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                <title>tenders - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>6 साल से सर्वे, लेकिन काम नहीं, फाइलों में कैद चंबल के बांधों का जीर्णोद्धार</title>
                                    <description><![CDATA[224 करोड़ की लागत से मिलेगा बांधों को नवजीवन।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/surveys-conducted-for-6-years--yet-no-work--restoration-of-chambal-dams-remains-trapped-in-files/article-148844"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)-(2)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। चंबल नदी पर बने प्रदेश के प्रमुख बांध कोटा बैराज, जवाहर सागर और राणाप्रताप सागर लंबे समय से जीर्णोद्धार की बाट जोह रहे हैं। इन बांधों के नवजीवन के लिए करोड़ों रुपए का बजट स्वीकृत हो चुका है। हर साल निविदाएं जारी होती हैं, लेकिन कार्य शुरू होने से पहले ही प्रक्रिया फिर किसी ने किसी कारण से अटक जाती है। जल संसाधन विभाग ने एक बार फिर करीब 224 करोड़ रुपए की लागत से तीनों बांधों के व्यापक जीर्णोद्धार के लिए निविदाएं आमंत्रित की हैं। पहले 27 मार्च तक अंतिम तिथि तय की गई थी, जिसे अब बढ़ाकर 15 अप्रैल कर दिया गया है। यह पहली बार नहीं है जब निविदा तिथि आगे बढ़ाई गई हो पिछले वर्षों में भी कई बार ऐसा हो चुका है।</p>
<p><strong>6 साल से सर्वे, लेकिन काम शून्य</strong><br />सूत्रों के अनुसार, इन बांधों के सुधार को लेकर पिछले 5-6 वर्षों से लगातार सर्वे और तकनीकी अध्ययन किए जा रहे हैं। राणा प्रताप सागर बांध के स्लूज गेट बदलने के लिए अंडरवाटर सर्वे तक पूरा हो चुका है। केंद्रीय जल आयोग सहित विभिन्न एजेंसियों के विशेषज्ञों ने भी निरीक्षण कर रिपोर्ट दी, लेकिन इसके बावजूद काम शुरू नहीं हो सका। विभागीय अधिकारियों के अनुसार 224 करोड़ रुपए की इस परियोजना में करीब 82.73 करोड़ रुपए सिविल कार्यों और 141.31 करोड़ रुपए हाइड्रो-मैकेनिकल कार्यों पर खर्च किए जाने प्रस्तावित हैं। तीनों बांधों के लगभग 50 गेट बदलने का भी प्रस्ताव है। इसके अलावा कंक्रीट संरचनाओं की मरम्मत, लीकेज रोकने और अन्य तकनीकी सुधार शामिल हैं।</p>
<p><strong>66 साल पुराने हो चुके बांध</strong><br />तीनों बांधों का निर्माण 1960 के दशक में हुआ था। उस समय की तकनीक आज के मानकों के अनुसार पुरानी हो चुकी है। विभागीय रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि गेट और मशीनरी की औसत उम्र 40-50 साल होती है, जबकि ये सिस्टम उससे कहीं अधिक समय से उपयोग में हैं। ऐसे में इन बांधों का जीर्णोद्धार होना बहुत जरूरी है। जीर्णोद्धार कार्य पूरा होने के बाद यह परियोजना चंबल नदी के तीनों बांधों को नया जीवन देगी, जिससे कोटा सहित पूरे हाड़ौती और प्रदेश के जल भविष्य को मजबूती मिलेगी। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यह पहली बार है जब चंबल के तीनों प्रमुख बांधों के गेट एक साथ बदले जाएंगे। इससे बांधों की सुरक्षा बढ़ेगी और आने वाले दशकों तक जल प्रबंधन सुचारू रहेगा।</p>
<p><strong>बार-बार की देरी बढ़ा रही चिंता</strong><br />विशेषज्ञों का मानना है कि इन बांधों के गेट और मशीनरी काफी पुरानी हो चुकी है। समय पर रखरखाव नहीं होने से खराबी की आशंका बनी रहती है।बरसात के दौरान जल दबाव बढ़ने पर जोखिम बढ़ सकता है। चंबल के ये तीनों बांध न केवल हाड़ौती क्षेत्र की जल आपूर्ति और सिंचाई व्यवस्था की रीढ़ हैं, बल्कि बिजली उत्पादन और बाढ़ नियंत्रण में भी अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में बार-बार की देरी चिंता का विषय बनती जा रही है। अब जरूरत इस बात की है कि कागजी प्रक्रियाओं से आगे बढ़कर जल्द से जल्द धरातल पर काम शुरू हो, ताकि भविष्य में किसी बड़े जोखिम से बचा जा</p>
<p><strong>इतनी राशि होगी खर्च</strong><br />-राणा प्रताप सागर बांध: 81.49 करोड़<br />-जवाहर सागर बांध: 75.94 करोड़<br />-कोटा बैराज: 66.62 करोड़</p>
<p>बांधों की मरम्मत के लिए निविदा आमंत्रित कर दी है। पूर्व में 27 मार्च तिथि निर्धारित की थी। जिसे बढ़ाकर 15 अप्रैल कर दिया गया है। इस साल के अंत तक कार्य प्रारंभ करने की योजना है।<br /><strong>-सुनील गुप्ता, अधीक्षण अभियंता, जल संसाधन विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 15:25:15 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का - केडीए ने अपलोड किया रिवर फ्रंट संचालन का टेंडर डॉक्यूमेंट, 8 जनवरी तक किए टेंडर आमंत्रित</title>
                                    <description><![CDATA[टेंडर डॉक्यूमेंट तैयार होने की जानकारी दैनिक नवज्योति ने सबसे पहले प्रकाशित की थी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news--kda-uploads-tender-document-for-river-front-operation--invites-tenders-until-january-8th/article-135262"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल चम्बल रिवर फ्रंट का संचालन एक ही निजी फर्म के माध्यम से करवाने की योजना के तहत केडीए की ओर से इसका टेंडर डॉक्यूमेंट तैयार किया है। जिसे केडीए की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है। एक माह में टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। केडीए सचिव मुकेश चौधरी ने बताया कि रिवर फ्रंट का संचालन अभी केडीए कर रहा है। साथ ही कई अन्य कार्य निजी संवेदक फर्मों के माध्यम से करवाए जा रहे हैं। लेकिन केडीए का प्रयास है कि इसका संचालन एक ही फर्म द्वारा किया जाए। इसके लिए एक टेंडर डॉक्यूमेंट तैयार किया गया है। इसमें इस बार इसे 30 साल के लिए लीज पर देने की योजना है। इसमें शुरूआती दो साल तक तो संवेदक फर्म को कोई भी राशि केडीए को नहीं देनी होगी। लेकिन रिवर फ्रंट से संबंधित सभी खर्चों व जिम्मेदारियों का वहन फर्म को ही करने होंगे। तीसरे साल के लिए केडीए ने 5 करोड़ रुपए निर्धारित किए हैं। इतनी राशि या इससे अधिक देने वाली फर्म को ठेका दिया जाएगा। उसके बाद हर साल 5 फीसदी राशि बढ़ती जाएगी।</p>
<p>उन्होंने बताया कि इस टेंडर डॉक्यूमेंट को अपलोड कर दिया है। जिसमें एक माह का समय दिया गया है। 8 जनवरी तक संवेदक फर्म व कम्पनियां जो इसका संचालन करने की इच्छुक होंगी वे टेंडर में हिस्सा लेंगी। 8 जनवरी के बाद टेंडर खोले जाएगे। जिसके बाद आगे की प्रक्रिया की जाएगी। गौरतलब है कि पूर्व में भी केडीए ने यह प्रयास किया था। उस समय 20 साल के लिए देने की योजना बनाई गई थी। लेकिन सफलता नहीं मिली थी। अब संशोधन के साथ इसे दोबारा से जारी किया गया है।</p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था प्रकाशित</strong><br />रिवर फ्रंट सचालन का टेंडर डॉक्यूमेंट तैयार होने की जानकारी दैनिक नवज्योति ने सबसे पहले प्रकाशित की थी। समाचार पत्र में 6 दिसम्बर को पेज 5 पर' तीसरे साल में 5 करोड़ या अधिक का भुगतान करने वाली फर्म करेगी संचालन शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें टेंडर से संबंधित सभी जानकारी दी गई थी। उन्हीं जानकारियों के साथ केडीए ने टेंडर डॉक्यूमेंट को अपलोड कर टेंडर अमंत्रित किए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Dec 2025 14:32:04 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - जांच कमेटी की रिपोर्ट पर एक दर्जन ग्राम पंचायतों की निविदा निरस्त</title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति अखबार ने हमारी शिकायत को प्रमुखता से उठाकर हमें न्याय दिलाया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/effect-of-news---tenders-of-a-dozen-gram-panchayats-cancelled-on-the-report-of-the-investigation-committee/article-122371"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(4)2.png" alt=""></a><br /><p>हिंडोली। दैनिक नवज्योति द्वारा शिकायतों की खबर प्रमुखता से छपने पर हिंडोली पंचायत समिति द्वारा गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट पर विकास अधिकारी रामकुमार चौधरी ने संज्ञान लेते हुए शुक्रवार को एक दर्जन ग्राम पंचायत के मनरेगा योजना की टेंडर प्रक्रिया को निरस्त कर दिया है। विकास अधिकारी रामकुमार चौधरी ने बताया कि 24 जुलाई को हिंडोली पंचायत समिति क्षेत्र की सभी ग्राम पंचायत मुख्यालय पर मनरेगा योजना एवं आरडी योजना के अंतर्गत सामान सप्लाई के टेंडर हुए थे। टेंडर प्रक्रिया के अंतर्गत एक दर्जन ग्राम पंचायत द्वारा टेंडर प्रक्रिया में धांधली के आरोप लग रहे थे। कुछ ग्राम पंचायत में संवेदकों के फार्म से डीडी गायब होने की शिकायत मिल रही थी। मिली शिकायतों के आधार पर हिंडोली पंचायत समिति द्वारा तीन सदस्य जांच कमेटी बनाई गई, जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट विकास अधिकारी रामकुमार चौधरी को सौंपी और विकास अधिकारी चौधरी ने ग्राम पंचायत सावंतगढ़, रामचंद्रजी का खेड़ा, आकोदा, चेता, बड़गांव, रुणीजा, छाबड़िया का नया गांव, गोठड़ा, पगारा, टोकड़ा, दबलाना, भवानीपुरा ग्राम पंचायत की निविदा प्रक्रिया को निरस्त कर दिया है। संवेदको ने दैनिक नवज्योति अखबार को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि दैनिक नवज्योति अखबार ने हमारी शिकायत को प्रमुखता से उठाकर हमें न्याय दिलाया है। </p>
<p>तीन सदस्य जांच कमेटी ने शुक्रवार दोपहर को अपनी रिपोर्ट मैंरे को सौंपी और मैंने रिपोर्ट का गहनता से अध्ययन किया। जांच कमेटी ने एक दर्जन ग्राम पंचायत में धुंधली के सबूत मिलने पर निविदाओं को निरस्त कर दिया है। <br /><strong>- रामकुमार चौधरी, विकास अधिकारी, पंचायत समिति, हिंडोली। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Aug 2025 15:15:48 +0530</pubDate>
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                <title>टेंडर का फेर, काम शुरु होने में हो रही देर </title>
                                    <description><![CDATA[ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का जुलाई में प्रस्तावित था निर्माण कार्य शुरु होना ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/due-to-the-issue-of-tenders--work-is-getting-delayed/article-119092"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/rtroer-(2)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । शम्भूपुरा में बनने वाले ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का निर्माण कार्य  जुलाई  में शुरु होना प्रस्तावित था। लेकिन अभी तक तो इसकी टेंडर प्रक्रिया ही पूरी नहीं हुई है। टेंडर के फेर में निर्माण कार्य शुरु होने में भी देरी हो रही है। करीब 1507 करोड़ की लागत से बनने वाले एयरपोर्ट के फेज एक में रनवे निर्माण का टेंडर  तो 6 फरवरी को ही जारी हो गया था। 467.67 करोड़ की लागत से होने वाले रनवे निर्माण के लिए निर्धारित अवधि तक आॅनलाइन टेंडर में 32 बड़ी कम्पनियों ने भाग लिया है। करीब एक महीना पहले 30 मई को रनवे साइट के टेंडर की तकनीकी बिड़ खोली जा चुकी है। लेकिन इतनी अधिक कम्पनियों के आने से एयरपोर्ट अथोरिटी आॅफ इंडिया के दिल्ली स्थित मुख्यालय में उन कम्पनियों के दस्तावेजों की जांच की जा रही है। दस्तावेजों की जांच और संवेदक कम्पनियों द्वारा टेंडर से संबंधित जानकारियों को अपलोड करने में ही इतना अधिक समय लग रहा है कि इसकी प्रक्रिया पूरी होने के बाद वित्तीय बिड़ खुलेगी। उसमें भी समय लगेगा। उसके बाद उसमें वित्तीय स्वीकृति ली जाएगी। जिसमें भी समय लगेगा। ऐसे में जुलाई में एयरपोर्ट का निर्माण कार्य शुरु हो पाना मुश्किल है। </p>
<p><strong>440.646 हैक्टेयर में होगा निर्माण</strong><br />ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट से संबंधित अधिकतर औपचारिकताएं पूरी कर ली गई है। जमीन के डायवर्जन से लेकर राशि जमा करवाने तक का काम किया जा चुका है। 440.646 हैक्टेयर में एयरपोर्ट का निर्माण किया जाना है। इसमें  रनवे(हवाई पट्टी) 32 सौ मीटर लम्बी व 45 मीटर चौड़ी होगी। एयरपोर्ट पर एक साथ 7 बड़े विमानों की पार्किंग की जा सकेगी। </p>
<p><strong>निर्माण साइट का भी होना है टेंडर</strong><br />एयरपोर्ट का निर्माण कार्य दो फेज में होना है। एक रनवे साइट का और दूसरा बिल्डिंग साइट का। हालत यह है कि अभी तक तो बिल्डिंग साइट का टेंडर ही जारी नहीं हुआ है। करीब 600 करोड़ से अधिक की लागत के इस टेंडर के जारी होने के बाद उसकी प्रक्रिया पूरी होने में भी कम से कम दो से ढाई महीने का समय लगना संभव है। सूत्रों के अनुसार बिल्डिंग साइट के टेंडर जारी करने में देरी होना इसके डिजाइन  बनाने में समय लगना बताया जा रहा है। </p>
<p><strong>मई में शुरु होकर दिसम्बर 27 में पूरा होना है काम</strong><br />एएआई द्वारा पूर्व में जारी शेड्यूल के अनुसार ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट का निर्माण कार्य इस साल मई में शुरु होना था।  इसके पूरा होने का समय दिसम्बर 2027 निर्धारित की गई है। लेकिन टेंडर में देरी होने पर बाद में निर्माण शुरु होने का समय जुलाई तक बढ़ा दिया था। जिस तरह से टेंडर प्रक्रिया चल रही है। उससे संभावना है कि जुलाई में भी काम शुरू होना मुश्किल है।  हालांकि सूत्रों के अनुसार एक बार काम शुरु होने के बाद उसे तीव्र गति से किया जाएगा। जिससे निर्माण कार्य समय पर ही पूरा किया जा सकेगा। </p>
<p>ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट के रनवे टेंडर की तकनीकी बिड़ खुलने के बाद उसमें भागीदार कम्पनियों के दस्तावेजों की जांच की जा रही है। उसमें समय लगने से वित्तीय बिड़ नहीं खुली है। बिल्डिंग साइट का टेंडर अभी तक जारी नहीं हुआ है। वैसे एयरपोर्ट से संबंधित पूरे काम की मॉनिटरिंग एएआई मुख्यालय द्वारा की जा रही है। <br /><strong>-पारसराम मीणा, निदेशक कोटा एयरपोर्ट </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Jul 2025 15:47:12 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - नए सिरे से होंगे टैंडर, कोटा बैराज के बदलेंगे गेट</title>
                                    <description><![CDATA[बैराज की दायीं और बायीं जर्जर नहरों की भी मरम्मत कराई जाएगी। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---tenders-will-be-issued-afresh--gates-of-kota-barrage-will-be-changed/article-111718"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/news-(1)37.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। चंबल नदी पर स्थित तीनों बांधों की मरम्मत के लिए करोड़ों रुपए का बजट करीब एक साल पहले स्वीकृत हो चुका है, लेकिन इन बांधों की मरम्मत के लिए संवेदक कंपनियां साहस नहीं जुटा पा रही हैं। हालात ऐसे हैं कि तीन बार टेंडर करने के बावजूद कोई भी कंपनी उसमें भाग लेने ही नहीं पहुंची। अब बांधों के लिए नए सिरे से टेंडर किए जाएंगे। इसके तहत कोटा बैराज के सभी पुराने गेटों को बदला जाएगा। वहीं टेल क्षेत्र तक नहरी पानी पहुंचाने के लिए बैराज के दोनों नहरों की मरम्मत के कार्य भी प्राथमिकता से करवाए जाएंगे। मंगलवार को कोटा दौरे पर आए जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार बांधों की मरम्मत के लिए गम्भीर है और जल्द ही इसके लिए नए सिरे प्रयास किया जाएगा।</p>
<p><strong>नवज्योति ने उठाया था जर्जर बांधों का मुद्दा     </strong><br />चंबल वैली प्रोजेक्ट के तहत राणा प्रताप सागर (आरपीएस), जवाहर सागर (जेएस) बांध और कोटा बैराज के जीर्णोद्धार का काम होना है। इसके लिए वर्ल्ड बैंक से डैम रिहैबिलिटेशन इंप्रूवमेंट प्रोजेक्ट (ड्रिप) के तहत राशि भी स्वीकृत हो गई है, लेकिन अभी बांधों की मरम्मत नहीं हो पाई है। यहां पर 236.23 करोड़ रुपए में रिनोवेशन का काम करवाया जाना प्रस्तावित किया है। इसके लिए तीन बार टैंडर आमंत्रित किए गए, लेकिन फर्मो के रुचि नहीं लेने से मामला आगे नहीं बढ़ पाया है। पुराने बांधों की मेंटेनेंस के काम के लिए काफी दिक्कत आती है, संवेदक इसलिए भी सामने नहीं आ रहे हैं। क्योंकि बांध में पानी काफी भरा रहता है और इस दौरान ही गेट और अन्य उपकरणों की मेंटेनेंस होनी है, जो हर कोई नहीं कर सकता है। अब जल संसाधन मंत्री ने नए सिरे से टैंडर प्रक्रिया करने की बात कही है, इससे अब बूढे बांधों को नवजीवन मिलने की उम्मीद जगी है।</p>
<p><strong>बैराज हमारे लिए काफी महत्वपूर्ण </strong><br />जल संसाधन मंत्री रावत ने बताया कि कोटा बैराज हमारे लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। इससे हाड़ौती क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए सुविधा उपलब्ध होती है। इसलिए सरकार कोटा बैराज सहित अन्य बांधों की मरम्मत कराने के लिए गम्भीर है। पूर्व में बांधों की मरम्मत के लिए टैंडर निकाले जा चुके हैं, लेकिन किसी कारणवश वह पूरे नहीं हो पाए हैं। अब नए सिरे टैंडर निकाले जाएंगे और कोटा बैराज के पुराने गेटों को बदला जाएगा। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों के टेल तक पानी पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए बैराज की दायीं और बायीं नहर की मरम्मत कराई जाएगी। जहां पर गे्रेविटी से पानी नहीं पहुंच रहा है, वहां पर लिफ्ट के जरिए पानी पहुंचाया जाएगा ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Apr 2025 13:27:54 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का - ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट निर्माण के लिए 20 और 30 जनवरी को जारी होंगे टेंडर</title>
                                    <description><![CDATA[हाइवे से एयरपोर्ट तक की एप्रोच रोड होगी 28 फरवरी तक पूरी। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---tenders-will-be-issued-on-20-and-30-january-for-the-construction-of-greenfield-airport/article-100564"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/555434.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा के शम्भूपुरा में प्रस्तावित ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट  निर्माण के लिए इसी महीने 20 और 30 जनवरी को टेंडर जारी किए जाएंगे। जिससे उनके फाइनल होने पर मई में इसका निर्माण शुरु किया जा सकेगा। यह जानकारी भारत सरकार के सिविल एविएशन विभाग सचिव की अध्यक्षता में हुई साप्ताहिक समीक्षा बैठक में दी गई। ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट  निर्माण को गति देने के  लिए केन्द्र व रा’य सरकार के साथ ही एयरपोर्ट अथोरिटी ऑफ इंडिया व अन्य विभागों की हर शुक्रवार को साप्ताहिक समीक्षा बैठक की जा रही है। इस बार शुक्रवार को हुई बैठक में वीसी के माध्यम से कोटा से भी एएआई, केडीए, सिचाई और बूंदी के वन विभाग समेत अन्य विभागों के अधिकारी बैठक में जुड़े। कोटा हवाई अड्डे के निदेशक तुलसीराम मीणा ने बताया कि समीक्षा बैठक में सभी विभागों से फीडबैक लिया गया। जिसमें अभीतक के काम और आने वाले दिनों में किए जाने वाले कामों की जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट का निर्माण दो चरणों में होना है।एक ऑपरेशनल और दूसरा बिल्ड़िंग का। ऐसे में ऑपरेशनल पार्ट में रनवे का निर्माण किया जाना है। जिसका टेंडव जारी होने की तिथि पूर्व में कई बार बदली जा चुकी है। अभी तक वह 10 जनवरी तय थी। लेकिन कुछ संशोधन होने से अब उस टेंडर को जारी करने की तिथि 20 जनवरी तय की गई है। उस समय तक ऑपरेशनल पार्ट का टेंडर जारी हो जाएगा। उसके बाद बिल्डिंग निर्माण का टेंडर भी 10दिन बाद 30 जनवरी तक जारी कर दिया जाएगा। इस महीने दोनों टेंडर जारी होने के बाद उनके फाइनल स्टेज तक पहुंचने में ही दो से तीन माह का समय लगेगा। </p>
<p><strong>सम्पर्क सड़क निर्माण में चट्टानों के कारण हो रही देरी</strong><br />एयरपोर्ट निदेशक मीणा ने बताया कि बैठक मेंजानकारी दी गई कि हाइवे से एयरपोर्ट तक करीब 600मीटर की सम्पर्क सड़क का निर्माण कोटा विकास प्राधिकरण द्वारा किया जा रहा है। पूर्व में  इस सड़क का निर्माण 30 जनवरी तक पूरा होना था। लेकिन केडीए इंजीनियरों ने बताया कि जिस जगह पर सड़क बनाई जा रही है। वहां की चट्टाने काफी सख्त है। जिनकी मशीनों से खुदाई करने में समय लग रहा है। ऐसे में इस सड़क को पूरा होने में समय लगेगा। इंजीनियरों ने इस सड़क के 28 फरवरी तक पूरा होने की तिथि बताई है। इसके अलावा एयरपोर्ट से जुड़े अन्य बिन्दुओं पर भी चर्चा  हुई व जानकारी दी गई। जिसमें बताया कि डीपीआर को फाइनल स्टेज  पर पहुंचाने का काम अंतिम चरण में है।  समीक्षा बैठक में कोटा से एएआई के उप महाप्रबंधक व कोटा हवाई अड्डे के निदेशक तुलसीराम मीणा, केडीए के निदेशक अभियांत्रिक रविन्द्र माथुर, एक्सईएन, सिचाई विभाग के अधिकारी, वन विभाग बूंदी के अधिकारी समेत अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी वीसी से जुड़े। </p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था प्रकाशित</strong><br />गौरतलब है कि दैनिक नव’योति ने 10 जनवरी कोपेज दो पर समाचार प्रकाशित किया था। ‘मई में निर्माण तो  इसी माह फाइनल करनी होगी टेंडर प्रक्रिया’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें जानकारी दी गई थी कि एयरपोर्ट का निर्माण कार्य इसी साल मई में शुरु किया जाना है। लेकिन यह तभी संभव होगा जब इनके निर्माण के दोनों चरणों के टेंडर इसी माह जारी होंगे। इसका कारण है कि टेंडर जारी होने के बाद उनके फाइनल होने व वित्त विभाग से स्वीकृति मिलने व कार्यादेश जारी होने के बाद काम शुरु होने में ढाई से तीन माह का समय लगेगा। सिविल एविएशन सचिव  की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई समीक्षा बैठक में निर्माण के टेंडर की तिथियों को फाइनल किया गया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Jan 2025 14:08:04 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>इन्दिरा गांधी नहर परियोजना : निविदाएं आमंत्रित, 83 लाख के होंगे काम</title>
                                    <description><![CDATA[इन्दिरा गांधी नहर परियोजना के अंतर्गत विभिन्न कार्यों के लिए निविदाएं आमंत्रित की जाती हैं। यह निविदाएं 14 जनवरी 2025 तक ऑनलाइन जमा की जा सकती हैं, और इन्हें 15 जनवरी 2025 को खोला जाएगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/indira-gandhi-canal-project-tenders-invited-work-worth-rs-83/article-100152"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/5554-(1)16.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। इन्दिरा गांधी नहर परियोजना के अंतर्गत विभिन्न कार्यों के लिए निविदाएं आमंत्रित की जाती हैं। यह निविदाएं 14 जनवरी 2025 तक ऑनलाइन जमा की जा सकती हैं, और इन्हें 15 जनवरी 2025 को खोला जाएगा। इस परियोजना के अंतर्गत निम्नलिखित कार्य होने है, जिसमें भूरासर डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम का सामान्य वार्षिक रखरखाव और संचालन 28.00 लाख, अवधि 12 महीने, बरसालपुर ब्रांच का सामान्य वार्षिक रखरखाव और संचालन 30.00 लाख, अवधि 12 महीने, सिद्ध कार्यों और नहरों के लिए सामान्य वार्षिक रखरखाव और संचालन 10.00 लाख, अवधि 12 महीने, वीर तेजाजी लिफ्ट सिस्टम के लिए वार्षिक रखरखाव और मरम्मत 14.46 लाख, अवधि 12 महीने है। </p>
<p>निविदा शुल्क, प्रोसेसिंग फीस और घरोहर राशि ऑनलाइन ई-ग्रास के माध्यम से अधिशाषी अभियंता के नाम प्रस्तुत करनी होगी। निविदा खोलने के दिन यदि राजकीय अवकाया होता है, तो यह अगले कार्यदिवस में खोली जाएगी। निविदा को किसी भी स्तर पर निरस्त करने का अधिकार अधिशाषी अभियंता के पास सुरक्षित है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jan 2025 16:40:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उत्पाती बंदर, शहर के अंदर, अब पकड़ेंगे मथुरा के धुरंधर</title>
                                    <description><![CDATA[गौरतलब है कि पूर्व में भी इसी फर्म के पास बंदर पकड़ने का ठेका था।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/miscreant-monkeys--inside-the-city--now-mathura-s-experts-will-catch-them/article-85089"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/34.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम द्वारा हर साल बंदरों को पकड़ने पर लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। उसके बाद भी शहर में बंदरों की संख्या कम होने की जगह बढ़ती ही जा रही है। ऐसे में एक बार फिर से  बंदरों को पकड़ने के लिए मथुरा से ही टीम कोटा आएगी। नगर निगम कोटा दक्षिण द्वारा पूर्व में बंदर पकड़ने का किया गया टेंडर समाप्त हो गया था। उसके बाद समय से उसका दोबारा टेंडर नहीं किया। जिससे लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लगने के कारण टेंडर नहीं हो सका था। आचार संहिता  हटत ही अटके टेंडरों की प्रक्रिया फिर से शुरू हो गई है। निगम ने अब  शहर से उत्पाती बंदर पकड़ने का टेंडर किया है।  टेंडर में फिर से मथुरा के देहली गेट छाता निवासी इमामुद्दीन की फर्म को ही शहर से बंदर पकड़ने का टेंडर दिया गया है।  </p>
<p><strong>शिकायतें अधिक होने पर आती है टीम</strong><br />नगर निगम की ओर से मथुरा की फर्म को बंदर पकड़ने का ठेका तो दिया जाता है। लेकिन संवेदक की टीम कोटा में नहीं रहती। शहर में जहां से भी बंदरों के उत्पात की शिकायतें नगर निगम में आती हैं। निगम के जन स्वास्थ्य अनुभाग द्वारा उन शिकायतों के आधार पर संवेदक को सूचना दी जाती है। उस सूचना पर संवेदक के कर्मचारी मथुरा से आते हैं। वे यहां कुछ दिन रूककर उन क्षेत्रों में पिंजरे लगाकर बंदरों को पकड़ते हैं। उसके बाद वे वापस चले जाते हैं। ऐसा महीने में एक दो बार ही होता है। </p>
<p><strong>490 रुपए प्रति बंदर में हुआ टेंडर</strong><br />नगर निगम की ओर से एक साल के लिए किए गए टेंडर में नेगोसिएशन के बाद 490 रुपए प्रति बंदर के हिसाब से पकड़ने का टेंडर हुआ है। नगर निगम की ओर से संवेदक को दर स्वीकृति आदेश जारी किया है। जिसमें संवेदक को तीन दिन में प्रतिभूति राशि निगम कोष में जमा करवाने को कहा गया है। संवेदक द्वारा राशि जमा करवाने पर निगम की ओर से फर्म को बंदर पकड़ने का कार्यादेश जारी कर दिया जाएगा। गौरतलब है कि पूर्व में भी इसीे फर्म के पास बंदर पकड़ने का ठेका था। </p>
<p><strong>टीम कोटा में रहकर ही पकड़े बंदर</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के पार्षद देवेश तिवारी व ऐश्वर्य श्रृंगी का कहना है कि शहर में बंदर अधिक है। ऐसे में उन्हें पकड़ने वाली टीम के कोटा में ही रहकर पकड़े जाने चाहिए। कभी-कभी टीम के आने से बंदर पूरी तरह से समाप्त नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि जब हर साल टेंडर होते हैं तो उनके पूरा होने से पहले ही नए टेंडर किए जाने चाहिए। जिससे बंदर पकड़ने का सिलसिला लगातार चलता रहे। अब कई महीने बाद टेंडर हुए हैं तो इस दौरान फिर से बंदरों की संख्या बढ़ गई है। इधर नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि चुनाव आचार संहिता में टेंडर नहीं हो सकते थे। अब आचार संहिता हटने के बाद फिर से टेंडर  किए जा रहे हैं। अभी बंदर पकड़ने के लिए संवेदक को दर स्वीकृति आदेश जारी किया है। उसके द्वारा प्रतिभूति राशि जमा करवाने पर कार्यादेश जारी किया जाएगा। मथुरा की फर्म ही कई सालों से बंदर पकड़ने का काम कर रही है। इस बार भी उसी की दर स्वीकृत हुई है। शीघ्र ही बंदर पकड़ना शुरु कर दिया जाएगा। </p>
<p><strong>दरा और रावतभाटा के जंगल में छोड़े जाते हैं बंदर</strong><br />संवेदक इमामुद्दीन का कहना है कि उनके द्वारा कोटा में पिछले कई सालों से बंदर पकड़े जा रहे हैं। इन बंदरों को शहर से दूर दरा और रावतभाटा के जंगलों  में छोड़ा जाता है। शहर में बंदरों की संख्या इतनी अधिक है कि वे सभी तो पकड़े नहीं जाते। जहां अधिक होते हैं वहां से पकड़ते  हैं। जो बंदर रह जाते हैं उनकी संख्या फिर से बढ़ जाती है। बंदरों की अधिक संख्या नयापुरा में सीबी गार्डन क्षेत्र में है। नए कोटा में रंगबाड़ी व गोदावरी धाम की तरफ है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jul 2024 16:26:00 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>स्ट्रीट डॉग से अभी कुछ दिन और नहीं मिलेगी निजात</title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम कोटा दक्षिण में श्वानों को पक़ड़कर उनका बधियाकरण व वैक्सीनेशन का काम पिछले कई महीने से बंद है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/there-will-be-no-relief-from-street-dogs-for-a-few-more-days/article-83134"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/6699-copy12.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में एक ओर जहां आवारा मवेशी समस्या बने हुए हैं। वहीं उससे बड़ी समस्या है स्ट्रीट डॉग। नगर निगम कोटा दक्षिण में पिछले कई महीने से इन्हें पकड़ने का काम बंद है। लेकिन लोकसभा चुनाव की आचार संहिता हटते ही निगम ने अब इन्हें पकड़ने का टेंडर किया है। लेकिन उसके अगले महीने खुलने से अभी कुछ दिन और लोगों को इससे निजात मिलने वाली नहीं है। शहर में स्ट्रीट डॉग द्वारा काटने की घटनाएं लगातार हो रही हैं। शहर का हर व्यक्ति इनसे परेशान है। ये बच्चों से लेकर महिलाओं व बुजुर्ग तक को अपना शिकार बना रहे हैं। राह चलते पैदल व्यक्ति हो या दो पहिया वाहन पर सवार या फिर घर के बाहर खेल रहे बच्चे हों। ये किसी को भी नहीं छोड़ रहे। शहर में आए दिन दिन इस तरह की घटनाएं होने के बाद भी बरसों से स्ट्रीट डॉग की समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा। </p>
<p><strong>फर्म को डी बार करने से बंद है काम</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण में श्वानों को पक़ड़कर उनका बधियाकरण व वैक्सीनेशन का काम पिछले कई महीने से बंद है। नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण में पुणे की फर्म यह काम कर रही थी। लेकिन दक्षिण निगम में कुछ समय पहले फर्म को डीबार कर दिया गया। इसका कारण अधिकारियों द्वारा फर्म के सही ढंग से काम नहीं करने व उसके खिलाफ शिकायतें होना बताया जा रहा है। जबकि वह फर्म कोटा उत्तर निगम में काम कर रही है। </p>
<p><strong>50 लाख का किया टेंडर</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण की ओर से हाल ही में 18 जून को टेंडर जारी किया है। जिसमें एक साल तक कोटा दक्षिण निगम क्षेत्र में श्वानों का बधियाकरण व वैक्सीनेशन किया जाना है। उसका 50 लाख रुपए का टेंडर किया है। टेंडर के लिए 8 जुलाई तक निविदा आमंत्रित की गई है। उसके  बाद टेंडर खोले जाएंगे और फर्म द्वारा सभी औपचारिकताएं पूरी करने पर कार्यादेश जारी होगा। जिसमें समय लगेगा। हालांकि निगम द्वारा पूर्व में भी  टेंडर निकाला था लेकिन कोई भी फर्म नहीं आई थी। </p>
<p><strong>पार्षद कर चुके मांग</strong><br />शहर वासियों के साथ ही नगर निगम कोटा दक्षिण के पार्षद भी स्ट्रीट डॉग को पकड़ने व उनका वैक्सीनेशन करने की मांग कर चुके हैं। पार्षदों का कहना है कि जब फर्म कोटा उत्तर में सही काम कर रही है तो फिर दक्षिण में ऐसा क्या हुआ जो उसे डीबार कर दिया गया। बड़ी मुश्किल से तो कोई फर्म काम करने आई थी। </p>
<p>स्ट्रीट डॉग के लिए टेंडर जारी किया है। 18 जून को जारी टेंडर 8 जुलाई को खोले जाएंगे। इस बार अधिक दिन का समय इसलिए दिया गया है जिससे कोई अच्छी व दूर की फर्म भी आ सकती है। जिस फर्म को डीबार किया गया है वह दो साल तक आवेदन ही नहीं कर सकती। <br /><strong>- रिचा गौतम, नगर निगम कोटा दक्षिण की स्वास्थ्य अधिकारी  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Jun 2024 14:39:30 +0530</pubDate>
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                <title>श्वान और बंदरों से जनता त्रस्त, निगम अधिकारी कार्यालय में मस्त </title>
                                    <description><![CDATA[जनहित के मुद्दों पर भी आचार संहिता का रोड़ा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/public-troubled-by-dogs-and-monkeys--corporation-officials-are-busy-in-their-offices/article-79310"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/shvan-or-bndaro-s-janta-trast,-nigam-adhikari-kryalaye-me-mst...kota-news-25-05-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में आए दिन श्वान लोगों को विशेष रूप से बच्चों और महिलाओं को शिकार बना रहे हैं। बंदरों का भी आतंक बना हुआ है। जनता इन सबसे त्रस्त हो रही है लेकिन निगम अधिकारियों को जनता की परवाह नहीं होने से वे मस्त हो रहे हैं। जनहित के मुद्दों पर भी आचार संहिता का रोड़ा आड़े आ रहा है।  कोटा दक्षिण निगम क्षेत्र में श्वानों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। एक दिन हले भी श्वान ने दस साल के बच्चे को बुरी तरह से नोच दिया। जिससे उसकी हालत गम्भीर बनी हुई है। उसी तरह से विज्ञान नगर में कुछ दिन पहले एक बुजुर्ग को राह चलते काट लिया था। श्वान राह चलते लोगों पर आए दिन हमले कर रहे हैं। किसी के पैर में तो किसी के चेहरे पर काट रहे हैं। जिससे लोगों में श्वानों के प्रति दहशत बढ़ती ही जा रही है। शहर मे सड़कों पर और गली मोहल्लों में श्वानों के झुंड दिखते ही लोग डरने लगे हैं। श्वानों के पास से निकलने में डर लगने लगा है। लेकिन निगम अधिकारियों द्वारा श्वानों की समस्या का कोई स्थायी समाधान तक नहीं किया जा रहा। वहीं निगम अधिकारी चुनाव की आचार संहिता का बहाना बनाकर नए टेंडर भी नहीं कर रहे हैं।  </p>
<p><strong>बंदर पकड़ने का ठेका खत्म, नया हुआ नहीं</strong><br />इसी तरह से नगर निगम कोटा दक्षिण क्षेत्र में बंदरों की संख्या भी काफी अधिक हो गई है। आए दिन उनके द्वारा लोगों के घरों में घुसने, खाने की सामग्री ले जाने और लोगों पर हमले करने के मामले हो रहे हैं। पार्षदों का कहना है कि बंदर पकड़ने का ठेका मथुरा की फर्म को दिया हुआ था। वह ठेका भी समाप्त हो गया। लेकिन अधिकारियों ने समय रहते नया ठेका नहीं किया। अब अधिकारियों के पास चुनाव आचार संहिता का बहाना है। जिससे नए टेंडर भी नहीं किए जा रहे हैं। </p>
<p><strong>फर्म को किया डीबार, अब जनता परेशान</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण में पुणे की निजी फर्म द्वारा श्वानों का बधियाकरण व टीकाकरण किया जा रहा था। लेकिन कोटा दक्षिण निगम में आयुक्त द्वारा उसे फरवरी-मार्च में डीबार कर दिया था। उसके बाद से फर्म ने काम बंद कर दिया। जिससे क्षेत्र की जनता परेशान हो रही है। जानकारों के अनुसार जबकि वही फर्म कोटा उत्तर निगम क्षेत्र में काम कर रही है।  कोटा दक्षिण के पार्षदों का कहना है कि   तलवंडी, जवाहर नगर, छावनी, बल्लभबाड़ी और बोरखेड़ा क्षेत्र में श्वानों का आतंक अधिक है। समाचार पत्रों में व प्रशासन के सामने तो बहुत कम मामले आ रहे हैं जबकि घटनाएं काफी अधिक हो रही है। लेकिन निगम अधिकारियों का जनता की समस्याओं पर कोई ध्यान ही नहीं है।  लोगों का कहना है कि श्वानों का बधियाकरण व टीकाकरण करने के बाद ये अधिक खूंखार हो रह हैं। जिससे ये लोगों पर हमले कर रहे हैं। </p>
<p><strong>लावारिस मवेशी तक नहीं पकड़े जा रहे</strong><br />शहर की सड़कों पर लावारिस मवेशियों का जमघट इतना अधिक हो गया है कि जगह-जगह पर ये झुंड में खड़े देखे जा सकते हैं। जिससे हादसों का तो खतरा बना हुआ है साथ ही लोगों पर हमले की घटनाएं भी हो रही है। विशेष रूप से सब्जीमंडी में और मेन रोड पर इनकी समस्या अधिक है।  लोगों का कहना है कि शहर में आवारा मवेशी अधिक होने के बाद भी उन्हें नहीं पकड़ा जा रहा है। निगम अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं। जिसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>श्वानशाला में सिर्फ बधियाकरण व टीकाकरण</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण की ओर से बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला परिसर में श्वानशाला बनाई गई है। यहां पुणे की निजी फर्म द्वारा श्वानों को लाकर उनका बधियाकरण व टीकाकरण किया जा रहा है। कुछ दिन रखने के बाद उन्हें वापस उसी स्थान पर छोड़ा जा रहा है जहां से पकड़कर लाए। जिससे श्वानों का खतरा कम नहीं हो रहा है। गली मोहल्लों में इनकी संख्या कम भी नहीं हो रही है। जबकि निगम अधिकारियों का कहना है कि बधियाकरण से इनकी संख्या नहीं बढ़ रही है और टीकाकरण से इनके काटने पर भी रैबीज फेलने का खतरा नहीं रहता। </p>
<p><strong>श्वानों की समस्या का हो समाधान</strong><br />नए कोटा क्षेत्र के जवाहर नगर व तलवंडी समेत सभी जगह पर श्वानों का इतना अधिक आतंक है कि लोग डर के कारण रात के समय तो घर से बाहर ही नहीं निकल पा रहे हैं। बच्चे आस-पास पार्क में खेल नहीं पा रहे हैं। लेकिन निगम अधिकारी चुनाव आचार संहिता का बहाना बनाकर बच रहे हैं।<br /><strong>- सुरेन्द्र सिंह, जवाहर नगर</strong></p>
<p>श्वानों की समस्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। जहां भी श्वान नजर आ जाते हैं वहां से रास्ता ही बदलना पड़ता है। आए दिन लोगों को काटने की घटनाएं होने पर बच्चों को घर से बाहर अकेले भेजने तक में डर लगने लगा है। निगम अधिकारियों को चाहिए कि इनका समाधान करे।<br /><strong>- गरिमा सोनी, तलवंडी</strong></p>
<p>सड़कों पर जहां देखो वहां श्वान ही श्वान दिखते हैं। सुबह के समय मंदिर जाते समय कई बार श्वान पीछे पड़ गए उस समय बड़ी मुश्किल से जान बचाई। महिलाओं व बच्चों के लिए तो इनसे बचना मुश्किल हो रहा है। निगम अधिकारियों को जनता के मुद्दों में तो आचार संहिता की आड़ नहीं लेनी चाहिए। समय रहते टेंडर करते तो ऐसी समस्या नहीं होती।<br /><strong>- महेन्द्र जैन, दादाबाड़ी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />निजी फर्म द्वारा सही ढंग से काम नहीं करने पर उसके खिलाफ शिकायतें आ रही थी। जांच में दोषी मानते हुए उसे डीबार कर दिया था। उसके बाद टेंडर किए लेकिन कोई फर्म नहीं आई। फिर लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू हो गई। इस दौरान नया टेंडर नहीं कर सकते। ऐसे में अब अगले महीने आचार संहिता हटने के बाद ही नए टेंडर होंगे। जिससे श्वान, बंदर व अन्य सभी समस्याओं का समाधान हो जाएगा। <br /><strong>- सरिता सिंह, आयुक्त नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 May 2024 14:22:35 +0530</pubDate>
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                <title>3 महीने में नहीं बना पक्षी घर तो डूब जाएंगे 87 लाख</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्ववर्ती सरकार ने पक्षी पुर्नवास के नाम से प्रदेश के सभी जिलों में पक्षी घर बनाने के लिए 87 लाख रुपए का बजट मिला था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/-if-bird-house-is-not-built-in-3-months--87-lakh-rupees-will-be-lost/article-66125"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/3-mahine.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में पक्षी घर निर्माण के लिए मिला 87 लाख का बजट डूबने की कगार पर है। वन्यजीव विभाग ने लापरवाही बरते हुए 6 माह तक बजट अपने पास पटका रखा। इस बीच न तो टेंडर निकाले और न ही वर्क आॅर्डर जारी किए। नतीजन, प्रदेश में सत्ता बदली तो नई सरकार ने कमान संभालते ही पूर्ववर्ती सरकार में स्वीकृत हुए नए कार्यों पर रोक लगा दी। वहीं, वित्तीय वर्ष भी समाप्ती की ओर है। ऐसे में विभाग दुविधा में फंस गया। यदि, मार्च  से पहले रोक नहीं हटी और निर्माण कार्य शुरू हुआ तो लाखों का बजट लेप्स हो जाएगा।  दरअसल, पिछली सरकार के आखिरी बजट घोषणा में अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में पक्षी घर बनाने के लिए विभाग को गत अगस्त माह में बजट स्वीकृत किया था। लेकिन, विभाग ने काम शुरू करवाने की बजाए 2 माह तक बजट अपने पास पटका रखा। इस अवधि में न तो टेंडर करवाए और न ही वर्कआॅर्डर जारी किए। इस बीच नवम्बर में विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लग गई। जिससे पक्षी घर का निर्माण शुरू होने से पहले ही रुक गया।  </p>
<p><strong>6 महीने पटका रखा बजट</strong><br />पूर्ववर्ती सरकार ने पक्षी पुर्नवास के नाम से प्रदेश के सभी जिलों में पक्षी घर बनाने के लिए 87 लाख रुपए का बजट मिला था। जिसका उद्देश्य रेस्क्यू होने वाले घायल पक्षियों का इलाज कर उनका संरक्षण व पुर्नवास करना था। लेकिन, वन्यजीव विभाग ने उस अवधि में न तो एस्टीमेट बनाया और न ही टेंडर निकाले। जबकि, इसके उलट अनंतपुरा स्थित लवकुश वाटिका में बन रहे पक्षी विहार का वनमंडल ने आचार संहिता लगने से पहले ही टेंडर की पक्रिया पूरी कर काम शुरू करवा दिया था। वर्तमान में पक्षी विहार का 50 फीसदी काम पूरा हो चुका है। </p>
<p><strong>नई सरकार ने लगाई रोक </strong><br />प्रदेश में नई सरकार के गठन के बाद पूर्ववर्ती सरकार में स्वीकृत हुए ऐसे कार्य जिनके टेंडर जारी नहीं हुए या जिनके वर्कआॅर्डर जारी हो चुके लेकिन कार्य शुरू नहीं हुए उन कार्यों पर अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी गई है। इन कार्यों की वित्तीय स्वीकृति मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अनुमति के बाद ही जारी हो सकेगी। ऐसे में वित्तीय वर्ष के खत्म होने से पहले स्वीकृति नहीं मिली तो बायोलॉजिकल पार्क में बनने वाले पक्षी घर का 87 लाख का बजट लेप्स हो सकता है। </p>
<p><strong>बजट लेप्स होने का खतरा</strong><br />विशेषज्ञों का मत है, वित्तीय वर्ष आगामी मार्च माह में समाप्त हो जाएगा। लेकिन, वन्यजीव विभाग की लेटलतीफी के कारण टेंडर तक नहीं हुए। अब सरकार की रोक के कारण विभाग चाहकर भी कार्य शुरू नहीं करवा सकता। ऐसे में विभाग दुविधा में फंस गया है कि एक तरफ तो सरकार की स्वीकृति का इंतजार करना पड़ेगा। वहीं, इस बीच वित्तीय वर्ष का समय भी निकलता जाएगा। यदि, समय रहते इस पर निर्णय नहीं हुआ तो बजट की राशि पर लेप्स होने का खतरा बढ़ जाएगा।</p>
<p><strong>घायल पक्षियों का होगा इलाज</strong><br />शहरभर से रेस्क्यू होने वाले पक्षियों का इलाज के लिए यहां पक्षी क्लिनिक भी बनाई जानी है। मकर संक्रांति पर मांजे की चपेट में आने से कई पक्षी जख्मी हो जाते हैं, ऐसे पक्षियों को यहां इलाज किया जाएगा और उन्हें इन्हीं एनक्लोजर मे रखा जाएगा। लेकिन, वन्यजीव विभाग के अधिकारियों की लापरवाही से कार्य अब 5 माह बाद ही शुरू हो पाने के आसार नजर आ रहे हैं। </p>
<p><strong>देसी-विदेशी पक्षियों को रखा जाएगा</strong><br />अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में प्रस्तावित पक्षी विहार में विभिन्न प्रजातियों के देसी विदेशी पक्षियों को रखा जाना है। जिनके लिए 4 एनक्लोजर बनाए जाने हैं। जिनमें दो बड़े व दो छोटे एनक्लोजर शामिल हैं। वहीं, शहरभर में रेस्क्यू किए जाने वाले घायल पक्षियों को भी आवास मिल सकेगा। इसके अलावा नयापुरा स्थित चिड़ियाघर में रखे पक्षियों की भी इनमें शिफ्टिंग हो सकेगी। इससे यहां आने वाले पर्यटक  बडर्् वॉचिंग कर सकेंगे। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />पक्षी घर निर्माण का एस्टीमेट बनवा लिया था। जिसके एफू्रव्ल के लिए प्रस्ताव सीसीएफ आॅफिस भिजवा दिए थे, जहां से अनुमोदन के लिए चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन को भेजे गए हैं। जहां से स्वीकृति मिलने के बाद ही टैंडर प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। हालांकि, अभी सरकार द्वारा नए कार्यों पर रोक लगी हुई है, जिसके हटने के बाद आगे की कार्यवाही हो सकेगी।                      <br /><strong>- सुनगुप्ता, डीएफओ, वन्यजीव विभाग कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jan 2024 14:41:39 +0530</pubDate>
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                <title>इस बार पार्षदों की नहीं, इवेंट कम्पनियों की पसंद के कलाकार आएंगे मेले में</title>
                                    <description><![CDATA[दशहरा मेले की विधिवत शुरुआत नवरात्र स्थापना के दिन से होती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/this-time--artists-of-the-choice-of-event-companies-and-not-the-councilors-will-come-to-the-fair/article-59095"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/is-br-parshado-k-nhi,-event-companiyo-ki-psnd-k-ayenge-kalakaar...kota-news-09-10-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की ओर से इस बार आयोजित होने वाले 130 वें राष्ट्रीय दशहरा मेले के शुरू होने के दिन लगातार कम होते जा रहे हैं। करीब एक सप्ताह का समय शेष है। ऐसे में अभी तक तो अधिकृत रूप से कलाकारों के टेंडर तक नहीं हुए हैं। जबकि आचार संहिता लगते ही टेंडर जारी हो जाहंगे। ऐसे में इस बार पार्षदों की पसंद के स्थान पर इवेंट कम्पनियों की पसंद के कलाकार दशहरा मेले में आएंगे। दशहरा मेले की विधिवत शुरुआत नवरात्र स्थापना के दिन से होती है। सुबह आशापुरा माताजी मंदिर  में देवी की पूजा अर्चना और शाम को उद्घाटन होता है। इस बार नवरात्र स्थापना 15 अक्टूबर को है। ऐसे में अब मात्र एक सप्ताह का ही समय शेष है। वहीं 24 अक्टूबर को दशहरा है। उस दिन से मेला परवान पर चढ़ता है। साथ ही मेले के दौरान विजयश्री रंगमंच पर रोजाना बड़े-बड़े कार्यक्रम भी होते हैं। उन कार्यक्रमों और उनमें आने वाले कलाकारों के नाम हर बार मेला समिति की बैठक में तय होते हैं। इस बार विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। जिसके चलते कभी भी चुनाव की तारीखों की घोषणा होने के साथ ही आचार संहिता लग सकती है। इसे देखते हुए न तो मेला समिति का मेले के आयोजन में रूचि है और न ही अधिकारी उस पर खुलकर काम कर रहे हैं। </p>
<p><strong>अधिकारियों को पता है मेला वही भरवाएंगे</strong><br />मेला समिति में आपसी तालमेल का अभाव होने व आचार संहिता में उनकी भूमिका समाप्त होने के चलते इस बार समिति ने अभी तक मेले के आयोजन में उतनी रूचि नहीं दिखाई जितनी पिछले साल दिखाई थी। वहीं निगम अधिकारियों को भी पता है कि आचार सहिता लगने पर मेला उन्हें ही भरवाना है। सूत्रों के अनुसार भले ही अधिकारी खुलकर तैयारी के बारे में कुछ नहीं कह रहे हैं। लेकिन इसका पता है कि मेला उन्हें ही भरवाना है। इस कारण से उन्होंने अंदरूनी तौर पर कागजी कार्रवाई पूरी कर ली है। साथ ही कलाकारों को बुलाने के बारे में इवेंट कम्पनियों के प्रतिनिधियों से सम्पर्क कर कलाकारों से बातचीत की जा रही है। हालांकि समय कम होने से एनवक्त पर वही कलाकार कोटा आ पाएंगे जो या तो उपलब्ध होंगे या फिर इवेंट कम्पनियां जिन्हें चाहेंगी उन्हें बुलाएंगी। आचार संहिता लगते ही सभी शेष कामों के टेंडर अगले ही दिन जारी हो जाएंगे। </p>
<p><strong>झूले लगाने में पर्याप्त समय चाहिए</strong><br />इधर झूला संचालक व दशहरा मेला व्यापार संघ के अध्यक्ष जाकिर हुसैन का कहना है कि मेले में लोगों के मनोरंजन का सबसे बड़ा साधन है झूले। मेले के दौरान बड़े-बड़े झूले लगते हैं। अधिकतर झूले वाले बाहर से आते हैं। ऐसे में उन्हें यहां आने, ट्रकों से सामान लाने और उन झूलों को फिट करने का पर्याप्त समय चाहिए। जगह की रसीद कटने से पहले झूले वाले मैदान में सामान लाकर भी नहीं डाल सकते। ऐसे में झूले वालों के सामने संकट है कि वे क्या करेें।</p>
<p><strong>हर पांच साल में यही स्थिति</strong><br />जानकारों के अनुसार इस तरह की  स्थिति पहली बार नहीं है। हर पांच साल में विधानसभा चुनाव और नगर निगम चुनाव से पहले यही स्थिति बनती है। लेकिन गत वर्षों में आचार संहिता लगने से पहले अधिकतर कार्यक्रम व टेंडर तय हो जाते थे जिससे परेशानी नहीं होती थी। लेकिन इस बार मेला शुरू होने वाला है और अभी तक तो समिति ने कुछ भी तय नहीं किया। वहीं अधिकारी भी इसमें उतनी रूचि नहीं दिखा रहे हैं। </p>
<p><strong>स्थानीय व्यापारी तैयार, बाहर वाले असमंजस में</strong><br />दशहरा मेले का न केवल शहर वासियों को वरन् व्यापारियों को भी इंतजार रहता है। ऐसे में इस बार भी मेले से संबंधित अभी तक निगम के स्तर पर भले ही कोई तैयारी नजर नहीं आ रही है। जबकि स्थानीय व्यापारियों ने अपने स्तर पर तैयारी कर रखी है। वह भी उन व्यापारियों ने जिन्हें हर साल स्थायी दुकानें आवंटित होती है। जबकि कच्ची दुकानों वाले, झूले वाले और बाहर से आने वाले व्यापारियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।  स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि बाहर से आने वाले व्यापारी निगम की तैयारियों व दुकानों के आवंटन के संबंध में उनसे जानकारी ले रहे हैं। इस बार विधानसभा चुनाव के कारण दुकान आवंटन में देरी होने पर बाहर के कई व्यापारी तो यहां आने में भी रूचि नहीं दिखा रहे हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मेले से संबंधित जो शुरुआत में होने वाले काम हैं उनके टेंडर हो चुके हैं। इस बार अवकाश अधिक आने और व्यस्तता के चलते मेला समिति की बैठकें नहीं हो सकी है। आचार संहिता लगने वाली है। उससे पहले यदि सभव हुआ त बैठक कर कार्यक्रम व कलाकार भी तय कर दिए जाएंगे। यदि आचार संहिता लग गई तो अधिकारी ही मेला भरवाएंगे। <br /><strong>- मंजू मेहरा, अध्यक्ष मेला समिति </strong></p>
<p>मेला समिति जब तक अस्तित्व में है तब तक मेले से संबंधित  निर्णय समिति में ही तय होंगे। आचार संहिता लगने पर समिति का दखल नहीं रहेगा। उस समय जैसी स्थिति बनेगी उस हिसाब से मेले को बेहतर से बेहतर करवाने का प्रयास किया जाएगा। <br /><strong>- प्रेम शंकर शर्मा, अतिरिक्त मेला अधिकारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Mon, 09 Oct 2023 17:29:10 +0530</pubDate>
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