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                <title>economic crisis - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>economic crisis RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>इक्वाडोर ने कोलंबियाई आयात पर थोपा 100% टैरिफ : व्यापार विवाद गहराया, विदेश आर्थिक नीति में संशोधन करने का आह्वान  </title>
                                    <description><![CDATA[इक्वाडोर ने सीमा सुरक्षा और नशीली दवाओं की तस्करी का हवाला देते हुए कोलंबिया से आयात पर 100% टैरिफ लगाने का फैसला किया है। कोलंबियाई राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने इसे "कठोर" बताते हुए एंडियन समुदाय छोड़ने के संकेत दिए हैं। बिजली आपूर्ति और व्यापारिक प्रतिबंधों ने दोनों देशों के बीच आर्थिक तनाव चरम पर पहुंचा दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/ecuador-doubles-tariffs-on-colombia-deepens-trade-dispute-calls-for/article-149884"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/tarffic.png" alt=""></a><br /><p>ब्यूनस आयर्स। इक्वाडोर ने एक मई से कोलंबिया से होने वाले आयात पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने का निर्णय लिया है। इक्वाडोर के उत्पादन, विदेश व्यापार एवं निवेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा, "कोलंबिया द्वारा ठोस और प्रभावी सीमा सुरक्षा उपायों को लागू करने में विफलता के कारण इक्वाडोर को संप्रभु कार्रवाई करनी पड़ी है। एक मई से कोलंबिया से आयात पर सुरक्षा शुल्क 50 प्रतिशत से बढ़कर 100 प्रतिशत हो जाएगा।"</p>
<p>कोलंबियाई राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि टैरिफ बढ़ाने का इक्वाडोर का फैसला "अत्यंत कठोर" है और इसके कारण कोलंबिया एंडियन समुदाय से बाहर हो सकता है। उन्होंने कोलंबिया की विदेश आर्थिक नीति में संशोधन करने का भी आह्वान किया, और विदेश मंत्री से आग्रह किया कि वे दक्षिण अमेरिकी मर्कोसुर समूह (दक्षिण अमेरिका का एक प्रमुख आर्थिक और व्यापारिक समूह) में स्थायी सदस्यता हासिल करने की दिशा में काम करें और कैरेबियन तथा मध्य अमेरिकी देशों के साथ व्यापारिक संबंधों को मजबूत करें।</p>
<p>हाल के महीनों में इक्वाडोर और कोलंबिया के बीच व्यापार को लेकर विवाद चल रहा है। इक्वाडोर के राष्ट्रपति डैनियल नोबोआ ने सबसे पहले एक फरवरी को कोलंबिया से होने वाले सभी आयात पर 30 प्रतिशत शुल्क लगा दिया था। उन्होंने इसका कारण सीमा पर नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने में कोलंबिया की ओर से सहयोग न मिलना बताया था, और बाद में उन्होंने इस शुल्क को और बढ़ा दिया। कोलंबिया ने भी जवाबी कदम उठाते हुए इक्वाडोर को बिजली की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति रोक दी।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि इक्वाडोर को सूखे के मौसम में हर साल ऊर्जा की कमी का सामना करना पड़ता है। एन्डियन समुदाय (जिसे पहले एन्डियन पैक्ट कहा जाता था) दक्षिण अमेरिकी देशों को एक साथ लाती है। इसमें कोलंबिया, इक्वाडोर, पेरू और बोलीविया जैसे देश शामिल हैं। इसका उद्देश्य आर्थिक एकीकरण, मुक्त व्यापार और नीतियों में तालमेल को बढ़ावा देना है। वर्ष 1969 में स्थापित यह संगठन, लैटिन अमेरिका के प्रमुख क्षेत्रीय आर्थिक समूहों में से एक बना हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 16:57:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>आर्थिक संकट में तेजी से बिक रही गरीबों की जमीनें</title>
                                    <description><![CDATA[ जागरूकता की कमी से बढ़ रहा भूमिहीनता का खतरा, स्थाई रूप से पटवारी की नियुक्ति की मांग 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/lands-of-the-poor-being-sold-rapidly-amidst-economic-crisis/article-148170"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)4.png" alt=""></a><br /><p>अरनेठा। अरनेठा कस्बे सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों से गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों की जमीनों के तेजी से बिकने के मामले सामने आ रहे हैं। आर्थिक तंगी, बढ़ते कर्ज, जागरूकता की कमी और बिचौलियों के झांसे में आकर कई लोग अपनी पैतृक जमीन कम दामों में बेचने को मजबूर हो रहे हैं। इससे उनका भविष्य असुरक्षित होने के साथ सामाजिक और आर्थिक असमानता भी बढ़ रही है।</p>
<p>ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो बड़ी संख्या में परिवार भूमिहीन हो सकते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि जमीन बेचने से पहले दस्तावेज, रजिस्ट्री और सरकारी नियमों की पूरी जानकारी अवश्य लें। बिचौलियों से सावधानी बरतते हुए बाजार दर की जानकारी लेकर ही सौदा तय करें।</p>
<p>ग्रामीणों ने सुझाव दिया कि आर्थिक संकट की स्थिति में जमीन बेचने के बजाय सरकारी योजनाओं, ऋण और अनुदान का सहारा लिया जाए तथा किसी भी बड़े निर्णय से पहले अनुभवी व्यक्तियों, वकीलों या राजस्व अधिकारियों से परामर्श किया जाए।<br />साथ ही ग्रामीणों ने मांग की कि पिछले दो वर्षों से अतिरिक्त प्रभार पर चल रहे अरनेठा पटवार मंडल में स्थाई रूप से पटवारी चंद्रशेखर नागर की नियुक्ति की जाए, ताकि व्यवस्थाएं सुचारू हो सकें।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />किसानों पर कर्ज का दबाव लगातार बढ रहा है। पिछले एक वर्ष से करीब 60-70 किसानों की जमीनें बिक चुके है। <br /><strong>-चन्द्रशेखर नागर, पटवारी, पटवार मंडल, अरनेठा। </strong></p>
<p>इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है, और प्रयास किए जाएंगे कि किसानों को जमींने कम से कम बिके। <br /><strong>-रामकिशोर मीणा, अतिरिक्त जिला कलक्टर, बूंदी।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 18:09:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रुपये में ऐतिहासिक गिरावट: 34 पैसे टूटकर 94.30 रुपये प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा, लगातार बिकवाली से भारतीय मुद्रा दबाव में</title>
                                    <description><![CDATA[विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारतीय रुपया शुक्रवार को ऐतिहासिक निचले स्तर ₹94.30 प्रति डॉलर पर लुढ़क गया। पश्चिम एशिया संकट के बाद से मुद्रा में ₹3 की गिरावट आई है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अंतर्राष्ट्रीय अस्थिरता और डॉलर की मजबूती ने घरेलू अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव बना दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/rupee-falls-by-34-paise-to-reach-record-low-of/article-148061"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(1)74.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। अंतरबैंकिंग मुद्रा बाजार में रुपया शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में 34 पैसे टूटकर 94.30 रुपये प्रति डॉलर पर आ गया। बीच कारोबार में पहली बार भारतीय मुद्रा इस स्तर तक कमजोर हुई है। पिछले कारोबारी दिवस पर 25 मार्च को यह 20 पैसे की गिरावट में 93.96 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुई थी जो इसका अब तक का सबसे कमजोर बंद भाव है।</p>
<p>रुपया आज 22.75 पैसे की गिरावट में 94.1875 रुपये प्रति डॉलर पर खुला और 94.30 रुपये प्रति डॉलर तक टूट गया। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में वृद्धि और विदेशी संस्थागत निवेशकों के भारतीय पूंजी बाजार में इस महीने लगातार बिकवाली रहने से भारतीय मुद्रा दबाव में है। पश्चिम एशिया संकट से पहले रुपया 91 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था। इस संकट के शुरू होने के बाद अब तक इसमें तीन रुपये प्रति डॉलर की गिरावट आ चुकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 11:21:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान की बैंकों पर हमले की चेतावनी: गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एनवीडिया, आईबीएम और ओरेकल जैसी कंपनियां भी निशाने पर</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने अमेरिका और इजरायल से जुड़े आर्थिक केंद्रों और बैंकों को निशाना बनाने की धमकी दी है। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और एनवीडिया जैसी टेक कंपनियों को 'वैध सैन्य लक्ष्य' घोषित किया है। ईरान ने नागरिकों को इन संस्थानों से दूर रहने की सलाह दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iran-warns-of-attack-on-banks-companies-like-google-microsoft/article-146119"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/iran-war1.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान ने एक बड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि वह क्षेत्र में स्थित अमेरिका और इजरायल से जुड़े आर्थिक केंद्रों, बैंकों और गूगल एवं माइक्रोसॉफ्ट जैसी अमेरिकी कंपनियों को भी निशाना बना सकता है। यह बयान कथित तौर पर एक ईरानी बैंक पर हुए हमले की प्रतिक्रिया में आया है।</p>
<p>ईरान में रिवोल्यूशनरी गाड्र्स से संबद्ध खतम अल-अंबिया मुख्यालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि एक ईरानी बैंक पर हुए हमले के बाद अब दुश्मन के वित्तीय संस्थान उनके निशाने पर हैं। ईरान ने क्षेत्र के नागरिकों को सलाह दी है कि वे सुरक्षा के लिहाज से इन बैंकों के एक किलोमीटर के दायरे से दूर रहें।</p>
<p>इसके साथ ही, ईरान ने उन दिग्गज अमेरिकी तकनीकी कंपनियों की सूची जारी की है जिनकी तकनीक का उपयोग सैन्य उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है। इनमें गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एनवीडिया, आईबीएम और ओरेकल जैसी कंपनियां शामिल हैं। ईरानी मीडिया के अनुसार, इन कंपनियों के इजरायल और कुछ खाड़ी देशों में स्थित कार्यालय और क्लाउड-आधारित बुनियादी ढांचे अब ईरान के वैध सैन्य लक्ष्य हैं। ईरान का कहना है कि जैसे-जैसे युद्ध का दायरा बढ़ रहा है, वह अपने हमलों का विस्तार आर्थिक और तकनीकी संपत्तियों तक करने के लिए मजबूर है।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, इन कंपनियों के कार्यालय और क्लाउड सेवाओं से संबंधित बुनियादी ढांचे इजरायल के कई शहरों के साथ-साथ कुछ खाड़ी देशों में भी स्थित हैं, जो अब ईरानी हमलों के जोखिम के दायरे में आ गए हैं। ईरानी अधिकारियों ने पहले ही चेतावनी दी है कि यदि उनके ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले जारी रहे, तो वे क्षेत्र की तेल सुविधाओं को निशाना बनाएंगे, जिससे तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं। खाड़ी देशों में पहले ही अमेजन के डेटा सेंटरों और तेल रिफाइनरियों पर छिटपुट हमलों की खबरें आ चुकी हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Mar 2026 17:06:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रूसी राजदूत पावेल कुजनेत्सोव ने फिनलैंड में आई मुसिबतों के लिए रिश्ते में आई खटास को ठहराया जिम्मेदार, कहा-ईस्टर्न ट्रेड के खत्म होने से देश में आई गहरी आर्थिक मंदी</title>
                                    <description><![CDATA[रूसी राजदूत पावेल कुजनेत्सोव ने कहा कि रूस से संबंध तोड़कर फिनलैंड गहरे आर्थिक संकट, रिकॉर्ड बेरोजगारी और भारी कर्ज में डूब गया है। देश की जीडीपी वृद्धि भी शून्य हो गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/russian-ambassador-pavel-kuznetsov-blamed-the-sourness-in-relations-for/article-143164"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(8)1.png" alt=""></a><br /><p>हेलेंस्की। फिनलैंड में रूस के राजदूत पावेल कुजनेत्सोव ने कहा है कि रूस के साथ संबंध टूटने के कारण फिनलैंड संकट का सामना कर रहा है। देश में रिकॉर्ड बेरोजगारी, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में शून्य वृद्धि, तेजी से बढ़ता राज्य ऋण और बजट घाटा बहुत ज्यादा है।</p>
<p>रूसी राजदून कुजनेत्सोव ने कहा, फिनलैंड अपने आधुनिक इतिहास के सबसे कठिन दौर में से एक से गुजर रहा है। मौजूदा सामाजिक-आर्थिक स्थिति की तुलना 1990 के दशक के उस संकट से की जा सकती है, जब सोवियत संघ के पतन के बाद ईस्टर्न ट्रेड के खत्म होने से देश गहरे आर्थिक मंदी में चला गया था। </p>
<p>पावेल कुजनेत्सोव के अनुसार, विशेष सैन्य अभियान शुरू होने के बाद फिनलैंड ने रूस के साथ सभी संपर्क और संबंध तोड़ दिये, जिससे दशकों में विकसित व्यापार और आर्थिक सहयोग को झटका लगा। उन्होंने आरोप लगाया कि फिनलैंड ने यह कदम स्वयं की पहल पर उठाया और अब उसके परिणाम भुगत रहा है।</p>
<p>राजदूत ने कहा कि हाल के वर्षों में देश की आर्थिक वृद्धि ठप हो गयी है और वर्ष 2025 में जीडीपी वृद्धि शून्य या उससे थोड़ा अधिक रहने की संभावना है। सार्वजनिक वित्त की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि सार्वजनिक ऋण तेजी से बढ़ रहा है और अब जीडीपी के लगभग 90 प्रतिशत के करीब पहुंच चुका है, जबकि कुछ समय पहले तक यह 60 प्रतिशत से कम था। वर्ष 2024 में बजट घाटा जीडीपी का 4.4 प्रतिशत रहा और 2025 में इसके और बढऩे की आशंका है।</p>
<p>उन्होंने यह भी बताया कि फिनलैंड में बेरोजगारी दर 10.6 प्रतिशत तक पहुंच गयी है, जो यूरोपीय संघ में सबसे अधिक बतायी जा रही है। साथ ही, 1990 के दशक के संकट के बाद से कंपनियों द्वारा दिवालिया होने के लिए दायर आवेदनों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, जो 3,900 से अधिक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Feb 2026 14:53:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>लेबनान में भयावह हादसा: जर्जर इमारत ढहने से 5 लोगों की दर्दनाक मौत, मलबे में दबे कई लोग, बचाव और राहत कार्य जारी</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तरी लेबनान के त्रिपोली शहर से एक दर्दनाक खबर सामने आ रही हैं। यहां रविवार को एक जर्जर इमारत गिरने से करीब 5 लोगों की मौत हो गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/horrific-accident-in-lebanon-5-people-died-due-to-collapse/article-142474"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(17)2.png" alt=""></a><br /><p>लेबनान। उत्तरी लेबनान के त्रिपोली शहर से एक दर्दनाक खबर सामने आ रही हैं। यहां रविवार को एक जर्जर इमारत गिरने से करीब 5 लोगों की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, हादसा बाब अल-तब्बानेह इलाके में हुआ, जो शहर का अत्यंत गरीब क्षेत्र माना जाता है। इस हादसे में कई लोगो के मलबे में दबे होने की आशंका है जिनको बचाने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल, इमारत के मलबे में दबे लोगों की तलाश के लिए बचाव दल लगातार अभियान चला रहे हैं। अब तक आठ लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है, जबकि मृतकों में एक बच्चा और एक बुजुर्ग महिला शामिल हैं।</p>
<p>सुरक्षा एजेंसियों ने आसपास की इमारतों को भी खाली करा लिया है, क्योंकि अन्य ढांचों के गिरने का खतरा बना हुआ है। सिविल डिफेंस के अनुसार, इमारत में दो ब्लॉक थे, जिनमें कुल 12 अपार्टमेंट थे। राष्ट्रपति जोसेफ औन के कार्यालय ने राहत और पुनर्वास कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं। लेबनान में पुरानी और अवैध इमारतों की संख्या अधिक है। लंबे आर्थिक संकट और मरम्मत के अभाव ने ऐसी दुर्घटनाओं का जोखिम और बढ़ा दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 16:02:35 +0530</pubDate>
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                <title>ईरान हिंसा: पश्चिमी ईरान में प्रदर्शनों के दौरान हुई झड़पों में 3 लोगों की मौत, कई अन्य घायल</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के इलम प्रांत में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई झड़पों में तीन लोगों की जान चली गई। सर्वोच्च नेता खामेनेई ने दंगाइयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iran-violence-3-killed-several-others-injured-in-clashes-during/article-138309"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/iran-voilence.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के पश्चिमी इलम प्रांत में शनिवार शाम विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई झड़पों में तीन लोगों की मौत हो गई। यह जानकारी अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फ़ार्स ने जानकार सूत्रों के हवाले से दी। समाचार एजेंसी फ़ार्स ने कहा कि मालेकशाही काउंटी में दंगाइयों ने एक कानून प्रवर्तन केंद्र पर हमला करने की कोशिश की जिसके कारण सुरक्षा बलों के साथ उनकी झड़पें हुईं। इसमें सुरक्षा बलों का एक जवान और दो दंगाइ मारे गए जबकि कई अन्य घायल हो गए।</p>
<p>इससे पहले शनिवार को, फ़ार्स न्यूज एजेंसी ने कहा था कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गाड्र्स कोर से संबद्ध बासिज स्वयंसेवी बल का एक सदस्य पश्चिमी प्रांत करमानशाह में हुई अशांति के दौरान मारा गया। एजेंसी ने कहा कि अली अजीजी की शुक्रवार को हरसिन काउंटी में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान चाकू और गोली लगने से मौत हो गई। ईरान की मुद्रा रियाल के मूल्य में भारी गिरावट के विरोध में रविवार से ईरान के कई शहरों में प्रदर्शन हो रहे हैं। अधिकारियों ने प्रदर्शनों को स्वीकार करते हुए कहा है कि वे आर्थिक शिकायतों के समाधान के लिए तैयार हैं, साथ ही हिंसा, तोडफ़ोड़ एवं अशांति के खिलाफ चेतावनी भी दी है।</p>
<p>ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली हुसैनी खामेनेई ने कल कहा कि व्यापारियों के विरोध प्रदर्शनों का फायदा उठाकर अशांति फैलाना एवं राष्ट्रीय सुरक्षा को कमजोर करना बिल्कुल अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत करनी चाहिए लेकिन उन लोगों के साथ नहीं जो दंगाई हैं। उन्होंने कहा कि दंगाईयों को उनकी औकात दिखा देनी चाहिए। खामेनेई ने स्वीकार किया कि रियाल के मुल्य में गिरावट ने कारोबारी माहौल को बिगाड़ दिया है और विदेशी मुद्रा दरों में इस अस्वाभाविक वृद्धि के लिए उन्होंने शत्रु कार्रवाइयों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान सहित वरिष्ठ अधिकारी स्थिति से निपटने के लिए काम कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 04 Jan 2026 18:19:46 +0530</pubDate>
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                <title>ईरान में भड़का जनविद्रोह, इस्लामिक शासन के खिलाफ सड़कों पर उतरें लोग</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान में गिरते रियाल और 42.2% महंगाई के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। 'मुल्ला शासन' के विरोध में लोग सड़कों पर हैं। आर्थिक बदहाली और अमेरिकी प्रतिबंधों ने खामेनेई सरकार के लिए गंभीर संकट पैदा कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/public-revolt-broke-out-in-iran-people-took-to-the/article-137860"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/iran.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पिछले दो दिनों से ईरान के कई शहरों और कस्बों की सड़कों पर भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। ईरानी रियाल की कीमत अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है और महंगाई दर 42.2 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिसमें खाद्य पदार्थों की कीमतें 72 प्रतिशत बढ़ गई हैं। इसके बाद सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाला धार्मिक शासन तीन साल की सबसे बड़ी जन-विरोधी लहर का सामना कर रहा है। तेहरान के ग्रैंड बाजार से शुरू हुआ सरकार विरोधी प्रदर्शन अब मशहद, इस्फहान, शिराज, हमदान समेत कई शहरों में फैल गया है।</p>
<p>ईरानी-अमेरिकी पत्रकार मसीह अलीनेजाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म  पर लिखा कि ईरान से आ रहे कई वीडियो में लोग एक स्वर में नारे लगा रहे हैं- मुल्लाओं को ईरान छोड़ना होगा और तानाशाही मुदार्बाद। उनके मुताबिक, यह उस जनता की आवाज है जो अब इस्लामिक रिपब्लिक नहीं चाहती. 9.2 करोड़ से अधिक आबादी वाले इस देश में आर्थिक बदहाली और कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति ने खामेनेई शासन के लिए गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। यह संकट ऐसे समय आया है, जब ईरान पहले से ही अपने परमाणु ठिकानों पर इजरायल और अमेरिका की कार्रवाइयों तथा डोनाल्ड ट्रंप की मैक्सिमम प्रेशर पॉलिसी के दबाव से जूझ रहा है।</p>
<p><strong>सड़कों पर शाह समर्थक नारे भी सुनाई दिए</strong></p>
<p>इसी बीच, ईरानी प्रवासियों द्वारा साझा की जा रही एक तस्वीर ने दुनिया का ध्यान खींचा है, जिसमें तेहरान की एक हाईवे पर एक व्यक्ति अकेले, शांत बैठा दिख रहा है, जबकि मोटरसाइकिलों पर सवार सुरक्षाबल उसकी ओर बढ़ रहे हैं। यूनाइटेड अगेंस्ट न्यूक्लियर ईरान (वअठक) के पॉलिसी डायरेक्टर जेसन ब्रॉडस्की ने इस दृश्य की तुलना 1989 के तियानआनमेन स्क्वायर आंदोलन की महशूर तस्वीर टैंक मैन से की है। कुछ विश्लेषकों का दावा है कि सड़कों पर शाह समर्थक नारे भी सुनाई दिए, जिनकी सत्ता को 1979 में खामेनेई समर्थित आंदोलन ने उखाड़ फेंका था।</p>
<p><strong>ईरान की जनता सड़कों पर क्यों उतरी?</strong></p>
<p>ईरान में 28 दिसंबर से शुरू हुए ये सरकार विरोधी प्रदर्शन 2022-23 के बाद सबसे बड़े हैं, जब महसा अमीनी की मौत के बाद देशव्यापी आंदोलन हुआ था। तेहरान और मशहद में सोमवार को प्रदर्शनकारियों की सुरक्षाबलों से झड़पें हुईं। सेंट्रल तेहरान, जहां सरकारी और व्यावसायिक केंद्र स्थित हैं, विरोध का बड़ा केंद्र बना। </p>
<p>सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में ग्रैंड बाजार के एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के भीतर लोग नारे लगाते दिखे- डरो मत, हम सब साथ हैं। रियाल की ऐतिहासिक गिरावट ने आम लोगों की क्रय शक्ति को लगभग खत्म कर दिया है। खाने-पीने की चीजें, दवाइयां और रोजमर्रा के सामान आम नागरिकों की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं। हालात ये है कि तेहरान, इस्फहान, शिराज और मशहद में व्यापारी, दुकानदार और छोटे कारोबारी सड़कों पर उतर आए हैं। </p>
<p><strong>इसके लिए ट्रंप फैक्टर कितना जिम्मेदार?</strong></p>
<p>ईरान की आर्थिक बदहाली का बड़ा कारण उस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध माने जा रहे हैं। अमेरिका के 2015 के परमाणु समझौते से पीछे हटने और ट्रंप की मैक्सिमम प्रेशर पॉलिसी ने ईरान की तेल से होने वाली आय को बुरी तरह प्रभावित किया है। ट्रंप के जनवरी 2025 में दूसरी बार अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद ये प्रतिबंध और सख्त हुए हैं, जिसने हालात और बिगाड़ दिए। पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने कहा कि इस्लामिक शासन के खिलाफ सड़कों पर उतरे ईरानियों का गुस्सा कोई हैरानी की बात नहीं है। </p>
<p><strong>रियाल के गिरने से नाराज मोबाइल फोन विक्रेताओं का प्रदर्शन </strong></p>
<p>हालांकि, ईरानी सरकारी मीडिया ने विरोध प्रदर्शनों को सीमित बताने की कोशिश की है। सरकारी समाचार एजेंसी ने इन्हें राजनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक नाराजगी करार दिया और कहा कि रियाल के गिरने से नाराज मोबाइल फोन विक्रेताओं ने प्रदर्शन किया। सुरक्षा बलों ने आंसू गैस और बल प्रयोग कर भीड़ को तितर-बितर करने की भी कोशिश की, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहे हैं। ईरान के सेंट्रल बैंक के गवर्नर मोहम्मद रेजा फरजिन ने इस्तीफा दे दिया है। जिसे राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने स्वीकार कर लिया। राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर कहा कि लोगों की आजीविका उनकी मुख्य चिंता है और सरकार मॉनेटरी रिफॉर्म करने की योजना बना रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 Dec 2025 11:45:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ग्रामीण आर्थिक संकट के दावों का पुनर्मूल्यांकन बेहद जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ एवं पटरी पर लाने के लिए बेहतर विकल्प ढूंढ़ना चाहिए, ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था और तेज रफ्तार पकड़ सकें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/re-evaluation-of-claims-of-rural-economic-crisis-is-very-important/article-22620"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/p-6-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>विश्व में भारतीय अर्थव्यवस्था पूरी तेजी के साथ आर्थिक महाशक्ति के रुप में उभर रही है। ऐसे में भारतीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ एवं पटरी पर लाने के लिए बेहतर विकल्प ढूंढ़ना चाहिए, ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था और तेज रफ्तार पकड़ सकें। महामारी शुरू होने के बाद से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में संकट के बारे में चर्चा हो रही है और इस सार्वजनिक चर्चा ने नीतिगत निर्णयों के साथ-साथ बुद्धिजीवियों के वर्गों को भी प्रभावित किया है, लेकिन बहुआयामी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को यथार्थवादी और तथ्यों के प्रति होने के लिए एक पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता है। स्व-नियोजन के हिस्से में वृद्धि हुई है और नियमित मजदूरी, वेतनभोगी और नैमित्तिक श्रमिकों के हिस्से में गिरावट आई है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत काम की मांग 2021 और 2022 के बड़े हिस्से में महामारी से पहले के स्तर से ऊपर बनी हुई है, जिसे आर्थिक संकट का संकेत माना जा रहा है। उपरोक्त तथ्य विरोधाभासी हैं और इस प्रकार इस बात के पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता है कि क्या ग्रामीण अर्थव्यवस्था सही अर्थों में दबाव में है। पीएलएफएस सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय  द्वारा किया जाने वाला एक वार्षिक सर्वेक्षण है।</p>
<p>केवल सीडब्ल्यूएस में शहरी क्षेत्रों के लिए तीन महीने के अल्पकालिक अंतराल में प्रमुख रोजगार और बेरोजगारी का अनुमान लगाना। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में सामान्य स्थिति यूएस और सीडब्ल्यूएस दोनों में रोजगार और बेरोजगारी संकेतकों का अनुमान लगाना। सामान्य स्थिति यूएस इस दृष्टिकोण में, सर्वेक्षण यह पता लगाता है कि सर्वेक्षण से पहले 365 दिनों में किसी व्यक्ति को पर्याप्त दिनों के लिए नियोजित किया गया था या नहीं। वर्तमान साप्ताहिक स्थिति  (सीडब्ल्यूएस) इसमें, सर्वेक्षण यह पता लगाने की कोशिश करता है कि क्या सर्वेक्षण से पहले के सात दिनों में किसी व्यक्ति को पर्याप्त रूप से नियोजित किया गया था। कम एलएफपीआर का मतलब है कि कामकाजी उम्र में लोगों का अनुपात जो अर्थव्यवस्था में भाग लेना हैं, अन्य अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी कम है। यद्यपि भारत में महिलाओं के लिए बेहद कम एलएफपीआर चिंता का विषय है। </p>
<p>मनरेगा गांव के निवासी परिवारों का अंतिम उपाय होने की तुलना में घरेलू संपत्ति सृजन और टिकाऊ आय सृजन के लिए एक स्मार्ट विकल्प बन गया है। व्यक्ति की भूमि पर किए गए कार्यों (जिसकी अनुमति दी गई है) का हिस्सा 201-15 में कुल पूर्ण कार्यों का 16 प्रति. से बढ़कर 2021-22 में 73 प्रति. हो गया है। इन कार्यों में पशु शेड, खेत तालाब, बागवानी वृक्षारोपण्, वर्मीकम्पोस्टिंग आदि घरेलू परिसंपत्तियों का निर्माण शामिल है। जिसमें लाभार्थी को मानक दरों के अनुसार श्रम और सामग्री लागत दोनों मिलती हैं। इस प्रकार मनरेगा का उपयोग करने वाले व्यक्तियों द्वारा सृजित परिसंपत्तियों का उत्पादकता और आय पर महत्वपूर्ण सकारात्मक प्रभाव देखा गया है। इंस्टीट्यूट आॅफ  इकोनॉमिक ग्रोथ, 2018 के एक अध्ययन से पता चलता है कि परिसंपत्ति सृजन के कारण 2021-22 में बिहार और यूपी जैसे राज्यों में अल्पकालिक पलायन 70-80 प्रति. तक कम हो गया है। कुल पूर्ण कार्यों में व्यक्तिगत भूमि पर कार्यों का मौद्रिक हिस्सा भी 2014-15 में लगभग 12 प्रति. से बढ़कर 2021-22 में 32 प्रति. हो गया है। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के अखिल भारतीय ग्रामीण वित्तीय समावेशन सर्वेक्षण के अनुसार सभी ग्रामीण परिवारों में से आधे से अधिक आय के एक से अधिक स्रोतों पर निर्भर हैं। सर्वेक्षण से पता चलता है कि कई परिवारों की आय एकल आय स्रोत पर निर्भर लोगों की तुलना में काफी अधिक है और मनरेगा के अपने निहितार्थ हैं। व्यक्तिगत भूमि पर मनरेगा के माध्यम से सृजित परिसंपत्तियां इसलिए आय विविधिकरण में सहायता कर सकती हैं, परिवारों की पूरक आय को बढ़ा सकती हैं, और ग्रामीण आजीविका में लचीलापन ला सकती हैं। </p>
<p>इससे आकस्मिक श्रम में गिरावट आई होगी और पीएलएफएस डेटा में स्व-रोजगार में वृद्धि देखी गई होगी। कृषि क्षेत्र, जो लगभग 60 प्रति. ग्रामीण कार्य बल को रोजगार देता है, ने अनुकूल मानसून की सहायता से कोविड के बावजूद मजबूत वृद्धि दर्ज की है। यह महामारी की अवधि के दौरान कृषि के लिए व्यापार के उच्च संदर्भ में स्पष्ट है और उच्च घरेलू ट्रैक्टर बिक्री में प्रकट हुआ है। पीएम-किसान, जो अब तीन-ए के लिए चालू है, ने 2021-22 में लगभग 120 मिलियन किसान परिवारों को लाभान्वित किया है। जो ग्रामीण आबादी के आधे से अधिक है। गैर-कृषि परिवारों के लिए जो भोजन के शुद्ध खरीदार हैं, उनके लिए पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना लाई गई है। एनएफएचएस पूरे भारत में घरों के प्रतिनिधि नमूने में आयोजित एक बड़े पैमाने पर बहु-दौर सर्वेक्षण है। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर पॉपुलेशन साइंसेज (आईआईपीएस) मुंबई, नोडल एजेंसी के रूप में इसे लागू करने के लिए कई क्षेत्रीय संगठनों के साथ सहयोग करता है। </p>
<p><strong>- समराज चौहान</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Sep 2022 11:05:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>आर्थिक संकट का सामना कर रहे श्रीलंका में लागू आपातकाल</title>
                                    <description><![CDATA[गजट में कहा गया है कि श्रीलंका में सार्वजनिक आपातकाल सार्वजनिक सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था की सुरक्षा के मद्देनजर आपातकाल घोषित किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/emergency-imposed-in-sri-lanka-facing-economic-crisis/article-15041"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/4654564653.jpg" alt=""></a><br /><p>कोलंबो। आर्थिक संकट का सामना कर रहे श्रीलंका में आपातकाल लागू हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार श्रीलंका के कार्यवाहक राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने संविधान के अनुच्छेद 40 (1) (सी) के तहत सार्वजनिक सुरक्षा अध्यादेश (अध्याय 40) के अनुच्छेद 2, 1959 के अधिनियम संख्या 08 द्वारा संशोधित, 1978 के कानून संख्या 6 और 1988 के अधिनियम संख्या 28 द्वारा उन्हें निहित शक्तियों के आधार पर आपातकाल की घोषणा की है।</p>
<p>गजट में कहा गया है कि श्रीलंका में सार्वजनिक आपातकाल सार्वजनिक सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था की सुरक्षा के मद्देनजर आपातकाल घोषित किया गया है। उल्लेखनीय है कि श्रीलंका 1948 में ब्रिटेन से आजादी मिलने के बाद सबसे खराब आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Jul 2022 11:45:49 +0530</pubDate>
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