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                <title>renovation - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>ब्रिटिश राजशाही का बड़ा खुलासा, किंग चार्ल्स और प्रिंस विलियम ने चुकाया करोड़ों का टैक्स</title>
                                    <description><![CDATA[ब्रिटेन के किंग चार्ल्स ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए वर्ष 2024-2025 के लिए अपना ₹161 करोड़ का टैक्स बिल सार्वजनिक किया है। इसके साथ ही प्रिंस विलियम ने भी ₹96.83 करोड़ का टैक्स चुकाया। शाही परिवार की इस पारदर्शिता की जहां सराहना हो रही है, वहीं आलोचकों ने उनके भारी-भरकम खर्चों पर सवाल भी उठाए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-revelation-of-british-monarchy-king-charles-and-prince-william/article-158152"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1200-x-600-px)-(3)14.png" alt=""></a><br /><p>लंदन। ब्रिटेन के किंग चार्ल्स ने वर्ष 2024-2025 के लिए अपने लगभग 161 करोड़ रुपये के टैक्स बिल का खुलासा किया है, जिससे वह अपनी कर देनदारी सार्वजनिक करने वाले पहले ब्रिटिश सम्राट बन गये हैं। इस भुगतान के साथ ही वह ब्रिटेन के शीर्ष 100 करदाताओं की सूची में शामिल हो गये हैं। शाही परिवार की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, इसी अवधि के दौरान उत्तराधिकारी और 'प्रिंस ऑफ वेल्स, प्रिंस विलियम' ने भी लगभग 96.83 करोड़ रुपये (77.6 लाख पाउंड) का टैक्स चुकाया है।</p>
<p>बकिंघम पैलेस ने इस कदम को पारदर्शिता बढ़ाने और जवाबदेही के प्रति समझ मजबूत करने का व्यक्तिगत एवं ऐतिहासिक निर्णय बताया है। इसके साथ ही यह भी साफ हो गया है कि किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला बकिंघम पैलेस के बजाय अपने पुराने निवास क्लेरेंस हाउस में ही रहना जारी रखेंगे। शाही कामकाज और महलों के रख-रखाव के लिए मिलने वाले सोवेरिन ग्रांट में भी बढ़ोतरी दर्ज की गयी है, जो वर्ष 2027-28 के लिए बढ़कर लगभग 1,247.84 करोड़ रुपये (100 मिलियन पाउंड) वार्षिक हो जायेगी। वित्त विशेषज्ञों का कहना है कि यह टैक्स खुलासा बेहद अस्पष्ट है, क्योंकि इसमें यह नहीं बताया गया है कि आय और पूंजीगत लाभ का विवरण क्या है और टैक्स की गणना किस आधार पर की गयी है।</p>
<p>किंग चार्ल्स को आधिकारिक और निजी खर्चों के लिए 'डची ऑफ लैंकेस्टर' एस्टेट से स्वतंत्र सालाना आय प्राप्त होती है, जो वर्ष 2025-26 में लगभग 314.50 करोड़ रुपये (25.2 मिलियन पाउंड) रही। वहीं प्रिंस विलियम को 'डची ऑफ कॉर्नवाल' से आय मिलती है। प्रिंस विलियम ने समाज सेवा की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए डार्टमूर जेल से मिलने वाले लगभग 18.72 करोड़ रुपये (1.5 मिलियन पाउंड) के वार्षिक किराये को छोड़ने और उस रकम को स्थानीय ग्रामीण समुदाय की मदद में खर्च करने का फैसला किया है। वार्षिक रिपोर्ट से शाही दौरों और अन्य खर्चों की बड़ी जानकारियां भी सामने आयी हैं। पिछले साल प्रिंस विलियम का तीन दिवसीय सऊदी अरब दौरा शाही परिवार का सबसे महंगा विदेशी दौरा रहा, जिस पर लगभग 1.62 करोड़ रुपये (1,30,000 पाउंड) से अधिक खर्च हुए। इसके बाद किंग और क्वीन की अप्रैल 2025 की चार दिवसीय इटली यात्रा पर लगभग 1.57 करोड़ रुपये (1,26,000 पाउंड) से ज्यादा का खर्च आया।</p>
<p>राजशाही खर्चों की आलोचना करने वाले विश्लेषकों का कहना है कि इस खुलासे से यह साफ हो गया है कि शाही परिवार की आय बेहद विशाल है। उनका तर्क है कि यदि किंग चार्ल्स और प्रिंस विलियम राजशाही के खर्चों में कटौती की बात करते हैं तो उन्हें केवल बकिंघम पैलेस की बालकनी पर दिखने वाले लोगों की संख्या कम करने के बजाय अपने भारी-भरकम खर्चों को भी कम करना चाहिए।बकिंघम पैलेस का करीब लगभग 4,616.86 करोड़ रुपये (370 मिलियन पाउंड) की लागत से चल रहा नवीनीकरण कार्य अगले वर्ष मार्च तक पूरा हो जायेगा, जिसके बाद इसे आम जनता के लिए खोलकर राजस्व बढ़ाने की योजना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 17:21:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>असर खबर का : गंगधार किले व रानी महल जीर्णोद्धार के लिए 80 लाख स्वीकृत, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति ने ऐतिहासिक धरोहरों के रखरखाव को लेकर प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किए थे।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/impact-of-news---80-lakh-rupees-approved-for-the-renovation-of-gangdhar-fort-and-rani-mahal/article-145492"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/200-x-60-px)5.png" alt=""></a><br /><p>चौमहला। चौमहला ग्रामीण विकास विभाग द्वारा डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी जिला उत्थान योजनान्तर्गत वित्तीय वर्ष 2025-26 के आवंटन में से गंगधार कस्बे में स्थित रानी महल व प्राचीन किला एवं इसमें स्थित देवल माता मंदिर का जीर्णोद्धार किया जाएगा। सरकार द्वारा प्राचीन ऐतिहासिक धरोहर के लिए राशि स्वीकृत करने पर ग्रामीणों ने हर्ष व्यक्त किया है,दैनिक नवज्योति द्वारा समय समय पर इन ऐतिहासिक इमारतों के रख रखाव को लेकर प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किए थे।</p>
<p>ग्रामीण विकास विभाग द्वारा डॉ श्यामप्रसाद मुखर्जी जिला उत्थान योजना के अंतर्गत रानी महल अब पुराना तहसील भवन के जीर्णोद्धार के लिए 40 लाख रुपए तथा राजा का किला एवं देवलमाता मंदिर के लिए 40 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की है साथ ही विभाग द्वारा ग्राम पंचायत रोझाना में सागर तालाब जीर्णोद्धार एवं छतरियों के निर्माण के लिए 48 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की गई। </p>
<p>स्थानीय नागरिकों द्वारा जिला कलेक्टर को कई बार पत्र लिखकर ऐतिहासिक धरोहर की मरम्मत की मांग की थी,जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ द्वारा कुछ माह पूर्व परिवार सहित महालक्ष्मी माता मंदिर में दर्शन कर पूजा आरती की थी तथा आसपास नदी, पुष्प वाटिका के सौंदर्य को निहारा था, इसके पश्चात जर्जर हो चुके पुराने तहसील भवन व पुरासम्पदा गंगधार गढ़ किले और, जल सागर बड़ा तालाब जेताखेड़ी , आसपास की बनी ऐतिहासिक प्राचीन छतरियों का अवलोकन किया व इनके बारे में जानकारियां ली थी। जिनके संरक्षण व जीर्णोद्धार के अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए थे तथा इन प्राचीन धरोहरों के संरक्षण के लिए पुरातत्व विभाग में शामिल करने के लिए विभाग को पत्र लिखने की बात भी कही थी। सरकार द्वारा राशि स्वीकृत करने पर पूर्व सरपंच राजेश नीमा,दशरथ पांडे,मथुरेश शर्मा,दिलीप मोरी,मनीष मिश्रा ने मुख्य मंत्री भजनलाल शर्मा,पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, सांसद दुष्यंत सिंह, विधायक कालूराम मेघवाल,जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ का आभार प्रकट किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Mar 2026 15:00:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का - चंबल के बांधों का बदलेगा स्वरूप, 50 गेट पहली बार होंगे नए</title>
                                    <description><![CDATA[निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद कार्य को 36 माह में पूरा करने का लक्ष्य है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---the-chambal-dams-will-be-transformed--50-gates-to-be-replaced-for-the-first-time/article-142388"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(24).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। चंबल नदी पर बने कोटा बैराज, राणप्रताप सागर और जवाहर सागर को पहली बार बड़े स्तर पर नवजीवन देने की तैयारी शुरू हो गई है। करीब 66 साल पुराने इन बांधों के 50 गेट बदले जाएंगे, जिस पर कुल 236 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 11 फरवरी को निविदा प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जल संसाधन विभाग के अनुसार अब तक इन बांधों के गेट कभी पूरी तरह बदले नहीं गए थे। समय के साथ गेट, स्लूज सिस्टम और मैकेनिज्म पुराने हो चुके हैं, जिससे संचालन में जोखिम बढ़ गया था। इसी को देखते हुए राज्य सरकार ने तीनों बांधों के व्यापक सुधार और आधुनिकीकरण का निर्णय लिया है।</p>
<p><strong>कोटा बैराज के बदलेंगे 19 गेट</strong><br />परियोजना के तहत पहली बार कोटा बैराज के 19 गेट बदले जाएंगे। इसके अलावा राणप्रताप सागर बांध के 7 बड़े और 4 छोटे गेट व जवाहर सागर बांध के 10 गेट को भी पूरी तरह बदला जाएगा। इसके साथ ही स्लूज गेट, कंट्रोल सिस्टम और अन्य तकनीकी हिस्सों को भी आधुनिक बनाया जाएगा।</p>
<p>जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना की अनुमानित लागत 236 करोड़ रुपए है। निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद कार्य को 36 माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। निविदा दस्तावेज 11 फरवरी से उपलब्ध होंगे, जबकि तकनीकी और वित्तीय निविदाएं फरवरी-मार्च में खोली जाएंगी। विशेषज्ञों का कहना है कि चंबल के ये तीनों बांध राजस्थान और मध्यप्रदेश के सिंचाई, पेयजल और बिजली उत्पादन के लिए रीढ़ की हड्डी हैं। रणप्रताप सागर और जवाहर सागर से बिजली उत्पादन होता है, वहीं कोटा बैराज से लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई और शहरों को पेयजल मिलता है।</p>
<p><strong>66 साल पुराने बांध आधुनिक तकनीक से होंगे लैस</strong><br />तीनों बांधों का निर्माण 1960 के दशक में हुआ था। उस समय की तकनीक आज के मानकों के अनुसार पुरानी हो चुकी है। विभागीय रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि गेट और मशीनरी की औसत उम्र 40-50 साल होती है, जबकि ये सिस्टम उससे कहीं अधिक समय से उपयोग में हैं। अब नई तकनीक से गेट बदले जाने से संचालन अधिक सुरक्षित, सटीक और तेज होगा। कुल मिलाकर, 236 करोड़ की यह परियोजना चंबल नदी के तीनों बांधों को नया जीवन देगी, जिससे कोटा सहित पूरे हाड़ौती और प्रदेश के जल भविष्य को मजबूती मिलेगी। जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह पहली बार है जब चंबल के तीनों प्रमुख बांधों के गेट एक साथ बदले जाएंगे। इससे बांधों की सुरक्षा बढ़ेगी और आने वाले दशकों तक जल प्रबंधन सुचारू रहेगा।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />चंबल नदी पर बने तीन प्रमुख बांधों के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में 30 नवंबर2025 को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। जिसमें बताया था कि राणा प्रताप सागर (आरपीएस), जवाहर सागर और कोटा बैराज के नवीनीकरण का बहुचर्चित प्रोजेक्ट पिछले 6 वर्षों से फाइलों और निरीक्षणों में अटका हुआ है। इस दौरान प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 100 करोड़ से बढ़कर 236 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। इसके बाद भी अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है। बजट बढ़ने के कारण अब टैंडर की अनुमति भारत नहीं बल्कि अमेरिका स्थित विश्व बैंक मुख्यालय से मिलेगी। इसका कारण यह बताया जा रहा है कि 200 करोड़ से ऊपर की अनुमति विश्व बैंक के मुख्यालय से आती है। तीनों बांधों के रखरखाव की राशि विश्व बैंक से लोन के रूप में ली जा रही है। विश्व बैंक से अनुमति मिलने के बाद ही टैंडर प्रक्रिया शुरू हो सकती है।</p>
<p>चंबल नदी पर बने कोटा बैराज, राणप्रताप सागर और जवाहर सागर को नवजीवन देने की तैयारी शुरू हो गई है। करीब 66 साल पुराने इन बांधों के 50 गेट बदले जाएंगे, जिस पर कुल 236 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 11 फरवरी को निविदा प्रक्रिया शुरू की जाएगी।<br /><strong>- आरपी गोयल, सहायक अभियंता, जल संसाधन विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 11:41:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सचिवालय में मजबूत होगी पार्किंग व्यवस्था, पीडब्ल्यूडी ने तैयार किया एक्शन प्लान</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री के निर्देश पर सचिवालय की बेसमेंट पार्किंग में रिसाव की समस्या दूर की जाएगी। इसके लिए पीडब्ल्यूडी ने मरम्मत कार्य शुरू कर दिया है, जो सितंबर 2026 तक पूरा होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/parking-system-will-be-strengthened-in-the-secretariat-pwd-has/article-138340"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/government-secretariat.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सचिवालय परिसर में पार्किंग व्यवस्था को और मजबूत व सुरक्षित बनाने के लिए राज्य सरकार ने ठोस कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने फ्रंट लॉन के नीचे बनी दो मंजिला बेसमेंट पार्किंग में पानी रिसाव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए एक्शन प्लान तैयार किया है।</p>
<p>पीडब्ल्यूडी के अनुसार फ्रंट लॉन के एक्सपेंशन जॉइंट्स से पानी रिसाव के कारण बेसमेंट-1 और बेसमेंट-2 में कॉलम, बीम और स्लैब के स्टील में जंग लगने लगी थी। अब लगभग 5 करोड़ 42 लाख रुपये की लागत से मरम्मत कार्य कर इन सभी समस्याओं का निस्तारण किया जाएगा। इसके लिए विभाग द्वारा फर्म को कार्यादेश जारी कर दिया गया है और कार्य सितंबर 2026 तक पूरा करना अनिवार्य किया गया है।</p>
<p>इस कार्य के पूर्ण होने से सचिवालय के कार्मिकों और यहां आने वाले आमजन को पार्किंग संबंधी राहत मिलेगी। वर्तमान में बेसमेंट-1 और बेसमेंट-2 में लगभग 450 चार पहिया वाहनों की पार्किंग क्षमता उपलब्ध है, जिसे सुरक्षित और सुचारु बनाया जाएगा।</p>
<p>इसके साथ ही सचिवालय के प्रवेश द्वार के पास निर्माणाधीन नॉर्थ ब्लॉक के नीचे तीन मंजिला बेसमेंट पार्किंग में 268 चार पहिया वाहनों के लिए पार्किंग स्पेस तैयार किया जा रहा है। यह सुविधा जून माह तक आमजन के लिए उपलब्ध हो जाएगी।</p>
<p>सरकार के इस कदम से सचिवालय परिसर में पार्किंग व्यवस्था बेहतर होने के साथ-साथ संरचनात्मक सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 04 Jan 2026 16:18:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दौसा रेलवे स्टेशन का कायाकल्प, यात्रियों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं</title>
                                    <description><![CDATA[अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 15.17 करोड़ रुपये की लागत से दौसा रेलवे स्टेशन को आधुनिक बनाया गया है। स्टेशन पर भव्य प्रवेश द्वार, नया एफओबी, दिव्यांग अनुकूल सुविधाएं और राजस्थानी कला के भित्ति चित्र विकसित किए गए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/dausa/rejuvenation-of-dausa-railway-station-passengers-will-get-modern-facilities/article-137087"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/dausa-railwaystarion.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान के दौसा जिले में स्थित दौसा रेलवे स्टेशन ऐतिहासिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि परिवहन के लिहाज से भी एक महत्वपूर्ण केंद्र है। दिल्ली–अहमदाबाद रेल मार्ग पर स्थित यह स्टेशन जयपुर से लगभग 60 किलोमीटर दूर है। ब्रिटिश शासनकाल में विकसित यह स्टेशन व्यापार, शिक्षा और सैन्य आवश्यकताओं की पूर्ति में अहम भूमिका निभाता रहा है।</p>
<p>अब अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत करीब 15.17 करोड़ रुपये की लागत से दौसा रेलवे स्टेशन को आधुनिक और यात्री-अनुकूल रूप में विकसित किया गया है। स्टेशन भवन का पूर्ण रूप से नवीनीकरण किया गया है। सर्कुलेटिंग एरिया में सुविधा क्षेत्र विकसित कर अलग-अलग प्रवेश और निकास द्वार बनाए गए हैं, साथ ही स्टेशन भवन में पोर्च का निर्माण भी किया गया है।</p>
<p>स्टेशन के अंदर और वेटिंग हॉल में भारतीय कला, विरासत और संस्कृति को दर्शाते भित्ति चित्र बनाए गए हैं। दोपहिया और चौपहिया वाहनों के लिए पृथक पार्किंग की सुविधा दी गई है। 4.10 करोड़ रुपये की लागत से रैंप और कवरिंग शेड सहित नया ऊपरी पैदल पुल (एफओबी) बनाया गया है। नए प्रतीक्षा कक्ष और आधुनिक फिटिंग के साथ शौचालयों का नवीनीकरण किया गया है।</p>
<p>दिव्यांगजनों के लिए हेल्प बूथ, विशेष शौचालय, रैंप, लिफ्ट, साइनेंज और पार्किंग जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। स्टेशन पर ट्रेन सूचना बोर्ड, कोच इंडिकेशन बोर्ड, सीसीटीवी कैमरे, महिला एवं बाल सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। साथ ही जल संरक्षण हेतु रेन वाटर हार्वेस्टिंग और ऊर्जा संरक्षण के लिए सोलर पावर से जुड़े कार्य भी किए गए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>दौसा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Dec 2025 17:52:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोटा दक्षिण वार्ड 23 - झूलते बिजली के तार व नालियों के टूटे ढक्कन बने मुसीबत, पार्क को जीर्णोद्धार की दरकार</title>
                                    <description><![CDATA[सड़क  पर गड्डे होने से राहगिरो को हो रही परेशानी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-south-ward-23---dangling-electrical-wires-and-broken-drain-covers-pose-a-problem--the-park-needs-renovation/article-127332"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/_4500-px)-(3)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के नगर निगम दक्षिण के वार्ड 23 में पार्षद द्वारा वार्ड में विकास के कार्य करवाए गए पर वार्ड की मुख्य रोड पर कुछ दुकानदारों द्वारा सड़क पर सामान रखने से रोड पर फोर व्हीलर के आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं वार्डवासियों ने बताया कि वार्ड पार्षद द्वारा समय-समय पर वार्ड का निरीक्षण किया जाता है। वार्ड में प्रतिदिन कचरा गाड़ी आती व रोड की सफाई भी प्रतिदिन होती है। वार्डवासी ने बताया कि वार्ड की रोड लाइट बारिश के दिनों में कभी-कभार बंद हो जाती है साथ ही रात्रि में आवारा कुत्तों की वजह से परेशानी का सामना करना पड़ता है। वार्डवासियों ने बताया कि वार्ड में स्थित तिकोना पार्क का विकास नहीं होने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है। बच्चों को खेलने व मॉर्निंग वॉक के लिए अन्य जगहों पर जाना पड़ता है।</p>
<p><strong>लटकते तार हादसों को दे रहे न्यौता</strong><br /> वार्ड में रामतलाई के आसपास के क्षेत्र में बिजली के तार जमीन से महज कुछ ही दूरी पर झूल रहे हैं। वहीं इनके आसपास दिनभर वाहनों का आवागमन रहता है जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।</p>
<p><strong>नालियों के टूटे ढक्कन </strong><br />गलियों में नालियों के टूटे ढक्कन व टूटे सीसी के ब्रेकर से बाइक सवारों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। साथ ही अंधेरे में कई बार इनसे हादसा होने का अंदेशा रहता है।</p>
<p><strong>गड्ढे बने परेशानी </strong><br />वार्ड के मुख्य रोड जिसमें महिला थाने जाने वाले रोड में जगह-जगह पर गड्ढे हो रहे हैं। जिससे आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है साथ ही इनसे उछलती गिट्टियां भी राहगीरों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं।</p>
<p><strong>वार्ड का एरिया </strong><br />रामतलाई कच्ची बस्ती, झूलेलाल मंदिर, तिकोना पार्क, सूरजपोल गेट, महिला थाना, श्रीपुरा गर्ल्स स्कूल, कृष्ण दूध डेयरी, बाबरा पाड़ा, साबरमती हरिजन बस्ती, आध भाग छोटी गाड़ी खाना, बेसिक मॉडल स्कूल, पशु ट्रेनिंग सेंटर क्षेत्र वार्ड के अंतर्गत आता है।</p>
<p>वार्ड में कचरा गाड़ी प्रतिदिन आती व सफाई भी नियमित होती है। वार्ड में पार्षद द्वारा समय-समय पर निरीक्षण करती है<br /><strong>- श्याम सिंह</strong></p>
<p>टिपर अंदर तक नहीं आता है। रोड पर ही खड़ा रहता है। जिससे कचरा डाल नहीं पाते हैं इससे परेशानी का सामना करना पड़ता है।      <strong> - शाहरुख</strong></p>
<p>रामतलाई व आसपास के क्षेत्रों के विद्युत तार को अधिकारियों को ऊंचा करने के लिए अवगत कर रखा है। नालियों के टूटे ढक्कन को जल्द ही ठीक करवा दिया जाएगा। तिकोना पार्क के विकसित करने के लिए अधिकारियों को अवगत करा रखा है। वर्क आॅर्डर होते ही पार्क का विकास करवाया जाएगा।<br /><strong>- आरती शाक्यवाल, पार्षद 23 (बीजेपी)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Sep 2025 16:56:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हम भी जर्जर हैं... अब तो सुध लो सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[दस साल से सरकारी विभागों में घूम रही फाइल। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/we-are-also-dilapidated----now-take-care-of-us--government/article-122075"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/1ne1ws1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। चंबल नदी पर स्थित कोटा बैराज, जवाहर सागर और राणाप्रताप सागर बांध  उम्रदराज होने के साथ जर्जर हो चुके हैं। यह बांध पिछले दस साल से अपने जीर्णोद्धार का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अभी तक इनकी फाइल इधर से उधर ही घूम रही है। चंबल वैली प्रोजेक्ट के तहत राणा प्रताप सागर (आरपीएस), जवाहर सागर (जेएस) बांध और कोटा बैराज के जीर्णोद्धार का काम होना है। इसके लिए वर्ल्ड बैंक से डैम रिहैबिलिटेशन इंप्रूवमेंट प्रोजेक्ट (ड्रिप) के तहत 236.23 करोड़ रुपए की राशि काफी समय पहले स्वीकृत हो चुकी है। इसके बाद गत दिनों सरकार ने संशोधित प्रशासनिक स्वीकृति जारी कर दी है, लेकिन अब भी इसकी तकनीकी और वित्तीय स्वीकृति की प्रक्रिया होनी है। इस प्रक्रिया में कितना समय लगेगा यह कोई नहीं कर सकता है। झालावाड़ के पिपलोदी स्कूल हादसे के बीच सरकार ने जर्जर भवनों की सूची तैयार का कार्य शुरू कर दिया है। ऐसे में अब चंबल नदी के जर्जर बांधों को भी सरकार से आस है कि उनकी जीर्णोद्धार की फाइल तेज गति से चलेगी और जल्द उनको संजीवनी मिल सकेगी।</p>
<p><strong>फैक्ट फाइल</strong><br />बांध मरम्मत राशि करोड़ों में<br />कोटा बैराज    72.10 <br />राणाप्रताप सागर    85.45 <br />जवाहर सागर    78.68 </p>
<p><strong>तीन बार निविदा निकाली, फिर भी हाथ रहे खाली</strong><br />जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार तीनों बांधों की मरम्मत के लिए जल संसाधन विभाग ने 14 अगस्त 2023 को निविदा जारी की थी, लेकिन किसी भी संवेदक फर्म ने इसमें टेंडर नहीं डाले। इसके बाद 28 सितंबर 2023 को एक बार फिर निविदा जारी की गई थी, इसमें भी यही हालात रहे। इसके बाद विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लग गई थी, जिसके चलते निविदा जारी नहीं कर पाए। आचार संहिता हटते ही 22 दिसंबर 2023 को दोबारा निविदा जारी कर दी गई थी। हालांकि इसमें हाइड्रो मैकेनिक के लिए कोई नहीं आया, दो फर्म सिविल वर्क के लिए पार्टिसिपेट करने आई, लेकिन इन कार्यों को करने के लिए अनुभव उनके पास नहीं था। साथ ही जिन मापदंड के जरिए बांधों में काम होना है। उसके अनुरूप वो सक्षम नहीं पाए गए थे, ऐसे में वो डिसक्वालीफाई हो गए थे। </p>
<p><strong>बांधों के गेटों पर  लग चुका जंग </strong><br />जानकारी के अनुसार कोटा बैराज, जवाहर सागर और राणा प्रताप सागर बांध करीब 60 से 65 साल पुराने बने हुए हैं। तीनों बांधों के गेटों पर जंग लग चुका है। इन गेटों की काफी समय से मरम्मत नहीं हुई है। ऐसे में इनमें जंग की मात्रा बढ़ती जा रही है। कोटा बैराज की सुरक्षा दीवार भी दरकी चुकी है। हर साल आयलिंग और ग्रिसिंग कर इन बांधों की संजीवनी देने का कार्य किया जा रहा है। वर्ल्ड बैंक से स्वीकृत बजट में इन बांधों पर सिविल और मैकेनिकल के कार्य करवाए जाएंगे। इसके तहत हाइड्रो मैकेनिकल वर्क में पुराने गेट व स्लूज गेट बदलने हैं। पूर्व में इस तरह के काम करने वाले संवेदकों को बुलाकर बातचीत भी की गई और उन्हें पूरे काम के संबंध में समझाया भी गया था।  इसके बावजूद कोई संवेदक नहीं आया था। पुराने बांधों की मेंटेनेंस के काम के लिए काफी दिक्कत आती है, संवेदक इसलिए भी सामने नहीं आ रहे हैं।</p>
<p><strong>रोबोटिक अंडरग्राउंड वॉटर सर्वे  में मिली थी खामियां</strong><br />राज्य सरकार ने जल संसाधन विभाग के चंबल नदी के तीनों बांध का अंडरवाटर सर्वे करवाया था। इसमें रोबोट के जरिए अंडर ग्राउंड वाटर वीडियोग्राफी करवाई गई थी, जिसके अंदर डैम बॉडी की पूरी पिक्चर रोबोट ने ली थी, उनका पूरा एसेसमेंट बनाकर सर्वे करने वाली कंपनी ने रिपोर्ट दी थी। इसमें कोटा बैराज, जवाहर सागर बांध और राणा प्रताप सागर बांध की बॉडी के स्ट्रक्चर में खामियां सामने नहीं आई हैं। जिनके लिए भी अब काम किया जाएगा। इसके अलावा बांधों के दरवाजों का हेल्थ असेसमेंट अल्ट्रासाउंड तकनीक व मशीनरी के जरिए करवाया गया था, जिसमें कई गेट को बदलने और दुरुस्त करने का पैसा पास हुआ था।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />यदि बांधों की तकनीकी स्थिति बेहतर होती है तो नहरों में पानी की उपलब्धता नियमित होगी। इससे सिंचाई समय पर होगी और फसलों का उत्पादन 20 से 25 फीसदी तक बढ़ सकता है। यदि बांधों के गेटस और चैनलों की स्थिति मजबूत होती है तो अनावश्यक जल हानि और कटाव को भी रोका जा सकेगा।<br /><strong>- रमेश कुमार, सेवानिवृत्त कृषि अधिकार</strong></p>
<p>वर्ल्ड बैंक से डैम रिहैबिलिटेशन इंप्रूवमेंट प्रोजेक्ट (ड्रिप) के तहत 236.23 करोड़ रुपए की राशि से तीनों बांधों की मरम्मत कराई जाएगी। गत दिनों सरकार ने तीनों बांधों के लिए संशोधित प्रशासनिक स्वीकृति जारी कर दी है। अब तकनीकी और वित्तीय स्वीकृत की प्रक्रिया शुरू होगी। जैसे ही इसकी स्वीकृति  मिलेगी तो बांधों के जीर्णोद्धार का कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।<br /><strong>- सुनील गुप्ता, अधीक्षण अभियंता, जल संसाधन विभाग कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 30 Jul 2025 15:51:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चंबल के बूढ़े बांधों को फिर जवानी का इंतजार</title>
                                    <description><![CDATA[एक साल पहले ही स्वीक़ृत हो चुका बजट।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-old-dams-of-chambal-are-waiting-for-you-again/article-96454"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer-(5)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। चंबल नदी पर स्थित तीनों बांधों की मरम्मत के लिए करोड़ों रुपए का बजट करीब एक साल पहले स्वीकृत हो चुका है, लेकिन इन बांधों की मरम्मत के लिए संवेदक कंपनियां साहस नहीं जुटा पा रही हैं। हालात ऐसे हैं कि तीन बार टेंडर करने के बावजूद कोई भी कंपनी उसमें भाग लेने ही नहीं पहुंची। चंबल वैली प्रोजेक्ट के तहत राणा प्रताप सागर (आरपीएस), जवाहर सागर (जेएस) बांध और कोटा बैराज के जीर्णोद्धार का काम होना है। इसके लिए वर्ल्ड बैंक से डैम रिहैबिलिटेशन इंप्रूवमेंट प्रोजेक्ट (ड्रिप) के तहत राशि भी स्वीकृत हो गई थी, लेकिन पहले जरूरी प्रक्रियाओं में समय लग गया और बाद में संवेदक मरम्मत के लिए हिम्मत नहीं जुटा पाए। इसके चलते अब इसके जीर्णोद्धार की राशि का बजट बढ़ाया गया है। यह राशि लाखों में नहीं करोड़ों में बढ़ गई है। पहले जहां पर तीनों डैम का काम 182.78 करोड़ में होना था, अब यह राशि 53.45 करोड़ रुपए बढ़ाई गई है, जिसके तहत 236.23 करोड़ रुपए में रिनोवेशन का काम करवाया जाना प्रस्तावित किया है।</p>
<p><strong>उम्रदराज बांध, इसलिए आ रही दिक्कत   </strong><br />विभागीय अधिकारियों के अनुसार कोटा बैराज, बूंदी के जवाहर सागर और रावतभाटा के राणा प्रताप सागर करीब 60 से 65 साल पुराने बने हुए हैं। हाइड्रो मैकेनिकल वर्क में पुराने गेट व स्लूज गेट बदलने हैं। इस तरह के काम करने वाले संवेदकों को बुलाकर बातचीत भी की गई और उन्हें पूरे काम के संबंध में समझाया भी गया है। बैठक में संवेदकों की क्वेरीज को भी बताया गया, इसके बावजूद कोई संवेदक नहीं आया है। नए निर्माण कार्यों के लिए तो संवेदक आगे आ जाते हैं, लेकिन पुराने बांधों की मेंटेनेंस के काम के लिए काफी दिक्कत आती है, संवेदक इसलिए भी सामने नहीं आ रहे हैं। क्योंकि बांध में पानी काफी भरा रहता है और इस दौरान ही गेट और अन्य उपकरणों की मेंटेनेंस होनी है, जो हर कोई नहीं कर सकता है।</p>
<p><strong>फैक्ट फाइल</strong><br /><strong>3 साल में आया 53.45 करोड़ का अंतर</strong><br /><strong>बांध                        पूर्व मेें स्वीकृत राशि       वर्तमान राशि        राशि में अंतर</strong><br />कोटा बैराज                      44.26                        72.1                 27.84<br />राणाप्रताप सागर              65.72                        85.45               19.73<br />जवाहर सागर                   72.8                         78.68                 5.88<br />कुल राशि                       182.76                       36.23                 3.46</p>
<p><strong>तीन बार निविदा निकाली, फिर भी हाथ रहे खाली</strong><br />जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार तीनों बांधों की मरम्मत के लिए जल संसाधन विभाग ने 14 अगस्त 2023 को निविदा जारी की थी, लेकिन किसी भी संवेदक फर्म ने इसमें टेंडर नहीं डाले। इसके बाद 28 सितंबर 2023 को एक बार फिर निविदा जारी की गई थी, इसमें भी यही हालात रहे। इसके बाद विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लग गई थी, जिसके चलते निविदा जारी नहीं कर पाए। आचार संहिता हटते ही 22 दिसंबर 2023 को दोबारा निविदा जारी कर दी गई थी। हालांकि इसमें हाइड्रो मैकेनिक के लिए कोई नहीं आया, दो फर्म सिविल वर्क के लिए पार्टिसिपेट करने आई, लेकिन इन कार्यों को करने के लिए अनुभव उनके पास नहीं था। साथ ही जिन मापदंड के जरिए बांधों में काम होना है। उसके अनुरूप वो सक्षम नहीं पाए गए थे, ऐसे में वो डिसक्वालीफाई हो गए थे। </p>
<p><strong>कोटा बैराज के गेट बदलने से बढ़ी राशि  </strong><br />जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि तीन बार निविदाएं आमंत्रित करने के बाद भी संवेदक इसमें रुचि नहीं दिखा रहे थे। ऐसे में सेंटर वाटर कमीशन ने संवेदकों को बुलाकर बातचीत की थी। इसके बाद उन्होंने दरों को कम बताया। साथ ही यह भी कहा था कि यह नए बांध नहीं है, पुराने बांध के रिनोवेशन का काम है, इसलिए इसमें ज्यादा पैसा लगेगा। ऐसे में ज्यादातर राशि कोटा बैराज में बढ़ी है। पहले इसके 19 गेटों का मेटलाइजेशन करने का कार्य होना था, लेकिन अब गेटों को ही बदलने का निर्णय किया गया है। इसके चलते नई बीएसआर की वजह से भी राशि बढ़ी है। इसके अलावा अन्य दोनों बांधों के कार्यो में कुछ बदलाव होने से राशि में इजाफा करना पड़ा है। </p>
<p><strong>रोबोटिक अंडरग्राउंड वॉटर सर्वे में मिली थी खामियां</strong><br />ड्रिप योजना से पैसा मिलने की उम्मीद के पहले राज्य सरकार ने जल संसाधन विभाग के चंबल नदी के तीनों बांध का अंडरवाटर सर्वे करवाया था। इसमें रोबोट के जरिए अंडर ग्राउंड वाटर वीडियोग्राफी करवाई गई थी, जिसके अंदर डैम बॉडी की पूरी पिक्चर रोबोट ने ली थी, उनका पूरा एसेसमेंट बनाकर सर्वे करने वाली कंपनी ने रिपोर्ट दी थी। इसमें कोटा बैराज, जवाहर सागर बांध और राणा प्रताप सागर बांध की बॉडी के स्ट्रक्चर में खामियां सामने नहीं आई हैं। जिनके लिए भी अब काम किया जाएगा। इसके अलावा बांधों के दरवाजों का हेल्थ असेसमेंट अल्ट्रासाउंड तकनीक व मशीनरी के जरिए करवाया गया था, जिसमें कई गेट को बदलने और दुरुस्त करने का पैसा पास हुआ था।</p>
<p>नए बांध के लिए संवेदक को काम करना आसान होता है, लेकिन पुराने बांधों की मरम्मत के काम दिक्कत रहती है। यह कार्य पानी के अन्दर करना होता है, जो हर किसी के लिए संभव नहीं है। इसलिए कोई संवेदक नहीं आया है। अब देश के बड़ी संवेदकों से इस सम्बंध में सम्पर्क किया जा रहा है। अभी वित्त विभाग से रिवाइज बजट की फाइल स्वीकृत होने का इंतजार है।<br /><strong>- संजय कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता, जल संसाधन विभाग कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Dec 2024 15:18:51 +0530</pubDate>
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                <title>उपेक्षा के आंसू बहा रही हाड़ौती की पुरासम्पदा </title>
                                    <description><![CDATA[मंदिर की बेशकीमती मूर्तियों को चुरा ले गए चोर । 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/hadoti-s-heritage-is-shedding-tears-of-neglect/article-91621"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/4427rtrer-(5)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। पुरासंपदा में देश-प्रदेश में सबसे ज्यादा संपन्न होने के बावजूद हाड़ौती क्षेत्र संरक्षण को तरस रहा है। हाड़ौती के कोटा, बारां, बूंदी व झालावाड़ा जिले में प्रारंभिक पाषाणकाल, मध्य पाषाणकाल, उत्तर पाषाणकाल, ताम्रयुग, लोहयुग, जनपद, मौर्य, शुंग, कुषाण, गुप्तकालीन सभ्यताओं से लेकर ब्रिटिशकाल तक के प्रमाण बिखरे पड़े हैं। 5वीं से 14वीं शताब्दी के दर्जनों मंदिर हैं। हर काल की कलाएं हैं। इसके बावजूद पुरातत्व विभाग इन पुरासम्पदाओं को सही ढंग से सहेज नहीं कर पा रहा है। कई स्थानों पर ऐतिहासिक धरोहर दुर्दशा की शिकार हो रही है। प्राचीन मंदिर खण्डहर में तब्दील होते जा रहे हैं। सरकार पुरा सम्पदाओं के संरक्षण के दावे तो करती है, लेकिन सरंक्षण की कवायद कभी भी कागजों से बाहर नहीं आ पाई है।  </p>
<p><strong>कोटा: इन मंदिरों को जीर्णोद्धार की दरकार</strong><br />जिले के अयाना क्षेत्र में प्राचीन शिव मंदिर पुरातत्व विभाग के अधीन है। इस मंदिर की बेशकीमती मूर्तियों को कुछ साल पहले चोर चुरा ले गए थे और कई मूर्तियों को खंडित कर दिया था। अभी भी काफी संख्या में मूर्तियां मंदिर परिसर में पड़ी हुई है। जो रखरखाव के अभाव में जमींदोज होती जा रही है। मंदिर की सुरक्षा के नाम पर अनुबंध पर एक सुरक्षा गार्ड लगा रखा है, जो रात को नहीं रहता है। जिससे यहां की बेशकीमती मूर्तियां भगवान भरोसे ही है। कंसुआ स्थित कर्णेश्वर महादेव मंदिर और चारचौमा स्थित शिवालय सदियों पुरानी धरोहर है। हालांकि इन मंदिरों के जीर्णोद्धार का कार्य चल रहा है, लेकिन विभाग को इसके लिए काफी कम बजट मिला है, ऐसे में कम बजट विरासत को सहेजने में मुश्किल हो सकती है।</p>
<p><strong>बूंदी में ऐसे हो रही दुर्दशा</strong><br />जिले में सबसे ज्यादा शैलचित्र, शुतुरमुर्ग के अंडे, 5वीं से 14वीं शताब्दी के दर्जनों मंदिर हैं। हर काल की कलाएं हैं। कमलेश्वर में 9वीं-10वीं शताब्दी की अधगढ़ मूर्तियां और पूरी वर्कशॉप, गुप्तकाल का सफेद सैंड स्टोन से निर्मित 5 फुट ऊंचा एकमुखी दुर्लभ शिवलिंग भीमलत क्षेत्र में जंगल में पड़ा है। 10 साल पहले यह साबुत था, समाजकंटकों ने खोदकर बाहर फेंक दिया, दो टुकड़े हो गए। ऐसे ही दो एकमुखी शिवलिंग चंबल-मेज नदी के संगमस्थल पाली गांव में मौजूद हैं। बीजमाता मंडावरा के पास बड़ी संख्या में एक हजार साल से पुरानी मूर्तियां खुले में पड़ी है, जो तस्करों-समाजकंटकों से बची हुई है, लेकिन अब इनकी सुरक्षा की दरकार है।</p>
<p><strong>पर्यटन के लिहाज से विकसित करें अथवा इनका निष्पादन करें</strong><br />हाड़ौती के बारां जिले में पुरासम्पदा की भरमार है। जिला मुख्यालय से कुछ दूर स्थित रामगढ़ में भंडदेवरा मंदिर काफी प्रसिद्ध है। हालांकि इसके संरक्षण के लिए प्रयास किए गए हैं, लेकिन वह नाकाफी हैं। दूर से भंडदेवरा बस पत्थरों का टीला नजर आता है। प्रतिमाओं के साथ मंदिर की सुंदरता बढ़ाने वाले कलात्मक झालर व खंभ टूट कर गिर चुके हैं। इन प्रतिमाओं का सौंदर्य बढ़ाने वाली सामग्री जर्जर होती जा रही है। अभी इस विरासत को संरक्षित किया जा सकता है। इसके अलावा बारां जिले में कई किले बने हुए हैं, जो समय के साथ-साथ अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हँै।</p>
<p><strong>झालावाड़ - आकर्षण का केन्द्र कोलवीं की गुफाएं</strong><br />जिला मुख्यालय से 90 किलोमीटर दूर कोलवी नामक गांव में चट्टानों को काटकर बनाई गई बौद्ध गुफाएं राजस्थान में बौद्धकालीन संस्कृति के अवशेष के रूप में अपना विशेष महत्व रखती हैं।  गुफाओं पर हिन्दु शैली के मंदिरों का तथा स्तूप शिखर पर दक्षिण भारतीय कला का प्रभाव नजर आता है। यहां बनी दो मंजिली गुफाएं विशेष रूप से दर्शनीय हैं। कुछ गुफाओं में भगवान बुद्ध की प्रतिमाएं एवं दीवारों पर रेखांकन नजर आता है। कोलवी से 12 किलोमीटर बिनायका में भी पहाड़ी पर चट्टानों को काटकर 16 गुफाएं बनाई गई हैं। पगारिया गांव के समीप हथियागोड़ की पहाड़ी पर भी 5 गुफाएं बनी हैं। इनकों भी संरक्षण की दरकार है।</p>
<p>प्रारंभिक पाषाणकाल, मध्य पाषाणकाल, उत्तर पाषाणकाल, ताम्रयुग, लोहयुग, जनपद, मौर्य, शुंग, कुषाण से लेकर ब्रिटिशकाल तक के प्रमाण बिखरे पड़े हैं। बिखरी पुरा संपदाओं को सहेजने के लिए साइट म्यूजियम जरूरी है, ताकि धरोहरें संरक्षित हो सके और लोगों की पहुंच में आ सके। वहीं बिखरी पड़ी पुरासम्पदाओं को मंदिरों के आसपास ही स्थापित किया जा सकता है। ताकि भावी पीढ़ी इन धरोहर से रूबरू हो सकें।<br /><strong>- ओमप्रकाश, पुरा अन्वेषक </strong></p>
<p>हाड़ौती की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए इन क्षेत्रों में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ानी होगी। इसके लिए पहले धरोहरों स्थलों को पर्यटन के लिहाज से विकसित करना होगा, ताकि पर्यटकों की इन क्षेत्रों के बारे में पूरी जानकारी मिल सके। इन क्षेत्रों का व्यापक प्रचार-प्रसार भी होना चाहिए। इसके लिए विभिन्न संगठनों की मदद ली जा सकती है।<br /><strong>- अनिरुद्ध सिंह, ट्यूरिस्ट गाइड</strong></p>
<p>हाड़ौती की पुराम्पदाओं के बारे में अधिकांश पर्यटकों को पता ही नहीं होता है। यहां पर कई पर्यटक बाहर से आते हैं, उनके लिए निजी ट्रैवल्स संचालक वाहनों की व्यवस्था करते हैं। पुरातत्व विभाग को चाहिए कि इन ट्रैवल्स संचालकों से सम्पर्क कर उन्हें पुरा स्थलों तक ले जाने के लिए चर्चा करें ताकि वहां पर पर्यटन गति पकड़ सके।<br /><strong>- महेन्द्र सिंह, ट्रैवल्स संचालक</strong></p>
<p>हाड़ौती में पुरासम्पदाओं के सरंक्षण के लिए हर संभव प्रयास किए जाते हैं। अधिकांश प्राचीन विरासत को सहेजने के लिए प्रत्येक जिलों में संग्रहालय बना रखे हैं। इनमें कई पुरासम्पदाओं का संरक्षण किया जा रहा है। जिलों में दूरदराज प्राचीन धरोहरों की सुरक्षा के लिए अनुबंध पर कर्मचारी लगा रखे हैं। वहीं बजट आने पर समय-समय पर प्राचीन मंदिरों का जीर्णोद्धार भी करवाया जाता है।<br /><strong>- ललित कुमार, वरिष्ठ लिपिक, पुरातत्व विभाग कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Sep 2024 16:15:06 +0530</pubDate>
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                <title>तीन बार टेंडर विफल, अब मरम्मत का बढ़ेगा खर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[केन्द्रीय जल आयोग ने नया एस्टीमेट बनाने की दी मंजूरी। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/tender-failed-thrice--now-the-cost-of-repair-will-increase/article-88231"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/pze-(4)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। चम्बल नदी पर बने कोटा बैराज, राणाप्रताप सागर और जवाहर सागर बांध को काफी समय से मरम्मत की दरकार है। इनके जीर्णोद्धार के लिए केन्द्रीय जल आयोग ने 183 करोड़ का बजट स्वीकृत कर रखा है। इस सम्बंध में अब तक तीन बार टेंडर हो चुके हैं, लेकिन ठेकेदार कंपनियों के नहीं आने से टेंडर विफल हो गए। अब तीनों बांधों के जीर्णोद्धार कार्य के टेंडर फिर से एस्टीमेट बनाकर होंगे। जिससे जीर्णोद्धार कार्य की लागत बढ़ जाएगी। गत दिनों जलसंसाधन विभाग कोटा के अधिकारियों की दिल्ली स्थित केन्द्रीय जल आयोग में बैठक हुई थी। इसके बाद आयोग ने बांधों के जीर्णोद्धार के लिए नया एस्टीमेट बनाने की अनुमति दे दी है। विभाग ने नए सिरे से एस्टीमेट बनाने की तैयारी शुरू कर दी है।</p>
<p><strong>नई बीएसआर दर से होंगे टेंडर</strong><br />जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार चंबल के तीनों बांध कोटा बैराज, जवाहर सागर और राणाप्रताप सागर बांध के जीर्णोद्धार कार्य के लिए पिछले साल निविदा प्रक्रिया शुरू की गई थी।12 सितम्बर 2023 को तकनीकी स्वीकृति जारी कर तीनों बांधों के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई थी, लेकिन किसी भी कंपनी और ठेकेदार ने निविदा नहीं भरी। दूसरी बार 10 अक्टूबर 2023 और तीसरी बार 20 जनवरी 2024 को निविदा आमंत्रित की गई थी। इस बार भी विभाग को निराशा हाथ लगी। जब 3 बार टेंडर लेने कोई नहीं आया तो ठेकेदार कंपनियों से बात की गई। कंपनियों ने बताया कि बांधों के एस्टीमेट पुरानी दरों पर बनाए गए थे। इस दर में कंपनियों को घाटा होगा। इस कारण कोई भी कंपनी टेंडर में भाग नहीं ले रही थी। इसके बाद विभाग के अधिकारियों की केन्द्रीय जल आयोग में बैठक हुई। आयोग ने नई बीएसआर दर से जीर्णोद्धार कार्य का एस्टीमेट बनाने की अनुमति दे दी है।</p>
<p><strong>बांधों को मरम्मत की सख्त दरकार</strong><br />चम्बल नदी पर तीनों ही बांध 1960 के दशक बने हुए हैं। बांध की मशीनों और हाइड्रों उपकरणों की उम्र 40 साल होती है। जबकि बांध के सिविल वर्क की उम्र 100 साल मानी जाती है। अब लगभग 65 वर्ष गुजरने वाले हैं। ऐसे में यदि इनका समय पर जीर्णोद्धार नहीं हुआ तो बांध की लाइफ और कम हो जाएगी। स्थिति यह है कि राणाप्रताप सागर बांध के स्लूज गेट 37 सालों से नहीं खुले हैं। गेटों से रिसाव हो रहा है। जवाहर सागर बांध का एक गेट अटका हुआ है। कोटा बैराज के गेटों की स्थिति भी ठीक नहीं है। इसके बाद जीर्णोद्धार का कार्य बार-बार टल रहा है। विश्व बैंक ने कोटा बैराज के लिए 45.86 करोड़, जवाहर सागर के लिए 72.02 करोड़ और राणाप्रताप सागर बांध के लिए 65.72 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की है।</p>
<p><strong>चंबल के बांधों पर निर्भर ईआरसीपी योजना</strong><br />राजस्थान का अस्तित्व चंबल के तीनों बांधों पर टिका हुआ है। परमाणु बिजलीघर, कोटा थर्मल संयंत्र, भारी पानी संयंत्र, अंता गैस बिजलीघर, हाड़ौती की नहरें, रामगंजमंडी, भीलवाड़ा, चित्तौडगढ़ और बूंदी की पेयजल योजना चंबल नदी के बांधों पर निर्भर है। राज्य में ईआरसीपी योजना को लेकर जोर-शोर से तैयारी की जा रही है। यह योजना भी इन्ही बांधों पर निर्भर है। ऐसे में काफी समय से चंबल के तीनों बांधों के जीर्णोद्धार के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अभी तक इस काम में सफलता नहीं मिल पाई है। अब नए सिरे से टेंडर की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके लिए दरें बढ़ाई जाएगी ताकि कंपनियां टेंडर में शामिल हो सके।</p>
<p>दिल्ली में गत दिनों केन्द्रीय जल आयोग के अधिकारियों के साथ बैठक हुई थी। वहां से तीन बांधों के नए एस्टीमेट बनाने की मंजूरी मिल गई है। इसके बाद अब जीर्णोद्धार के लिए नया एस्टीमेट बनाया जा रहा है। जल्द कार्य के लिए निविदा लगाई जाएगी। <br /><strong>- भारतरत्न गौड़, अधिशासी अभियंता, जल संसाधन विभाग, कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 21 Aug 2024 15:36:39 +0530</pubDate>
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                <title>डाढ़ देवी मंदिर जाने वाली एकमात्र सड़क छह महीनों से खराब</title>
                                    <description><![CDATA[खराब सड़क के चलते मार्ग कई बार बड़े हादसे हो चुके हैं। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-only-road-leading-to-the-dhard-devi-temple-has-been-damaged-for-the-last-six-months/article-84053"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/61.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के छोर पर स्थित उम्मेदगंज से डाढ़देवी माता मंदिर तक की सड़क पूरी क्षतिग्रस्त हो चुकी है। मंदिर तक सड़क पर इतने गड्ढे हो चुके हैं कि उस पर दोपहिया वाहन ही नहीं चौपहिया वाहनों को चलाने में भी मुश्किल आ रही है। कोटा के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक डाढ़ देवी माता मंदिर तक जाने वाली सड़क की हालात खराब होने से लोगों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। यहां से गुजरने वाले लोगों ने बताया कि ये सड़क पिछले छ माह से खराब पड़ी है जिसके अभी तक ना पेच वर्क का कार्य हुआ है ना नवीनीकरण का जबकि से सड़क हर साल उखड़ जाती है।</p>
<p><strong>साढे चार किमी सड़क पर सौ से ज्यादा गड्ढे</strong><br />शहर से डाढ़ मंदिर को जोड़ने वाली यह एक मात्र सड़क है। इसके अलावा ये सड़क आसपास के ग्रामीणों को शहर से जोड़ने का कार्य करती है। साथ ही इस इलाके में वन विभाग की चौकी भी स्थित है ऐसे में सड़क की आवश्यकता और बढ़ जाती है। लेकिन करीब 4.5 किलोमीटर लंबी इस सड़क पर सौ से ज्यादा गड्ढे मौजूद हैं। वहीं कुछ स्थानों पर तो सड़क ही गायब हो चुकी है। इस सड़क पर औसतन हर रोज 500 से 800 वाहनों का गुजरना होता है। सड़क के खराब होने और गड्ढों का नुकसान मार्ग से गुजरने वालों को हर दिन उठाना पड़ता है। खराब सड़क के चलते मार्ग कई बार बड़े हादसे हो चुके हैं। लेकिन स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है।</p>
<p><strong>हर बारिश में खराब हो जाती है सड़क</strong><br />डाढ़ देवी मंदिर की सड़क हर साल बारिश के दौरान उखड़ जाती है। जिसके बाद हर इसके लिए पेच वर्क का कार्य करना होता है। साथ ही सड़क वन विभाग के क्षेत्र में होने के कारण निर्माण में समस्या आती है। डाढ़ देवी मंदिर कोटा के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है जहां हर रविवार को हजारों श्रद्धालु जाते हैं। सड़क के खराब होने के कारण लोगों की समस्या अधिक हो जाती है।</p>
<p><strong>मंदिर जाने में परेशानी</strong><br />डाढ़ देवी मंदिर कोटा में आस्था का बड़ा केंद्र है, जहां हर रविवार को हजारों भक्त दर्शन करने जाते हैं। लेकिन वहां तक जाने वाली एक मात्र सड़क पिछले छह महीनों से खराब है, जिसके मरम्मत की आवश्यकता है।<br /><strong>- विशाल वर्मा, श्रीराम नगर</strong></p>
<p><strong>पेचवर्क से नहीं चलेगा काम </strong><br />डाढ़ देवी माता मंदिर की पूरी सड़क पर बड़े बड़े गड्ढे हो रखे हैं। जिनसे कई बार वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं। सड़क को पेच वर्क नहीं, नवीनीकरण करने की सख्त जरूरत है क्योंकि यहां हर रविवार को हजारों वाहन आते हैं।<br /><strong>- नरेंद्र गुर्जर, कंसुआ</strong></p>
<p><strong>बारिश में होती ज्यादा परेशानी</strong><br />बारिश के दौरान सड़कों पर होने वाले गड्ढों के कारण हादसों की संख्या बढ़ जाती है। मंदिर पर भी हजारों वाहन आते हैं केवल एक ही मार्ग होने से किसी वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने से अन्य वाहनों को समस्या हो सकती है।<br /><strong>- जगदीश सैनी, उम्मेदगंज</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />बारिश के कारण अभी सड़कों का डामरीकरण रुका हुआ है, जैसे ही बारिश में कमी आएगी डाढ़ देवी मंदिर की सड़का का पेच वर्क का कार्य किया जाएगा। <br /><strong>- आर के सोनी, अधीक्षण अभियंता, पीडब्लूडी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Mon, 08 Jul 2024 17:42:58 +0530</pubDate>
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                <title>ये कैसा पर्यटन : गंदगी और बदबू से बदरंग इतिहास की तस्वीर</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/what-kind-of-tourism-is-this--a-picture-of-history-discolored-by-dirt-and-stench/article-55538"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/ye-kesa-paryatan--gandagi-or-badbu-s-badrnag-itihas-ki-tasveer...kota-news-26-08-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कला, संस्कृति और प्रकृति के अनूठे संगम के बीच चंबल की गोद में बसा अभेड़ा महल चमक खो रहा है। कचरे और गंदगी के ढेर में दबा कोटा का गौरवशाली इतिहास अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा। दीवारों से जहां इतिहास के रंग धुंधले हो गए वहीं, रानी महल की तस्वीर बदरंग हो गई। दीवारों पर लिखे अपशब्द पर्यटकों को शर्मसार कर रहे हैं। राजसी वैभव, युद्ध नजारे, शाही विवाह रस्में, हाथी-घोड़ों पर सवार सैनिकों का लश्कर और कला संस्कृति से रुबरू कराती कलात्मक चित्रकारी भी बदहाल है। दरअसल, अभेड़ा महल उपेक्षा का शिकार हो रहा है। पैसा देने के बावजूद पर्यटक सुविधाओं को तरस रहे हैं। महल का संचालन यूआईटी द्वारा किया जा रहा है। टिकट लेने के बावजूद इसके संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। जलाशय भी गंदगी से अटे हैं। दुर्गंध से सैलानियों का सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है।</p>
<p><strong>17 साल पहले हुआ था महल का रिनोवेशन</strong><br />नेचर प्रमोटर एएच जैदी ने बताया कि यूआईटी ने साढ़े तीन करोड़ की लागत से वर्ष 2003 में अभेड़ा महल का जीर्णोंद्धार शुरू किया था, जो तीन साल बाद 2006 में पूरा हुआ। रिनोवेशन के तहत भवन की मरम्मत, रंग-रोशन, सुलभ कॉम्पलेक्स, मुगल गार्डन, रानी महल की मरम्मत व नक्काशी, झरोखे, तालाब, बाहरी दीवारों पर राज दरबार की सवारी जुलूस व राजसी वैभव को प्रदर्शित करती पेटिंग्स सहित कई कार्य करवाए थे। </p>
<p><strong>खरीदना पड़ रहा पानी</strong><br />केशवरायपाटन से आए बद्रीलाल जांगिड़ ने बताया कि महल में पानी की व्यवस्था नहीं है। मजबूरी में महंगे दामों पर कैंटिन से पानी की बोटलें खरीदनी पड़ती है। वहीं, सुविधा घर भी बदहाल हैं। झूले टूटें हुए हैं। साफ-सफाई पर बिलकुल भी ध्यान नहीं है। </p>
<p><strong>बदरंग हुए इतिहास के रंग  </strong><br />अभेड़ा महल की दीवार पर बनी शाही सवारी, विवाह रस्म व हाथी-घोड़े व भाले लेकर चल रहे सैनिकों की कलात्मक चित्रकारी बदरंग हो चुकी है। वहीं, रानी महल की अंदरुनी दीवारों पर राजसी वैभव को प्रदर्शित करते चित्रों को लोगों ने अभद्र कमेंट लिखकर खराब कर दिए हैं। जबकि, महल देखने आने वाले पर्यटकों से टिकट लिया जाता है लेकिन मॉनिटरिंग नहीं की जाती। जिसका फायदा प्रेमी युगल व अन्य शरारती तत्व उठाते हैं और दीवारों पर नाम व अभद्र कमेंट लिख धरोहर को नुकसान पहुंचा रहे हैं। वहीं, परिवार के साथ आने वाले पर्यटकों को शर्मिंदगी महसूस होती है। </p>
<p><strong>कमल के पत्तों में दबा तालाब का सौंदर्य</strong><br />महल परिसर में बना मुख्य तालाब आकर्षण का केंद्र है। लेकिन, इन दिनों पूरा तालाब कमल के पत्तों से अटा पड़ा है। लंबे समय से तालाब की सफाई नहीं हुई। पानी में काई जमी हुई है, जिससे उठती दुर्गंध से पर्यटक परेशान हैं। वहीं, जलीय जीवों का दम घुट रहा है। देश प्रदेश से आने वाले पक्षियों को ठोर नहीं मिलती। इससे पक्षियों की संख्या में भी लगातार गिरावट बनी हुई है। ऐसे में यूआईटी प्रशासन को तालाब की सफाई करवाकर महल की खूबसूरती बरकरार रखनी चाहिए।</p>
<p><strong>बदबू से पर्यटकों का सांस लेना मुश्किल</strong><br />जैदी ने बताया कि अभेड़ा महल बहुत ही खूबसूरत है। लेकिन, देखरेख के अभाव में बदहाल हो रहा है। यहां आने वाले पर्यटकों ने रानी महल की दीवारें व झरोखों को पान-गुटखों की पीक से बदरंग कर दिया है। वहीं, कोटा शैली की पेंटिंग्स खराब कर  दी है।  इसके अलावा महल के नजदीक बने कुंड में प्लास्टिक की बोटलें फेंक कर गंदा कर रखा है। गंदगी से उठती दुगंध से लोगों का सांस लेना तक मुश्किल हो रहा है। </p>
<p><strong>पर्यटन प्रेमियों ने दिए सुझाव</strong><br />- पर्यटन प्रेमियों के अनुसार, यूआईटी प्रशासन अभेड़ा महल की टिकट दर में बढ़ोतरी की जाए। ताकि, उससे होने वाली आय से महल का मेंटिनेंस किया जा सके। <br />- सुरक्षा गार्ड की संख्या बढ़ाई जाए।<br />- सीसीटीवी कैमरों की संख्या में इजाफा किया जाए। <br />- अधिकारियों द्वारा मॉनिटरिंग की जाए। <br />- कुंड, तालाबों  व परिसर की साफ-सफाई की पुख्ता व्यवस्था हो। <br />- धुंधली होती पेंटिंग्स को रंग रोगन के लिए फिर से जीवंत किया जाए। </p>
<p><strong>पर्यटक बोले-देखने लायक नहीं बचा अभेड़ा</strong><br />बोरखेड़ा निवासी सुरेश सुमन व अजय कुश्वाह ने बताया कि रविवार को छुट्टी का दिन होने से परिवार को लेकर अभेड़ा महल घूमने आए थे। महल में प्रवेश करते ही गंदगी से अटा तालाब दुर्गंध मार रहा था। तालाब के पास खड़ा मुश्किल हो गया। झूले सभी टूटे हुए हैं और फव्वारे भी बंद हैं। सुविधा घरों की हालात खराब है। वहीं, इटावा से आए चंद्रशेखर मीणा, सरीता मीणा ने कहा, अभेड़ा महल का काफी नाम सुना था इसलिए देखने आए, लेकिन यह जगह अब देखने लायक नहीं रहा। यहां पानी के लिए नल तक नहीं है। चारों तरफ गंदगी के ढेर है। </p>
<p>जिला पर्यटन विकास समिति की बैठक में सभी पर्यटन व एतिहासिक स्थलों के रखरखाव  व साफ-सफाई के मामले उठाते हैं। पूर्व में यूआईटी अधिकारियों को महल के मेंटिनेंस से अवगत कराया था। अभेड़ा महल का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का अवलोकन करेंगे और हालातों से अधिकारियों से चर्चा करेंगे। <br /><strong>- संदीप श्रीवास्तव, जिला पर्यटन अधिकारी कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Aug 2023 18:45:55 +0530</pubDate>
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