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                <title>चांद को क्या मालूम चाहता है उसे कोई चकोर</title>
                                    <description><![CDATA[विज्ञान या ज्योतिष, सितारों की चाल या ख्यालों का सफर चांद ही हमसफर रहा, चांद तोड़ लाना या चांद पर झूला डालना, चांद ही जिंदगी के हर पहलू में साथ रहा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/what-does-the-moon-want-to-know/article-14424"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/4546546522.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। नजर चांद की बेखबर दानिश कोई देख रहा है उसे प्यार से, चांद पर जाने की हसरत ही इंसान को अंतरिक्ष में ले गई। चांद ही समुद्र के उतार चढ़ाव का सबब रहा, चांद देख महिलाओं ने व्रत तोड़े, चांद दिखा, तो त्योहार बना ,चांद से नया साल और चांद पर ही शायरी हुई। माओ की लोरी, बच्चों का खिलौना, पतियों के लिए पत्नी चांद सी महबूबा बनी। विज्ञान या ज्योतिष, सितारों की चाल या ख्यालों का सफर चांद ही हमसफर रहा, चांद तोड़ लाना या चांद पर झूला डालना, चांद ही जिंदगी के हर पहलू में साथ रहा। हम ऐसी ही फिल्मों का उल्लेख करेंगे, जहां चांद ने अपनी मौजूदगी का एहसास कराया है।</p>
<p><strong>चौदहवीं का चांद</strong><br />वहीदा पर जब गुरुदत ने चौदहवीं का चांद गाना फिल्माया तो सेंसर बोर्ड ने कड़ी आपत्ति की, उनका मानना था इसमें वहीदा की आंखों में जो लाल रंग का डोरा है, वो इतनी रूमानियत करता है जो समाज के लिए सही नहीं है।</p>
<p><strong>पूर्णिमा :</strong> चांद हो या परिवार, पूरा ही अच्छा लगता है। दो अधूरी जिंदगी जब साथ मिल के पूरी हो जाए तो घटते बढ़ते हालातों की उलझने भी सुलझ जाती है, जिस तरह चांद से गृहण हट जाता है।</p>
<p><strong>चांद का टुकड़ा :</strong> मां के लिए उसकी औलाद चांद का टुकड़ा है पर जब श्रीदेवी ये बनी तो सलमान खान की बरसों पुरानी चाहत पूरी हो गई। श्रीदेवी उनकी फेवरेट हीरोइन जो थी।</p>
<p><strong>चांद :</strong> मीना कुमारी की फिल्म वाकई चांद जैसी है, जहां भावनाओं का ज्वार भाटा चांद की तरह कम और बढ़ता रहता है।</p>
<p><strong>खोया खोया चांद :</strong> बागी लेखक का ग्लैमर की दुनियां में सितारों की बनावटी रोशनी में स्वयं का वजूद खोना यही ये फिल्म है।</p>
<p><strong>चांद सा रोशन चेहरा :</strong> तम्मना भाटिया की पहली हिंदी फिल्म जहां बचपन के प्यार को पाने के लिए उसे जमाने से लड़ना पड़ता है।</p>
<p><strong>चोर और चांद :</strong> एक चोर एक लड़की को उसकी शादी से भगा ले जाता है, ताकि वो अपनी मर्जी से जी सके, जमाने की नजर से बचते हुए उन्हें कब प्यार हो जाता है और चकोर चांद का हो जाता है। पूरे चांद की दूधिया रोशनी में जब ये आसमान रंगता है, तो कहीं त्योहारों का मौसम आता है, तो कहीं मोहब्बत और विश्वास का प्रतीक यही चांद बन जाता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 Jul 2022 10:24:27 +0530</pubDate>
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