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                <title>natural calamity - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>natural calamity RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>नेपाल में भीषण बाढ़ से मचा हाहाकार: मृतकों की संख्या बढ़कर 1,127 पहुंची, 4,858 लोग लापता</title>
                                    <description><![CDATA[नेपाल में भीषण बाढ़ आपदा में मृतकों की संख्या बढ़कर 1,127 हो गई है, जबकि 4,858 लोग अभी भी लापता हैं। भोटेकोशी नदी में ग्लेशियर टूटने और भूस्खलन के बाद आई इस तबाही से प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों ने राहत और बचाव अभियान चलाकर 6,541 लोगों को सुरक्षित बचाया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/massive-flood-creates-havoc-in-nepal-death-toll-rises-to/article-164460"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(2)4.png" alt=""></a><br /><p>काठमांडू। नेपाल में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,127 हो गई है और 4,858 लोग अभी भी लापता हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को पुलिस के हवाले से यह जानकारी दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बाढ़ प्रभावित इलाकों से 6,541 लोगों को बचाया गया है और 4,858 लोग अभी भी लापता हैं।</p>
<p>गौरतलब है कि 26 अगस्त की सुबह उत्तरी नेपाल में उस समय भीषण बाढ़ आ गई जब चीन की तरफ से पानी का एक विशाल सैलाब भोटेकोशी नदी में आकर मिल गया था। यह बाढ़ एक बड़े ग्लेशियर के टूटने और उसके बाद हुए भूस्खलन के कारण आई थी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 15:52:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नेपाल में बाढ़ का कहर: अब तक 1,000 से अधिक लोगों की मौत, सैकड़ों अभी भी लापता</title>
                                    <description><![CDATA[नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन से मरने वालों की संख्या 1,000 पार कर गई है, जबकि सैकड़ों लोग लापता हैं। इसमें कई विदेशी नागरिक और जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे मजदूर शामिल हैं। सेना और अंतरराष्ट्रीय बचाव दल राहत कार्यों में जुटे हैं तथा लावारिस शवों का डीएनए सुरक्षित रख अंतिम संस्कार किया जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/flood-wreaks-havoc-in-nepal-more-than-1000-people-dead/article-164409"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/nepal3.png" alt=""></a><br /><p>काठमांडू। नेपाल में बुधवार को अचानक आयी बाढ़ की आपदा में मरने वालों की संख्या 1,000 के आंकड़े को पार कर गयी है, जबकि चीन में भी कई लोगों की जानें गयीं है और सैकड़ों लोग लापता हैं। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, देश में बाढ़ के कारण कम से कम 1,003 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा 3,916 लोग अब भी लापता हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के अनुसार बाढ़ आपदा के बाद से अब तक 11,379 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।</p>
<p>नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, लापता लोगों में 583 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। राहत कार्यों के दौरान हालांकि भारत, चीन, जर्मनी, बुल्गारिया, तुर्की, इटली, अमेरिका, माल्टा, स्विट्जरलैंड, रूस, पुर्तगाल और ओमान सहित विभिन्न देशों के 315 विदेशी नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया है। वहीं, स्पेन, बेल्जियम और अमेरिका के पांच अन्य विदेशी नागरिक स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में हैं। चीन में भी बाढ़ ने भारी तबाही मचायी है। चीन के सरकारी बयान में कहा गया है कि बाढ़ के कारण कम से कम 16 लोगों की मौत हो चुकी है और 546 से अधिक लोग लापता हैं।</p>
<p>चीन के सरकारी ब्रॉडकास्टर सीसीटीवी ने चीन के जल संसाधन मंत्रालय का हवाला देते हुए बताया है कि हिमालयी इलाके में आयी भीषण और जानलेवा बाढ़ के कुछ दिनों बाद भी, नेपाल में टकराव से बने गड्ढे के आस-पास मौजूद ग्लेशियर ‘गिर सकते हैं, जिससे बड़ा खतरा हो सकता है।’ यह लगातार दूसरा दिन है जब मंत्रालय ने ग्लेशियरों के गिरने की संभावना जतायी है। इससे पहले चीन के सरकारी ब्रॉडकास्टर ने बताया था कि पहाड़ के किनारे बने उस गढ्ढे के पास जमा पानी वाले इलाके ‘लबालब’ की स्थिति में थे। यह गढ्ढा पिछले सप्ताह ग्लेशियर के गिरने से बना था। मंगलवार सुबह लिये गये नये ड्रोन फ़ुटेज के आधार पर, चीनी मंत्रालय ने आकलन किया कि नेपाल की छोचेन खोला नदी के इम्पैक्ट क्रेटर में जमा पानी ‘काफ़ी हद तक निकल चुका है’ और नदी का बहाव सामान्य है। मंत्रालय ने हालांकि चेतावनी दी है कि ग्लेशियर के गिरने का खतरा अभी भी बना हुआ है।</p>
<p>नेपाल में जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए बचाव अभियान अभी भी जारी है। रसुवा जिले के ‘अपर त्रिशूली-1’ प्रोजेक्ट में लगभग 300 मजदूरों के टनल में फंसे होने की आशंका जतायी गयी थी। वहीं, 'त्रिशूली-3ए' प्रोजेक्ट के पावरहाउस और टनल में फंसे लगभग 42 तकनीकी कर्मियों तक पहुंचने के लिए नेपाली सेना ड्रिलिंग और ब्लास्टिंग का सहारा ले रही है। सुरंग के भारी मलबे को हटाने के साथ-साथ वेंटिलेशन पाइप के जरिए अंदर ऑक्सीजन पहुंचाई जा रही है और कैमरों की मदद से फंसे हुए लोगों की स्थिति का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।</p>
<p>नेपाल के रसुवा और नुवाकोट जिलों में आयी भीषण आपदा के दौरान करीब 600 से अधिक मजदूरों के फंसे होने की जानकारी सामने आयी थी। त्रिशूली और भोटेकोशी नदी घाटी में लगभग 10 से 12 अलग-अलग जलविद्युत परियोजनाएं काम कर रही थीं। इनमें 'अपर त्रिशूली-1', 'त्रिशूली-3ए' और 'रसुवागढ़ी' प्रमुख हैं। बाढ़ और भूस्खलन के कारण इन सभी परियोजनाओं की सुरंगों, काम करने वाली जगहों और पावरहाउस में अलग-अलग जगहों पर मजदूर फंस गये थे।</p>
<p>नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और अंतरराष्ट्रीय रेस्क्यू टीमें एक साथ कई अलग-अलग जगहों पर राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं। भारी मलबे, कीचड़ और रास्ते बंद होने की वजह से रेस्क्यू टीमों को ड्रिलिंग करके टनल तक पहुंचना पड़ रहा है। कई सुरंगों में वेंटिलेशन पाइप के जरिए ऑक्सीजन और पानी पहुंचाया जा रहा है तथा कैमरों की मदद से अंदर फंसे लोगों की स्थिति का पता लगाने की कोशिशें लगातार जारी हैं।</p>
<p>नेपाल में बरामद शवों की पहचान और उनके अंतिम संस्कार को लेकर प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रिया जारी बनी हुयी है। लगातार हो रही बारिश और नदी के तेज बहाव के कारण बहकर आये शवों की स्थिति काफी खराब) हो गयी है। अस्पतालों के शवगृहों में जगह कम पड़ने और सड़ते शवों से बीमारी फैलने की आशंका को देखते हुए अधिकारियों ने अनाम और लावारिस शवों को दफनाना शुरू कर दिया है। चितवन जिले के देवघाट के जंगलों में अस्थायी तौर पर गड्ढे खोदकर शवों को दफनाया जा रहा है।</p>
<p>जल्दबाजी में दफनाये जाने के बावजूद भविष्य में परिजनों द्वारा पहचान स्थापित करने की पूरी व्यवस्था की गयी है। शवों को दफनाने से पहले उनके डीएनए सैंपल एकत्र किये जा रहे हैं। साथ ही, शवों पर मौजूद खास निशानों (जैसे अंगूठी, टैटू, या कपड़े)और चेहरे के फोटो खींचकर एक स्पेशल रेफरेंस नंबर के साथ जियो-टैग किया जा रहा है। अगर बाद में कोई परिवार दावा करता है, तो डीएनए मैच कराकर शव को उनके सुपुर्द किया जा सकेगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक अस्थायी व्यवस्था है, ताकि स्वास्थ्य संकट न पैदा हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 17:33:06 +0530</pubDate>
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                <title>तिब्बत में भूस्खलन से हाहाकार, लापता लोगों की तलाश के लिए चीन कर रहा हर संभव प्रयास: शी जिनपिंग  </title>
                                    <description><![CDATA[चीन-नेपाल सीमा पर स्थित गिरोंग चेकपॉइंट और तिब्बत क्षेत्र में भीषण भूस्खलन के बाद राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सभी लापता नागरिकों की तलाश के लिए युद्धस्तर पर बचाव कार्य चलाने के निर्देश दिए हैं। आपदा के बाद प्रभावित इलाकों में बड़े पैमाने पर खोज अभियान जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/more-than-900-people-died-due-to-landslide-in-tibet/article-164272"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/shi-jinping.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा है कि उनकी सरकार तिब्बत क्षेत्र में भूस्खलन के बाद लापता लोगों की तलाश के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। नेपाल में 26 अगस्त को बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ था, जिससे तिब्बत क्षेत्र में चीन-नेपाल सीमा पर स्थित गिरोंग चेकपॉइंट के पास भारी तबाही हुई। ताजा आंकड़ों के अनुसार, चीन-नेपाल में आयी इस प्राकृतिक आपदा के कारण 900 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 4,000 से अधिक लोग लापता हैं।</p>
<p>किर्गिस्तान की राजधानी बिशकेक में वहां के राष्ट्रपति सादिर जापारोव के साथ बैठक में जिनपिंग ने कहा, "तिब्बत क्षेत्र में आये मलबे के बहाव के बाद लापता दर्ज चीनी और विदेशी नागरिकों की तलाश के लिए चीन हर संभव प्रयास कर रहा है।" स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, इस भीषण भूस्खलन के कारण तीन रूसियों सहित 23 देशों के 261 विदेशी नागरिकों से संपर्क टूट गया था। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा है कि भीषण भूस्खलन के बाद चीन-नेपाल सीमा पर चलाये जा रहे बचाव कार्य अपनी जटिलता और गंभीरता के मामले में अभूतपूर्व हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 18:13:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भूकंप के झटकों से कांपी लद्दाख की धरती: पहले 5.5 और फिर 4.3 रही तीव्रता, जान-माल का नुकसान नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[केन्द्र शासित प्रदेश लद्दाख और आसपास के इलाकों में गुरुवार सुबह चार घंटे के भीतर दो बार भूकंप के झटके महसूस किए गए। पहला झटका 5.5 और दूसरा 4.3 तीव्रता का मापा गया। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के अनुसार, किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/the-land-of-ladakh-trembled-due-to-the-earthquake-the/article-162845"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/earthquake-2.jpg" alt=""></a><br /><p>श्रीनगर। केन्द्र शासित प्रदेश लद्दाख में गुरुवार सुबह चार घंटे के भीतर भूकंप के दो बार झटके महसूस किये गये। रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 5.5 और 4.3 मापी गयी। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के अनुसार, भूकंप का पहला झटका सुबह 6:05 बजे महसूस किया गया, जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.5 मापी गई। भूकंप का केन्द्र लेह-लद्दाख क्षेत्र में 36.881 डिग्री उत्तरी अक्षांश तथा 74.402 डिग्री पूर्वी देशांतर तथा जमीनी सतह से 10 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था।</p>
<p>इसके लगभग चार घंटे बाद, पूर्वाह्न 9:54 बजे दूसरा झटका महसूस किया गया। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 4.3 मापी गयी। इन दोनों  भूकंपों के झटके कश्मीर और लद्दाख के विभिन्न इलाकों में महसूस किए गए। फिलहाल इस घटना में किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान या हताहत होने की कोई खबर नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 15:36:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अच्छी खबर: जम्मू से अमरनाथ त्रा फिर हुई शुरू, अमरनाथ गुफा के पास बादल फटने से आई प्राकृतिक आपदा के कारण लगाई गई थी अस्थायी रूप से रोक </title>
                                    <description><![CDATA[जम्मू। जम्मू के भगवती नगर में स्थित यात्री निवास आधार शिविर  से अमरनाथ की यात्रा फिर से शुरू हो गई है। शुक्रवार शाम को अमरनाथ गुफा के पास बादल फटने से आई प्राकृतिक आपदा के कारण इस पर अस्थायी रूप से रोक  लगाई गई थी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/good-news-amarnath-yatra-resumed-from-jammu--temporarily-halted-due-to-natural-calamity-caused-by-cloudburst-near-amarnath-cave/article-14038"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/amarnath-yatra.jpg" alt=""></a><br /><p>जम्मू। जम्मू के भगवती नगर में स्थित यात्री निवास आधार शिविर  से अमरनाथ की यात्रा फिर से शुरू हो गई है। शुक्रवार शाम को अमरनाथ गुफा के पास बादल फटने से आई प्राकृतिक आपदा के कारण इस पर अस्थायी रूप से रोक  लगाई गई थी। <br /><br />यहां बादल फटने की वजह से आई तबाही में 16 लोगों की मौत हो चुकी है, 40 लापता हैं और करीब 50 घायल हुए हैं।  अमरनाथ में आई इस आपदा के बावजूद यहां मौजूद तीर्थयात्रियों का उत्साह  बिल्कुल भी कम नहीं हुआ है। सरकार द्वारा भक्तों के लिए स्थापित आधार  शिविरों में ये 'बम बम भोले के जयकारे' के साथ पहुंच रहे हैं। 4,026 तीर्थयात्रियों का 12वां जत्था।10 वाहनों के काफिले में आधार शिविर से रवाना हुआ।<br /><br />एक  अधिकारी ने बताया कि बालटाल मार्ग के लिए 25 बसों और 10 हल्के मोटर वाहनों  में 767 पुरुष, 240 महिलाएं और नौ बच्चे समेत कुल 1,016 यात्री आधार शिविर  से रवाना हुए हैं। ठीक इसी तरह पहलगाम रूट के लिए कुल 3,010  तीर्थयात्री  58 बसों सहित 75 वाहनों में सवार होकर आधार शिविर से रवाना  हुए, जिनमें 2,425 पुरुष, 401 महिलाएं, चार बच्चे, 174 साधु और छह साध्वी  शामिल हैं।अधिकारी ने कहा कि जम्मू आधार शिविर से अब तक 73,554 तीर्थयात्री  पवित्र गुफा के दर्शन के लिए रवाना हो चुके हैं। कोरोना महामारी के कारण दो साल से बंद अमरनाथ यात्रा की शुरुआत 30 जून से हुई है। 43 दिन तक चलने वाली इस तीर्थयात्रा का समापन 11 अगस्त को रक्षा बंधन के अवसर पर होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 11 Jul 2022 12:19:41 +0530</pubDate>
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