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                <title>ramgarh - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>रामगढ़ से पिछड़ा मुकुंदरा, 1 जिप्सी के भरोसे जंगल सफारी, 100 किमी चक्कर काटकर भी निराश लौट रहे पर्यटक </title>
                                    <description><![CDATA[दो साल बाद भी मुकुंदरा की बोराबांस में शुरू नहीं हुई सफारी, दरा जाकर भी शहरवासियों को नहीं मिल रही सफारी की बुकिंग।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mukundra-lags-behind-ramgarh--jungle-safari-relies-on-only-1-jeep--tourists-return-disappointed-after-traveling-100-km/article-137745"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/500-px)-(2)10.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी शुरू हुए करीब दो साल बीत चुके हैं, इसके बावजूद सफारी परवान नहीं चढ़ी। जबकि, रामगढ़ टाइगर रिजर्व हाउस फुल चल रहा है। नतीजन, राजस्व और पर्यटकों की संख्या में मुकुंदरा, रामगढ़ टाइगर रिजर्व से पिछड़ रहा है। इसकी बड़ी वजह मुकुंदरा की सफारी 1 ही जिप्सी के भरोसे चल रही है। जबकि, रामगढ़ में 6 जिप्सी पर्यटकों को जंगल की सैर करवा रही है। दरअसल, मुकुंदरा में एक ही रेंज दरा में जंगल सफारी करवाई जा रही है, जो कोटा शहर से करीब 48 किमी दूर है और टिकट बुकिंग भी आॅफलाइन है। ऐसे में पर्यटक दरा जाता है तो जिप्सी पहले से ही बुक रहती है। ऐसे में उन्हें 48 किमी जाना और वापस आने में करीब 100 किमी का चक्कर काट बैरंग लौटना पड़ता है।</p>
<p><strong>रुट्स बने फिर से शहर से सटे बोराबास में शुरू नहीं हुई सफारी</strong><br />शहरी सीमा से सटे रावतभाटा रोड स्थित मुकुंदरा की बोराबास रेंज में जंगल सफारी शुरू किए जाना प्रस्तावित है। इसके रुट्स भी बन चुके हैं। हाल ही में रुट्स संशोधित भी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद यहां 2 साल बाद भी सफारी शुरू नहीं हो सकी। जबकि, यह जंगल शहर के नजदीक होने से पर्यटकों की संख्या में इजाफा हो सकता है। इसके बावजूद मुकुंदरा प्रशासन द्वारा यहां सफारी शुरू नहीं की जा रही। पर्यटकों को शहर से 48 किमी दूर दरा जाना पड़ता है, जहां भी एक ही जिप्सी होने से बुकिंग नहीं मिल पाती। ऐसे में उन्हें बैरंग लौटना पड़ता है।</p>
<p><strong>बोराबास में है चम्बल व जंगल का विहंगम व्यू प्वाइंट्स</strong><br />नेचर प्रमोटर एएच जैदी का कहना है कि शहर से सटी बोराबास रेंज का जंगल काफी घना है। यहां चंबल व जंगल के कई विहंग्म व्यू प्वाइंट है। इसके अलावा पैंथर, भेड़िया, भालू, जरख, फॉक्स सहित अन्य बड़े वन्यजीवों का हैबीटाट है, जिनकी सफारी के दौरान साइटिंग होने से पर्यटकों की संख्या में तेजी से इजाफा होगा। इधर, पर्यटकों का कहना है कि मुकुंदरा प्रशासन यदि, रावतभाटा रोड स्थित बोराबांस रैंज में स्वीकृत रुट्स पर सफारी शुरू करें तो हमें दरा जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। समय की बचत होगी और ट्यूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा।</p>
<p><strong>यह रहेगा 15 किमी का सफारी रुट्स</strong><br />बोराबास रेंजर राजपाल शर्मा ने बताया कि यहां दौलतगंज स्थित डायवर्जन चैनल के पास चौकी से सफारी के लिए पर्यटकों को एंट्री मिलेगी। यहां से चंबल नदी के किनारे कोटिया भील महल, चंबल व्यू प्वाइंट, गरड़िया व्यू प्वाइंट होते हुए रथकांकरा तक रुट रहेगा। यह रुट्स गत अक्टूबर माह में ही तय किया गया था। जल्द ही सफारी शुरू किए जाने की तैयारी है।</p>
<p><strong>दरा में एक जिप्सी के भरोसे सफारी</strong><br />दरा सेंचुरी में जंगल सफारी के लिए मात्र एक ही जिप्सी है, जो सुबह की पारी में 6 से 9 बजे तथा दोपहर 3 से 6 बजे तक रहती है। पर्यटकों को एंट्री व टिकट दरा रेंज कार्यालय से लेना होता है। यहीं से बुकिंग आॅफलाइन की जाती है। कोटा शहर से जाने वाले पर्यटकों को वहां जाकर पता लगता है कि जिप्सी एडवांस बुक हैं, ऐसे में उन्हें सफारी का मौका अगले दिन मिल पाएगा या फिर दोपहर की पारी तक इंतजार करना होगा। दोनों ही सूरत में पर्यटकों का समय व्यर्थ हो जाता है। मजबूरन उन्हें बैरंग लौटना पड़ता है। यदि, यहां जिप्सियों की संख्या बढ़ाई जाए तो भी लोगों को राहत मिल सकती है।</p>
<p><strong>ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों से झलकता प्राचीन वैभव</strong><br />नेचर प्रमोटर एएच जैदी ने बताया कि प्राकृतिक छटा के साथ मुकुन्दरा विरासत से भरा पड़ा है। रिजर्व में 12वीं शताब्दी का गागरोन किला, 17वीं शताब्दी का अबली मीणी का महल, पुरातात्विक सर्वे के अनुसार 8वीं-9वीं शताब्दी का बाडोली मंदिर समूह, भैंसरोडगढ़ फोर्ट, 19वीं शताब्दी का रावठा महल, शिकारगाह समेत कई ऐतिहासिक व रियासतकालीन इमारतें, गेपरनाथ, गरड़िया महादेव मंदिर भी है, जो कला-संस्कृति व प्राचीन वैभव को दशार्ते हैं। ऐसे में इन रुट्स पर सफारी शुरू होने से पर्यटक विरासत से रुबरू हो सकेंगे।</p>
<p><strong>इधर, रामगढ़ में दोनों स्लॉट की सफारी हाउस फुल</strong><br />रामगढ़ टाइगर रिजर्व के रेंजर सुमीत कुमार ने बताया कि नवम्बर व दिसम्बर माह से जंगल सफारी हाउस फुल चल रही है। सफारी के लिए यहां 6 जिप्सी संचालित की जा रही है। सुबह की 6 से 9 और शाम की 3 से 6 बजे की दोनों पारी में पर्यटकों को जबरदस्त रुझान देखने को मिल रहा है।</p>
<p><strong>क्या कहते हैं पर्यटक</strong><br />दरा में जंगल सफारी के लिए बुकिंग आॅफलाइन है, जो पर्यटन के लिहाज से सही नहीं है। शहर से 48 किमी का सफर कर दरा पहुंचते हैं तो वहां जाकर जिप्सी एडवांस बुक होने की बात पता चलती है, जिससे आना-जाना मिलाकर 100 किमी का चक्कर व्यर्थ हो जाता है। मुकुंदरा प्रशासन को बोराबास रैंज में सफारी शुरू करनी चाहिए।<br /><strong>-अशोक कुमार, महावीर नगर तृतीय</strong></p>
<p>दरा बहुत दूर पड़ता है। ऐसे में रावतभाटा रोड स्थित बोराबास या कोलीपुरा रेंज में प्रस्तावित रुट पर जंगल सफारी शुरू की जानी चाहिए। ताकि, पर्यटकों का समय व पेट्रोल का पैसा बच सके। साथ ही बुकिंग प्रणाली भी आॅनलाइन होनी चाहिए, जिससे व्यक्ति सफारी से पहले बुकिंग की करंट स्टेटस को देख ट्रैवलिंग प्लान बना सके।<br /><strong>-राम नारायण माहेश्वरी, दादाबाड़ी छोटा चौराहा</strong></p>
<p>मैं अपने साथियों के साथ कुछ दिनों पहले सफारी के लिए दरा गया था। वहां जाकर पता लगा कि जिप्सी एडवांस में ही बुक हो चुकी है। ऐसे में शाम का स्लॉट मिलने पर सफारी मिल सकती थी। जिसके लिए दोपहर 3 बजे तक का इंतजार करना पड़ता। ऐसे में वापस बैरंग लौटना पड़ा। यदि, बुकिंग व्यवस्था आॅनलाइन होती या फिर जिप्सी की संख्या अधिक होती तो उसी दिन सफारी का मौका मिल जाता। विभाग को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने और शहरी सीमा में स्थित रावतभाटा रोड के जंगलों में सफारी शुरू की जानी चाहिए।<br /><strong>-चेतन सैन, प्रहलाद मीणा कैशवपुरा</strong></p>
<p>बोराबास रेंज में जंगल सफारी शुरू की जानी है। यहां के रुट्स भी तय कर दिए हैं, अब यहां रास्ते, वाच टावर, एंट्री गेट सहित पब्लिक फेसेलिटी डवलपमेंट के लिए कार्य किए जा रहे हैं। हमारी कोशिश वित्तिय वर्ष की समाप्ती से पहले सफारी शुरू किए जाने की कोशिश है। पर्यटन बढ़ाने के लिए हमारी तरफ से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।<br /><strong>-सुगनाराम जाट, सीसीएफ मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Dec 2025 14:58:45 +0530</pubDate>
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                <title>अब मजबूत होगी बाघों की नस्ल, सुधरेगा जीनपूल, इंटर स्टेट बाघ ट्रांसलोकेशन से रुकेगी इन ब्रिडिंग</title>
                                    <description><![CDATA[मध्यप्रदेश के माधव टाइगर रिजर्व में मुकुंदरा व रामगढ़ के अधिकारियों को दो दिन ट्रैनिंग दी गई। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/tiger-populations-will-be-strengthened--gene-pools-will-improve--and-interstate-tiger-translocations-will-prevent-inbreeding/article-128635"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/cop7y-of-news.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। बाघों में इनब्रीडिंग गंभीर समस्या है, जिससे बाघों का जीन पूल कमजोर हो रहा है और उनकी प्रजनन क्षमता प्रभावित हो रही है, जिसके कारण शावक अपेक्षाकृत कमजोर पैदा हो रहे हैं। लेकिन, अब कोटा के मुकुंदरा व रामगढ़ टाइगर रिजर्व की तस्वीर बदलेगी। वन विभाग व एनटीसीए से इंटर स्टेट बाघ ट्रांसलोकेशन की अनुमति मिलने के बाद मध्यप्रदेश से दो बाघिन लाने की तैयारियां शुरू हो गई है। हाड़ौती के दोनों टाइगर रिजर्व में मध्यप्रदेश से बाघिन आने पर न केवल इन ब्रिडिंग की समस्या खत्म होगी बल्कि जीनपूल में सुधार होने से बाघों की नस्ल भी पहले की तुलना में अधिक मजबूत होगी।  दरअसल, इंटर स्टेट बाघ ट्रांसलोकेशन को लेकर मध्यप्रदेश के माधव टाइगर रिजर्व में मुकुंदरा व रामगढ़ के अधिकारियों को दो दिन ट्रैनिंग दी गई। जिसमें वाइल्ड लाइफ सीसीएफ सुगनाराम जाट व मुकुंदरा डीएफओ मूथू एस ने भाग लिया।  प्रशिक्षण में वन अधिकारियों को बाघिन के स्थानांतरण के दौरान बरती जाने वाली सावधानियां व जरूरी एहतियात उपायों व तैयारियों की जानकारी दी गई।  गौरतलब है कि दैनिक नवज्योति ने इनब्रिडिंग को लेकर पूर्व में खबर प्रकाशित कर इसके नुकसान से वन प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया था। जिसके बाद वन्यजीव प्रेमियों ने इंटर स्टेट बाघ ट्रांसलोकेशन की मांग उठाई। आखिरकार लंबे संघर्ष व इंतजार के बाद मध्यप्रदेश व महाराष्टÑ से बाघिन लाने का रास्ता साफ हुआ। </p>
<p><strong>नवम्बर के प्रथम सप्ताह में आएगी दो ट्राइग्रेस</strong><br />सीसीएफ जाट ने बताया कि मध्यप्रदेश व महाराष्टÑ से दो चरणों में बाघिन लाई जानी है। प्रथम फेस में नवम्बर माह के पहले सप्ताह में मध्यप्रदेश से एक-एक बाघिन मुकुंदरा व रामगढ़ टाइगर रिजर्व  में बाघिन लाई जाएगी। जिसे मुकुंदरा की राउंठा रेंज में बनने वाले एनक्लोजर में शिफ्ट कर सॉफ्ट रिलीज किया जाएगा। इसके बाद खुले जंगल में हार्ड रिलीज किया जाएगा। </p>
<p><strong>इसी माह में होगा एमटी-7 की हार्ड रिलीज का फैसला</strong><br />अभेड़ा बायोलॉजिलक पार्क से गत वर्ष दिसम्बर माह से रिवाइल्डिंग के लिए मुकुंदरा में शिफ्ट की गई बाघिन एमटी-7 को खुले जंगल में छोड़े जाने का फैसला इसी माह में होगा। क्योंकि, इसी अक्टूबर माह डब्ल्यूआईआई की टीम मुकुंदरा आएगी, जो बाघिन के व्यवहार, शिकार सहित फिजिकल वेरिफिकेशन कर हार्ड रिलीज को लेकर रिपोर्ट देगी। जिसके आधार पर खुले जंगल में छोड़े जाने को लेकर निर्णय होगा। </p>
<p><strong>इनब्रीडिंग से जुड़ी प्रमुख समस्याएं</strong><br /><strong>जीन पूल का कमजोर होना: </strong>प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व रिजर्व में अधिकांश बाघ रणथम्भौर से ही शिफ्ट किए गए हैं। ऐसे में अधिकांश बाघ एक ही जीन पूल से हैं, जिससे इनब्रीडिंग बढ़ रही है।</p>
<p><strong>प्रजनन क्षमता में गिरावट: </strong>इनब्रीडिंग के कारण बाघों की प्रजनन क्षमता पर बुरा असर पड़ रहा है। <br />शावकों की घटती उम्र और स्वास्थ्य: बायोलॉजिस्ट्स के अनुसार, नए पैदा होने वाले शावक कमजोर और बीमार हो रहे हैं, जिससे उनकी उम्र में गिरावट देखी जा रही है।  <br /><strong>बीमारियों का खतरा:</strong> इनब्रीडिंग बोन ट्यूमर जैसी बीमारियों का भी कारण बनती है, जो बाघों के लिए जानलेवा हो सकती हैं।</p>
<p><strong>बाघों की ट्रैकिंग व मॉनिटरिंग का दिया प्रशिक्षण</strong><br />संभागीय मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक सुगनाराम जाट  ने बताया कि बाघ स्थानांतरण कार्यक्रम के अंतर्गत मध्यप्रदेश से मुकुंदरा व रामगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघिन शिफ्ट की जानी है। ऐसे में बरती जाने वाली सावधानियां व जरूरी एहतियात   को लेकर 28 व 29 सितम्बर को मध्यप्रदेश के माधव टाइगर रिजर्व में ट्रैनिंग दी गई। जिसमें बाघों की ट्रैकिंग एवं मॉनिटरिंग के संबंध में प्रशिक्षण एवं व्यावहारिक जानकारी दी गई।  </p>
<p><strong>समाधान और प्रयास</strong><br />बाघों का आदान-प्रदान: इनब्रीडिंग से निपटने के लिए मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच बाघों के आदान-प्रदान की अनुमति मिली है, जो एक सकारात्मक कदम है। बरहाल, मध्यप्रदेश से बाघिन लाने की तैयारियां शुरू हो चुकी है। माधव टाइगर रिजर्व में वन अधिकारियों को दो दिवसीय ट्रैनिंग भी दी गई है। </p>
<p><strong>वन अधिकारियों को यह दिया प्रशिक्षण </strong><br /><strong>बाघ ट्रैकिंग एवं मॉनिटरिंग की सीखाई तकनीक</strong><br />मध्यप्रदेश से बाघिनों को शिफ्ट करने के दौरान मॉनिटरिंग की विभिन्न विधियों का प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें बाघों की गतिविधियों के पैटर्न की पहचान संबंधी व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। <br /><strong>रेडियो कॉलर का उपयोग करना </strong><br />रेडियो टेलीमेट्री के माध्यम से बाघों की ट्रैकिंग एवं मॉनिटरिंग की प्रक्रिया समझाई गई। वहीं, डेटा का एनालिसिस करना व हार्ड रिलीज के बाद बाघों की निगरानी के संबंध में तकनीकी जानकारी दी गई। <br /><strong>सॉफ़्ट रिलीज एनक्लोजर</strong><br />हार्ड रिलीज करने से पहले उस उन एनक्लोजरों का अवलोकन करना और सुरक्षा इंतजाम व अनूकूलन अवधि के दौरान अपनाई जाने वाली प्रोटोकॉल की जानकारी दी गई।<br /><strong>रिकॉर्ड संधारण, दस्तावेजीकरण </strong><br />ट्रैनिंग में वन अधिकारियों को अभिलेखों, रजिस्टरों एवं डिजिटल विधियों के माध्यम से बाघ मॉनिटरिंग का रिकॉर्ड संधारण करना सिखाया।  </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मुकुंदरा व रामगढ़ टाइगर रिजर्व में मध्यप्रदेश से प्रथम चरण में दो बाघिन लाई जानी है। इसी को लेकर एमपी के माधव टाइगर रिजर्व में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम था। जिसमें बाघ स्थानांतरण से लेकर ट्रैकिंग, मॉनिटरिंग, डेटा एनालिसिस, जरूरी इंतजाम, सावधानियों को लेकर व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया। नवम्बर माह के प्रथम सप्ताह में बाघिन लाए जाने की संभावना है। <br /><strong>- सुगनाराम जाट, संभागीय मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक वन्यजीव कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Oct 2025 15:24:36 +0530</pubDate>
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                <title>मुकुंदरा की सफारी में आए केवल 250 पर्यटक, रामगढ़ भर रही उड़ान </title>
                                    <description><![CDATA[एक साल में मुकुंदरा में 250 पर्यटक, रामगढ़ में 3 माह में ही 900 ने की सफारी। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mukundra-s-safari-is-bullock-cart--ramgarh-is-flying/article-100282"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/257rtrer-(1)12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी शुरू हुए करीब 13 महीने से ज्यादा समय बीत चुका है। इसके बावजूद  पर्यटकों का रुझान नहीं बढ़ सका। अब तक यहां मात्र 250 पर्यटक ही सफारी के लिए आए हैं। जबकि, रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में पिछले तीन माह में ही 900 पर्यटक जंगल सफारी का लुफ्त उठा चुके। दोनों टाइगर रिजर्व में पर्यटकों की संख्या में रात-दिन का अंतर अधिकारियों के प्रबंधन और सफारी के प्रति इच्छा शक्ति का भाव प्रकट करता है।  </p>
<p><strong>मुकुंदरा में 1 तो रामगढ़ में 9 जप्सी से सफारी</strong><br />मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी के लिए 4 रुट्स निर्धारित किए हुए हैं। लेकिन  सफारी मात्र दरा रेंज में एक रुट्स पर ही चल रही है। जहां एक ही जिप्सी के भरोसे पर्यटकों को सफारी करवाई जा रही है। छह से ज्यादा पर्यटकों के आने पर दूसरी गाड़ी नहीं मिलती है और उन्हें दोपहर की अगली पारी के लिए 6 घंटे इंतजार करना पड़ता है। जबकि, रामगढ़ टाइगर रिजर्व में 9 जिप्सी रजिस्टर्ड हैं। यहां आने वाले पर्यटकों को आसानी से बुकिंग मिल जाती है। लेकिन, मुकुंदरा में विजिटर्स को भटकना पड़ता है। </p>
<p><strong>13 माह में मुकुंदरा ने 2.20 लाख तो रामगढ़ ने 3 माह में ही कमा लिए 7.24 लाख </strong><br />मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी अक्टूबर 2023 में शुरू की गई थी। तब से अब तक 13 महीने में करीब 2 लाख 20 हजार रुपए का ही राजस्व मिला है। जबकि, रामगढ़ टाइगर रिजर्व की बात करें तो यहां वर्ष 2023 में अक्टूबर से दिसम्बर तक मात्र तीन महीने में 7 लाख 24 हजार रुपए का राजस्व प्राप्त हो चुका है। हालांकि, आरवीटीआर में 9 जप्सी रजिस्टर्ड है। जबकि, एमएचटीआर में सिर्फ 1 जिप्सी के भरोसे ही पर्यटकों को सफारी करवाई जा रही है। दोनों रिजर्व में पर्यटकों की संख्या व राजस्व के आंकड़ों में रात-दिन का अंतर अधिकारियों की कार्यप्रणाली, कार्य दक्षता, प्रबंधन और रुचि को प्रदर्शित करता है।</p>
<p><strong>यहां 13 माह में 250 और वहां 3 माह में 900 पर्यटकों ने की सफारी </strong><br />जंगल सफारी के प्रति रुझान वन अधिकारियों के प्रबंधन और इच्छाशक्ति पर निर्भर करता है। मुकुंदरा और रामगढ़ दोनों टाइगर रिवर्ज में सफारी बफर जोन में करवाई जाती है। इसके बावजूद एक साल में मुकुंदरा में पर्यटकों की संख्या निराशाजनक रही, जबकि रामगढ़ में पिछले तीन महीने के ही आंकड़े उत्साहवर्धक रहे हैं। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में 1 अक्टूबर 2023 से अब तक मात्र 250 पर्यटक ही सफारी के लिए दरा पहुंचे हैं। इसके ठीक विपरीत रामगढ़ टाइगर रिजर्व में गत वर्ष अक्टूबर से दिसम्बर तक के तीन माह में ही 900 विजिटर्स सफारी कर चुके हैं। </p>
<p><strong>मुकुंदरा डीएफओ ने नहीं दिया जवाब</strong><br />मामले को लेकर नवज्योति ने मुकुंदरा टाइगर रिजर्व के डीएफओ मुथू एस को फोन किया था लेकिन उन्होंने रिसीव नहीं किया। </p>
<p><strong>मुकुंदरा में पर्यटकों की संख्या में कमी के कारण</strong><br />- मुकुंदरा टाइगर रिजर्व के बफर जोन में सफारी के लिए 4 रुट तय किए गए हैं लेकिन 1 ही रुट दरा अभयारण्य में सफारी करवाई जा रही है, जो शहर से करीब 70 किमी दूर है। जिसकी वजह से पर्यटक जाने में रुचि नहीं दिखाते। <br />- दरा अभयारणय में एक ही जिप्सी के भरोसे सफारी चल रही है। पर्यटकों को दोपहर की पारी के लिए 6 घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। <br />- शहर के बीच मुकुंदरा के शेष 3 रुट्स पर सफारी शुरू नहीं किया जाना सबसे बड़ा कारण है।<br />- वर्तमान में मुकुंदरा में तीन टाइगर हैं। जिनमें से बाघ  एमटी-5 व बाघिन एमटी-6 का मूवमेंट बोराबांस, कोलीपुरा व जवाहर सागर रेंज में रहता है। जिस रुट पर सफारी है वहां टाइगर नहीं है। हालांकि, दरा में 5 हैक्टेयर के एनक्लोजर में अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क से शिफ्ट की गई बाघिन है, जिसकी रिवाइल्डिंग की जा रही है। ऐसे में यहां पर्यटकों को टाइगर देखने को नहीं मिलते। <br />- सफारी को आने वाले पर्यटकों में मुख्यत: टाइगर आकर्षण रहता है, लेकिन इस रुट्स में टाइगर नहीं होने से भी पर्यटक यहां नहीं आते। <br />- मुकुंदरा में जंगल सफारी का प्रचार प्रसार की भारी कमी है। <br />- दरा में ट्यूरिस्ट सेंटर नहीं होने से लोगों को कहां से टिकट मिलेंगे और कहां से जिप्सी मिलेगी, इसकी जानकारी नहीं मिल पाती। <br />- बुनियादी सुविधाओं व वन अधिकारियों में इच्छा शक्ति का अभाव।<br />- दरा रेंज में सफारी रुट पर सावनभादौ डेम भी आता है, जहां विभिन्न प्रजातियों के पक्षी, वन्यजीव व मगरमच्छों की अच्छी साइटिंग होती है। लेकिन इस क्षेत्र में पर्यटकों के लिए कहीं भी कैफेटेरिया नहीं है। </p>
<p>मुकुंदरा और रामगढ़ दोनों ही सफारी को लेकर प्राइमरी स्टेज पर हैं। अभी पूरी तरह से सुविधाएं भी विकसित नहीं हुई हैं। यहां न तो बेहतर ट्रैक है और न ही अच्छी गाड़ियां रजिस्टर्ड हैं। हालांकि, दोनों ही रिजर्व में सफारी का प्रचार-प्रसार किया जाएगा। रही बात टाइगर की तो मुकुंदरा में तीन और रामगढ़ में दो टाइगर लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।<br /><strong>- रामकरण खैरवा, संभागीय मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक, वन विभाग कोटा</strong></p>
<p>रामगढ़ टाइगर रिजर्व में सफारी के प्रति पटर्यटकों में रुझान बढ़ रहा है। यहां पिछले तीन महीने अक्टूबर से दिसम्बर 2024 तक 900 पर्यटकों ने जंगल सफारी कर चुके हैं। जिनसे सरकार को 7.24 लाख रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ है। यहां पर्यटकों की  संख्या बढ़ें, इसके लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। <br /><strong>- संजीव शर्मा, डीएफओ रामगढ़ टाइगर रिजर्व</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jan 2025 16:14:17 +0530</pubDate>
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                <title>रामगढ में युवक की चाकू से गोदकर हत्या</title>
                                    <description><![CDATA[ घर से रामलीला देखने की कहकर घर से निकला था। पुलिस ने बताया कि आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे के माध्यम से इस मामले की जांच की जा रही है कि इस हमले में कौन-कौन शामिल था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/alwar/draft-add-your-title/article-59617"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/बंदर-ली-अधिकारी-कि-जगह(2).png" alt=""></a><br /><p>रामगढ में युवक की चाकू से गोदकर हत्या</p>
<p>अलवर। राजस्थानमें अलवर जिले के रामगढ़ कस्बे में चल रही रामलीला के दौरान ही एक युवक की चाकू से गोदकर हत्या किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।</p>
<p>      रामगढ़ थाने के एएसआई समुंद्र सिंह ने बताया कि थाने के रामलीला मैदान के पास सब्जी मंडी में घायल अवस्था में किसी युवक के पड़े होने की सूचना मिली। मौके पर पहुंचे तो एक युवक लहूलुहान अवस्था में जमीन पर पडा मिला। जिसके शरीर से खून बह रहा था। जिसे बिना समय गवाए रामगढ़ सीएचसी में भर्ती कराया । जहां से गंभीर स्थिति होने पर युवक को अलवर रैफर कर दिया। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। हत्या की यह वारदात रामगढ़ थाने से चंद दुरी स्थित रामलीला मैदान के पास हुई।</p>
<p>उन्होंने बताया कि मृतक की पहचान 22 वर्षीय रवि नायक निवासी नायक मोहल्ला रामगढ़ के रूप में हुई है। इस मामले में गंभीरता से जांच की जा रही है और इसके शरीर पर चाकू के हमले के निशान पाए गए हैं। करीब 8-10 स्थान पर चाकू के घाव हैं। मृतक के शव को अलवर के राजीव गांधी सामान्य चिकित्सालय की मोर्चरी में रखवाया गया है। युवक पर बड़ी बेरहमी से चाकू से वार किया गया।</p>
<p>मृतक रवि नायक अपने घर से रामलीला देखने की कहकर घर से निकला था। पुलिस ने बताया कि आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे के माध्यम से इस मामले की जांच की जा रही है कि इस हमले में कौन-कौन शामिल था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अलवर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Oct 2023 18:23:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जल्द हो सकती है राजा की रामगढ़ की रानी से मुलाकात</title>
                                    <description><![CDATA[टाइग्रेस टी-102 का मंगल प्रवेश के साथ ही जीवन साथी की तलाश में दो साल से भटक रहा टाइगर टी-115 का इंतजार खत्म हो गया। रामगढ़ के जंगल में बाघिन के कदम पड़ते ही वन्यजीव प्रेमियों में खुशियों की लहर है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/soon-the-king-may-meet-the-queen-of-ramgarh/article-15249"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/jald-ho-sakti-hai-raja-ki-rani-se-mulakaat-kota-news-19.7.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। रामगढ़ टाइगर रिजर्व बाघों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है। यहां, घना जंगल, पहाड़, झरने, और सदानीरा मेज नदी और प्रकृति की गोद में पलते सैकड़ों प्रजाति के वन्यजीवों की अच्छी तादाद है। ऐसे में बाघों की बसावट के लिए रामगढ़ विषधारी अभयारण्य आदर्श जगह है। इसी का नतीजा है, टाइगर रिजर्व बनने के दो माह में ही रामगढ़ में बाघिन को बसा दिया गया। टाइग्रेस टी-102 का मंगल प्रवेश के साथ ही जीवन साथी की तलाश में दो साल से भटक रहा टाइगर टी-115 का इंतजार खत्म हो गया। रामगढ़ के जंगल में बाघिन के कदम पड़ते ही वन्यजीव प्रेमियों में खुशियों की लहर है। उम्मीद जताई जा रही है, जल्द ही जंगल के राजा का घर बसेगा। हालांकि, मुंह दिखाई की रस्म में अभी थोड़ा वक्त लग सकता है। क्योंकि, बाघिन मछली की पौती थोड़ी शर्मिली है। अभी वह अपने नए घर के माहौल में घुलने-मिलने की कोशिश कर रही है। वहीं, होने वाले दूल्हे राजा के कदम भी अपनी रानी की ओर बढ़ रहे हैं। मंगलवार को बाघ टी-115 के पगमार्क गुलखेड़ी गांव स्थित महादेव मंदिर के पास मिले हैं। यह इलाका बाघिन के एनक्लोजर से ज्यादा दूर नहीं है। ऐसे में जल्द ही पहली मुलाकात के कयास लगाए जा रहे हैं।  <br /><br /><strong> मन को भाया रामगढ़</strong> <br />बाघिन टी-102 को रामगढ़ की वादियां पसंद आ रही है। 4 हैक्टैयर में फेला सॉफ्ट एनक्लोजर में घूम रही है। सुबह-शाम एनक्लोजर में टहलती है। असल में वह रामगढ़ के जंगल से रूबरू हो रही है। परिवेक्ष में घुलने-मिलने की कोशिश कर रही है। बाघिन पूरी तरह से स्वस्थ है। रणथम्भौर से यहां आने के बाद सोमवार शाम तक 5-6 बार साइटिंग हुई है। वन विभाग के कर्मचारी लगातार निगरानी बनाए हुए हैं। वहीं, रेडियोकॉलर से उसका मूवमेंट व मॉनिटरिंग की जा रही है। वहीं, सुरक्षा के लिहाज से एनक्लोजर में 4 कैमरे लगाए गए हैं, जिसके जरिए बाघिन के व्यवहार, स्वभाव में होने वाले बदलावों पर नजर रखी जा रही है। <br /><br /><strong>तीन दिन बाद भी नहीं किया शिकार</strong> <br />बाघिन को रामगढ़ आए सोमवार को तीन दिन हो गए हैं। अभी तक उसने कोई शिकार नहीं किया। जबकि, एनक्लोजर में पर्याप्त मात्रा में प्री-बेस सहित भोजन-पानी की माकूल व्यवस्थाएं हैं। डीसीएफ संजीव शर्मा ने बताया कि शिफ्टिंग से पहले बाघिन ने रणथम्भौर में शिकार किया था। इसलिए, उसका पेट भरा होने से वह अभी शिकार नहीं कर रही है। टाइगर शिकार करने के बाद उसे पूरा नहीं खाते। एक बार में वह करीब 5 किलो मांस खाते हंै, इसके बाद 7-8 दिन बिना खाए भी रह सकते हैं। <br /><br /><strong>जल्द हो सकता है मिलन</strong><br />डीसीएफ शर्मा ने बताया कि टाइगर्स में सूंधने की शक्ति काफी तेज होती है। बाघ जैसे ही एनक्लोजर के आसपास आएगा तो उसे अपने ईर्द-गिर्द अन्य टाइगर या टाइग्रेस की मौजूदगी का पता चल जाता है। सोमवार को बाघ टी-115 के गुलखेड़ी गांव स्थित महादेव के मंदिर पास पगमार्क मिले हैं। यह जगह एनक्लोजर से ज्यादा दूर नहीं है। ऐसे में बाघ और बाघिन का आमना-सामना जल्द हो सकती है। <br /><br /><strong>रामगढ़ की लाइफ लाइन है मेज नदी</strong><br />वन्यजीव प्रेमियों के मुताबिक, 20 मई 1982 को रामगढ़ सेंचुरी बना और 2021 में टाइगर रिजर्व घोषित हुआ। जिसका गजट नोटिफिकेशन 16 मई 2022 को पब्लिश हुआ था। इसी के साथ रामगढ़ देश का 52वां और प्रदेश का चौथा टाइगर रिजर्व बन गया। रामगढ़ का कोर व बफर एरिया 1501 वर्ग किमी है। इसमें अभयारण्य का 225 वर्ग किमी, चंबल घड़ियाल सेंचुरी का 256 वर्ग किमी, बफर एरिया 1019.98 वर्ग किमी एरिया शामिल है। इसके बीच से गुजरती मेज नदी अभयारण्य की लाइफ लाइन है। <br /><br /><strong>यहां बड़ी संख्या में है वन्यजीव</strong> <br />रामगढ़ अभ्यारण्य एक तरफ रणथम्भौर तो दूसरी तरफ मुकुंदरा टाइगर रिजर्व से जुड़ा हुआ है। इस टाइगर रिजर्व में नीलगाय, सियार, हिरण, भालू, आईना, जंगली कुत्ते, चीतल, सांभर, जंगली बिल्लियां, तेंदुए, लंगूर, सांप, मगरमच्छ सहित कई प्रकार के वन्यजीव मौजूद हैं। वहीं, खूबसूरत बाघों के प्रजनन के लिए ग्रास लैंड है। इसके अलावा रणथम्भौर से ज्यादा वैरायटी के पौधे भी रामगढ़ में है<br /><br /><strong>बाघों के प्रजनन के लिए खूबसूरत ग्रास लैंड</strong><br />बूंदी का रामगढ़ अभयारण्य सदियों से बाघों के लिए मैटरनिटी होम (जच्चा घर) के रूप में प्रसिद्ध रहा है। रामगढ़ का प्राकृतिक वातावरण व इसके बीच में बहने वाली मेज नदी की खूबसूरत वादियों में बाघों की दहाड़ ने ही इसे देश का एक प्रमुख अभयारण्य होने का गौरव प्रदान किया है। रणथम्भौर से टी-62 व टी-91 बाघों के यहां आने के बाद अभयारण्य का स्वरूप पूरी तरह बदल गया था। टी-91 को मुकुंदरा में शिफ्ट किया था और टी-62 वापस लौट गया था। वर्तमान में रणथम्भौर से निकला टी-115 यहां 2 साल से सेंचुरी में विचरण कर रहा है। <br /><br /><strong>टूरिज्म के लिए बूंदी से बेहतर कोई स्पॉट नहीं </strong> <br />वाइल्ड लाइफ सफारी के लिए बूंदी से बेहतर कोई स्पोट नहीं है। यहां समृद्ध हेरिटेज है। फोर्ट पेंटिंग, बावड़ियां, झील-झरने, रॉक पेंटिंग्स हैं। यहां घड़ियाल सेंचुरी के साथ ही वेटलैंड्स है। बर्ड्स की हजारों की तादात में यहां प्रजातियां है।<br /><br /><strong>बाघिन पूरी तरह से स्वस्थ</strong> <br />बाघिन टी-102 पूरी तरह से स्वस्थ है। लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। उसकी साइटिंग भी हो रही है। रामगढ़ आए उसे अभी 48 घंटे ही हुए हैं। जंगल के माहौल में घुलने-मिलने की कोशिश कर रही है। पेट भरा होने से अभी तक बाघिन ने कोई शिकार नहीं किया। जबकि, एनक्लोजर में प्री-बेस सहित भोजन-पानी की सभी व्यवस्थाएं हैं। यहां आने से पहले उसने रणथम्भौर में शिकार किया था। बाघ 115 के महादेव मंदिर के पास ताजा पगमार्क मिले हैं। नियमित ट्रैकिंग व मॉनिटरिंग की जा रही है। <strong>- संजीव शर्मा, डीसीएफ, रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व बूंदी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Jul 2022 15:18:58 +0530</pubDate>
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