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                <title>Ceasefire - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Ceasefire RSS Feed</description>
                
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                <title>होर्मुज में ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ के बाद तनाव बढ़ा: नए हमलों के बीच ईरान-अमेरिका वार्ता खतरे में, ट्रंप ने दी चेतावनी </title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम टूटने की कगार पर है। 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' और ईरानी ड्रोन हमले के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी जहाजों पर हमला होने पर ईरान को मिटा दिया जाएगा। इस तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी ने वैश्विक नौवहन और शांति के लिए गंभीर संकट पैदा कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/tension-increases-after-project-freedom-in-hormuz-iran-us-talks-in/article-152825"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/trump--and-iran.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। ईरान और अमेरिका के बीच हुआ युद्धविराम अब होर्मुज स्ट्रेट को लेकर खतरे में पड़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के ताजा प्रस्ताव को खारिज करने और होर्मुज से जहाजों के पारगमन में मदद के लिए ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ शुरू करने के बाद तनाव चरम पर है। यूएई के फुजैरा पेट्रोलियम उद्योग क्षेत्र पर ईरान के ड्रोन हमले के बाद स्थिति और भी गंभीर हो गई है। इस हमले में तीन भारतीय नागरिक घायल हुए हैं। इस घटना ने उस शांति को खत्म कर दिया है जो अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम के बाद से बनी हुई थी। </p>
<p>ट्रम्प की चेतावनी : हमारे जहाजों पर हमला किया तो मिटा देंगे : उधर, ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरानी सेना ने होर्मुज या फारस की खाड़ी में कहीं भी अमेरिकी जहाजों को निशाना बनाने का दुस्साहस किया, तो उन्हें धरती से मिटा दिया जाएगा। ईरान की प्रतिक्रिया भी उतनी ही आक्रामक रही है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालीबाफ ने अमेरिका और उसके सहयोगियों पर युद्धविराम के उल्लंघन और नाकाबंदी कर सुरक्षित नौवहन को खतरे में डालने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के लिए मौजूदा स्थिति को सहन करना असंभव होगा और चेतावनी दी कि ईरान के पास अभी भी कई बड़े विकल्प मौजूद हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 11:04:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान-पाकिस्तान वार्ता : मॉस्को रवाना हुए Abbas Araghchi ; पुतिन से करेंगे अहम मुलाकात, मध्यस्थता प्रयासों के बीच अमेरिका से वार्ता जारी रखने पर चर्चा </title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पाकिस्तान, ओमान और रूस के साथ गहन कूटनीतिक चर्चा की है। अमेरिका के साथ संवाद बहाली और होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हुए, वे अब मास्को में राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात करेंगे। इस दौरे का उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव कम करना और वैश्विक स्थिरता सुनिश्चित करना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/iran-pakistan-talks-abbas-araghchi-leaves-for-moscow-will-have-an/article-151885"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran7.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोमवार को कहा कि उनकी पाकिस्तान यात्रा के दौरान कई मध्यस्थों की भागीदारी वाले क्षेत्रीय राजनयिक प्रयासों के बीच अमेरिका के साथ बातचीत को निरंतर जारी रखे जाने को लेकर पाकिस्तान के साथ चर्चा की गयी है। अराघची ने टेलीग्राम पर लिखा, "पाकिस्तान में मेरे दोस्तों के साथ मेरी अच्छी बातचीत हुई और यह दौरा सफल रहा। हमने इस बात पर चर्चा की कि किन परिस्थितियों में और किस तरह से बातचीत जारी रखी जा सकती है।"</p>
<p>क्षेत्रीय स्तर पर समानांतर परामर्श के दौरान, अराघची ने ओमान में हुई चर्चाओं का भी उल्लेख किया जहां ईरानी और ओमानी अधिकारियों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में हो रहे घटनाक्रमों पर बात की। उनका कहना है कि दोनों पक्षों ने समुद्री सुरक्षा पर समान रुख अपनाया और इस मुद्दे पर विशेषज्ञ स्तर का संवाद जारी रखने पर सहमति व्यक्त की। ईरानी विदेश मंत्री आगे की बातचीत के लिए मास्को रवाना हुए हैं। ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि वह सोमवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात करेंगे और वार्ता की वर्तमान स्थिति, युद्धविराम से संबंधित घटनाक्रम और व्यापक क्षेत्रीय स्थितियों पर चर्चा करेंगे।</p>
<p>हाल के वर्षों में रूस और ईरान के राजनीतिक और रणनीतिक संबंध मजबूत हुए हैं खासकर तब जब दोनों देश व्यापक पश्चिम देशों के प्रतिबंधों के साए में हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि चर्चा में मध्यस्थता प्रयासों और चल रहे क्षेत्रीय संघर्षों पर अद्यतन जानकारी शामिल होगी। इसके अलावा, ओमान के अधिकारियों ने यह भी कहा कि श्री अराघची के साथ हुई चर्चा में क्षेत्रीय स्थिरता, होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा और तनाव कम करने के उद्देश्य से चल रहे मध्यस्थता प्रयासों पर ध्यान केंद्रित किया गया। ओमान के प्रतिनिधियों ने क्षेत्र में चल रहे संकटों के लिए संवाद और राजनयिक समाधानों के महत्व पर बल दिया।</p>
<p>ये राजनयिक प्रयास ऐसे समय में किए जा रहे हैं जब अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ क्षेत्र में पहले के संघर्ष संबंधी तनावों और प्रत्यक्ष वार्ता में लंबे समय तक विराम के बाद ईरान और अमेरिका के बीच अप्रत्यक्ष संपर्क बनाए रखने के प्रयास जारी रखे हुए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 18:26:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा: तीन हफ़्तों के लिए और बढ़ा इज़रायल और लेबनान के बीच संघर्ष-विराम, नेतन्याहू और जोसेफ आउन के बीच शिखर सम्मेलन की मेजबानी की संभावना</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इज़रायल और लेबनान के बीच संघर्ष विराम को तीन सप्ताह के लिए बढ़ाने की घोषणा की है। व्हाइट हाउस में हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद ट्रंप ने हिज़्बुल्लाह के विरुद्ध लेबनान की रक्षा का संकल्प लिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/donald-trumps-announcement-extends-the-ceasefire-between-israel-and-lebanon/article-151524"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump3.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। इज़रायल और लेबनान के बीच संघर्ष विराम को तीन हफ़्तों के लिए बढ़ा दिया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को यह घोषणा की। यह फ़ैसला व्हाइट हाउस के ओवल ऑफ़िस में श्री ट्रम्प, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वैन्स, विदेश मंत्री मार्को रूबियो, इज़रायल में अमेरिका के राजदूत माइक हकाबी, लेबनान में अमेरिका के राजदूत मिशेल ईसा और इज़रायल तथा लेबनान के कई उच्च-स्तरीय प्रतिनिधियों के बीच हुई एक बैठक में लिया गया।</p>
<p>ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर कहा, "बैठक बहुत अच्छी रही।" उन्होंने कहा कि अमेरिका लेबनान को हिज़्बुल्लाह से रक्षा करने में मदद करने के लिए उसके साथ मिलकर काम करेगा। उन्होंने कहा कि वह "निकट भविष्य" में इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन की बैठक की मेज़बानी करने के लिए उत्सुक हैं, हालाँकि उन्होंने इसकी तारीख़ की घोषणा नहीं की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 10:51:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान ने ट्रंप के युद्धविराम विस्तार को 'चाल' बताकर किया खारिज: कहा-हमने कभी इसकी मांग नहीं की, नौसैनिक नाकेबंदी की निंदा की </title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने डोनाल्ड ट्रंप के एकतरफा युद्धविराम विस्तार को 'धोखा' करार देते हुए खारिज कर दिया है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को 'युद्ध की कार्रवाई' बताया। ईरान का स्पष्ट रुख है कि जब तक नाकेबंदी खत्म नहीं होती, कोई वार्ता संभव नहीं है और हॉर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद रहेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/iran-rejected-trumps-ceasefire-extension-as-a-ploy-said/article-151300"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran6.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्धविराम को एकतरफा बढ़ाने की घोषणा पर शक जाहिर करते हुए कहा है कि यह एक 'चाल' है और उसने कभी इसके लिए दरख्वास्त नहीं की थी। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान ने 'धमकियों के साये' में युद्धविराम विस्तार या नयी बातचीत की कोई गुजारिश नहीं की है। श्री अराघची ने ईरानी बंदरगाहों की जारी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी की निंदा करते हुए इसे 'युद्ध की कार्रवाई' और मौजूदा युद्धविराम सिद्धांतों का उल्लंघन करार दिया। उन्होंने कहा, “ईरान जानता है कि दबंगई का मुकाबला कैसे करना है।”</p>
<p>ईरानी संसद के अध्यक्ष बगर गालिबाफ के वरिष्ठ सलाहकार महदी मोहम्मदी ने युद्धविराम विस्तार को खारिज करते हुए कहा कि ईरान के नजरिये से इसका 'कोई मतलब नहीं' है और इसकी 'कोई वास्तविक अहमियत' नहीं है। उन्होंने इस कदम को 'अचानक हमले' के लिए वक्त हासिल करने की रणनीति बताया और दलील दी कि जो पक्ष इस तरह के दबाव का सामना कर रहा हो, वह शर्तें तय नहीं कर सकता।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत आमिर सईद इरावानी ने इस बात पर जोर दिया कि इस्लामाबाद में किसी भी औपचारिक शांति वार्ता में शामिल होने के लिए नौसैनिक नाकेबंदी को खत्म करना ईरान की अनिवार्य शर्त है।इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) से जुड़ी ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी मेहर (एमएनए) ने कहा कि ईरान ने युद्धविराम बढ़ाने की मांग नहीं की है। एजेंसी ने ताकत के दम पर अमेरिकी नाकेबंदी को तोड़ने की धमकियों को फिर दोहराया।</p>
<p>युद्धविराम विस्तार की यह घोषणा युद्ध में हुए कई बड़े घटनाक्रमों के बाद हुई है। हमलों पर रोक के बावजूद ट्रंप ने अमेरिकी सेना को नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखने का निर्देश दिया है, जो ईरान के लिए विवाद का मुख्य मुद्दा बना हुआ है। ट्रंप ने दावा किया कि यह विस्तार आंशिक रूप से ईरानी सरकार में 'गहरी दरार' होने के कारण किया गया है। ईरानी अधिकारियों ने इस आख्यान को खारिज कर दिया है और स्थायी शांति के लिए खुद की '10-सूत्रीय योजना' पर कायम हैं।</p>
<p>मेहर समाचार एजेंसी ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप, जो पिछले कुछ दिनों से बार-बार दावा कर रहे थे कि वह ईरान के साथ युद्धविराम नहीं बढ़ायेंगे, उन्होंने एकतरफा रूप से युद्धविराम विस्तार की घोषणा कर दी। एजेंसी के मुताबिक, ट्रंप को एकतरफा युद्धविराम की घोषणा करने के लिए मजबूर होना पड़ा, जबकि उन्होंने पहले खुले तौर पर जोर दिया था कि वह किसी भी हाल में युद्धविराम नहीं बढ़ायेंगे और ईरान को इस्लामाबाद वार्ता में हिस्सा लेना ही होगा।</p>
<p>डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को घोषणा की थी कि अमेरिकी प्रतिनिधि बातचीत के लिए पाकिस्तान जा रहे हैं और अगर ईरान सहमत नहीं हुआ तो युद्ध फिर से शुरू हो जायेगा। ईरानी अधिकारियों ने हालांकि चुप्पी साधे रखी है और बातचीत में शामिल होने या न होने के संबंध में किसी आधिकारिक रुख की घोषणा नहीं की है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका ने युद्धविराम का उल्लंघन किया है। एक अन्य अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी, तस्नीम ने अज्ञात अधिकारियों के हवाले से यह भी कहा कि ईरान ने युद्धविराम के विस्तार का अनुरोध नहीं किया था, और ट्रंप की घोषणा के कई मायने हो सकते हैं।</p>
<p>"पहला मतलब यह है कि ट्रंप युद्ध हार चुके हैं। उन्होंने युद्ध के दौरान सभी संभावित परिदृश्यों का परीक्षण और कार्यान्वयन कर लिया है।" इसमें कहा गया है कि श्री ट्रंप जानते हैं कि युद्ध के जरिये उन्हें कुछ हासिल नहीं होगा, इसलिए वह युद्ध से बाहर निकलने को ही अपने लिए सबसे अच्छा रास्ता मानते हैं। अगर वह युद्ध जारी भी रखते हैं, तब भी उन्हें कुछ हासिल नहीं होगा। तस्नीम ने कहा कि हालांकि इस युद्ध में अमेरिका के लिए कोई उपलब्धि नहीं है, लेकिन ट्रंप हर मुमकिन हथकंडे से धोखा देने सहित कुछ भी कर सकते हैं, जिनमें युद्धविराम का विस्तार भी शामिल है। इसमें कहा गया है कि ट्रंप युद्धविराम बढ़ाने का दावा कर सकते हैं, लेकिन फिर वही अमेरिकी प्रशासन या इजरायल 'आतंकवादी कदम' उठा सकते हैं। एजेंसी ने कहा कि ईरान ऐसे परिदृश्य को कम कर नहीं आंकता और इस तरह की संभावना पर करीब से नजर रख रहा है।</p>
<p>इसमें कहा गया है कि अमेरिका युद्ध से पीछे हट जायेगा और इजरायल लेबनान में युद्धविराम के उल्लंघन के बहाने इस जंग में बना रहेगा।अमेरिकी अधिकारियों को हालांकि पहले ही चेतावनी दी जा चुकी है कि अमेरिका एकतरफा रूप से युद्ध से भाग नहीं सकता और इजरायल को लड़ाई में बनाये नहीं रख सकता। नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहने का मतलब है कि शत्रुता जारी है। जब तक नौसैनिक नाकेबंदी लागू रहेगी, तब तक ईरान कम से कम होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोलेगा और अगर जरूरी हुआ तो ताकत के बल पर इस नाकेबंदी को तोड़ देगा।</p>
<p>इसमें कहा गया है कि अमेरिका ईरान पर युद्ध का साया बनाये रखना चाहता है और ईरान की अर्थव्यवस्था और राजनीति को अधर में रखना चाहता है। तस्नीम ने अज्ञात अधिकारियों के हवाले से कहा, "अमेरिका का मानना है कि ईरान की स्थिति वैसी ही है, जैसी 12 दिवसीय युद्ध के बाद थी। वर्तमान काल में हालांकि एक मौलिक अंतर है और वह है होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण। अगर अमेरिका युद्ध का साया बनाये रखना चाहता है, तो उसे यह जान लेना चाहिए कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से बंद रहेगा।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 18:01:12 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका ने बढ़ाया युद्धविराम, ट्रंप बोले-ईरानी नेतृत्व बातचीत के लिए एक &quot;एकीकृत प्रस्ताव&quot; पेश नहीं करता, तब तक नहीं होगी कोई आक्रामक कार्रवाई </title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान की अपील पर ईरान के साथ युद्धविराम बढ़ाने और सैन्य हमला स्थगित करने की घोषणा की है। हालांकि, अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि नौसैनिक नाकेबंदी और सैन्य तैयारी जारी रहेगी। अब तक 4,000 मौतों के बाद, यह कदम कूटनीति को एक आखिरी मौका देने के रूप में देखा जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/donald-trump-extends-ceasefire-says-no-offensive-action-unless-iranian/article-151271"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/chatgpt-image-apr-22,-2026,-11_56_00-am.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को घोषणा की कि अमेरिका ने ईरान के साथ जारी युद्ध में युद्धविराम की अवधि बढ़ा दी है और प्रस्तावित सैन्य हमले को फिलहाल टाल दिया गया है। व्हाइट हाउस द्वारा भारतीय समयानुसार देर रात के बाद जारी बयान में कहा गया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान के नेतृत्व की अपील पर ईरान पर नियोजित सैन्य हमले को स्थगित करने और युद्धविराम को बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि ईरान के भीतर "गंभीर रूप से विभाजित" स्थिति को देखते हुए यह कदम उठाया गया है, जिससे ईरान की ओर से एकजुट बातचीत की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं।</p>
<p>बयान के अनुसार, युद्धविराम बढ़ाने का अनुरोध पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने किया था। अमेरिका ने कहा है कि जब तक ईरानी नेतृत्व बातचीत के लिए एक "एकीकृत प्रस्ताव" पेश नहीं करता, तब तक कोई आक्रामक कार्रवाई नहीं की जाएगी। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "मैंने अपनी सेना को निर्देश दिया है कि वे नाकेबंदी जारी रखें और पूरी तरह तैयार रहें।" इसका मतलब है कि सक्रिय सैन्य कार्रवाई भले ही टाल दी गई हो लेकिन ईरान पर दबाव बना रहेगा।</p>
<p>बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि युद्धविराम तब तक प्रभावी रहेगा जब तक ईरान अपना प्रस्ताव पेश नहीं करता और वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंचती "चाहे जो भी परिणाम हो।" इससे यह संकेत मिलता है कि कूटनीति विफल होने पर सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू हो सकती है। यह कदम क्षेत्रीय संकट के बीच कूटनीति के लिए एक अस्थायी अवसर के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें पाकिस्तान मध्यस्थ के रूप में एक अहम भूमिका निभाने के तौर पर उभर रहा है। अमेरिका के हालांकि नाकेबंदी जारी रहने से यह भी स्पष्ट है कि तनाव अभी कम नहीं हुआ है और बातचीत विफल होने पर स्थिति फिर से बिगड़ सकती है।</p>
<p>इससे पहले ईरान ने संयुक्त राष्ट्र से अपील करते हुए अमेरिका द्वारा ईरानी जहाज "तौस्का " को जब्त करने की निंदा की थी और इसे "समुद्री डकैती" करार दिया था। अमेरिका-ईरान दोनों देशों के बीच संघर्षविराम रुकने तक लगभग 4,000 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें अधिकतर मौतें मिसाइल हमलों और ड्रोन हमलों के कारण हुई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 12:31:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका-ईरान वार्ता पर संशय : बुधवार को समाप्त हो रहा संघर्ष विराम, नए कूटनीतिक दौर की उम्मीदें अब भी अनिश्चित</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह का संघर्ष विराम बुधवार को समाप्त हो रहा है, लेकिन इस्लामाबाद वार्ता पर अब भी अनिश्चितता बरकरार है। जहाज जब्ती और तीखी बयानबाजी ने तनाव बढ़ा दिया है। जहां जेडी वेंस के नेतृत्व में अमेरिकी दल की संभावना है, वहीं ईरान ने नाकेबंदी के बीच झुकने से साफ इनकार कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/doubt-over-us-iran-talks-ceasefire-ending-on-wednesday-hopes-for/article-151188"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/america-and-iran.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। अमेरिका-ईरान के बीच दो सप्ताह के संघर्ष विराम की समय सीमा बुधवार को समाप्त होने वाली है, लेकिन इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता में शामिल होने की पुष्टि अभी तक दोनों पक्षों ने नहीं की है। इससे संकेत मिलता है कि नये कूटनीतिक दौर की उम्मीदें अब भी अनिश्चित बनी हुई हैं। समुद्र में बढ़ते तनाव और नेताओं की तीखी बयानबाजी के बीच पैदा हुई इस अस्पष्टता ने उन आशंकाओं को बढ़ा दिया है कि शांतिपूर्ण समाधान का रास्ता बंद हो सकता है।</p>
<p>ईरानी विदेश मंत्रालय ने रविवार को अमेरिकी नौसेना के जब्त ईरानी मालवाहक जहाज के साथ-साथ 'उसके नाविकों, चालक दल और उनके परिवारों' को रिहा करने की मांग की है। ईरान ने इस जब्ती का बदला लेने का संकल्प लिया है। दोनों पक्षों के अधिकारियों की ओर से हालांकि मिले-जुले संदेश आये हैं जिससे वार्ता की स्थिति अस्पष्ट बनी हुई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किसी भी समझौते पर पहुंचने के दबाव का खंडन किया है, हालांकि उन्होंने संकेत दिया है कि अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही पाकिस्तान की यात्रा कर सकता है।</p>
<p>ईरानी पक्ष की ओर से अधिकारियों ने अधिक सतर्क रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि वार्ता के अगले दौर की 'कोई योजना नहीं' है, जबकि राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने तनाव कम करने के लिए कूटनीति की आवश्यकता पर जोर दिया है। सूत्रों के अनुसार, श्री वेंस और शीर्ष अमेरिकी अधिकारियों के आज पाकिस्तान के लिए रवाना होने की उम्मीद है, ताकि ईरान के साथ युद्ध को लेकर संभावित दूसरे दौर की वार्ता की जा सके।</p>
<p>यह कूटनीतिक अनिश्चितता वैश्विक तेल मार्ग के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में अस्थिरता के बीच उत्पन्न हुई है। अमेरिका लगातार नौसैनिक नाकेबंदी कर रहा है और हाल ही में ईरान के ध्वज वाले एक मालवाहक जहाज की जब्ती की घटना ने तनाव को और अधिक भड़का दिया है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर दो सप्ताह के संघर्ष विराम समझौते के उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं, जो जल्द ही समाप्त होने वाला है। ईरानी अधिकारियों ने इसे अमेरिकी आक्रामकता में बढ़ोतरी के रूप में वर्णित करते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बघेर कालीबाफ ने 'धमकी के साये में' बातचीत खारिज कर दिया है और चेतावनी दी कि दबाव की रणनीति उन्हें झुकने पर मजबूर नहीं कर पायेगी। इसी तरह प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने संकेत दिया कि ईरान के तेल निर्यात पर निरंतर प्रतिबंधों के वैश्विक ऊर्जा स्थिरता के लिए व्यापक परिणाम हो सकते हैं।</p>
<p>इस बीच पर्दे के पीछे कूटनीतिक रास्ते खुले हुए हैं। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और पाकिस्तान के मोहम्मद इशाक डार ने पिछले कुछ दिनों में कई दौर की चर्चा की है। इसमें संघर्ष विराम और नये सिरे से बातचीत की संभावना पर ध्यान केंद्रित किया गया है।<br />तनाव के बावजूद संवाद जारी रखने की इच्छा के कुछ धुंधले संकेत मिल रहे हैं। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि संभावित समझौता पहुंच के भीतर है, हालांकि इसका विवरण अभी अस्पष्ट है। वहीं दूसरी ओर ईरानी नेताओं ने अमेरिका के दिये सार्वजनिक बयानों के प्रति संदेह व्यक्त किया है, विशेष रूप से उन दावों के बाद जिनमें कहा गया था कि प्रमुख प्रावधानों पर पहले ही सहमति बन चुकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 16:30:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत से इनकार किया, तो उसे 'अभूतपूर्व समस्याओं' का करना पड़ेगा सामना : डोनाल्ड ट्रंप</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि वह शांति वार्ता से इनकार करता है, तो उसे अभूतपूर्व समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। नाकेबंदी और तनाव के बीच ट्रंप ने समझौते की उम्मीद जताई है, जबकि ईरान ने धमकियों के दबाव में झुकने से साफ मना कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/if-iran-refuses-to-negotiate-with-america-it-will-face/article-151149"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान अमेरिका के साथ बातचीत करने से इनकार करता है, तो उसे अभूतपूर्व समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने सोमवार को पत्रकार जॉन फ्रेडरिक्स के साथ साक्षात्कार में कहा, “ वे बातचीत करेंगे, और अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो उन्हें ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा, जैसी उन्होंने पहले कभी नहीं देखी होंगी।” अमेरिका के राष्ट्रपति ने यह उम्मीद भी जतायी कि अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता हो जाएगा। उधर, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बगर ग़ालिबाफ़ ने इससे पहले कहा था कि ईरान धमकियों के दबाव में अमेरिका के साथ बातचीत नहीं करेगा।</p>
<p>गौरतलब है कि अमेरिका और इज़रायल ने 28 फरवरी को ईरान में कुछ ठिकानों पर हमले करके युद्ध की शुरुआत की थी, जिससे काफी नुकसान हुआ और आम नागरिकों की भी जानें गयी। सात अप्रैल को अमेरिका और ईरान ने दो हफ़्ते के लिए संघर्ष-विराम की घोषणा की। इसके बाद पाकिस्तान के इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच हुई बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला। फिर युद्ध शुरू होने की कोई घोषणा नहीं की गयी, लेकिन अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी शुरू कर दी। मध्यस्थ अब बातचीत का एक नया दौर शुरू करवाने की कोशिश कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 12:41:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पाकिस्तानी पीएम शरीफ ने की पेजेश्कियान से फोन पर बात : शांति प्रयासों को जारी रखने का लिया संकल्प, क्षेत्रीय हालातों पर हुई पर विस्तृत चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने फोन पर पश्चिम एशिया में शांति बहाली पर चर्चा की। शरीफ ने वार्ता और कूटनीति के जरिए स्थायी शांति बनाने का संकल्प जताया। राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा 22 अप्रैल को युद्धविराम समाप्त होने से पहले नई वार्ता की घोषणा के बीच, पाकिस्तान मध्यस्थ के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/pakistani-pm-sharif-spoke-to-pejeshkian-over-phone-resolved-to/article-151083"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/pakistan-pm.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान से फोन पर बातचीत में पश्चिम एशिया में शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने के प्रयास जारी रखने का संकल्प जताया है। पीएम शरीफ और पेजेश्कियान के बीच रविवार को करीब 45 मिनट चली बातचीत में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने ईरान में पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर के साथ वार्ता में ईरानी नेतृत्व की रचनात्मक भूमिका की सराहना की।</p>
<p>पाकिस्तानी प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय हालात पर विस्तृत चर्चा की। शरीफ ने ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला सैय्यद मोजतबा खामेनेई और राष्ट्रपति का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ तथा विदेश मंत्री अब्बास अराघची के नेतृत्व में उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद भेजा था।श्री शरीफ ने सऊदी अरब, कतर और तुर्किये के नेताओं के साथ अपनी हालिया बैठकों की जानकारी देते हुए कहा कि इन संपर्कों से संवाद और कूटनीति के जरिए स्थायी शांति के लिए सहमति बनाने में मदद मिली है।</p>
<p>पेजेश्कियान ने पाकिस्तान के प्रयासों की सराहना करते हुए दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया। इससे पहले, अराघची और पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार ने भी फोन पर क्षेत्रीय हालात पर चर्चा की। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने आठ अप्रैल को पाकिस्तान की मध्यस्थता में अस्थायी युद्धविराम की घोषणा की थी, जब अमेरिका ने ईरान के 10-सूत्रीय प्रस्ताव को स्वीकार किया था।इस्लामाबाद में 11 अप्रैल को लगभग 21 घंटे चली, अमेरिका-ईरान वार्ता हालांकि किसी समझौते पर नहीं पहुंच सकी थी, जिसमें ईरान ने अमेरिकी ‘अत्यधिक मांगों’ और बदलते रुख को जिम्मेदार ठहराया। ईरान के राष्ट्रपति से बातचीत में श्री शरीफ ने शांति प्रयास जारी रखने का भरोसा जताया।</p>
<p>इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 22 अप्रैल को समाप्त होने वाले दो सप्ताह के युद्धविराम से पहले नये दौर की वार्ता के लिए प्रतिनिधिमंडल भेजने की घोषणा की है। उन्होंने समझौता न होने पर हमलों की चेतावनी भी दी है। ईरान ने अभी तक दूसरे दौर की वार्ता में भागीदारी की पुष्टि नहीं की है। सरकारी समाचार एजेंसी इरना के अनुसार, अमेरिकी नाकेबंदी और लगातार धमकियों ने वार्ता की प्रगति को प्रभावित किया है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 16:02:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान ने किया दूसरी दौर की वार्ता से इनकार : अमेरिकी बलों ने ईरानी ज़हाज जब्त किया, जवाबी कार्रवाई की चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका द्वारा ईरानी जहाज 'तौस्का' को जब्त किए जाने के बाद ईरान ने दूसरे दौर की शांति वार्ता ठुकरा दी है। तेहरान ने इसे 'समुद्री डकैती' और युद्धविराम का उल्लंघन बताया। ओमान की खाड़ी में बढ़ते तनाव और ड्रोन हमलों की खबरों के बीच, 22 अप्रैल को समाप्त हो रहा युद्धविराम अब खतरे में है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/iran-refuses-second-round-of-talks-us-forces-seize-iranian/article-151049"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/mojtaba.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। ईरान ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित दूसरे दौर की शांति वार्ता में भाग लेने से इनकार कर दिया है, जिसका मुख्य कारण ईरानी बंदरगाहों पर जारी अमेरिकी नाकेबंदी बताया गया है।इस बीच, अमेरिकी सेना ने एक ईरानी मालवाहक जहाज को जब्त कर लिया, जिससे पश्चिम एशिया में नाजुक दौर से गुजर रही शांति पर और अनिश्चितता व्याप्त हो गयी है। ईरान ने पुष्टि की कि अमेरिकी नौसेना ने ओमान की खाड़ी में ईरानी जहाज ‘टौस्का’ को ‘हमला कर जब्त’ किया, जिसे उसने युद्धविराम का उल्लंघन बताया और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी।</p>
<p>ईरान के खत्म उल-अंबिया मुख्यालय ने कहा कि अमेरिकी कार्रवाई ईरानी वाणिज्यिक जहाजों पर हमला है और इसे ‘सशस्त्र समुद्री डकैती’ करार दिया। ईरान की अर्ध-सरकारी तस्नीम समाचार एजेंसी के अनुसार, इस घटना के बाद ईरान ने अमेरिकी युद्धपोतों पर ड्रोन हमले भी किये, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि अमेरिकी शर्तें ‘अवास्तविक और अनुचित" हैं और जब तक नाकेबंदी नहीं हटायी जाती, वार्ता संभव नहीं है। उन्होंने अमेरिका पर शर्तें बदलने का आरोप भी लगाया।</p>
<p>ईरानी मीडिया के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में वार्ता के सफल होने की ‘कोई स्पष्ट संभावना नहीं’ है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान में फिर वार्ता की घोषणा की है।दोनों देशों के बीच जारी दो सप्ताह का युद्धविराम 22 अप्रैल को समाप्त होने वाला है। इस बीच, अमेरिकी केन्द्रीय कमान (सेंटकॉम) ने पुष्टि की कि अमेरिकी बलों ने रविवार को अरब सागर में ईरानी झंडे वाले मालवाहक जहाज को रोका।</p>
<p>सेंटकॉम के अनुसार, निर्देशित मिसाइल विध्वंसक यूएसएस स्प्रूअन्स ने ‘टौस्का’ को रोका, जो ईरान के बंदर अब्बास की ओर जा रहा था। कई चेतावनियों के बावजूद जहाज के चालक दल ने निर्देशों का पालन नहीं किया।इसके बाद अमेरिकी जहाज ने अपनी पांच इंच की तोप से इंजन कक्ष को निशाना बनाकर उसकी गति निष्क्रिय कर दी, जिसके बाद अमेरिकी मरीन बलों ने जहाज पर चढ़कर उसे अपने नियंत्रण में ले लिया। सेंटकॉम ने कहा कि कार्रवाई ‘संतुलित और पेशेवर तरीके’ से की गयी। उसने यह भी बताया कि नाकेबंदी लागू होने के बाद से 25 वाणिज्यिक जहाजों को वापस लौटने या दिशा बदलने के निर्देश दिये गये हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 14:02:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>बातचीत के बावजूद ईरानी सशस्त्र बल पूरी तरह से युद्ध के लिए तैयार : संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका के साथ शांति वार्ता के बावजूद, ईरान ने अपने सशस्त्र बलों को युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार रहने का आदेश दिया है। संसद अध्यक्ष मोहम्मद ग़ालिबफ़ ने 'दुश्मन' पर अविश्वास जताते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। इस्लामाबाद में अगले दौर की बातचीत प्रस्तावित है, लेकिन बंदरगाहों की नाकाबंदी से संघर्ष का खतरा बना हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/despite-talks-iranian-armed-forces-are-fully-prepared-for-war/article-150996"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/मोहम्मद-बगेर-ग़ालिबफ़.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ ने कहा कि मध्य पूर्व में संघर्ष के समाधान के लिए वाशिंगटन और तेहरान के बीच जारी बातचीत के बावजूद, ईरान के सशस्त्र बल पूरी तरह से युद्ध के लिए तैयार हैं। प्रेस टीवी ने ग़ालिबफ़ के हवाले से कहा, "हमें दुश्मन पर भरोसा नहीं है। अभी भी, जब हम यहां बैठे हैं, युद्ध छिड़ सकता है। सशस्त्र बल ज़मीन पर पूरी तरह से युद्ध के लिए तैयार हैं।"</p>
<p>प्रसारक के अनुसार, संसद अध्यक्ष ने इस बात से इनकार किया कि जारी बातचीत से राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति लापरवाही हो सकती है।  ग़ालिबफ़ ने कहा, "हमारा मानना है कि बातचीत के कारण सशस्त्र बल तैयार नहीं हैं। इसके विपरीत, सड़कों पर आम लोगों की तरह, हमारे सशस्त्र बल भी तैयार हैं।"</p>
<p>इससे पहले, पाकिस्तानी प्रसारक जियो टीवी ने बताया कि अमेरिका-ईरान वार्ता का दूसरा दौर इस्लामाबाद में अगले सप्ताह के अंत में होने की संभावना है। 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल ने ईरान में ठिकानों पर हमले शुरू किए, जिनमें 3,000 से अधिक लोग मारे गए। 8 अप्रैल को वाशिंगटन और तेहरान ने दो सप्ताह के लिए युद्धविराम की घोषणा की। इस्लामाबाद में हुई बाद की बातचीत बेनतीजा रही। हालांकि शत्रुता फिर से शुरू करने की कोई घोषणा नहीं की गई, लेकिन अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू कर दी है। मध्यस्थ बातचीत का एक नया दौर आयोजित करने का प्रयास कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 15:39:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इजरायल-लेबनान युद्धविराम का किया समर्थन, इजरायल को लेबनान की संप्रभुता का सम्मान करते हुए युद्ध रोकना चाहिए</title>
                                    <description><![CDATA[फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिवसीय युद्धविराम का समर्थन करते हुए नागरिक सुरक्षा की अपील की है। उन्होंने हिजबुल्लाह से हथियार छोड़ने और इजरायल से संप्रभुता का सम्मान करने को कहा। बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे शांति का अवसर बताया, जबकि संयुक्त राष्ट्र ने अमेरिकी मध्यस्थता की सराहना की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/french-president-emmanuel-macron-supports-israel-lebanon-ceasefire-israel-must-stop/article-150840"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/macro1.png" alt=""></a><br /><p>पेरिस। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इजरायल और लेबनान के बीच दस दिनों के युद्धविराम का 'पूर्ण समर्थन' किया है। मैक्रों ने हालांकि इस समझौते को लेकर चिंता भी जताई। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, "मैं इस बात को लेकर चिंतित हूँ कि सैन्य अभियानों के जारी रहने से यह युद्धविराम कमजोर पड़ सकता है। मैं सीमा के दोनों ओर नागरिक आबादी की सुरक्षा की अपील करता हूँ। हिजबुल्लाह को अपने हथियारों का त्याग करना चाहिए और इजरायल को लेबनान की संप्रभुता का सम्मान करते हुए युद्ध रोकना चाहिए।"</p>
<p>इजरायल और लेबनान दोनों ने इस युद्धविराम का स्वागत किया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे 'ऐतिहासिक शांति समझौता करने का अवसर' बताया है। यह समझौता फिलहाल दस दिनों के लिए है, जिसे बातचीत में प्रगति होने पर आगे बढ़ाया जा सकता है। अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा जारी मुख्य प्रावधानों के अनुसार, इजरायल के पास किसी भी संभावित हमले के खिलाफ 'आत्मरक्षा में सभी आवश्यक कदम उठाने का अधिकार' सुरक्षित रहेगा। वहीं, लेबनान को हिजबुल्लाह और अन्य सशस्त्र समूहों द्वारा हमलों को रोकना होगा। साथ ही देश की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी केवल लेबनानी सुरक्षा बलों की होगी।</p>
<p>दोनों पक्षों ने बाकी मुद्दों को सुलझाने के लिए अमेरिका की मध्यस्थता में बातचीत जारी रखने का अनुरोध किया है। इजरायल ने इस युद्धविराम को स्थायी शांति की दिशा में एक 'सद्भावना संकेत' बताया है। हिजबुल्लाह ने भी इसमें शामिल होने के संकेत दिए हैं, लेकिन उसने हमलों को पूरी तरह रोकने और इजरायली सैनिकों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। इस बीच, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस संघर्षविराम का स्वागत करते हुए अमेरिका की भूमिका की सराहना की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे विवाद का दीर्घकालिक समाधान निकलेगा और सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने का आग्रह किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 18:29:48 +0530</pubDate>
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                <title>हिज़बुल्ला युद्धविराम पर सहमत : इज़रायल को उल्लंघन के खिलाफ दी चेतावनी, युद्धविराम के लिए रखी शर्ते</title>
                                    <description><![CDATA[लेबनान के सैन्य संगठन हिज्बुल्लाह ने इजरायल के साथ युद्धविराम पर सहमति जताई है। हिज्बुल्लाह नेता महमूद कोमाती ने स्पष्ट किया कि संगठन तभी पालन करेगा जब इजरायल भी अपनी शर्तों पर टिका रहे। उन्होंने पुराने अनुभवों का हवाला देते हुए 'इजरायली विश्वासघात' के प्रति आगाह किया और फिलहाल दक्षिणी लेबनान में यात्रा न करने की सलाह दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/hezbollah-agrees-to-ceasefire-warns-israel-against-violating-conditions-laid/article-150647"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(4)8.png" alt=""></a><br /><p>बेरुत। लेबनान स्थित प्रमुश शिया मुस्लिम राजनीतिक अर्ध सैन्य संगठन हिजबुल्लाह ने युद्धविराम के लिए सहमति व्यक्त की है लेकिन शर्त रखी है कि इजरायल भी इसका पालन करेगा। हिजबुल्लाह की राजनीतिक परिषद के उप प्रमुख महमूद कोमाती ने यह जानकारी दी है हिजबुल्लाह ने इस शर्त पर इजरायल के साथ युद्धविराम पर सहमति व्यक्त की है कि दोनों पक्ष इसका पालन करेंगे। उप प्रमुख महमूद कोमाती ने कहा, "हम युद्धविराम पर सहमत हुए, लेकिन हम 2024 के समझौते के अनुभव को दोहराने की अनुमति नहीं देंगे, जहां हमने इसका पालन किया जबकि इजरायली पक्ष अपने दायित्वों से मुकर गया।"</p>
<p>उन्होंने आगे कहा कि हम इजरायली विश्वासघात को लेकर सतर्क हैं और उन्होंने इस समय दक्षिणी लेबनान की यात्रा न करने की सलाह दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 14:26:11 +0530</pubDate>
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