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                <title>murmu - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>सीडीएस और तीनों सेना प्रमुखों ने द्रौपदी मुर्मु से की मुलाकात : सशस्त्र बलों के अभियान-ऑपरेशन सिंदूर की दी जानकारी, राष्ट्रपति ने की सेना की वीरता की सराहना </title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने सशस्त्र बलों की वीरता और समर्पण की सराहना की, जिसने आतंकवाद के खिलाफ भारत के जवाब को शानदार सफलता बना दिया। राष्ट्रपति तीनों सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/cds-all-three-army-chiefs-meet-draupadi-murmu-give-information/article-114156"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/6622-copy27.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान और थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह तथा नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी के साथ राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। इन शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने राष्ट्रपति को पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों, उनके अड्डों और उनकी मदद करने वालों के खिलाफ भारतीय सशस्त्र बलों के अभियान- ऑपरेशन सिंदूर के बारे में जानकारी दी।</p>
<p>राष्ट्रपति भवन ने इस बारे में सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि राष्ट्रपति को ऑपरेशन सिंदूर के बारे में जानकारी दी गयी। इस पोस्ट में कहा गया कि राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने सशस्त्र बलों की वीरता और समर्पण की सराहना की, जिसने आतंकवाद के खिलाफ भारत के जवाब को शानदार सफलता बना दिया। राष्ट्रपति तीनों सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Wed, 14 May 2025 19:01:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>मुर्मु और मोदी सहित कई नेताओं ने दी होली की शुभकामनाएं, कहा- यह पर्व एकता, प्रेम और सद्भाव का देता है संदेश </title>
                                    <description><![CDATA[ देश में शुक्रवार को रंगों का पर्व होली हर्षोल्लास से मनाया जा रहा है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/many-leaders-including-murmu-and-modi-wished-holi-this-festival/article-107487"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/murmu-1.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। देश में शुक्रवार को रंगों का पर्व होली हर्षोल्लास से मनाया जा रहा है। होली के इस पर्व पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ सहित कई नेताओं ने देशवासियों को होली की बधाई एवं शुभकामनाएं दी। राष्ट्रपति मुर्मु ने सोशल मीडिया मंच एक्स अपने शुभकामना संदेश में कहा कि “रंगों के त्योहार होली के पावन अवसर पर सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं. हर्षोल्लास का यह पर्व एकता, प्रेम और सद्भाव का संदेश देता है। यह त्योहार भारत की अनमोल सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। आइए इस शुभ अवसर पर हम सब मिलकर भारत माता की सभी संतानों के जीवन में निरंतर प्रगति, समृद्धि और खुशियों के रंग भरने का संकल्प लें। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार रात को होली की बधाई देते हुए एक्स पर पोस्ट लिखा था, “आप सभी को होली की ढेरों शुभकामनाएं. हर्ष और उल्लास से भरा यह पावन-पर्व हर किसी के जीवन में नई उमंग और ऊर्जा का संचार करने के साथ ही देशवासियों की एकता के रंग को और प्रगाढ़ करे, यही कामना है।”</p>
<p>उपराष्ट्रपति धनखड़ ने होली की बधाई देते हुए 'एक्स' पर लिखा, “होली के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं. होली बुराई पर अच्छाई की जीत और वसंत के आगमन का प्रतीक है, जो नई शुरुआत और नए दृष्टिकोण का प्रतीक है। यह होली हमें अपने विचारों को करुणा से, अपने कार्यों को दयालुता से और अपने दृष्टिकोण को हमारे महान राष्ट्र के लिए आशा से रंगने की याद दिलाए।”</p>
<p>केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने होली की बधाई देते हुए कहा, “उमंग, उत्साह और रंगों के पर्व 'होली' की समस्त देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं। यह रंगोत्सव आप सभी के जीवन में उत्तरोत्तर समृद्धि, उन्नति और संपन्नता लेकर आए।” रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने होली के शुभकामना देेते हुए एक्स पर लिखा, “होली के पावन पर्व पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं. हर्ष, उल्लास और नवीन ऊर्जा का प्रतीक यह त्योहार आपके जीवन में प्रसन्नता और उत्तम स्वास्थ्य के रंग भरे, यही मंगलकामना है. आपकी होली आनंदमय और सुरक्षित हो।” </p>
<p>लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “आप सभी को होली के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं। रंगों का यह त्यौहार आपके जीवन में नई उमंग, नए उत्साह और ढेर सारी खुशियां ले कर आए।” कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक्स पर लिखा, “होली, विविधता का महोत्सव है। ये भय, द्वेष, ईर्ष्या, नफ़रत और भेदभाव को मिटाने का त्योहार है। होली हमें रंगो की विविधता का आनंद लेने के लिए प्रेरित करती है। सभी देशवासियों को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ और बधाई।”</p>
<p>उन्होंने आगे कहा, “आइये हम अपने बहु-सांस्कृतिक समाज को जीवंत रंगों, एकजुटता व भाईचारे की भावना से भर दें और सौहार्द व सद्भाव का एक बार फिर प्रण लें।” दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आज होली के त्यौहार पर दिल्ली और पूरे देश वासियों को अपनी अनंत शुभकामनाएं दीं। अपने संदेश में उन्होंने आशा व्यक्त की कि रंगों का यह जीवंत त्योहार सभी के जीवन में अनगिनत खुशियाँ, अपार प्रेम और सद्भाव लेकर आएगा। गुप्ता ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट में लिखा, “रंगों के पवित्र त्योहार होली पर दिल्ली और पूरे देश के लोगों को अनंत शुभकामनाएं। रंगों का यह त्योहार, होली आपके जीवन में अनगिनत खुशियां, अपार प्रेम और सद्भाव लेकर आए। यह त्योहार केवल रंगों का उत्सव नहीं है, बल्कि सच्चाई की जीत, रिश्तों के मजबूत बंधन और आपसी भाईचारे का जीवंत प्रतीक है।</p>
<p>उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर अपने शुभकामना संदेश में लिखा, “रंग, उमंग, उत्साह और तरंग के पावन पर्व होली की आप सभी को शुभकामनाएं। होली का पर्व एकता का संदेशवाहक है, जो हमें प्रेम और सौहार्द के साथ सद्भाव के मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्रदान करता है. प्रभु श्री राम से कामना है कि यह पर्व आप सभी के जीवन को सुख, समृद्धि व नव उमंग के विविध रंगों से परिपूर्ण करें।”<br />कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने एक्स पर होली की शुभकामना संदेश लिखा, “रंग, उमंग, उत्साह, उल्लास, बंधुत्व, बराबरी और मेलजोल के महापर्व होली की हार्दिक शुभकामनाएं। होली खेलते हुए हर किसी को प्यार से गले लगाइए। अपने परिवार, समाज और हर देशवासी के साथ खुशियां बांटिए। आप सबके लिए होली शुभ हो।”</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Fri, 14 Mar 2025 14:32:08 +0530</pubDate>
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                <title>गणतंत्र दिवस : कर्तव्य पथ पर भव्य समारोह में द्रौपदी मुर्मू ने फहराया तिरंगा, परेड की ली सलामी</title>
                                    <description><![CDATA[उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और पीएम मोदी भी मौजूद रहे। इस बार कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबिआंतो हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/draupadi-murmu-hoisted-the-tricolor-in-the-grand-ceremony-on/article-102106"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/6622-copy.jpg22.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। देश में 76वें गणतंत्र दिवस के मौके पर कर्तव्य पथ पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया है। इस समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शामिल हुई। उन्होंने झंडा फहराया। इस मौके पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और पीएम मोदी भी मौजूद रहे। इस बार कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबिआंतो हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Sun, 26 Jan 2025 11:03:03 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>संवैधानिक आदर्शों को अपनाएं देश के लोग, विकसित भारत बनाने में दें योगदान : मुर्मु</title>
                                    <description><![CDATA[हमारा संविधान हमारे लोकतांत्रिक गणराज्य की मजबूत आधारशिला है। हमारा संविधान हमारी सामूहिक और व्यक्तिगत गरिमा सुनिश्चित करता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/peoples-of-the-country-constitutional-ideals--contribute-ijn-india--saya-murmu/article-95949"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/6630400-sizee2.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देशवासियों से संवैधानिक आदर्शों को आचरण में लाने तथा मौलिक कर्तव्यों का पालन करने की अपील करते हुए विकसित भारत बनाने का राष्ट्रीय लक्ष्य हासिल करने को कहा है। मुर्मु ने संविधान को अंगीकार किये जाने के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर यहां संविधान सदन के केन्द्रीय कक्ष में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि 75 वर्ष पहले, संविधान सदन में, संविधान सभा ने एक नए स्वतंत्र देश के लिए संविधान बनाने का बड़ा काम पूरा किया था। उस दिन संविधान सभा के माध्यम से, हम, भारत के लोगों ने, इस संविधान को अपनाया, अधिनियमित किया और खुद को समर्पित किया। हमारा संविधान हमारे लोकतांत्रिक गणराज्य की मजबूत आधारशिला है। हमारा संविधान हमारी सामूहिक और व्यक्तिगत गरिमा सुनिश्चित करता है।</p>
<p>राष्ट्रपति ने कहा कि हमारा संविधान एक जीवंत और प्रगतिशील दस्तावेज है। देश के दूरदर्शी संविधान निर्माताओं ने बदलते समय की आवश्यकताओं के अनुरूप नये विचारों को अपनाने की व्यवस्था प्रदान की थी। देश ने संविधान के माध्यम से सामाजिक न्याय और समावेशी विकास से संबंधित कई महत्वाकांक्षी लक्ष्य हासिल किए हैं। उन्होंने कहा कि एक नए ²ष्टिकोण के साथ, भारत विदेशी राष्ट्रों के समुदाय में एक नई पहचान अर्जित कर रहा है।  संविधान निर्माताओं ने भारत को अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का निर्देश दिया था और आज भारत एक अग्रणी अर्थव्यवस्था होने के साथ-साथ 'विश्व-बंधु की भूमिका भी बखूबी निभा रहा है।</p>
<p>मुर्मु ने कहा कि लगभग तीन-चौथाई सदी की संवैधानिक यात्रा में, देश संविधान निर्माताओं की अपेक्षा के अनुसार क्षमताओं को दिखाने और परंपराओं को विकसित करने में हद तक सफल हुआ है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हमने जो सबक सीखा है, उसे अगली पीढिय़ों तक पहुंचाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि 2015 से हर साल 'संविधान दिवस मनाने से  युवाओं के बीच संविधान के बारे में जागरूकता बढ़ाने में मदद मिली है। उन्होंने सभी साथी नागरिकों से संवैधानिक आदर्शों को अपने आचरण में अपनाने का आग्रह करते हुए मौलिक कर्तव्यों का पालन करने और विकसित भारत के निर्माण के राष्ट्रीय लक्ष्य के प्रति समर्पण के साथ आगे बढने को कहा। </p>
<p>राष्ट्रपति ने कहा कि आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर सभी देशवासियों ने आजादी का अमृत महोत्सव मनाया। उन्होंने कहा कि इस तरह के समारोह हमें अब तक की यात्रा की समीक्षा करने  और आगे की यात्रा के लिए बेहतर योजना बनाने का अवसर प्रदान करते हैं। ऐसे समारोह हमारी एकता को मजबूत करते हैं और दिखाते हैं कि राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने के अपने प्रयासों में हम सभी एक साथ हैं। मुर्मु ने कहा कि एक मायने में, भारत का संविधान कुछ महान विचारकों के लगभग तीन वर्षों के विचार-विमर्श का परिणाम था। लेकिन, सही मायने में यह  लंबे स्वतंत्रता संग्राम का परिणाम था। उस अतुलनीय राष्ट्रीय आंदोलन के आदर्शों को संविधान में प्रतिष्ठापित किया गया। उन्होंने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में  न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों को संक्षेप में शामिील किया गया है। ये आदर्श युगों-युगों से भारत को परिभाषित करते आए हैं। उन्होंने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में रेखांकित आदर्श एक-दूसरे के पूरक हैं। साथ मिलकर, वे एक ऐसा वातावरण बनाते हैं जिसमें प्रत्येक नागरिक को फलने-फूलने, समाज में योगदान करने और साथी नागरिकों की मदद करने का अवसर मिलता है।</p>
<p>राष्ट्रपति ने कहा कि संवैधानिक आदर्शों को कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका के साथ-साथ सभी नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से ताकत मिलती है। उन्होंने कहा कि संविधान में प्रत्येक नागरिक के मौलिक कर्तव्यों का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। भारत की एकता और अखंडता की रक्षा करना, समाज में सछ्वाव को बढ़ावा देना, महिलाओं की गरिमा सुनिश्चित करना, पर्यावरण की रक्षा करना, वैज्ञानिक सोच विकसित करना, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना और राष्ट्र को उपलब्धियों के उच्च स्तर पर ले जाना नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों में शामिल है। .</p>
<p>मुर्मु ने कहा कि संविधान की भावना के अनुरूप कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका की जिम्मेदारी है कि वे आम लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए मिलकर काम करें। उन्होंने कहा कि लोगों की आकांक्षाओं को संसद द्वारा अधिनियमित कई कानूनों में अभिव्यक्ति मिली है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान सरकार ने समाज के सभी वर्गों, विशेषकर कमजोर वर्गों के विकास के लिए कई कदम उठाए हैं। ऐसे फैसलों से लोगों का जीवन बेहतर हुआ है और उन्हें विकास के नये अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने इस बात पर खुशी जतायी कि उच्च न्यायालय के प्रयासों से देश की न्यायपालिका हमारी न्यायिक प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास कर रही है। इस अवसर पर उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, संसदीय कार्य मंत्री किरेण रिजिजू, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, केन्द्रीय मंत्री, सांसद और विदेशी राजनयिक भी मौजूद थे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Tue, 26 Nov 2024 14:16:09 +0530</pubDate>
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                <title>एशिया को मजबूत बनाने के लिए बौद्ध धर्म की भूमिका पर हो चर्चा, इस समुदाय के पास है बहुत ज्ञान : मुर्मु</title>
                                    <description><![CDATA[बुद्ध के अनुसार ये दो मानसिक शक्तियां हमारे समस्त दुखों का मूल कारण हैं। वह  यहां प्रथम एशियाई बौद्ध शिखर सम्मेलन को संबोधित कर रही थीं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-role-of-buddhism-should-be-discussed-in-strengthening-asia--community-has-a-lot-of-knowledge--says-murmu/article-94485"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/murmuu.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि विभिन्न संकटों से गुजर रहे विश्व को सहायता के लिए बौद्ध समुदाय के पास बहुत ज्ञान और शिक्षाएं हैं तथा एशिया को मजबूत बनाने के लिए भी बौद्ध धर्म की भूमिका के बारे में चर्चा करने की आवश्यकता है। मुर्मु ने कहा कि वास्तव में हमें इस बारे में विस्तार से चर्चा करनी होगी कि बुद्ध धर्म एशिया और दुनिया में शांति, वास्तविक शांति कैसे ला सकता है - ऐसी शांति, जो न केवल शारीरिक हिंसा से बल्कि सभी प्रकार के लालच और घृणा से भी मुक्त हो - बुद्ध के अनुसार ये दो मानसिक शक्तियां हमारे समस्त दुखों का मूल कारण हैं। वह  यहां प्रथम एशियाई बौद्ध शिखर सम्मेलन को संबोधित कर रही थीं। </p>
<p>इस सम्मेलन का आयोजन अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (आईबीसी) के सहयोग से केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा किया गया। राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि यह शिखर सम्मेलन बुद्ध की शिक्षाओं की हमारी साझा विरासत के आधार पर हमारे सहयोग को मजबूत बनाने की दिशा में दूरगामी प्रभाव उत्पन्न करेगा।  राष्ट्रपति ने कहा कि जब दुनिया कई मोर्चों पर अस्तित्व के संकट का सामना कर रही है, उसके सामने केवल संघर्ष ही नहीं, बल्कि जलवायु संकट भी है, तो ऐसे में इस विशाल बौद्ध समुदाय के पास मानवता को देने के लिए बहुत कुछ है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म के विभिन्न संप्रदाय दुनिया को दर्शाते हैं कि संकीर्ण संप्रदायवाद का मुकाबला कैसे किया जाए। उनका मुख्य संदेश शांति और अहिंसा पर केंद्रित है। यदि कोई एक शब्द बुद्ध धम्म को व्यक्त कर सकता है, तो वह है करुणा या दया, जिसकी दुनिया को जरूरत है।<br />मुर्मु ने कहा कि बुद्ध की शिक्षाओं का संरक्षण हम सभी के लिए एक महान सामूहिक प्रयास रहा है। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि भारत सरकार ने अन्य भाषाओं के साथ-साथ पाली और प्राकृत को भी शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया है। उन्होंने कहा कि पाली और प्राकृत को अब वित्तीय सहायता मिलेगी, जो उनके साहित्यिक खजाने के संरक्षण और उनके पुनरुद्धार में महत्वपूर्ण योगदान देगी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत धर्म की पवित्र धरती है। हर युग में भारत में महान गुरु और रहस्यवादी, द्रष्टा और साधक हुए हैं, जिन्होंने मानवता को अपने भीतर की शांति  और बाहर सछ्वाव खोजने का मार्ग दिखाया है। इन पथप्रदर्शकों में बुद्ध का अद्वितीय स्थान है। राष्ट्रपति ने  कहा कि बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे सिद्धार्थ गौतम का ज्ञान प्राप्त करना इतिहास की एक अनुपम घटना है। उन्होंने कहा कि सदियों से यह स्वाभाविक ही रहा कि अलग-अलग साधकों ने बुद्ध के प्रवचनों से अलग-अलग अर्थ ग्रहण किए और इस तरह अनेक संप्रदाय उभरे। बुद्ध धर्म का उत्कर्ष इतिहास के विभिन्न कालखंडों में अनेक दिशाओं में हुआ। विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र में धम्म के इस प्रसार ने एक समुदाय, एक विशाल संघ निर्मित किया पर बुद्ध के ज्ञान की भूमि भारत इसके केंद्र में है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Nov 2024 18:02:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रमेन डेका ने मुर्मु को भेंट किया बेल मेटल से निर्मित स्मृति चिन्ह </title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति मुर्मु ने भी राष्ट्रपति भवन की काष्ठ से निर्मित प्रतिकृति उन्हें भेंट की। मुर्मु ने अपने छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान राजभवन में मिले आतिथ्य की सराहना की। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/ramen-deka-give-memento-made-of-bell-metal-to-murmu/article-93940"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/630400-sizee-(9)4.png" alt=""></a><br /><p>रायपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के छत्तीसगढ़ के प्रवास के अंतिम दिन राजभवन में उन्हें ससम्मान बिदाई दी गई। राष्ट्रपति मुर्मु को राज्यपाल रमेन डेका द्वारा छत्तीसगढ़ की पहचान, बेल मेटल से निर्मित स्मृति चिन्ह और विश्व प्रसिद्ध कोसा की साड़ी भेंट की गई। </p>
<p>राष्ट्रपति मुर्मु ने भी राष्ट्रपति भवन की काष्ठ से निर्मित प्रतिकृति उन्हें भेंट की। मुर्मु ने अपने छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान राजभवन में मिले आतिथ्य की सराहना की। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Oct 2024 15:43:22 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>द्रौपदी मुर्मू ने भरी लड़ाकू विमान में उड़ान </title>
                                    <description><![CDATA[ असम की यात्रा पर गई तीनों सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर मुर्मू सुबह तेजपुर वायु सैनिक अड्डे पहुंची और उन्होंने करीब आधे घंटे तक सुखोई लड़ाकू विमान में उड़ान भरी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/draupadi-murmu-flew-in-fighter-plane/article-42196"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/666-copy30.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वायु सेना के तेजपुर बेस से लड़ाकू विमान सुखोई में उड़ान भरी। असम की यात्रा पर गई तीनों सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर मुर्मू सुबह तेजपुर वायु सैनिक अड्डे पहुंची और उन्होंने करीब आधे घंटे तक सुखोई लड़ाकू विमान में उड़ान भरी। इस विमान को 106 स्क्वाड्रन के कमांडिंग अफसर ग्रुप कैप्टन नवीन कुमार ने उड़ाया। विमान समुद्र तल से करीब दो किलोमीटर की ऊंचाई पर रहा और इसकी गति 800 किलोमीटर प्रति घंटा रही। मुर्मू सुखोई में उड़ान भरने वाली देश की तीसरी राष्ट्रपति और दूसरी महिला राष्ट्रपति हैं।</p>
<p>सुखोई लड़ाकू विमान में उड़ान भरना मेरे लिए रोमांचक अनुभव था। यह गर्व की बात है कि भारत की रक्षा क्षमता का विस्तार जल, थल और वायु सभी मोर्चों तक हुआ है। मैं वायु सेना और तेजपुर वायु सेना स्टेशन की समूची टीम को इस उड़ान के लिए बधाई देती हूं।<br /><strong>- द्रौपदी मुर्म, राष्ट्रपति </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Apr 2023 11:51:48 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>हर महिला की कहानी मेरी कहानी,महिलाओं की प्रगति में मेरी आस्था: मुर्मू</title>
                                    <description><![CDATA[उन्होंने कहा कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की राष्ट्रपति के रूप में मेरा चुनाव, महिला सशक्तीकरण की गाथा का एक अंश है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>नयी दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्म ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर कहा कि हर महिला की कहानी मेरी कहानी, महिलाओं की प्रगति में मेरी आस्था है। राष्ट्रपति मुर्मु ने आज भारतीय महिलाओं के अदम्य मनोबल पर आलेख में यह बात कही। उन्होंने कहा कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की राष्ट्रपति के रूप में मेरा चुनाव, महिला सशक्तीकरण की गाथा का एक अंश है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि मैं बचपन से ही समाज में महिलाओं की स्थिति को लेकर व्याकुल रही हूं। एक ओर तो एक बच्ची को हर तरफ से ढेर सारा प्यार-दुलार मिलता है और शुभ अवसरों पर उसकी पूजा भी की जाती है, दूसरी ओर उसे जल्दी ही यह आभास हो जाता है कि उसकी उम्र के लड़कों की तुलना में, उसके जीवन में कम अवसर और संभावनाएं उपलब्ध हैं। एक ओर तो महिलाओं को उनकी सहज बुद्धिमत्ता के लिए आदर मिलता है, यहां तक कि पूरे कुटुंब में सब का ध्यान रखने वाली, परिवार की धुरी के रूप में उसकी सराहना भी की जाती है, लेकिन दूसरी ओर,परिवार से संबद्ध, यहां तक कि उसके ही जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों में, यदि उसकी कोई भूमिका होती भी है, तो अत्यंत सीमित होती है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में, जब हमने हर क्षेत्र में कल्पनातीत प्रगति कर ली है, वहीं आज तक कई देशों में कोई महिला राष्ट्र अथवा शासन की प्रमुख नहीं बन सकी है। उन्होंने कहा कि अनगिनत महिलाएं अपने चुने हुए क्षेत्रों में कार्य करके राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रही हैं। वे कॉरपोरेट इकाइयों का नेतृत्व कर रही हैं और यहां तक कि सशस्त्र बलों में भी अपनी सेवाएं दे रही हैं। अंतर केवल इतना है कि उन्हें एक साथ दो कार्यक्षेत्रों में अपनी योग्यता तथा उत्कृष्टता सिद्ध करनी पड़ती है - अपने करियर में भी और अपने घरों में भी। वे शिकायत भी नहीं करती हैं, लेकिन समाज से इतनी आशा तो जरूर करती हैं कि वह उन पर भरोसा करे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि हमारे यहां, जमीनी स्तर पर निर्णय लेने वाली संस्थाओं में महिलाओं का अच्छा प्रतिनिधित्व है। लेकिन जैसे-जैसे हम ऊपर की ओर बढ़ते हैं, महिलाओं  की संख्या क्रमश: घटती जाती है। यह तथ्य राजनीतिक संस्थाओं के संदर्भ में उतना ही सच है जितना ब्यूरोक्रेसी, न्यायपालिका और कॉपोर्रेट जगत के लिए। उन्होंने कहा कि मेरा ²ढ़ विश्वास है कि समाज में व्याप्त मानसिकता को बदलने की जरूरत है। एक शांतिपूर्ण और समृद्ध समाज के निर्माण के लिए, महिला-पुरुष असमानता पर आधारित जड़ीभूत पूर्वाग्रहों को समझना तथा उनसे मुक्त होना जरूरी है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि मैंने देखा है कि यदि महिलाओं को अवसर मिलता है, तो वे शिक्षा के क्षेत्र में पुरुषों से प्राय: आगे निकल जाती हैं। भारतीय महिलाओं तथा हमारे समाज की इसी अदम्य भावना के बल पर मुझे विश्वास होता है कि भारत, महिला-पुरुष के बीच न्याय के मार्ग पर विश्व-समुदाय का पथ-प्रदर्शक बनेगा। उन्होंने कहा कि यदि महिलाओं को निर्णय लेने शामिल किया जाता है तो न केवल आर्थिक प्रगति में, बल्कि जलवायु से जुड़ी कार्रवाई में तेजी आयेगी। उन्होंने कहा मुझे विश्वास है कि यदि मानवता की प्रगति में बराबरी का भागीदार बनाया जाए तो हमारी दुनिया अधिक खुशहाल होगी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि महिलाओं की मुक्ति की कहानी धीमी गति से, प्राय: दुखदाई शिथिलता के साथ आगे बढ़ी है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल सीधी दिशा में ही आगे बढ़ रही है, कभी भी उल्टी दिशा में नहीं लौटी इस लिए यह बात मेरे विश्वास को मजबूत बनाती है और मैं अक्सर कहती भी हूं कि भारत की स्वाधीनता की शताब्दी तक का 'अमृत काल' युवा महिलाओं का समय है। उन्होंने कहा कि विगत वर्षों के दौरान घर के बाहर के वातावरण में, पहले एक छात्रा, उसके बाद एक अध्यापिका और बाद में एक समाज-सेविका के रूप में, मैं इस तरह के विरोधाभासपूर्ण रवैये से हैरान हुए बिना नहीं रह सकी हूं। कभी-कभी मैंने महसूस किया कि व्यक्तिगत स्तर पर हममें से अधिकांश लोग, पुरुषों और महिलाओं की समानता को स्वीकार करते हैं। लेकिन, सामूहिक स्तर पर वही लोग हमारी आधी आबादी को सीमाओं में बांधना चाहते हैं। अपने अब तक के जीवन-काल के दौरान मैंने अधिकांश व्यक्तियों को समानता की प्रगतिशील अवधारणा की ओर बढ़ते देखा है। हालांकि, सामाजिक स्तर पर, पुराने रीति-रिवाज और परंपराएं, पुरानी आदतों की तरह, हमारा पीछा नहीं छोड़ रही हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यही, विश्व की सभी महिलाओं की व्यथा-कथा है। धरती-माता की हर दूसरी संतान यानी महिला, अपना जीवन बाधाओं के बीच शुरू करती है। इक्कीसवीं सदी में जहां हमने हर क्षेत्र में कल्पनातीत प्रगति कर ली है, वहीं आज तक कई देशों में कोई महिला राष्ट्र या शासन की प्रमुख नहीं बन सकी है। दूसरे सीमांत पर, दुर्भाग्यवश, दुनिया में ऐसे स्थान भी हैं जहां आज तक महिलाओं को मानवता का निम्नतर हिस्सा माना जाता है; और स्कूल जाना भी एक लड़की के लिए ङ्क्षजदगी और मौत का सवाल बन जाता है। उन्होंने कहा कि आज मैं आप सबसे, प्रत्येक व्यक्ति से अपने परिवार, आस-पड़ोस अथवा कार्यस्थल में एक बदलाव लाने के लिए स्वयं को समर्पित करने का आग्रह करना चाहती हूं। ऐसा कोई भी बदलाव जो किसी बच्ची के चेहरे पर मुस्कान बिखेरे, ऐसा बदलाव जो उसके लिए जीवन में आगे बढऩे के अवसरों में वृद्धि करे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Mar 2023 10:14:45 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नारी शक्ति के बिना जल शक्ति की सफलता संभव नहीं : मुर्मू</title>
                                    <description><![CDATA[ दूषित जल से जो समस्याएं पैदा होती हैं उससे कई तरह के संकट खड़े होते हैं  इसलिए जल संक्रमण से बचाव  का एकमात्र तरीका घर-घर स्वच्छ जल उपलब्ध कराना है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/success-of-jal-shakti-is-not-possible-without-women-power--says-murmu/article-38978"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/55.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि देश में स्वच्छता अभियान तथा स्वच्छ पेयजल जैसी जनमानस से जुड़ी देशव्यापी योजनाओं की सफलता में देश की महिला शक्ति की भूमिका अहम है। इसलिए नारी शक्ति के बिना जलशक्ति की सफलता की उम्मीद नहीं की जा सकती है। मुर्मू ने विज्ञान भवन में आयोजित जल शक्ति मंत्रालय के स्वच्छ सुजल शक्ति सम्मान जल शक्ति अभियान-कैच द रेन कार्यक्रम में देश में जल अभियान को सफल बनाने में योगदान देने वाली महिलाओं को सम्मानित करने के लिए आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि इस अभियान का आधार नारी शक्ति है और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना इस कार्यक्रम की सफलता की उम्मीद नहीं की जा सकती है। </p>
<p>जल संकट होता है, तो इसमें सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को होती है। पहाड़ी और आदिवासी क्षेत्रों में महिलाएं इस समस्या से जूझती हैं और परिवार के लिए पेयजल की व्यवस्था करती हैं जिसमें उनका बहुत अधिक समय बर्बाद हो जाता है। जल संक्रमण को एक बड़ी समस्या बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे कई तरह की बीमारियां पैदा होती है। दूषित जल से जो समस्याएं पैदा होती हैं उससे कई तरह के संकट खड़े होते हैं  इसलिए जल संक्रमण से बचाव  का एकमात्र तरीका घर-घर स्वच्छ जल उपलब्ध कराना है। राष्ट्रपति ने कहा कि जल जीवन का आधार है और इसके बिना जीवन संभव नहीं है। हमारे धर्म ग्रंथों में भी इसका उल्लेख है। यजुर्वेद में जल की महत्ता का वर्णन करते हुए कहा गया है कि इस धरती पर जीवन प्रदान करने वाला रस जल ही तो है। हमारे यहां बड़े स्तर पर शहरीकरण हो रहा है। इससे जल का वितरण भी आसमान हो गया। भूजल खत्म हो रहा है। लोगों को साफ पानी देने के लिए है जल समितियां हैं लेकिन पीने के पानी के आसमान वितरण हो रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Mar 2023 15:45:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जनजाति समाज शिक्षा पर विशेष तौर पर दे ध्यान: मुर्मू</title>
                                    <description><![CDATA[उन्होने कहा कि जिंदगी जीने के लिए घर जरूरी है। आपमें से कोई पंचायत मुखिया बन गया, कोई समिति सदस्य, हर क्षेत्र में बच्चियां बढ़ रही हैं। यह शुरुआत है, जनजातीय भी जरूर आगे बढ़ेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/murmu-should-pay-special-attention-to-tribal-society-education/article-37262"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/mm.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि जनजाति समाज को शिक्षा पर विशेष ध्यान देने का आवाह्नन करते हुये कहा कि बुक्सा समाज शिक्षा, सामाजिक व आर्थिक समेत सभी क्षेत्रों में पीछे है जबकि सरकार चाहती है कि वे भी कदम से कदम मिलाकर चलें। उत्तर प्रदेश प्रवास के दूसरे दिन सोमवार को राष्ट्रपति ने बुक्सा जनजाति के लोगों को वनाधिकार पत्र वितरित किये। इस अवसर पर उन्होने कहा कि मुसहर जनजाति के लोग जंगलों में रहते हैं। उनकी खुद की जमीन न होने से वे प्रधानमंत्री आवास योजना से नहीं जुड़ पाते। उन्होंने समाज के लोगों को नसीहत दी कि सीखना बहुत जरूरी है। बेटा हो या बेटी, दोनों को पढ़ाना चाहिए।  </p>
<p>उन्होने कहा कि जिंदगी जीने के लिए घर जरूरी है। आपमें से कोई पंचायत मुखिया बन गया, कोई समिति सदस्य, हर क्षेत्र में बच्चियां बढ़ रही हैं। यह शुरुआत है, जनजातीय भी जरूर आगे बढ़ेंगे। सिर्फ सरकार से ही सहारा न लें, बल्कि आगे बढऩे का जुनून होना चाहिए। मानसिकता मजबूत होनी चाहिए। मनोबल को सशक्त करना चाहिए। बेटा-बेटी दोनों को पढ़ाइए,  सरकार से बात करूंगी कि जरूरत पर नजदीक स्कूल खोले जाएं। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि अभी एकलव्य विद्यालय खोले गए हैं। बच्चों को भी कंप्टीशन में भाग लेना चाहिए। यह सोच आनी चाहिए कि दूसरे समुदाय के बच्चों के साथ आपके बच्चे भी आगे आ पाएं। आपको भी उस रास्ते पर दौडऩा चाहिए। हम जनजातिय हैं, पीछे नहीं रहेंगे, हम भी सशक्त होंगे, हम भी कुछ बनेंगे। यह सोच होनी चाहिए।</p>
<p>राष्ट्रपति ने कहा '' आपको अपना पारंपरिक कार्य (खेती-बाड़ी, पशुपालन) भी करते रहना चाहिए। आर्थिक उन्नति के लिए सरकार सहयोग देती है। बेहतर के लिए हमें प्रयास करना चाहिए और प्रयास करने से ही आगे बढ़ सकते हैं। आपका भविष्य उज्ज्वल होगा, आपको भी कदम से कदम और कंधे से कंधे मिलाकर बढऩा चाहिए। सरकार प्रयास कर रही है पर आपको भी प्रयास जारी रखना चाहिए। '' राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने जनजातीय समूहों द्वारा संचालित समूहों की ओर से निर्मित स्मृति चिह्न राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को दिया। कार्यक्रम में निदेशलाय, जनजातीय विकास विभाग की तरफ से बुक्सा जाति पर डॉक्यूमेंट्री भी प्रदर्शित की गई। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Feb 2023 15:45:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>विभाजन-विभीषिका दिवस सामाजिक सद्भाव मानव सशक्तिकरण और एकता के लिए : मुर्मू</title>
                                    <description><![CDATA[ मुर्मू ने 76 वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि 14 अगस्त के दिन को विभाजन-विभीषिका स्मृति-दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/partition-horror-day-for-social-harmony-human-empowerment-and-unity--says-murmu/article-19085"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/46546546556.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विभाजन-विभीषिका स्मृति दिवस को लेकर विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों के बीच राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि इस स्मृति दिवस को मनाने का उद्देश्य सामाजिक सद्भाव, मानव सशक्तिकरण और एकता को बढ़ावा देना है। मुर्मू ने 76 वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि 14 अगस्त के दिन को विभाजन-विभीषिका स्मृति-दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। इस स्मृति दिवस को मनाने का उद्देश्य सामाजिक सद्भाव, मानव सशक्तीकरण और एकता को बढ़ावा देना है।</p>
<p><strong>स्वास्थ्य, शिक्षा और अर्थव्यवस्था में आए बदलाव </strong><br />मुर्मू ने कहा कि देश में संवेदनशीलता व करुणा के जीवन-मूल्यों को प्रमुखता दी जा रही है। इन जीवन-मूल्यों का मुख्य उद्देश्य हमारे वंचित, जरूरतमंद तथा समाज के हाशिये पर रहने वाले लोगों के कल्याण के लिए कार्य करना है। उन्होंने कहा कि देश में स्वास्थ्य, शिक्षा और अर्थ-व्यवस्था तथा इनके साथ जुड़े अन्य क्षेत्रों में जो अच्छे बदलाव दिखाई दे रहे हैं उनके मूल में सुशासन पर विशेष बल दिए जाने की प्रमुख भूमिका है।</p>
<p><strong>देश की उम्मीदें हमारी बेटियों पर टिकीं</strong><br />उन्होंने कहा कि देश के नए आत्म-विश्वास का स्रोत युवा, किसान और सबसे बढ़कर देश की महिलाएं हैं। महिलाएं अनेक रूढ़ियों और बाधाओं को पार करते हुए आगे बढ़ रही हैं। सामाजिक और राजनीतिक प्रक्रियाओं में उनकी बढ़ती भागीदारी निर्णायक साबित होगी। आज हमारी पंचायती राज संस्थाओं में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की संख्या चौदह लाख से कहीं अधिक है। हमारे देश की उम्मीदें हमारी बेटियों से है। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Aug 2022 10:40:15 +0530</pubDate>
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                <title>मुर्मू का संबोधन</title>
                                    <description><![CDATA[संयोग से हम जब आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं और मुर्मू देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद को संभाल रही हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/addressed-of-dropadi-murmu/article-16340"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/46565465.jpg" alt=""></a><br /><p>द्रो पदी मुर्मू ने देश के 15वें राष्ट्रपति पद की शपथ ग्र्रहण करने के बाद राष्ट्रपति के रूप में संसद भवन से अपने पहले संबोधन में जिस सहजता से अपनी बेहद मामूली पृष्ठभूमि और ओडिशा के एक छोटे से गांव से राष्ट्रपति भवन तक की अपनी यात्रा के बारे में जो बताया, उसके गहरे निहितार्थ हैं। गौरतलब है कि द्रौपदी मुर्मू ने 1997 में तब राजनीति में कदम रखा था, जब देश ने आजादी की स्वर्ण जयंती मनाई थी और संयोग से हम जब आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं और मुर्मू देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद को संभाल रही हैं। अपने संबोधन में उनका यह कहना बेहद महत्वपूर्ण है कि यह हमारे लोकतंत्र की ही शक्ति है कि गरीब घर, सुदूर आदिवासी क्षेत्र में पैदा हुई बेटी भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंच सकती है। राष्ट्रपति के पद तक पहुंचना, भारत के हर गरीब की उपलब्धि है। मेरा चुना जाना सबूत है कि भारत में हर गरीब सपने भी देख सकता है और उन्हें पूरा भी कर सकता है। निश्चित ही उनके इतना कहने से ऐसे करोड़ों लोग अपना जुड़ाव महसूस करेंगे, जिन्हें आज भी दो वक्त की रोटी के लिए जूझना पड़ता है। राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में जनजाति समुदायों के साथ ही दलितों, वंचितों और महिलाओं का भी जिक्र किया, जिससे समझा जा सकता है कि उनके भीतर इन वर्गो के प्रति गहरी संवेदना है। द्रौपदी मुर्मू स्वयं आदिवासी समुदाय से आती हैं, जो आज भी बेहद उपेक्षित होकर जीवन जीने को मजबूर है।</p>
<p>आजादी के सात दशक बीत जाने के बाद भी आदिवासी समाज जंगलों में प्रकृति के साथ तालमेल बनाकर जीवन जी रहा है। यहां विशेष रूप से गौरतलब है कि मुर्मू ने झारखण्ड की राज्यपाल के रूप में आदिवासियों की भूमि का उल्लंघन करने वाले विधेयक को लौटा दिया था। इस तरह से देखें, तो सामाजिक, आर्थिक, भौगोलिक और जेंडर के उन सभी स्तरों का उनके पास निजी अनुभव है, जहां बड़े प्रयासों की जरूरत है। राष्ट्रपति के तौर पर यह अनुभव उनके काफी काम आएगा। इसके साथ ही उनका यह अनुभव देश के लोगों के लिए भी एक आश्वासन है कि सर्वोच्च पद पर एक ऐसी हस्ती आसीन है, जो उनके दुख-दर्द को अच्छी तरह जानती समझती है। पिछले कुछ दशकों में हमारा लोकतंत्र उन सभी लोगों को, तमाम समुदायों को मुख्यधारा में, बल्कि केन्द्र में ले आया है, जो कभी सत्ता संरचना के हाशिये पर हुआ करते थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 Jul 2022 11:02:33 +0530</pubDate>
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