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                <title>laboratory - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>यहां है नाम की प्रयोगशाला, लटका है बरसों से ताला</title>
                                    <description><![CDATA[निर्माण कार्य के सैम्पलों की निजी प्रयोगशालाओं में करवानी पड़ रही जांच।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/there-is-a-laboratory-in-name-only--but-it-is-locked-for-years/article-113307"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/news-(1)13.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। डामर की सड़क हो या सीसी रोड। नाली का निर्माण हो या भवन का। कोई भी निर्माण कार्य शुरु होने से पहले उसमें उपयोग होने वाली निर्माण सामग्री के सैम्पलों की जांच की जाती है। नगर निगम द्वारा करवाए जाने वाले कार्यों में निर्माण सामग्री के सैम्पलों की जांच के लिए निगम की प्रयोगशाला तो है लेकिन उसका उपयोग नहीं होने से बरसों से उस पर ताला लटका हुआ है। चम्बल गार्डन के पास स्थित गांधी उद्यान में नगर निगम की गुणवत्ता नियंत्रण जांच प्रयोगशाला है। यहां पूर्व में तो जांच के लिए उपकरण व मशीनरी  भी थी। लेकिन वर्तमान में हालत यह है कि इस प्रयोगशाला में न तो पर्याप्त उपकरण हैं और न ही जांच के लिए प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ। यही कारण है कि प्रयोगशाला होने के बाद भी नगर निगम द्वारा इसका उपयोग नहीं किया जा रहा है। जिससे पिछले कई सालों से इस पर ताला  लटका हुआ है। कोटा में वर्तमान में दो नगर निगम होने के बावजूद कोटा दक्षिण निगम क्षेत्र में ही एक मात्र प्रयोगशाला है। </p>
<p><strong>निर्माण सामग्री की होती है जांच</strong><br />शहर में निर्माण कार्य से संबंधित सरकारी एजेंसियों में नगर निगम के अलावा कोटा विकास प्राधिकरण, हाउसिंग बोर्ड व सार्वजनिक निर्माण विभाग हैं। इनके द्वारा किसी भी तरह का कोई निर्माण कार्य कराया जाता है। उसमें उपयोग होने वाली निर्माण सामग्री बजरी, रेत, सीमेंट,डामर व कंकरीट की जांच प्रयोगशाला में ही की जाती है। जानकारी के अनुसार कोटा में सार्वजनिक क्षेत्र में सार्वजनिक निर्माण विभाग की अपनी प्रयोगशाला है। </p>
<p><strong>निजी प्रयोगशालाओं से करवा रहे जांच</strong><br />नगर निगम की प्रयोगशाला होने के बाद भी उसका  उपयोग नहीं हो पा रहा है। निगम की प्रयोगशाला में पूर्व में लाखों की मशीनरी व उपकरण लगाए गए थे। जहां निर्माण सामग्री के सैम्पलों की जांच नि:शुल्क की जाती थी। लेकिन इस पर ताला लटका हुआ है। जिससे निगम द्वारा संवेदक के माध्यम से करवाए जाने वाले निर्माण की सामग्री की जांच निजी प्रयोगशालाओं में करवानी पड़ रही है। जिसके लिए संवेदक को जांच का निर्धारित शुल्क देना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>न्यूनतम तीन सैम्पलों की जांच</strong><br />सूत्रों के अनुसार निर्माण कार्य की लागत के हिसाबम से उसमें प्रयोग होने वाली सामग्री के सैम्पलों की जांच करवाई जाती है। 10 लाख तक के निर्माण कार्य के तीन सैम्पलों की जांच कवाई जाती है। इसके बाद 20 लाख तक के निर्माण के 6 सैम्पल और उसके बाद लागत के हिसाब से सैम्पलों की जांच की जाती है। निगम के इंजीनियरों के निर्देश पर तकनीकी स्टाफ द्वारा जांच में मानक पर गुणवत्तापूर्ण होने पर ही उसका उस निर्माण में सामग्री का उपयोग किया जाता है। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही काम का भुगतान किया जाता है। </p>
<p><strong>उपकरण व मशीनरी चोरी</strong><br />सूत्रों के अनुसार प्रयोगशाला गांधी उद्यान में है। जहां रात के समय अक्सर अंधेरा रहता है। यहां सुरक्षा गार्ड तो हैं लेकिन वह अधिकतर मुख्य द्वार पर या गार्डन में ही रहते हैं। प्रयोगशाला की सुरक्षा के लिए अलग से कोई गार्ड नहीं है। वहीं बरसों से इस पर ताला लगा हुआ है। सूत्रों के अनुसार प्रयोगशाला से कई कीमती उपकरण चोरी तक हो चुके हैं। जिसकी जानकारी निगम अधिकारियों तक को है। हालांकि यह जानकारी उन्हें काफी देर से लगी जब तक सामान चोरी हो चुका था। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />नगर निगम की गांधी उद्यान स्थित गुणवत्ता नियंत्रण जांच प्रयोगशाला है। जिसके उपकरण काफी पुराने हो चुके हैं। निगम की ओर से यहां आधुनिक उपकरण लगाने व उसके हिसाब से ही प्रशिक्षत तकनीकी स्टाफ लगाकर इसे शीघ्र ही शुरु करने की योजना है। प्रयास किया जा रहा है कि इस प्रयोगशाला को नगर निगम भवन में ही शिफ्ट किया जाए। जिससे इसका सही उपयोग भी हो सकेगा।  वर्तमान में निर्माण सामग्री के सैम्पलों की जांच सरकार द्वारा  आईएसओ सर्टिफाइड  प्रतोगशाला में करवाई जा रही है। जिसके लिए संवेदक को जांच शुल्क का भुगतान करना पड़ रहा है। <br /><strong>- ए.क्यू कुरैशी, अधिशाषी अभियंता नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 May 2025 16:26:09 +0530</pubDate>
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                <title>प्रयोगशाला में मानव दांत बनाने में कामयाबी : वैज्ञानिकों ने लैब में बनाए इंसानी दांत, फिलिंग और डेंटल इम्प्लांट से मिलेगा छुटकारा</title>
                                    <description><![CDATA[दांतों को प्राकृतिक रूप से प्राप्त कर सकेंगे। यह तरीका फिलिंग और डेंटल इम्प्लांट का विकल्प तो है ही, उनसे कहीं अधिक सुविधाजनक और सरल भी होगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/scientists-successful-in-making-human-teeth-in-the-laboratory-will/article-110810"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/257rtrer70.png" alt=""></a><br /><p>लंदन। वैज्ञानिकों ने पहली बार प्रयोगशाला में मानव दांत बनाने में सफलता प्राप्त कर ली है। लैब में उगा हुआ यह दांत खुद की कोशिका से तैयार होता है। इंग्लैंड के किंग्स कॉलेज लंदन में हुए एक शोध के अनुसार भविष्य में लोग खोए हुए दांतों को प्राकृतिक रूप से प्राप्त कर सकेंगे। यह तरीका फिलिंग और डेंटल इम्प्लांट का विकल्प तो है ही, उनसे कहीं अधिक सुविधाजनक और सरल भी होगा। </p>
<p>वैज्ञानिकों ने बताया कि उन्होंने एक खास सामग्री तैयार की है, जो दांतों के विकास के लिए जरूरी माहौल तैयार करेगी। इससे कोशिकाएं आपस में संकेत भेज कर दांत बना पाती हैं। इस प्रक्रिया में इंसान के जबड़े में छोटी-छोटी कोशिकाएं डाली जाएंगी। फिर ये कोशिकाएं धीरे-धीरे असली दांत में बदल जाएंगी। यह वैसे ही उगेगा जैसे बचपन में दूध के दांत टूटने के बाद नए दोत आते हैं। वैज्ञानिकों ने कहा कि जैसे शार्क और हाथियों के दांत दोबारा उग आते हैं, वैसे ही मनुष्य में भी यह सम्भव होगा। </p>
<p><strong>पहले कोशिश हुई नाकाम</strong><br />वैज्ञानिकों ने पहले भी कोशिकाओं से दांत उगाने की कोशिश की थी। लेकिन तब कोशिकाएं आपस में ठीक से सम्पर्क नहीं कर पाईं। बाद में टीम ने दूसरे तरीके आजमाए।</p>
<p><strong>मजबूत, टिकाऊ और पूरी तरह जैविक </strong><br />वैज्ञानिकों के मुताबिक फिलिंग और इम्प्लांट पूरी तरह प्राकृतिक दांत का काम नहीं कर पाते। ये समय के साथ कमजोर हो जाते हैं और कई दूसरी समस्याएं पैदा कर देते हैं। वहीं प्रयोगशाला में उगाया गया दांत मजबूत, टिकाऊ और पूरी तरह जैविक होता है। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Apr 2025 11:36:44 +0530</pubDate>
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                <title>जांच में मिला मिलावटी खाद व कीटनाशी</title>
                                    <description><![CDATA[अभियान के दौरान खाद, बीज और कीटनाशी के 500 नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजे गए थे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/inspection-found-adulterated-fertilizers-and-pesticides/article-96302"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/6633-copy190.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा ।  खेती-किसानी के बढ़ रहे रुझान को देखते हुए खाद-बीज और कीटनाशकों के कारोबार में भी इजाफा हो रहा है। ऐसे में कृषि आदान भी मिलावट के दंश से अछूते नहीं है। इसके तहत जिले में कृषि विभाग की ओर से गुण नियंत्रण अभियान चलाया जा रहा है। गत एक माह से चल रहे अभियान के तहत विभाग की ओर से खाद-बीज और कीटनाशकों के नमूने लिए गए हैं। इनमें से कई नमूने जांच में अमानक पाए गए हैं। इनके खिलाफ विभाग की ओर से कार्रवाई की गई है। जिले में नमूने अमानक पाए जाने के बाद अब विभाग ने अभियान की अवधि 15 दिन और बढ़ा दी है। इससे कृषि आदान दुकानदारों में हड़कम्प मचा हुआ है। जिले में एक माह में करीब पांच सौ नमूने लिए गए थे। इनमें अभी तक जांच में 40 नमूने अमानक मिले हैं।</p>
<p><strong>कीटनाशक और खाद में मिली गड़बड़ी</strong><br />जिले में गत कुछ वर्षों से कृषि आदानों में मिलावट की शिकायतों को देखते हुए कृषि विभाग की ओर से नमूने लेने और जांच कराने का अभियान एक माह पूर्व शुरू किया गया था। इसके तहत कृषि विभाग की ओर से कृषि आदान की दुकानों पर निरीक्षण किया गया। अभियान के दौरान खाद, बीज और कीटनाशी के 500 नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजे गए थे। अभी तक मिली जांच रिपोर्ट में करीब 40 नमूने अमानक पाए गए हैं। ऐसे में इनके खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया गया है। वहां से जुर्माना राशि तय की  जाएगी। कृषि आदानों में सबसे ज्यादा मिलावट खाद और कीटनाशी में मिली है। इनमें नमूने सबसे ज्यादा फेल हुए हैं। वहीं बीज का कोई नमूना फेल नहीं  हुआ है।   </p>
<p><strong>अब लगातार होगी मॉनिटरिंग</strong><br />कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार वैसे तो हर माह कृषि आदान दुकानों का निरीक्षण किया जाता है। अब नमूनों में मिलावट मिलने के बाद विभाग ने लगातार इन दुकानों की मॉनिटरिंग करने का निर्णय किया गया है। इसके तहत अब कृषि आदान दुकानों की आकस्मिक जांच की जाएगी। जिले के सभी डीलरों के यहां निरीक्षक पंजिका का संधारण किया जाना आवश्यक है। इसके साथ ही चैक लिस्ट भी साथ लगानी होती है। यदि जांच में इनकी पूर्ति नहीं मिली तो सम्बंधित आदान विक्रेता के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। आगामी दिनों में समय-समय पर निरीक्षण कर लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी। </p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />कृषि आदानों में मिलावट मिलने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। विभाग की ओर से इस तरह का अभियान लगातार चलाया जाना चाहिए ताकि मिलावटी आदानों की बिक्री नहीं हो सके। कई बार देरी से जांच रिपोर्ट मिलने से किसानों को नुकसान हो जाता है। इसलिए जांच रिपोर्ट जल्द-जल्द मिलने की व्यवस्था भी हो।<br /><strong>-जोगेन्द्र सिंह, किसान</strong></p>
<p>कृषि विभाग किसानों के प्रति संवेदनशील है। विभाग की ओर से रबी नियंत्रण अभियान के तहत कृषि आदानों के नमूने लिए जा रहे हैं। इनको जांच के लिए प्रयोगशालाओं में भिजवाया जा रहा है। अभी तक कुछ नमूने जांच में अमानक मिले हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है। वहीं अभियान की अवधि भी बढ़ा दी गई है। <br /><strong>-आर. के. जैन, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Nov 2024 14:58:20 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कोटा विश्वविद्यालय की लैबोरेट्री में अवैध रूप से रखे शेडयूल-1 व 2 वन्यजीवों के मृत शरीर और हड्डियां </title>
                                    <description><![CDATA[उसके मृत शरीर के अंगों को बिना सक्षम अनुमति रखना भी अपराध की श्रेणी में आता है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dead-bodies-and-bones-of-schedule-1-and-2-wild-animals-kept-illegally-in-the-laboratory-of-kota-university/article-60022"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/कोटा-विश्वविद्यालय.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा विश्वविद्यालय में अवैध रूप से शेडयूल 1 व 2 के वन्यजीवों का मृत शरीर व हड्डियां रखे जाने का खनसनीखेज मामला सामने आया है। विश्वविद्यालय चोरी छिपे लैबोरेट्री में इन वन्यजीवों के अवशेषों को रख वाइल्ड लाइफ एक्ट 1972 का खुला उल्लंघन कर रहा है।  जबकि, इन्हें रखने की विश्वविद्यालय के पास परमिशन तक नहीं है, ना इनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और न ही पंचनामा है। ऐसे में कैम्पस में यह सांप कहां से आए, इनकी मौत कैसे हुई और हड़िडयां किस सांप की हैं, इन्हें किस प्रासेज के तहत निकाली गई सहित कई सवाल वन्यजीव अपराध की ओर इशारा कर रहा है। विश्वविद्यालय, वन्यजीव अधिनियम की धारा 9, 48-ए, 49-बी और 51 के दायरे में आ रहा है। </p>
<p><strong>क्या है शेड्यूल-1 और 2</strong><br /> शेड्यूल-1 के सभी वन्यजीवों की सुरक्षा व प्रोटोकॉल वही है जो टाइगर और लॉयन की होती है।  टाइगर को ना कोई रख सकता है ना पकड़ सकता है। ना ला लेजा सकता है। उसके मृत शरीर के अंगों को बिना सक्षम अनुमति रखना भी अपराध की श्रेणी में आता है। इसी प्रकार कोबरा व चैकर्ड कीलबैक सांप शेड्यूल-1 का वन्य प्राणी है। जब कि करेत शेड्यूल-2 का है।  कोबरा, करेत,चैकर्ड कीलबैक के मृत शरीर को रखना,उसके अंगों ,हड्डियों को बिना सक्षम अनुमति काम लेना,आवागमन करना वन्यजीव व्यापार, तस्करी सहित अन्य वन्यजीव अपराध की श्रेणी में आता है। इसके बावजूद कोटा विश्वविद्यालय में वाइल्ड लाइफ साइंस डिपार्टमेंट की लैबोरेट्री में  चैकर्ड कीलबैक, कोबरा और करैत प्रजाति के सांप के मृत शरीर एक डिब्बे में प्रिजर्व रखे हुए हैं। </p>
<p><strong>हडिड्यां व अवशेष किसकी</strong><br />कोटा विश्वविद्यालय की वाइल्ड लाइफ डिपार्टमेंट की लैबोरेट्री में सांप की हड्डियां व अवशेष अनाधिकृत रूप से रखे हुए हैं।  इसकी सूचना न तो वन विभाग को दी और न ही फोरेंसिक साइंस से जांच करवाई। ऐसे में सवाल उठता है कि यह अवशेष किस सांप के हैं। इन हड्डियों को किस प्रोसेज के तहत निकाला गया। बिना वन विभाग की जांच व सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना किसी भी वन्यजीव के शरीर के अंग या अवशेष रखना वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट की धारा 49-बी के तहत तस्करी की श्रेणी में आता है। </p>
<p><strong>न पोस्टमार्टम और न ही पंचनामा</strong><br />वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट नागेंद्र राणावत का कहना है, वन्यजीव अधिनियम 1972 के प्रोटोकोल के अनुसार कोई भी वन्यजीव कहीं पर किसी भी अवस्था में मिलता है तो संबंधित संस्था या व्यक्ति को सूचना तुरंत सर्किल डीएफओ वन मंडल को देनी होती है। इसके बाद वनकर्मी मौके से वन्यजीव का रेस्क्यू करते हैं। यदि, जानवर मृत है तो उसकी मौत का वास्तविक कारण जानने के लिए पोस्टमार्टम कर पंचनामा तैयार किया जाता है। लेकिन विश्वविद्यालय परिसर में मृत मिले चैकर्ड कीलबैक सांप की सर्किल डीएफओ को सूचना न देना, बिना पोस्टमार्टम व पंचनामा रिपोर्ट के सांप को प्रिजर्व रखना प्रोटोकॉल का खुला उल्लंघन है। </p>
<p><strong>वाइल्ड लाइफ डिपार्टमेंट कोर्डिनेटर डॉ. रंजना गुप्ता से सवाल-जवाब</strong><br />यूनिवर्सिटी से मिली जानकारी के अनुसार कोबरा करेत को रखने संबंधी संपूर्ण प्रक्रिया यूनिवर्सिटी के सक्षम अधिकारी द्वारा की जानी चाहिए लेकिन सम्पूर्ण पत्र व्यवहार विभागाध्यक्ष अपने निजी रुप से कर रही हैं। विभागाध्यक्ष इस संबंध में सक्षम अधिकारी नहीं है। वह मात्र संविदा कर्मी हैं । फिर भी नवज्योति ने उनसे सवाल किए। </p>
<p><strong>-  सवाल : </strong> शेड्यूल-1 का कोबरा और शेड्यूल-2 का करैत स्नेक कहां से आए और बिना अनुमति के क्यों रखा? <br />जवाब : रेप्टियल साइंस की फैकल्टी कॉआर्डिनेटर विनोद महोबिया द्वारा लाए गए, यह कहां से आए, किस अवस्था में आए, यह सभी डेटा मेंटेंन किया हुआ है, उन्होंने इसकी परमिशन वाइल्ड लाइफ डीएफओ सुनील गुप्ता से ली है। <br /><strong>-   सवाल :</strong> चैकर्ड कीलबैक सांप कहां से और कब, किस अवस्था में लाए, लैब में कैसे पहुंचा<br />जवाब : दिसम्बर 2022 में विवि परिसर में मृत मिला था, जिसे हमने लैब में प्रिजर्व रख लिया।<br /><strong>-   सवाल : </strong>चैकर्ड कीलबैक स्नैक को प्रिजर्व रखने की आपको परमिशन कब मिली?<br />जवाब : जनवरी 2023 में चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन से मिली थी।<br /><strong>- सवाल :</strong> स्वीकृति मिलने से पहले ही चैकर्ड कीलबैक को अपने पास प्रिजर्व रखा?, इसकी सूचना किस वन अधिकारी को दी और परमिशन किससे ली? <br />जवाब : मैंने इसकी सूचना वन विभाग के अधिकारी अनुराग भटनागर को दी थी। उन्होंने अपने पास रखकर सक्षम अधिकारी से परमिशन के लिए आवेदन करने की प्रोसेज करने को कहा था। <br /><strong>- सवाल : </strong>तीनों मृत सांपों को लैब में रखने से पहले वन विभाग को सूचित कर पोस्टमार्टम करवाया?<br />जवाब :  किसी भी स्नेक का पोस्टमार्टम नहीं करवाया।<br /><strong>- सवाल</strong>: लैब में रखी सांप की हड्डियां व अवशेष कहां से और कौन लाया?<br />जवाब : हमारे वाइल्ड लाइफ डिपार्टमेंट का एक स्टूडेंट रामगढ़ टाइगर रिजर्व में रिसर्च कर रहा है, उसे जंगल के बाहर से इसी अवस्था में मिला था तो वह लेकर आया था। पढ़ाने के लिए रखे हैं, इसमें कोई गलत बात नहीं है।</p>
<p><strong>सवाल : जब किसी भी वन अधिकारी ने परमिशन नहीं दी तो किसने दी। </strong><br />हमने कोटा विश्वविद्यालय प्रशासन को शेडयूल-1 व 2 के कोबरा व करैत की डेडबॉडी प्रिजर्व रखने की कोई परमिशन नहीं दी है। चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन की अनुमति के बिना कोई भी इन वन्यजीवों को अपने पास प्रिजर्व नहीं रख सकता। यदि, विश्वविद्यालय की लैबोरेट्री में रखे गए तो यह वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 का सीधा उल्लंघन है। ऐसे में संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ प्रारंभिक तौर पर सेशन-9 व 51 के तहत वन्य जीव की हत्या का मामला बनता है। शेडयूल 1 व 2 के सांप कब, कहां से, किस अवस्था लाए गए या मिले, हमें सूचना न देना, बिना पोस्टमार्टम रिपोर्ट के रखना सहित कई पहलुओं पर जांच के बाद और क्या धाराएं जोड़ी जाएंगी, इसका निर्णय हो सकेगा। परमिशन के संबंध में स्थानीय व जयपुर स्तर पर जो भी पत्र व्यवहार होगा वो वनमंडल के माध्यम से होगा। जांच कर कार्रवाई करेंगे।    </p>
<p><strong> -जयराम पांडे, उप वन संरक्षक, वन मंडल कोटा </strong></p>
<p>कहीं मृत स्नेक मिलता है तो सर्वप्रथम उसकी सूचना वन विभाग को देना अनिवार्य है। सूचना दिए बिना किसी भी वन्यजीव का शरीर तो दूर बॉडी का एक भी अंग नहीं रखा जा सकता। हमने किसी को कोई परमिशन नहीं दी है। मैं इसके लिए सक्षम अधिकारी नहीं हूं।  <br /><strong>- अनुराग भटनागर, डीएफओ, उड़नदस्ता वन्यजीव विभाग</strong></p>
<p> मैंने कोटा विश्वविद्यालय व किसी अन्य व्यक्ति को शेड्यूल-1 व 2 के सांपों को प्रिजर्व रखने की कोई परमिशन नहीं दी है। परमिशन तो चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन जयपुर से मिलती है। जिसके लिए प्रोसेज अपनाया जाता है। <br /><strong>- सुनील गुप्ता, डीएफओ, वन्यजीव विभाग कोटा</strong></p>
<p><strong>तुरंत एक्शन लेंगे</strong><br /> आपके द्वारा ही इस तरह के मामले की जानकारी मिली है। इसकी जांच करवाकर तुरंत कार्रवाई करेंगे। यदि विद्यार्थियों के अध्ययन के लिए इस तरह की सुविधाओं की जरूरत होती है तो विश्वविद्यालय द्वारा सक्षम स्तर से स्वीकृति के उपरांत ही संबंधित विभाग से परमिशन लेने की कार्यवाही की जाती है। <br /><strong>- प्रो. डॉ. निलीमा सिंह, कुलपति, कोटा विश्वविद्यालय </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Oct 2023 18:37:07 +0530</pubDate>
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                <title>प्रयोगशाला में मानव हृदय का एक टुकड़ा निकाला, जो पूरी तरह से धक-धक करता है!</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/a-piece-of-human-heart-was-extracted-in-the-laboratory/article-15155"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/rtr.jpg" alt=""></a><br /><p>शोधकर्ताओं ने एक प्रयोगशाला में मानव हृदय का एक हिस्सा विकसित किया। नया मॉडल पूरा दिल नहीं है। इसके बजाय, यह वेंट्रिकल का एक पुतला है, जो कोरोनरी हृदय के कई मुख्य तत्वों में से एक है। शोधकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने मिलीमीटर लंबे जहाज को रिवर्स इंजीनियर किया। इससे उन्हें एक ऐसा मॉडल बनाने में मदद मिली जो न केवल असली डील की तरह धड़कता है बल्कि यह वास्तव में इसके द्वारा तरल पदार्थ भी पंप कर सकता है, जैसे कि एक जीवित मानव हृदय में।<br /><br />मानव हृदय के अंगों की गहराई से जांच करने में सक्षम होना कठिन रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि एक रोगग्रस्त या स्वस्थ हृदय रक्त पंप कैसे करता है, इसकी समीक्षा करने के लिए केवल कुछ ही विकल्प उपलब्ध थे। पोस्टमार्टम द्वारा प्राप्त अंग प्रामाणिकता प्रस्तुत करते हैं। हालांकि, चूंकि वे उद्देश्यपूर्ण नहीं हैं, वे हिम्मत के अभ्यास में कोई धारणा नहीं देते हैं। ऊतक संवर्धन भी अच्छे हैं, लेकिन वे आमतौर पर सपाट होते हैं। नतीजतन, वे हिम्मत के कुल हाइड्रोलिक्स को जब्त नहीं करते हैं, जो ऊतक का त्रि-आयामी, स्पंदनशील द्रव्यमान है। इस नए पुतले के साथ, हालांकि, टोरंटो विश्वविद्यालय के एक बायोमेडिकल इंजीनियर, सरगोल ओखोवेशन, एक घोषणा में नोट करते हैं कि वे “इजेक्शन वॉल्यूम को मापने में सक्षम होंगे – वेंट्रिकल अनुबंधों के साथ-साथ हर बार कितना तरल पदार्थ बाहर निकलता है – साथ ही साथ उस द्रव का दबाव। ”<br /><br />यह हिम्मत और हृदय संबंधी बीमारियों का पता लगाने के लिए एक बड़ा कदम है, खासकर अगर वे इन प्रयोगशाला में विकसित दिलों में बीमारियों को इंजीनियर करेंगे। एक प्रयोगशाला में मानव हृदय के बढ़ते तत्व वैज्ञानिकों को अंग के स्पष्ट तत्वों की समीक्षा करने की अनुमति देंगे। यह मॉडल हमें यह भी जांचने की अनुमति देता है कि नवीनतम उपचारों के प्रभाव में रहने पर हृदय कैसे काम करता है। एक प्रयोगशाला में मानव कोरोनरी हृदय को ऊपर उठाने का सबसे स्पष्ट लाभ यह है कि यह हमें अंग को देखने देता है क्योंकि यह क्षमता रखता है। क्योंकि इंजीनियरों ने जो पुतला बनाया है, वह वास्तव में धड़कता है, हम देखेंगे कि तरल पदार्थ कैसे हिम्मत छोड़ता है और किस ड्राइव पर ऐसा करता है। इससे हमें दिल की समस्याओं के उपचार के प्रबंधन के लिए उच्च तरीके तय करने में मदद मिल सकती है।<br /><br />दिल की समस्याओं पर शोध और इसका इलाज करने से लंबे समय में काफी सुधार हुआ है। हालांकि, दिल की बीमारी अब भी हर साल लगभग 18 मिलियन लोगों की जिंदगी को दहला देती है। इस तरह के नए फैशन के साथ, हालांकि, वैज्ञानिक संभवतः विश्लेषण को नई श्रेणियों में धकेल सकते हैं। इसके अलावा, शोधकर्ताओं का कहना है कि यह संभव है कि जल्द या बाद में, वे अंग प्रत्यारोपण को हराकर एक आवास बना सकें। वर्तमान में, अंग प्रत्यारोपण की आवश्यकता के लिए आम तौर पर एक सुलभ दाता के साथ लौटने के लिए एक सूची पर तैयार होने की आवश्यकता होती है। अफसोस की बात है कि जिस व्यक्ति को प्रत्यारोपण की आवश्यकता है, वह उस प्रतीक्षा में हर समय जीवित नहीं रह सकता है। यदि हम मानव हृदय और अन्य अंगों का विकास करेंगे, तो हम प्रत्यारोपण को और अधिक व्यवहार्य बना देंगे, क्योंकि हमारे पास प्रत्यारोपण योग्य अंगों की एक स्थिर आपूर्ति होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Mon, 18 Jul 2022 16:06:51 +0530</pubDate>
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