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                <title>damaged roads - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>damaged roads RSS Feed</description>
                
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                <title>जानलेवा सड़कें, कब थमेगा यह सिलसिला</title>
                                    <description><![CDATA[भारत की सड़कें आज मौत का दूसरा नाम बन चुकी हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/when-will-this-process-stop-with-deadly-roads/article-127410"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/images-(2)1.png" alt=""></a><br /><p>भारत की सड़कें आज मौत का दूसरा नाम बन चुकी हैं। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की 2023 की ताजा रिपोर्ट बताती है कि बीते साल देश में 4.8 लाख सड़क दुर्घटनाए हुईं, जिनमें1.73 लाख लोगों की मौत हो गई और 4.6 लाख लोग घायल हुए। औसतन हर घंटे 20 लोग सड़क पर दम तोड़ रहे हैं। यह आंकड़े सिर्फ संख्याएं नहीं, एक गंभीर राष्ट्रीय संकट का संकेत हैं। भारत में हर साल औसतन चार लाख से अधिक सड़क हादसे होते हैं, जिनमें लगभग दो लाख लोग जान गंवाते हैं। ये आंकड़े न सिर्फ बढ़ती जनसंख्या और वाहनों की संख्या का परिणाम हैं, बल्कि इसके पीछे कई जमीनी कारण भी हैं।</p>
<p><strong>तेज रफ्तार से वाहन चलाना :</strong></p>
<p>2023 में सड़क दुर्घटनाओं की 68प्रतिशत घटनाएं तेज गति के कारण हुईं। इससे 1.17 लाख मौतें दर्ज हुईं। तेज रफ्तार न केवल दुर्घटना की संभावना बढ़ाती है, बल्कि उसे अधिक घातक भी बना देती है। यातायात नियमों की अनदेखी करना हेलमेट और सीटबेल्ट न पहनना, रेड लाइट पार करना, गलत दिशा में गाड़ी चलाना,ये सभी नियमों का उल्लंघन घातक साबित होता है। रिपोर्ट बताती है कि बिना सीटबेल्ट के 16,000 से अधिक लोग और बिना हेलमेट के 54,500 से ज्यादा लोग मारे गए। शराब या ड्रग्स के प्रभाव में गाड़ी चलाना तथा मोबाइल फोन के उपयोग जैसे कारणों से भी गंभीर दुर्घटनाएं हो रही हैं। चालक की थकान या नींद भी एक बड़ा कारण बनती जा रही है।</p>
<p><strong>अनुशासनहीनता :</strong></p>
<p>अव्यवस्थित सड़के,खराब सड़कों की डिजाइन और रखरखाव। देश की कई सड़कें ब्लैक स्पॉट्स में बदल चुकी हैं। गड्ढे, तीखे मोड़ और जर्जर सड़कें जानलेवा साबित हो रही हैं। भारतीय कारों में सेफ्टी फीचर्स की कमी अब भी चिंताजनक है। एयरबैग, और मानकों का पालन कम होता है। बढ़ती जनसंख्या और वाहन संख्या से सड़कें भरी पड़ी हैं, जिससे अनुशासनहीनता बढ़ती है और हादसे आम हो जाते हैं। प्रशासनिक और नीतिगत कमजोरियां भी एक कारण है। यातायात कानूनों का कमजोर होना। कई राज्यों में ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं होता और पुलिस बल की संख्या या निगरानी प्रणाली अपर्याप्त है।</p>
<p><strong>जागरूकता का अभाव :</strong></p>
<p>आम नागरिकों में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता का अभाव है। उन्हें यह नहीं सिखाया गया कि हेलमेट, सीटबेल्ट या ड्राइविंग नियमों का पालन जीवन रक्षा के लिए कितना जरूरी है। दुर्घटनाओं का डेटा इकट्ठा करने और विश्लेषण करने की कोई मजबूत राष्ट्रीय प्रणाली नहीं है। इससे नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करना कठिन हो जाता है। 2023 की रिपोर्ट में सामने आया कि कुल सड़क हादसों में से लगभग दोहाई घटनाएं तेज गति से वाहन चलाने के कारण हुईं। तेज रफ्तार न केवल हादसे का कारण बनी, बल्कि इसकी घातकता भी बढ़ा दी। इसके साथ ही, गलत दिशा में वाहन चलाना और लेन अनुशासनहीनता से भी 9,432 मौतें हुईं। देश में अभी भी सुरक्षा उपकरणों का उपयोग गंभीरता से नहीं लिया जाता।</p>
<p><strong>सीसीटीवी निगरानी :</strong></p>
<p>एक रिपोर्ट में 16,000 से अधिक लोग बिना सीटबेल्ट के मारे गए। 54,500 से ज्यादा दोपहिया सवार बिना हेलमेट के जान गंवा बैठे। यह व्यक्तिगत लापरवाही के साथ-साथ कमजोर ट्रैफिक प्रवर्तन की ओर भी इशारा करता है। तेज रफ्तार न केवल दुर्घटनाओं को जन्म देती है, बल्कि उन्हें अधिक घातक बना देती है। राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर सीसीटीवी निगरानी हो,मोबाइल स्पीड कैमरों का उपयोग और नियमित प्रवर्तन को अनिवार्य बनाया जाए। कुछ राज्यों ने थोड़े बहुत सुधार किए हैं, जैसे केरल और आंध्र प्रदेश में मौतों में हल्की गिरावट दर्ज हुई है। वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और राजस्थान में मौतों में 5प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है।</p>
<p><strong>तेज रफ्तार :</strong></p>
<p>विशेषज्ञ मानते हैं कि इन राज्यों में तेज रफ्तार एक्सप्रेसवे और कमजोर ट्रैफिक नियंत्रण इस वृद्धि के बड़े कारण हैं। विशेष रूप से टियर-2 और टियर-3 शहरों में सड़कें सिर्फ मोटर वाहनों के हिसाब से बनाई जाती हैं। पैदल यात्रियों और साइकिल सवारों के लिए कोई सुरक्षित बुनियादी ढांचा नहीं होता। फुटपाथ, जेब्रा क्रॉसिंग, सिग्नलाइज्ड पैदल यात्री मार्ग या तो नहीं हैं या उपयोग में नहीं लिए जाते। यह उपेक्षा दुर्घटनाओं में वृद्धि का एक बड़ा कारण बनती जा रही है। भारत में सड़क सुरक्षा अब केवल एक प्रशासनिक मसला नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय आपात स्थिति बन चुकी है।</p>
<p><strong>कठोर कदम उठाएं :</strong></p>
<p>यदि तुरंत कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में भारत की सड़कें और अधिक रक्तरंजित और जानलेवा बन जाएंगी। इसके लिए जरूरी है कि गति सीमा का सख्त पालन हो, सीटबेल्ट और हेलमेट का अनिवार्य उपयोग करें, ब्लैक स्पॉट्स का पुनर्विकास होना,नशे में ड्राइविंग के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति, जन-जागरूकता अभियान और सड़क डिजाइन में वैश्विक सर्वोत्तम मानकों का समावेश। यदि हम अब भी नहीं चेते, तो हर दिन की ये 20 मौतें सिर्फ आंकड़े नहीं,बल्कि हमारे सिस्टम की असफलता का स्थायी प्रमाण बन जाएंगी।</p>
<p><strong>-प्रकाश चंद्र शर्मा</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Sep 2025 12:49:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का - बरसात शुरू होने से पहले करें क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत-जिला कलक्टर </title>
                                    <description><![CDATA[नवज्योति ने इस मामले को लेकर लोगों की समस्या को उजागर किया था। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---repair-damaged-roads-before-the-onset-of-rains---district-collector/article-117770"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer-(5)14.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिला कलक्टर डॉ. रविन्द्र गोस्वामी ने कहा कि सीवर लाइन, पाइप लाइन, भूमिगत केबल व अन्य कार्यों की वजह से रोड कटिंग के बाद सड़क की मरम्मत नहीं हुई है तो संबंधित कार्यकारी एजेंसी उसे बरसात से पहले ठीक करवा दें ताकि आमजन को किसी तरह की परेशानी नहीं हो।बरसात शुरू होने से पहले सभी क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत सुनिश्चित की जाए।  डॉ. गोस्वामी ने ये निर्देश मंगलवार को कलक्ट्रेट सभागार में साप्ताहिक समीक्षा बैठक के दौरान विभिन्न विभागों के कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए दिए। अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्राधिकार वाली सभी प्रकार की सड़कें जो कि रोड कटिंग या अन्य किसी कारण से क्षतिग्रस्त हैं, उनका निरीक्षण कर उनकी मरम्मत वर्षा  रितु से पहले करवाएं। </p>
<p><strong>नवज्योति ने चेताया था</strong><br />दैनिक नवज्योति ने इस मामले को लेकर दो दिन पहले 16 जून को ही समाचार प्रकाशित कर लोगों की समस्या को उजागर किया था। समाचार प्रकाशन के बाद प्रशासन का इस समस्या की ओर ध्यान गया। इसके बाद मीटिंग में जिला कलक्टर ने निर्देश जारी किए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Jun 2025 17:13:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रदेश में क्षतिग्रस्त सड़कों के सुधार के लिए 6 हजार करोड़ का प्रस्ताव, बारिश से पूर्व सही करने की कवायद</title>
                                    <description><![CDATA[मरूस्थलीय इलाकों में बड़ी दूरियां और कठिन भूगोल के कारण इन सड़कों का निर्माण विकास कार्यों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/for-improvement-of-damaged-roads-in-the-state-6-thousand/article-113432"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtrer-(1)36.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सार्वजनिक निर्माण विभाग ने वर्षा के कारण क्षतिग्रस्त सड़कों को पुनः सुधारने के लिए 6 हजार करोड़ रुपए की लागत से 21 हजार किमी. नॉन पेचेबल सड़कों का निर्माण कार्य कराने का प्रस्ताव रखा है। प्रथम चरण में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 10-10 करोड़ रुपये की लागत से सड़कों का निर्माण किया जाएगा। पश्चिमी राजस्थान के मरूस्थलीय क्षेत्रों में सड़कों की विशेष आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए 15-15 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि का प्रावधान किया गया है।</p>
<p>यह क्षेत्र थार मरुस्थल से आच्छादित है और इसमें बाड़मेर, बीकानेर, चूरू, जैसलमेर, जोधपुर, नागौर सहित 11 जिले और अनूपगढ़ शामिल हैं। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन को सुगम बनाना और स्थानीय विकास को गति देना है। मरूस्थलीय इलाकों में बड़ी दूरियां और कठिन भूगोल के कारण इन सड़कों का निर्माण विकास कार्यों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 May 2025 14:40:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बारिश से क्षतिग्रस्त सड़कों पर जल्द होगा निर्बाध यातायात : जेडीसी</title>
                                    <description><![CDATA[जेडीए आयुक्त आनंदी ने बताया कि क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत के लिए जोन वाईज कार्य योजना बनाने के लिए 14.73 करोड़ रुपए के कार्यादेश भी जारी कर दिए है और सभी जोनों में कार्य भी शुरू करवा दिए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jdc-there-will-be-uninterrupted-traffic-on-rain-damaged-roads/article-90821"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/27rtrer-(1)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शहर में लंबे समय पर हुई बारिश के चलते खस्ताहाल सड़कों पर अभी वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसको लेकर जयपुर विकास प्राधिकरण ने क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत का काम शुरू कर दिया है और जल्द ही आमजन को राहत मिल सकेगी। जेडीए आयुक्त आनंदी ने बताया कि क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत के लिए जोन वाईज कार्य योजना बनाने के लिए 14.73 करोड़ रुपए के कार्यादेश भी जारी कर दिए है और सभी जोनों में कार्य भी शुरू करवा दिए हैं।</p>
<p>जेडीए आयुक्त ने बताया कि जेडीए के अन्तर्गत आने वाली 60 फीट से ऊपर की मुख्य सड़कों को दीपावली से पूर्व पेचवर्क किया जाना प्रस्तावित है, इन सड़कों की मरम्मत के लिए लगभग 2 लाख 80 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में कार्य किया जाना है। बालाजी तिराहे से इन्दूणी फाटक, ट्रांसपोर्ट नगर से गलता गेट दिल्ली रोड, वन्देमातरम् रोड, टोंक रोड, जवाहर सर्किल के चारों ओर सड़कों पर कोल्डमिक्स एवं हॉट मिक्स डामर से पेच वर्क लगभग कर दिया गया है और जेएलएन मार्गभवानी सिंह रोड पर कार्य प्रगति पर है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Sep 2024 09:31:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोटा उत्तर वार्ड 51: करोड़ों के विकास कार्यों को धत्ता बताते वार्ड 51 के हालात</title>
                                    <description><![CDATA[शहर में करोड़ों के विकास कार्य करवाए जा रहे हंै लेकिन कोटा उत्तर वार्ड 51के निवासी मूलभूत सुविधाओं के लिए आज तक तरस रहे हैं। सड़कों की हालत खराब है । क्षेत्र में खाली पड़े भूखन्डों में या गदंगी और कचरे के ढ़ेर लगे हुए हैं या जानवरों ने डेरा जमाया हुआ है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-north-ward-51--the-condition-of-ward-51-shows-the-development-works-worth-crores/article-32727"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/ward-51--karoro-ke-vikas-kaaryo-ko-dhata-batate-ward-51-ke-haalat..kota-news...19.12.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। घरों के बाहर गाड़ियों पर कुछ ही मिनटों में जमी धूल की परतें, सड़कों से उड़ती धूल, अर्द्धनिर्मित नालों से निकलती बदबू से परेशान लोग। ये कहानी नहीं बल्कि हकीकत हैं कोटा उत्तर नगर निगम के वार्ड 51 के कुछ क्षेत्रों की। ये हालात तो तब है जब इस वार्ड का प्रतिनिधित्व निगम में पूर्व नेता प्रतिपक्ष और वर्तमान में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के शहर जिला उपाध्यक्ष अनिल सुवालका करते हैं। वार्ड 51 में थर्मल कॉलोनी, कुन्हाड़ी, संत तुकाराम सामुदायिक भवन, हनुमानगढ़ी तथा अम्बेडकर नगर आदि क्षेत्र आते हैं। इनमें से अम्बेडकर कॉलोनी तथा यूआईटी की ओर से आवंटित कॉलोनी तथा हनुमानगढ़ी क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि भले ही शहर में करोड़ों के विकास कार्य करवाए जा रहे हंै लेकिन हम तो मूलभूत सुविधाओं के लिए आज तक तरस रहे हैं। कुछ लोगों का तो ये भी कहना है कि हमें भाजपाई होने का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। दरअसल वार्ड 51 के इन क्षेंत्रों में सड़कों की हालात वास्तव में इतनी खराब है कि पैदल तक चलने में पैर मुड़ सकता है। कॉलोनियों में बनाये जा रहे नाले कई स्थानों पर खुले पड़े हुए हैं। इन खुले नालों से उठनी वाली बदबू के कारण यहां रहने वाले लोगों का जीना तक दुश्वार हो चुका है। क्षेत्र में खाली पड़े भूखन्डों में या गदंगी और कचरे के ढ़ेर लगे हुए हैं या जानवरों ने डेरा जमाया हुआ है। इन्ही क्षेत्रों में एक हनुमानगढ़ी में रहने वाले नागरिकों का कहना है कि उन्हे खुद के मकानों के पटटों के महीनों से निगम के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। वे जब भी निगम जाते हैं उन्हे कोई ना कोई बहाना बनाकर वापस भेज दिया जाता है। नियमानुसार पटटा आवंटन के दौरान लगी आपत्ति का निवारण 7 दिनों में हो जाना चाहिए था लेकिन कई माह बीत जाने के बाद भी ऐसा नहीं हुआ है। कई बार फोन पर सम्पर्क करने पर पार्षद अनिल सुवालका ने फोन नहीं उठाया।</p>
<p><strong>वार्डवासियों का कहना है</strong><br /> क्षेत्र के कई नालों का कार्य अधूरा छोड़ा हुआ है। लगभग सभी नाले खुले पड़े हैं। क्षेत्र में सफाई व्यवस्था बिल्कुल भी नहीं है। सफाई के नाम पर सफाईकर्मी धूल उड़ाकर चले जाते हैं। सफाई नहीं करते कचरा फैला रहता है। नालियां गंदगी से भरी पड़ी हैं।<br /><strong>- सुरेन्द्रराय सक्सेना, स्थानीय निवासी</strong></p>
<p> इलाके की गलियां खुदी पड़ी है। क्षेत्र के भाजपा से जुड़े लोगों के पट्टे नहीं बनाये जा रहे हैं। लोग जाते हैं तो उनको फटकार बाहर निकाल दिया जाता है। क्षेत्र में खाली पडेÞ प्लॉटों पर गंदगी के ढेÞर लगे हुए है। वार्ड में ना सफाई व्यवस्था है ना ही काई खुदी सड़कों की सुध लेने वाला।<br /><strong>- प्रहलाद  सिंह पंवार, वार्डवासी</strong></p>
<p>इस क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या इलाके में उड़ती धूल है। जिससे श्वास संबंधित बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है। पूरे क्षेत्र में गड़ढें हुए पड़े हैं। सड़के खोद दी गई लेकिन अब उनकी सुध नहीं ली जा रही है। घरों के बाहर गाड़ी खड़ा करना तक मुश्किल हैं।<br /><strong>-रामचन्द्र राठौड़, वार्डवासी।</strong></p>
<p> क्षेत्र की सड़कों को आज तक साफ नहीं देखा है। जब भी घर से निकलों धूल के गुबार नजर आते हंै। कितना ही मास्क या कुछ और डाल गा लो घूल तो जाती ही है। सड़कें खुदी हुई है। नालियां भरी हुई है। रोड साइड बने नालों को खुला छोड़ा हुआ है। जिससे दुर्घटना ही आशंका बनी रहती है। <br /><strong>-साक्षी सरोंजा, स्थानीय निवासी</strong></p>
<p> मैने 8 महीने पहले पट्टा प्राप्त करने के लिए रसीद कटवाई थी, किसी ने मई माह में आपत्ति दर्ज करवाई लेकिन उसका आज तक निस्तारण नहीं हुआ है। क्षेत्र में 15 साल पहले नालियां बनाई गई थी उसके बाद कभी नालियां नहीं बनी।<br /><strong>- जमादार सिंह, निवासी हनुमानगढ़ी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Dec 2022 14:41:04 +0530</pubDate>
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                <title>आकेड़ा डूंगर इंडस्ट्रियल एरिया में क्षतिग्रस्त सड़कें, व्यापारी परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[करोड़ों रुपए लेने के बाद भी नहीं हुआ विकास]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-damaged-roads-in-akera-dungar-industrial-area-traders-upset/article-17323"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/p-2.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। आकेड़ा डूंगर इंडस्ट्रियल एरिया में लोग निजी डवलपर एवं रीको अधिकारियों की आपसी लड़ाई में फंसे हुए हैं। क्षेत्र में जीर्ण-शीर्ण सड़कों की मरम्मत नहीं हो रही है। इसके लिए स्थानीय लोग रीको के अधिकारियों के बार-बार चक्कर काट रहे हैं।  आकेड़ा डूंगर इंडस्ट्रियल एरिया के महासचिव सुनील कुमार जैन एवं सेके्रटेरी निर्मल अग्रवाल ने बताया कि इस क्षेत्र का गठन नताशा हाउसिंग सोसायटी ने किया था। रिको द्वारा नक्शा पास हुआ और फिर रीको ने ही इसकी लीज डीड जारी की। रिको के लीज होल्ड जारी करने के बाद भी इस औद्योगिक एरिया में किसी भी तरह का कोई विकास नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार प्रदेश में उद्योगों का बढ़ावा देने के लिए बाहर के व्यापारियों को प्रमोट कर रही है। वहीं रीको के अधिकारी स्थानीय व्यापारियों की सुनवाई तक नहीं करते हैं। इस क्षेत्र में सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढ़े हो गए हैं। ऐसे में ट्रांसपोर्ट्स व्यापारियों का सामान लाने में आनाकानी करते हैं और लाते भी हैं तो उसके बदले किराया अधिक देना पड़ रहा है। इस संबंध में उन्होंने रीको के अधिकारियों के साथ ही जिला कलेक्टर को भी पत्र लिखकर सड़कों की मरम्मत कराने की मांग की है। <br /><br /><strong>करोड़ों रुपए लेने के बाद भी नहीं हुआ विकास</strong><br />अग्रवाल ने बताया कि रीको व्यापारियों से लीज डीड के करोड़ों रुपए ले चुका है और विकास के नाम पर कुछ भी काम नहीं कराया जा रहा है। आकेड़ा डूंगर इंडस्ट्रियल एरिया में सड़क, बिजली, पानी, नाली, बैंक जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं होने से उद्योग जल्द ही बंद होने के कगार पर हैं। इस क्षेत्र में कई एक्सपोर्ट यूनिटें भी हैं जो करोड़ों रुपए की विदेशी मुद्रा देश के लिए सृजित करती हैं और पांच हजार से अधिक परिवारों को रोजगार मुहैया कराती हैं।<br /><br />रीको इस एरिया को मैंटेन नहीं करता है, इसको एक निजी कम्पनी ने डवलप किया था। ऐसे में निजी कम्पनी को ही इसे मैंटेन करना चाहिए। यदि रीको को इसे डवलप करना है तो अभी ऐसे आदेश नहीं आए हैं। -<strong>महेन्द्र सिंह, सीनियर डीजीएम, रीको, वीकेआई, जयपुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Aug 2022 11:38:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>कोटा दक्षिण वार्ड 13: उधड़ी सड़कें दे रही जख्म, पैदल चलना भी जोखिम भरा</title>
                                    <description><![CDATA[आरयूआईडीपी द्वारा डाली जा रही सीवरेज पाइप लाइन कार्य ने कॉलोनियों की सूरत बिगाड़ रख दी। अच्छी भली सड़कों को उधेड़ रख दिया। जगह-जगह गहरे गड्ढे और उनमें भरा बरसाती पानी बाशिंदों को जख्म दे रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-south-ward-13-damaged-roads-are-giving-wounds--walking-too-risky/article-14066"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/ward-13--udhari-sadke-de-rahi-jakhm..kota.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। आरयूआईडीपी द्वारा डाली जा रही सीवरेज पाइप लाइन कार्य ने कॉलोनियों की सूरत बिगाड़ रख दी। अच्छी भली सड़कों को उधेड़ रख दिया। जगह-जगह गहरे गड्ढे और उनमें भरा बरसाती पानी बाशिंदों को जख्म दे रही है। बरसात के पानी की निकासी नहीं होने से कीचड़ व गंदगी की समस्या हो गई। वहीं, जलभराव होने से मच्छरजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया। बच्चों को घर से स्कूल पहुंचाना व वापस घर लाना काफी जोखिमभरा है। कोटा दक्षिण नगर निगम के वार्ड 13 के हालातों से दुखी बाशिंदोें ने कुछ इस तरह पीड़ा बयां की। <br /><br /><strong>यह है वार्ड क्षेत्र</strong> <br />विज्ञान नगर सेक्टर-8 व 7, विस्तार योजना, भट्टा बस्ती, नूरी जामा मस्जिद, संस्कृत स्कूल, अमन कॉलोनी, गणेश नगर।<br /><br /><strong>सुबह 9 बजे के बाद नहीं आता पानी</strong><br />सुबह 9 बजे के बाद नलों में पानी नहीं आता। मोटर चलाने पर ही पानी आता है। जलापूर्ति प्रेशर से नहीं होती। , एक बाल्टी भरने में ही आधे घंटे का समय लग जाता है। पार्षद को समस्या से अवगत कराया था। दूसरे मोहल्लों से पानी लाना पड़ता है। वहीं, सड़कों पर जगह-जगह गिट्टी फैली है। गिट्टियां उछलकर राहगीरों को चोटिल कर रही है। <br /><strong>- आशीष बंसल, विस्तार योजना निवासी</strong><br /><br /><strong>कॉलोनी में आवारा मवेशियों का जमावड़ा</strong><br />विज्ञान नगर की अमन कॉलोनी में इन दिनों आवारा मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है। इनमें श्वानों की समस्या अधिक हैं। शाम ढलते ही कॉलोनियों की सड़कों पर श्वानों का जमावड़ा लगना शुरू हो जाता है। बाइक सवारों के पीछे दौड़ते हैं। इनसे बचने के चक्कर में कई बार बाइकर्स गिरकर चोटिल हो जाते हैं। <br /><strong>- असलम अंसारी, अमन कॉलोनी निवासी</strong><br /><br />घ<strong>र से बाहर पैदल निकलना भी मुश्किल</strong><br />चार महीने से जगह-जगह गिट्टी-मिट्टी का ढेर लगा हुआ है। जलभराव होने से गड्ढे दिखाई नहीं देते। यहां से गुजरने के दौरान बाइक सवार दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। । ठेकेदारों को मलबा उठाने को कहा था लेकिन सुनवाई नहीं हुई। बच्चों को स्कूल पहुंचाने व वापस घर तक लाने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। वाहनों का मेंटिनेंस भी बढ़ रहा है।      <strong>- सरफराज अहमद, विस्तार योजना निवासी</strong><br /><br /><strong>नाला निर्माण अधूरा, सड़कों पर जमा गंदा पानी</strong><br />हनुमान मंदिर से सरकारी स्कूल तक नाले का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। कीचड़ फैला हुआ है। वहीं, पास में ही कचरा पाइंट है।  भोजन की तलाश में आवारा मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है ।  बदबू इतनी तेज रहती है कि यहां से गुजरना तक मुश्किल हो जाता है।  पानी की टंकी के पास गहरे गड्ढेÞ हो रहे हैं। बरसाती पानी भरा होने से हादसे हो रहे हैं। <br /><strong>- इरफान अंसारी, वार्ड 13 निवासी</strong><br /><br /><strong>सीवरेज काम पूरा होते ही नई सड़क बनाएंगे</strong><br />अभी सीवरेज लाइन डाले जाने का काम चल रहा है। पूरा होते ही नई सीसी सड़क बनाई जाएगी। विस्तार योजना में सामुदायिक भवन का जीर्णोंद्धार किया जा रहा है। वहीं, बरसाती पानी की निकासी के लिए नाले का निर्माण करवा रहे है। पूरे वार्ड में एक ही कचरा पाइंट है, जहां नगर निगम द्वारा लगाई गई ट्रैक्टर-ट्रॉली समय पर नहीं आती, जिससे कचरे का उठाव नहीं हो पाता।  निगम में शिकायत भी कर चुके हैं। वहीं, वार्ड में जहां अंधेरा रहता है वहां नई एलईडी लाइटें लगवाई है। <br /><strong>- शमा परवीन, पार्षद वार्ड 13</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 Jul 2022 16:40:38 +0530</pubDate>
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