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                <title>census - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>census RSS Feed</description>
                
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                <title>विपक्षी दलों ने किया परिसीमन विधेयक का विरोध: लोकसभा सीटों में कमी होने की जताई आशंका, परिसीमन आयोग की रिपोर्ट को नकारा नहीं जा सकता</title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा में विपक्षी दलों ने परिसीमन विधेयक का कड़ा विरोध किया है। कनिमोझी और शशि थरूर ने तर्क दिया कि नई व्यवस्था से दक्षिण भारतीय राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा। उन्होंने महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग कर तुरंत लागू करने और सहकारी संघवाद के तहत छोटे राज्यों के हित सुरक्षित करने की मांग की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/opposition-parties-opposed-the-delimitation-bill-expressed-fear-of-reduction/article-150823"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/shashi.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। लोक सभा में शुक्रवार को विपक्षी दलों ने परिसीमन विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि विधेयक के इस रूप में पारित होने से दक्षिण और छोटे राज्यों का लोकसभा में प्रतिनिधित्व कम होगा और उनके हक़ मारे जाने की आशंका बनी रहेगी। सदन में परिसीमन विधेयक 2026, संविधान ( 137वां संशोधन ) विधेयक 2026 और संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक 2026 पर अधूरी रही चर्चा की शुरुआत करते हुए द्रविड मुनेत्र कषगम (द्रमुक) की कनिमोझी ने आज कहा कि गृह मंत्री अमित शाह ने परिसीमन के बाद राज्यों की बढ़ने वाली लोक सभा की सीटें बढ़ाने का जो सूत्र बताया है उसे भविष्य में बदला जा सकता है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि परिसीमन के मामले में सरकार अपना एजेंडा लागू कर सकती है। परिसीमन आयोग की रिपोर्ट को नकारा भी जा सकता है। ऐसी स्थिति में न्याय कहां मिलेगा। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की द्रमुक सरकार सहकारी संघवाद मानती है। द्रमुक सरकार ने महिलाओं को विधायिका में आरक्षण देने के लिए केन्द्र को पत्र लिखा था, द्रमुक की महिला मोर्चा ने इसके लिए दिल्ली में रैली की थी। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार भारतीय महिलाओं को शील्ड के रूप में इस्तेमाल कर रही है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आंकड़े दर्शाते हैं कि इस सरकार ने सदन में किये गये 80 से 90 प्रतिशत आश्वासनों को पूरा नहीं किया है। सरकार सहकारी संघवाद की भावना का पालन नहीं कर रही है। उन्होंने महिलाओं को आरक्षण देने का विधेयक तुरंत लागू करने की मांग की। उन्होंने परिसीमन विधेयक को ऐसी संसदीय समिति को भेजने की मांग की जो सभी दलों के सदस्यों से सलाह-मशविरा करके अपनी रिपोर्ट दे। इस मामले में जल्दबाजी न करें और पूरी प्रक्रिया को कम से कम तीन महीने तक जनता के समक्ष रखे और सबकी राय के बाद ही महिला आरक्षण को लागू किया जाये।</p>
<p>कांग्रेस के शशि थरूर ने कहा कि विधायिका में महिला आरक्षण की व्यवस्था को तुरंत लागू किया जाये, इसे परिसीमन से जोड़कर क्यों रखा जा रहा है।उन्होंने कहा कि राज्यों की बढ़ने का जो सूत्र बताया गया है, उसे बदला भी जा सकता है। थरूर ने कहा कि लोक सभा में 850 सीटें हो जाने से यह बड़ी बोझिल हो जायेगी, कार्यवाही का संचालन बहुत दुष्कर हो जायेगा। प्रश्न काल और शून्य काल में सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का मौका कैसे मिलेगा। उन्होंने कहा,"हमें ऐसा सूत्र बनाना चाहिए जिससे छोटे-छोटे राज्य भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व कर सकें। हितधारकों और राज्यों के साथ व्यापक परामर्श करके सीटों का निर्धारण किया जाना चाहिए। ऐसी क्रियाविधि अपनायी जाये जिससे नया भारत आपस में विभाजित न हो।" उन्होंने कहा कि केरल और तमिलनाडु जैसे दक्षिण के राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में महती योगदान दिया है और ये राज्य केन्द्र को तुलनात्मक रूप से अधिक राजस्व देते हैं जिससे केन्द्र सरकार चलती है।</p>
<p>ऐसी स्थिति में इन राज्यों के साथ लोक सभा सीटों के मामले में अन्याय न हो, इसके विधायी प्रावधान किये जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि वह सरकार से कहते हैं, "कृपया देश हित में दूरदृष्टि रखें, छोटे-छोटे लाभ न देखें।" वाईएसआरसीपी के पी वी मिधुन रेड्डी ने चर्चा में शामिल होते हुए कहा कि परिसीमन प्रक्रिया में सभी दलों का प्रतिनिधित्व होना चाहिए। विपक्षी दलों को नुकसान पहुंचाने का कार्य नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों के लिए कड़े कानून बनाये जायें। महिलाओं का सशक्तीकरण तभी हो सकता है जब उनकी सुरक्षा के लिए कड़े कानून बनाये जायेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 17:34:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राज्य में जनगणना-2027 का मकान सूचीकरण 16 मई से 14 जून तक, कार्य की तिथियां जारी</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य सरकार ने भारत जनगणना-2027 के प्रथम चरण के मकान सूचीकरण की तिथियां घोषित कर दी हैं। राज्य में यह कार्य 16 मई से 14 जून 2026 तक होगा। नागरिकों को 1 मई से 15 मई 2026 तक स्व-गणना का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा। यह प्रक्रिया जनगणना अधिनियम, 1948 और नियम 1990 के अंतर्गत संपन्न कराई जाएगी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/house-listing-work-of-census-2027-in-the-state-continues-from/article-140496"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/secretariat.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य सरकार ने भारत की जनगणना-2027 के प्रथम चरण के तहत मकान सूचीकरण कार्य की तिथियां निर्धारित कर दी हैं। सांख्यिकी विभाग से जारी अधिसूचना के अनुसार राज्य में मकान सूचीकरण का कार्य 16 मई 2026 से 14 जून 2026 तक संपन्न कराया जाएगा। यह कार्य जनगणना अधिनियम, 1948 तथा जनगणना नियम, 1990 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए किया जाएगा।</p>
<p>अधिसूचना में बताया गया है कि केंद्र सरकार द्वारा जनगणना नियम 1990 के नियम 6(क) और 6(घ) के साथ पठित जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 3 एवं 17 के तहत भारत की जनगणना-2027 से संबंधित मकान सूचीकरण का कार्य 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 के बीच सभी राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों में किया जाना है। प्रत्येक राज्य एवं संघ राज्य क्षेत्र द्वारा विनिर्दिष्ट 30 दिनों की अवधि में यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी।</p>
<p>इसके साथ ही नागरिकों को स्व-गणना का विकल्प भी उपलब्ध कराया जाएगा। राज्य में स्व-गणना की प्रक्रिया 1 मई 2026 से 15 मई 2026 तक संचालित की जाएगी, जो घर-घर जाकर होने वाले मकान सूचीकरण से पूर्व की अवधि होगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Jan 2026 15:42:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>देश में पहली बार होगी डिजिटल जनगणना : मोदी कैबिनेट ने मंजूर किए 11,718 करोड़ रुपए, 2 चरणों में होगी</title>
                                    <description><![CDATA[पहला चरण हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच होगी, वहीं दूसरा चरण जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में होगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/digital-census-will-be-done-for-the-first-time-in/article-135807"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/etws-(1200-x-600-px)-(7).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। देश के इतिहास में पहली बार पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी। मोदी कैबिनेट ने पहली डिजिटल जनगणना के लिए 11,718.24 करोड़ रुपए के बजट को मंजूरी प्रदान कर दी है। सूत्रों के मुताबिक डिजिटल जनगणना में एक व्यक्ति की जनगणना पर सरकार के करीब 97 रुपए खर्च होंगे। पहला चरण हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच होगी, वहीं दूसरा चरण जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में होगा। </p>
<p><strong>बर्फ से ढके इलाकों में एक अक्टूबर 2026 से होगी</strong><br />केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि जनगणना की संदर्भ तिथि एक मार्च 2027 को होगी। बर्फ से ढके क्षेत्रों के लिए यह तिथि एक अक्टूबर 2026 को होगी। जनगणना 2027 दो चरणों में आयोजित की जाएगी, पहले चरण में मकान सूचीकरण और आवास जनगणना  होगी, इसे अप्रैल से सितंबर 2026 तक अंजाम दिया जाएगा। दूसरे चरण में जनसंख्या की गिनती होगी, यह फरवरी 2027 से शुरू होगी।</p>
<p><strong>30 लाख लोग देंगे अंजाम, करेंगे काम</strong><br />वैष्णव ने बताया कि डिजिटल जनगणना में लगभग 30 लाख कार्यकर्ता शामिल होंगे और 1.02 करोड़ मानव दिवस का रोजगार सृजित होगा। उन्होंने बताया कि इस बार स्व गणना का भी विकल्प प्रदान किया जाएगा। जनगणना-एक-सेवा विभिन्न मंत्रालयों/राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों को उपयोगकर्ता के अनुकूल, मशीन पठनीय और कार्रवाई योग्य प्रारूप में डैशबोर्ड जैसी सुविधाओं के साथ डेटा उपलब्ध कराएगी। जनगणना के दौरान प्रचार अभियान चलाया जाएगा। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Dec 2025 10:55:25 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>2027 में होगी देश की सबसे बड़ी जनगणना, दो चरणों में जुटेंगे मकानों से लेकर जनसंख्या तक के आंकड़े</title>
                                    <description><![CDATA[जनगणना कार्य निदेशालय, राजस्थान को ओर से मंगलवार को जनगणना से जुड़ी जानकारी देने के लिए प्रेसवार्ता का आयोजन किया गया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/in-2027-the-countrys-largest-census-will-gather-in-two/article-123367"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/oer-(1)1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जनगणना कार्य निदेशालय, राजस्थान को ओर से मंगलवार को जनगणना से जुड़ी जानकारी देने के लिए प्रेसवार्ता का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आयोजना, सांख्यिकी विभाग के प्रमुख शासन सचिव भवानी सिंह देथा ने जनगणना के कार्यों की जानकारी लोगों तक पहुंचाने और सूचना देने के लिए आधिकारिक व्हाट्सऐप चैनल का लोकार्पण किया। </p>
<p>निदेशक जनगणना कार्य बिष्णु चरण मल्लिक ने बताया कि  समस्त प्रशासनिक इकाइयों यथा जिलों, उपखंड, तहसीलों, कस्बों, राजस्व ग्रामों, शहरी निकायों आदि की सीमाओं में किसी भी प्रकार का परिवर्तन 31 दिसंबर, 2025 के पश्चात नहीं किया जाए। जब तक जनगणना 2027 का कार्य पूरा नहीं हो जाता। उन्होंने बताया कि जनगणना 2027 दो चरणों में पूरी होगी। </p>
<p>पहला चरण: अप्रैल से सितंबर 2026<br />जनगणना निदेशक विष्णु चरण मल्लिक ने जानकारी दी कि देश की अगली जनगणना 2027 में दो चरणों में की जाएगी। पहले चरण का आयोजन अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच होगा। इस चरण में मकानों की सूची तैयार की जाएगी और संपत्तियों का विस्तृत विवरण दर्ज किया जाएगा। इसका उद्देश्य आधारभूत ढांचा और आवासीय स्थिति का सटीक आंकलन करना है।</p>
<p>दूसरा चरण: 1 मार्च 2027 से शुरू<br />दूसरे चरण की शुरुआत 1 मार्च 2027 से होगी, जिसमें व्यक्तियों की जनगणना की जाएगी। इस दौरान 28 फरवरी 2027 तक हुए जन्म और मृत्यु के आंकड़े भी दर्ज किए जाएंगे, ताकि जनसंख्या का सही और अद्यतन डेटा प्राप्त हो सके।</p>
<p>जनगणना निदेशक ने कहा कि यह जनगणना देश की सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय स्थिति की सटीक तस्वीर पेश करेगी। इससे सरकार को योजनाओं के निर्माण, संसाधनों के वितरण और विकास नीतियों के निर्धारण में मदद मिलेगी। अधिकारियों के अनुसार, यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और तकनीकी साधनों के सहारे संपन्न की जाएगी, जिससे आंकड़ों की विश्वसनीयता सुनिश्चित हो सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Aug 2025 17:51:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>देश में अगले साल शुरू होगी जनगणना, जातीय और संप्रदाय आधारित आंकड़ों को भी शामिल करने पर विचार</title>
                                    <description><![CDATA[2028 तक परिसीमन प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य है, जिससे लोकसभा सीटों का पुनर्विन्यास किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/census-will-start-next-year-in-the-country-consideration-of/article-94088"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/census.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत में हर दस साल में होने वाली जनगणना को लेकर मोदी सरकार पहल करने वाली है। सूत्रों की मानें तो मोदी सरकार 2025 में जातिगत जनगणना की शुरुआत कर सकती है, यह जनगणना 2026 तक चलेगी।  सूत्रों के अनुसार, इस बार जनगणना डिजिटल माध्यम से होगी, जिसमें आंकड़े एक विशेष पोर्टल के जरिए संकलित किए जाएंगे, यह पहली बार है जब जनगणना में डिजिटल प्रक्रिया अपनाई जा रही है। सरकार ने इस पोर्टल में जातिवार आंकड़े एकत्रित करने का भी प्रावधान रखा है।</p>
<p><strong>2028 तक परिसीमन प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य</strong><br />2028 तक परिसीमन प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य है, जिससे लोकसभा सीटों का पुनर्विन्यास किया जाएगा। यह जनगणना न केवल देश की जनसंख्या और विविधताओं का अद्यतन चित्र प्रस्तुत करेगी, बल्कि विभिन्न समुदायों की जरुरतों को समझने में भी मदद करेगी। </p>
<p><strong>...ताकि नहीं हो कोई मतभेद</strong><br />केंद्र सरकार ने फिलहाल जनगणना के साथ जातिवार जनगणना कराने को लेकर औपचारिक फैसला नहीं किया है, लेकिन विपक्ष की ओर से जातिवार जनगणना को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश को देखते हुए मोदी सरकार जातिवार जनगणना कराने का फैसला ले सकती है क्योंकि सरकार भी चाहती है कि एक तो इस मुद्दे पर एनडीए में कोई मतभेद न हो साथ ही सभी धर्मों की आबादी में मौजूद जाति व्यवस्था की जड़ों का भी पता चल सके, फिर अगर आरक्षण सहित किसी भी सुविधा के लिए कोई विशेष योजना चलानी हो तो ट्रिपल टेस्ट का पहला और अहम टेस्ट इसी मुहिम के साथ पूरा हो जाएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Oct 2024 10:46:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>देश में कराई जाए जाति जनगणना : चिराग पासवान</title>
                                    <description><![CDATA[इससे सरकार के पास वंचितों, कमजोरों के वास्तविक आंकड़े सामने आएंगे। उन्होंने कहा कि आंकड़े सार्वजनिक करने की जरूरत नहीं है, लेकिन सरकार के पास इसके आंकड़े होने चाहिए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/caste-census-should-be-conducted-in-the-country--says-paswan/article-88639"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/1rer-(6)4.png" alt=""></a><br /><p>रांची। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के लगातार दूसरी बार राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री चिराग पासवान ने देश में जाति जनगणना कराए जाने पर बल देते हुए कहा कि इससे योजना बनाने में केंद्र और राज्य सरकार को सहूलियत होगी। पासवान ने कहा कि केंद्र, राज्य के स्तर से कमजोर, वंचित वर्ग के लाभ के लिए योजनाएं बनाई जाती है।</p>
<p>उनकी पार्टी चाहती है कि देश में जातीय जनगणना हो। इससे सरकार के पास वंचितों, कमजोरों के वास्तविक आंकड़े सामने आएंगे। उन्होंने कहा कि आंकड़े सार्वजनिक करने की जरूरत नहीं है, लेकिन सरकार के पास इसके आंकड़े होने चाहिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 26 Aug 2024 14:08:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>लंबित जनगणना तत्काल करवाने की आवश्यकता</title>
                                    <description><![CDATA[किसी भी जनगणना में जुटाए आंकड़े शासन- प्रशासन, योजनाओं और नीतियों के निर्माण के साथ-साथ इनके प्रबंधन में भी बेहद सहायक होते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/there-is-a-need-to-get-the-pending-census-done/article-83829"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/u1rer-(16)3.png" alt=""></a><br /><p>दरअसल,  हमारे देश की 16वीं जनगणना 2021 में होनी थी। लेकिन, कोविड-19 की वजह से 2021 में भारत की जनगणना नहीं हुई। कोरोना महामारी के बाद से लगातार जनगणना को टाला गया। अब महामारी का असर न्यूनतम हुए दो वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन जनगणना के मोर्चे पर कोई प्रगति होती नहीं दिख रही है। ताजा जानकारी के मुताबिक, जनगणना कराने को लेकर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि पिछले 150 वर्षों में यह पहली दफा हुआ है कि जनगणना का कार्य स्थगित किया गया हो। बता दें कि भारत उन 120 देशों में शामिल है जिन्होंने महामारी का हवाला देकर जनगणना के कार्य को स्थगित किया। हालांकि भारत के कई पड़ोसी देशों मसलन चीन, बांग्लादेश और नेपाल ने महामारी के दौरान भी जनगणना की है। भारत उन 44 देशों में शामिल है जिन्होंने अब तक जनगणना नहीं की है। ऐसा करने वाले अन्य देशों में यमन, म्यांमार, यूक्रेन, श्रीलंका अफगानिस्तान तथा सबसहारा अफ्रीका के देश शामिल हैं जो किसी न किसी तरह के संकट से जूझ रहे हैं। अमेरिका में कोरोना पीक पर होने के बावजूद 2020 में जनगणना कराई गई। इसी तरह से यूके, इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और आयरलैंड में अलग- अलग एजेंसियों ने कोरोना लहर के दौरान तय समय पर जनगणना के लिए डेटा जुटाना शुरू कर दिया था। अब इन देशों की एजेंसियां डेटा को व्यवस्थित करके इसका एनालिसिस कर रही हैं। पड़ोसी देश चीन ने भी अपने यहां कोरोना महामारी के दौरान तय समय पर जनगणना का कार्य संपन्न किया। लिहाजा,यह कहा जा सकता है कि जनगणना का कार्य हमारी प्राथमिकता में नहीं रहा,अन्यथा जनगणना को तय समय पर करवाया जा सकता था। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक, भारत की आबादी चीन से अधिक हो चुकी है और 1.4 अरब लोगों के साथ हम दुनिया में सबसे बड़ी आबादी वाले देश बन चुके हैं। विडंबना यह है कि भारत सरकार के पास आबादी को लेकर कोई नई आधिकारिक जानकारी नहीं है। जनगणना को बार- बार स्थगित किए जाने के बीच भारत की आधिकारिक आबादी अभी भी 1.2 अरब है। ऐसे में, हर दशक होने वाली जनगणना को तत्काल शुरू करवाने की दिशा में कदम बढ़ाने होंगे। आज हमें जनगणना को तय समय पर करवाने के पीछे की अहमियत को समझने की आवश्यकता है। दरअसल, किसी भी मुल्क के लिए जनगणना कई मायनों में महत्त्वपूर्ण है। किसी एक मुल्क के विकास का पैमाना तय करने में जनगणना की उपयोगिता बढ़ जाती है। जनगणना उस प्रक्रिया को दिया जाने वाला नाम है, जो न केवल किसी मुल्क के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और जनसंख्या आदि के बारे में जानकारी उपलब्ध करवाती है, बल्कि देश की विविधता और इससे जुड़े अन्य पहलुओं का अध्ययन करने का अवसर भी प्रदान करती है। जनगणना वह माध्यम है, जिसके द्वारा नागरिकों को अपने समाज, जनसांख्यिकी, अर्थशास्त्र, मानव जीवन, समाजशास्त्र, सांख्यिकी आदि द्वारा उन समस्त के बारे में अपडेट देती है, जो उनके जीवन को प्रत्यक्ष या फिर परोक्ष रूप से प्रभावित करते हैं। इसके अलावा भी जनगणना के आंकड़े कई मायनों में बेहद  महत्त्वपूर्ण हैं। केंद्र और राज्य सरकारों के लिए योजना और नीति- निर्धारण में बहुमूल्य जानकारी साझाकरण का कार्य जनगणना के आंकड़े ही करते है। वहीं, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं, विद्वानों, व्यापारियों, उद्योगपतियों के साथ- साथ अन्य कई लोगों द्वारा व्यापक रूप से आंकड़े उपयोग में लिए जाते हैं। जनगणना को आंकड़ों का एक व्यापक स्रोत माना जाता है। इसके अन्तर्गत ही किसी मुल्क की जनसांख्यिकी लाभांश के बारे में जानकारी इकट्ठा की जाती है। जो मुल्क की नीति निर्माण को पूवार्नुमान की सटीकता के समीप ले जाती है। किसी भी मुल्क के साक्ष्य आधारित निर्णयों में इसका महत्त्व और अधिक बढ़ जाता है।</p>
<p>किसी भी जनगणना में जुटाए आंकड़े शासन- प्रशासन, योजनाओं और नीतियों के निर्माण के साथ-साथ इनके प्रबंधन में भी बेहद सहायक होते हैं। किसी क्षेत्र विशेष के विकास के लिए आवश्यक निर्णयन में जनगणना से प्राप्त आंकड़ों की भागीदारी बढ़ जाती है। इसका महत्त्व इसलिए भी है,क्योंकि समाज के सबसे निचले तबके के लोगों को ध्यान में रखते हुए सरकारी कार्यक्रमों के संचालन और उनकी सफलता को सुनिश्चित किया जाता है।  यह न केवल जनसंख्या की वृद्धि के आकलन के लिए बेहद महत्त्वपूर्ण है, बल्कि पेयजल, स्वच्छता, आवास और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के आकलन के लिए भी अहम है। जनगणना को राजनीतिक फैसलों, आर्थिक निर्णयों एवं विकास लक्ष्यों के लिहाज से भी जरूरी समझा जाता है। लिहाजा, जनगणना-2021 की प्रक्रिया को अतिशीघ्र शुरू किया जाना चाहिए। केंद्र सरकार का आॅनलाइन मोड में जनगणना करवाने का फैसला एक बेहतरीन निर्णय साबित होगा। साथ ही, डिजिटल जनगणना से भारत की सूचना प्रौद्योगिकी शक्ति की प्रतिष्ठा और बढ़ेगी। </p>
<p><strong>-अली खान</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jul 2024 11:28:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>जनगणना कराने में हो रही देरी पर कांग्रेस ने साधा निशाना- मोदी सरकार जनगणना करवाने में विफल</title>
                                    <description><![CDATA[ कांग्रेस ने जनगणना नहीं कराने को लेकर मोदी सरकार पर हमला करते हुए आज कहा कि आजादी के बाद से देश में नियत समय पर लगातार होने वाली जनगणना कराने में वह विफल रही है ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congress-targeted-the-delay-in-conducting-the-census-modi/article-56596"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/jairam_ramesh-sixteen_nine.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने जनगणना नहीं कराने को लेकर मोदी सरकार पर हमला करते हुए आज कहा कि आजादी के बाद से देश में नियत समय पर लगातार होने वाली जनगणना कराने में वह विफल रही है और उसे राज्यों सरकारों द्वारा कराए जाने वाली जातीय गणना के काम का इस विरोध नहीं करना चाहिए।</p>
<p>कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश द्वारा जारी एक बयान में कहा कि मोदी सरकार 2021 में होने वाली दशकीय जनगणना कराने में विफल रही है जबकि इंडोनेशिया, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे अन्य कई विकासशील और जी-20 की सदस्य के देश कोविड -19 के बावजूद जनगणना कराने में कामयाब रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत अपनी बारी से अनुसार 18वें जी-20 की अध्यक्षता कर रहा है लेकिन मोदी सरकार ने नियत समय पर जनगणना नहीं करा सकी और यह उसकी बड़ी विफलताओं में से एक है। यह सरकार इतनी अयोग्य और अक्षम है कि वह 1951 से तय समय पर होने वाली भारत की सबसे महत्वपूर्ण सांख्यिकीय प्रक्रिया को पूरा करने में असमर्थ रही है। आ•ााद भारत के इतिहास में यह सरकार की सबसे बड़ी और अभूतपूर्व विफलता है।</p>
<p>प्रवक्ता ने कहा कि मोदी सरकार न केवल जनगणना कराने में विफल रही है बल्कि इसने 2011 में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार द्वारा कराई गई सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना को भी दबा दिया है। इसने उच्चतम न्यायालय में बिहार सरकार के राज्य-स्तरीय जाति जनगणना के प्रयास का भी विरोध किया है और इस तरह के प्रयास का विरोध नहीं करना चाहिए।</p>
<p>उन्होंने एक पत्रिका में सभी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इस विफलता के कारण एक अनुमान के अनुसार 14 करोड़ भारतीयों को उनके भोजन के अधिकार से वंचित कर दिया है। इसके तहत  67 प्रतिशत भारतीय भोजन के लिए राशन पाने के हक़दार हैं। चूंकि मोदी सरकार 2021 में जनगणना कराने में विफल रही, इसलिए यह 2011 की जनगणना के आधार पर केवल 81 करोड़ लोगों को खाद्य सुरक्षा मिल पा रही है। </p>
<p>कांग्रेस नेता नेता ने जाति जनगणना को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि आबादी की गिनती, वर्गीकरण और ओबीसी की बहुसंख्यक आबादी के स्पष्ट विवरण के बिना सभी भारतीयों के लिए विकास और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना असंभव है। सबको न्याय और उनके अधिकार सुनिश्चित हों इसके लिए जाति जनगणना को आवश्यक बताते हुए उन्होंने कहा कि जनगणना और राष्ट्रीय जाति जनगणना हो और राज्यों के स्तर पर हो रहे जाति जनगणना के प्रयासों का विरोध करना बंद करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Sep 2023 14:35:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>2024 लोकसभा चुनाव के बाद ही होगी जनगणना </title>
                                    <description><![CDATA[अब जब भी जनगणना होगी, वह डिजिटली की जाएगी। यह देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/census-will-be-held-only-after-2024-lok-sabha-elections/article-47013"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/z-73.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। 2021 की जनगणना अब लोकसभा चुनाव के बाद ही होगी। सरकार ने अभी तक जनगणना के नए कार्यक्रम की घोषणा नहीं <br />की है। 2024 के लोकसभा चुनाव अप्रैल-मई में होने हैं। उससे पहले कर्मचारियों को वोटर लिस्ट अपडेट करनी है। ऐसे में जनगणना का काम शुरू होना संभव नहीं है। अब जब भी जनगणना होगी, वह डिजिटली की जाएगी। यह देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी। इसमें लोगों से 31 सवाल पूछे जाएंगे। जनगणना का काम कोरोना महामारी के कारण पहले अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 May 2023 10:03:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्व जनसंख्या दिवस और जनगणना</title>
                                    <description><![CDATA[विश्व में तेजी से बढ़ती आबादी और इससे जुड़ी समस्याओं पर ध्यान आकर्षित करन के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से वर्ष 1989 से 11 जुलाई विश्व जनसंख्या दिवस मनाए जाने की घोषणा की गई थी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/world-population-day-and-census/article-14054"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/world-population-day-new.jpg" alt=""></a><br /><p>विश्व में तेजी से बढ़ती आबादी और इससे जुड़ी समस्याओं पर ध्यान आकर्षित करन के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से वर्ष 1989 से 11 जुलाई विश्व जनसंख्या दिवस मनाए जाने की घोषणा की गई थी। आबादी के अन्तर्गत विशेष नंबर पर जन्में शिशुओं को अन्तरराष्ट्रीय संस्था की ओर से विशेष सम्मान की परम्परा रही है। दरअसल, 11 जुलाई 1987 को तत्कालीन यूगोस्लाविया के जागरेख में मातेज गैसकर को पांच अरब की संख्या वाला बच्चा माना गया। विचार-विमर्श के क्रम में दो वर्ष पश्चात 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस के रूप में मनाने की परम्परा आरंभ हुई। जनसंख्या दिवस मनाए जाने के साथ-साथ जनगणना का विशिष्ट महत्व हैं जनगणना से किसी भी देश की कमोबेश वास्तविक जनसंख्या का तथ्यात्मक आंकलन किया जाता है। देश की समूची जनसंख्या एवं उसकी जनांकिकीय विशिष्टताओं के प्रतीक रूप में जनगणना की मान्यता है।</p>
<p>इससे शासन-प्रशासन को विशेष रूप से सामाजिक, आर्थिक एवं क्षेत्रीय नियोजन तथा नीति संबंधी निर्णय लेने के लिए आवश्यक सूचनाएं उपलब्ध होती है। दूसरे अर्थों में दस साल के अन्तराल में की जाने वाली जनगणना में समूची जनसंख्या का अगणक एवं आयु, लिंग, भाषा, शिक्षा, रोजगार प्रवास, परिवार का आकार, प्रजननशीलता, आमदनी, व्यवसाय, धर्म एवं जाति के अनुसार उसके वितरण के संदर्भ में व्यापक जानकारी प्राप्त की जाती है। जनगणना से संबंधित तैयारियां आधार वर्ष से तीन वर्ष पहले प्रारंभ की जाती है। मकान सूचीकरण तथा मकानों की गणना परिवार अनुसूची तथा जनगणना का प्रगणन काल इत्यादि विभिन्न कदम निर्धारित समय चक्र के अनुसार उठाए जाते हैं। जनगणना के लिए व्यापक प्रशासन तंत्र की व्यवस्था की जाती है।</p>
<p><br />भारत में प्राचीन काल में कई सुव्यवस्थित राज्यों में जनगणना की जाती थी। चाणक्य के अर्थशास्त्र ग्र्रंथ में चन्द्रगुप्त मौर्य एवं सम्राट अशोक के शासनकाल में इसके प्रमाण उपलब्ध हैं। इसी प्रकार शेरशाहसूरी तथा मुगल काल के दौरान समय की शासन व्यवस्था और आवश्यकतानुसार जनगणना कार्य प्रचलन में था। ब्रिटिश शासन में 1872 में अलग-अलग समय पर विभिन्न राज्यों में जनगणना की गई। इसमें एकरूपता का अभाव था। इसलिए 1881 से जनगणना का काम विधिवत तौर पर आरंभ हुआ और दस वर्ष के अंतराल पर नियमित रूप से जनगणना की जाने लगी। वर्ष 1931 में भारत में पहली बार जाति धर्म आधार पर की गई जनगणना के आंकड़े सार्वजनिक किए गए थे। द्वितीय विश्व युद्ध के चलते 1941 में निर्धारित समय पर जनगणना नहीं हो सकी। यूपीए सरकार के समय जातीय आधार पर जनगणना कराने के निर्णय पर काफी बावेला मचा।स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात 1951 में पहली जनगणना करवाई गई थी। जनगणना का कार्य दो चरणों में किया जाता है। जनगणना दशक वर्ष के आरंभ से करीब छ: माह पूर्व प्राय: अप्रैल से जून माह की अवधि में राज्यों तथा संघ राज्य क्षेत्रों में मकान नंबर एवं सूचीकरण का कार्य सम्पन्न किया जाता है।</p>
<p>दूसरे चरण में फरवरी माह में जनगणना की गणना का कार्य होता है। जन्म और मृत्यु संबंधी आंकड़ों के साथ जनगणना से संबंधित सारणियां तैयार कर उनका विश्लेषण किया जाता है। कोरोना वायरस की वैश्विक महामारी से भारत में दशकीय जनगणना से संबंधित क्रियाकलापों पर विपरीत प्रभाव हुआ है। लेकिन जनगणना का कार्य तो सम्पन्न किया जाना है। स्वाभाविक रूप से इसके समय चक्र में काफी फेरबदल किया जाना है। इस बार की जाने वाली गणना में तथा आंकड़ों में संकलन के लिए मोबाइल एप का विशेष प्रयोग किया जाएगा। जनगणना कार्य की निगरानी और प्रबंधन पोर्टल की व्यवस्था की गई है। जनगणना से संबंधित लगभग 60 प्रतिशत कार्य आॅनलाईन किया जाना है। जनगणना कानून 1948 एवं जनगणना नियम 1990 जनगणना के लिए वैधानिक फ्रेमवर्क उपलब्ध कराता है। नागरिक कानून 1955 तथा नागरिकता नियम 2003 के अन्तर्गत राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) पहली बार 2010 में तैयार किया गया था। इसे आधार कार्ड से जोड़ने के पश्चात 2015 में अपडेट किया गया। केन्द्र सरकार ने गत 24 दिसंबर को जनगणना कार्य की मंजूरी दी। जनगणना कार्य पर 8754-23 करोड़ रुपये तथा राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (असम को छोड़कर) के लिए 3941.45 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।जनगणना कार्य सोलह भाषाओं में किया जाएगा।</p>
<p>जनगणना प्रगणक इकतीस प्रश्नों के माध्यम से हर परिवार के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। लगभग तीस लाख कार्मिकों को इस कार्य में जुटाया जाएगा। जनगणना प्रश्नावली से मकान की स्थिति, पानी, बिजली, शौचालय, टेलीफोन, इंटरनेट, मोबाईल, लेपटॉप, वाहन, रसोई गैस, बैंक खाता इत्यादि सूचनाएं प्राप्त की जाएंगी। इनसे प्राप्त आंकड़ों के विश्लेषण से सामाजिक आर्थिक स्थिति का सहज संकलन हो सकेगा। विश्व में तेजी से बढ़ रही आबादी तथा संसाधनों की उपलब्धता में कमी है, हालात भयावह हो रहे हैं। इसलिए हमें जनसंख्या स्थिरीकरण और स्थायी विकास के लक्ष्य की दिशा में अग्र्रसर होना है। भारत में प्राचीन काल में कई सुव्यवस्थित राज्यों में जनगणना की जाती थी। चाणक्य के अर्थशास्त्र ग्र्रंथ में चन्द्रगुप्त मौर्य एवं सम्राट अशोक के शासनकाल में इसके प्रमाण उपलब्ध हैं। इसी प्रकार शेरशाहसूरी तथा मुगल काल के दौरान समय की शासन व्यवस्था और आवश्यकतानुसार जनगणना कार्य प्रचलन में था। ब्रिटिश शासन में 1872 में अलग-अलग समय पर विभिन्न राज्यों में जनगणना की गई।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Mon, 11 Jul 2022 15:57:43 +0530</pubDate>
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