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                <title>harvard - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>नम्बर वन से पिछड़ी हार्वर्ड यूनिवर्सिटी : रिसर्च-केंद्रित रैंकिंग में तीसरे स्थान पर आई, हायर एजुकेशन में अब चीन की झेजियांग सबसे आगे</title>
                                    <description><![CDATA[खासतौर पर विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित जैसे क्षेत्रों में चीन का प्रदर्शन लगातार बेहतर होता गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/after-falling-from-number-one-harvard-university-came-third-in/article-139948"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/6622-copy58.jpg" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। दुनिया भर में बेहतरीन पढ़ाई के लिए मानी जानी वाली हार्वर्ड यूनिवर्सिटी पिछड़ती नजर आ रही है। हाल में जारी हुई ग्लोबल यूनिवर्सिटी रैंकिंग में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी पहले पायदान से फिसल गई है। हायर एजुकेशन में अब चीन की झेजियांग यूनिवर्सिटी अव्वल नंबर पर आ गई हैं। कई दशकों तक हार्वर्ड का नाम ही एजुकेशन में बेस्ट क्वालिटी माना जाता था। एक रिपोर्ट के अनुसार कुछ रिसर्च-केंद्रित रैंकिंग में हार्वर्ड तीसरे स्थान तक खिसक गई है। ये नई रैंकिंग मुख्य रूप से पब्लिश्ड रिसर्च, साइंटिफिक आर्टिकल्स के नंबर्स और उन पर मिलने वाले साइटेशन (क्रेडिट) पर आधारित हैं। इन क्षेत्रों में चाइनीज यूनिवर्सिटीज ने तेजी से प्रगति की है। खासतौर पर विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित जैसे क्षेत्रों में चीन का प्रदर्शन लगातार बेहतर होता गया है।</p>
<p><strong>यह रहा हार्वर्ड के पिछड़ने का कारण</strong><br />रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अमेरिका की यूनिवर्सिटीज को कुछ नीतिगत चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। रिसर्च फंडिंग को लेकर अनिश्चितता, सख्त इमिग्रेशन नियम और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर कई तरह के प्रतिबंध, एकेडमिक माहौल को प्रभावित कर रहे हैं। इससे रिसर्च की रफ्तार धीमी पड़ सकती है जिसका असर रैंकिंग में दिखने लगा है।</p>
<p><strong>ऐसे ही नम्बर वन नहीं बनी चाइनीज यूनिवर्सिटीज </strong></p>
<p>पिछले बीस सालों में चीन ने उच्च शिक्षा और साइंटिफिक रिसर्च में अरबों डॉलर का निवेश किया। सरकार ने यूनिवर्सिटीज को स्पष्ट लक्ष्य दिए, जिसमें हाई क्वालिटी रिसर्च को बढ़ावा दिया गया।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Jan 2026 10:36:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>हार्वर्ड पर डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा एक्शन : हार्वर्ड विवि को अब नहीं मिलेगी टैक्स छूट, बोले- वो इसी लायक</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी का टैक्स छूट का दर्जा समाप्त कर दिया है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/donald-trumps-big-action-on-harvard-harvard-university-will-no/article-112846"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/news-(1)2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी का टैक्स छूट का दर्जा समाप्त कर दिया है। ट्रंप ने शुक्रवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में इसकी घोषणा की। उनका यह कदम हार्वर्ड जैसी प्रतिष्ठित संस्था पर सरकार की कड़ी निगरानी और नीतिगत बदलावों की ओर इशारा कर सकता है।</p>
<p><strong>ट्रंप ने लिखा, वो इसी लायक हैं</strong><br />डोनाल्ड ट्रंप ने 2 मई 2025 को ऐलान किया कि उनका प्रशासन हार्वर्ड यूनिवर्सिटी का टैक्स-छूट का दर्जा समाप्त करने जा रहा है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा, हम हार्वर्ड का टैक्स-छूट दर्जा समाप्त करने जा रहे हैं। वो इसी लायक हैं। इस कदम को हार्वर्ड और ट्रंप प्रशासन के बीच चल रहे विवादों से जोड़कर देखा जा रहा है। पिछले कुछ समय से ट्रंप प्रशासन ने हार्वर्ड पर विविधता, समानता और समावेशन पहलों को लेकर दबाव बनाया है, जिन्हें प्रशासन नस्लीय भेदभाव के रूप में देखता है। इसके अलावा, प्रशासन ने हार्वर्ड पर अंतरराष्ट्रीय छात्रों की मेजबानी की क्षमता को भी चुनौती दी है।</p>
<p><strong>ट्रंप ने रोक दी थी 2.2 बिलियन डॉलर की फंडिंग</strong><br />हार्वर्ड ने इन मांगों का विरोध करते हुए अपनी स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का संकल्प लिया है। यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष एलन गार्बर ने कहा, विश्वविद्यालय अपनी स्वतंत्रता या संवैधानिक अधिकारों को नहीं छोड़ेगा। इस विवाद के चलते, ट्रंप प्रशासन ने हार्वर्ड के लिए 2.2 बिलियन डॉलर से अधिक की संघीय फंडिंग को भी फ्रीज कर दिया है। यह कदम अमेरिकी उच्च शिक्षा प्रणाली में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, क्योंकि यह पहली बार है जब किसी प्रमुख विश्वविद्यालय का टैक्स-छूट दर्जा समाप्त करने की बात की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय अन्य विश्वविद्यालयों और गैर-लाभकारी संस्थाओं के लिए भी एक उदाहरण स्थापित कर सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 03 May 2025 12:59:48 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>शैलेष झंवर के इनोवेशन की हार्वर्ड में होगी स्टडी</title>
                                    <description><![CDATA[हैदराबाद के इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस की ओर से इस केस स्टडी को लिखा गया था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/shailesh-jhanwars-innovation-will-be-studied-at-harvard/article-15342"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/neww-copy2.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर।  क्रिटिकल केयर स्पेशलिस्ट डॉ. शैलेष झंवर के इनोवेशन क्रिटिकल केयर होपको हार्वर्ड बिजनेस पब्लिकेशन में 14 पन्नो की केस स्टडी के रूप में प्रकाशित किया गया है। ऐसा पहली बार हुआ है, जब प्रदेश के किसी हेल्थ इनोवेशन को दुनिया की 100 साल पुरानी सबसे विश्वसनीय मैगजीन्स में से एक हार्वर्ड बिजनेस पब्लिकेशन में केस स्टडी के रूप में प्रकाशित किया गया हो। हैदराबाद के इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस की ओर से इस केस स्टडी को लिखा गया था। अब तक इस पब्लिकेशन मे चुनिंदा भारतीय शख्सियतों को ही स्थान मिल सका है। इस स्टडी को अब पूरी दुनिया के मेडिकल मैनेजमेंट एक्सपर्ट और स्टूडेंट्स केस स्टडी के रूप में पढेंगे।</p>
<p>डॉ. शैलेष ने क्रिटिकल केयर होप की थ्योरी के जरिये अब तक प्रदेश के 30 से अधिक दूरस्थ स्थित अस्पतालों को जोड़कर सैकडो की संख्या में लोगो को अचाने में सफलता प्राप्त कर चुके हैं एवं आगे भी काम जारी है। इस थ्योरी में आईसीयू और क्रिटिकल केयर की सुविधा ग्रामीण क्षेत्रो तक ऑनलाईन पहुंचाने का इनोवेशन किया गया, जिसे अब वैश्विक स्तर पर सराहा जा रहा है। शैलेष ने पूणे से एमबीबीएस करने के बाद यूके से नौ वर्षो तक क्रिटिकल केयर के क्षेत्र में मास्टरी हासिल की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Jul 2022 10:57:37 +0530</pubDate>
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