;">
<tbody>
<tr>
<td style="text-align:center;width:707px;" colspan="2"><strong>जनसंख्या की दृष्टि से टॉप 8 देश</strong></td>
</tr>
<tr>
<td style="width:163.117px;">नाईजारिया</td>
<td style="width:543.883px;">15,52,15,573</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:163.117px;">बांग्लादेश</td>
<td style="width:543.883px;">15,85,70,535</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:163.117px;">पाकिस्तान</td>
<td style="width:543.883px;">18,73,42,721</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:163.117px;">ब्राजील</td>
<td style="width:543.883px;">20,34,26,773</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:163.117px;">इंडोनेशिया</td>
<td style="width:543.883px;">24,56,13,043</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:163.117px;">संयु. अमेरिका</td>
<td style="width:543.883px;">31,32,32, 044</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:163.117px;">भारत</td>
<td style="width:543.883px;">15,85,70,535</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:163.117px;">चीन</td>
<td style="width:543.883px;">1,33,67,18015</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>सर्वाधिक लोग एशिया में</strong></span></p>
<p>महादेशों में सर्वाधिक जनसंख्या एशिया की है।  दूसरा स्थान अफ्रिका का है।  इनकी जनसंख्या 1.34 अरब है।  एशिया में जहां विश्व के 36% लोग रहते हैं,  वहीं अफ्रिका में 17.7 प्रतिशत। यूरोप की जनसंख्या 74.7 करोड़ है।  जहां दुनिया के 10 प्रतिशत लोग रहते है।<br /><br /><span style="color:#ff0000;"><strong>उत्तर अमेरिका में दुनिया 5% लोग</strong></span><br />उत्तर अमेरिका महादेश में वर्ष 2020 के अंत तक 36.6 करोड़ लोग रहते थे।  जो पूरी दुनिया की जनसंख्या का लगभग पांच प्रतिशत है।<br /><br /><span style="color:#ff0000;"><strong>दक्षिण अमेरिका में दुनिया के 8% लोग</strong></span><br />दक्षिण अमेरिका और कैरीबियन की जनसंख्या इस समय अर्थात वर्ष 2020 तक 65.3 करोड़ थी। जो विश्व आबादी का आठ प्रतिशत है।<br /><br />एक अनुमान के अनुसार 10 हजार ई. पूर्व कृषि कार्य की शुरुआत होने तक दुनिया की आबादी दस लाख से एक करोड़ के बीच थी। कृषि कार्य शुरू होने पर अन्न की प्रचुरता हुई और दुनिया की जनसंख्या तेजी से बढ़ने लगी।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>शहरीकरण और चुनौतियां</strong></span><br />पिछले दो दशक में एशिया में भारत और चीन में बहुत तेज आर्थिक वृद्धि हुई और शहरीकरण भी खूब हुआ। वर्ष 2035 तक चीन की शहरी आबादी के 1.05 अरब हो जाने की सम्भावना है। जबकि एशिया महादेश की शहरी जनसंख्या 2.99 अरब। तब तक दक्षिण एशिया की शहरी जनसंख्या 98,75,92,000 तक पहुंच जाएगी। भारत और चीन जैसी बहुत बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में विश्व जनसंख्या का बहुत बड़ा भाग निवास करता है, इसलिए उनके विकास के अनुचित रास्ते विश्व में असमानता बढ़ाते हैं। वर्तमान शहरी जनसंख्या अधिक जन्मदर के कारण लगातार बढ़ रही है। निम्नआय वाले देशों में तो ऐसा हो ही रहा है।<br /><br /><span style="color:#ff0000;"><strong>जन्मदर और वृद्धि का कारण</strong></span><br />वर्ष 2021 के नवम्बर में विश्व की जनसंख्या 7.9 अरब पहुंच गई।  मानव इतिहास में जनसंख्या के एक अरब तक पहुंचने में 20 लाख वर्ष लगे।  वर्ष 1814 से लेकर 2021 तक के 207 वर्ष में ही विश्व जनसंख्या  7.9 अरब हो गई। जन्म दर में वृद्धि का कारण माना जा रहा है कि  हमने तमाम बीमारियों पर काबू कर लिया है ।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>महामारियों ने कम की आबादी</strong></span><br />रोमन सम्राट जस्टीनियन के शासन काल में यूरोप में प्लेग फैला था। जिससे वहां की आधी आबादी मौत के मुंह में चली गई। यह रोग भारत में भी फैला, यहां भी भारी संख्या में लोगों की मृत्यु हुई। कोरोना जैसी महामारी ने भी विश्व की आबादी कम करने में अपनी अह्म भूमिका निभाई है। <br /><br /><strong><span style="color:#ff0000;">संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार 6 जुलाई 2022 को</span></strong><br /><span style="color:#ff0000;"><strong>भारत की जनसंख्या एक अरब 40 करोड़ 71 लाख 99 हजार 129 थी।</strong></span><br />संयुक्त राष्ट्र का सांख्यिकी कर्मी चीन की जनसंख्या अब भारत से अधिक नहीं मानते। उनका कहना है कि अनेक वर्षों तक एक बच्चा नीति के कारण चीन की आबादी कम हो गई है। लेकिन वह आंकड़ों में हेर फेर कर अपने को विश्व का सबसे बड़े देश दिखा रहा है। वर्ष 2020 में भारत की जनसंख्या एक अरब 38 करोड़ थी। यह आंकड़ा भी संयुक्त राष्ट्र के अनुसार ही है।</p>
<table style="width:708px;">
<tbody>
<tr style="height:41px;">
<td style="text-align:center;width:705px;height:41px;" colspan="2"><span style="color:#ff0000;"><strong>ये वो देश हैं जो जनसंख्या की दृष्टि से हमारे राज्य के बराबर</strong></span></td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">आंध्र प्रदेश</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">जर्मनी</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">अरुणाचल प्रदेश</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">मॉरीशियस</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">असम</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">पेरु</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">छत्तीसगढ़</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">नेपाल</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">दिल्ली</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">बेलारूस</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">गोवा</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">एस्टोनिया</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">गुजरात</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">इटली</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">हरियाणा</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">यमन</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">हिमाचल प्रदेश</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">हॉंगकांग</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">जम्मू और कश्मीर</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">जिम्बाब्वे</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">झारखंड</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">इराक</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">कर्नाटक</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">फ्रांस</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">केरल</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">कनाड़ा</td>
</tr>
<tr style="height:41.2px;">
<td style="width:299.667px;height:41.2px;">मध्यप्रदेश</td>
<td style="width:405.333px;height:41.2px;">इरान</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">महाराष्ट्र</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">जापान</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">मणिपुर</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">मंगोलिया</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">मेघालय</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">ओमान</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">मिजोरम</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">बहरीन</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">नागालैंड</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">स्लोबोनिया</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">ओडिशा</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">अर्जेंटीना</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">पंजाब</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">मलेशिया</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">राजस्थान</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">थाइलैंड</td>
</tr>
</tbody>
</table>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 Jul 2022 14:47:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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