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                <title>encouragement - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>'जो खेलता है, वो खिलता है' PM Modi का युवाओं को बड़ा संदेश, खेलों को बताया उज्ज्वल भविष्य का रास्ता</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' में युवाओं द्वारा खेल को करियर चुनने पर खुशी जताई। उन्होंने नागालैंड के दो बेहतरीन प्रयासों—बच्चों के लिए 'नागालैंड बेबी लीग' और बेटियों के लिए 'नागालैंड वुमेन फुटसाल लीग' (इनडोर फुटबॉल) की जमकर सराहना की, जो प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के नए अवसर दे रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/one-who-plays-blossoms-pm-modis-big-message-to-the/article-158312"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/modii.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि पहले की तुलना में अब कहीं अधिक युवा खेलों को करियर के रूप में अपना रहे हैं। पीएम मोदी ने अपने मासिक कार्यक्रम मन की बात की 135वीं कड़ी में रविवार को कहा, "मैं अक्सर कहता हूँ, जो खेलता है, वो खिलता है। आज देश में ऐसे युवाओं की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है, जो खेल भी रहे हैं और खिल भी रहे हैं। पहले की तुलना में अब कहीं अधिक युवा खेलों को करियर के रूप में अपना रहे हैं। मुझे नागालैंड के दो ऐसे प्रयासों के बारे में जानकारी मिली है, जो बहुत दिलचस्प हैं। पहला प्रयास है 'नागालैंड बेबी लीग'. नाम सुनकर आपको जरूर लगता होगा ये बहुत छोटे बच्चों की कोई साधारण लीग होगी लेकिन ऐसा नहीं है।</p>
<p>ये पांच से 10-12 साल की आयु के छोटे-छोटे बच्चे, फूल जैसे बच्चों की एक असाधारण लीग है और इन बच्चों के फुटबाल खिलाड़ियों की एक ऐसी लीग है, जो उनकी रफ्तार को और प्रतिभा के लिए उनको प्रेरित भी करती है और उनकी पहचान भी बनाती है। इसकी शुरुआत नागालैंड के अधिक-से-अधिक बच्चों को फुटबाल से जोड़ने के लिए हुई थी। पांच से बारह वर्ष तक के लड़के और लड़कियां इसमें हिस्सा ले सकते हैं। ये लीग अब अपने तीन वर्ष पूरे कर चुकी है। इस लीग का बच्चों के मन पर बहुत अच्छा प्रभाव पड़ा है।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि नागालैंड में एक और अच्छा प्रयास हो रहा है। इसका नाम है, 'नागालैंड वुमेन फुटसाल लीग', हो सकता है आपके लिए ये 'फुटसाल' एक नया नाम होगा, मैं आपको बताता हूँ फुटसाल को इनडोर फुटबाल भी कहा जाता है। इसमें एक टीम में केवल पांच खिलाड़ी होते हैं। खेल का मैदान भी फुटबाल के मैदान से बहुत छोटा होता है। इस कारण खिलाड़ियों को तेज फैसले लेने होते हैं। उन्हें अपनी तकनीक और स्किल का बेहतर इस्तेमाल करना पड़ता है। नागालैंड की वुमेन फुटसाल लीग हमारी बेटियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अच्छा अवसर दे रही है। मैं ऐसी पहलों के लिए नागालैंड के लोगों की सराहना करता हूं। ऐसे प्रयास देश के दूसरे हिस्सों को भी प्रेरणा देते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:53:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>यूनिटी मॉल से स्थानीय उत्पादों को मिलेगा प्रोत्साहन, राजस्थान मंडपम सुविधाओं से होगा युक्त : भजनलाल</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान मंडपम विश्वस्तरीय सुविधाओं से युुक्त, आयोजनों की करेगा मेजबानी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/local-products-will-get-encouragement-from-unity-mall-chief-minister/article-101070"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/257rtrer25.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान मंडपम विश्वस्तरीय सुविधाओं से युक्त और अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय होगा। उन्होंने कहा कि राजस्थान मंडपम में आवश्यक व्यवस्थाओं और सुविधाओं की पुख्ता कार्य योजना बनाई जाए ताकि यहां पर बड़े आयोजन सुगमता से हो सके। सीएम सीएमओ में जयपुर में प्रस्तावित राजस्थान मण्डपम एवं यूनिटी मॉल की कार्य योजना के संबंध में उच्च स्तरीय बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राजस्थान मंडपम स्थानीय कला, संस्कृति और पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ सांस्कृतिक और व्यावसायिक आयोजनों के लिए प्रमुख आकर्षण के रूप में उभरेगा। उन्होंने कहा कि देश एवं विदेशों के बेहतरीन कन्वेंशन सेंटर का परीक्षण कर राजस्थान मंडपम में विश्वस्तरीय सुविधाएं विकसित की जाएगी। उन्होंने यहां विकसित होने वाले कन्वेंशन सेंटर, एक्जीबिशन सेंटर, मीटिंग हॉल एवं आगन्तुकों की पार्किंग के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए।</p>
<p>वन स्टॉप मार्केट प्लेस के रूप में कार्य करेगा यूनिटी मॉल: मुख्यमंत्री ने कहा कि जयपुर में ‘मेक इन इंडिया’ तथा ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट’ के तहत स्वदेशी उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए यूनिटी मॉल का भी निर्माण किया जाएगा। यह मॉल जीआई प्रोडक्ट, हस्तशिल्प उत्पाद और अन्य स्थानीय उत्पादों के प्रमोशन एवं विक्रय के लिए वन स्टॉप मार्केट प्लेस के रूप में कार्य करेगा। इसमें दुकानकारों की आवश्यकताओं के दृष्टिगत सभी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। साथ ही यहां कॉमन ट्रेनिंग सेन्टर, ओपन थिएटर, बिजनेस मीटिंग हॉल एवं सेमिनार हॉल आदि सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। बैठक में प्रस्तुतीकरण से राजस्थान मंडपम एवं यूनिटी मॉल की प्रस्तावित कार्ययोजना के बारे में मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jan 2025 14:06:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title> योग में दे रही योगदान, अब मिले प्रोत्साहन</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा शहर की बालिकाएं भी योग खेल में अपना भविष्य बनाने में जुटी हुई है। खेल में शामिल योग आगे बढ़ने की दौड़ में शामिल हो गया है, लेकिन अब जरूरत इन योगा खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/contributing-to-yoga--now-get-encouragement/article-17696"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/yog.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर योग को पहचान दिलाने में भारत का अहम योगदान हैं। केन्द्र सरकार ने योग को खेल की श्रेणी में शामिल कर युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर दिया है।अब इसे खेल बनाने से युवा प्रतिभा अपना हुनर राष्ट्रीय अन्तराष्ट्रीय स्तर पर भी दिखा पाएंगे। कोटा शहर की बालिकाएं भी योग खेल में अपना भविष्य बनाने में जुटी हुई है। खेल में शामिल योग आगे बढ़ने की दौड़ में शामिल हो गया है, लेकिन अब जरूरत इन योगा खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने की है।<br /><br /><strong>10 का कारवां 25 तक पहुंचा</strong><br />शरीर को स्वस्थ व चुस्त बनाने के लिए योग का सहारा आम है। अब खेल का दर्जा मिलने के बाद इसके प्रति बालिकाओं का भी रुझान बढ़ने लगा है। तलवंडी स्थित श्यामाप्रसाद मुखर्जी स्टेडियम में नियमित रूप से बालिकाओं की योगा क्लास लगाई जा रही है। पहले इस क्लास में बालिकाओं की संख्या कम थी। बाद में योग के फायदे देखकर बालिकाओं का कारवां बढ़ता चला गया। वर्तमान में क्लास में 25 बालिकाएं नियमित रूप से योगाभ्यास कर रही हैं।<br /><br /><strong>जिला प्रतियोगिता में दिखाएंगी दम</strong><br />कोटा शहर में आगामी 7 अगस्त को जिला स्तरीय ओपन योगासन प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।<br /> इस प्रतियोगिता में यहां की 25 बालिकाएं भी भाग लेंगी। इसके लिए विशेष तैयारी की जा रही है। इस प्रतियोगिता में जिले भर के योगा खिलाड़ी भाग लेंगे। इस कारण यहां की बालिकाओं जीत के लिए निरन्तर अभ्यास कर रही हैं।<br /><br /> योग हमारे जीवन की शक्ति, ध्यान करने की क्षमता और उत्पादकता को बढ़ाता है। इससे स्वास्थ्य की समस्याएं भी दूर होती हैं। कोटा जिले में बालिकाओं का योग के प्रति रुझान बढ़ा है। योग को खेल में शामिल करने से अब बालिकाओं का उत्साह दोगुना हो गया है।<br /><strong>- निमिषा, योग कोच</strong><br /><br /> मैने योग में एमए कर रखा है और अभी योगा की ऑनलाइन क्लासेज ले रही हूं। वर्तमान में योग को और प्रोत्साहन देने की जरूरत है। कोटा में भी पीएचडी के स्तर तक बच्चों को योग की पढ़ाई कराई जाए और सरकारी एवं प्राइवेट कॉलेज, स्कूल में योग शिक्षक की भर्तियां निकाली जानी चाहिए। इस प्रयास से योग के विकास को और गति मिलेगी।<br /><strong>- सुप्रिया शर्मा, राष्ट्रीय खिलाड़ी</strong><br /><br />योग को खेल में शामिल करने से बालिकाओं का इसमें रुझान बढ़ेगा। वह इस खेल में राज्य स्तरीय कांस्य पदक विजेता है और वर्तमान में राष्ट्रीय स्तर प्रतियोगिता की तैयारी कर रही हूं। राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए वह काफी मेहनत कर रही है। इस बार उसे गोल्ड मेडल लाने की उम्मीद है। सरकार को इस खेल को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष प्रयास करना चाहिए।<br /><strong>- इशिका नागर, खिलाड़ी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Aug 2022 12:47:31 +0530</pubDate>
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                <title>एस्ट्रोटर्फ मैदान और प्रोत्साहन मिले तो फिर जीत जाए हॉकी</title>
                                    <description><![CDATA[हॉकी खेल का गढ़ रहा कोटा वर्तमान में सुविधाओं का अभाव झेल रहा है। कोटा में ओलंपियन और राष्टÑीय स्तर के खिलाड़ी तो तैयार हुए, लेकिन जो सुविधाएं मिलनी चाहिए थी उसके लिए अभी भी जद्दोजहद जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/if-you-get-astroturf-field-and-encouragement-then-hockey-can-win/article-14702"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/astroturf-maidan-hockey.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। हॉकी खेल का गढ़ रहा कोटा वर्तमान में सुविधाओं का अभाव झेल रहा है। कोटा में ओलंपियन और राष्टÑीय स्तर के खिलाड़ी तो तैयार हुए, लेकिन जो सुविधाएं मिलनी चाहिए थी उसके लिए अभी भी जद्दोजहद जारी है। यदि प्रोत्साहन और एस्ट्रोटर्फ (कृत्रिम घास का) मैदान मिल जाए तो कोटा फिर से हॉकी का सिरमौर बन सकता है। हॉकी के लिए उपजाऊ रही हाड़ौती की जमीन को प्रोत्साहन की दरकार है। यहां एक जमाने में गली-गली में हॉकी का बोलबाला था। कोटा के रेलवे कॉलोनी, नयापुरा में फ्रेंडस क्लब व कुन्हाड़ी में विजयवीर क्लब सहित कई क्लब ऐसे थे, जिनकी हॉकी की दो-दो टीमें बन जाया करती थी। रेलवे कॉलोनी क्षेत्र में तो गली-गली में हॉकी खेली जाती थी। कई साल तक 8 टूर्नामेंट कोटा के अलग-अलग मैदानों में होते थे। सबसे बड़ा टूर्नामेंट आॅल इंडिया श्रीराम हॉकी टूर्नामेंट होता था, जिसमें भारत की नामी गिरामी टीमें भाग लेती थी। यहां के बच्चों में भी हॉकी के प्रति लगाव थे।<br /><br /><strong>समय बदला व्यवस्थाएं नहीं</strong><br />कोटा शहर में हॉकी के माध्यम से कई खिलाड़ी ओलंपिक और राष्टÑीय स्तर की प्रतियोगिताओं में पहुंचे है। इसके बावजदू यहां पर सुविधाएं विकसित करने पर ध्यान नहीं दिया गया है। इसमें सबसे ज्यादा समस्या खेल मैदान की नजर आई। हॉकी का खेल एस्ट्रोटर्फ (कृत्रिम घास का) मैदान पर खेला जाता है, लेकिन कोटा में इसका अभाव है। यहां पर समुचित सुविधायुक्त एक भी मैदान नहीं है। ऐसे में हॉकी के खिलाड़ी सामान्य मैदान के भरोसे अपनी प्रतिभा निखार रहे हैं। <br /><br /><strong>अभी यहां तैयार हो रही प्रतिभाएं</strong><br />कोटा शहर में हॉकी के लिए सुविधायुक्त खेल मैदान नहीं है। वर्तमान में रेलवे वर्कशॉप मैदान में हॉकी के खिलाड़ियों को तैयार किया जा रहा है। इस समय यहां पर करीब से 80 युवक हॉकी की प्रेक्टिस कर रहे हैं। एस्ट्रोटर्फ मैदान नहीं होने से परेशानी तो होती है, लेकिन अच्छे खिलाड़ी तैयार करने की कोशिश जारी है।<br /><br /><strong>यह रोशन कर चुके कोटा का नाम</strong><br />सुविधाओं का अभाव होने के बावजूद हॉकी के खिलाड़ी ओलंपिक व राष्टÑीय स्तर की प्रतियोगिताओं में कोटा का नाम रोशन कर चुके हैं। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के बेटे अशोक कुमार ओलंपिक में खेल चुके हैं। कोटा में खेलते हुए उन्हें रेलवे में नौकरी मिली थी। बाद में वह टीम इंडिया में भी पहुंच गए थे। इनके अलावा हेमंत चतुर्वेदी, रितिक कश्यप, अमन खान, मसरूर, दीपक निनामा, प्रेमप्रकाश, कार्तिक, राहुल मीणा, मोहिन, अंकित शर्मा, श्याम सिंह, सुधीर सिंह, हर्षित कुमार राष्टÑीय स्तर पर कोटा का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वहीं अभी हाल ही में कुणाल कोण्डल व प्रांशुल कुमार का राज्य स्तरीय अकेडमी में चयन हुआ है। <br /><br /><strong>इनमें हम काफी पीछे </strong> <br />प्रदेश में राज्य सरकार हर तरह के खेल को प्रोत्साहित करने की बात कहती है, लेकिन कोटा में हॉकी प्रोत्साहन से कोसों दूर हैं। राजस्थान में जयपुर, अजमेर और उदयपुर में एस्ट्रोटर्फ मैदान हैं और यहां पर खिलाड़ियों को समूचित सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं कोटा हॉकी का सिरमौर होने के बावजूद एस्ट्रोटर्फ मैदान को तरस रहा है। ऐसे में राष्टÑीय स्तर के खिलाड़ी तैयार करने की गति काफी धीमी हो गई है।<br /><br /><strong>अधरझूल में खेल मैदान का प्रस्ताव</strong><br />हॉकी कोच हर्षवर्धन चूंडावत ने बताया कि एक साल पहले जिला क्रीड़ा परिषद ने कोटा के रेलवे विभाग को खेल मैदान उपलब्ध कराने के सम्बंध में पत्र भेजा था। इस सम्बंध में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी बात की गई थी। उन्होंने खेल मैदान उपलब्ध होने के बाद एस्ट्रोटर्फ की सुविधा तैयार करवाने का आश्वासन दिया था, लेकिन अभी तक रेलवे ने इस मामले में कोई गम्भीरता नहीं दिखाई। ऐसे में मामला अधरझूल में है।<br /><br /><strong>इनका कहना है......</strong><br />उचित खेल मैदान और सुविधाओं के अभाव में हॉकी खेल को प्रोत्साहित करने में परेशानी आती है। यहां पर हॉकी का क्रेज है, फिर भी एस्ट्रोटर्फ मैदान नहीं है। सरकार के स्तर पर जमीन उपलब्ध हो जाए तो हॉकी का बेहतर मैदान तैयार हो सकता है। राष्टÑीय व अन्तरराष्टÑीय स्तर पर खिलाड़ी तभी पहुंच पाएगा जब यहां पर उसी के अनुरूप सुविधा मिलेगी। यह सभी के प्रयास के संभव हो पाएगा।<br /><strong>-हर्षवर्धन चूंडावत, हॉकी कोच</strong><br /><br />कोटा में हॉकी खेल का विकास जरूरी है। कई नामी गिरामी खिलाड़ी होने के बावजूद यहां पर पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पाई। वर्तमान में हॉकी कोटा से राजपूत हॉकी क्लब, विजयवीर क्लब, रेलवे स्पोर्टस क्लब सोसायटी, यंग ब्वाइज क्लब और यंग स्टार क्लब जुड़े हुए हैं। पूर्व में काफी क्लब हुआ करते थे, लेकिन अब समय के साथ क्लब भी बदल गए हैं।<br /><strong>-सुमेर सिंह, सचिव, हॉकी कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>खेल</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 Jul 2022 15:35:45 +0530</pubDate>
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