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                <title>disability - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>विकलांगता आवेदन पत्रों में फजीर्वाड़ा : मचा हड़कम्प,  सभी ऑफलाईन प्रक्रिया की बंद </title>
                                    <description><![CDATA[कई फार्मो में ''घुटने के नीचे एक पैर कटा'' लिखा असेसमेन्ट बना शक का कारण। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/fraud-uncovered-in-disability-applications--uproar-ensues--all-offline-processing-halted/article-147547"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)57.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिले में विकलांगता प्रमाण पत्रों को लेकर बड़ा गडबड़ झाला सामने आया है। कोटा एमबीएस में प्राप्त आफलाईन व आनलाईन आवेदनों में गम्भीर प्रकार की गड़बड़ी देखने में आयी है। जहां डॉ. द्वारा जांच पत्र में भरी गयी जानकारी की हूबहू नकल करके अन्य आवेदकों के फार्माे पर लगा कर मिथ्या टिप्पणियां बना दी गयी है। हांलाकि मेडिकल बोर्ड द्वारा समय पर इन गड़बड़ियों को पकड़ लिया गया, जिससे इन आवेदकों के फर्जी विकलांगता प्रमाण पत्र बनने से रह गये । जबकि अस्पताल प्रबंधन द्वारा मामले का परिवाद नयापुरा थाने में भी दिया जा चुका हे।</p>
<p>कोटा के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में विकलांगता प्रमाणपत्र बनवाने के लिये लोग सीधे ही कोटा आते है। ऐसे आवेदनों की संख्या व लोगों को राहत देने के लिये एमबीएस प्रशासन ने अभी भी आॅफलाईन प्रक्रिया जारी की हुई हे। हांलाकि राज्य सरकार ने ऐसे किसी भी आवेदन के लिये वऊकऊ यूनिक डिस एबिलिटि पहचान पत्र पोर्टल पर आवेदन को अनिवार्य रूप से करने का भी निर्देश जारी किया हुआ है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों से आये लोगों द्वारा अभी भी सीधे एमबीएस आने के कारण यहां पर कार्य भार बढ़ता जा रहा है । ऐसे में सीधे कार्यालय में किये गये आवेदनों का जांचने में काफी चूक होने की संभावना रहती है।</p>
<p><strong>घुटने के नीचे एक पैर कटा'' से खुला मामला</strong><br />यहां आये आवेदनों में एक बात सभी में कॉमन थी की सभी आवेदकों के चिकित्सकीय प्रमाणीकरण में घुटने के नीचे एक पैर कटा वाली टिप्पणी लिखी हुयी थी। ऐसे में किसी भी चिकित्सक द्वारा एक जैसी लैखनी व टिप्पणी की गयी थी। जिससे इन आवेदकों के बारें में शक हुआ।विकलांगता के लिये भरे गये पत्र में भी चिकित्सीय टिप्पणी में एक टांग के कटे वाली टिप्पणी से पैनल को सारी कहानी समझ में आ गयी।वहीं दो अन्य मामलों मे प्राप्त आवेदन में भूनेश सुमन वार्ड नं 5 पिपल्दा व मनोहरी बाई ख्यावदा निवासी द्वारा दिये गये प्रपत्र में भी ऐसी ही टिप्पणी की गयी हे।</p>
<p><strong>सभी ने एक ही ई मित्र संचालक का नाम लिया</strong><br />बनवारी सुमन मनोहरी बाई सुमन के पति 4 साल पहले मोटर सायकिल से गिरकर एक्सीडेन्ट हो गया था एक पैर ने काम करना बन्द कर दिया कोटा एमबीएस में आॅपरेशन करवाया था,जिसके बाद पैर पतला पड़ गया। पैर से चलने में लाचार है सरकारी पेंशन मिल जायें तो काम आये इसी लिये हमनें आवेदन किया है। हमने पिपल्दा के ई-मित्र से हमने फार्म भरवाया था। मामले में जानकारी जुटाने के दौरान सभी आवेदक एक ही क्षेत्र के निकले वहीं सभी ने आवेदन प्रक्रिया में ई मित्र संचालक का नाम भी लिया। वही ई मित्र संचालक का कहना है कि मैने किसी का कोई आवेदन नहीं किया।</p>
<p><strong>अब आवेदन केवल आॅनलाईन ही मान्य</strong><br />एम बी एस अस्पताल द्वारा ऐसे मामले सामने आने के बाद हड़कम्प मच गया था। अधीक्षक डॉ धर्मराज मीणा इस संदर्भ में जानकारी देते हुये बताया कि जिसके बाद से ही आॅफलाईन आवेदनों को पूरी तरह बन्द कर दिया गया है। डॉ मीणा ने बताया की हमारी तरफ से उपरोक्त प्रकरण को नयापुरा थाने में भिजवाया गया है ।</p>
<p><strong>चिकित्सकों की डिजिटल मैपिंग</strong><br />अब वऊकऊ की समस्त कार्यप्रणाली आॅनलाइन होगी। अधिकृत चिकित्सकों की प्रोफाइल पोर्टल पर मैप की जा रही है ताकि आंकलन सीधे आॅनलाइन भरा जा सके।सत्यापन प्रक्रिया आॅनलाइन आवेदकों को अस्पताल द्वारा स्वयं कॉल करके बुलाया जाएगा। जांच और आॅनलाइन एंट्री के बाद ही वऊकऊ कार्ड जारी होगा। निश्चित समय सीमा: इस पूरी प्रक्रिया (जांच से कार्ड जारी होने तक) के लिए एक माह की अवधि निर्धारित की गई है।</p>
<p>आम जन की सुविधा के लिये दोनों प्रकार से काम चलाया हुआ था लेकिन गड़बडी मिलने के बाद अब केवल आॅनलाईन ही काम होंगे। हमने पुलिस को भी जानकारी भिजवा दी है।<br /><strong>-डॉ धर्मराज मीणा,  अधीक्षक एमबीएस कोटा</strong></p>
<p>अभी जानकारी में आया हे यदि ऐसा हे तो मामले में जांच की करवायी जायेगी।<br /><strong>- विनोद कुमार,  थानाधिकारी नयापुरा कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 15:41:20 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>वन सेवा के अधिकारी पर फर्जी दिव्यांगता का आरोप : सेवाकाल में सिस्टम का दुरूपयोग, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने यह आदेश आरएफएस अधिकारी सरिता कुमारी व अन्य की याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/forest-service-officer-accused-of-fake-disability-misuse-of-system/article-135007"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/court-22.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट में राजस्थान वन सेवा के अधिकारी पर सेवाकाल के दौरान सिस्टम का दुरूपयोग कर फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र हासिल करने और उसके आधार पर पहले सलेक्शन स्केल का लाभ और अब आईएफएस पद पर होने वाली पदोन्नति में इसका लाभ मिलने का आरोप लगाते हुए याचिका दायर की गई है। जिस पर अदालत ने वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, यूपीएससी सचिव, पीसीसीएफ और डीओपी सचिव सहित आरएफएस अधिकारी जगदीप सिंह से जवाब मांगा है। जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने यह आदेश आरएफएस अधिकारी सरिता कुमारी व अन्य की याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए।</p>
<p>याचिका में अधिवक्ता तनवीर अहमद ने अदालत को बताया कि जगदीप सिंह का राजस्थान वन सेवा के अधिकारी के पद पर सामान्य तौर पर चयन हुआ था। उसके पास 40 फीसदी या अधिक की बेंचमार्क दिव्यांगता भी नहीं है। याचिका में आरोप लगाया गया कि अरण्य भवन में तैनाती के दौरान उन्होंने सिस्टम का दुरूपयोग कर फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवा लिया। याचिकाकर्ता वरिष्ठता सूची में जगदीप सिंह से ऊपर हैं, लेकिन दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर उन्हें याचिकाकर्ताओं से पहले सिलेक्शन स्केल का लाभ दिया गया। वहीं अब उन्हें इसी दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर भारतीय वन सेवा में पदोन्नति में लाभ दिया जा सकता है।</p>
<p>याचिका में कहा गया फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्रों को लेकर एसओजी में कई प्रकरण र्ज है और राज्य सरकार भी संदिग्ध अधिकारियों की दिव्यांगता का पुन: परीक्षण करा रही है। इसके बावजूद जगदीप सिंह की दिव्यांगता को लेकर कोई जांच नहीं की गई। आरएफएस से आईएसएफ पद पर पदोन्नति के लिए जल्दी ही पदोन्नति बोर्ड की बैठक होने वाली है। उसमें भी जगदीप सिंह को दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर याचिकाकर्ताओं से ऊपर माना जाएगा। ऐसे में राज्य सरकार पहले जगदीप सिंह की दिव्यांगता की जांच की जाए और उसके बाद ही डीपीसी बोर्ड की बैठक बुलाई जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Dec 2025 10:58:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिव्यांगता के आधार पर अभ्यर्थी को न्यायिक सेवाओं से नहीं किया जा सकता वंचित : दृष्टिहीन और दृष्टिबाधित नियुक्ति के हकदार, सुप्रीम कोर्ट ने एमपी नियम 6ए को किया खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा नियम 1994 के नियम 6ए को निरस्त किया जाता है, क्योंकि यह दृष्टिबाधित और ²ष्टिहीन उम्मीदवारों को न्यायिक सेवाओं में नियुक्ति से बाहर रखता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/on-the-basis-of-disability-the-candidate-cannot-be-done/article-106225"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/supreme-court--3.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली।  सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा कि केवल दिव्यांगता के आधार पर किसी भी अभ्यर्थी (संबंधित पद के आवेदक) को न्यायिक सेवाओं से वंचित नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने दृष्टिबाधित और दृष्टिहीन अभ्यार्थियों को न्यायिक सेवाओं में नियुक्ति से बाहर रखने वाले मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा नियम की शर्तों के उस भाग को निरस्त करते हुए कहा कि वे (दृष्टिहीन और दृष्टिबाधित) भारत की न्यायिक सेवाओं में नियुक्ति के आवेदन के पात्र हैं। पीठ की ओर से फैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति महादेवन ने कहा कि मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा नियम 1994 के नियम 6ए को निरस्त किया जाता है, क्योंकि यह दृष्टिबाधित और ²ष्टिहीन उम्मीदवारों को न्यायिक सेवाओं में नियुक्ति से बाहर रखता है।</p>
<p>पीठ ने कई पहलुओं पर गौर करने के बाद कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुसार उनकी (दिव्यांग व्यक्तियों की) पात्रता का आकलन करते समय उन्हें उचित सुविधाएं प्रदान की जानी चाहिए। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट तौर कहा कि दृष्टिबाधित और कम दृष्टि वाले अभ्यर्थी न्यायिक सेवा के पदों के लिए चयन में भाग लेने के हकदार होंगे।</p>
<p>पीठ ने कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों को न्यायिक सेवा की भर्ती में किसी भी तरह के भेदभाव का सामना नहीं करना चाहिए और राज्य को समावेशी ढांचा सुनिश्चित करने के लिए उन्हें सकारात्मक कार्रवाई प्रदान करनी चाहिए। पीठ ने फैसले में आगे कहा कि वह संवैधानिक ढांचे और संस्थागत अक्षमता ढांचे से निपटता है और इस मामले को सबसे महत्वपूर्ण मानता है। शीर्ष अदालत के समक्ष एक ²ष्टिबाधित अभ्यर्थी की मां ने पिछले साल मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा (भर्ती और सेवा शर्तें) नियम में शामिल उक्त नियम के खिलाफ पत्र याचिका दी थी, जिस पर अदालत ने स्वत: संज्ञान मामला दर्ज किया था। शीर्ष अदालत ने सुनवाई पूरी होने के बाद तीन दिसंबर, 2024 को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Mar 2025 15:25:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>निशक्तता या बीमारी के कारण सेवानिवृत्ति लेने वाले कर्मचारियों के आश्रितों को नियुक्ति का फैसला, गहलोत ने व्यक्त की प्रसन्नता </title>
                                    <description><![CDATA[गहलोत ने कहा कि राजस्थान सरकार की तरह ही केन्द्रीय गृह मंत्रालय द्वारा सेवा में निशक्तता या गंभीर बीमारी के कारण सेवानिवृत्ति लेने वाले कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकम्पा नियुक्ति देने का निर्णय किया है। इससे  आश्रित परिवारों को संबल मिलेगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/decision-to-appoint-dependents-of-employees-taking-retirement-due-to-disability/article-14352"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/46546546574.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सरकारी नौकरी से निशक्तता या गंभीर बीमारी के कारण सेवानिवृत्ति लेने वाले कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकम्पा नियुक्ति देने के मोदी सरकार के फैसले का मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रसन्नता व्यक्त की। गहलोत ने कहा कि राजस्थान सरकार की तरह ही केन्द्रीय गृह मंत्रालय द्वारा सेवा में निशक्तता या गंभीर बीमारी के कारण सेवानिवृत्ति लेने वाले कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकम्पा नियुक्ति देने का निर्णय किया है। इससे  आश्रित परिवारों को संबल मिलेगा। निशक्तता एवं गंभीर बीमारियों के कारण परिवार पर आने वाले आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा के संकट से उबरने के लिए यह एक जरूरी फैसला है। बजट घोषणा के अनुसार राजस्थान सरकार के सभी विभागों में लागू इस फैसले की तरह केन्द्र सरकार के अन्य मंत्रालयों को भी इस फैसले को लागू करना चाहिए।</p>
<p><strong>मोदी सरकार का फैसला</strong><br />गृह मंत्रालय ने अनुकंपा नियुक्तियों की नीति में बदलाव किया है। नई नीति के अनुसार अब सेवा के दौरान मरने वाले व चिकित्सा आधार पर सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के परिजनों को भी अनुकंपा नियुक्ति मिलेगी। इस नीति से केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले कर्मचारियों को लाभ होने की उम्मीद है। इनमें केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के कर्मचारी भी शामिल है, जो आतंकी हमलों व झड़पों के शिकार होते है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Jul 2022 15:36:06 +0530</pubDate>
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