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                <title>delimitation - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>delimitation RSS Feed</description>
                
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                <title>सोनिया गांधी का सरकार पर निशाना : असली चिंता महिला आरक्षण नहीं, बल्कि प्रस्तावित परिसीमन, राजनीतिक लाभ लेने की मंशा का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला करते हुए प्रस्तावित परिसीमन को "संविधान पर हमला" करार दिया। उन्होंने लेख के जरिए चेतावनी दी कि जनगणना में देरी और महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना लोकतांत्रिक संतुलन बिगाड़ सकता है। सोनिया ने जातिगत जनगणना और पारदर्शिता की मांग दोहराई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/sonia-gandhis-target-on-the-government-is-that-the-real/article-150190"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/sonia-gandhi-issued-notice.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक निजी अखबार में लिखे अपने लेख के जरिए केंद्र सरकार पर महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे को लेकर हमला बोला है। सोनिया गांधी ने सोमवार को यहां स्पष्ट तौर पर कहा कि मौजूदा समय में असली चिंता महिला आरक्षण नहीं, बल्कि प्रस्तावित परिसीमन है, जिसे उन्होंने "बेहद खतरनाक" और "संविधान पर हमला" करार दिया। अपने लेख में उन्होंने चेतावनी दी कि संसद के विशेष सत्र में जिस तरह परिसीमन का मुद्दा सामने आ रहा है, वह लोकतांत्रिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जल्दबाजी में इस विषय को आगे बढ़ा रही है, जिसके पीछे राजनीतिक लाभ लेने की मंशा हो सकती है।</p>
<p>उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष से समर्थन तो मांगा जा रहा है लेकिन इस अहम मुद्दे पर पारदर्शिता नहीं बरती जा रही। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष की ओर से सर्वदलीय बैठक की मांग को लगातार नजरअंदाज किया गया है। सोनिया गांधी ने याद दिलाया कि 2023 में संसद द्वारा पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान पहले ही किया जा चुका है। हालांकि, इसके क्रियान्वयन के लिए जनगणना और परिसीमन जरूरी है।</p>
<p>उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार 2029 से महिला आरक्षण लागू करना चाहती है, तो यह निर्णय पहले क्यों नहीं लिया गया। साथ ही उन्होंने कहा कि लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने का फैसला केवल गणितीय आधार पर नहीं, बल्कि राजनीतिक संतुलन को ध्यान में रखकर होना चाहिए, ताकि जनसंख्या नियंत्रण में आगे रहे राज्यों को नुकसान न हो। इसके अलावा उन्होंने जातिगत जनगणना में देरी पर भी सरकार की आलोचना की और कहा कि बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों ने कम समय में सर्वे कर यह साबित कर दिया है कि यह कार्य संभव है।</p>
<p>अंत में उन्होंने 2021 की जनगणना टालने के फैसले पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इससे करोड़ों लोग सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह गये। उन्होंने सरकार से अपील की कि ऐसे महत्वपूर्ण फैसलों पर जल्दबाजी के बजाय विपक्ष के साथ व्यापक चर्चा की जाय और पूरी प्रक्रिया को लोकतांत्रिक बनाया जाया। गौरतलब है कि महिला आरक्षण पर 16-18 अप्रैल तक संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 17:36:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>असम में कांग्रेस के सामने चुनौतियां: अपार पार्टी का बिखराव बन सकता है घातक, मुसलमानों की अहम भूमिका</title>
                                    <description><![CDATA[असम में सत्ता वापसी की राह देख रही कांग्रेस आंतरिक कलह और बड़े नेताओं के इस्तीफों से पस्त है। परिसीमन के बाद मुस्लिम बहुल सीटों का गणित बदलने और AIUDF के साथ त्रिकोणीय मुकाबले ने गौरव गोगोई की रणनीति को मुश्किल में डाल दिया है। हिंदू और मुस्लिम वोटों के बीच संतुलन साधना अब पार्टी के लिए सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/challenges-before-congress-in-assam-are-immense-disintegration-of-the/article-147143"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/assam-congress.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। असम में 10 साल बाद सत्ता में वापसी की कांग्रेस ने उम्मीद तो पाल ली लेकिन वर्तमान स्थिति में यह बहुत मुश्किल दिख रहा है। एक ओर कांग्रेस पार्टी के भीतर भयंकर गुटबाजी से त्रस्त है, जिसका परिणाम सांसद प्रद्युत बारदोलई का इस्तीफा है। इसके अलावा परिसीमन ने मुस्लिम बहुल सीटों की कमी से विधानसभा का गणित बदल दिया है। पिछली बार बदरूद्दीन अजमल की पार्टी आल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआइयूडीएफ) के साथ के कारण मुस्लिम वोटों का बंटवारा नहीं हुआ था।</p>
<p><strong>कांग्रेस का खेल हो सकता है खराब: </strong>इस बार एआईयूडीएफ इन सीटों पर कांग्रेस का खेल खराब करने की पूरी कोशिश करेगी। कांग्रेस ने लोकसभा में अपने उपनेता और पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के बेटे गौरव गोगोई के हाथ में कमान देकर प्रदेश संगठन में गुटबाजी खत्म करने और एकजुट होकर हिमंत बिस्व सरमा के सामने चुनौती पेश करने की रणनीति बनाई थी। लेकिन फरवरी में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा और अब प्रद्युत बारदोलाई व प्रदेश उपाध्यक्ष नवज्योति तालुकदार के इस्तीफे ने प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेताओं के बीच गहरी खाई को उजागर कर दिया। चुनाव के ठीक पहले लगे इन झटकों से पार पाना कांग्रेस के लिए आसान नहीं होगा।</p>
<p>कांग्रेस के सामने एक बड़ी चुनौती मुस्लिम वोटों को बंटने से रोकने के साथ ही हिंदू वोटों को साधने की भी है। पार्टी में मौजूदा संकट की एक बड़ी वजह ये भी है। दरअसल मुस्लिम वोटों को बंटने से रोकने के लिए 2021 में कांग्रेस ने एआइयूडीएफ के साथ गठबंधन किया था, जिसका खामियाजा पार्टी को हिंदू बहुल सीटों पर चुकाना पड़ा। इस बार कांग्रेस ने एआइयूडीएफ से किनारा जरूर कर लिया है। लेकिन मुस्लिम बहुल सीटों पर कांग्रेस की टक्कर उसी से होनी तय है। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस मुस्लिम वोट को काफी हद तक एआइयूडीएफ से झटकने में सफल रही थी। विधानसभा चुनाव में ऐसा होगा या नहीं देखना होगा। लगभग 35 से 40 फीसद आबादी के साथ असम की राजनीति में मुसलमान अहम भूमिका निभाते थे।</p>
<p><strong>मुसलमान निभाएंगे अहम भूमिका</strong></p>
<p>2021 में 31 सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवारों की जीत हुई थी, जो कांग्रेस और एआइयूडीएफ से थे। वैसे लगभग 40-42 सीटों पर मुसलमान अहम भूमिका निभाते थे। 126 सीटों वाले विधानसभा में यह बड़ी संख्या है। लेकिन 2022 में हुए परिसीमन ने खेल बदल दिया है। अब दो दर्जन से कम सीटें ही मुस्लिम बहुल रह गई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 12:58:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का - अब परिसीमन में आड़े आ रहा तीन पंचायतों का पेच, 7 दिन आगे बढ़ गया परिसीमन कार्य</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य के नगरीय  निकायों का वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर किए जा रहे परिसीमन व वार्ड पुनर्गठन कार्य को 7 दिन आगे बढ़ा दिया गया है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-impact-of-the-news---now-the-problem-of-three-panchayats-is-coming-in-the-way-of-delimitation/article-108021"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/news34.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राज्य के नगरीय निकायों का वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर किए जा रहे परिसीमन व वार्ड पुनर्गठन कार्य को 7 दिन आगे बढ़ा दिया गया है। अब वार्डों के परिसीमन प्रस्ताव 27 मार्च तक तैयार किए जा सकेंगे। कोटा नगर निगम में कैथूून नगर पालिका की 3 पंचायतों को शामिल किया जाता है तो 30 हजार जनसंख्या बढ़ सकती है। जिससे यह 10 लाख 30 हजार की जनसंख्या हो जाएगी। हालांकि अभी तक कैथून को शामिल करने के संबंध में कोई आदेश नहीं आया है। स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक एवं विशिष्ट सचिव इंद्रजीत सिंह द्वारा इस संबंध में आदेश जारी किया गया है। आदेश के अनुसार पूर्व में वार्डों के परिसीमन के प्रस्ताव तैयार करने का समय 16 फरवरी से 20 मार्च तक था। लेकिन उसे संशोधित कर व बढ़ाकर 1 मार्च से 27 मार्च तक कर दिया गया है। इसके साथ ही तैयार प्रस्तावों पर आपत्तियां प्राप्त करने का समय 28 मार्च से 17 अप्रैल तक किया है। प्राप्त आपत्तियों व दावों पर टिप्पणी समेत रा’य सरकार को भेजने का समय 18 अप्रैल से 8 मई तक किया गया है। वहीं सरकार द्वारा आपत्तियों का निस्तारण कर प्रस्तावों का अनुमोदन करने का समय 9 से 22 मई तक किया गया है। इस तरह से पूरा कार्यक्रम ही 7 दिन आगे बढ़ गया है। नगर निगम कोटा दक्षिण के वरिष्ठ नगर नियोजक  अमित व्यास ने बताया कि स्वायत्त शासन विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार परिसीमन के प्रस्राव तैयार करने समेत अन्य कार्यों की अवधि 7 दिन आगे बढ़ गई है। जिससे अब प्रस्ताव तैयार करने में समय मिल गया है। व्यास ने बताया कि डीएलबी के आदेश के अनुसार वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार ही वार्डों का परिसीमन किया जा रहा है। लेकिन कोटा नगर निगम में कैथूून नगर पालिका की 3 पंचायतों को शामिल किया जाता है तो  30 हजार जनसंख्या बढ़ सकती है। जिससे यह 10 लाख 30 हजार की जनसंख्या हो जाएगी।  हालांकि अभी तक कैथून को शामिल करने के संबंध में कोई आदेश नहीं आया है। लेकिन शीघ्र ही आने की संभावना है। </p>
<p><strong>नवज्योति ने जताई थी तिथि बढ़ने की संभावना</strong><br />गौरतलब है कि परिसीमन कार्य की अवधि बढ़ने की संभावना नवज्योति ने पहले ही जता दी थी। समाचार पत्र में 17 मार्च को पेज 5 पर ‘नगर निगम के एकीकरण की नहीं हुई अधिसूचना जारी’ शीर्षक से प्रकाशित समाचार में यह संभावना जता दी थी। जिसमें बताया था कि अभी तक न तो दोनों निगमों के एकीकरण की अधिसूचना जारी हुई है और न ही कैथून को निगम में शामिल करने के स्पष्ट आदेश आए हैं। हालांकि निगम अधिकारी अपने स्तर पर परिसीमन के प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं लेकिन इस कार्य को करने की तिथि बढ़ सकती है।  स्वायत्त शासन विभाग की ओर से 7 दिन की अवधि बढ़ाने का आदेश जारी करने से नवज्योति की खबर की पुष्टि हो गई है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Mar 2025 14:55:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असम के 11 विपक्षी दलों ने राज्य में परिसीमन प्रक्रिया को लेकर खड़गे से की मुलाकात</title>
                                    <description><![CDATA[ असम के 11 विपक्षी दलों के नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात कर राज्य में परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर आपत्ति जताई है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/11-opposition-parties-of-assam-meet-kharge-over-delimitation-process/article-51141"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/545445454.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। असम के 11 विपक्षी दलों के नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात कर राज्य में परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर आपत्ति जताई है। असम प्रदेश कांग्रेस के नेताओं के साथ विपक्षी दलों के प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार रात यहां खड़गे से उनके आवास पर मुलाकात की और उन्हें इस संबंध में एक ज्ञापन सौंपा।</p>
<p>खड़गे ने कहा कि एआईसीसी महासचिव जितेंद्र सिंह अलवर, कांग्रेस पार्टी के उपनेता (लोकसभा) गौरव गोगोई, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा, कांग्रेस विधायक दल के नेता देबब्रत सैकिया और असम कांग्रेस के अन्य सदस्यों सहित 11 विपक्षी दलों के नेताओं ने एक ज्ञापन सौंपा है। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने मुझे राज्य में परिसीमन प्रक्रिया पर सामूहिक आपत्तियों के बारे में बताया।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en" xml:lang="en">Leaders of 11 opposition parties along with AICC General Secretary, Shri <a href="https://twitter.com/JitendraSAlwar?ref_src=twsrc%5Etfw">@JitendraSAlwar</a>, Congress Party's Deputy Leader (Lok Sabha), Shri <a href="https://twitter.com/GouravAssam?ref_src=twsrc%5Etfw">@GouravAssam</a>, PCC President, Shri <a href="https://twitter.com/BhupenKBorah?ref_src=twsrc%5Etfw">@BhupenKBorah</a>, CLP Leader Shri <a href="https://twitter.com/DsaikiaOfficial?ref_src=twsrc%5Etfw">@DsaikiaOfficial</a> and other members of <a href="https://twitter.com/INCAssam?ref_src=twsrc%5Etfw">@INCAssam</a> handed over a… <a href="https://t.co/b4Q7PZYgOo">pic.twitter.com/b4Q7PZYgOo</a></p>
— Mallikarjun Kharge (@kharge) <a href="https://twitter.com/kharge/status/1677177154646208512?ref_src=twsrc%5Etfw">July 7, 2023</a></blockquote>
<p>

</p>
<p>कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इस संबंध में निर्वाचन आयोग को एक ज्ञापन दिया जाएगा। खड़गे ने ट्वीट किया कि इस मुद्दे को सभी उचित मंचों पर उठाया जाएगा। असम में परिसीमन प्रक्रिया में राजनीतिक दायरे में व्यापक स्वीकृति और सर्वसम्मति की सख्त जरुरत है। खड़गे से मुलाकात करने वाले विपक्षी दलों के नेताओं में असम जातीय परिषद के अध्यक्ष लुरिनज्योति गोगोई भी शामिल थे।</p>
<p>गौरतलब है कि पिछले महीने निर्वाचन आयोग ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 8-ए के प्रावधान के तहत असम में विधानसभा और संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के लिए मसौदा प्रस्ताव प्रकाशित किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Fri, 07 Jul 2023 17:36:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>परिसीमन से कांग्रेस  चुनाव जीत सकती है, जनता के दिल नही जीत सकते  : पूनिया </title>
                                    <description><![CDATA[बिना परिसीमन के अगर चुनाव कराते तो 33 की 33 जिलाप्रमुख हमारे होते  : पूनिया ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/congress-can-win-elections-by-delimitation--cannot-win-public-s-heart--poonia/article-15553"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/bjp2.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने पंचायत और निकायों की कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में कहा कि भाजपा अपनी पूरी ताकत से बढ़ रही है। सरकार की सारी  सरकारी मशीन लगा दी पंचाय और निकाय चुनावों में। परिसीमन भी अपनी जीत के अनुसार कांग्रेस ने कराया। बावजूद इसके हम रिकॉर्ड जीत हासिल की। करीब एक हजार में से 505 पंचायते जीती। 33में से 18 जिलाप्रमुख हमने बनाये। बिना परिसीमन के अगर चुनाव कराते तो 33 की 33 जिलाप्रमुख हमारे होते।</p>
<p>कांग्रेस ने परिसीमन कर चुनाव तो जीत लिए लेकिन वे दिल नही जीत सकते। दिल तो पीएम मोदी ही जीत सकते है। कार्यकर्ताओ की ताकत से ही भाजपा आज इस मुकाम पर है। सीएम अशोक गहलोत जो संघवाद की बात करते है, वे केवल बाते करते है।वे दिल्ही जाए लेकिन पहले राजस्थान में तो इसे लागू करें। वे राजस्थान में केंद्र पर भेदभाव के आरोप लगाए है। लेकिन केंद्र के काम देख लें कितने करोड़ो रूपये दिए है। राजस्थान में कई योजना केंद्र की ठीक से नही चल रही। कोरोना वैक्सीन दी केंद्र ने, जबकि अशोक गहलोत अपनी फोटो लगा कर उसकी खुद वाहवाही लूट रहे है। पंचायत राज में कैसे हमने काम किये है, गरीबो को कैसे राहत दी उन योजनाओं पर भी संवाद करे। व्याप्त कमियों, खामियों को अगले सत्र में रखे ताकि हम केंद्र सरकार को उन्हें बता सके। जनप्रतिनिधि बनाने के बाद वे अपनी भूमिका को सीमित ना रखे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Jul 2022 12:38:46 +0530</pubDate>
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