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                <title>dominance - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>स्मृति मंधाना ने रचा इतिहास, टी-20 में 600 चौके लगाने वाली दुनिया की पहली बल्लेबाज़</title>
                                    <description><![CDATA[स्टार ओपनर स्मृति मंधाना ने नीदरलैंड के खिलाफ इतिहास रच दिया है। वह पुरुष और महिला क्रिकेट दोनों में 600 टी-20 चौके जड़ने वाली पहली खिलाड़ी बनीं। इसके साथ ही दीप्ति शर्मा ने 355 विकेट लेकर झूलन गोस्वामी की बराबरी की और भारत ने विश्व कप का सर्वोच्च स्कोर (209) बनाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/smriti-mandhana-created-history-the-first-batsman-in-the-world/article-157341"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/smritii.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार ओपनर स्मृति मंधाना ने टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए इतिहास रच दिया है। नीदरलैंड के खिलाफ मुकाबले में शानदार बल्लेबाजी के दौरान उन्होंने टी-20 इंटरनेशनल क्रिकेट में 600 चौकों का आंकड़ा पार कर लिया। इस उपलब्धि के साथ वह पुरुष और महिला दोनों वर्गों में यह मुकाम हासिल करने वाली दुनिया की पहली क्रिकेटर बन गई हैं।</p>
<p>मंधाना ने मैच में दमदार अर्धशतक भी जड़ा, जो महिला टी-20 विश्व कप में उनका छठा 50+ स्कोर रहा। इसके साथ ही उन्होंने मिताली राज और हरमनप्रीत कौर को पीछे छोड़ते हुए विश्व कप इतिहास में सबसे अधिक अर्धशतक लगाने वाली भारतीय बल्लेबाज़ का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।</p>
<p>वहीं, ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 355 विकेट पूरे कर झूलन गोस्वामी की बराबरी कर ली। भारतीय टीम ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 20 ओवर में 209 रन बनाए, जो महिला टी-20 विश्व कप में भारत का अब तक का सर्वोच्च स्कोर है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 14:26:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>हिन्द महासागर में बढ़ता चीनी वर्चस्व भारत के लिए मुफीद </title>
                                    <description><![CDATA[हिंद महासागर क्षेत्र में चीन का दबदबा लगातार बढ़ रहा है। जबकि यहां भारत का बहुत कुछ दांव पर लगा है। भारत का समुद्री तट बहुत बड़ा है, लगभग 7,517 किलोमीटर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/increasing-chinese-dominance-in-the-indian-ocean-is-favorable-for/article-98992"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/555454.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। हिंद महासागर क्षेत्र में चीन का दबदबा लगातार बढ़ रहा है। जबकि यहां भारत का बहुत कुछ दांव पर लगा है। भारत का समुद्री तट बहुत बड़ा है, लगभग 7,517 किलोमीटर। यह पश्चिम एशिया,अफ्रीका और पूर्वी एशिया के व्यस्त व्यापार मार्गों के लिए महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों के बीच में स्थित है। भारत के पास अभी केवल दो एयरक्राफ्ट कैरियर हैं,जो अब उतने सक्षम नहीं हैं। तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर नौसेना की जरूरत ही नहीं,बल्कि आर्थिक विकास,रणनीतिक आवश्यकता और वैश्विक समुद्री शक्ति के रूप में भारत के उदय का प्रतीक भी होगा। भारतीय नौसेना ने सरकार से भी इसकी मांग की है। जबकि चीन अपनी परमाणविक पनडुब्बियों के बूते क्षेत्र में लगातार अपना वर्चस्व स्थापित करने का प्रयास कर रहा है। </p>
<p>भारत के लिए समुद्री सुरक्षा बहुत जरूरी है। इसलिए एयरक्राफ्ट कैरियर की जरूरत है। ये कैरियर समुद्र में भारत की ताकत को दर्शाते हैं और दूर देशों में भी हमारी रक्षा भी करते हैं। हॉर्मुज से मलक्का तक समुद्री रास्तों की सुरक्षा हमारे व्यापार के लिए जरूरी है। इस साल अदन की खाड़ी में हुए हमलों से भारत को भी नुकसान हुआ। भारत के पास दो एयरक्राफ्ट कैरियर हैं। आईएनएस विक्रमादित्य रूस से 2013 में लिया गया था, जो पहले एडमिरल गोर्शकोव के नाम से जाना जाता था। आइएनएस  विक्रांत 2022 में शामिल हुआ,जो भारत में बना पहला कैरियर है। यह भारत की तकनीकी ताकत दिखाता है।</p>
<p>हालांकि,परिचालन सीमाओं के कारण कभी-कभी केवल एक ही वाहक युद्ध के लिए तैयार रह पाता है। एक तीसरा वाहक होने से लगातार दो वाहक हमेशा तैनात रहेंगे। इससे भारतीय नौसेना पूर्वी और पश्चिमी दोनों समुद्री तटों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकेगी और साथ ही मानवीय सहायता और आपदा राहत  कार्यों के लिए भी तैयार रह सकेगी। चीन अपनी नौसेना का तेजी से आधुनिकीकरण कर रहा है। ये भारत के लिए भी सबक है। भारत को तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर बनाने की जरूरत है। इस हफ्ते कुछ वीडियो सामने आए हैं। इनमें चीन का नया छठी पीढ़ी का लड़ाकू विमान पहली बार उड़ान भरता दिख रहा है। लेकिन चीन का तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर,फुजियान हकीकत बन गया है। इसने पहला समुद्री परीक्षण पूरा कर लिया है। जल्द ही इसे नौसेना में शामिल किया जाएगा,हालांकि कोई तारीख घोषित नहीं की गई है।</p>
<p>फुजियान 1 मई को शंघाई जियांगनान शिपयार्ड से अपने पहले समुद्री परीक्षण के लिए निकला था। 8 मई को यह वापस शिपयार्ड लौट आया। आठ दिनों के समुद्री परीक्षण के दौरान,फुजियान ने अपने प्रणोदन विद्युत प्रणालियों और अन्य उपकरणों का परीक्षण किया। 80,000 टन का यह एयरक्राफ्ट कैरियर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एयरक्राफ्ट लॉन्च सिस्टम से लैस है। यह तकनीक चीन को दुनिया की कई नौसेनाओं से आगे रखती है। चीन की योजना 2050 तक और भी एयरक्राफ्ट कैरियर बनाने की है।</p>
<p>तीसरा वाहक जहाज बनाना केवल एक रणनीतिक फैसला नहीं है,बल्कि यह अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देगा। विक्रांत परियोजना से सीधे 2000 रोजगार सृजित हुए,लेकिन इसके अलावा 13,000 और रोजगार भी अप्रत्यक्ष रूप से पैदा हुए। इस जहाज के निर्माण में बड़े उद्योगों के साथ-साथ कई छोटे और मध्यम उद्योगों ने भी हिस्सा लिया। इसे मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया था। इससे रक्षा उपकरणों के आयात पर निर्भरता कम होगी और विदेशी मुद्रा की बचत होगी। एक नए वाहक जहाज की परियोजना से भी इसी तरह की आर्थिक गतिविधियां होंगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Dec 2024 11:59:45 +0530</pubDate>
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                <title>हाड़ौती में कम हो रहा वॉलीबॉल का वर्चस्व </title>
                                    <description><![CDATA[ हाड़ौती में आज से चार दशक पहले तक वॉलीबॉल खेल लोगों का सबसे पसंदीदा खेल हुआ करता था। लेकिन 41 साल पहले नेशनल में गोल्ड जीतने के बाद भी यहांं ना खिलाड़ियों को प्रोत्साहन  मिला ना ही पूरे संसाधन जिसके कारण ये खेल हाशिए पर चला गया । ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-dominance-of-volleyball-is-decreasing-in-hadoti/article-15263"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/hadoti-mei-kum-ho-raha-vollyball-kota-news-19.7.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती में आज से चार दशक पहले तक वॉलीबॉल खेल लोगों का सबसे पसंदीदा खेल हुआ करता था। लेकिन 41 साल पहले नेशनल में गोल्ड जीतने के बाद भी यहांं ना खिलाड़ियों को प्रोत्साहन  मिला ना ही पूरे संसाधन जिसके कारण ये खेल हाशिए पर चला गया । हालांकि स्कूल व कॉलेज में वॉलीबॉल को जीवित रखने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन अभी तक किसी ने भी राष्टÑीय और राज्य स्तर पर कोई अमिट छाप नहीं छोड़ी है। यहां पिछले साल ही वॉलीबॉल अकेडमी बनी  है। <br /><br /><strong>1978 में बैंकाक के थाईलेंड में एशियन गैम्स में लिया भाग</strong> <br />अंतरराष्टÑीय वॉलीबॉल प्लेयर व एनआई एस क्वालिफाइड कोच सुमेर सिंह यादव ने बताया कि कोटा में आज से चार दशक पहले वॉलीबॉल खेल का लोगों में खास क्रेज था। जब में 1977 में कोटा आया तब यहां इस खेल को लेकर लोगों काफी उत्साह था। लोग खेल को लेकर जमकर पसीना बहाया करते थे। मैने हरियाणा राज्य से 6 बार नेशनल वहीं राजस्थान से 7 बार नेशलन खेला है। 1978 में कोटा आने के बाद 1978 में बैकांक के थाईलैंड में एशियन गेम्स में भारत का नेतृत्व किया। 1989 में एनआईएस क्लालिफाइड कोच बना। इंटरनेशनल रेफरी का कोर्स भी किया हुआ है।<br /><br /><strong>1981 में नेशनल में जीता था गोल्ड, उसके बाद नहीं हुआ बेहतर प्रदर्शन</strong><br />1981 में राजस्थान टीम फरीदाबाद में नेशनल खेलने गई । राजस्थान टीम पहली बार नेशनल में विजता रही और गोल्ड मेडल जीता । उसके बाद राजस्थान टीम ने नेशनल में अभी एक भी बार गोल्ड नहीं जीता। जब से राजस्थान में वॉलीबॉल शुरू हुआ है तब से लेकर अब तक राजस्थान ने एक बार ही नेशनल जीता है। उसके बाद सूखा ही रहा है। हाड़ौती में वॉलीबॉल को लेकर लंबा सूखा पड़ा है। 1981 के बाद से अब तक टीम क्वॉटर फाइनल और फाइनल तक ही पहुंच पाती है। गोल्ड कभी नहीं जीता है। राजस्थान के इतिहास में वालीवॉल में एक ही गोल्ड आया है। <br /><br /><strong>श्रीराम रेयंस टीम वालीबॉल में थी इंडिया की नंबर वन टीम</strong> <br /> 1977 में श्रीरामरेयंस वॉलीबॉल की टीम इंडिया की नंबर वन टीम हुआ करती थी। दस से 12 साल तक इस टीम का खास वर्चस्व रहा। इस टीम ने  तीन अर्जुन अवार्ड,  एक द्रोणाचार्य अवार्ड विनर टीम थे। टीम में आठ से दस खिलाड़ी नामचीन हुआ करते थे। वर्तमान में अभी श्रीराम रेयंस की कोई टीम नहीं है। कोटा में हाड़ौती में वालीवॉल का वर्चस्व कम हो रहा है। <br /><br /><strong>हैल्दी बच्चे नहीं होने से वॉलीबॉल में हाड़ौती हो  गया ड्राई एरिया</strong> <br />कोटा में  छोटे बच्चे  वालीबॉल को लेकर उत्साहित हैं लेकिन हेल्दी बच्चे नहीं होने से स्टेट और नेशनल तक टीम नहीं पहुंच पाती है। स्कूलों व कॉलेज में जरूर  बच्चे वालीबॉल खेलते हैं। अभी तक यहां वॉलीबॉल का कोच नहीं होने से अच्छे खिलाड़ी तैयार नहीं हो पाते हैं। <br /><strong>- सुमेर सिंह यादव, अंतरराष्टÑीय वॉलीबॉल प्लेयर व एनआई एस क्वालिफाइड कोच</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>खेल</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Jul 2022 15:28:30 +0530</pubDate>
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