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                <title>school building - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>असर खबर का - चार माह से बंद विद्यालय भवन का निर्माण कार्य फिर पटरी पर, जानें पूरा मामला  </title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति में खबर प्रकाशित होने के बाद जागा प्रशासन, निर्माण शुरू।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/impact-of-news---construction-work-on-the-school-building--which-had-been-stalled-for-four-months--is-back-on-track/article-143649"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/12200-x-600-px)-(7)2.png" alt=""></a><br /><p>देईखेड़ा। क्षेत्र की खरायता पंचायत के डडवाडा राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय भवन का चार माह से रुका निर्माण कार्य समाचार प्रकाशित होने के बाद पुन: शुरू हो गया। जर्जर भवन को जमींदोज किए जाने के बाद से विद्यालय का संचालन पास के सामुदायिक भवन में किया जा रहा था, जिससे विद्यार्थियों को कठिनाई उठानी पड़ रही थी। विद्यालय के नए भवन निर्माण के लिए 20 लाख रुपए तथा शौचालय निर्माण के लिए 3 लाख 50 हजार रुपए की स्वीकृति जारी हुई थी। टेंडर प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद संवेदक ने कार्य प्रारंभ भी कर दिया था, किंतु ग्रामीणों द्वारा सुगम पोर्टल पर घटिया निर्माण की शिकायत दर्ज कराने के बाद करीब चार माह से कार्य बंद पड़ा था।</p>
<p>प्रधानाध्यापक रामस्वरूप ने बताया कि भवन के अभाव के कारण विद्यार्थियों को सामुदायिक भवन के दो कमरों में बैठाना पड़ रहा था। इस संबंध में विभागीय उच्चाधिकारियों को कई बार पत्र लिखकर अवगत कराया गया, लेकिन समाधान नहीं हो सका। पिछले सप्ताह दैनिक नवज्योति समाचार पत्र में खबर प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया और संवेदक द्वारा पुन: निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया गया। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि अब गुणवत्ता के साथ निर्माण कार्य समयबद्ध रूप से पूर्ण होगा, जिससे विद्यार्थियों को शीघ्र ही नए भवन की सुविधा मिल सकेगी।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />ग्रामीणों द्वारा शिकायत के बाद से निर्माण कार्य अटका पड़ा था जब सवेंदक ने कार्य शुरू कर दिया है। <br /><strong> -रामस्वरूप, प्रधानाध्यापक, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय,डडवाडा। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Feb 2026 15:21:19 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>बे-मौसम की बारिश से विद्यालयों में शिक्षण कार्य हुआ प्रभावित, टपकती छतों के नीचे शिक्षाग्रहण करना विद्यार्थियों की मजबूरी</title>
                                    <description><![CDATA[विद्यालय में चार कक्ष जमींदोज हो गए थे, जबकि अन्य कक्षों की छतें भी खराब हैं। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/four-classrooms-in-the-school-have-collapsed--while-the-roofs-of-other-classrooms-are-also-in-poor-condition/article-130859"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/_4500-px)-(2)5.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। नैनवां उपखंड क्षेत्र के 15 विद्यालयों में बारिश के चलते शिक्षा कार्य प्रभावित हो गया है। इन विद्यालयों में कई कक्षों को जमींदोज कर दिया गया था, लेकिन डेढ़ महीने से अधिक समय गुजरने के बाद भी इन विद्यालयों में मरम्मत नहीं की गई और न ही नए भवनों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, भण्डेड़ा में छात्रों को टपकती छत के नीचे शिक्षाग्रहण करना पड़ रहा है। यहां की छतों से बारिश का पानी टपकता नजर आ रहा है, जिससे छात्रों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कक्षा आठ और कक्षा दस के छात्र एक ही कक्षा में बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि अन्य कक्षों की स्थिति और भी खराब है। जानकारी के अनुसार, इस विद्यालय में चार कक्ष जमींदोज हो गए थे, जबकि अन्य कक्षों की छतें भी खराब हैं। पुस्तकालय, आर्ट क्राफ्ट रूम, कम्प्यूटर लैब और विज्ञान लैब में भी पानी टपकता है, जिससे विद्यार्थियों और शिक्षकों को असुविधा हो रही है। यह विद्यालय भवन पांच साल पहले बना था, लेकिन घटिया निर्माण और विभाग की अनदेखी के कारण अब यहां समस्याएं बढ़ गई हैं। विद्यालय प्रशासन और शालाध्यापक इस स्थिति को लेकर परेशान हैं और जल्द से जल्द मरम्मत की मांग कर रहे हैं।</p>
<p><strong>बारिश में छतें टपकते ही छोटी कक्षाओं की छुट्टी </strong><br />जैसे ही बारिश का दौर शुरू होता है, कक्षाओं की छतें टपकने लग जाती हैं, जिससे छोटे कक्षाओं को छुट्टी देने या उन्हें बड़ी कक्षाओं में समायोजित करने की मजबूरी बन जाती है। इससे बोर्ड कक्षा के बच्चों को सही तरीके से शिक्षा नहीं मिल पाती। मौसम ठीक रहने पर, विद्यालयों में भामाशाहों द्वारा दिए गए टीनशेड के नीचे बच्चों को बैठाने से कुछ राहत मिल जाती है, लेकिन इस समय हो रही बारिश से शैक्षिक कार्य पर विपरीत असर पड़ रहा है।</p>
<p>नैनवां उपखंड क्षेत्र के कुल 15 विद्यालयों में जर्जर हालत के भवनों को जमींदोज किया गया है और इन विद्यालयों के लिए नए भवनों की डिमांड की गई है।<br /><strong>- ओमप्रकाश नागर, जेईएन। </strong></p>
<p>भण्डेड़ा में एसडीआरएफ बाढ़ राहत कोष से दो लाख रुपये की राशि स्वीकृत हो चुकी है, जिससे जल्द ही विद्यालयों की मरम्मत का कार्य शुरू किया जाएगा। हालांकि, जमींदोज हुए भवनों के लिए राशि अभी तक स्वीकृत नहीं हुई है, लेकिन प्रक्रिया चल रही है और जैसे ही राशि स्वीकृत होगी, वहां नए भवनों का निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।<br /><strong>- अनिल गोयल, एसीबीईओ। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Oct 2025 15:26:01 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>शिक्षा का मंदिर बदहाल: हाथों में किताब, सिर पर खुला आसमां</title>
                                    <description><![CDATA[छत के सरिए निकले, दीवारों में आई दरारें।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/the-temple-of-education-is-in-a-bad-state--books-in-hands--open-sky-above-the-head/article-106208"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer-(2)7.png" alt=""></a><br /><p> कामखेड़ा। प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को दूरुस्त करने के वादे किए जा रहे है, लेकिन राजकीय प्राथमिक विद्यालय खेजडा की तस्वीरें कुछ और हकीकत बयान कर रही हैं। ये  मामला मनोहरथाना ब्लॉक के राजकीय प्राथमिक विद्यालय खेजडा गांव के सरकारी स्कूल है। जमीन पर बैठे बच्चे, हाथों में किताब और सिर पर खुला आसमान... ये तस्वीर यह बताने के लिए काफी हैं कि यहां के सरकारी स्कूल में बच्चे किन हालातों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।  राजकीय प्राथमिक विद्यालय खेजडा का भवन जर्जर होने के कारण स्कूल के बच्चे ं स्कूल के सामने खुले आसमान के नीचे बैठकर पढाई करने को मजबूर हैं। बताया जा रहा है कि स्कूल की बिल्डिंग पिछले एक सालों से जर्जर अवस्था में है। बिल्डिंग की छत में जगह जगह बड़ी-बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं। वहीं छत में जगह जगह सरिया दिखाई देने लगा है, विद्यालय  के अंदर जाना किसी खतरे से कम नहीं है। वहीं विद्यालय के  संस्था प्रधान ने  स्कूल को खुले आसमान के नीचे संचालित करना शुरू कर दिया। हाल यह है कि  बारिश,सर्दी,गर्मी में बच्चे खुले आसमान के नीचे पढ़ाई करने को मजबूर हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती नजर आ रही है। वहीं बच्चों को भविष्य अंधकार में डूबता नजर आ रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं । </p>
<p><strong>जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान</strong><br />राजकीय प्राथमिक विद्यालय खेजडा के स्कूल के भवन की हालत देखकर बच्चों के अभिभावक अब अपने बच्चों को पढ़ने भेजने से कतराने लगे हैं। इसके बाद भी क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और शिक्षा विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहे है। फिलहाल वे सिर्फ आश्वासन देकर औपचारिकता पूरी कर रहे हैं। स्कूल के संस्था प्रधान  ने बताया कि स्कूल भवन की छत जर्जर हो चुकी है और कभी भी बड़ा हादसा होने का खतरा बना हुआ है कई बार उच्च अधिकारियों को लिखित में  अवगत कराया। वही बैठक के माध्यम से भी प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेज रखा है  लेकिन फिर भी कोई पहल नहीं की गई है। </p>
<p><strong>30 साल पुराना भवन, हादसों को दे रहा न्योता</strong><br />इस बारे में स्थानीय लोगों का कहना है कि 30 साल पुराने इस स्कूल की हालत बेहद जर्जर हो चुकी है। इस कारण यहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। छत का प्लास्टर जगह जगह निकला हुआ है, जिससे भवन के अंदर कमरों में सीमेंट के टुकड़े गिरते हैं। छत और दीवारों में दरारें पड़ गई हैं, यहां बच्चों को भेजना खतरे से खाली नहीं है। स्कूल की हालत इतनी खराब है कि शिक्षक बाहर  बैठाकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं।</p>
<p>विद्यालय भवन में जगह जगह दरारें चल रही हैं, वहीं छत में जगह जगह सरिया दिखाई दे रहा है। बच्चों को विद्यालय भेजने में भी डर लगता है हमारी मांग है कि विद्यालय का नया भवन निर्माण कराया जाए। <br /><strong>- घनश्याम एसएमसी अध्यक्ष </strong></p>
<p>विद्यालय भवन जर्जर है वहीं दीवारों में दरारें भी चल रही, जिससे बच्चों को विद्यालय भेजने में भी डर लगता है। मैंने विद्यालय भवन को लेकर विधायक को भी अवगत करवाया उन्होंने भी आश्वाशन दिया।  <br /><strong>- गोलू नागर वार्ड पंच खेजड़ा </strong></p>
<p>पूरा विद्यालय भवन जर्जर है जगह जगह प्लास्टर उखड़ रहा है, किसी दिन बच्चों पर गिर जाए तो  जिम्मेदार कौन है, अब तो बच्चों को विद्यालय में भेजने में भी डर लगता है कि कही कोई हादसा नहीं हो जाए लेकिन विद्यालय भवन को लेकर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं । <br /><strong>- ओमप्रकाश नागर खेजडा  </strong></p>
<p>हमारे विद्यालय की बिल्डिंग क्षतिग्रस्त है, विद्यालय में आने में बहुत डर लगता है, हम बाहर बैठते हैं तो बहुत धूप लगती है। हम विद्यालय नया बनवाने की मांग करते हैं । <br /><strong>- हेमराज छात्र कक्षा 5</strong></p>
<p>हमें जर्जर विद्यालय में आने में डर लगता है और बाहर बैठ कर पढ़ाई करते है, जिससे हमारी पढ़ाई भी नहीं होती है हमारी मांग है हमारा विद्यालय नया बनवाए जाए। <br /><strong>- राधिका छात्रा कक्षा 5</strong></p>
<p>विद्यालय में कुल नामांकन 21 बच्चों का है और 15 बच्चे आंगनबाड़ी के आते हैं। कुल 36 बच्चे पढ़ाई करते हैं। पूरा विद्यालय का भवन जर्जर है जगह जगह दरारें चल रही है। वहीं छत में जगह जगह सरिया दिखाई दे रहा है। कभी भी भवन गिर सकता है। ऊपर से आदेश है कि क्षतिग्रस्त भवन में बच्चों को नहीं  इस लिए बच्चों को बाहर बैठा कर पढ़ना पड़ रहा है, जिससे बच्चों को पढ़ाई प्रभावित होती है।  मैंने कई  बार उच्च अधिकारियों को अवगत कराया लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। <br /><strong>- सुरेश कुमार, संस्था प्रधान</strong></p>
<p>मेरे द्वारा विद्यालय का अवलोकन किया गया है, विद्यालय का भवन क्षतिग्रस्त है। इसको लेकर उच्च अधिकारियों को अवगत करवा रखा है । <br /><strong>- रामचरण मेहर,पीईईओ कामखेड़ा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Mar 2025 16:03:42 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - जिला शिक्षा अधिकारी ने जारी किए जांच के आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति में स्टोरी प्रकाशित होने के बाद हरकत में आया शिक्षा विभाग]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news---district-education-officer-issued-orders-for-investigation/article-103346"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/news-(1)3.png" alt=""></a><br /><p>मोईकलां। सुल्तानपुर के दरबीजी सरकारी विद्यालय में घटी दर्दनाक घटना जिसमें शौचालय की जर्जर दीवार गिरने से एक मासूम बच्ची की मौत हो गई थी, के बाद मोईकलां में भी पुराने राजकीय विद्यालय के जर्जर हो चुके भवन पर दैनिक नवज्योति में तीन फरवरी को स्टोरी प्रकाशित होने के बाद हरकत में आते हुए जिला शिक्षा अधिकारी कृष्णकांत शर्मा ने ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को सांगोद व कनवास क्षेत्र में जर्जर विद्यालय भवनों व कक्षा-कक्षों की जांच के आदेश जारी किए हंै। अतिरिक्त खण्ड शिक्षा अधिकारी सांगोद कृष्ण कुमान सक्सेना ने त्वरित कार्यवाही करते हुए खण्ड के समस्त विद्यालय प्रधनाचार्यों को तीन दिन के अंदर एसडीएमसी रिपोर्ट तैयार करवाकर जिला शिक्षा विभाग में भेजने के लिए आदेशित किया है। इसी संदर्भ में बुधवार को कृष्ण कुमार सक्सेना ने मोईकलां के जर्जर हो चुके भवन का निरीक्षण कर तथ्यात्मक रिपोर्ट जारी करने की बात प्रधानाचार्य हेमन्त गोचर को कही। जांच करने आए अतिरिक्त खण्ड अधिकारी ने बताया कि पुराना विद्यालय भवन जो जर्जर हो चुका है, उसके पश्चिमी हिस्से को मरम्मत कार्य की जरूरत है। वहीं पूर्वी भवन का हिस्सा जो ज्यादा जर्जर हो चुका है, उसको जमींदोज करके पुन: निर्माण किया जाए तो भवन वापस उपयोग में लेने योग्य हो सकता है। साथ ही रिपोर्ट में बताया गया है कि जो भवन जर्जर था, उसको मात्र पोषाहार संग्रहण कक्ष के रूप में उपयोग में लिया जाता था। इसमें विद्यार्थियों का आवागमन व कक्षाएं तकरीबन 10-15 वर्षों से बंद है। राजकीय विद्यालय के प्रधानाचार्य हेमन्त गोचर ने बताया कि खण्ड शिक्षा अधिकारी के निर्देशानुसार जांच रिपोर्ट तैयार करके जिला शिक्षा अधिकारी को भेजी जाएगा।</p>
<p>जिला शिक्षा अधिकारी के आदेशानुसार बुधवार को सांगोद खण्ड के मोईकलां विद्यालय में जाकर यथास्थिति का अवलोकन करके प्रधनाचार्य को जांच रिपोर्ट तैयार करके आगे भेजने के आदेश दिए। साथ ही सांगोद क्षेत्र में समस्त प्रधानाचार्यों को विद्यालय में भवनों की यथास्थिति स्पष्ट करने के आदेश दिए। <br /><strong>-कृष्ण कुमार सक्सेना, अतिरिक्त खण्ड शिक्षा अधिकारी</strong></p>
<p>पुराने भवन की स्थिति की रिपोर्ट तैयार करके जिला अधिकारी को भेज दी है। भवन का थोड़ा मरम्मत कार्य व निर्माण हो जाए तो आगामी समय में ये बालिका विद्यालय के रूप में अस्थायी रूप से उपयोग में आ सकता है।<br /><strong>-हेमन्त गोचर, कार्यवाहक प्रधानाध्यापक, मोईकलां </strong></p>
<p>मामले की गम्भीरता को देखते हुए व आगामी समय में कोई अनहोनी ना हो, इसके बचाव के लिए समस्त खण्ड अधिकारियों को क्षेत्र में जर्जर विधायक भवनों की सूची तैयार करने के आदेश जारी कर दिए हंै। साथ ही कनिष्ठ व सहायक अभियंता को अवलोकन करके जांच के निष्कर्ष के आदेश पारित किए हैं।<br /><strong>-कृष्ण कुमार शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Feb 2025 14:58:24 +0530</pubDate>
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                <title>स्कूल मर्ज होने के बाद भवन बना मवेशियों का ठिकाना</title>
                                    <description><![CDATA[ विद्यालयों को मर्ज करने से कही स्थानों पर भवनों की दुर्दशा हो रही है जिससे लाखों रुपए का नुकसान हो रहा है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/after-the-merger-of-schools--the-building-has-become-a-place-for-cattle/article-91343"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/427rtrer-(10)1.png" alt=""></a><br /><p>देई। बच्चों के शोरगुल से गंूजने वाला स्कूल भवन अब मवेशियों का ठिकाना बन गया है। जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते क्षेत्र की भजनेरी पंचायत मुख्यालय के राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल का भवन मर्ज होने के बाद इस हालात में पहुंच गया है। बरामदे से लेकर कमरों तक फर्श पर गोबर फैला जमा है। जिससे भवन में गोबर ही गोबर फैला रहता है। स्कूल भवन के कई कमरे के गेट टूटे हुए है जिनको समाजकंटक लेकर चले गये है। इसी तरह के हालात बने रहे तो भवन शीघ्र ही भवन जर्जर अवस्था में पहुंच जायेगा। ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को अवगत करवाकर भवन के उचित रखरखाव की मांग उठाई है। नहीं तो भवन पर लोग अतिक्रमण कर सकते है। जानकारी के अनुसार पूर्व में विद्यालय में कक्षा एक से आठ की कक्षाओं का संचालन किया जाता था। स्कूल को राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल भजनेरी में शिफ्ट करने के बाद कक्षाओं का संचालन वहां पर शुरू कर दिया। जिससे अब भवन की देखरेख नही होने से मवेशियों ने अपना आशियाना बना लिया।</p>
<p><strong>ग्रामीणों की यह पीड़ा</strong><br />ग्रामीण महावीर मीणा ने बताया कि इस बारे शिक्षा विभाग के अधिकारियों को अवगत करवाया गया था। मगर कोई ध्यान नही दिए जाने से अब भवन पर अतिक्रमण होने की संभावना है।  ग्रामीण घनश्याम मीना ने बताया कि एक तरफ चीता की झौंपडियां मे नौनिहालों के लिए पढने के लिए कमरों की कमी है वही विद्यालयों को मर्ज करने से कही स्थानों पर भवनों की दुर्दशा हो रही है जिससे लाखों रुपए का नुकसान हो रहा है। </p>
<p>बाबूलाल मीणा ने बताया कि विद्यालय मर्ज होने के बाद भवन की देखभाल नही होने से भवन की दशा खराब हो गई है। लाखों रुपए से बने भवनों का उपयोग नहीं होने से किवाड  टूटने पर आवारा पशुओं का जमावडा रहने लगता है। प्रशासन व शिक्षा विभाग इस भवन में वापस स्कूल का संचालन करे तो भवन की सुरक्षा हो सकेगी। </p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />बरसात के मौसम मे गेट टूटने से स्कूल परिसर मे सूने मवेशी जाकर बैठ जाते है  शीघ्र ही भवन की मरम्मत का काम किया जायेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Sep 2024 18:25:34 +0530</pubDate>
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                <title>खस्ताहाल शिक्षा का मंदिर: मासूमों की जिंदगी पर संकट</title>
                                    <description><![CDATA[स्कूल भवन की छत की हालत इतनी ज्यादा खराब है कि यहां के शिक्षक बच्चों की क्लास बाहर ही लगाते हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/dilapidated-temple-of-education--threat-to-the-lives-of-innocents/article-87639"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/4111u1rer-(11)9.png" alt=""></a><br /><p>मनोहरथाना। मनोहरथाना ब्लॉक में शिक्षा के मंदिर पूरी तरह से बदहाली का शिकार हो चुके हैं। मनोहरथाना ब्लॉक स्थिति राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय हरिपुरा में बने कमरों और बरामदों की छत पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है। छत कब गिर जाए कुछ कहा नहीं जा सकता है जिससे  मासूमों की जिंदगी पर मौत का संकट मंडरा रहा है लेकिन शिक्षा विभाग के अफसरों का  इस ओर कोई ध्यान नहीं है। इस सरकारी स्कूल में शिक्षा के नाम पर मासूमों को मौत के मुंह में धकेलने का काम चल रहा है लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारी आंख मूंद कर बैठे है। राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय हरिपुरा में  छात्रों से जब जर्जर छत के नीचे बैठकर पढ़ने के बारे में पूछा गया तो बच्चों ने सहम कर जबाब दिया डर तो बहुत लगता है लेकिन क्या करें पढ़ना तो पड़ेगा। अनदेखी से हो सकता है बड़ा हादसा: राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय हरिपुरा की जर्जर इमारत होने की वजह से कभी भी हादसा हो सकता है जिसका खामियाजा ग्रामीण बच्चों को भुगतना पड़ रहा है  लेकिन  शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों  को इसकी कोई परवाह नहीं है। इसी वजह से ग्रामीणों को जर्जर विद्यालय में  मासूम छात्रों को भेजने में डर सताने लगा है। ग्रामीण का कहना है कि बिल्डिंग के अंदर छत से सीमेंट के टुकड़े गिरते हैं और प्लास्तर भी पूरी तरह से उखड़ गया है। नीचे से छत नही आसमान देख सकते है वही बिल्डिंग के सरिए साफ नजर आ रहे है। यह भवन काफी साल पुराना बताया जा है और इसका मेंटेनेंस भी नहीं किया जा रहा है। बच्चों को यहां भेजना खतरे से खाली नहीं है। स्कूल भवन की छत की हालत इतनी ज्यादा खराब है कि यहां के शिक्षक बच्चों की क्लास बाहर ही लगाते हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />हमारे विद्यालय की  बिल्डिंग की दशा हमसे नही देखी जा रही है हमारे बच्चे बाहर बैठकर पढ़ते हैं। बरसात आने पर बच्चे भीगकर घर पहुंचते हैं बच्चों को घर वाले समझाकर भेजते हैं की बिल्डिंग के अंदर नहीं जाना है स्कूल को 2 साल हो गए क्षतिग्रस्त हुए कोई भी ध्यान नहीं दे रहा है।<br /><strong>- पप्पू लाल, ग्रामीण हरिपुरा</strong></p>
<p>विद्यालय ने अध्यापक बच्चो को बाहर पढ़ाते हैं यहा पर बहुत समस्या है। बच्चे के माता पिता बच्चे को डर कर स्कूल भेजते है। बोलते हैं ध्यान रखना क्षतिग्रस्त कमरों की तरफ मत जाना सरकार का इस और कोई ध्यान नही है। आकर नही देखता है। <br /><strong>- कुशाल सिंह ग्रामीण हरिपुरा</strong></p>
<p>2 साल से छत गिरी हुई है और इसका मटेरियल जमीन पर ही पड़ा हुआ है। बच्चे स्कूल भेजने पर डर लगता है बच्चों को बाहर ही बिठाया जाता है जिस कारण से बच्चों की पढ़ाई भी खराब हो रही है हम सरकार से नई बिल्डिंग बनाने की मांग करते हैं।<br /><strong>-भारतसिंह, ग्रामीण हरिपुरा</strong></p>
<p>विद्यालय क्षतिग्रस्त हुए 3 साल हो गए कोई अधिकारी हमारी नहीं सुनता बच्चे भवन गिरने के डर की वजह से स्कूल नहीं आते। हम सरकार से नई भवन बनाने की मांग करते हैं। <br /><strong>- मांगीलाल, ग्रामीण हरिपुरा</strong></p>
<p>ग्राम पंचायत द्वारा भी कई बार शिक्षा विभाग  को अवगत करवा दिया लेकिन उसके बाद भी कोई समाधान नहीं हुआ और ग्राम पंचायत द्वारा भी भवन के लिए प्रस्ताव भिजवा रखा है। अगर वहां से सेक्शन हो जायेगा तो हमारे द्वारा बनवा दिया जायेगा।<br /><strong>- दयाराम प्रजापति, सरपंच ग्राम पंचायत खाताखेड़ी</strong></p>
<p>हरिपुरा स्कूल का मामला मेरे संज्ञान में है।  पीडब्ल्यूडी विभाग के द्वारा इसका सर्वे कर लिया गया है। पूरी बिल्डिंग नहीं उसके दो कमरे क्षतिग्रस्त हुए हैं। उसे जमींदोज करने का प्रस्ताव जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक भिजवा दिए गए। जैसे ही वहां से आदेश जारी हो जाएगा। आगे की कार्यवाही की जाएगी रही।<br /><strong>- चंद्रशेखर लुहार, कार्यवाहक ब्लॉक शिक्षा अधिकारी मनोहरथाना</strong></p>
<p>अगर स्कूल भवन जीर्ण शीर्ण भवन है तो बच्चे उसमे नही बिठाया जाएं  और उसका प्रस्ताव हमे भिजवाया जावे ताकि उसको जीर्ण शीर्ण है तो उसको डेमेज घोषित की जा सके और नए भवन के प्रस्ताव भिजवाए जा सके ताकि नया भवन वहां बन सके। <br /><strong>- हंसीराज मीणा, जिला शिक्षा अधिकारी झालावाड़</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Aug 2024 14:48:25 +0530</pubDate>
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                <title>मौत के साए में पढ़ाई को मजबूर नौनिहाल </title>
                                    <description><![CDATA[स्कूल का भवन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/children-forced-to-study-under-the-shadow-of-death/article-87106"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/4111u1rer-(12)4.png" alt=""></a><br /><p>मनोहरथाना। जहां एक और राज्य सरकार प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को दूरुस्त करने का वादा कर रही है लेकिन मनोहर थाना ब्लॉक के राजकीय प्राथमिक विद्यालय मोतीपुरा की तस्वीरें कुछ और हकीकत बयान कर रही हैं। राजकीय प्राथमिक विद्यालय मोतीपुरा  गांव का सरकारी स्कूल है जहां जमीन पर बैठे बच्चे, हाथों में किताब और सिर पर खुला आसमान। ये तस्वीर यह बताने के लिए काफी हैं कि यहां के सरकारी स्कूल में बच्चे किन हालातों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। दरअसल इस स्कूल का भवन  पूरा भवन जर्जर हो चुका है। इस वजह से स्कूल के विद्यार्थी खुले आसमान के नीचे बैठकर पढाई करने को मजबूर हैं। स्कूल की बिल्डिंग पिछले 4 सालों से जर्जर अवस्था में है बिल्डिंग की छत में जगह जगह बड़ी-बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं। स्कूल का भवन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका है। स्कूल के अंदर जान का खतरा होने के कारण शिक्षकों ने स्कूल को खुले आसमान के नीचे संचालित करना शुरू कर दिया हाल यह है कि बारिश के दिनों में गीली जगह में ही बैठकर बच्चों को पढ़ाई करनी पड़ती है</p>
<p><strong>अधिकारियों द्वारा कोई पहल नहीं</strong><br />वहीं प्रधान अध्यापक ने बताया कि, स्कूल भवन की छत जर्जर हालत में है और कभी भी बड़ा हादसा होने का खतरा है। इसके लिए कई बार अधिकारियों को सूचना दी गई है लेकिन फिर भी कोई पहल नहीं हो पाई है। साथ ही उन्होंने बताया कि छात्रों को स्कूल के सामने खुले आसमान के नीचे बैठाकर शिक्षा दी जा रही है। बता दें कि सरकार की शिक्षा का अधिकार और सर्व शिक्षा अभियान जैसी योजनाओं से भी बच्चों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।  </p>
<p><strong>कक्षा कक्षा हो जाता है गीला</strong><br />राजस्थान का एक ऐसा विद्यालय है जहां बारिश के समय के विद्यालय की दीवारों में झरने शुरू हो जाते वहीं स्कूल के अध्यापक बताते है कि बारिश के  समय स्कूल का भवन ढलान पर होने से ऊपर से पानी आता है  जिससे स्कूल की दीवारों में झरने चलने लग जाते जिससे पूरा फर्श गीला हो जाता है जिससे बच्चों को बाहर बैठाना पड़ता हैं जिससे बच्चों को पढ़ाई प्रभावित हो रही है। मनोहरथाना ब्लॉक के राजकीय प्राथमिक स्कूल मोतीपुरा की बिल्डिंग की हालत जर्जर हो गई है। यहां बच्चों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बिल्डिंग की हालत इतनी नाजुक है कि छत का पानी कमरों में रिसता है। जिससे काफी परेशानियां उठनी पड़ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिल्डिंग के अंदर के कमरों में छत से सीमेंट के टुकड़े गिरते हैं और पलास्तर भी निकल रहा है। जिससे छत और दीवारों में दरारे पड़ी हुई हैं। वही यह भवन करीबन 30 साल पुराना है और इसका मेंटेनेंस भी नहीं किया जा रहा है। बच्चों को यहां भेजना खतरे से खाली नहीं है। </p>
<p><strong>खुले में पढ़ाई से सांप-बिच्छु का खतरा</strong><br />बाहर कक्षाएं लगाना भी खतरा उत्पन्न करता है। बारिश में  खुले में बच्चो को बाहर सांप, बिच्छू आदि का डर भी बना रहता है। प्राथमिक स्कूल होने के कारण यहां छोटे बच्चे ही आते हैं और बच्चों को पढने के लिए एक अच्छा भवन तक नहीं है। शिक्षा विभाग के अफसर हो या अन्य जिम्मेदार व्यक्ति किसी का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा है। उधर, प्राथमिक विद्यालय का  जर्जर भवन  होने की वजह से कभी भी हादसा हो सकता है, जिसका खामियाजा जर्जर इमारत की छत के नीचे पढ़ रहे मासूम छात्रों को भुगतना पड़ सकता है लेकिन, झालावाड़ जिले के  शिक्षा विभाग के अफसरों को इसकी कोई परवाह नहीं है इसी वजह से जर्जर छत के नीचे मासूम छात्रों के जीवन में मौत का साया लगातार मंडरा रहा है।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />स्कूल की बिल्डिंग बहुत पुरानी है 1995 में बनकर तैयार हुई थी अब पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई ही जो कभी भी गिर सकती है बच्चे बाहर बैठ कर पढ़ाई करते है जिससे बच्चों की पढ़ाई खराब हो रही है। सरकार से मांग है की नया विद्यालय भवन बनाया जाए।<br /><strong>- मांगीलाल, ग्रामीण मोतीपुरा</strong></p>
<p>स्कूल में कोई सुविधा नहीं है मैंने मेरे बच्चों की टीसी कटवा कर दूसरे स्कूल में नाम लिखवाया इस स्कूल की बिल्डिंग की छत पूरी तरीके से टपकती है तथा कमरों में पानी भर जाता है। बच्चे कहां बैठेंगे सभी अध्यापक सुबह से बैठे रहते हैं। बच्चे स्कूल आते हैं पानी भरा रहा है। स्कूल में बच्चों की  बैठने की कोई व्यवस्था नहीं। सरकार से मांग है की नया विद्यालय बनाया जाए।<br /><strong>- फूलसिंह, ग्रामीण मोतीपुरा</strong></p>
<p>मोतीपुरा स्कूल का भवन क्षतिग्रस्त हो गया है। बारिश में स्कूल में पानी भरा रहता है। इसस्कूल भवन को बने 30 साल  हो गए हैं जब बारिश  नहीं आती है तो अध्यापकों द्वारा बच्चों को बाहर बैठा कर पढ़ाया जाता है अगर बारिश आ जाती है तो बच्चों को घर भिजवा देते हैं जिससे बच्चों की पढ़ाई खराब हो रही है।<br /><strong>- मांगीलाल, ग्रामीण मोतीपुरा</strong></p>
<p>यह मेरे क्षेत्र का मामला है ग्रामीणों ने सूचना दी थी की राजकीय प्राथमिक विद्यालय मोतीपुरा में विद्यालय भवन क्षतिग्रस्त है जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है में  प्रशासनिक अधिकारी और नेताओ से विद्यालय बनाने की मांग करती हूं।<br /><strong>- मोरम बाई तंवर, पूर्व प्रधान पंचायत समिति मनोहरथाना</strong></p>
<p>राजकीय प्राथमिक विद्यालय मोतीपुरा में प्रशासन को ध्यान देना चाहिए विद्यालय भवन को लेकर कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को इस बारे में अवगत करवा रखा लेकिन उसके बाद भी स्कूल पर ध्यान नहीं दिया  अभी कुछ दिन पहले मध्यप्रदेश के सागर में  दीवार गिरने से 9 मासूम बच्चों की मौत हो गई ऐसा  मनोहरथाना ब्लॉक में ना हो इसलिए प्रशासन को सख्त से सख्त कदम उठाकर नई बिल्डिंग की व्यवस्था करनी चाहिए। <br /><strong>- चंद्रभान सिंह, जिला सचिव झालावाड़</strong></p>
<p>राजकीय प्राथमिक विद्यालय मोतीपुरा के संस्था प्रधान को पीईईओ  द्वारा नोटिस जारी किया गया है पिछले कुछ वर्षों में अनुदान राशि आई हैं। उसका किस प्रकार काम में ली गई है। इस संदर्भ में जांच विचाराधीन है, किसी भी संस्था प्रधान की विद्यालय भवन संबंधित समस्या मरम्मत ,भवन में बारिश का  पानी टपकना संबंधित समस्या आती हैं तो आगे भेज देता हूं।<br /><strong>- हरिराम मीना, कार्यवाहक पीईईओ राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, पिंडोला</strong></p>
<p>राजकीय प्राथमिक विद्यालय मोतीपुरा में कुल 52 बच्चों का नामांकन है और अभी नामांकन चल रहे है लगभग 60 से 65 बच्चे तो हो ही जाएंगे। बच्चों को बैठने की समस्या आ रही है स्कूल की बिल्डिंग छोटी पड़ रही है साथ ही बिल्डिंग पूरी तरीके से जीर्ण  क्षीण हो चुकी है बारिश में छत टपकती रहती है। यहां पर बारिश के समय बच्चों को बिठाने में बहुत ज्यादा समस्या आती है। मैं यहां 4 साल से हूं और मैंने इन चार सालों में  10 से 12 बार अलग-अलग तरीके से अधिकारियों को अवगत करा दिया है। हमने उपखंड अधिकारी, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, तहसीलदार, पीईईओ  सरपंच विधायक और प्रधान को भी इस स्कूल के बारे में अवगत कराया है लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं हो पाया है बच्चे पढ़ने आते हैं और हम उनको बिठा नहीं पाते हैं जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।<br /><strong>- करण सिंह मीणा, संस्था प्रधान राजकीय प्राथमिक विद्यालय मोतीपुरा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Aug 2024 18:09:11 +0530</pubDate>
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                <title>जर्जर हालत: विद्यालय भवन की दीवार दरकी</title>
                                    <description><![CDATA[ बच्चों की बैठने की अव्यवस्था एवं ऊपर से शिक्षकों की कमी के चलते यहां परेशानियों का अंबार लगा हुआ है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/dilapidated-condition--wall-of-school-building-cracked/article-86700"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/jarjar-halat-vidylay-bavan-ki-deevar-darki...harnavdashahji,-baran-news-03-08-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>हरनावदाशाहजी। हरनावदाशाहजी क्षेत्र के कुम्भाखेड़ी ग्राम पंचायत स्तर पर संचालित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में खाल की तरफ वाले दोनों कमरों के पीछे की दीवार का कुछ हिस्सा शुक्रवार को बरसात से ढह गया। दीवार लगभग 10 फीट लम्बाई में दरकने की जानकारी सामने आई है। ग्रामीणों ने बताया कि विद्यालय भवन जर्जर अवस्था में है। अधिकारी आते हैं और खानापूर्ति करके चले जाते हैं। अधिकारियों की अनदेखी के चलता यहां कभी भी बढ़ा हादसा हो सकता है। एक ओर राज्य सरकार शिक्षा के लिए नवाचार के प्रयास कर रही है। ढांचागत सुविधाओं के नाम पर घोषणाओं का अम्बार लग रहा है। दूसरी ओर शिक्षा के इन कथित मंदिरों की व्यथा जानने की कोशिश करें तो दबे स्वर में समस्याओं के अम्बार दिखाई देते हैं। उनको गहराई से समझने पर मानों यह समस्याएं अंतहीन सी प्रतीत होती जान पड़ रही है। </p>
<p><strong>सुविधाओं की पोल खोल रहे विद्यालय</strong><br />ऐसी ही परेशानियों से जूझ रहे कुंभाखेडी सीनियर स्कूल वर्ष 2015 में सीनियर स्कूल क्रमोन्नत किया गया था लेकिन सुविधाओं की पोल खोलते यहां के विद्यालय भवन की हालत ऐसी है कि 12 कक्षाओं को बिठाने के लिए महज तीन-चार कमरे ही हैं। बच्चों की बैठने की अव्यवस्था एवं ऊपर से शिक्षकों की कमी के चलते यहां परेशानियों का अंबार लगा हुआ है। </p>
<p><strong>अब एक कक्षा कक्ष में ही संचालित होगी सभी कक्षाएं</strong><br />विद्यालय स्टाफ से मिली जानकारी के अनुसार स्कूल में पहले ही तीन कक्षा कक्ष में 12 कक्षाएं संचालित की जा रही है। अब बरसात के मौसम में एक कक्षा कक्ष में 12 कक्षाओं को संचालित करना मुमकिन नहीं है। शुक्रवार को दीवार दरकने की सूचना दूरभाष पर मुख्य ब्लॉक शिक्षाअधिकारी को भी दी गई। अब मरम्मत करवाने का प्रयास किया जा रहा लेकिन दीवार के दूसरी जगह से ढहने की संभावना जताई जा रही है। इस प्रकार स्कूल के बच्चे जगह की तंगी से परेशान है।</p>
<p><strong>नवीन बिल्डिंग बनाने की आवश्यकता</strong><br />विद्यार्थियों के शिक्षण व्यवस्था में व्यवधान हो रहा है। बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। जर्जर बिल्डिंग को जमीदोंज कर नवीन बिल्डिंग बनाने की आवश्यकता है। वर्ष 2015 में सीनियर स्कूल क्रमोन्नत किया गया था। विद्यालय में कला वर्ग खुलने से गांव के लोगों को अपने बच्चों के भविष्य को लेकर नई आस बंधी थी। लेकिन सुविधाओं के नाम पर यहां कुछ भी नहीं है। विद्यालय भवन की हालत ऐसी है कि 12 कक्षाओं को बिठाने के लिए महज तीन-चार कमरे ही हैं। उनमें भी बालक बालिकाओं पर खतरा मंडरा रहा है।<br /><strong>- राजकुमार भील, ग्रामीण।</strong></p>
<p>इस बारे में ब्लॉक लेवल से जिला लेवल तक शिकायत कर चुके हैं, लेकिन आज तक कुम्भाखेड़ी स्कूल की जर्जर बिल्डिंग की किसी ने सुध नहीं ली। साथ ही कुंभाखेड़ी के सीनियर स्कूल में पिछले कई वर्षों से अध्यापकों की कमी भी बनी हुई है। जिससे  बालकों की शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होती है। <br /><strong>- कैलाशचंद भील, समाजसेवी</strong></p>
<p>कुंभाखेड़ी में स्कूल की दीवार का कुछ हिस्सा गिर गया। जिससे विद्यार्थियों में भय बना हुआ है। वहीं पूरा स्कूल जर्जर हो रहा है कभी भी बिल्डिंग गिर सकती है। यहां वर्तमान में सीनियर स्कूल संचालित है जबकि बिल्डिंग प्राइमरी स्कूल की ही बनी हुई है वह भी काफी जर्जर हो चुकी है। <br /><strong>- कमलेश सेन, समाजसेवी। </strong></p>
<p>शुक्रवार को विद्यालय पहुंचने पर दीवार ढहने का पता चला तो तुरंत वहां बैठी चार कक्षाओं को अन्यत्र शिफ्ट किया गया। <br /><strong>- ओमप्रकाश मीना, प्रधानाध्यापक, रा0उ0 माध्य विद्यालय, कुंभाखेडी। </strong></p>
<p>दीवार दरकने की सूचना मिलने पर कुंभाखेड़ी विद्यालय भवन पहुंचकर जायजा लिया। कुछ पत्थर गिर गये थे। जिनको जिनको दोबारा लगाने के निर्देश दिए गए हैं। विद्यालय भवन में आई दरारों को लेकर उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है।<br /><strong>- दिनेश भार्गव, मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, छीपाबड़ौद। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 03 Aug 2024 17:11:29 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - हरकत में आए शिक्षा विभाग के अधिकारी</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रामीणों का कहना है कि उच्च अधिकारियों द्वारा वापस निष्पक्ष जांच करवाई जाएं और दोषियों पर कार्यवाही की जाए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/effect-of-news---education-department-officials-came-into-action/article-76674"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/t21rer12.png" alt=""></a><br /><p>मनोहरथाना।  मनोहरथाना ब्लॉक के राजकीय प्राथमिक विद्यालय आफूखेड़ी में 10 सालों से विद्यालय भवन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त होने के कारण गांव के बच्चे एक चबूतरे पर शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर है। वहीं विद्यालय में राज्य सरकार द्वारा दी जाने वाला राशि से भी बच्चो के खेल की  और विद्यालय में कोई भी सामग्री अध्यापक द्वारा नहीं खरीदी गई और पैसे उठा लिए। वहीं विद्यालय में ना तो खेल का सामान हैं इस खबर को लेकर दैनिक नवज्योति टीम ने मुद्दा उठाया था। 1 मई को शिक्षा का मंदिर खंडहर में तब्दील,सात सालों से टीन शेड के नीचे पढ़ रहे विद्यार्थी...शीर्षक से खबर प्रकाशत की थी। जिसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने गुरुवार को टीम का गठन किया और जांच के आदेश दिए। वहीं मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी द्वारा जांच समिति बनाई, जिसमें बनवारी लाल पीईइओ बांसखेड़ा,सुनील कुमार शर्मा पीईइओ बांसखेड़ी,राजेंद्र कुमार मीणा पीईइओ कामखेड़ा द्वारा गांव आफूखेड़ी में भौतिक रूप से उपस्थित होकर विद्यालय भवन,पोषाहार तथा विद्यालय में जारी बजट में खरीदी गई सामग्री संबंधित जांच की गई।</p>
<p><strong>टीम क्षतिग्रस्त विद्यालय भवन में पहुंची</strong><br />जब जांच टीम के साथ विद्यालय के संस्था प्रधान अनिल मेवाड़ा आफूखेड़ी विद्यालय के क्षतिग्रस्त भवन  पहुंचे तो वहां ग्रामीण भी पहुंच गए।  जांच टीम को समस्या बताई उसके बाद जब वीडियो पर विद्यालय के संस्था प्रधान अनिल मेवाड़ा को नजर गई तो उन्होंने ग्रामीणों से  वीडियो नही बने को लेकर माना किया लेकिन ग्रामीणों ने वीडियो बंद नही किया तो संस्था प्रधान अनिल मेवाड़ा जांच टीम के वहां से भाग गया। ग्रामीणों का कहना है कि जांच टीम ने अध्यापक की बिना मौजूदगी में ही अध्यापक के पक्ष में जांच बना ली और अध्यापक का पक्ष ले लिया। जब ग्रामीणों से जांच टीम ने हस्ताक्षर करने की बोला तो ग्रामीणों ने हस्ताक्षर करने से मना कर दिया और निष्पक्ष जांच की बात की। इस दौरान जांच टीम ने ग्रामीणों के बिना  हस्ताक्षर के ही जांच उच्च अधिकारियों तक भेज दी। ग्रामीणों का कहना है कि उच्च अधिकारियों द्वारा वापस निष्पक्ष जांच करवाई जाएं और दोषियों पर कार्यवाही की जाए।</p>
<p><strong>जांच टीम ने यह की जांच</strong><br />जांच टीम ने रिपोर्ट दी की आफूखेड़ी विद्यालय भवन पूर्णतया क्षतिग्रस्त है, जिसके खिड़की, दरवाजे, विद्यालय का संपूर्ण सामान दीवारों को तोड़कर सामान चुरा लिया। साथ ही विद्यालय का फर्श पूरी तरह से उखड़ा पाया गया, आफूखेड़ी विद्यालय का भवन खेतों के मध्य स्थित है, जहां पहुंचने के लिए कोई मार्ग नहीं है ,विद्यालय भवन की छतों के तार निकले हुए है,छत कमजोर है जो कभी भी गिर सकती है,विद्यालय में मेनू के अनुसार नियमित रूप से भोजन बनाया जा रहा है। स्रोत विद्यार्थी और कुक कम हेल्पर,बच्चो से प्राप्त जानकारी के अनुसार गुरुवार को फल वितरित किए जाते है,स्थान के अभाव के कारण अध्यापक पोषाहार और खेल सामग्री रोजाना अपने घर से ही लाते ले जाते है,अध्यापक द्वारा  नियमानुसार सीएसजी और अन्य सामग्री को खरीदा गया है यूथ एवं इको क्लब की राशि का उपयोग पर्यावरण स्वच्छता तथा विद्यालय हित में उपयोग में लिए गये।</p>
<p><strong>जांच टीम और संस्था प्रधान के बयान में अंतर</strong><br />आपको बता दे की जांच टीम द्वारा अध्यापक द्वारा खेल सामग्री रोजाना अपने घर से लाने की बात कही, लेकिन जब उस दिन आफूखेड़ी विद्यालय के संस्था प्रधान अनिल मेवाड़ा ने कहा था की खेल सामग्री में मेरे घर ही रखता हूं और जब जरूरत होती है मैं गाड़ी में ले आता हूं। साथ हो जांच टीम ने बताया कि यूथ एवं इको क्लब की राशि का उपयोग पर्यावरण स्वच्छता तथा विद्यालय हित में उपयोग में ली जाती है लेकिन करीबन 10 सालों से विद्यालय भवन क्षतिग्रस्त है साथ ही बच्चे गांव के एक चबूतरे पर पढ़ाई करते है ना तो जिस जगह बच्चे पढ़ाई करते है वहां अस्थाई शौचालय है ना ही पीने के पानी को कोई व्यवस्था है बच्चो द्वारा घर से ही पानी लाना पढ़ता है।</p>
<p>जांच अधिकारी जब मौके पर आए तो सब ग्रामीण वहां पर मौजूद थे, जांच अधिकारियों द्वारा कहा की  तुम्हारे ऊपर मुकदमा दर्ज हो जाएगा उसके बाद मैने वीडियो बनाया उसके बाद मेरे से संस्था प्रधान ने वीडियो बंद करने की कहा। हम उस जांच से सहमत नहीं हैं। दोबारा उच्च अधिकारियों द्वारा जांच की जाए हम उनको बताएंगे।<br /><strong>- अबरार खान ग्रामीण</strong></p>
<p>हम अध्यापक से  बोलते  भी थे कि जो खेल का सामान लाए वो कहा है तो कहते है की मेरे घर  है, साथ ही पोषाहार  उनके घर पर ही रखते है, बुधवार जो जांच की है वो अध्यापक के पक्ष में जांच की हमारी मांग है कि वापस जांच हो और उच्च अधिकारीयों द्वारा जांच की जाए।<br /><strong>- अख्तर खान ग्रामीण</strong></p>
<p>इस चबूतरे पर जो चद्दर चढ़ रहे है वो अगले सत्र 2022- 23 में चढ़ाए थे। साथ ही अशरफ भाई के मकान से ही बच्चे  पानी पीते है और जहां चबूतरे पर बच्चो को पढ़ाया जाता है वहां कोई अस्थाई शौचालय नहीं है जो भी जांच हुई है उससे हम सहमत नही है। जो जांच की है वो अध्यापक को बचाने के लिए की गई है हमारी मांग है कि वापस उच्च अधिकारियों द्वारा जांच करवाई जाए।<br /><strong>- शाहिद खान ग्रामीण</strong></p>
<p>विद्यालय में जो पोषाहार बनता है वो अध्यापक उनके घर ही रखते है कभी पोषाहार लेकर नही आते है और यहां खत्म हो जाता है तो मेरे से बोलते है की आपके घर से  लेके पोषाहार बना दो,और जो चबूतरे पर चद्दर चढ़ रहे है यह पिछले साल चढ़ा दिए थे। उसमे भी इन्होंने तो 17 हजार दिए थे बाकी 6 हजार मैंने मेरे पास से दिए थे।<br /><strong>- अशरफ खां कुककम हेल्पर पति</strong></p>
<p>जो जांच की है वो अध्यापक के पक्ष में जांच हुई है। हमारी मांग है कि वापस उच्च अधिकारियों द्वारा जांच करवाई जाए।<br /><strong>- अशफाक खान ग्रामीण</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />जांच का भी बिंदु है जो भी जांच होगी। उसके नियम अनुसार कार्यवाही की जाएगी।          <br /><strong>- हंसीराज मीणा डीईओ झालावाड़</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 May 2024 16:21:43 +0530</pubDate>
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                <title>शिक्षा का मंदिर खंडहर में तब्दील: सात सालों से टीन शेड के नीचे पढ़ाई कर रहे विद्यार्थी </title>
                                    <description><![CDATA[ग्रामीणों का कहना है कि राजकीय प्राथमिक आफूखेड़ी का भवन गांव से एक किमी दूर सुनसान जगह पर है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/temple-of-education-turned-into-ruins--students-studying-under-tin-shed-for-seven-years/article-76463"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/t21rer-(1)3.png" alt=""></a><br /><p>मनोहरथाना। मनोहरथाना से 15 किलोमीटर दूर राजकीय प्राथमिक आफूखेड़ी का भवन जर्जर हो चुका है। ऐसे में 7  सालों से आफूखेड़ी गांव के बच्चों को गांव में  एक घर के बाहर चबूतरे पर बैठ कर शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर है। वैसे तो स्कूल में 25 बच्चों का नामांकन है और यहां महज एक ही अध्यापक बच्चों को पढ़ाता है। स्कूल भवन के दरवाजे और खिड़कियां तक नहीं है। स्कूल भवन खंडहर प्रतित होता है। विगत दस सालों से स्कूल भवन बदहाल स्थिति में है। ग्रामीण बताते है कि शिक्षा विभाग के अधिकारी आंखें मूंदे बैठे है। ऐसे में बच्चों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल का भवन जर्जर है। उसी में पुताई करवा देते थे लेकिन उस स्कूल में 7 सालों से बच्चे नहीं पढ़ रहे है। कभी भी हमारे बच्चों को अध्यापक द्वारा खेल का सामान लाकर दिया गया ना ही यहां बच्चे खेल खेलते है। ग्रामीणों का कहना है कि राजकीय प्राथमिक आफूखेड़ी का भवन गांव से एक किमी दूर सुनसान जगह पर है। स्कूल तक जाने का रास्ता भी बदहाल है। ऐसे में गांव में ही अशरफ खान के घर के बाहर चबुतरे पर टीन शेड के नीचे बच्चों को पढ़ाई कराई जा रही है। स्कूल भवन के दरवाजे और खिड़कियां अज्ञात लोग निकाल कर ले जा चुके है। विगत दस साल से स्कूल भवन खंडहर में तब्दिल हो चुका है। </p>
<p><strong>स्कूल के लिए आता है पर्याप्त बजट</strong><br />वैसे तो राज्य सरकार द्वारा सभी स्कूलों में हर साल अलग-अलग मद से हजारों रुपए दिया जाता है जिससे स्कूल की भौतिक सुविधाएं मिल सके। साथ ही बच्चों को खेल खेल में पढ़ाया जा सके। वहीं ईको कलब द्वारा दी जाने वाली राशि से  बच्चे पर्यावरण को ज्ञान प्राप्त कर सके। सत्र 2023 - 24 में वैसे तो राजकीय प्राथमिक विद्यालय आफूखेड़ी  में भी सीएसजी के मध्यम से 25 हजार रुपए सरकार द्वारा दिया गया है लेकिन जब स्कूल भवन ही जर्जर है तो उसका इस्तेमाल कहां किया जा रहा है? वैसे तो सीएसजी के मध्यम से दी जाने वाली राशि से विद्यालय की भौतिक सुविधाएं दूर करनी होती है लेकिन आफूखेड़ी विद्यालय में भौतिक सुविधा भी दूर नही हो सकी ग्रामीणों की माने तो आफूखेड़ी स्कूल में  करीबन पांच साल से अनिल मेवाड़ा के हाथ में इस विद्यालय की चाबी है लेकिन 5 साल में आज तक आफूखेड़ी विद्यालय के तस्वीर दिनों दिन बद से बदतर होती जा रही है। सीएसजी के मध्यम सरकार द्वारा दी जाने वाली  राशि में से 15 हजार रुपए को विद्यालय की भौतिक सुविधा के लिए खर्च किया जाता है साथ ही बाकी 10 हजार रूपए का साल भर का खर्चा जिस में आॅनलाइन,विद्यालय की  स्टेशनरी आदि के लिए काम में लिया जा सके। </p>
<p><strong>खेल और ईको क्लब के लिए भी आती राशि</strong><br />राज्य सरकार द्वारा हर साल बच्चों के लिए खेल और ईको क्लब के माध्यम से खेल के 5 हजार और ईको क्लब के 5 हजार हर विद्यालय में दिया जाता है जिससे कि बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाया जा सके और बच्चे भी खेल खेल में पढ़ सके। साथ ही इको क्लब के माध्यम से मिलने वाली राशि से पर्यावरण से संबंधित अस्थाई सामान विद्यालय में लाकर बच्चों को पर्यावरण की जानकारी दी जा सके  लेकिन राजकीय प्राथमिक विद्यालय आफूखेड़ी में इसके विपरित होता नजर आ रहा है। विद्यालय में खेल के लिए कोई खेल सामग्री उपलब्ध नही है और ना ही विद्यालय में पर्यावरण संबंधित कोई भी सामग्री है।    </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />स्कूल की खेल सामग्री तो मेरे घर पर रखी है। जब  जब जरूरत पड़ती है मैं गाड़ी में रख कर लाता हूं  और जो पैसा आता है वो इस चबूतरे की देख रेख में खर्च कर दिया बाकी में मेरे हिसाब से काम करता हूं।<br /><strong>- अनिल मेवाड़ा, संस्था प्रधान, राजकीय प्राथमिक स्कूल आफूखेड़ी</strong></p>
<p>आफूखेड़ी विद्यालय से जो भी बिल आए थे सब क्लियर है। वैसे  अमाउंट का तो मुझे पता नहीं है कितने अमाउंट के बिल थे। सभी मिल मार्च में क्लियर हो गए थे।<br /><strong>- सांवरिया बैरवा, कनिष्ठ सहायक,राजकीय प्राथमिक स्कूल आफूखेड़ी</strong></p>
<p>सीएसजी में 25 हजार और खेल के 5 हजार और ईको क्लब के 5 हजार आते है। ईको क्लब के लिऐ तो बिल्डिंग नही है तो किताब वगैरा खरीद लेते है बाकी जो पैसा हैं स्कूल के जो नियम होते है वैसे खर्च करते है। खेल सामग्री कहां रखे वहां बिल्डिंग ही नहीं है तो किसके यहां रखे आप ही बताओ। संस्था प्रधान खेल सामग्री घर पर ही रखते हैं, जब वो आते है तो गाड़ी पर ले आते है। <br /><strong>- बनवारी लाल,कार्यवाहक पीआईओ बांसखेड़ा</strong></p>
<p>नए सत्र में स्कूल के नए भवन के लिए जगह देखकर भवन का निर्माण किया जाएगा। स्कूल में जो पैसा आता है उनकों तो बच्चों के ऊपर खर्च करना ही पड़ता है। वैसे जो भी सामान है वो विद्यालय में ही रखना पड़ता है। वैसे इस सत्र का समापन चल रहा है फिर भी में पीईईओ से बात कर लूंगा और जांच करवाई जायेगी। जो भी दोषी होगा। उस पर कार्यवाई की जाएगी।<br /><strong>- चंद्रशेखर लुहार, कार्यवाहक ब्लॉक शिक्षा अधिकारी मनोहरथाना</strong></p>
<p><strong>क्या कहते है ग्रामीण</strong><br />आफूखेड़ी प्राथमिक स्कूल भवन बदहाल हो चुका है। स्कूल भवन के अभाव में बच्चे गांव में ही एक चबुतरे पर पढ़ने को मजबूर है। यहां पढ़ने वाले बच्चों के लिए एक बार ही अध्यापक खेल के सामान  लेके आए थे वो भी गांव में क्रिकेट खेलने वाले लड़को को वो खेल सामग्री दे दी गई। उसके बाद अब तक कोई खेल सामग्री  नही आए और सरकार द्वारा जो पैसे दिए  जाते है वो भी पता नहीं कहा खर्च करते है।<br /><strong>- शाहिद खान, वार्ड पंच आफूखेड़ी </strong></p>
<p>7 साल से मेरे घर के बाहर चबूतरे पर स्कूल के बच्चे पढ़ाई करते है। मंैने आज तक भी अध्यापकों से चबूतरे पर पढ़ाने का किराया नहीं लिया। पोषाहार भी अध्यापक अपने घर पर ही रखते हैं और पोषाहार भी स्कूल में तो बच्चों की जरूरत के हिसाब से उनके घर से ही लाते है। बच्चो को इस साल में एक दो बार ही फल फ्रूट खिलाए।<br /><strong>- अशरफ खान, ग्रामीण</strong></p>
<p>संस्था प्रधान ने मेरे से तीन बिल पर हस्ताक्षर तो करवाए थे लेकिन उन बिलों पर रूपए नही भर रखे थे मंैने पूछा भी कि इसमें पैसे क्यों नहीं भरे तो मेरे से कहां की जीतना बच्चों के लिए खर्च होगा उतना में भर लूंगा।<br /><strong>- इकलाक खां एसएमसी अध्यक्ष </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 May 2024 17:02:04 +0530</pubDate>
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                <title>स्कूल में बच्चे परेशान: घटिया निर्माण से टपकते कक्षा कक्षों में पढ़ने को मजबूर नौनिहाल</title>
                                    <description><![CDATA[जिला कलक्टर से लोगों ने मांग की है कि उक्त मामले की जांच कर गुणवत्ताहीन मरम्मत करने वाले के खिलाफ कार्रवाई की जाए और स्कूल की मरम्मत दोबारा से कराई जाए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/children-troubled-in-school--children-forced-to-study-in-classrooms-dripping-with-shoddy-construction/article-55442"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/kota-news1.png" alt=""></a><br /><p>शाहाबाद। उपखंड मुख्यालय शाहाबाद क्षेत्र के भीलखेड़ा माल ग्राम पंचायत के घोघरा में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित है। जिसमें मात्र दो अध्यापक के द्वारा पढ़ाई कराई जाती है जबकि उक्त विद्यालय भवन बिल्कुल जर्जर अवस्था में हैं। इसकी शिकायत कई बार गांव के लोगों द्वारा एवं स्टाफ द्वारा उच्च अधिकारियों से की गई उच्च अधिकारियों द्वारा  विद्यालय की मरम्मत आदि का कार्य किसी बारा  के ठेकेदार को दे दिया गया परंतु हालत जस के तस बने हुए हैं।</p>
<p><strong>मरम्मत के बाद भीटपकता है पानी</strong><br />गांव के कुबेर सिंह मजबूत सिंह, राधेश्याम जसराम आदि ने बताया कि विद्यालय की घटिया मरम्मत के चलते बच्चों को टपकती हुए कमरों में बैठने को मजबूर होना पड़ रहा है। जिस ठेकेदार द्वारा घटिया मरम्मत कराई गई है। उसे ब्लैक लिस्ट किया जाना चाहिए विद्या के मंदिर में घटिया मरम्मत कर दी गई जो बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। जब सरकार द्वारा उच्च गुणवत्ता पर कार्य करने का पैसा दिया जाता है तो फिर यह गुणवत्ताहीन मरम्मत करने वालों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जाती। जिला कलक्टर से लोगों ने मांग की है कि उक्त मामले की जांच कर गुणवत्ताहीन मरम्मत करने वाले के खिलाफ कार्रवाई की जाए और स्कूल की मरम्मत दोबारा से कराई जाए। </p>
<p><strong>बच्चों की पढ़ाई में हो रहा व्यवधान</strong><br />घोघरा विद्यालय की मरम्मत का कार्य फरवरी 2023 में कराया गया था। जिससे बरसात के समय में बच्चों को टपकती हुए छत के नीचे ना बैठना पड़े परंतु हालत जस के तस बने हुए हैं और बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है। एक तरफ तो सरकार द्वारा गांव-गांव में विद्यालय खोल दिए गए परंतु कहीं शिक्षक नहीं है तो कहीं पर विद्यालय जर्जर हालत में है और बच्चे टपकती छत के नीचे बैठकर पढ़ने को मजबूर हो रहे हैं जबकि सरकार द्वारा अधिक से अधिक बच्चे विद्यालय में आए इसके लिए जागरूकता अभियान आदि चलाए जाते हैं परंतु जब विद्यालय भवन ही जर्जर अवस्था में होगा तो पढ़ाई बाधित होना स्वाभाविक है। कस्बेवासी नीरज दरबार, दौलत, सिंह यादव आदि ने जिला कलेक्टर को पत्र भेज कर मरम्मत कार्य करने की और ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। </p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />अभी मरम्मत को 4 महीने ही हुए हैं। ऐसे में विद्यालय भवन की छत से पानी आ रहा है। ठेकेदार द्वारा गुणवत्ताहीन सामग्री प्रयोग कर मरम्मत कर दी गई ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई हो और मरम्मत दोबारा करवाई जाए। <br /><strong>- कुबेर सिंह यादव, एडवोकेट निवासी घोघरा।</strong></p>
<p>विद्यालय में शिक्षकों के पद भी खाली पड़े हुए हैं। उन्हें भी भरा जाए। जिससे छात्र-छात्राओं की पढ़ाई खराब ना हो गुणवत्ताहीन मरम्मत करने वाले खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। <br /><strong>- दरबार सिंह यादव, निवासी घोघरा। </strong><br />    <br />विद्यालय की गुणवत्ताहीन मरम्मत कर दी गई। हम सभी गांव वाले जिला कलक्टर से मांग करते हैं कि विद्यालय की मरम्मत कराई जाए। <br /><strong>- दौलतराम, निवासी घोघरा। </strong></p>
<p>विद्यालय भवन की मरम्मत का कार्य माह फरवरी 2023 में कराया गया था परंतु अभी भी छत से पानी आता है। उक्त समस्या के बारे में उच्च अधिकारी को अवगत करा रखा है। <br /><strong>- सुनील मेहता, हेडमास्टर, राजकीय प्राथमिक विद्यालय घोघरा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Aug 2023 17:26:39 +0530</pubDate>
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                <title>शिक्षा के मंदिर में दरारें, छात्राओं को खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[करीब पांच वर्ष पूर्व बने कमरों में दरारें हो चुकी है। दो बार परकोटे की दीवार गिरने से अंदर के भवन भी क्षतिग्रस्त होते जा रहे है।  स्कूल में अध्ययनरत 500 मासूम बेटियों की जान को खतरा बना हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/cracks-in-the-temple-of-education--threat-to-the-lives-of-innocent-daughters/article-22133"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/a-1-copy5.jpg" alt=""></a><br /><p>देई। कस्बे में स्थित राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक स्कूल भवन में जगह-जगह दरारें पड़ गई है। स्कूल भवन के परकोटे की दीवार ढह गई है। ऐसे में स्कूल में अध्ययनरत 500 मासूम बेटियों की जान को खतरा बना हुआ है। मजबूत कक्षा कक्ष के अभाव में बच्चियों को जर्जर भवन में बिठाकर पढ़ाया जा रहा है। देई गांव के रामराय शर्मा का कहना है कि स्कूल के क्षतिग्रस्त भवन परकोटे की दीवारों से दुर्घटना घटित होने की चिंता बढ गई है। अब विद्यालय के लिए नई जगह का आंवटन होना चाहिए।  शीघ्र समस्या समाधान नही हुआ तो मजबूर लोग आंदोलन करने को मजबूर हो जाएंगे। ओमप्रकाश साहू ने बताया कि  छात्राओं के साथ ही स्कूल भवन के आसपास सटे बाजार में रहने वाले लोगों के लिए भी अब गढ़ का  जर्जर परकोटा खतरा बनता जा रहा है। घनश्याम मीणा के अनुसार रियासतकालीन गढ़ में बालिका विद्यालय संचालित हो रहा है। लेकिन अब परकोटे की दीवारें क्षतिग्रस्त होकर गिरने लगी है। जिसके कारण अंदर विद्यालय का भवन भी क्षतिग्रस्त हो गया है। 2 बार परकोटे की दीवारें गिर चुकी है और दीवारें जगह-जगह से झूक गई है।</p>
<p>छात्राओं की सुरक्षा के लिए विद्यालय प्रबन्धन ने क्षतिग्रस्त हिस्सों पर जालियां लगाई है। जिससे लोगों में भय व्याप्त हो गया है।  विद्यालय मे कुल 13 कमरे बने हुए है। जिनमें तीन कमरों मे खस्ताहाल होने से ताला लगाकर बंद कर दिया गया है। एक कमरे में आॅफिस संचालित है। बाकि अन्य में कक्षा कक्ष संचालित है। चिंता का विषय करीब पांच वर्ष पूर्व बने कमरों से है। जिनमें दरारें हो चुकी है। दो बार परकोटे की दीवार गिरने से अंदर के भवन भी क्षतिग्रस्त होते जा रहे है। वही गढ़ की शुरूआत में बना हुआ रियासतकालीन भवन किसी भी काम में नही लिया जा रहा है। </p>
<p>बालिका विद्यालय में करीब 500 बालिकाओं के नामांकन है जिनके अनुरूप कक्षा कक्ष नही होने से क्षतिग्रस्त कमरों में बिठाकर बालिकाओं को पढ़ाया जा रहा है। विद्यालय की स्थिति से उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया है। परकोटे की क्षतिग्रस्त दीवारों के कारण भी समस्याएं आ रही है।<br /><strong>- विनिता वर्मा,  प्रधानाचार्या राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक स्कूल </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 Sep 2022 14:30:22 +0530</pubDate>
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